IPS अधिकारी अरविंद दिग्विजय नेगी समेत 9 लोगों के खिलाफ चार्जशीट, पाकिस्तान से मिले कनेक्शन

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लश्कर-ए-तैयबा को खुफ़िया जानकारी लीक करने के मामले में IPS अधिकारी अरविंद दिग्विजय नेगी पर शिकंजा कर सकता है. नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) अगले सप्ताह उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर सकती है. बता दें कि इस केस की जांच के दौरान NIA को पाकिस्तान के साथ कनेक्शन के सबूत मिले थे.

आतंकी संगठन को खुफिया जानकारी लीक करने के आरोप में NIA में काम कर चुके IPS अधिकारी अरविंद दिग्विजय नेगी समेत 9 लोगों पर चार्जशीट दाखिल की जाएगी. 9 आरोपियों में से नाम पाकिस्तानी हैदर अली का भी है. सूत्रों के मुताबिक NIA में काम कर चुके एडी नेगी, खुर्रम परवेज, मुनीर अहमद, अरशद अहमद टोंक, ज़फर अब्बास, रामभान प्रसाद, चंदन महतो, हैदर उर्फ अली, गुप्ता ब्रदर्स पर चार्जशीट फाइल करने की अनुमति  गृह मंत्रालय से मांग गई थी.

क्या था पूरा मामला?

NIA को अपनी इन्वेस्टिगेशन में पता चला कि IPS अधिकारी अरविंद दिग्विजय नेगी ने कश्मीर घाटी में जिस ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) परवेज खुर्रम के घर पहली बार रेड की थी, उसी को आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज पैसों के एवज़ में सौंप दिए थे. आरोपी अधिकारी टेलीग्राम चैट के जरिये पैसों के लेन-देन की बात करता था. जांच मे ये बात सामने आई थी कि नेगी के पास 10 से ज़्यादा मोबाइल नंबर थे, जिससे वो डीलिंग करता था.

NIA ने किया था गिरफ्तार

लश्कर-ए-तैयबा को खुफिया जानकारी लीक करने के मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने हिमाचल प्रदेश काडर के आईपीएस अधिकारी अरविंद दिग्विजय नेगी को गिरफ्तार किया था.

कब दर्ज हुआ था केस?
 
11 साल तीन महीने NIA में प्रतिनियुक्ति (Deputation) में रहने के बाद नेगी को उनके काडर में वापस भेज दिया गया था. नेगी NIA में सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने वाले अधिकारियों में शामिल थे. भारतीय खुफिया एजेंसियों के खुफिया दस्तावेज लीक होने की जानकारी देने के बाद नवंबर में NIA ने हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में उनके आवास पर छापेमारी की थी. इस मामले में NIA ने 6 नवंबर 2021 को केस दर्ज किया था.

किस टीम का हिस्सा थे नेगी?

अरविंद दिग्विजय नेगी NIA की उस टीम का हिस्सा थे, जो फेक करेंसी (Fake Currency), आईएसआईएस (ISIS) के आतंकियों की भर्ती और जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग के लिए नियंत्रण रेखा (LOC) की दूसरी ओर व्यापार के संबंधित मामलों की जांच करती थी.

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