बिहार सरकार मरने के बाद भी दे रही वृद्धा पेंशन

राज्य

पटना । ‎बिहार में समाज कल्याण विभाग से जुड़े घोटाले का मामला सामने आया है। हालां‎कि इस घोटाले को समाज कल्याण विभाग के एक गोपनीय पत्र ने बेनकाब कर दिया है। समाज कल्याण विभाग के सामाजिक सुरक्षा निदेशालय की ओर से बिहार के सभी जिलाधिकारी को जारी किए गए पत्र में आगाह किया गया है कि बिहार में मुर्दे भी पेंशन उठा रहे हैं और यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। यह जानकारी सामाजिक सुरक्षा निदेशालय को मिली है कि पेंशनधारियों के मृत्यु के पश्चात भी उनके खाते में राशि ट्रांसफर हो रहा है। निदेशालय ने इसे वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला मानते हुए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है और कहा कि सभी मृतकों की सूची जल्द से जल्द तैयार कर समाज कल्याण विभाग की सूची से उनका नाम हटाएं ताकि सरकारी राशि का दुरुपयोग वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन और विकलांग पेंशन समेत सभी मदों में रोकी जा सके। बता दें कि पहले शिविर के माध्यम से पेंशनधारियों की उस्थिति दर्ज कर उन्हें पेंशन दिया जाता था जिससे उनके जीवित होने का भौतिक सत्यापन त्वरित हो जाता था, लेकिन हाल के महीनों में डीबीटी प्रक्रिया शुरू की गई है और लाइफ सर्टिफिकेट से सत्यापन सही रूप से नहीं हो रहा है। इन मामलों के जानकार और वरीय पत्रकार रवि उपाध्याय ने बताया गया ‎कि इस पूरे मामले की जांच करवाकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है। वहीं, विपक्ष ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई से जांच करवाने की मांग की है और कहा है कि वह सड़क से लेकर सदन तक पूरे मामले को उठाएगा। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी राजद के नेता भाई वीरेंद्र ने कहा कि अधिकारियों के संरक्षण में ही यह घोटाला अब तक फलता फूलता रहा है। वहीं पार्टी नेता निखिल मंडल ने दावा किया कि नीतीश कुमार की सरकार ने कभी भी घोटालों से वितीय अनियमितता से कोई समझौता नही किया है। भले ही सत्ता पक्ष के नेता कुछ भी कहें लेकिन निदेशालय के पत्र से ही साबित हो गया है कि लंबे समय से राज्य में पेंशन घोटाला जारी है। 

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