City Today & : अजब&गजब https://citytoday.co.in/rss/category/Amazing City Today & : अजब&गजब en Copyright 2022 citytoday.co.in& All Rights Reserved.CITYTODAY MEDIA PRIVATE LIMITED महाकाल मंदिर के बाहर खोई चप्पल ChatGPT ने ढूंढ निकाली: गोवा के शख्स ने AI को बनाया ‘फुटवियर डिटेक्टर’, VIDEO वायरल https://citytoday.co.in/8318 https://citytoday.co.in/8318 जूते-चप्पलों की भीड़ में अपनी खास जोड़ी तलाशने के लिए फोन से ली तस्वीरें, ChatGPT ने आखिरकार पहचान ली चप्पल

उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के बाहर जूते-चप्पलों की भीड़ में अपनी खोई हुई चप्पल ढूंढना एक शख्स के लिए मुश्किल हो गया। लेकिन इस परेशानी का हल उसने पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से निकाला। गोवा के रहने वाले शुभांग बोरकर ने अपनी चप्पल ढूंढने के लिए ChatGPT का इस्तेमाल किया और इस पूरे प्रयोग का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। शुभांग बोरकर महाकाल मंदिर दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे थे। मंदिर के बाहर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की चप्पलें और जूते रखे हुए थे। दर्शन के बाद जब उन्हें अपनी चप्पल तलाशनी थी, तो एक जैसी दिखने वाली कई जोड़ियों के बीच अपनी चप्पल पहचानना आसान नहीं था। इसके बाद उन्होंने अपने फोन से आसपास रखे फुटवियर की तस्वीरें लेना शुरू किया और इन तस्वीरों को ChatGPT के साथ शेयर किया।

बोरकर ने ChatGPT को अपनी खोई हुई चप्पल की पहचान करने के लिए तस्वीरें दिखाईं। वह अलग-अलग हिस्सों में रखे जूते-चप्पलों की तस्वीरें लेकर AI से पूछते रहे कि इनमें उनकी चप्पल दिखाई दे रही है या नहीं। कई तस्वीरों को स्कैन करने के बाद आखिरकार ChatGPT ने उस जोड़ी को पहचान लिया, जिसकी तलाश बोरकर कर रहे थे। बोरकर ने अपने इस AI प्रयोग का वीडियो इंस्टाग्राम पर “Used ChatGPT to find my lost clogs” नाम से शेयर किया। वीडियो में दिखाया गया कि कैसे उन्होंने अपने फोन को एक तरह के स्कैनिंग डिवाइस की तरह इस्तेमाल किया और जूते-चप्पलों की तस्वीरों के जरिए AI की मदद से अपनी चप्पल खोजने की कोशिश की। इस अनोखे प्रयोग ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींचा है। आमतौर पर ChatGPT का इस्तेमाल सवालों के जवाब, लिखने-पढ़ने, जानकारी जुटाने या दूसरे डिजिटल कामों के लिए किया जाता है। लेकिन इस मामले में AI का इस्तेमाल एक बेहद रोजमर्रा की समस्या को हल करने के लिए किया गया, जिसने इसे खास बना दिया।

महाकाल मंदिर जैसे बड़े धार्मिक स्थलों पर रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में दर्शन के दौरान जूते-चप्पल रखने और बाद में उन्हें पहचानने की समस्या आम है। एक जैसी दिखने वाली कई जोड़ियों के बीच अपनी चप्पल ढूंढने में श्रद्धालुओं को समय लग जाता है। शुभांग बोरकर का यह प्रयोग इसी छोटी लेकिन आम समस्या के लिए AI के एक मजेदार इस्तेमाल के तौर पर सामने आया है। हालांकि, यह किसी आधिकारिक मंदिर व्यवस्था का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक श्रद्धालु द्वारा किया गया व्यक्तिगत AI प्रयोग है। फिर भी इस घटना ने यह दिखाया कि AI का इस्तेमाल सिर्फ बड़े और जटिल कामों के लिए ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी परेशानियों को हल करने के लिए भी किया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद लोग इस अनोखे तरीके को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। किसी ने इसे AI का मजेदार इस्तेमाल बताया तो किसी ने कहा कि अब जूते-चप्पल ढूंढने की जिम्मेदारी भी ChatGPT की हो गई है। फिलहाल महाकाल मंदिर के बाहर खोई चप्पल को AI की मदद से ढूंढने का यह किस्सा सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है।

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Tue, 18 Aug 2026 16:15:43 +0530 news desk MPcg
19 दिन जेल में रहा जापानी छात्र, फिर पुलिस ऑफिस से उठा ले गया कुर्सी; गिरफ्तार होना चाहता था, 7 साल बाद मिला ₹75 हजार मुआवजा https://citytoday.co.in/7929 https://citytoday.co.in/7929 अंग्रेजी सीखने बेंगलुरु आया था हिरोतोशी तनाका, अकादमी प्रमुख से विवाद के बाद गिरफ्तार हुआ; हाईकोर्ट ने केस खत्म किया तो मानवाधिकार आयोग पहुंचा, गिरफ्तारी के विरोध में पुलिस ऑफिस से कुर्सी ले जाकर खींची थी सेल्फी

जापान से भारत अंग्रेजी सीखने और यहां की संस्कृति को समझने आया एक छात्र ऐसी कानूनी उलझन में फंसा कि उसकी जिंदगी के करीब सात साल मुकदमे और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने में निकल गए। जापानी नागरिक हिरोतोशी तनाका 2019 में बेंगलुरु आया था। एक अंग्रेजी अकादमी में हुए विवाद के बाद उसे गिरफ्तार किया गया और उसने 19 दिन जेल में बिताए। बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ आपराधिक मामला खत्म कर दिया। इसके बाद तनाका ने अपनी गिरफ्तारी को लेकर मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया।

मामले का सबसे हैरान करने वाला मोड़ फरवरी 2021 में आया, जब तनाका ने बेंगलुरु के जेसी नगर एसीपी कार्यालय से एक प्लास्टिक की कुर्सी उठा ली। उसने कुर्सी के साथ सेल्फी भी ली और उसे अपने घर ले गया। उसका दावा था कि वह कुर्सी चोरी करके पैसा कमाने या सामान हड़पने के लिए नहीं ले गया था, बल्कि चाहता था कि पुलिस उसे गिरफ्तार करे, ताकि वह भारत में रहकर अपनी मानवाधिकार शिकायत की कानूनी लड़ाई जारी रख सके।

2019 में अंग्रेजी सीखने बेंगलुरु आया था तनाका

हिरोतोशी तनाका 2019 में जापान से बेंगलुरु आया था। उसका उद्देश्य अंग्रेजी सीखना और भारत में कुछ समय बिताना था। उसने एक निजी अंग्रेजी अकादमी में दाखिला लिया।

तनाका के अनुसार, अकादमी में कक्षाएं नियमित रूप से नहीं चल रही थीं और कई बार कक्षाएं रद्द कर दी जाती थीं। उसने अकादमी के प्रमुख से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा। बातचीत और शिकायतों का सिलसिला धीरे-धीरे विवाद में बदल गया।

अकादमी प्रमुख से विवाद के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा

तनाका के मुताबिक, नवंबर 2019 में अकादमी प्रमुख के साथ उसकी बहस हुई। उसका दावा था कि बहस के दौरान उसे उकसाया गया और गुस्से में उसने अकादमी प्रमुख को मुक्का मार दिया।

इसके बाद अकादमी प्रमुख की शिकायत पर आरटी नगर पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया। उस पर स्वेच्छा से चोट पहुंचाने और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराएं लगाई गईं। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, ये अपराध जमानती थे।

तनाका को 23 नवंबर 2019 को गिरफ्तार किया गया और बेंगलुरु सेंट्रल जेल भेज दिया गया। वह 19 दिन न्यायिक हिरासत में रहा और 11 दिसंबर 2019 को बाहर आया।

जेल में क्या हुआ?

तनाका ने बाद में बताया कि भारत की कानूनी व्यवस्था से वह पूरी तरह अनजान था। उसे अंग्रेजी में कानूनी शब्दावली और गिरफ्तारी की प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। उसने कहा कि उसे शुरुआत में यह तक समझ नहीं आ रहा था कि वकील, जमानत और मजिस्ट्रेट जैसी कानूनी प्रक्रियाओं का मतलब क्या है।

तनाका ने यह भी बताया कि वह ADHD और अनिद्रा के लिए दवाएं ले रहा था, लेकिन गिरफ्तारी के समय उसकी मेडिकल रिपोर्ट उसके पास नहीं थी। उसके अनुसार, दवाएं उपलब्ध न होने के कारण जेल में उसकी तबीयत भी खराब रही। ये उसके व्यक्तिगत दावे हैं।

जेल में उसे कुछ अधिकारियों और दूसरे कैदियों से मदद भी मिली। बाद में उसने एक कैदी शंकर को अपना करीबी दोस्त बताया। शंकर गंभीर अपराध में सजा काट रहा था और तनाका के मुताबिक उसने जेल में कानूनी प्रक्रिया समझने और अदालत की सुनवाई तक पहुंचने में उसकी मदद की।

हाईकोर्ट ने 2020 में खत्म कर दिया आपराधिक मामला

जेल से बाहर आने के बाद तनाका ने अपने खिलाफ चल रहे मामले को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अकादमी प्रमुख और तनाका के बीच विवाद का निपटारा होने के बाद हाईकोर्ट ने 2 नवंबर 2020 को FIR और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को खत्म कर दिया।

यानी जिस मामले के कारण तनाका को गिरफ्तार किया गया और 19 दिन जेल में रहना पड़ा था, वह बाद में हाईकोर्ट में समाप्त हो गया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

मानवाधिकार आयोग में पहुंची शिकायत

तनाका ने दिसंबर 2020 में कर्नाटक राज्य मानवाधिकार आयोग का रुख किया। उसने आरोप लगाया कि उसकी गिरफ्तारी और हिरासत में पुलिस ने उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

उसने तत्कालीन आरटी नगर पुलिस सब-इंस्पेक्टर हनुमंथरायप्पा के खिलाफ शिकायत की। अधिकारी बाद में सेवानिवृत्त हो चुके थे। तनाका ने पुलिस पर दुर्व्यवहार और रिश्वत मांगने जैसे आरोप भी लगाए थे। इन आरोपों को तनाका के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए; हालांकि मानवाधिकार आयोग ने उसकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर अलग निष्कर्ष दिया।

फिर पुलिस ऑफिस से कुर्सी क्यों उठा ले गया?

मामले का सबसे अनोखा हिस्सा फरवरी 2021 का है।

हाईकोर्ट से आपराधिक मामला खत्म होने के बाद भी तनाका भारत में अपनी मानवाधिकार शिकायत की लड़ाई जारी रखना चाहता था। दूसरी ओर उसका वीजा समाप्त हो चुका था और उसे देश छोड़ने के लिए कहा गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, 28 फरवरी 2021 उसके भारत से बाहर जाने की समयसीमा थी।

तनाका का मानना था कि यदि वह गिरफ्तार हो जाता है तो उसे भारत में रहकर अपनी कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है।

इसी सोच के तहत वह जेसी नगर एसीपी कार्यालय पहुंचा और वहां से एक सफेद प्लास्टिक की कुर्सी उठा ली। उसने कुर्सी के साथ सेल्फी ली और उसे बेंगलुरु के बीटीएम लेआउट स्थित अपने घर ले गया।

उसका उद्देश्य, उसके अपने बयान के अनुसार, कुर्सी चुराना नहीं बल्कि गिरफ्तारी करवाना था।

पुलिस ने कुर्सी चोरी का केस दर्ज नहीं किया

दिलचस्प बात यह है कि पुलिस ने कुर्सी हटाने की घटना पर उसके खिलाफ चोरी का मामला दर्ज नहीं किया। इसके बजाय उसके वीजा की स्थिति को देखते हुए उसे देश छोड़ने की प्रक्रिया का सामना करना पड़ा।

3 मार्च 2021 को उसे ओवरस्टे करने के मामले में डिटेंशन सेंटर भेजा गया और बाद में उसे जापान डिपोर्ट कर दिया गया। वह अप्रैल 2021 में जापान पहुंचा।

मानवाधिकार आयोग ने गिरफ्तारी को गलत माना

तनाका की शिकायत पर कर्नाटक राज्य मानवाधिकार आयोग ने जांच की। 9 मई 2022 को आयोग ने निष्कर्ष दिया कि पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया में उचित नियमों का पालन नहीं किया था।

आयोग के मुताबिक, संबंधित मामले में अपराध जमानती था और रिकॉर्ड में ऐसी कोई अदालत की अनुमति या वारंट नहीं था, जिसके आधार पर तनाका की गिरफ्तारी को उचित ठहराया जा सके। आयोग ने उसकी 19 दिन की न्यायिक हिरासत को अनावश्यक माना और इसे उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया।

₹75 हजार मुआवजे की सिफारिश

मानवाधिकार आयोग ने कर्नाटक सरकार को तनाका को ₹75,000 मुआवजा देने की सिफारिश की। आयोग ने संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और मुआवजे की रकम अधिकारी से वसूलने पर भी विचार करने को कहा था।

इसके अलावा आयोग ने विदेशी नागरिकों और ऐसे लोगों की गिरफ्तारी से जुड़े मामलों में पुलिस के लिए उचित दिशा-निर्देश बनाने की बात भी कही थी।

हालांकि आयोग की सिफारिश तत्काल लागू नहीं हुई। तनाका ने इसके अनुपालन के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया और सितंबर 2022 में याचिका दायर की। मामला कई वर्षों तक चलता रहा।

करीब सात साल बाद मिला मुआवजा

अब अगस्त 2026 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक सरकार ने तनाका को ₹75,000 का मुआवजा दे दिया है। इससे 2019 में शुरू हुई उसकी लंबी कानूनी लड़ाई का यह अध्याय समाप्त हुआ।

यानी एक अंग्रेजी अकादमी से शुरू हुआ विवाद पुलिस स्टेशन, जेल, हाईकोर्ट, मानवाधिकार आयोग, इमिग्रेशन कार्रवाई और अंततः मुआवजे तक पहुंचा।

तनाका ने क्या हासिल किया?

इस पूरे मामले में दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है। पहली, तनाका ने खुद स्वीकार किया था कि अकादमी प्रमुख के साथ विवाद के दौरान उसने उन्हें मारा था। दूसरी, कर्नाटक राज्य मानवाधिकार आयोग ने उसकी बाद की शिकायत पर उसकी गिरफ्तारी और 19 दिन की हिरासत की प्रक्रिया को गैर-कानूनी माना।

इसलिए इसे केवल “जापानी छात्र निर्दोष था” या “पुलिस ने उसे झूठे केस में फंसाया” जैसे एकतरफा निष्कर्ष के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिकॉर्ड यह दिखाता है कि आपराधिक मामला हाईकोर्ट ने खत्म किया और मानवाधिकार आयोग ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाईं।

कुर्सी की कहानी क्यों बनी चर्चा का विषय?

तनाका का कुर्सी उठाने वाला कदम इस पूरी कहानी का सबसे असामान्य हिस्सा इसलिए बना क्योंकि उसका उद्देश्य कथित तौर पर सामान चोरी करना नहीं था। वह चाहता था कि पुलिस उसे गिरफ्तार करे और इस तरह उसे भारत में रहकर अपनी मानवाधिकार शिकायत आगे बढ़ाने का रास्ता मिले।

लेकिन पुलिस ने उसे कुर्सी चोरी के मामले में गिरफ्तार करने के बजाय उसके इमिग्रेशन स्टेटस के आधार पर कार्रवाई की और अंततः उसे भारत से डिपोर्ट कर दिया।

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Mon, 10 Aug 2026 15:50:20 +0530 news desk MPcg
कच्छ के रण में प्राचीन मानव बस्ती मिलने का दावा, 100 से अधिक कंकालों और अवशेषों की खोज की रिपोर्ट; वैज्ञानिक जांच से खुलेगा इतिहास https://citytoday.co.in/7853 https://citytoday.co.in/7853 गुजरात के कच्छ क्षेत्र से एक बड़ी पुरातात्विक खोज सामने आने की रिपोर्ट है। रिपोर्ट के मुताबिक, कच्छ के रण के एक इलाके में प्राचीन मानव बस्ती के अवशेषों के साथ 100 से अधिक मानव कंकाल, मिट्टी के बर्तन, टेराकोटा से बनी वस्तुएं और पुरानी संरचनाओं के अवशेष मिले हैं। इस खोज को कच्छ यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ताओं की टीम से जोड़ा गया है। हालांकि, इस खोज और इससे जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में स्थल की वास्तविक उम्र, सभ्यता और यहां मिले मानव अवशेषों की संख्या को वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही अंतिम रूप से तय किया जा सकेगा।

BSF की गश्त के दौरान सामने आया स्थल

रिपोर्ट के अनुसार, इस इलाके की जानकारी सीमा सुरक्षा बल के जवानों को गश्त के दौरान मिली। इसके बाद कच्छ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने क्षेत्र का सर्वेक्षण किया और वहां जमीन पर दिखाई दे रहे प्राचीन अवशेषों का अध्ययन शुरू किया।

कच्छ का रण भौगोलिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां समय-समय पर प्राचीन मानव गतिविधियों, पुरातात्विक स्थलों और जीवाश्मों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आते रहे हैं। कच्छ क्षेत्र में कच्छ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा भूवैज्ञानिक और जीवाश्म संबंधी अध्ययन का रिकॉर्ड भी मौजूद है।

100 से ज्यादा मानव कंकाल मिलने का दावा

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि स्थल से 100 से अधिक मानव कंकाल मिले हैं। इन कंकालों के साथ मिट्टी के बर्तन और अन्य वस्तुएं भी मिलने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मानव अवशेष एक व्यवस्थित तरीके से दफनाए गए दिखाई दिए हैं।

अगर वैज्ञानिक जांच में यह बात प्रमाणित होती है कि ये वास्तव में एक ही पुरातात्विक स्थल से जुड़े मानव शवाधान हैं, तो इससे उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों की अंतिम संस्कार संबंधी परंपराओं, सामाजिक संरचना और जीवनशैली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी कंकाल एक ही कालखंड के हैं या एक ही समुदाय से संबंधित हैं। इसके लिए पुरातत्वविदों और मानव-विज्ञान विशेषज्ञों की विस्तृत जांच जरूरी होगी।

मिट्टी के बर्तन और टेराकोटा वस्तुएं भी मिलने की बात

रिपोर्ट के मुताबिक, मानव अवशेषों के अलावा स्थल से मिट्टी के बर्तन, टेराकोटा के खिलौने और पुरानी इमारतों या संरचनाओं के अवशेष भी मिले हैं।

पुरातत्व में इस तरह की वस्तुओं का महत्व इसलिए अधिक होता है क्योंकि इनके आकार, निर्माण तकनीक, मिट्टी की संरचना और सजावट से किसी स्थल के संभावित कालखंड का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी स्थल की निश्चित उम्र निर्धारित करने के लिए केवल मिट्टी के बर्तनों या संरचनाओं के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। इसके लिए अलग-अलग वैज्ञानिक प्रमाणों को एक साथ देखना पड़ता है।

क्या यह हड़प्पा सभ्यता के बाद का स्थल है?

रिपोर्ट में इस स्थल को सिंधु घाटी सभ्यता के उत्तरकाल यानी लेट हड़प्पन काल या मध्यकाल से जोड़ने की संभावना जताई गई है। लेकिन यह अभी प्रारंभिक अनुमान है।

सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में कच्छ का क्षेत्र विशेष महत्व रखता है। धोलावीरा इसी व्यापक क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख हड़प्पा स्थल है और यहां प्राचीन नगरीय जीवन के महत्वपूर्ण प्रमाण मिले हैं। इसलिए कच्छ में किसी नए पुरातात्विक स्थल की पहचान होने पर उसका हड़प्पा सभ्यता और उसके बाद के सांस्कृतिक विकास से संबंध जांचना स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण होगा।

फिर भी किसी नए स्थल को धोलावीरा या हड़प्पा सभ्यता के किसी विशेष चरण से जोड़ने के लिए पुरातात्विक स्तर, वस्तुओं की शैली और वैज्ञानिक डेटिंग जैसे प्रमाण जरूरी होंगे।

वैज्ञानिक जांच से तय होगी असली उम्र

रिपोर्ट के अनुसार, आगे की जांच में मानव अवशेषों और अन्य सामग्री का वैज्ञानिक विश्लेषण कराया जा सकता है। इसमें रेडियोकार्बन डेटिंग, डीएनए अध्ययन और अन्य प्रयोगशाला परीक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वैज्ञानिक डेटिंग से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि मानव अवशेष कितने पुराने हैं। वहीं डीएनए अध्ययन से उपलब्ध जैविक सामग्री के आधार पर उस समय की आबादी, आपसी संबंध और आनुवंशिक इतिहास के बारे में जानकारी हासिल करने की संभावना हो सकती है।

हालांकि, यह भी जरूरी है कि ऐसी जांचों के लिए पर्याप्त रूप से सुरक्षित और उपयुक्त नमूने उपलब्ध हों। इसके अलावा किसी पुरातात्विक स्थल की तारीख निर्धारित करने के लिए एक से अधिक प्रमाणों की तुलना की जाती है।

कच्छ में पहले भी हुई हैं महत्वपूर्ण खोजें

कच्छ क्षेत्र पहले से ही भूविज्ञान और पुरातत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा है। कच्छ यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ताओं ने अतीत में इस क्षेत्र में जीवाश्म और भूवैज्ञानिक अध्ययन किए हैं। वर्ष 2016 में कच्छ में डायनासोर के जीवाश्मों की खोज से जुड़ी रिपोर्टों में भूविज्ञानी गौरव चौहान का भी उल्लेख हुआ था। उस समय शोधकर्ताओं ने डायनासोर की हड्डियों के हिस्से मिलने की जानकारी दी थी और उनकी उम्र तथा प्रजाति निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक जांच की बात कही थी।

कच्छ के भूगर्भीय इतिहास और इसकी अलग-अलग चट्टानी संरचनाओं के कारण यह क्षेत्र वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से अध्ययन का केंद्र रहा है। कच्छ यूनिवर्सिटी के शोध रिकॉर्ड में भी क्षेत्र की भू-विरासत और जीवाश्म संबंधी अध्ययनों का उल्लेख मिलता है।

खोज के बाद कई सवालों के जवाब मिलना बाकी

अगर 100 से अधिक मानव कंकाल मिलने की रिपोर्ट की वैज्ञानिक पुष्टि होती है, तो सबसे बड़ा सवाल इन अवशेषों की उम्र और उनके मूल समुदाय को लेकर होगा। इसके अलावा यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि वहां वास्तव में कोई स्थायी मानव बस्ती थी या यह मुख्य रूप से शवाधान स्थल था।

मिट्टी के बर्तनों और टेराकोटा वस्तुओं की जांच से उस समय की तकनीक और दैनिक जीवन के बारे में जानकारी मिल सकती है। वहीं संरचनाओं के अवशेष यह समझने में मदद कर सकते हैं कि वहां किस तरह का निवास या गतिविधि होती थी।

वैज्ञानिकों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मानव अवशेषों का कालक्रम एक जैसा है या अलग-अलग समय में वहां दफनाए गए लोगों के अवशेष एक ही स्थान पर जमा हुए हैं।

आधिकारिक और वैज्ञानिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल इस खोज से जुड़े कई महत्वपूर्ण दावे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो पाए हैं। इसलिए 100 से अधिक कंकालों की संख्या, स्थल की निश्चित उम्र और इसे लेट हड़प्पन या मध्यकालीन काल से जोड़ने जैसी बातों को अंतिम तथ्य मानने से पहले आधिकारिक पुरातात्विक रिपोर्ट और वैज्ञानिक परीक्षणों का इंतजार करना जरूरी है।

यदि विस्तृत जांच में इन दावों की पुष्टि होती है, तो कच्छ का यह स्थल गुजरात के प्राचीन इतिहास और पश्चिमी भारत में मानव बस्तियों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। खासकर मानव शवाधान, प्राचीन जीवनशैली और कच्छ क्षेत्र में सभ्यताओं के विकास को समझने में इससे नई जानकारी मिलने की संभावना होगी।

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Sat, 08 Aug 2026 14:36:51 +0530 news desk MPcg
उत्तराखंड की रेनू धरियाल के 8 फीट 10 इंच लंबे बाल, Guinness World Record में नाम दर्ज: 271.50 सेंटीमीटर लंबाई मापी गई https://citytoday.co.in/7833 https://citytoday.co.in/7833 उत्तराखंड के हल्द्वानी की रहने वाली रेनू धरियाल ने अपने असाधारण रूप से लंबे बालों के कारण Guinness World Records में जगह बनाई है। उनके बालों की लंबाई 271.50 सेंटीमीटर यानी करीब 8 फीट 10 इंच दर्ज की गई है। Guinness World Records के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, रेनू ने यह उपलब्धि 15 अप्रैल 2026 को हल्द्वानी में हासिल की थी। उनका रिकॉर्ड Longest hair on a living person (female) श्रेणी में दर्ज किया गया है।

रेनू की इस उपलब्धि की जानकारी Guinness World Records की ओर से सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें और रिकॉर्ड को लेकर चर्चा शुरू हो गई। भारतीय महिला के इतने लंबे बालों का यह रिकॉर्ड अब Guinness के आधिकारिक रिकॉर्ड डेटाबेस में दर्ज है।

271.50 सेंटीमीटर लंबाई, सामान्य कद से भी ज्यादा

रेनू धरियाल के बालों की आधिकारिक लंबाई 271.50 सेंटीमीटर मापी गई। यह करीब 2.71 मीटर है। Guinness के रिकॉर्ड में इसकी लंबाई 106.88 इंच भी दर्ज है। यानी उनके बालों की लंबाई कई वयस्क लोगों की ऊंचाई से अधिक है।

Guinness World Records ने रेनू को इस श्रेणी की रिकॉर्डधारी के तौर पर दर्ज किया है। रिकॉर्ड का आधिकारिक नाम “Longest hair on a living person (female)” है। रिकॉर्ड की जगह हल्द्वानी, उत्तराखंड और तारीख 15 अप्रैल 2026 दर्ज है।

रिकॉर्ड के लिए 15 अप्रैल को हुई माप

Guinness के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, रेनू के बालों की लंबाई का रिकॉर्ड 15 अप्रैल 2026 को मापा गया था। इसी माप के आधार पर 271.50 सेंटीमीटर का आंकड़ा दर्ज हुआ। Guinness के रिकॉर्ड पेज पर रेनू धरियाल का नाम, भारत का उल्लेख और हल्द्वानी में रिकॉर्ड बनाए जाने की जानकारी दी गई है।

इस उपलब्धि के बाद रेनू ने कहा कि Guinness World Records में नाम दर्ज कराना उनका बड़ा सपना था। Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय लंबे समय तक बालों की देखभाल और लगातार मेहनत को दिया।

सोशल मीडिया पर ‘रैपुंजल’ के नाम से चर्चा

रेनू के बालों की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग उन्हें ‘रैपुंजल’ नाम से भी बुला रहे हैं। उनके बालों की लंबाई ने लोगों का ध्यान इसलिए खींचा क्योंकि 271.50 सेंटीमीटर की लंबाई सामान्य तौर पर देखी जाने वाली बालों की लंबाई से कई गुना अधिक है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर चल रही कई टिप्पणियों से अलग आधिकारिक रिकॉर्ड का आधार Guinness द्वारा दर्ज की गई माप है। इसलिए रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए 271.50 सेंटीमीटर का आधिकारिक आंकड़ा ही मान्य है।

Guinness में रिकॉर्ड का आधिकारिक नाम क्या है?

Guinness World Records में यह उपलब्धि “Longest hair on a living person (female)” नाम की श्रेणी में दर्ज है। रिकॉर्ड के अनुसार रेनू धरियाल भारत की हैं और यह रिकॉर्ड हल्द्वानी, उत्तराखंड में 15 अप्रैल 2026 को हासिल किया गया।

यह रिकॉर्ड किसी एक दिन की उपलब्धि नहीं, बल्कि लंबे समय तक बालों को बढ़ाने और उनकी देखभाल से जुड़ी प्रक्रिया का परिणाम है। रेनू की कहानी इस वजह से भी चर्चा में है कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत विशेषता को अंतरराष्ट्रीय स्तर के रिकॉर्ड में बदल दिया।

करीब 9 फीट लंबे बाल संभालना भी बड़ी चुनौती

इतने लंबे बालों को संभालना रोजमर्रा की जिंदगी में सामान्य बालों की तुलना में काफी अलग होता है। रेनू ने अपनी दिनचर्या और बालों की देखभाल को लेकर भी चर्चा की है। हाल की रिपोर्टों में उन्होंने बताया कि उनके लंबे बालों के पीछे महंगे उत्पादों से ज्यादा नियमित देखभाल, धैर्य और निरंतरता महत्वपूर्ण रही।

उनकी कहानी में सबसे खास बात यह है कि रिकॉर्ड केवल बालों की लंबाई का आंकड़ा नहीं है, बल्कि लंबे समय तक उसी लंबाई को बनाए रखने और उसकी देखभाल करने से जुड़ा प्रयास भी है।

दुनिया में आधिकारिक रिकॉर्ड के तौर पर दर्ज हुई उपलब्धि

Guinness World Records के आधिकारिक डेटाबेस में रेनू धरियाल का नाम अब इस श्रेणी के रिकॉर्डधारक के रूप में दर्ज है। Guinness के अनुसार उनकी लंबाई 271.50 सेंटीमीटर है और रिकॉर्ड भारत के हल्द्वानी में बनाया गया।

रेनू की उपलब्धि के बाद उत्तराखंड और भारत से जुड़ी इस अनोखी उपलब्धि की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। उनके बालों की लंबाई करीब 2.7 मीटर होने के कारण यह रिकॉर्ड सोशल मीडिया पर भी तेजी से ध्यान खींच रहा है।

एक नजर में रिकॉर्ड
नाम: रेनू धरियाल
स्थान: हल्द्वानी, उत्तराखंड, भारत
रिकॉर्ड: Longest hair on a living person (female)
बालों की लंबाई: 271.50 सेंटीमीटर
फीट में: करीब 8 फीट 10 इंच
रिकॉर्ड की तारीख: 15 अप्रैल 2026
रिकॉर्ड संस्था: Guinness World Records

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Sat, 08 Aug 2026 12:41:38 +0530 news desk MPcg
सिंगापुर में बढ़ी हिंदू आबादी, 5 साल में हिस्सेदारी 5% से बढ़कर 5.4% हुई: सर्वे में सामने आया धार्मिक बदलाव का ट्रेंड https://citytoday.co.in/7783 https://citytoday.co.in/7783 धर्म से दूरी बनाने वालों की संख्या में भी बड़ा इजाफा, 2025 में 23.9% लोगों ने खुद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा

सिंगापुर में पिछले पांच वर्षों के दौरान धार्मिक जनसांख्यिकी में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार, देश में हिंदू आबादी की हिस्सेदारी में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कुछ अन्य प्रमुख धर्मों के अनुयायियों के अनुपात में कमी आई है। इसके साथ ही ऐसे लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, जो खुद को किसी भी धर्म से नहीं जोड़ते हैं।

सिंगापुर के जनरल हाउसहोल्ड सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 में देश की 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 5.0 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 5.4 प्रतिशत हो गई। यानी पांच वर्षों में हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी बढ़ने वाला प्रमुख धर्म

सर्वे के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में हिंदू धर्म ऐसा प्रमुख धर्म रहा, जिसके अनुयायियों के प्रतिशत में सकारात्मक बदलाव दर्ज किया गया। इसके पीछे विशेषज्ञों ने कई कारण बताए हैं, जिनमें भारत से आने वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या, पेशेवरों का सिंगापुर में बसना और जनसांख्यिकीय बदलाव शामिल हैं।

सिंगापुर में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इनमें तमिल समुदाय की संख्या भी काफी महत्वपूर्ण है, जिनकी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं हिंदू धर्म से जुड़ी हुई हैं।

धार्मिक पहचान से दूरी बढ़ी, गैर-धार्मिक आबादी 23.9% पहुंची

सर्वे की सबसे बड़ी बात यह रही कि सिंगापुर में खुद को किसी धर्म से नहीं जोड़ने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

2020 में ऐसे लोगों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 23.9 प्रतिशत हो गई। यानी पांच वर्षों में गैर-धार्मिक आबादी में करीब 3.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव सिंगापुर जैसे आधुनिक और बहुसांस्कृतिक समाज में बदलती सामाजिक सोच को दर्शाता है, जहां बड़ी संख्या में लोग धार्मिक पहचान के बजाय व्यक्तिगत विचारों और जीवनशैली को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ईसाई, ताओ और बौद्ध आबादी के अनुपात में कमी

सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, कुछ प्रमुख धर्मों के अनुयायियों की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई।

ईसाई आबादी की हिस्सेदारी में करीब 1.8 प्रतिशत की कमी आई।
ताओ धर्म मानने वालों की संख्या में लगभग 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
बौद्ध धर्म के अनुयायियों के अनुपात में भी कमी देखने को मिली।

हालांकि, सिंगापुर अब भी दुनिया के सबसे धार्मिक रूप से विविध देशों में शामिल है, जहां कई धर्मों और संस्कृतियों के लोग साथ रहते हैं।

हिंदू आबादी बढ़ने के पीछे क्या हैं कारण?

विशेषज्ञों के मुताबिक, सिंगापुर में हिंदू आबादी बढ़ने के पीछे मुख्य कारण प्रवासन और प्राकृतिक जनसंख्या बदलाव हैं।

1. भारत से बढ़ता प्रवासन

सिंगापुर एशिया का एक बड़ा आर्थिक केंद्र है। यहां भारत से बड़ी संख्या में आईटी, वित्त, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों से जुड़े पेशेवर पहुंचते हैं। इनमें कई लोग लंबे समय तक रहने के बाद स्थायी निवासी या नागरिक बन जाते हैं।

2. जन्म और मृत्यु दर का अंतर

रिपोर्ट में बताया गया कि हिंदू समुदाय में जन्म दर और मृत्यु दर के बीच अंतर भी आबादी के अनुपात को प्रभावित करता है। हिंदुओं में जन्म दर करीब 7.3 प्रति हजार और मृत्यु दर करीब 5 प्रति हजार दर्ज की गई।

3. धार्मिक पहचान बनाए रखने की प्रवृत्ति

सर्वे में यह भी सामने आया कि हिंदू समुदाय में अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखने की दर काफी अधिक है। करीब 97 प्रतिशत हिंदू अपने मूल धर्म से जुड़े रहते हैं।

धार्मिक पहचान बनाए रखने में हिंदू समुदाय आगे

सर्वे के अनुसार, अपने मूल धर्म को बनाए रखने के मामले में हिंदू समुदाय की रिटेंशन रेट सबसे अधिक रही।

हिंदू: 97 प्रतिशत
मुस्लिम: 96.1 प्रतिशत
ताओ: 91.7 प्रतिशत
बौद्ध: 79.7 प्रतिशत

वहीं ईसाई समुदायों में यह दर अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई।

सिंगापुर की बदलती सामाजिक तस्वीर

सिंगापुर लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। यहां चीनी, मलय, भारतीय और अन्य समुदायों के लोग रहते हैं। नए आंकड़े बताते हैं कि देश में एक ओर कुछ धार्मिक समुदायों की हिस्सेदारी बदल रही है, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी में धर्म से दूरी बनाने का रुझान भी बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में प्रवासन, जन्म दर और सामाजिक बदलाव सिंगापुर की धार्मिक जनसंख्या संरचना को और प्रभावित कर सकते हैं।

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Fri, 07 Aug 2026 14:29:44 +0530 news desk MPcg
18 साल की उम्र में बने दुनिया के सबसे युवा पुरुष प्रोफेसर: नाथन थॉमस ने तोड़ा 306 साल पुराना रिकॉर्ड, 10 साल में शुरू की थी कॉलेज पढ़ाई https://citytoday.co.in/7730 https://citytoday.co.in/7730

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दी मान्यता; 18 साल 346 दिन की उम्र में मियामी डेड कॉलेज में पढ़ाना शुरू किया, अब कानून की पढ़ाई कर रहे हैं

फ्लोरिडा (अमेरिका)। दुनिया में कुछ लोग अपनी उम्र से कहीं आगे जाकर उपलब्धियां हासिल करते हैं। अमेरिका के नाथन थॉमस भी ऐसी ही प्रतिभाओं में शामिल हैं, जिन्होंने बेहद कम उम्र में शिक्षा के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। नाथन थॉमस को दुनिया के सबसे युवा पुरुष प्रोफेसर के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने मान्यता दी है।

नाथन ने यह रिकॉर्ड तब बनाया, जब उन्होंने केवल 18 साल 346 दिन की उम्र में कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में पढ़ाना शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने करीब 306 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया, जो इतने लंबे समय से कायम था।

सबसे खास बात यह है कि नाथन ने जिस कॉलेज में शिक्षक के रूप में अपनी शुरुआत की, उनकी शैक्षणिक यात्रा भी वहीं से शुरू हुई थी। एक समय वह इसी संस्थान में छात्र थे और कुछ वर्षों बाद उसी जगह विद्यार्थियों को पढ़ाने लगे।


10 साल की उम्र में कॉलेज में लिया था दाखिला

नाथन थॉमस का जन्म 9 सितंबर 2004 को हुआ था। बचपन से ही उनकी रुचि विज्ञान, तकनीक, गणित और इंजीनियरिंग जैसे विषयों में थी। उनकी सीखने की क्षमता और तेज समझ के कारण उन्होंने सामान्य उम्र से काफी पहले उच्च शिक्षा की शुरुआत कर दी।

सिर्फ 10 साल की उम्र में नाथन ने मियामी डेड कॉलेज में दाखिला लिया। वह वहां एक विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम के माध्यम से जुड़े थे, जिसमें प्रतिभाशाली और तेज सीखने वाले छात्रों को कम उम्र में कॉलेज स्तर की पढ़ाई का मौका दिया जाता है।

उस समय जब उनकी उम्र के बच्चे स्कूल की सामान्य पढ़ाई कर रहे थे, नाथन कॉलेज स्तर के विषयों को समझने और सीखने में जुटे थे।

इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए 14 साल की उम्र में फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया। यहां उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी पढ़ाई जारी रखी।


18 साल की उम्र तक पूरी कर ली बैचलर और मास्टर डिग्री

नाथन थॉमस की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि उन्होंने बहुत कम उम्र में उच्च शिक्षा के कई स्तर पूरे कर लिए।

18 साल की उम्र तक उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर और मास्टर डिग्री पूरी कर ली थी। दोनों डिग्रियां उन्होंने अच्छे प्रदर्शन के साथ हासिल कीं।

जब उनकी उम्र के अधिकतर युवा अभी कॉलेज की शुरुआती पढ़ाई पूरी कर रहे थे, उस समय नाथन न केवल अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर चुके थे, बल्कि एक शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।


उसी कॉलेज में बने प्रोफेसर जहां कभी छात्र थे

अगस्त 2023 में नाथन थॉमस ने मियामी डेड कॉलेज में फैकल्टी सदस्य के रूप में काम शुरू किया।

पहली बार जब वह क्लासरूम में शिक्षक बनकर पहुंचे तो स्थिति काफी अलग थी। कई छात्र उम्र में उनसे ज्यादा बड़े नहीं थे और कुछ लगभग उनकी ही उम्र के थे।

हालांकि, नाथन के ज्ञान और विषय पर मजबूत पकड़ ने उन्हें छात्रों के बीच अलग पहचान दिलाई। उन्होंने इंजीनियरिंग से जुड़े विषय पढ़ाने शुरू किए और कम उम्र के बावजूद एक अनुभवी शिक्षक की तरह अपनी भूमिका निभाई।

वह छात्रों को कंप्यूटिंग और प्रोग्रामिंग से जुड़े विषय पढ़ाते हैं। उनके पाठ्यक्रम में इंजीनियरिंग छात्रों के लिए कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की मूल अवधारणाओं को शामिल किया गया है।


माता-पिता से मिली इंजीनियरिंग की प्रेरणा

नाथन थॉमस के अनुसार, तकनीक और इंजीनियरिंग में उनकी रुचि का बड़ा कारण उनका पारिवारिक माहौल रहा।

उनके माता-पिता दोनों इंजीनियर हैं। बचपन से ही उन्हें विज्ञान और तकनीक से जुड़े विषयों को समझने का अवसर मिला।

खासकर उनकी मां ने कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाने में उनकी काफी मदद की। नाथन का कहना है कि बचपन में मां द्वारा सिखाई गई कई बातें आज उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने बताया कि कई बार माता-पिता द्वारा दी गई छोटी-छोटी सीख भविष्य में बड़ी उपलब्धियों का आधार बन जाती है।


अब कानून की पढ़ाई कर रहे हैं नाथन

प्रोफेसर बनने के बाद भी नाथन थॉमस ने अपनी शिक्षा जारी रखी है। वर्तमान में वह कानून की पढ़ाई कर रहे हैं।

उनकी योजना इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ (बौद्धिक संपदा कानून) में विशेषज्ञता हासिल करने की है। वह खासतौर पर विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित यानी STEM क्षेत्र से जुड़े कानूनी मामलों में रुचि रखते हैं।

नाथन का मानना है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई ने उन्हें जटिल समस्याओं को छोटे हिस्सों में बांटकर समझना सिखाया है। अब वह इसी सोच का इस्तेमाल कानून की पढ़ाई में भी कर रहे हैं।

उनके अनुसार, शिक्षक बनने से उनकी अपनी समझ भी मजबूत होती है, क्योंकि दूसरों को पढ़ाने के दौरान किसी विषय को और गहराई से समझना पड़ता है।

वह अपनी कानून की डिग्री साल 2028 तक पूरी करने की उम्मीद कर रहे हैं।


306 साल पुराना रिकॉर्ड कैसे टूटा?

नाथन थॉमस के नाम दर्ज रिकॉर्ड से पहले सबसे युवा पुरुष प्रोफेसर का रिकॉर्ड 18वीं सदी में बना था।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, इससे पहले यह रिकॉर्ड मैकनॉरेन के नाम था, जिन्होंने साल 1717 में प्रोफेसर बनकर यह उपलब्धि हासिल की थी।

करीब तीन शताब्दियों से ज्यादा समय तक यह रिकॉर्ड कायम रहा। नाथन ने 18 साल 346 दिन की उम्र में प्रोफेसर बनकर इस रिकॉर्ड को अपने नाम कर लिया।

महिला वर्ग में सबसे कम उम्र में प्रोफेसर बनने का रिकॉर्ड Alia Sabur के नाम है। अलिया साबुर साल 2008 में 18 साल 362 दिन की उम्र में प्रोफेसर बनी थीं।

नाथन पुरुष वर्ग में यह रिकॉर्ड बनाने वाले सबसे युवा प्रोफेसर हैं।


पढ़ाई के साथ खेल और संगीत में भी रुचि

नाथन थॉमस सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं। उन्हें खेल और संगीत में भी काफी रुचि है।

वह बास्केटबॉल, टेनिस और गोल्फ खेलना पसंद करते हैं। इसके अलावा उन्हें पियानो बजाने का भी शौक है।

उनका मानना है कि जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। सिर्फ पढ़ाई या करियर पर ध्यान देने के बजाय अपनी रुचियों को भी समय देना चाहिए।


नाथन थॉमस का संदेश- उम्र सफलता की सीमा नहीं

अपनी उपलब्धि को लेकर नाथन थॉमस का कहना है कि सफलता के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती।

उनके अनुसार, हर व्यक्ति की सीखने और आगे बढ़ने की गति अलग होती है। इसलिए दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार लगातार मेहनत करते रहना चाहिए।

नाथन की कहानी उन छात्रों के लिए प्रेरणा है जो कम उम्र में बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साबित किया कि सही दिशा, परिवार का समर्थन और सीखने की इच्छा हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।

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Thu, 06 Aug 2026 15:00:18 +0530 news desk MPcg
ट्रेन में आग की अफवाह से कूदकर यात्री की मौत को हाई कोर्ट ने माना ‘अप्रत्याशित दुर्घटना’, रेलवे को देना होगा ₹8 लाख मुआवजा https://citytoday.co.in/7474 https://citytoday.co.in/7474 पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने रेलवे दुर्घटना मुआवजे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि ट्रेन में आग लगने की अफवाह के कारण कोई यात्री घबराकर अपनी जान बचाने के लिए ट्रेन से उतरता है और इसी दौरान दूसरी ट्रेन की चपेट में आकर उसकी मौत हो जाती है, तो इसे ‘अनटुवर्ड इंसीडेंट’ (Untoward Incident) यानी अप्रत्याशित दुर्घटना माना जाएगा।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में रेलवे केवल यह तर्क देकर मुआवजा देने से इनकार नहीं कर सकता कि यात्री ने खुद ट्रेन से उतरने का फैसला लिया था या उसकी लापरवाही के कारण हादसा हुआ।

अदालत ने रेलवे को मृतक यात्री के परिवार को ₹8 लाख रुपये का वैधानिक मुआवजा छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है।

हाई कोर्ट ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल का फैसला पलटा

यह फैसला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस हरकेश मनुजा की पीठ ने सुनाया। अदालत ने मयंक के माता-पिता मीना और अन्य की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए रेलवे दावा न्यायाधिकरण (Railway Claims Tribunal), चंडीगढ़ के फैसले को रद्द कर दिया।

रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने पहले मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। ट्रिब्यूनल का कहना था कि ट्रेन से उतरने के बाद यात्री का दर्जा खत्म हो गया था और उसका कृत्य स्वयं की लापरवाही की श्रेणी में आता है।

लेकिन हाई कोर्ट ने इस तर्क को गलत ठहराते हुए कहा कि असाधारण परिस्थितियों में ट्रेन से उतरने के कारण किसी यात्री का दर्जा समाप्त नहीं हो जाता।

क्या था पूरा मामला?

मामला मयंक नाम के एक यात्री की मौत से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, मयंक अपने साथियों के साथ औरंगाबाद में एक जागरण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सचखंड एक्सप्रेस से करनाल लौट रहा था।

मयंक के पास यात्रा के लिए वैध रेलवे टिकट था। यानी वह ट्रेन में अधिकृत यात्री के रूप में सफर कर रहा था।

यात्रा के दौरान हरसाना कलां रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन में आग लगने की अफवाह फैल गई। अफवाह के बाद ट्रेन के डिब्बे में अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

अपनी जान बचाने के प्रयास में कई यात्री ट्रेन से नीचे उतरने लगे। इसी दौरान मयंक भी घबराकर ट्रेन से कूद गया।

लेकिन दुर्भाग्य से वह पास के दूसरे रेलवे ट्रैक पर आ रही ट्रेन की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई।

रेलवे ने मुआवजा देने से किया था इनकार

हादसे के बाद मयंक के परिवार ने रेलवे से मुआवजे की मांग की थी।

रेलवे दावा न्यायाधिकरण ने माना था कि:

मयंक वैध टिकट के साथ यात्रा कर रहा था।
वह वास्तविक यात्री था।
उसकी मौत रेलवे यात्रा के दौरान हुई।

लेकिन इसके बावजूद ट्रिब्यूनल ने मुआवजा देने से इनकार कर दिया।

ट्रिब्यूनल का तर्क था कि ट्रेन से उतरने के बाद मयंक यात्री नहीं रहा और उसका खुद ट्रेन से कूदना उसकी अपनी लापरवाही थी।

इसके आधार पर उसे रेलवे अधिनियम के तहत मुआवजे का पात्र नहीं माना गया।

“यात्रा का अनुबंध खत्म नहीं होता”: हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के इस निष्कर्ष को खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा कि कोई यात्री केवल इसलिए यात्री का दर्जा नहीं खो देता क्योंकि किसी आपात स्थिति में उसे ट्रेन से उतरना पड़ा।

हाई कोर्ट ने कहा कि जब तक यात्री अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचता, तब तक उसका रेलवे के साथ यात्रा संबंध बना रहता है।

अदालत ने कहा कि यदि कोई यात्री किसी खतरे की आशंका के कारण अपनी जान बचाने की कोशिश करता है, तो उसे लापरवाही नहीं कहा जा सकता।

“यह आत्मरक्षा की स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी”

हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रेन में आग लगने की आशंका के बीच कोई व्यक्ति अपनी जान बचाने के लिए तुरंत प्रतिक्रिया देता है।

ऐसी स्थिति में यह नहीं कहा जा सकता कि यात्री ने जानबूझकर खुद को नुकसान पहुंचाने का कदम उठाया।

अदालत ने कहा कि मयंक का ट्रेन से उतरना आत्म-विनाश नहीं बल्कि आत्मरक्षा की स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी।

कोर्ट ने माना कि अचानक फैली अफवाह और उससे पैदा हुई दहशत के कारण यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति बनी थी।

रेलवे अधिनियम की धारा 124-A का किया उल्लेख

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में रेलवे अधिनियम की धारा 124-A का भी उल्लेख किया।

अदालत ने कहा कि यह प्रावधान ‘सख्त जिम्मेदारी’ (Strict Liability) के सिद्धांत पर आधारित है।

इसका मतलब है कि यदि कोई यात्री किसी अप्रत्याशित रेलवे दुर्घटना में मारा जाता है या घायल होता है, तो सामान्य परिस्थितियों में रेलवे मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार होगा।

कोर्ट ने कहा कि केवल यात्री की सामान्य लापरवाही को मुआवजा रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

रेलवे पर था अपवाद साबित करने का दायित्व

हाई कोर्ट ने कहा कि यदि रेलवे मुआवजा देने से बचना चाहता है तो उसे यह साबित करना होगा कि मामला कानून में बताए गए अपवादों के अंतर्गत आता है।

अदालत ने पाया कि रेलवे ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो सके कि मयंक का मामला धारा 124-A के किसी अपवाद में आता है।

कोर्ट ने कहा कि मृतक के सहयात्री की गवाही से यह स्पष्ट हुआ कि ट्रेन में आग की अफवाह के कारण डर और दहशत का माहौल पैदा हुआ था।

आठ लाख रुपये मुआवजा और ब्याज देने का आदेश

हाई कोर्ट ने रेलवे दावा न्यायाधिकरण के पुराने फैसले को रद्द करते हुए मयंक के माता-पिता को मुआवजा देने का आदेश दिया।

अदालत ने निर्देश दिया कि:

रेलवे को ₹8 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा।
राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
ब्याज की गणना दावा याचिका दायर करने की तारीख से भुगतान तक की जाएगी।
रेलवे को आठ सप्ताह के भीतर राशि ट्रिब्यूनल में जमा करनी होगी।
फैसले का महत्व

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का यह फैसला रेलवे दुर्घटना मुआवजे से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि आपात परिस्थितियों में यात्रियों द्वारा अपनी जान बचाने के लिए उठाया गया कदम हमेशा लापरवाही नहीं माना जा सकता।

अदालत ने यह संदेश दिया है कि रेलवे यात्रियों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है और अप्रत्याशित घटनाओं में पीड़ित परिवारों को कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।

यह फैसला भविष्य में उन मामलों में भी उदाहरण बन सकता है, जहां डर, अफवाह या अचानक पैदा हुई आपात स्थिति के कारण यात्री दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

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Sat, 25 Jul 2026 15:46:14 +0530 news desk MPcg
गोपालगंज में 5 साल के रिजवान ने पकड़े दो विशाल धामिन सांप, वायरल वीडियो ने मचाई सनसनी; विशेषज्ञ बोले& सावधानी जरूरी https://citytoday.co.in/7383 https://citytoday.co.in/7383  जिले के नगर थाना क्षेत्र के बसडीला गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। महज 5 साल के एक बच्चे का दो बड़े आकार के धामिन सांपों के साथ खेलते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बच्चा बिना किसी डर के दोनों सांपों को हाथ में पकड़े नजर आ रहा है। इस घटना के बाद जहां कुछ लोग बच्चे की हिम्मत की चर्चा कर रहे हैं, वहीं वन्यजीव विशेषज्ञों ने इसे बेहद जोखिम भरा बताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

एनएच-27 के पास हुई घटना, लोगों की जुटी भीड़

जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला गोपालगंज जिले के नगर थाना क्षेत्र के बसडीला गांव का है। बताया जा रहा है कि एनएच-27 के आसपास बच्चे ने दो धामिन सांपों को पकड़ लिया था। जब आसपास मौजूद लोगों ने एक छोटे बच्चे को इतने बड़े सांपों के साथ देखा तो वे हैरान रह गए।

कुछ ही देर में मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए। लोग बच्चे को सांपों के साथ देखकर आश्चर्यचकित थे। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने अपने मोबाइल फोन से बच्चे का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यही वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से फैल गया।

वीडियो में सांपों को हाथ में लेकर खेलता दिखा बच्चा

वायरल वीडियो में 5 वर्षीय रिजवान दोनों सांपों को अपने हाथों में पकड़े हुए दिखाई दे रहा है। बच्चा सांपों के साथ ऐसे व्यवहार कर रहा है जैसे वह किसी सामान्य चीज के साथ खेल रहा हो। उसके चेहरे पर डर नजर नहीं आ रहा है।

वीडियो देखने वाले कई लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर इतनी कम उम्र के बच्चे ने सांप पकड़ना कैसे सीख लिया और उसे इतने खतरनाक जीवों के इतने करीब जाने दिया गया।

पिता ने बताया- गांव के एक व्यक्ति से सीखी सांप पकड़ने की कला

रिजवान के पिता शमशेर अली ने बताया कि गांव में रहने वाला एक व्यक्ति सांप पकड़ने का काम करता है। उसी व्यक्ति से बच्चे ने सांप पकड़ने की तकनीक सीखी है।

पिता के इस बयान के बाद गांव में भी इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी प्रशिक्षित व्यक्ति की मौजूदगी के बिना बच्चों को सांप पकड़ने की अनुमति देना बेहद खतरनाक हो सकता है।

क्या होता है धामिन सांप?

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार धामिन या रैट स्नेक भारत में पाया जाने वाला एक सामान्य सांप है। यह विषहीन प्रजाति में आता है और आमतौर पर इंसानों के लिए जानलेवा नहीं होता।

धामिन सांप खेतों और ग्रामीण इलाकों में अक्सर दिखाई देता है। यह मुख्य रूप से चूहों और छोटे जीवों को खाता है, जिसके कारण इसे किसानों के लिए लाभकारी भी माना जाता है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सांप को पूरी तरह सुरक्षित मानना गलत है। सांप चाहे जहरीला हो या विषहीन, खतरा महसूस होने पर वह खुद को बचाने के लिए हमला कर सकता है।

विशेषज्ञों ने बच्चों को दूर रखने की दी सलाह

स्नेक रेस्क्यू टीम और वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि सांपों को पकड़ना एक विशेष कौशल है, जिसके लिए प्रशिक्षण और अनुभव की जरूरत होती है।

उन्होंने लोगों से अपील की है कि अगर घर, खेत या सड़क पर सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या छेड़ने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में वन विभाग या प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना देना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार लोग सांप की सही पहचान नहीं कर पाते और इसी वजह से हादसे हो जाते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो लोगों को आकर्षित जरूर करते हैं, लेकिन इन्हें देखकर ऐसी गतिविधियों की नकल करना खतरनाक साबित हो सकता है।

सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

रिजवान का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोगों ने बच्चे की निडरता की तारीफ की तो कई लोगों ने माता-पिता और आसपास मौजूद लोगों से सवाल किया कि बच्चे को सांपों के इतने करीब क्यों जाने दिया गया।

कुछ यूजर्स ने कहा कि बच्चे की जिज्ञासा को समझना चाहिए, लेकिन उसकी सुरक्षा सबसे जरूरी है। वहीं कई लोगों ने प्रशासन से भी अपील की कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को वन्यजीवों से जुड़े खतरों के बारे में जागरूक किया जाए।

बच्चों में वन्यजीवों को लेकर जागरूकता जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को प्रकृति और वन्यजीवों के बारे में जानकारी देना अच्छी बात है, लेकिन उन्हें सुरक्षित तरीके से यह शिक्षा दी जानी चाहिए।

सांपों को लेकर लोगों में कई तरह की गलत धारणाएं भी होती हैं। कुछ लोग हर सांप को जहरीला मानते हैं, जबकि कुछ लोग हर सांप को नुकसान न पहुंचाने वाला समझ लेते हैं। दोनों ही स्थितियां खतरनाक हो सकती हैं।

सही जानकारी, सावधानी और विशेषज्ञों की मदद से ही इंसान और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित संतुलन बनाया जा सकता है।

फिलहाल वीडियो की चर्चा जारी

गोपालगंज के बसडीला गांव की यह घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। बच्चे का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर लगातार शेयर किया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों की सलाह साफ है कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों को सांपों या अन्य जंगली जीवों के संपर्क में अकेले नहीं आने देना चाहिए।

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Mon, 20 Jul 2026 18:56:05 +0530 news desk MPcg
इंसान जैसे दिखने वाले रोबोट ‘सर्जी’ ने की सफल सर्जरी, दूर बैठे डॉक्टरों ने किया कंट्रोल; मेडिकल रोबोटिक्स में नई शुरुआत https://citytoday.co.in/7337 https://citytoday.co.in/7337 मेडिकल साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। अमेरिका में एक ह्यूमनॉयड रोबोट ‘सर्जी (Surgical Robot / SRT – Sarcopenia? संदर्भानुसार नाम)’ ने पहली बार इंसानों जैसी शारीरिक संरचना के साथ एक जटिल सर्जिकल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस प्रयोग में डॉक्टरों ने रोबोट को दूर बैठकर नियंत्रित किया और रोबोट ने सामान्य सर्जिकल उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) हटाने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

यह उपलब्धि भविष्य में चिकित्सा क्षेत्र में रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेली-सर्जरी के इस्तेमाल को नई दिशा दे सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसी तकनीक उन क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने में मदद कर सकती है, जहां अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की टीम ने किया प्रयोग

इस सफल प्रयोग को अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिकों और मेडिकल विशेषज्ञों की टीम ने अंजाम दिया। शोधकर्ताओं ने एक ऐसे ह्यूमनॉयड रोबोट को विकसित किया, जो इंसानों की तरह हाथों की गतिविधियों को समझ सकता है और सर्जिकल उपकरणों को नियंत्रित कर सकता है।

रोबोट ‘सर्जी’ को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह केवल एक तय मशीन की तरह नहीं, बल्कि एक मानव सहायक की तरह काम कर सके। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम लगाया गया है, जो डॉक्टरों के निर्देशों को समझकर सर्जिकल गतिविधियों को अंजाम देता है।

रोबोट ने की गॉल ब्लैडर हटाने की सर्जरी

ट्रायल के दौरान रोबोट ने लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी (Laparoscopic Cholecystectomy) यानी गॉल ब्लैडर हटाने की सर्जरी की।

गॉल ब्लैडर शरीर का एक छोटा अंग होता है, जो लिवर द्वारा बनाए गए पित्त (Bile) को जमा करता है। इसमें पथरी या अन्य समस्याएं होने पर कई बार इसे सर्जरी के जरिए हटाना पड़ता है।

इस प्रक्रिया में रोबोट ने:

सर्जिकल उपकरणों को पकड़ा
डॉक्टरों के निर्देशों के अनुसार मूवमेंट किया
ऑपरेशन के जरूरी चरणों को पूरा किया
इंसानी डॉक्टरों द्वारा दिए गए कमांड का पालन किया

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह प्रयोग इस बात का संकेत है कि भविष्य में रोबोट सर्जरी के क्षेत्र में डॉक्टरों के सहायक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

दूर बैठे डॉक्टरों ने किया ऑपरेशन कंट्रोल

इस प्रयोग की सबसे खास बात यह रही कि डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में मौजूद नहीं थे, बल्कि उन्होंने दूर बैठकर रोबोट को नियंत्रित किया।

डॉक्टरों ने रिमोट इंटरफेस के माध्यम से रोबोट को निर्देश दिए और रोबोट ने उन निर्देशों के आधार पर सर्जिकल प्रक्रिया पूरी की।

इस तकनीक को भविष्य में टेली-सर्जरी (Remote Surgery) के क्षेत्र में बड़ी सफलता माना जा रहा है। इससे विशेषज्ञ डॉक्टर हजारों किलोमीटर दूर रहकर भी मरीजों की मदद कर सकेंगे।

मौजूदा रोबोटिक सर्जरी सिस्टम से कैसे अलग है ‘सर्जी’?

अस्पतालों में पहले से ही रोबोटिक सर्जरी सिस्टम मौजूद हैं, लेकिन वे आमतौर पर किसी खास काम के लिए बनाए जाते हैं।

उदाहरण के तौर पर:

रोबोटिक आर्म सिस्टम
विशेष सर्जिकल मशीनें
डॉक्टर द्वारा नियंत्रित ऑपरेशन प्लेटफॉर्म

इन मशीनों को चलाने के लिए विशेष ऑपरेशन थिएटर और प्रशिक्षित टीम की जरूरत होती है।

वहीं, ह्यूमनॉयड रोबोट ‘सर्जी’ को सामान्य इंसानी वातावरण में काम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसका डिजाइन इंसानों की तरह रखा गया है ताकि यह मौजूदा चिकित्सा उपकरणों और वातावरण के साथ आसानी से काम कर सके।

AI और रोबोटिक्स बदल रहे हैं चिकित्सा का भविष्य

मेडिकल क्षेत्र में AI और रोबोटिक्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

इन तकनीकों की मदद से:

सर्जरी में अधिक सटीकता लाई जा सकती है
मानवीय गलतियों को कम किया जा सकता है
दूर-दराज क्षेत्रों में इलाज पहुंचाया जा सकता है
डॉक्टरों को कठिन ऑपरेशन में सहायता मिल सकती है

विशेषज्ञों का कहना है कि रोबोट डॉक्टरों की जगह नहीं लेंगे, बल्कि वे डॉक्टरों के सहायक के रूप में काम करेंगे।

अभी नियमित इस्तेमाल में लगेगा समय

हालांकि यह उपलब्धि बड़ी मानी जा रही है, लेकिन अस्पतालों में ऐसे ह्यूमनॉयड रोबोट का नियमित इस्तेमाल शुरू होने में अभी समय लगेगा।

इसके लिए कई चरणों से गुजरना होगा:

सुरक्षा परीक्षण
मेडिकल रेगुलेटरी मंजूरी
मरीजों पर विस्तृत परीक्षण
डॉक्टरों की ट्रेनिंग
तकनीक की लागत कम करना

मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि इंसानों पर बड़े स्तर पर इस्तेमाल से पहले इस तकनीक की विश्वसनीयता और सुरक्षा को पूरी तरह साबित करना जरूरी होगा।

भविष्य में अंतरिक्ष से लेकर गांवों तक उपयोग की संभावना

वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी तकनीक भविष्य में केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगी।

संभावना है कि:

दूर-दराज गांवों में विशेषज्ञ इलाज पहुंचाया जा सकेगा
युद्ध या आपदा क्षेत्रों में रोबोट मदद कर सकेंगे
अंतरिक्ष मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों की चिकित्सा सहायता की जा सकेगी
डॉक्टरों की कमी वाले देशों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी
मेडिकल रोबोटिक्स के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम

ह्यूमनॉयड रोबोट ‘सर्जी’ की सफल सर्जरी को चिकित्सा तकनीक के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह प्रयोग दिखाता है कि आने वाले समय में AI और रोबोटिक्स स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह बदल सकते हैं।

हालांकि मानव डॉक्टरों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रहेगी, लेकिन ऐसी तकनीकें उन्हें अधिक सक्षम बनाने और दुनिया के हर कोने तक बेहतर इलाज पहुंचाने में मदद कर सकती हैं।

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Sat, 18 Jul 2026 13:17:42 +0530 news desk MPcg
आगर मालवा में बुजुर्ग मां को कमरे में बंद रखने का आरोप, पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस ने छुड़ाया; तीसरे बेटे के साथ भेजा गया https://citytoday.co.in/7325 https://citytoday.co.in/7325  जिले के सुसनेर नगर में एक बुजुर्ग महिला को कथित तौर पर करीब दो महीने तक कमरे में बंद रखने का मामला सामने आया है। घटना वार्ड क्रमांक-5 के कल्याण जीन क्षेत्र की बताई जा रही है। पड़ोसियों की सूचना के बाद नगर परिषद के जनप्रतिनिधि और पुलिस मौके पर पहुंचे, जिसके बाद बुजुर्ग महिला को कमरे से बाहर निकाला गया।

पुलिस की मौजूदगी में महिला को थाने लाया गया, जहां परिवार के सदस्यों से बातचीत के बाद उसे उसके तीसरे बेटे के साथ भेज दिया गया। फिलहाल पुलिस ने मामले में दोनों पक्षों की बात सुनी है और आगे की कार्रवाई को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है।

पड़ोसियों ने दी मामले की जानकारी

जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों को पिछले कुछ समय से बुजुर्ग महिला कौशल्या बाई के कमरे में रहने को लेकर संदेह था। शुक्रवार सुबह पड़ोसियों ने इस मामले की जानकारी नगर परिषद अध्यक्ष प्रदीप सोनी और पार्षद प्रतिनिधि पवन शर्मा को दी।

सूचना मिलने के बाद दोनों जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और परिवार के सदस्यों से कमरे की चाबी मांगी। आरोप है कि परिजनों ने शुरुआत में चाबी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस ने खुलवाया कमरे का ताला

मामले की सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने परिजनों से बातचीत के बाद कमरे की चाबी ली और ताला खुलवाया। कमरे के अंदर मौजूद बुजुर्ग महिला कौशल्या बाई को बाहर निकाला गया।

इसके बाद पुलिस महिला को थाने लेकर गई, जहां परिवार के अन्य सदस्यों को भी बुलाया गया। थाने में दोनों पक्षों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली गई।

बुजुर्ग महिला की मानसिक स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे

मामले में परिवार के सदस्यों और जनप्रतिनिधियों के दावों में अंतर सामने आया है। परिजनों का कहना है कि बुजुर्ग महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह कई बार बिना बताए घर से बाहर चली जाती थीं। इसी वजह से उन्हें कमरे में रखा गया था।

वहीं, पार्षद प्रतिनिधि पवन शर्मा ने दावा किया कि महिला मानसिक रूप से ठीक थीं। उन्होंने बताया कि बुजुर्ग महिला अपना नाम और परिवार के सदस्यों की पहचान भी बता रही थीं।

दो महीने से कमरे में रहने की बात

नगर परिषद अध्यक्ष प्रदीप सोनी के मुताबिक, पड़ोसियों ने बताया कि बुजुर्ग महिला करीब दो महीने से उसी कमरे में रह रही थीं। हालांकि, परिवार की ओर से उनके खाने-पीने की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें इस स्थिति की जानकारी मिल रही थी, जिसके बाद उन्होंने जनप्रतिनिधियों को मामले से अवगत कराया।

तीसरे बेटे के साथ भेजा गया

थाने में हुई बातचीत के बाद दोनों पक्षों की सहमति से बुजुर्ग महिला कौशल्या बाई को उनके तीसरे बेटे गणेश के साथ भेज दिया गया। पुलिस ने फिलहाल मामले को पारिवारिक विवाद के रूप में देखते हुए दोनों पक्षों की बात दर्ज की है।

अधिकारियों के अनुसार, आगे की कार्रवाई तथ्यों और जांच के आधार पर की जाएगी। घटना सामने आने के बाद इलाके में बुजुर्गों की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

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Fri, 17 Jul 2026 16:16:01 +0530 news desk MPcg
उज्जैन में ₹2.5 लाख की पोशाक पहनकर निकले भगवान जगन्नाथ, जापानी धागों और मोतियों से बंगाल के कारीगरों ने तैयार किया दिव्य श्रृंगार https://citytoday.co.in/7305 https://citytoday.co.in/7305 मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा आस्था, भक्ति और उत्साह के साथ निकाली गई। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और जय जगन्नाथ के जयघोष के बीच महाप्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकले। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के रथ की रस्सी खींचकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

इस वर्ष उज्जैन की रथ यात्रा में सबसे खास आकर्षण भगवान जगन्नाथ की विशेष पोशाक रही, जिसे बंगाल के कुशल कारीगरों ने तैयार किया है। इस दिव्य पोशाक की कीमत करीब 2.5 लाख रुपए बताई जा रही है। इसे तैयार करने में जापान से मंगाए गए विशेष धागों और मोतियों का इस्तेमाल किया गया है।

15 दिन के एकांतवास के बाद भक्तों को दर्शन देने निकले महाप्रभु

जगन्नाथ परंपरा के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा 15 दिनों के एकांतवास में रहते हैं। इस दौरान भक्तों को उनके दर्शन नहीं होते हैं।

एकांतवास की परंपरा पूरी होने के बाद भगवान पुनः भक्तों के बीच आते हैं और रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के तहत उज्जैन में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली गई।

श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि, अच्छी बारिश और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

पहली बार तीन अलग-अलग रथों पर विराजे भगवान

उज्जैन के इस्कॉन मंदिर की रथ यात्रा इस बार विशेष रही। पहली बार भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए अलग-अलग पारंपरिक रथ तैयार किए गए।

भगवान बलभद्र — तालध्वज रथ पर विराजमान हुए
देवी सुभद्रा — दर्पदलन रथ पर विराजमान हुईं
भगवान जगन्नाथ — सबसे बड़े नंदीघोष रथ पर सवार हुए

भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ करीब 35 फीट ऊंचा है, जो यात्रा का मुख्य आकर्षण रहा।

भक्तों ने रस्सियों से रथ खींचकर भगवान को नगर भ्रमण कराया। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और आरती कर भगवान का स्वागत किया।

बंगाल के कारीगरों ने तैयार की खास पोशाक

भगवान जगन्नाथ की विशेष पोशाक को तैयार करने के लिए बंगाल के कारीगरों की मदद ली गई। पोशाक में आकर्षक डिजाइन के साथ जापान से मंगाए गए विशेष धागों और मोतियों का इस्तेमाल किया गया है।

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, पोशाक की सुंदरता और भव्यता को ध्यान में रखते हुए इसे विशेष रूप से तैयार कराया गया है। भगवान के श्रृंगार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और डिजाइन को धार्मिक परंपराओं के अनुरूप रखा गया है।

100 साल पुराने लकड़ी के रथ से निकली दूसरी यात्रा

उज्जैन में केवल इस्कॉन मंदिर ही नहीं, बल्कि अन्य मंदिरों से भी भगवान जगन्नाथ की यात्राएं निकाली गईं।

कार्तिक चौक स्थित जगदीश मंदिर से खाती समाज द्वारा निकाली गई रथ यात्रा भी आकर्षण का केंद्र रही। इस यात्रा में करीब 100 साल पुराने लकड़ी के पारंपरिक रथ का उपयोग किया गया।

इस रथ को हजारों श्रद्धालुओं ने मिलकर खींचा। यात्रा में करीब 1200 गांवों से जुड़े श्रद्धालुओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई।

मध्य प्रदेश के कई शहरों में दिखा जगन्नाथ भक्ति का उत्साह

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल उज्जैन तक सीमित नहीं रही। मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी भव्य आयोजन किए गए।

महेश्वर में 11वीं बार निकली यात्रा

खरगोन जिले के महेश्वर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 11वें वर्ष आयोजित की गई। 15 दिन के एकांतवास के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर सवार होकर भक्तों के बीच पहुंचे।

बैंड-बाजों और जयकारों के बीच निकली यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया।

हरदा में 51 किलो फूलों से सजा रथ

हरदा के प्राचीन जगदीश मंदिर से निकली रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ का रथ विशेष रूप से सजाया गया था। रथ को करीब 51 किलो फूलों से सजाया गया।

भक्तों ने पुष्पवर्षा और आरती के साथ भगवान का स्वागत किया।

बेगमगंज में दिखा राजनीतिक सौहार्द

रायसेन जिले के बेगमगंज में भगवान जगन्नाथ यात्रा से पहले अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता एक साथ पूजा करते नजर आए।

सिलवानी से कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल और भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री ठाकुर रामपाल सिंह राजपूत ने एक साथ भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना की।

इसके बाद जयकारों और भजन-कीर्तन के साथ यात्रा शुरू हुई।

सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रशासन अलर्ट

रथ यात्रा को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए। प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात रहा।

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए गए। मंदिर समितियों और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से शांतिपूर्ण तरीके से यात्रा में शामिल होने की अपील की।

जगन्नाथ रथ यात्रा का धार्मिक महत्व

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।

ओडिशा के पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा की तरह देशभर के कई शहरों में यह परंपरा श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है।

उज्जैन में निकली इस वर्ष की रथ यात्रा में भक्ति, परंपरा और आधुनिक कला का अनोखा संगम देखने को मिला, जहां करोड़ों की आस्था के बीच भगवान जगन्नाथ विशेष पोशाक और भव्य रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने पहुंचे।

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Thu, 16 Jul 2026 14:54:37 +0530 news desk MPcg
झाबुआ में खौफ के साए में 116 आदिवासियों की जिंदगी: 7 साल पुराने खूनी विवाद के बाद टूटा घर, छूटी पढ़ाई; पुलिस पहरे में भी डर नहीं हुआ खत्म https://citytoday.co.in/7299 https://citytoday.co.in/7299 मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जहां एक पूरा कुनबा आज भी सात साल पुराने विवाद की छाया में जीने को मजबूर है। दोतड़ गांव के सालेड़ा फलिया में रहने वाले 116 सदस्यीय आदिवासी परिवार के लिए घर लौटना आसान नहीं रहा। प्रशासन की मदद से वापसी तो हुई, लेकिन डर, तनाव और असुरक्षा अब भी उनके जीवन का हिस्सा बने हुए हैं।

परिवार के बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है। महिलाएं टूटी झोपड़ियों और अस्थायी ठिकानों में रह रही हैं। पुरुष सदस्य सुरक्षा कारणों से गांव से बाहर रहने को मजबूर हैं। परिवार का कहना है कि वे अपनी जमीन और घर वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी खतरा महसूस होता है।

गांव में पुलिस की तैनाती है, लेकिन परिवार का कहना है कि उन्हें पूरी सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल पा रहा है।

"पहले जान बचानी है, फिर पढ़ाई करेंगे" — बच्चों की दर्दभरी कहानी

इस परिवार की 16 वर्षीय रीना की कहानी इस पूरे मामले की सबसे बड़ी तस्वीर दिखाती है।

रीना बताती है कि डर की वजह से उसकी पढ़ाई छूट गई है। वह कहती है कि अब उसे यह तक याद नहीं कि वह किस कक्षा में पढ़ती थी।

उसके शब्दों में डर साफ दिखाई देता है। रीना का कहना है कि स्कूल जाने से पहले उसे अपनी सुरक्षा की चिंता सताती है।

रीना अकेली नहीं है। परिवार के करीब 20 अन्य बच्चों ने भी स्कूल जाना बंद कर दिया है। इन बच्चों का बचपन गांव की गलियों और स्कूल के मैदान में बीतने के बजाय डर और तनाव के बीच गुजर रहा है।

शादी समारोह से शुरू हुआ विवाद, बदल गई पूरी जिंदगी

इस पूरे मामले की जड़ 17 मई 2019 की एक घटना है।

गांव में एक शादी समारोह आयोजित किया गया था। आरोप है कि इसी दौरान डीजे बजाने को लेकर दो पक्षों में विवाद शुरू हुआ। शुरुआत में कहासुनी हुई, लेकिन देखते ही देखते विवाद हिंसक संघर्ष में बदल गया।

इस संघर्ष में वक्का भूरिया नामक व्यक्ति की मौत हो गई।

हत्या के मामले में दूसरे पक्ष के नौ लोगों को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामला अदालत तक पहुंचा और न्यायालय ने आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

समय बीतने के साथ आठ आरोपी जमानत पर बाहर आ गए, जबकि एक आरोपी की जेल में मौत हो गई।

लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी गांव का तनाव खत्म नहीं हुआ।

20 घर उजड़े, जमीन पर कब्जे का आरोप

परिवार का आरोप है कि हत्या की घटना के बाद बदले की कार्रवाई के तौर पर उनके घरों को निशाना बनाया गया।

उनका कहना है कि करीब 20 मकान तोड़ दिए गए। घरों में रखा अनाज, घरेलू सामान और पशु भी ले जाए गए।

परिवार का सबसे बड़ा आरोप करीब 150 बीघा जमीन पर कब्जे का है।

उनका कहना है कि जिस जमीन पर उनके परिवार पीढ़ियों से खेती करता आया था, वहां अब वे आसानी से नहीं जा पा रहे हैं।

उस समय परिवार के पुरुष सदस्य जेल में थे। महिलाएं और बच्चे डर के कारण गांव छोड़कर गुजरात चले गए। एक पूरा परिवार अचानक अपने घर, खेत और रोजमर्रा की जिंदगी से दूर हो गया।

गुजरात में गुजारे दिन, गांव वापसी बनी चुनौती

कई वर्षों तक यह परिवार गांव से दूर रहा।

जब अदालत से आरोपियों को जमानत मिलनी शुरू हुई तो परिवार ने दोबारा अपने गांव लौटने की कोशिश शुरू की।

लेकिन वापसी का रास्ता आसान नहीं था।

परिवार का दावा है कि सामाजिक स्तर पर कई बार पंचायतें हुईं, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में दोबारा बसने के लिए उनसे बड़ी रकम की मांग की गई।

परिवार का कहना है कि उन्होंने समझौते के लिए 8 से 10 लाख रुपए तक देने की बात कही, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी।

एसपी कार्यालय पहुंचे परिवार, फिर मिली वापसी की अनुमति

लंबे संघर्ष के बाद परिवार ने प्रशासन से मदद मांगी।

उन्होंने झाबुआ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर सुरक्षा और पुनर्वास की मांग की।

इसके बाद प्रशासन ने 19 जून को पुलिस सुरक्षा के बीच परिवार को वापस गांव पहुंचाया।

जब परिवार गांव लौटा तो उनके सामने पुराने घरों का मलबा था। जहां कभी पक्के मकान थे, वहां अब टूटी दीवारें और खाली जमीन दिखाई देती है।

सुरक्षा के लिए पुलिस कैंप, फिर भी परिवार डरा हुआ

परिवार की वापसी के समय भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

शुरुआत में 25 से अधिक पुलिस जवानों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों को भी मौके पर लगाया गया।

समय के साथ सुरक्षा बल कम कर दिया गया।

अब गांव में करीब 5 से 6 पुलिस जवान लगातार तैनात रहते हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद रहती हैं।

हालांकि परिवार का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उन्हें पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं होता।

"हमारी क्या गलती है?" महिलाओं ने पूछे सवाल

परिवार की महिलाओं का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति ने अपराध किया था तो उसे कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए थी, लेकिन पूरे परिवार को उसकी कीमत क्यों चुकानी पड़ रही है।

परिवार के बुजुर्ग राजू भूरिया ने आरोप लगाया कि उनके घर तोड़े गए, सामान ले जाया गया और अब दोबारा घर बनाने में भी परेशानी आ रही है।

उनका कहना है कि वे शांति से अपना जीवन जीना चाहते हैं और अपनी जमीन पर खेती करना चाहते हैं।

बिजली कटी, पानी के लिए टैंकर पर निर्भर परिवार

गांव लौटने के बाद परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतों की बड़ी चुनौती है।

महिलाओं का आरोप है कि उनकी बिजली व्यवस्था बाधित है। कई दिनों तक उन्हें अंधेरे में रहना पड़ा।

पानी की समस्या भी गंभीर है।

परिवार का कहना है कि पास में हैंडपंप होने के बावजूद उन्हें वहां से पानी लेने में परेशानी होती है। मजबूरी में उन्हें निजी टैंकर मंगवाना पड़ता है, जिसके लिए करीब 1200 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं।

खुले आसमान के नीचे गुजर रही रातें

परिवार के कई सदस्य अभी भी स्थायी घर के इंतजार में हैं।

कई महिलाएं और बच्चे अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे हैं।

रात के समय बच्चों को सांप और जहरीले जीवों से बचाने के लिए विशेष सावधानी रखनी पड़ती है।

परिवार का कहना है कि सात साल बाद भी वे सामान्य जिंदगी शुरू नहीं कर पाए हैं।

पुरुष गांव छोड़कर रहने को मजबूर

परिवार के पुरुष सदस्यों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से वे गांव में नहीं रुक रहे।

उनका आरोप है कि गांव में तनाव अभी भी बना हुआ है।

एक सदस्य ने बताया कि परिवार तक राशन पहुंचाने और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए भी कई बार पुलिस की मदद लेनी पड़ती है।

उनका कहना है कि वे अपने ही गांव में सामान्य नागरिक की तरह जीवन जीना चाहते हैं।

पुलिस और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

इस पूरे मामले में प्रशासन के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं।

पहली चुनौती है परिवार को सुरक्षित माहौल देना और बच्चों की शिक्षा दोबारा शुरू कराना।

दूसरी चुनौती है दोनों पक्षों के बीच वर्षों से चले आ रहे विवाद को स्थायी रूप से खत्म करना।

झाबुआ पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार ने कहा कि पुलिस मामले को गंभीरता से देख रही है।

उनके मुताबिक, दोनों पक्ष एक ही परिवार के रिश्तेदार हैं और प्रशासन बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है।

क्या खत्म होगा सात साल पुराना विवाद?

सालेड़ा फलिया का यह मामला सिर्फ एक गांव का विवाद नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि हिंसा के बाद पीड़ित परिवारों का पुनर्वास कितना प्रभावी हो पाता है।

116 लोगों का यह परिवार आज भी अपने पुराने घर, जमीन और सामान्य जीवन की तलाश में है।

बच्चों की छूटी पढ़ाई, महिलाओं की असुरक्षा और पुरुषों का गांव से दूर रहना बताता है कि सात साल पुरानी घटना के घाव अभी भी भरे नहीं हैं।

अब नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है कि क्या यह परिवार वास्तव में भयमुक्त होकर अपने गांव में दोबारा बस पाएगा या फिर संघर्ष का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

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Thu, 16 Jul 2026 13:07:03 +0530 news desk MPcg
इंदौर में गैस सिलेंडर से निकला पानी, शिकायत लेकर कलेक्टर जनसुनवाई पहुंचा उपभोक्ता; एक महीने से नहीं हुई सुनवाई https://citytoday.co.in/7284 https://citytoday.co.in/7284 शिव छाया गैस एजेंसी से मिले सिलेंडर में गैस की जगह पानी निकलने का आरोप, कलेक्टर ने जांच के दिए निर्देश

इंदौर में मंगलवार को आयोजित कलेक्टर जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने घरेलू गैस सिलेंडर की गुणवत्ता और उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे पर सवाल खड़े कर दिए। एक उपभोक्ता गैस सिलेंडर में गैस की जगह पानी निकलने की शिकायत लेकर सिलेंडर सहित कलेक्टर कार्यालय पहुंच गया।

हालांकि सुरक्षा कारणों के चलते कलेक्टर कार्यालय के सुरक्षाकर्मियों ने उपभोक्ता को सिलेंडर के साथ परिसर के अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद उपभोक्ता ने अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर मामले में कार्रवाई की मांग की।

कलेक्टर शिवम वर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, इंदौर निवासी राजेंद्र सिंह करोले ने जनसुनवाई में पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें घरेलू उपयोग के लिए मिला गैस सिलेंडर सही नहीं था।

राजेंद्र सिंह के मुताबिक, उन्हें 2 जून को शिव छाया गैस एजेंसी से घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी मिली थी।

जब उन्होंने घर पर सिलेंडर का इस्तेमाल शुरू किया तो उन्हें संदेह हुआ कि सिलेंडर में सामान्य तरीके से गैस नहीं आ रही है। जांच करने पर कथित तौर पर उसमें से गैस की जगह पानी निकलने लगा।

इसके बाद उन्होंने तुरंत गैस एजेंसी से संपर्क कर शिकायत की, लेकिन उनका कहना है कि काफी समय बीतने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया।

एक महीने से लगा रहे थे गैस एजेंसी के चक्कर

राजेंद्र सिंह का आरोप है कि शिकायत करने के बाद गैस एजेंसी की ओर से उन्हें केवल आश्वासन दिए जाते रहे।

उन्होंने बताया कि—

सिलेंडर को बदला नहीं गया।
समस्या की सही जांच नहीं की गई।
कोई संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया गया।

लगातार कार्रवाई नहीं होने से परेशान होकर वह अपनी शिकायत सीधे जिला प्रशासन तक पहुंचाने के लिए कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे।

सिलेंडर लेकर पहुंचे तो सुरक्षा कारणों से रोका गया

राजेंद्र सिंह अपनी शिकायत को साबित करने के लिए गैस सिलेंडर भी साथ लेकर पहुंचे थे।

लेकिन कलेक्टर कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें सिलेंडर के साथ अंदर जाने से रोक दिया गया।

इसके बाद उन्होंने कार्यालय के बाहर अधिकारियों को बताया कि सिलेंडर से किस तरह पानी निकल रहा है और फिर लिखित शिकायत सौंपकर जांच की मांग की।

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

मामले को गंभीर मानते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को जांच करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने कहा कि उपभोक्ताओं से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि—

पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।
शिकायत में सच्चाई सामने लाई जाए।
दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाए।
यदि अन्य गैस एजेंसियों से भी ऐसी शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी भी जांच की जाए।
गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली की होगी समीक्षा

प्रशासन अब गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली और उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया की समीक्षा करेगा।

अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को सही गुणवत्ता वाला सिलेंडर मिले और शिकायतों का समय पर समाधान हो।

घरेलू गैस सिलेंडर आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर मानी जाती है।

जनसुनवाई में सामने आए अन्य संवेदनशील मामले

कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान केवल गैस सिलेंडर की शिकायत ही नहीं, बल्कि कई अन्य मानवीय मामले भी सामने आए।

प्रशासन ने इन मामलों में भी तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

अनाथ बच्चियों की फीस माफ कराने के निर्देश

जनसुनवाई में एक बुजुर्ग महिला अपनी तीन नातिनों के साथ पहुंची।

महिला ने बताया कि बच्चियों के माता-पिता का निधन हो चुका है और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह उनकी स्कूल फीस जमा नहीं कर पा रही हैं।

मामले को संवेदनशील मानते हुए कलेक्टर ने बच्चियों की फीस माफ कराने और उन्हें आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

दिव्यांग बच्चे को मिलेगी 18 हजार रुपये की सहायता

एक अन्य मामले में एक दिव्यांग बच्चे के पिता ने आर्थिक परेशानी बताते हुए सहायता की मांग की।

उन्होंने बताया कि बच्चा सुनने में असमर्थ है और उसके श्रवण यंत्र की बैटरी बदलवाने के लिए आर्थिक समस्या आ रही है।

कलेक्टर ने तत्काल 18 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि बच्चे को जरूरी सुविधा मिल सके।

वात्सल्य योजना की राशि नहीं मिलने की शिकायत पर राहत

जनसुनवाई में एक महिला ने शिकायत की कि पिछले एक साल से उसके बच्चों के खाते में वात्सल्य योजना की राशि जमा नहीं हो रही है।

महिला ने बताया कि उसके परिवार में एक बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित है, जिसके कारण परिवार को अतिरिक्त आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला को 24 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

जनसुनवाई का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का समाधान

कलेक्टर जनसुनवाई का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं को सीधे प्रशासन तक पहुंचाना और उनका समाधान करना है।

इंदौर प्रशासन का कहना है कि जनता से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जा रहा है और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित मामलों का जल्द निराकरण किया जाए।

गैस सिलेंडर मामले में अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि सिलेंडर में पानी आने की वास्तविक वजह क्या थी और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

मुख्य बिंदु
स्थान: इंदौर, मध्य प्रदेश
शिकायतकर्ता: राजेंद्र सिंह करोले
गैस एजेंसी: शिव छाया गैस एजेंसी
डिलीवरी तारीख: 2 जून
आरोप: गैस सिलेंडर से गैस की जगह पानी निकलना
कार्रवाई: कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए
अन्य सहायता: अनाथ बच्चियों की फीस, दिव्यांग बच्चे और वात्सल्य योजना मामले में राहत

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Wed, 15 Jul 2026 16:06:17 +0530 news desk MPcg
इंदौर में हॉर्न बजाने पर बवाल: कार पर चढ़कर युवक ने तोड़े शीशे, दंपती ने बनाया वीडियो; पुलिस ने शुरू की कार्रवाई https://citytoday.co.in/7261 https://citytoday.co.in/7261 मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। रावजी बाजार थाना क्षेत्र में सड़क से हटने के लिए हॉर्न बजाना एक दंपती को भारी पड़ गया। गुस्साए युवक ने बीच सड़क पर जमकर हंगामा किया और कार पर चढ़कर तोड़फोड़ कर दी।

पूरी घटना कार में मौजूद दंपती ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर ली, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

बीच सड़क पर खड़े युवक को हटाने के लिए बजाया था हॉर्न

जानकारी के अनुसार, घटना रविवार रात की बताई जा रही है। मामला इंदौर के रावजी बाजार थाना क्षेत्र का है।

बताया गया कि सिंधी कॉलोनी निवासी बाबू पंजवानी अपनी पत्नी के साथ कार से जा रहे थे। जब उनकी कार पलासिया चौराहे के पास शराब दुकान के सामने पहुंची, तो एक युवक सड़क के बीच में खड़ा हुआ था।

रास्ता साफ कराने के लिए दंपती ने युवक को हटने के लिए हॉर्न बजाया। इसी बात से युवक नाराज हो गया और उसने कार चालक से विवाद शुरू कर दिया।

गुस्से में कार के बोनट पर चढ़ा युवक

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक ने पहले कार के बोनट पर हाथ मारे। इसके बाद वह अचानक कार के ऊपर चढ़ गया और जमकर तोड़फोड़ करने लगा।

आरोपी ने—

कार के आगे के शीशे तोड़े
अन्य कांच को नुकसान पहुंचाया
बोनट पर चढ़कर हंगामा किया

घटना के समय दंपती कार के अंदर मौजूद थे। उन्होंने किसी तरह पूरी घटना का वीडियो बना लिया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। वीडियो में एक युवक कार के ऊपर चढ़कर तोड़फोड़ करता दिखाई दे रहा है।

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की।

पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लिया

पुलिस के अनुसार, मामले में कार्रवाई करते हुए दो युवकों को हिरासत में लिया गया है।

हिरासत में लिए गए युवकों की पहचान—

बाबू पिता मुकेश (19 वर्ष), निवासी पंचमुखी हनुमान मंदिर और सुलभ कॉम्प्लेक्स के सामने भोरासला, इंदौर
अंकित पिता दिलीप केलवा (23 वर्ष), निवासी शिव मंदिर के पास गोविंदनगर

के रूप में हुई है।

पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है। जानकारी के अनुसार बाबू नल फिटिंग का काम करता है, जबकि अंकित सलून संचालित करता है।

पुलिस कर रही मामले की जांच

रावजी बाजार थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

पुलिस का कहना है कि घटना में शामिल आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

शहर में बढ़ती सड़क विवाद की घटनाओं पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर मामूली बातों को लेकर होने वाले विवादों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर हॉर्न बजाने, रास्ता देने या वाहन हटाने जैसी छोटी बातों पर विवाद हिंसा तक पहुंच जाते हैं।

पुलिस लोगों से अपील करती है कि सड़क पर किसी भी विवाद की स्थिति में संयम रखें और कानून हाथ में लेने से बचें। किसी भी परेशानी की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना दें।

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Tue, 14 Jul 2026 12:54:24 +0530 news desk MPcg
आगरा में फ्रिज की बर्फ से बनी शिवलिंग जैसी आकृति वायरल: लोग मान रहे चमत्कार, कर रहे पूजा; वैज्ञानिक पुष्टि नहीं https://citytoday.co.in/7260 https://citytoday.co.in/7260 उत्तर प्रदेश के आगरा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। खेरिया मोड़ स्थित नगला भुजा क्षेत्र का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक घर के फ्रिज के अंदर जमी बर्फ की आकृति शिवलिंग जैसी दिखाई दे रही है।

वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं। कुछ लोग इसे भगवान शिव का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं, जलाभिषेक कर रहे हैं और चढ़ावा भी चढ़ा रहे हैं। हालांकि, इस आकृति को लेकर किसी भी प्रकार की आधिकारिक या वैज्ञानिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

फ्रिज के अंदर बनी आकृति बनी चर्चा का विषय

जानकारी के अनुसार, आगरा के नगला भुजा इलाके में एक घर के फ्रिज में अचानक बर्फ की एक विशेष आकृति दिखाई दी। घर के लोगों ने जब इसे देखा तो यह आकार उन्हें शिवलिंग जैसा नजर आया।

इसके बाद इसकी जानकारी आसपास के लोगों तक पहुंची और देखते ही देखते यह बात पूरे इलाके में फैल गई। लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया, जिसके बाद वीडियो तेजी से वायरल होने लगा।

लोगों ने शुरू कर दी पूजा-अर्चना

वायरल वीडियो में कई लोग इस बर्फ की आकृति के सामने पूजा करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

कुछ लोगों ने—

जलाभिषेक किया
फूल चढ़ाए
पैसे चढ़ाए
भगवान शिव के नाम का जाप किया

लोग इसे "बाबा बर्फानी" से जोड़कर देख रहे हैं।

वीडियो में कुछ लोग दावा करते हुए सुनाई दे रहे हैं कि अमरनाथ में बाबा बर्फानी की बर्फ पिघल चुकी है, लेकिन यहां भगवान शिव की आकृति प्रकट हुई है।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ वीडियो

वीडियो वायरल होने के बाद आसपास के इलाकों के लोग इस आकृति को देखने पहुंचने लगे। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इसे आस्था से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया बता रहे हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि फ्रिज के अंदर तापमान, पानी के जमाव और बर्फ बनने की प्रक्रिया के कारण कई बार अलग-अलग आकार की आकृतियां बन सकती हैं।

वैज्ञानिक पुष्टि नहीं, जांच जरूरी

फिलहाल इस घटना को लेकर कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि फ्रिज में बनी यह आकृति किसी चमत्कार का परिणाम है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बर्फ जमने के दौरान तापमान, पानी की मात्रा और फ्रिज की स्थिति के आधार पर अलग-अलग आकार बन सकते हैं। कई बार ये आकृतियां किसी परिचित वस्तु या प्रतीक जैसी दिखाई देने लगती हैं।

इसलिए सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को बिना प्रमाण के सच नहीं माना जा सकता।

प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं

इस मामले में अभी तक स्थानीय प्रशासन या किसी सरकारी एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है।

वहीं, वायरल वीडियो के कारण लोगों की भीड़ जुटने की बात कही जा रही है। ऐसे मामलों में प्रशासन आमतौर पर लोगों से अफवाहों से बचने और तथ्यों की पुष्टि करने की अपील करता है।

आस्था और विज्ञान के बीच चर्चा

भारत में धार्मिक आस्था से जुड़े ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं, जहां प्राकृतिक घटनाओं को लोग धार्मिक दृष्टि से देखते हैं। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ऐसी घटनाओं को प्राकृतिक प्रक्रियाओं से जोड़कर देखा जाता है।

आगरा के इस मामले में भी लोग अपनी-अपनी मान्यताओं के अनुसार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। फिलहाल यह वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों की आस्था तक सीमित है, जबकि इसकी वास्तविक वजह का पता वैज्ञानिक जांच या विशेषज्ञों के विश्लेषण के बाद ही चल सकेगा।

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Tue, 14 Jul 2026 12:37:25 +0530 news desk MPcg
चलती ट्रेन में पूजा का वीडियो वायरल: रेलवे ने दी सफाई, बताया& ₹3 लाख से ज्यादा देकर बुक कराया गया था प्राइवेट सैलून कोच https://citytoday.co.in/7243 https://citytoday.co.in/7243 सोशल मीडिया पर भारतीय रेलवे से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें चलती ट्रेन के अंदर पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान होते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाए कि क्या ट्रेन के सामान्य कोच में इस तरह के धार्मिक आयोजन की अनुमति है। मामले पर अब रेलवे ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है।

रेलवे के मुताबिक, वायरल वीडियो किसी सामान्य यात्री कोच का नहीं, बल्कि एक प्राइवेट तरीके से बुक किए गए सैलून कोच का है। इस कोच को भारतीय रेलवे की व्यावसायिक बुकिंग व्यवस्था के तहत IRCTC के माध्यम से आरक्षित कराया गया था।

वायरल वीडियो में क्या दिखा?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर वायरल हुए वीडियो में एक पुजारी ट्रेन के अंदर फर्श पर बैठकर पूजा की रस्में करते नजर आ रहे हैं। उनके आसपास कई श्रद्धालु मौजूद हैं, जिनमें से अधिकतर सफेद कपड़े पहने हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में ट्रेन चलती हुई नजर आ रही है और कोच के अंदर धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने रेलवे से सवाल किया कि क्या चलती ट्रेन में इस तरह का आयोजन नियमों के तहत किया जा सकता है।

Northern Railway ने दी सफाई

वीडियो को लेकर सवाल उठने के बाद नॉर्दर्न रेलवे ने सोशल मीडिया के जरिए स्थिति स्पष्ट की। रेलवे ने बताया कि यह आयोजन किसी सामान्य यात्री कोच में नहीं हुआ था, बल्कि एक विशेष सैलून कार (Saloon Car) में किया गया था।

रेलवे के अनुसार, इस सैलून कोच की बुकिंग 8 जुलाई 2026 को IRCTC के जरिए की गई थी। इसके लिए संबंधित पार्टी ने ₹3,08,580 रुपये की एडवांस राशि जमा कराई थी।

यह सैलून कार ट्रेन नंबर 12926 पश्चिम एक्सप्रेस (Paschim Express) के साथ जोड़ी गई थी, जो नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से मुंबई बांद्रा टर्मिनस (BDTS) तक की एकतरफा यात्रा के लिए निर्धारित थी।

क्या होता है रेलवे सैलून कोच?

रेलवे का सैलून कोच सामान्य यात्री डिब्बों से अलग होता है। इसे विशेष बुकिंग के तहत निजी यात्रा के लिए उपलब्ध कराया जाता है।

इसमें आमतौर पर—

एयर कंडीशन कमरे
बेडरूम की सुविधा
बैठक और भोजन कक्ष
रसोईघर (किचन)
अटैच बाथरूम

जैसी सुविधाएं होती हैं।

ऐसे कोच पहले रेलवे अधिकारियों और वीआईपी यात्राओं के लिए इस्तेमाल किए जाते थे, लेकिन अब इन्हें नियमों के तहत निजी और व्यावसायिक उपयोग के लिए भी बुक किया जा सकता है।

रेलवे ने सुरक्षा को लेकर भी दी जानकारी

नॉर्दर्न रेलवे ने कहा कि रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और ट्रेन संचालन को सुचारु बनाए रखना है। रेलवे ने स्पष्ट किया कि इस घटना के दौरान किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई और ट्रेन संचालन या सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई।

रेलवे ने यह भी बताया कि वीडियो में दिखाई दे रहे पुजारी उसी निजी समारोह का हिस्सा थे, जो बुक किए गए सैलून कोच के अंदर आयोजित किया गया था।

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने धार्मिक आयोजन को लेकर सवाल उठाए, जबकि कई लोगों ने रेलवे की सफाई के बाद कहा कि अगर कोच निजी तौर पर नियमों के तहत बुक किया गया था तो आयोजन पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

रेलवे ने इस मामले में स्पष्ट कर दिया है कि यह घटना सामान्य ट्रेन कोच में नहीं हुई थी और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत की गई थी।

पहले भी वायरल हुआ था ट्रेन का वीडियो

गौरतलब है कि इससे पहले भी भारतीय रेलवे से जुड़े कुछ असामान्य वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। हाल ही में एक फर्स्ट एसी कोच को शादी जैसे सजाने का वीडियो चर्चा में आया था, जिसके बाद रेलवे की निजी कोच बुकिंग व्यवस्था को लेकर बहस शुरू हुई थी।

इस मामले में भी रेलवे ने नियमों और बुकिंग प्रक्रिया की जानकारी देकर स्थिति स्पष्ट की थी।

फिलहाल पूजा वाले वायरल वीडियो को लेकर रेलवे की सफाई के बाद यह साफ हो गया है कि आयोजन निजी रूप से बुक किए गए सैलून कोच में हुआ था, न कि सामान्य यात्री डिब्बे में।

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Mon, 13 Jul 2026 14:34:39 +0530 news desk MPcg
बिहार की बेटी पायल कुमारी ने जापान में बढ़ाया देश का मान, 'No Helmet, No Start Bike' प्रोजेक्ट के साथ Sakura Science Program में किया प्रतिनिधित्व https://citytoday.co.in/7171 https://citytoday.co.in/7171 बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के सिकटा की रहने वाली पायल कुमारी रौनियार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए जापान में आयोजित प्रतिष्ठित Sakura Science Program में बिहार का प्रतिनिधित्व किया। सड़क सुरक्षा पर आधारित अपने अभिनव 'No Helmet, No Start Bike' प्रोजेक्ट के साथ पायल ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया। जापान की शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक संस्थाओं के भ्रमण और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के साथ संवाद के बाद वह भारत लौट आई हैं।

पायल की इस उपलब्धि को बिहार के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में उनकी भागीदारी यह दर्शाती है कि छोटे शहरों और कस्बों के छात्र भी वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं।

भारत से चुने गए 51 छात्रों में शामिल थीं पायल

जानकारी के अनुसार, 27 जून को पायल भारत से जापान के लिए रवाना हुई थीं। Sakura Science Program के तहत भारत से कुल 51 छात्रों का चयन किया गया था, जिनमें 20 छात्राएं शामिल थीं। बिहार से इस कार्यक्रम में पायल कुमारी रौनियार अकेली प्रतिभागी थीं।

वर्तमान में पायल पटना के कंकड़बाग स्थित New Era Public School में कक्षा 11वीं की छात्रा हैं। उनका चयन सड़क सुरक्षा और तकनीकी नवाचार पर आधारित उनके प्रोजेक्ट 'No Helmet, No Start Bike' के आधार पर किया गया।

क्या है 'No Helmet, No Start Bike' प्रोजेक्ट?

पायल का प्रोजेक्ट सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने की सोच पर आधारित है। इस अवधारणा का उद्देश्य ऐसा तकनीकी समाधान विकसित करना है, जिसमें यदि चालक हेलमेट नहीं पहने, तो बाइक स्टार्ट ही न हो।

भारत में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान हेलमेट का उपयोग न करने के कारण जाती है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट तकनीक के माध्यम से सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विचार माना जा रहा है।

जापान साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी में मिला वैश्विक अनुभव

जापान पहुंचने के बाद पायल ने सबसे पहले Japan Science and Technology Agency (JST) में आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम में भाग लिया।

इस दौरान उन्हें जापान की वैज्ञानिक कार्यप्रणाली, अनुसंधान संस्कृति, समयपालन, अनुशासन और नवाचार आधारित शिक्षा प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि जापान किस प्रकार विज्ञान और तकनीक को सामाजिक विकास से जोड़कर आगे बढ़ा रहा है।

भारतीय दूतावास और जापानी संस्कृति से हुईं रूबरू

ओरिएंटेशन कार्यक्रम के बाद पायल ने टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास का दौरा किया। यहां भारतीय अधिकारियों से मुलाकात के दौरान उन्हें भारत-जापान संबंधों, शिक्षा सहयोग और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक आदान-प्रदान की जानकारी दी गई।

इसके बाद उन्होंने टोक्यो के प्रसिद्ध आसाकुसा सांस्कृतिक क्षेत्र का भ्रमण किया, जहां जापान की पारंपरिक संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर, स्वच्छता व्यवस्था और अनुशासित जीवनशैली को करीब से समझने का अवसर मिला।

JAXA स्पेस सेंटर में जाना अंतरिक्ष विज्ञान का अनुभव

30 जून को पायल ने जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA Tsukuba Space Center का दौरा किया। यहां उन्होंने उपग्रह तकनीक, रॉकेट लॉन्च सिस्टम, चंद्र मिशन, अंतरिक्ष अनुसंधान और आधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।

इस दौरान वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को अंतरिक्ष अनुसंधान में जापान की उपलब्धियों और भविष्य की परियोजनाओं के बारे में भी जानकारी दी।

टोक्यो विश्वविद्यालय में देखी आधुनिक शिक्षा प्रणाली

जापान यात्रा के दौरान पायल ने University of Tokyo के Kashiwa Campus का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, अनुसंधान सुविधाओं और आधुनिक शिक्षा प्रणाली का अवलोकन किया।

उन्होंने विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और छात्रों के साथ बातचीत कर वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास की प्रक्रियाओं को समझा।

अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच प्रस्तुत की भारत की सांस्कृतिक विरासत

1 जुलाई को पायल ने Meikei High School में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में भाग लिया।

इस कार्यक्रम में जापान, भारत, ताइवान और इंडोनेशिया के छात्रों ने विभिन्न विषयों पर विचार साझा किए। आर्किटेक्चर विषय पर आयोजित समूह चर्चा में पायल ने बिहार और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विरासत के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

विदेशी छात्रों ने भारतीय संस्कृति, ऐतिहासिक स्मारकों और पारंपरिक वास्तुकला को लेकर विशेष रुचि दिखाई तथा पायल की प्रस्तुति की सराहना की।

विज्ञान, रोबोटिक्स और नई तकनीकों को करीब से समझा

2 जुलाई को उन्होंने National Museum of Nature and Science तथा Dai Nippon Printing Company का भ्रमण किया।

यहां पायल ने रोबोटिक्स, डिजिटल प्रिंटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैज्ञानिक अनुसंधान और अत्याधुनिक औद्योगिक तकनीकों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। संग्रहालय में प्रदर्शित वैज्ञानिक मॉडलों और तकनीकी नवाचारों ने उन्हें काफी प्रभावित किया।

स्मार्ट नेविगेशन तकनीक पर मिला विशेष व्याख्यान

3 जुलाई को पायल ने Miraikan – The National Museum of Emerging Science and Innovation में प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. चीको असाकावा के व्याख्यान में भाग लिया।

इस व्याख्यान में दृष्टिबाधित लोगों के लिए विकसित स्मार्ट नेविगेशन तकनीक और सहायक तकनीकों की जानकारी दी गई। पायल ने बताया कि इस तरह की तकनीकें समाज के सभी वर्गों के लिए विज्ञान को उपयोगी बनाने का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

बिहार के युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा

पायल कुमारी रौनियार की उपलब्धि यह साबित करती है कि प्रतिभा अवसर मिलने पर वैश्विक मंच तक पहुंच सकती है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में बिहार का प्रतिनिधित्व कर यह संदेश दिया है कि मेहनत, नवाचार और वैज्ञानिक सोच के बल पर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम भारत और जापान के बीच वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ छात्रों को वैश्विक अनुसंधान, तकनीक और नवाचार से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। पायल की सफलता बिहार के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर तकनीकी समाधान विकसित करने की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है।

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Wed, 08 Jul 2026 17:15:02 +0530 news desk MPcg
समोसे खरीदने के लिए ट्रेन रोकने का दावा निकला भ्रामक, वायरल वीडियो पर रेलवे ने दी सफाई; कहा& मालगाड़ी पहले से सिग्नल पर खड़ी थी https://citytoday.co.in/7164 https://citytoday.co.in/7164 मध्य प्रदेश के इंदौर के पास एक लोको पायलट द्वारा समोसे खरीदने के लिए ट्रेन रोकने का दावा करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो के साथ यह दावा किया जा रहा था कि लोको पायलट ट्रेन को बीच रास्ते में रोककर समोसे खरीदने चला गया, जबकि यात्री काफी देर तक ट्रेन चलने का इंतजार करते रहे। मामला चर्चा में आने के बाद पश्चिम रेलवे ने पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए वायरल दावे को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यों से परे बताया है।

रेलवे का कहना है कि वीडियो को गलत संदर्भ के साथ साझा किया गया है, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संबंधित ट्रेन कोई यात्री ट्रेन नहीं, बल्कि एक मालगाड़ी थी, जो परिचालन कारणों से पहले से निर्धारित स्थान पर रुकी हुई थी।

क्या था वायरल वीडियो का दावा?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में रेलवे ट्रैक के किनारे स्थित एक दुकान से रेलवे कर्मचारी खाद्य सामग्री खरीदता दिखाई देता है। इसके साथ दावा किया गया कि लोको पायलट ने समोसे खरीदने के लिए ट्रेन को लगभग 10 मिनट तक रोक दिया। कई पोस्ट में इसे इंदौर की DEMU यात्री ट्रेन से जोड़ते हुए कहा गया कि यात्री बेवजह इंतजार करते रहे और रेलवे कर्मचारियों ने लापरवाही दिखाई।

वीडियो के वायरल होने के बाद इस पर हजारों लोगों ने प्रतिक्रिया दी और रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए। हालांकि, बाद में रेलवे ने पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर दी।

रेलवे ने क्या कहा?

पश्चिम रेलवे ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वायरल वीडियो में दिखाई गई ट्रेन DEMU यात्री ट्रेन नहीं बल्कि मालगाड़ी (Goods Train) थी। यह मालगाड़ी राऊ (Rau) होम सिग्नल पर पहले से निर्धारित इंजीनियरिंग कार्य के कारण अधिकृत रूप से रुकी हुई थी।

रेलवे के अनुसार, ट्रेन का ठहराव पूरी तरह परिचालन प्रक्रिया का हिस्सा था और इसे किसी भी प्रकार से भोजन या समोसे खरीदने के लिए नहीं रोका गया था।

सहायक लोको पायलट ने खरीदा था भोजन

रेलवे ने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति लोको पायलट नहीं बल्कि सहायक लोको पायलट (Assistant Loco Pilot) था। अधिकृत ठहराव के दौरान उसने व्यक्तिगत रूप से भोजन खरीदा था।

अधिकारियों ने कहा कि ट्रेन पहले से ही सिग्नल पर खड़ी थी और इस दौरान सहायक लोको पायलट द्वारा भोजन खरीदने की घटना को गलत तरीके से यह दिखाकर वायरल कर दिया गया कि ट्रेन को इसी उद्देश्य से रोका गया था।

यात्री ट्रेन से जोड़कर फैलाया गया भ्रम

रेलवे ने यह भी बताया कि वीडियो को जानबूझकर यात्री DEMU ट्रेन का बताकर सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग थी। रेलवे के अनुसार, वीडियो के साथ गलत जानकारी जोड़कर लोगों को भ्रमित किया गया और रेलवे संचालन को लेकर गलत संदेश फैलाया गया।

अधिकारियों का कहना है कि परिचालन संबंधी कारणों से मालगाड़ियों का विभिन्न सिग्नलों पर रुकना सामान्य प्रक्रिया है और इसका किसी कर्मचारी के व्यक्तिगत कार्य से कोई संबंध नहीं होता।

रेलवे संचालन में क्यों रुकती हैं ट्रेनें?

रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार, मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को कई बार सिग्नल, ट्रैक मेंटेनेंस, इंजीनियरिंग कार्य, क्रॉसिंग या ट्रैफिक प्रबंधन के कारण अधिकृत रूप से रोका जाता है। ऐसे ठहराव पूरी तरह रेलवे के ऑपरेशन कंट्रोल के निर्देशों के अनुसार होते हैं।

यदि ट्रेन निर्धारित समय तक रुकी रहती है तो चालक दल के सदस्य सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए सीमित गतिविधियां कर सकते हैं। इससे ट्रेन संचालन या सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

फर्जी दावों पर रेलवे की चेतावनी

पश्चिम रेलवे ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वायरल वीडियो, फोटो या पोस्ट पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता आधिकारिक स्रोतों से अवश्य जांच लें। रेलवे ने कहा कि अधूरी या गलत जानकारी साझा करने से अनावश्यक भ्रम फैलता है और सरकारी संस्थानों की छवि भी प्रभावित होती है।

रेलवे ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी दावे की पुष्टि किए बिना उसे आगे साझा करना उचित नहीं है। आधिकारिक सूचना मिलने के बाद स्पष्ट हो गया है कि समोसे खरीदने के लिए ट्रेन रोकने का दावा पूरी तरह निराधार और भ्रामक था।

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Wed, 08 Jul 2026 14:20:04 +0530 news desk MPcg
शाजापुर में दर्दनाक हादसा: आवारा कुत्ते से बचने के प्रयास में 13 हिरण गहरे कुएं में गिरे, सभी की मौत; वन विभाग ने शुरू की विस्तृत जांच https://citytoday.co.in/7161 https://citytoday.co.in/7161 मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले से वन्यजीव संरक्षण को झकझोर देने वाली एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। जिले की कालापीपल तहसील के खरदोंनकलां गांव में आवारा कुत्ते से अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे 13 हिरण एक गहरे खुले कुएं में गिर गए, जिससे सभी की मौत हो गई। हादसे में हिरणों का पीछा कर रहा कुत्ता भी कुएं में गिर गया और उसकी भी जान नहीं बच सकी। इस घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। वन विभाग और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को बाहर निकाल लिया है तथा पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा माना जा रहा है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।

खेत पर पहुंचे किसान ने देखा दर्दनाक मंजर

घटना का खुलासा तब हुआ जब खेत मालिक अपनी फसल पर कीटनाशक का छिड़काव करने के लिए खेत पहुंचे। काम के दौरान उन्हें कुएं की दिशा से तेज दुर्गंध महसूस हुई। संदेह होने पर जब उन्होंने कुएं के अंदर झांककर देखा तो पानी में कई हिरणों और एक कुत्ते के शव तैरते दिखाई दिए। यह भयावह दृश्य देखकर किसान के होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल गांव के सरपंच और वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तथा ग्रामीणों की सहायता से कई घंटे तक चले अभियान के बाद सभी शवों को कुएं से बाहर निकाला गया।

प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया?

वन विभाग की शुरुआती जांच के अनुसार यह हादसा संभवतः एक या दो दिन पहले हुआ था। अधिकारियों का मानना है कि हिरणों का झुंड खेतों और जंगल के बीच से गुजर रहा था, तभी एक आवारा कुत्ते ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। जान बचाने के लिए हिरण तेज गति से भागने लगे। भागते-भागते पूरा झुंड उस पुराने कुएं के पास पहुंच गया जिसकी मुंडेर कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त थी। तेज रफ्तार और घबराहट के कारण हिरण कुएं को देख नहीं पाए और सीधे उसके अंदर जा गिरे। पीछे दौड़ रहा कुत्ता भी अपनी रफ्तार नियंत्रित नहीं कर सका और वह भी उसी कुएं में गिर गया।

13 हिरणों में 9 मादा और 4 नर शामिल

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कुएं से कुल 13 हिरणों के शव निकाले गए हैं। इनमें 9 मादा और 4 नर हिरण शामिल हैं। इसके अलावा एक आवारा कुत्ता भी मृत मिला। अधिकारियों के अनुसार सभी जानवर गहरे कुएं में गिरने के बाद बाहर नहीं निकल सके। माना जा रहा है कि समय पर किसी की नजर न पड़ने के कारण वे लंबे समय तक वहीं फंसे रहे, जिससे उनकी मौत हो गई।

क्षतिग्रस्त मुंडेर बनी हादसे की बड़ी वजह

ग्रामीणों का कहना है कि जिस कुएं में यह हादसा हुआ उसकी मुंडेर लंबे समय से टूटी हुई थी और उसके चारों ओर किसी प्रकार की सुरक्षा दीवार या जाली नहीं लगाई गई थी। वन विभाग भी इस पहलू की जांच कर रहा है कि यदि कुएं की उचित घेराबंदी होती तो संभवतः इतनी बड़ी जनहानि रोकी जा सकती थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में खुले और असुरक्षित कुएं वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।

पोस्टमार्टम के बाद किया गया अंतिम संस्कार

घटना की गंभीरता को देखते हुए सभी मृत हिरणों और कुत्ते का पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सभी वन्यजीवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि होगी। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।

वन विभाग का बयान

जिला वन अधिकारी (DFO) हेमलता शाह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला आवारा कुत्ते द्वारा हिरणों के झुंड का पीछा किए जाने से जुड़ा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य इसी ओर संकेत करते हैं कि हिरण घबराकर भागे और क्षतिग्रस्त मुंडेर वाले कुएं में गिर गए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही निकाला जाएगा। वन विभाग पूरे घटनाक्रम की सभी पहलुओं से जांच कर रहा है।

वन्यजीव संरक्षण पर फिर उठे सवाल

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा और खुले कुओं की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश देश के प्रमुख वन्यजीव राज्यों में शामिल है, जहां हिरण, नीलगाय, तेंदुआ और अन्य वन्यजीव बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। जंगलों से लगे खेतों में खुले और बिना सुरक्षा वाले कुएं अक्सर वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कुओं की पहचान कर उनकी घेराबंदी करना, सुरक्षा जाल लगाना और वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) की बेहतर निगरानी करना समय की आवश्यकता है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बना चिंता का विषय

पिछले कुछ वर्षों में जंगलों के आसपास मानव गतिविधियों के विस्तार, प्राकृतिक आवासों में बदलाव और आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या के कारण वन्यजीवों से जुड़े हादसों में वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण के लिए ठोस योजनाएं लागू की जाएं और खुले कुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

जांच जारी, रिपोर्ट का इंतजार

वन विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी। फिलहाल उपलब्ध साक्ष्यों और प्रारंभिक जांच के आधार पर माना जा रहा है कि आवारा कुत्ते से बचने के प्रयास में हिरणों का झुंड घबराकर खुले कुएं में गिर गया, जिससे 13 हिरणों और एक कुत्ते की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों की आवश्यकता की ओर एक बार फिर गंभीर संकेत देती है।

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Wed, 08 Jul 2026 13:45:33 +0530 news desk MPcg
बेगूसराय में शादी की खुशियां मातम में बदलीं: हर्ष फायरिंग में 45 वर्षीय व्यक्ति को लगी दो गोलियां, पुलिस वीडियो खंगाल रही https://citytoday.co.in/7133 https://citytoday.co.in/7133 बिहार के बेगूसराय जिले में शादी समारोह के दौरान कथित हर्ष फायरिंग की एक गंभीर घटना सामने आई है। रिफाइनरी थाना क्षेत्र के हरपुर गांव में बारात निकलने के दौरान हुई फायरिंग में 45 वर्षीय विपिन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके शरीर में दो गोलियां लगीं, जिसके बाद उन्हें तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों द्वारा ऑपरेशन के बाद उनका उपचार जारी है और फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

घटना के बाद शादी समारोह में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और फायरिंग करने वाले व्यक्ति की पहचान के लिए समारोह की वीडियो रिकॉर्डिंग एवं अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

बारात निकलने के दौरान हुई घटना

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हरपुर गांव निवासी प्रवीण सिंह की पुत्री का विवाह समारोह चल रहा था। भागलपुर से बारात आई थी और देर रात करीब 12 बजे बारात दरवाजे की ओर बढ़ रही थी। इसी दौरान बाबा स्थान के समीप भीड़ में किसी व्यक्ति ने कथित रूप से हर्ष फायरिंग शुरू कर दी।

फायरिंग के दौरान वहां मौजूद विपिन सिंह अचानक घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। उनके कमर के पास और जांघ में गोली लगी, जिससे मौके पर ही भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

पहले लोगों ने समझा पटाखे का टुकड़ा लगा है

घायल के परिजनों के अनुसार, शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि गोली लगी है। तेज आवाज और शादी समारोह में आतिशबाजी के कारण लोगों को लगा कि शायद पटाखे या बम का कोई टुकड़ा लगने से विपिन सिंह घायल हुए हैं।

उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकीय जांच और एक्स-रे के बाद पता चला कि उनके शरीर में दो गोलियां लगी हैं। इसके बाद डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन कर उनका इलाज शुरू किया।

हालत स्थिर, इलाज जारी

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, घायल का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया है। फिलहाल उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

परिजनों ने बताया कि विपिन सिंह पहले हरपुर चौक पर पान और कोल्ड ड्रिंक की दुकान चलाते थे। लगातार चोरी की घटनाओं के कारण उन्होंने दुकान बंद कर दी थी और वर्तमान में रिफाइनरी क्षेत्र में दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। परिजनों का कहना है कि उनकी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी या विवाद नहीं था।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही रिफाइनरी थाना पुलिस तथा सदर-दो डीएसपी कुमारी दुर्गा शक्ति देर रात अस्पताल पहुंचीं। पुलिस अधिकारियों ने घायल और उनके परिजनों से घटना की जानकारी ली तथा घटनास्थल का निरीक्षण किया।

पुलिस ने शादी समारोह की वीडियो रिकॉर्डिंग, मोबाइल फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं ताकि फायरिंग करने वाले व्यक्ति की पहचान की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि दोषी की पहचान होते ही उसके विरुद्ध भारतीय कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हर्ष फायरिंग पर कानून क्या कहता है?

भारत में सार्वजनिक स्थानों या समारोहों में बिना अनुमति हथियार से फायरिंग करना दंडनीय अपराध है। यदि लाइसेंसी हथियार का भी दुरुपयोग किया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की लागू धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी घटनाओं में हथियार का लाइसेंस रद्द करने का भी प्रावधान है।

पुलिस लगातार लोगों से शादी, जुलूस और अन्य आयोजनों में हर्ष फायरिंग से बचने की अपील करती रही है, क्योंकि ऐसी घटनाएं कई बार जानलेवा साबित होती हैं।

बढ़ती घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

बिहार सहित देश के कई राज्यों में शादी और अन्य सामाजिक समारोहों के दौरान हर्ष फायरिंग की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खुशी के अवसर पर की जाने वाली लापरवाही अक्सर निर्दोष लोगों की जान जोखिम में डाल देती है।

इस मामले में भी पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि फायरिंग किसने की और हथियार लाइसेंसी था या अवैध। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक तस्वीर सामने आएगी।

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Tue, 07 Jul 2026 11:46:33 +0530 news desk MPcg
80 वर्षीय चूहड़ सिंह ने 18 हजार फीट से स्काईडाइविंग कर रचा इतिहास, भारत के सबसे उम्रदराज एडवेंचर टूरिज्म उदाहरणों में शामिल https://citytoday.co.in/7076 https://citytoday.co.in/7076 हरियाणा के कैथल जिले के कलायत क्षेत्र के गांव बात्ता के 80 वर्षीय चूहड़ सिंह ने ऑस्ट्रेलिया में 18 हजार फीट की ऊंचाई से स्काईडाइविंग कर साहस और फिटनेस की एक दुर्लभ मिसाल पेश की है। यह घटना न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारत में उम्र और एडवेंचर स्पोर्ट्स को लेकर बनी पारंपरिक सोच को भी चुनौती देती है।

चूहड़ सिंह ने यह छलांग लगभग 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से करीब 60 सेकेंड के फ्री-फॉल के दौरान लगाई। खास बात यह रही कि उन्होंने स्काईडाइविंग के दौरान पारंपरिक सफेद कुर्ता पहना और हवा में भारत का तिरंगा भी लहराया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।

मेडिकल फिटनेस के बाद ही मिली अनुमति

स्काईडाइविंग जैसे उच्च जोखिम वाले खेल में भाग लेने से पहले प्रतिभागी की विस्तृत मेडिकल जांच की जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, चूहड़ सिंह को पूरी तरह फिट पाए जाने के बाद ही विमान से छलांग लगाने की अनुमति दी गई। यह तथ्य इस बात को मजबूत करता है कि यह केवल साहसिक निर्णय नहीं था, बल्कि एक नियंत्रित और सुरक्षित एडवेंचर एक्टिविटी थी।

पहले भी कर चुके हैं स्काईडाइविंग

यह उनका पहला अनुभव नहीं है। इससे पहले भी वे पंजाब के पटियाला एयरफील्ड से लगभग 15 हजार फीट की ऊंचाई से स्काईडाइविंग कर चुके हैं। लगातार दो अलग-अलग अवसरों पर यह गतिविधि करना दर्शाता है कि यह केवल क्षणिक उत्साह नहीं, बल्कि उनके भीतर विकसित हुआ एक स्थायी एडवेंचर रुझान है।

पारिवारिक प्रेरणा और जीवनशैली

उनके पोते अंकित के अनुसार, चूहड़ सिंह लंबे समय तक कृषि कार्य से जुड़े रहे हैं और उनका जीवन बेहद सादा और शारीरिक रूप से सक्रिय रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित शारीरिक श्रम, संतुलित देसी खानपान और सक्रिय जीवनशैली उम्र बढ़ने के बावजूद शरीर को फिट बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं—और यह मामला उसी का उदाहरण माना जा सकता है।

विश्लेषण: क्यों खास है यह उपलब्धि?

विशेषज्ञों के मुताबिक, 80 वर्ष की उम्र में 18 हजार फीट से स्काईडाइविंग करना सामान्य परिस्थितियों में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। आमतौर पर इस उम्र में लोगों को हृदय गति, ब्लड प्रेशर और हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याओं के कारण ऐसे एडवेंचर स्पोर्ट्स से दूर रखा जाता है।

इस घटना को तीन प्रमुख दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है:

पहला, फिटनेस और एजिंग (उम्र बढ़ने की प्रक्रिया) — यह साबित करता है कि सक्रिय जीवनशैली उम्र के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर सकती है।
दूसरा, एडवेंचर टूरिज्म का बढ़ता चलन — भारत और विदेशों में अब उम्रदराज लोग भी साहसिक गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।
तीसरा, सामाजिक प्रेरणा — यह घटना युवाओं और बुजुर्गों दोनों के लिए यह संदेश देती है कि उम्र केवल एक संख्या है, सीमाएं नहीं।

सोशल मीडिया पर चर्चा

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोग इसे “गट्स और फिटनेस का उदाहरण” बता रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञ सावधानी की भी बात कर रहे हैं कि ऐसी गतिविधियां केवल उचित मेडिकल निगरानी में ही करनी चाहिए।

निष्कर्ष

चूहड़ सिंह की यह स्काईडाइविंग उपलब्धि केवल एक रोमांचक घटना नहीं, बल्कि यह दिखाती है कि अनुशासन, फिटनेस और आत्मविश्वास के साथ उम्र किसी भी सपने की बाधा नहीं बन सकती।

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Fri, 03 Jul 2026 15:01:00 +0530 news desk MPcg
1454 फीट की ऊंचाई पर प्रपोज और 'Peace' का संदेश... लेकिन नीचे उतरते ही हथकड़ी! Empire State Building स्टंट ने रोमांस से ज्यादा कानून को किया सक्रिय https://citytoday.co.in/7062 https://citytoday.co.in/7062 "प्यार इंसान को आसमान तक ले जाता है"—यह कहावत न्यूयॉर्क में एक रूसी कपल ने कुछ ज़्यादा ही गंभीरता से ले ली। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित इमारतों में शामिल Empire State Building की लगभग 1,454 फीट (443 मीटर) ऊंची चोटी पर पहुंचकर शादी का प्रस्ताव (Marriage Proposal) देना और शांति का संदेश देने वाला बैनर लहराना सोशल मीडिया पर कुछ ही मिनटों में वायरल हो गया। लेकिन यह रोमांचक स्टंट दोनों के लिए कानूनी मुसीबत बन गया और नीचे उतरते ही न्यूयॉर्क पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार किए गए दोनों की पहचान 33 वर्षीय एंजेला निकोलाउ (Angela Nikolau) और 32 वर्षीय इवान कुज़नेत्सोव (Ivan Kuznetsov) उर्फ Ivan Beerkus के रूप में हुई है। दोनों रूस के नागरिक हैं और न्यू जर्सी में रहते हैं। सोशल मीडिया की दुनिया में ये "रूफटॉपर्स" (Rooftoppers) के नाम से जाने जाते हैं और दुनिया की ऊंची इमारतों पर चढ़कर एडवेंचर वीडियो बनाने के लिए प्रसिद्ध हैं।

1454 फीट की ऊंचाई पर प्रपोजल, फिर लहराया 'Peace' का बैनर

रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार दोपहर दोनों कथित तौर पर Empire State Building के प्रतिबंधित ऊपरी हिस्से तक पहुंच गए। वहां उन्होंने शादी का प्रस्ताव रखा और इसके बाद एक बड़ा काला बैनर प्रदर्शित किया, जिस पर लिखा था—

"When the power of love beats the love of power, the world knows peace."

अर्थात, "जब प्रेम की शक्ति सत्ता के प्रेम पर भारी पड़ती है, तब दुनिया शांति को जानती है।"

पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हुआ और कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि यह स्टंट जितनी तेजी से इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना, उतनी ही तेजी से कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजर में भी आ गया।

न्यूयॉर्क पुलिस ने दर्ज किए कई गंभीर आरोप

न्यूयॉर्क पुलिस के अनुसार, दोनों ने इमारत के प्रतिबंधित हिस्से में अवैध रूप से प्रवेश किया और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

इन आरोपों में शामिल हैं—

Burglary (सेंधमारी)
Reckless Endangerment (लापरवाही से लोगों की जान को खतरे में डालना)
Criminal Trespass (अवैध प्रवेश)
Criminal Mischief (संपत्ति से छेड़छाड़ या नुकसान)
Criminal Tampering
Disorderly Conduct
Burglar's Tools रखने का आरोप

गिरफ्तारी के बाद दोनों को अलग-अलग हिरासत में रखा गया और बाद में न्यूयॉर्क की अदालत में पेश किया गया।

ड्रोन और हेलीकॉप्टर से हुई निगरानी

जैसे ही दोनों के प्रतिबंधित हिस्से में पहुंचने की सूचना मिली, न्यूयॉर्क पुलिस ने पूरे ऑपरेशन की निगरानी ड्रोन और हेलीकॉप्टर के माध्यम से की।

इसके बाद New York Police Department (NYPD) की Emergency Service Unit, जो ऊंची इमारतों और कठिन स्थानों पर रेस्क्यू ऑपरेशन में विशेषज्ञ मानी जाती है, मौके पर पहुंची और दोनों को सुरक्षित नीचे उतारकर हिरासत में ले लिया।

फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों Empire State Building के अत्यधिक सुरक्षित और प्रतिबंधित हिस्से तक आखिर पहुंचे कैसे।

कौन हैं Angela Nikolau और Ivan Beerkus?

एंजेला निकोलाउ और इवान कुज़नेत्सोव सोशल मीडिया पर एडवेंचर और रूफटॉपिंग वीडियो बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं।

एंजेला निकोलाउ के इंस्टाग्राम पर लगभग 18 लाख फॉलोअर्स हैं।
इवान (Beerkus) के अकाउंट पर 5 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं।

दोनों इससे पहले चीन, कैलिफोर्निया और अन्य देशों की कई ऊंची इमारतों और संरचनाओं पर भी इसी तरह के स्टंट कर चुके हैं। उनके वीडियो अक्सर लाखों लोगों द्वारा देखे जाते हैं।

क्या है 'रूफटॉपिंग'?

रूफटॉपिंग एक अत्यंत जोखिम भरी गतिविधि है, जिसमें लोग बिना किसी सुरक्षा उपकरण के गगनचुंबी इमारतों, पुलों, टावरों और अन्य ऊंची संरचनाओं पर चढ़कर फोटो और वीडियो बनाते हैं।

हालांकि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो काफी लोकप्रिय होते हैं, लेकिन अधिकांश देशों में यह गतिविधि कानूनन प्रतिबंधित या दंडनीय मानी जाती है क्योंकि इससे—

स्टंट करने वाले व्यक्ति की जान को गंभीर खतरा रहता है।
सार्वजनिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
बचाव दल को अतिरिक्त जोखिम उठाना पड़ता है।
इमारत की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।
Empire State Building प्रबंधन ने क्या कहा?

घटना के बाद Empire State Building के प्रबंधन ने बयान जारी कर कहा कि यदि कोई यादगार प्रपोजल करना चाहता है, तो उसके लिए ऑब्जर्वेशन डेक जैसी अधिकृत और सुरक्षित जगह उपलब्ध है।

प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि इमारत के प्रतिबंधित हिस्सों में प्रवेश किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया की दौड़ और बढ़ता जोखिम

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ ने एडवेंचर कंटेंट की सीमाएं लगातार बढ़ा दी हैं। अधिक व्यूज़, लाइक्स और फॉलोअर्स पाने की चाह में कई कंटेंट क्रिएटर अपनी सुरक्षा के साथ-साथ सार्वजनिक सुरक्षा को भी खतरे में डाल देते हैं।

ऐसी घटनाओं में यदि कोई दुर्घटना हो जाए तो बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ता है, जिससे सार्वजनिक संसाधनों और सुरक्षा एजेंसियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

जांच में क्या-क्या देखा जा रहा है?

जांच एजेंसियां फिलहाल कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाश रही हैं—

दोनों प्रतिबंधित क्षेत्र तक कैसे पहुंचे?
क्या उन्होंने सुरक्षा घेरा तोड़ा?
क्या किसी विशेष उपकरण का इस्तेमाल किया गया?
क्या सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई?

जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों ने यह स्टंट किस प्रकार अंजाम दिया।

घटना का व्यापक संदेश

यह मामला केवल एक वायरल वीडियो या रोमांटिक प्रपोजल का नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश कई बार कानून और सुरक्षा नियमों से टकरा जाती है।

कुछ मिनटों का वायरल कंटेंट लाखों व्यूज़ जरूर दिला सकता है, लेकिन यदि उसके लिए सार्वजनिक सुरक्षा और कानून की अनदेखी की जाए, तो उसका परिणाम गिरफ्तारी, आपराधिक मुकदमे और लंबी कानूनी प्रक्रिया के रूप में सामने आ सकता है।

Empire State Building पर हुआ यह हाई-प्रोफाइल स्टंट एक बार फिर याद दिलाता है कि रोमांच और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना उतना ही जरूरी है, जितना किसी ऐतिहासिक इमारत की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

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Fri, 03 Jul 2026 12:10:31 +0530 news desk MPcg
तेलंगाना का अनोखा सरकारी स्कूल: पूरे विद्यालय में सिर्फ एक छात्रा, फिर भी हर दिन लगती है क्लास; 12.84 लाख रुपये के वार्षिक खर्च के बीच शिक्षा बचाने की मिसाल बनी कीर्तना https://citytoday.co.in/7051 https://citytoday.co.in/7051 डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और निजी स्कूलों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले का एक छोटा-सा सरकारी प्राथमिक विद्यालय पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। वजह यह है कि इस स्कूल में न तो बच्चों की भीड़ है और न ही कई सेक्शन वाली कक्षाएं। पूरे विद्यालय में केवल एक छात्रा पढ़ती है—9 वर्षीय कीर्तना। लेकिन छात्रा सिर्फ एक होने के बावजूद स्कूल प्रतिदिन निर्धारित समय पर खुलता है, शिक्षिका नियमित रूप से पढ़ाने आती हैं, मध्याह्न भोजन योजना लागू है और सरकार विद्यालय का संचालन पूरी व्यवस्था के साथ जारी रखे हुए है।

यह कहानी केवल एक छात्रा की नहीं, बल्कि ग्रामीण सरकारी शिक्षा, अभिभावकों की बदलती सोच, शिक्षा के अधिकार और सरकारी स्कूलों के अस्तित्व को बचाने के संघर्ष की भी कहानी है।

कभी 70 से अधिक बच्चों से गुलजार था यह स्कूल

स्थानीय ग्रामीणों और शिक्षा विभाग से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, नरपननीपल्ली गांव का यह सरकारी प्राथमिक विद्यालय कभी आसपास के क्षेत्र का प्रमुख शिक्षण संस्थान था। कुछ वर्ष पहले तक यहां 70 से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते थे। विद्यालय में नियमित कक्षाएं लगती थीं और बच्चों की चहल-पहल रहती थी।

समय के साथ गांव के अधिकांश अभिभावकों ने अपने बच्चों को निजी और अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में भेजना शुरू कर दिया। बेहतर अंग्रेजी शिक्षा, आधुनिक सुविधाओं और प्रतियोगी माहौल की उम्मीद में सरकारी विद्यालयों से नामांकन लगातार घटता गया। परिणामस्वरूप एक-एक कर सभी छात्र दूसरे स्कूलों में चले गए और आज विद्यालय में केवल एक छात्रा का नामांकन शेष है।

पिता ने नहीं छोड़ा सरकारी स्कूल का साथ

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अलग भूमिका निभाई कीर्तना के पिता पुलैया ने। जब गांव के अधिकांश परिवार अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेज रहे थे, तब उन्होंने अपनी बेटी का नाम सरकारी विद्यालय से नहीं हटाया।

पुलैया का मानना है कि यदि गांव का एकमात्र सरकारी स्कूल बंद हो गया तो भविष्य में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए नजदीक में शिक्षा प्राप्त करना कठिन हो जाएगा। उनका कहना है कि सरकारी विद्यालय केवल वर्तमान छात्रों के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक हैं। इसी सोच के चलते उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई इसी विद्यालय में जारी रखने का निर्णय लिया।

एक छात्रा, एक शिक्षिका और पूरी कक्षा

विद्यालय में नियुक्त शिक्षिका उमा प्रतिदिन समय पर स्कूल पहुंचती हैं। छात्रा केवल एक होने के बावजूद वह पूरी शैक्षणिक प्रक्रिया का पालन करती हैं। सुबह की उपस्थिति, प्रार्थना, पाठ्यक्रम आधारित शिक्षण, लिखित अभ्यास, गृहकार्य, मूल्यांकन और पुनरावृत्ति जैसी गतिविधियां नियमित रूप से कराई जाती हैं।

व्यक्तिगत शिक्षण का लाभ यह है कि कीर्तना को प्रत्येक विषय में सीधे शिक्षिका का मार्गदर्शन मिलता है। पढ़ाई के दौरान उसकी कमजोरियों पर तुरंत काम किया जाता है और उसकी प्रगति का लगातार आकलन किया जाता है।

हालांकि शिक्षिका यह भी मानती हैं कि विद्यालय केवल किताबों तक सीमित नहीं होता। अन्य बच्चों के साथ संवाद, सामूहिक खेल, समूह गतिविधियां और सामाजिक व्यवहार भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

सरकार हर साल करती है लगभग 12.84 लाख रुपये का व्यय

सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार इस विद्यालय के संचालन पर सरकार का वार्षिक खर्च लगभग 12.84 लाख रुपये है। इस राशि में शिक्षिका का वेतन, विद्यालय का रखरखाव, मध्याह्न भोजन योजना, रसोइया, प्रशासनिक खर्च तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं शामिल हैं।

यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह राशि किसी एक छात्रा पर सीधे खर्च होने वाली व्यक्तिगत लागत नहीं है, बल्कि पूरे विद्यालय के संचालन का कुल वार्षिक व्यय है। सरकारी विद्यालयों का संचालन शिक्षा के अधिकार अधिनियम और राज्य की शैक्षिक जिम्मेदारियों के तहत किया जाता है, इसलिए केवल कम नामांकन के आधार पर विद्यालयों को तत्काल बंद नहीं किया जाता।

अकेले पढ़ाई के फायदे और चुनौतियां

विशेषज्ञों के अनुसार अकेले अध्ययन करने से छात्र को व्यक्तिगत ध्यान, बेहतर सीखने की गति और शिक्षक से अधिक समय मिलता है। लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं।

विद्यालय बच्चों के सामाजिक विकास का भी केंद्र होता है। सहपाठियों के साथ बातचीत, समूह में सीखना, टीमवर्क, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियां और प्रतिस्पर्धा बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एकल छात्र व्यवस्था में इन अनुभवों की कमी महसूस की जा सकती है।

इसी कारण शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि विद्यालय में नामांकन बढ़ाना आवश्यक है ताकि शैक्षणिक और सामाजिक दोनों प्रकार का विकास सुनिश्चित हो सके।

प्रशासन चला रहा है विशेष अभियान

शिक्षा विभाग विद्यालय में दोबारा छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार 'We Can Learn' जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से गांवों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। अभिभावकों को सरकारी विद्यालयों की सुविधाओं, निःशुल्क शिक्षा, पाठ्यपुस्तकों, यूनिफॉर्म, मध्याह्न भोजन और अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।

अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले शैक्षणिक सत्र में नए प्रवेश बढ़ेंगे और विद्यालय फिर से सामान्य छात्र संख्या के साथ संचालित हो सकेगा।

पूरे देश में चर्चा का विषय बना यह स्कूल

नरपननीपल्ली का यह विद्यालय आज केवल एक स्थानीय खबर नहीं है। यह सरकारी शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों, ग्रामीण भारत में बदलती शैक्षिक प्राथमिकताओं और शिक्षा तक समान पहुंच जैसे राष्ट्रीय मुद्दों का प्रतीक बन गया है।

एक ओर यह विद्यालय सरकारी व्यवस्था की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसमें एक भी बच्चे की शिक्षा को महत्व दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठाता है कि आखिर ऐसे कौन-से कारण हैं जिनकी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी विद्यालय लगातार खाली होते जा रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

शिक्षा नीति से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर अधोसंरचना, डिजिटल संसाधन, प्रशिक्षित शिक्षक और समुदाय की भागीदारी बढ़ाकर नामांकन में सुधार किया जा सकता है। उनका कहना है कि केवल भवन बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अभिभावकों का विश्वास जीतना भी उतना ही आवश्यक है।

एक बच्ची, एक स्कूल और एक बड़ा संदेश

आज जब पूरे विद्यालय में केवल एक छात्रा पढ़ रही है, तब भी स्कूल का हर दिन खुलना इस बात का प्रतीक है कि शिक्षा का अधिकार संख्या पर नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे के अधिकार पर आधारित है। कीर्तना, उनके पिता पुलैया और शिक्षिका उमा की प्रतिबद्धता यह संदेश देती है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो दूरदराज के गांवों में भी सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है।

नरपननीपल्ली का यह छोटा-सा स्कूल आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है—जहां एक छात्रा की शिक्षा के लिए पूरा विद्यालय, पूरी व्यवस्था और एक शिक्षक समान समर्पण के साथ काम कर रहे हैं।

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Thu, 02 Jul 2026 15:04:10 +0530 news desk MPcg
गीता प्रेस का ऐतिहासिक कदम: पहली बार संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी में प्रकाशित होगी त्रिभाषी श्रीमद्भगवद्गीता, वैश्विक पाठकों को मिलेगा बड़ा लाभ https://citytoday.co.in/7048 https://citytoday.co.in/7048  देश की प्रतिष्ठित धार्मिक प्रकाशन संस्था गीता प्रेस, गोरखपुर ने पहली बार संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी में एक साथ प्रकाशित होने वाली त्रिभाषी श्रीमद्भगवद्गीता का लोकार्पण करने की घोषणा की है। लगभग एक शताब्दी के इतिहास में यह पहला अवसर है जब गीता प्रेस ने एक ही संस्करण में मूल संस्कृत श्लोकों के साथ हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद उपलब्ध कराया है। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी, भारतीय प्रवासी समुदाय (डायस्पोरा) और अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक भगवद्गीता के संदेश को अधिक सरल और सुलभ रूप में पहुंचाना है।

पहली बार तीन भाषाओं में एक साथ उपलब्ध होगी गीता

नई त्रिभाषी श्रीमद्भगवद्गीता में प्रत्येक श्लोक का मूल संस्कृत पाठ, उसके साथ हिंदी अनुवाद और अंग्रेजी अनुवाद एक ही पुस्तक में दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संस्करण में ऐसे पाठकों को भी ध्यान में रखा गया है जो संस्कृत या देवनागरी लिपि से परिचित नहीं हैं, ताकि वे श्लोकों का उच्चारण और अर्थ दोनों आसानी से समझ सकें।

युवा पीढ़ी और वैश्विक पाठकों पर विशेष फोकस

गीता प्रेस का कहना है कि बदलते समय में भारतीय संस्कृति और सनातन दर्शन के प्रति दुनिया भर में रुचि बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह संस्करण तैयार किया गया है, जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीय, विद्यार्थी, शोधकर्ता तथा भारतीय दर्शन में रुचि रखने वाले विदेशी पाठक भी भगवद्गीता का अध्ययन सरलता से कर सकें।

भाषाई बाधाएं होंगी कम

इस नए संस्करण का प्रमुख उद्देश्य भाषाई सीमाओं को कम करना है। एक ही पुस्तक में तीन भाषाओं की उपलब्धता से पाठकों को मूल संस्कृत श्लोक पढ़ने के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी में उनका अर्थ समझने की सुविधा मिलेगी। इससे धार्मिक अध्ययन, अकादमिक शोध और आध्यात्मिक अध्ययन करने वाले लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

1923 से धर्मग्रंथों के प्रकाशन में अग्रणी है गीता प्रेस

1923 में स्थापित गीता प्रेस दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक प्रकाशन संस्थाओं में से एक मानी जाती है। पिछले एक शताब्दी से अधिक समय से यह संस्था कम कीमत पर हिंदू धर्मग्रंथों का प्रकाशन और वितरण करती आ रही है। श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस, पुराण, उपनिषद, हनुमान चालीसा और 'कल्याण' मासिक पत्रिका सहित करोड़ों प्रतियां देश-विदेश में प्रकाशित और वितरित की जा चुकी हैं।

भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

धार्मिक और सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह त्रिभाषी संस्करण भारतीय आध्यात्मिक साहित्य को वैश्विक स्तर पर और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विशेष रूप से अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा प्राप्त करने वाली युवा पीढ़ी तथा विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए यह संस्करण उपयोगी साबित हो सकता है।

अध्ययन और शोध में भी मिलेगा लाभ

शिक्षा और शोध से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही पुस्तक में मूल संस्कृत पाठ और दो प्रमुख भाषाओं में अनुवाद उपलब्ध होने से विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों, शोध संस्थानों तथा धार्मिक अध्ययन केंद्रों में इसका व्यापक उपयोग हो सकेगा। इससे भारतीय दर्शन और भगवद्गीता पर अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भी सुविधा मिलेगी।

सनातन साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल

गीता प्रेस का यह प्रकाशन केवल धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास भी माना जा रहा है। डिजिटल युग में जहां बहुभाषी अध्ययन की मांग लगातार बढ़ रही है, वहां यह त्रिभाषी संस्करण भारतीय आध्यात्मिक साहित्य को नई पीढ़ी और वैश्विक समाज से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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Thu, 02 Jul 2026 13:38:59 +0530 news desk MPcg
गोरखपुर विश्वविद्यालय में बड़ा शैक्षणिक फैसला: रवि किशन, चंद्र प्रकाश अग्रवाल और अतुल सर्राफ बने ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’, 25 प्रोफेसरों को पदोन्नति https://citytoday.co.in/7030 https://citytoday.co.in/7030 दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयूजीयू) की कार्य परिषद की महत्वपूर्ण बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक और शोध कार्यों को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की, जिसमें विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों और कार्य परिषद के सदस्यों ने भाग लिया।

बैठक में सबसे चर्चित निर्णय गोरखपुर के सांसद एवं अभिनेता रवि किशन, शहर के प्रमुख उद्योगपति चंद्र प्रकाश अग्रवाल (चंदू बाबू) तथा उद्यमी अतुल सर्राफ को ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ नियुक्त करने का रहा। इसके अलावा 11 विभागों के 25 प्रोफेसरों को वरिष्ठ प्रोफेसर पद पर पदोन्नति, विभिन्न विभागों में नई शिक्षकों की नियुक्ति और आगामी दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के नाम पर भी अंतिम मुहर लगाई गई।

तीन प्रतिष्ठित हस्तियों को मिली ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की जिम्मेदारी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत विश्वविद्यालयों में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य ऐसे अनुभवी व्यक्तियों को शिक्षण संस्थानों से जोड़ना है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया हो और जिनके अनुभव से विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान मिल सके।

इसी व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालय ने—

रवि किशन को ललित कला एवं संगीत विभाग में,
चंद्र प्रकाश अग्रवाल (चंदू बाबू) को वाणिज्य विभाग में,
अतुल सर्राफ को वाणिज्य विभाग में

प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन तीनों व्यक्तित्वों का अनुभव विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें मनोरंजन उद्योग, व्यापार, उद्योग प्रबंधन, नेतृत्व, उद्यमिता और व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों को समझने का अवसर भी मिलेगा।

क्या होता है ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’?

‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ ऐसे विशेषज्ञ होते हैं जो पारंपरिक शैक्षणिक पृष्ठभूमि से अलग किसी विशेष क्षेत्र में लंबा व्यावसायिक अनुभव रखते हैं। विश्वविद्यालय उन्हें नियमित अध्यापक के रूप में नहीं, बल्कि विशेषज्ञ मार्गदर्शक के रूप में जोड़ता है।

वे विद्यार्थियों के लिए—

विशेष व्याख्यान देंगे,
कार्यशालाओं का संचालन करेंगे,
उद्योग आधारित प्रशिक्षण देंगे,
परियोजनाओं में मार्गदर्शन करेंगे,
रोजगार और कौशल विकास से जुड़ी जानकारी साझा करेंगे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य उच्च शिक्षा को उद्योग और समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है।

25 प्रोफेसरों को वरिष्ठ प्रोफेसर पद पर पदोन्नति

बैठक में शिक्षकों के कैरियर उन्नयन से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। कार्य परिषद ने विश्वविद्यालय के 11 विभागों के 25 प्रोफेसरों को वरिष्ठ प्रोफेसर पद पर पदोन्नत करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।

पदोन्नति प्राप्त करने वाले विभागों में—

गणित एवं सांख्यिकी
जंतु विज्ञान
इतिहास
अर्थशास्त्र
रसायन विज्ञान
जैव प्रौद्योगिकी
वनस्पति विज्ञान
अंग्रेजी
रक्षा अध्ययन
संस्कृत
समाजशास्त्र

शामिल हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, पदोन्नति से शिक्षकों की जिम्मेदारियां और बढ़ेंगी तथा शोध, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को और गति मिलेगी।

नई नियुक्तियों को भी मिली मंजूरी

कार्य परिषद ने विभिन्न विभागों में चयनित शिक्षकों की नियुक्ति को भी अंतिम स्वीकृति प्रदान की।

सांख्यिकी विभाग में डॉ. अशोक कुमार पाठक के सहयुक्त आचार्य पद पर चयन को मंजूरी दी गई।
समाजशास्त्र विभाग में डॉ. पूजा त्रिपाठी तथा विनय कुमार गुप्ता के सहायक आचार्य पद पर चयन को भी अनुमोदित किया गया।

विश्वविद्यालय का मानना है कि नई नियुक्तियों से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा और विभागों में शिक्षण व्यवस्था और मजबूत होगी।

छह अगस्त को होगा दीक्षांत समारोह

बैठक में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के प्रस्तावित दीक्षांत समारोह को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।

कार्य परिषद ने 6 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. वी.के. सारस्वत के नाम को मंजूरी दी।

डॉ. सारस्वत वर्तमान में नीति आयोग के सदस्य हैं। इससे पहले वे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के महानिदेशक रह चुके हैं। रक्षा अनुसंधान, मिसाइल प्रौद्योगिकी, विज्ञान, नवाचार और राष्ट्रीय नीति निर्माण में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से सम्मानित कर चुकी है।

शोध और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा

बैठक में विश्वविद्यालय की शोध गतिविधियों, नवाचार, अकादमिक गुणवत्ता और प्रशासनिक सुधारों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्य परिषद ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों को केवल डिग्री आधारित शिक्षा नहीं, बल्कि कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।

विश्वविद्यालय का मानना है कि उद्योग जगत, कला, व्यापार और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विशेषज्ञों के जुड़ने से छात्रों को वास्तविक परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता और पेशेवर दक्षता में वृद्धि होगी।

कुलपति ने क्या कहा?

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय उत्कृष्ट शिक्षण, गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में अनुभवी विशेषज्ञों की नियुक्ति, शिक्षकों की पदोन्नति और नई नियुक्तियां विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को नई ऊंचाई देंगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि इन निर्णयों से विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम आधारित ज्ञान के साथ-साथ उद्योग, व्यापार, संस्कृति, कला और समाज से जुड़े व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होंगे। इससे विश्वविद्यालय में शिक्षा, शोध और नवाचार का वातावरण और अधिक मजबूत होगा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में भी सहायता मिलेगी।

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Wed, 01 Jul 2026 15:12:38 +0530 news desk MPcg
अखिलेश यादव के जन्मदिन पर मुरादाबाद में 53 फीट लंबा केक, सांसद रुचि वीरा ने बताया खास कारण; 2027 चुनाव, संगठन और विवादों पर भी खुलकर बोलीं https://citytoday.co.in/7022 https://citytoday.co.in/7022 समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुरादाबाद से लोकसभा सांसद रुचि वीरा की मौजूदगी में 53 फीट लंबा केक काटा गया, जिसने पूरे कार्यक्रम का केंद्र आकर्षण बना। बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इसमें हिस्सा लिया और अखिलेश यादव के दीर्घायु एवं राजनीतिक सफलता की कामना की।

कार्यक्रम के दौरान रुचि वीरा ने केवल जन्मदिन समारोह तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि संगठन के भीतर चल रही चर्चाओं, टिकट वितरण, महिला सम्मान, पीडीए अभियान, आगामी विधानसभा चुनाव और विपक्षी नेताओं के बयानों पर भी विस्तार से प्रतिक्रिया दी।

53 फीट लंबा केक क्यों काटा गया?

रुचि वीरा ने बताया कि इस विशेष अवसर के लिए स्थानीय अलवीना बेकरी ने बेहद कम समय में 53 फीट लंबा केक तैयार किया। उनके अनुसार, यह आयोजन केवल जन्मदिन का उत्सव नहीं बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं की एकजुटता और राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रति सम्मान का प्रतीक था।

उन्होंने कहा कि वह अखिलेश यादव के स्वस्थ, दीर्घायु और सफल राजनीतिक भविष्य की कामना करती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिर बड़ी भूमिका निभाएंगे।

2027 विधानसभा चुनाव को लेकर जताया भरोसा

रुचि वीरा ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य अखिलेश यादव को दोबारा मुख्यमंत्री बनाना है और इसके लिए संगठन पूरी ताकत से काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो 2027 से 2032 का कार्यकाल प्रदेश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण दौर साबित हो सकता है। उनके मुताबिक पार्टी सामाजिक न्याय, विकास और सभी वर्गों के हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में काम कर रही है।

टिकट वितरण पर क्या बोलीं?

हाल के दिनों में समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट वितरण और संगठनात्मक फैसलों को लेकर उठ रहे सवालों पर रुचि वीरा ने स्पष्ट किया कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रखता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पार्टी की परिस्थितियों और संगठन की जरूरतों को सबसे बेहतर तरीके से समझते हैं। इसलिए नेतृत्व द्वारा लिया गया हर निर्णय पार्टी हित में होता है और सभी कार्यकर्ताओं को उसका सम्मान करना चाहिए।

रुचि वीरा ने कहा कि उनका पूरा ध्यान संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर है, न कि आंतरिक चर्चाओं पर।

कमाल अख्तर विवाद पर दिया जवाब

हाल के दिनों में पार्टी नेता कमाल अख्तर से जुड़े विवाद और उनके विधानमंडल के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) पद से इस्तीफे को लेकर भी रुचि वीरा से सवाल पूछा गया।

इस पर उन्होंने कहा कि उनकी किसी भी पुरानी शिकायत या व्यक्तिगत मामले का वर्तमान घटनाक्रम से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर चल रही अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि इसे अनावश्यक रूप से जोड़कर देखा जा रहा है।

पोस्टरों और पीडीए अभियान में नाम न होने पर प्रतिक्रिया

पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) कार्यक्रमों के पोस्टरों और तस्वीरों में पर्याप्त जगह नहीं मिलने के सवाल पर रुचि वीरा ने कहा कि उन्हें पोस्टर या प्रचार सामग्री में दिखने की कोई व्यक्तिगत इच्छा नहीं है।

उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल जनता के बीच रहकर काम करना है। उनके अनुसार, वह लगातार क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख, सामाजिक आयोजनों और जनसमस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रहती हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता की पहचान पोस्टर से नहीं बल्कि उसके जनसंपर्क और कार्यों से होती है।

मुरादाबाद की सभी विधानसभा सीटें जीतने का दावा

रुचि वीरा ने मुरादाबाद की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करेगी।

उनके अनुसार, संगठन लगातार बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश में पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।

ओम प्रकाश राजभर के बयान पर पलटवार

सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर द्वारा विपक्षी नेताओं को "सीजनल सन्यासी" बताए जाने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रुचि वीरा ने कहा कि उनके ऐसे बयानों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी जनता के मुद्दों पर लगातार काम कर रही है और राजनीतिक बयानबाजी से अधिक जनता के बीच काम करना ही पार्टी की प्राथमिकता है।

संगठन को मजबूत करने पर जोर

कार्यक्रम के अंत में रुचि वीरा ने कहा कि समाजवादी पार्टी का पूरा फोकस संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और जनता के बीच अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर है।

उन्होंने कहा कि जन्मदिन जैसे कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और संगठनात्मक ऊर्जा बढ़ाने का माध्यम भी हैं। उनके अनुसार, आने वाले चुनावों को देखते हुए पार्टी पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।

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Wed, 01 Jul 2026 12:47:29 +0530 news desk MPcg
भीलवाड़ा में फिल्मी अंदाज में लाखों की चोरी, PM मोदी जैसा मास्क पहनकर मोबाइल शॉप में घुसे बदमाश; CCTV फुटेज से पुलिस को अहम सुराग https://citytoday.co.in/7009 https://citytoday.co.in/7009 राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में मोबाइल शॉप में हुई लाखों रुपये की चोरी की वारदात ने स्थानीय व्यापारियों और पुलिस दोनों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के करेड़ा कस्बे में स्थित एक मोबाइल दुकान में सोमवार देर रात अज्ञात बदमाशों ने छत के रास्ते प्रवेश कर करीब 35 से 40 स्मार्टफोन चोरी कर लिए। दुकान संचालक के अनुसार चोरी गए मोबाइल फोन की कुल कीमत करीब 4 से 5 लाख रुपये है। इस मामले ने इसलिए भी सुर्खियां बटोरी हैं क्योंकि दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में एक संदिग्ध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा दिखने वाला फेस मास्क पहने दिखाई दिया।

स्पष्टीकरण: पुलिस ने अब तक केवल इतना बताया है कि सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसी आकृति वाला मास्क पहने दिखाई देता है। यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मास्क आधिकारिक रूप से किस प्रकार का था।

देर रात छत के रास्ते दुकान में दाखिल हुए चोर

जानकारी के अनुसार, घटना करेड़ा बस स्टैंड के समीप स्थित मातेश्वरी मोबाइल शॉप की है। दुकान संचालक लक्ष्मण सेन ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि सोमवार देर रात अज्ञात बदमाश दुकान के पीछे से छत पर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने सीढ़ियों के प्रवेश द्वार का ताला तोड़ा और छत के रास्ते दुकान के अंदर घुस गए।

दुकान में प्रवेश करने के बाद आरोपियों ने व्यवस्थित तरीके से महंगे स्मार्टफोन अपने कब्जे में लिए। वारदात के दौरान दुकान के काउंटर और डिस्प्ले सेक्शन में रखे कई मोबाइल फोन के बॉक्स खोल दिए गए। आरोपी मोबाइल फोन समेटकर मौके से फरार हो गए।

सुबह दुकान खुली तो बिखरा मिला पूरा शोरूम

मंगलवार सुबह जब दुकान संचालक रोजाना की तरह दुकान खोलने पहुंचे तो उन्होंने देखा कि दुकान का सामान पूरी तरह अस्त-व्यस्त पड़ा हुआ था। महंगे मोबाइल फोन रखने वाले कई बॉक्स खाली पड़े थे, जबकि शोरूम के अंदर सामान बिखरा हुआ था।

स्थिति देखकर तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद करेड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।

CCTV फुटेज में कैद हुई पूरी घटना

पुलिस ने दुकान और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वारदात में शामिल एक संदिग्ध ने अपनी पहचान छिपाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा दिखने वाला फेस मास्क पहन रखा था।

फुटेज में आरोपी दुकान के भीतर घूमता हुआ और मोबाइल फोन इकट्ठा करता हुआ दिखाई देता है। पुलिस अब फुटेज की गुणवत्ता बेहतर बनाकर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। साथ ही अन्य कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों के आने-जाने के मार्ग का पता लगाया जा सके।

एक ही रात दूसरी मोबाइल दुकान में भी सेंध लगाने की कोशिश

प्रारंभिक पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि संभवतः इसी गिरोह ने उसी रात बीज गोदाम चौराहे के पास स्थित सांवरिया मोबाइल नामक दूसरी दुकान में भी चोरी का प्रयास किया।

बताया जा रहा है कि वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में भी वही मास्क पहने संदिग्ध दुकान का शटर तोड़ने की कोशिश करता दिखाई देता है। हालांकि, किसी कारणवश आरोपी वहां चोरी करने में सफल नहीं हो सके और मौके से फरार हो गए।

पुलिस दोनों घटनाओं के बीच संबंध की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दोनों वारदातों में एक ही गिरोह शामिल था या नहीं।

फॉरेंसिक और तकनीकी जांच पर भी जोर

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। अधिकारियों ने आसपास के इलाकों में लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी कब्जे में ली है।

जांच टीम आरोपियों के भागने के संभावित रास्तों, इस्तेमाल किए गए वाहन तथा तकनीकी साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर फॉरेंसिक साक्ष्यों की भी जांच कराई जा सकती है।

व्यापारियों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी

घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि कस्बे के प्रमुख बाजार क्षेत्र में स्थित दुकान में इतनी बड़ी चोरी होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

व्यापारी संगठनों ने पुलिस प्रशासन से बाजार क्षेत्र में रात्रि गश्त बढ़ाने, प्रमुख बाजारों में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने और चोरी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

करेड़ा थाना पुलिस ने दुकान संचालक लक्ष्मण सेन की शिकायत पर चोरी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय खुफिया जानकारी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

फिलहाल किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।

अब तक की प्रमुख जानकारी
घटना राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के करेड़ा कस्बे की है।
मातेश्वरी मोबाइल शॉप में देर रात छत के रास्ते घुसकर चोरी की गई।
करीब 35–40 स्मार्टफोन चोरी हुए, जिनकी अनुमानित कीमत 4–5 लाख रुपये बताई गई है।
सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा दिखने वाला फेस मास्क पहने दिखाई दिया।
पुलिस को शक है कि यही गिरोह दूसरी मोबाइल दुकान में भी चोरी का प्रयास कर चुका है।
मामला दर्ज कर पुलिस सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही है।

तथ्यात्मक स्थिति: अब तक पुलिस ने चोरी की घटना, सीसीटीवी फुटेज और जांच शुरू होने की पुष्टि की है। हालांकि, आरोपियों की पहचान, उनकी संख्या तथा मास्क पहनने के उद्देश्य को लेकर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है। इसलिए इन पहलुओं पर जांच जारी है।

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Tue, 30 Jun 2026 15:59:43 +0530 news desk MPcg
महोबा में कुएं से 50 से अधिक बिजली मीटर मिलने का दावा, बिजली विभाग पर गंभीर सवाल; रिकॉर्ड में हेराफेरी और भ्रष्टाचार के आरोपों की मांग उठी https://citytoday.co.in/6999 https://citytoday.co.in/6999 उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में एक पुराने कुएं की सफाई के दौरान 50 से अधिक बिजली मीटर मिलने का दावा सामने आने के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर वायरल हो रहे वीडियो और दावों के अनुसार, कुएं से बड़ी संख्या में ऐसे बिजली मीटर निकाले गए हैं जिन्हें कथित तौर पर बिजली चोरी के मामलों में जब्त किया गया था। हालांकि, इस दावे की अभी तक किसी सक्षम सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी, साक्ष्यों को नष्ट करने और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोपों का रूप ले सकता है।

कुएं की सफाई के दौरान सामने आया मामला

जानकारी के अनुसार, महोबा में एक पुराने कुएं की नियमित सफाई और गाद निकालने का कार्य चल रहा था। इसी दौरान मजदूरों और स्थानीय लोगों ने कुएं के भीतर बड़ी संख्या में बिजली मीटर देखे। बाद में इन्हें बाहर निकाला गया, जिसके बाद पूरे इलाके में चर्चा शुरू हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि कुएं से 50 से अधिक बिजली मीटर निकले हैं। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, हालांकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

बिजली चोरी के मामलों से जुड़ा होने का आरोप

स्थानीय लोगों और कुछ सूत्रों का आरोप है कि ये मीटर बिजली चोरी के मामलों में जब्त किए गए थे। नियमों के अनुसार, ऐसे मीटरों को जब्त करने के बाद उनका पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, उन्हें सुरक्षित रखा जाता है और कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित कार्रवाई की जाती है।

आरोप है कि इन मीटरों को रिकॉर्ड में सुरक्षित रखने के बजाय वर्षों तक कुएं में फेंका जाता रहा और कई मामलों को कथित रूप से विभागीय स्तर पर "सेटल" कर दिया गया। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह विभागीय प्रक्रियाओं और सरकारी अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ का मामला हो सकता है।

कई गंभीर सवाल खड़े

घटना के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं—

आखिर बड़ी संख्या में बिजली मीटर कुएं तक कैसे पहुंचे?
क्या यह किसी एक कर्मचारी की लापरवाही थी या इसके पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहा था?
जिन मीटरों को कथित तौर पर जब्त किया गया था, उनका विभागीय रिकॉर्ड क्या कहता है?
क्या इन मीटरों से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई पूरी की गई थी या उन्हें बिना प्रक्रिया के बंद कर दिया गया?
यदि विभाग के रिकॉर्ड में ये मीटर सुरक्षित दिखाए गए हैं, तो वास्तव में वे कुएं में कैसे मिले?
जांच की मांग तेज

घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि केवल मीटर मिलने की घटना की जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि यह सिलसिला कब से चल रहा था और इसमें किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी जब्त सामग्री को रिकॉर्ड से हटाकर इस प्रकार ठिकाने लगाया गया है तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर मामला बन सकता है।

बिजली विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार

समाचार लिखे जाने तक बिजली विभाग की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। साथ ही, प्रशासन की ओर से भी इस दावे की औपचारिक पुष्टि या विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी

फिलहाल यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि कुएं से 50 से अधिक बिजली मीटर मिलने और उन्हें बिजली चोरी के मामलों से जोड़ने के दावे विभिन्न स्थानीय स्रोतों और वायरल वीडियो के आधार पर सामने आए हैं। इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।

यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति, रिकॉर्ड प्रबंधन, भ्रष्टाचार और कानून के पालन से जुड़ा एक गंभीर प्रशासनिक मामला बन सकता है। वहीं, यदि जांच में तथ्य अलग सामने आते हैं, तो उसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

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Tue, 30 Jun 2026 13:27:31 +0530 news desk MPcg
पश्चिम बंगाल के जमुरिया में मिलीं 500 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां, प्राचीन इतिहास, आयुर्वेद और विज्ञान के अनमोल रहस्य आने की उम्मीद https://citytoday.co.in/6966 https://citytoday.co.in/6966 पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले के जमुरिया ब्लॉक स्थित चिंचूरिया गांव से एक ऐसी ऐतिहासिक खोज सामने आई है, जिसने इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और पुरातत्व विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। गांव निवासी दिब्येंदु चक्रवर्ती के घर में लगभग 500 वर्ष पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां मिलने का दावा किया गया है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इन पांडुलिपियों में धर्म, दर्शन, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, गणित और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मौजूद हो सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन पांडुलिपियों का वैज्ञानिक परीक्षण और संरक्षण किया जाता है, तो भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर नई रोशनी पड़ सकती है।

ऐसे सामने आया ऐतिहासिक दस्तावेजों का खजाना

इस दुर्लभ संग्रह की जानकारी तब सामने आई जब दिब्येंदु चक्रवर्ती की पुत्री, जो पेशे से पारा शिक्षिका हैं, ने अपने विद्यालय के शिक्षक माधव चंद्र मंडल को घर में सुरक्षित रखी गई पुरानी पांडुलिपियों के बारे में बताया।

सूचना मिलने पर माधव मंडल ने चक्रवर्ती परिवार के घर पहुंचकर इन हस्तलिखित ग्रंथों का निरीक्षण किया। प्रारंभिक अध्ययन में उन्होंने बताया कि अधिकांश पांडुलिपियां विशेष प्रकार के कपड़े से बने पारंपरिक कागज पर लिखी गई हैं, जबकि कुछ भोजपत्र पर अंकित हैं। उनकी अनुमानित आयु लगभग 200 से 500 वर्ष के बीच हो सकती है।

काशीपुर रियासत से जुड़ा हो सकता है संबंध

दिब्येंदु चक्रवर्ती के अनुसार उनके पूर्वज संभवतः काशीपुर रियासत के राजदरबार में विद्वान पंडित थे। परिवार की परंपरा के अनुसार इन पांडुलिपियों को कई पीढ़ियों से सुरक्षित रखा गया है।

इन दस्तावेजों में यज्ञ-विधि, दशमहाविद्या, श्रीमद्भागवत सहित अनेक धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों का उल्लेख बताया जा रहा है। यदि यह दावा प्रमाणित होता है, तो यह संग्रह क्षेत्र के सांस्कृतिक और बौद्धिक इतिहास के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

आयुर्वेद, गणित और खगोल विज्ञान से जुड़े हो सकते हैं महत्वपूर्ण तथ्य

विशेषज्ञों के अनुसार प्राचीन भारतीय पांडुलिपियां केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं होतीं, बल्कि उनमें चिकित्सा विज्ञान, कृषि, धातु विज्ञान, गणित, ज्योतिष और खगोल विज्ञान जैसे विषयों का भी विस्तृत ज्ञान दर्ज रहता है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस संग्रह में भी आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, कृषि पद्धतियों और गणितीय सिद्धांतों से संबंधित सामग्री मौजूद हो सकती है। हालांकि इन दावों की पुष्टि विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन और विशेषज्ञों की जांच के बाद ही संभव होगी।

आधुनिक तकनीक से पढ़े जाएंगे सदियों पुराने दस्तावेज

इतिहासकारों का कहना है कि समय के साथ कई पांडुलिपियों की स्याही धुंधली हो जाती है, जिससे सामान्य आंखों से उन्हें पढ़ना कठिन हो जाता है।

ऐसी स्थिति में मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग, इन्फ्रारेड और अल्ट्रावायलेट स्कैनिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की सहायता से धुंधले अक्षरों को स्पष्ट किया जा सकता है। इसके अलावा कार्बन डेटिंग के माध्यम से इनकी वास्तविक आयु और निर्माण काल का भी वैज्ञानिक निर्धारण किया जा सकता है।

संरक्षण सबसे बड़ी प्राथमिकता

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी पुरानी पांडुलिपियों को खुले वातावरण में रखना जोखिमपूर्ण हो सकता है। नमी, तापमान में बदलाव, फफूंद, दीमक और कीट इनके लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकते हैं।

इसी कारण ऐसे दस्तावेजों का वैज्ञानिक संरक्षण आवश्यक माना जाता है। इसके तहत—

विशेष रासायनिक उपचार (Chemical Conservation)
नियंत्रित तापमान वाले संग्रह कक्ष
हाई-रेजोल्यूशन डिजिटल स्कैनिंग
डिजिटल अभिलेखीकरण (Digitization)
कार्बन डेटिंग और सामग्री विश्लेषण

जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।

भारत में पांडुलिपियों की समृद्ध विरासत

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां लाखों प्राचीन पांडुलिपियां ताड़पत्र, भोजपत्र, रेशमी वस्त्र और हस्तनिर्मित कागजों पर संरक्षित रही हैं।

इन दुर्लभ धरोहरों के संरक्षण और दस्तावेजीकरण के लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (National Mission for Manuscripts) संचालित किया जा रहा है। इस मिशन के तहत देशभर में लाखों पांडुलिपियों की पहचान, सूचीकरण और डिजिटलीकरण का कार्य किया जा चुका है।

शोध के बाद ही होगी दावों की पुष्टि

हालांकि प्रारंभिक निरीक्षण में इन पांडुलिपियों को अत्यंत प्राचीन और महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन उनकी वास्तविक आयु, ऐतिहासिक महत्व और उनमें निहित विषयवस्तु की आधिकारिक पुष्टि विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत अध्ययन, वैज्ञानिक परीक्षण और प्रमाणिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

यदि यह संग्रह प्रारंभिक दावों के अनुरूप प्रमाणित होता है, तो यह भारतीय इतिहास, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान-विज्ञान के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है।

मुख्य बिंदु 

पश्चिम बंगाल के जमुरिया के चिंचूरिया गांव में दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियां मिलने का दावा।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इनकी आयु लगभग 200 से 500 वर्ष के बीच हो सकती है।
पांडुलिपियां कपड़े से बने पारंपरिक कागज और भोजपत्र पर लिखी गई बताई जा रही हैं।
इनमें धर्म, दर्शन, आयुर्वेद, गणित, कृषि और खगोल विज्ञान से जुड़ी सामग्री होने की संभावना।
परिवार का दावा है कि उनके पूर्वज काशीपुर रियासत के राजदरबार से जुड़े विद्वान थे।
वैज्ञानिक परीक्षण, कार्बन डेटिंग और मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग के बाद ही वास्तविक ऐतिहासिक महत्व स्पष्ट होगा।
विशेषज्ञों ने तत्काल संरक्षण और डिजिटलीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।

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Sat, 27 Jun 2026 18:27:00 +0530 news desk MPcg
फरीदाबाद में आवारा कुत्तों के आतंक के खिलाफ बच्चों का प्रदर्शन, बैनर&पोस्टर लेकर निकले मासूम; 10 वर्षीय बच्चे पर हमले के बाद बढ़ा आक्रोश https://citytoday.co.in/6961 https://citytoday.co.in/6961 हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सेक्टर-70 की मलबरी काउंटी सोसायटी में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर निवासियों का गुस्सा शनिवार को सड़कों पर दिखाई दिया। सोसायटी के बच्चों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया तथा प्रशासन से उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने की मांग की। प्रदर्शन में स्थानीय निवासी और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के पदाधिकारी भी शामिल हुए।

यह विरोध प्रदर्शन कुछ दिन पहले हुई उस घटना के बाद हुआ, जिसमें 10 वर्षीय एक बच्चे पर कथित तौर पर चार-पांच आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया था। घटना के बाद सोसायटी में रहने वाले परिवारों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों में डर का माहौल बना हुआ है।

10 वर्षीय बच्चे पर हमले के बाद भड़का आक्रोश

स्थानीय लोगों के अनुसार बुधवार को 10 वर्षीय पार्थ सोसायटी परिसर में था, तभी चार से पांच आवारा कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। बताया गया कि कुत्तों ने बच्चे को जमीन पर गिरा दिया और पंजों तथा दांतों से घायल कर दिया।

बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद उसे कुत्तों के बीच से सुरक्षित निकाला। घायल बच्चे को तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

इस घटना के बाद अभिभावकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है।

बैनर-पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरे बच्चे

शनिवार को सोसायटी के बच्चों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बच्चों ने सुरक्षित वातावरण की मांग करते हुए प्रशासन से आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान करने की अपील की।

बच्चों के साथ उनके अभिभावक, स्थानीय निवासी और आरडब्ल्यूए पदाधिकारी भी मौजूद रहे। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और इसका उद्देश्य प्रशासन का ध्यान बच्चों की सुरक्षा की ओर आकर्षित करना था।

RWA का दावा—सोसायटी में 32 से अधिक आवारा कुत्ते

रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के पदाधिकारियों का कहना है कि मलबरी काउंटी सोसायटी में 32 से अधिक आवारा कुत्ते मौजूद हैं।

उनके अनुसार हर महीने कुत्तों के हमले के 10 से अधिक मामले सामने आते हैं। बच्चों के अलावा बुजुर्ग और सुबह-शाम टहलने वाले लोग भी इन कुत्तों के कारण असुरक्षित महसूस करते हैं।

RWA ने दावा किया कि डर के कारण कई बच्चे पार्क, पार्किंग और बेसमेंट जैसे साझा क्षेत्रों में अकेले जाने से भी घबराने लगे हैं।

डॉग फीडिंग और प्रबंधन को लेकर भी विवाद

सोसायटी के कुछ निवासियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सार्वजनिक स्थानों पर नियमित रूप से आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, लेकिन डॉग फीडिंग से संबंधित निर्धारित नियमों और सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया जाता।

RWA का यह भी कहना है कि जब नगर निगम की टीम आवारा कुत्तों को पकड़ने या नसबंदी के लिए ले जाने पहुंचती है, तब कई बार विरोध के कारण कार्रवाई प्रभावित होती है।

हालांकि, इस संबंध में डॉग फीडर्स की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बिल्डर और एस्टेट प्रबंधन पर भी उठे सवाल

सोसायटी के निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार बिल्डर और एस्टेट मैनेजमेंट को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन प्रभावी समाधान नहीं निकाला गया।

निवासियों के अनुसार बार-बार शिकायतों के बावजूद सुरक्षा संबंधी स्थायी व्यवस्था नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ी है।

नगर निगम ने उठाए आठ आवारा कुत्ते

सोसायटी के निवासियों द्वारा जिला प्रशासन और नगर निगम से शिकायत किए जाने के बाद नगर निगम की टीम ने कार्रवाई करते हुए सोसायटी से आठ आवारा कुत्तों को पकड़ा है।

नगर निगम के मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ (MOH) नीतिश परवाल के अनुसार पकड़े गए सभी आवारा कुत्तों का नियमानुसार नसबंदी (Sterilization) कराई जाएगी। इसके बाद उनके संबंध में आगे की कार्रवाई पशु कल्याण और लागू नियमों के अनुसार की जाएगी।

प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग

प्रदर्शन के दौरान निवासियों ने प्रशासन से मांग की कि सोसायटी में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी और दीर्घकालिक व्यवस्था की जाए।

उन्होंने नियमित डॉग मैनेजमेंट, नसबंदी अभियान, टीकाकरण और जिम्मेदार एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की भी मांग की।

मुख्य बिंदु
फरीदाबाद के सेक्टर-70 स्थित मलबरी काउंटी सोसायटी में बच्चों ने आवारा कुत्तों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
हाल ही में 10 वर्षीय बच्चे पर चार-पांच आवारा कुत्तों के हमले के बाद विरोध तेज हुआ।
RWA के अनुसार सोसायटी में 32 से अधिक आवारा कुत्ते हैं।
निवासियों का दावा है कि हर महीने कुत्तों के हमले के 10 से अधिक मामले सामने आते हैं।
नगर निगम ने शिकायत के बाद आठ आवारा कुत्तों को पकड़ा है।
निगम अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए कुत्तों की नसबंदी कराई जाएगी।
निवासी बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
डॉग फीडिंग, सोसायटी प्रबंधन और नगर निगम की भूमिका को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

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Sat, 27 Jun 2026 16:56:15 +0530 news desk MPcg
गोवा में दर्दनाक हादसा: दोस्तों की चेतावनी अनसुनी कर चट्टानों पर बैठा पर्यटक, तेज लहरों में बहने से मौत https://citytoday.co.in/6920 https://citytoday.co.in/6920 गोवा के प्रसिद्ध बागा बीच पर एक दर्दनाक हादसे में कर्नाटक के बीजापुर निवासी 34 वर्षीय पर्यटक अशफाक मसली की समुद्र में डूबने से मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अशफाक ने शराब के नशे में सुरक्षा नियमों और दोस्तों की चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए समुद्र किनारे खतरनाक चट्टानों पर बैठने का जोखिम उठाया, जिसके बाद एक विशाल लहर उन्हें समुद्र में बहाकर ले गई।

वीडियो बनाते समय हुआ हादसा

पुलिस के अनुसार अशफाक मसली अपनी महिला मित्र के साथ छुट्टियां मनाने गोवा पहुंचे थे। दोनों ने दिनभर बागा बीच पर समय बिताया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अशफाक शराब के नशे में थे और बार-बार समुद्र के बेहद करीब स्थित चट्टानों पर जाने की कोशिश कर रहे थे।

घटना के समय उनकी महिला मित्र उनका वीडियो बना रही थी। वीडियो में अशफाक समुद्र की लहरों के बीच चट्टानों पर बैठे दिखाई देते हैं। इसी दौरान अचानक एक शक्तिशाली लहर आई और उन्हें संतुलन खोने पर मजबूर कर दिया। कुछ ही सेकंड में लहर उन्हें गहरे समुद्र में खींच ले गई।

दोस्तों ने रोका, लेकिन नहीं माने

महिला मित्र ने बताया कि उसने अशफाक को कई बार चेतावनी दी थी कि वह चट्टानों के पास न जाएं। उसने कहा कि समुद्र में उस समय लहरें बेहद ऊंची और खतरनाक थीं, लेकिन अशफाक ने किसी की बात नहीं सुनी।

स्थानीय पुलिसकर्मियों के अनुसार, दोस्तों ने भी उन्हें चट्टानों पर बैठने से मना किया था। इसके बावजूद वह समुद्र के बीच उभरी चट्टानों तक पहुंच गए और वहीं बैठ गए, जहां लगातार ऊंची लहरें टकरा रही थीं।

बचाव की कोशिशें नाकाम

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लहरों में बहने के बाद अशफाक कुछ मिनट तक पानी में संघर्ष करते दिखाई दिए। आसपास मौजूद लोगों और मित्रों ने शोर मचाकर मदद की गुहार लगाई। सूचना मिलते ही बचाव दल सक्रिय हुआ, लेकिन समुद्र की तेज धाराओं और खराब मौसम के कारण उन्हें सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका।

कुछ समय बाद उनका शव समुद्र तट के पास बरामद किया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

मानसून के दौरान पहले से जारी थी चेतावनी

गोवा सरकार द्वारा अधिकृत समुद्री सुरक्षा एजेंसी दृष्टि मरीन ने मानसून सीजन शुरू होने के साथ ही पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की थी। इसमें समुद्र के अंदर जाने, चट्टानों पर चढ़ने और ऊंची लहरों के दौरान समुद्र तट के नजदीक जाने से बचने की सलाह दी गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि मानसून के दौरान चट्टानी क्षेत्र अत्यधिक फिसलन भरे हो जाते हैं और समुद्र में अचानक उठने वाली ऊंची लहरें लोगों को बहा सकती हैं। इसी खतरे को देखते हुए गोवा के अधिकांश समुद्र तटों पर लाल झंडे लगाए गए हैं।

वाटर स्पोर्ट्स और समुद्र में उतरने पर प्रतिबंध

राज्य प्रशासन ने खराब मौसम और समुद्री परिस्थितियों को देखते हुए मानसून अवधि में समुद्र में तैराकी, वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों और मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा रखा है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार पर्यटकों से चेतावनियों का पालन करने की अपील कर रही हैं।

यह हादसा एक बार फिर साबित करता है कि समुद्र तटों पर सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि मानसून के दौरान किसी भी तरह का जोखिम न उठाएं और केवल लाइफगार्ड व सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें।

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Thu, 25 Jun 2026 14:26:34 +0530 news desk MPcg
FIFA World Cup 2026: मेसी के सम्मान में अर्जेंटीना ने रचा इतिहास, पेटागोनिया में 26 मीटर ऊंची विशाल प्रतिमा का लोकार्पण https://citytoday.co.in/6892 https://citytoday.co.in/6892 फीफा विश्व कप 2026 के दौरान अर्जेंटीना में फुटबॉल के महानायक लियोनेल मेसी के प्रति दीवानगी और सम्मान एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। दक्षिणी अर्जेंटीना के पेटागोनिया क्षेत्र में मेसी की 26 मीटर ऊंची विशाल प्रतिमा का अनावरण किया गया है, जिसे देश में उनके सम्मान में बनाई गई सबसे बड़ी प्रतिमा बताया जा रहा है। इस स्मारक ने न केवल फुटबॉल प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि यह अर्जेंटीना के खेल इतिहास और राष्ट्रीय गौरव का नया प्रतीक भी बन गया है।

यह प्रतिमा पेटागोनिया के कुट्रल को (Cutral Co) शहर के बाहरी इलाके में स्थापित की गई है। लगभग 70 टन स्टील और लोहे से निर्मित इस भव्य संरचना में मेसी को फीफा विश्व कप ट्रॉफी के साथ विजय उत्सव मनाते हुए दर्शाया गया है। प्रतिमा में उनके दोनों हाथ आसमान की ओर उठे हुए हैं, जो 2022 कतर विश्व कप जीतने के बाद उनके ऐतिहासिक जश्न की याद दिलाते हैं।

विश्व कप अभियान की शुरुआत के दिन हुआ लोकार्पण

प्रतिमा का उद्घाटन 16 जून को किया गया, जिस दिन अर्जेंटीना ने फीफा विश्व कप 2026 में अपने अभियान की शुरुआत की थी। उद्घाटन समारोह में स्थानीय प्रशासन, कलाकारों, खेल प्रेमियों और बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रशंसकों ने भाग लिया।

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार यह स्मारक न केवल मेसी की उपलब्धियों को समर्पित है, बल्कि अर्जेंटीना की उस पीढ़ी की भावनाओं का प्रतीक भी है जिसने मेसी के नेतृत्व में देश को तीसरा विश्व कप जीतते देखा।

18 महीने की मेहनत से तैयार हुई प्रतिमा

इस विशाल प्रतिमा का निर्माण अर्जेंटीना के मूर्तिकार एल्डो बेरोइसा ने किया है। उन्होंने करीब 18 महीनों की मेहनत के बाद इस परियोजना को पूरा किया।

एल्डो बेरोइसा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मेसी केवल एक महान खिलाड़ी नहीं बल्कि अर्जेंटीना की पहचान हैं। उनके अनुसार यह प्रतिमा किसी कलाकार की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे देश की ओर से मेसी को श्रद्धांजलि है।

उन्होंने कहा कि मेसी ने दशकों तक अर्जेंटीना का नाम दुनिया भर में रोशन किया है और वह देश के "प्राकृतिक राजदूत" की भूमिका निभाते रहे हैं।

2022 विश्व कप के ऐतिहासिक पल को किया गया अमर

प्रतिमा में मेसी के करियर के सबसे भावुक और यादगार क्षणों में से एक को दर्शाया गया है। दिसंबर 2022 में कतर विश्व कप जीतने के बाद मेसी ने ट्रॉफी के साथ जो भावुक जश्न मनाया था, उसी दृश्य को इस स्मारक में उकेरा गया है।

प्रतिमा में मेसी को अर्जेंटीना की जर्सी पहने हुए दिखाया गया है। उनकी मुद्रा उनके उस प्रसिद्ध अंदाज को भी दर्शाती है, जब वह गोल करने के बाद आसमान की ओर देखकर अपनी दिवंगत दादी को याद करते हैं। मेसी कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उनकी दादी ने ही उन्हें फुटबॉल खेलने के लिए सबसे अधिक प्रेरित किया था।

पर्यटन का नया आकर्षण बना कुट्रल को

प्रतिमा के अनावरण के बाद कुट्रल को शहर में पर्यटकों और फुटबॉल प्रशंसकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। आमतौर पर तेल उद्योग और औद्योगिक गतिविधियों के लिए पहचाने जाने वाला यह शहर अब खेल पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है।

स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि प्रतिमा के उद्घाटन के बाद होटल, रेस्तरां और स्थानीय बाजारों में लोगों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

1300 प्रशंसकों के नाम वाला विशेष म्यूरल भी चर्चा में

मेसी के सम्मान में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स प्रांत के बेराजटेगुई इलाके में एक विशेष म्यूरल भी तैयार किया गया है। इस कलाकृति में उन 1300 प्रशंसकों के नाम शामिल किए गए हैं जिन्होंने प्रतिमा और अन्य स्मारक परियोजनाओं के निर्माण में सहयोग दिया।

म्यूरल में मुस्कुराते हुए मेसी की तस्वीर बनाई गई है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

मेसी ने भेजा भावुक संदेश

इस परियोजना की जानकारी मिलने के बाद स्वयं लियोनेल मेसी ने कलाकारों और प्रशंसकों के लिए एक वीडियो संदेश भेजा। उन्होंने सभी समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए बेहद भावुक करने वाला है।

मेसी ने अपने संदेश में कहा कि इतने बड़े स्तर पर मिला प्यार और सम्मान उनके लिए गर्व की बात है और वह उन सभी लोगों के आभारी हैं जिन्होंने इस स्मारक को साकार करने में योगदान दिया।

विश्व कप 2026 में भी शानदार फॉर्म में मेसी

39वां जन्मदिन मना रहे लियोनेल मेसी फीफा विश्व कप 2026 में भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। टूर्नामेंट में अब तक वह पांच गोल कर चुके हैं और अर्जेंटीना को नॉकआउट चरण तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

2022 विश्व कप जीतने के बाद मेसी के नेतृत्व में अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का सपना देख रहा है। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि मेसी का अनुभव और नेतृत्व क्षमता इस अभियान में टीम की सबसे बड़ी ताकत है।

अर्जेंटीना के लिए सिर्फ खिलाड़ी नहीं, राष्ट्रीय गौरव हैं मेसी

लियोनेल मेसी को अर्जेंटीना में केवल एक फुटबॉलर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव, संघर्ष और सफलता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। विश्व कप, कोपा अमेरिका और कई अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों ने उन्हें देश के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है।

पेटागोनिया में स्थापित यह 26 मीटर ऊंची प्रतिमा इसी सम्मान और प्रेम का प्रमाण है, जिसने मेसी को खेल इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में हमेशा के लिए अमर कर दिया है।

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Wed, 24 Jun 2026 13:44:46 +0530 news desk MPcg
आंध्र प्रदेश में दिल दहला देने वाली घटना: आर्थिक तंगी और बीमारी से परेशान परिवार के चार सदस्यों की मौत, जांच में जुटी पुलिस https://citytoday.co.in/6858 https://citytoday.co.in/6858 आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले से एक बेहद दुखद और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक ही परिवार के चार सदस्य मृत पाए गए। मृतकों में पति-पत्नी और उनके दो नाबालिग बच्चे शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में आर्थिक तंगी, पारिवारिक तनाव और महिला की लंबे समय से चल रही बीमारी को इस त्रासदी की संभावित वजह माना जा रहा है। पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

मृतकों में दंपति और दो बच्चे शामिल

पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान दामोदर (30), उनकी पत्नी निर्मला, 13 वर्षीय पुत्र और 10 वर्षीय पुत्री के रूप में हुई है। घटना चित्तूर जिले के बेंगारूरेड्डीपल्ली क्षेत्र में सामने आई, जहां परिवार अपने घर में मृत मिला। सूचना मिलने पर पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए।

बीमारी और आर्थिक संकट ने बढ़ाई परेशानी

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दामोदर की पत्नी निर्मला पिछले काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार उन्हें पहले ब्रेन स्ट्रोक भी आया था, जिसके बाद इलाज पर लगातार खर्च हो रहा था। परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा था और बढ़ते खर्च ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया था।

पुलिस को आशंका है कि इन्हीं परिस्थितियों के कारण परिवार मानसिक दबाव में था। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।

घटनास्थल से मिले अहम सुराग

जांच अधिकारियों के मुताबिक घटनास्थल से कुछ महत्वपूर्ण सामग्री और दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले परिवार किन परिस्थितियों से गुजर रहा था और क्या कोई अन्य कारण भी इस दुखद कदम के पीछे था। परिवार के रिश्तेदारों और पड़ोसियों से भी पूछताछ की जा रही है।

पुलिस सभी पहलुओं से कर रही जांच

चित्तूर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फोरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल आत्महत्या की आशंका सबसे प्रबल है, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

बढ़ती आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर फिर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर उन परिवारों की स्थिति को सामने लाती है जो गंभीर बीमारी, बढ़ते चिकित्सा खर्च और आर्थिक अस्थिरता के कारण कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और समय पर मनोसामाजिक सहयोग ऐसी परिस्थितियों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

फिलहाल पूरे इलाके में शोक का माहौल है और स्थानीय लोग इस घटना से स्तब्ध हैं। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

नोट: इस मामले में जांच अभी जारी है। आत्महत्या के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।

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Tue, 23 Jun 2026 12:17:02 +0530 news desk MPcg
डांसिंग गर्ल विवाद पर एनसीईआरटी का स्पष्टीकरण: चित्र को ‘प्रारंभिक त्रुटि’ बताया, डिजिटल संस्करण में सुधार शुरू https://citytoday.co.in/6746 https://citytoday.co.in/6746  सिंधु घाटी सभ्यता की विश्वप्रसिद्ध कांस्य मूर्ति ‘डांसिंग गर्ल’ को लेकर एनसीईआरटी की कक्षा 9 की कला पुस्तक ‘मधुरिमा’ में किए गए चित्र संशोधन पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मामला सामने आने के बाद एनसीईआरटी ने इसे “प्रारंभिक प्रकाशन त्रुटि” बताया है और कहा है कि डिजिटल संस्करण में मूल चित्र को अपडेट किया जा रहा है, जबकि आगामी मुद्रित संस्करणों में भी प्रामाणिक चित्र ही शामिल किया जाएगा। संस्थान ने यह भी कहा है कि भविष्य में शैक्षणिक सामग्री की जांच प्रक्रिया को और अधिक सख्त किया जाएगा।

विवाद की पृष्ठभूमि: यह विवाद तब शुरू हुआ जब कक्षा 9 की पुस्तक में ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर में मूर्ति के ऊपरी हिस्से को शेडिंग के जरिए ढका हुआ दिखाया गया। इसके बाद इतिहासकारों और शिक्षा विशेषज्ञों ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यह बदलाव मूल ऐतिहासिक कलाकृति के स्वरूप को बदल देता है। उनका तर्क है कि इससे छात्रों को गलत ऐतिहासिक समझ मिल सकती है।

एनसीईआरटी का पक्ष: एनसीईआरटी के अनुसार यह बदलाव जानबूझकर नहीं किया गया था, बल्कि प्रकाशन प्रक्रिया के दौरान हुई प्रस्तुति संबंधी गलती थी। संस्थान ने स्पष्ट किया कि डिजिटल माध्यम में अब सही और मूल छवि को अपडेट किया जा रहा है तथा प्रिंट संस्करणों में भी सुधार किया जाएगा। साथ ही सभी पाठ्यपुस्तकों की सामग्री की पुनः समीक्षा की जाएगी।

ऐतिहासिक महत्व: ‘डांसिंग गर्ल’ सिंधु घाटी सभ्यता की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कांस्य मूर्ति है, जिसे लगभग 2600 ईसा पूर्व का माना जाता है। इसे 1926 में मोहनजोदड़ो की खुदाई के दौरान पुरातत्वविद अर्नेस्ट मैके ने खोजा था। लगभग साढ़े दस सेंटीमीटर ऊंची यह मूर्ति प्राचीन धातु कला की उत्कृष्ट मिसाल है और वर्तमान में राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में संरक्षित है।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया: इतिहास और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों में ऐतिहासिक धरोहरों को उनके मूल स्वरूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि किसी भी प्रकार का दृश्य परिवर्तन ऐतिहासिक तथ्यों की गलत व्याख्या का कारण बन सकता है और छात्रों के ज्ञान पर असर डाल सकता है।

सोशल मीडिया पर चर्चा: यह पूरा मामला अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खासकर इंस्टाग्राम पर भी तेजी से वायरल हो गया है। यहां इस मुद्दे पर मीम्स बन रहे हैं और ‘डांसिंग गर्ल’ को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जिससे यह विषय ट्रेंडिंग चर्चा का हिस्सा बन गया है।

आगे की प्रक्रिया: एनसीईआरटी ने संकेत दिया है कि पूरे मामले की आंतरिक समीक्षा की जाएगी और भविष्य में प्रकाशन से पहले अधिक सख्त संपादकीय जांच लागू की जाएगी। फिलहाल डिजिटल सुधार प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और यह मामला शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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Thu, 18 Jun 2026 19:08:28 +0530 news desk MPcg
अमेरिका में पुरुषों के खिलाफ हिंसा भी बड़ी चुनौती, शर्म और सामाजिक दबाव के कारण नहीं कराते शिकायत https://citytoday.co.in/6726 https://citytoday.co.in/6726 जब सुरक्षा और हिंसा की बात होती है तो अक्सर महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर चर्चा होती है, लेकिन दुनिया के कई देशों में पुरुष भी शारीरिक, मानसिक और यौन हिंसा का सामना करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक सोच और शर्म के कारण बड़ी संख्या में पुरुष अपने साथ हुई घटनाओं की शिकायत तक दर्ज नहीं कराते।

अमेरिका जैसे विकसित देश में भी पुरुषों के खिलाफ घरेलू हिंसा, शारीरिक हमला और यौन उत्पीड़न के मामले सामने आते रहते हैं। कई शोधों और सर्वेक्षणों के अनुसार पुरुष पीड़ित अक्सर इस डर से चुप रहते हैं कि समाज उनकी बात पर विश्वास नहीं करेगा या उनकी मर्दानगी पर सवाल उठाए जाएंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों के खिलाफ होने वाली हिंसा के मामलों की रिपोर्टिंग महिलाओं की तुलना में काफी कम होती है। कई पीड़ित मानसिक तनाव, अवसाद और सामाजिक दबाव के कारण पुलिस या सहायता एजेंसियों तक नहीं पहुंच पाते। यही वजह है कि वास्तविक मामलों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकती है।

घरेलू हिंसा के मामलों में भी पुरुष पीड़ितों की मौजूदगी को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया है। कई मामलों में पुरुष अपने साथी द्वारा मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना झेलते हैं, लेकिन सामाजिक कलंक के डर से चुप रहना पसंद करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंसा का शिकार चाहे महिला हो या पुरुष, दोनों को समान रूप से कानूनी सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और न्याय मिलने का अधिकार है। जागरूकता बढ़ाने और पीड़ितों को बिना भेदभाव सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है।

हालांकि, उपलब्ध शोध यह भी बताते हैं कि अमेरिका में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और यौन अपराधों की संख्या अब भी पुरुषों की तुलना में अधिक दर्ज होती है। इसलिए सुरक्षा और सहायता तंत्र को सभी पीड़ितों के लिए समान रूप से संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है।

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Thu, 18 Jun 2026 15:10:32 +0530 news desk MPcg
मधुबनी में भूमि विवाद ने लिया हिंसक रूप, बुजुर्ग ने आत्मदाह की कोशिश के बाद बवाल; भीड़ ने कोर्ट कमिश्नर पर हमला https://citytoday.co.in/6692 https://citytoday.co.in/6692 मधुबनी (बिहार): बिहार के मधुबनी जिले में भूमि विवाद के दौरान मंगलवार को स्थिति अचानक बेकाबू हो गई। बेनीपट्टी थाना क्षेत्र के अधवारी गांव में कोर्ट के आदेश पर दखल-दिहानी कराने पहुंची प्रशासनिक टीम के सामने एक बुजुर्ग ने आत्मदाह की कोशिश की, जिसके बाद मौके पर तनाव फैल गया और हिंसा भड़क उठी।

जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला लंबे समय से चल रहे जमीन विवाद से जुड़ा है, जिसमें दो पक्षों के बीच मालिकाना हक को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही थी। कोर्ट के आदेश के तहत प्रशासनिक टीम जमीन पर कब्जा दिलाने पहुंची थी, तभी एक पक्ष के बुजुर्ग ने खुद पर केरोसिन डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। घटना के बाद स्थिति और बिगड़ गई और भीड़ आक्रोशित हो उठी।

भीड़ का प्रशासनिक टीम पर हमला, कोर्ट कमिश्नर की पिटाई

आत्मदाह की कोशिश के बाद माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि भीड़ ने प्रशासनिक टीम पर हमला कर दिया। इस दौरान अंचलाधिकारी और अपर थानाध्यक्ष किसी तरह मौके से सुरक्षित निकल गए, लेकिन कोर्ट द्वारा नियुक्त कमिश्नर भीड़ के हत्थे चढ़ गए। आरोप है कि उन्हें बंधक बनाकर पिटाई की गई।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। आसपास के कई थानों की पुलिस को तैनात कर दिया गया है।

बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में इलाज जारी

आत्मदाह की कोशिश में झुलसे बुजुर्ग को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र भेजने की प्रक्रिया चल रही है।

लंबे समय से चल रहा है जमीन विवाद

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह विवाद कई वर्षों से चल रहा था और दोनों पक्षों के बीच पहले भी अदालत में कई बार सुनवाई हो चुकी है। हाल ही में कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन जमीन का कब्जा दिलाने पहुंचा था, जिसके बाद यह घटना हुई।

पुलिस जांच में जुटी, गांव में तनाव

घटना के बाद पुलिस ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है और हमलावरों की पहचान की जा रही है। अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि कानून व्यवस्था भंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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Wed, 17 Jun 2026 17:29:26 +0530 news desk MPcg
श्रीनगर में भीख मांगने पर लगा प्रतिबंध, ‘स्माइल’ योजना के तहत पुनर्वास अभियान तेज; प्रशासन ने लोगों से मांगा सहयोग https://citytoday.co.in/6675 https://citytoday.co.in/6675 श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में लगातार बढ़ रही भिक्षावृत्ति पर नियंत्रण पाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। प्रशासन ने पूरे जिले में सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगने पर प्रतिबंध लागू कर दिया है और केंद्र सरकार की ‘स्माइल’ (SMILE - Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना के तहत भिक्षावृत्ति में शामिल लोगों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है।

प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल भीख मांगने पर रोक लगाना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों को सम्मानजनक जीवन, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में बड़ी संख्या में भिक्षावृत्ति में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें पुनर्वास योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया है और अब इस अभियान को और व्यापक बनाया जा रहा है।

मोबाइल प्रचार वाहनों से दी जा रही जानकारी

प्रशासन ने शहर के विभिन्न इलाकों में मोबाइल प्रचार वाहन तैनात किए हैं, जो लोगों को भीख मांगने पर लगाए गए प्रतिबंध और पुनर्वास योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं। इन वाहनों के माध्यम से नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे भिक्षावृत्ति को बढ़ावा देने के बजाय ऐसे लोगों की सूचना प्रशासन को दें, ताकि उन्हें उचित सहायता और पुनर्वास उपलब्ध कराया जा सके।

आम जनता से सहयोग की अपील

जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई व्यक्ति भीख मांगता दिखाई दे तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं। प्रशासन का कहना है कि ऐसे लोगों को दंडित करने के बजाय उन्हें सरकारी योजनाओं, आश्रय गृहों, कौशल विकास कार्यक्रमों और रोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

‘स्माइल’ योजना का उद्देश्य

केंद्र सरकार की ‘स्माइल’ योजना का मुख्य उद्देश्य समाज के हाशिए पर रह रहे लोगों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। इस योजना के तहत भिक्षावृत्ति में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सुविधाएं, पुनर्वास केंद्र और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

सामाजिक भागीदारी पर जोर

प्रशासन का मानना है कि भिक्षावृत्ति जैसी सामाजिक समस्या का समाधान केवल सरकारी कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे जरूरतमंद लोगों की मदद संगठित पुनर्वास व्यवस्था के माध्यम से करें, ताकि उन्हें स्थायी आजीविका मिल सके और वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

प्रशासन का लक्ष्य है कि इस अभियान के जरिए श्रीनगर में भिक्षावृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाए और अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाए।

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Wed, 17 Jun 2026 13:53:13 +0530 news desk MPcg
दिल्ली मेट्रो और नमो भारत में किस टेलीकॉम कंपनी का नेटवर्क सबसे कमजोर? TRAI की रिपोर्ट में सामने आई हकीकत https://citytoday.co.in/6616 https://citytoday.co.in/6616 नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर की मेट्रो और नमो भारत रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) में सफर करने वाले लाखों यात्रियों को अक्सर कॉल ड्रॉप, कमजोर सिग्नल और धीमी इंटरनेट स्पीड जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अब भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की हालिया ड्राइव टेस्ट रिपोर्ट ने इन शिकायतों की पुष्टि करते हुए विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क प्रदर्शन की तस्वीर सामने रखी है।

TRAI ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में संचालित दिल्ली मेट्रो और नमो भारत RRTS के कुल 15 कॉरिडोर, लगभग 490 किलोमीटर मार्ग और दर्जनों स्टेशनों पर नेटवर्क गुणवत्ता का आकलन करने के लिए विस्तृत ड्राइव टेस्ट किया। इस परीक्षण में कॉल कनेक्टिविटी, कॉल ड्रॉप, वॉइस क्वालिटी, डेटा डाउनलोड स्पीड, अपलोड स्पीड और नेटवर्क उपलब्धता जैसे कई तकनीकी मानकों की जांच की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी टेलीकॉम कंपनी MTNL का प्रदर्शन सबसे कमजोर पाया गया। कई स्थानों पर नेटवर्क उपलब्धता सीमित रही, जबकि कॉल कनेक्ट होने और डेटा सेवाओं के उपयोग में भी यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से भूमिगत मेट्रो स्टेशनों और सुरंग वाले हिस्सों में MTNL की सेवाएं अन्य कंपनियों की तुलना में काफी कमजोर दर्ज की गईं।

वहीं Jio ने डाउनलोड स्पीड के मामले में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। कई कॉरिडोर पर इसकी औसत डेटा स्पीड अन्य ऑपरेटरों से बेहतर रही, जिससे वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन पेमेंट और अन्य इंटरनेट सेवाओं का अनुभव अपेक्षाकृत बेहतर पाया गया। अन्य निजी टेलीकॉम कंपनियों का प्रदर्शन अलग-अलग रूटों पर भिन्न रहा, लेकिन कई स्थानों पर नेटवर्क कवरेज और स्पीड में सुधार की जरूरत महसूस की गई।

TRAI की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि व्यस्त स्टेशनों, इंटरचेंज पॉइंट्स और भूमिगत सेक्शनों में नेटवर्क कवरेज की गुणवत्ता समान नहीं है। कई यात्रियों को यात्रा के दौरान इंटरनेट रुकने, वीडियो कॉल टूटने और ऑनलाइन सेवाओं के बाधित होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

रिपोर्ट जारी करते हुए TRAI ने सभी टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं से मेट्रो और RRTS कॉरिडोर में अतिरिक्त नेटवर्क उपकरण लगाने, इन-बिल्डिंग सॉल्यूशन (IBS) मजबूत करने, कवरेज बढ़ाने, कॉल ड्रॉप कम करने और डेटा स्पीड में सुधार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। नियामक का कहना है कि बढ़ती डिजिटल निर्भरता और सार्वजनिक परिवहन का तेजी से विस्तार देखते हुए यात्रियों को निर्बाध मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

दिल्ली मेट्रो और नमो भारत नेटवर्क का उपयोग प्रतिदिन लाखों लोग करते हैं। ऐसे में मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता केवल संचार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑनलाइन टिकटिंग, यूपीआई भुगतान, डिजिटल कार्य और आपातकालीन संपर्क जैसी सेवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण हो गई है। TRAI की यह रिपोर्ट टेलीकॉम कंपनियों के लिए नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

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Tue, 16 Jun 2026 13:12:21 +0530 news desk MPcg
सोशल मीडिया पर छाई अजीबो&गरीब कार, एक गाड़ी के ऊपर दूसरी गाड़ी लगाकर बनाया डबल डेकर लुक https://citytoday.co.in/6044 https://citytoday.co.in/6044 सोशल मीडिया पर इन दिनों एक हैरान कर देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ युवाओं ने देसी जुगाड़ लगाकर एक साधारण कार को ‘डबल डेकर कार’ में बदल दिया है। यह अनोखा प्रयोग देखकर लोग हैरान भी हैं और मनोरंजन भी ले रहे हैं।

कार के ऊपर फिट की दूसरी कार

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक कार की छत पर दूसरी कार का ढांचा वेल्डिंग करके फिट किया गया है। इस तरह पूरी गाड़ी दो मंजिला यानी डबल डेकर जैसी दिखने लगती है। यह वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया है और इसे देखने के बाद लोग इसे क्रिएटिविटी और पागलपन का अनोखा मिश्रण बता रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लाखों व्यूज

इस ‘डबल डेकर कार’ के वीडियो को अब तक लाखों लोग देख चुके हैं और हजारों लाइक्स भी मिल चुके हैं। कमेंट सेक्शन में यूजर्स मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे “देसी इंजीनियरिंग” बता रहे हैं तो कुछ इसे “पेट्रोल के बढ़ते दामों का समाधान” कहकर मजाक बना रहे हैं।

ड्राइविंग और सेफ्टी पर सवाल

हालांकि इस तरह की मॉडिफाइड गाड़ी को लेकर कई यूजर्स ने सुरक्षा और कानूनी पहलुओं पर सवाल भी उठाए हैं। लोगों का कहना है कि सड़क पर इस तरह का प्रयोग खतरनाक हो सकता है और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन भी हो सकता है।

वायरल कंटेंट की बढ़ती क्रेजी दुनिया

यह वीडियो एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए लोग किस हद तक क्रिएटिव और अनोखे प्रयोग करने लगे हैं।

इंटरनेट पर छाया ‘देसी जुगाड़’

भले ही यह गाड़ी सड़क पर चले या नहीं, लेकिन इस ‘डबल डेकर कार’ ने इंटरनेट पर जबरदस्त चर्चा जरूर बटोर ली है और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

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Sat, 23 May 2026 15:41:24 +0530 news desk MPcg
प्रकृति के 5 सबसे अजीब फूल, जिन्हें देखकर यकीन करना मुश्किल हो जाए कि ये सच में असली हैं https://citytoday.co.in/5866 https://citytoday.co.in/5866
प्रकृति अपने आप में रहस्यों और चमत्कारों से भरी हुई है। जहां गुलाब जैसे फूल सुंदरता और प्रेम का प्रतीक माने जाते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी फूल हैं जो अपनी अनोखी बनावट और रूप के कारण हर किसी को हैरान कर देते हैं। ये फूल देखने में इतने अजीब होते हैं कि कई बार यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि ये वास्तव में प्राकृतिक हैं।

1. पैरेट फ्लावर

यह फूल उड़ते हुए तोते जैसा दिखाई देता है। इसका लाल और बैंगनी रंग इसे और आकर्षक बनाता है। इसे पहली बार 1901 में Joseph Dalton Hooker ने वर्णित किया था। यह भारत, म्यांमार और थाईलैंड में पाया जाता है।

2. स्नैपड्रैगन

खिलने पर यह फूल सामान्य और सुंदर लगता है, लेकिन मुरझाने के बाद इसके बीज खोपड़ी जैसे आकार में बदल जाते हैं, जो इसे रहस्यमयी बनाता है।

3. मंकी ऑर्किड 

यह दुर्लभ फूल इक्वाडोर और पेरू के जंगलों में पाया जाता है। इसकी बनावट बंदर के चेहरे जैसी होती है, इसी कारण इसे मंकी ऑर्किड कहा जाता है।

4. हूकर लिप्स 

इस फूल की पंखुड़ियां बिल्कुल इंसानी होंठों जैसी दिखाई देती हैं। इसका चमकीला लाल रंग इसे और भी अलग बनाता है। यह मध्य और दक्षिण अमेरिका के वर्षावनों में पाया जाता है।

5. स्वैडल्ड बेबी ऑर्किड 

यह फूल देखने में ऐसे लगता है जैसे किसी शिशु को कपड़े में लपेटा गया हो। यह कोलंबिया के एंडीज क्षेत्र में पाया जाता है और अपनी अनोखी बनावट के लिए जाना जाता है।

ये सभी फूल दिखाते हैं कि प्रकृति कितनी अनोखी और रहस्यमयी हो सकती है। हर फूल सिर्फ सुंदरता नहीं, बल्कि एक अनोखा प्राकृतिक चमत्कार भी होता है।

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Sat, 16 May 2026 15:53:30 +0530 news desk MPcg
कार नंबर में छुपा CM का संकेत ? विजय थलपति का वायरल वीडियो मचा रहा बवाल https://citytoday.co.in/5756 https://citytoday.co.in/5756

तमिल सुपरस्टार विजय थलपति एक बार फिर सुर्खियों में हैं—लेकिन इस बार वजह सिर्फ उनकी फिल्म नहीं, बल्कि उससे जुड़ा एक दिलचस्प “संयोग” है। उनकी 2024 में रिलीज़ हुई फिल्म द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम (GOAT) का एक सीन इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इस वायरल क्लिप में विजय एक कार पर बैठे नजर आते हैं, जिसकी नंबर प्लेट पर लिखा है—“TN 07 CM 2026”। अब जब तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री और उनकी पार्टी के शानदार प्रदर्शन की चर्चा जोरों पर है, लोग इस नंबर को उनके संभावित मुख्यमंत्री बनने से जोड़कर देख रहे हैं।

“TN” यानी तमिलनाडु, “CM 2026” यानी मुख्यमंत्री 2026—इस नंबर प्लेट को लेकर इंटरनेट पर यूजर्स इसे महज फिल्मी डिटेल नहीं, बल्कि “भविष्यवाणी” जैसा बता रहे हैं। खास बात यह है कि यह वीडियो उस समय से ही चर्चा में था, जब विजय ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी और चुनाव प्रचार में जुटे थे।

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इसे केवल एक संयोग मान रहे हैं और फिल्मी क्रिएटिविटी का हिस्सा बता रहे हैं। लेकिन फैंस के बीच यह क्लिप एक अलग ही उत्साह पैदा कर रहा है, जहां सिनेमा और राजनीति का अनोखा मेल देखने को मिल रहा है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह वायरल “संयोग” हकीकत में बदलता है या सिर्फ सोशल मीडिया की एक और सनसनी बनकर रह जाता है।

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Wed, 06 May 2026 15:09:30 +0530 news desk MPcg
गर्मी में रसोई में खाना जल्दी हो रहा खराब, दाल को फ्रेश रखने के आसान तरीके https://citytoday.co.in/5690 https://citytoday.co.in/5690 गर्मी में रसोई में खाना जल्दी हो रहा खराब, दाल को फ्रेश रखने के

आसान तरीके ! 

गर्मियों में तपिश केवल बाहर ही नहीं, बल्कि घर के अंदर भी महसूस होती है. गर्मी में घर भट्टी की तरह तपता रहता है. लेकिन जो हिस्सा सबसे ज्यादा गर्म रहता है वो रसोई घर है. जैसा-जैसे बाहर तापमान बढ़ता है, वैसे-वैसे रसोई घर भी तपने लगता है. आलम ये होता है कि रसोई घर में खाना जल्दी-जल्दी खराब होने लगता है. इस मौसम में उमस और गर्मी के कारण बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं, जिससे पका हुआ खाना चंद घंटों में ही खट्टा और खराब होने लगता है.

दूध से लेकर दही खट्टा होने के साथ ही जो एक चीज जल्दी खराब होती है, वो है पकी हुई दाल. प्रोटीन से भरपूर होने के कारण दाल बहुत जल्दी फर्मेंट होने लगती है, जिससे वो खट्टी हो जाती है और उसमें झाग बनने लगते हैं. कई बार तो सुबह बनाई गई दाल लंच तक ही खराब हो जाती है. अगर आपकी रसोई में भी ये समस्या देखने मिलती है, तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है. अगर आप कुछ आसान और स्मार्ट ट्रिक्स को अपनाएं, तो आप भीषण गर्मी में भी दाल को लंबे समय तक फ्रेश बनी रहती है.

1. ज्यादा देर बाहर न रखें: दाल को पकाने के बाद ज्यादा देर बाहर न रखा छोड़ें. गर्मी में दाल को ज्यादा देर बाहर रखना ठीक नहीं है. जैसे ही दाल ठंडी हो जाए, वैसे ही उसे फ्रिज में रख दें. वरना इसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ने लगते हैं.

2. फ्रिज में रखने का सही तरीका: दाल को स्टोर करते समय साफ और एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करें. दाल पूरी तरह ठंडी होने के बाद ही उसे बंद करके फ्रिज में रखें, ताकि नमी और गंदगी अंदर न जा सके.

3. पहले पूरी तरह ठंडा करें: अगर आप दाल पकने के बाद तुरंत ही फ्रिज में रख देते हैं तो वो भी गलत है. गर्म दाल को सीधे फ्रिज में रखना सही नहीं होता. इससे फ्रिज का तापमान बिगड़ सकता है और बाकी चीजों पर भी असर पड़ता है. इसलिए दाल को पहले नॉर्मल तापमान पर ठंडा करें, फिर स्टोर करें.

4. दोबारा गर्म करने का सही तरीका: दाल को बार-बार गर्म करने की गलती न करें. ऐसा करने से उसका स्वाद और क्वालिटी खराब होती है. हमेशा उतनी ही दाल निकालकर गर्म करें जितनी खानी हो और बाकी दाल को फ्रिज में ही रहने दें. जरूरत पड़े तो दिन में 1–2 बार उबालना फायदेमंद होता है.

5. नमक और मसालों का ध्यान रखें: दाल में हमेशा नमक और मसालों को ध्यान से डालें. कम नमक वाली दाल जल्दी खराब हो सकती है. सही मात्रा में नमक और हल्दी डालने से दाल ज्यादा समय तक सुरक्षित रहती है, क्योंकि हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं.

6. खट्टापन बाद में डालें: अगर आपको दाल में नींबू डालकर खाना पसंद है तो जान लें कि वो बहुत ध्यान से डालना चाहिए. नींबू या इमली जैसी खट्टी चीजें दाल को जल्दी खराब कर सकती हैं. इसलिए इन्हें हमेशा दाल गर्म करने के बाद ही डालें, पहले से मिलाने से दाल जल्दी खट्टी हो जाती है.

7. सही बर्तन चुनें: दाल को स्टोर करने के लिए प्लास्टिक के बजाय स्टील या मिट्टी के बर्तन बेहतर होते हैं. ये तापमान को संतुलित रखते हैं और दाल को ज्यादा देर तक ताजी बनाए रखते हैं.

8. समय पर करें इस्तेमाल: फ्रिज में रखी दाल भी हमेशा नहीं चलती. इसे 3–5 दिनों के अंदर इस्तेमाल कर लेना चाहिए, क्योंकि ज्यादा समय बाद इसमें बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं.

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Thu, 30 Apr 2026 13:49:55 +0530 news desk MPcg
एमपी का ‘देसी फ्रिज’ बना हिट: मालवा&निमाड़ के मटकों की देशभर में बढ़ी डिमांड https://citytoday.co.in/5346 https://citytoday.co.in/5346 नई दिल्ली
भीषण गर्मी की आहट होते ही घरों में फ्रिज से ज्यादा 'देसी फ्रिज' यानी मिट्टी के मटकों की मांग बढ़ गई है। आपको जानकर हैरानी होगी कि मध्य प्रदेश, खासकर मालवा और निमाड़ क्षेत्र में बने मटके आज सिर्फ प्रदेश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी गूंज दक्षिण भारत तक पहुंच चुकी है। अपनी खास बनावट और प्राकृतिक शीतलता के कारण एमपी के ये मटके राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की पहली पसंद बन गए हैं।

क्यों खास हैं मालवा-निमाड़ के मटके?
मध्य प्रदेश के इन मटकों को 'देसी फ्रिज' की संज्ञा दी जाती है। इनकी लोकप्रियता के पीछे छिपे हैं ये चार मुख्य कारण:

विशेषता     विवरण
विशेष काली मिट्टी: प्राकृतिक खनिजों से भरपूर काली मिट्टी का उपयोग किया जाता है, जो पानी को शुद्ध रखती है।
कठोर तपस्या:     इन्हें बनाने में तीन दिन की कड़ी मेहनत लगती है और भट्टी में तब तक तपाया जाता है जब तक ये पूरी तरह लाल और मजबूत न हो जाएं।
बैक्टीरिया मुक्त: मिट्टी की प्राकृतिक संरचना के कारण इसमें हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पनपते, जिससे पानी स्वास्थ्य के लिए अमृत समान होता है।
कुदरती कूलिंग: ये मटके भीषण गर्मी में भी पानी को फ्रिज जैसा ठंडा रखने की क्षमता रखते हैं।

सात समंदर तो नहीं, पर सात राज्यों पार है डिमांड
 मालवा के कारीगरों की बेहतरीन नक्काशी और गुणवत्ता का ही परिणाम है कि यहां के मटके अब दक्षिण भारत के राज्यों में भी सप्लाई हो रहे हैं। गुजरात की विशेष मिट्टी से बने आकर्षक बर्तन भी अब बाजार में कड़ी टक्कर दे रहे हैं, लेकिन पारंपरिक काली मिट्टी के मटकों का दबदबा आज भी बरकरार है।
 
तीन दिन की मेहनत से तैयार होता है एक 'फ्रिज'
एक मटके को आकार देने से लेकर उसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया बेहद जटिल है। कारीगरों के अनुसार, मिट्टी को गूंथने, चाक पर चढ़ाने और फिर सुखाने के बाद आग में तपाने की प्रक्रिया में लगभग 72 घंटे का समय लगता है। यही 'तपस्या' मटके को इतनी मजबूती देती है कि वह सालों-साल चलता है।
 
स्वास्थ्य और स्वाद का संगम
डॉक्टरों का भी मानना है कि मिट्टी के घड़े का पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म सुधरता है और गले से जुड़ी बीमारियां नहीं होतीं। फ्रिज के प्लास्टिक और गैस के विपरीत, मिट्टी के मटके पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) होते हैं।

इंदौर, उज्जैन, खरगोन और खंडवा के बाजारों में मटकों की दुकानें सज चुकी हैं। इस साल डिजाइनदार और स्टैंड वाले मटकों की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है।

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Mon, 30 Mar 2026 13:03:56 +0530 news desk MPcg
IPS केके बिश्नोई ने रिंग सेरेमनी में ASP अंशिका को गोदी में उठाया, प्यार करेगी गाने पर डांस से जीता दिल https://citytoday.co.in/5323 https://citytoday.co.in/5323 संभल

यूपी की चर्चित आईपीएस जोड़ी संभल के एसपी केके बिश्नोई और बरेली की एएसपी अंशिका वर्मा इन दिनों अपनी शादी को लेकर सुर्खियों में हैं. 29 मार्च को दोनों सात फेरे लेने जा रहे हैं, लेकिन उससे पहले  हुई उनकी रिंग सेरेमनी ने सोशल मीडिया पर अलग ही माहौल बना दिया है। 

रिंग सेरेमनी का एक वीडियो खास तौर पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें केके बिश्नोई, अंशिका वर्मा को गोदी में उठाए नजर आते हैं और बैकग्राउंड में 'चल प्यार करेगी, हां जी-हां जी…' गाना बज रहा है. यह वीडिया अब इंटरनेट पर भी लोगों का दिल जीत रहा है. गुरुवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सगाई की रस्म पूरी हुई. परिवार के सदस्य, करीबी रिश्तेदार और कुछ खास मेहमान इस मौके पर मौजूद रहे. कार्यक्रम में सादगी के साथ पारंपरिक रंग देखने को मिला, वहीं शाम होते-होते माहौल में उत्सव का रंग घुल गया. रात में आयोजित रिंग सेरेमनी में दोनों अफसरों का अंदाज बिल्कुल अलग नजर आया. केके बिश्नोई काला चश्मा लगाए, आत्मविश्वास से भरे हुए मंच पर पहुंचे, वहीं अंशिका वर्मा भी बेहद खूबसूरत अंदाज में नजर आईं. दोनों की केमिस्ट्री ने पूरे कार्यक्रम का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 

अंगूठी पहनाने का खास पल

रिंग सेरेमनी का सबसे अहम क्षण वह था जब दोनों ने एक-दूसरे को अंगूठी पहनाई. पहले केके बिश्नोई ने अंशिका वर्मा को रिंग पहनाई, फिर अंशिका ने भी मुस्कुराते हुए उन्हें अंगूठी पहनाई. इसके बाद दोनों ने हाथ पकड़कर उन्हें ऊपर उठाया और खुशी का इजहार किया. रिंग सेरेमनी के बाद जैसे ही संगीत का दौर शुरू हुआ, माहौल पूरी तरह बदल गया. मंच पर रोशनी, संगीत और तालियों के बीच दोनों अफसर एक साथ नजर आए. सबसे पहले दोनों भागम भाग फिल्म के सिग्नल… प्यार का सिग्नल गाने पर थिरकते दिखे. एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखकर, कभी साथ चलते तो कभी ताल पर झूमते रहे.  इसके बाद चल प्यार करेगी, हां जी-हां जी… गाना बजा और यहीं से कार्यक्रम का सबसे चर्चित पल सामने आया. केके बिश्नोई ने अचानक अंशिका वर्मा को गोदी में उठा लिया. इस पर वहां मौजूद मेहमानों ने तालियों और हूटिंग के साथ उनका उत्साह बढ़ाया। 

सोशल मीडिया पर छाया वीडियो
रिंग सेरेमनी के वीडियो और तस्वीरें सामने आते ही वायरल हो गईं. कमेंट सेक्शन में यूजर्स इस पल को रियल, क्यूट और दिल छू लेने वाला बता रहे हैं. कई लोग यह भी लिख रहे हैं कि इतने जिम्मेदार पदों पर रहने के बावजूद दोनों का यह सहज अंदाज प्रेरणादायक है. कार्यक्रम में दोनों परिवारों के सदस्य पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए. पारंपरिक रस्मों से लेकर आधुनिक अंदाज के जश्न तक, हर पल में परिवार का साथ साफ दिखाई दिया. रिंग सेरेमनी में शामिल होने के लिए मुरादाबाद से बीजेपी विधायक रितेश गुप्ता भी पहुंचे. उनके अलावा प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग भी इस खुशी के मौके के गवाह बने। 

शादी की तैयारियां तेज
रिंग सेरेमनी के बाद अब शादी की तैयारियां और तेज हो गई हैं. 27 मार्च को बाड़मेर स्थित कृष्ण निवास में हल्दी और संगीत कार्यक्रम आयोजित होंगे. इसके बाद 29 मार्च को बाड़मेर में ही दोनों सात फेरे लेंगे. यह समारोह अपेक्षाकृत निजी रखा जाएगा, जिसमें सीमित मेहमान ही शामिल होंगे. 30 मार्च को जोधपुर के लारिया रिसॉर्ट में भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में मेहमानों के पहुंचने की संभावना है. केके बिश्नोई और अंशिका वर्मा दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों में सख्त और जिम्मेदार अफसर के रूप में जाने जाते हैं. एक ओर जहां कानून-व्यवस्था को संभालने की चुनौती होती है, वहीं दूसरी ओर निजी जीवन के ये खास पल भी उतने ही अहम होते हैं। 

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Fri, 27 Mar 2026 14:34:38 +0530 news desk MPcg
ट्रेन बनी ‘किचन’, लोअर बर्थ पर चाय बनाने लगी महिला, वीडियो ने शुरू की बहस https://citytoday.co.in/5086 https://citytoday.co.in/5086 नई दिल्ली

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला ट्रेन के कोच में इलेक्ट्रिक केतली का इस्तेमाल करती दिखाई दे रही है. वीडियो एक सह-यात्री ने रिकॉर्ड किया और इसमें महिला को लोअर बर्थ पर बैठकर केतली को कोच के सॉकेट में लगाकर चाय बनाते हुए दिखाया गया है. जैसे ही यह क्लिप सामने आई, सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई.

वीडियो में साफ दिखता है कि महिला आराम से केतली चला रही है और उसके आसपास मौजूद यात्री भी बिना किसी आपत्ति के बैठे हुए हैं. लेकिन तथ्य यह है कि इलेक्ट्रिक केतली जैसे हाई-वॉटेज उपकरण ट्रेन में चलाना नियमों के खिलाफ है. रेलवे के कोचों में लगे सॉकेट केवल मोबाइल, लैपटॉप जैसे लो-वॉटेज इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस चार्ज करने के लिए बनाए गए हैं, न कि भारी उपकरण चलाने के लिए.

‘नियम पता हैं, लोग मानते नहीं’

वीडियो X पर साझा किया गया, जिसमें पोस्ट करने वाले ने रेलवे सेवा और रेल मंत्रालय को टैग कर चेतावनी दी कि ऐसी हरकत से शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी घटना हो सकती है. उन्होंने कहा कि रेलवे को इसके लिए जागरूकता अभियान शुरू करना चाहिए.

इसके बाद सोशल मीडिया पर टिप्पणियों की बाढ़ आ गई. कई यूजर्स ने इसे खतरनाक हरकत बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की. एक यूजर ने लिखा कि ट्रेन में इलेक्ट्रिक केतली चलाना पहले से ही प्रतिबंधित है. जागरूकता है, लोग पालन नहीं करते. एक अन्य ने कहा कि जागरूकता अभियान की जरूरत नहीं, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जरूरत है.

किसी ने तंज कसते हुए लिखा, नाइट सूट और केतली के साथ इन्होंने तो कोच को ही घर बना लिया है.. वहीं एक टिप्पणी थी कि लोग सोचते हैं नुकसान रेलवे का होगा, लेकिन हादसा होगा तो सबसे बड़ा नुकसान उनका ही होगा..

रेलवे सेवा हुई सक्रिय, शिकायत मांगी गई

वीडियो वायरल होते ही रेलवे सेवा ने इस पर प्रतिक्रिया दी और साझा करने वाले व्यक्ति से यात्री का पीएनआर नंबर और मोबाइल नंबर मांगते हुए कहा कि वह तुरंत कार्रवाई के लिए जानकारी उपलब्ध कराएं. रेलवे ने यह भी बताया कि शिकायत सीधे RailMadad या 139 नंबर पर भी दर्ज कराई जा सकती है.

गौरतलब है कि इससे पहले भी इसी तरह की घटना सामने आ चुकी है, जब एक महिला ट्रेन में इलेक्ट्रिक केतली से मैगी पकाते हुए दिखी थी. उस समय भी केंद्रीय रेलवे ने कार्रवाई की थी.

क्यों हैं ये खतरनाक?

भारतीय रेलवे के कोच में लगी मोबाइल/लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट से इलेक्ट्रिक केतली चलाना बेहद खतरनाक है.ये रेलवे नियमों के खिलाफ है, क्योंकि ट्रेन की सॉकेटें केवल लो-पावर डिवाइस (50-100 वाट) के लिए बनी होती हैं, जबकि इलेक्ट्रिक केतली 1000-2000 वाट तक पावर खींचती है. इस वजह से ओवरलोडिंग, शॉर्ट सर्किट और आग लगने का बड़ा जोखिम बढ़ जाता है. यही कारण है कि रेलवे ने केतली, हीटर, इंडक्शन, इमर्शन रॉड जैसे उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है. ऐसे उपकरण इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर रेलवे एक्ट की धारा 153, 154 के तहत भारी जुर्माना और 6 महीने से 2 साल तक की जेल हो सकती है, और नुकसान होने पर सजा और भी बढ़ जाती है. रेलवे लगातार एडवाइजरी जारी करता है कि ऐसे डिवाइस ट्रेन में कभी न चलाएं.

 

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Sat, 28 Feb 2026 18:44:20 +0530 news desk MPcg
14 साल के साथी ‘Mr. टाइगर’ को परिवार ने दी इंसानी विदाई, गंगाघाट पर हुआ अंतिम संस्कार | Agra News , Dog Lovers https://citytoday.co.in/4951 https://citytoday.co.in/4951 आगरा से एक भावनात्मक और अनोखी खबर सामने आई है, जिसने इंसान और जानवर के रिश्ते की गहराई को उजागर कर दिया है। घनश्याम दीक्षित दिल्ली से लैब्राडोर नस्ल के एक कुत्ते को अपने घर लाए थे, जिसका नाम उन्होंने प्यार से ‘टाइगर’ रखा। टाइगर बीते 14 वर्षों तक दीक्षित परिवार का अभिन्न हिस्सा रहा और उसे कभी पालतू नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह ही माना गया।

करीब एक माह पहले टाइगर की तबीयत अचानक बिगड़ गई, इलाज के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। टाइगर के निधन के बाद दीक्षित परिवार ने उसे पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। आगरा के गंगाघाट पर हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मुंडन संस्कार भी कराया गया और 13वीं के दिन ब्रह्मभोज का आयोजन कर परंपराओं का पालन किया गया।

घनश्याम दीक्षित का कहना है कि टाइगर सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं था, बल्कि परिवार का हिस्सा था। उनका कहना है कि “उसे पालतू कहना हमारे दिल को चोट पहुंचाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में जब इंसानी रिश्ते कमजोर होते जा रहे हैं, तब टाइगर जैसा साथ और अपनापन बहुत कुछ सिखा जाता है।

इस घटना ने समाज में पशु प्रेम और संवेदनशीलता को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। 

#viral #agra #sadnews #emotional 

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Tue, 10 Feb 2026 12:51:04 +0530 news desk MPcg
Bollywood :  समीर वानखेड़े मानहानि मामले में दिल्ली HC ने भेजा समन; जानें क्या है पूरा मामला https://citytoday.co.in/3884 https://citytoday.co.in/3884 Bollywood :  समीर वानखेड़े मानहानि मामले में दिल्ली HC ने भेजा समन; जानें क्या है पूरा मामला
ShahRukh Khan: बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान और उनकी पत्नी गौरी खान की कानूनी परेशानियां एक बार फिर बढ़ गई हैं. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पूर्व अधिकारी समीर वानखेड़े द्वारा दायर मानहानि मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने शाहरुख और गौरी को समन जारी किया है. वानखेड़े ने दोनों पर झूठे आरोप लगाने और उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए 2 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है.

समीर वानखेड़े का कहना है कि शाहरुख और गौरी खान ने मीडिया और अन्य माध्यमों से उनके खिलाफ झूठी बातें फैलाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने इसे व्यक्तिगत और पेशेवर छवि को धूमिल करने वाला बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है

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Wed, 08 Oct 2025 15:17:05 +0530 news desk MPcg
World's Rarest New Blood Group: वैज्ञानिकों ने की दुनिया के सबसे दुर्लभ नए ब्लड ग्रुप की पहचान, जानें इसके बारे में https://citytoday.co.in/2810 https://citytoday.co.in/2810 World's Rarest New Blood Group: फ्रांस (France) की रक्त आपूर्ति एजेंसी ने घोषणा की है कि कैरेबियाई द्वीप ग्वाडेलोप (Caribbean island of Guadeloupe) की एक फ्रांसीसी महिला को एक नए ब्लड ग्रुप (New Blood Group) की एकमात्र ज्ञात वाहक के रूप में पहचाना गया है, जिसे 'ग्वादा नेगेटिव' कहा जाता है. फ्रांसीसी रक्त प्रतिष्ठान (French Blood Establishment) यानी ईएफएस (EFS) ने शुक्रवार को कहा कि यह घोषणा शोधकर्ताओं द्वारा सर्जरी से पहले नियमित परीक्षण से गुजरने वाले एक मरीज से रक्त का नमूना प्राप्त करने के 15 साल बाद की गई थी. एजेंसी ने सोशल नेटवर्क लिंक्डइन पर एक बयान में कहा कि EFS ने अभी-अभी दुनिया में 48वें रक्त समूह की खोज की है. इस खोज पर आधिकारिक तौर पर जून की शुरुआत में मिलान में इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन (International Society of Blood Transfusion) यानी ISBT द्वारा मान्यता दी गई थी.

वैज्ञानिक संघ ने अब तक 47 रक्त समूह प्रणालियों को मान्यता दी थी. खोज में शामिल ईएफएस के एक चिकित्सा जीवविज्ञानी थिएरी पेयर्ड ने एएफपी को बताया कि 2011 में पहली बार रोगी में एक ‘बहुत ही असामान्य’ एंटीबॉडी पाई गई थी. उन्होंने कहा कि उस समय संसाधनों ने आगे के शोध की अनुमति नहीं दी. पेयर्ड ने कहा कि वैज्ञानिक अंततः 2019 में ‘उच्च-थ्रूपुट डीएनए अनुक्रमण’ की बदौलत रहस्य को सुलझाने में सक्षम थे, जिसने एक आनुवंशिक उत्परिवर्तन को उजागर किया.
पेयर्ड ने कहा कि मरीज, जो उस समय 54 वर्ष का था और पेरिस में रहता था, सर्जरी से पहले नियमित परीक्षण करवा रहा था, जब अज्ञात एंटीबॉडी का पता चला. विशेषज्ञ ने कहा कि यह महिला ‘निस्संदेह दुनिया में एकमात्र ज्ञात मामला है.’ उन्होंने कहा कि वह दुनिया की एकमात्र ऐसी व्यक्ति है जो खुद के साथ संगत है. पेयर्ड ने कहा कि महिला को यह रक्त प्रकार उसके पिता और माता से विरासत में मिला है, जिनमें से प्रत्येक में उत्परिवर्तित जीन था.

पेयर्ड ने कहा कि विशेषज्ञों के बीच ‘ग्वादा नेगेटिव’ नाम लोकप्रिय रहा है, जो रोगी की उत्पत्ति को संदर्भित करता है और ‘सभी भाषाओं में अच्छा लगता है.’ ABO रक्त समूह प्रणाली की खोज सबसे पहले 1900 के दशक की शुरुआत में हुई थी. DNA अनुक्रमण की बदौलत हाल के वर्षों में नए रक्त समूहों की खोज में तेजी आई है. पेयर्ड और उनके सहकर्मी अब उसी रक्त समूह वाले अन्य लोगों को खोजने की उम्मीद कर रहे हैं. EFS ने कहा कि नए रक्त समूहों की खोज का मतलब है दुर्लभ रक्त प्रकारों वाले रोगियों को बेहतर स्तर की देखभाल प्रदान करना.

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Thu, 26 Jun 2025 11:47:24 +0530 news desk MPcg
मुंबई स्कूल बम धमाका: दो अंतरराष्ट्रीय स्कूलों को ईमेल के ज़रिए बम की धमकी मिली, पुलिस जांच कर रही है https://citytoday.co.in/2709 https://citytoday.co.in/2709 आज, 16 जून को मुंबई पुलिस ने बताया कि शहर के दो स्कूलों को बम की धमकी वाले ईमेल मिले हैं. जी हाँ और साथ ही जिन दो स्कूलों को बम की धमकी वाले ईमेल मिले हैं, उनकी पहचान कनकिया इंटरनेशनल स्कूल (Kanakia International School) और रयान इंटरनेशनल स्कूल (Ryan International School) के रूप में की गई है.वही दूसरी तरफ  मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने ईमेल के ज़रिए बताया कि दोनों स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है. 

पर उसके साथ ही  मुंबई पुलिस ने कहा कि अभी तक कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है. मुंबई पुलिस ने कहा, "एफआईआर दर्ज की गई है और पुलिस इस ईमेल को भेजने वाले का पता लगा रही है.

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Mon, 16 Jun 2025 14:00:29 +0530 news desk MPcg
पिंपरी चिंचवड़ में पेड़ के तने से पानी की प्रस्तुति के बाद दिव्य चमत्कार समझकर लोग करने लगे उसकी पूजा, बाद में पता चला कि पाइप में लीक था https://citytoday.co.in/2663 https://citytoday.co.in/2663 पिंपरी के प्रेमलोक पार्क इलाके में 6 जून को एक अजीबोगरीब घटना ने पुणे के निवासियों को हैरान कर दिया, जब एक गुलमोहर के पेड़ के तने से पानी बहता हुआ देखा गया. स्थानीय लोगों ने तुरंत इसे "उपचार शक्तियों वाला" "चमत्कारी पेड़" घोषित कर दिया, और माला, हल्दी, सिंदूर चढ़ाया. पेड़ की पूजा करने लगे.

जी हाँ यह चौकाने वाली खबर आरही है पिंपरी के प्रेमलोक पार्क इलाके में 6 जून को एक अजीबोगरीब घटना ने पुणे के निवासियों को हैरान कर दिया, जब एक गुलमोहर के पेड़ के तने से पानी बहता हुआ देखा गया. स्थानीय लोगों ने तुरंत इसे "उपचार शक्तियों वाला" "चमत्कारी पेड़" घोषित कर दिया, और माला, हल्दी, सिंदूर चढ़ाया. पेड़ की पूजा करने लगे , जिससे जिज्ञासा और आलोचना दोनों ही भड़क उठी. हालांकि,आपकी नजानकारी के लिए बतादे  पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम द्वारा की गई जांच में सच्चाई सामने आई- यह दैवीय चमत्कार नहीं था, और आप यह जानकार हैरान होंगे बल्कि एक लीक हुई भूमिगत पानी की पाइपलाइन थी. PCMC के डिप्टी इंजीनियर प्रवीण धूमल ने स्पष्ट किया कि पेड़ के नीचे एक पुरानी पाइप बह रही थी, और पानी एक खोखले तने से ऊपर आ रहा था. और भारत में अंधविश्वास इतना बढ़ गया है की कुछ लोगों ने इसे एक आध्यात्मिक क्षण के रूप में सराहा, अन्य लोगों ने सतर्क नागरिकों की प्रशंसा की जिन्होंने इसे रिपोर्ट किया. 


पुणे के निवासियों ने पेड़ के तने से पानी बहने के बाद दैवीय चमत्कार समझकर करने लगे उसकी पूजा

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Fri, 13 Jun 2025 13:36:24 +0530 news desk MPcg
दिल्ली&एनसीआर में आसमान से बरस रही आग, पारा 45 डिग्री के पार, IMD ने बताया& कब होगी बारिश https://citytoday.co.in/2622 https://citytoday.co.in/2622 नई दिल्ली में तेज गर्मी के कारन लोग हैं परेशान तापमान पहुंचा 45 डिग्री सेल्सियस के पार ....

 
दिल्ली-एनसीआर में आसमान से आग बरस रही है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। आया नगर में अधिकतम तापमान 45.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार यह अभी और बढ़ सकता है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में दिल्ली का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो सकता है। सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में सुबह का तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आर्द्रता का स्तर लगभग 48 प्रतिशत दर्ज किया गया। यदि दोनों स्थितियों को मिला दें यह गर्मी से असहज करने के लिए पर्याप्त है। रविवार को दिल्ली में अधिकतम तापमान 42.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर में अगले चार दिनों तक के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान लू चलने की भी संभावना है।

आईएमडी के वैज्ञानिक अखिल श्रीवास्तव ने एएनआई को बताया कि अगर हम उत्तर-पश्चिम भारत की बात करें तो अगले चार दिनों तक मैदानी इलाकों में लू की स्थिति रहने की संभावना है। दिल्ली-एनसीआर में सोमवार और मंगलवार को तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की उम्मीद है, जिससे अलग-अलग जगहों पर लू की स्थिति पैदा होगी। इस क्षेत्र के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
किन-किन इलाकों में बरस रही आग

सफदरजंग- 43.4 डिग्री सेल्सियस
पालम- 44.3 डिग्री सेल्सियस
लोधी रोड- 43.3 डिग्री सेल्सियस
रिज- 44.9 डिग्री सेल्सियस 
आया नगर- 45.3 डिग्री सेल्सियस

वायु गुणवत्ता भी खराब श्रेणी में पहुंचा
दिल्ली में वायु गुणवत्ता भी खराब हो गई है। सोमवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 219 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस स्तर को खराब श्रेणी में ऱखता है। गर्मी और उमस के अलावा AQI एक और समस्या है जिसका दिल्ली के लोग सामना कर रहे हैं।

क्या बारिश से राहत मिलेगी?
दिल्ली-एनसीआर में सप्ताह के मध्य तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसस भीषण गर्मी से राहत मिलने का अनुमान है। आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ-साथ बिजली गिरने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की उम्मीद है। आईएमडी के मौसम बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी यूपी में 13 और 14 जून को हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

 

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Tue, 10 Jun 2025 15:56:15 +0530 news desk MPcg
सोने और चांदी की कीमतों में तेजी, कीमत बढ़कर करीब 97,000 रुपए हुई, चांदी एक लाख रुपए के पार....... https://citytoday.co.in/2596 https://citytoday.co.in/2596 सोने और चांदी की कीमतों में मंगलवार को तेजी देखने को मिली और 24 कैरेट के सोने की कीमत बढ़कर करीब 97,000 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत एक लाख रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गई है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट के सोने की कीमत 187 रुपए बढ़कर 96,867 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि सोमवार को 96,680 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।

22 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत बढ़कर 88,730 रुपए हो गई है, जो कि पहले 88,559 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, 18 कैरेट के 10 ग्राम सोने का दाम बढ़कर 72,650 रुपए हो गया है, जो कि पहले 72,510 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

सोने के साथ चांदी की कीमत में भारी इजाफा देखने को मिला है। बीते 24 घंटे में चांदी की कीमत 2,669 रुपए बढ़कर 1,00,460 रुपए प्रति किलो हो गई है, जो कि पहले 97,761 रुपए प्रति किलो थी।

एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि 2000 रुपए की रैली के बाद गोल्ड का प्रदर्शन एमसीएक्स पर 97,700 रुपए प्रति 10 ग्राम पर करीब सपाट रहा। अमेरिकी में अहम आर्थिक आंकड़ों से पहले सोना कंसोलिडेशन फेस में है।

सोना आने वाले समय में 95,000 रुपए प्रति 10 ग्राम से लेकर 99,500 रुपए प्रति 10 ग्राम की रेंज में रह सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। सोना 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,384 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 34.46 डॉलर प्रति औंस पर था।

1 जनवरी से अब तक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 76,162 रुपए से 20,705 रुपए या 27.18 प्रतिशत बढ़कर 96,867 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी का भाव भी 86,017 रुपए प्रति किलो से 14,443 रुपए या 16.17 प्रतिशत बढ़कर 1,00,460 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। इसके अतिरिक्त रुपए में आज 16 पैसे की गिरावट हुई, जिसके कारण डॉलर के मुकाबले घरेलू मुद्रा 85.53 पर बंद हुई।

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Fri, 06 Jun 2025 17:55:39 +0530 news desk MPcg
Slovakia's की ‘Aircar’ सड़क और आसमान में लाएगी क्रांति https://citytoday.co.in/2532 https://citytoday.co.in/2532 स्लोवाकिया की कंपनी क्लेन विजन ने एक ऐसी अनोखी कार तैयार की है, जो न सिर्फ सड़क पर चल सकती है, बल्कि आसमान में उड़ भी सकती है। कंपनी की इस अनोखी कार का नाम है ‘एयरकार’, और यह तकनीक निजी परिवहन की दुनिया में एक नया युग शुरू कर सकती है। क्लेन विजन की इस फ्लाइंग कार को यूरोपीय विमानन एजेंसी से हवाई योग्यता का प्रमाणपत्र मिल चुका है। एयरकार ने अब तक 200 से भी ज्यादा सफल उड़ानें भरी हैं और 35 मिनट की ब्रातिस्लावा-नाइट्रा हवाई यात्रा भी पूरी की है। गर्मियों में इसका नया मॉडल ‘एयरकार 2’ परीक्षण के लिए तैयार होगा और इसके बाद इसे बाजार में उतारा जाएगा। यह कार सड़क पर 200 km/hr और आसमान में 250 km/hr की रफ्तार से चल सकती है। एक बार फ्यूल भरवाने पर यह 1000 km तक उड़ान भर सकती है। इसका सबसे रोचक पहलू यह है कि हवाई मोड में बदलने पर इसके पंख और पीछे की पूंछ जैसी संरचनाएं बाहर आ जाती हैं, जिससे यह एक छोटे विमान में तब्दील हो जाती है।

हालांकि, इसकी कीमत आम लोगों की पहुंच से बाहर हो सकती है। एयरकार 2 की अनुमानित कीमत 6.5 से 8 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है। इसके अलावा, इसे उड़ाने के लिए पायलट लाइसेंस की आवश्यकता होगी। लेकिन कंपनी का दावा है कि आने वाले समय में इसे और अधिक सुलभ और किफायती बनाया जाएगा। क्लेन विजन के संस्थापक स्टीफन क्लेन को हाल ही में ‘लिविंग लीजेंड्स ऑफ एविएशन’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि यह कार उनका सपना था, जिसके जरिए वह आम लोगों को उड़ने की आजादी देना चाहते हैं।

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Sun, 25 May 2025 13:44:11 +0530 news desk MPcg
दिव्यांगों का मजाक उड़ाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: समय रैना समेत 5 इन्फ्लूएंसर्स को अगली सुनवाई में हाजिर होने का आदेश https://citytoday.co.in/2363 https://citytoday.co.in/2363 नई दिल्ली, 5 मई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग व्यक्तियों और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए मशहूर कॉमेडियन समय रैना सहित पांच सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि ये इन्फ्लूएंसर्स उपस्थित नहीं होते, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) 'क्योर एसएमए फाउंडेशन ऑफ इंडिया' की याचिका पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इन इन्फ्लूएंसर्स ने अपने शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (एसएमए) जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाया।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह शामिल हैं, ने इस मामले की सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर दिव्यांगों और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों के प्रति असंवेदनशील सामग्री को "हानिकारक" और "निराशाजनक" बताया। कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्रता के नाम पर किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। बेंच ने मुंबई पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे इन पांच इन्फ्लूएंसर्स- समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर- को नोटिस जारी करें और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करें।

कोर्ट का रुख और टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्या कांत ने कहा, "संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन यह पूर्ण नहीं है। किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अधिकार किसी को नहीं है।" कोर्ट ने सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स की व्यापक पहुंच और उनके प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी सामग्री कमजोर वर्गों के लिए हानिकारक है। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कुछ सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाइयां आवश्यक हैं।

कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि से भी इस मामले में सहायता मांगी है, ताकि दिव्यांगों और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित लोगों के खिलाफ सोशल मीडिया सामग्री को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार किए जा सकें।

समय रैना और अन्य का पक्ष

समय रैना पहले ही इस विवाद के लिए सार्वजनिक माफी मांग चुके हैं और अपने यूट्यूब चैनल से 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के सभी एपिसोड हटा चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि उनका इरादा केवल मनोरंजन करना था और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। हालांकि, कोर्ट ने उनकी कनाडा में की गई टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई थी, जहां उन्होंने इस विवाद का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि टिकट बिक्री से उनकी कानूनी फीस का भुगतान हो रहा है। जस्टिस कांत ने इसे "अति स्मार्ट" रवैया करार देते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को सुप्रीम कोर्ट की अधिकारिता का अंदाजा नहीं है।

अन्य इन्फ्लूएंसर्स- विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर- ने अभी तक इस मामले में कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी को अगली सुनवाई में उपस्थित होना होगा।

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Mon, 05 May 2025 17:42:32 +0530 news desk MPcg
अंतिम संस्कार में हुई अजीब घटना, पिता के ताबूत के साथ कब्र में गिरा पूरा परिवार https://citytoday.co.in/2109 https://citytoday.co.in/2109 अमेरिका के फिलाडेल्फिया में एक शख्स के अंतिम संस्कार के दौरान बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है. जब ताबूत को दफनाने के लिए कब्र तक ले जा रहा पूरा परिवार अचानक ताबूत के साथ ही कब्र में गिर गया. इस अजीबोगरीब घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, 21 मार्च को फिलाडेल्फिया में अपने घर पर हृदय रोग से संबंधित बीमारी की वजह से बेंजामिन एविलेस की मौत हो गई थी, जिसके बाद शुक्रवार को उनके अंतिम संस्कार के बाद जब उन्हें ग्रीनमाउंट कब्रिस्तान में दफनाया के लिए ले जाया जा रहा था, तभी शोकाकुल परिवार ताबूत समेत कब्र में जा गिरा. इस हादसे में लोगों के पैर, हाथ और पीठ में काफी चोटें आईं.

 इस घटना को एविलेस के परिवार के बाकी लोगों ने वीडियो में कैद कर लिया.हालांकि, सबसे बुरा एविलेस के बेटे बेंजामिन के साथ हुआ जो कब्र के अंदर उनके ताबूत के नीचे फंस गया. एक यूजर ने लिखा- ये खौफनाक था. दूसरे ने कहा- यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. इसने शोकाकुल परिवार को और अधिक पीड़ा दी है.

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Fri, 11 Apr 2025 14:40:47 +0530 News desk Hindi
मेरठ मर्डर केस से जोड़कर बना दिया भोजपुरी सॉन्ग, भड़की पब्लिक, कहा& कुछ तो शर्म करो https://citytoday.co.in/2086 https://citytoday.co.in/2086 मेरठ केस से जहाँ लोग अभी तक शॉकेड हैं. वहीँ किसी-किसी जगह इसको ट्रेंड की तरह लिया जा रहा हैं. हाल ही में इस मेरठ हत्याकांड से जोड़कर भोजपुरी का एक गाना रिलीज किया गया है, जिसका टाइटल है ड्रम में राजा. लोगों की तरफ से इसके लिए मिक्स्ड रिएक्शन सामने आ रहे हैं. आपको बता दे कि ये गाना 6 अप्रैल को रिलीज हुआ था, जिसे अभी तक 30,000 से भी ज़्यादा लोगों ने देखा है. हालांकि, गाने के कमेंट बॉक्स में कई सारे लोगों ने इस गाने को बकवास बताते हुए, मामले की गंभीरता को समझने की बात की है. 

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Thu, 10 Apr 2025 12:48:13 +0530 News desk Hindi
चेन्नई: इलाके में दबदबा दिखाने के लिए इलेक्ट्रिक ट्रेन की छत पर चढ़ गए कॉलेज छात्र, खतरनाक स्टंट करने का वीडियो वायरल, प्रशासन ने की छात्रों की पहचान https://citytoday.co.in/chennai-college-students-climbed-on-the-roof-of-an-electric-train-to-show-dominance-in-the-area-video-of-dangerous-stunt-went-viral-administration-identified-the-students https://citytoday.co.in/chennai-college-students-climbed-on-the-roof-of-an-electric-train-to-show-dominance-in-the-area-video-of-dangerous-stunt-went-viral-administration-identified-the-students चेन्नई, 9 अप्रैल 2025: तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में कॉलेज छात्रों के एक समूह ने इलाके में अपना दबदबा दिखाने के लिए इलेक्ट्रिक ट्रेन की छत पर चढ़कर खतरनाक स्टंट किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना ने न केवल लोगों को हैरान कर दिया है, बल्कि सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन ने वीडियो के आधार पर इन छात्रों की पहचान कर कार्रवाई शुरू कर दी है। 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हुए इस वीडियो में कुछ युवा तेज रफ्तार इलेक्ट्रिक ट्रेन की छत पर चढ़ते और दरवाजों पर लटकते नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, ये छात्र चेन्नई के एक कॉलेज के हैं और यह खतरनाक हरकत 'रूट थाला' नामक ट्रेंड का हिस्सा बताई जा रही है। इस ट्रेंड में युवा अपने इलाके में दबदबा कायम करने के लिए ऐसे जोखिम भरे स्टंट करते हैं। वीडियो में दिख रहा है कि छात्र न सिर्फ ट्रेन की छत पर चढ़े, बल्कि चलती ट्रेन के दरवाजों पर भी लटककर स्टंट कर रहे थे, जो बेहद खतरनाक साबित हो सकता था।

स्थानीय लोगों और रेलवे अधिकारियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि इलेक्ट्रिक ट्रेनों की छत पर 25,000 वोल्ट की बिजली की तारें होती हैं, जो किसी भी व्यक्ति के लिए जानलेवा हो सकती हैं। इसके बावजूद, इन छात्रों ने अपनी जान जोखिम में डालकर यह स्टंट किया। अधिकारी ने कहा, "ऐसी हरकतें न केवल अवैध हैं, बल्कि रेलवे संपत्ति पर अनधिकृत प्रवेश एक दंडनीय अपराध भी है।"प्रशासन ने इस वीडियो के वायरल होने के बाद तुरंत हरकत में आते हुए छात्रों की पहचान शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, यह घटना चेन्नई के उपनगरीय रेलवे नेटवर्क में हुई, जहां ये छात्र नियमित रूप से सफर करते हैं। पुलिस और कॉलेज प्रशासन मिलकर इन छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही, रेलवे ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे खतरनाक स्टंट से बचें और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दी हैं। जहां कुछ यूजर्स ने इसे "बेवकूफी भरा करतब" करार दिया, वहीं अन्य ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की। एक यूजर ने लिखा, "रील्स के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डालना कहां की समझदारी है?" वहीं, एक अन्य ने टिप्पणी की, "इन बच्चों को सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसा न करे।"

यह पहली बार नहीं है जब चेन्नई में छात्रों की ऐसी हरकतें सामने आई हों। पिछले कुछ महीनों में भी उपनगरीय ट्रेनों और बसों में छात्रों के बीच झड़प और स्टंट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाहत और ग्रुप में दबदबा दिखाने की होड़ इसके पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं।

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Wed, 09 Apr 2025 15:32:06 +0530 Newsdesk
"विरासत का अनोखा नमूना: 150 वर्षीय सीलिंग फैन ने इंटरनेट पर मचाई धूम!" https://citytoday.co.in/विरासत-का-अनोखा-नमूना-150-वर्षीय-सीलिंग-फैन-ने-इंटरनेट-पर-मचाई-धूम https://citytoday.co.in/विरासत-का-अनोखा-नमूना-150-वर्षीय-सीलिंग-फैन-ने-इंटरनेट-पर-मचाई-धूम Sat, 04 Jan 2025 17:21:40 +0530 Newsdesk भोपाल के यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को जलाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में 2 प्रदर्शनकारियों ने खुद पर पेट्रोल छिड़का किसी ने पीछे से आग लगा दी। दोनों की हालत गंभीर https://citytoday.co.in/भोपाल-के-यूनियन-कार्बाइड-के-जहरीले-कचरे-को-जलाने-के-खिलाफ-विरोध-प्रदर्शन-में-2-प्रदर्शनकारियों-ने-खुद-पर-पेट्रोल-छिड़का-किसी-ने-पीछे-से-आग-लगा-दी-दोनों-की-हालत-गंभीर https://citytoday.co.in/भोपाल-के-यूनियन-कार्बाइड-के-जहरीले-कचरे-को-जलाने-के-खिलाफ-विरोध-प्रदर्शन-में-2-प्रदर्शनकारियों-ने-खुद-पर-पेट्रोल-छिड़का-किसी-ने-पीछे-से-आग-लगा-दी-दोनों-की-हालत-गंभीर Fri, 03 Jan 2025 14:24:23 +0530 Newsdesk बोलते सब है पर जानते है क्या होती है दमड़ी https://citytoday.co.in/Everyone-says-it-but-do-you-know-what-Damdi-is https://citytoday.co.in/Everyone-says-it-but-do-you-know-what-Damdi-is अपनी करंसी का इतिहास
कुछ कहावतें बहुत प्रचलित हैं, जैसे
आपकी कौड़ी कौड़ी अदा कर दूंगा। 
चमड़ी जाये पर दमड़ी न जाये। 
धैले भर की बात।
दरअसल यह हमारी करंसी से जुड़े हुए शब्द हैं। फूटी कौड़ी एक जमाने में हमारी करेंसी हुआ करती थी, जिसकी कीमत सबसे कम होती थी। तीन फूटी कौड़ियों से एक कौड़ी बनती थी और दस कौड़ियों से एक दमड़ी।  

यह थी करंसी
3 फूटी कौड़ी- 1 कौड़ी
10 कौड़ी - 1 दमड़ी
02 दमड़ी - 1.5 पाई
1.5 पाई - 1 धैला
2 धैला - 1 पैसा
3 पैसे - 1 टका
2 टके - 1 आना
2 आने - दोअन्नी
4 आने - चवन्नी
8 आने - अठन्नी
16 आने - 1 रुपया

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Tue, 28 May 2024 18:47:28 +0530 Newsdesk