हाईकोर्ट में फिर पहुंचा 567 विदेशी तब्लीगी जमातियों को रिहा करने का मामला

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नई दिल्ली । दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद एकांतवास (क्वारेंटाइन) में रखे गए 567 विदेशी नागरिकों को छोड़ने की मांग करनेवाली एक याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की गई है। इन विदेशी नागरिकों को दिल्ली सरकार ने कोरोना निगेटिव होने के बाद दिल्ली पुलिस को सौंप दिया था।

याचिका मोहम्मद जमाल ने दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील अशीमा मंडला ने कहा है कि दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग ने पिछले 9 मई को 567 विदेशी नागरिकों को दिल्ली पुलिस को सौंपने का आदेश दिया था। इन नागरिकों की एकांतवास की अवधि पूरी हो चुकी है। दिल्ली पुलिस को सौंपने का दिल्ली सरकार का आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 21 एवं 22 का उल्लंघन है।

याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि रमजान का महीना चल रहा है और ईद काफी नजदीक है। ऐसे में उन विदेशी नागरिकों को आइसोलेशन में रखना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। पुलिस की एफआईआर में 567 विदेशी नागरिकों के बारे में यह नहीं बताया गया है कि क्या ये कभी ब्लैकलिस्टेड हुए हैं या कभी उन्हें पुलिस अधिकारियों ने पकड़ा है। किसी व्यक्ति को जांच के लिए हिरासत में रखना कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए इन विदेशी नागरिकों को तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया जाए।

हाईकोर्ट में एक दूसरी याचिका पर पिछले 15 मई को सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने कहा था कि तब्लीगी जमात के जिन लोगों का एकांतवास पूरा हो चुका है, उन्हें रिहा कर दिया गया है। उसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली थी।

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