बिना रजिस्ट्रेशन दुर्गा प्रतिमा स्थापित की तो विसर्जन स्थल पर नहीं ले जा सकेंगे

भोपाल मध्य-प्रदेश

भोपाल . दुर्गोत्सव में प्रतिमा की ऊंचाई को लेकर एक बार फिर प्रशासन और मूर्तिकार आमने-सामने आ गए हैं। प्रशासन का कहना है कि बिना रजिस्ट्रेशन के स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं का नदी या तालाब में विसर्जन नहीं होने दिया जाएगा। मूर्तिकार थाने की अनुमति देख कर ही प्रतिमा डिलीवर कर सकेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों ने मूर्तिकारों को यह भी समझाइश दी कि वे मूर्ति की हाइट के साथ उसका आकार नियंत्रित करें। नई मूर्तियां छह फीट से ऊंची न बनाएं।

उधर, मूर्तिकारों का कहना है कि उत्सव शुरू होने के एक पखवाड़े पहले इस तरह के प्रतिबंध लगाया जाना अव्यावहारिक है। कलेक्टर तरुण पिथोड़े, निगम आयुक्त बी विजय दत्ता और डीआईजी इरशाद वली की मौजूदगी में हुई बैठक में ज्यादातर मूर्तिकार रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए बिना ही चले गए। बैठक में आए मूर्तिकार देवेंद्र प्रजापति, राकेश प्रजापति, दिलीप प्रजापति और राजू कुशवाह ने दैनिक भास्कर से कहा कि यह हमारे रोजगार से जुड़ा मुद्दा है। त्योहार से छह महीने पहले मूर्तियों का निर्माण शुरू हो जाता है। कुछ लोग अंतिम दिनों में मूर्तियां लेने आते हैं। सबके फॉर्म चैक करना संभव नहीं है। हम बैठक करके निर्णय लेंगे कि प्रशासन के आदेश पर क्या कदम उठाना है।

आदेश बेमानी, मूर्तियां बैठेंगी भी और विसर्जन भी होगा :

 जिला शांति समिति के सदस्य प्रमोद नेमा ने कहा कि त्योहार के पहले ऐसे आदेश बेमानी हैं। मूर्तियां बैठेंगी भी और विसर्जन भी होगा। प्रशासन को इसके लिए व्यवस्था करना होगी। उन्होंने मूर्तिकारों को अपराधियों की तरह बैठक में लाने पर भी नाराजगी जताई। इधर, खटलापुरा में हादसे में चार नाविकों पर केस दर्ज करने के विरोध में मछुआ समुदाय ने रविवार को मौन जुलूस निकालकर विरोध जताया।

 इधर, मूर्तिकारों ने प्रशासन के आदेश को बताया अव्यावहारिक

हिदायत… ड्यूटी पर तैनात अफसर होंगे जिम्मेदार : कलेक्टर, निगमायुक्त और डीआईजी ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुर्गोत्सव के दौरान ड्यूटी पर तैनात अफसर किसी भी दुर्घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होंगे। विसर्जन पूरी तरह से क्रेन से ही होगा। बिना पंजीयन मूर्ति विसर्जन स्थल पर नहीं जाने दी जाएगी। इन मूर्तियों का विसर्जन कैसे होगा? इस पर बाद में निर्णय लिया जाएगा।

पूर्व सीएम बोले… जांच प्रभावित कर रहे मुख्य सचिव : खटलापुरा में हुई नाव पलटने की घटना पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जांच शुरू होने से पहले ही बयान देकर मुख्य सचिव एसआर मोहंती जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। मजिस्ट्रियल जांच पूरी होने से पहले ही उन्होंने क्लीनचिट दे दी कि बड़े अफसर दोषी नहीं हैं। यह प्रशासनिक अराजकता की स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। एक तरफ एसडीएम को कलेक्टर प्रताड़ित कर रहा है तो वही कलेक्टर अधीनस्थ एसडीएम पर आरोप लगा रहा है।

एक हकीकत यह भी… हर बार अगले साल के लिए टल जाता है मुद्दा : शहर में गणेशोत्सव और दुर्गोत्सव में मूर्ति की साइज से लेकर पीओपी तक का मुद्दा हर साल उठता है, लेकिन इसे अगले साल के लिए टाल दिया जाता है। मूर्तिकार हों या आयोजक दोनों ही तर्क देते हैं कि इस साल मूर्तियां बन गईं हैं। अब कुछ नहीं हो सकता। फिर इस मुद्दे को मूर्तिकारों के रोजगार से जोड़ दिया जाता है। अंतत: प्रशासन इसे अगले साल के लिए टाल देता है। दो दशक पहले भोज वेटलैंड प्रोजेक्ट के तहत बड़े तालाब के अंतिम छोर प्रेमपुरा पर विसर्जन घाट बनाने के साथ ही प्रतिमाओं का आकार कम करने का प्रयास चल रहा है, लेकिन इसे अब तक अमल में नहीं लाया जा सका है।

धारा 144 के आदेश में कलेक्टर ने किया संशोधन : शहर के तालाबों में बोट संचालन पर नियंत्रण के लिए कलेक्टर ने धारा 144 के तहत एक हफ्ते पहले जारी आदेश में संशोधन करके पर्यटन निगम के साथ निगम को भी इसके लिए अधिकृत कर दिया है। निगम ने सभी तालाबों में संचालित बोटों के पंजीयन का आदेश जारी किया हैै। सोमवार सुबह से पंजीयन शुरू होगा। बोट संचालकों को साल में दो बार बोट का तकनीकी परीक्षण कराना होगा। इनका आधार नंबर निगम के पास होगा। बोट की क्षमता तय होगी और नाविक को सुरक्षा के सभी इंतजाम करना जरूरी होगा। कलेक्टर के आदेश के बाद पर्यटन निगम ने बड़े तालाब पर बोट क्लब के अलावा शहर की अन्य बोट का पंजीयन करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद कलेक्टर और निगमायुक्त के बीच चर्चा में यह रास्ता निकाला गया। कलेक्टर पिथाेड़े ने कहा कि उनके पूर्व आदेश में भी पर्यटन निगम या अन्य सक्षम संस्था का जिक्र है।

 

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