साल 2010 IPL फाइनल में सचिन को आउट करने के लिए धोनी ने बनाई थी रणनीति, अब जकाती ने किया खुलासा

खेल

सचिन तेंदुलकर और एमएस धोनी के बीच का रिश्ता काफी स्पेशल है. साल 2011 में टीम इंडिया को वर्ल्ड कप विजेता बनाने के पीछे भी दूसरे खिलाड़ियों के साथ धोनी और सचिन का भी हाथ है. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार ये भी कहा जाता रहा है कि जब राहुल द्रविड़ ने टीम की कप्तानी छोड़ी थी तब सचिन ने ही धोनी को कप्तान बनाने की सिफारिश की थी. पिछले कई सालों से इन दोनों खिलाड़ियों ने टीम इंडिया के लिए काफी कुछ किया है. दोनों खिलाड़ियों के बीच ये रिश्ता मैदान पर उस वक्त के लिए टूटा जब दोनों अपनी टीम को आईपीएल चैंपियन बनाना चाहते थे. दोनों एक दूसरे के खिलाफ खेल रहे थे. समय था साल 2008 यानी की आईपीएल की शुरूआत लेकिन फाइनल मुकाबला देखने को मिला साल 2010 में.

साल 2010 के फाइनल में चेन्नई की टीम बेहद मजबूत थी लेकिन मुबंई की टीम फिलहाल की तरह चैंपियन टीम नहीं बनी थी. धोनी चेन्नई के कप्तान थे और आईपीएल फाइनल के दौरान सचिन को आउट करने के लिए वो रणनीति बना रहे थे.

10 साल बाद आज चेन्नई के पूर्व स्पिनर शादाब जकाती ने ये खुलासा किया है कि कैसे धोनी की रणनीति की बदौलत चेन्नई की टीम उस साल आईपीएल की चैंपियन टीम बनी थी. लेफ्ट आर्म स्पिनर जकाती ने कहा कि वो उस साल धोनी के लिए अहम हथियार थे. धोनी ने जकाती को पहले 10 ओवरों में गेंदबाजी करवाई थी. लेकिन साल 2010 के फाइनल के दौरान धोनी ने उन्हें रिजर्व रखा. इसके पीछे मुंबई के दाहिने हाथ के बल्लेबाजों को गेंदबाजी कराने की रणनीति थी.

जकाती ने कहा कि, पहले दो ओवरों में मैंने 21 रन खाए. बाएं हाथ के बल्लेबाज अभिषेक नायर उस वक्त बल्लेबाजी कर रहे थे और फिर धोनी ने मुझे कहा कि तुम अब बीच के ओवरों में गेंदबाजी करना. धोनी ने मुझे सचिन, रायडू और पोलार्ड के लिए रखा था. हम मुंबई के खिलाफ काफी होमवर्क करके आए थे और हमें पता था कि मुंबई के बल्लेबाज लेफ्ट आर्म स्पिनर्स के खिलाफ कमाल नहीं दिखा पाते.

मुंबई को जीत के लिए 169 रन बनाने थे और फिर सचिन भी अपने अर्धशतक के करीब थे. 15वें ओवर में सबकुछ बदला और मुंबई को उस वक्त जीत के लिए 74 रन चाहिए थे. तेंदुलकर बड़े हिट्स लगा रहे थे. इसके बाद धोनी ने मुझे गेंद थमाई और मैंने सचिन को स्पिन के खिलाफ खेलने के लिए मजबूर किया. सचिन ने पहली गेंद पर चौका मारा लेकिन अगली ही गेंद पर वो फील्डर को कैच दे बैठे. इसके बाद मैंने तिवारी को भी आउट किया और फिर चेन्नई वापस गेम में आ घई.

इसके बाद धोनी की रणनीति की वजह से पोलार्ड भी पवेलियन लौट गए . इस मैच के बाद मुझे पता चला था कि धोनी कैसे रणनीति बनाते हैं. वो जानते हैं कि उन्हें कब किस गेंदबाज का इस्तेमाल करना है. अंत में चेन्नई ये मैच 22 रनों से जीत गया और टीम ने आईपीएल खिताब पर कब्जा कर लिया. जकाती ने चार सीजन में चेन्नई के लिए 48 विकेट झटके थे जो साल 2009 से 2012 था.
 

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