39 चीनी फाइटर जेट्स ने भरी उड़ान, जवाब में ताइवान ने मिसाइलें और लड़ाकू विमान तैनात किए

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ताइपे। ताइवान पर दोबारा अपनी सत्ता काबिज करने के लिए बौखलाए चीन ने फिर उसकी सीमा में घुसपैठ की है। चीन ने ताइवान के AIDZ (एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन) में 39 लड़ाकू विमान भेजे। यह पिछले कुछ महीनों में की गई चीन की दूसरी बड़ी घुसपैठ है। ताइवान सरकार ने हमले की आशंका से चीन के फाइटर प्लेन को ट्रैक करने के लिए मिसाइलें तैनात कर दी हैं।

इन विमानों ने ताइवान की सीमा में भरी उड़ान
एजेंसी के मुताबिक, चीन के करीब 39 लड़ाकू विमान 23 जनवरी की रात ताइवान के डिफेंस जोन में पहुंच गए। इनमें 24 लड़ाकू जेट J-16 और 10 इलेक्ट्रॉनिक/फाइटर प्लेन J-10 भी शामिल थे। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि चीन की इस घुसपैठ के बाद ताइवान की एयरफोर्स ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के विमानों को एयर डिफेंस रडार सिस्टम पर ट्रैक करने के बाद अपने फाइटर प्लेन भी तैनात कर दिए हैं।

पिछले 5 महीनों में चीन की दूसरी बड़ी कार्रवाई
यह पहला मौका नहीं है जब चीन ने ताइवान की सीमा में फाइटर प्लेन भेजे हैं। चीनी पायलट पिछले डेढ़ साल से आए दिन ताइवान की ओर उड़ान भर रहे हैं। अक्टूबर 2021 में एक ही दिन में 56 फाइटर प्लेन ताइवान की सीमा में पहुंचे थे।

ताइवान ने चीन की ओर से की जा रही घुसपैठ को लेकर सितंबर 2020 से नियमित आंकड़े जारी करना शुरू किया था। अक्टूबर में रिकॉर्ड 196 घुसपैठ दर्ज की गई थीं। इनमें से चीन के 149 लड़ाकू विमान सिर्फ चार दिन के भीतर भेजे गए थे। उस वक्त चीन अपना सालाना राष्ट्रीय दिवस मना रहा था। इसी बहाने उसने ताइवान को अपनी ताकत दिखाई थी।

इसलिए चीन करता है घुसपैठ
आम तौर पर ये उड़ानें ताइवान के दक्षिण-पश्चिम में हवाई क्षेत्र में होती हैं। इसे AIDZ (एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन) कहते हैं। 1949 में गृहयुद्ध के दौरान ताइवान और चीन अलग हो गए थे, लेकिन चीन इस द्वीप पर अपना दावा करता रहा है। नतीजतन बीजिंग ताइवान सरकार की हर कार्रवाई का विरोध करता है। ताइवान को अलग-थलग करने और डराने के लिए राजनयिक और सैन्य ताकत का इस्तेमाल करता रहता है।

2016 में ताइवान के नागरिकों द्वारा साई इंग वेन को राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से यह तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। साई के विचार चीन के पक्ष में थे और उन्होंने इस दावे का समर्थन किया था कि दोनों एक ही चीनी राष्ट्र का हिस्सा हैं। बाद में उनके ख्याल बदल गए। इससे चीन नाराज हो गया। बीजिंग ने ताइवान सरकार के साथ हर तरह का संपर्क तोड़ लिया था।

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