City Today & : विदेश https://citytoday.co.in/rss/category/International City Today & : विदेश en Copyright 2022 citytoday.co.in& All Rights Reserved.CITYTODAY MEDIA PRIVATE LIMITED क्या चीन गुपचुप तरीके से ईरान को भेज रहा है हथियार? चार रहस्यमय विमान पहुंचे तेहरान https://citytoday.co.in/5554 https://citytoday.co.in/5554

तेहरान 

मध्य एशिया में जारी तनाव के बीच एक नई घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए कमेंटेटर मारियो नॉफाल ने दावा किया है कि चीन के चार कार्गो विमान ईरान में गुपचुप तरीके से उतरे हैं। उन्होंने दावा किया कि लैंडिंग से पहले विमानों ने अपने ट्रांसपॉन्डर बंद कर दिए जिससे उनकी जानकारी किसी को हासिल ना हो सके। एक दिन पहले ही शी जिनपिंग ने अमेरिका से वादा किया था कि वह ईरान को हथियारों की कोई सप्लाई नहीं करेंगे।

अब इस मामले के जानकारों कहना है कि चारों विमानों का इस तरह से लैंडिंग से पहले ट्रांसपॉन्डर बंद करना कोई तकनीकी खामी नहीं हो सकती है। हालांकि इन विमानों को लेकर ना तो ईरान की तरफ से और ना ही चीन की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है। चीन ने ईरान को किसी तरह के सहयोग देने के आरोपों को खारिज किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को कहा कि इस तरह की रिपोर्ट एकदम झूठी हैं। चीन ने ईरान को कोई सैटलाइट हेल्प भी नहीं की है।

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि पड़ोसी देशों में अमेरिका के बेस ध्वस्त करने के लिए चीन उनसकी सहायता कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन को धमकी दी थी कि वह अगर किसी भी रूप में दखल देता है तो इसके परिणाम बहुत बुरे होंगे। एविएशन एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह से विमानों का ट्रांसपॉन्डर बंद कर लेना सामान्य तो नहीं है। हो सकता है कि किसी ऑपरेशनल या फिर सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया हो।

चीन का क्या कहना है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने ईरान को मिलिट्री सपोर्ट देने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बुधवार को साफ कहा कि सैटेलाइट जानकारी देने का दावा ‘पूरी तरह मनगढ़ंत’ हैं और अगर अमेरिका ने इन आधारहीन आरोपों के आधार पर कोई कार्रवाई की, तो जवाब दिया जाएगा. दूसरी तरफ, अमेरिका पहले ही संकेत दे चुका है कि अगर कोई देश ईरान की सैन्य मदद करता पाया गया, तो उसके खिलाफ आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं। 

ट्रांसपोंडर बंद करना क्या संकेत है?
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसपोंडर बंद करना असामान्य जरूर है, लेकिन हमेशा गलत इरादे का संकेत नहीं होता. कभी-कभी यह सुरक्षा या तकनीकी कारणों से भी हो सकता है. लेकिन यहां एक साथ कई विमानों का ऐसा करना और वह भी कम समय में संदेह को बढ़ाता है. इस बीच, जमीन पर कूटनीति भी जारी है. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू होने के संकेत हैं और लेबनान सीजफायर के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य भी आंशिक रूप से खुल चुका है। 

जानकारों का कहना है कि लगातार कई विमानों का एक ही पैटर्न पर लैंड करना संदेह बढ़ाता है। अमेरिका और इजरायल के बीच थोड़ा तनाव इस बात से कम होता नजर आ रहा है कि दोनों ही देशों ने दावा किया है कि कमर्शल जहाजों के लिए होर्मुज को खोल दिया गया है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज सभी जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि ईरान के लिए उनकी नाकेबंदी जारी रहेगी।

वाशिंगटन और तेहरान ने 7 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। हालांकि शत्रुता की पुनः शुरुआत की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। अब वार्ता और युद्ध को लेकर एक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। होर्मुज की खबर आने के बाद वैश्विक बाजार में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है।

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Sat, 18 Apr 2026 13:06:52 +0530 news desk MPcg
इंडोनेशिया विमान हादसा: लापता हेलीकॉप्टर का मलबा मिला, 8 लोगों की मौत https://citytoday.co.in/5544 https://citytoday.co.in/5544  कालीमंतन 
इंडोनेशिया के पश्चिम कालीमंतन प्रांत से एक बेहद दुखद खबर आई है। पिछले कुछ समय से लापता एक निजी हेलीकॉप्टर का मलबा वीरवार यानि कि बीते दिन सुदूर और घने वन क्षेत्र में बरामद कर लिया गया है। इस दुर्घटना में सवार सभी 8 लोगों की मौत हो गई है। दुर्गम इलाका होने के कारण बचाव दल को शवों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं बचाव दल के अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल नूर्रचमन गिंधा द्राधिज़्या ने बताया कि फिलहाल चार लोगों के शवों को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया है और उन्हें बॉडी बैग में रखा गया है जबकि तीन अन्य अभी भी हेलीकॉप्टर के मलबे के अंदर हैं।" शिन्हुआ के अनुसार, अंतिम पीड़ित की तलाश जारी है।

इंडोनेशियाई राष्ट्रीय पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार हेलीकॉप्टर की पहचान पीटी मैथ्यू एयर एयरबस एच-130 (पीके-सीएफएक्स) के रूप में हुई है। शिन्हुआ ने उड़ान विवरण के हवाले से बताया कि हेलीकॉप्टर में आठ लोग सवार थे। शिन्हुआ के अनुसार अधिकारियों ने बताया कि अंधेरा और दुर्गम भूभाग के कारण बचाव कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और आज फिर से शुरू किया जाएगा।  

द्राधिज़्या ने आगे कहा, "हम कल सुबह भी बचाव कार्य जारी रखेंगे, जिसमें हेलिकॉप्टर के मलबे को काटकर अंदर फंसे शवों को निकालने के प्रयास भी शामिल हैं।" इससे पहले, इंडोनेशियाई राष्ट्रीय पुलिस ने कहा था कि सेकाडाऊ के घने जंगलों में मलबा मिलने के बाद संयुक्त बचाव दल सक्रिय रूप से निकासी अभियान में जुट गए हैं।

इंडोनेशियाई वायु सेना के एक सुपर प्यूमा हेलिकॉप्टर ने वीरवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर लगभग 3:25 बजे अंतिम ज्ञात संपर्क बिंदु से लगभग तीन किलोमीटर दूर मलबे (जिसे विमान की पूंछ का हिस्सा माना जा रहा है) को सबसे पहले देखा। राष्ट्रीय खोज एवं बचाव एजेंसी (बासारनास) के संचालन एवं तैयारी उप प्रमुख एडी प्राकोसो ने कहा, "हवाई निगरानी से संभावित स्थान का पता चल गया है। हमने बचाव अभियान में सहायता के लिए ये निर्देशांक जमीनी इकाइयों को भेज दिए हैं।" 

वहीं स्थानीय निवासियों के सहयोग से जमीनी दल दुर्घटनास्थल तक पहुंचने के लिए कठिन भूभाग और अप्रत्याशित मौसम की स्थिति का सामना कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने इससे पहले बुकिट पुंतक क्षेत्र में एक विस्फोट की आवाज सुनने की सूचना दी थी। बचाव अभियान जारी रहने के दौरान अधिकारियों ने बचाव कार्य में सहयोग के लिए पास के हुलु पेनीती गांव में एम्बुलेंस भी तैनात कर दी थीं।

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Fri, 17 Apr 2026 13:51:05 +0530 news desk MPcg
80 साल बाद अमेरिका बना दुनिया का सबसे बड़ा तेल विक्रेता, पूरी दुनिया संकट में https://citytoday.co.in/5537 https://citytoday.co.in/5537 वाशिंगटन

दुनियाभर में चल रही उथल-पुथल के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि अमेरिका दुनिया को तेल बेचने के मामले में एक नया रिकॉर्ड बनाने के करीब पहुंच गया है. असल में ईरान (Iran) के साथ जारी तनाव और युद्ध की वजह से खाड़ी देशों से होने वाली तेल की सप्लाई रुक गई है. ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें अब अमेरिका पर टिकी हैं और उसके यहां से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल एक्सपोर्ट हो रहा है। 

अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ बढ़ता तनाव ही इसकी मुख्य वजह है, क्योंकि इसके चलते दुनिया के एनर्जी मार्केट में अब तक की सबसे बड़ी रुकावट आई है. ईरान ने समुद्र के रास्ते होने वाली सप्लाई को रोकने की धमकी दी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस का व्यापार अटक गया है. जब एशिया और यूरोप के देशों को वहां से तेल मिलना बंद हुआ, तो उन्होंने अपनी जरूरत पूरी करने के लिए अमेरिका का रुख किया. अमेरिका इस समय दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और वहां से तेल की मांग अचानक बहुत बढ़ गई है। 

सात महीनों में सबसे ज्यादा तेल एक्सपोर्ट
रायटर्स की एक रिपोर्ट में लेटेस्ट सरकारी आंकड़ों के मुताबिक लिखा गया है कि पिछले हफ्ते अमेरिका ने करीब 52 लाख बैरल कच्चा तेल रोजाना दूसरे देशों को भेजा. यह पिछले सात महीनों में सबसे ज्यादा है. अगर हम उसके आयात और निर्यात के अंतर को देखें, तो यह घटकर सिर्फ 66,000 बैरल रोजाना रह गया है. इसका मतलब है कि अमेरिका अब जितना तेल मंगाता है, लगभग उतना ही दुनिया को बेच भी रहा है. केवल 66,000 बैरल का फर्क है. 1943 के बाद यह पहला मौका है, जब अमेरिका कच्चे तेल का नेट एक्सपोर्टर (Net Exporter) बनने के काफी करीब है। 

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Thu, 16 Apr 2026 19:55:32 +0530 news desk MPcg
समझौता न होने पर होर्मुज में तूफान आएगा, ट्रंप की धमकी से ईरान पर कोई असर नहीं, रूस ने किया युद्ध में प्रवेश https://citytoday.co.in/5519 https://citytoday.co.in/5519 वाशिंगटन

पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई, जबकि पहले युद्धविराम की घोषणा की गई थी. इस असफल बातचीत के बाद हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं. वार्ता फेल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा कदम उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक घेराबंदी लागू कर दी. ट्रंप ने साफ कहा कि हम किसी देश को दुनिया को ब्लैकमेल या डराने नहीं देंगे.उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान की कोई तेज हमला करने वाली नौकाएं अमेरिकी सेना के करीब आईं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। 

हिज्बुल्ला का ऐलान
हालांकि ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत विफल होने के बाद ईरान के प्रतिनिधियों ने फिर से संपर्क किया है और अब तेहरान शांति समझौते के लिए बातचीत में लौटना चाहता है. इस बीच क्षेत्र में एक और तनावपूर्ण बयान सामने आया है. लेबनान के संगठन हिज्बुल्ला के प्रमुख नईम कासिम ने लेबनान सरकार से अपील की है कि वह अमेरिका में इजरायल के साथ होने वाली प्रस्तावित वार्ता को रद्द कर दे. हिज्बुल्ला ने कहा कि इजरायल जैसे दुश्मन देश के साथ किसी भी तरह की बातचीत को पूरी तरह खारिज करते हैं. उन्होंने इसे रद्द करने के लिए सरकार से ऐतिहासिक और साहसिक फैसला लेने की मांग की. गौरतलब है कि हिजबुल्लाह ईरान समर्थित संगठन है और 2 मार्च से इजरायल के साथ संघर्ष में शामिल है। 

रूस बनना चाहता है मध्यस्थ
ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध में अब रूस शांतिदूत की भूमिका निभाना चाहता है. पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस संबंध में ऑफर दिया था और अब विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची से फोन पर बातचीत की. रूस की ओर से कहा गया कि सशस्त्र संघर्ष दोबारा न हो, यह बहुत जरूरी है. साथ ही रूस ने एक बार फिर साफ किया कि वह इस संकट को सुलझाने में हर संभव मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 

अमेरिका बोला- फैसला ईरान को लेना है
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने कहा कि ईरान को परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने के लिए खुद कदम उठाने होंगे. उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान में 21 घंटे चली बातचीत के बाद अमेरिका अब वहां से वापस आ रहा है और ईरान की प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं रही. वेंस के मुताबिक आगे की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान कितनी गंभीरता से बातचीत में शामिल होता है. उन्होंने कहा कि अब प्रगति की जिम्मेदारी ईरान पर है और उसे यह दिखाना होगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाने के लिए तैयार है। 

पाकिस्तान का दावा- ईरान चाहता है इस्लामाबाद में हो वार्ता
इस्लामाबाद में हुई बातचीत के बाद मध्यस्थता की कोशिश करने वाले देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच मैसेज का आदान-प्रदान जारी रखा है. उनका लक्ष्य है कि दोनों देश कम से कम 45 दिन के लिए सीजफायर बढ़ाने पर राजी हो जाएं. दोनों पक्ष बातचीत जारी रखने पर तो सहमत हैं, लेकिन अगली मीटिंग के एजेंडा, उद्देश्य, फॉर्मेट और जगह को लेकर मतभेद अभी भी बने हुए हैं. ईरान चाहता है कि अगली बातचीत इस्लामाबाद में हो क्योंकि वहां उसे सुविधा और पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भरोसा है. वहीं अमेरिका दूसरी जगहों पर विचार कर रहा है, जहां उसे सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स बेहतर लगते हैं. हालांकि अगर बड़े मुद्दों पर सहमति बनती है, तो बातचीत की जगह कोई बड़ी रुकावट नहीं बनेगी। 

 2 दिन बाद फिर शुरू होगी ईरान-अमेरिका वार्ता
ईरान-अमेरिका युद्ध: एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच एक नई दौर की बातचीत जल्द ही गुरुवार तक हो सकती है. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में इस्लामाबाद में हुई उच्चस्तरीय वार्ता भले ही किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची, लेकिन बातचीत के दरवाजे खुले रहे. इसका मतलब है कि दोनों देश अब भी कूटनीतिक रास्ते से समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं. आने वाली बातचीत में पिछले मुद्दों पर फिर चर्चा हो सकती है और समझौते की संभावना बनी हुई है। 

 होर्मुज नाकेबंदी हटाना चाहता है सऊदी, ट्रंप से की बात
अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक सऊदी अरब, अमेरिका पर दबाव डाल रहा है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नौसैनिक घेराबंदी तुरंत हटा ले और दोबारा बातचीत की मेज पर लौट आए. सऊदी और अन्य खाड़ी देशों को डर है कि अगर अमेरिका ने घेराबंदी जारी रखी तो ईरान बदला लेने के लिए उनके वैकल्पिक रास्ते भी बंद कर सकता है. ऐसी स्थिति उनकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगी. होर्मुज के हाहाकार के बाद भी उनका तेल अब तक दूसरे रास्तों से निकल रहा था लेकिन ट्रंप के इस कदम से वो भी खतरे में आ जाएंगे। 

होर्मुज पर चीन ने अमेरिका को हड़काया – हमारे मामले से दूर रहो
 होर्मुज ब्लॉकेड पर अब चीन भी भड़क उठा है. चीन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी लगाने के ट्रंप के फैसले को लेकर अमेरिका को चेताया है. चीन ने अमेरिका को आगाह किया कि वह ईरान के साथ चीन के संबंधों में दखल न दे. होर्मुज ब्लॉकेड पर चीन की अमेरिका को सीधी-सीधी पहली प्रतिक्रिया है. चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने कहा कि बीजिंग तेहरान के साथ अपने व्यापार और ऊर्जा संबंधी वादों को पूरा करेगा. उन्होंने कहा कि चीनी जहाज इस इलाके में अपना काम जारी रखेंगे और बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं करेंगे। 

लेबनान-इजरायल के बीच वार्ता की शुरुआत
इजरायल-लेबनान वार्ता: अमेरिका में आज इजराइल और लेबनान के बीच बातचीत की शुरुआत होगी. अमेरिकी राजदूत येचिएल लीटर और लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोआवद की आज शांति के लिए बातचीत होगी.
पिछले हफ्ते पहली बार दोनों देशों के राजदूतों के बीच फोन पर दशकों बाद बातचीत हुई थी. 1983 में अंतिम बार दोनों देशों के बीच आखिरी और सीधी बातचीत हुई थी, हालांकि अप्रत्यक्ष समझौते और अप्रत्यक्ष वार्ता होती रही है. आज
अमेरिका की मध्यस्थता में यह बातचीत होनी है. ये बात दिलचस्प है क्योंकि इजरायल-लेबनान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध तक नहीं हैं। 

होर्मुज की नाकेबंदी कर रहा अमेरिका, ईरान को दी धमकी
 डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान की कोई भी हमला करने वाली नौकाएं अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों के आसपास लगाई गई नौसैनिक घेराबंदी के पास आती हैं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम बनाए रखने और बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है। 

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Tue, 14 Apr 2026 14:56:38 +0530 news desk MPcg
अमरोहा में एक दुल्हन के लिए पहुंचीं दो बारातें, पुलिस ने कराया निकाह https://citytoday.co.in/5507 https://citytoday.co.in/5507  मुरादाबाद

अमरोहा कोतवाली क्षेत्र के कैलसा बाईपास स्थित एक बैंक्वेट हॉल में रविवार को एक दुल्हन की दो बारातें पहुंचने से अफरा-तफरी मच गई. मुरादाबाद निवासी पहले दूल्हे से मंगनी टूटने के बाद दुल्हन पक्ष ने संभल के दूसरे दूल्हे से उसी तारीख का रिश्ता तय कर लिया था. कार्ड बंटने और तैयारियां पूरी होने के कारण मुरादाबाद वाला दूल्हा भी बारात लेकर पहुंच गया, जिससे मौके पर तनाव और कहासुनी शुरू हो गई. सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने तीनों पक्षों की बात सुनी और दुल्हन की रजामंदी के आधार पर संभल वाले दूल्हे के साथ निकाह की रस्म पूरी कराई.

मंगनी टूटी पर दूल्हा लेकर आया बारात
पूरा मामला मुरादाबाद और संभल के दो दूल्हों के बीच फंसा था. जानकारी के मुताबिक, दुल्हन की मंगनी पहले मुरादाबाद के एक रिश्तेदार से हुई थी, लेकिन बाद में दोनों परिवारों के बीच अनबन हो गई.

दुल्हन पक्ष ने इस रिश्ते को खत्म कर संभल के युवक से शादी तय कर ली. चूंकि, पुरानी तारीख के कार्ड बंट चुके थे और तैयारी पूरी थी, इसलिए मुरादाबाद का दूल्हा भी अपना हक जताते हुए बारात लेकर बैंक्वेट हॉल पहुंच गया.

पुलिस की मौजूदगी में हुआ निकाह
एक ही समय पर दो बारातियों और दो दूल्हों को देखकर माहौल गर्मा गया. दुल्हन पक्ष ने तुरंत पुलिस को फोन कर दिया. मौके पर पहुंची पुलिस ने छानबीन की और तीनों पक्षों को शांत कराया. आखिरकार दुल्हन की पसंद और रजामंदी को प्राथमिकता दी गई. संभल से आए दूल्हे के साथ निकाह की रस्में सादगी से अदा की गईं और शाम को दुल्हन की रुखसती हुई. मुरादाबाद वाले दूल्हे को अपनी बारात लेकर बिना दुल्हन के ही वापस लौटना पड़ा.

बिना कानूनी कार्रवाई के सुलझा विवाद
इतना बड़ा ड्रामा होने के बावजूद मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई. तीनों पक्षों ने आपस में समझौता कर लिया और पुलिस की मौजूदगी में विवाद निपट गया. फिलहाल, पूरे अमरोहा नगर में इस अनोखी शादी और दो दूल्हों की चर्चा जोरों पर है। लोग इसे फिल्मी सीन की तरह देख रहे हैं, जहां अंत में पुलिस ने दखल देकर मामला शांत कराया और दुल्हन अपने तय दूल्हे के साथ विदा हुई

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Mon, 13 Apr 2026 14:06:11 +0530 news desk MPcg
रूस&यूक्रेन के बीच हुआ सीजफायर, पुतिन ने किया ऐलान; जानिए कितने दिन रहेगी शांति https://citytoday.co.in/5479 https://citytoday.co.in/5479 मॉस्को 

ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद अब दुनिया को एक और खुशखबरी मिली है. जी हां, अब रूस-यूक्रेन के बीच भी सीजफायर हो गया है. हालांकि, यह टेंपररी सीजफायर है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मानें तो रूस अब 2 दिनों तक यूक्रेन पर कोई अटैक नहीं करेगा. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर दो दिन के सीजफ़ायर का ऐलान किया. क्रेमलिन ने कहा कि उसे उम्मीद है कि यूक्रेन भी इसका पालन करेगा। 

क्रेमलीन की ओर से इस बाबत एक बयान जारी किया गया. रूसी बयान में कहा गया, ‘ऑर्थोडॉक्स ईस्टर की आने वाली छुट्टी के सिलसिले में 11 अप्रैल को शाम 4 बजे से 12 अप्रैल को दिन खत्म होने तक सीजफायर का ऐलान किया जाता है. हम मानते हैं कि यूक्रेनी पक्ष भी रूसी संघ का उदाहरण अपनाएगा.’ यानी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर 32 घंटे की युद्धविराम की घोषणा की है। 

ईस्टर ईसाइयों के लिए एक बड़ा त्योहार है. यह रविवार को मनाया जाएगा. ऑर्थोडॉक्स चर्चों द्वारा अपनाए गए जूलियन कैलेंडर के अनुसार यूक्रेन और रूस में ईस्टर 12 अप्रैल को पड़ता है। 

यूक्रेन ने सीजफायर पर क्या कहा
वहीं, रूसी राष्ट्रपति के बयान पर जेलेंस्की का भी बयान आया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस के फैसले पर कहा कि कीव ने बार-बार ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के दौरान युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है और उसी अनुसार कार्रवाई करेगा. उन्होंने कहा, ‘यूक्रेन ने बार-बार कहा है कि हम समान कदम उठाने के लिए तैयार हैं. हमने इस साल ईस्टर के दौरान युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था और हम उसी अनुसार कार्रवाई करेंगे. लोगों को एक ऐसा ईस्टर चाहिए जिसमें कोई खतरा न हो और शांति की ओर वास्तविक कदम बढ़ें. रूस के पास भी मौका है कि वह ईस्टर के बाद हमलों पर वापस न लौटे। 

पुतिन का यह कदम क्यों अहम
पुतिन का यह कदम जेलेंस्की के उस प्रस्ताव के बाद आया है, जिसमें उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के दौरान एक-दूसरे की ऊर्जा संरचना पर हमले रोकने की बात कही थी. उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव अमेरिका के माध्यम से दिया गया था, जो मॉस्को और कीव के बीच बातचीत में मध्यस्थता कर रहा है, क्योंकि युद्ध पांचवें साल में पहुंच गया है। 

कब से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध
गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच 2022 से ही युद्ध जारी है. रूस और यूक्रेन के बीच दो दिनों के सीजफायर का ऐलान तब हुआ है, जब इससे पहले ईरान और अमेरिका सीजफायर पर सहमत हुए हैं. बीते दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 15 दिनों के सीजफायर का ऐलान किया. ईरान और अमेरिका के बीच आज इस्लामाबाद में शांति वार्ता होगी. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर अटैक किया था. तब से ही युद्ध जारी था। 

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Fri, 10 Apr 2026 17:50:21 +0530 news desk MPcg
अमेरिका को बख्शने के मूड में नहीं ईरान, ब्लड मनी की मांग; इरान ने खुले तौर पर बताए इरादे https://citytoday.co.in/5475 https://citytoday.co.in/5475 तेहरान 

पाकिस्तान में बातचीत से पहले ईरान ने अपने इरादे बता दिए हैं। सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का कहना है कि आक्रमण करने वालों को बगैर सजा दिए छोड़ा नहीं जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान शहीदों के लिए ब्लड मनी की भी मांग करेगा। इसके अलावा भी उन्होंने कई मांगें रखी हैं। उनका बयान ऐसे समय पर आया है, जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच दो सप्ताह का सीजफायर हुआ है और पाकिस्तान में आगे की वार्ता होनी है।

खामेनेई ने इस युद्ध में ईरान की जीत का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, 'आज तक के हालातों को देखते हुए यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि आप ईरान की बहादुर जनता, इस मैदान में असली विजेता रहे हैं।'

रखी हैं ये मांगें
खामेनेई ने कहा, 'हम अपराधी हमलावरों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ेंगे। हम हर चोट का हर्जाना, शहीदों के लिए ब्लड मनी और इस जंग में अपाहिज हुए सैनिकों के लिए मुआवाजा जरूर लेंगे। साथ ही, हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रबंधन को यकीनन एक नए स्तर पर ले जाएंगे।' उन्होंने साफ किया है कि अस्थायी सीजफायर का मतलब युद्ध खत्म होना नहीं है।

ईरान ने रख दी लेबनान वाली शर्त
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू करने के लिए लेबनान में इजरायली हमलों का तुरंत रुकना एक अहम शर्त है। उन्होंने कहा कि ईरान की 10-सूत्रीय योजना के तहत प्रस्तावित युद्धविराम 'ईरानी नेतृत्व और जनता के बलिदान का परिणाम' है। उन्होंने कहा कि अब देश कूटनीति, रक्षा तथा जनभागीदारी के स्तर पर एकजुट रहेगा।

ट्रंप जता चुके हैं आशंका
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौते के प्रभावी होने को लेकर आशंका जताई है। उन्होंने गुरुवार को कहा, 'ईरान बहुत खराब काम कर रहा है। ईरान तेल को होर्मुज से गुजरने देने के संदर्भ में बहुत खराब काम कर रहा है। कुछ लोग इसे शर्मनाक कहेंगे।' उन्होंने कहा, 'हमारे बीच ऐसा कोई समझौता नहीं है।'

पाकिस्तान की वार्ता पर नजर
अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को वार्ता की मेजबानी करने जा रहे पाकिस्तान ने राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। हालांकि, शीर्ष ईरानी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि लेबनान पर किए गए इजराइली हमले वार्ता को निरर्थक बना सकते हैं। अमेरिका और ईरान बुधवार को दो हफ्ते के लिए सशर्त युद्ध-विराम पर सहमत हो गए। इसके बाद, मतभेदों को सुलझाने और मौजूदा युद्ध-विराम को एक स्थायी शांति में तब्दील करने के लिए इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच बैठक होनी है।

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Fri, 10 Apr 2026 16:47:14 +0530 news desk MPcg
मार्क ज़करबर्ग का AI मास्टरस्ट्रोक: ‘Muse Spark’ लॉन्च, गूगल और ओपनएआई को दी टक्कर https://citytoday.co.in/5454 https://citytoday.co.in/5454 वाशिंगटन
फेसबुक की पेरेंटल कंपनी मेटा ने बुधवार को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की इंडस्ट्री में बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने नए AI मॉडल को लॉन्च किया है, जिसका नाम म्यूज स्पार्क है. यह कंपनी के न्यू AI डिविजन का बनाया नया प्रोडक्ट है, जिसको लेकर कंपनी ने बीते करीब एक साल में बड़े स्तर पर इनवेस्टमेंट की है। 

लॉन्चिंग से पहले इस प्रोजेक्ट को इंटरनल नाम दिया गया था, जो 'एवोकाडो' था. अब म्यूज स्पार्क को मेटा के स्टैंडअलोन AI ऐप पर लॉन्च कर दिया है. अब आने वाले दिनों में इसको को मेटा के ऐप के लिए जारी किया जाएगा, जिसमें वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और मेटा एआई स्मार्ट ग्लास के नाम शामिल हैं। 

गूगल और ओपनएआई को देगा टक्कर 
वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम में मिलने वाला मेटा एआई कई जगह पिछड़ने लगा था. अब म्यूज स्पार्क की मदद से कंपनी को बड़े फायदे की उम्मीद कर रही है. राइटिंग और रीजनिंग के मामले में म्यूज स्पार्क ने बेहतर रिजल्ट दिया है, जिसकी वजह से यह ओपनएआई, गूगल और एंथ्रोपिक के बेहतरीन मॉडल के लेवल के आसपास पहुंच चुका है। 

रिपोर्ट्स में कोडिंग को लेकर बड़ा अंतर दिखाया गया है. मौजूदा समय में एआई रेस में कोडिंग काबिलियत एक जरूरी स्टैंडर्ड बन चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कोडिंग के मामले में म्यूज स्पार्क अपने राइवल्स से थोड़ा पीछे रह गया है। 

मार्क जकरबर्ग ने बीते साल बनाई AI टीम
मार्क जकरबर्ग AI को लेकर बीते करीब एक साल से बड़ी इनवेस्टमेंट कर रहे हैं और इंडस्ट्री के कई बड़े टैलेंट को उन्होंने अपनी AI टीम में मोटी रकम देकर शामिल किया है. जकरबर्ग ने 29 साल के एलेक्जेंटर वांग को मोटी रकम देकर कंपनी में शामिल कर चुके हैं और उनको चीफ एआई ऑफिसर की पोस्ट दी, साथ ही कंपनी ने लामा-4 मॉडल पर काम करने वाली पुरानी टीम को बदल दिया. नए टीम में ओपनएआई, गूगल और अन्य राइवल्स कंपनियों से नए लोगों को मोटी रकम देकर मेटा में शामिल किया गया। 

म्यूज स्पार्क को अभी बंद मॉडल रखा 
मेटा ने म्यूज स्पार्क के साथ एक बड़ा बदलाव किया है 
और इसके कोड को मौजूदा समय में प्राइवेट रखा है. इसको क्लोज्ड मॉडल भी कह सकते हैं. बताते चलें कि मेटा अपने एआई मॉडल्स को ओपेन सोर्स करता था, जिसकी मदद से डेवलपर्स को कोड यूज करने की परमिशन मिलती थी। 

मेटा का बड़ा इनवेस्टमेंट 
जकरबर्ग ने एआई डेवलपमेंट के लिए बड़े इनवेस्टमेंट की तैयारी करके रखी है. एआई डेवलपमेंट के नए डेटा सेंटर पर 600 अरब डॉलर खर्च करने का प्लान बनाया हुआ है. साल 2026 में मेटा लगभग 135 अरब डॉलर तक खर्च करने का प्लान बनाया है, जो बीते साल की तुलना में लगभग दोगुना है. बीते साल कंपनी ने 72 अरब डॉलर की इनवेस्टमेंट की थी। 

म्यूज स्पार्क को लेकर कंपनी ने बड़ा दांव लगाया है और इससे कंपनी अपने राइवल्स से आगे निकलना चाहती है. गूगल, ओपनएआई और एन्थ्रॉपिक जैसे नाम मेटा से काफी आगे निकल चुके थे. म्यूज स्पार्क कंपनी के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, वो तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा। 

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Thu, 09 Apr 2026 13:18:43 +0530 news desk MPcg
ईरान को पाई&पाई चुकाएगा अमेरिका, नुकसान का मुआवजा देगा; गजब शर्तें सामने आईं https://citytoday.co.in/5442 https://citytoday.co.in/5442 तेहरान 

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम का ऐलान हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान से मिले 10 बिंदु बातचीत आगे बढ़ाने का आधार हैं। खबर है कि इसमें ईरान ने एक शर्त यह भी रखी है कि उसे हुए नुकसान का मुआवजा भी दिया जाएगा। सबसे बड़ी राहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना मानी जा रही है, जिसपर दुनिया का तेल वितरण टिका हुआ था।

3640 मौतें, 90 हजार घर गिरे

जंग में लेबनान, इराक, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, यूएई, ओमान जैसे देश भी शामिल हो गए। लगभग 40 दिन तक मिसाइलें, ड्रोन और बमबारी चलती रही. अब तक की रिपोर्ट के अनुसार कुल मौतें करीब 3640 बताई जा रही हैं. हजारों लोग घायल हुए हैं. बहुत बड़ी संपत्ति का नुकसान हुआ है। 

जंग कब शुरू हुई और फैली?
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए. इन हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकाने, परमाणु सुविधाएं और सरकार से जुड़े स्थान निशाने पर थे. ईरान ने इसे जवाब दिया और इजरायल पर मिसाइल व ड्रोन दागे. साथ ही उसने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए। 

ईरान ने खाड़ी देशों पर भी हमले किए क्योंकि वहां अमेरिकी ठिकाने हैं. लेबनान में हिजबुल्लाह ने भी इजरायल पर रॉकेट दागे. यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल को निशाना बनाया. इस तरह एक छोटा सा संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैल गया. कई देशों में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं और तेल-गैस की कीमतें आसमान छूने लगीं। 

इस 40 दिन की जंग में सबसे ज्यादा नुकसान ईरान को हुआ. ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वहां 2076 लोग मारे गए. 26500 से ज्यादा घायल हुए. इनमें आम नागरिक भी शामिल हैं. लेबनान में 1497 मौतें हुईं और हजारों लोग घायल हुए. इजरायल में 26 लोग मारे गए जबकि 7183 घायल हुए. अमेरिकी सैनिकों में 13 मौतें हुईं और 200 से ज्यादा घायल हुए। 

खाड़ी देशों में कुल 28 मौतें बताई गई हैं. इनमें कुवैत में 7, बहरीन में 3, सऊदी अरब में 2, यूएई में 12, ओमान में 3 और कतर में कुछ घायल हुए. इराक में 109 मौतें और दर्जनों घायल. जॉर्डन में 29 घायल, सीरिया में 4 मौतें और साइप्रस में भी कुछ नुकसान हुआ. 
कुल मिलाकर मौतों की संख्या 3640 के आसपास पहुंच गई है. घायलों की संख्या बहुत ज्यादा है – ईरान अकेले में 26,500 से ऊपर. असली आंकड़े इससे भी ज्यादा हो सकते हैं क्योंकि स्थिति तेजी से बदल रही है। 

इमारतों और संपत्ति का भारी नुकसान
जंग ने सिर्फ लोगों की जान नहीं ली, बल्कि शहरों और गांवों को भी तबाह कर दिया. कुल 90 हजार घर पूरी तरह बर्बाद हो गए. स्कूलों पर भी बहुत असर पड़ा – 760 स्कूल क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए. अस्पतालों की संख्या 307 बताई गई है जो या तो बमबारी में टूट गए या इस्तेमाल नहीं हो पा रहे. हजारों व्यावसायिक इमारतें, दुकानें, बाजार और फैक्टरियां भी नष्ट हुईं। 

ईरान में कई शहरों में आवासीय इलाके, स्कूल और अस्पताल प्रभावित हुए. लेबनान में भी बड़े पैमाने पर घर और इमारतें गिर गईं. इजरायल में कुछ इलाकों में क्षति हुई लेकिन वहां की एयर डिफेंस ने कई हमलों को रोक लिया. खाड़ी देशों में तेल और गैस के प्लांट, बंदरगाह और एयरपोर्ट पर हमले हुए जिससे ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हुआ. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल परिवहन बाधित होने से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ गईं। 
ईरान इस जंग का मुख्य केंद्र रहा. वहां सबसे ज्यादा मौतें और घायल हुए. उसके परमाणु और सैन्य कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा. लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े इलाकों में भारी बमबारी हुई जिससे आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया. इजरायल ने अपनी मजबूत रक्षा व्यवस्था से कई हमलों को रोका लेकिन कुछ मौतें और चोटें हुईं। 

खाड़ी देश जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन आदि ने ईरानी हमलों का सामना किया. इन देशों में ज्यादातर हमले ऊर्जा सुविधाओं पर थे. हालांकि इन देशों की एयर डिफेंस ने ज्यादातर मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया, फिर भी कुछ मौतें और संपत्ति का नुकसान हुआ। 

ईरान ने रखीं हैं 10 शर्तें

एक-दूसरे पर हमला न करना

Strait of Hormuz पर ईरान का नियंत्रण बने रहना

यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देना

सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को हटाना

सभी माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाना

UNSC के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना

IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना

ईरान को हुए नुकसान का मुआवजा देना

क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों को वापस बुलाना

सभी मोर्चों पर युद्ध रोकना, जिसमें लेबनान के 'इस्लामिक रेजिस्टेंस' के खिलाफ युद्ध भी शामिल है।

ट्रंप का बयान
ट्रंप ने लिखा, 'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर से हुई बातचीत के आधार पर, जिसमें उन्होंने मुझसे ईरान पर आज रात होने वाले विनाशकारी हमले को रोकने का अनुरोध किया था। साथ ही ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरा, तत्काल और सुरक्षित तरीके से खोलने के मद्देनजर मैं दो सप्ताह के लिए ईरान पर दो हफ्ते के लिए बमबारी और हमले रोकने के लिए तैयार हो गया हूं।'

ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका और ईरान के बीच पिछले विवाद के लगभग सभी बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है, लेकिन दो हफ्तों का संघर्ष विराम समझौते को अंतिम रूप देने और लागू करने में मदद करेगा।'

पाकिस्तान में होगी वार्ता
पाकिस्तान ने बुधवार को अमेरिका और ईरान को इस्लामाबाद में वार्ता के लिए आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान ने तत्काल संघर्षविराम पर सहमति जताई है। शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में आमने-सामने बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, ताकि 'सभी विवादों का समाधान' निकाला जा सके।

चीन की है अहम भूमिका?
एपी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि चीन ने ईरान के नेताओं से बातचीत करके उन्हें अमेरिका से युद्धविराम का रास्ता तलाशने के लिए राजी करने की कोशिश की। दो अधिकारियों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि बातचीत के दौरान चीनी अधिकारी ईरानी अधिकारियों के संपर्क में थे। एक अधिकारी ने कहा कि चीन अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है और वह मुख्य रूप से पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र समेत मध्यस्थों के साथ काम कर रहा है।

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Wed, 08 Apr 2026 15:42:57 +0530 news desk MPcg
इस्फहान में अमेरिकी रेस्क्यू ऑपरेशन पर छिड़ा वाकयुद्ध, ईरान ने बताया अपनी जीत, ट्रंप बोले ‘साहसी मिशन’ https://citytoday.co.in/5410 https://citytoday.co.in/5410 नई दिल्ली

ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच एक रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। ईरान ने इसे अपनी जीत बताया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसे बड़ी सैन्य सफलता करार दिया है।

ईरान ने रविवार को दावा किया कि दक्षिण इस्फहान में अमेरिका को कड़वी हार का सामना करना पड़ा। यह बयान उस समय आया जब एक अमेरिकी एफ-15 विमान के दूसरे क्रू सदस्य को बचा लिया गया, जो विमान गिरने के बाद लापता हो गया था।

ईरान के खातम अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघरी ने कहा कि इस घटना ने अमेरिकी सेना की कमजोरी को उजागर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि डोनल्ड ट्रंप जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस ऑपरेशन के दौरान एक सी-130 श्रेणी का विमान भी मार गिराया गया। जोल्फाघरी ने इसे ईरानी सेना की बहादुरी और साहस का उदाहरण बताया।

ट्रंप ने बताया बड़ी सफलता
जहां ईरान इसे अपनी जीत बता रहा है, वहीं डोनल्ड ट्रंप ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अमेरिकी सेना की बड़ी सफलता कहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि घायल पायलट अब सुरक्षित है और यह मिशन अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी बचाव अभियानों में से एक है।

ट्रंप ने कहा कि इस अभियान में कई विमान और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि दुश्मन के इलाके में जाकर दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग बचाना सेना की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन ईरान के आसमान में अमेरिका की ताकत और नियंत्रण को दिखाता है।

ऑपरेशन के दौरान टकराव
ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस ऑपरेशन के दौरान दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक सी-130 विमान को निशाना बनाया गया। कुछ तस्वीरों में रेगिस्तानी इलाके में धुआं उठता हुआ भी दिखाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय ईरानी लोगों ने भी अमेरिकी हेलीकॉप्टरों पर गोलीबारी की। इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं।
युद्ध का बढ़ता असर

इस संघर्ष का असर अब आम लोगों तक भी पहुंचने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य समेत कई अहम समुद्री रास्ते प्रभावित हुए हैं, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि संस्था ने चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध जून तक जारी रहा, तो दुनिया भर में 4.5 करोड़ और लोग भूख के संकट में फंस सकते हैं।

पहले से ही 32 करोड़ लोग खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं। इस बीच मिस्र और पाकिस्तान जैसे देश कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं।

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Mon, 06 Apr 2026 12:57:37 +0530 news desk MPcg
ईरानी हमले में बर्बाद हुआ US एयरफोर्स का E&3 Sentry विमान, कीमत ₹6600 करोड़ https://citytoday.co.in/5350 https://citytoday.co.in/5350 रियाद

सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले ने अमेरिका की सैन्य क्षमताओं को बड़ा झटका दिया है. 27 मार्च को हुए इस हमले में अमेरिकी वायुसेना का बेहद अहम E-3 Sentry AWACS (Airborne Warning and Control System) विमान क्षतिग्रस्त हो गया, साथ ही हवा में ईंधन भरने वाले कई टैंकर विमान भी इस हमले की चपेट में आए. ईरान के दावे के मुताबिक उसके इस हमले में 10 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक भी घायल हुए हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है. सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में E-3 Sentry AWACS विमान को भारी नुकसान पहुंचा दिख रहा है। 

इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) ने भी अपने X हैंडल से हमले में बर्बाद हुए इस​ विमान की तस्वीरें पोस्ट की हैं. फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, हमले से पहले इस बेस पर करीब छह E-3 Sentry विमान तैनात थे. यह एक सर्विलांस विमान होता है, जिसका इस्तेमाल आसमान से दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित खतरे का पता लगाने के लिए होता है. ईरानी हमले में इस महत्वपूर्ण विमान को हुए नुकसान से क्षेत्र में अमेरिका के एरियल ऑपरेशन की क्षमता को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस एक विमान की कीमत $700 मिलियन (₹6600 करोड़) के करीब है। 

क्यों अहम है E-3 Sentry विमान

E-3 Sentry विमान को अमेरिका के एरियल ऑपरेशन का बैकबोन माना जाता है. यह विमान हवा में उड़ता हुआ एक कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की तरह है, जो अमेरिकी वायुसेना को इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (खुफिया जानकारी जुटाना) जैसी महत्वपूर्ण क्षमताएं प्रदान करता है. 1970 के दशक से सेवा में मौजूद यह विमान कई बड़े सैन्य अभियानों- जैसे ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म, कोसोवो युद्ध, इराक और अफगानिस्तान अभियानों, ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व में निर्णायक भूमिका निभा चुका है. यह प्लेटफॉर्म विशाल हवाई क्षेत्र की निगरानी करने, विभिन्न लड़ाकू विमानों के बीच तालमेल बैठाने में सक्षम है. अमेरिका के अलावा फ्रांस, ब्रिटेन और सऊदी अरब जैसे कई देशों की सेनाएं भी इसका इस्तेमाल करती हैं। 

एक्सपर्ट्स ने बताया गंभीर नुकसान
एयर पावर एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के विमान को नुकसान पहुंचना बेहद गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है. अमेरिकी वायुसेना की पूर्व F-16 पायलट और डिफेंस पॉलिसी एक्सपर्ट हीथर पेनी (Heather Penney) ने इस घटना को बेहद चिंताजनक और गंभीर नुकसान बताया. अमेरिकन फॉरेन एंड डिफेंस पॉलिसी एक्सपर्ट केली ग्रीको (Kelly Grieco) ने इसे 'शॉर्ट टर्म में बड़ा नुकसान' करार दिया और चेतावनी दी कि इससे मिडिल ईस्ट में चल रहे वर्तमान युद्ध में अमेरिका के ऑपरेशनल कवरेज में गैप आ सकता है. पेनी ने AWACS की भूमिका को 'शतरंज के मास्टर' की तरह बताया-जो पूरे युद्धक्षेत्र की तस्वीर देखता है, जबकि फाइटर पायलट उसी आधार पर मिशन को अंजाम देते हैं। 

एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर हमला किसी आकस्मिक घटना का नतीजा नहीं, बल्कि ईरान की व्यापक सैन्य रणनीति का हिस्सा हो सकता है. यह बेस क्षेत्र में अमेरिकी ऑपरेशंस का एक प्रमुख केंद्र है. ईरान के खिलाफ वर्तमान युद्ध में अमेरिकी वायुसेना बहुत हद तक इस एयरबेस पर निर्भर है, इसलिए यह एक हाई-वैल्यू टारगेट माना जाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान का प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर यह हमला एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी एयर पावर के अहम घटकों- जैसे रडार सिस्टम, कम्युनिकेशन नेटवर्क और AWACS जैसे हाई-वैल्यू एयरक्राफ्ट को नष्ट करना है। 

ओल्ड AWACS फ्लीट पर बढ़ेगा दबाव
इस घटना ने अमेरिकी एयरबोर्न बैटल मैनेजमेंट सिस्टम के भविष्य को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है. E-3 Sentry के संभावित विकल्प के रूप में Boeing E-7 Wedgetail विमान पर विचार किया जा रहा है. हालांकि, हीथर पेनी ने चेतावनी दी कि नए सिस्टम की खरीद में देरी से मौजूदा AWACS फ्लीट पर दबाव बढ़ेगा, जिससे अमेरिकी वायुसेना की कार्यक्षमता और मिशन रेडीनेस पर असर पड़ सकता है. कुल मिलाकर, E-3 Sentry को हुए नुकसान की तत्काल भरपाई अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि यह अमेरिकी वायुसेना की लॉन्ग टर्म स्ट्रैटेजी और तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। 

 

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Mon, 30 Mar 2026 13:33:04 +0530 news desk MPcg
ईरान पर बड़े हमले की तैयारी? गेमप्लान: 2500 नौसैनिक, 3500 सैनिक साथ अमेरिकी सैनिकों की बड़ी योजना https://citytoday.co.in/5347 https://citytoday.co.in/5347 वाशिंगटन

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब एक निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. 'एसोसिएटेड प्रेस' (AP) और 'वॉशिंगटन पोस्ट' की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी मरीन कॉर्प्स की पहली 'एक्सपीडिशनरी यूनिट' (31st MEU) मध्य पूर्व पहुंच चुकी है। 

इसके साथ ही पेंटागन ने ईरान के भीतर हफ़्तों तक चलने वाले ग्राउंड ऑपरेशन का खाका तैयार कर लिया है.अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने ईरान में संभावित जमीनी सैन्य अभियान की तैयारी तेज कर दी है. वहीं अमेरिका ने क्षेत्र में 3500 से ज्यादा सैनिक तैनात किए गए हैं। 

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से 'द वॉशिंगटन पोस्ट' ने दावा किया है कि  पेंटागन कई हफ्तों तक चलने वाले ग्राउंड ऑपरेशन की योजना बना रहा है. इसमें स्पेशल ऑपरेशन फोर्स और पारंपरिक पैदल सेना शामिल हो सकती है. हालांकि अंतिम फैसला अभी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को लेना है। 

मिडिल ईस्ट पहुंचा युद्धपोत
 इसी बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत USS Tripoli करीब 2500 मरीन सैनिकों को लेकर मिडिल ईस्ट पहुंच गया है. इस जहाज पर 31st मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के सैनिक तैनात हैं. यह यूनिट पहले जापान में तैनात थी और ताइवान के आसपास अभ्यास कर रही थी, लेकिन करीब दो हफ्ते पहले इसे मिडिल ईस्ट भेजने का आदेश दिया गया। 

USS त्रिपोली अपने साथ ट्रांसपोर्ट विमान, अत्याधुनिक स्ट्राइक फाइटर जेट्स (F-35) और Amphibious हमले के उपकरण भी मौजूद हैं जो समुद्र से जमीन पर सीधा प्रहार करने में सक्षम है। 

वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी अब ईरान के भीतर 'स्पेशल ऑपरेशन्स' और पारंपरिक इन्फैंट्री सैनिकों द्वारा छापेमारी (Raids) की योजना बना रहे हैं. हालांकि, ट्रंप द्वारा इन जमीनी सैन्य अभियानों को अंतिम मंजूरी देना अभी बाकी है, लेकिन 82nd एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों और सैन डिएगो से रवाना हुए। 

और खतरनाक मोड़ पर पहुंच सकता है युद्ध
दरअसल मिडिल ईस्ट में तनाव तब चरम पर पहुंचा जब ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमला किया, जिसमें 10 अमेरिकी कर्मी घायल हुए. वहीं, ईरान द्वारा होर्मुज की नाकेबंदी ने वैश्विक तेल संकट पैदा कर दिया है. यमन के हूती विद्रोहियों की सक्रियता ने 'बाब अल-मंडेब' जैसे व्यापारिक मार्गों को भी असुरक्षित बना दिया है। 

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ईरान में जमीनी ऑपरेशन शुरू करता है, तो यह युद्ध और व्यापक हो सकता है. अभी तक युद्ध मिसाइल, ड्रोन और एयर स्ट्राइक तक सीमित था, लेकिन ग्राउंड ऑपरेशन शुरू होने पर सीधे जमीन पर लड़ाई शुरू हो जाएगी। 

कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है. ऐसे में मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है और दुनिया की नजर अब अमेरिका के अगले कदम पर टिकी है। 

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Mon, 30 Mar 2026 13:16:05 +0530 news desk MPcg
बांग्लादेश से दर्दनाक खबर: पद्मा नदी में गिरी यात्रियों से भरी बस, 16 की मौत https://citytoday.co.in/5315 https://citytoday.co.in/5315 बांग्लादेश के Rajbari जिले से एक बेहद दुखद हादसे की खबर सामने आई है, जहां यात्रियों से भरी एक बस Padma River में जा गिरी। बताया जा रहा है कि बस में करीब 40 लोग सवार थे, जिनमें से अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लापता हैं।

यह हादसा दौलतदिया घाट नंबर-3 पर उस समय हुआ, जब ढाका जा रही बस फेरी पर चढ़ने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान अचानक संतुलन बिगड़ गया और बस सीधे नदी में गिर गई। अधिकारियों के मुताबिक, बस लगभग 30 फीट गहराई में डूब गई।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि एक छोटी फेरी के पोंटून से टकराने के कारण यह बड़ा हादसा हुआ। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

बताया जा रहा है कि बस में सवार कई यात्री ईद मनाकर अपने घरों से लौट रहे थे। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है, जबकि परिजन अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।

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Thu, 26 Mar 2026 15:35:26 +0530 news desk MPcg
हां, हम युद्ध खत्म करेंगे मगर… – अमेरिका को ईरान का सीधा जवाब, 9 अप्रैल तक खत्म होगा जंग? https://citytoday.co.in/5286 https://citytoday.co.in/5286 वाशिंगटन/ तेहरान 

अमेरिका अब ईरान जंग खत्म करने को रेडी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने का दावा है कि कि ईरान अब युद्ध नहीं लड़ना चाहता. वह समझौता करना चाहता है. उनकी मानें तो अमेरिका सीजफायर को लेकर ईरानी नेता के साथ बातचीत कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ प्रोडक्टिव बातचीत हो रही है. वहीं ईरान ने ट्रंप के दावों को फेक ही बता दिया है. ईरान का कहना है कि मार्केट को मेनुपुलेट करने के लिए ट्रंप ईरान जंग पर ऐसा दावा कर रहे हैं. अब सवाल है कि क्या सच में ईरान जंग खत्म करने को तैयार नहीं हैं? वह भी तब जब उसके सारे टॉप लीडर्स मारे जा चुके हैं. अब ईरान ने भी अपनी मंशा जाहिर कर दी है. ईरान ने ट्रंप को सीधा जवाब दिया है कि वह भी युद्ध खत्म करने को तैयार है, मगर उसकी कुछ शर्तें हैं। 

जी हां, ईरान भी अमेरिका और इजरायल संग युद्ध खत्म करना चाहता है. मगर वह ऐसे ही जंग खत्म नहीं करना चाहता. उसकी कुछ शर्तें हैं. ईरान का कहना है कि युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक सभी प्रतिबंध हटा नहीं दिए जाते और अमेरिका द्वारा युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर दी जाती. जी हां, ईरान अब अमेरिका से युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई चाहता है. साथ ही वह अपने ऊपर लगे सारे सैंक्शन्स हटवाना चाहता है. ये दोनों चीजें अमेरिका मान लेता है तो फिर ईरान इस युद्ध को आगे नहीं बढ़ाएगा और डोनाल्ड ट्रंप की बात मान लेगा। 

क्या मानेंगे डोनाल्ड ट्रंप?
मगर सवाल है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप ईरान की इन शर्तों को मानेंगे? दरअसल, ईरान के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि युद्ध का अंत ईरान के हाथ में है. ईरान इसे तभी समाप्त मानेगा जब अमेरिका से पूर्ण मुआवजा मिले और भविष्य में हस्तक्षेप न करने की गारंटी हो. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध को ‘समाप्त करने की दिशा में’ विचार करने की बात कही थी. ट्रंप प्रशासन ने तेल की कीमतों में भारी उछाल को नियंत्रित करने के लिए ईरानी तेल पर कुछ प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाए हैं, जिससे लगभग 140 मिलियन बैरल तेल बाजार में आ सकता है. लेकिन ईरान इसे अपनी जीत के रूप में देख रहा है और अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। 

ईरानी विदेश मंत्री ने क्या कहा?
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी दोहराया कि युद्ध अमेरिका द्वारा शुरू किया गया था और इसके सभी परिणामों के लिए वाशिंगटन जिम्मेदार है. उन्होंने मुआवजे, क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य अड्डों की वापसी और भविष्य में हमलों की गारंटी की मांग की है. ईरान का कहना है कि बिना इन शर्तों के कोई युद्धविराम स्वीकार नहीं किया जाएगा। 

ट्रंप का क्या दावा?
वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को उस ईरानी नेता का नाम बताने से इनकार कर दिया, जिसके साथ अमेरिका तीन सप्ताह से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत कर रहा है. ट्रंप ने कहा कि वार्ताकार एक ‘शीर्ष व्यक्ति’ है, जो उस देश में ‘सबसे सम्मानित’ है. खबरों के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत होने से इनकार किया है, लेकिन यह स्वीकार किया है कि क्षेत्र के कुछ देश तनाव कम करने के प्रयास कर रहे हैं। 

व्हाइट हाउस का जवाब
इधर, समाचार एजेंसी ANI ने व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट से संपर्क किया और पूछा कि क्या अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शांति मिशन के लिए अमेरिका के विशेष राष्ट्रपति दूत स्टीव विटकॉफ, और व्यवसायी व अमेरिका के राष्ट्रपति के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर इस सप्ताह इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे? इस पर व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने जवाब दिया, ‘ये संवेदनशील कूटनीतिक चर्चाएं हैं और अमेरिका प्रेस के माध्यम से बातचीत नहीं करेगा. यह एक बदलती हुई स्थिति है और मुलाकातों के बारे में की जा रही अटकलों को तब तक अंतिम नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि व्हाइट हाउस द्वारा उनकी औपचारिक घोषणा न कर दी जाए। 

9 अप्रैल तक खत्म हो जाएगा युद्ध?

 मध्य पूर्व में जारी युद्ध को लेकर एक नई और दिलचस्प जानकारी सामने आ रही है. इजराइली मीडिया आउटलेट वाईनेट ने एक अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि अमेरिका ईरान के साथ चल रहे युद्ध को अप्रैल महीने की 9 तारीख तक खत्म करने की योजना बना रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने 9 अप्रैल को युद्ध समाप्त करने की संभावित तारीख तय की है. अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक ही चलता है तो इसका मतलब है कि लड़ाई और बातचीत में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। 

रिपोर्ट ये भी कहती है कि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता इसी हफ्ते के अंत में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो सकती है. इसे लेकर न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने भी जानकारी दी है कि दोनों पक्षों में बात के लिए इस्लामाबाद को चुना जा सकता है. हालांकि इजरायली रिपोर्ट में ये भी कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप को इजरायल डे के मौके पर नेतन्याहू सम्मानित करने का वादा कर चुके हैं. अगर तब तक ये युद्ध रुका नहीं, तो ये सम्मान समारोह भी टल जाएगा और ट्रंप ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते। 

क्यों 9 अप्रैल तक खत्म होगा युद्ध?
दरअसल दिसंबर, 2025 के अंत में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने के बाद एक विशेष सम्मान देने का वादा किया था. यदि 9 अप्रैल तक युद्ध खत्म होता है, तो यह ट्रंप के लिए इजराइल के स्वतंत्रता दिवस यानि 21-22 अप्रैल के दौरान वहां यात्रा करने और इजराइल प्राइज लेने का मौका देगा. ये देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इसके बाद भी आने वाले तीन हफ्तों के लिए आगे की योजनाएं बनाई जा रही हैं। 

इजरायल-अमेरिका के बीच बात भी नहीं?
इजराइल डिफेंस फोर्स के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने कहा कि उनकी सेना ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई यहूदी त्योहार पासओवर तक जारी रखेगी, जो इस साल 1 से 8 अप्रैल के बीच पड़ रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेरी के साथ अपने संपर्कों की जानकारी इजराइल को नहीं दी थी. एक इंटरव्यू में यह भी कहा गया कि गालिबाफ अमेरिका के साथ बातचीत की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 

अब तक युद्ध में क्या-क्या हुआ?
    यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था. शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यह संघर्ष लगभग एक महीने तक चल सकता है, लेकिन 11 मार्च को उन्होंने कहा कि यह किसी भी समय खत्म हो सकता है। 

    23 मार्च को ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका पांच दिनों तक ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर हमला नहीं करेगा और तेहरान के साथ बातचीत की बात कही थी. हालांकि, ईरान ने इस तरह की किसी भी बातचीत से इनकार किया है। 

    इससे पहले अमेरिका ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने का अल्टीमेटम दिया था और चेतावनी दी थी कि ऐसा न करने पर उसके पावर प्लांट्स पर हमला किया जाएगा. इसके जवाब में ईरान ने कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो वह पूरे मध्य पूर्व में ऊर्जा, आईटी और पानी शुद्धिकरण से जुड़े ढांचों को निशाना बनाएगा। 

    दुनिया की लगभग 20% ऑयल एंड एलएनजी सप्लाई होर्मुज से होकर गुजरती है. इस संघर्ष का असर यूक्रेन समेत अन्य देशों पर भी पड़ा है. रिपोर्ट के अनुसार इससे ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है और आगे गैस की कीमतों तथा सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है। 

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Tue, 24 Mar 2026 14:10:30 +0530 news desk MPcg
ईरान सिर्फ इजरायल नहीं, दुनिया के लिए खतरा – नेतन्याहू ने पेश किए चौंकाने वाले सबूत https://citytoday.co.in/5277 https://citytoday.co.in/5277 ईरान
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को दुनियाभर के नेताओं से अपील की कि वे ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के युद्ध प्रयासों में शामिल हों। उन्होंने इजरायली क्षेत्र पर हाल ही में हुए हमलों का हवाला देते हुए कहा कि ये हमले एक बढ़ते वैश्विक खतरे का सबूत हैं। इजरायल के अराद में ईरान द्वारा किए गए एक मिसाइल हमले की जगह पर बोलते हुए, नेतन्याहू ने कहा कि पिछले 48 घंटों के घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि ईरान न केवल इजरायल के लिए, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।

इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान ने यरुशलम में नागरिक इलाकों और प्रमुख धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया है, जिनमें वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद शामिल हैं। नेतन्याहू ने कहा, "अगर आपको इस बात का सबूत चाहिए कि ईरान पूरी दुनिया के लिए खतरा है, तो पिछले 48 घंटों ने वह सबूत दे दिया है। पिछले 48 घंटों में, ईरान ने एक नागरिक इलाके को निशाना बनाया। वे ऐसा सामूहिक हत्या के हथियार के तौर पर कर रहे हैं। खुशकिस्मती से, कोई मारा नहीं गया, लेकिन ऐसा किस्मत की वजह से हुआ, न कि उनके इरादे की वजह से। उनका इरादा नागरिकों की हत्या करना है।"

उन्होंने आगे कहा, "दूसरी बात, उन्होंने यरुशलम पर हमला किया, जो तीन एकेश्वरवादी धर्मों के पवित्र स्थलों- वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ़ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद के ठीक बगल में स्थित है। और एक चमत्कार की बदौलत, एक बार फिर, उनमें से किसी को भी चोट नहीं आई, लेकिन वे तीन प्रमुख एकेश्वरवादी धर्मों के पवित्र स्थलों को निशाना बना रहे थे।'' उन्होंने आगे दावा किया कि ईरान ने लंबी दूरी तक मार करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है, जिसमें काफी दूर तक मिसाइलें दागना और समुद्री व ऊर्जा गलियारों सहित रणनीतिक मार्गों को निशाना बनाना शामिल है।

उन्होंने आगे कहा, ''आपको और क्या सबूत चाहिए कि इस शासन को, जो पूरी दुनिया के लिए खतरा है, रोकना ही होगा। इजरायल और अमेरिका पूरी दुनिया के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। और अब समय आ गया है कि बाकी देशों के नेता भी इसमें शामिल हों। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि मैं देख सकता हूं कि उनमें से कुछ लोग उस दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर रहे हैं, लेकिन अभी और ज्यादा करने की जरूरत है।'' नेतान्याहू ने ईरान के खिलाफ व्यापक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपीलों का भी स्वागत किया, और इसे न केवल इजरायल और अमेरिका के लिए, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी जरूरी बताया।

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Mon, 23 Mar 2026 16:09:48 +0530 news desk MPcg
जंग पर ब्रेक ? ट्रंप ने सैन्य अभियान खत्म करने के संकेत दिए, बोले& ‘मिशन ईरान’ पूरा होने के करीब https://citytoday.co.in/5264 https://citytoday.co.in/5264 वाशिंगटन

अमेरिका-ईरान युद्ध के 21वें दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला 'एग्जिट प्लान' साझा किया है.  'ट्रुथ सोशल' पर जारी एक विस्तृत पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने के 'बेहद करीब' है और अब वह मध्य पूर्व में जारी अपने बड़े सैन्य अभियानों को धीरे-धीरे कम करने (Winding Down) पर विचार कर रहा है। 

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में उन उपलब्धियों को गिनाया जिन्हें वे जीत का आधार मान रहे हैं' उन्होंने कहा, 'हमने ईरान की मिसाइल क्षमता, रक्षा औद्योगिक आधार, नौसेना और वायुसेना को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है' ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियारों के करीब न पहुंच सके। 

इस दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों-इजरायल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत की सुरक्षा सुनिश्चित की है और आगे भी उनकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। 

ट्रंप के इस बयान का सबसे अहम हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की सुरक्षा को लेकर था. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जो देश इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल अपने तेल और व्यापार के लिए करते हैं, अब सुरक्षा और पुलिसिंग की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर मदद कर सकता है, लेकिन यह जिम्मेदारी अन्य देशों को निभानी चाहिए। 

ट्रंप ने तर्क दिया, 'अमेरिका इस रास्ते का उपयोग नहीं करता है, इसलिए अन्य देशों को आगे आना चाहिए'' उन्होंने इसे उन देशों के लिए एक 'आसान सैन्य अभियान' बताया और कहा कि ईरान का खतरा खत्म होने के बाद अमेरिका की मुख्य भूमिका की आवश्यकता नहीं रह जाएगी। 

आपको बता दें कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है. हाल के हफ्तों में यहां हमलों और तनाव के कारण वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ा है. ट्रंप के इस बयान को ऐसे समय में देखा जा रहा है जब युद्ध को लगभग तीन हफ्ते हो चुके हैं और क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है। 

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Sat, 21 Mar 2026 13:49:26 +0530 news desk MPcg
जंग पर ब्रेक ? ट्रंप ने सैन्य अभियान खत्म करने के संकेत दिए, बोले& ‘मिशन ईरान’ पूरा होने के करीब https://citytoday.co.in/5265 https://citytoday.co.in/5265 वाशिंगटन

अमेरिका-ईरान युद्ध के 21वें दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला 'एग्जिट प्लान' साझा किया है.  'ट्रुथ सोशल' पर जारी एक विस्तृत पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने के 'बेहद करीब' है और अब वह मध्य पूर्व में जारी अपने बड़े सैन्य अभियानों को धीरे-धीरे कम करने (Winding Down) पर विचार कर रहा है। 

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में उन उपलब्धियों को गिनाया जिन्हें वे जीत का आधार मान रहे हैं' उन्होंने कहा, 'हमने ईरान की मिसाइल क्षमता, रक्षा औद्योगिक आधार, नौसेना और वायुसेना को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है' ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियारों के करीब न पहुंच सके। 

इस दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों-इजरायल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत की सुरक्षा सुनिश्चित की है और आगे भी उनकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। 

ट्रंप के इस बयान का सबसे अहम हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की सुरक्षा को लेकर था. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जो देश इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल अपने तेल और व्यापार के लिए करते हैं, अब सुरक्षा और पुलिसिंग की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर मदद कर सकता है, लेकिन यह जिम्मेदारी अन्य देशों को निभानी चाहिए। 

ट्रंप ने तर्क दिया, 'अमेरिका इस रास्ते का उपयोग नहीं करता है, इसलिए अन्य देशों को आगे आना चाहिए'' उन्होंने इसे उन देशों के लिए एक 'आसान सैन्य अभियान' बताया और कहा कि ईरान का खतरा खत्म होने के बाद अमेरिका की मुख्य भूमिका की आवश्यकता नहीं रह जाएगी। 

आपको बता दें कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है. हाल के हफ्तों में यहां हमलों और तनाव के कारण वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ा है. ट्रंप के इस बयान को ऐसे समय में देखा जा रहा है जब युद्ध को लगभग तीन हफ्ते हो चुके हैं और क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है। 

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Sat, 21 Mar 2026 13:49:26 +0530 news desk MPcg
ईरान&इजरायल से पाक&अफगान तक, जंग ने करोड़ों बच्चों की पढ़ाई को किया बर्बाद, सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट में खुलासा https://citytoday.co.in/5254 https://citytoday.co.in/5254  नई दिल्ली
आज दुनिया के नक्शे पर एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जहां स्कूलों की घंटी नहीं बल्कि धमाकों का शोर सुनाई दे रहा है. ईरान-इजरायल, रूस-यूक्रेन, पाक-अफगान से लेकर दुन‍िया के कई देश इस आग में झुलस रहे हैं. लेकिन इस सनक का सबसे ज्यादा खामियाजा अगर कोई भुगत रहा है या भुगतने वाला है तो वो आज के बच्चे यानी कल के युवा… 

दुनिया की सबसे बड़ी बाल अधिकार संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' की ताजा और डराने वाली रिपोर्ट ने इस खतरे को सामने रखा है. रिपोर्ट कहती है कि मिडिल ईस्ट और उसके आसपास के देशों में जारी हिंसा ने करीब 5.2 करोड़ बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप कर दी है।

यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसे एक 'एजुकेशन इमरजेंसी' कहा जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के डेटा पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि 5 से 17 साल के करोड़ों बच्चे अब स्कूल जाने के बजाय अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं।

ईरान में 65 स्कूल मलबे में तब्दील
ईरानियन रेड क्रिसेंट सोसाइटी के हवाले से खबर है कि अकेले ईरान में हवाई हमलों ने 65 स्कूलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है. जिन कमरों में बच्चे पहाड़े और कविताएं याद करते थे, वहां अब सिर्फ ईंट-पत्थर और धुआं बचा है।

स्कूल नहीं, अब 'शेल्टर होम' कहिए
रिपोर्ट में उन 12 देशों का जिक्र है जहां शिक्षा व्यवस्था आईसीयू (ICU) पर है. इनमें ईरान, इजरायल, जॉर्डन, सऊदी अरब, फिलिस्तीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं. इन देशों में दो बड़ी चुनौतियां सामने आई हैं।

स्कूलों पर हमला: कई स्कूल बमबारी में क्षतिग्रस्त हो गए हैं.
मजबूरी में शरण: जो स्कूल बच गए हैं, उन्हें बंद कर दिया गया है क्योंकि वहां बेघर हुए हजारों परिवार शरण लिए हुए हैं. यानी क्लासरूम अब रहने के ठिकानों में बदल गए हैं।

ऑनलाइन पढ़ाई भी फेल!
हालांकि कुछ देशों ने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन संसाधनों की कमी और बार-बार कटते इंटरनेट ने इस उम्मीद को भी तोड़ दिया है. कई इलाकों में बिजली और सुरक्षित इंटरनेट न होने के कारण बच्चे महीनों से अपनी किताबों से दूर हैं. बता दें कि इस क्षेत्रीय अस्थिरता का असर सिर्फ युद्ध लड़ रहे देशों तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में भी इस हिंसा का 'रिपल इफेक्ट' (लहर जैसा असर) दिख रहा है. वहां भी अस्थिरता की वजह से बच्चों की नियमित पढ़ाई में बाधा आ रही है।

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Fri, 20 Mar 2026 13:23:32 +0530 news desk MPcg
अमेरिका के आर्मी बेस पर ड्रोन की मंडराहट, रुबियो और रक्षा मंत्री हेगसेथ की मौजूदगी https://citytoday.co.in/5241 https://citytoday.co.in/5241 वाशिंगटन

पश्चिम एशिया में जंग जारी है. अमेरिका और इजरायल की सेनाएं ईरान के शहरों, सैन्य ठिकानों और ऑयल फील्ड्स पर बम के रूप में तबाही बरसा रही हैं. वहीं,  ईरान युद्ध के बीच अब एक ऐसी घटना हुई है, जिसे लेकर खाड़ी देशों से बहुत दूर अमेरिका में भी हड़कंप मच गया है. अमेरिकी सेना हाईअलर्ट पर आ गई है।

दरअसल, अमेरिका के एक आर्मी बेस पर ड्रोन मंडराता दिखा है. यह ड्रोन जिस आर्मी बेस पर मंडरा रहा था, उस बेस पर तब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दो मजबूत और प्रभावशाली चेहरे मौजूद थे. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पेटे हेगसेथ तब उसी बेस पर मौजूद थे।

सऊदी का धैर्य समाप्त? ईरान को प्रिंस ने दी सख्त चेतावनी, मिसाइल-ड्रोन हमलों के बाद

पश्चिम एशिया में जारी जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से खाड़ी देशों की चिंता बढ़ गई है, और अब सऊदी अरब के सब्र का बांध भी टूटता नजर आ रहा है. सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अब उनके देश और उसके सहयोगियों की "सहनशक्ति" खत्म हो रही है।

रियाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रिंस फैसल ने साफ कहा कि ईरान को तुरंत अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना चाहिए. उन्होंने इशारों में यह भी जता दिया कि अगर हमले नहीं रुके, तो सऊदी अरब और उसके साझेदार जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।

प्रिंस फैसल ने कहा, "हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि हमारे पास बहुत बड़ी क्षमता और ताकत है. अगर हम चाहें, तो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं." हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कब और किन हालात में सऊदी जवाब देगा, लेकिन उनके बयान से साफ है कि अब स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी है।

ईरानी गैस फील्ड पर हमले के बाद मिडल ईस्ट में 'तेल युद्ध', क़तर और UAE का काउंटर अटैक

ईरान पर यूएस-इज़रायल के हमले के बाद बीसवें दिन भी मिडिल ईस्ट में भयानक जंग जारी है. ईरान की टॉप लीडरशिप बड़ा नुक़सान हुआ है लेकिन तेहरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और इज़रायल की तरफ़ लगातार मिसाइलें दाग रहा है. इधर से इज़रायल की तरफ़ से भी एयर स्ट्राइक जारी है.

मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि बीते 24 घंटों में यह सीधे-सीधे ‘ऑयल वॉर’ में बदल गया है. क्योंकि इस जंग में एनर्जी ठिकानों पर सीधे हमले हो रहे हैं, जिसका असर दुनिया के कई अन्य इलाकों में भी पड़ा है.

ऑयल की ग्लोबल सप्लाई भी बाधित हुई है और तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आया है.

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Thu, 19 Mar 2026 13:07:11 +0530 news desk MPcg
होर्मुज पर ट्रंप की उम्मीदों को लगा झटका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने किया साफ इनकार, साउथ कोरिया ने कहा& ‘सोचेंगे’ https://citytoday.co.in/5213 https://citytoday.co.in/5213 वाशिंगटन

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध (US-Iran War) में ईरानी घमकियों के मद्देनजर डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से Hormuz Strait की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की थी. दुनिया के 20% तेल की आवाजाही के लिए जरूरी इस समुद्री रूट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति आर-पार के मूड में हैं और बड़ा बयान देते हुए कहा कि ये देखना दिलचस्प होगा कि कौन से देश हमारे अनुरोध को ठुकराते हैं और हमारी मदद के लिए युद्धपोत नहीं भेजता है. इस बीच बता दें कि जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया और तुर्की तक ने होर्मुज में अपने युद्धपोत भेजने से लगभग इनकार कर दिया है।

ट्रंप बोले- हम 7 देशों से कर रहे बात 
होर्मुज को लेकर ईरान की धमकियों (Iran Warnings On Hormuz) के बीच ट्रंप ने कई देशों से युद्धपोत भेजने का आह्वान बीते दिनों किया था. इस बीच एयर फोर्स वन में बोलते हुए Donald Trump ने कहा कि वह होर्मुज की निगरानी के लिए अन्य देशों से सहयोग के लिए बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनका प्रशासन Hormuz Strait की सुरक्षा को लेकर 7 देशों से बातचीत कर रहा है. ट्रंप ने ईरान युद्ध के तीसरे हफ्ते में प्रवेश करने के साथ क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर इसके प्रभाव पर जोर दिया।

'मदद करे तो अच्छा, न करे तो बहुता अच्छा'
Donald Trump होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पूरी तर अब आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं और सहयोगी देशों से मदद की अपील में भी उनकी सख्ती साफ झलक रही है. उन्होंने कहा है कि अगर ये देश हमारी मदद करते हैं तो बहुत अच्छा है और अगर नहीं करते हैं, तो भी बहुत अच्छा है. ट्रंप ने आगे कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा देश Hormuz Strait को खुला रखने जैसे छोटे से प्रयास में हमारी मदद नहीं करेगा।

इन देशों से सहयोग की आस
राष्ट्रपति ने कहा कि खाड़ी देशों के तेल पर निर्भर देशों को होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी ही चाहिए. मैं मांग करता हूं कि ये देश आगे आएं और अपने क्षेत्र की रक्षा करें, क्योंकि यह उनका क्षेत्र है, यह वह स्रोत है जहां से उन्हें ऊर्जा मिलती है. हालांकि ट्रंप ने सभी 7 देशों का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि कई देश होर्मुज के जरिए होने वाले तेल यातायात को सुचारू रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे. उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन का नाम उन देशों में लिया, जिनसे उन्हें सहयोग की उम्मीद है. हालांकि, किसी भी देश ने अभी तक ट्रंप की इस अपील पर आगे आकर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही युद्धपोत भेजे हैं।

जापान-ऑस्ट्रेलिया से तुर्की तक का इनकार
ट्रंप के युद्धपोत भेजने की अपील पर जापान का कहना है कि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों से होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में मदद के लिए वॉरशिप भेजने को कहा था, लेकिन वह समुद्री सुरक्षा ऑपरेशन पर विचार नहीं कर रहा है. जापानी प्रधानमंत्री (Japan PM) का कहना है कि जापान को अभी तक US से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को एस्कॉर्ट करने के लिए अपनी नेवी भेजने का रिक्वेस्ट नहीं मिला है, इसलिए जवाब देना मुश्किल है।

वहीं दूसरी ओर एएफपी की रिपोर्ट की मानें, तो ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि ट्रंप के रिक्वेस्ट के बाद वह होर्मुज स्ट्रेट में नेवी शिप नहीं भेजेगा. नाटो में अमेरिका के पार्टनर तुर्की ने इस जंग से पहले ही पल्ला झाड़ लिया है. वहीं साउथ कोरिया इस बात पर ध्यान से विचार करने की बात कह रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में अपना वॉरशिप तैनात किया जाए या नहीं।

फ्रांस ने भी झाड़ लिया पल्ला 
न सिर्फ जापान, कोरिया, तुर्की और ऑस्ट्रेलिया, बल्कि अब फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन ने भी ट्रंप के अनुरोध पर दो टूक जबाव दिया है. उन्होंने कहा है कि जब तक युद्ध बढ़ता रहेगा, फ्रांस Hormuz Strait में अपने जंगी जहाज नहीं भेजेगा. वहीं जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल ने ऑपरेशन के बढ़ने की संभावना पर शक जताया और जर्मन ब्रॉडकास्टर ARD को बताया कि EU मिशन असरदार नहीं था, इसीलिए मुझे बहुत शक है कि एस्पाइड्स को होर्मुज तक बढ़ाने से ज्यादा सुरक्षा मिलेगी।

ईरान की झमता लगभग खत्म!
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि ईरान की उत्पादन क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है, यही कारण है कि वह कम मिसाइलें दाग रहा है. ऐसे में होर्मुज की सुरक्षा और निगरानी का यह एक छोटा प्रयास है, हमने पहले ही ईरान की उत्पादन क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. उसकी ओर से मिसाइलें ही नहीं, बल्कि दागे जा रहे ड्रोनों की संख्या भी बहुत कम हो गई है और ये पहले की तुलना में करीब 20% रह गए हैं।

इन देशों से सहयोग की उम्मीद
हालांकि ट्रंप ने सभी सात सरकारों का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कई देश होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले समुद्री यातायात को सुचारू रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे, जहां से दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन का नाम उन देशों में लिया जिनसे उन्हें सहयोग की उम्मीद है। 

इतना खास क्यों है Hormuz?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वो देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं जो सीधे तौर पर इस चोक पॉइंट से जुड़े हैं और तेल आयात पर निर्भर हैं. भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी सीधे तौर पर इस रास्ते पर निर्भर हैं. ऐसे में यहां रुकावट इनकी आर्थिक हालात बिगड़ने में अहम रोल निभा सकती हैं. बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम चोक पॉइंट है, जहां से रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल तेल, यानी दुनिया की कुल खपत का करीब 20 प्रतिशत, गुजरता है. इसके साथ ही दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) भी इसी रास्ते से भेजी जाती है।

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Mon, 16 Mar 2026 13:20:56 +0530 news desk MPcg
उत्तर कोरिया ने दागी मिसाइल, अमेरिका दक्षिण कोरिया से THAAD हटाने की करेगा तैयारी https://citytoday.co.in/5207 https://citytoday.co.in/5207 फियोंगयांग

ईरान वॉर अभी तक समाप्‍त नहीं हुआ है, पर एक और क्षेत्र में तनाव की आहट ने खलबली मचा दी है. कोरियाई प्रायद्वीप से बड़ी खबर सामने आ रही है. दक्षिण कोरिया का कहना है कि उत्‍तर कोरिया ने मिसाइल दागी है. उत्‍तर और दक्षिण केारिया के बीच तनाव नई बात नहीं है. दोनों देशों के बीच संबंध लंबे समय से तल्‍ख हैं. उत्‍तर कोरिया को चीन और रूस का करीबी माना जाता है, जब‍कि साउथ कोरिया अमेरिका का करीबी सहयोगी है. दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्‍य बेस भी स्थित है. किम जॉन्‍ग उन के देश की तरफ से ऐसे समय में मिसाइल दागी गई है, जब अमेरिका दक्षिण कोरिया से अपने कुछ THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को हटाने पर विचार कर रहा है. ऐसे में उत्‍तर कोरिया के कदम से दक्षिण कोरिया की चिंता बढ़ गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थ कोरिया ने समंदर की तरफ मिसाइल दागी है. उत्‍तर कोरिया की तरफ से अक्‍सर ही समंदर का रुख कर मिसाइल परीक्षण किए जाते रहे हैं. यह कोई पहला मौका नहीं है, जब किम जोंग उन के देश की तरफ से इस तरह की कार्रवाई की गई है. हालांकि, इस बार की टाइमिंग काफी अहम है. पश्चिम एशिया में हालात पहले से ही खराब है. अमेरिका और इजरायल ने संयुक्‍त रूप से ईरान पर अटैक कर दिया है. तेहरान की तरफ किए गए पलटवार से माहौल पहले ही तनावपूर्ण और गंभीर हो चुके हैं. ऐसे में उत्‍तर कोरिया की ओर से मिसाइल दागने से एशिया के एक और जोन में हालात तनावपूर्ण होने की आशंका बढ़ गई है. चीन की आक्रामक नीतियों की वजह से इस क्षेत्र में ऐसे ही तनाव का आलम है.

जापान सतर्क
उत्तर कोरिया ने शनिवार को एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया है. जापान के रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी है. ‘निक्‍केई एशिया’ के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि यह मिसाइल संभवतः जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर जाकर गिरी. इस प्रक्षेपण के कारण किसी प्रकार के नुकसान की कोई खबर नहीं है. वहीं, दक्षिण कोरिया की सेना ने बताया कि उत्तर कोरिया ने पूर्व दिशा की ओर कम से कम एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र यानी प्रोजेक्‍टाइल दागा. इससे पहले उत्तर कोरिया ने 27 जनवरी को जापान सागर की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिनके बारे में भी आकलन किया गया था कि वे जापान के ईईजेड के बाहर गिरी थीं.

बढ़ा तनाव, क्या खुलेगा जंग का तीसरा मोर्चा या होगी World WAR 3?

दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार, शनिवार को उत्तर कोरिया ने जापान सागर की ओर एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल दागी। इससे पूर्वी एशिया में नया तनाव पैदा हो गया है, जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में चल रहे संघर्ष अभी भी वैश्विक सुरक्षा चिंताओं का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि यह मिसाइल उत्तर कोरिया से उसके पूर्वी जलक्षेत्र की ओर दागी गई थी, जिसे आमतौर पर जापान सागर (पूर्वी सागर) के नाम से जाना जाता है। अधिकारियों ने शुरू में इस हथियार को अज्ञात मिसाइल बताया था, लेकिन माना जा रहा है कि यह एक बैलिस्टिक मिसाइल ही थी।

अमेरिका- दक्षिण कोरिया कर रहे सैन्य अभ्यास
बता दें कि यह मिसाइल तब दागी गई जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया मिलकर अपना सालाना स्प्रिंगटाइम संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे थे, जिसमें हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ भी एक बढ़ता हुआ युद्ध लड़ रहा है। हाल ही में इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया था, जो कि युद्ध हर दिन के साथ बढ़ा और हर जगह तबाही मची हुई है। इसमें ईरान से लेकर इजयारल और अमेरिका तक को नुकसान हो रहा है, क्योंकि ईरान खाड़ी देश में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है।

उत्तर कोरिया ने क्यों की होगी मिसाइल लॉन्च?
उत्तरी कोरिया लंबे समय से सहयोगी देशों के सैन्य अभ्यासों को 'आक्रमण का पूर्वाभ्यास' बताता रहा है, और अक्सर इनका इस्तेमाल अपने सैन्य प्रदर्शनों या हथियारों के परीक्षण को तेज करने के बहाने के तौर पर करता है।

यह मिसाइल लॉन्च, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन द्वारा मंगलवार को वॉशिंगटन और सियोल की आलोचना किए जाने के कुछ ही दिनों बाद हुआ। उन्होंने वैश्विक सुरक्षा के लिए एक खतरनाक मोड़ पर अपने सैन्य अभ्यास जारी रखने के लिए इन दोनों देशों की आलोचना की थी, और चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा को दी गई कोई भी चुनौती भयानक परिणामों को जन्म देगी।

बता दें कि 11-दिवसीय 'फ्रीडम शील्ड' अभ्यास, जो 19 मार्च तक चलेगा, यह संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाओं द्वारा आयोजित किए जाने वाले दो वार्षिक कमांड पोस्ट अभ्यासों में से एक है।

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Sat, 14 Mar 2026 16:45:06 +0530 news desk MPcg
ईद पर नहीं होगी इमरान खान की रिहाई: बहन अलीमा का दावा, बोलीं& ‘यह तारीख इतिहास में दर्ज होगी’ https://citytoday.co.in/5183 https://citytoday.co.in/5183 इस्लामाबाद
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनें अडियाला जेल के बाहर फिर से धरने पर बैठ गई हैं। तीनों को चेक पोस्ट पर रोका गया जिसके विरोध में उन्होंने धरना दिया। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को बताया कि पुलिस ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं को भी पीछे धकेल दिया, जो जेल की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे।

मंगलवार को जेल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए, इमरान खान की अलीमा खान ने इसे बेहद निराशाजनक रवैया करार दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के ऑर्डर के बावजूद परिवार के लोगों को पीटीआई संस्थापक से मिलने नहीं दिया गया। पीटीआई के आधिकारिक एक्स हैंडल पर अलीमा खान की एक वीडियो क्लिप अपलोड की गई है, जिसमें वह गुस्से और हताशा में कह रही हैं कि उन्हें यकीन है कि भाई को ईद में भी रिहा नहीं किया जाएगा। एक सवाल के जवाब में, अलीमा खान ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि उनके भाई को ईद से पहले रिहा कर दिया जाएगा।

पाकिस्तान के अनुसार, अलीमा ने उन खबरों को लेकर पूछे गए सवाल पर जवाब दिया जिसमें इमरान खान को ईद में रिहा किए जाने का दावा किया गया था। उन्होंने कहा, "वे उसे रिहा नहीं करना चाहते। आजकल जो दुनिया में हो रहा है उस पर ध्यान देंगे तो, और आपको पता चल जाएगा कि इमरान खान जेल में क्यों हैं? उनके साथ जो हो रहा है उसे तारीख (इतिहास) याद रखेगी।" इससे पहले फरवरी में, जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेताओं ने पाकिस्तान के चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था, जिसमें इमरान खान को कानूनी और मेडिकल मदद देने में कथित रुकावटों पर गंभीर चिंता जताई गई थी।

नेताओं ने चीफ जस्टिस याह्या अफरीदी को लिखे अपने खत में उनसे इस मामले में दखल देने की अपील की ताकि इस मामले में इंसाफ हो सके। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अफरीदी से यह भी अनुरोध किया कि वे इस मामले पर ध्यान दें और यह पक्का करें कि इमरान खान को कानून के मुताबिक निजी चिकित्सक, कानूनी सलाहकार और परिवार के लोगों से मिलने की इजाजत मिले।

पत्र में, पीटीआई नेताओं ने इमरान खान के इलाज की तुलना पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के 2019 में हुए मेडिकल ट्रीटमेंट से की। उन्होंने कहा कि तब की सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि नवाज शरीफ को लाहौर के सर्विसेज हॉस्पिटल ले जाया जाए और जब उनका प्लेटलेट काउंट कम था तो उन्हें सही मेडिकल केयर दी जाए। उन्होंने आगे कहा कि नवाज शरीफ के पर्सनल डॉक्टर मेडिकल बोर्ड की सभी मीटिंग में शामिल होते थे, उनका परिवार और वकील भी उनसे नियमित तौर पर मिलते थे।

 

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Thu, 12 Mar 2026 13:21:55 +0530 news desk MPcg
क्या कोई देश दूसरे देश पर कब्जा कर उसे अपना बना सकता है? जानिए UN के नियम https://citytoday.co.in/5173 https://citytoday.co.in/5173 संयुक्त राष्ट्र

दुनियाभर में अभी दो जंगे चल रही हैं, जिनकी चर्चा हर जगह हो रही है। इसमें पहला युद्ध तो अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हो रहा है, जबकि दूसरा रूस-यूक्रेन के बीच चल रहा है। रूस-यूक्रेन जंग फरवरी 2022 से ही जारी है। इस युद्ध में रूस ने यूक्रेन के कई हिस्सों को कब्जाया है, जिसमें डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया जैसी जगहें शामिल हैं। इसके अलावा वह 2014 से ही क्रीमिया पर कब्जा करके बैठा है, जो कभी यूक्रेन का हिस्सा हुआ करता था। ये तो बस एक ताजा उदाहरण है, जिसमें किसी देश ने दूसरे देश के हिस्सों को कब्जाया है।

अगर इतिहास उठाकर देखें तो ऐसे कई उदाहरण मिलेंगे, जहां किसी देश ने पहले दूसरे मुल्क के खिलाफ जंग छेड़ दी। फिर उस मुल्क के किसी हिस्से को कब्जा लिया। ईरान के साथ चल रही अमेरिका-इजरायल की जंग में भी ऐसा होने की संभावना जताई जा रही है। अब यहां सवाल उठता है कि क्या कोई देश ऐसा कर सकता है? क्या किसी देश को दूसरे मुल्क की जमीन पर जबरन कब्जा करने का अधिकार है? संयुक्त राष्ट्र के नियम इस संबंध में क्या कहते हैं? अगर आप इंटरनेशनल रिलेशन के स्टूडेंट हैं या फिर सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो फिर आपको इसका जवाब भी मालूम होना चाहिए।

देश कब्जाने को लेकर UN के नियम क्या हैं?
संयुक्त राष्ट्र (UN) एक ऐसी संस्था है, जिसका प्रमुख काम दुनिया में शांति बनाए रखना है, ताकि युद्ध की संभावना पैदा ना हो। मगर फिर भी कई देशों के बीच युद्ध होते रहते हैं। UN के 193 सदस्य देश हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करना होता है। इस चार्टर को आप UN का संविधान मान सकते हैं, जिसमें बताया गया है कि किसी देश को क्या करना है और क्या नहीं करना है। इसी चार्टर में इस बात की भी जानकारी दी गई है कि क्या कोई देश दूसरे देश के किसी हिस्से पर कब्जा कर सकता है या नहीं। UN चार्टर के आर्टिकल 2 में इस बारे में विस्तार से बात की गई है। इस आर्टिकल में 7 प्वाइंट्स हैं, जिसमें आर्टिकल 2(4) में कब्जे से संबंधित बातें हैं।

आर्टिकल 2(4) में कहा गया है, 'सभी सदस्य देश अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किसी भी मुल्क की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग या धमकी से परहेज करेंगे, या किसी भी अन्य ऐसे तरीके से परहेज करेंगे जो संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों के साथ मेल नहीं खाता हो।' आसान भाषा में कहें तो इस आर्टिकल में कहा गया है कि दूसरे देशों पर ना तो हमला करें और ना ही उन्हें धमकी दें। यहां जिस क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने की बात हुई है, उसका मतलब है कि किसी देश की ना तो जमीन कब्जाई जाए और ना ही उसके बॉर्डर चेंज किए जाएं। कुल मिलाकर शांति से रहें और युद्ध ना करें।

जमीन कब्जाने के बाद क्या नियम लागू होते हैं?
हालांकि, ऐसा देखने को मिलता है कि भले ही हर देश UN चार्टर पर साइन कर दे, लेकिन वह इसके नियमों का पालन नहीं करता है। जैसे रूस का ही उदाहरण लेते हैं, उसने UN के नियमों का पालन नहीं किया और यूक्रेन के कई हिस्सों को कब्जा लिया। अब यहां सवाल उठता है कि अगर कोई देश ऐसा कर देता है, तो फिर उसे कब्जे वाली जगह पर किन नियमों का पालन करना चाहिए। 12 अगस्त, 1949 को अपनाई गई चौथी जिनेवा संधि में इस बारे में विस्तार से बात हुई है। ये संधि युद्ध के समय और कब्जे वाले क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा के लिए समर्पित है।

इसमें कहा गया है कि कब्जे वाले इलाके में उन सभी लोगों की सुरक्षा करनी चाहिए, जो सेना के सदस्य नहीं हैं। कब्जे वाले इलाके में रहने वाले सभी लोगों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। उनके साथ मारपीट या उन्हें टॉर्चर नहीं किया जा सकता है। कब्जाने वाले देश को इस बात की इजाजत नहीं है कि वह लोगों को भगाए या उन्हें डिपोर्ट करे। उसे इस बात की भी इजाजत नहीं है कि वह कब्जे वाले इलाके में अपने देश के नागरिकों को बसा सके। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि कब्जा वाले इलाके में खाना और दवाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसी की है।

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Wed, 11 Mar 2026 12:56:07 +0530 news desk MPcg
अबू धाबी की तरह नया नोएडा: 2041 मास्टर प्लान में 3000 उद्योग और 6 लाख आबादी की तैयारी https://citytoday.co.in/5159 https://citytoday.co.in/5159 नोएडा
उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर और बुलंदशहर के बीच बसने वाला 'नया नोएडा' (Naya Noida Master Plan 2041) (दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र – DNGIR) भविष्य का सबसे आधुनिक औद्योगिक शहर बनने जा रहा है। इसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है।

औद्योगिक हब… 3 हजार फैक्ट्रियां और 21 हजार हेक्टेयर क्षेत्र
नया नोएडा करीब 21,000 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैला होगा। मास्टर प्लान 2041 के अनुसार, इसका सबसे बड़ा हिस्सा यानी 8,811 हेक्टेयर क्षेत्र केवल उद्योगों के लिए आरक्षित किया गया है। यहां लगभग 3,000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां लगाई जाएंगी, जिससे यह क्षेत्र निवेश का ग्लोबल हब बनेगा।  इस नए शहर की अनुमानित आबादी करीब 6 लाख होगी। खास बात यह है कि इसमें से 3.5 लाख लोग माइग्रेंट (प्रवासी) होंगे, जो यहाँ के उद्योगों में काम करने के लिए आएंगे। आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 2,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन का उपयोग किया जाएगा।

ईडब्ल्यूएस से लेकर एचआईजी फ्लैट्स तक
यहां हर आय वर्ग के लिए घर उपलब्ध होंगे। मास्टर प्लान में चार कैटेगरी और तीन टाइप के मकानों का प्रस्ताव है…
    EWS (आर्थिक रूप से कमजोर): 18.1 हेक्टेयर क्षेत्र।
    LIG (निम्न आय वर्ग): 40.8 हेक्टेयर क्षेत्र।
    MIG (मध्यम आय वर्ग): 29.9 हेक्टेयर क्षेत्र।
    HIG (उच्च आय वर्ग): 1.8 हेक्टेयर क्षेत्र।

पानी और पर्यावरण: गंगाजल और झीलों का संगम
शहर की प्यास बुझाने के लिए 300 MLD पानी की व्यवस्था की जाएगी, जिसमें गंगाजल और भूजल का मिश्रण होगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए मास्टर प्लान में खास प्रावधान हैं…
    झीलों और नहरों का निर्माण: 58.96 हेक्टेयर में लेक और 91.75 हेक्टेयर में कैनाल बनाई जाएंगी।
    जल संचयन: गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए वेटलैंड विकसित किए जाएंगे।
    वाटर सप्लाई: कुल पानी में से 212 MLD उद्योगों को और 85 MLD घरेलू उपयोग के लिए दिया जाएगा।

80 गांवों की जमीन पर 'लैंड पूल' मॉडल
नया नोएडा को बुलंदशहर और दादरी के 80 गांवों की जमीन पर बसाया जा रहा है। यहां जमीन का अधिग्रहण 'लैंड पूलिंग' नीति के जरिए किया जाएगा, जिससे किसानों को भी शहर के विकास में भागीदार बनाया जा सके।

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Tue, 10 Mar 2026 12:55:00 +0530 news desk MPcg
ईरान युद्ध के बीच बड़ा कदम: पश्चिम एशिया से 50 उड़ानों की तैयारी में भारतीय एयरलाइंस https://citytoday.co.in/5156 https://citytoday.co.in/5156 नई दिल्ली
केंद्र सरकार के अनुसार ईरान युद्ध से प्रभावित पश्चिम एशिया क्षेत्र के हवाई अड्डों से सोमवार को भारत की एयरलाइंस द्वारा 50 आने वाली उड़ानों की योजना बनाई गई है। यह ऑपरेशन की क्षमता और मौजूद परिस्थितियों के आधार पर संचालित होंगी। भारतीय एयरलाइंस एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो, स्पाइस जेट और अकासा एयर दुबई, अबू धाबी, रास अल खैमाह, फुजैरा, मस्कट और जेद्दा से उड़ानें संचालित करने के लिए तैयार हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि वह पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है, जो भारत व पश्चिम एशिया के बीच हवाई यात्रा को प्रभावित कर रही है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, “उड़ान कंपनियां मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक संचालन समायोजन कर रही हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और उड़ानों का व्यवस्थित संचालन हो।”

7 मार्च को उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र से भारत के लिए 51 इनबाउंड उड़ानें भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित की गईं, जिनमें 8,175 यात्री भारत पहुंचे। 8 मार्च को भी भारतीय एयरलाइंस ने इस क्षेत्र के हवाई अड्डों से 49 इनबाउंड उड़ानों की योजना बनाई थी। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय एयरलाइंस अन्य हवाई अड्डों की स्थिति का लगातार मूल्यांकन कर रही हैं ताकि इन जगहों से और भी उड़ानें संचालित की जा सकें। मंत्रालय एयरलाइंस और अन्य हितधारकों के साथ लगातार समन्वय में है। इसके साथ ही टिकट की कीमतों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि कीमतें उचित रहें और इस अवधि में अनावश्यक वृद्धि न हो।

यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपने संबंधित एयरलाइंस से उड़ानों के शेड्यूल के नवीनतम अपडेट लेते रहें। मंत्रालय स्थिति पर निगरानी जारी रखेगा और आवश्यक होने पर आगे अपडेट जारी करेगा। इसी बीच, एयर इंडिया ने घोषणा की कि वह 10 मार्च से 18 मार्च 2026 के बीच नौ मार्गों पर 78 अतिरिक्त उड़ानें संचालित करेगी, ताकि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति में यात्रियों को सहायता मिल सके। कंपनी ने कहा कि वह न्यूयॉर्क (जेएफके), लंदन (हीथ्रो), फ्रैंकफर्ट, पेरिस, एम्स्टर्डम, ज्यूरिख, कोलंबो और माले के लिए अतिरिक्त क्षमता तैनात कर रही है, जिससे दोनों दिशाओं में 17,660 सीटें उपलब्ध कराई जाएंगी। इन उड़ानों में दिल्ली–न्यूयॉर्क, दिल्ली–लंदन, मुंबई–लंदन शामिल हैं, जिससे जब यात्रा विकल्प सीमित हों, तब यात्रियों के लिए आवश्यक क्षमता बढ़ाई जा सके। इसके अलावा, फ्रैंकफर्ट, पेरिस, एम्स्टर्डम, ज्यूरिख, माले और कोलंबो से दिल्ली के लिए अतिरिक्त उड़ानें भी संचालित होंगी।

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Mon, 09 Mar 2026 18:17:52 +0530 news desk MPcg
अब किम जोंग से पंगा ले रहे डोनाल्ड ट्रंप, हजारों सैनिकों की शुरू कर दी मिलिट्री ड्रिल https://citytoday.co.in/5151 https://citytoday.co.in/5151 वासिंगटन.

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बीते 10 दिनों से जारी भीषण युद्ध का कोई अंत फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक सैंकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और जंग का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच अब अमेरिका ने कुछ ऐसा कर दिया है जिससे उत्तर कोरिया का भड़कना तय है। दरअसल अमेरिका ने सोमवार को दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर एक बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभ्यास में हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं, जिससे उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन का पारा चढ़ सकता है।
दक्षिण कोरिया के 'ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ' ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 18,000 कोरियाई सैनिक इस 'फ्रीडम शील्ड' अभ्यास में हिस्सा लेंगे, जो 19 मार्च तक चलेगा। हालांकि अमेरिकी सेना ने दक्षिण कोरिया में इस अभ्यास में शामिल अपने सैनिकों की संख्या नहीं बताई है इन दोनों सहयोगी देशों का यह संयुक्त अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब दक्षिण कोरियाई मीडिया में अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिका कुछ सैन्य संसाधनों को दक्षिण कोरिया से हटा कर ईरान के खिलाफ लड़ाई में ले जा रहा है।

पैट्रियट मिसाइल सिस्टम पश्चिम एशिया भेजे जाने की खबरें
इससे पहले 'यूएस फोर्सेज कोरिया' ने पिछले सप्ताह कहा था कि सुरक्षा कारणों से वह सैन्य संसाधनों की विशिष्ट गतिविधियों पर टिप्पणी नहीं करेगी। वहीं दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने भी इस खबर पर टिप्पणी करने से इनकार किया कि कुछ अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और अन्य उपकरण पश्चिम एशिया भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इससे सहयोगी देशों की संयुक्त रक्षा रणनीति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

बौखला सकता है उत्तर कोरिया
'फ्रीडम शील्ड' अभ्यास को लेकर उत्तर कोरिया की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। उत्तर कोरिया लंबे समय से सहयोगी देशों के संयुक्त अभ्यासों को आक्रमण का पूर्वाभ्यास बताता रहा है और इसे अपने सैन्य प्रदर्शनों और हथियार परीक्षणों को बढ़ाने का बहाना बनाता रहा है। अमेरिका एवं दक्षिण कोरिया का कहना है कि ये अभ्यास रक्षा उद्देश्य के लिए होते हैं।

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Mon, 09 Mar 2026 15:13:54 +0530 news desk MPcg
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच अमेरिका ने किया ‘मिनटमैन&III’ मिसाइल टेस्ट, स्पेन को लेकर ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा विवाद https://citytoday.co.in/5121 https://citytoday.co.in/5121

न्यूयॉर्क/तेहरान: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच अमेरिका ने कैलिफोर्निया तट से अपनी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल LGM-30G Minuteman III का परीक्षण किया। अमेरिकी सेना के अनुसार मिसाइल को Vandenberg Space Force Base से देर रात लॉन्च किया गया। यह मिसाइल पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप के पास तय लक्ष्य क्षेत्र में गिरी।

अमेरिकी वायुसेना ने बताया कि यह परीक्षण मिसाइल प्रणाली की सटीकता, तैयारी और प्रभावशीलता को परखने के लिए किया गया था। इस परीक्षण में किसी भी प्रकार का परमाणु हथियार शामिल नहीं था।

इसी बीच मिडिल ईस्ट में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। हालिया घटनाओं के बाद क्षेत्र में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। ईरान की ओर से इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों पर हमलों की खबरें सामने आ रही हैं, जबकि इज़राइल ने लेबनान की राजधानी Beirut में जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है।

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और स्पेन के प्रधानमंत्री Pedro Sánchez के बीच भी नया विवाद सामने आया है। स्पेन ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल से इनकार कर दिया। इसके बाद ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि सहयोग नहीं मिला तो अमेरिका स्पेन के साथ व्यापारिक संबंधों पर पुनर्विचार कर सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका-स्पेन व्यापार करीब 16 अरब यूरो का है और यह विवाद केवल आर्थिक नहीं बल्कि कूटनीतिक असर भी डाल सकता है। वहीं अमेरिका का कहना है कि Minuteman-III जैसे परीक्षण उसके परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने के लिए नियमित प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

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Thu, 05 Mar 2026 16:03:09 +0530 news desk MPcg
मौत के बाद इंसान क्या सुन सकता है? नई स्टडी ने खोला हैरान कर देने वाला सच https://citytoday.co.in/5118 https://citytoday.co.in/5118 न्यूयॉर्क
   सोचिए… आपका दिल धड़कना बंद कर देता है. डॉक्टर CPR रोक देते हैं. आपको ‘डेथ’ घोषित कर दिया जाता है,लेकिन आपका दिमाग अब भी जिंदा है,और आपको सब कुछ सुनाई दे रहा है.यहां तक कि डॉक्टर आपकी मौत का समय भी बोल रहे हों!

मौत आज भी दुनिया के लिए एक रहस्य बनी हुई है. इंसान के साथ मौत के बाद क्या होता है और आखिरी क्षणों में उसका अनुभव कैसा होता है.इस पर बहुत कुछ कहा जा चुका है. इन विषयों पर कई रिसर्च भी हो चुके हैं, लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने सभी को चौंका दिया. इसमें दावा किया गया है कि इंसान की मौत के बाद भी उसका दिमाग कुछ समय तक एक्टिव रहता है और वह अपने आसपास की आवाजें सुन सकता है.

न्यूयॉर्क में एक डॉक्टर ने ऐसा खुलासा किया है जिसने मौत की परिभाषा को ही बदलकर रख दिया है. दिल की धड़कन रुक जाने के बाद भी इंसानी दिमाग सक्रिय रहता है, और कई बार मरीज डॉक्टरों द्वारा अपनी मौत की घोषणा तक सुन लेते हैं. यह दावा एक भयावह लेकिन महत्वपूर्ण स्टडी में किया गया है, जो Resuscitation में पब्लिश हुई है.

मौत के बाद भी सबकुछ सुनाई देता है

इस स्टडी का नेतृत्व न्यूयॉर्क के एनवाईयू लैंगोन मेडिकल सेंटर (NYU Langone Medical Center) के डॉक्टर सैम पारनिया ने किया. उन्होंने उन मरीजों से बात की जिन्हें क्लिनिकली मृत घोषित कर दिया गया था-यानी जिनका दिल धड़कना बंद हो चुका था,लेकिन बाद में वे दोबारा जिंदा हो गए. चौंकाने वाली बात यह थी कि कई मरीजों ने अपने कमरे में हो रही घटनाओं को सटीक रूप से याद किया.

डॉ. पारनिया के अनुसार, इन मरीजों की याददाश्त इतनी स्पष्ट इसलिए थी क्योंकि दिल रुकने के बाद भी लगभग एक घंटे तक दिमाग में सामान्य और लगभग सामान्य ब्रेन ऐक्टिविटी पाई गई. उन्होंने बताया कि ये अनुभव न तो सपने जैसे होते हैं और न ही भ्रम या मतिभ्रम.ये एक्सपियरेंस खास होते हैं.

इस शोध में अमेरिका और ब्रिटेन के 25 अस्पतालों में कार्डियक अरेस्ट से बचे 53 मरीजों की दिमागी गतिविधि और जागरूकता का अध्ययन किया गया. इसमें पाया गया कि 40 फीसदी मरीजों ने यादें या सचेत विचार होने की बात कही. डॉ. पारनिया के अनुसार, मौत के दौरान कई लोगों को लगता है कि वे अपने शरीर से अलग हो चुके हैं और कमरे में घूमकर चीजें देख-पहचान रहे हैं.

जैसे कंप्यूटर अचानक रीबूट हो गया

इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) से पता चला कि मरीजों में दिल रुकने के 35 से 60 मिनट बाद तक gamma, delta, theta, alpha और beta जैसी ब्रेन वेव्स मौजूद थीं, जो सोचने और जागरूकता से जुड़ी होती हैं. यह बताता है कि दिमाग दिल रुकने के बाद भी पूरी तरह बंद नहीं होता, बल्कि कभी-कभी उच्च स्तरीय गतिविधि दिखाता है-मानो कोई बंद कंप्यूटर अचानक रीबूट हो रहा हो.

पूरी लाइफ का फ्लेशबैक एकसाथ

डॉ. पारनिया का कहना है कि पहले यह माना जाता था कि दिल रुकने के 10 मिनट बाद दिमाग स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है, लेकिन यह शोध दिखाता है कि दिमाग CPR जारी रहने पर देर तक सक्रिय रह सकता है. यही ऊर्जा का उभार लोगों को अपने पूरे जीवन की यादें एक साथ देखने जैसा अनुभव भी दे सकता है.

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Thu, 05 Mar 2026 13:27:19 +0530 news desk MPcg
तालिबान ने पाकिस्तान पर किया प्रचंड हमला, डूरंड लाइन पर दो नई पोस्ट कब्जाई, युद्ध तेज https://citytoday.co.in/5101 https://citytoday.co.in/5101 काबुल 

पाकिस्तान को अफगानिस्तान-तालिबान ने एक और झटका दे दिया है. तालिबान ने डूरंड लाइन पर दो पोस्टों पर कब्जा कर लिया है. Tolo News की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक अमीरात ऑफ़ अफ़गानिस्तान की सेनाओं ने कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक और शोराबक ज़िलों में काल्पनिक डूरंड लाइन के पास पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर कब्ज़ा कर लिया है| 

पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच तनाव तब और बढ़ गया, जब अफ़गान तालिबान सेनाओं ने रावलपिंडी में नूर खान एयर बेस पर पाकिस्तान के कमांड और कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाकर हथियारों से लैस ड्रोन हमले किए. यह घटना खास तौर पर सेंसिटिव है क्योंकि नूर खान एयर बेस उन पाकिस्तानी मिलिट्री साइट्स में से एक था, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं ने टारगेट किया था| 

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन की छोटी लेकिन ज़ोरदार लड़ाई के नौ महीने बाद भी, बेस पर रिकंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. बेस पर अफ़गान तालिबान के नए हमले की खबर ने रिपेयर के काम को और खतरे में डाल दिया है, जिससे और नुकसान हुआ है| 

अफ़गानिस्तान के नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री के ऑफिशियल X अकाउंट के मुताबिक, तालिबान सेनाओं ने क्वेटा में 12th डिवीजन हेडक्वार्टर और खैबर पख्तूनख्वा में दूसरी पाकिस्तानी मिलिट्री जगहों पर ड्रोन हमले किए| 

मिनिस्ट्री ने कहा, "आज, नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री की एयर फोर्स ने पाकिस्तान में ज़रूरी मिलिट्री ठिकानों पर सटीक और कोऑर्डिनेटेड हवाई ऑपरेशन किए. इसमें रावलपिंडी में नूर खान एयरबेस, क्वेटा (बलूचिस्तान) में 12th डिवीजन हेडक्वार्टर, खैबर पख्तूनख्वा की मोहमंद एजेंसी में ख्वाजाई कैंप और कई दूसरी ज़रूरी पाकिस्तानी मिलिट्री जगहों और कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया| 

इससे पहले, तालिबान अधिकारियों ने दावा किया था कि पूर्वी अफ़गान शहर जलालाबाद में एक पाकिस्तानी फ़ाइटर जेट को मार गिराया गया था. न्यूज़ एजेंसी AFP ने बताया कि पायलट को एयरक्राफ़्ट से पैराशूट से उतरने के बाद ज़िंदा पकड़ लिया गया. स्थानीय लोगों ने AFP को बताया कि पायलट को लैंडिंग के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया था. यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर बॉर्डर पार दुश्मनी के बीच हुआ है| 

शुक्रवार को पाकिस्तान ने अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल और दक्षिणी शहर कंधार पर एयरस्ट्राइक की, जहां तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा का ठिकाना है. पाकिस्तानी सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि 133 तालिबान लड़ाके मारे गए, 200 से ज़्यादा घायल हुए और कई चौकियां तबाह कर दी गईं या उन पर कब्ज़ा कर लिया गया| 

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Tue, 03 Mar 2026 13:25:29 +0530 news desk MPcg
48 नेता, 40 कमांडर, 9 नेवल शिप… ईरान के लिए 48 घंटे की जंग का क्या है असर? मिडिल ईस्ट में फ्रांस का बढ़ता प्रभाव https://citytoday.co.in/5089 https://citytoday.co.in/5089 तेहरान / न्यूयॉर्क

अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान ईरान को 48 घंटे में भारी नुकसान हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया कि इन हमलों में 48 ईरानी नेता मारे गए हैं. उन्होंने कहा, 'यह तेजी से आगे बढ़ रहा है. कोई विश्वास नहीं कर सकता कि हमने कितनी सफलता हासिल की है, एक ही हमले में 48 नेता खत्म हो गए.' ट्रंप ने यह बात फॉक्स न्यूज के साथ इंटरव्यू में कही.

वहीं इजरायल की सेना (IDF) ने कहा कि इस हमले में 40 'महत्वपूर्ण' ईरानी सैन्य कमांडर मारे गए हैं, जिनमें ईरान के चीफ ऑफ स्टाफ, अब्दुलरहीम मौसावी भी शामिल हैं. IDF के अनुसार, यह कार्रवाई खामेनेई पर हमले के तुरंत बाद हुई.

नौ ईरानी युद्धपोत डूबे

ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी सेनाएं ईरान की नौसेना को बेअसर करने में लगी हैं और अब तक नौ ईरानी युद्धपोत डूब चुके हैं. उन्होंने कहा, 'वे जल्दी ही समुद्र की तलहटी पर तैरेंगे!' उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरानी नौसेना मुख्यालय को भी भारी नुकसान पहुंचाया है.

तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत

ईरानी सैन्य बलों ने जवाब में सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. अमेरिकी सेना ने पुष्टि की कि इस संघर्ष में अब तक तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और पांच गंभीर रूप से घायल हुए हैं. अमेरिकी सेनाध्यक्षों के अनुसार, ईरान के खिलाफ संयुक्त अमेरिकी-इजरायली ऑपरेशन ने देश के कई प्रमुख सैन्य और राजनीतिक नेताओं को खत्म कर दिया, जिनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे.

USS अब्राहम लिंकन पर हमले का दावा खारिज

यह संघर्ष अब पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में फैल गया है. ईरानी मिसाइलों ने यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन को निशाना बनाया. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने रविवार को दावा किया कि अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln पर चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि मिसाइलें कैरियर के पास तक भी नहीं पहुंच सकीं और कैरियर अभी भी क्षेत्र में संचालन कर रहा है.

अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए ईरान पर भीषण हमले किए जो तीसरे दिन भी जारी हैं. इसके जवाब में ईरान ने भी कई देशों में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में टकराव बढ़ता जा रहा है.  दूसरी तरफ खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने भी अपने तेवर से बता दिया है कि वो रुकने वाला नहीं है. ईरान की जामकरान मस्जिद पर इंतकाम का लाल झंडा फहराया गया है.

ईरान ने जवाबी हमले में 'करारा' जवाब देने का दावा करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. मिडिल ईस्ट के देशों ने अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं, जबकि कई देशों ने अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी की है, जिसमें गैर-ज़रूरी मूवमेंट से बचने के लिए कहा गया है.

 पाकिस्तान में US दूतावास अलर्ट पर

अमेरिकी दूतावास इस्लामाबाद ने पाकिस्तान में वर्तमान स्थिति को लेकर चेतावनी जारी की है. दूतावास ने बताया कि लाहौर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर चल रहे प्रदर्शन और कराची के अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हिंसक विरोध प्रदर्शन की सूचना मिल रही है. इसके अलावा, इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास और पेशावर के अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के सामने भी अतिरिक्त प्रदर्शन के आह्वान हो रहे हैं. अमेरिकी सरकार के कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे तब तक अपनी आवाजाही सीमित रखें जब तक अन्य सूचना न दी जाए.

सेंसेक्स 2743 अंक टूटा, निफ्टी 519 अंक गिरा

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है. सेंसेक्स में 2743 अंक यानी 3.38% की भारी गिरावट देखी गई और यह 78,543 अंक पर खुला. वहीं, निफ्टी इंडेक्स में भी 519 अंक या 2.06% का नुकसान हुआ, जो इसे 24,659 अंक पर ले आया.

इजरायल के हमलों में कम से कम 10 लोगों की मौत
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. इजरायल के हमलों के चलते बेरूत के दक्षिणी इलाकों में कम से कम 10 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है.

साइप्रस में ब्रिटिश बेस पर ड्रोन हमला, नुकसान की पुष्टि
साइप्रस ने पुष्टि की है कि उसके द्वीप पर स्थित एक ब्रिटिश सैन्य ठिकाने को ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया था. इस हमले से ठिकाने को गंभीर नुकसान पहुंचा है, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई है. यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के संदर्भ में चिंता का विषय बनी हुई है.

 ईरानी सुप्रीम लीडर की हत्या के विरोध में डोडा-किश्तवाड़ में बंद का आह्वान
डोडा और किश्तवार जिलों में शिया और अन्य मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने आज बंद का आह्वान किया है. यह बंद ईरान के सुप्रीम नेता की हत्या के विरोध में आयोजित किया गया है. जम्मू डिवीजन के ये दोनों जिले धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां इस तरह के घटनाक्रम का गहरा असर पड़ता है.

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Mon, 02 Mar 2026 12:59:51 +0530 news desk MPcg
बांग्लादेश के नए PM तारिक रहमान का बड़ा फैसला, भारत को लेकर पलट दिया यूनुस का आदेश https://citytoday.co.in/5036 https://citytoday.co.in/5036 Sat, 21 Feb 2026 19:43:18 +0530 news desk MPcg 10% ग्लोबल टैरिफ का ऐलान: ट्रंप के फैसले से भारत सहित दुनिया पर क्या होगा असर? https://citytoday.co.in/5028 https://citytoday.co.in/5028 Sat, 21 Feb 2026 13:09:28 +0530 news desk MPcg बांग्लादेशी संसद में केवल 4 अल्पसंख्यक सांसद, हिंदू प्रतिनिधित्व पर सवाल – तारिक रहमान ने दी एकता की अपील https://citytoday.co.in/5002 https://citytoday.co.in/5002 Mon, 16 Feb 2026 17:01:12 +0530 news desk MPcg बांग्लादेश में तारिक रहमान की ताजपोशी: भारत के लिए खतरा या मौका? https://citytoday.co.in/4982 https://citytoday.co.in/4982 Fri, 13 Feb 2026 20:57:08 +0530 news desk MPcg पुतिन ने जुकरबर्ग को करारा जवाब दिया, रूस ने अमेरिका की दादागिरी पर चुप्पी तोड़ी, चीन भी है शामिल https://citytoday.co.in/4968 https://citytoday.co.in/4968 Thu, 12 Feb 2026 16:21:14 +0530 news desk MPcg भारत पर 18% टैरिफ: ट्रंप प्रशासन ने तय की नई डेडलाइन https://citytoday.co.in/4941 https://citytoday.co.in/4941 Sat, 07 Feb 2026 12:42:23 +0530 news desk MPcg दुनिया के सबसे बड़े सोने के भंडार पर ट्रंप की नजर, बलूचिस्तान में अमेरिका ने झोंका पैसा, पाक का खजाना होगा लुटता https://citytoday.co.in/4935 https://citytoday.co.in/4935 Fri, 06 Feb 2026 13:22:56 +0530 news desk MPcg रूस&अमेरिका की परमाणु संधि खत्म, 50 साल में पहली बार कोई नियम नहीं; क्या दुनिया पर मंडराया विनाश का खतरा? https://citytoday.co.in/4928 https://citytoday.co.in/4928 Thu, 05 Feb 2026 16:59:31 +0530 news desk MPcg बलूचिस्तान में बढ़ता संकट, बवाल के बावजूद US&चीन की चुप्पी क्यों? https://citytoday.co.in/4918 https://citytoday.co.in/4918 Wed, 04 Feb 2026 15:26:10 +0530 news desk MPcg लेबनान में इजरायल की बड़ी एयर स्ट्राइक, हिज्बुल्लाह का ‘मास्टरमाइंड इंजीनियर’ अली दाऊद अमिच मारा गया https://citytoday.co.in/4893 https://citytoday.co.in/4893 Mon, 02 Feb 2026 15:04:27 +0530 news desk MPcg एपस्टीन फाइल्स का नया खुलासा: ट्रंप की बेटी इवांका और एलन मस्क का नाम सामने आया https://citytoday.co.in/4888 https://citytoday.co.in/4888 Sat, 31 Jan 2026 20:34:00 +0530 news desk MPcg ट्रंप का दावा : पुतिन एक हफ्ते तक कीव पर हमला नहीं करेंगे, रूस ने नहीं दी पुष्टि https://citytoday.co.in/4876 https://citytoday.co.in/4876 Fri, 30 Jan 2026 13:15:36 +0530 news desk MPcg ट्रंप का दावा : पुतिन एक हफ्ते तक कीव पर हमला नहीं करेंगे, रूस ने नहीं दी पुष्टि https://citytoday.co.in/4875 https://citytoday.co.in/4875 Fri, 30 Jan 2026 13:15:35 +0530 news desk MPcg EU&India Trade Deal पर ट्रंप टीम का हमला, स्कॉट बेसेंट बोले– ‘यूरोप दोहरी नीति अपना रहा है’ https://citytoday.co.in/4853 https://citytoday.co.in/4853 Tue, 27 Jan 2026 14:36:37 +0530 news desk MPcg अब तक 70 से ब्रेकअप! US ने WHO से औपचारिक रूप से अलग होने की प्रक्रिया पूरी, ट्रंप का बड़ा कदम https://citytoday.co.in/4844 https://citytoday.co.in/4844 Sat, 24 Jan 2026 13:14:14 +0530 news desk MPcg डोनाल्ड ट्रंप के नारे का ग्रीनलैंड में बना मजाक, टोपियां लगाकर तंज कस रहे लोग https://citytoday.co.in/4824 https://citytoday.co.in/4824 Tue, 20 Jan 2026 18:52:12 +0530 news desk MPcg डोनाल्ड ट्रंप के नारे का ग्रीनलैंड में बना मजाक, टोपियां लगाकर तंज कस रहे लोग https://citytoday.co.in/4825 https://citytoday.co.in/4825 Tue, 20 Jan 2026 18:52:12 +0530 news desk MPcg चीन की आबादी तेजी से घट रही, 2025 में 40 लाख लोग कम, लोग शादियों से डर रहे https://citytoday.co.in/4819 https://citytoday.co.in/4819 Tue, 20 Jan 2026 12:47:01 +0530 news desk MPcg बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले जारी, हिंदू शिक्षक के घर को उपद्रवियों ने फूंका https://citytoday.co.in/4810 https://citytoday.co.in/4810 Sat, 17 Jan 2026 20:11:10 +0530 news desk MPcg वॉशिंगटन में मचाडो ने ट्रंप से साझा किया नोबेल पदक, वेनेजुएला की राजनीतिक स्थिति बनी चर्चा का विषय | https://citytoday.co.in/4797 https://citytoday.co.in/4797 Fri, 16 Jan 2026 15:05:05 +0530 news desk MPcg चीन के सहारे बना JF&17 अब पाकिस्तान की मजबूरी, इंडोनेशिया को बेचने की कोशिश तेज https://citytoday.co.in/4787 https://citytoday.co.in/4787 Tue, 13 Jan 2026 15:50:12 +0530 news desk MPcg चीन के सहारे बना JF&17 अब पाकिस्तान की मजबूरी, इंडोनेशिया को बेचने की कोशिश तेज https://citytoday.co.in/4788 https://citytoday.co.in/4788 Tue, 13 Jan 2026 15:50:12 +0530 news desk MPcg ईरान में खामेनेई की सेना का कहर: डॉक्टर का दावा, तेहरान में 217 मौतें, अधिकतर गोलीबारी में मरे https://citytoday.co.in/4775 https://citytoday.co.in/4775 Sat, 10 Jan 2026 16:02:01 +0530 news desk MPcg चापलूसी और लालच का खेल! कैसे आसिम मुनीर बने डोनाल्ड ट्रंप के ‘पसंदीदा फील्ड मार्शल’, भारत की बढ़ी टेंशन https://citytoday.co.in/4735 https://citytoday.co.in/4735 वाशिंगटन 
आज यानी 31 दिसंबर, साल 2025 का आखिरी दिन है। इस साल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने भारत के लिए गहरी चिंता खड़ी कर दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बार-बार सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की, उन्हें 'माई फेवरिट फील्ड मार्शल' कहा है, और कई मौकों पर ग्रेट फाइटर व हाइली रिस्पेक्टेड जनरल जैसी उपाधियां दी हैं। यह निकटता न केवल पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई दे रही है, बल्कि भारत-अमेरिका रिश्तों में दरार डालने की क्षमता रखती है। भारत के एंगल से देखें तो यह ट्रंप की ट्रांजेक्शनल डिप्लोमेसी का नतीजा है, जहां पाकिस्तान ने चापलूसी, झूठे नैरेटिव और आर्थिक लालच देकर अमेरिकी राष्ट्रपति को अपने पक्ष में कर लिया है। लेकिन क्या इसके पीछे की हकीकत भारत के लिए खतरे की घंटी है? आइए समझते हैं कि आखिर कैसे पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर 2025 में ट्रंप के पसंदीदा फील्ड मार्शल बन गए।
 
सबसे पहले समझिए कि यह निकटता कैसे शुरू हुई। अप्रैल 2025 में पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 लोग मारे गए। भारत ने इसका जवाब 'ऑपरेशन सिंदूर' से दिया- पाकिस्तान के एयरबेस और आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया, लेकिन सैटेलाइट इमेजेस से साफ हुआ कि उसे ही भारी नुकसान हुआ। चार दिन के संघर्ष के बाद पाकिस्तानी सेना अधिकारी के अनुरोध पर दोनों देशों के DGMO स्तर पर सीधे संपर्क से सीजफायर हुआ। ट्रंप ने इसमें अपना क्रेडिट लिया- दावा किया कि उन्होंने फोन कॉल्स और टैरिफ के जरिए परमाणु युद्ध टाला और एक करोड़ से ज्यादा जिंदगियां बचाईं। भारत ने इसे सिरे से खारिज किया, लेकिन पाकिस्तान ने मौके का फायदा उठाया।

भारत लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी विवाद को केवल द्विपक्षीय रूप से हल किया जा सकता है। लेकिन मई से, ट्रंप ने बार-बार इस संघर्ष का जिक्र किया है, चार दर्जन से अधिक मौकों पर जोर देकर कहा है कि उन्होंने युद्धविराम में मध्यस्थता की। उन्होंने विभिन्न मौकों पर विमानों को मार गिराने के दावों को भी दोहराया है।

पाक पीएम शहबाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज पार्टी के एक सदस्य ने अल-जजीरा को बताया- भारत के ट्रंप को सीजफायर का श्रेय देने से इनकार करने से एक ऐसा मौका मिला, जिसका आर्मी चीफ मुनीर और PM शरीफ ने तुरंत फायदा उठाया। पूर्व पाकिस्तानी विदेश सचिव सलमान बशीर ने भी मई के संघर्ष को निश्चित मोड़ बताया।

अमेरिका के लिए कभी सहयोगी, तो कभी खतरनाक देश था पाक
पाकिस्तान कभी अमेरिका का एक अहम सहयोगी था और 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में हुए हमलों के बाद उसे एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी देश का दर्जा दिया गया था। अगले कुछ सालों में रिश्ते खराब हो गए, क्योंकि अमेरिकी अधिकारियों ने अमेरिका के तथाकथित आतंक पर युद्ध में इस्लामाबाद पर धोखे का आरोप लगाया। अपने पहले कार्यकाल के दौरान, ट्रंप ने पाकिस्तान पर अमेरिका को झूठ और धोखे के अलावा कुछ नहीं देने और हथियारबंद ग्रुप्स को पनाह देने का आरोप लगाया। उनके उत्तराधिकारी, जो बाइडेन ने बाद में पाकिस्तान को सबसे खतरनाक देशों में से एक बताया।

इसी समय, अमेरिकी पॉलिसी तेजी से भारत की तरफ मुड़ गई, जिसे वॉशिंगटन में चीन के संभावित मुकाबले के तौर पर देखा गया, जो पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक पार्टनर है। फिर भी, अपने दूसरे कार्यकाल के सिर्फ दो महीने बाद ही ट्रंप का रुख बदल गया। मार्च में कांग्रेस के एक जॉइंट सेशन को संबोधित करते हुए, उन्होंने अगस्त 2021 में काबुल एयरपोर्ट पर एबे गेट बम धमाके के कथित दोषियों में से एक को गिरफ्तार करने के लिए पाकिस्तान को धन्यवाद दिया। इस हमले में 13 अमेरिकी सैनिक और दर्जनों अफगान नागरिक मारे गए थे, जब अमेरिका अफगानिस्तान से जल्दबाजी में निकल रहा था।

फिर शुरू हुआ पाक का चापलूसी वाला दौर
भारत के साथ मई में हुए संघर्ष के बाद, मुनीर को फील्ड मार्शल बनाया गया, जो पाकिस्तान के इतिहास में यह रैंक पाने वाले दूसरे अधिकारी थे। उसी साल बाद में, एक संवैधानिक बदलाव से चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) का पद बनाया गया, जिसे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) एक साथ संभालेंगे। ऑपरेशन सिंदूर में मार खाने के बावजूद मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप को शांति का दूत बताया और नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट किया। यही वह मीठी गोली थी जिसने ट्रंप को प्रभावित किया। जून 2025 में मुनीर को वाइट हाउस में अकेले लंच के लिए बुलाया गया- पाकिस्तानी आर्मी चीफ के लिए ऐतिहासिक पल था। वहां मुनीर ने ट्रंप की चापलूसी की, रेयर अर्थ मिनरल्स, क्रिप्टो डील और ट्रेड ऑफर्स दिए।

इसके बाद ट्रंप की प्रशंसा का सिलसिला चला: सितंबर में दूसरी मीटिंग (शरीफ के साथ), अक्टूबर में गाजा पीस समिट में ट्रंप ने मुनीर को फेवरिट फील्ड मार्शल कहा और दिसंबर तक 10 से ज्यादा बार तारीफ की। पाकिस्तान ने इसे अपनी डिप्लोमेटिक कमबैक बताया।

पाकिस्तान की रणनीति: चापलूसी और ट्रांजेक्शनल डील्स
    पाकिस्तान के लिए मुनीर सोल्जर-डिप्लोमैट बन गए। उन्होंने ट्रंप को:नोबेल का लालच दिया।
    बलूचिस्तान के रेयर अर्थ मिनरल्स का ऑफर।
    क्रिप्टो और ट्रेड डील्स का वादा।
    आतंकवाद विरोध में सहयोग (ISIS-K गिरफ्तारियां)।
    गाजा स्टेबलाइजेशन फोर्स में ट्रूप्स भेजने की संभावना (जो अब दबाव बन रहा है)।

ट्रंप, जो डील्स के शौकीन हैं, इससे प्रभावित हुए। पाकिस्तान को बेहतर ट्रेड टैरिफ मिले, जबकि भारत पर 50% टैरिफ लगाए गए।

क्षेत्रीय और मध्य-पूर्वी संतुलन
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पाकिस्तान ने 2025 में बांग्लादेश, मध्य एशिया और मध्य-पूर्व में कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाई है। सऊदी अरब में मोहम्मद बिन सलमान के साथ हुई रक्षा संधि को वर्ष की सबसे अहम उपलब्धियों में माना जा रहा है। वहीं, पाकिस्तान ने गाजा में युद्ध को लेकर ट्रंप द्वारा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल में शामिल होने की इच्छा भी जताई है।

घरेलू राजनीति और आलोचनाएं
जहां विदेशी मोर्चे पर पाकिस्तान की सक्रियता बढ़ी, वहीं देश के भीतर आलोचनाएं भी तेज हुईं। मई संघर्ष के बाद मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा मिला और संवैधानिक संशोधन के जरिए सेना प्रमुख को अभूतपूर्व अधिकार सौंपे गए। ये सब तब हुआ जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाक को करारी हार मिली थी। विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने लोकतंत्र के क्षरण और मीडिया दमन के आरोप लगाए। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कैद, बलूचिस्तान में हिंसा और 27वें संशोधन पर उठे सवालों के बीच आलोचकों का कहना है कि कथित अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सफलता ने इन मुद्दों को हाशिये पर धकेल दिया है।

भारत के लिए खतरे और चिंताएं
भारत-अमेरिका संबंधों में दरार: ट्रंप का पहला कार्यकाल भारत के साथ मजबूत था (मोदी-ट्रंप बॉन्डिंग)। अब पाकिस्तान को प्राथमिकता मिल रही है। कांग्रेस ने इसे बेहद चिंताजनक कहा। भारत को चीन के खिलाफ काउंटर के रूप में देखा जाता था, लेकिन ट्रंप की पॉलिसी में पाकिस्तान को मिडिल पावर मल्टी-अलाइनर के रूप में जगह मिल रही है। पाकिस्तान की सैन्य ताकत बढ़ना: मई संघर्ष में हार के बाद मुनीर को फील्ड मार्शल बनाया गया। संवैधानिक संशोधन से उन्हें सभी सशस्त्र बलों पर कमांड, लाइफटाइम इम्युनिटी और 2030 तक एक्सटेंशन मिला। अमेरिकी समर्थन से पाकिस्तान की हिम्मत बढ़ी – अफगानिस्तान पर ड्रोन स्ट्राइक्स, भारत में प्रॉक्सी टेरर ग्रुप्स को सपोर्ट, और न्यूक्लियर थ्रेट्स।

क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा: ट्रंप का पाकिस्तान से निकटता आतंकवाद निरोधक सहयोग बढ़ा सकती है, लेकिन पाकिस्तान का ट्रैक रिकॉर्ड (ओसामा बिन लादेन छिपाना) संदेहास्पद। गाजा में पाक ट्रूप्स भेजने का दबाव मुनीर के लिए घरेलू बैकलैश का कारण बन सकता है, लेकिन अगर भेजे गए तो पाकिस्तान की ग्लोबल रिलेवंस बढ़ेगी- भारत के लिए नेगेटिव।

ट्रंप की अनप्रेडिक्टेबल पॉलिसी: ट्रंप टैक्टिकल रोमांस कर रहे हैं। भारत ने मध्यस्थता के दावे खारिज किए, लेकिन पाकिस्तान ने नैरेटिव सेट किया। इससे क्वाड, इंडो-पैसिफिक स्ट्रेटजी प्रभावित हो सकती है।

भारत के लिए यह सबक है कि ट्रंप की डिप्लोमेसी पर्सनल और ट्रांजेक्शनल है। भारत को मजबूत रहना होगा- सैन्य तैयारी, डिप्लोमेटिक आउटरीच और आर्थिक ताकत बढ़ानी होगी। पाकिस्तान की यह तथाकथित जीत अस्थायी हो सकती है, क्योंकि ट्रंप के वादे अक्सर बदलते हैं, और पाकिस्तान की आर्थिक हालत कमजोर है। लेकिन फिलहाल, मुनीर की ट्रंप-भक्ति भारत की सुरक्षा और कूटनीति के लिए चुनौती है। 2026 में देखना होगा कि यह फेवरिट रिश्ता कितना टिकता है।

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Wed, 31 Dec 2025 19:34:49 +0530 news desk MPcg
यमन पर अचानक सऊदी हमले का खुलासा, UAE से किस बात पर बिगड़े रिश्ते? https://citytoday.co.in/4734 https://citytoday.co.in/4734 रियाद 
अरब के दो मुसलमान देशों के बीच अचानक छिड़ी जंग ने पूरी दुनिया का ही ध्यान आकर्षित किया है। यमन में जब यूएई की ओर से भेजी गई हथियारों की खेप वाले जहाजों पर सऊदी अरब ने हमले किए तो हर कोई हैरान रह गया। इस हमले के बाद इलाके में तनाव भड़क गया और अंत में UAE ने ही अपने कदम वापस खींचने का फैसला लिया है। सऊदी अरब की ओर से यह बमबारी यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर की गई थी। उसका कहना था कि पड़ोसी UAE की तरफ से यमन में हथियारों का एक बड़ा जखीरा भेजा गया था, जिसे अलगाववादी इस्तेमाल करते। इससे उन्हें आपत्ति थी और इसी के चलते हमला किया गया।

सऊदी अरब के सख्त ऐतराज और हमलों के बाद UAE का कहना है कि वह यमन से अपने सुरक्षा बलों को वापस बुलाएगा। UAE पर आरोप है कि उसके सुरक्षा बल अलगाववादियों का साथ दे रहे हैं। जानकारी मिली है कि UAE के दो जहाज यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर पहुंचे थे, जिनमें 80 वाहन सवार थे और कंटेनर्स थे, जिनमें तमाम हथियार लदे हुए थे। इसके अलावा विस्फोटक भी था। यह सारा सामान सऊदी अरब की जानकारी के बिना पहुंचा था और अलगाववादियों के हाथ लगना था। इससे सऊदी अरब भड़क गया और उसने हमले कर दिए। वहीं UAE ने अब अपने सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की बात कही है।

अब तक यमन में उसके सुरक्षा बल काउंटर टेररिज्म के नाम पर वहां ऐक्टिव थे। सऊदी अरब की ओर से आरोप लग रहा था कि UAE की ओर से अलगाववादियों को समर्थन मिल रहा था। सऊदी का आरोप है कि यूएई की ओर से अलगाववादी सदर्न ट्रांजिशन काउंसिल यानी STC को हथियारों की सप्लाई की जा रही थी। इसी को लेकर उसे आपत्ति है क्योंकि वह STC के खिलाफ रहा है। इसके अलावा यमन की आधिकारिक सरकार भी UAE के विरोध में खड़ी हो गई और कहा कि इस तरह अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले 24 घंटे के अंदर यमन से निकल जाएं। अंत में UAE को ही झुकना पड़ा है।

 

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Wed, 31 Dec 2025 16:42:34 +0530 news desk MPcg
कनाडा में भारतीय महिला हिमांशी खुराना की हत्या, आरोपी पार्टनर अब्दुल गफूर फरार https://citytoday.co.in/4693 https://citytoday.co.in/4693 टोरंटो
 कनाडा के टोरंटो में एक भारतीय महिला की हत्या का मामला सामने आया है। भारतीय दूतावास ने इस मामले की पुष्टि करते हुए दुख जताया है। टोरंटो पुलिस ने महिला के पार्टनर अब्दुल गफूर की तलाश शुरू कर दी है। वह वारदात के बाद से फरार है।

भारतीय दूतावास ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय युवा नागिरक हिमांशी खुराना की मौत दुखद है। यह सूचना परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक है। इस घड़ी में हम सब उनके साथ हैं। पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए भारतीय दूतावास हर संभव मदद करेगा।

पुलिस ने पार्टनर के खिलाफ जारी किया वारंट

    टोरंटो पुलिस को शुक्रवार देर रात जानकारी दी गई थी कि 30 वर्षीय हिमांशी खुराना मिल नहीं रही है। उससे किसी भी तरह का कॉन्टैक्ट नहीं हो पा रहा है। ऐसे में पुलिस ने जांच शुरू की। 19 दिसंबर की रात उसकी तलाश शुरू हुई। 20 दिसंबर की सुबह उसका शव घर अंदर ही मिला।

    पुलिस ने हिमांशी के पार्टनर अब्दुल गफूर के बारे में पता चला, लेकिन वह वहां मौजूद नहीं था। उसको तलाश किया गया, लेकिन वह घटना के बाद से ही फरार था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है।

गफूरी की तलाश में जुटी पुलिस

कनाडा पुलिस ने जानकारी दी कि पीड़िता और आरोपी रिलेशन में थे। उसकी हत्या के बाद से ही वह फरार है। उसकी तलाश की जा रही है। अभी उसके खिलाफ फर्स्ट डिग्री वारंट जारी किया है। उसका गुनाह साबित होने पर गैर-जमानती आजीवन कारावास की सजा मिलने की संभावना है।

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Thu, 25 Dec 2025 18:06:15 +0530 news desk MPcg
आवामी लीग से बैन हटाओ’ पर अमेरिका ने युनुस को दिया झटका, बांग्लादेश में हसीना की वापसी का रास्ता तैयार? https://citytoday.co.in/4680 https://citytoday.co.in/4680 ढाका 

बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले आम चुनाव से पहले शेख हसीना की वापसी का रास्ता बनता दिख रहा है. मोहम्मद यूनुस की तानाशाही के खिलाफ अंतरिम सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव तेज हो गया है. अमेरिका के प्रभावशाली सांसदों के एक समूह ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यूनुस को शेख हसीना की पार्टी वामी लीग से बैन हटाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखा गया, तो यह चुनाव न तो स्वतंत्र होगा और न ही निष्पक्ष. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी डब्ल्यू मीक्स, बिल हुईजेंगा और सिडनी कैमलागर-डोव ने मंगलवार को बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस को एक औपचारिक पत्र भेजा. इस पत्र में उन्होंने कहा कि किसी पूरे राजनीतिक संगठन पर प्रतिबंध लगाना लाखों मतदाताओं को उनके वोट के अधिकार से वंचित कर सकता है.

अमेरिकी सांसदों ने यह पत्र ऐसे समय में भेजा है जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने जुलाई विद्रोह के बाद अवामी लीग और उसकी छात्र इकाई बांग्लादेश छात्र लीग पर प्रतिबंध लगा रखा है. सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रीय संकट के दौरान अंतरिम सरकार की भूमिका को समझते हैं, लेकिन किसी पार्टी को सामूहिक रूप से दोषी ठहराना बुनियादी मानवाधिकारों और व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी के सिद्धांत के खिलाफ है.पत्र में यह भी चेतावनी दी गई कि राजनीतिक गतिविधियों पर रोक और इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) को दोबारा उसी पुराने स्वरूप में शुरू करना चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है.

अमेरिका से यूनुस ने की थी बात

अमेरिकी सांसदों ने जोर दिया कि चुनाव ऐसा होना चाहिए जिसमें जनता शांतिपूर्ण तरीके से बैलेट के जरिए अपनी इच्छा व्यक्त कर सके और सरकारी संस्थानों की निष्पक्षता पर भरोसा बहाल हो. यह पत्र ऐसे समय आया है जब यूनुस ने अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर से फोन पर बातचीत की. इस बातचीत में व्यापार, टैरिफ, चुनाव, लोकतांत्रिक संक्रमण और छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या पर चर्चा हुई. यूनुस ने कहा कि देश 12 फरवरी को चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और अंतरिम सरकार स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करेगी.

शेख हसीना की बैकडोर से एंट्री!

राजनीति में कहा जाता है कि नेता पद छोड़ सकता है, देश छोड़ सकता है, लेकिन उसका सियासी वजूद रातों-रात खत्म नहीं होता. बांग्लादेश में इन दिनों कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भले ही देश से दूर हों, लेकिन उनकी पार्टी अवामी लीग का बेस इतना बड़ा है कि उसे बांग्लादेश के नक्शे से मिटाना नामुमकिन साबित हो रहा है. शेख हसीना को सत्‍ता से हटाने में अहम भूमिका न‍िभाने वाले नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने चौंकाने वाला दावा किया है. उनका कहना है क‍ि शेख हसीना की पार्टी के नेता अब दूसरी पार्टियों के जरिए मुख्यधारा की राजनीति में लौटने की तैयारी कर रहे हैं. इसे शेख हसीना की बैकडोर एंट्री के तौर पर देखा जा रहा है. नाहिद इस्लाम के दावों ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है.

5 अगस्त के बदलाव के बाद बांग्लादेश में अवामी लीग के लिए हालात चुनौतीपूर्ण हो गए हैं. पार्टी के कई बड़े नेताओं पर मुकदमे दर्ज हैं. लेकिन अवामी लीग बांग्लादेश की सबसे पुरानी और बड़ी पार्टियों में से एक है, जिसका हर गांव और कस्बे में अपना एक मजबूत वोट बैंक और कार्यकर्ता नेटवर्क है.

नाहिद इस्लाम का दावा है कि विपक्षी पार्टियां खासकर खाल‍िदा ज‍िया की पार्टी बीएनपी और जमात-ए-इस्‍लामी अवामी लीग के इस विशाल वोट बैंक की ताकत को समझती हैं. द डेली स्टार के एक कार्यक्रम में नाहिद ने कहा, इन वोटों को अपने पाले में करने के लिए पर्दे के पीछे एक खेल चल रहा है. दूसरी पार्टियां अवामी लीग के नेताओं को ऑफर दे रही हैं कि अगर वे उनका समर्थन करें, तो उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस ले लिए जाएंगे या उन्हें सुरक्षा दी जाएगी.

शेख हसीना के शुरू हो गए अच्छे दिन

बांग्लादेश में चारों तरफ से बरस रही नफरत की आग के बीच एक ही नाम गूंज रहा है और वो है ‘शेख हसीना’ का…यहां के उग्रवादी पूर्व प्रधानमंत्री की वापसी की डिमांड कर रहे हैं. हालांकि, शेख हसीना ने साफ कर दिया है कि वो किसी धमकी से घबराती नहीं हैं, इस बीच चुपके से उनकी धमाकेदार वापसी की शुरुआत हो चुकी है. देश की एक बड़ी पोस्ट पर शेख हसीना का करीबी बैठ गया है. ये वही पोस्ट है जहां से शेख हसीना के खिलाफ लिए गए कई कानूनी एक्शन कैंसिल हो सकते हैं लेकिन अभी ऐसा कोई ऐलान नहीं हुआ है.

कौन हैं शेख हसीना के करीबी?

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश में फांसी की सजा तक सुनाई जा चुकी है और उन्हें फंदे पर लटकाने के लिए मौजूदा सरकार बार-बार उनके प्रत्यर्पण की डिमांड कर रही है. बांग्लादेश में तबाही मचा रहे आंदोलनकारी भी शेख हसीना का ही नाम जप रहे हैं. इन सबके बीच हाल ही में यूनुस की आखों के सामने हसीना के करीबी जुबैर रहमान चौधरी, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की कुर्सी पर जाकर बैठ गए हैं. बांग्लादेश राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने उनके नियुक्ति पत्र पर मुहर लगी है और बात पक्की हो चुकी है.

कैसे दिखाई शेख हसीना के प्रति वफादारी?

बताया जा रहा है कि अब जुबैर रहमान 27 दिसंबर को कुर्सी पर बैठेंगे और इसके बाद अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे. माना जा रहा है कि इस तारीख के बाद से शेख हसीना की देश में धमाकेदार वापसी की शुरुआत हो सकती है. अभी भले ही ऐसा कोई इशारा नहीं मिला है लेकिन रहमान, शेख हसीना के करीबी माने जाते हैं. बताया जाता है कि तख्तापलट के बाद से अपीलीय न्यायालय प्रभाग के न्यायाधीश पद पर रहते हुए रहमान के पास शेख हसीना के खिलाफ कई केसेस आए लेकिन उन्होंने ज्यादातर पर फैसला नहीं दिया.

शेख हसीना के राज में क्या हुआ था?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख हसीना के राज में ही जुबैर का कद बढ़ा है. साल 2003 में जुबैर को जज के तौर पर पहली नियुक्ति मिली थी और 2007 में उनकी ही अदालत ने शेख हसीना को एक्सटॉर्शन मामले में राहत दी थी. इसके बाद जब 2008 में शेख हसीना देश की प्रधानमंत्री बनीं तब जुबैर को ढाका हाईकोर्ट में तैनाती मिली. फिर 2017 और 2022 में शेख हसीना के खिलाफ जो जितने भी मामले कोर्ट गए, सभी में शेख हसीना को संजीवनी मिली.

क्या बोलीं शेख हसीना?

हालांकि यूनुस ने यह भी आरोप लगाया कि अपदस्थ शासन के समर्थक करोड़ों डॉलर खर्च कर चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं और विदेश से हिंसा भड़काई जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार है. इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 22 दिसंबर को कड़ा बयान देते हुए कहा कि अवामी लीग के बिना चुनाव चुनाव नहीं बल्कि ‘राजतिलक’ होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी पार्टी पर प्रतिबंध बरकरार रहा तो लाखों लोग मतदान से दूर रहेंगे और ऐसी सरकार को नैतिक वैधता नहीं मिलेगी. हसीना ने मौजूदा हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हमलों और उस्मान हादी की हत्या के लिए यूनुस सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि भारत समेत पड़ोसी देश बांग्लादेश की अराजकता को चिंता के साथ देख रहे हैं.

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Wed, 24 Dec 2025 15:52:48 +0530 news desk MPcg
नेरेस के दो गोल से नेपोली ने इटालियन सुपर कप जीता https://citytoday.co.in/4668 https://citytoday.co.in/4668 रियाद
डेविड नेरेस ने दोनों हाफ में एक-एक गोल किया जिससे मौजूदा सीरी ए चैंपियन नेपोली ने सऊदी अरब में खेले गए फाइनल में बोलोग्ना को 2-0 से हराकर तीसरी बार इटालियन सुपर कप फुटबॉल टूर्नामेंट जीता।

नेरेस का 39वें मिनट में पहला गोल किया। उनका 25 मीटर की दूरी से बाएं पैर से लगाया गया शॉट दूर के कोने में जाकर लगा। उन्होंने बोलोग्ना के गोलकीपर फेडेरिको रावग्लिया को इसे बचाने का कोई मौका नहीं दिया।

उन्होंने मैच का एक घंटा पूरा होने के बाद अपना दूसरा गोल किया। नेरेस ने रावाग्लिया के एक ढीले पास का फायदा उठाया और जॉन लुकुमी से गेंद छीनकर गोलकीपर के ऊपर से उसे गोल में डाल दिया। नेपोली ने इससे पहले 1990 और 2014 में सुपर कप जीता था।

 

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Tue, 23 Dec 2025 17:28:39 +0530 news desk MPcg
एपस्टीन फाइल्स से अमेरिका में भूचाल, 14 साल की लड़की से ट्रंप की मीटिंग और क्लिंटन का नाम भी जुड़ा https://citytoday.co.in/4658 https://citytoday.co.in/4658 वाशिंगटन

अमेरिकी फाइनेंशियर और दोषी सेक्स अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों की रिलीज ने एक बार फिर दुनियाभर में हलचल मचा दी है. एपस्टीन की मौत के बाद उनके नेटवर्क से जुड़ी फाइलों को 'एपस्टीन फाइल्स' के नाम से जाना जाता है. इन फाइल्स में कई हाई-प्रोफाइल हस्तियों के नाम और फोटोज शामिल हैं. हाल ही में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) ने कुछ दस्तावेज जारी किए हैं, लेकिन एपस्टीन फाइल्स को पूरी तरह रिलीज न करने को लेकर विवाद बढ़ गया है.

एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत अमेरिकी संसद, कांग्रेस ने DOJ को 19 दिसंबर 2025 तक सभी दस्तावेज जारी करने का डेडलाइन दिया था. हालांकि, DOJ ने केवल आंशिक रिलीज की, जिसमें हजारों पेज और सैकड़ों इमेज शामिल हैं. इनमें से कई पेज काले कर दिए गए हैं जिनमें पुलिस के बयान, जांच रिपोर्ट्स और फोटोज शामिल हैं. शुक्रवार को रिलीज डॉक्यूमेंट्स में 550 से ज्यादा पेज काले किए गए हैं. तर्क दिया जा रहा है कि पीड़ितों की पहचान छिपाने के लिए ऐसा किया गया है.

रविवार को जब अमेरिका के डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच से सवाल किया गया कि सभी डॉक्यूमेंट्स एक साथ क्यों नहीं रिलीज किए गए तो उन्होंने कहा कि सभी फाइलें धीरे-धीरे जारी की जाएंगी, और ट्रंप से जुड़े सभी मटेरियल भी रिलीज होंगे.

DOJ ने घोषणा की है कि आने वाले हफ्तों में और दस्तावेज जारी किए जाएंगे. लेकिन डेडलाइन मिस होने और कुछ फाइलों के DOJ वेबसाइट से गायब होने से विवाद बढ़ा है. अमेरिकी सांसदों ने अटॉर्नी जनरल पामेला बॉन्डी को कंटेम्प्ट ऑफ कांग्रेस की धमकी दी है. 
अब तक किन-किन हस्तियों के नाम सामने आए हैं?

एपस्टीन फाइल्स में अब तक कई फेमस नाम उजागर हुए हैं, लेकिन कोई 'क्लाइंट लिस्ट' या बड़े बॉम्बशेल नहीं मिले. जारी दस्तावेजों में ईमेल्स, फोटोज और रिकॉर्ड्स शामिल हैं. हालिया रिलीज डॉक्यूमेंट्स में जिनके नाम शामिल हैं वो हैं-

बिल क्लिंटन (पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति)- फोटोज और मेंशंस, एपस्टीन के जेट पर 28 ट्रिप्स का जिक्र 

डॉनल्ड ट्रंप (अमेरिकी राष्ट्रपति)- फोटोज और ईमेल्स में मेंशन, लेकिन कोई आरोप नहीं, कुछ फाइल्स डिलीट हुईं. 

केविन स्पेसी (एक्टर)- फोटोज और मेंशंस 

लैरी समर्स (पूर्व ट्रेजरी सेक्रेटरी)- ईमेल्स में कनेक्शन 

कैथरीन रुमलर (पूर्व व्हाइट हाउस काउंसल)- ईमेल्स में मेंशन

माइकल वुल्फ (जर्नलिस्ट)- ईमेल्स में मेंशन 

एलन मस्क (टेस्ला CEO)- दस्तावेजों में नाम 

बिल गेट्स (माइक्रोसॉफ्ट को-फाउंडर)- दस्तावेजों में नाम 

ये नाम ईमेल्स, फोटोज और कोर्ट डॉक्यूमेंट्स से आए हैं, लेकिन अधिकांश में कोई क्रिमिनल आरोप नहीं हैं. इन डॉक्यूमेंट्स में क्लिंटन और ट्रंप के नाम बार-बार आ रहे हैं.
एपस्टीन ने ट्रंप को 14 साल की एक लड़की से मिलाया

कोर्ट के डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, जेफ्री एपस्टीन ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप को 14 साल की एक लड़की से मिलवाया था. कोर्ट रिकॉर्ड में बताया गया है कि एपस्टीन ने 1990 के दशक में फ्लोरिडा स्थित ट्रंप के मार-ए-लागो रिसॉर्ट में कथित तौर पर 14 साल की लड़की को ट्रंप से मिलवाया.
इस कथित मुलाकात के दौरान एपस्टीन ने ट्रंप को कोहनी मारी और लड़की की ओर इशारा करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा, 'यह अच्छी है, है ना?'

2020 में एपस्टीन की संपत्ति और घिस्लेन मैक्सवेल के खिलाफ दायर मुकदमे के अनुसार, ट्रंप ने मुस्कुराते हुए सहमति में सिर हिलाया. डॉक्यूमेंट्स में कहा गया है कि इसके बाद दोनों हंस पड़े और वहां खड़ी लड़की असहज महसूस कर रही थी लेकिन 'उस समय वो इतनी छोटी थी कि यह समझ नहीं पाई कि वो हंस क्यों रहे हैं.'

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता का आरोप है कि सालों तक एपस्टीन ने उसे बहला-फुसलाकर उसका शोषण किया. हालांकि, कोर्ट में दायर याचिका में उसने ट्रंप के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया है.

डॉक्यूमेंट्स पर ट्रंप प्रशासन क्या बोला?

इस डॉक्यूमेंट पर व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन 'इतिहास का सबसे पारदर्शी प्रशासन' है. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने हजारों पन्नों के दस्तावेज जारी किए, हाउस ओवरसाइट कमेटी के समन अनुरोध में सहयोग किया और ट्रंप ने एपस्टीन से जुड़े डेमोक्रेट पार्टी के दोस्तों की जांच की मांग की जो कि डेमोक्रेट्स कभी नहीं कर पाते. उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स पीड़ितों के लिए इतना कभी नहीं कर पाते.

 जारी हजारों फाइलों में राष्ट्रपति का उल्लेख बहुत कम जगहों पर है. कुछ तस्वीरों में वो दिखाई देते हैं, लेकिन उनका शामिल होना बेहद सीमित बताया गया है. उन तस्वीरों में से एक शनिवार को फाइलों से हटाई गई थी, लेकिन विवाद बढ़ने पर 24 घंटे बाद उसे वापस जोड़ दिया गया.

एपस्टीन फाइल्स के अभी और हजारों पन्ने रिलीज होने बाकी हैं. डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा है कि 'कई लाख' पन्नों की समीक्षा अभी चल रही है और उन्हें अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति पहले कह चुके हैं कि एपस्टीन से सालों तक उनकी दोस्ती रही लेकिन 2004 के आसपास दोनों के संबंध टूट गए. यह एपस्टीन की पहली गिरफ्तारी से कई साल पहले की बात है. ट्रंप ने एपस्टीन से जुड़े किसी भी तरह के गलत काम में अपनी संलिप्तता से लगातार इनकार किया है.

बड़ी जानकारियां छिपा रहा ट्रंप प्रशासन

ट्रंप प्रशासन पर आरोप है कि वे फाइल्स को पूरी तरह रिलीज नहीं कर रहे, जिससे कवरअप का शक हो रहा है. ट्रंप ने एपस्टीन फाइल्स को रिलीज करने वाले एक्ट पर साइन किया, लेकिन DOJ की देरी से विपक्ष कह रहा है कि ट्रंप फाइल्स में खुद से जुड़ी बेहद संवेदनशील चीजों को छिपा रहे हैं.

एपस्टीन और ट्रंप की पुरानी दोस्ती (मार-ए-लागो में फोटोज) और ईमेल्स में ट्रंप का जिक्र इसकी वजह है. रिपब्लिकन्स का कहना है कि ट्रंप ने एपस्टीन को जेल भेजा और विक्टिम्स की मदद की. लेकिन डेमोक्रेट्स का कहना है कि वो बेहद संवेदनशील जानकारियां छिपा रहे हैं.

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Mon, 22 Dec 2025 19:54:57 +0530 news desk MPcg
बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या पर सख्त रुख, मुहम्मद यूनुस के निर्देश पर 7 आरोपी गिरफ्तार https://citytoday.co.in/4643 https://citytoday.co.in/4643 बांग्लादेश

बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या के मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने शनिवार को यह जानकारी दी है। यूनुस ने कहा कि रैपिड एक्शन बटालियन ने मैमनसिंह के बालुका में 27 साल के सनातन हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या के मामले में संदिग्धों को हिरासत में लिया है।

यूनुस ने कहा, "रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने मैमनसिंह के बालुका में 27 साल के सनातन हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या के मामले में सात लोगों को संदिग्ध के तौर पर गिरफ्तार किया है।" बयान के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान मोहम्मद लिमोन सरकार (19), मोहम्मद तारेक हुसैन (19), मोहम्मद मानिक मिया (20), इरशाद अली (39), निजुम उद्दीन (20), आलमगीर हुसैन (38) और मोहम्मद मिराज हुसैन अकन (46) के रूप में हुई है।

यूनुस ने कहा कि ये गिरफ्तारियां इलाके में RAB यूनिट्स की समन्वित कार्रवाई के बाद हुई हैं। उन्होंने कहा, "RAB-14 ने अलग-अलग जगहों पर ऑपरेशन चलाकर उपरोक्त संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।"

इस बीच बांग्लादेश के एक प्रमुख युवा नेता का शव शुक्रवार को सिंगापुर से ढाका लाए जाने के बीच बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अपने नागरिकों से कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा की गयी हिंसा से दूर रहने का आह्वान किया । युवा नेता शरीफ उस्मान हादी को छह दिन पहले गोली मार दी गयी थी। वह जुलाई में सरकार के विरूद्ध हुए हिंसक प्रदर्शनों में एक प्रमुख चेहरा थे।

पुलिस के अनुसार, हादी का शव सिंगापुर से ढाका पहुंचने के कुछ ही समय बाद, कथित कट्टरपंथी दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने राजधानी में वामपंथी विचारधारा वाली उदिची शिल्पीगोष्ठी के मुख्य कार्यालय में आग लगा दी।

देश के विभिन्न हिस्सों में बृहस्पतिवार रात हमले और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं जिनमें चट्टगांव में भारतीय सहायक उच्चायुक्त के आवास पर पथराव भी शामिल है। ये घटनाएं मुख्य सलाहकार मोहम्मद युनूस द्वारा टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए हादी की मौत की पुष्टि करने के बाद हुईं।

इंकलाब मंच के प्रवक्ता हादी का शव कड़ी सुरक्षा और व्यापक जन शोक के बीच बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की उड़ान से स्थानीय समयानुसार शाम लगभग छह बजे हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एचएसआईए) पर लाया गया। यह जानकारी सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस ने बिमान के महाप्रबंधक (जनसंपर्क) बोशरा इस्लाम के हवाले से दी।

 

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Sat, 20 Dec 2025 18:05:10 +0530 news desk MPcg
अमेरिकी तकनीक से चीन का निगरानी साम्राज्य, नेपाल बना ‘डिजिटल जेल’, तिब्बती भुगत रहे कीमत https://citytoday.co.in/4642 https://citytoday.co.in/4642 वाशिंगटन 
काठमांडू की अव्यवस्थित गलियों और भीड़भाड़ के ऊपर, बौद्धनाथ स्तूप का सफेद गुंबद एक मूक प्रहरी की तरह खड़ा है। इसके शिखर पर सुनहरा कलश और चारों दिशाओं में बनी बुद्ध की शांत, चौकस आंखें- जो मानो नीचे घट रही हर हलचल को देख रही हों। दशकों तक ये आंखें तिब्बती शरणार्थियों के लिए सुरक्षा और आश्रय का प्रतीक रहीं जो अपनी मातृभूमि में चीनी दमन से भागकर आए थे। लेकिन आज, तिब्बती शरणार्थियों पर कहीं अधिक दुर्भावनापूर्ण आंखें नजर रख रही हैं: हजारों चीनी सीसीटीवी कैमरे यहां सड़कों के कोनों और छतों पर लगे हैं और नीचे हर हरकत पर नजर रखते हैं। इस गहन निगरानी ने एक समय विश्वव्यापी गूंज पैदा करने वाले 'फ्री तिब्बत' आंदोलन को दबा दिया है।
 
नेपाल अब उन कम से कम 150 देशों में शामिल है, जहां चीनी कंपनियां निगरानी तकनीक निर्यात कर रही हैं। वियतनाम में कैमरे, पाकिस्तान में सेंसरशिप फायरवॉल, केन्या में शहर-स्तरीय मॉनिटरिंग सिस्टम चीन का ही है। एल्गोरिदम और डेटा के सहारे यह तकनीक कम संसाधनों वाली सरकारों के लिए ‘किफायती पुलिसिंग’ बन गई है- लेकिन इसकी कीमत नागरिकों की आजादी से चुकानी पड़ रही है।
अमेरिकी तकनीक, चीनी निगरानी

इस डिजिटल अधिनायकवाद का सबसे बड़ा विडंबनापूर्ण पहलू यह है कि चीन जिन निगरानी औजारों का निर्यात कर रहा है, उनमें से कई की जड़ें अमेरिका में विकसित तकनीक से जुड़ी हैं। दशकों तक सिलिकॉन वैली की कंपनियां चीन की शर्तों के आगे झुकती रहीं। चीन की शर्त थी- हमें अपनी तकनीक दो और हम तुम्हें अपने बाजार तक पहुंच देंगे।

आज भी कड़वाहट के बावजूद ये रिश्ते पूरी तरह टूटे नहीं हैं। उदाहरण के लिए, अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) चीनी तकनीकी दिग्गजों जैसे हिकविजन और दाहुआ को क्लाउड सेवाएं प्रदान करता है, जो उनके विदेशी विस्तार में मदद करती हैं। दोनों कंपनियां राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकार चिंताओं के कारण अमेरिकी वाणिज्य विभाग की एंटिटी लिस्ट में हैं। इसका मतलब है कि उनके साथ लेनदेन अवैध नहीं लेकिन सख्त प्रतिबंधों के अधीन हैं।

एडब्ल्यूएस ने एपी को बताया कि वह नैतिक आचार संहिता का पालन करता है, अमेरिकी कानूनों का अनुपालन करता है और खुद निगरानी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं प्रदान करता। दाहुआ ने कहा कि वे अपने उत्पादों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित जांच करते हैं। हिकविजन ने भी यही कहा और कंपनी के दमन में शामिल होने या सहयोग करने के किसी भी सुझाव को स्पष्ट रूप से खारिज किया। चीनी तकनीकी फर्में अब दूरसंचार, निगरानी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरा सूट प्रदान करती हैं, जिसमें बेचने वाले या उपयोग पर कम प्रतिबंध हैं। चीन खुद को कम अपराध दरों वाला वैश्विक सुरक्षा मॉडल पेश करता है, जो अमेरिका के रिकॉर्ड से विपरीत है।

नेपाल में सिमटता तिब्बती जीवन
एपी की जांच हजारों नेपाली सरकारी खरीद दस्तावेजों, कॉर्पोरेट मार्केटिंग सामग्री, लीक हुए सरकारी और कॉर्पोरेट दस्तावेजों तथा 40 से अधिक लोगों के साक्षात्कारों पर आधारित है, जिनमें तिब्बती शरणार्थी और नेपाली, अमेरिकी तथा चीनी इंजीनियर, कार्यकारी, विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल हैं। एक समय नेपाल में हर साल हजारों तिब्बती शरण लेते थे। आज यह संख्या सिंगल डिजिट में सिमट गई है। तिब्बती निर्वासित सरकार के अनुसार, सख्त सीमा नियंत्रण, चीन-नेपाल के बढ़ते संबंध और अभूतपूर्व निगरानी इसकी प्रमुख वजहें हैं। 2021 की एक आंतरिक नेपाली सरकारी रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन ने नेपाल के भीतर और सीमा-बफर जोन में भी निगरानी प्रणालियां खड़ी कीं, जहां निर्माण प्रतिबंधित है। चीन ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताया।

काठमांडू में लगभग सभी पुलिस कैमरों की फीड एक चार-मंजिला इमारत में जाती है। यह इमारत चीनी दूतावास से कुछ ही ब्लॉक दूर है। ठंडी हवा फेंकते पंखों के बीच नीली वर्दी में बैठे अधिकारी, रात-दिन स्क्रीन पर झिलमिलाते दृश्यों को खंगालते हैं। नीचे लगे एक बोर्ड पर अंग्रेजी और चीनी में लिखा है: चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय की ओर से शुभकामनाओं सहित।

‘वे हमें पहले ही पकड़ लेते हैं’
49 वर्षीय सोनम ताशी कभी प्रदर्शनों में आगे रहते थे लेकिन आज बस अपने 10 साल के बेटे को सुरक्षित बाहर निकालना चाहते हैं। बच्चा नेपाल में जन्मा है, पर न शरणार्थी कार्ड है, न नागरिकता। ताशी बताते हैं कि 10 मार्च (1959 के तिब्बती विद्रोह की बरसी) या दलाई लामा के जन्मदिन जैसे दिनों से पहले संभावित प्रदर्शनकारियों को उठा लिया जाता है। 2018 में नेपाल ने ‘प्रिडिक्टिव पुलिसिंग’ की पुष्टि की थी जहां लोगों की गतिविधियों के पैटर्न से पहले ही गिरफ्तारी हो जाती है। कैमरे हर जगह हैं। यहां कोई भविष्य नहीं।

‘उन्होंने पैसे नहीं, पूरा हार्डवेयर दिया’
2013 में नेपाल पुलिस को चीन से डिजिटल ट्रंकिंग रेडियो सिस्टम मिला- पूरी तरह उपहार था। लागत लगभग 5.5 मिलियन डॉलर। यह तकनीक सस्ती थी, उन्नत थी और सीमा क्षेत्रों तक कवरेज चाहती थी। नेपाल ने हामी भर दी। इसके बाद चीनी पुलिस दूत नियमित रूप से मुख्यालय आने लगे- ब्रोशर, प्रशिक्षण, उपकरण सब उनका था। नेपाल के सैकड़ों पुलिसकर्मी चीन में प्रशिक्षण लेने गए।

‘सेफ सिटी’ से सर्विलांस सिटी
2016 में काठमांडू की ‘सेफ सिटी’ परियोजना शुरू हुई- पहले सड़कें, फिर पर्यटन स्थल, धार्मिक परिसर, संसद और प्रधानमंत्री आवास। कैमरे केवल रिकॉर्ड नहीं करते- वे चेहरे पहचानते हैं, भीड़ में एक चेहरे को ट्रैक करते हैं, और पैटर्न सहेजते हैं। आज नेपाल में अधिकांश कैमरे चीनी कंपनियों के हैं- Hikvision, Dahua और Uniview। कई सिस्टम AI और फेसियल रिकग्निशन से लैस हैं।

ऑपरेटर राजधानी में मोटरबाइक ट्रैक कर सकते हैं
उनकी पहुंच विशाल है। ऑपरेटर राजधानी में मोटरबाइक ट्रैक कर सकते हैं, प्रदर्शन बनते देख सकते हैं या अलर्ट सीधे पेट्रोल रेडियो पर भेज सकते हैं। कई कैमरे नाइट विजन, फेशियल रिकग्निशन और एआई ट्रैकिंग से लैस हैं – त्योहार की भीड़ से एक चेहरा चुन सकते हैं या किसी व्यक्ति को घर के अंदर गायब होने तक फॉलो कर सकते हैं। सिस्टम न सिर्फ देखता है बल्कि याद करना सीख रहा है, गतिविधियों के पैटर्न स्टोर कर रहा है, निगरानी के नीचे जिए जा रहे जीवन का रिकॉर्ड बना रहा है।

शहर के एक 34 वर्षीय तिब्बती कैफे मालिक ने शहर के बदलाव को खामोश डर से देखा। वे कहते हैं- अब आप सिर्फ निजी में तिब्बती हो सकते हैं। पब्लिक में नहीं। उन्होंने और अन्य तिब्बतियों ने प्रतिशोध के डर से गुमनाम रहकर एपी से बात की। बौद्धनाथ में पहले कैमरे 2012 में लगाए गए, आधिकारिक तौर पर अपराध रोकने के लिए। लेकिन 2013 में एक तिब्बती भिक्षु ने स्तूप के सामने खुद को पेट्रोल डालकर आग लगा ली, तो पुलिस ने उसके आसपास 35 नाइट विजन कैमरे जोड़े।

काठमांडू में चीनी दूतावास ने पुलिस के साथ निकट सहयोग किया। कनाडा की साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रूपक श्रेष्ठ ने कहा कि पुलिस को नए कैमरों का उपयोग करने, फ्री तिब्बत आंदोलन से जुड़े संभावित प्रतीकों की पहचान करने और असंतोष की आशंका करने की विशेष ट्रेनिंग दी गई। 2013 में नेपाल पुलिस के एक दल ने उत्तरी सीमा पार कर तिब्बत में झांगमू गए: चीनी अधिकारियों से पुलिस रेडियो लेने। एक ट्रक उपकरणों से लदा और कुछ हैंडशेक के बाद वे काठमांडू लौट आए।
चीन तिब्बत से लगी सीमा के पास कवरेज चाहता था

उन्होंने कहा कि नेपाल ने शुरू में अमेरिका से तकनीक खरीदने पर विचार किया और सिर्फ दो बड़े शहरों में कैमरे तैनात करना चाहता था। लेकिन चीन तिब्बत से लगी सीमा के पास कवरेज चाहता था। नेपाल मान गया। उन्होंने तकनीक सिंधुपाल्चोक- चीन के लिए प्रमुख सड़क वाले सीमा जिले में तिब्बती शरणार्थियों द्वारा इस्तेमाल होने वाले इलाके में लगाई। एक व्यक्ति ने कहा कि भले ही हम स्वतंत्र हैं, लेकिन निगरानी कैमरे मतलब हम एक बड़े जेल में जी रहे हैं।

शुरू से अमेरिकी कंपनियां चीन के विशाल बाजार के लालच में तकनीक के बदले प्रवेश देती रहीं। कई को चीन में जॉइंट वेंचर और रिसर्च ऑपरेशन शुरू करने की शर्त थी। दर्जनों ने बात मानी, मूल्यवान नॉलेज और विशेषज्ञता ट्रांसफर की। संवेदनशील क्षेत्रों जैसे एन्क्रिप्शन या पुलिसिंग में भी काम हुआ। धीरे-धीरे चीनी कंपनियों ने प्रतिभा लुभाकर, रिसर्च प्राप्त कर और कभी-कभी हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर कॉपी कर अमेरिकी तकनीकी कंपनियों की बढ़त छीनी। तकनीक का प्रवाह जारी रहा, जबकि अमेरिकी अधिकारी खुले तौर पर चीन पर आर्थिक जासूसी और अमेरिकी कंपनियों से तकनीक के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाते रहे।

इनोवेशन पर फोकस थिंक टैंक के तत्कालीन अध्यक्ष रॉबर्ट डी. एटकिंसन ने 2012 की कांग्रेस सुनवाई में चेताया- चीन जबरन तकनीक ट्रांसफर में सबसे बड़ा अपराधी है। अमेरिकी तकनीकी प्रतिरोध का अंत 2012 में एडवर्ड स्नोडेन के खुलासों से हुआ कि अमेरिकी खुफिया अमेरिकी तकनीक से बीजिंग पर जासूसी कर रहा था। डरकर चीनी सरकार ने पश्चिमी फर्मों को कहा कि तकनीक सौंपो और सुरक्षा गारंटी दो वरना बाहर जाओ। एचपी और आईबीएम जैसी कंपनियों के मानने के बाद उनके पूर्व पार्टनर उनके सबसे बड़े वैश्विक प्रतिद्वंद्वी बने और अमेरिकी फर्मों के विपरीत उन्हें तकनीक उपयोग पर सवाल नहीं उठाने पड़े। हुआवेई, हिकविजन और दाहुआ अब वैश्विक दिग्गज हैं जो दुनिया भर निगरानी सिस्टम बेचते हैं।

अमेरिकी तकनीक इसमें प्रमुख थी:
    यूनिव्यू, चीनी एआई-पावर्ड सीसीटीवी सप्लायर है। इसने 2016 में नेपाल के सेफ सिटी प्रोजेक्ट के पहले चरण में काठमांडू में कैमरे लगाए। यूनिव्यू कैलिफोर्निया स्थित एचपी के चीन निगरानी वीडियो व्यवसाय से निकली।
    हाइटेरा ने नेपाली पुलिस को डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान किया, जैसे वॉकी-टॉकी और डिजिटल ट्रंकिंग तकनीक। इस साल हाइटेरा ने अमेरिकी कंपनी मोटोरोला से तकनीक चोरी स्वीकार की और जर्मन, ब्रिटिश, स्पेनिश तथा अमेरिकी तकनीकी व्यवसाय अधिग्रहण किए।
    हिकविजन और दाहुआ, चीन के दो सबसे बड़े निगरानी कैमरा सप्लायर हैं। वे नेपाल में कई कैमरे बेचते हैं। उन्होंने इंटेल और एनविडिया से पार्टनरशिप कर कैमरों में एआई क्षमता जोड़ी। 2019 के अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद संबंध खत्म हुए, लेकिन एडब्ल्यूएस दोनों को क्लाउड सेवाएं बेचता रहता है, जो कुछ सांसदों के अनुसार कानूनी लूपहोल है।

चीनी तकनीकी दिग्गज हुआवेई दुनिया के प्रमुख निगरानी सिस्टम विक्रेता बने, 200 से अधिक शहरों में सेंसर लगाए। नेपाल में उन्होंने टेलीकॉम गियर और अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हाई-कैपेसिटी सर्वर सप्लाई किए। वर्षों में कंपनी को आईबीएम जैसी अमेरिकी कंपनियों से पार्टनरशिप लाभ मिला और आरोप लगे — जैसे 2004 में सिस्को राउटर कोड कॉपी, जिसे हुआवेई ने कोर्ट बाहर सेटल किया।

पिछले दशक में विवाद और प्रतिबंधों के बाद अमेरिकी तकनीक ट्रांसफर ज्यादातर रुक गया। लेकिन उद्योग इनसाइडर्स कहते हैं कि बहुत देर हो चुकी: एक समय तकनीकी पिछड़ा चीन अब दुनिया के सबसे बड़े निगरानी तकनीक निर्यातकों में है। कम लोग समझ पाए कि अमेरिका को चीन को सॉफ्टवेयर नहीं बेचना चाहिए क्योंकि वे कॉपी कर सकते हैं, निगरानी और बुरी चीजों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। कोई इतनी जल्दी नहीं समझ पाया कि ऐसा हो सकता है।
आकाश में बड़ी आंख

नेपाल के मुस्तांग जिले के लो मन्थांग में 15वीं सदी के मठ में लकड़ी की स्लैट्स से रोशनी झांकती है, धूल के कणों और फीके बोधिसत्व चेहरों को पकड़ती है। तिब्बती सीमा के साथ दीवार वाले शहर में देवताओं के पैरों में चीनी मुद्रा के सिक्के पड़े हैं। दुकानों में चीनी इंस्टेंट नूडल्स और चीनी प्लेट वाली कारें पहाड़ी सड़कों पर दौड़ती हैं।

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Sat, 20 Dec 2025 18:03:47 +0530 news desk MPcg
बांग्लादेश: ढाका में दंगाइयों ने 9वीं मंजिल पर फंसे 28 पत्रकारों के सामने आग लगा दी, 3 घंटे मौत के साए में गुजरे https://citytoday.co.in/4629 https://citytoday.co.in/4629 ढाका 

बांग्लादेश में उस्मान हादी की मौत के बाद दंगाइयों ने आधी रात वहां के मीडिया प्रतिष्ठानों के दफ्तर में जमकर धमाल मचाया. दंगाइयों ने बांग्लादेश के अंग्रेजी दैनिक अखबार 'द डेली स्टार' के दफ्तर को आग लगा दी, इस दौरान बिल्डिंग के छत पर दर्जनों पत्रकार तीन घंटे तक फंसे रहे. ये इन पत्रकारों के लिए मौत से होकर गुजरने का अनुभव था. 

'द डेली स्टार' का ऑफिस अब पूरी तरह से जल चुका है. बलवाइयों ने बांग्लादेश के दूसरे अखबार प्रथम आलो के दफ्तर को भी जला दिया है. 

यह हमला अखबार के कारवान बाज़ार ऑफिस में हुआ, जिसके बाद पास की प्रोथोम आलो बिल्डिंग में तोड़फोड़ और आगजनी हुई. एक पत्रकार के मुताबिक बाहर से एक फोन कॉल आया जिसने स्टाफ को चेतावनी दी कि भीड़ द डेली स्टार के परिसर की ओर बढ़ रही है. 

9वीं मंजिल पर फंसे 28 पत्रकार, नीचे सुलगती आग

न्यूज़रूम में मौजूद स्टाफ ने शुरू में नीचे जाने की कोशिश की, लेकिन तब तक एक भीड़ बिल्डिंग की निचली मंजिलों पर पहुंच चुकी थी, उन्होंने यहां तोड़फोड़ शुरू कर दी और बाद में उसके कुछ हिस्सों में आग लगा दी. 

'द डेली स्टार' में हिंसा की पूरी रिपोर्ट बांग्लादेश की वेबसाइट बीडीन्यूज24 में छपी है. रिपोर्ट के अनुसार जब प्रदर्शनकारियों ने ऑफिस के निचले हिस्से में आग लगा दी तो वहां से धुएं का गुबार निकल पड़ा. इस वजह से पत्रकार बाहर नहीं निकल पाए. 

इसके बाद पत्रकारों का एक ग्रुप 9वीं मंजिल की छत पर चला गया. पत्रकार ने बताया कि वहां 28 लोग थे. 

कुछ देर बाद बिल्डिंग का एक कैंटीन वर्कर बाहर की आग बुझाने वाली सीढ़ी का इस्तेमाल करके नीचे उतरा. जमीन पर पहुंचते ही भीड़ ने उसे पकड़ लिया और पीटा. इस घटना के बाद किसी और ने सीढ़ी का इस्तेमाल करने की कोशिश नहीं की. 

बाद में फायर फाइटर्स आए और निचली मंजिलों पर लगी आग को काबू में किया. इसके बाद फायर सर्विस के चार लोग फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए छत पर गए. हालांकि, नीचे तोड़फोड़ जारी रहने के कारण पत्रकार नीचे आना नहीं चाह रहे थे. वहीं नीचे बिल्डिंग में आग भी लगी हुई थी. इस दौर में इन पत्रकारों ने ऊपर रहना ही मुनासिब समझा. और छत का दरवाज़ा बंद कर दिया गया. 

दंगाइयों ने की ऊपर चढ़ने की कोशिश

फायर सर्विस के स्टाफ ने उन्हें भरोसा दिलाने की कोशिश की, इन लोगों ने पत्रकारों से कहा कि आर्मी के जवान बिल्डिंग के बाहर मौजूद हैं. लेकिन जब कई हमलावर छत पर आ गए और दरवाजा पीटने लगे तो फिर से घबराहट फैल गई. छत पर मौजूद फायर फाइटर्स भी घबरा गए. 

इस दौरान पत्रकारों ने मदद का इंतजार करते हुए छत पर रखे गमलों से दरवाजे को बंद करने की कोशिश की.

बाद में एडिटर्स काउंसिल के प्रेसिडेंट और न्यू एज के एडिटर नूरुल कबीर, फोटोग्राफर शाहिदुल आलम के साथ भीड़ को शांत करने की कोशिश में बिल्डिंग के सामने गए. बाद में नूरुल कबीर के साथ बदसलूकी की गई.

पत्रकारों के अनुसार बाद में सैनिकों ने सीढ़ियों के एक तरफ से रास्ता दिया, जिसका इस्तेमाल हमलावरों ने बिल्डिंग में घुसने और तोड़फोड़ और लूटपाट जारी रखने के लिए किया. 

हम खुशकिस्मत थे…

इस दौरान छत पर और बिल्डिंग के अंदर फंसे डेली स्टार के स्टाफ को फायर-एग्जिट सीढ़ियों से नीचे उतारा गया और बिल्डिंग के पीछे के रास्ते से बाहर निकाला गया. एक पत्रकार ने कहा, "हम खुशकिस्मत थे. हम एक बड़ी आपदा से बच गए. मुझे नहीं पता कि देश किस दिशा में जा रहा है."इस घटना के बाद 'द डेली स्टार' का न्यूज रूम जल गया है और इस ग्रुप ने फिलहाल अखबारों का फिजिकल और ऑनलाइन प्रकाशन बंद करने का फैसला किया है.

इधर उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश के मुख्य प्रशासक मोहम्मद यूनुस ने रात को देश को संबोधित किया. 

मोहम्मद यूनुस ने कहा, "इस क्रूर हत्या में शामिल सभी अपराधियों को जल्द से जल्द न्याय के कठघरे में लाया जाएगा और उन्हें अधिकतम सजा दिलाई जाएगी. इस मामले में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी."

यूनुस ने कहा, "मैं एक बार फिर स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि उस्मान हादी पराजित ताकतों, फासीवादी आतंकवादियों के दुश्मन थे. उनकी आवाज को दबाने और क्रांतिकारियों को डराने का नापाक प्रयास पूरी तरह विफल किया जाएगा. कोई भी डर, आतंक या खूनखराबे के ज़रिए इस देश की लोकतांत्रिक प्रगति को नहीं रोका जा सकता."

बता दें कि 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के नेता उस्मान हादी को अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी थी. इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उसे सिंगापुर ले जाया गया था. जहां उसकी मौत हो गई. 

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Fri, 19 Dec 2025 19:04:35 +0530 news desk MPcg
डोनाल्ड ट्रंप के विरोध के बावजूद TikTok हुआ बिक, अब अमेरिका में बिना रोक&टोक चलेगा ऐप https://citytoday.co.in/4628 https://citytoday.co.in/4628 वाशिंगटन

 दुनियाभर में फेमस वीडियो ऐप TikTok से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है. लंबे समय से बैन की तलवार झेल रहे टिक-टॉक ने आखिरकार घुटने टेक दिए हैं!अब टिकटॉक बिक गया है! अमेरिकी निवेशकों के साथ स्पिन-ऑफ डील साइन हो गई है. कंपनी के सीईओ शाउ जी च्यू के मुताबिक अब अमेरिका में टिक-टॉक एक नई कंपनी के रूप में काम करेगा, जिसका कंट्रोल अमेरिकी हाथों में होगा. इस बड़े बदलाव के बाद अब सोशल मीडिया पर एक ही सवाल तेज हो गया है कि अगर अमेरिका में रास्ता निकल सकता है, तो क्या भारत में भी टिक-टॉक की वापसी संभव है? क्या बाइटडांस का यह समझौता भारत सरकार के कड़े रुख में नरमी ला सकता है? आइए जानते हैं इस यह खबर विस्तार से.

TikTok के सीईओ शाउ जी च्यू ने ऐप से बैन हटाने के लिए अमेरिकी निवेशकों के एक ग्रुप के साथ एक डील साइन कर ली है. इस डील के बाद अब अमेरिका में टिक-टॉक के बैन होने का खतरा टलता नजर आ रहा है.

क्या है पूरा मामला?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका की ट्रंप सरकार ने जनवरी में एक कानून पारित किया, जिसके तहत टिक-टॉक की मदर कंपन ByteDance को अपना अमेरिकी कारोबार किसी अमेरिकी कंपनी को बेचने या फिर बैन का सामना करने का अल्टीमेटम दिया था. अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन वाली इस नई डील के जरिए टिक-टॉक एक नई अमेरिकी यूनिट के रूप में काम करेगी.

सीईओ ने मेमो में क्या कहा?
सीईओ शाउ जी च्यू ने इस डील के बाद कर्मचारियों को भेजे एक मैसेज मे कहा है कि हमने एक नए टिक-टॉक यू.एस. जॉइंट वेंचर को लेकर निवेशकों के साथ डील किए हैं. इससे 17 करोड़ से ज्यादा अमेरिकी नागरिक इस समुदाया का हिस्सा बनें रह सकेंगे.

टिकटॉक की इस नई कंपनी में 7 सदस्यों वाला एक बोर्ड होगा जिसके भी ज्यादातर अमेरिकी सदस्य ही होंगे. कंपनी को लेकर हुए जॉइन्ट वेंचर का 50 फीसदी हिस्सा Oracle, Silver Lake और अबू-धाबी बेस्ड MGX के पास रहेगा. वहीं मात्र 30 फीसदी हिस्सा ByteDance के इन्वेस्टर्स के पास और 20 फीसदी हिस्सा TikTok  के मदर कंपनी ByteDance के पास होगा.

TikTok को लेकर हुए इस नए जॉइन्ट वेंचर में Oracle एक trusted security partner की भूमिका निभाएगा. सरल शब्दों में कहें तो कंपनी के ऑडिट का काम Oracle के पास रहेगा. यह डील 22 जनवरी को पूरा होने की उम्मीद है. साथ ही अमेरिका की तरफ से राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के चलते बाइटडांस पर अमेरिकी कारोबार बेचने के लिए बनाए जा रहे दबाव का सिलसिला भी समाप्त हो जाएगा. 

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Fri, 19 Dec 2025 19:03:22 +0530 news desk MPcg
सऊदी अरब में पाकिस्तानियों की बड़ी बेइज्जती! 24,000 से ज्यादा पाकिस्तानी भिखारियों को देश से बाहर निकाला https://citytoday.co.in/4623 https://citytoday.co.in/4623

सऊदी अरब में पाकिस्तानियों की बड़ी बेइज्जती हुई हैं. पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के महानिदेशक रिफ़त मुख्तार राजा ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की स्थायी समिति को बताया कि सऊदी अरब ने इस साल लगभग 24,000 पाकिस्तानी नागरिकों को “भीख मांगने” के आरोप में देश से Deport (निकाल) कर दिया है.

सऊदी अरब ने क्या कहा

उनका कहना है कि इन लोगों ने उमराह या टूरिस्ट वीज़ा का दुरुपयोग कर सऊदी अरब के पवित्र शहरों जैसे मक्का और मदीना के आसपास भीख मांगने जैसी गतिविधियों में संलिप्तता दिखाई, जो वहाँ की स्थानीय नीतियों के खिलाफ है और सऊदी अधिकारियों के लिए चिंता का कारण बना. 

FIA  ने क्या कहा

FIA ने यह भी बताया कि…अलग‑अलग देशों ने इस तरह के मामलों में पाकिस्तानियों को वापस भेजा है. इस साल सऊदी अरब अकेले 24,000 पाकिस्तानियों को भिखारी होने के आरोप में डिपोर्ट कर चुका है. इसके अलावा, अन्य देशों ने भी इसी तरह के मामलों में पाकिस्तानी नागरिकों को उसी तरह वापस भेजा है.

कुछ रिपोर्टों में यह संख्या और भी अधिक बताई जा रही है कि सऊदी अरब ने कुल मिलाकर लगभग 56,000 पाकिस्तानी भिखारियों को इस साल निकाल दिया है, लेकिन FIA ने संसद में जो आंकड़ा दिया है वह लगभग 24,000 की संख्या पर केंद्रित है.

विशेषज्ञों ने क्या कहा

विशेषज्ञों का मानना है कि वीज़ा दुरुपयोग, नकली दस्तावेज़ और अवैध प्रवास की कोशिशें इन Deportations का मुख्य कारण बन रही हैं.

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Fri, 19 Dec 2025 16:02:04 +0530 news desk MPcg
यूक्रेन युद्ध पर शांति की बड़ी पहल, ट्रंप के प्रस्ताव पर 90% सहमति का दावा, अमेरिका ने जताई उम्मीद https://citytoday.co.in/4608 https://citytoday.co.in/4608 कीव
लगभग 4 सालों से जारी यूक्रेन जंग में एक बार फिर शांति की उम्मीदें जगी हैं। नए अमेरिकी प्रस्ताव पर जोरों-शोरों से काम चल रहा है, जहां अमेरिका दोनों पक्षों को समझा-बुझा कर प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है। इस बीच अमेरिकी अधिकारियों ने सोमवार को कहा है कि उनके द्वारा तैयार की गई शांति योजना के लगभग 90 प्रतिशत बिंदुओं पर यूक्रेन और यूरोप सहमत हो गए हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा है कि दोनों देश शांति समझौते के पहले से कहीं अधिक करीब है।

वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक बयान में कहा है कि रूस के साथ जारी युद्ध को खत्म करने के लिए अगले कुछ दिनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद शांति समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसके बाद अमेरिकी दूत अगले सप्ताहांत अमेरिका में संभावित बैठकों से पहले समझौते के मसौदे को रूस के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

जेलेंस्की ने सोमवार देर रात संवाददाताओं से कहा कि बर्लिन में अमेरिका के साथ चर्चा की गई शांति योजना का मसौदा ‘बहुत ही व्यावहारिक’ है। हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति ने आगाह किया कि रूस के कब्जे में उसके क्षेत्र सहित कुछ मुद्दे हैं, जो अब भी अनसुलझे हैं।

भूमि का मुद्दा व्यापक समझौते के रास्ते में सबसे कठिन बाधाओं में से एक बना हुआ है। पुतिन चाहते हैं कि सैन्य कार्रवाई के जरिये कब्जे में लिये गए चार प्रमुख क्षेत्रों के साथ ही 2014 में कब्जा किए गए क्रीमिया प्रायद्वीप को रूसी क्षेत्र के रूप में मान्यता दी जाए।

वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कुछ अन्य प्रस्तावों पर आपत्ति जता रहे हैं, जिनमें यूक्रेन के लिए युद्धोत्तर सुरक्षा गारंटी भी शामिल है। इधर जेलेंस्की ने दोहराया है कि यूक्रेन, देश के आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण डोनबास क्षेत्र के किसी भी हिस्से पर रूस के नियंत्रण को मान्यता नहीं देगा।

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Wed, 17 Dec 2025 13:41:52 +0530 news desk MPcg
हॉलीवुड डायरेक्टर&एक्टर रॉब रेनर और पत्नी मिशेल सिंगर घर में मृत पाए गए, पुलिस जांच में जुटी https://citytoday.co.in/4590 https://citytoday.co.in/4590 लॉस एंजेलिस

 मशहूर अमेरिकी डायरेक्टर और एक्टर रॉब रेनर और उनकी पत्नी मिशेल को लॉस एंजेलिस स्थित उनके घर में मृत पाया गया। अधिकारियों ने शुरुआती जानकारी देते हुए बताया कि दोनों के शरीर पर चाकू के घाव हैं। इस मामले में पुलिस परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रही है। लॉस एंजेलिस फायर डिपार्टमेंट के मुताबिक, उनके पास दोपहर करीब 3:30 बजे मेडिकल इमरजेंसी के लिए कॉल आई। जब टीम मौके पर पहुंची, तो 78 वर्षीय रॉब और 68 वर्षीय मिशेल को मृत पाया गया। पुलिस ने इस घटना को हत्या करार दिया। लॉस एंजेलिस पुलिस विभाग के रॉबरी हौमिसाइड डिविजन की टीम मामले की जांच कर रही है। मामले में अभी किसी पर भी आधिकारिक तौर पर आरोप नहीं लगाया गया है।

इस खबर ने हॉलीवुड में सनसनी मचा दी है, और फिल्मी दुनिया के लोग इस घटना पर शोक व्यक्त कर रहे हैं। लॉस एंजेलिस की मेयर करेन बास ने भी इसे शहर के लिए एक बड़ा नुकसान बताया।
रॉब रेनर सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि हॉलीवुड के सबसे चर्चित डायरेक्टर्स में से एक भी थे। उनका जन्म 6 मार्च 1947 को न्यूयॉर्क में एक यहूदी परिवार में हुआ। उनके पिता, कार्ल रेनर, खुद एक प्रसिद्ध अभिनेता और कमीडियन थे। फिल्म और एक्टिंग की दुनिया से जुड़ाव उनके बचपन से ही रहा। रॉब ने अपने करियर की शुरुआत एक्टिंग से की और टीवी सीरियल 'ऑल इन द फैमिली' के लिए उन्हें पॉपुलैरिटी मिली। इस शो में उन्होंने मीटहेड का किरदार निभाया, जिसने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया और इसके लिए उन्हें दो एमी अवॉर्ड भी मिले।

इसके बाद रॉब ने डायरेक्शन में कदम रखा और हॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कई यादगार फिल्में बनाई, जिनमें 'दिस इज स्पाइनल टैप', 'स्टैंड बाय मी', 'द प्रिंसेस ब्राइड', 'व्हेन हैरी मेट सैली', 'मिजरी' और 'ए फ्यू गुड मैन' शामिल हैं। 'ए फ्यू गुड मैन' को साल 1992 में बेस्ट पिक्चर कैटेगरी में ऑस्कर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था। इस फिल्म में जैक निकोलसन और टॉम क्रूज जैसे बड़े अभिनेता नजर आए थे।
रॉब को फिल्मों के लिए कई अवॉर्ड मिले, जिनमें चार गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड और कई डायरेक्टर्स गिल्ड ऑफ अमेरिका अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेशन शामिल हैं।
रॉब की निजी जिंदगी भी फिल्मी कहानी जैसी रही। उन्होंने 1971 में डायरेक्टर और एक्ट्रेस पेनी मार्शल से शादी की, लेकिन उनकी शादी ज्यादा समय तक नहीं चली और 1981 में तलाक हो गया। इस शादी से रॉब ने पेनी की बेटी ट्रेसी को गोद लिया। इसके बाद 1989 में उन्होंने मिशेल सिंगर से शादी की। मिशेल खुद एक एक्ट्रेस और फोटोग्राफर थीं। दोनों की मुलाकात फिल्म 'व्हेन हैरी मेट सैली' के सेट पर हुई थी। शादी के बाद उनके तीन बच्चे हुए।
फिल्मी दुनिया में सक्रिय रहने के अलावा, रॉब रेनर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में भी आगे रहे। वे अमेरिकी राजनीति में एक मुखर पॉलिटिकल एक्टिविस्ट थे और अपने विचारों के लिए जाने जाते थे।
साल 2024 में रॉब ने अपनी कल्ट फिल्म 'स्पाइनल टैप' के सीक्वल पर काम शुरू किया था। इसके अलावा, वे टीवी शोज और फिल्मों में कैमियो रोल करते रहे, जिनमें 'द लैरी सैंडर्स शो', 'द सिम्पसंस' और 'न्यू गर्ल' शामिल हैं।

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Mon, 15 Dec 2025 19:20:27 +0530 news desk MPcg
भारत यात्रा के बाद पुतिन पर घिरा नया संकट, यूरोप–G7 ने रची ‘महासाजिश’, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मचेगा भूचाल https://citytoday.co.in/4566 https://citytoday.co.in/4566 मॉस्को 
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा अभी-अभी समाप्त हुई है, जहां उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की। लेकिन मॉस्को लौटते ही पुतिन को एक बड़ा झटका लग सकता है। दुनिया की सबसे संपन्न लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं रूस के समुद्री तेल व्यापार पर अपने अब तक के सबसे कठोर कदम की तैयारी में लग गई हैं। दरअसल यूरोपीय संघ (EU) और G7 देश रूस के खिलाफ एक नई 'महासाजिश' रच रहे हैं जिसके तहत ये देश रूसी तेल निर्यात पर पूर्ण समुद्री बैन लगाने की योजना बना रहे हैं। यह कदम रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को सीधा निशाना बनाएगा, क्योंकि तेल रूस के केंद्रीय बजट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा मुहैया कराता है। एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना रूसी तेल की कीमत सीमा (प्राइस कैप) को पूरी तरह समाप्त कर देगी और पश्चिमी टैंकरों, बीमा तथा झंडियों के उपयोग पर रोक लगा देगी। क्या यह वैश्विक तेल बाजार में भूचाल लाएगा? आइए पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
 
G7 देशों और यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल के लिए समुद्री सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर विचार शुरू कर दिया है। यह कदम पश्चिमी जहाजों और बीमा सेवाओं को रोक देगा, जो अभी भी रूस के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा ढो रहे हैं। यह जानकारी सीधे तौर पर बातचीत से जुड़े छह सूत्रों ने Reuters को दी।

रूस-यूक्रेन युद्ध और तेल का खेल
2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद G7 देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान) और EU ने रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन पूरी तरह बंद करने के बजाय, उन्होंने एक चालाक तंत्र अपनाया- 'प्राइस कैप'। इसके तहत रूसी कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रखने पर पश्चिमी शिपिंग और बीमा सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। इससे रूस को तेल बेचने में दिक्कत तो हुई, लेकिन पूरी तरह रुकावट नहीं लगी।

समय के साथ रूस ने इसे चकमा दिया। मॉस्को ने 'शैडो फ्लीट' नामक एक गुप्त जहाजी बेड़ा विकसित किया- पुराने, बिना पश्चिमी नियमन वाले टैंकर जो ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों से प्रेरित हैं। अक्टूबर 2025 तक, रूसी तेल निर्यात का 44% इसी शैडो फ्लीट से होता है, जबकि 38% अभी भी G7/EU/ऑस्ट्रेलिया के टैंकरों से। लेकिन अब यह प्राइस कैप 'कागजी शेर' साबित हो रहा है। सितंबर 2025 में EU और कनाडा ने इसे घटाकर 47.6 डॉलर प्रति बैरल कर दिया, लेकिन अमेरिका ने समर्थन नहीं किया। ट्रंप प्रशासन प्राइस कैप के प्रति संशयपूर्ण रहा है।

नई योजना: समुद्री सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध
रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि G7 और EU अब प्राइस कैप को ताक पर रखकर 'पूर्ण समुद्री सेवाओं प्रतिबंध' (फुल मारिटाइम सर्विसेज बैन) लाने की बात कर रहे हैं। इसका मतलब? रूसी तेल या ईंधन को ले जाने वाले किसी भी जहाज को पश्चिमी टैंकर, बीमा या पंजीकरण सेवाएं नहीं मिलेंगी – चाहे वह कहीं भी जा रहा हो। यह योजना मुख्य रूप से रूस के एशियाई बाजारों को निशाना बनाएगी। रूस का एक-तिहाई से अधिक तेल निर्यात (मुख्यतः भारत और चीन को) अभी भी ग्रीस, साइप्रस और माल्टा जैसे EU देशों के टैंकरों से होता है।

क्यों यह कदम रूस के लिए बड़ा झटका हो सकता है?
प्रस्तावित प्रतिबंध मौजूदा प्राइस-कैप सिस्टम को खत्म कर देगा और उस समुद्री व्यापार को निशाने पर लेगा जिसमें रूस भारी मुनाफा कमाता है। रूस अभी भी अपने तेल का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा पश्चिमी देशों के स्वामित्व वाले जहाजों और सेवाओं के माध्यम से भेजता है। यदि G7-EU इस प्रतिबंध को मंजूरी देते हैं, तो रूस को मजबूरन अपने शैडो फ्लीट- यानी पुराने, कम निगरानी वाले, अस्पष्ट स्वामित्व वाले जहाजों पर अधिक निर्भर होना पड़ेगा। प्रतिबंध लगने पर रूस को अपना शैडो फ्लीट दोगुना करना पड़ेगा, जो पहले से ही 1,423 जहाजों का जाल है (जिनमें 921 प्रतिबंधित हैं)।

अगले EU प्रतिबंध पैकेज में शामिल हो सकता है प्रस्ताव
EU के 27 सदस्य देश इसे अपनी अगली (20वीं) प्रतिबंध पैकेज में शामिल करना चाहते हैं, जो 2026 की शुरुआत में लागू हो सकती है। लेकिन पहले G7 की व्यापक सहमति जरूरी है। ब्रिटेन और अमेरिका इसकी अगुवाई कर रहे हैं। यूरोपीय आयोग चाहता है कि यह फैसला G7 की सहमति से लिया जाए ताकि इसे औपचारिक प्रस्ताव में शामिल करना आसान हो। ब्रिटेन और अमेरिका के अधिकारी इस मुद्दे पर तकनीकी स्तर पर लगातार बातचीत कर रहे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय अमेरिकी नीति पर निर्भर करेगा, खासकर इस बात पर कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन रूस-यूक्रेन शांति वार्ता के बीच कौन-सी रणनीति अपनाता है। चार सूत्र बताते हैं कि फिलहाल अमेरिकी रुख अनिश्चित है। अगर यह प्रतिबंध लागू किया जाता है, तो यह 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से रूस के तेल पर लगाया गया सबसे कड़ा कदम होगा।

रूस की ‘शैडो फ्लीट’ तेजी से बढ़ रही है
प्राइस कैप से बचने के लिए रूस ने अपना अधिकांश तेल एशियाई बाजारों की ओर मोड़ दिया है। रूस अक्सर अपने ही जहाजों का उपयोग करते हुए ऐसा कर रहा है। इनमें से कई टैंकर पश्चिमी बीमा के बिना, अस्पष्ट मालिकों के साथ और कम सुरक्षा मानकों पर चलते हैं। ऊर्जा और स्वच्छ हवा पर अनुसंधान केंद्र (CREA) के अनुसार: अक्टूबर में रूस ने 44% तेल प्रतिबंधित शैडो फ्लीट पर भेजा और 18% गैर-प्रतिबंधित शैडो जहाजों पर। इसके अलावा, 38% पश्चिमी देशों (G7, EU, ऑस्ट्रेलिया) से जुड़े जहाजों पर भेजा। वहीं लंदन की कंपनी लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस का कहना है कि रूस, ईरान और वेनेजुएला से प्रतिबंधित तेल ढोने वाली शैडो फ्लीट अब 1423 टैंकरों तक पहुंच गई है। बाइडेन प्रशासन का तर्क रहा है कि रूस को पुराने जहाज बदलने पर मजबूर करना उसके युद्ध को वित्तपोषित करने की क्षमता को कमजोर करेगा। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने प्राइस कैप को कड़ा करने में कम दिलचस्पी दिखाई है और 2025 में इसे 60 डॉलर से घटाकर 47.60 डॉलर करने के प्रस्ताव का भी समर्थन नहीं किया।

बहस की दिशा: बाजार स्थिरता बनाम रूस की आय
पश्चिमी सरकारें मानती हैं कि लक्ष्य रूस की युद्धकालीन आय कम करना है, लेकिन वैश्विक तेल बाजार को झटका दिए बिना। अगर पूरा समुद्री प्रतिबंध लागू होता है, तो यह रूस की पश्चिमी जहाजरानी सेवाओं तक पहुंच को गंभीर रूप से सीमित कर देगा और मॉस्को को मजबूर करेगा कि या तो वह अपनी शैडो फ्लीट को और बढ़ाए, या तेल निर्यात को कम करे। फिलहाल इन देशों की सरकारों ने अपनी योजना पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है

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Sat, 06 Dec 2025 15:35:55 +0530 news desk MPcg
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को मिला ‘शांति पुरस्कार’, खुशी से खुद पहना https://citytoday.co.in/4565 https://citytoday.co.in/4565

वाशिंगटन

 नोबेल शांति पुरस्कार की मांग कर रहे डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल तो नहीं लेकिन फीफा शांति पुरस्कार जरूर मिल गया है। फुटबॉल की वैश्विक संस्था (FIFA) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने नए फीफा शांति पुरस्कार से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार खेल से इतर वैश्विक शांति को ध्यान में रखकर बनाया गया है और ट्रंप इसके पहले विजेता हैं।

फीफा ने क्यों दिया यह पुरस्कार

डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रेम किसी से छिपा नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि फीफा द्वारा इस साल से शुरू किया जा रहा है शांति पुरस्कार ट्रंप को ही मिलेगा। वैसे बी फीफा के वर्तमान अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को ट्रंप का करीबी माना जाता है। वह कई बार खुले तौर पर इस बात को कह चुके हैं कि गाजा संघर्ष में युद्धविराम करवाने के लिए ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना ही चाहिए।

फीफा के अगले विश्वकप के लिए आयोजित किए जा रहे एक कार्यक्रम में जियानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए ट्रंप को यह पुरस्कार देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, "यह आपके लिए एक सुंदर मेडल है, जिसे आप जहां चाहें, वहां पहन सकते हैं।" इसके बाद ट्रंप ने तुरंत ही इसे अपने गले में डाल लिया। इसके साथ ही ट्रंप को एक सर्टिफिकेट भी दिया गया, जिसमें ट्रंप को 'दुनिया में शांति और एकता बढ़ाने में योगदान' देने वाला बताया गया।

इसके अलावा जियानी ने ट्रंप को एक सोने की ट्राफी भी भेंट की। इस पर आगे ट्रंप का नाम लिखा हुआ था। उन्होंने कहा, "आप इस शांति पुरस्कार के योग्य हैं, अपनी कोशिशों और उपलब्धियों के लिए।

फीफा शांति पुरस्कार मिलने के बाद ट्रंप उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा, "यह मेरे जीवन के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है।" इसके बाद उन्होंने अपने परिवार, खासतौर पर अपनी पत्नी मेलानिया का धन्यवाद दिया और मेजबान देशों कनाडा और मेक्सिको के नेताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह तीनों देशों के लिए बेहतर रहेगा।

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Sat, 06 Dec 2025 15:30:16 +0530 news desk MPcg
आसिम मुनीर बने पाकिस्तान के पहले CDF, पांच साल के कार्यकाल के साथ नई जिम्मेदारी https://citytoday.co.in/4551 https://citytoday.co.in/4551 इस्लामाबाद 

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) नियुक्त करने की औपचारिक मंजूरी दे दी. उन्हें यह पद पांच साल के कार्यकाल के लिए दिया गया है.

राष्ट्रपति द्वारा यह मंजूरी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा भेजी गई उस संस्तुति पर दी गई, जिसमें उन्हें सेना प्रमुख और CDF पद पर नियुक्त करने की अनुशंसा की गई थी.

नए संवैधानिक संशोधन के तहत पद का गठन

पिछले महीने पाकिस्तान की संसद ने 27वें संविधान संशोधन को पारित किया था, जिसके तहत CDF का पद सृजित किया गया. इस पद का उद्देश्य देश की रक्षा संरचना में यूनिटी ऑफ कमांड सुनिश्चित करना और महत्वपूर्ण परिस्थिति में त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करना है.

CDF पद ने चेयरमैन, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) के पद की जगह ले ली है, जिसे अब खत्म कर दिया गया है.

राष्ट्रपति ने शुभकामनाएं दीं

राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि जरदारी ने नई नियुक्ति के लिए फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को शुभकामनाएं दी हैं.

इसके साथ ही राष्ट्रपति ने एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू को दो साल का कार्यकाल विस्तार भी मंजूर किया है, जो उनके मौजूदा कार्यकाल के 19 मार्च, 2026 को पूरा होने के बाद लागू होगा.

मुनीर का कार्यकाल और नियुक्ति प्रक्रिया

प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने पहले आसिम मुनीर को आर्मी चीफ और CDF दोनों पदों पर नियुक्त करने का प्रस्ताव मंजूर किया था, जिसे बाद में राष्ट्रपति को भेजा गया.

आसिम मुनीर को नवंबर 2022 में COAS नियुक्त किया गया था, उस समय उनका कार्यकाल तीन वर्षों का था. लेकिन 2024 में इसे बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया था.

सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद उस देरी से जुड़ी अटकलों पर विराम लगा, जिनमें कहा जा रहा था कि नए CDF की नियुक्ति समय पर नहीं हो पा रही. नियुक्ति 27 नवंबर से लंबित थी, जब पिछले CJCSC जनरल साहिर शमशाद मिर्जा सेवानिवृत्त हुए थे.

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Fri, 05 Dec 2025 18:04:38 +0530 news desk MPcg
5 महीने बाद यमन की जेल से रिहा हुआ भारतीय क्रू मेंबर रवींद्रन, भारत ने मुस्लिम देश को कहा धन्यवाद https://citytoday.co.in/4549 https://citytoday.co.in/4549 यमन 
यमन में करीब पांच महीने से कैद भारतीय क्रू मेंबर अनिलकुमार रवींद्रन को आखिरकार रिहा कर दिया गया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी है। मंत्रालय के बयान के मुताबिक रवींद्रन लाइबेरिया झंडे वाली ग्रीक के एक बल्क कैरियर शिप MV Eternity C के क्रू का हिस्सा थे। इस जहाज पर बीते जुलाई महीने में हूती विद्रोहियों ने हमला किया था।
 
विदेश मंत्रालय के मुताबिक हमले के बाद रवींद्रन को पकड़ लिया गया था और वह 7 जुलाई 2025 से हिरासत में थे। मंत्रालय ने बताया कि रवींद्रन बुधवार को ओमान के मस्कट पहुंच गए हैं और जल्द ही भारत लौटने की उम्मीद है। इससे पहले सरकार लंबे समय से उनकी सुरक्षित रिहाई और वापसी सुनिश्चित करने के लिए कई पक्षों के साथ लगातार समन्वय कर रही थी।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “भारत सरकार, MV Eternity C के भारतीय क्रू मेंबर अनिलकुमार रवींद्रन की रिहाई का स्वागत करती है। वह 7 जुलाई 2025 से यमन में हिरासत में थे। रवींद्रन मस्कट पहुंच गए हैं और जल्द ही भारत लौटेंगे। सरकार इस मामले में कई पक्षों के साथ समन्वय कर रही थी।”

ओमान के प्रति आभार
भारत ने रवींद्रन की रिहाई में सहयोग के लिए ओमान सरकार का आभार जताया है। हूती समर्थित मीडिया अल-मसीरा ने बताया है कि इस रिहाई में ओमान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और क्रू को सुरक्षित तरीके से सना से मस्कट पहुंचाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक हूती विद्रोहियों द्वारा जुलाई में निशाना बनाए गए Eternity C जहाज के सभी 10 क्रू मेंबरों को रिहा कर सना से ओमान ट्रांसफर किया गया है।

 

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Fri, 05 Dec 2025 17:33:37 +0530 news desk MPcg
कर्ज में डूबा पाकिस्तान: इंटरनेशनल एयरलाइंस बेचने पर मजबूर, मुनीर के ‘फौजी’ भी खरीदारी में शामिल https://citytoday.co.in/4531 https://citytoday.co.in/4531

इस्लामाबाद 

पाकिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) की बिक्री जल्द ही होने वाली है. यह कदम अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा पाकिस्तान को दिए गए 7 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज की शर्तों के तहत उठाया जा रहा है. पाकिस्तान फाइनेंशियल क्राइसिस में फंसा हुआ है और कई बार कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज ले लिया है. इस कारण से पाकिस्तान को अपने राष्ट्रीय एयरलाइन को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

फौजी कंपनी 'फर्टिलाइजर' भी है शामिल
PIA की बिक्री के लिए चार कंपनियों को सबसे ऊपर रखा गया है. इनमें फौजी फर्टिलाइजर कंपनी लिमिटेड भी शामिल है, जो पाकिस्तान की सैन्य कंट्रोल फौजी फाउंडेशन का हिस्सा है. बाकी तीन कंपनियों में लकी सीमेंट कंसोर्टियम, आरिफ हबीब कॉर्पोरेशन कंसोर्टियम और एयर ब्लू लिमिटेड का नाम सामने आ रहा है. बिक्री की बोली 23 दिसंबर, 2025 को होगी और इसे सभी मीडिया पर लाइव दिखाया जाएगा.

2 दशकों में सबसे बड़ी निजीकरण योजना
PIA की बात करें तो ये पिछले 2 दशकों में पाकिस्तान की सबसे बड़ी निजीकरण योजना है. सरकार ने बताया कि इस साल कुल 86 अरब रुपये की बिक्री का प्लान है. PIA की पिछली बोली में केवल 15% राशि सरकार के पास गई थी, जबकि बाकी का पैसा एयरलाइन में ही निवेश कर दिया गया था.

नकली लाइसेंस के साथ पायलट भर रहे हैं उड़ान
PIA पिछले कई सालों से गंभीर संकट में है. 2020 में यह सामने आया कि एयरलाइन के 30% पायलट नकली या संदिग्ध लाइसेंस के साथ उड़ान भर रहे थे. इस कारण 262 पायलटों को निलंबित किया गया और ऑपरेशन में बड़ी बाधाएं आईं थी. यूरोपीय संघ, अमेरिका और ब्रिटेन ने सुरक्षा कारणों से PIA की उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया था. इन प्रतिबंधों के कारण एयरलाइन को करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा था.

200 अरब से अधिक है कर्ज
इतना ही नहीं पाकिस्तान सरकार में अंदरूनी समस्याएं भी गंभीर हैं, जैसे अधिक कर्मचारियों, राजनीतिक नियुक्तियों और nepotism ने एयरलाइन के खर्च और अच्छे काम करने वाले लोगों को प्रभावित करने का काम किया है. साथ ही 2020 में PIA Flight 8303 के क्रैश ने पाकिस्तान ने सुरक्षा जांच और फ्लीट मेंटेनेंस की जरूरत बढ़ा दी है. इन सभी कारणों से एयरलाइन पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है और नुकसान पाकिस्तानी रुपयों में 200 अरब से अधिक हो गया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि PIA की परेशानियां केवल एक घटना के कारण नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियां भी इसका परिणाम हो सकती हैं. अब सरकार और IMF की शर्तों के तहत एयरलाइन को बेचकर उसकी फाइनेंशियल स्थिति को सुधारने का काम करेगी. 

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Thu, 04 Dec 2025 14:21:48 +0530 news desk MPcg
ट्रंप के संकेत: ड्रग तस्करी के खिलाफ वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई की संभावना का इशारा https://citytoday.co.in/4530 https://citytoday.co.in/4530 वॉशिंगटन
कैरिबियन में कथित वेनेजुएला के ड्रग तस्करों की नावों पर अमेरिका के बार-बार हवाई हमलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बहुत जल्द वेनेजुएला के अंदर रहने वाले 'बुरे लोगों' पर हमला करना शुरू कर देगा.

मंगलवार की कैबिनेट मीटिंग में ट्रंप की टिप्पणी से वॉशिंगटन और काराकास के बीच और तनाव बढ़ने का इशारा मिलता है. ट्रंप ने कैबिनेट मीटिंग के दौरान कहा, 'हम जमीन पर भी ये हमले शुरू करने जा रहे हैं. जमीन पर हमला करना ज्यादा आसान है. हम जानते हैं कि बुरे लोग कहाँ रहते हैं, और हम यह बहुत जल्द शुरू करने जा रहे हैं.'

ट्रंप की यह बात तब आई है जब उनके प्रशासन पर ड्रग तस्करी करने वाली नावों को निशाना बनाने के लिए किए गए हमले को लेकर कड़ी जांच हुई है, जिसमें अब तक 80 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. बैठक में ट्रंप ने वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ का बचाव किया और कहा कि न तो उन्हें और न ही वॉर सेक्रेटरी को संदिग्ध ड्रग जहाज पर दूसरे हमले के बारे में पता था. अमेरिकी सेना ने 2 सितंबर को कैरिबियन में चल रहे एक संदिग्ध ड्रग जहाज पर एक और हमला किया था, जब शुरुआती हमले में जहाज पर सवार सभी लोग नहीं मारे गए थे.

ट्रंप ने कहा, 'मुझे दूसरे हमले के बारे में नहीं पता था. मुझे लोगों के बारे में कुछ नहीं पता था. मैं इसमें शामिल नहीं था और मुझे पता था कि उन्होंने एक नाव ली थी, लेकिन मैं यह कहूंगा कि उन्होंने हमला किया था.' राष्ट्रपति ने कहा कि हेगसेथ हमले से संतुष्ट थे लेकिन उन्हें दूसरे हमले के बारे में पता नहीं था, जिसमें दो लोग शामिल थे.

हेगसेथ ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने पहला हमला लाइव देखा था, लेकिन फिर अपनी अगली मीटिंग में चले गए. वॉर सेक्रेटरी ने आगे कहा कि उन्हें दूसरे हमले के बारे में कुछ घंटे बाद पता चला और उन्होंने किसी भी जिंदा को नहीं देखा. हेगसेथ ने कहा, 'कुछ घंटों बाद मुझे पता चला. मैंने खुद किसी को जिंदा नहीं देखा क्योंकि उस चीज में आग लगी हुई थी. इसे युद्ध का कोहरा कहते हैं. व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड के कमांडर एडमिरल फ्रैंक एम 'मिच' ब्रैडली ने दूसरे हमले का आदेश दिया था.

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Thu, 04 Dec 2025 14:20:27 +0530 news desk MPcg
पुतिन का कड़ा संदेश: ‘यूरोप युद्ध चाहता है तो रूस तैयार, लेकिन हमारा संघर्ष का कोई इरादा नहीं’ https://citytoday.co.in/4515 https://citytoday.co.in/4515 मॉस्को 

'यदि आप युद्ध चाहते हो तो रूस तुम्हें शिकस्त देगा. यूरोपीय शक्तियों की हार इतनी पक्की और मुकम्मल होगी कि शांति समझौता करने के लिए भी कोई नहीं बचेगा.' ये चेतावनी रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने यूरोप के नेताओं को दी है. भारत दौरे से पहले रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने यूरोप को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वे युद्ध चाहते हैं तो रूस इसके लिए तैयार है और उन्हें पराजित किया जाएगा. 

राष्ट्रपति पुतिन 4 दिसंबर को भारत दौरे पर आने वाले हैं. इससे पहले मॉस्को में यूक्रेन वार पर कूटनीति की तेज कोशिशें चल रही है. पुतिन ने यह बात तब कही जब अमेरिकी राष्ट्रपति के स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कोरी कुशनर यूक्रेन युद्ध पर बात करने के लिए मॉस्को में हैं. 

पुतिन ने मॉस्को के इन्वेस्टमेंट फोरम में जब ये बात कही तो विटकॉफ और कुशनर रूस-यूक्रेन पीस प्लान की डिटेल्स पर बात करने के लिए मॉस्को के दूसरे हिस्से में उनका इंतजार कर रहे थे.

मॉस्को में इन्वेस्टमेंट फोरम को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि उन्हें लड़ाई की कोई इच्छा नहीं है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि “अगर यूरोप अचानक हमारे साथ युद्ध करना चाहता है और शुरू करता है, तो हम तुरंत तैयार हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि 'युद्ध की ओर यूरोप का कोई भी कदम 'ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है जिसमें बातचीत करने वाला कोई नहीं होगा.'

पुतिन ने पत्रकारों से कहा कि उनके पास शांति का कोई एजेंडा नहीं है, वे युद्ध के पक्ष में हैं. 

राष्ट्रपति पुतिन ने यूरोप पर शांति प्रस्तावों में बदलाव करने का आरोप लगाया. पुतिन ने कहा कि इसमें ऐसी मांगें शामिल हैं जो रूस को बिल्कुल मंज़ूर नहीं हैं, इस तरह पूरी शांति प्रक्रिया को रोक दिया गया, और इसके लिए सिर्फ़ रूस को दोषी ठहराया गया. 

पुतिन ने कहा, "यही उनका लक्ष्य है."

राष्ट्रपति ने अपनी पुरानी बात दोहराई कि रूस का यूरोप पर हमला करने का कोई प्लान नहीं है . यह चिंता कुछ यूरोपीय देश अक्सर जाहिर करते रहते हैं. 

पुतिन ने कहा, "लेकिन अगर यूरोप अचानक हमारे साथ युद्ध छेड़ना चाहता है और शुरू करता है, तो हम तुरंत तैयार हैं. इसमें कोई शक नहीं हो सकता."

मंगलवार को पुतिन ने जो कहा है वो उनके पुराने बयानों जैसा ही है. पिछले हफ्ते किर्गिस्तान के दौरे पर पुतिन ने कहा था कि जब तक ज़ेलेंस्की सत्ता में हैं, किसी भी तरह का शांति समझौता करना 'बेकार' है. लड़ाई के मैदान में रूस की हालिया बढ़त का जश्न मनाते हुए पुतिन ने कहा कि अगर यूक्रेनी सेना अपने कब्जे वाले इलाके छोड़ देती है तो हम लड़ाई का ऑपरेशन रोक देंगे. लेकिन अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम इसे हम सैन्य तरीकों से हासिल करेंगे.

विटकॉफ और कुशनर से मुलाकात

मॉस्को में इन्वेस्टमेंट फोरम को संबोधित करने के बाद राजधानी के दूसरे हिस्से में पुतिन अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिले. यहां शुरुआती अभिवादन और तस्वीरों के बाद मीडिया को बाहर कर दिया गया. ये मुलाकात 5 घंटे तक चली. 

रूसी राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रीव ने X पर एक पोस्ट में बातचीत को 'प्रोडक्टिव' बताया और क्रेमलिन के सहयोगी यूरी उषाकोव ने रिपोर्टरों को बताया कि "चर्चा बहुत उपयोगी, कंस्ट्रक्टिव और बहुत ठोस थी." लेकिन उषाकोव ने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन और मॉस्को दोनों को अभी भी बहुत काम करना है और अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि बातचीत आगे जारी रहेंगे.

 

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Wed, 03 Dec 2025 17:59:10 +0530 news desk MPcg
पाकिस्तान से भेजे गए एक्सपायर माल की चोरी पकड़ी गई, श्रीलंका के बाढ़ पीड़ितों में वितरण हो रहा था https://citytoday.co.in/4501 https://citytoday.co.in/4501  नई दिल्ली

बाढ़ और तूफानग्रस्त श्रीलंका को राहत सामग्री भेज रहे पाकिस्तान ने फिर से नीच हरकत कर दी है. पाकिस्तान श्रीलंका को वैसी राहत सामग्री भेज रहा है जो एक्सपायर हो चुका है. पाकिस्तान इन राहत सामग्री की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्टकर वाह-वाही बटोरने की कोशिश कर रहा है. लेकिन उसकी खोट नियत का इन तस्वीरों से ही पता चल रहा है.

श्रीलंका में पाकिस्तान के दूतावास ने श्रीलंका को सप्लाई की गई राहत सामग्री की तस्वीरें पोस्ट करते हुए एक्स पर लिखा, "पाकिस्तान श्रीलंका के साथ हमेशा से खड़ा रहा है. श्रीलंका में हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित हमारे भाइयों और बहनों की मदद के लिए पाकिस्तान से राहत पैकेज सफलतापूर्वक पहुंचा दिए गए हैं, जो हमारी पक्की एकता को दिखाता है. पाकिस्तान आज और हमेशा श्रीलंका के साथ खड़ा है. 

इसके बाद पाकिस्तानी दूतावास ने राहत सामग्रियों की तस्वीरें पोस्ट की हैं. लेकिन इस तस्वीरों को ध्यान से देखने पर पाकिस्तान का घपला समझ में आता है. पीले पैकेट में पैक ये राहत सामग्री अगस्त 2022 में बने हैं. इन्हें इस्तेमाल करने की मियाद 2 वर्षों तक है. इस तरह से अगस्त 2022 में बने इन प्रोडक्ट का इस्तेमाल अगस्त 2024 तक ही किया जा सकता था. 

लेकिन अभी अगस्त 2024 को गुजरे एक साल से भी ज्यादा समय गुजर चुके हैं. दरअसल बाढ़ पीड़ितों को मदद के नाम पर पाकिस्तान खराब हो चुके माल को श्रीलंका में भेज रहा है. 

श्रीलंका में विनाशकारी बाढ़ और तूफान का कहर

28 नवंबर 2025 को श्रीलंका में चक्रवात दित्वाह ने यहां के जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. ये इस दशक का सबसे भयानक बाढ़ और भूस्खलन है. तेज हवाओं और भारी वर्षा से पूरे देश में जलप्रलय आ गया, जिससे 25 जिलों में 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए. इस आपदा में अबतक 355 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 366 लोग लापता हैं. 

कोलंबो के बाहरी इलाकों, गंपाहा, बडुल्ला और माह ओया जैसे क्षेत्र सबसे ज्यादा तबाह हुए, जहां घर, सड़कें और फसलें पानी में डूब गईं हैं 

राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने इसे देश के इतिहास का 'सबसे बड़ा और चुनौतीपूर्ण प्राकृतिक आपदा' बताते हुए राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है. 1.48 लाख लोगों को अस्थायी आश्रयों में स्थानांतरित किया गया, जबकि आधे मिलियन से ज्यादा बेघर हो चुके हैं. सेना हेलिकॉप्टर से मदद पहुंचा रही है. 

भारत से एयरस्पेस मांगने में भी पाकिस्तान ने किया ड्रामा

श्रीलंका को राहत सामग्री भेजने के लिए जब पाकिस्तान ने भारत के एयरस्पेस को इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी तो यहां भी पाकिस्तान ने प्रोपगैंडा किया. पाकिस्तान ने 1 दिसंबर को दोपहर एक बजे भारत के सामने एयरस्पेस इस्तेमाल करने का निवेदन दिया. इसके बाद तुरंत पाकिस्तान की मीडिया ने रिपोर्ट चला दी कि भारत ने मानवीय सहायता भेजने के लिए भी एयरस्पेस नहीं दिया. बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान एक दूसरे का एयरस्पेस प्रयोग नहीं कर रहे हैं. 

लेकिन पाकिस्तान का प्रोपगैंडा झूठा था. भारतीय अधिकारियों ने लगभग 4 घंटे बाद ही पाकिस्तानी अधिकारियों को एयरस्पेस इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी थी. और पाकिस्तान का प्रचार मिथ्या था.   

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Tue, 02 Dec 2025 18:26:45 +0530 news desk MPcg
CDF नियुक्ति और सेना प्रमुख पद पर बदलाव के बाद आसिम मुनीर की भूमिका पर सवाल—क्या शहबाज़ सरकार का रुख बदला? https://citytoday.co.in/4491 https://citytoday.co.in/4491 CDF नियुक्ति और सेना प्रमुख पद पर बदलाव के बाद आसिम मुनीर की भूमिका पर सवाल—क्या शहबाज़ सरकार का रुख बदला?

आसिम मुनीर की स्थिति पर उठे सवाल: CDF पद नहीं मिला, सेना प्रमुख का कार्यकाल भी पूरा—क्या बदला राजनीतिक समीकरण?

पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व में बदलाव से बढ़ी चर्चाएँ, आसिम मुनीर को लेकर शहबाज़ सरकार की रणनीति पर सवाल

लाहौर 

 हम सभी जानते हैं कि पाकिस्तान में सत्ता की लड़ाई बिल्कुल अलग होती है. यहां पर सिर्फ नेता प्रधानमंत्री बनने के लिए आमने-सामने नहीं होते, इसका एक और पहिया होता है- सेना. कोई कितने भी बहुमत से यहां सरकार बना ले, उसे हमेशा डर तख्तापलट का लगा रहता है. इसका सीधा उदाहरण इस वक्त पाकिस्तान की अदियाला जेल में बंद इमरान खान हैं. यही वजह है कि शहबाज शरीफ ने सेना से कोई पंगा लेने के बजाय आसिम मुनीर से बनाकर चलते रहे.

भारत-पाकिस्तान के बीच जब मई में जंग जैसे हालात बन गए, तो युद्धविराम के बाद खुद ही आसिम मुनीर ने जीत घोषित कर दी और इसका सेहरा भी अपने सिर बांध लिया. शहबाज शरीफ इस पूरे मामले में सिर्फ उनके लिए तालियां ही बजाते रहे. उन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि दे दी गई और विदेश दौरे पर भी आसिम मुनीर अकेले ही जाने लगे. कुल मिलाकर मान लिया गया था कि उन्हें सिर्फ एक ऑफिशियल टाइटल की जरूरत है बाकी सत्ता उनकी मुट्ठी में है.

क्या बदल गया है शहबाज शरीफ का मूड?

पाकिस्तान में विवादित 27वें संविधान संशोधन के जरिये आसिम मुनीर की ताकत को बढ़ाया गया. उनके लिए सीडीएफ नाम का नया पद गढ़ा गया, जिस पर बैठने के बाद वे ताउम्र पाकिस्तान के अघोषित तानाशाह बने रहेंगे. इस बात का नोटिफिकेशन जारी होकर ये काम जल्द से जल्द होना था, लेकिन इसी बीच अटकलें ये लगाई जा रही हैं कि शहबाज शरीफ का मूड बदल गया है. दरअसल पाकिस्तान के उपचुनाव का रिजल्ट हाल ही आया और उनकी पार्टी PMLN की ताकत बढ़ने के बाद वे इस काम में देरी कर रहे हैं. कहा ये भी जा रहा है कि उनके भाई नवाज शरीफ भी इसमें सलाह-मशविरा दे रहे हैं कि अगर आसिम मुनीर को अल्टीमेट पावर मिली, तो उनकी औकात कुछ नहीं रह जाएगी.

आसिम मुनीर -शहबाज शरीफ.

आसिम मुनीर कब बनेंगे CDF ?

आसिम मुनीर को 29 नवंबर, 2022 को सेना प्रमुख बनाया गया था. इस हिसाब से 29 नवंबर को उनका तीन साल का कार्यकाल खत्म हो चुका है. अब तक नए सेना प्रमुख के तौर पर उनके नाम का नोटिफिकेशन भी नहीं आया है. वैसे तो पाकिस्तानी संसद ने सेना प्रमुख के कार्यकाल को 5 साल कर दिया था, ऐसे में वे पद पर तो बने रहेंगे लेकिन इसका नोटिस अब तक नहीं आया है. वहीं पिछले महीने हुए संविधान संशोधन में पाकिस्तान में CJCSC की जगह CDF पद बनाया गया जो तीनों सेनाओं के बीच तालमेल रखेगी. इस पर आसिम मुनीर को बैठना है. CJCSC शाहिद शमशाद मिर्जा का भी रिटायरमेंट 27 नवंबर को हो गया, पर मुनीर का नया पद अस्तित्व में नहीं आ पाया है.

जब होना ही है, तो देरी क्यों?

हालांकि इस मामले में तस्वीर साफ करने के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ आए और उन्होंने सोशल मीडिया पर एक्स अकाउंट से लिखा – ‘CDF की नोटिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जल्द ही नोटिफिकेशन जारी होगी.’ इस मामले में हो रही देरी को लेकर उन्होंने कुछ नहीं कहा. इसी बीच यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने भी 27वें संविधान संशोधन में देरी को लेकर टिप्पणी की थी, जिस पर पाकिस्तान बौखला गया था.

 

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Tue, 02 Dec 2025 12:26:02 +0530 news desk MPcg
भ्रष्टाचार केस की आंच के बीच नेतन्याहू ने राष्ट्रपति से मांगी माफी—क्या मिलेगी राहत? https://citytoday.co.in/4476 https://citytoday.co.in/4476 इजरायल 
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देश के राष्ट्रपति से औपचारिक रूप से क्षमादान की मांग की है ताकि उनके खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के लंबे मुकदमे को समाप्त किया जा सके। प्रधानमंत्री कार्यालय ने रविवार को जारी बयान में कहा कि नेतन्याहू ने राष्ट्रपति भवन के कानूनी विभाग को क्षमादान का औपचारिक आवेदन सौंप दिया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने इसे 'असाधारण अनुरोध' करार देते हुए स्वीकार किया कि इसके 'गंभीर और दूरगामी निहितार्थ' हैं।
 
बता दें कि यह आवेदन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप के उस सार्वजनिक आग्रह के कुछ सप्ताह बाद आया है, जिसमें उन्होंने इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से नेतन्याहू को क्षमा करने की अपील की थी।

राष्ट्रपति कार्यालय ने अनुरोध मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि इस पर पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता से विचार किया जाएगा। क्षमादान की प्रक्रिया में न्याय मंत्रालय की राय लेना और जनहित का मूल्यांकन करना अनिवार्य होता है। कार्यालय ने कहा कि हमें पता है कि यह एक असामान्य अनुरोध है जिसके व्यापक प्रभाव हैं। सभी संबंधित पक्षों की राय लेने के बाद राष्ट्रपति पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ फैसला लेंगे।

गौरतल है कि नेतन्याहू इजरायली इतिहास के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो पद पर रहते हुए आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहे हैं। उन पर तीन अलग-अलग मामलों में धोखाधड़ी, विश्वासघात और रिश्वतखोरी के आरोप हैं। इनमें धनी राजनीतिक समर्थकों से अनुचित लाभ लेने और मीडिया मालिकों को फायदा पहुंचाने के बदले सकारात्मक कवरेज हासिल करने के आरोप शामिल हैं। अभी तक उन्हें किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है।

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Mon, 01 Dec 2025 17:15:07 +0530 news desk MPcg
ड्रोन हमले में 3 चीनी इंजीनियर मारे गए, अफगान सीमा के पास सोने की खदान में काम कर रहे थे https://citytoday.co.in/4461 https://citytoday.co.in/4461 खटलोन 
अफगानिस्तान की सीमा से सटे ताजिकिस्तान में चाइनीज इंजीनियरों पर ड्रोन से घातक हमला हुआ है. इस हमले में 3 चाइनीज मारे गए हैं. ताजिकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ये हमला UAV से किया गया. इस UAV में ग्रेनेड और विस्फोटक लोड थे. इससे एक माइनिंग साइट पर हमला किया गया.

ताजिकिस्तान का दावा है कि ये हमले सीमा पार से किए गए थे. विदेश मंत्रालय के मुताबिक र रात को ताजिकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी खटलोन इलाके में एक कैंप हाउसिंग कंपनी के कर्मचारियों को निशाना बनाकर हमला किया गया. 

यह हमला योल बॉर्डर डिटैचमेंट में फर्स्ट बॉर्डर गार्ड पोस्ट "इस्तिकलोल" के पास एलएलसी शोहिन एसएम वर्कर्स कैंप को निशाना बनाकर किया गया था. माइनिंग कंपनी एलएलसी शोहिन ताजिकिस्तान में गोल्ड माइनिंग का काम करती है.

ताजिकिस्तान ने कहा, "ताजिकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच बॉर्डर वाले इलाकों में सुरक्षा बनाए रखने और शांति और स्थिरता का माहौल बनाने की ताजिकिस्तान की लगातार कोशिशों के बावजूद अफ़गानिस्तान के इलाके में मौजूद क्रिमिनल ग्रुप्स की खतरनाक हरकतें अभी भी जारी हैं."

मंत्रालय ने "आतंकवादी ग्रुप्स की इन हरकतों" की निंदा की और अफ़गान अधिकारियों से बॉर्डर के अपने हिस्से को स्थिर और सुरक्षित करने की अपील की.ताजिकिस्तान के अनुसार, "यह हमला हथियारों और ग्रेनेड से भरे ड्रोन से किया गया, जिसमें चीनी नागरिक तीन स्टाफ की मौत हो गई."

ताजिकिस्तान में क्या कर रहे थे चाइनीज इंजीनियर

कई चीनी कंपनियां ताजिकिस्तान में काम करती हैं. ये कंपनियां खासकर माइनिंग और नेचुरल रिसोर्स के क्षेत्र में काम कर रही हैं. जो अक्सर पहाड़ी बॉर्डर इलाकों में होती हैं. ये पहाड़ी और बॉर्डर इलाका दोनों देशों के बीच लगभग 1,350 किलोमीटर तक फैला हुआ है.

ये चाइनीज वर्कर ताजिकिस्तान में माइनिंग और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में शामिल थे. ताजिकिस्तान और अफगानिस्तान के इस बॉर्डर पर समय समय पर दिक्कतें होती रहती है. 

ताजिकिस्तान ने कहा कि उसने एक हफ़्ते पहले इस इलाके में अफ़गानिस्तान के दो संदिग्ध ड्रग स्मगलरों को मारने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया था. अगस्त में ताजिक गार्ड्स और अफ़गानिस्तान के रूलिंग तालिबान मूवमेंट के लड़ाकों के बीच फायरिंग भी हुई थी. 

चीनी वर्करों को मारने वाला ड्रोन हमला गुरुवार को कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइज़ेशन जो एक रीजनल ब्लॉक है की मीटिंग से पहले हुआ.  

 LLC Shohin SM क्या काम करती है

LLC Shohin SM में धातु की माइनिंग होती है. विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में और यहां आमतौर पर तांबा, सोना और अन्य बहुमूल्य धातुओं की खुदाई की जाती है. LLC Shohin SM ताजिकिस्तान के खातलॉन प्रांत के शोहिन जिले में सोने की खदान चलाती है. यह एक चीनी-ताजिक जॉइंट वेंचर है, जिसमें मुख्य निवेश और तकनीक चीन की कंपनी Tibet Huayu Mining Co. Ltd से आता है. यह खदान जिलाउ और आसपास के क्षेत्रों में सोने की खोज और उत्पादन करती है, जो ताजिकिस्तान के सबसे बड़े सोने के भंडारों में से एक है.

अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान में नया तनाव

यह हमला मध्य एशिया में नए तनाव को जन्म दे रहा है. जहां चीन का करोड़ों डॉलर का निवेश है. इस घटना ने ताजिकिस्तान को चीन और रूस के बीच एक संवेदनशील भूमिका में खींच लिया है, जहां चीन अपने निवेश और सुरक्षा हितों को बढ़ाने के लिए ताजिकिस्तान की सरकार पर दबाव डाल रहा है, जबकि ताजिकिस्तान की सरकार आंतरिक अस्थिरता और चीन की बढ़ती उपस्थिति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. ​

हमले ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजनाओं की सुरक्षा को भी चुनौती दी है, जिससे चीन के निवेश और आर्थिक रणनीति पर खतरा उत्पन्न हुआ है. इसके अलावा, चीन अफगानिस्तान के तालिबान सरकार के साथ भी आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जिससे तालिबान के साथ चीन के रिश्तों में भी नए आयाम उभर रहे हैं. 

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Fri, 28 Nov 2025 17:02:20 +0530 news desk MPcg
फ्रांस के आसमान में गरुड़ का दबदबा: भारतीय वायुसेना ने दिखाया दमखम https://citytoday.co.in/4452 https://citytoday.co.in/4452 फ्रांस 
फ्रांस के Mont-de-Marsan एयरबेस पर चल रहा Exercise Garuda 2025 तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है। भारतीय वायुसेना (IAF) और फ्रेंच एयर एंड स्पेस फोर्स (FASF) लगातार संयुक्त मिशन उड़ानें भर रही हैं। दोनों एयरफोर्सेज़ अपनी सटीकता, तालमेल और संयुक्त ऑपरेशन क्षमता का शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।IAF ने X पर पोस्ट करते हुए बताया कि “दोनों टीमें उच्च operational tempo बनाए रखते हुए जटिल मिशन प्रोफाइल्स को पूरा कर रही हैं।” पोस्ट के साथ शेयर की गई हवाई तस्वीरों में उड़ते फाइटर जेट्स, refuelling और formation flying की अद्भुत झलक दिखाई दी।
    Su-30MKI फाइटर जेट्स (IAF)
    French Multirole Fighter Jets
    C-17 Globemaster III – एयरलिफ्ट और लॉजिस्टिक सपोर्ट
    IL-78 Tankers- mid-air refuelling के लिए

इन विमानों ने मिलकर air-to-air combat, air defence, और coordinated strike missions जैसे वास्तविक युद्ध जैसी सिचुएशन में उड़ानें भरीं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह अभ्यास पायलटों को वास्तविक ऑपरेशनल माहौल में रणनीति, सामरिक प्रशिक्षण और teamwork को निखारने का मौका देता है। यह अभ्यास भारत–फ्रांस की 1998 में शुरू हुई Strategic Partnership को और मजबूत बनाता है। रक्षा, सुरक्षा, स्पेस और Indo-Pacific क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। Exercise Garuda 2025 पेशेवर अनुभव साझा करने और बेहतरीन tactical practices को सीखने का एक बड़ा मंच बन गया है।

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Thu, 27 Nov 2025 19:07:21 +0530 news desk MPcg
पाकिस्तान का हमला जारी, अफगानों पर भारी गोलाबारी में 9 बच्चों की मौत https://citytoday.co.in/4442 https://citytoday.co.in/4442

काबुल 

पाकिस्तान के पेशावर में आतंकी हमला हुआ, पाकिस्तान खुद के बुने जाल में फंस रहा है. हालांकि इस देश की जड़ों में जो आतंक बसा है वो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. अब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया है. अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के एक रिहायशी इलाके में पाकिस्तानी सेना के हमले में नौ बच्चों समेत दस लोग मारे गए. अफगान सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी है.

घरों को बनाया गया निशाना
अधिकारियों के अनुसार, यह हमला आधी रात के कुछ समय बाद हुआ और इसमें एक स्थानीय निवासी के घर को निशाना बनाया गया, जिससे सीमा पर दुश्मनी बढ़ने की चिंता फिर बढ़ गई है. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया कि यह हमला मंगलवार को सुबह करीब 12:00 बजे खोस्त के गुरबुज जिले के मुगलगई इलाके में हुआ. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी हमलावर सेनाओं ने एक लोकल नागरिक, वालियत खान, काजी मीर के बेटे के घर पर बमबारी की, इस हमले में 9 बच्चे (पांच लड़के और चार लड़कियां) और एक महिला की मौत हो गई और उनका घर तबाह हो गया.

पहले भी पाकिस्तान ने किया था अटैक
मुजाहिद ने यह भी बताया कि उसी रात कुनार और पक्तिका प्रांतों में अलग-अलग हवाई हमले हुए, जिनमें चार आम नागरिक घायल हो गए. खोस्त में हुआ ताजा हमला लोगों में डर पैदा कर रहा है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच सीमा पर फिर से हिंसा का नया दौर शुरू हो सकता है. अक्टूबर में दोनों देशों के बीच भारी झड़पों के बाद कुछ समय के लिए लड़ाई रुकी हुई थी, लेकिन अब फिर तनाव बढ़ गया है. इससे पहले, 9 अक्टूबर को पाकिस्तान ने काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में एयरस्ट्राइक की थी. इसके बाद अफगान तालिबान ने भी जवाबी कार्रवाई की.

दोनों देशों में हुई थी गोलीबारी
तालिबान सेनाओं ने 11 और 12 अक्टूबर की रात के बीच अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर कई पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर हमला किया, जिससे भारी गोलीबारी हुई. हमलों के बाद, तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उनका ऑपरेशन खत्म हो गया है, हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने किसी भी सीजफायर की घोषणा को खारिज कर दिया और अपनी मिलिट्री कार्रवाई जारी रखी. उस समय तालिबान के एक प्रवक्ता ने कन्फर्म किया था कि लड़ाई 12 अक्टूबर की सुबह तक जारी रही. दोनों देशों ने कहा कि उन्होंने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाया है और कई बॉर्डर पोस्ट को तबाह कर दिया है या उन पर कब्जा कर लिया है.

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Tue, 25 Nov 2025 14:30:47 +0530 news desk MPcg
मलेशिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन की तैयारी https://citytoday.co.in/4441 https://citytoday.co.in/4441 क्वालालंपुर

ऑस्ट्रेलिया के बाद मलेशिया भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की तैयारी कर रहा है। मलेशिया अगले साल से 16 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगा सकता है। मलेशिया के अलावा और भी कई देश ऐसे हैं, जहां बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर बैन लगा रखा है। इन देशों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच को सीमित करने का फैसला लिया है। मलेशिया के संचार मंत्री फहमी फदजिल ने रविवार को कहा कि सरकार ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर उम्र की पाबंदी लगाने के तरीकों पर विचार कर रही है। उन्होंने युवाओं को साइबरबुलिंग, फाइनेंशियल स्कैम और बच्चों के यौन शोषण जैसे ऑनलाइन अपराधों से बचाने के लिए इस फैसले की जरूरत बताई। मलेशिया की लोकल मीडिया द स्टार की रिपोर्ट में कहा गया, “हमें उम्मीद है कि अगले साल तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स सरकार के उस फैसले को मान लेंगे, जिसमें 16 साल से कम उम्र के लोगों के यूजर अकाउंट खोलने पर रोक लगाई गई है।”

बच्चों के मेंटल हेल्थ और सुरक्षा पर सोशल मीडिया का असर दुनिया भर में एक बढ़ती हुई चिंता बन गया है। चाहे टिकटॉक हो या स्नैपचैट, गूगल या फिर मेटा के सभी प्लेटफॉर्म (फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम), यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए संकट का कारण बनता जा रहा है। इन प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के मेंटल हेल्थ संकट को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका के लिए अमेरिका में केस भी चल रहे हैं।

दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया में, अगले महीने से 16 साल से कम उम्र के सभी सोशल मीडिया यूजर्स के रजिस्टर्ड अकाउंट को डीएक्टिवेट किया जाएगा। इसपर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।
मलेशिया हाल ही में सोशल मीडिया कंपनियों पर कड़ी नजर रख रहा है। उनका कहना है कि ऑनलाइन जुए और नस्ल, धर्म और हानिकारक पोस्ट जैसे कंटेंट तेजी से बढ़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मलेशिया में 8 मिलियन से अधिक यूजर्स वाले प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स को जनवरी में लागू हुए नए नियम के तहत लाइसेंस लेना अनिवार्य है।

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Tue, 25 Nov 2025 14:27:38 +0530 news desk MPcg
पीएम मोदी से मुलाकात से पहले कनाडा ने किया बड़ा कदम, हजारों भारतीयों में खुशी की लहर https://citytoday.co.in/4425 https://citytoday.co.in/4425 नई दिल्ली

भारत और कनाडा के रिश्ते फिर से नई दिशा में बढ़ रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में G20 लीडर्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के पीएम मार्क कार्नी की मुलाकात ने दोनों देशों के बीच जम चुके रिश्तों को लगभग खत्म कर दिया. इसी बैठक के बाद दोनों देशों ने पुराने और रुके हुए व्यापार समझौते CEPA पर दोबारा बातचीत शुरू करने का ऐलान किया, जिसे रिश्तो में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. लेकिन इस मुलाकात से पहले कनाडा ने भारतीय मूल के परिवारों को बड़ा तोहफा दिया है. कनाडा की सरकार ने नागरिकता नियमों में बड़े बदलाव का रास्ता साफ कर दिया है. ‘लॉस्ट कनेडियन्स’ कानून को अब रॉयल असेंट मिल गया है. यह बिल C-3 दरअसल कनाडा की सिटिजनशिप एक्ट 2025 में अहम बदलाव करता है और उन हजारो परिवारों को राहत देगा जो कई सालो से अपने बच्चों के लिए नागरिकता को लेकर परेशान थे.

यह बिल इसी हफ्ते सीनेट से पास हुआ और रॉयल असेंट मिलने के बाद अब इसे लागू करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. कनाडा की इमिग्रेशन मिनिस्टर लीना डियाब ने कहा क यह कानून पुराने नियमो के कारण बाहर रह गए लोगों को न्याय देगा. उन्होंने बताया क नया कानून उन परिवारों की मुश्किलें खत्म करेगा जिनके बच्चे या जिन्हें खुद विदेश में पैदा होने की वजह से नागरिकता नहीं मिल सकी थी.

क्या है यह बिल?

इस बिल का मकसद उस पुराने नियम को खत्म करना है जिसे ‘सेकंड जेनरेशन कट-ऑफ’ कहा जाता था. 2009 में कनाडा ने कानून बदलकर यह तय कर दिया था कि जो कनाडाई नागरिक खुद विदेश में पैदा हुआ है, वह अपने बच्चे को नागरिकता सिर्फ तभी दे सकता है जब बच्चा कनाडा में पैदा हो. इससे बड़ी संख्या में ऐसे लोग बन गए जिन्हें ‘लॉस्ट कनेडियन्स’ कहा जाने लगा. यानी ऐसे लोग जो खुद को कनाडा का नागरिक मानते थे लेकिन कानून उनकी राह में अटक जाता था.

भारतीयों के लिए क्या है राहत?

कई भारतीय मूल परिवार ऐसे थे जिनके बच्चे विदेश में पैदा होने या गोद लिए जाने के कारण सिटिजनशिप नहीं पा सके. नया कानून लागू होते ही ऐसे लोग सीधे तौर पर नागरिकता पा सकेंगे, बशर्ते उनका केस पुराने कानून से प्रभावित हुआ हो. साथ ही नया नियम कहता है क कोई भी कनाडाई नागरिक, जो खुद विदेश में पैदा या गोद लिया गया हो, वह अपने बच्चे को नागरिकता दे सकेगा.
भारत-कनाडा में होगी बातचीत

भारत और कनाडा ने 2010 में CEPA यानी कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट की बातचीत शुरू की थी. 2022 में इस पर काफी तेजी भी आई थी. खासकर दवाइयो, क्रिटिकल मिनरल्स, टूरिज्म, ग्रीन एनर्जी और माइनिंग जैसे क्षेत्रो में दोनों देशों ने मिलकर काम बढ़ाया था. लेकिन 2023 में कनाडा ने बातचीत रोक दी थी, जिससे रिश्तो में कड़वाहट और तनाव साफ दिखने लगा.

भारत के विदेश मंत्रायल ने रविवार रात जारी बयान में साफ कहा है कि दोनों देश अब एक हाई-अम्बिशन व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं. लक्ष्य है कि 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाया जाए. इससे न सिर्फ कारोबार बढ़ेगा बल्कि नौकरी, निवेश और तकनीक साझा करने जैसे कई नए दरवाजे खुल सकते हैं. इसके साथ ही दोनों देशों ने सिविल न्यूक्लियर सहियोग को और मजबूत करने पर भी बात की है. खासकर लम्बे समय के लिए यूरेनियम सप्लाई एग्रीमेंट पर फिर से चर्चा शुरू करने का इरादा दिखा है. यह क्षेत्र दोनों देशों के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जाता है.

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Mon, 24 Nov 2025 14:07:38 +0530 news desk MPcg
पेशावर में बड़ा आतंकी हमला: FC मुख्यालय पर दो सुसाइड ब्लास्ट, हमलावरों ने की फायरिंग https://citytoday.co.in/4424 https://citytoday.co.in/4424 पेशावर

पाकिस्तान के पेशावर में पैरामिलिट्री फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) मुख्यालय, पैरा मिलिट्री फोर्सेज का मुख्यालय है. पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों के इस मुख्यालय पर सोमवार की सुबह हमला हो गया. फ्रंटियर कोर के मुख्यालय से दो धमाकों की आवाज सुनी गई. पाकिस्तान के सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर ऑपरेशन शुरू कर दिया है.

पाकिस्तान के पेशावर में सोमवार को FC के मुख्यालय पर आत्मघाती हमले में हमलावर समेत तीन लोग मारे गए हैं. मरने वालों में आत्मघाती हमलावर के साथ ही एक अन्य आतंकी भी शामिल बताया जा रहा है.इस हमले में तीन सुरक्षाकर्मियों की भी जान गई है. एक धमाका मेन गेट, और दूसरा एफसी मुख्यालय परिसर के साइकिल स्टैंड के पास  हुआ.

अधिकारियों ने इसकी पुष्टि कर दी है. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा पुलिस के महानिरीक्षक (आईजी) जुल्फिकार हमीद ने पाकिस्तानी मीडिया से बात करते हुए कहा है कि दो आत्मघाती विस्फोट हुए. एक विस्फोट मेन गेट पर हुआ. दूसरा धमाका मुख्यालय परिसर में मोटरसाइकिल स्टैंड के पास हुआ. मोटरसाइकिल स्टैंड अर्धसैनिक बलों के मुख्यालय के परिसर में स्थित है.

पेशावर हमले की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है. सामने आए सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट दिख रहा है कि मेन गेट के बार एक धमाका होता है और आग की लपटें दिख रही हैं.एक शख्स इसके बाद मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश करता भी नजर आ रहा है. इलाके में अब भी गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई दे रही है. सुरक्षाबलों और हमलावरों के बीच गोलीबारी जारी है.

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Mon, 24 Nov 2025 14:06:04 +0530 news desk MPcg
Miss Universe 2025: मेक्सिको की फातिमा को ताज, भारत की मनिका का ये रहा स्थान https://citytoday.co.in/4405 https://citytoday.co.in/4405 बैंकॉक

21 नवंबर को थाईलैंड के बैंकॉक में साल 2025 की मिस यूनिवर्स का फिनाले हुआ जो भारतीय समयानुसार सुबह 6:30 बजे शुरू हुआ था. जानकारी के मुताबिक, मिस मेक्सिको को मिस यूनिवर्स का खिताब मिला है. कोटे डी आइवर फर्स्ट रनरअप थाईलैंड, सेकेंड रनरअप वेनेजुएला और थर्ड रनरअप फिलीपींस रहा. इस कॉम्पिटिशन में भारत की 22 साल मनिका विश्वकर्मा विभिन्न देशों की 100 से ज्यादा ब्यूटी क्वींस के साथ कॉम्पिटिशन कर रही थीं लेकिन खबर सामने आई है कि वह टॉप 12 में शामिल नहीं हो पाई हैं. मिस यूनिवर्स 2025 के फाइनलिस्ट में चिली, कोलंबिया, क्यूबा, ​​ग्वाडेलोप, मेक्सिको, प्यूर्टो रिको, वेनेजुएला, चीन, फिलीपींस, थाईलैंड, माल्टा और कोट डी आइवर की सुंदरियां शामिल हुई थीं.

इमोशन और जबरदस्त एनर्जी से भरे फिनाले में मेक्सिको की फातिमा बॉश ऑफिशियली मिस यूनिवर्स 2025 बनीं. जैसे ही उनका नाम पुकारा गया पूरा एरिना गूंज उठा क्योंकि मेक्सिको एक ऐसे ताज का जश्न मना रहा था जो ऐतिहासिक और मेहनत से कमाया हुआ दोनों लग रहा था.

फातिमा अपनी आखिरी गाउन में आगे बढ़ीं और जब ताज उनके सिर पर रखा गया तो वह कांपती हुई दिखीं. यह एक ऐसा पल था जो सालों की लगन, महीनों की तैयारी और एक आखिरी जवाब से बना था जो बहुत गहराई तक गया, यह दुनिया भर की महिलाओं के लिए एक आवाज थी कि वो बोलें, बदलाव लाएं और मिलकर इतिहास फिर से लिखें.

मिस यूनिवर्स 2024 ने पहनाया ताज

मिस यूनिवर्स 2024 डेनमार्क की विक्टोरिया केजर थेलविग को पिछले साल 16 नवंबर 2024 को मिस यूनिवर्स का ताज पहनाया गया था और वह यह खिताब जीतने वाली देश की पहली महिला थीं. उन्होंने मिस यूनिवर्स 2025 की विनर फातिमा को ताज पहनाया.

1952 में स्थापित मिस यूनिवर्स ऑर्गनाइजेशन दुनिया भर की महिलाओं के लिए एक मंच है जो कॉम्पिटिटर्स के बीच लीडरशिप, एजूकेशन, सोशल इंपेक्ट, डाइवर्सिटी और पर्सनल डेवलपमेंट को बढ़ावा देता है.

हालांकि, इस साल का ये कॉम्पिटिशन धांधली और विवादों के आरोपों के कारण चर्चा में रहा. जज और म्यूजिशियन उमर हार्फूच द्वारा फाइनल से ठीक 3 दिन पहले अपने इस्तीफे की घोषणा के बाद, मिस यूनिवर्स के दूसरे जज, फ्रांसीसी फुटबॉल मैनेजर क्लाउड मैकेले ने भी इस्तीफा दे दिया था.

2 हफ्ते पहले आई थीं विवादों में

फातिमा बॉश ने इस महीने की शुरुआत में मिस यूनिवर्स का खिताब जीतने के लिए एक बड़े विवाद का सामना किया था. जानकारी के मुताबिक, 2 हफ्ते पहले मिस यूनिवर्स की मेजबान नवात इत्सराग्रिसिल द्वारा एक मीटिंग के दौरान पब्लिकली रूप से आलोचना किए जाने के बाद फातिमा बॉश ने ड्रेमेटिक तरीके से वॉकआउट कर दिया था. लाइव स्ट्रीम सेशन के दौरान नवात ने उनके लिए 'Dumbhead' शब्द का उपयोग किया था.

मिस मेक्सिको ने दिया ये जवाब और जीता ताज

प्रतियोगिता के दौरान मिस मेक्सिको से पूछा गया कि आपके हिसाब से साल 2025 में एक महिला होने के क्या चैलेंज हैं और आप मिस यूनिवर्स के टाइटल का इस्तेमाल दुनिया भर की महिलाओं के लिए एक सेफ जगह बनाने के लिए कैसे करेंगी.

इस पर उन्होंने कहा कि एक महिला और मिस यूनिवर्स के तौर पर मैं अपनी आवाज और ताकत दूसरों की सेवा में लगाऊंगी क्योंकि आजकल हम यहां बोलने, बदलाव लाने और सब कुछ देखने के लिए हैं क्योंकि हम महिलाएं हैं और जो बहादुर लोग खड़े होंगे वही इतिहास बनाएंगे.

वहीं, भारत की मनिका विश्वकर्मा टॉप 12 से बाहर हो गईं थीं. इस प्रतियोगिता में अलग-अलग देशों के 100 से ज्यादा सुंदरियां मुकाबला कर रही थीं और सभी की नजर इस खास ताज पर थी. 2021 में हरनाज कौर संधू के जीते हुए ताज के बाद अब भारत की तलाश एक बार फिर शुरू हो गई है.

फाइनलिस्ट में चिली, कोलंबिया, क्यूबा, ​​ग्वाडेलोप, मेक्सिको, प्यूर्टो रिको, वेनेजुएला, चीन, फिलीपींस, थाईलैंड, माल्टा और कोटे डी आइवर शामिल थे. इस साल भारत की बैडमिंटन लीजेंड साइना नेहवाल इस पेजेंट के जजों के पैनल में हैं.

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Fri, 21 Nov 2025 18:56:21 +0530 news desk MPcg
वियतनाम में बाढ़ का कहर: 67,700 से अधिक घर डूबे, अनाज और पशुओं पर भी संकट https://citytoday.co.in/4404 https://citytoday.co.in/4404 हनोई 
 वियतनाम में बाढ़ से हाहाकार मच गया है। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने वियतनाम डिज़ास्टर एंड डाइक मैनेजमेंट अथॉरिटी के हवाले से बताया कि वियतनाम के सेंट्रल इलाके में भारी बारिश और बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 43 हो गई है। इसके अलावा नौ लोग लापता हैं। अधिकारियों की तरफ से शुक्रवार को यह जानकारी दी गई। अथॉरिटी के मुताबिक, बाढ़ से 67,700 से ज्यादा घर डूब गए हैं और 168 दूसरी संरचनाओं को नुकसान हुआ है। 13,000 हेक्टेयर से ज्यादा चावल और दूसरी फसलें, साथ ही 88 हेक्टेयर मछली पालन फार्म डूब गए, जबकि 30,700 से ज्यादा जानवर और मुर्गियां मारे गए या बह गए। सिन्हुआ ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस भयावह बाढ़ की वजह से लगभग 3 ट्रिलियन वियतनामी डोंग के आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया गया है। इसका मतलब है कि लगभग 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा के आर्थिक नुकसान का अनुमान है।

इससे पहले सिन्हुआ ने सरकारी मीडिया के हवाले से बताया था कि ट्रांसपोर्ट सर्विस बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। वियतनाम रेलवे कॉर्पोरेशन ने हाल के दिनों में 14 पैसेंजर ट्रेनों को रोक दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली जाने से कई राज्यों में 1 मिलियन से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।

खान होआ प्रांत के 14 इलाकों और वार्डों में करीब 9,000 घर पानी में डूब गए। इसके अलावा पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर लैंडस्लाइड हुई, जिसके बाद ट्रैफिक में भी रुकावट आई है। इसकी वजह से लोगों की सुरक्षा को खतरा है। हालांकि, बुधवार सुबह तक बाढ़ वाले इलाकों से 6,500 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू करके सुरक्षित जगहों पर भेजा जा चुका था।

खान होआ प्रांत में बारिश की वजह से हुए लैंडस्लाइड में सात लोगों की मौत हो गई। उसी प्रांत में दो और लोगों का पता नहीं चल पाया है। डा नांग शहर में एक और लैंडस्लाइड के बाद तीन लोग लापता हैं।

क्वांग ट्राई प्रांत और ह्यू शहर में बाढ़ के पानी में बह जाने के बाद एक-एक व्यक्ति के लापता होने की खबर है। इस बाढ़ में क्वांग ट्राई प्रांत और ह्यू शहर के 13,759 घर डूब गए। यहां पर 7,000 हेक्टेयर चावल के खेत बर्बाद हो गए। इसके अलावा बाढ़ में 357 जानवर और 4,900 मुर्गियां मर गई या बह गईं। क्वांग ट्राई प्रांत, ह्यू शहर, क्वांग न्गाई प्रांत और लाम डोंग प्रांत में ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बुरी तरह बाधित रहे।

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Fri, 21 Nov 2025 18:53:14 +0530 news desk MPcg
हमास की कैद से रिहा यहूदियों से मिले ट्रंप, सम्मान स्वरूप दी खास निशानी https://citytoday.co.in/4403 https://citytoday.co.in/4403 वॉशिंगटन 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास की कैद से छूटे इजरायलियों से मुलाकात की है। वाइट हाउस में ही इन लोगों को बुलाया गया था और डोनाल्ड ट्रंप ने इनसे सीधी बात करते हुए कहा कि अब आप लोग बंधक नहीं हैं बल्कि आजाद हैं। आप लोग हमारे हीरो हैं। ट्रंप से मिलने आए पूर्व बंधकों में कुल 26 लोग शामिल थे, जिनमें से 17 तो वे हैं, जिन्हें अक्तूबर में ही हमास ने अपनी कैद से एक डील के तहत रिहा किया था। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने हमास की कैद में रहे मैटन अंगरेस्ट की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि अंगरेस्ट ने हमास की कैद में रहते हुए भी बड़ी बहादुरी दिखाई और हिम्मत से काम लिया। उन्होंने कहा कि मैटन को कई बार पीटा गया।
 
इतनी पिटाई हुई कि वे बेहोश तक हो जाते थे। वह सबसे अलग कैद में रख गए थे और ऐसा वक्त उनके लिए बेहद खराब गुजरा था, फिर भी वह मजबूती से डटे रहे। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इजरायली डिफेंस फोर्सेज का मैटन हिस्सा रहे थे और हमास के आतंकियों ने उन्हें इसी बात की सजा दी थी। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'तमाम अत्याचारों के बाद भी मैटन टूटे नहीं। आज वह हमारे बीच हैं और हमास के अत्याचारों को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैटन इस बात के प्रतीक हैं कि यहूदी कितने बहादुर और मजबूत दिल के होते हैं। आप हम सभी एक लिए एक प्रेरणा की तरह हैं।'

डोनाल्ड ट्रंप ने हमास की कैद से छूटे लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह हमारे लिए सम्मान की बात है कि आपसे बात हो रही है। मैं आपमें से कुछ लोगों को पहले से ही जानता हूं। कुछ लोगों से अब परिचय हो रहा है। मैं आप लोगों से बात कर रहा हूं। आप लोग शानदार हैं और देश से प्यार करने वाले हैं। इस दौरान ट्रंप ने हर बंधक से बात की और उन्हें एक विशेष सिक्के से भी नवाजा गया।

ये लोग राष्ट्रपति ट्रंप के लिए सम्मान के तौर पर कुछ गिफ्ट भी लेकर आए थे। इस दौरान दो जुड़वा भाई गली और जिव बर्मन भी मौजूद थे। ये लोग हमास की ओर से 7 अक्तूबर 2023 को लगाई गई आग से बच निकले थे। लंबे समय तक अस्पताल में रहने के बाद ये लोग अस्पताल से 13 अक्तूबर को ही डिस्चार्ज हुए थे। इससे पहले भी डोनाल्ड ट्रंप दो बार हमास की कैद से छूटे लोगों से मुलाकातें कर चुके हैं। बता दें कि हमास की कैद से लोगों को छुड़वाने का श्रेय भी डोनाल्ड ट्रंप लेते रहे हैं।

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Fri, 21 Nov 2025 18:51:54 +0530 news desk MPcg
रूस में भारतीयों से मिले जयशंकर, हाथ जोड़कर किया अभिवादन—तस्वीरें वायरल https://citytoday.co.in/4385 https://citytoday.co.in/4385 मॉस्को
 रूस में इन दिनों चारों तरफ भारत को विदेश मंत्री एस जयशंकर छाए हुए हैं. वो मॉस्को में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं. इस दौरान जयशंकर ने कतर और मंगोलिया के प्रधानमंत्री से लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की. अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने आतंकवाद पर तगड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया कि इसे जुड़े होने की बात तो छोड़ो छुपाने का काम करने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा. जयशंकर रूस में भारतीय लोगों से भी मिले और विदेश में अपने लोगों के देखकर वो गदगद हो गए.

मॉस्को से जयशंकर की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वो भारतीय मूल को लोगों से मुलाकात करते दिखाई दे रहे हैं. जयशंकर रूस में ‘अपने लोगों’ को देखकर गदगद हो गए हैं. तस्वीरों में जयशंकर कभी हाथ जोड़े खड़े दिख रहे हैं और कभी हंसते-मुस्कुराते बात करते नजर आ रहे हैं. उनसे कई भारतीय मूल के लोगों ने ऑटोग्राफ भी लिया है. तस्वीरों में उनके आस-पास जमा हुई भीड़ से जाहिर है कि जयशंकर विदेशों में भी छाए रहते हैं.

भारतीयों को देख गदगद हुए EAM

बता दें कि रूस में जयशंकर ने बार-बार ‘अपने लोगों की रक्षा’ की बात करते हुए आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख दिखाया है. उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के सामने आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कह दिया था कि ‘आतंकवाद के मामले में किसी भी तरह का झूठ, व्हाइटवॉशिंग या टालमटोल की हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी’. उन्होंने कहा था कि ‘भारत अपने लोगों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा’. EAM जयशंकर ने राष्ट्रपति पुतिन के सामने भी आतंकवाद की समस्या रखी है.

 

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Thu, 20 Nov 2025 16:39:33 +0530 news desk MPcg
बांग्लादेश की मीडिया को हसीना के बयान प्रसारित न करने का निर्देश, पत्रकारों ने सुनवाई पर उठाए गंभीर सवाल https://citytoday.co.in/4371 https://citytoday.co.in/4371 ढाका, 18 नवंबर : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद देश की नेशनल साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ने मीडिया संगठनों से उनके बयान प्रसारित न करने की अपील की है. स्थानीय मीडिया के अनुसार, एजेंसी ने मंगलवार को यह निर्देश जारी किया. यह कदम अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस द्वारा अवामी लीग और उसकी नेता शेख हसीना की गतिविधियों को असंवैधानिक रूप से दबाने की एक और कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

नेशनल साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ने कहा कि वह इस बात को लेकर "गंभीर रूप से चिंतित" है कि कुछ मीडिया संस्थान "दोषी करार दिए गए भगोड़े" यानी हसीना के बयान प्रसारित कर रहे हैं. एजेंसी के मुताबिक, ये बयान ऐसे निर्देश देते हैं जो "हिंसा, अव्यवस्था और आपराधिक गतिविधियों को भड़का सकते हैं." एजेंसी ने भले ही प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी का सम्मान करने की बात कही, लेकिन मीडिया से आग्रह किया कि वे "दोषसिद्ध व्यक्तियों" के बयान प्रकाशित न करें और अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का ध्यान रखें.

इस बीच, सैकड़ों पत्रकारों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ आए फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. पत्रकारों ने चेतावनी दी कि बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण की "पक्षपातपूर्ण और अपारदर्शी" प्रक्रिया, दक्षिण एशियाई देश में कानून के शासन के लिए बड़ा खतरा है. यह बयान उस समय आया जब आईसीटी ने सोमवार को जुलाई 2024 के प्रदर्शनों से जुड़े "मानवता के खिलाफ अपराधों" के आरोपों में हसीना को मौत की सजा सुनाई. पत्रकारों ने इस फैसले को तुरंत रद्द करने और पूरी पारदर्शिता व निष्पक्षता के साथ न्यायिक प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग की. उन्होंने कहा, "चाहे आरोपी राजनीतिक नेता हो या आम नागरिक, न्याय पारदर्शी, निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के होना चाहिए. इस मामले में उचित प्रक्रिया और निष्पक्षता का गंभीर अभाव रहा."

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Wed, 19 Nov 2025 14:56:45 +0530 news desk MPcg
ब्रिटेन की नई इमिग्रेशन पॉलिसी: अब 20 साल बाद ही मिलेगा स्थायी निवास https://citytoday.co.in/4362 https://citytoday.co.in/4362  ब्रिटेन सरकार ने देश में शरणार्थियों के लिए सबसे बड़े स्तर पर नीति बदलाव की घोषणा की है। इसके तहत अब शरणार्थियों की स्थिति स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी होगी और स्थायी बसावट  के लिए इंतजार का समय पांच साल से बढ़ाकर 20 साल कर दिया जाएगा। यह कदम आधुनिक समय में देश की शरणार्थी नीतियों में सबसे व्यापक सुधार माना जा रहा है।

सरकार का मकसद और प्रेरणा
लेबर पार्टी की सरकार ने यह कदम अवैध छोटे नावों से फ्रांस से आने वाले प्रवासियों पर कड़े नियंत्रण के लिए उठाया है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से लोकप्रियता बढ़ाने वाले Reform UK पार्टी के प्रभाव को सीमित करना है, जिसने पिछले समय में प्रवास नीति को राष्ट्रीय एजेंडे का केंद्र बना दिया था। सरकार ने कहा कि इस नीति में डेनमार्क मॉडल से प्रेरणा ली गई है, जो यूरोप में सबसे सख्त प्रवास नीतियों वाला देश माना जाता है। वहां बढ़ती एंटी-इमिग्रेंट भावना के चलते कई देशों ने अपने नियमों को और कड़ा कर दिया है, हालांकि इस कदम की मानवाधिकार समूहों द्वारा आलोचना भी की गई है।

    अब शरणार्थियों को मिलने वाला कर-आधारित समर्थन जैसे आवास और साप्ताहिक भत्ते केवल उन्हीं को मिलेगा जो काम कर रहे हैं या स्थानीय समुदायों और अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।

    जिन शरणार्थियों के पास काम करने की क्षमता है लेकिन वे काम नहीं करना चाहते, या जो कानून तोड़ते हैं, उन्हें अब ये समर्थन नहीं मिलेगा। शरणार्थी की सुरक्षा की स्थिति नियमित समीक्षा के तहत अस्थायी होगी और यदि मूल देश को सुरक्षित माना गया, तो यह रद्द भी की जा सकती है।

    वर्तमान में यूरोप के अन्य देशों की तुलना में ब्रिटेन की प्रणाली काफी उदार मानी जाती है, जहां पांच साल बाद शरणार्थी स्वतः स्थायी निवास प्राप्त कर लेते हैं। अब इसे बदल दिया जाएगा।

समीक्षा और स्थायी बसावट का नया समय
होम सेक्रेटरी शबाना महमूद ने कहा कि अब शरणार्थियों की स्थिति हर दो साल छह महीने में समीक्षा की जाएगी। स्थायी बसावट की प्रक्रिया को लंबा कर 20 साल कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सोमवार को इस नीति के और विवरण साझा किए जाएंगे, जिसमें यूरोपीय मानवाधिकार संधि के अनुच्छेद 5 से संबंधित अपडेट भी शामिल होंगे।

सरकार का संदेश
शबाना महमूद ने कहा, “हमारा उद्देश्य उन लोगों को प्राथमिकता देना है जो हमारे समाज और अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। अब शरणार्थियों के लिए हमारा दृष्टिकोण समान अवसर, लेकिन जिम्मेदारी के साथ होगा।”

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Tue, 18 Nov 2025 18:53:41 +0530 news desk MPcg
बांग्लादेश में उपद्रव फिर भड़का, शेख हसीना को सजा&ए&मौत पर हिंसा, दो की मौत https://citytoday.co.in/4361 https://citytoday.co.in/4361 ढाका 

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को पिछले साल हुई हिंसा मामले में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद पड़ोसी देश एक बार फिर उबल पड़ा है। न्यायाधिकरण ने पूर्व गृहमंत्री और शेख हसीना को सामूहिक हत्या का दोषी करार दिया था। वहीं अब आवामी लीग के समर्थक सड़कों पर उतर पड़े हैं। ढाका की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कई जगहों पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। स्थानीय मीडिया की बात करें तो हिंसा में अब तक दो लोगों के मारे जाने की खबर है।

मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार को फैसले के बारे में सारी जानकारी थी। इसीलिए ढाका में पहले ही पुलिस और सैन्य बल की तैनाती कर दी गई थी। मोहम्मद यूनुस के आवास की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसके बावजूद सोमवार को फैसला आने केबाद से ही ढाका की तनाव बढ़ गया है। आवामी लीग का कहना है कि न्यायाधिकरण ने यह फैसला अंतरिम सरकार और सेना के इशारे पर केवल राजनीतिक बदले की भावना से सुनाया है। ऐसे में आवामी लीग ने दो दिन के राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया है।

शेख हसीना को देश की विशेष अदालत 'अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने पिछले वर्ष जुलाई में हुए व्यापक विद्रोह के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। न्यायाधिकरण ने पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मृत्युदंड तथा पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून को पांच साल की सजा दी है। मामून ने अपराध स्वीकार कर सरकारी गवाह बनने का निर्णय लिया था। न्यायाधिकरण ने हसीना और असदुज्जमां की संपत्तियाँ जब्त करने का आदेश भी दिया है। फैसला उनकी अनुपस्थिति में सुनाया गया क्योंकि शेख हसीना इन दिनों भारत में रह रही हैं। मामून हिरासत में हैं।

फैसला आने के तुरंत बाद शेख हसीना ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह फैसला राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है। मैंने कोई आदेश नहीं दिया, न किसी को उकसाया। यदि किसी निष्पक्ष अदालत में साक्ष्यों की ईमानदारी से जांच हो, तो मुझे अपने खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप का सामना करने में कोई डर नहीं है। मुझे न्यायपालिका पर विश्वास है, लेकिन जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह न्याय का उल्लंघन है।"

अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने कहा कि यह फैसला सिद्ध करता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और यह कदम लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि देश को अब कानून, जवाबदेही और भरोसे की नई संरचना तैयार करनी है।

फैसला आने के तुरंत बाद शेख हसीना ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह फैसला राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है। मैंने कोई आदेश नहीं दिया, न किसी को उकसाया। यदि किसी निष्पक्ष अदालत में साक्ष्यों की ईमानदारी से जांच हो, तो मुझे अपने खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप का सामना करने में कोई डर नहीं है। मुझे न्यायपालिका पर विश्वास है, लेकिन जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह न्याय का उल्लंघन है।"

अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने कहा कि यह फैसला सिद्ध करता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और यह कदम लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि देश को अब कानून, जवाबदेही और भरोसे की नई संरचना तैयार करनी है।

बंगलादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार से शेख हसीना और असदुज्जमां को प्रत्यर्पित करने का औपचारिक अनुरोध भेजने की घोषणा की है। मंत्रालय ने कहा कि मानवता के विरुद्ध दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को शरण देना किसी भी देश का गैरदोस्ताना कदम कदम होगा। दोनों देशों के बीच 2016 की प्रत्यर्पण संधि का हवाला दिया गया है। विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने बताया कि प्रत्यर्पण का अनुरोध पत्र ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग या नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के माध्यम से भेजा जाएगा। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में शेख हसीना के खिलाफ तीन और मामले लंबित हैं, जिन पर निर्णय अभी बाकी है।

जुलाई 2024 में आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी से उपजे छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के कारण हसीना सरकार गिर गयी थी। पाँच अगस्त को वह भारत आ गयीं और प्रोफ़ेसर यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, विद्रोह के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए। हसीना ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए कई साक्षात्कारों में इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि गोलीबारी "बंगलादेश पुलिस के सामान्य हथियारों जैसी नहीं थी"।

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Tue, 18 Nov 2025 18:50:19 +0530 news desk MPcg
ढाका में आज बड़ा फैसला, शेख हसीना को लेकर कथित सजा मांग पर तनाव; कई जगहों पर हिंसा और आगजनी https://citytoday.co.in/4349 https://citytoday.co.in/4349 ढाका 
बांग्लादेश भयानक हिंसा के मुहाने पर खड़ा है. आज पूर्व पीएम शेख हसीना को उनके कथित अपराधों के लिए इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल सजा सुनाएगी. इस फैसले को ढाका में बड़े स्क्रीन पर लाइव दिखाया जाएगा. इसके अलावा इसे फेसबुक पर भी देखा जा सकेगा. इससे पहले बांग्लादेश में जबर्दस्त टेंशन है. मोहम्मद यूनुस की सरकार ने इस दौरान हिंसा, आगजनी करने वालों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया है.

बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी को प्रतिबंधित कर दिया गया है और उनकी पार्टी चुनाव नहीं लड़ सकती है. इस बीच फैसले से पहले शेख हसीना ने एक भावुक ऑडियो मैसेज दिया है. शेख हसीना ने कहा कि, "अन्याय करने वालों को एक दिन बंगाल की धरती पर जनता सजा देगी. इसलिए मैं सबको बता दूं कि डरने की कोई बात नहीं है. मैं जिंदा हूं. मैं ज़िंदा रहूंगी. मैं देश की जनता का साथ दूंगी. और अगर इंशाअल्लाह इन अपराधियों को बंगाल की धरती पर सजा दूंगी."

वहीं 78 वर्षीय शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कहा कि अगर उनकी पार्टी पर प्रतिबंध नहीं हटाया गया, तो उनकी पार्टी अवामी लीग के समर्थक फरवरी में होने वाले राष्ट्रीय चुनाव में बाधा डालेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि विरोध प्रदर्शन हिंसा में बदल सकता है. 

सजीब वाजेद ने कहा, "हमें ठीक-ठीक पता है कि फ़ैसला क्या आने वाला है. वे इसे टीवी पर दिखा रहे हैं. वे उसे दोषी ठहराएंगे, और शायद उसे मौत की सजा भी सुनाएंगे." बता दें कि बांग्लादेश के सरकारी वकील ने 78 वर्षीय हसीना के लिए मृत्युदंड की मांग की है.

वाशिंगटन डी.सी. में रहने वाले वाजेद ने कहा, "वे मेरी मां का क्या कर सकते हैं? मेरी मां भारत में सुरक्षित हैं. भारत उन्हें पूरी सुरक्षा दे रहा है."

यूनुस के सलाहकार के घर हमला

इस बीच बांग्लादेश में कई जगहों से हिंसा और प्रदर्शन की खबरें मिल रही हैं. ढाका में मोहम्मद यूनुस के सलाहकार सैयद रिजवाना हसन के घर के बाहर क्रूड बमों से हमला किया गया है. यहां आगजनी भी हुई है. 

वहीं कॉक्सबाजार में भी हिंसा की खबरें हैं. यहां शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया है. कई शहरों में हंगामा और हिंसा की खबरें हैं. 

बांग्लादेश में शूट एट साइट का ऑर्डर 

इधर शेख हसीना के खिलाफ फैसला आने से पहले छिटपुट आगजनी और देसी बम से हमलों के बीच ढाका और अन्य क्षेत्रों में रात भर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-बांग्लादेश के फैसले से पहले हसीना की अब भंग हो चुकी अवामी लीग द्वारा दो दिवसीय बंद की घोषणा की खबरों के बाद अधिकारियों ने कड़ी सैन्य, अर्धसैनिक और पुलिस चौकसी का आदेश दिया है. 

रविवार रात अज्ञात लोगों ने एक पुलिस स्टेशन परिसर के वाहन डंपिंग कॉर्नर में आग लगा दी और अंतरिम सरकार प्रमुख प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस के सलाहकार परिषद के एक सदस्य के आवास के बाहर दो देसी बम विस्फोट किए. इसके अलावा राजधानी में कई चौराहों पर विस्फोट भी किए गए.

ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मारने के लिए कहा है. 

ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस आयुक्त एसएम सजात अली ने रविवार देर रात कहा, "मैंने वायरलेस पर कहा है कि जो कोई भी बस में आग लगाता है या जान से मारने के इरादे से देसी बम फेंकता है, उसे गोली मार दी जानी चाहिए. यह अधिकार हमारे कानून में स्पष्ट रूप से दिया गया है."

ढाका में 10 नवंबर के बाद से कई गुप्त हमले हुए हैं, जिनमें मीरपुर में यूनुस द्वारा स्थापित ग्रामीण बैंक मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर देसी बम विस्फोट भी शामिल है.

अधिकारियों ने बताया कि बैंक की कई शाखाओं को भी पेट्रोल बम और आगजनी का निशाना बनाया गया.

अज्ञात हमलावरों ने पिछले सप्ताह कई खड़ी बसों में भी आग लगा दी, जिससे एक वाहन के अंदर सो रहे चालक की मौत हो गई.

शेख हसीना के अलावा कौन-कौन हैं आरोपी

बांग्लादेश के इस चर्चित में मामले में तीन आरोपी है. शेख हसीना इस समय भारत में निर्वासित जीवन गुजार रही हैं. दूसरे आरोपी पूर्व गृह मंत्री 
असदुज्जमां खान कमाल है और तीसरे आरोपी पूर्व पुलिस प्रमुख अब्दुल्ला अल मामून है. अब्दुल्ला अल मामून ने व्यक्तिगत रूप से मुकदमे का सामना किया और "सरकारी गवाह" बनकर ज़ाहिर तौर पर रियायत की मांग की. 

बांग्लादेश के सरकारी गाजी एमएच तमीम ने रविवार को कहा, "हमने हसीना के लिए अधिकतम संभव सजा की मांग की है. हमने पिछले साल के हिंसक सड़क विरोध प्रदर्शनों के शहीदों और घायलों के परिवारों में वितरित करने के लिए दोषियों की संपत्ति जब्त करने का भी अनुरोध किया है."

सरकारी वकीलों ने कहा है कि फैसले का सरकारी बीटीवी पर सीधा प्रसारण किया जाएगा और ढाका में कई स्थानों पर बड़े स्क्रीन पर इसे प्रदर्शित करने की व्यवस्था की गई है.  अदालत के इस फैसले को लाइव भी दिखाया जाएगा.

शेख हसीना पर क्या क्या आरोप हैं

पूर्वी पीएम शेख हसीना 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले जुलाई विद्रोह के दौरान सत्ता से हटीं थीं. उन पर बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने मानवता के खिलाफ अपराधों के पांच प्रमुख आरोप लगाए हैं. ये आरोप मुख्य रूप से 2024 के जुलाई-अगस्त महीनों में प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित दमन से जुड़े हैं, जिसमें अनुमानित 1,400 से अधिक मौतें हुईं.  ट्रिब्यूनल ने 10 जुलाई 2025 को इन आरोपों को औपचारिक रूप से फ्रेम किया था, शेख हसीना पर ये मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में चला था. 

शेख हसीना पर हत्या, हत्या का प्रयास, यातना और अन्य अमानवीय कृत्यों का आरोप है. शेख हसीना के 14 जुलाई 2024 के प्रेस ब्रीफिंग के बाद, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिदेशक चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामून ने कथित रूप से असुरक्षित छात्र प्रदर्शनकारियों पर हमलों को भड़काया. इसमें आंदोलनकारी अबू सायेद की नजदीक से गोली मारकर हत्या शामिल है. 

इस दौरान तत्कालीन सरकार ने घातक हथियारों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोनों के उपयोग का आदेश देकर छात्र प्रदर्शनकारियों को दबाया. इसमें सुपीरियर कमांड जिम्मेदारी, साजिश, सहायता और सुविधा शामिल है. 

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Mon, 17 Nov 2025 16:09:20 +0530 news desk MPcg
मक्का से मदीना जा रही बस टैंकर से टकराई, 42 भारतीय जिंदा जले, सऊदी अरब में बड़ा हादसा https://citytoday.co.in/4348 https://citytoday.co.in/4348  रियाद

सऊदी अरब में सोमवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें कम से कम 42 भारतीय उमरा यात्रियों के मारे जाने की आशंका है. इनमें से कई यात्रियों के तेलंगाना के हैदराबाद से होने की जानकारी सामने आई है. हादसा उस समय हुआ जब मक्का से मदीना जा रही एक बस मुफ्रिहात इलाके के पास एक डीजल टैंकर से टकरा गई.

शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, टक्कर इतनी भीषण थी कि कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं. स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत व बचाव कार्य शुरू किया.

वहीं इस घटना को लेकर तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से स्थिति की पुष्टि करने और तत्काल सहायता के लिए विदेश मंत्रालय और सऊदी दूतावास के साथ समन्वय करने को कहा है। तेलंगाना सचिवालय में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। इस दौरान एक हेल्पलाइन: 79979 59754, 99129 19545 भी जारी किया गया है। वहीं हैदराबाद के व्यक्ति ने बताया मक्का जाने के लिए यात्री उमरा करने गए थे। इस दौरान मदीने से 25 किलोमीटर पहले बस में आग लग गई।

इस घटना में शोएब नामक व्यक्ति ने कूद कर जान बचाई। हादसे में वह घायल हो गया और उसे उपचार के लिए भर्ती करवाया गया। उन्होंने कहा कि 42 हाजी बस में सवार थे। घटना के बारे में लगातार संपर्क किया जा रहा है। 42 यात्रियों में 16 बच्चे शामिल थे और 24 से 25 बड़े यात्री सवार थे। वहीं अन्य वय्क्ति ने कहा कि उमरा के लिए 45 यात्री हैदराबाद से बस में सवार हुए थे। इस यात्रियों में से उसके परिवार के 6 लोग शामिल थे। इस घटना में बस जलकर पूरी तरह से राख हो गई है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस घटना पर तत्काल संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव के. रामकृष्णा राव और डीजीपी बी. शिवाधर रेड्डी को तुरंत पूरी जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं. राज्य सरकार विदेश मंत्रालय (MEA) और सऊदी दूतावास के साथ मिलकर प्रभावित परिवारों की मदद के प्रयास कर रही है.

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Mon, 17 Nov 2025 14:39:14 +0530 news desk MPcg
डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका: अमेरिकी अदालत में फिर फंसा मामला https://citytoday.co.in/4318 https://citytoday.co.in/4318 वॉशिंगटन

 अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है। फेडरल कोर्ट ने उस निर्णय पर रोक लगा दी है, जिसके तहत ट्रंप प्रशासन कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के लिए जारी फंड को तुरंत रोकना चाहता था। यह फैसला उस समय आया है जब ट्रंप सरकार कई विश्वविद्यालयों पर यह आरोप लगाकर कार्रवाई कर रही है कि वे नस्लीय भेदभाव और यहूदी-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं।

सैन फ्रांसिस्को की जिला अदालत की जज रीटा लिन ने साफ कहा कि प्रशासन विश्वविद्यालय को न तो फंड में कटौती कर सकता है और न ही उस पर कोई त्वरित जुर्माना लागू कर सकता है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने उन यूनियनों और संगठनों की याचिका पर भी सहमति जताई है, जो छात्रों, कर्मचारियों और फैकल्टी के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका दावा है कि ट्रंप प्रशासन विरोधी आवाज़ों को दबाने के इरादे से कार्रवाई कर रहा है, जो अमेरिकी संविधान का उल्लंघन है।

क्या था ट्रंप प्रशासन का दावा?
ट्रंप ने कई प्रतिष्ठित कॉलेजों को “उदारवादी और यहूदी-विरोधी विचारधारा से प्रभावित” बताते हुए दर्जनों विश्वविद्यालयों की जांच शुरू करवाई थी। उनका कहना है कि विविधता और समावेशन के नाम पर श्वेत और एशियाई छात्रों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जो नागरिक अधिकार कानून के खिलाफ है।

1.2 अरब डॉलर का जुर्माना और फंड पर रोक
ट्रंप प्रशासन ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय पर 1.2 अरब डॉलर का भारी भरकम जुर्माना भी लगाया था और रिसर्च फंड पर रोक लगा दी थी। यही नहीं, कोलंबिया सहित कुछ निजी विश्वविद्यालयों के फेडरल फंड भी इसी तरह की कार्रवाई के तहत रोक दिए गए।

यूसी अध्यक्ष जेम्स बी. मिलिकेन ने इस जुर्माने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि इतना बड़ा दंड संस्था की बुनियाद को हिला देगा और उसके संचालन को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। कोर्ट का यह फैसला फिलहाल विश्वविद्यालयों को बड़ी राहत देता है और ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है, जिसके तहत वह विश्वविद्यालयों पर राजनीतिक और वैचारिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।

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Sat, 15 Nov 2025 18:47:37 +0530 news desk MPcg
अमेरिका में ऐतिहासिक गतिरोध खत्म: सीनेट की मंजूरी के बाद ट्रंप ने किया शटडाउन समझौते पर साइन https://citytoday.co.in/4294 https://citytoday.co.in/4294 वाशिंगटन     

डोनाल्ड ट्रंप झुक गए हैं और इसके साथ ही अमेरिकी इतिहास का सबसे लंबा सरकारी शटडाउन (US Shutdown) करीब 43 दिन बाद खत्म हो रहा है. बुधवार रात को सीनेट में शटडाउन खत्म करने से जुड़ा बिल पास हुआ. इसे 222-209 मतों से पारित किया गया. व्हाइट हाउस की ओर से भी पुष्टि कर दी गई है कि Donald Trump इस विधेयक पर साइन कर दिया है. अब सरकारी कामकाज औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा. ये न सिर्फ America GDP के लिए गुड न्यूज है, बल्कि अमेरिका के करीब 4 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है. आइए जानते हैं कैसे? 

शटडाउन क्यों लगाया गया था? 
सबसे पहले बताते हैं कि आखिर अमेरिका में इस लंबे शटडाउन की स्थिति बनी कैसे? तो, जान लीजिए अमेरिकी सीनेट में सरकारी खर्चों से जुड़े बिल पर सहमति न बन पाना इसका कारण रहा. सीनेट मेंबर्स ने इसे 14 बार खारिज किया था और US Shutdown की नौबत आ गई. रिपोर्ट के मुताबिक, अब शटडाउन स्वास्थ्य सेवा सब्सिडी (Health Service Subsidy) पर बिना किसी समाधान के साथ खत्म हो रहा है, जो डेमोक्रेट्स की सबसे बड़ी मांग थी. राष्ट्रपति ट्रंप को इसे लेकर समझौता करना पड़ा. 

उड़ानें बाधित, आर्थिक डेटा ठप्प
अमेरिका में शटडाउन को लेकर बीते 6 सप्ताह से गतिरोध चल रहा था, जिस पर अब ब्रेक लगा है, लेकिन इसकी वजह से जो परेशानियां पैदा हुईं उनसे निजात पाने में अभी भी समय लगेगा. बता दें कि US Shutdown से एयरलाइंस बाधित हुई थीं, तो खाद्य सहायता में देरी का सामना करना पड़ा. इसके साथ ही अमेरिका के आर्थिक आंकड़े भी ठप्प नजर आए. 

रिपोर्ट्स में परिवहन सचिव सीन डफी के हवाले से कहा गया है कि उड़ानों से प्रतिबंध हटाने और हवाई अड्डे का संचालन पूरी तरह से बहाल करने में करीब एक हफ्ते तक का समय लग सकता है. वहीं Delta Airlines CEO एड बास्टियन ने चेतावनी दी है कि शटडाउन के कारण रद्द होने वाली उड़ानों से एयरलाइन की कमाई पर बेहद खराब असर पड़ा है. हालांकि, उन्होंने थैंक्सगिविंग (US ThanksGiving) तक संचालन सामान्य होने की उम्मीद जताई है.

GDP से करोड़ों अमेरिकियों तक नुकसान
अमेरिका में शटडाउन का आर्थिक नुकसान बहुत ज्यादा देखने को मिला. कांग्रेस के बजट कार्यालय ने भी ये अनुमान जाहिर किया था कि इससे चौथी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर में 1.5% की कमी (US GDP Growth Slowdown)  आएगी, हालांकि अब संघीय कार्यक्रमों के फिर से शुरू होने और बकाया वेतन जारी होने पर इसमें कुछ सुधार देखने को मिल सकता है. 

भले ही अब ट्रंप के झुकने और जिद छोड़ने के बाद सदन में पास हुए Funding Bill पर साइन करने से शटडाउन का The End हो गया है, लेकिन हकीकत में नुकसान तो हो ही चुका है. खासकर 4.2 करोड़ अमेरिकियों का, जो सीधे तौर पर फ़ूड स्टैम्प पर निर्भर हैं. इनमें से ज्यादातर नवंबर के लाभ से वंचित रह गए. तमाम राज्यों का कहना है कि  सहायता राशि को फिर से बढ़ाने में समय लग सकता है और इन लोगों को मदद के लिए एक और हफ्ते का इंतजार करना पड़ सकता है.

'ये मूर्खतापूर्ण और निरर्थक था' 
7 सीनेट डेमोक्रेट और एक इंडिपेंडेंट मेंबर ने रिपब्लिकन के साथ मिलकर दिसंबर के मध्य तक सब्सिडी पर सीनेट में मतदान के बदले में वित्त पोषण विधेयक पारित किया. सदन के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने इसे निचले सदन में लाने की कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है. हालांकि, जॉनसन ने सख्त लहजे में बोला कि, 'जैसा कि हम शुरू से ही कहते आए हैं, यह शटडाउन अंततः पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण और निरर्थक था.'

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Thu, 13 Nov 2025 16:53:48 +0530 news desk MPcg
इस्लामाबाद में सुसाइड बम धमाका, कार विस्फोट से 12 मौतें और 21 घायल https://citytoday.co.in/4262 https://citytoday.co.in/4262 इस्लामाबाद 

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में भयानक धमाका देखने को मिला है। इस घटना में 12 लोगों की मौत हो गई और 21 लोग घायल हैं।। यह धमाका इस्लामाबाद में अदालत के ठीक सामने हुआ। वहीं, धमाके की वजह अभी तक सामने नहीं आई है।

जियो टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, यह एक आत्मघाती हमला था। इस्लामाबाद में कोर्ट के बाहर खड़ी कार में अचानक ब्लास्ट हो गया। इस घटना में 12 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 21 लोग घायल हैं। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती किया गया है।

कोर्ट खाली करवाई गई

घायलों में ज्यादातर वकील और याचिकाकर्ता शामिल हैं। धमाके के बाद पूरी कचेहरी में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने कोर्ट परिसर को फौरन खाली करवाया। कचेहरी में मौजूद लोगों को पीछे के दरवाजे से बाहर निकाला गया। वहीं, अदालत की सारी कार्यवाहियां भी रोक दी गईं।

गैस सिलेंडर या आत्मघाती हमला?

शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि धमाका संभवतः एक कार में लगे गैस सिलेंडर से हुआ. हालांकि, पुलिस ने आत्मघाती हमले की संभावना से भी इंकार नहीं किया है. विस्फोटक वाहन अदालत के मुख्य गेट के पास खड़ा था. घायलों में ज्यादातर वकील और अदालत कर्मचारी बताए जा रहे हैं. पुलिस और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गए हैं. अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि कार में कोई संदिग्ध व्यक्ति तो मौजूद नहीं था.

एक दिन पहले फौजी कॉलेज पर हमला नाकाम

धमाके से ठीक एक दिन पहले, पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने खैबर पख्तूनख्वा के वाना शहर में एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम किया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी तालिबान (TTP) के छह आतंकियों ने एक फौज के अधीन चलने वाले कैडेट कॉलेज पर हमला करने की कोशिश की थी. सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में दो आतंकी मारे गए, जबकि तीन को कॉलेज परिसर में घेर लिया गया.

न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार अदालत में इस समय आमतौर पर सुनवाई में भाग लेने वाले सैकड़ों लोगों की भीड़ रहती है. पुलिस ने कहा कि वे जांच कर रही है. हालांकि उसने उन  स्थानीय मीडिया रिपोर्टों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया जिसमें दावा किया गया है कि कार के अंदर एक गैस सिलेंडर फट गया था.

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार विस्फोट के बाद कचेरी कोर्ट की इमारत को खाली करा लिया गया. इमारत के अंदर मौजूद लोगों को पिछले दरवाजे से बाहर निकाला जा रहा था और अदालती कार्यवाही निलंबित कर दी गई थी. इस्लामाबाद के उप महानिरीक्षक (डीआईजी), मुख्य आयुक्त और फोरेंसिक टीम विस्फोट स्थल पर तुरंत पहुंचे. वहीं बचाव दल और पुलिस ने मृतकों और घायलों को अस्पताल पहुंचाया. इस्लामाबाद के पिम्स अस्पताल में आपातकाल घोषित कर दिया गया है.

कई बड़े अधिकारियों ने किया दौरा

धमाके की सूचना मिलते ही इस्लामाबाद के डीआईजी, चीफ कमिश्नर और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंचे। बचाव टीमों ने घायलों को अस्पताल में भर्ती किया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद इस्लामाबाद के पिम्स अस्पताल में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। पुलिस इस हमले की जांच कर रही है।

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Tue, 11 Nov 2025 17:34:31 +0530 news desk MPcg
S&400 हासिल करने की चाहत में पाकिस्तान का बड़ा घोटाला, रूस में भी हुआ अपमान, ISI एजेंट गिरफ्तार https://citytoday.co.in/4239 https://citytoday.co.in/4239 मॉस्को 

भारत के खिलाफ साजिश रचने में जुटे पाकिस्तान की एक बार फिर इंटरनेशनल बेइज्जती हुई है. रूस ने उसकी खुफिया एजेंसी ISI के जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. यह नेटवर्क रूस से एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम जैसे S-400 और हेलिकॉप्टर टेक्नॉलजी चुराने की कोशिश में था. रूस की यह कार्रवाई भारत की सुरक्षा दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि जिन तकनीकों को निशाना बनाया गया था, वे भारतीय वायुसेना के आधुनिक रक्षा तंत्र का हिस्सा हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की खुफिया एजेंसियों ने सेंट पीटर्सबर्ग में एक रूसी नागरिक को गिरफ्तार किया, जो ISI के लिए काम कर रहा था. सीक्रेट डॉक्यूमेंट की तस्करी होने से पहले ही भंडाफोड़ हो गया.

उसके पास से ऐसे दस्तावेज बरामद हुए हैं जो सैन्य हेलिकॉप्टर और एयर डिफेंस सिस्टम के डेवलपमेंट में इस्तेमाल होते हैं. इनमें Mi-8 AMTShV से जुड़ी संवेदनशील तकनीकी जानकारियां शामिल थीं. यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब भारत ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में बैठे आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका दिया था. पाकिस्तान ने वापस हमला करने की कोशिश की, लेकिन S-400 इसमें गेम चेंजर साबित हुआ. पाकिस्तान के जेट भारत की सीमा में भी नहीं आ सके. माना जा रहा है कि उसी के बाद पाकिस्तान ने रूस में अपनी जासूसी गतिविधियां बढ़ाईं. रिपोर्ट्स के अनुसार, ISI का यह नेटवर्क रूस के एडवांस्ड S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम से जुड़ी जानकारियां हासिल करने की कोशिश कर रहा था. वही सिस्टम जिसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय वायुसेना को निर्णायक बढ़त दिलाई थी.

भारतीय वायुसेना के पास S-400

भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल S-400 मिसाइल सिस्टम की तीन यूनिट हैं, और भारत ने रूस से पांच और सिस्टम खरीदने की योजना बनाई है. ISI की यह कोशिश सीधे तौर पर भारत की सामरिक बढ़त को कमजोर करने के मकसद से की गई थी. रूस की जांच एजेंसियों ने इस पूरे मामले को ‘काउंटर-एस्पियोनेज ऑपरेशन’ यानी गुप्तचर विरोधी अभियान के तहत अंजाम दिया. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति से फिलहाल पूछताछ जारी है और यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस जासूसी रैकेट में पाकिस्तान के दूतावास या अन्य विदेशी एजेंसियों की कोई भूमिका है.

रूस ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है. वहीं इससे पहले पिछले हफ्ते मॉस्को स्थित पाकिस्तानी अखबार फ्रंटियर पोस्ट में छपी ‘एंटी-रशियन’ रिपोर्ट्स पर भी रूसी दूतावास ने आपत्ति जताई थी. रूसी दूतावास ने साफ कहा कि ‘ऐसे लेख से रूस की छवि खराब करने की कोशिश हो रही है.’

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Mon, 10 Nov 2025 15:54:21 +0530 news desk MPcg
US शटडाउन का असर: 3300 उड़ानें रद्द, स्टाफ छुट्टी पर, यात्रियों में हाहाकार https://citytoday.co.in/4238 https://citytoday.co.in/4238

वाशिगटन 
अमेरिका में शटडाउन के बीच अब एयर ट्रैवल का भी संकट खड़ा हो गया है। रविवार को विमानन कंपनियों ने 3300 उड़ानें रद्द कर दीं। वहीं परिवहन मंत्री सीन डफी ने चेतावनी दी कि यदि ट्रंप सरकार का ‘शटडाउन’ (सरकारी कामकाज के लिए वित्तपोषण की कमी) ‘थैंक्सगिविंग’ अवकाश तक जारी रहता है तो पूरे देश में हवाई यातायात ‘‘बहुत धीमा होकर लगभग ठप’’ पड़ सकता है। देश के 40 सबसे व्यस्त हवाई अड्डों पर उड़ानों में व्यवधान तीसरे दिन भी जारी है जिससे स्थिति और बिगड़ने लगी है।

वहीं इतने बड़े पैमाने पर उड़ानें प्रभावित होने के बाद शटडाउन खत्म होने पर भी बात बनती हुई नजर आ रही है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के एक समूह ने स्वास्थ्य देखभाल सब्सिडी के विस्तार की गारंटी के बिना चर्चा करने पर सहमति व्यक्त की जिससे उनके ‘कॉकस’ के कई सदस्य नाराज हो गए। इस ‘कॉकस’ का कहना है कि अमेरिकी लोग चाहते हैं कि सब्सिडी को लेकर लड़ाई जारी रखी जाए।

आवश्यक प्रक्रिया की शृंखला के तहत पहला कदम उठाते हुए सीनेट में मत विभाजन में सरकार के कामकाज को वित्तपोषित करने के मकसद से समझौता विधेयक पारित करने के लिए 60-40 मतों से मतदान हुआ। इसने बाद में ‘अफोर्डेबल केयर एक्ट टैक्स क्रेडिट’ पर मतदान किया गया जो एक जनवरी को समाप्त होने वाला है।

वहीं ‘अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन’ (एफएए) ने संघीय 'शटडाउन' के बीच देशभर में उड़ानों को कम करने का आदेश दिया है। दरअसल कई हवाई यातायात नियंत्रकों ने वेतन न मिलने के कारण काम पर आना बंद कर दिया है जिसके कारण यह आदेश जारी किया गया। हवाई यात्रा में व्यवधानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘फ्लाइटअवेयर’ के अनुसार, अकेले रविवार को लगभग 7,000 उड़ानों में देरी की सूचना मिली और 2,100 से अधिक उड़ानें रद्द की गईं। शुक्रवार को 1,000 से अधिक और शनिवार को 1,500 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गईं।

एफएए की कटौती शुक्रवार को चार प्रतिशत से शुरू हुई थी और 14 नवंबर तक यह 10 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। यह कटौती स्थानीय समयानुसार सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक प्रभावी रहेगी और सभी वाणिज्यिक विमानन कंपनियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

डफी ने रविवार को चेतावनी दी कि अगर ‘शटडाउन’ जारी रहा तो अमेरिकी हवाई यातायात में भारी गिरावट आ सकती है। उन्होंने कहा कि उड़ानों में शायद 20 प्रतिशत तक कटौती की जरूरत पड़ सकती है, खासकर तब जब नियंत्रकों को लगातार दूसरी बार वेतन नहीं मिल रहा है।

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Mon, 10 Nov 2025 15:50:45 +0530 news desk MPcg
भारतीय मूल के स्वर्णजीत सिंह खालसा बने कनेक्टिकट के नॉर्विच शहर के मेयर https://citytoday.co.in/4230 https://citytoday.co.in/4230

 वॉशिंगटन
भारतीय मूल के मुसलमान जोरहान ममदानी के अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क का मेयर चुने जाने की दुनिया भर में चर्चा है। इस बीच भारतीय मूल के ही एक सिख नेता स्वर्णजीत सिंह खालसा ने भी बड़ी सफलता पाई है। वह अमेरिकी प्रांत कनेक्टिकट के शहर नॉर्विच के मेयर चुने गए हैं। वह पहले सिख नेता हैं, जिन्हें अमेरिका के इस प्रांत के किसी शहर में यह जिम्मेदारी मिली है। खालसा ने रिपब्लिक कैंडिडेट पीटर नैस्ट्रॉम को हराकर सफलता हासिल की है। अहम बात यह है कि नॉर्विच में सिर्फ 10 परिवार ही हैं और उसके बाद भी खालसा को जीत मिलना दिलचस्प है।

स्वर्णजीत सिंह खालसा 40 वर्षीय अमृतधारी सिख हैं और मूल रूप से उनका परिवार पंजाब के जालंधर का रहने वाला है। उनका परिवार दिल्ली से लेकर पंजाब तक पंथिक मामलों से लेकर राजनीति तक में ऐक्टिव रहा है। उन्होंने अमेरिका में राजनीतिक जीवन की शुरुआत तब की, जब 9/11 के आतंकी हमलों के बाद सिखों को भी उनकी वेश-भूषा के चलते टारगेट किया गया। हेट क्राइम का भी सामना करना पड़ा। स्वर्णजीत सिंह खालसा ने एक लंबा कैंपेन चलाया था कि कैसे सिख समुदाय की एक अलग पहचान है। इसके बाद वह स्थानीय मसले भी उठाने लगे और धीरे-धीरे अमेरिका के नॉर्विच शहर में एक लोकप्रिय चेहरा बन गए।
FBI ने भी किया था स्वर्णजीत सिंह खालसा का सम्मान

उनकी ओर से लगातार प्रयास किए गए कि नॉर्विच समेत अमेरिका में सहिष्णुता और सामुदायिक भावना को प्रोत्साहित किया जाए। उनके प्रयासों का परिणाम था कि अमेरिकी एजेंसी एफबीआई की ओर से 2017 में उन्हें कम्युनिटी लीडरशिप अवॉर्ड मिला था। कुल 56 लोगों को ये सम्मान मिले थे, जिनमें से वह अकेले भारतीय थे। उनका मुख्य प्रयास यह था कि अमेरिकियों को बताया जाए कि सिखों की एक अलग पहचान है। वे वैसे नहीं हैं, जैसी इमेज उनके बारे में है। खासतौर पर दाढ़ी और पगड़ी के चलते उनके बारे में पूर्वाग्रह रखने वाले लोगों को उन्होंने जागरूक किया।
जालंधर के कॉलेज से पढ़े और फिर स्टडी वीजा पर गए थे अमेरिका

स्वर्णजीत सिंह खालसा के पिता परमिंदर पाल सिख इंटरनेशल सोसायटी में हैं। उन्होंने बेटे की सफलता का जिक्र सोशल मीडिया पर भी किया है। परमिंदर ने बताया कि उनके बेटे ने जालंधर के डीएवी इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की थी। इसके बाद वह स्टडी वीजा पर अमेरिका चले गए थे। अमेरिका में ही स्वर्णजीत सिंह ने कंप्यूटर इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री हासिल की थी। वहीं पर उन्होंने लुधियाना की ही रहने वाली सिख युवती से विवाह किया था। फिलहाल वह नॉर्विच में कंस्ट्रक्शन का बिजनेस करते हैं। वह जिस नॉर्विच शहर में रहते हैं, वह अमेरिका के उन शहरों में से एक है, जहां लोगों की प्रति व्यक्ति आय काफी ज्यादा है।

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Fri, 07 Nov 2025 18:46:44 +0530 news desk MPcg
अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होगा एक और इस्लामिक देश, ट्रंप ने इजरायल को होने वाले लाभ का किया खुलासा https://citytoday.co.in/4229 https://citytoday.co.in/4229 तेल अवीव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि कजाकिस्तान अब्राहम समझौते में शामिल हो गया है. यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला ऐसा कदम है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह समझौता क्या है, कजाकिस्तान क्यों इसमें आ रहा है, और इससे मिडिल ईस्ट या दुनिया में क्या बदलाव आएगा? आइए समझते हैं.
अब्राहम समझौता क्या है?

अब्राहम समझौता ट्रंप के पहले कार्यकाल की बड़ी कामयाबी है. यह 2020 में शुरू हुआ था. इसका नाम अब्राहम से आया है, जो यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्मों के पैगंबर माने जाते हैं. यह समझौता इजरायल और कुछ मुस्लिम देशों के बीच दोस्ती से जुड़ा है. इससे पहले, इजरायल और कई अरब देशों के बीच दुश्मनी थी. लेकिन इस समझौते से वे देश इजरायल को आधिकारिक तौर पर मान्यता देने लगे. दूतावास खोले, व्यापार बढ़ाया, पर्यटन शुरू किया. अभी तक इसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को और सूडान शामिल हैं. इन देशों ने इजरायल के साथ पूर्ण संबंध बनाए. सूडान इकलौता ऐसा देश है, जिसने दूतावास नहीं खोला. ट्रंप इसे अपनी विदेश नीति की सबसे बड़ी सफलता मानते हैं. लेकिन गाजा युद्ध के बाद यह समझौता थोड़ा ठंडा पड़ गया था. अब ट्रंप इसे फिर से जिंदा करना चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि मध्य एशिया का मुस्लिम बहुल देश कजाखस्तान ऐसा पहला देश होगा, जो उनके दूसरे कार्यकाल में अब्राहम अकॉर्ड का हिस्सा बनेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर इस संबंध में पोस्ट करके जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मैंने कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासम-जोमार्ट तोकायेव से बात की है। इसके अलावा इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से भी इस संबंध में बात की है। उन्होंने कहा कि हम दुनिया में शांति स्थापित करना चाहते हैं और उसके लिए ये संबंध अहम हैं। इसी के तहत अब्राहम अकॉर्ड अहम है और सभी इसके साथ जुड़कर शांति एवं समृद्धि को बढ़ावा देना चाहते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का दावा- कुछ और मुसलमान देश हैं लाइन में

डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा भी किया कि अभी इस अकॉर्ड से कुछ और देश भी जुड़ने के लिए कतार में हैं। उन्होंने कहा कि हम जल्दी ही एक सेरेमनी का ऐलान करेंगे, जिसमें कजाखस्तान अब्राहम अकॉर्ड का हिस्सा बनेगा। हमें उम्मीद है कि जल्दी ही दुनिया में एकता, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कुछ और देश भी साथ आएंगे। बता दें कि इस अकॉर्ड से सीरिया के भी जुड़ने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। यह इजरायल का पड़ोसी देश है और यदि सीरिया साथ आया तो यह बड़ा बदलाव होगा। खासतौर पर मध्य पूर्व एशिया में शांति और स्थिरता के लिहाज से यह अहम होगा। यही नहीं मुस्लिम देशों की एकता के लिए भी यह देखने लायक होगा।

इजरायल के साथ कजाखस्तान के हैं पुराने रिश्ते, अब क्या बदलेगा

बता दें कि कजाखस्तान के पहले से ही इजरायल से रिश्ते रहे हैं। कभी सोवियत संघ का हिस्सा रहे कजाखस्तान ने 1992 में इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित किए थे। ट्रंप का मानना है कि मुसलमान देशों को साथ लाने से गाजा में भी शांति व्यवस्था स्थापित करने में मदद मिलेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि गाजा में इजरायली हमलों के खिलाफ मुसलमान देश एकजुट रहे हैं।

कजाखस्तान भी मुस्लिम बहुल देश, पर क्यों नहीं है कट्टरता

कज़ाखस्तान की आबादी लगभग 2 करोड़ है और यह क्षेत्रफल की दृष्टि से दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है। हालांकि इसकी अधिकांश आबादी मुस्लिम है, लेकिन यह आधिकारिक तौर पर इस्लामिक देश नहीं है। जैसा बहरीन, मोरक्को और संयुक्त अरब अमीरात के साथ है, जिन्होंने 2020 में अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने का फैसला लिया था। यही नहीं कजाखस्तान को अपेक्षाकृत उदारवादी देश माना जाता है। अन्य इस्लामिक देशों के मुकाबले सोवियत से अलग होने वाले मुल्क मुस्लिम बहुल तो हैं, लेकिन कट्टरता वहां नहीं है।

कजाकिस्तान का क्या संबंध है?

कजाकिस्तान मध्य एशिया का एक बड़ा देश है. यहां की आबादी का 70 फीसदी मुस्लिम है. लेकिन अब्राहम समझौते पर अगर यह देश हस्ताक्षर करता है तो भी ये कुछ नया नहीं होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि कजाकिस्तान के 1992 से ही इजरायल के साथ अच्छे संबंध रखे हैं. वहां दूतावास हैं, व्यापार होता है, कोई दुश्मनी नहीं. ऐसे में यह कदम नया संबंध बनाने का नहीं, बल्कि पुराने को मजबूत करने का है.

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव से फोन पर बात की. टोकायेव गुरुवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप से मिले थे, क्योंकि वहां सेंट्रल एशिया के पांच देशों के नेताओं का समिट था. टोकायेव ने कहा, ‘यह हमारे देश की नीति का प्राकृतिक हिस्सा है. हम संवाद, सम्मान और स्थिरता चाहते हैं.’ एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने इसे ‘शक्ति का क्लब’ कहा और बोले, ‘यह पहला देश है, कई और आएंगे.’
कजाकिस्तान अब क्यों करेगा समझौता?

    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कजाकिस्तान के राष्ट्रपति टोकायेव का कहना है कि इससे इजरायल के साथ व्यापार और सहयोग बढ़ेगा.

    कजाकिस्तान के पास यूरेनियम और दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार हैं. गुरुवार को कजाकिस्तान ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में अमेरिकी सरकार के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किया. इसमें कजाकिस्तानका भी हित है. वह नहीं चाहता कि चीन और रूस के बीच फंसा रहे.

    कजाकिस्तान अमेरिका को खुश करके निवेश और तकनीक हासिल करना चाहता है. इसका एक उदाहरण भी दिखा जब कजाकिस्तान के राष्ट्रपति ने ट्रंप के सामने उनकी तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘आप एक महान राजनेता हैं जिन्हें अमेरिका की नीति में सामान्य ज्ञान और परंपराओं को वापस लाने के लिए स्वर्ग से भेजा गया है.’

    ट्रंप के लिए यह राजनीतिक जीत है. गाजा युद्ध के बाद इजरायल दुनिया में अकेला पड़ गया था. ट्रंप पहले भी कह चुके हैं, ‘मेरा लक्ष्य इजरायल को फिर से मजबूत बनाना है.’

किसको क्या फायदा होगा?

    ट्रंप कार्यकाल का यह पहला समझौता होगा. ऐसे में इजरायल की दुनिया में साख बढ़ेगी. दूसरे मुस्लिम देशों से समर्थन की भी उम्मीद है.
    कजाकिस्तान अमेरिका के कहने पर यह समझौता करेगा. ऐसे में अमेरिका से आर्थिक मदद, इजरायल से कृषि, वाटर मैनेजमेंट और साइबर टेक्नोलॉजी मिलने की उम्मीद है.
    ट्रंप कजाकिस्तान से ये समझौता कराकर खाता खोलना चाहते हैं. ये सऊदी अरब और सीरिया जैसे बड़े देशों को समझौते पर लाने का रास्ता बनेगा. सऊदी का क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और सीरिया के राष्ट्रपति नवंबर में अमेरिका पहुंचेंगे.
    हालांकि इसे एक ज्यादा बड़ा कदम इसलिए भी नहीं माना जा रहा है. क्योंकि कजाकिस्तान और इजरायल पहले से ही एक दूसरे को मान्यता देते हैं. ये समझौता प्रतीकात्मक होगा, लेकिन कोई नया रास्ता नहीं खुलेगा.

 

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Fri, 07 Nov 2025 18:41:28 +0530 news desk MPcg
China Earthquake: चीन के झिंजियांग में भूकंप के झटके, 4.7 की तीव्रता से हिली धरती https://citytoday.co.in/4215 https://citytoday.co.in/4215 झिंजियांग, 6 नवंबर : 

चीन (China) के झिंजियांग में गुरुवार को भूकंप के झटकों से धरती डोल गई. रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 4.7 आंकी गई. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने यह जानकारी दी है. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार झिंजियांग में 220 किमी की गहराई पर भूकंप का केंद्र था. भूकंप की चपेट में आने से जानमाल का कितना नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार 6 नवंबर को सुबह 6 बजकर 32 मिनट 18 सेकेंड पर भूकंप आया. इससे पहले चीन में 26 अक्टूबर को 4.9 की तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी गहराई 130 किलोमीटर थी.

कम गहराई वाले भूकंप आमतौर पर गहराई वाले भूकंप से ज्यादा विनाशकारी होते हैं. चीन की भौगोलिक स्थिति की वजह से भूकंपीय गतिविधियों को लेकर इसे संवेदनशील माना जाता है. चीन दो सबसे बड़ी भूकंपीय पट्टियों, प्रशांत महासागरीय भूकंपीय पट्टी और हिंद महासागरीय भूकंपीय पट्टी के बीच स्थित है. यहां प्रशांत, हिंद महासागरीय और फिलीपींस प्लेट के आपसी दबाव के कारण भूकंप आने का खतरा ज्यादा रहता है. चीन के विज्ञान संग्रहालयों के अनुसार, 1900 से अब तक चीन में भूकंपों में 5,50,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, जो कुल वैश्विक भूकंप हताहतों का 53 प्रतिशत है.

1949 से अब तक, चीनी नगर पालिकाओं और स्वायत्त क्षेत्रों में 100 से ज्यादा विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं, जिनमें से 14 पूर्वी चीन में आए हैं. इसकी वजह से 270,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. यह आंकड़ा चीन में प्राकृतिक आपदाओं से हुई कुल मौतों का 54 प्रतिशत है. भूकंप प्रभावित जिलों का क्षेत्रफल 300,000 वर्ग किलोमीटर है, जहां 70 लाख से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचाया है. विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाएं चीन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. शांतिपूर्ण समय में भी भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं चीन के लिए सबसे कठिन दौर लेकर आती हैं.

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Thu, 06 Nov 2025 14:11:46 +0530 news desk MPcg
अमेरिका में 36 दिनों से सरकारी कामकाज ठप! इतिहास का सबसे बड़ा Shutdown जारी https://citytoday.co.in/4213 https://citytoday.co.in/4213 वाशिंगटन 
अमेरिका की संघीय सरकार बुधवार को 36वें दिन भी ठप रही जो देश के इतिहास में अब तक इस तरह के सबसे लंबे गतिरोध का रिकॉर्ड है। कांग्रेस द्वारा बजट को मंजूरी नहीं दिये जाने की वजह से संघीय कार्यक्रमों में कटौती, उड़ान में देरी तथा देश भर में संघीय कर्मचारियों का वेतन भुगतान ठप पड़ गया है और इससे लाखों अमेरिकियों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेट्स के साथ उनकी मांगों पर बातचीत करने से इनकार कर दिया है।

विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी स्वास्थ्य बीमा सब्सिडी को समाप्त करने की योजना को ढंडे बस्ते में डालने की मांग कर रही है और जब तक यह पूरा नहीं होता कांग्रेस (संसद) में बजट को समर्थन देने से इनकार कर दिया है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में संघीय सरकार के ठप होने का पिछला रिकॉर्ड बना था। उस समय मैक्सिको की सीमा पर सुरक्षा दीवार के लिए धन मुहैया कराने को लेकर गतिरोध बना था और संघीय सरकार करीब 35 दिनों तक ठप रही थी। रिपब्लिकन सीनेटर बुधवार को इस संकट पर चर्चा के लिए नाश्ते पर मिलने वाले हैं। लेकिन डेमोक्रेट्स के साथ कोई बातचीत निर्धारित नहीं है।   

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Thu, 06 Nov 2025 12:57:59 +0530 news desk MPcg
US चुनाव में भारतीयों का जलवा, ममदानी समेत अन्य विजेताओं ने भी बढ़ाया गौरव https://citytoday.co.in/4199 https://citytoday.co.in/4199  न्यूयॉर्क

अमेरिका के न्यूयॉर्क मेयर चुनाव में भारतीय मूल के मुस्लिम डेमोक्रेट ज़ोहरान ममदानी (34) ने ऐतिहासिक फतह हासिल की है. उन्होंने पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमो और रिपब्लिकन कर्टिस स्लीवा को पटखनी देते हुए अमेरिका के सबसे अमीर शहर में इतिहास रच दिया है. इसके साथ ही वे अमेरिका के सबसे बड़े शहर के मेयर पद पर बैठने वाले पहले दक्षिण एशियाई और मुस्लिम शख्स बन गए हैं.

जोहरान ममदानी को इस चुनाव में 948,202 वोट (50.6 प्रतिशत) मिले, जिसमें से 83 प्रतिशत वोट पड़े थे. वह कई महीनों से NYC मेयर चुनाव में सबसे आगे चल रहे थे. एंड्रयू कुओमो एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े थे और चुनाव के एक दिन पहले ट्रंप का सपोर्ट मिला था. इसके बाद भी बेहद आसानी से ममदानी की जीत हो गई. 

कुओमो को 776,547 वोट (41.3 प्रतिशत) मिले, जबकि स्लीवा को 137,030 वोट मिले. न्यूयॉर्क सिटी चुनाव बोर्ड ने बताया कि 1969 के बाद पहली बार दो मिलियन वोट डाले गए, जिनमें मैनहट्टन में 444,439 वोट पड़े, उसके बाद ब्रोंक्स (187,399), ब्रुकलिन (571,857), क्वींस (421,176) और स्टेटन आइलैंड (123,827) का स्थान रहा. ममदानी ने न्यूयॉर्क सिटी मेयर पद के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में कुओमो को हराया था और इस साल जून में उन्हें विजेता घोषित किया गया था.

ज़ोहरान ममदानी कौन हैं?

युगांडा के कंपाला में जन्मे ज़ोहरान ममदानी सात साल की उम्र में न्यूयॉर्क शहर चले गए और बाद में अमेरिकी नागरिक बन गए. उनकी मां मीरा नायर एक मशहूर भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्माता हैं और उनके पिता महमूद ममदानी कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं.

ममदानी की शादी सीरियाई-अमेरिकी कलाकार रमा दुवाजी से हुई है. इस जोड़े की सगाई अक्टूबर 2024 में हुई और इसी साल फरवरी में लोअर मैनहट्टन स्थित सिटी क्लर्क के कार्यालय में दोनों कोर्टहाउस में शादी के बंधन में बंध गए. बता दें कि ज़ोहरान ममदानी के अलावा और भी भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने अलग-अलग चुनावों में जीत हासिल की है.

भारतीय मूल की ग़ज़ाला हाशमी की जीत

भारतीय मूल की डेमोक्रेट ग़ज़ाला हाशमी ने रिपब्लिकन जॉन रीड को हराकर वर्जीनिया के लेफ्टिनेंट गवर्नर का चुनाव जीत लिया है. हाशमी वर्जीनिया सीनेट में सेवा देने वाली पहली मुस्लिम और पहली दक्षिण एशियाई अमेरिकी हैं, जो 15वें सीनेटरियल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करती हैं. हाशमी की इस जीत का मतलब है कि उनकी सीनेट सीट के लिए एक विशेष चुनाव होगा.

ग़ज़ाला हाशमी ने 2019 में सियासत में एंट्री ली और एक चौंकाने वाली जीत के साथ, रिपब्लिकन के कब्जे वाली स्टेट सीनेट सीट को जीत लिया और वर्जीनिया जनरल असेंबली के लिए चुनी गईं. पांच साल बाद, साल 2024 में उन्हें सीनेट शिक्षा और स्वास्थ्य समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जो दो महत्वपूर्ण डेमोक्रेटिक प्राथमिकताओं, प्रजनन स्वतंत्रता और सार्वजनिक शिक्षा, के लिए एक महत्वपूर्ण नेतृत्व पद है.

जेजे सिंह ने लहराया परचम

भारतीय मूल के जेजे सिंह ने वर्जीनिया के Virginia House of Delegates District 26 से चुनाव लड़ा था और यहां पर जीत हासिल की है. यह जिला मुख्य रूप से उत्तरी वर्जीनिया में स्थित है. 

जेजे सिंह का जन्म उत्तरी वर्जीनिया में एक पंजाबी सिख परिवार में हुआ था और वे फेयरफैक्स स्टेशन में पले-बढ़े. उनके माता-पिता 1970 में भारत से इस इलाके में आकर बस गए थे. उनके पिता अमर जीत सिंह का जन्म ब्रिटिश भारत (मौजूदा पाकिस्तान) के पंजाब प्रांत के फैसलाबाद में हुआ था और भारत के बंटवारे के बाद वे भारत के हरियाणा आ गए. 

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Wed, 05 Nov 2025 15:52:50 +0530 news desk MPcg
अमेरिका में एक माह से शटडाउन का बुरा असर; ढाई हजार से अधिक उड़ानें प्रभावित, एयरपोर्ट पर अफरा&तफरी, कर्मचारियों को नहीं मिल रहा वेतन https://citytoday.co.in/4181 https://citytoday.co.in/4181 नई दिल्ली, 04 नवम्बर 2025:

 अमेरिका में एक महीने से अधिक समय से जारी सरकारी शटडाउन का असर अब हवाई अड्डों पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। कर्मचारियों की कमी के कारण उड़ानों में विलंब और सुरक्षा जाँच की लंबी लाइनें बढ़ती जा रही हैं। सोमवार दोपहर तक देश भर में 2,530 से ज़्यादा उड़ानें देरी से चल रही थीं और 60 से अधिक रद्द करनी पड़ी थीं। यात्रियों को सिक्योरिटी लाइन में तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल है।

शटडाउन के कारण हवाई यातायात नियंत्रक (Air Traffic Controller) भी बिना वेतन के काम करने पर मजबूर हैं। परिवहन सचिव शॉन डफी ने चेतावनी दी है कि इन कर्मचारियों पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है, और यदि यही स्थिति जारी रही तो कई लोग नौकरी छोड़ने पर मजबूर हो जाएँगे। उन्होंने बताया कि देश में पहले से ही लगभग 2,000 से 3,000 नियंत्रकों की कमी है। यातायात विभाग ने आगे और उड़ानें देर से चलने या रद्द होने की चेतावनी भी दी है।

शटडाउन की स्थिति को लेकर अमेरिका में राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। सोमवार को व्हाइट हाउस ने इसके लिए डेमोक्रेट नेताओं को जिम्मेदार ठहराया, जबकि डेमोक्रेट दल ने इन आरोपों को गलत बताया है। रिपब्लिकन दल डेमोक्रेट पर गैरकानूनी प्रवासियों को स्वास्थ्य सुविधा देने की मांग करने का आरोप लगा रहा है, जिसे डेमोक्रेट्स खारिज कर रहे हैं। शटडाउन कब खत्म होगा, यह तय नहीं है, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।

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Tue, 04 Nov 2025 14:01:01 +0530 news desk MPcg
‘अब रूस को मिलेगा करारा जवाब’; यूक्रेन को अमेरिका&जर्मनी से मिली पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी, जेलेंस्की ने बताया गेम&चेंजर https://citytoday.co.in/4180 https://citytoday.co.in/4180 नई दिल्ली, 04 नवम्बर 2025:

 रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में एक नया मोड़ आ गया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पुष्टि की है कि यूक्रेन को अमेरिका निर्मित पैट्रियट वायु रक्षा प्रणालियां प्राप्त हो चुकी हैं। यह प्रणाली रूस के लगातार होते मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए अत्यंत अहम मानी जा रही है। जेलेंस्की ने अपने संबोधन में कहा कि अब और अधिक पैट्रियट यूक्रेन में हैं और इन्हें अभियानों में लगाया जा रहा है। उन्होंने इस रक्षा सहयोग के लिए जर्मनी और उसके चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

विश्लेषकों का मानना है कि पैट्रियट प्रणाली रूस की मिसाइलों और ड्रोन के खिलाफ अब तक की सबसे प्रभावी रक्षा साबित हो सकती है। यूक्रेनी वायु सेना का कहना है कि रूस ने हाल ही में 12 मिसाइलें और 138 हमलावर ड्रोन दागे थे, जिनमें से कई को पैट्रियट प्रणाली की मदद से नष्ट कर दिया गया। हालाँकि, इस बीच रूस की ओर से किए गए ड्रोन हमलों में उत्तर-पूर्वी सूमी क्षेत्र में एक व्यक्ति की मौत हो गई और उसके परिवार के पाँच सदस्य घायल हो गए।

जेलेंस्की ने चेतावनी दी है कि हमारे पूरे देश की सुरक्षा के लिए और प्रणालियों की आवश्यकता बनी हुई है। उन्होंने बताया कि पैट्रियट प्रणाली का निर्माण केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में किया जाता है, जिसकी उत्पादन क्षमता सीमित है, और पश्चिमी सहयोगी देश अपने भंडार भी बनाए रखना चाहते हैं। जेलेंस्की ने सहयोगी देशों से आपूर्ति तेज करने का आग्रह किया है, क्योंकि रूस सर्दियों में यूक्रेन की ऊर्जा आपूर्ति, जल संसाधन और हीटिंग सिस्टम को निशाना बनाकर नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

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Tue, 04 Nov 2025 13:56:58 +0530 news desk MPcg
पंजाबी ड्राइवरों के एक्सीडेंट के बाद ट्रम्प सरकार ने कड़ा कदम उठाया: अंग्रेज़ी टेस्ट अनिवार्य, 7 हजार फेल https://citytoday.co.in/4166 https://citytoday.co.in/4166 पंजाबी ड्राइवरों के एक्सीडेंट के बाद ट्रम्प सरकार ने कड़ा कदम उठाया: अंग्रेज़ी टेस्ट अनिवार्य, 7 हजार फेल

ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड, अंग्रेज़ी स्पीकिंग टेस्ट फेल हुए 7 हजार लोग, ट्रम्प सरकार का सख्त नियम लागू

ट्रम्प सरकार ने लगाया अंग्रेज़ी टेस्ट नियम, एक्सीडेंट के बाद पंजाबी ड्राइवरों पर सख्ती

न्यूयॉर्क

अमेरिका में ड्राइविंग स्किल के आधार पर नौकरी की तलाश में गए पंजाबी युवाओं पर ट्रम्प सरकार ने सख्ती की है। यहां ट्रक चलाने वाले युवाओं के लिए इंग्लिश स्पीकिंग मेंडेटरी कर दी गई है। बाकायदा इसके लिए टेस्ट भी लिए जा रहे हैं।

.पंजाब के ट्रक ड्राइवरों से हुए एक्सीडेंट के बाद ट्रम्प सरकार ने इस नियम को लागू किया है। पुलिस ऑन रोड ट्रक ड्राइवरों को रोक-रोक कर भी इंग्लिश स्पीकिंग टेस्ट ले रही है। इस टेस्ट में अब तक नॉन अमेरिकी 7 हजार से ज्यादा ट्रक ड्राइवर फेल हो गए हैं। इनके लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए हैं।

इस वक्त अमेरिका में 1.50 लाख पंजाबी ड्राइवर हैं। अमेरिका के ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी सीन डफी के मुताबिक, 30 अक्टूबर तक चले इंग्लिश टेस्ट में कई ड्राइवर सही से इंग्लिश बोल नहीं पाए, तो कुछ इंग्लिश में लिखे ट्रैफिक साइन के बारे में नहीं बता पाए।

बता दें कि लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए अमेरिकी सरकार करीब दो महीने पहले भारतीय ड्राइवरों के वीजा पर रोक लगा चुका है। इसकी जानकारी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दी थी।

यूएसए के ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी सीन डफी ने कहा कि रोडसाइड इंग्लिश लैंग्वेज प्रोफिशियंसी (ELP) टेस्ट में पास न होने के कारण 7 हजार से ज्यादा नॉन अमेरिकी ड्राइवरों को आउट ऑफ सर्विस घोषित कर दिया गया है।

    अंग्रेजी में ट्रैफिक साइन पढ़ना और बोलना जरूरी: अमेरिका के ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी सीन डफी ने कहा कि अमेरिकी ट्रांसपोर्ट लॉ में सभी ट्रक ड्राइवरों के लिए अंग्रेजी में ट्रैफिक साइन पढ़ना और अंग्रेजी बोलना जरूरी है। इसके बिना लाइसेंस नहीं मिलता। ओबामा प्रशासन में इसे सीरियसली नहीं लिया गया, जिससे अंग्रेजी टेस्ट में फेल ड्राइवरों को भी लाइसेंस मिल गए।

    सड़क पर ही पुलिस टेस्ट ले रही: डफी ने कहा कि अमेरिका में बढ़ रहे ट्रक हादसों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 25 जून, 2025 से अंग्रेजी का टेस्ट अनिवार्य कर दिया। नई पॉलिसी के तहत अब अमेरिकन पुलिस सड़क पर ही ड्राइवरों का मौके पर टेस्ट ले रही है। अंग्रेजी न बोल पाने वाले ट्रक ड्राइवरों को तुरंत ट्रक से उतार दिया जा रहा है।

    कैलिफोर्निया में अंग्रेजी जरूरी नहीं, वहीं से बन रहे लाइसेंस: डफी के कहा कि अंग्रेजी बोलने की शर्त का कैलिफोर्निया स्टेट ने विरोध किया था। यहां कॉमर्शियल लाइसेंस के लिए अंग्रेजी अनिवार्य नहीं है। अंग्रेजी का टेस्ट होता है, लेकिन थोड़ी बहुत अंग्रेजी जानने वालों को लाइसेंस मिल जाता है। इस कारण अधिकतर इंडियन ड्राइवर यहीं से लाइसेंस लेते हैं।

ट्रम्प ने कैलिफोर्निया का ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट फंड रोका कैलिफोर्निया के ट्रम्प की शर्त न मानने के बाद ट्रम्प प्रशासन ने स्टेट का ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट फंड रोक दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका की ट्रक चेन कंपनी के सीईओ अडालबर्टो कैम्पेरो ने कहा कि ट्रम्प के इस निर्णय से लॉजिस्टिंग सेक्टर को नुकसान हो रहा है।

अमेरिकी ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री में 1.50 लाख पंजाबी ड्राइवर 2021 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में विदेशी मूल के ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री (ट्रक, टैक्सी, बस और अन्य सभी वाहन) से जुड़े लोगों की संख्या 7,20,000 तक पहुंच चुकी है। इनमें डेढ़ लाख के करीब ड्राइवर पंजाबी हैं। इस साल की शुरुआत में वित्तीय कंपनी ऑल्टलाइन की एक रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका में 24 हजार ट्रक ड्राइवरों की कमी है।

इस कमी के कारण सामान समय पर नहीं पहुंच पाता और माल ढुलाई उद्योग को हर हफ्ते लगभग 95.5 मिलियन डॉलर का नुकसान होता है। इसी वजह से वहां लगातार ट्रक ड्राइवरों की मांग बढ़ रही है।

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Mon, 03 Nov 2025 16:50:33 +0530 news desk MPcg
पाकिस्तान कर रहा परमाणु परीक्षण, ट्रंप ने इशारों&इशारों में किया खुलासा https://citytoday.co.in/4165 https://citytoday.co.in/4165 इस्लामाबाद 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को लेकर एक बहुत बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि निश्चित रूप से  उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण कर रहा है. पाकिस्तान भी न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है. ट्रंप ने कहा कि हम भी परीक्षण करेंगे क्योंकि दूसरे देश परमाणु परीक्षण करते हैं. 

ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि दुनिया के कई देश परमाणु बम की टेस्टिंग कर रहे हैं. लेकिन वे इसके बारे में बात नहीं करते हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "रूस और चीन परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन वे इस बारे में बात नहीं करते. वे इसे बताते नहीं हैं. हम एक खुला समाज हैं. हम अलग हैं. हम इस बारे में बात करते हैं. हमें इस बारे में बात करनी ही होगी क्योंकि वरना आप लोग कल को रिपोर्ट कर देंगे. उनके पास ऐसे पत्रकार नहीं हैं जो इस बारे में लिखें." 

ट्रंप ने आगे कहा कि अब अमेरिका भी न्यूक्लियर टेस्ट करेगा. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया और पाकिस्तान भी परमाणु बम का परीक्षण कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "हम परीक्षण करेंगे क्योंकि वे परीक्षण करते हैं और दूसरे भी परीक्षण करते हैं. और निश्चित रूप से उत्तर कोरिया परीक्षण कर रहा है. पाकिस्तान भी परमाणु परीक्षण कर रहा है."

गौरतलब है कि पाकिस्तान की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक 1998 में परमाणु परीक्षण किया था. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के दावे को माने तो पाकिस्तान परमाणु परीक्षण करता आ रहा है. और ऐसी ही स्थिति रूस और चीन की है. ट्रंप के मुताबिक दोनों ही देश लंबे समय से परमाणु परीक्षण करते आ रहे हैं. 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूज चैनल सीबीएस के 60 मिनट्स कार्यक्रम पर एक साक्षात्कार में कहा कि रूस और उत्तर कोरिया भी अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं. 

ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उन्होंने 33 साल के प्रतिबंध के बाद अमेरिकी सेना को परमाणु हथियार परीक्षण करने के अपने आदेश को उचित ठहराया. ट्रंप के खुलासे के मुताबिक अगर पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है तो ये भारत के लिए चिंताजनक सूचना है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "परमाणु हथियार संपन्न देश आपको इसके बारे में बताने नहीं जाते… वे जमीन के नीचे परीक्षण करते हैं जहां लोगों को ठीक से पता ही नहीं चलता कि परीक्षण में क्या हो रहा है. बस आपको थोड़ा कंपन महसूस होता है."

33 सालों बाद न्यूक्लियर टेस्ट क्यों कर रहा है अमेरिका

बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका 33 वर्षों के अंतराल के बाद परमाणु परीक्षण शुरू करने जा रहा है. अमेरिका ने आखिरी बार परीक्षण 1992 में किया गया था. इसके बाद शीत युद्ध के अंत की घोषणा की गई थी. 

सोशल मीडिया पर ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पेंटागन को "हमारे परमाणु हथियारों का समान आधार पर परीक्षण शुरू करने" का निर्देश दिया है, जो रूस द्वारा नई न्यूक्लियर सिस्टम के परीक्षण और चीन द्वारा नए बैलिस्टिक मिसाइल साइलो की तैनाती के जवाब में है.

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Mon, 03 Nov 2025 16:45:16 +0530 news desk MPcg
अमेरिका में मानव तस्करी कांड: भारतीय दंपति विक्रांत और इंदु पर लगा बड़ा प्रतिबंध https://citytoday.co.in/4151 https://citytoday.co.in/4151 वाशिंगटन 
भारत में जन्मे एक दंपति विक्रांत भारद्वाज और उनकी पत्नी इंदु रानी अब अमेरिकी वित्त मंत्रालय की जांच के घेरे में हैं। अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने गुरुवार को इन दोनों को एक बड़े मानव तस्करी नेटवर्क का मास्टरमाइंड घोषित किया है। यह कार्रवाई उस समय सामने आई जब अमेरिका ने 'भारद्वाज ह्यूमन स्मगलिंग ऑर्गनाइजेशन' (HSO) के खिलाफ व्यापक प्रतिबंध लगाए। यह गिरोह कथित तौर पर हजारों अवैध प्रवासियों को अमेरिका में दाखिल कराने का काम करता था। इनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, OFAC ने बताया कि विक्रांत और इंदु रानी नई दिल्ली में जन्मे भारतीय नागरिक हैं, जो अब मेक्सिको के कैनकुन में एक आलीशान जीवन जी रहे थे। उनका नेटवर्क तीन देशों में फैला हुआ था, जिसमें कम से कम चार भारतीय कंपनियां और 16 फ्रंट एंटिटीज शामिल थीं। इनकी मदद से गिरोह मेक्सिको से अमेरिका तक क्रॉस-कॉन्टिनेंटल स्मगलिंग रूट संचालित करता था। अमेरिका ने अब इन दोनों के सभी अमेरिकी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है और अमेरिकी नागरिकों व कंपनियों को इनके साथ किसी भी वित्तीय लेनदेन से प्रतिबंधित किया गया है।

तस्करी का खाका
अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार, गिरोह का कामकाज बेहद संगठित था। प्रवासी यात्रियों को पहले मेक्सिको के कैनकुन इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचाया जाता था, जहां एयरपोर्ट के कुछ अधिकारियों को रिश्वत देकर प्रक्रिया आसान की जाती थी। इसके बाद उन्हें होटलों और हॉस्टलों में ठहराया जाता, जो स्वयं भारद्वाज गिरोह के नियंत्रण में थे। फिर इन प्रवासियों को लक्जरी यॉट्स और जमीनी रास्तों से सिनालोआ कार्टेल की मदद से अमेरिका-मेक्सिको सीमा तक पहुंचाया जाता था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह नेटवर्क विशेष रूप से हाई-वैल्यू क्लाइंट्स पर केंद्रित था- यानी एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण अमेरिका के ऐसे लोग जो अमेरिका में दाखिल होने के लिए हजारों डॉलर तक देने को तैयार रहते थे।

भारत में बनी कंपनियां बनी मनी लॉन्ड्रिंग का जरिया
OFAC की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में स्थित कई कंपनियां इस नेटवर्क की मनी लॉन्ड्रिंग मशीन के रूप में काम कर रही थीं। इनमें वीणा शिवानी एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी रियल एस्टेट कंपनियां शामिल हैं, जिनके जरिए गैरकानूनी कमाई को प्रॉपर्टी डील्स के जरिए साफ दिखाया जाता था। इसी तरह, यूएई में स्थित ब्लैक गोल्ड प्लस एनर्जीज ट्रेडिंग एलएलसी नाम की कंपनी ऊर्जा कारोबार के नाम पर तस्करी की कमाई को छिपाने का काम करती थी।

मेक्सिको में सहयोगी और सुरक्षा नेटवर्क
मेक्सिकन अधिकारियों ने खुलासा किया है कि भारद्वाज दंपति ने स्थानीय सहयोगियों की एक मजबूत टीम बना रखी थी। इसमें जोसे जर्मन वलादेज फ्लोरेस, कैनकुन के एक व्यापारी शामिल थे। पूर्व क्विंटाना रू पुलिस अधिकारी जॉर्ज अलेजांद्रो मेंडोजा विललेगास के एयरपोर्ट और सुरक्षा विभागों में गहरे संपर्क बताए गए हैं। गिरोह का मेक्सिको मुख्यालय बाहरी तौर पर एक कानूनी व्यापारिक साम्राज्य जैसा दिखता था- जिसमें यॉट सेवाएं, सुपरमार्केट, रेस्टोरेंट और ऊर्जा व्यापार जैसे कारोबार चल रहे थे। मगर अधिकारियों के मुताबिक, यह सब नकदी के प्रवाह और मादक पदार्थों की तस्करी को छिपाने का तरीका था।

अमेरिका की सख्त कार्रवाई
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अंडरसेक्रेटरी फॉर टेररिज्म एंड फाइनेंशियल इंटेलिजेंस, जॉन के. हर्ली, ने कहा कि यह फैसला इस नेटवर्क की क्षमता को बाधित करता है, जो अवैध रूप से प्रवासियों को अमेरिका लाने का काम कर रहा था। ट्रंप प्रशासन अमेरिकी लोगों की सुरक्षा के लिए ऐसे ट्रांसनेशनल अपराध संगठनों को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, अभी तक किसी गिरफ्तारी या औपचारिक आपराधिक मुकदमे की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यह कार्रवाई अमेरिका, मेक्सिको और भारत की एजेंसियों के संयुक्त अभियान का हिस्सा बताई जा रही है।

क्या होगा आगे?
OFAC की इस घोषणा के बाद, भारद्वाज दंपति की सभी अमेरिकी संपत्तियां तुरंत फ्रीज हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बैंकों को चेतावनी दी गई है कि अगर वे इनसे जुड़े लेनदेन करेंगे तो उन्हें भी सेकेंडरी सैंक्शंस का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला भारतीय नागरिकों से जुड़ी अब तक की सबसे बड़ी मानव तस्करी जांचों में से एक माना जा रहा है- जो यह दिखाता है कि किस तरह भारतीय कंपनियों का दुरुपयोग कर अंतरराष्ट्रीय तस्करी रैकेट संचालित किए जा रहे हैं।

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Sat, 01 Nov 2025 16:12:40 +0530 news desk MPcg
83 करोड़ से शुरू होगी बोली! अमेरिका में नीलाम होने जा रहा ‘सोने का टॉयलेट’ https://citytoday.co.in/4150 https://citytoday.co.in/4150 वाशिंगटन 
आपने पेंटिंग या पुरानी कलाकृतियों की नीलामी की खबरें अकसर सुनी होंगी लेकिन शायद ही कभी टॉयलट शीट की नीलामी की बात सोची भी हो। लंदन में बना एक बेहद कीमती सोने का टॉइलट सीट नीलामी के लिए तैयार है। खास बात यह है कि यह शीट एकदम ठोस सोने से बनी हुई है। मशहूर इटैलियन कलाकार मॉरिजियो कैटेलन ने इसे बनाया है। गौर करने वाली बात है कि उन्होंने इसका नाम 'अमेरिका' रखा है। न्यूयॉर्क के सॉथबी नीलामी घर में इस गोल्ड टॉइलेट की नीलामी होगी। इसकी शुरुआती कीमत ही 10 मिलियन डॉलर यानी करीब 83 करोड़ रुपये रखी गई है। कैटेलन ना कहना है कि यह टॉइलट संदेश देता है कि अमीर लोगों, दिखावे की जिंदगी का कोई फायदा नहीं है। टॉइलेट चाहे सोने का हो या फिर मिट्टी का, उसमें काम एक ही हो सकता है। यह एक कलाकृति ही है जो कि समाज में ऊंच-नीच और गरीब-अमीर के फर्क को रेखांकित करती है।

बनाने में लगा 101 किलो सोना
इस टॉइलेट शीट को बनाने में करीब 101 किलो सोने का इस्तेमाल किया गया है। जानकारी के मुताबिक टॉइलट केवल डिजाइनर नहीं बल्कि पूरी तरह से फंक्शनल है। 2019 में ब्लेनहीम पैलेस में भी इसी तरह का एक टॉइलट रखा गया था जो कि चोरी हो गया था। इसके बाद इसकी काफी चर्चा हुई थी। 2016 में इसे गगनहाइम म्यूजियम में लगाया गया था और लोगों के लिए खोला गया था। तब एक लाख से ज्यादा लोगों ने इसका इस्तेमाल किया था। डोनाल्ड ट्रंप को भी ऑफर दिया गया था कि वह इसे वाइट हाउस में रख सकते हैं। हालांकि उन्होंने ऑफर ठुकरा दिया। इस टॉइलट को बनाने वाले मॉरिजियो कैटेन का नाम कई बार विाद में रहा है। उन्होंने एक बार एक केले को दीवार से टेप लगाकर चिपकाकर कमीडियन नाम से बेच दिया था। एक कलाकृति में उन्होंने घुटनों पर बैठे हुए हिटलर को दिखाया था। यह 17.2 मिलियन डॉलर में बिकी थी।

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Sat, 01 Nov 2025 16:11:04 +0530 news desk MPcg
रूस ने क्रूज़ मिसाइल का परीक्षण, यूएस ने न्यूक्लियर परीक्षणों की तैयारी की घोषणा — किसके पास कितने हथियार? https://citytoday.co.in/4131 https://citytoday.co.in/4131 नई दिल्ली
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को पेंटगन को परमाणु हथियारों का परीक्षण तुरंत शुरू करने का आदेश दिया। ट्रंप के इस बयान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी। इससे पहले रूस ने क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया था। आइए जानते हैं किस देश के पास ज्यादा परमाणु हथियार हैं। इससे पहले रूस ने 26 अक्टूबर को क्रूज मिसाइल के परीक्षण की जानकारी दी थी। रूस के इस कदम के कुछ ही दिनों के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति ने परमाणु हथियारों को परीक्षण का आदेश दे दिया। ट्रंप ने यह दावा भी किया कि परमाणु हथियार के मामले में अमेरिका सबसे आगे है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीनी प्रेसिडेंट से मुलाकात के ठीक पहले परमाणु हथियार के परीक्षण को लेकर यह ऐलान किया। उन्होंने ट्रूथ सोशल पर लिखा, "संयुक्त राज्य अमेरिका के पास किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं। यह सब मेरे पहले कार्यकाल के दौरान ही संभव हो पाया, जिसमें मौजूदा हथियारों का पूर्ण नवीनीकरण और नवीनीकरण भी शामिल है। इसकी प्रचंड विनाशकारी शक्ति के कारण, मुझे ऐसा करना बहुत बुरा लगता था, लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं था।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए आगे लिखा, "रूस दूसरे स्थान पर है और चीन काफी दूर तीसरे स्थान पर है, लेकिन अगले पांच सालों में यह बराबरी पर आ जाएगा। अन्य देशों के परीक्षण कार्यक्रमों के कारण, मैंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि वह हमारे परमाणु हथियारों का समान आधार पर परीक्षण शुरू करे। यह प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी। 

वहीं, रूस ने क्रू मिसाइल परीक्षण की सफलता के बारे में कहा, "हमने परमाणु ऊर्जा से संचालित मिसाइल की कई घंटे लंबी उड़ान संचालित की। इस मिसाइल ने 14 हजार किलोमीटर (8,700 मील) की दूरी तय की, जो कि इसकी अधिकतम सीमा नहीं है।" बता दें कि रूस ने इसकी घोषणा साल 2018 में की थी। वहीं, इसका परीक्षण 21 अक्टूबर को किया गया। परीक्षण के दौरान रूस की ये क्रूज मिसाइल 15 घंटे तक हवा में रही। यूक्रेन के साथ युद्ध के बीच जब नाटो देशों ने रूस पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, तब पुतिन ने साफ शब्दों में कह दिया था कि वह परमाणु हमले के लिए तैयार हैं।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ये दावा कर रहे हैं कि अमेरिका के पास सबसे ज्यादा हथियार हैं, लेकिन आंकड़े कुछ और कह रहे हैं। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट नाम की संस्था के 2022 के आंकड़ों के हिसाब से रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट ने भारत समेत कुल 9 देशों के परमाणु हथियारों की संख्या की लिस्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में जो आंकड़े दिखाए गए हैं, वह 2025 की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक रूस के पास 5, 449 परमाणु हथियार हैं, जबकि नाटो देशों को मिलाकर 5792 परमाणु हथियार हैं। नाटो देशों में अमेरिका के पास 5277, फ्रांस के पास 290, ब्रिटेन के पास 225 परमाणु हथियार हैं। इसके अलावा चीन के पास 350, पाकिस्तान के पास 165, इजरायल के पास 90 और उत्तर कोरिया के पास 20 परमाणु हथियार हैं। बता दें कि यह आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट की ओर से ये आंकड़े जारी किए गए हैं।

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Fri, 31 Oct 2025 15:46:44 +0530 news desk MPcg
ट्रंप का धमाकेदार ऐलान: 33 साल बाद अमेरिका करेगा न्यूक्लियर टेस्ट, रूस&चीन को दी कड़ी चेतावनी https://citytoday.co.in/4130 https://citytoday.co.in/4130 वाशिंगटन

 दुनिया फिर से न्यूक्लियर डर के साये में आ गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा कदम उठा दिया है जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई. उन्होंने 33 साल बाद फिर से अमेरिका में परमाणु हथियारों के परीक्षण शुरू करने का आदेश दे दिया है. यह ऐलान उन्होंने किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं, बल्कि अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर किया वो भी उस वक्त जब वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए जा रहे थे.

ट्रंप का ट्रुथ सोशल पोस्ट- ‘अब बराबरी जरूरी है’

ट्रंप ने अपने Marine One हेलिकॉप्टर से उड़ान के दौरान पोस्ट किया कि  दूसरे देशों के परीक्षण कार्यक्रमों को देखते हुए मैंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि वे हमारे परमाणु हथियारों का परीक्षण तुरंत शुरू करें. यह प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी. उन्होंने लिखा कि रूस दूसरे नंबर पर है और चीन तीसरे पर, लेकिन चीन पांच साल में बराबरी कर लेगा. यानी, ट्रंप का कहना साफ था कि अगर दूसरे देश परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, तो अमेरिका क्यों पीछे रहे?

‘दूसरे कर रहे हैं तो हम क्यों नहीं?’- ट्रंप का तर्क

वॉशिंगटन लौटते समय ट्रंप ने कहा कि अगर रूस और चीन परीक्षण कर रहे हैं, तो अमेरिका को भी करना चाहिए. उनका कहना है कि दूसरे देश जब टेस्ट कर रहे हैं, तो हमें भी करना चाहिए. इससे हम अपने विरोधी देशों के बराबर रहेंगे. उन्होंने कहा कि टेस्ट साइट बाद में तय की जाएगी, लेकिन यह भी जोड़ा कि वे अब भी परमाणु निरस्त्रीकरण (denuclearisation) चाहते हैं. मैं चाहूंगा कि दुनिया परमाणु हथियारों से मुक्त हो, लेकिन जब तक दूसरे नहीं रुकते, हम भी नहीं रुकेंगे. हालांकि, यह साफ नहीं है कि ट्रंप असली परमाणु विस्फोट की बात कर रहे हैं या परमाणु मिसाइलों की उड़ान जांच (flight testing) की.

चीन-रूस की चालों के जवाब में ट्रंप का न्यूक्लियर कदम

ट्रंप का यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब रूस और चीन दोनों अपने परमाणु कार्यक्रमों में तेजी से निवेश कर रहे हैं. चीन ने पिछले दस सालों में अपनी परमाणु ताकत दोगुनी कर ली है. 2020 में 300 हथियार थे, जो 2025 में बढ़कर करीब 600 हो गए. अमेरिकी अधिकारियों का अनुमान है कि 2030 तक चीन के पास 1,000 से ज्यादा परमाणु हथियार होंगे.

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की रिपोर्ट कहती है कि हाल ही में चीन की विक्ट्री डे परेड में ऐसे पांच हथियार दिखाए गए जो अमेरिका तक पहुंच सकते हैं. वहीं रूस ने हाल ही में दावा किया है कि उसने Poseidon नाम की परमाणु-चालित टॉरपीडो और Burevestnik नाम की क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका परीक्षण करेगा, तो रूस भी करेगा.

दुनिया के तीन बड़े न्यूक्लियर खिलाड़ी

Arms Control Association के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका के पास 5,225 परमाणु हथियार, रूस के पास 5,580, चीन के पास करीब 600 है. ट्रंप ने कहा, “हमारे स्टॉक बहुत सुरक्षित हैं, लेकिन जब बाकी देश बढ़ रहे हैं तो हमें भी तैयारी रखनी चाहिए.” उन्होंने यह भी बताया कि वे रूस से बातचीत कर रहे हैं और अगर भविष्य में कोई समझौता होता है तो चीन को भी शामिल किया जाएगा.

अमेरिका के अंदर विरोध शुरू, कहा – ‘ट्रंप गलतफहमी में हैं’

ट्रंप के इस ऐलान पर अमेरिका में ही तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली. नेवादा की डेमोक्रेट सांसद डीना टाइटस ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि  मैं ऐसा बिल लाने जा रही हूं जो इस परीक्षण को रोक सके. वहीं Arms Control Association के डायरेक्टर डैरिल किम्बल ने कहा कि  ट्रंप गलतफहमी में हैं. 1992 के बाद अब अमेरिका को फिर से परमाणु विस्फोट करने की न तो जरूरत है और न कारण. उन्होंने चेतावनी दी कि यह फैसला दुनिया में परमाणु परीक्षणों की नई दौड़ शुरू कर सकता है और ‘नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी’ (NPT) को तोड़ सकता है. किम्बल का कहना है कि अगर अमेरिका ने कदम बढ़ाया तो रूस और चीन भी अपनी रफ्तार बढ़ा देंगे.

परमाणु युग की कहानी 

पहला परीक्षण संयुक्त राज्य अमेरिका ने जुलाई 1945 में न्यू मैक्सिको के अलामोगोर्डो में किया था. इसका पहला प्रयोग अगस्त 1945 में हुआ, जब हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराए गए. अमेरिका ने आखिरी परीक्षण 1992 में किया था. रूस ने आखिरी परीक्षण 1990 में किया था. चीन ने आखिरी परीक्षण 1996 में किया था. उत्तर कोरिया ने आखिरी परीक्षण 2017 में किया था. यानी, 1990 के दशक के बाद से लगभग सभी बड़े देश परमाणु विस्फोटक परीक्षण बंद कर चुके हैं, सिर्फ उत्तर कोरिया को छोड़कर.

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Fri, 31 Oct 2025 15:41:19 +0530 news desk MPcg
ट्रंप&जिनपिंग समझौता: अमेरिका ने टैरिफ घटाया, चीन देगा रेयर अर्थ मेटल और खरीदेगा सोयाबीन https://citytoday.co.in/4111 https://citytoday.co.in/4111 बीजिंग /वाशिंगटन

डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की साउथ कोरिया में हुई बैठक में बड़े फैसले लिए गए हैं. इसमें टैरिफ के मुद्दे पर बात बनी, तो वहीं ट्रंप के लिए सिरदर्द बनी सोयाबीन की खरीद भी फिर से शुरू होने पर सहमति बनी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसके बारे में बताते हुए कहा कि China Tariff को 10 फीसदी कम करते हुए 57% से 47% किया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्रपति के साथ बैठक शानदार रही है और इसमें कई बड़े फैसले लिए गए हैं. Soyabean पर भी इस दौरान चर्चा हुई और ट्रंप के मुताबिक चीन द्वारा सोयाबीन की खरीद तुरंत शुरू की जाएगी. 

US-China संबंधों की नई शुरुआत
Donald Trump ने गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ आर्थिक और व्यापारिक समझौतों को लेकर बड़ा ऐलान किया. इसमें उन्होंने चीन पर लागू टैरिफ में 10% की कटौती करते हुए इसे 57% से 47% किए जाने की जानकारी दी. तो वहीं दूसरी ओर कई अन्य विवादित मुद्दों पर चीन के साथ सहमति की बात कहते हुए इस बैठक अद्भुत करार दिया. उन्होंने कहा कि ये अमेरिका-चीन संबंधों में एक शानदार नई शुरुआत है. 

साउथ कोरिया के बुसान शहर में Donald Trump-Xi Jinping के बीच करीब दो घंटे से अधिक समय तक बंद कमरे बातचीत हुई. इसके बाद ट्रंप ने बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि बैठक में बहुत सारे निर्णय लिए गए और बहुत सी महत्वपूर्ण चीजों पर निष्कर्ष जल्द ही जारी किए जाएंगे.

'US में चीनी निर्यात में कोई बाधा नहीं…'
रेयर अर्थ मिनरल्स, चिप समेत अन्य ऐसे मुद्दे, जो बीते कुछ समय से अमेरिका और चीन के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह बने थे, उन्हें भी सुलझाने का दावा ट्रंप की ओर से किया गया है.चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक में बनी सहमतियों के बारे में बताते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि अब कोई भी रुकावट अमेरिका में चीनी निर्यात के प्रवाह में नहीं आएगी. 

चिप से रेयर अर्थ मिनरल्स तक बनी बात
डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस बात पर सहमति बनी है कि चीन फेंटेनाइल को रोकने के लिए कड़ी मेहनत करेगा. उन्होंने कहा कि कई मुद्दों पर चर्चा हुई, चिप्स के मुद्दे पर जिनपिंग NVIDIA और अन्य कंपनियों से चर्चा करेंगे.

इसके अलावा ट्रंप के साथ मौजूद अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर मुद्दा तय हो गया है और चीन दुर्लभ खनिजों के निर्यात को जारी रखेगा. US-China Deal को लेकर आए इस अपडेट के बाद सप्लाई चेन से संबंधित चिंताएं कम हो सकती हैं.

'सोयाबीन खरीदारी हमारे किसानों की जीत'
डोनाल्ड ट्रंप ने चीन द्वारा अमेरिकी सोयाबीन की खरीद को तुरंत फिर से शुरू करने को लेकर कहा कि, 'यह हमारे किसानों के लिए एक बहुत बड़ी जीत है. अब अमेरिका औऱ चीन के व्यापारिक संबंध बहुत अलग नजर आने वाले हैं.' बता दें कि US Soyabean के लिए चीन सबसे बड़ा खरीदार रहा है. बीते साल अमेरिका ने करीब 24.5 अरब डॉलर मूल्य का सोयाबीन निर्यात किया था और इसमें से 12.5 अरब डॉलर मूल्य की सोयाबीन को अकेले चीन ने ही खरीदा था. हालांकि, टैरिफ टेंशन के चलते ड्रैगन ने इसकी खरीद रोककर अमेरिका को तगड़ा झटका दिया था. 

दूसरी ओर चीन द्वारा रेयर अर्थ मिनरल्स पर प्रतिबंध बढ़ाने के बाद दोनों देशों के बीच तनातनी और भी बढ़ गई थी. China के इस कदम पर पलटवार करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 100% टैरिफ लगाने का ऐलान तक कर दिया था. हालांकि, अब दोनों के बीच इस तमाम मुद्दों को लेकर सहमति बन गई है. 

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Thu, 30 Oct 2025 14:50:22 +0530 news desk MPcg
ब्राजील में नशे की तस्करी पर कार्रवाई, 119 से ज्यादा मौतों के बाद जनता में आक्रोश https://citytoday.co.in/4110 https://citytoday.co.in/4110 रियो डी जनेरियो

साउथ अमेरिका के देश ब्राजील में मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह पर छापेमारी हुई है। इसमें 119 लोगों की मौत हो गई है। बुधवार को इन मौतों के बाद ब्राजील में काफी प्रदर्शन हुए। इसके अलावा गवर्नर से भी इस्तीफे की मांग की गई है। पुलिस की छापेमार कार्रवाई में रियो डि जनेरियो में ये मौतें हुई हैं। पुलिस की इस कार्रवाई को शहर के इतिहास की सबसे घातक कार्रवाई माना जा रहा है। लोगों ने सड़क पर शव रख कर प्रदर्शन किए और पुलिस पर एक खास वर्ग के लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। इन लोगों ने कहा कि पुलिस पर सख्त ऐक्शन होना चाहिए।

बड़ी संख्या में लोग सरकारी मुख्यालय के सामने एकत्र हुए। उन्होंने नारे लगाए और लाल रंग से रंगे ब्राजीलियाई झंडे लहराए। मृतकों की संख्या और शवों की अवस्था (विकृति और चाकू के घाव आदि) को लेकर तत्काल सवाल उठने लगे। ब्राजील के उच्चतम न्यायालय, अभियोजकों और सांसदों ने गवर्नर कास्त्रो से अभियान की विस्तृत जानकारी प्रदान करने को कहा। कई नेताओं ने हैरानी जताई कि आखिर पुलिस के ऐक्शन में इतने लोगों की मौत कैसे हो सकती है। मृतकों की कुल संख्या अधिकारियों द्वारा पूर्व में बताई गई संख्या से कहीं अधिक है। अधिकारियों ने पहले कहा था कि 60 लोग मारे गए हैं।

छापे की कार्रवाई लगभग 2,500 पुलिसकर्मियों और सैनिकों ने पेन्हा और कॉम्प्लेक्सो डी अलेमाओ में की थी। स्थानीय निवासी एलिसांगेला सिल्वा सैंटोस (50) ने पेन्हा में कहा, 'वे उन्हें जेल ले जा सकते थे, उन्हें इस तरह क्यों मार रहे हैं? उनमें से बहुत से जिंदा थे और मदद के लिए पुकार रहे थे। हां, वे तस्कर हैं, लेकिन वे इंसान हैं।' पुलिस और सैनिकों ने हेलीकॉप्टरों, बख्तरबंद वाहनों और पैदल ही अभियान शुरू किया, जिसका लक्ष्य ‘रेड कमांड’ गिरोह था। फिलहाल ब्राजील में इस घटनाक्रम के चलते तनाव की स्थिति है और बड़ी संख्या में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल को तैनात किया गया है।

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Thu, 30 Oct 2025 14:44:36 +0530 news desk MPcg
70 की उम्र में खुशखबरी! एक्टर केल्सी ग्रामर बने आठवीं बार पिता https://citytoday.co.in/4103 https://citytoday.co.in/4103 लंदन 

70 साल के हॉलीवुड टीवी स्टार केल्सी ग्रामर अभी भी अपने परिवार को बढ़ा रहे हैं. हाल ही में उनके 8वें बच्चे का जन्म हुआ है. 'चीयर्स' और 'फ्रेजयर' जैसे शोज काम कर चुके एक्टर केल्सी ग्रामर, इस साल फरवरी में 70 साल के हुए थे. अब वह आठ बच्चों के पिता बन गए हैं. ग्रामर ने 'पॉड मीट्स वर्ल्ड' पॉडकास्ट में शिरकत के दौरान इस बात का ऐलान किया कि उन्होंने और उनकी पत्नी केट वॉल्श ने अपने चौथे बच्चे का स्वागत किया है. ये एक्टर का आठवां बच्चा है.

8वीं बार पिता बनें केल्सी ग्रामर 

पॉडकास्ट के सोमवार को आए एपिसोड में केल्सी ग्रामर ने कहा, 'हमने अभी अपने चौथे बच्चे का स्वागत किया है. अब यह आठ बच्चों का परिवार हो गया है. क्रिस्टोफर, यही वह है जो अभी परिवार में शामिल हुआ है.' एमी अवॉर्ड विनर केल्सी, टीवी के दिग्गज एक्टर हैं. उन्होंने कहा कि उनका नया बेटा एपिसोड की रिकॉर्डिंग से 'तीन दिन' पहले पैदा हुआ था. उन्होंने पॉडकास्ट होस्ट राइडर स्ट्रॉन्ग, डेनियल फिशेल और विल फ्रीडल के साथ मजाक किया कि उनके पास अलग-अलग उम्र के बच्चों के 'समूह' हैं.

ग्रामर और 46 साल की केट वॉल्श ने 2011 में शादी की थी. कपल के पास एक टीनएज बेटी और दो बेटे भी हैं. पीपल मैगजीन ने जून में बताया था कि यह कपल फिर से पेरेंट्स बनने वाला है. लंदन में सैर करते हुए दोनों की तस्वीरें वायरल हुई थीं. पांच बार एमी विनर रहे ग्रामर ने चार बार शादी की है. वॉल्श से पहले, उनकी शादी डांसर-मॉडल कैमिल डोनाटाची से हुई थी. इससे पहले वे ली-ऐन चुहानी से और उससे पहले डांस इंस्ट्रक्टर डोरीन एल्डरमैन से शादी कर चुके हैं. केल्सी ग्रामर के सात और बच्चे हैं, जिनमें सबसे बड़ी एक्ट्रेस स्पेंसर ग्रामर हैं.

बढ़ती उम्र में पिता बनकर हैं खुश

सिटकॉम स्टार केल्सी ग्रामर, अक्टूबर 2011 में नाना बने थे. उनकी बेटी स्पेंसर ने अपने तब पति रहे जेम्स हेस्केथ के साथ एक बेटे का स्वागत किया था. अतीत में, ग्रामर ने 'बुजुर्ग पिता होने की सुंदरता' के बारे में खुलकर बात की हुई है. उन्होंने 2018 में द गार्जियन को बताया कि जिंदगी के बाद के सालों में बच्चों को पालने से उन्हें 'फिर से कोशिश करने का मौका' मिलने का सौभाग्य महसूस होता है. यह एक वास्तविक उपहार रहा है.

केल्सी ग्रामर ने अपने आठवें बच्चे के आगमन की घोषणा अपनी किताब 'केरेन ए ब्रदर रिमेम्बर्स' के प्रमोशन के दौरान की. ये किताब मई में रिलीज हुई थी. इसमें उनकी 18 साल की बहन की क्रूर हत्या और दुख के साथ उनकी जीवन भर की लड़ाई के बारे में लिखा हुआ है. एपिसोड के दौरान, फिशेल ने एक्टर से पूछा कि उनके बच्चों को उनकी दिवंगत बहन के बारे में कितना पता है.

इसके बारे में एक्टर ने बताया कि उनके बड़े बच्चों को उनकी बहन के बारे में अलग-अलग स्तर की जानकारी है, जबकि छोटे बच्चों को अभी और जानने और उनकी किताब पढ़ने के लिए इंतजार करना होगा. उन्होंने कहा, 'कुछ चीजें बहुत क्रूर हैं, उन्हें अभी उसका सामना करने की जरूरत नहीं है.' पॉडकास्ट एपिसोड के दौरान ग्रामर ने अपनी बहन के मामले की कार्यवाही और अपने इस नुकसान को झेलते हुए टीवी पर लोगों को हंसाने के दिनों को याद किया. उन्होंने कहा, 'मैं इसके बारे में ज्यादा बात नहीं करता था, जब यह हुआ उस दिन से अभी तक ये चीज मेरे साथ है.'

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Wed, 29 Oct 2025 19:25:32 +0530 news desk MPcg
ट्रंप&शी मुलाकात से पहले ‘दर्द की गोली’ पर चर्चा! आखिर क्या है अमेरिका&चीन के बीच नई रणनीति? https://citytoday.co.in/4099 https://citytoday.co.in/4099 वाशिंगटन 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के शी जिनपिंग की साउथ कोरिया में मुलाकात हो सकती है। एशिया-पैसिफिक समिट के दौरान यह मीटिंग होगी, जिसका एजेंडा भी डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि मैं शी जिनपिंग के साथ फेंटानिल पर बात करूंगा। इसी दवा की सप्लाई दोनों देशों के बीच विवाद का विषय बनी है और अमेरिका ने चीन पर टैरिफ लादे हैं। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि मैं शी जिनपिंग के साथ मीटिंग में फेंटानिल दवा और किसानों के मसले पर बात करूंगा। दोनों की मीटिंग गुरुवार को होने की संभावना है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यदि चीन की ओर से फेंटानिल दवा में इस्तेमाल होने वाले केमिकल के निर्यात पर नियंत्रण लगता है तो फिर हम टैरिफ में कमी करेंगे। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि हम चीन पर लादे गए फेंटानिल टैरिफ में 20 फीसदी तक की कमी करेंगे। फिलहाल चीनी उत्पादों पर अमेरिका में 55 फीसदी टैक्स लग रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया है कि मीटिंग में ताइवान का मसला नहीं उठेगा। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि हम इस पर बात करेंगे।  

फेंटेनाइल एक दर्द निवारक दवा है, जिसे नशे के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा रहा है। यह मॉर्फिन या हेरोइन की माफिक नशा करती है। यह पूरी तरह से प्रयोगशालाओं में बनाई जाती है, जिसमें कोई प्राकृतिक तत्व नहीं होता। आमतौर पर इसे दर्द निवारक दवा के रूप में लेने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसकी ओवरडोज घातक है। अमेरिका में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल दर्द जैसी समस्या से निजात पाने की बजाय नशे के लिए किए जाने की खबरें हैं। इसी के चलते अमेरिका चाहता है कि चीन उन केमिकल्स का निर्यात रोक दे, जिनसे यह दवा तैयार होती है। अमेरिका ने इसी चिंता के तहत चीन पर टैरिफ भी लादे हैं। अब यही दवा एक बार फिर से दोनों ताकतवर मुल्कों के बीच चर्चा का विषय होगी।

कैसे लोग हो जाते हैं फेंटेनाइल की लत का शिकार
फेंटेनाइल कई अन्य नशीली दवाओं की तुलना में अधिक शक्तिशाली है। इसकी थोड़ी सी मात्रा भी घातक ओवरडोज़ का कारण बन सकती है। ऐसा तब भी हो सकता है जब कोई व्यक्ति बिना जाने फेंटेनाइल ले ले, अगर इसे नकली प्रिस्क्रिप्शन गोलियों या अन्य अवैध दवाओं में मिलाया गया हो। फेंटेनाइल टेस्ट स्ट्रिप्स का उपयोग करने से फेंटेनाइल युक्त दवाओं के उपयोग के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों को अकसर लत हो जाती है। इसके बार-बार उपयोग से मस्तिष्क की गतिविधि में परिवर्तन होता है जिसके कारण लोग हानिकारक प्रभावों का अनुभव होने पर भी इसका उपयोग जारी रखते हैं।

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Wed, 29 Oct 2025 17:23:22 +0530 news desk MPcg
इजरायल ने हमास पर फिर शुरू किया एक्शन, पहले बंधक छुड़ाए अब हमास पर हमला https://citytoday.co.in/4098 https://citytoday.co.in/4098 गाज़ा 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि गाजा में अगर इजरायल के सैनिक मारे जाते हैं तो उसे जवाबी हमला करना चाहिए. राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार इजरायल को जवाबी कार्रवाई का अधिकार है. इस बीच इजरायल ने गाजा में हमास पर फिर से अटैक किया है. इजरायल के ताजा हवाई हमलों में कम से कम 30 लोग मारे गए हैं और दर्जनों घायल हुए हैं.

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे हमास के खिलाफ "शक्तिशाली हमला" बताया है. इजरायल का यह हमला इस महीने की शुरुआत में अमेरिका द्वारा मध्यस्थता किए गए युद्धविराम के बावजूद हुआ है. हालांकि ट्रंप ने कहा है कि कोई भी घटना 'सीजफायर' को खत्म नहीं कर सकती है. 

बता दें कि इजरायल और हमास के बीच अक्टूबर 2025 में हुए सीजफायर के बाद हमास ने 13 अक्टूबर को सभी 20 जीवित बंधकों को रिहा किया, बदले में इजरायल ने फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ा. 

दोनों देशों के बीच सीजफायर 9-10 अक्टूबर को प्रभावी हुआ, जिसमें हमास ने 13 अक्टूबर को सभी 20 जीवित इजरायली बंधकों को रिहा किया, बदले में इजरायल ने करीब 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों को मुक्त किया. 

इजरायल और हमास के बीच सीजफायर क्यों टूटा?

इजरायल और हमास के बीच सीजफायर पहले ही अविश्वास की बुनियाद पर पनपा था. हमास ने 20 जिंदा इजरायली बंधकों को छोड़ दिया. इसके बाद जब मृत बंधकों को छोड़े की बारी आई तो इजरायल ने आरोप लगाया कि हमास ने उसके नागरिकों के क्षत-विक्षत शव सौंपे हैं जो समझौते का ' स्पष्ट उल्लंघन'है.

एक इजरायली सैन्य अधिकारी ने कहा कि हमास के आतंकवादियों ने तथाकथित पीली रेखा के पूर्व में इज़राइली फोर्सेज पर हमला किया. ये रेखा गाजा के इज़राइली कब्जे वाले हिस्से को शेष क्षेत्र से अलग करती है. सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार राफा क्षेत्र में तैनात सैनिक कथित तौर पर रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) और स्नाइपर फायरिंग की चपेट में आ गए. इस दौरान इजरायल के दो सैनिक मारे गए. हमास ने इन हमलों में हाथ होने से इनकार किया है.

इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सीजफायर टूट गया. 

हमास के हमले के बाद इजारायली रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने चेतावनी दी कि इज़राइली रक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए हमास को "भारी कीमत" चुकानी पड़ेगी. काट्ज की टिप्पणी के तुरंत बाद गाजा सिविल डिफेंस ने बताया कि गाजा शहर के अल-सबरा इलाके में एक इज़रायली हवाई हमला हुआ है. 

हमास ने इसका खंडन किया और इजरायल को हमलों को दोषी ठहराया. 28 अक्टूबर को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को 'शक्तिशाली और तत्काल' हमले का आदेश दिया, जिसमें गाजा पर हवाई स्ट्राइक्स हुईं. इनमें कम से कम 30 लोग मारे गए. 

क्या अब हमास का खात्मा करेगा इजरायल?

ट्रंप भले ही कह रहे हो कि सीजफायर अभी भी कायम है लेकिन इजरायल ने हमलों की नई खेप में गाजा पट्टी पर जबर्दस्त अटैक किए हैं. इस दौरान 30 लोग मारे गए हैं. 

हमेशा से इजरायल का लक्ष्य हमास की सैन्य ताकत को कमजोर करना और उसके नेटवर्क को नेस्तनाबूद करना है. इजरायली नेतृत्व लगातार बयान दे रहा है कि यदि हमास ने सीजफायर या शांति की शर्तें नहीं मानीं, तो उसका पूरी तरह सफाया किया जाएगा. 

सीजफायर के तुरंत बाद इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था, "हमास इस समझौते पर तभी राजr हुआ जब उसे लगा कि तलवार उसकी गर्दन पर टिकी है और वह अब भी उसकी गर्दन पर ही है… हमास को निरस्त्र कर दिया जाएगा और गाजा से सभी हथियार हटा दिए जाएंगे."

तब अपनी मंशा जाहिर करते हुए नेतन्याहू ने कहा था, "अगर यह आसान तरीके से हो जाए, तो और भी अच्छा. और अगर नहीं, तो इसे कठिन तरीके से हासिल किया जाएगा."

सैन्य विश्लेषक मानते हैं कि अगले दिनों में इजरायल और भी आक्रामक हो सकता है. 

बता दें कि नेतन्याहू की कैबिनेट हमेशा से हमास के खिलाफ कठोर कदम उठाने की समर्थक रही है. इजरायल वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच ने "हमास के लगातार उल्लंघनों के जवाब में" बदले में रिहा किए गए फ़िलिस्तीनियों को फिर से गिरफ़्तार करने का आग्रह किया था. 

वहीं इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने कहा कि इसका सही जवाब "हमास को पूरी तरह से नष्ट करना" है. 

हमास और इजरायल के बीच की दुश्मनी अब किस ओर जाएगी, इजरायल कितना आक्रामक होगा अब ये अमेरिकी रुख पर निर्भर करता है. 

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Wed, 29 Oct 2025 17:11:36 +0530 news desk MPcg
तुर्की के सिंदिर्गी में 6.1 तीव्रता का भूकंप, झटके इस्तांबुल और इजमिर तक महसूस, राहत कार्य जारी https://citytoday.co.in/4077 https://citytoday.co.in/4077

सिंदिर्गी

तुर्की में भोरे-भोरे जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्कैल पर इसकी तीव्रता करीब 6.1 थी. इससे भारी नुकसान की आशंका है. यह भूकंप पूर्वी तुर्की के इलाके में आई है. स्थानीय समय के अनुसार सोमवार देर पूर्वी तुर्की के सिंदिर्गी शहर में यह भूंकप आया. बीते तीन महीनों में इस क्षेत्र को प्रभावित करने वाला दूसरा बड़ा भूकंप है. तुर्की की आपदा और आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी (AFAD) के अनुसार भूकंप स्थानीय समयानुसार रात 10:48 बजे (1948 GMT) आया. इसका असर देश की आर्थिक राजधानी इस्तांबुल और पर्यटक स्थल इजमिर तक महसूस किया गया.

अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. आंतरिक मामलों के मंत्री अली येरलिकाया ने बताया कि अगस्त में आए पिछले भूकंप के बाद खाली किए गए तीन भवनों और एक दुकान के ढहने की सूचना है, लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई. सिंदिर्गी, इजमिर से लगभग 138 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में पहाड़ी क्षेत्र में बसा एक छोटा शहर है, जो भूकंपीय गतिविधियों के लिए संवेदनशील है.

अगस्त में भी आया था भूकंप

इससे पहले 10 अगस्त को सिंदिर्गी में 6.1 तीव्रता के भूकंप ने एक व्यक्ति की जान ले ली थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे. तुर्की भौगोलिक रूप से कई फॉल्ट लाइनों से होकर गुजरता है, जिसके कारण यह क्षेत्र भूकंपों के लिए अत्यधिक संवेदनशील है. फरवरी 2023 में दक्षिण-पश्चिम तुर्की में आए 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने अंताक्या (प्राचीन शहर एंटिओक) को तबाह कर दिया था, जिसमें कम से कम 53,000 लोगों की मौत हुई थी. इसके अलावा जुलाई की शुरुआत में इसी क्षेत्र में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और 69 लोग घायल हुए थे. स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं. भूकंप के बाद लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है.

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Tue, 28 Oct 2025 14:03:24 +0530 news desk MPcg
ब्रिटेन की ‘Eastern Airways’ पर संकट के बादल: दिवालियापन की कगार पर, 8 लाख यात्रियों की उड़ानें खतरे में https://citytoday.co.in/4076 https://citytoday.co.in/4076 लंदन

यूरोप की एक और प्रमुख एयरलाइन Eastern Airways अब प्रशासनिक संकट की ओर बढ़ रही है। इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के कई शहरों को जोड़ने वाली यह क्षेत्रीय विमान सेवा कंपनी सिर्फ कुछ ही दिनों में दिवालिया घोषित हो सकती है, जिससे हज़ारों यात्रियों की यात्रा योजनाएम प्रभावित होंगी।1997 में स्थापित Eastern Airways हर साल लगभग 8 लाख (800,000) यात्रियों को सेवा देती है और ब्रिटेन के क्षेत्रीय हवाई नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती है।

 इसके वर्तमान गंतव्यों में स्कॉटलैंड के विक और एबरडीन, तथा इंग्लैंड के हंबरसाइड, टीसाइड इंटरनेशनल, लंदन गैटविक और न्यूक्वे जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। कभी यह एयरलाइन ब्रिटेन से जिब्राल्टर के लिए भी उड़ानें चलाती थी, लेकिन 2021 में शुरू हुई यह सेवा सिर्फ एक साल बाद बंद कर दी गई। इसी तरह, मार्च 2023 में कार्डिफ़ से पेरिस ऑर्ली (फ्रांस) के बीच चलने वाला मार्ग भी रद्द कर दिया गया था। हाल ही में Eastern Airways ने कॉर्नवाल के न्यूक्वे से लंदन साउथएंड एयरपोर्ट (एसेक्स) के बीच नई उड़ानें शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन यह रूट अब कंपनी की वेबसाइट से हटा दिया गया है, जो गंभीर वित्तीय स्थिति का संकेत देता है।

 Eastern Airways केवल एक वाणिज्यिक एयरलाइन ही नहीं, बल्कि यह यूरोप की सबसे बड़ी चार्टर फ़्लाइट प्रदाता कंपनी भी है  जो प्रीमियर लीग और चैंपियनशिप फ़ुटबॉल टीमों, रग्बी यूनियन और सुपर लीग टीमों को विशेष उड़ानें उपलब्ध कराती है। एयरलाइन विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती ईंधन कीमतें, श्रमिक लागत और कोविड के बाद की आर्थिक चुनौतियों ने इस कंपनी को गहरे वित्तीय संकट में धकेल दिया है।

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Tue, 28 Oct 2025 14:00:13 +0530 news desk MPcg
इस्तांबुल में Pak&Afghan वार्ता का दूसरा दौर तनावपूर्ण, पाकिस्तान ने दी खुली चेतावनी—‘बात बनी तो ठीक, वरना जंग तय!’ https://citytoday.co.in/4060 https://citytoday.co.in/4060 इस्लामाबाद 
पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए एक संयुक्त निगरानी और निरीक्षण तंत्र स्थापित करने के लिए इस्तांबुल में दूसरे दौर की वार्ता की। इस बीच पाकिस्तान ने चेतावनी दी कि यदि वार्ता आतंकवाद के बारे में उसकी मुख्य चिंता का समाधान करने में विफल रही तो युद्ध अब भी एक विकल्प है। इस महीने के शुरू में झड़पों में दर्जनों सैनिक, नागरिक और आतंकवादी मारे गए थे, जिससे युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। लेकिन 19 अक्टूबर को दोहा में कतर और तुर्किये की मदद से दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत के बाद अस्थायी रूप से शांति बहाल हो गयी।

दोहा में बनी सहमति के अनुसार, पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच दूसरे दौर की वार्ता शनिवार को तुर्किये के इस्तांबुल में हुई। ‘रेडियो पाकिस्तान' ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि चर्चा सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने तथा व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए एक संयुक्त निगरानी और निरीक्षण तंत्र स्थापित करने पर केंद्रित रही। दोनों पक्षों ने दीर्घकालिक राजनीतिक समझ तक पहुंचने की संभावना पर भी विचार-विमर्श किया। ‘जियो न्यूज' ने खबर दी है कि पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की वार्ता के दौरान अफगान तालिबान को एक व्यापक आतंकवाद-रोधी योजना सौंपी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने गृह नगर सियालकोट में पत्रकारों के साथ बातचीत में चेतावनी दी कि अगर वार्ता विफल रही तो अफगान तालिबान शासन के साथ ‘पूरी तरह से युद्ध' छिड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि वार्ता का नतीजा आज नहीं, तो कल तक पता चल ही जाएगा।
 
रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले चार-पांच दिनों में सीमा पर कोई झड़प नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि दोहा में पहले दौर की वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच जिन 80 प्रतिशत बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन्हें लागू किया जा रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान एक ऐसे समझौते पर सहमत होंगे जो क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करेगा। अपनी अगुवाई में हुई पहली वार्ता को याद करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि वार्ता के दौरान उन्हें शांति की इच्छा महसूस हुई। उन्होंने हालांकि, इस बात पर खेद व्यक्त किया कि अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में आतंकवाद का समर्थन किया, जबकि पाकिस्तान चार दशकों से भी ज़्यादा समय से उनकी मेज़बानी कर रहा है।

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Mon, 27 Oct 2025 17:26:59 +0530 news desk MPcg
मां का दूध पिया है तो मैदान में आ’ – TTP कमांडर ने पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर को दी खुली चुनौती https://citytoday.co.in/4043 https://citytoday.co.in/4043 काबुल 

पाकिस्तान के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) एक ऐसा नासूर बन गया है, जिसे खत्म करना उसके लिए चुनौती बन चुका है. टीटीपी के लड़ाके न केवल पाकिस्तानी सेना को खुली चुनौती दे रहे हैं, बल्कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर को भी सीधे ललकार रहे हैं. 

हाल ही में टीटीपी ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कुर्रम जिले में 8 अक्टूबर को किए गए हमले का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उनके दावे के अनुसार 22 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे. हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने इस हमले में अपने 11 सैनिकों के मारे जाने की बात कही थी. वीडियो में टीटीपी ने पाकिस्तानी सैनिकों से छीने गए हथियार, वाहन और एक क्वाडकॉप्टर ड्रोन भी दिखाया है. 

आसिम मुनीर को टीटीपी कमांडर की धमकी

टीटीपी द्वारा जारी वीडियो में उसका शीर्ष कमांडर अहमद काजिम पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर को सीधे चुनौती दे रहा है. काजिम के सिर पर पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में 10 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया है. वीडियो में काजिम कहता है, 'आपके सामने यह जो गाड़ी खड़ी है, यह मुजाहिद्दीन को अल्लाह ने दे दी है. दो दिन पहले हुई जंग में दुश्मन के जान और माल का भारी नुकसान हुआ.'

अहमद काजिम वीडियो में दावा कर रहा है कि टीटीपी के हमले में पाकिस्तान के तकरीबन 22 फौजी मारे गए, जिनमें मेजर तैयब और कर्नल जुनैद भी शामिल थे. वह कहता है, 'उनकी गाड़ी हमने जला दी. मुजाहिद्दीन को कई हथियार मिले हैं. इंशा अल्लाह यह जंग का सिलसिला जारी रहेगा. अगर आप (पाक सेना के बड़े अधिकारी) मर्द हैं, मां का दूध पिया है तो आम सैनिकों को भेड़-बकरियों की तरह भेजने की जगह खुद मैदान में आओ. हम आपको जंग का मजा चखाएंगे.'

कुर्रम जिले के डोगर में TTP ने किया था हमला

टीटीपी ने कुर्रम जिले के डोगर इलाके में जोगी सैन्य किले पर किए गए हमले का वीडियो जारी किया है. टीटीपी ने दावा किया है कि इस हमले में उसके लड़ाकों ने पाकिस्तानी सैनिकों से भारी मात्रा में गोला-बारूद, 20 राइफलें, दो हिलक्स पिकअप वाहन और एक क्वाडकॉप्टर ड्रोन कैमरा अपने कब्जे में ले लिया. इस हमले की अगुआई खुद कमांडर अहमद काजिम ने की थी, जो TTP का ‘शैडो गवर्नर’ माना जाता है.

टीटीपी का कहना है कि पाकिस्तानी सेना को अपने सैनिकों को बेकार में मरने के लिए भेजने की बजाय अपने शीर्ष अधिकारियों को जंग के मैदान में उतारना चाहिए. गत 21 अक्टूबर को पाकिस्तानी अधिकारियों ने टीटीपी कमांडर अहमद काजिम की गिरफ्तारी या सूचना देने के लिए 10 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की थी. यह इनाम TTP के इस शीर्ष कमांडर की बढ़ती सक्रियता और हमलों को देखते हुए घोषित किया गया. पाकिस्तानी सेना ने टीटीपी  के इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
 

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Fri, 24 Oct 2025 15:55:43 +0530 News desk Hindi
यूक्रेन में किम जोंग उन ने कुर्बान किए हजारों सैनिक, अब उनके सम्मान में बना रहे स्मारक https://citytoday.co.in/4042 https://citytoday.co.in/4042 फियोंगयांग

यूक्रेन के साथ युद्ध में रूस का खुलकर समर्थन करने वाला उत्तर कोरिया अब अपने सैनिकों के लिए स्मारक बनवा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस-यूक्रेन के युद्ध में उत्तर कोरिया के हजारों सैनिक मारे गए हैं। उत्तर कोरिया की न्यूज एजेंसियों के मुताबिक राजधानी प्योंगयांग में इस स्मारक की नींव रखी गई है। शिलान्यास कार्यक्रम में उत्तर कोरिया में रूस के राजदूत और खुद किम जोंग उन शामिल हुए थे।

किम ने कहा कि यह म्यूजियम सच्चे देशभक्तों के लिए बनाया जा रहा है। बता दें कि उत्तर कोरिया जो कि दुनियाभर में सबसे अलग-थलग देश माना जाता है, उसकी रूस के साथ खूब बन रही है। पश्चिमी रूस से यूक्रेनी सेना को खदेड़ने के लिए किम जोंग उन ने हथियार और हजारों सैनिक रूस भेजे थे। दक्षिण कोरिया की मीडिया के मुताबिक इस युद्ध में उत्तर कोरिया के करीब 6 हजार सैनिक मारे गए हैं और हजारों सैनिक घायल हुए हैं।

किम जोंग उन ने रूस की मदद करने के लिए अपने सैनिकों की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय उन सैनिकों को समर्पित है जिन्होने राष्ट्रभक्ति की भावना का परिचय देते हुए रूस के लिए लड़ते हुए अपनी जान दे दी। इस मौके पर सेना के बड़े अधिकारियों के साथ उन सैनकों के परिवारवाले भी मौजूद थे जिनकी रूस में मौत हो गई है।

बता दें कि रूस और उत्तर कोरिया में बड़ा सैन्य समझौता हुआ है जिसके मुताबिक युद्ध की स्थिति में दोनों को एक दूसरे के साथ खड़े होना है। वहीं उत्तर कोरिया लगातार नए-नए हथियारों का परीक्षण करता रहता है। हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने विभिन्न हाइपरसोनिक हथियार प्रणालियों का परीक्षण किया है। ये हथियार ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक गति से उड़ान भरने में सक्षम बताए जाते हैं और अपने मार्ग से मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भ्रमित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने यह सवाल उठाया है कि क्या उत्तर कोरियाई मिसाइलें वास्तव में परीक्षणों के दौरान उतनी ही गति से उड़ान भर रही हैं जितनी गति का दावा किया जाता है।

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Fri, 24 Oct 2025 15:46:22 +0530 News desk Hindi
एपस्टीन केस में नया खुलासा! सर्वाइवर की आत्मकथा में ‘नामी PM’ पर सनसनीखेज आरोप https://citytoday.co.in/4035 https://citytoday.co.in/4035 लंदन /न्यूयॉर्क 

जेफरी एपस्टीन सेक्स कांड की मुखर सर्वाइवरों में से एक रही वर्जीनिया गिफ्रे की कहानी पर आधारित पुस्तक अमेरिका और यूरोप में बवंडर लेकर आई है. वर्जीनिया गिफ्रे की मौत के बाद बाजार में आ रही पुस्तक नोबॉडीज गर्ल (Nobody’s Girl) जेफरी एपस्टीन और उसके सेक्स सिंडिकेट के कारनामों की दास्तान है. इस पुस्तक में वर्जीनिया गिफ्रे के हवाले से दावा किया गया है कि एक 'नामी-गिरामी प्रधानमंत्री' ने उनके साथ रेप किया था. 

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में उनकी मृत्यु के छह महीने बाद प्रकाशित इस संस्मरण में दुनिया भर के शक्तिशाली पुरुषों के हाथों वर्षों तक चले यौन शोषण, जबरदस्ती और तस्करी का बेबाक विवरण दिया गया है. 

इस संस्मरण में गिफ्रे बताती हैं कि कैसे एपस्टीन ने उसे तस्करी के जरिये अपने कैद में किया फिर उसके कई प्रभावशाली सहयोगियों ने उनका यौन शोषण किया. किताब में सबसे चौंकाने वाले दावों में से एक, एक अनाम "जाने-माने प्रधानमंत्री" से जुड़ा है. वर्जीनिया ने इस 'अनाम पीएम' पर बेरहमी से पिटाई और बलात्कार का आरोप लगाया है. 

गिफ्रे इस साल की शुरुआत में अपनी मृत्यु से पहले पुरस्कार विजेता पत्रकार और लेखिका एमी वालेस के साथ मिलकर "नोबडीज़ गर्ल: अ मेमॉयर ऑफ़ सर्वाइविंग एब्यूज़ एंड फाइटिंग फ़ॉर जस्टिस" नाम के संस्मरण पर काम कर रही थीं.

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार 400 पृष्ठों वाली यह पुस्तक 21 अक्टूबर को बाजार में आई है. 

गिफ्रे ने इस कथित घटना का विस्तृत विवरण दिया और बताया कि कैसे "उनका इस्तेमाल किया गया और उन्हें अपमानित किया गया और कई बार तो उनका गला घोंटा गया उन्हें पीटा गया और खून से लथपथ कर दिया गया." उन्होंने लिखा कि उन्हें डर था कि वह "एक यौन दासी के रूप में मर जाएंगी."

…वो और उत्तेजित हो गया

गिफ्रे की दास्तान विवरण के अनुसार यह हमला एपस्टीन के निजी कैरिबियाई द्वीप पर हुआ था जब वह 18 वर्ष की थीं. गिफ्रे ने लिखा, "उसने बार-बार मेरा गला दबाया जब तक कि मैं बेहोश नहीं हो गई और मुझे अपनी जान के लिए डरते हुए देखकर उसे खुशी हुई. जब उसने मुझे चोट पहुंचाई तो वो प्रधानमंत्री हंसा और जब मैंने उससे रुकने की विनती की तो वो और उत्तेजित हो गया."

उन्होंने कहा कि उन्होंने एपस्टीन से विनती की कि उन्हें उस राजनेता के पास वापस न भेजें, लेकिन उन्होंने उनकी विनती ठुकरा दी और कथित तौर पर ठंडे स्वर में कहा, "कभी न कभी तो तुम्हें यह सब झेलना पड़ेगा."

उनके संस्मरण के अमेरिकी एडिशन में कथित अपराधी को "एक प्रसिद्ध प्रधानमंत्री" बताया गया है, जबकि ब्रिटिश संस्करण में कथित तौर पर उन्हें "पूर्व मंत्री" बताया गया है. इस आरोपी राजनेता की पहचान उजागर नहीं की गई. 

प्रिंस एंड्रयू पर आरोप

गिफ्रे के संस्मरण ने प्रिंस एंड्रयू को फिर से सुर्खियों में ला दिया है. उन्होंने प्रिंस पर किशोरावस्था में उन पर हमला करने का आरोप लगाया और दावा किया कि जब वह अदालत में उनसे लड़ रही थीं, तब उनके सहयोगियों ने उन्हें बदनाम करने की कोशिश की थी.

गिफ्रे ने लिखा, "इतने लंबे समय तक मेरी विश्वसनीयता पर संदेह करने के बाद प्रिंस एंड्रयू की टीम ने मुझे परेशान करने के लिए इंटरनेट ट्रोल्स को भी नियुक्त करने की कोशिश की." "ड्यूक ऑफ यॉर्क को भी मुझसे सार्थक माफ़ी मांगनी चाहिए."

प्रिंस एंड्रूयू ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया और कहा कि वह गिफ्रे से कभी नहीं मिले. इसके बावजूद प्रिंस एंड्रयू ने 2022 में अदालत के बाहर एक समझौता किया, जिसकी कीमत कथित तौर पर लाखों डॉलर थी.

विवाद को और बढ़ाते हुए ब्रिटिश मीडिया ने हाल ही में पुराने ईमेल उजागर किए. जिनमें दावा किया गया था कि एंड्रयू का एपस्टीन के साथ संपर्क उससे भी ज़्यादा समय तक चला जितना उसने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था. 2011 के एक संदेश में उन्होंने कथित तौर पर एपस्टीन को लिखा था, "ऐसा लगता है कि हम दोनों इसमें साथ हैं और हमें इससे ऊपर उठना होगा. वरना, संपर्क में रहो और हम जल्द ही कुछ और करेंगे!"

कौन था जेफरी एपस्टीन और क्या था उसका कांड?

वर्जीनिया गिफ्रे के हवाले से 'नोबॉडीज गर्ल' में रोंगटे खड़े कर देने वाले विवरण दर्ज है. इस किताब में एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की सर्वाइवर वर्जीनिया कहती हैं कि उस 'नामी-गिरामी प्रधानमंत्री' ने बार-बार मेरा गला दबाया जब तक कि मैं बेहोश नहीं हो गई और मुझे अपनी जान के लिए डरते हुए देखकर उसे खुशी हुई. 

जेफरी एपस्टीन (1953-2019) अमेरिका का एक अमीर बिजनेसमैन था. इस शख्स को बच्चों के यौन शोषण और यौन तस्करी के लिए दोषी ठहराया गया. इसने न्यूयॉर्क और फ्लोरिडा में संपत्तियां रखीं और हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों जैसे बिल क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंध बनाए. 2008 में उसे फ्लोरिडा में बच्चों के साथ अवैध यौन गतिविधियों के लिए दोषी ठहराया गया और वह 13 महीना जेल में रहा.

 2019 में उसे न्यूयॉर्क में यौन तस्करी के आरोपों पर गिरफ्तार किया गया, लेकिन जेल में रहते हुए उसने आत्महत्या कर ली. उसकी मौत ने व्यापक जांच और साजिश के सिद्धांतों को जन्म दिया. इसकी साथी घिस्लेन मैक्सवेल को 2021 में यौन तस्करी में दोषी ठहराया गया. एपस्टीन का अतीत, उसके यौन शोषण से जुड़ी कहानियां अमेरिका और यूरोप में चर्चा में है. 

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Thu, 23 Oct 2025 18:14:30 +0530 News desk Hindi
चीन का ‘गोल्डन डोम’ तैयार! डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति पर फिरा पानी https://citytoday.co.in/4020 https://citytoday.co.in/4020 चीन
अमेरिका महज सपने बुन रहा था, लेकिन चीन ने उसे हकीकत का जामा पहना दिया। यूं कहें तो पूरी दुनिया ने एक ऐसी अभूतपूर्व शक्ति परिवर्तन का साक्ष्य देखा, जिसकी कोई कल्पना भी न कर सकता। दशकों से अमेरिका यह सोच रहा था कि वह पृथ्वी को मिसाइल रक्षा के एक नए युग में ले जाएगा। मानवता को तबाही से बचाने वाला एक अंतरिक्ष-आधारित किलेबंदी तैयार करेगा। लेकिन वाशिंगटन अभी-अभी योजनाएं गढ़ ही रहा था कि बीजिंग ने इसे साकार कर दिखाया। और दुनिया को स्पष्ट संदेश दे दिया कि तय कर लो, सुपरपावर कौन है?

दरअसल चीन ने 'बिग डेटा प्लेटफॉर्म' नामक एक वास्तविक, कार्यशील वैश्विक मिसाइल रक्षा नेटवर्क का प्रोटोटाइप विकसित कर लिया है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने किसी अनुमति या पूर्णता के इंतजार के बिना इसे सीधे तैनात कर दिया। अब इस प्रोटोटाइप के सक्रिय होते ही एक चमत्कारिक परिवर्तन हो चुका है। जहां अमेरिका के पास केवल एक अवधारणा है, वहीं चीन के पास ठोस हकीकत।

अमेरिका ने अपने इस दृष्टिकोण को 'गोल्डन डोम' नाम दिया था। एक ग्रहीय सुरक्षा कवच, जो अंतरिक्ष-आधारित और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से संचालित हो, तथा पृथ्वी के किसी भी कोने से प्रक्षेपित किसी भी मिसाइल का पता लगाकर उसे नष्ट करने में सक्षम हो। 2025 में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित यह प्रणाली वैश्विक सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव का वादा कर रही थी। लेकिन जब पेंटागन बजट और डेटा प्रवाह पर बहसों में उलझा था, चीन के इंजीनियर मैदान में कूद पड़े थे।

चीन के प्रमुख रक्षा अनुसंधान संस्थान, नानजिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी में ली जुदोंग की टीम के अनुसार, यह सफलता महज मिसाइलों या उपग्रहों में नहीं, बल्कि डेटा प्रसंस्करण की क्रांति में छिपी है। उनका सिस्टम पृथ्वी के किसी भी भाग से एक साथ चीन पर दागी गईं 1000 मिसाइलों को ट्रैक कर सकता है। अंतरिक्ष, समुद्र, वायु और भूमि पर फैले सेंसरों के विशाल जाल के सहारे, यह वास्तविक समय में खतरों को संग्रहित, विश्लेषित और प्राथमिकता निर्धारित करता है।

हर प्रक्षेप पथ, हर वारहेड, हर छलावे की पहचान होती है, उसे सूचीबद्ध किया जाता है और प्रभाव से पहले ही केंद्रीय कमांड को सूचना भेजी जाती है। पीएलए की यह प्रणाली केवल रडार या उपग्रहों पर निर्भर नहीं है; यह विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से, अलग-अलग समयों में और विविध सैन्य मंचों से प्राप्त डेटा को एकीकृत करती है।

उधर, प्रशांत महासागर के उस पार अमेरिकी गोल्डन डोम अभी भी एक सपना मात्र है, जो आंतरिक विवादों में फंसा पड़ा है। इसकी अनुमानित लागत 140 अरब पाउंड से लेकर खरबों पाउंड तक बताई जा रही है। जुलाई में अमेरिकी स्पेस फोर्स के जनरल माइकल गुएटलिन ने कबूल किया था कि किसी को, यहां तक कि उन्हें भी 'गोल्डन डोम' के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

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Wed, 22 Oct 2025 16:53:09 +0530 News desk Hindi
सऊदी अरब ने खत्म किया कफाला सिस्टम, प्रवासी श्रमिकों को मिली बड़ी राहत https://citytoday.co.in/4019 https://citytoday.co.in/4019 दुबई 

सऊदी अरब में अब पहले के मुताबिक जॉब करना आसान हो गया है क्योंकि इस देश ने गुलामी की जंजीर कही जाने वाली दशकों पुरानी कफाला सिस्टम का अंत कर दिया है। यह लेबर स्पॉन्सरशिप सिस्टम था, जिसके तहत लाखों विदेशी कामगारों के जीवन और अधिकारों को नियंत्रित किया जाता था। जून 2025 में घोषित यह निर्णय अब प्रभावी हो गया है। यह प्रवासी कल्याण और श्रम अधिकारों में सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस सुधार से लगभग 1.3 करोड़ प्रवासी कामगारों को लाभ होने की उम्मीद है, जिनमें से अधिकांश दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया से हैं। इनमें भारतीयों की भी बड़ी संख्या है।

कफाला सिस्टम क्या?

कफाला, अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ 'प्रायोजन' यानी स्पॉन्सरशिप होता है। यह शब्द खाड़ी देशों में जीवन के एक तरीके को उजागर करता है। इसके तहत कोई भी विदेशी कामगार या श्रमिक वहां किसी नियोक्ता के स्पॉन्सरशिप पर ही काम कर सकता था। इस सिस्टम में नियोक्ताओं का अपने कर्मचारियों पर लगभग पूरा कंट्रोल होता है। कर्मचारी अपने स्पॉन्सरशिप की इजाजत के बिना न तो नौकरी बदल सकते हैं, न देश छोड़ सकते हैं, या यहां तक ​​कि उसे कोई कानूनी मदद भी नहीं मिल सकती है। यह एक तरह से गुलामी की जंजीर थी।
1950 के दशक से ही चला आ रहा

यह सिस्टम 1950 के दशक से ही चला आ रहा है। सऊदी अरब के अलावा यह कतर, कुवैत, जॉर्डन जैसे देशों में बहुत प्रचलित सिस्टम है। कफाला सिस्टम मूल रूप से तेल-समृद्ध खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं के निर्माण के लिए आवश्यक सस्ते विदेशी श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और उसका प्रबंधन करने के लिए डिजाइन किया गया था। इस प्रणाली के अनुसार, प्रत्येक प्रवासी श्रमिक एक स्थानीय प्रायोजक, जिसे कफ़ील कहा जाता था, से बंधा होता था, जो उनके निवास, रोजगार और कानूनी स्थिति पर अधिकार रखता था।

श्रमिकों के शोषण का जरिया था ये सिस्टम

शुरुआत में यह सिस्टम प्रवासी श्रमिकों की मदद के लिए लाया गया था ताकि विदेशी जमीं पर उनके रहमे-सहने, खाने-पीने का इंतजाम उसके स्पॉन्सर करें लेकिन बाद में यह सिस्टम श्रमिकों के शोषण का जरिया बन गया। नियोक्ता श्रमिकों के पासपोर्ट जब्त कर लेते थे, वेतन देने में देरी या इनकार किया करते थे, और उनकी आवाजाही पर बैन लगा रहे थे। बेचारा श्रमिक उनकी मर्जी के बिना अपने घर भी नहीं लौट सकते थे, या दुर्व्यवहार की स्थिति में अधिकारियों से भी संपर्क नहीं कर सकते थे।

सऊदी अरब Vision 2030 का हिस्सा

हालांकि, कई अधिकार समूह अक्सर कफाला सिस्टम की तुलना 'आधुनिक गुलामी' से करते रहे हैं, और कहते हैं कि इसने श्रमिकों से उनकी बुनियादी स्वतंत्रता छीन ली और उन्हें शोषण के दलदल में धकेल दिया है। लेकिन अब सऊदी अरब के हालिया श्रम सुधारों ने कफाला सिस्टम की जगह कॉन्ट्रैक्ट एंप्लॉयमेंट मॉडल को लागू किया है। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, नए सिस्टम में विदेशी वर्कर्स को मौजूदा कंपनी या कहें कफील की इजाजत लिए बगैर नई कंपनी ज्वाइन करने की अनुमति होगी। बता दें कि सऊदी अरब Vision 2030 के तहत देश में सुधार कर रहा है और कफाला सिस्टम को खत्म करना भी इसी पहल का हिस्सा है।

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Wed, 22 Oct 2025 16:51:27 +0530 News desk Hindi
कंबोडिया में चार महीनों में 3,455 ऑनलाइन घोटाले के संदिग्ध गिरफ्तार https://citytoday.co.in/4009 https://citytoday.co.in/4009 नोम पेन्ह, 16 अक्टूबर (वार्ता/सिन्हुआ)

 कंबोडिया में ऑनलाइन घोटाला केंद्रों पर की गई कार्रवाई में लगभग चार महीनों में गिरफ्तार किए गए संदिग्धों की संख्या बढ़कर 3,455 हो गई है। यह जानकारी बुधवार देर रात ऑनलाइन घोटालों से निपटने के लिए एड-हॉक समिति द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त हुई।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि अधिकारियों ने 27 जून से अब तक राज्य के 25 शहरों और प्रांतों के 18 शहरों और प्रांतों में कुल 92 परिसरों पर छापेमारी की है। गिरफ्तार संदिग्ध 20 विभिन्न देशों के हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि दर्जनों सरगनाओं को अभियोजन के लिए अदालतों में भेजा गया है जबकि अधिकांश अन्य को उनके देशों में वापस भेज दिया गया है।

दक्षिण-पूर्व एशियाई देश ने साइबर घोटाले नेटवर्क पर अभूतपूर्व राष्ट्रव्यापी कार्रवाई शुरू की है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा को बनाए रखना और उसकी रक्षा करना है।

 

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Thu, 16 Oct 2025 15:01:50 +0530 news desk MPcg
अमेरिका ने चीनी एयरलाइंस को लिया निशाने पर, जानें कौन सा कारण बना बैन की तैयारी की वजह! https://citytoday.co.in/4008 https://citytoday.co.in/4008 वाशिंगटन 


चीन और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद जारी है। टैरिफ युद्ध के बीच एक नया मुद्दा सामने आ गया है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक प्रस्ताव रखा, जिसमें चीन की एयरलाइंस कंपनियों को रूस के ऊपर से होकर अमेरिका आने-जाने वाली फ्लाइट्स पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई। इस पर चीन की प्रमुख सरकारी एयरलाइंस ने कड़ी आपत्ति जताई है।

अमेरिका का कहना है कि ऐसी उड़ानें चीनी एयरलाइंस को अमेरिकी कंपनियों से अधिक लाभ देती हैं, क्योंकि अमेरिकी फ्लाइट्स रूसी एयरस्पेस का उपयोग नहीं कर सकतीं। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि रूस के हवाई क्षेत्र से गुजरने पर चीनी विमानों को समय के साथ-साथ ईंधन की भी बचत होती हैं।

बता दें कि 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के जवाब में मॉस्को ने अमेरिकी और अधिकांश यूरोपीय एयरलाइंस के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। लेकिन चीनी एयरलाइंस पर कोई ऐसी पाबंदी नहीं लगी। दूसरी ओर एयर चाइना, चाइना ईस्टर्न और चाइना सदर्न समेत छह प्रमुख चीनी एयरलाइंस ने पिछले हफ्ते इस अमेरिकी प्रस्ताव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

चाइना ईस्टर्न ने इस सप्ताह अमेरिकी परिवहन विभाग को सौंपी रिपोर्ट में कहा कि यह प्रस्ताव सार्वजनिक हित को नुकसान पहुंचाएगा और अमेरिका-चीन के यात्रियों को परेशानी देगा। इससे यात्रा समय बढ़ेगा, जिससे खर्च और टिकट की कीमतें महंगी होंगी, जो सभी यात्रियों पर बोझ बनेगा। चाइना सदर्न ने चेतावनी दी कि रूसी एयरस्पेस पर रोक से हजारों यात्री प्रभावित होंगे।

एयर चाइना का अनुमान है कि अगर यह प्रतिबंध थैंक्सगिविंग और क्रिसमस के दौरान लागू हुआ तो कम से कम 4400 यात्री प्रभावित होंगे। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भी इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह कदम वैश्विक यात्रियों के लिए 'सजा' जैसा साबित होगा।

 

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Thu, 16 Oct 2025 14:57:12 +0530 news desk MPcg
इजरायल स्थित अमेरिका के नेतृत्व वाला गाजा पुनर्निर्माण केंद्र जल्द काम करना शुरू करेगा https://citytoday.co.in/4007 https://citytoday.co.in/4007 यरुशलम 16 अक्टूबर (वार्ता)

फिलीस्तीन में गाजा युद्धविराम समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए इजरायल स्थित अमेरिका के नेतृत्व वाला समन्वय केंद्र आने वाले दिनों में काम करना शुरू कर देगा।
एबीसी न्यूज़ प्रसारक ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी।
बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि इस केंद्र का नेतृत्व एक अमेरिका के लेफ्टिनेंट जनरल द्वारा किए जाने की उम्मीद है, जिनकी पहचान अभी तक उजागर नहीं की गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र के पुनर्निर्माण में शामिल अन्य देशों के प्रतिनिधियों के लिए खुलापन सुनिश्चित करने के लिए यह केंद्र किसी इजरायली सैन्य अड्डे पर स्थित नहीं होगा।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह सिसी, कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने गाजा युद्धविराम पर एक व्यापक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं। उसी दिन, फिलिस्तीनी आंदोलन हमास ने इजरायल के साथ एक समझौते के तहत सात अक्टूबर, 2023 से गाजा पट्टी में बंधक बनाए गए 20 जीवित बंधकों को रिहा कर दिया है। फ़िलिस्तीनी कैदियों के मीडिया कार्यालय ने पुष्टि की है कि इजरायल ने गाजा में बंद 1718 फ़िलिस्तीनी कैदियों और लंबी सजा काट रहे 250 अन्य कैदियों को रिहा कर दिया है। श्री ट्रम्प की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना 29 सितंबर को जारी की गई थी। इसमें तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया गया था, बशर्ते बंधकों की रिहाई 72 घंटों के भीतर हो। दस्तावेज में यह भी प्रस्ताव रखा गया था कि हमास या अन्य फिलिस्तीनी सशस्त्र गुटों की गाजा पट्टी के सत्ता में कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए और इस परिक्षेत्र का नियंत्रण श्री ट्रम्प के नेतृत्व वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की देखरेख वाली एक तकनीकी समिति को सौंप दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा गाजा शहर के अधिकारियों ने बताया है कि अक्टूबर 2023 में इजरायल द्वारा शुरू किए गए हमले के बाद से शहर का 80 प्रतिशत से ज़्यादा बुनियादी ढाँचा पूरी तरह से नष्ट हो चुका है। अधिकारी अब भारी उपकरणों और मानवीय सहायता की आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए जमीनी, समुद्री और हवाई गलियारों की तत्काल स्थापना की मांग कर रहे हैं।

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Thu, 16 Oct 2025 14:53:03 +0530 news desk MPcg
पाक&अफगान सीमा पर फिर भड़की हिंसा! गोलाबारी में दोनों ओर भारी नुकसान https://citytoday.co.in/3985 https://citytoday.co.in/3985 अफगानिस्तान

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सैनिकों के बीच मंगलवार को सुदूर उत्तर-पश्चिमी सीमा क्षेत्र में झड़पें हुईं। पाकिस्तान की सरकारी मीडिया ने अपनी खबर में अफगानिस्तान के सैनिकों पर ‘‘बिना उकसावे के गोलीबारी'' करने का आरोप लगाया और कहा कि गोलीबारी के बाद जवाबी कार्रवाई की गई। ‘पाकिस्तान टीवी' में प्रसारित खबर और दो सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई की जिससे अफगान टैंकों और सैन्य चौकियों को नुकसान पहुंचा।

अफगनिस्तान के खोस्त प्रांत के पुलिस उप प्रवक्ता ताहिर अहरार ने झड़पों की पुष्टि की लेकिन कोई और जानकारी नहीं दी। इस सप्ताह दोनों ओर से गोलीबारी की यह दूसरी घटना है। पाकिस्तान की सरकारी मीडिया के अनुसार अफगानिस्तान की सेना और पाकिस्तानी तालिबान ने संयुक्त रूप से ‘‘बिना उकसावे के'' एक पाकिस्तानी चौकी पर गोलीबारी की जिसके बाद खैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के कुर्रम ज़िले में पाकिस्तानी सैनिकों ने करार जवाब दिया। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तानी तालिबान के एक विशाल प्रशिक्षण केंद्र को भी नष्ट कर दिया।

पाकिस्तानी सेना ने फिलहाल इस घटना पर टिप्पणी नहीं की है। शनिवार को दोनों पक्षों के बीच कई सीमावर्ती क्षेत्रों में गोलीबारी हुई थी जिससे दोनों पक्षों के दर्जनों लोग हताहत हुए थे। इसके बाद से ही सेना अलर्ट पर है। हालांकि सऊदी अरब और कतर की अपील के बाद रविवार को झड़पें रुक गईं थीं लेकिन पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सभी सीमाएं बंद हैं।

 

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Wed, 15 Oct 2025 14:26:49 +0530 news desk MPcg
सिर्फ 15 मिनट में PAK सेना का आत्मसमर्पण, तालिबान ने हथियार भी कब्जाए https://citytoday.co.in/3984 https://citytoday.co.in/3984 काबुल 

तालिबानी लड़ाके और पाकिस्तानी की सेनाओं के बीच एक बार फिर से भीषण जंग हो रही है. दोनों सेनाएं अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित स्पिन बोल्डक में लड़ाई लड़ रही हैं. आज सुबह लगभग 4 बजे स्पिन बोल्डक क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना और अफगान तालिबान के बीच भारी लड़ाई शुरू हो गई. सोशल मीडिया पर जारी किए गए बॉर्डर में स्पिन बोल्डक-चमन सीमा का क्रॉसिंग दिखाई दे रहा है.

स्पिन बोल्डक अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर स्थित है. यह उत्तर में कंधार शहर और दक्षिण में पाकिस्तान के चमन और क्वेटा शहर से एक राजमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है. पश्चिमी-चमन सीमा क्रॉसिंग शहर के दक्षिण-पूर्व में स्थित है. 

अफ़गान तालिबान का दावा है कि पाकिस्तानी सैनिकों के साथ भिडंत के 15 मिनट के अंदर ही तालिबानियों ने पाकिस्तानियों को सरेंडर के लिए मजबूर कर दिया और उनके हथियार ज़ब्त कर लिए गए. 

एक और वीडियो में दिखाया गया है कि लड़ाई के 15 मिनट के अंदर ही तालिबानियों ने पाकिस्तानियों के हथियार जब्त कर लिए.

स्पिन बोल्डक जिले के सूचना प्रमुख अली मोहम्मद हकमल ने टोलो न्यूज़ को बताया कि जारी लड़ाई में हल्के और भारी दोनों तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

अभी तक हताहतों की संख्या के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तानी तोपखाने की गोलाबारी से आम लोगों के घर तबाह हो गए हैं, जिससे कई निवासियों को इलाक़े से भागना पड़ा है. 

अफगानिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से जुड़े कबीर हकमाल ने कहा है कि, 'स्पिन बोल्डक क्षेत्र में तालिबान और पाकिस्तानी सेना के बीच भीषण झड़पें हुई हैं. कई सूत्रों ने हताहतों की पुष्टि की है और बताया है कि कई स्थानीय घर नष्ट हो गए हैं. पाकिस्तानी सेना कथित तौर पर डूरंड रेखा से सटे इलाकों को निशाना बनाने के लिए भारी हथियारों और हवाई शक्ति का इस्तेमाल कर रही है. दोनों पक्षों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.'

AFGEYE नाम की न्यूज एजेंसी ने कहा है कि कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक गेट पर आज तड़के अफगान सुरक्षा बलों और पाकिस्तानियों के बीच भीषण झड़पें शुरू हो गईं. पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के हताहत होने की पुष्टि हुई है.

एक दूसरे यूजर ने लिखा है कि अफगान सेना ने स्पिन बोल्डक में डूरंड रेखा पर पाकिस्तान की चौकियों को नष्ट कर दिया है और दर्जनों पाकिस्तानी सैनिकों को ज़िंदा पकड़ लिया है. उन्होंने बड़ी संख्या में हल्के और भारी हथियारों के साथ-साथ टैंक भी ज़ब्त कर लिए हैं और उन्हें अफ़ग़ानिस्तान में स्थानांतरित कर दिया है.

पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच हालिया टकराव 

11-12 अक्टूबर की रात को अफगान तालिबान ने पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमला बोला. तालिबान ने दावा किया कि उन्होंने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और 25 चौकियां कब्जे में लीं, जबकि पाकिस्तान के अनुसार 23 उसके सैनिक मारे गए और 200 से अधिक तालिबानी लड़ाके मारे गए. 

यह लड़ाई डुरंड लाइन के आस-पास हो रही है. ये वो जगह है जहां पर पाकिस्तान अफगानिस्तान पर टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) को पनाह देने का आरोप लगाता है. पाकिस्तान टीटीपी पर अपने यहां हमलों का आरोप लगाता रहता है. 

जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान ने कंधार और हेलमंद में ड्रोन हमले किए. तनाव के बीच दोनों देशों ने सीमा बंद कर दी है जिससे व्यापार ठप हो गया और हजारों वाहन फंस गए हैं. 

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Wed, 15 Oct 2025 14:23:35 +0530 news desk MPcg
चीन की बड़ी चिप कंपनी पर इस देश का कब्जा, बढ़ सकता है व्यापार युद्ध https://citytoday.co.in/3965 https://citytoday.co.in/3965 एम्स्टर्डम

वैश्विक व्यापार युद्ध के बीच नीदरलैंड्स सरकार ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए चीन की विंगटेक टेक्नोलॉजी के स्वामित्व वाली डच चिपमेकर कंपनी नेक्स्पेरिया का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। यह कदम डच आर्थिक मामलों के मंत्रालय द्वारा “गुड्स अवेलेबिलिटी एक्ट के तहत उठाया गया है, ताकि देश में आवश्यक चिप्स की सप्लाई और तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि नेक्स्पेरिया में “गंभीर प्रशासनिक खामियों के हालिया और तात्कालिक संकेत” मिले हैं, जो नीदरलैंड्स और यूरोप की तकनीकी क्षमताओं के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। बयान में कहा गया कि “इन क्षमताओं का नुकसान डच और यूरोपीय आर्थिक सुरक्षा के लिए जोखिम साबित हो सकता है,” विशेष रूप से ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए, जो चिप्स पर भारी निर्भर करता है।

चिप उद्योग में रणनीतिक हस्तक्षेप
नीजमेगन में मुख्यालय वाली नेक्स्पेरिया दुनिया की प्रमुख चिप निर्माता कंपनियों में से एक है, जो मुख्यतः सरल कंप्यूटर चिप्स (जैसे डायोड और ट्रांजिस्टर) बनाती है। साथ ही यह कंपनी “वाइड गैप” सेमीकंडक्टर तकनीक पर भी काम करती है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, चार्जिंग सिस्टम्स और एआई डेटा सेंटर्स में होता है।

नीदरलैंड्स सरकार का कहना है कि यह हस्तक्षेप “अत्यंत असाधारण” स्थिति में किया गया है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में चिप आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए। यह निर्णय सितंबर में लागू किया गया था, लेकिन इसकी औपचारिक घोषणा अब की गई है।

अमेरिका-चीन तनाव की पृष्ठभूमि में निर्णय
यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के निर्यात पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।

हालांकि डच आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने अमेरिकी दबाव से इनकार करते हुए इसे “सिर्फ एक संयोग” बताया, लेकिन यह निर्णय उस व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है जिसमें अमेरिका और नीदरलैंड्स दोनों चिप उद्योग पर निर्यात नियंत्रण को लेकर करीबी सहयोग कर रहे हैं।

उधर, बीजिंग ने हाल ही में रेयर अर्थ एलिमेंट्स और मैग्नेट्स के निर्यात पर नियंत्रण लगाया है, जो यूरोप के ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए बेहद अहम हैं। इससे यूरोप-चीन व्यापारिक रिश्तों में और तनाव आ सकता है।

विंगटेक पहले से अमेरिकी निगरानी सूची में
गौरतलब है कि विंगटेक टेक्नोलॉजी को दिसंबर 2024 में अमेरिका ने अपनी “एंटिटी लिस्ट” में शामिल किया था। आरोप था कि कंपनी “संवेदनशील सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमताओं वाली संस्थाओं को हासिल करने के चीन सरकार के प्रयासों में सहायता” कर रही है।

विंगटेक की तीखी प्रतिक्रिया
इस फैसले पर विंगटेक ने नाराजगी जताई है। कंपनी ने अपने अब हटाए गए वीचैट पोस्ट में डच सरकार के कदम को “भू-राजनीतिक पक्षपात से प्रेरित अत्यधिक हस्तक्षेप” बताया। विंगटेक ने कहा कि उसने 2019 में नेक्स्पेरिया के अधिग्रहण के बाद से सभी स्थानीय कानूनों का पालन किया है और उसके यूरोप में हजारों कर्मचारी कार्यरत हैं- जिनमें नीदरलैंड्स, जर्मनी और ब्रिटेन शामिल हैं।

नेक्स्पेरिया की प्रतिक्रिया और प्रभाव
नेक्स्पेरिया के प्रवक्ता ने CNBC से कहा कि कंपनी सभी नियमों का पालन कर रही है और नियमित रूप से अधिकारियों के संपर्क में है, लेकिन उन्होंने आगे कोई टिप्पणी करने से इनकार किया। इस घोषणा के बाद शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में विंगटेक के शेयर 10% की गिरावट के साथ अपने दैनिक सीमा तक लुढ़क गए। कंपनी की एक कॉर्पोरेट फाइलिंग (13 अक्टूबर) के अनुसार, अब नेक्स्पेरिया अस्थायी बाहरी प्रबंधन के अधीन है, जिसमें एक वर्ष तक कंपनी की परिसंपत्तियों, व्यवसाय या कर्मचारियों में बदलाव की अनुमति नहीं होगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, विंगटेक के चेयरमैन झांग शुएझेंग को नेक्स्पेरिया में उनकी सभी भूमिकाओं से निलंबित कर दिया गया है, हालांकि कंपनी के दैनिक कार्य सामान्य रूप से जारी रहेंगे।

बढ़ते यूरोप-चीन व्यापार तनाव
इससे पहले 2023 में नीदरलैंड्स सरकार ने नेक्स्पेरिया द्वारा चिप स्टार्टअप “Nowi” के अधिग्रहण की जांच की थी, जिसे बाद में मंजूरी दे दी गई थी। लेकिन अब यह नया कदम चीन-नीदरलैंड्स व्यापारिक रिश्तों को और अधिक तनावपूर्ण बना सकता है, खासकर उस पृष्ठभूमि में जब डच कंपनी ASML को चीन को उन्नत चिप-मेकिंग उपकरणों के निर्यात पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था। जैसे-जैसे वैश्विक व्यापार युद्ध और तकनीकी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, नीदरलैंड्स सरकार का यह अभूतपूर्व कदम इस बात को रेखांकित करता है कि सेमीकंडक्टर अब केवल एक औद्योगिक उत्पाद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा का मूल स्तंभ बन चुके हैं।

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Tue, 14 Oct 2025 18:13:57 +0530 news desk MPcg
हमास की गिरफ्त में जान गंवाने वाले बिपिन जोशी का शव इजरायल को सौंपा गया https://citytoday.co.in/3964 https://citytoday.co.in/3964

तेल अवीव
हमास की ओर से बंधक बनाए गए नेपाली हिंदू छात्र बिपिन जोशी का शव इजरायल को लौटा दिया गया है। 7 अक्टूबर, 2023 को दक्षिणी इजरायल पर किए गए हमले के दौरान उसका अपहरण कर लिया गया था। अटैक के वक्त जोशी ने अपनी बहादुरी से कई सहपाठियों की जान बचाई थी। सोमवार को गाजा में संघर्ष विराम समझौते के बाद उसकी मृत्यु की पुष्टि ऐसे समय हुई, जब 20 जीवित बंधकों की रिहाई पर उत्सव का माहौल था। बंधक बनाए जाने के कुछ दिनों बाद इजरायली सेना की ओर से वीडियो फुटेज जारी किया गया, जिसमें जोशी को गाजा के शिफा अस्पताल में घसीटते हुए दिखाया गया था। यह उनकी आखिरी ज्ञात जीवित झलक थी।

हमास के लड़ाकों ने जब हमला किया, तब 22 वर्षीय बिपिन जोशी नेपाल से गाजा सीमा के पास किबुत्ज अलुमिम गए थे। यहां वह खेती-किसानी को लेकर ट्रेनिंग कार्यक्रम के लिए आए थे। जोशी गाजा में जीवित माने जाने वाले एकमात्र गैर-इजरायली और हिंदू बंधक थे। नेपाल के इजरायल में राजदूत धन प्रसाद पंडित ने रिपब्लिका को उनकी मौत की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सोमवार देर रात हमास ने जोशी के शव को इजरयइली अधिकारियों को सौंप दिया। पंडित ने कहा, 'बिपिन जोशी का शव हमास ने इजरायली अधिकारियों को सौंपा है और इसे तेल अवीव ले जाया जा रहा है।'
जिंदा ग्रेनेड को पकड़कर फेंका था बाहर

इजरायली सैन्य प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने कहा कि हमास ने बिपिन जोशी सहित 4 बंधकों के शव लौटाए हैं। उनके शव को नेपाल भेजने से पहले डीएनए टेस्ट किया जाएगा। उम्मीद है कि उनका अंतिम संस्कार नेपाली दूतावास के सहयोग से इजरायल में किया जाएगा। जोशी की इजरायल यात्रा सितंबर 2023 में शुरू हुई, जब वह 16 अन्य छात्रों के साथ किबुत्ज अलुमिम गए थे। यह पहल नेपाली छात्रों को इजरायली कृषि तरीकों के बारे ट्रेनिंग देने के लिए की गई थी। 7 अक्टूबर की सुबह हमास आतंकवादियों ने अचानक हमला कर दिया। छात्रों ने बम बंकर में शरण ली। जब बंकर के अंदर ग्रेनेड फेंके गए तो जोशी ने एक जिंदा ग्रेनेड को पकड़कर बाहर फेंक दिया, जिससे कई लोगों की जान बच गई। हालांकि, हमले में वह घायल हो गए और बाद में हमास के बंदूकधारियों ने उन्हें पकड़ लिया।

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Tue, 14 Oct 2025 18:08:09 +0530 news desk MPcg
डेविड एडियांग दूसरे कार्यकाल के लिए नाउरू के राष्ट्रपति चुने गए https://citytoday.co.in/3963 https://citytoday.co.in/3963 सिडनी, 14 अक्टूबर (वार्ता)

 नाउरू में शनिवार को हुए राष्ट्रीय चुनावों के बाद वर्तमान राष्ट्रपति डेविड एडियांग दूसरे कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति चुने गए है।

नाउरू सरकार ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि मंगलवार को माइक्रोनेशियाई राष्ट्र की 25वीं संसद के उद्घाटन सत्र के दौरान श्री एडियांग को निर्विरोध राष्ट्रपति चुना गया।

श्री एडियांग अक्टूबर 2023 से नाउरू के राष्ट्रपति के रूप में सेवा दे रहे हैं और 2001 से संसद सदस्य हैं। वह शनिवार को हुए राष्ट्रीय चुनावों में 25वीं संसद में नाउरू के आठ बहु-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए 19 सांसदों में से एक हैं।

उबेनिडे, नाउरू का सबसे अधिक आबादी वाला निर्वाचन क्षेत्र है। जिसका प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए चार सांसदों में से श्री एडियांग को सबसे ज्यादा वोट प्राप्त हुए।मार्कस स्टीफन आज फिर से संसद के अध्यक्ष चुने गए। वह 2007 से 2011 के बीच नाउरू के राष्ट्रपति रह चुके हैं।

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Tue, 14 Oct 2025 18:05:42 +0530 news desk MPcg
सीओपी 30 प्रतिनिधियों ने बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर सहमत जताई https://citytoday.co.in/3962 https://citytoday.co.in/3962 ब्रासीलिया, 14 अक्टूबर (वार्ता) 

ब्राजील में आगामी 2025 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी30) में भाग लेने वाले देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने बहुपक्षवाद को मजबूत करने की आवश्यकता पर व्यापक रूप से सहमति व्यक्त की है। शिखर सम्मेलन के प्रभारी ब्राजील के वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

ब्राजील के विदेश मंत्रालय के जलवायु, ऊर्जा एवं पर्यावरण सचिव तथा सीओपी30 के अध्यक्ष आंद्रे कोर्रिया डो लागो ने ब्रासीलिया में आयोजित प्री-सीओपी30 बैठक के दौरान एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “बहुपक्षवाद को सुदृढ़ करने की इच्छा पर स्पष्ट सहमति है और सभी ने इसका उल्लेख किया।”

उन्होंने कहा कि अमीर देशों से लेकर छोटे द्वीपों और मध्यम आय वाले देशों ने अनुकूलन पर भी ज़ोर दिया और इस पर आम सहमति बन गयी है।

उन्होंने यह भी कहा कि बैठक में वित्त मंत्री फर्नांडो हद्दाद की भागीदारी ने जलवायु मुद्दों के बढ़ते आर्थिक महत्व का संकेत दिया है। इस प्रारंभिक वार्ता का उद्देश्य संबंधित पक्षों के बीच उत्पन्न होने वाले मतभेदों से बचना है।

श्री डो लागो ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नवंबर में ब्राज़ील के बेलेम शहर में होने वाले सीओपी30 में सभी देश हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति लूला ने स्पष्ट किया है कि यह एक खुला जलवायु परिवर्तन सम्मेलन होगा ,जहां सभी का स्वागत है।”

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Tue, 14 Oct 2025 18:00:59 +0530 news desk MPcg
गाजा में फिर हिंसा का कहर, एक हमले में 27 की मौत और 8 हमास आतंकी ढेर https://citytoday.co.in/3948 https://citytoday.co.in/3948 गाजा 

इजरायल और हमास के बीच शांति हो गई है. इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को उम्मीद है कि सोमवार को उनके कैदियों की वापसी होने लगेगी. लेकिन इस सबके बीच गाजा से एक चिंता वाली खबर आई है. गाजा में एक बार फिर भीषण हिंसा भड़क उठी है लेकिन इस बार दुश्मन इजराइल नहीं, बल्कि हमास के अपने ही लोग हैं. शनिवार देर रात से रविवार सुबह तक चली हमास सुरक्षा बलों और दुघमुश (Dughmush) कबीले के लड़ाकों के बीच हुई मुठभेड़ में कम से कम 27 लोग मारे गए, जिनमें 19 कबीले के सदस्य और 8 हमास फाइटर शामिल हैं.

यह गाजा में इज़राइल के बड़े हमलों के खत्म होने के बाद से अब तक का सबसे भीषण आंतरिक संघर्ष है. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि, गाजा सिटी के तेल अल-हावा इलाके में जॉर्डनियन अस्पताल के पास भारी गोलीबारी हुई. मास्क पहने हमास गनमैनों ने दुघमुश कबीले के लड़ाकों पर हमला किया. कहा जा रहा है कि यह झड़प तब शुरू हुई जब हमास के 300 से ज्यादा फाइटर एक बिल्डिंग में घुसे जहां दुघमुश कबीले के लोग छिपे थे. स्थानीय लोगों ने बताया कि ‘इस बार लोग इजरायली हमले से नहीं, बल्कि अपने ही लोगों से भाग रहे थे.’ कई परिवारों को फिर से विस्थापन झेलना पड़ा, जो पहले से युद्ध की मार झेल चुके हैं.
क्यों हुई लड़ाई?

रिपोर्ट के अनुसार, झगड़े की शुरुआत तब हुई जब दुघमुश कबीले के लड़ाकों ने हमास के दो एलीट फाइटर्स को गोली मार दी, जिनमें से एक हमास के वरिष्ठ सैन्य खुफिया प्रमुख इमाद आकेल का बेटा था. गुस्से में हमास ने ‘सुरक्षा ऑपरेशन’ चलाते हुए इलाके को घेर लिया. हमास के आंतरिक मंत्रालय ने कहा कि यह ‘गैरकानूनी मिलिशिया की कार्रवाई’ थी, जिसे ‘कठोरता से दबाया जाएगा.’ दूसरी ओर, दुघमुश कबीले ने आरोप लगाया कि हमास उनकी बिल्डिंग पर कब्जा करना चाहता था, जो पहले जॉर्डन अस्पताल रही थी और जहां कबीले के लोग शरण लिए हुए थे. रिपोर्ट के मुताबिक दुघमुश कबीले के 19 और हमास के 8 लड़ाके मारे गए.

गाजा के सबसे प्रमुख कबीलों में से एक, दुघमुश परिवार का हमास के साथ लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहा है. पहले भी हमास के साथ इसके टकराव हुए हैं. दोनों पक्ष झड़प के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. दुघमुश का कहना है कि उनके लोगों ने जहां शरण ले रखी थी हमास उस जगह को कब्जा करने के लिए पहुंचा और अपना बेस बना लिया, जिससे बवाल बढ़ा.
हमास ने 7,000 लड़ाकों को बुलाया

गाजा से मिली रिपोर्टों के अनुसार, हमास ने हाल ही में 7,000 सुरक्षा कर्मियों को दोबारा बुलाया है ताकि इज़राइल की वापसी के बाद छोड़े गए इलाकों पर फिर से नियंत्रण पाया जा सके. इनमें कई पूर्व सैन्य कमांडर शामिल हैं जिन्हें गवर्नर नियुक्त किया गया है. स्थानीय सूत्रों का कहना है कि हमास ‘गाज़ा को अपराधियों और इज़राइल समर्थक तत्वों से मुक्त’ करने की तैयारी में है.

 

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Mon, 13 Oct 2025 19:27:10 +0530 news desk MPcg
पाकिस्तान में बवाल: लाहौर&इस्लामाबाद में हिंसक झड़प, गोलीबारी में 40 की मौत https://citytoday.co.in/3947 https://citytoday.co.in/3947

इस्लामाबाद 
पाकिस्तान में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के कार्यकर्ताओं के इस्लामाबाद मार्च को रोकने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस और रेंजर्स के साथ प्रदर्शनकारियों की हिंसक झड़पें हुईं. लाहौर में हुई झड़पों में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और करीब 40 लोगों की मौत होने की खबर है. वहीं इस्लामाबाद में पाक सुरक्षा बलों ने अमेरिकी दूतावास के पास फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शन की योजना बना रहे TLP नेताओं को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े. लाठियां और गोलियां चलाईं।
अमेरिकी दूतावास के पास हजारों पुलिसकर्मी तैनात
वहीं स्थिति बिगड़ती देखकर इस्लामाबाद, लाहौल और रावलपिंडी में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गईं हैं. इस्लामाबाद रेड जोन में हजारों सुरक्षाकर्मी बैरिकेड्स लगाकर तैनात कर दिए गए हैं. अमेरिकी दूतावास के आस-पास का इलाका अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है. अमेरिकी दूतावास ने भी अपने नागरिकों को सतर्क रहने और प्रदर्शनकारियों से दूर रहने की चेतावनी दी है. बता दें कि पंजाब पुलिस ने बीते गुरुवार TLP प्रमुख साद हुसैन रिजवी को गिरफ्तार किया था, इसके बाद ही विरोध प्रदर्शन हिंसक होने लगे.

क्यों हो रहा है पाकिस्तान में हिंसक विरोध प्रदर्शन?
बता दें कि कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) गाजा में इजरायली सेना की कार्रवाई, हमले, नरसंहार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है. प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी दूतावास को घेरने का ऐलान किया है, लेकिन पाक पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कार्रवाई कर रही है. पुलिस के रोकने पर प्रदर्शनकारी हिंसक हो रहे हैं और प्रदर्शन का विस्तार पंजाबभर में करने की धमकी दे चुके हैं. शहबाज सरकार विवाद सुलझाने के लिए बातचीत करने का ऑफर दिया है, लेकन प्रदर्शनकारी नहीं मान रहे. हिंसा, गोलीबारी और पथराव के वीडियो वायरल हो रहे हैं.
 
कैसे हुई विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की शुरुआत?
बता दें कि गाजा में फिलिस्तीनियों के समर्थन में TLP ने लब्बैक या अक्सा मिलियन मार्च बुलाया. मार्च के तहत प्रदर्शनकारियों ने इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास को घेराव करने की योजना बनाई. विरोध प्रदर्शन 9 अक्टूबर को लाहौर से शुरू हुआ, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिए TLP मुख्यालय पर रेड मारी तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया. पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया.

10 अक्टूबर के प्रदर्शनकारी लाहौर से इस्लामाबाद की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शन का दमन करने के लिए सड़कों को कंटेनर बिछाकर बंद कर दिया. साथ ही रावलपिंडी और इस्लामाबाद में धारा-144 लागू करके इंटरनेट बंद कर दिया. 11 और 12 अक्टूबर को लाहौर, मुरिदके और पंजाब के अन्य शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प हुई, जिसमें करीब 10 लोग मारे गए. साद रिजवी (TLP) की हत्या होने का दावा भी किया गया है.

 

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Mon, 13 Oct 2025 19:22:15 +0530 news desk MPcg
इतिहास रचा जाएगा: US राष्ट्रपति का इजराइल संसद में भाषण, हमास ने छोड़े अंतिम 13 बंधक https://citytoday.co.in/3946 https://citytoday.co.in/3946 इजराइल 
इजराइल और अमेरिका के संबंधों में  तब  ऐतिहासिक पल देखने को मिले जब   अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गाजा में बंदी बनाए गए सभी जीवित इजराइली बंधकों की रिहाई के बाद उन्हें मिलने इजराइल पहुंचे। सबसे बड़ी बात यह है कि ट्रंप  इजराइल की संसद ‘कनेसट’ में भाषण देने जा रहे हैं। यह 17 सालों में पहला मौका है जब कोई सत्ता में मौजूद अमेरिकी राष्ट्रपति सीधे इजराइल की संसद के सामने भाषण देंगे। ट्रंप उसी समय  कनेसट पहुंचे जब गाजा में फंसे आखिरी इजराइली बंधकों को रिहा किया गया।  इस मौके को संघर्ष में मोड़ और परिवारों के पुनर्मिलन का क्षण माना जा रहा है। ट्रंप का यह दौरा अंतरराष्ट्रीय शांति व्यवस्था के लिए लंबे समय तक प्रयास करने का प्रतीक भी है। ट्रंप ने इजरायली नेसेट में एक साहसिक हस्तलिखित संदेश के साथ आधिकारिक अतिथि पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए:"यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। एक महान और सुंदर दिन। एक नई शुरुआत।" संदेश पर येरूशलम में हस्ताक्षर किए गए, जिसमें नेतन्याहू उनके साथ खड़े थे, जब 20 बंधकों ने हमास की कैद से इजराइल की ओर अपनी यात्रा पूरी की।
 
हमास ने बचे हुए 13 इजराइली बंधकों को इजराइल में पहुंचाने के लिए सौंप दिया। इजराइली अधिकारियों ने पुष्टि की कि सभी बंधक सुरक्षित हैं और “खड़े होकर” यात्रा कर रहे हैं।रिहाई प्रक्रिया में रेड क्रॉस ने सहायता की, और IDF की टीमें उनकी आगमन पर स्वागत के लिए तैयार हैं। इससे पहले, आज कुल 20 इजराइली परिवारों अपने प्रियजनों से फिर से मिल पाएंगे। अमेरिकी शांति मिशन के सदस्य स्टीव विटकॉफ़ ने कहा-"मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह दिन देख पाऊंगा।
 
यह जानकर दिल को बहुत राहत मिली कि इतने सारे परिवार आखिरकार अपने प्रियजनों से मिलेंगे।लेकिन इस खुशी के बीच, उनका दिल उन लोगों के लिए दुखी है, जिनके प्रियजन जीवित नहीं लौटेंगे। उनके शवों को लाना उनका सम्मान है और उनकी याद को हमेशा के लिए सम्मानित करेगा।मैं राष्ट्रपति ट्रंप के अदम्य साहस और नेतृत्व के लिए अत्यंत आभारी हूं। यह दिन उनके बिना संभव नहीं होता।"ट्रंप का भाषण न केवल बंधकों की रिहाई का जश्न है, बल्कि यह इजराइल और फिलिस्तीनी क्षेत्रों के लिए स्थायी शांति की दिशा में संकेत भी देता है। राजनीतिक विश्लेषक इसे पारंपरिक संघर्षों को कम करने और दीर्घकालीन शांति ढांचा बनाने का अवसर मान रहे हैं।

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Mon, 13 Oct 2025 19:19:55 +0530 news desk MPcg
जिसे फौज ने सिर चढ़ाया, वही बना सिरदर्द: आखिर कौन है तहरीक&ए&लब्बैक? https://citytoday.co.in/3924 https://citytoday.co.in/3924 लाहौर 
पाकिस्तान में आज जो हालात हैं, वह एक पुरानी कहावत को सच साबित करते हैं – "जो बोएगा वही काटेगा." लाहौर में हिंसक झड़पें और इस्लामाबाद का किले में तब्दील होना दिखाता है कि पाकिस्तान अपनी ही बनाई समस्या में फंस गया है. इसके पीछे तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) नाम का एक कट्टरपंथी संगठन है, जो कभी पाक फौज का 'प्यारा' था.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि TLP को खुद पाकिस्तानी फौज ने बनाया और पाला था. मकसद था नागरिक सरकारों को दबाने के लिए एक 'सड़क की ताकत' तैयार करना. यह वही तरीका है जो पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के साथ अपनाया था. लेकिन अब यही 'पालतू कुत्ता' अपने मालिकों को ही काटने लगा है.

लंदन स्थित पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ आजकिया का कहना है, "TLP, लश्कर-ए-तैयबा की तरह ही पाक आर्मी की बनाई हुई संगठन है. फौज ने इसे घरेलू राजनीति में हेरफेर के लिए बनाया था." अब वही संगठन पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बन गया है.

शनिवार को लाहौर में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) का एक विशाल विरोध प्रदर्शन जारी है. इस प्रदर्शन में हजारों समर्थक शामिल हुए हैं और इस्लामाबाद की ओर मार्च कर रहे हैं. टीएलपी के संस्थापक खादिम हुसैन रिज़वी का आरोप है कि इस प्रदर्शन के दौरान उनके 11 समर्थकों को मार दिया गया है.

फौज का दोहरा खेल

2015 में बना यह संगठन बार-बार पाकिस्तान को तकलीफ़ देता रहा है. 2017 में इन्होंने इस्लामाबाद की 21 दिन की घेराबंदी की. मजेदार बात यह है कि जब भी यह संगठन उत्पात मचाता है, पाक फौज 'बिचौलिए' की भूमिका निभाती है और इनके साथ डील करती है. तहरीक-ए-लब्बैक उर्दू शब्द है. तहरीक का अर्थ – आंदोलन या मूवमेंट है और लब्बैक का अर्थ है – हाजिर हूं.

2017 के प्रदर्शनों के दौरान एक सीनियर फौजी अफसर को TLP प्रदर्शनकारियों को पैसे बांटते हुए देखा गया था – जो साफ दिखाता है कि यह सब कितना नियोजित था. उस समय तत्कालीन कानून मंत्री ज़ाहिद हामिद को इस्तीफा देना पड़ा था.

इमरान खान का TLP प्रेम

सबसे शर्मनाक बात यह है कि 2021 में इमरान खान की सरकार ने TLP पर से प्रतिबंध हटा दिया था. हुआ यह कि TLP के मुखिया सआद रिज़वी को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत जेल में डाल दिया गया था. लेकिन हज़ारों TLP समर्थकों ने लाहौर से इस्लामाबाद तक 'लॉन्ग मार्च' निकाला. इस हिंसा में 20 से ज्यादा लोग मारे गए, जिसमें 10 पुलिसकर्मी भी शामिल थे.

पाक फौज की मध्यस्थता से इमरान खान की सरकार ने TLP के साथ गुप्त समझौता किया. परिणाम – सआद रिज़वी और 2000 से ज्यादा TLP कार्यकर्ता रिहा कर दिए गए. यह वही इमरान खान था जो भारत को आतंकवाद के बारे में उपदेश देता रहता था.

2018 चुनावों में TLP का इस्तेमाल

इंडियन काउंसिल ऑन ग्लोबल रिलेशंस की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 के चुनावों में TLP का इस्तेमाल पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) को कमज़ोर करने के लिए किया गया था, ताकि इमरान खान का रास्ता साफ हो सके. यानी TLP ने ISI के इशारे पर काम किया.

धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग

TLP की रणनीति बेहद चालाकी भरी है. यह 'खतम-ए-नबुव्वत' (पैगंबर की अंतिमता) जैसे भावनात्मक मुद्दों का सहारा लेता है. पाकिस्तान में धार्मिक भावनाओं को हथियार बनाने की यह परंपरा कोई नई नहीं है – यही तो भारत के खिलाफ भी किया जाता रहा है.

पाकिस्तान का आत्मघाती रास्ता

अटलांटिक काउंसिल की रिपोर्ट में साफ लिखा है, "TLP ने अपनी ताकत का स्वाद चख लिया है और सीख गया है कि इसे कैसे इस्तेमाल करना है – राज्य के खिलाफ नहीं, बल्कि उनकी सेवा में जो पर्दे के पीछे से असली नियंत्रण रखते हैं."

पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर के मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्ज़ा का कहना है, "आज जो अराजकता दिख रही है, वह धर्म को हथियार बनाने के दशकों का अपरिहार्य परिणाम है. पाकिस्तान अब अपने ही अंतर्विरोधों के बोझ तले दब रहा है."

फ्रैंकनस्टाइन का राक्षस

यह स्थिति उस फ्रैंकनस्टाइन की कहानी जैसी है जिसका बनाया हुआ राक्षस उसे ही खत्म करने पर आमादा हो गया. पाकिस्तानी फौज ने TLP को नागरिक सरकारों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए बनाया था, लेकिन अब यही संगठन पूरे पाकिस्तान को अस्थिर कर रहा है.

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Sat, 11 Oct 2025 19:15:06 +0530 news desk MPcg
ट्रंप का चीन पर टैरिफ वार! एक फैसले से भड़के, लगाया 100% शुल्क https://citytoday.co.in/3923 https://citytoday.co.in/3923 वाशिंगटन

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने शुक्रवार को चीन पर बड़ा टैरिफ अटैक किया है. 1 नवंबर 2025 से चीन से आने वाले सभी आयतित उत्‍पादों पर अतिरिक्‍त 100 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. इसका मतलब है कि जो टैक्‍स पहले से लागू हैं, उसके ऊपर 100 फीसदी और टैक्‍स लगाया जाएगा. 

ट्रंप ने टैरिफ धमकी देने के साथ ही यह भी ऐलान किया कि अमेरिका 1 नवंबर से ही 'क्रिटिकल सॉफ्टवेयर' पर एक्सपोर्ट कंट्रोल (Critical Software Export Control) भी लागू करेगा. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर डोनाल्‍ड ट्रंप ने अचानक चीन पर क्‍यों टैरिफ का ऐलान किया है, जब चीजें धीरे-धीरे सही हो रही थीं? दरअसल, इसके पीछे की वजह चीन का एक फैसला है. 

चीन ने क्‍या कि अमेरिका ने लगाया 100% टैरिफ
चीन ने 1 दिसंबर से रेयर अर्थ मिनरल्‍स (Rare Earth Minarals) पर सख्‍त कंट्रोल का ऐलान किया है. चीन रेयर अर्थ मिनिरल्स का राजा है, वह इसके निर्यात का करीब 90 फीसदी हिस्‍सा कंट्रोल करता है. इसी कारण चीन आए दिन रेयर अर्थ मिनरल्‍स को लेकर नया नियम लेकर आता रहता है. अब चीन ने कहा है कि ह इन खनिजों के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लगाएगा, ताकि पर्यावरण की रक्षा हो और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत बनी रहे. 

चीन ने भारत से भी गारंटी मांगी है कि वह आश्‍वस्‍त करे कि अमेरिका को हैवी रेयर अर्थ मिनरल्‍स की सप्‍लाई नहीं करेगा, तभी वह भारत को भी रेयर अर्थ मिनरल्‍स देगा. अब इसी फैसले के बाद ट्रंप का गुस्‍सा चीन पर फुटा है, जिस कारण अमेरिका ने चीन पर अतिर‍िक्‍त 100 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. 

कितना जरूरी है रेयर अर्थ मिनरल्‍स? 
रेयर अर्थ मिनरल्‍स 17 तरह के चुम्‍बकीय तत्‍व हैं जैसे लैंथेनम, नियोडिमियम और यूरोपियम आदि , जिनका उपयोग स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक कारों, कंप्यूटर चिप्स, सैन्य उपकरणों और ग्रीन एनर्जी के लिए किया जाता है. इन चीजों के ना होने से ऑटो समेत कई इंडस्‍ट्रीज प्रभावित होंगी. इलेक्‍ट्रॉनिक इंडस्‍ट्री तो ठप भी हो सकती है. दुनिया का 70 प्रतिशत से ज्यादा रेयर अर्थ चीन से आता है.

ट्रंप ने चीन पर क्‍या कहा? 
ट्रंप ने कहा कि चीन के रेयर अर्थ मिनरल्‍स पर फैसले से सभी देश प्रभावित होंगे. उन्‍होंने चीन के कदम को नैतिक अपमान बताया है और कहा कि यह वर्ल्‍ड ट्रेड पर हावी होने की उसकी लॉन्‍गटर्म रणनीति का हिस्‍सा है. अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने कहा कि अमेकिरा एकतरफा कार्रवाई करेगा, चाहे अन्‍य देश क्‍या करना चाहें. उन्‍होंने कहा कि 1 नवंबर, 2025 से संयुक्त राज्य अमेरिका चीन पर 100% टैरिफ लगाएगा, जो वर्तमान में उनके द्वारा चुकाए जा रहे किसी भी टैरिफ के अतिरिक्त होगा. 

चीन ने आखिर क्‍या किया है? 
चीन ने होल्मियम, एर्बियम और यटरबियम समेत कई रेयर अर्थ मिनरल्‍स पर प्रतिबंध बढ़ाते हुए उसे एक्‍सपोर्ट करने से रोकने का फैसला लिया है. इससे प्रतिबंधित दुर्लभ पृथ्वी की कुल संख्या 12 हो गई है. बीजिंग ने अर्धचालक और रक्षा क्षेत्रों से जुड़ी उत्पादन प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग की जाने वाली लिथियम बैटरी और ग्रेफाइट एनोड पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. चीन ने इसके पीछे की वजह राष्‍ट्रीय सुरक्षा बताई है. 

ट्रंप ने कहा जिनपिंग से नहीं मिलेंगे
इस महीने के अंत में दक्षिण कोरिया में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन से पहले तनाव बढ़ रहा है, जहाँ ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोनों के शामिल होने की उम्मीद है। ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि चीन की हालिया कार्रवाइयों के बाद शी जिनपिंग से 'मुलाकात करने का कोई कारण नहीं है'.

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Sat, 11 Oct 2025 19:12:45 +0530 news desk MPcg
फिलीपींस में 7.4 तीव्रता का भूकंप, समुद्र तटीय क्षेत्रों में सुनामी का अलर्ट https://citytoday.co.in/3905 https://citytoday.co.in/3905

मिंडानाओ

फिलीपींस के मिंडानाओ इलाके में ज़ोरदार भूकंप आया है. इसकी तीव्रता 7.4 मापी गई, जो कि बहुत शक्तिशाली है. भूकंप का केंद्र करीब 20 किलोमीटर गहराई में था. इस भूकंप के बाद स्थानीय भूकंप विज्ञान एजेंसी फिवोल्क्स ने सुनामी का अलर्ट जारी किया है. समुद्र किनार रहने वाले लोगों को तुरंत ऊंची जगहों पर जाने को कहा गया है. 

यह भूकंप इतना खतरनाक था कि कई देशों में सुनामी की चेतावनी जारी की गई है. अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली ने कहा है कि भूकंप के केंद्र से 300 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक लहरें आ सकती हैं.

शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी बड़े नुक़सान या तबाही की ख़बर नहीं आई है, लेकिन इतने शक्तिशाली भूकंप की वजह से लोग घबरा कर अपने घरों से बाहर निकल आए. मृतकों या घायलों की संख्या की पुष्टि नहीं हुई है. यह भूकंप मिंडानाओ और आस-पास के क्षेत्रों के लिए गंभीर चेतावनी है, क्योंकि यह इलाके भूकंप आने वाले सक्रिय क्षेत्रों में आते हैं.

स्थानीय प्रशासन ने क्षतिग्रस्त इलाकों में राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया है. पहले अस्पताल, सड़कों और गंभीर रूप से प्रभावित इमारतों को प्राथमिकता दी जा रही है. फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने कहा कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है.

शक्तिशाली भूकंप फिलीपींस के लिए ख़तरनाक 

फिलीपींस भूकंपीय रूप से बहुत ज्यादा एक्टिव एरिया है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें, जैसे फिलीपींस सी प्लेट और यूरेशियन प्लेट, एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं और आपस में टकराती हैं. इन टकरावों की वजह से जमीन के अंदर बहुत तेज तनाव उत्पन्न होता है, जो अचानक मुक्त होने पर भूकंप का रूप ले लेता है. फिलीपींस के क्षेत्र में साल भर में 800 से ज्यादा भूकंप आते रहते हैं. 

चूंकि इस क्षेत्र का भूकंप केंद्र अक्सर समुद्र के नीचे होता है, इसलिए इसका एक बड़ा खतरा सुनामी का भी होता है. भूकंप के कारण समुद्र तल में हलचल से बहुत बड़ी लहरें पैदा हो सकती हैं, जो तटीय इलाकों पर भारी तबाही मचा सकती हैं. तटीय क्षेत्रों में बसे कई बड़े शहर और गांव इन लहरों की चपेट में आ सकते हैं, जिससे मानवीय और आर्थिक नुकसान और भी बढ़ जाता है.

फिलीपींस की घनी आबादी, कमजोर निर्माण सामग्री से बनी इमारतें, और प्रमुख शहरों का तटीय इलाकों में स्थित होना इस भूकंपीय खतरे को और भी गंभीर बना देता है. ऐसे भूकंप में न सिर्फ जनहानि होती है, बल्कि भारी आर्थिक नुकसान और पुनर्निर्माण की लंबी प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है.

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Fri, 10 Oct 2025 19:08:16 +0530 news desk MPcg
काबुल में फिर खुलेगा भारतीय दूतावास! अफगानिस्तान ने दी बड़ी गारंटी, जानें पूरी डील https://citytoday.co.in/3904 https://citytoday.co.in/3904 काबुल  
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी भारत के ऐतिहासिक दौरे पर हैं। शुक्रवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर और मुत्तकी के बीच बेहद अहम बातचीत हुई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के लिए भारत पूरी तरह प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि भारत जल्द ही काबुल में अपना दूतावास खोलेगा। बता दें कि चार साल पहल अशरफ गनी के अफगानिस्तान से भागने और तालिबान के कब्जे के बाद भारत ने अपना दूतावास काबुल में बंद कर दिया था। गौरतलब है कि इस वक्त अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच भी संबंध तनावपूर्ण हैं। ऐसे में भारत और अफगानिस्तान की निकटता पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

भारत के खिलाफ नहीं होगा अफगान जमीन का इस्तेमाल
मुत्ताकी ने खुलकर स्वीकार किया है कि भारत हमेशा अफगान लोगों के साथ खड़ा रहा है और कई क्षेत्रों में उनकी सहायता की है। अफगानी विदेश मंत्री ने भी आश्वासन दिया है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के लिए कतई नहीं होने देंगे। बता दें कि भारत ने अपने दूतावास को बंद करने के एक साल बाद ही काबुल में एक अस्थायी मिशन शुरू कर दिया था जिसका उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को बनाए रखना और अफगानिस्तान की जनता को सहायता मुहैया कराना था। वहीं अब काबुल में रूस, ईरान और पाकिस्तान समेत करीब एक दर्जन देशों के दूतावास काम कर रहे हैं। हालांकि तालिबानी शासन को मान्यता अब तक केवल रूस ने ही दी है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, हमारे विकास और क्षेत्रीय शांति के लिए दोनों देशों का आपसी सहयोग बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि काबुल में भारत के टेक्निकल मिशन को जल्द ही दूतावास में बदल दिया जाएगा। हालांकि इसके लिए विदेश मंत्री ने कोई समय सीमा नहीं बताई है। बता दें कि भारत के साथ संबधों को सुधारने और आगे बढ़ाने के ही उद्देश्य से मुत्तकी भारत के 6 दिवसीय दौरे पर हैं। भारत और अफगानिस्तान के साथ हमेशा ही अच्छे संबंध रहे हैं। हालांकि अब तक भारत ने तालिबानी शासन को मान्यता नहीं दी है।

पश्चिमी जानकारों का कहना है कि तालिबानी प्रशासन को मान्यता ना मिलने की केवल एक वजह है और वह है महिलाओं पर प्रतिबंध। बता दें कि अब तक यूएनएससी ने तालिबानी नेताओं की यात्रा पर प्रतिबंध लगा रखे थे। प्रतिबंध हटने के बाद ही उनकी भारत यात्रा संभव हो पाई है।

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Fri, 10 Oct 2025 19:05:32 +0530 news desk MPcg
नोबेल शांति पुरस्कार मचादो को, ट्रंप की उम्मीदों को लगा धक्का https://citytoday.co.in/3903 https://citytoday.co.in/3903 ओस्लो
दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान शुक्रवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होते ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सपना चकनाचूर हो गया। इस बार का 'नोबेल पीस प्राइज' वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचादो को मिला है। बता दें कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी हर साल इस पुरस्कार के लिए ऐसे लोगों या संस्थाओं को चुनती है, जो शांति को बढ़ावा देने, देशों के बीच भाईचारे को मजबूत करने और समाज के लिए काम करने में योगदान देते हैं। बता दें कि यह पुरस्कार हमेशा चौंकाने वाला होता है।

नोबेल प्राइज के लिए काफी बेचैन थे ट्रंप?
नोबेल पीस प्राइज के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कई दिनों से काफी बेचैन नजर आ रहे थे। ट्रंप ने अपनी विदेश नीति की कुछ उपलब्धियों, जैसे शांति समझौतों को लेकर खुद की तारीफ की थी। लेकिन नोबेल विशेषज्ञों का पहले ही कहना था कि उनके जीतने की संभावना बहुत कम है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कमेटी आमतौर पर उन लोगों या संगठनों को पुरस्कार देती है, जो लंबे समय से शांति के लिए काम कर रहे हों।
 
कौन हैं मारिया कोरिना मचाडो?
मारिया कोरिना मचाडो का जन्म 7 अक्टूबर 1967 को हुआ था। वह वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और औद्योगिक इंजीनियर हैं। 2002 में उन्होंने वोट निगरानी समूह सूमाते की स्थापना की और वेंटे वेनेजुएला पार्टी की राष्ट्रीय समन्वयक हैं। 2011-2014 तक वे वेनेजुएला की नेशनल असेंबली की सदस्य रहीं। वह 2018 में बीबीसी की 100 प्रभावशाली महिलाओं और 2025 में टाइम पत्रिका की 100 प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल हुईं। निकोलस मादुरो सरकार ने उनके देश छोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था। 2023 में अयोग्यता के बावजूद, उन्होंने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी प्राथमिक चुनाव जीता, लेकिन बाद में उनकी जगह कोरिना योरिस को उम्मीदवार बना दिया गया।
 
इन नामों की हो रही थी चर्चा
नोबेल शांति पुरस्कार के लिए इस बार कई नाम सामने आए थे। पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो ने कुछ संभावित विजेताओं का जिक्र किया था, जिनमें शामिल थे:
    सूडान की इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स: यह एक समुदाय आधारित नेटवर्क है, जो सूडान के गृहयुद्ध के दौरान मानवीय सहायता का मजबूत आधार बना हुआ है।
    इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट: ये दोनों संस्थाएं वैश्विक न्याय और शांति के लिए काम करती हैं।
    कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स: यह अमेरिका आधारित संगठन प्रेस की आजादी को बढ़ावा देता है और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करता है। यह संगठन उन पत्रकारों की सूची भी तैयार करता है, जो अपने काम के दौरान मारे गए।

पिछले साल किसने जीता था नोबेल शांति पुरस्कार?
पिछले साल 2024 में नोबेल शांति पुरस्कार जापान की संस्था निहोन हिदानक्यो को दिया गया था। यह संगठन परमाणु हथियारों के खिलाफ दशकों से काम कर रहा है और हिरोशिमा-नागासाकी बम धमाकों के पीड़ितों की आवाज को दुनिया तक पहुंचाता है।

क्यों खास है नोबेल शांति पुरस्कार?
नोबेल शांति पुरस्कार दुनिया के सबसे बड़े पुरस्कारों में से एक है। बाकी नोबेल पुरस्कार (जैसे चिकित्सा, भौतिकी, रसायन और साहित्य) स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में दिए जाते हैं, लेकिन शांति पुरस्कार का ऐलान और समारोह ओस्लो में होता है। इस हफ्ते स्टॉकहोम में चिकित्सा, भौतिकी, रसायन और साहित्य के पुरस्कारों का ऐलान हो चुका था जिसके बाद सबकी नजर शुक्रवार के ऐलान पर टिकी थीं। इसके अलावा, अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार सोमवार को घोषित किया जाएगा।

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Fri, 10 Oct 2025 19:03:47 +0530 news desk MPcg
अफगानिस्तान पर पाक की एयरस्ट्राइक, मुत्ताकी के भारत दौरे पर तिलमिलाया इस्लामाबाद? https://citytoday.co.in/3902 https://citytoday.co.in/3902 काबुल

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल शुक्रवार सुबह तेज धमाकों से दहल उठी. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विस्फोट पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF) की कथित एयरस्ट्राइक के कारण हुए हैं. पाकिस्तानी चैनलों ने दावा किया कि इन हमलों का निशाना तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकाने थे. यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब तालिबान के विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी भारत दौरे पर हैं. मुत्तकी का यह दौरा अफगानिस्तान की नई सरकार और भारत के बीच संवाद की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अफगानिस्तान की ज़मीन अगर पाकिस्तान विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होती है, तो ‘कड़ी कार्रवाई’ की जाएगी. उसी के कुछ दिन बाद यह कथित एयरस्ट्राइक सामने आई है. कतर में तालिबान के राजदूत मुहम्मद सुहैल शाहीन ने बयान जारी कर कहा, ‘काबुल में दो धमाकों की आवाज सुनी गई, लेकिन अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.’ पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया कि हमले में TTP प्रमुख नूर वली महमूद मारा गया. अफगान मीडिया के मुताबिक, अटैक के बाद TTP के प्रमुख नूर वली महसूद का एक ऑडियो सामने आया जिसमें उसने खुद के जिंदा होने की बात कही और पाकिस्तान पर ‘फर्जी प्रचार’ करने का आरोप लगाया.

ख्वाजा आसिफ ने दी थी धमकी

इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने गुरुवार को धमकी भरे लहजे में अफगानिस्तान के अंतरिम प्रशासन को चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि अफगानिस्तान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को अपने देश के अंदर सुरक्षित पनाहगाह दे रहा है. उन्होंने कहा था कि ‘इनफ इज इनफ’ यानी अब बहुत हो गया. पाकिस्तानी सेना लगातार TTP के खिलाफ ऑपरेशन चला रही है. गुरुवार को कम से कम सात टीटीपी आतंकी मारे गए.

मुत्ताकी की भारत यात्रा के बीच हमला

एक कहावत है घर वाला घर नहीं हमें किसी का डर नहीं. यह धमाका ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अफगानिस्तान के संबंध बेहतर हो रहे हैं और अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचे. अगस्त 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद यह पहली बार है, जब काबुल से कोई मंत्री-स्तरीय प्रतिनिधि नई दिल्ली का दौरा कर रहा है. मुत्तकी की यह यात्रा लगभग एक सप्ताह की है. इसे दोनों देशों के बीच संवाद की नई पहल के रूप में देखा जा रहा है.

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Fri, 10 Oct 2025 19:00:16 +0530 news desk MPcg
AMRAAM मिसाइल डील पर ट्रंप का बड़ा फैसला, पाकिस्तान को फिर झटका https://citytoday.co.in/3901 https://citytoday.co.in/3901 वाशिंगटन

पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चापलूसी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. शहबाज और मुनीर अमेरिका तक गए और उन्होंने रेयर अर्थ मिनरल का खजाना भी सौंप दिया. लेकिन इसके बावजूद अब अमेरिका ने भारत को झटका दिया है. भारत में अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया. अमेरिकी दूतावास ने उन मीडिया रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण जारी किया है, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका पाकिस्तान को एडवांस एयर-टू-एयर मिसाइल्स (AMRAAM) बेचने जा रहा है. दूतावास ने स्पष्ट कहा है कि यह जानकारी गलत व्याख्या पर आधारित है और पाकिस्तान को किसी प्रकार की नई या उन्नत मिसाइल प्रणाली नहीं दी जा रही है.

अमेरिकी दूतावास की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 30 सितंबर 2025 को अमेरिकी ‘डिपार्टमेंट ऑफ वार’ (जो मिलिट्री कॉन्ट्रैक्ट की सार्वजनिक सूची जारी करता है) ने कई कॉन्ट्रैक्ट्स की जानकारी साझा की थी. उसी सूची में पाकिस्तान से जुड़ा एक विदेशी मिलिट्री बिक्री कॉन्ट्रैक्ट संशोधन भी शामिल था, लेकिन उसका उद्देश्य केवल रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति था. दूतावास ने स्पष्ट शब्दों में कहा है- ‘यह कॉन्ट्रैक्ट किसी नई मिसाइल डिलीवरी या पाकिस्तान की मौजूदा हवाई युद्ध क्षमता को अपग्रेड करने से जुड़ा नहीं है. सस्टेनमेंट का मतलब केवल मौजूदा सिस्टम के सपोर्ट से है, अपग्रेड से नहीं.’

नहीं मिलेंगी नई मिसाइलें

बीते कुछ दिनों से कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि अमेरिका पाकिस्तान को AIM-120 AMRAAM मिसाइलें उपलब्ध करा रहा है. रिपोर्ट्स में बताया जा रहा था कि इससे पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट की क्षमता बढ़ेगी और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आएगा. नई मिसाइल सेल की खबरों ने इस धारणा को हवा दी थी कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्ते फिर से गर्म हो रहे हैं. हालांकि, अमेरिकी दूतावास के बयान ने इन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कॉन्ट्रैक्ट का उद्देश्य केवल सिस्टम का रखरखाव, उपकरण अपडेट और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति है. इसे किसी भी रूप में पाकिस्तान की हवाई शक्ति बढ़ाने के कदम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, जो कई देशों के साथ चलते रहते हैं. इसमें हथियार प्रणाली के रखरखाव, परीक्षण, और सप्लाई चेन के सुचारु संचालन से जुड़े तकनीकी अपडेट शामिल होते हैं. बयान में यह भी जोड़ा गया कि कुछ मीडिया संस्थानों ने ‘कॉन्ट्रैक्ट मॉडिफिकेशन’ शब्द का गलत अर्थ निकालते हुए इसे नए हथियारों की सप्लाई समझ लिया.

 

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Fri, 10 Oct 2025 18:57:00 +0530 news desk MPcg
F&35 की चमक फीकी, स्पेन को भाया तुर्की का KAAN फाइटर जेट—अमेरिका को बड़ा झटका https://citytoday.co.in/3867 https://citytoday.co.in/3867 मैड्रिड

अमेरिका के सुपर एडवांस्ड F-35 स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर यूरोप का भरोसा अब डगमगा गया है. बढ़ती लागत, सॉफ्टवेयर देरी और लगातार हो रही तकनीकी गड़बड़ियों के बीच स्पेन ने अमेरिकी F-35 को ठुकरा दिया है. अब खबर है कि यूरोप का यह अहम देश तुर्की के KAAN फाइटर जेट को खरीदने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. यह कदम न केवल यूरोप की रक्षा रणनीति को नया मोड़ देगा बल्कि अमेरिका के वर्चस्व पर भी सीधा झटका माना जा रहा है.

स्पेन का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब कई अन्य देश कनाडा, पुर्तगाल और स्विट्ज़रलैंड भी F-35 प्रोग्राम से दूरी बना रहे हैं. वजह वही: बढ़ते खर्चे, लगातार सॉफ्टवेयर फेलियर और अमेरिकी नियंत्रण को लेकर उठे सवाल. दरअसल, अमेरिका पर आरोप है कि F-35 का सोर्स कोड वह खुद तक सीमित रखता है. इससे यह जेट इस्तेमाल करने वाले देशों की डिजिटल निर्भरता उसी पर बनी रहती है. अब यूरोप ने “Rearm Europe Program” के तहत अमेरिका पर अपनी रक्षा निर्भरता घटाने का फैसला किया है.

F-35 छोड़ अब स्पेन की नजर तुर्की के KAAN पर
स्पेन ने अपने 2023 के रक्षा बजट में 6.25 बिलियन यूरो (करीब 7.24 अरब डॉलर) नए फाइटर जेट्स के लिए रखे थे. शुरुआत में माना जा रहा था कि स्पेन Eurofighter Typhoon या फिर Future Combat Air System (FCAS) में से किसी एक को चुनेगा. लेकिन अब स्पेनिश बिज़नेस डेली “El Economista” के मुताबिक मैड्रिड सरकार तुर्की के KAAN फाइटर जेट को खरीदने पर विचार कर रही है. जो फिलहाल विकास के दौर में है और 2030 के शुरुआती दशक में सेवा में आने की उम्मीद है.

क्यों डगमगा रहा है यूरोप का FCAS प्रोजेक्ट?
यूरोप का महत्वाकांक्षी Future Combat Air System (FCAS) प्रोजेक्ट अब गंभीर संकट में है. फ्रांस की Dassault Aviation और जर्मनी की Airbus Defence के बीच नियंत्रण को लेकर खींचतान ने इस कार्यक्रम की रफ्तार लगभग रोक दी है. पहले इसका परीक्षण उड़ान 2027-29 के बीच होने की उम्मीद थी, लेकिन अब यह टाइमलाइन पूरी तरह बिगड़ चुकी है. ब्रिटिश मीडिया द इकोनॉमिक टाइम्स और फाइनेंशियल टाइम्स ने रिपोर्ट किया है कि FCAS “पूरी तरह ध्वस्त” भी हो सकता है. इस बीच स्पेन को अगले दशक में अपने पुराने F-18 और F-5 विमानों को बदलने की जरूरत है. ऐसे में तुर्की का KAAN एक व्यावहारिक और तेजी से उपलब्ध विकल्प बन रहा है.

स्पेन-तुर्की रक्षा साझेदारी गहराती दिख रही है
स्पेन और तुर्की के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुआ है. दिसंबर 2024 में दोनों देशों ने 24 Hürjet एडवांस्ड जेट ट्रेनर विमानों के लिए समझौता किया था. सितंबर 2025 में स्पेन के मंत्रिमंडल ने 45 Hürjet विमान खरीदने को मंजूरी दे दी. जिनकी कीमत 3.68 अरब यूरो बताई जा रही है. अब KAAN की संभावित डील इस रिश्ते को और आगे बढ़ाएगी.

KAAN की ताकत- F-35 को टक्कर देने वाला जेट
तुर्की का KAAN फाइटर जेट फरवरी 2024 में अपनी पहली उड़ान भर चुका है. इसे Turkish Aerospace Industries (TUSAŞ) ने तैयार किया है. तुर्की ने घोषणा की है कि 2028 तक 20 ऐसे विमान उसकी वायुसेना में शामिल हो जाएंगे. KAAN को “पांचवीं पीढ़ी” का जेट माना जाता है, जिसमें स्टील्थ डिजाइन, एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड कॉम्बैट क्षमता, और हाई-स्पीड एवियोनिक्स सिस्टम शामिल हैं. TUSAŞ के सीईओ Temel Kotil ने मई 2024 में दावा किया था, “KAAN, F-35 से बेहतर विमान है.”

इंडोनेशिया बना पहला ग्राहक, स्पेन हो सकता है दूसरा
इंडोनेशिया पहले ही 48 KAAN जेट्स खरीदने का करार कर चुका है, जिसकी डिलीवरी 10 साल में पूरी होगी. वहीं, अज़रबैजान, पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई भी इसमें दिलचस्पी दिखा चुके हैं. अगर स्पेन यह डील साइन करता है, तो वह KAAN का दूसरा अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बन जाएगा जो तुर्की की रक्षा क्षमता के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी.

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Tue, 07 Oct 2025 17:49:58 +0530 news desk MPcg
ईरान ने संसद में पास किया ऐतिहासिक बिल, करेंसी से हटाएगा चार शून्य—जानिए वजह https://citytoday.co.in/3866 https://citytoday.co.in/3866 तेहरान

ईरान की संसद ने एक ऐत‍िहास‍िक बिल पास क‍िया है. और अब उनकी करेंसी रियाल में चार शून्य हट जाएंगे. मतलब, 10,000 पुराने रियाल बराबर अब एक नया रियाल होगा. ये सिर्फ नंबरों का खेल लगता है, लेकिन इसके पीछे महंगाई, पाबंद‍ियां, और इकॉनमी की बदहाली की कहानी है. तो ईरान ऐसा कर क्‍यों रहा है? इससे क्‍या फायदा होगा? और क्‍या इससे पहले क‍िसी और देश ने ऐसा क‍िया है? अगर क‍िया है तो क्‍या उसकी अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार आया?

सबसे पहले, समझें कि ईरान की करेंसी की हालत इन द‍िनों खराब है. रियाल 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ही जूझ रहा है, यह अब कागज से भी सस्ता हो गया. आप इसे ऐसे समझ‍िए क‍ि एक अमेरिकी डॉलर अगर आपको खरीदना तो 11,50,000 रियाल चाहिए. मतलब, एक रोटी खरीदने के लिए लाखों के नोट गिनने पड़ते हैं. दूसरी बात, महंगाई पिछले कई सालों से 35% से ऊपर है. कभी यह 40%, कभी 50% तक भी पहुंच जाती है. 2022 में इंटरनेशनल मॉन‍िटरी फंड की एक रिपोर्ट आई, जिससे ईरान की खस्‍ता हालत को बयां क‍िया. ईरान तेल निर्यात पर निर्भर है, लेकिन अमेरिका की पाबंदियों की वजह से चीन को छोड़कर कोई उससे तेल नहीं खरीदता. वर्ल्‍ड बैंक कहता है क‍ि तेल एक्‍सपोर्ट न होने से उसके खजाने पर भारी असर पड़ा. नतीजा महंगाई चार साल तक 40% से ऊपर रही.

महंगाई चरम पर

पीछे मुड़कर देखें तो ये नई बात नहीं. 1979 के बाद से ईरान में महंगाई दर 10 फीसदी से ज्‍यादा ही रही है. इस्‍लामिक क्रांत‍ि के बाद बाहर से मंगाई गई चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं. इंपोर्ट ज्‍यादा है और एक्‍सपोर्ट कम है, इसकी वजह से करेंसी का मूल्‍य ग‍िरता जा रहा है. 2023 में तो रियाल का पतन इस कदर हुआ क‍ि महंगाई ने इतना बुरा था कि मुद्रास्फीति ने मुद्रा अवमूल्यन को पछाड़ दिया. पाबंद‍ियों की वजह से विदेशी मुद्रा आई नहीं, दुन‍िया से संबंध तनावपूर्ण हो गए. राजनीत‍िक अलगाव ने अर्थव्‍यवस्‍था का दम घोट द‍िया.

जीरो घटाने से होगा क्‍या?

अब सवाल ये कि शून्य हटाने से क्या होगा? ईरान की सरकारी मीडिया IRNA ने बताया क‍ि रियाल वही रहेगा, सिर्फ करेंसी से चार शून्य हटाए जाएंगे. केंद्रीय बैंक को तैयारी के ल‍िए दो साल मिलेंगे. फिर तीन साल का बदलाव दौर होगा, जहां पुराने और नए दोनों नोट चलेंगे. 10,000 पुराना रियाल अब 1 नया रियाल बन जाएगा. इससे लेनदेन आसान हो जाएगा. बिल जमा करने में ग‍िनती में मुश्क‍िल होती थी, वो द‍िक्‍कत खत्‍म हो जाएगी. इसे ऐसे समझें क‍ि पहले रोटी के ल‍िए जहां 10000 रियाल देने पड़ते थे, अब एक रियाल देना होगा. लाखों की बजाय अब सैकड़ों ग‍िनना होगा.

दूसरे देशों ने क्या किया

    वेनेजुएला: महंगाई चरम पर हुई तो 2018 में 5 शून्य हटाए, फ‍िर 2021 में भी ऐसा क‍िया. लेकिन महंगाई अभी भी ऊंची.
    जिम्बाब्वे: 2000 के दशक में ऐसा क‍िया. 10 खरब डॉलर के नोट से जीरो हटाए. लेकिन व्‍यवस्‍था नहीं सुधरी.
    तुर्की: सफल कहानी. 2005 में तुर्की ने 6 शून्य हटाए, नया लिरा लाया. विश्वसनीयता लौटी, मुद्रास्फीति नियंत्रण में आई.
    ब्राजील: 1994 में रियाल योजना से महंगाई रोकी. नतीजा काफी बदलाव हुआ और ब्राजील कंपटीशन कर रहा है.
    घाना: 2007 में सिस्टी हटाई, लेकिन विदेशी निवेश पर मिला-जुला असर रहा.

सोशल मीडिया में उड़ा मजाक

सोशल मीडिया में लोग इसका मजाक उड़ा रहे हैं. एक शख्‍स ने लिखा, ईरानी रियाल कागज से भी सस्ता है. 1 मिलियन रियाल प्रति डॉलर. सेंट्रल बैंक जीरो हटाने की योजना बना रहा. दूसरे ने तंज कसा, रियाल को बदल दो ‘ईरानी धुंध’ से. जनता का मूड कैसे बदलोगे? यह हताशा है, क्योंकि 80% लोग अब जरूरी चीजों पर ज्‍यादा खर्च कर रहे हैं. उनकी खरीदने की क्षमता कम हो गई है.

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Tue, 07 Oct 2025 17:46:58 +0530 news desk MPcg
कनाडा में तीन जगहों पर फायरिंग, लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने मानी जिम्मेदारी https://citytoday.co.in/3853 https://citytoday.co.in/3853

ओटावा

कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी का दावा किया है. कनाडा में रविवार देर रात तीन अलग-अलग जगहों पर हुई फायरिंग की जिम्मेदारी बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पर ली है. गैंग की तरफ से किए गए पोस्ट में लिखा गया है कि "2 नंबर के धंधे" यानी अवैध कारोबार करने वालों से वसूली की जाती है, मेहनत करने वालों से नहीं.

बिश्नोई गैंग की तरफ से पुर्तगाल में रहने वाले फतेह पुर्तगाल ने इन घटनाओं की जिम्मेदारी ली. उसने सोशल मीडिया पर फायरिंग का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें एक शूटर अत्याधुनिक हथियार से फायरिंग करता नजर आ रहा है. वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.

कनाडाई पुलिस ने फिलहाल घटनास्थलों को सील कर जांच शुरू कर दी है. शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, फायरिंग में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन पुलिस ने इसे संगठित अपराध से जुड़ी बड़ी साजिश के तौर पर देखा है.

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही कनाडा की सरकार ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकी संगठन घोषित किया था. इसके बाद से ही गैंग सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर अपनी "मौजूदगी" दिखाने की कोशिश कर रहा है.

सोशल मीडिया पर बिश्नोई गैंग ने क्या दावा किया?

सोशल मीडिया पर खुद को 'फतेह पुर्तगाल बताने वाले शख्स ने पोस्ट में बताया कि जिन तीन जगहों पर फायरिंग हुई वे हैं – Theshi Enterprise (1254, 110 Ave), House No. 2817 (144 St) और 13049, 76 Ave Unit No.104. दावा करने वाले व्यक्ति ने कहा कि ये सभी स्थान 'नवी तेसी' नामक व्यक्ति के स्वामित्व में हैं, जिसने कथित रूप से "लॉरेंस बिश्नोई गैंग" का नाम लेकर कलाकारों से अवैध वसूली की थी.

गैंग के लोगों को परेशान किए जाने का दावा

पोस्ट में लिखा गया कि, "हम मेहनत करने वालों से दुश्मनी नहीं रखते, लेकिन जो लोग हमारे लोगों को परेशान करते हैं या गलत तरीके से पैसा वसूलते हैं, हम उनके खिलाफ कार्रवाई करते हैं." उसने यह भी चेतावनी दी कि "अगर किसी ने गलत खबर फैलाई, तो उससे होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी."

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Mon, 06 Oct 2025 18:29:43 +0530 news desk MPcg
सिंगापुर: वेश्याओं से लूटपाट के मामले में दो भारतीयों को 5 साल 1 महीने की जेल https://citytoday.co.in/3824 https://citytoday.co.in/3824 सिंगापुर 

सिंगापुर में दो भारतीयों को 5 साल और एक महीने की जेल की सजा सुनाई गई है। साथ ही, दोनों को 12 कोड़े मारने की भी सजा दी गई। इन पर होटल के कमरों में दो सेक्स वर्कर्स के साथ लूटपाट और मारपीट करने का आरोप था। 23 वर्षीय अरोकियासामी डायसन और 27 वर्षीय राजेंद्रन माइलारासन ने पीड़ितों के साथ लूटपाट की और उन्हें चोट भी पहुंचाई। अदालत को बताया गया कि अरोकियासामी और राजेंद्रन 24 अप्रैल को भारत से सिंगापुर छुट्टियां मनाने आए थे। दो दिन बाद लिटिल इंडिया इलाके में टहलते समय एक अज्ञात व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और पूछा कि क्या वे वेश्याओं को किराए पर लेना चाहेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, उस व्यक्ति ने फिर उन्हें दो महिलाओं की संपर्क करवाया और चला गया। अरोकियासामी ने राजेंद्रन से कहा कि उन्हें पैसे की जरूरत है। उसने सुझाव दिया कि वे उन महिलाओं से संपर्क करें और होटल के कमरे में उनसे लूटपाट कर लेंगे। राजेंद्रन इस पर सहमत हो गया। उन्होंने उसी दिन शाम 6 बजे के आसपास होटल के कमरे में पहली महिला से मिलने की व्यवस्था की। कमरे में जाने के बाद उन्होंने पीड़िता के हाथ-पैर कपड़ों से बांध दिए और उसे थप्पड़ मारा। उन्होंने उसके गहने, 2 हजार सिंगापुर डॉलर नकद, उसका पासपोर्ट और बैंक कार्ड लूट लिए।

800 सिंगापुर डॉलर की लूटपाट

रात लगभग 11 बजे उन्होंने दूसरी महिला के साथ एक अन्य होटल में मुलाकात की। जब वह आई तो उन्होंने उसकी बाहों को कसकर पकड़ लिया। राजेंद्रन ने उसके मुंह को ढक दिया ताकि वह चिल्ला न सके। उन्होंने 800 सिंगापुर डॉलर नकद, दो मोबाइल फोन और उसका पासपोर्ट चुरा लिया। दोनों ने उसे धमकी दी कि वह तब तक कमरे से बाहर न निकले जब तक वे वापस न आएं। अरोकियासामी और राजेंद्रन के कांड का खुलासा तब हुआ जब दूसरी पीड़िता ने अगले दिन एक अन्य व्यक्ति से बात की। इसके बाद पुलिस को बुलाया गया और फिर आगे की कार्रवाई हुई।

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Sat, 04 Oct 2025 16:03:10 +0530 news desk MPcg
हमास ने ट्रंप के गाजा प्लान को स्वीकारा, इजरायली बंधकों की रिहाई पर सहमति https://citytoday.co.in/3822 https://citytoday.co.in/3822  गाजा 

हमास ने ट्रंप के गाजा पीस प्लान को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है और लगभग सभी बड़ी शर्तों को मानने के लिए हामी भरी है. ​इस फिलिस्तीनी मिलिशिया संगठन ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आगे बढ़ाए गए शांति योजना के तहत सभी इजरायली बंधकों (चाहे जीवित हों या मृत) को रिहा करने के लिए तैयार है. हमास का यह फैसला गाजा में संघर्ष समाप्त करने में काफी महत्वपूर्ण साबित होगा.

हमास ने एक बयान में कहा कि वह इस मामले (ट्रंप के गाजा प्लान) की विस्तृत चर्चा के लिए मध्यस्थों के माध्यम से तत्काल वार्ता में शामिल होने के लिए तैयार है. यदि यह कदम साकार होता है, तो यह अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हमले के दौरान अपहृत बंधकों की वापसी के लिए महीनों की कोशिशों में सबसे महत्वपूर्ण सफलता होगी. हमास ने यह भी दोहराया कि वह गाजा का प्रशासन 'स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की फिलिस्तीनी संस्था' को सौंपने के लिए तैयार है.

हमास ने डोनाल्ड ट्रंप का जताया आभार

बता दें कि हमास ही अब तक गाजा का प्रशासन चलाता था. इस समूह ने गाजा संघर्ष समाप्त कराने के प्रयासों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका के लिए उनका सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया. साथ ही अरब, इस्लामी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों का आभार जताया. इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास से रविवार शाम 6 बजे तक इजरायल के साथ शांति समझौते पर पहुंचने का अल्टीमेटम था, वरना गाजा में कहर टूटने की चेतावनी दी थी.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिया था अल्टीमेटम

ट्रंप ने कहा था कि हमास को हमारे गाजा प्लान को स्वीकार करने, इजरायली बंधकों को रिहा करने और शत्रुताओं समाप्त करने का एक आखिरी मौका दिया जा रहा है. अगर वह इस पर सहमति नहीं जताता है तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा. उन्होंने कहा था कि गाजा में किसी न किसी तरह शांति जरूर स्थापित होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो वर्ष से चल रहे गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए इजरायल और हमास दोनों को शांति समझौते पर सहमत करने के लिए प्रयासरत हैं.

ट्रंप के 20 सूत्री गाजा प्लान में क्या-क्या है?

उन्होंने इसके लिए एक 20 सूत्री प्रस्ताव का खाका तैयार किया है, जो न केवल युद्ध को तत्काल रोकने का आह्वान करता है बल्कि गाजा में शासन के लिए एक समाधान भी प्रस्तुत करता है. व्हाइट हाउस ने संघर्ष समाप्त करने और क्षेत्र के भविष्य के प्रशासन को आकार देने के लिए ट्रंप के गाजा प्लान को एक रोडमैप बताया. ट्रंप के गाजा पीस प्लान (गाजा शांति योजना) के अनुसार, हमास और इजरायल के बीच शांति समझौते के 72 घंटों के भीतर हमास को सभी जीवित और मृत इजरायली बंधकों को रिहा करना होगा, बदले में इजरायल सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों को अपनी जेलों से रिहा करेगा.

अब गाजा पर नहीं होगा हमास का नियंत्रण

इस प्लान के मुताबिक गाजा पर हमास का नियंत्रण खत्म होगा और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में एक स्वतंत्र सरकार यहां का प्रशासन चलाएगी. हमास की ओर से इस पीस प्लान पर सहमति जताने के तुरंत बाद गाजा में पूर्ण सहायता भेजी जाएगी. ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि हमास गाजा प्लान को अस्वीकार करता है, तो उसे पूरी तरह खत्म करने का काम पूरा करने के लिए इजरायल को अमेरिका का पूर्ण समर्थन मिलेगा. हमास का ट्रंप के गाजा प्लान पर सहमति जताना, मध्य पूर्व में शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.

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Sat, 04 Oct 2025 16:00:59 +0530 news desk MPcg
नोबेल पुरस्कारों की घोषणा नजदीक: डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदें और नॉर्वे से ताज़ा खबरें https://citytoday.co.in/3815 https://citytoday.co.in/3815

ओस्लो 
दुनिया के सबसे प्रतिष्ठा प्राप्त सम्मानों में से एक नोबेल पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा अगले सप्ताह की जाएगी। इसके तहत चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य, अर्थशास्त्र और शांति के क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए सम्मान दिए जाते हैं। लोगों की दिलचस्पी यह जानने में है कि आखिर नोबेल शांति पुरस्कार के लिए डोनाल्ड ट्रंप को सम्मान दिया जाता है या नहीं। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2018 से अमेरिका के लोगों के साथ-साथ विदेशों में नेताओं द्वारा कई बार नामित किया गया है। उन्होंने अपने नए कार्यकाल के तहत इसी साल 19 जनवरी को कमान संभाली थी। उसके बाद से वह 7 युद्धों को रुकवाने का दावा कर चुके हैं।

वहीं नोबेल समिति के एक सदस्य ने पिछले दिनों कहा था कि इस बार डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर विचार होना मुश्किल है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिन उपलब्धियों के नाम पर उनके लिए दावा किया जा रहा है, वे नोबेल नॉमिनेशन की आखिरी तारीख के बाद की हैं। दिसंबर में एक रिपब्लिकन सांसद ने अब्राहम समझौते की मध्यस्थता के लिए भी ट्रंप के नाम का प्रस्ताव दिया था।

इस समझौते ने इजराइल और कुछ अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बना दिया था। अब देखना होगा कि दिसंबर की उस उपलब्धि के नाम पर डोनाल्ड ट्रंप को सम्मान मिलता है या नहीं। नोबेल पुरस्कारों का ऐलान 10 अक्तूबर तक होना है। इसके अलावा ओस्लो से कुछ सूत्रों ने कहा कि जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका फर्स्ट की नीति पर काम कर रहे हैं और बाहरी लोगों के लिए वैमनस्यता का भाव दिखा रहे हैं, उसके चलते भी उन्हें पुरस्कार मिलना मुश्किल है।

नोबेल पुरस्कारों का क्या है इतिहास
नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत 19वीं सदी के स्वीडन के व्यवसायी और वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने की थी। उनके पास 300 से ज़्यादा पेटेंट थे, लेकिन पुरस्कारों से पहले उनकी प्रसिद्धि का कारण नाइट्रोग्लिसरीन को एक ऐसे यौगिक के साथ मिलाकर डायनामाइट का आविष्कार करना था। इसके चलते बड़े-बड़े धमाके करना आसान हो गया। डायनामाइट निर्माण, खनन और हथियार उद्योग में बेहद लोकप्रिय हो गया और इसने नोबेल को बहुत अमीर बना दिया। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने अपनी विशाल संपत्ति का इस्तेमाल वार्षिक पुरस्कारों के लिए धन जुटाने में करने का निर्णय लिया।

चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति के क्षेत्र में पहला नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल के निधन के पांच साल बाद 1901 में प्रदान किया गया था। वर्ष 1968 में स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने अर्थशास्त्र के लिए छठा पुरस्कार शुरू किया। हालांकि नोबेल पुरस्कार के शुद्धतावादी इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अर्थशास्त्र का पुरस्कार तकनीकी रूप से नोबेल नहीं है। फिर भी इसे हमेशा अन्य पुरस्कारों के साथ ही प्रदान किया जाता है। नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन प्रक्रिया पुरस्कारों की संबंधित समितियों द्वारा किसी भी नामांकन की घोषणा नहीं की जाती है।

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Sat, 04 Oct 2025 12:32:00 +0530 news desk MPcg
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मन के खिलाफ किया सशस्त्र युद्ध का ऐलान, गोपनीय दस्तावेज़ में हुआ खुलासा https://citytoday.co.in/3811 https://citytoday.co.in/3811 वाशिंगटन 
अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मन -ड्रग कार्टेल- के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सशस्त्र युद्ध का ऐलान कर दिया है। एक गोपनीय दस्तावेज़ में खुलासा हुआ है कि ट्रंप ने ड्रग तस्करों को ‘गैरकानूनी योद्धा’ बताते हुए पेंटागन को निर्देश दिए हैं कि वे इन कार्टेल्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। इस रणनीति के तहत कैरेबियन सागर में पहले ही तीन ड्रग तस्करों वाली नावों पर हमले किए जा चुके हैं, जिससे राजनीतिक और कानूनी विवाद भी छिड़ गए हैं।

वाशिंगटन से आई खबर के मुताबिक, यह घोषणा कैरेबियन सागर में अमेरिकी सेना के हाल के हमलों के बाद आई है, जहां ड्रग तस्करों के तीन नावों को निशाना बनाया गया। इनमें से दो नावें वेनेजुएला से थीं, जिन पर अमेरिकी सेना ने गोलियां चलाईं और कई लोगों की मौत हुई। ट्रंप ने इन हमलों को आत्मरक्षा का एक जरूरी कदम बताया और कहा कि यह ड्रग्स की तस्करी को रोकने के लिए किया गया सैन्य अभियान है।

हालांकि, इस ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ ने अमेरिका के अंदर कानूनी और राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है। कई सांसदों का कहना है कि ऐसी सशस्त्र कार्रवाई के लिए पहले कांग्रेस की मंजूरी लेना जरूरी था। वहीं, पेंटागन ने सीनेट को हमलों की जानकारी दी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि कौन-कौन से कार्टेल निशाने पर हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में नाराजगी फैल गई है।

ट्रंप ने मैक्सिकन गैंग्स और वेनेजुएला के ट्रेन डे अरागुआ जैसे कार्टेल्स को आतंकी संगठन घोषित किया है और कहा है कि ये गैंग पश्चिमी गोलार्ध में ड्रग तस्करी कर अमेरिका को नष्ट करने की साजिश रच रहे हैं। राष्ट्रपति की इस नई रणनीति से स्पष्ट है कि ड्रग्स के खिलाफ अमेरिकी लड़ाई अब सिर्फ कानून या पुलिस की कार्रवाई नहीं बल्कि सैन्य और सशस्त्र संघर्ष का रूप लेने जा रही है।
 
ट्रंप का यह कदम ‘अमेरिका फर्स्ट’ के एजेंडे के तहत विदेशों में सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाने के बावजूद अब एक नए युद्ध की शुरुआत की तरह दिखता है, जिसने देश में राजनीतिक बहस और कानूनी सवालों को जन्म दिया है। अमेरिकी प्रशासन की यह रणनीति ड्रग तस्करी के खिलाफ कड़े कदम उठाने के उद्देश्य से है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता और कानूनी वैधता अभी विवादों में है।

 

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Fri, 03 Oct 2025 19:05:06 +0530 news desk MPcg
फ्रांस में खर्च कटौती के विरोध में भूचाल: 200 शहरों में हड़ताल, एफिल टावर रहा बंद https://citytoday.co.in/3810 https://citytoday.co.in/3810 पेरिस 

फ्रांस में  बड़े पैमाने पर हड़ताल और विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों ने खर्चों में कटौती का विरोध करते हुए अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाने की मांग की. इस दौरान राजधानी पेरिस का मशहूर आइफल टॉवर भी बंद रहा.

200 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन

फ्रांस के 200 से अधिक शहरों और कस्बों में हजारों कामगार, रिटायर्ड लोग और छात्र सड़कों पर उतरे. पेरिस में प्रदर्शनकारियों ने प्लेस द’इटली (Place d’Italie) से मार्च की शुरुआत की. आइफल टॉवर प्रशासन ने बयान जारी कर बताया कि हड़ताल की वजह से स्मारक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है.

यूनियनों की अगुवाई में विरोध

यह देशव्यापी हड़ताल फ्रांस की प्रमुख यूनियनों ने बुलाई है. पिछले महीने से बजट को लेकर चल रही राजनीतिक उथल-पुथल और बहस के बीच यह विरोध प्रदर्शनों की नई कड़ी है. यूनियनों का कहना है कि सरकार को पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री के बजट प्रस्तावों को छोड़ देना चाहिए, जिनमें सामाजिक कल्याण योजनाओं पर रोक और खर्चों में कटौती जैसी बातें शामिल हैं. यूनियनों ने चेतावनी दी है कि ऐसे कदम कम और मध्यम आय वर्ग के लोगों की क्रयशक्ति को और कमजोर करेंगे. वे अमीरों पर टैक्स बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.

नई सरकार पर दबाव

पिछले महीने ही प्रधानमंत्री बने सेबास्टियन लेकोर्नू ने अभी तक अपने बजट की विस्तृत जानकारी नहीं दी है और न ही अपनी मंत्रिमंडल टीम की घोषणा की है. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सरकार का गठन होगा और साल के अंत तक संसद में बजट बिल पर बहस की जाएगी.

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Fri, 03 Oct 2025 18:58:08 +0530 news desk MPcg
पुतिन बोले: मैं PM मोदी को जानता हूं, भारत कभी अपमान सहन नहीं करेगा https://citytoday.co.in/3809 https://citytoday.co.in/3809 नई दिल्ली
अमेरिका ने भारत को झुकाने के लिए 50 फीसदी टैरिफ लगाया. डोनाल्ड ट्रंप ने सोचा इससे भारत-रूस की दोस्ती टूट जाएगी. भारत टैरिफ के दबाव में रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा. इससे रूस कमजोर पड़ जाएगा. रूस-यूक्रेन खत्म हो जाएगा. मगर ट्रंप की सोच से भी आगे निकली भारत-रूस की दोस्ती. जी हां, ट्रंप के टैरिफ का असर अब उल्टा हो रहा है. भारत और रूस की दोस्ती और मजबूत हो रही है. यही कारण है कि रूस अब अपने दोस्त भारत को टैरिफ से अधिक नुकसान नहीं होने देगा. ट्रंप टैरिफ से भारत को हो रहे नुकसान की भरपाई खुद रूस करेगा. इसका आदेश भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दे दिया है.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को अपनी सरकार को आदेश दिया है कि वह नई दिल्ली की ओर से कच्चे तेल के भारी आयात के कारण भारत के साथ व्यापार असंतुलन को कम करने के उपाय करे. साउथ रूस के काला सागर रिसॉर्ट में गुरुवार शाम भारत सहित 140 देशों के सुरक्षा और भू-राजनीतिक विशेषज्ञों के अंतर्राष्ट्रीय वल्दाई चर्चा मंच से बोलते हुए पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि रूस और भारत के बीच कभी कोई समस्या या तनाव नहीं रहा है और उन्होंने हमेशा अपनी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए हैं.

पुतिन ने की मोदी की तारीफ

पुतिन ने कहा कि भारत के साथ रूस का कभी कोई समस्या या अंतर्राज्यीय तनाव नहीं रहा. कभी नहीं. व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र बताया और कहा कि वे उनके भरोसेमंद संबंधों में सहज महसूस करते हैं. पुतिन ने मोदी के नेतृत्व वाली भारत की राष्ट्रवादी सरकार की सराहना की और उन्हें एक संतुलित, बुद्धिमान और राष्ट्र हितैषी नेता बताया.

भारत के नुकसान की भरपाई करेगा रूस

पुतिन ने कहा कि भारत में हर कोई यह बात अच्छी तरह जानता है. खासकर रूस से तेल आयात रोकने के अमेरिकी दबाव को नजरअंदाज करने के भारत के फैसले के बारे में. उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के टैरिफ के कारण भारत को होने वाले नुकसान की भरपाई रूस से कच्चे तेल के आयात से हो जाएगी. साथ ही इससे भारत को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठा भी मिलेगी.’

क्या है रूस का प्लान

पुतिन ने कहा कि व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए रूस भारत से और अधिक कृषि उत्पाद और दवाइयां खरीद सकता है. पुतिन ने कहा, ‘भारत से और अधिक कृषि उत्पाद खरीदे जा सकते हैं. औषधीय उत्पादों और दवाइयों के लिए हमारी ओर से कुछ कदम उठाए जा सकते हैं.’ उन्होंने रूस और भारत के बीच आर्थिक सहयोग की अपार संभावनाओं का जिक्र किया, मगर इन अवसरों को पूरी तरह से खोलने के लिए विशिष्ट मुद्दों को सुलझाने की जरूरत को भी स्वीकार किया. पुतिन ने वित्तपोषण, रसद और भुगतान संबंधी बाधाओं को प्रमुख चिंताओं के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि हमें अपने अवसरों और संभावित लाभों को खोलने के लिए सभी तरह के कार्यों को हल करने की ज़रूरत है.

भारत के लोग कभी अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे

रूस और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर पश्चिमी देशों को चेतावनी दी है. उन्होंने साफ कहा कि यदि यूरोप ने रूस को उकसाने की कोशिश की तो उसका जवाब तुरंत और बेहद घातक होगा. साथ ही उन्होंने रूस-यूक्रेन जंग खत्‍म कराने की कोश‍िश करने के ल‍िए भारत की तारीफ की. पीएम मोदी की तारीफ करते हुए पुत‍िन ने कहा, मैं पीएम मोदी को जानता हूं. भारत के लोग अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे. रूस भारत और चीन जैसे देशों का आभारी है, जिन्होंने ब्रिक्स की स्थापना की. ये ऐसे देश हैं जो किसी का पक्ष लेने से इनकार करते हैं और वास्तव में एक न्यायपूर्ण विश्व बनाने की आकांक्षा रखते हैं

दक्षिण रूस में आयोजित एक समारोह में पुतिन ने कहा, हम यूरोप के बढ़ते सैन्यीकरण पर बारीकी से नजर रख रहे हैं. रूस की ओर से जवाबी कदम उठाने में वक़्त नहीं लगेगा. और यह प्रतिक्रिया बहुत गंभीर होगी. पुतिन ने साफ किया कि रूस कमजोरी या अनिर्णय का परिचय कभी नहीं देगा. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस का नाटो गठबंधन पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर किसी को अभी भी हमारे साथ सैन्य प्रतियोगिता करने का मन है, तो उन्हें कोशिश कर लेने दें. रूस ने सदियों से यह साबित किया है कि उकसावे का जवाब तुरंत और सख्ती से दिया जाता है.

शांति से सोइए, आराम कीजिए
राष्ट्रपति पुतिन ने विशेष रूप से जर्मनी का नाम लेते हुए कहा कि वह यूरोप में सबसे शक्तिशाली सेना बनाने का सपना देख रहा है. उन्होंने यूरोपीय नेताओं पर हिस्टेरिया फैलाने का आरोप लगाया. यूरोप की एकजुट अभिजात्य जमात लगातार युद्ध की आशंका का माहौल बना रही है. वे बार-बार कहते हैं कि रूस से जंग दरवाज़े पर खड़ी है. यह एक तरह की बकवास है, जिसे वे मंत्र की तरह दोहराते रहते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यह मानना असंभव है कि रूस कभी नाटो के किसी सदस्य देश पर हमला करेगा. सचमुच, मैं सिर्फ यही कहना चाहता हूं: शांति से सोइए, आराम कीजिए और अपने घर की समस्याओं पर ध्यान दीजिए. जरा देखिए कि यूरोपीय शहरों की सड़कों पर क्या हो रहा है.

रूस-यूरोप टकराव: शीत युद्ध से आगे
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने पश्चिमी मीडिया की शीत युद्ध जैसी तुलना को खारिज किया. उन्होंने कहा, यह शीत युद्ध नहीं है. यहां काफी पहले से ठंड नहीं, बल्कि आग लगी हुई है. हम पहले से ही एक नए तरह के संघर्ष में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय संघ और नाटो, रूस पर झूठे आरोप लगाकर अपने विशाल रक्षा बजट को सही ठहराना चाहते हैं. “उनके बयान दो चीज़ें बताते हैं. पहला, वे उकसावे की एक श्रृंखला तैयार कर रहे हैं. दूसरा, उन्हें अपने सैन्य बजट को जायज़ ठहराने का बहाना चाहिए.

ड्रोन घटनाएं और बढ़ती चिंताएं
पिछले दिनों डेनमार्क में ड्रोन घटनाओं और एस्टोनिया व पोलैंड में कथित रूसी हवाई उल्लंघनों ने इस डर को गहरा कर दिया है कि यूक्रेन युद्ध की आग सीमाओं से बाहर फैल सकती है. हालांकि पुतिन ने इन चिंताओं को “अफवाह और प्रोपेगेंडा” बताते हुए खारिज किया. उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों का मकसद अपने सैन्य खर्च को जायज ठहराना है.

अमेरिका और रूस में तनाव
सिर्फ दो महीने पहले अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पुतिन की मुलाक़ात के बावजूद शांति की उम्मीदें अब और धुंधली होती दिख रही हैं. रूसी सेना यूक्रेन में लगातार बढ़त बना रही है, वहीं रूसी ड्रोन के नाटो हवाई क्षेत्र में दाखिल होने की रिपोर्टें भी आई हैं. इस बीच, अमेरिका अब रूस के भीतर गहरे हमले करने पर विचार कर रहा है.

 

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Fri, 03 Oct 2025 18:55:58 +0530 news desk MPcg
पेशावर में बड़ा धमाका: 9 की मौत, 4 पुलिसकर्मी घायल https://citytoday.co.in/3808 https://citytoday.co.in/3808 इस्लामाबाद 
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर में गुरुवार को हुए बम धमाके में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह जानकारी दी है। पेशावर के कैपिटल सिटी पुलिस ऑफिसर मियां सईद ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस हमले में पुलिस को निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा, “प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि विस्फोटक सामग्री पुलिस मोबाइल के मार्ग पर लगाई गई थी।”

घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया है और जांच शुरू कर दी है। यह धमाका ऐसे समय हुआ है जब पेशावर और इसके आसपास के इलाकों में हाल के महीनों में आतंकी गतिविधियों में तेजी आई है। पिछले कुछ वर्षों में यह शहर कई बड़े हमलों का गवाह रहा है।

धमाके के तुरंत बाद भारी संख्या में सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और इलाके की घेराबंदी कर दी। सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ऑपरेशन) मसूद बंगश ने कहा कि फोर्सेज मौके पर जांच कर रही हैं और सबूत इकट्ठे किए जा रहे हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही 30 सितंबर को बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में एक भीषण धमाके ने दहशत फैला दी थी। उस हमले में कम से कम 10 लोग मारे गए और 32 घायल हुए थे। धमाका फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) मुख्यालय के पास व्यस्त सड़क पर हुआ था। बलूचिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री बख्त मोहम्मद काकर ने मौतों की पुष्टि की थी। पुलिस के अनुसार, आठ शवों को क्वेटा के सिविल अस्पताल लाया गया था।

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगटी ने इसे आतंकी हमला करार देते हुए कहा, “आतंकी कायराना हमलों से राष्ट्र की एकता और संकल्प को कमजोर नहीं कर सकते। लोगों और सुरक्षाबलों की कुर्बानियां व्यर्थ नहीं जाएंगी। हम बलूचिस्तान को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों ने तत्काल जवाबी कार्रवाई में चार हमलावरों को मार गिराया। बुगटी ने यह भी कहा कि प्रदेश में आतंकियों के खिलाफ विशेष ऑपरेशन जारी है।

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Fri, 03 Oct 2025 18:54:37 +0530 news desk MPcg
PoK में विरोध&प्रदर्शन जारी, अब तक 12 मौतें; UN में उठी आवाज़, पाक पर मानवाधिकार हनन का आरोप https://citytoday.co.in/3807 https://citytoday.co.in/3807 इस्लामाबाद 

पाकिस्तान ऑक्यूपाइड जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी असंतोष की लहर अब इस्लामाबाद तक पहुंच गई है. नेशनल प्रेस क्लब में पुलिस के बर्बर हमले और लाठीचार्ज की खबर है. यह कार्रवाई कश्मीर एक्शन कमेटी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई. मानवाधिकार समूहों और मीडिया संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है.

इस्लामाबाद पुलिस ने गुरुवार को नेशनल प्रेस क्लब (NPC) पर छापा मारा है. पुलिस ने परिसर में जबरन प्रवेश कर पत्रकारों के साथ-साथ PoJK (पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर) के प्रदर्शनकारियों पर हमला किया. 

यह घटना PoJK में कथित अत्याचारों और इंटरनेट ब्लैकआउट के विरोध में किए जा रहे एक प्रदर्शन के दौरान हुई. पुलिस ने लाठीचार्ज किया और मीडिया उपकरणों को नष्ट कर दिया. इस कार्रवाई से देश भर में आक्रोश फैल गया है.

प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का कड़ा प्रहार

पुलिस की यह कार्रवाई कश्मीर एक्शन कमेटी द्वारा आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान हुई. यह प्रदर्शन कथित अत्याचारों और अधिकृत कश्मीर में चल रहे इंटरनेट ब्लैकआउट के खिलाफ किया जा रहा था.

पीओके में शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, सेना के दमन के खिलाफ आवाज़ – pok mass protests against shehbaz sharif government army repression demands for …

रिपोर्ट्स के मुताबिक, PoJK के एडवोकेट समुदाय के सदस्य NPC के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान, पुलिस ने हमला किया और उन्हें निशाना बनाया. चश्मदीदों ने पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और मीडिया उपकरणों को नष्ट करने की जानकारी दी.

मानवाधिकार संगठनों और पत्रकारों ने की निंदा

इस हमले की ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) ने कड़ी निंदा की. HRCP ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हम नेशनल प्रेस क्लब पर छापे और पत्रकारों पर हमले की कड़ी निंदा करते हैं. उन्होंने तत्काल जांच की मांग की और कहा कि जिम्मेदार लोगों को कटघरे में लाया जाना चाहिए. इस घटना ने देशव्यापी आक्रोश और मानवाधिकार समूहों से निंदा को जन्म दिया है.

राजनीतिक नेताओं ने मांगी जवाबदेही

पाकिस्तान के मशहूर पत्रकार ज़ाईद गिशकोरी ने भी अधिकारियों को फटकार लगाई. उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद प्रेस क्लब पर पुलिस का बर्बर हमला गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने सवाल किया कि पत्रकारों का घर उन लोगों के लिए असुरक्षित कैसे हो गया, जिनके पास विरोध करने की कोई जगह नहीं है. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पूर्व दूत मलीहा लोधी ने भी इस छापे को "निंदनीय" बताया और जवाबदेही की मांग की.

अवाम बोली- PAK को हमें मारने का कोई हक नहीं

पाक अधिकृत कश्मीर में स्थानीय लोगों के प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सेना का अत्याचार अब संयुक्त राष्ट्र तक तक पहुंच गया है. पीओके के राजनीति दलों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से मांग की है कि UN तुरंत यहां दखल दे और यहां की जनता को पाकिस्तानी सेना के अत्याचार से बचाए. यहां 29 सितंबर से चल रहे नागरिकों के प्रदर्शन में अब तक 12 लोग मारे जा चुके हैं.

स्विटजरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद 60वें सेशन के दौरान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की पार्टी (UKPNP-यूनाइटेड कश्मीर पीपुल नेशनल पार्टी) ने इस मुद्दे को उठाया. UKPNP ने कहा कि पाकिस्तान को कश्मीरियों को मारने, हमारी जमीन और हमारे संसाधनों पर कब्जा करने, हमारे लोगों पर अत्याचार करने और उन्हें खत्म करने का कोई हक नहीं है.

UKPNP के प्रवक्ता सरदार नासिर अजीज खान ने जिनेवा में कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर में कई लोग गायब हो गए हैं, लेकिन हाल ही में तथाकथित 'आज़ाद कश्मीर' में जो हो रहा है, उससे लोग अपनी जान को लेकर चिंतित हैं क्योंकि 29 सितंबर से अब तक 12 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है.

नासिर अजीज खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान यहां के लोगों पर क्रूर बल प्रयोग कर रहा है और प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चला रहा है जिससे लोग मारे जा रहे हैं. सैकड़ों लोग जेल में हैं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है. 

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में इस अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के जमावड़े के माध्यम से हम आग्रह करते हैं कि संयुक्त राष्ट्र उन कश्मीरियों की जान बचाने के लिए हस्तक्षेप करे जो पाकिस्तानी कब्जे में रह रहे हैं. कश्मीरियों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जा रहा है.

इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद प्रेस क्लब में इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस के एक्शन की निंदा की. 

सरदार नासिर अजीज खान ने कहा कि हमारी पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरदार तानिया, पूर्व उपाध्यक्ष सरदार आफ़ताब ख़ान और कई अन्य लोगों को आज मुज़फ़्फ़राबाद में गिरफ़्तार कर लिया गया. वे पाकिस्तान द्वारा की गई इन हत्याओं और गिरफ़्तारियों के खिलाफ इस्लामाबाद प्रेस क्लब के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. और पाकिस्तान का कश्मीर में कोई अधिकार नहीं है. उन्हें कश्मीरियों को मारने, हमारी जमीन और हमारे संसाधनों पर कब्जा करने हमारे लोगों पर अत्याचार करने और उन्हें खत्म करने का कोई हक नहीं है.

इस्लामाबाद प्रेस क्लब में क्या हुआ?

2 अक्टूबर 2025 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के नेशनल प्रेस क्लब में एक गंभीर घटना घटी. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JKJAC) के सदस्य इस्लामाबाद प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे. इस दौरान इस्लामाबाद पुलिस प्रेस क्लब में घुस गई. पुलिस ने प्रदर्शन को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया. पुलिस ने क्लब के अंदर घुसकर पत्रकारों और स्टाफ पर लाठीचार्ज किया, कैफेटेरिया को तोड़ा-फोड़ा, कैमरे और मोबाइल फोन तोड़े और कुछ लोगों को गिरफ्तार किया. 

वीडियो फुटेज में पुलिस को पत्रकारों को घसीटते और पीटते हुए दिखाया गया है. यह घटना PoK में चल रहे पांचवें दिन के विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई, जहां बाजार बंद हैं और इंटरनेट कटा हुआ है. 

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Fri, 03 Oct 2025 18:52:38 +0530 news desk MPcg
यूक्रेन पर ट्रंप की नई रणनीति: क्या पुतिन से समझौते का ख्याल छोड़ दिया? https://citytoday.co.in/3788 https://citytoday.co.in/3788 वाशिंगटन 
ऐसा लगता है कि यूक्रेन को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नजरिया काफी बदल गया है। पहली नजर में तो ऐसा लगता है कि उन्होंने पूरी तरह से इस आशावादी रुख को अपना लिया है कि कीव ‘‘पूरे यूक्रेन को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए लड़ने और जीतने की स्थिति में है’’। इसके साथ यह संदेश भी आया कि इसे साकार करने के लिए यूरोपीय देशों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

ट्रंप के अनुसार यूक्रेन की जीत “समय, धैर्य और यूरोप तथा विशेष रूप से उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के वित्तीय समर्थन” पर निर्भर करती है। अमेरिका की एकमात्र प्रतिबद्धता ‘‘नाटो को हथियार उपलब्ध कराना है ताकि नाटो उनके साथ जो चाहे कर सके।’’

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपने संदेश के अंत में लिखा, ‘‘सभी को शुभकामनाएं!’’ यह शायद अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत है कि अमेरिकी राष्ट्रपति शांति समझौते के अपने प्रयासों से पीछे हट रहे हैं। इससे यह भी पता चलता है कि उन्होंने रूस के अपने समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ एक अलग समझौते का विचार छोड़ दिया है। लेकिन यहीं पर अच्छी खबर समाप्त हो जाती है और यहीं पर यूरोपीय नेतृत्व वाले गठबंधन को इस महाद्वीप को और अधिक अस्थिर वातावरण में सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करने की आवश्यकता होगी।

नाटो हवाई क्षेत्र में रूसी घुसपैठ के कई सप्ताह बाद, ड्रोनों ने – जिनके रूस से जुड़े होने की अत्यधिक संभावना है – कोपेनहेगन हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्र में दो बार डेनमार्क के हवाई क्षेत्र को बाधित किया। ऐसा लगा जैसे कि यह यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की द्वारा 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए उनके भाषण में की गई भविष्यवाणी का पूर्वाभास था।

पुतिन की लगातार उकसावे वाली गतिविधियां कीव के यूरोपीय सहयोगियों के लिए एक खुली चुनौती हैं। इस गठबंधन के केंद्र में, यूरोपीय संघ ने निश्चित रूप से यह प्रदर्शित किया है कि वह इस चुनौती का सामना करने के लिए अपनी वाक्पटुता दिखाने को तैयार है।

ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के संस्थानों ने अपने दृढ़ संकल्प के बारे में कभी कोई संदेह नहीं छोड़ा है कि यूक्रेन के खिलाफ रूस के आक्रामक युद्ध को ‘‘यूक्रेन के लिए एक न्यायसंगत और स्थायी शांति के साथ समाप्त करने की आवश्यकता है’’। यूरोपीय संघ आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हाल में अपने संबोधन में इसका जिक्र किया था।

सबसे पहले, इच्छुक देशों का गठबंधन एक सुसंगत निकाय नहीं है। इसके सदस्यों में नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्य, साथ ही ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। लेकिन अमेरिका इसमें शामिल नहीं है।

फरवरी में आठ देशों, यूरोपीय संघ और नाटो से बढ़कर, अप्रैल में 33 और सितंबर में 39 सदस्य हो गए। कीव को सैन्य उपकरणों से सहायता देने वाले 57 सदस्यीय यूक्रेन रक्षा संपर्क समूह, जिसकी 30वीं बैठक सितंबर की शुरुआत में हुई थी, के साथ इसका संबंध पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

यह भी पूरी तरह साफ नहीं है कि यूरोपीय संघ और नाटो के नेता अपने संगठन के सभी सदस्यों की ओर से बोल रहे हैं या नहीं। उदाहरण के लिए यूरोपीय संघ और नाटो के सदस्यों में हंगरी और स्लोवाकिया ने रूस के विरुद्ध यूरोप की रक्षा के मामले में अस्पष्ट रुख अपनाया है। नाटो के यूरोपीय सदस्य अमेरिका के इस कदम से बेहद चिंतित हैं और यह चिंता गलत भी नहीं है कि अमेरिका ने नाटो को छोड़ दिया है।

यूरोप को अपना धन बढ़ाने, अपनी सैन्य शक्ति विकसित करने तथा निर्णय लेने की ऐसी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है जो टालमटोल में न फंसी हो, ताकि वह उस छद्म युद्ध को जीत सके जिसे क्रेमलिन ने यूक्रेन और उसके सहयोगियों पर थोपा है। ऐसा करने से यह सुनिश्चित हो जायेगा कि यूरोपीय देश रूस को यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध को पश्चिम के साथ पूर्ण सैन्य टकराव में बदलने से रोकने में बेहतर स्थिति में हैं।

 

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Thu, 02 Oct 2025 17:43:54 +0530 news desk MPcg
पहले आटे पर बवाल, अब आसिम मुनीर की सेना पर सवाल: PoK में बढ़ते तनाव की गंभीर तस्वीर https://citytoday.co.in/3787 https://citytoday.co.in/3787

इस्लामाबाद 
PoK यानी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन जारी हैं। अब प्रदर्शनकारियों ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अगुवाई वाली सेना को भी आड़े हाथों लिया है। पाकिस्तान सरकार और सेना की तुलना चुड़ैल से की जा रही है, जो लोगों की हत्या करने पर तुली हुई है। प्रदर्शनकारी अब भ्रष्टाचार और राजनीतिक अधिकार नहीं दिए जाने के भी आरोप लगा रहे हैं।

खबर है कि पाकिस्तानी बलों ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की थी, जिसमें कम से कम 12 आम नागरिकों की मौत हो गई थी और 200 से ज्यादा घायल हो गए थे। पाकिस्तानी रेंजर्स की गोलीबारी में 3 पुलिसकर्मियों की भी मौत हो गई थी। साथ ही 9 घायल हो गए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, आवामी ऐक्शन कमेटी के नेता शौकत नवाज मीर ने भाषण दिया, 'हमारा संघर्ष किसी एक व्यक्ति से नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम से है।' उन्होंने कहा, 'यह जनता का संघर्ष है, यह आपका संघर्ष है और यह हम सभी का संघर्ष है। हम सभी मिलकर इस सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाएंगे।' उन्होंने पाकिस्तानी सेना और सरकार को लेकर कहा, 'एक चुड़ैल लोगों को मारने पर तुली हुई है।' मीर ने कहा, 'यह संघर्ष आखिरी सांस तक जारी रहेगा।' उन्होंने कहा, 'हम चुप नहीं रहेंगे। पीओके के लोग अब दबाव के आगे और नहीं झुकेंगे।'

कैसे शुरू हुआ प्रदर्शन
यह विरोध प्रदर्शन दो साल पहले क्षेत्र में आटे और बिजली की नियमित और रियायती आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शुरू हुआ था लेकिन अब इसमें अतिरिक्त मांगें भी जुड़ गई हैं, जैसे कश्मीरी अभिजात वर्ग के विशेषाधिकारों में कटौती, आरक्षित विधानसभा सीटों का उन्मूलन और मुफ्त शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं।

जेकेजेएएसी का आरोप है कि इस बार का विरोध प्रदर्शन इसलिये किया जा रहा है क्योंकि सरकार दो साल पहले हुए समझौते को पूरी तरह से लागू करने में विफल रही है। प्रदर्शनकारियों ने 38 सूत्री मांगपत्र प्रस्तुत किया, जिसमें प्रमुख मांगें शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों की समाप्ति और अभिजात वर्ग के विशेषाधिकारों की वापसी शामिल हैं।

अन्य मांगों में कई सड़क परियोजनाओं का निर्माण, करों में राहत, आटे और बिजली पर सब्सिडी, शरणार्थियों के लिए नौकरी कोटा समाप्त करना, न्यायपालिका में सुधार और अन्य स्थानीय मांगें शामिल हैं।

 

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Thu, 02 Oct 2025 17:41:17 +0530 news desk MPcg
पाकिस्तान के उपदेश पर भारत का पलटवार: UN में दूत मोहम्मद हुसैन ने सुनाई खरी&खरी https://citytoday.co.in/3786 https://citytoday.co.in/3786 वाशिंगटन 
भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में पाकिस्तान को सख्त लहजे में आड़े हाथों लिया और जमकर फटकार लगाई है। भारतीय राजदूत मोहम्मद हुसैन ने बुधवार को जिनेवा में हुई 60वें सत्र की 34वीं बैठक में कहा कि यह विडंबना है कि पाकिस्तान जैसे देश को मानवाधिकारों पर दूसरों को भाषण देने का साहस होता है, जबकि खुद उसके यहां अल्पसंख्यकों का लगातार दमन हो रहा है। हुसैन ने साफ कहा कि पाकिस्तान को प्रचार फैलाने की बजाय अपने घर के हालात सुधारने चाहिए और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों का सामना करना चाहिए।

बैठक के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी पाकिस्तान के मानवाधिकार हनन पर सवाल उठाए। भू-राजनीतिक शोधकर्ता जॉश बोव्स ने बलूचिस्तान में कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया और बताया कि पाकिस्तान नाजुक समुदायों को दबाता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नैतिकता का ढोंग करता है।

उन्होंने बताया कि यूएससीआईआरएफ (USCIRF) की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट 2025 के अनुसार पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून के तहत 700 से अधिक लोग जेल में हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 300% अधिक है। बलूच नेशनल मूवमेंट की मानवाधिकार इकाई पांक के अनुसार, 2025 के पहले छह महीनों में ही 785 जबरन गुमशुदगियां और 121 हत्याएं दर्ज की गईं। वहीं पश्तून राष्ट्रीय जिरगा का कहना है कि इस साल तकरीबन 4,000 पश्तून अब भी लापता हैं।

पीओके में बिगड़ता हालात
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) के प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने परिषद से अपील की कि पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में दमन की बढ़ती घटनाओं पर हस्तक्षेप किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। कान ने कहा कि पाकिस्तान ने रेंजर्स की तैनाती कर दी है और फोन व इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं ताकि संसाधनों के स्वामित्व और बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे अहिंसक आंदोलन को दबाया जा सके।

इससे पहले जुलाई में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान सरकार को आगाह किया था कि वह अल्पसंख्यकों (विशेषकर अहमदी समुदाय) के खिलाफ बढ़ रही हिंसा, मनमाने ढंग से गिरफ्तारियां और पूजा स्थलों पर हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।

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Thu, 02 Oct 2025 17:29:04 +0530 news desk MPcg
PoK में बवाल: सुरक्षाबलों की फायरिंग से 12 की मौत, हालात बेकाबू https://citytoday.co.in/3785 https://citytoday.co.in/3785 इस्लामाबाद 
पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बीते तीन दिनों से जारी बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो उठे हैं। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक कम से कम 12 नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने गोलियां और आंसू गैस के गोले दागे। मारे गए नागरिकों में पांच मुजफ्फराबाद, पांच धीरकोट और दो डडियाल के बताए जा रहे हैं। इस दौरान झड़प में कम से कम तीन पुलिसकर्मी भी मारे गए हैं।

प्रदर्शन की शुरुआत सरकार की मूलभूत मांगें पूरी न करने से हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों के खिलाफ व्यापक विरोध में बदल गया है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि क्षेत्र में लगातार शोषण और संसाधनों की लूट हो रही है, जबकि बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।

हिंसा में घायल हुए अधिकांश लोगों को गोलियों से चोटें आई हैं। कई अस्पतालों में भीड़ बढ़ गई है और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से हालात और बिगड़ रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह आंदोलन PoK में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा जनविरोध है, जिसने पाकिस्तान प्रशासन और सेना के खिलाफ नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया है।

जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने अशांत क्षेत्र में जनजीवन को ठप कर दिया है। इस आंदोलन के केंद्र में पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित पीओके की 12 विधानसभा सीटों को समाप्त करने की मांग है। 29 सितंबर को विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से बाजार, दुकानें और स्थानीय व्यवसाय बंद हैं। मोबाइल, इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाएं भी पूरी तरह से बंद हैं। इस बीच, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

 

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Thu, 02 Oct 2025 16:46:15 +0530 news desk MPcg
हमास में हलचल! ट्रंप की दो शर्तें ठुकराईं, 2 बड़ी गारंटी भी मांगी https://citytoday.co.in/3784 https://citytoday.co.in/3784 दोहा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले दिनों गाजा में शांति स्थापना और युद्धविराम की शर्तों पर सहमति जताई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने शांति योजना के तहत 20 सूत्री प्रस्ताव दिया है, जिस पर इजरायल ने सहमति दे दी है लेकिन हमास की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हमास को इसके लिए 72 घंटों का समय दिया गया है। इस बीच, फिलिस्तीनी सूत्रों ने बताया है कि हमास ने ट्रंप के 20 सूत्री प्लान की दो अहम शर्तों पर सवाल उठाए हैं और उसे मानने से इनकार कर दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हमास के अधिकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना में निरस्त्रीकरण संबंधी प्रावधानों में संशोधन चाहते हैं। यह जानकारी समूह के नेतृत्व के एक करीबी फिलिस्तीनी सूत्र ने दी है। सूत्र ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए बताया कि हमास के वार्ताकारों ने मंगलवार को दोहा में तुर्की, मिस्र और कतर के अधिकारियों के साथ चर्चा की। इस दौरान ट्रंप की दो शर्तों पर अपनी असहमति जताई है और उसमें बदलाव की चाहत जताई है।फिलिस्तीनी सूत्र ने बताया कि हमास अपने गुट के निरस्त्रीकरण और अपने लड़ाकों के गाजा से निष्कासन जैसे कुछ प्रावधानों में संशोधन करना चाहता है। इसके अलावा हमास नेता गाजा पट्टी से इजरायल की पूर्ण वापसी के लिए अंतर्राष्ट्रीय गारंटी चाहते हैं। हमास के लोग यह भी चाहते हैं कि गाजा के अंदर या बाहर कहीं भी उनके लोगों पर हमला न हो और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी इसकी गारंटी दे कि भविष्य में हमास के लोगों की हत्या नहीं की जाएगी।

अरब साझेदारों के संपर्क में हमास
दरअसल, पिछले महीने दोहा में युद्धविराम प्रस्ताव पर चर्चा के लिए हमास अधिकारियों की बैठक के दौरान ही इजराइल ने हमला बोल दिया था, जिसमें छह लोग मारे गए थे। फिलिस्तीनी सूत्र ने विस्तृत जानकारी दिए बिना कहा कि हमास अन्य क्षेत्रीय और अरब साझेदारों के साथ भी संपर्क में है। इस बीतचीत से परिचित एक अन्य सूत्र ने एएफपी को बताया कि ट्रम्प की योजना को लेकर फिलिस्तीनी समूह में मतभेद है।

हमास के भीतर दो विचार चल रहे
फिलिस्तीनी सूत्र ने कहा कि अभी तक हमास के भीतर दो विचार चल रहे हैं। पहला बिना शर्त ट्रंप के पीस प्लान का समर्थन करता है क्योंकि उन्हें इसके जरिए ट्रम्प गाजा में युद्धविराम की गारंटी दे रहे हैं लेकिन दूसरे समूह को निरस्त्रीकरण और गाजा छोड़ने की शर्त पर आपत्ति है। सूत्र ने कहा, "वे निरस्त्रीकरण और किसी भी फिलिस्तीनी नागरिक को गाजा से निकाले जाने का विरोध कर रहे हैं।" बता दें कि हमास के पास ट्रंप के 20 सूत्री प्लान पर जवाब देने के लिए अब कम समय बचा है। हालांकि, सूत्र ने कहा कि समूह को जवाब देने के लिए अभी दो या तीन दिन और लग सकते हैं।

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Thu, 02 Oct 2025 16:33:52 +0530 news desk MPcg
स्कूल नियमों के विरोध में बोर्ड मीटिंग में महिला ने किया कपड़े उतारने का विवादित प्रदर्शन; वीडियो वायरल https://citytoday.co.in/3768 https://citytoday.co.in/3768 कैलिफोर्निया

अमेरिका के स्कूल में बीते दिनों चल रही एक बोर्ड मीटिंग में एक महिला की वजह से हड़कंप मच गया। दरअसल महिला मीटिंग में बीच अचानक एक-एक कर अपने कपड़े उतारने लगी और सिर्फ बिकनी पहनकर अपना भाषण देने लगी। मामला कैलिफोर्निया का है। न्यू यॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक महिला की पहचान बेथ बॉर्न के रूप में हुई है, जो पहले भी इस तरह के विवाद खड़े कर चुकी है।

दरअसल महिला जिले की उस नीति का विरोध कर रही थी, जिसके मुताबिक ट्रांसजेंडर छात्रों को उनकी पसंद के लॉकर रूम और वॉशरूम का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी गई है। महिला मॉम्स फॉर लिबर्टी नाम की एक संस्था की अध्यक्ष है। यह वाकया बीते 18 सितंबर को हुआ जब वह डेविस जॉइंट यूनिफाइड स्कूल डिस्ट्रिक्ट बोर्ड की मीटिंग में भाग लेने पहुंची थी।

कपड़े उतारने हुए महिला कहने लगी, “मैं डेविस यूनिफाइड स्कूल डिस्ट्रिक्ट की एक अभिभावक हूं, और मैं आज यहां जूनियर हाई स्कूलों के लॉकर रूम के लिए आपकी नीतियों पर बात करने आई हूँ। एमर्सन, होम्स, हार्पर जूनियर हाई। अभी, हम अपने छात्रों को फिजिकल एजुकेशन की क्लासेस के लिए कपड़े उतारने के लिए कहते हैं। इसलिए मैं आपको बस यह बताने जा रही हूं कि जब मैं कपड़े उतारती हूं तो उन्हें कैसा लगता है।”

महिला ने कहा है कि वह अपने कपड़े उतारकर यह दिखाना चाहती थीं कि मौजूदा नियमों के तहत लड़कियां कितनी असुरक्षित महसूस कर सकती हैं। जैसे ही उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किए, बैठक में अफरा-तफरी मच गई और बोर्ड के सदस्यों ने बैठक स्थगित कर दी।

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Wed, 01 Oct 2025 15:46:20 +0530 news desk MPcg
अफगानिस्तान में तालिबान के प्रतिबंध: स्कूल से लेकर सोशल मीडिया तक सब कुछ बंद https://citytoday.co.in/3767 https://citytoday.co.in/3767 काबुल 

तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में टेलीकॉम सर्विसेज और इंटरनेट सेवा को बंद करने का आदेश दे दिया है. ग्लोबल इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स की मानें तो पूरे देश में बीते दिन कनेक्टिविटी सामान्य से एक फीसदी के भी कम रह गई है. संस्था का कहना है कि यह इंटरनेट शटडाउन पूरी तरह से ब्लैकआउट के बराबर है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है, जब तालिबान ने अफगानिस्तान में किसी चीज पर बैन लगाया हो. इससे पहले भी जब तालिबान अफगानिस्तान में सत्ता में आया था, तब भी कई चीजों पर रोक लगाई गई है. चलिए जानें.

सत्ता में आया तालिबान, घर में सिमटीं महिलाएं

अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता आने के बाद से महिलाओं की जिंदगी तो बिल्कुल सिमट गई है. अगस्त 2021 में तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया और तब से अब तक महिलाओं और लड़कियों पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं. शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन से जुड़े अधिकार उनसे धीरे-धीरे छीन लिए गए हैं. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार तालिबान की नीतियों की आलोचना होती रही है, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं दिख रहा है.

लड़कियों की पढ़ाई हुई बैन

तालिबान के आने के बाद सबसे पहला असर लड़कियों की पढ़ाई पर पड़ा. तालिबान ने 2021 में लड़कियों के लिए छठी कक्षा से आगे की पढ़ाई पर रोक लगा दी. धीरे-धीरे विश्वविद्यालयों में भी उनका प्रवेश बंद कर दिया गया. आज स्थिति यह है कि अफगानिस्तान की लाखों लड़कियां और युवतियां स्कूल-कॉलेज जाने से वंचित हैं. शिक्षा का यह अधिकार उनसे पूरी तरह छीन लिया गया है.

रोजगार के अवसरों पर लगी पाबंदी

केवल शिक्षा ही नहीं, महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बंद कर दिए गए. तालिबान सरकार ने कई क्षेत्रों में महिलाओं के काम करने पर रोक लगाई, जिनमें गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं. इसके चलते हजारों महिलाएं जो पहले समाज में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं, अब घरों में कैद होकर रह गई हैं.

ब्यूटी पार्लर भी कर दिए गए बंद

महिलाओं की सार्वजनिक उपस्थिति को भी सीमित कर दिया गया है. उनके लिए पार्क, जिम और पब्लिक बाथहाउस जैसी जगहों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. यहां तक कि यात्रा करने के लिए भी महिलाओं को अब पुरुष अभिभावक यानी उनके पिता या पति की जरूरत पड़ती है. यह नियम उनकी स्वतंत्रता को पूरी तरह खत्म कर देता है. जुलाई 2023 में तालिबान ने महिलाओं के लिए ब्यूटी पार्लर बंद करने का भी आदेश जारी किया था. अफगानिस्तान में हजारों महिलाएं ब्यूटी पार्लर में काम करती थीं और यह उनका रोजगार का साधन भी था. 

तालिबान में सामान्य जीवन नहीं जी सकते लोग

इन तमाम पाबंदियों के बीच तालिबान का तर्क यही रहता है कि ये फैसले उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक व्याख्या पर आधारित हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि तालिबान की नीतियां सीधे तौर पर महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का हनन हैं. आज अफगानिस्तान में हालात ऐसे हैं कि लड़कियों की किताबें छिन चुकी हैं, कामकाजी महिलाओं की रोजी-रोटी खत्म हो चुकी है और सामान्य जीवन जीने के मौके भी लगातार सीमित किए जा रहे हैं.  

 

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Wed, 01 Oct 2025 15:36:35 +0530 news desk MPcg
अमेरिका शटडाउन की कगार पर: ट्रंप को चाहिए थे 60 वोट, मिले सिर्फ 55 https://citytoday.co.in/3766 https://citytoday.co.in/3766 वाशिंगटन

अमेरिका एक बार फिर सरकारी शटडाउन के मुहाने पर खड़ा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को सीनेट में अस्थायी फंडिंग बिल पास कराने के लिए कम से कम 60 वोटों की जरूरत थी, लेकिन सिर्फ 55 वोट ही जुट पाए. यानी यह प्रस्ताव गिर गया. अब सरकार के पास जरूरी फंडिंग का विस्तार नहीं है और इसका सीधा मतलब है कि कई संघीय कामकाज रुक सकते हैं. अमेरिकी कानून के तहत जब तक बजट या अस्थायी फंडिंग बिल पास नहीं होता, तब तक 'गैर-जरूरी' सरकारी विभागों और सेवाओं को बंद करना पड़ता है. इस स्थिति को ही शटडाउन कहा जाता है. पिछले दो दशकों में यह अमेरिका की पांचवीं बड़ी शटडाउन स्थिति बन सकती है.

इससे पहले रिपब्लिकन ने सरकार को 21 नवंबर तक खुला रखने के लिए एक अल्पकालिक वित्त पोषण विधेयक पेश किया है. हालांकि, डेमोक्रेट्स का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है. वे चाहते हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीष्मकालीन मेगा-बिल से मेडिकेड कटौती को वापस लिया जाए और अफोर्डेबल केयर एक्ट के प्रमुख टैक्स क्रेडिट को बढ़ाया जाए.

रिपब्लिकन ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है. किसी भी पक्ष के पीछे हटने के की वजह से इस हफ्ते सदन में मतदान भी निर्धारित नहीं है.

सात साल बाद यह पहला मौका होगा, जब फंड की कमी की वजह से अमेरिका में कई सेवाएं प्रभावित होंगी. 2018 में ट्रंप के पिछले कार्यकाल के दौरान शटडाउन 34 दिनों तक चला था. इस बार खतरा और गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि ट्रंप इसकी आड़ में लाखों कर्मचारियों की छंटनी और कई अहम योजनाओं को बंद करने की तैयारी कर सकते हैं. शटडाउन से ठीक पहले उन्होंने इसके संकेत भी दे दिए हैं.

क्यों होता है शटडाउन?

सरकारी शटडाउन तब होता है, जब कांग्रेस संघीय एजेंसियों को चलाने के लिए वार्षिक व्यय विधेयकों पर सहमत नहीं हो पाती. एंटीडेफिशिएंसी एक्ट एजेंसियों को बिना अनुमति के पैसा खर्च करने से रोकता है, इसलिए जब पैसा खत्म हो जाता है, तो सरकार का ज्यादातर काम भी बंद हो जाता है.

अमेरिकी सरकार के अलग-अलग विभागों को चलाने के लिए भारी मात्रा में फंड की जरूरत होती है. इसके लिए संसद (कांग्रेस) से बजट या फंडिंग बिल पारित कराना जरूरी होता है. लेकिन जब राजनीतिक मतभेद या गतिरोध की वजह से तय समयसीमा में फंडिंग बिल पारित नहीं हो पाता, तो सरकार के पास कानूनी रूप से खर्च करने के लिए फंड नहीं बचता. ऐसी स्थिति में अमेरिकी सरकार को अपनी गैर-जरूरी सेवाएं बंद करनी पड़ती हैं, जिसे सरकारी शटडाउन कहा जाता है. यह आमतौर पर अस्थायी होता है, लेकिन इस बार ट्रंप कई विभागों को स्थायी रूप से बंद करने और हजारों कर्मचारियों को नौकरी से हटाने की तैयारी में हैं.

क्या बंद होगा, क्या खुला रहेगा?

अगर समय सीमा बीत जाती है तो एजेंसियों को 'गैर-अपवादित' कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजना शुरू करना होगा. विशेष रूप से वे कर्मचारी जो जीवन या संपत्ति की सुरक्षा से संबंधित नहीं हैं. ट्रंप के पहले कार्यकाल में 35 दिनों के बंद के दौरान, 340,000 कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा गया था, जबकि बाकी कर्मचारियों ने सरकार के फिर से खुलने तक बिना वेतन के काम किया.

इस बार, एफबीआई जांच, सीआईए ऑपरेशन, हवाई यातायात नियंत्रण, सैन्य सेवा, सामाजिक सुरक्षा जांच, मेडिकेयर दावे और पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य सेवा जैसे महत्वपूर्ण कार्य जारी रहेंगे. डाक वितरण भी अप्रभावित रहेगा क्योंकि अमेरिकी डाक सेवा अपने स्वयं के राजस्व पर चलती है.

लेकिन कई एजेंसियां अपने काम में भारी कटौती करेंगी. शिक्षा विभाग अपने करीब 90% कर्मचारियों की छंटनी करेगा, हालांकि छात्र सहायता जारी रहेगी. स्मिथसोनियन संग्रहालय और राष्ट्रीय चिड़ियाघर अपने दरवाज़े बंद कर देंगे. FDA ने दवा और उपकरणों की मंज़ूरी में देरी की चेतावनी दी है. और राष्ट्रीय उद्यान सेवा कुछ स्थलों के दरवाज़े बंद कर देगी, जबकि अन्य सीमित कर्मचारियों के साथ खुले रहेंगे.

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Wed, 01 Oct 2025 15:33:29 +0530 news desk MPcg
ताइवान का अमेरिका को साफ जवाब: चिप उत्पादन में 50&50% हिस्सेदारी नामंज़ूर https://citytoday.co.in/3765 https://citytoday.co.in/3765 न्यूयॉर्क

ताइवान ने अमेरिका के साथ चिप प्रोडक्शन को लेकर 50 फीसदी हिस्सेदारी के समझौते पर असहमति जताई है. यह ऐलान बुधवार को ताइवान के शीर्ष टैरिफ वार्ताकार ने घर लौटने के बाद हुआ है. अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक ने सुझाव दिया था कि चिप निर्माण में 50-50 का विभाजन हो, जिसका ज्यादातर हिस्सा मौजूदा वक्त में ताइवान में बनता है. ताइवान की उप-प्रीमियर चेंग ली-चियुन ने साफ किया है कि उनकी टीम ने ऐसी किसी भी शर्त पर न तो चर्चा की और न ही वे सहमति देंगे.

अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक ने वीकेंड में यूएस टेलीविजन नेटवर्क न्यूज़ नेशन को बताया था कि वॉशिंगटन का प्रस्ताव चिप बनाने में 50-50 का विभाजन होगा. 

ताइवान की उप-प्रीमियर चेंग ली-चियुन ने वापस देश लौटने पर पत्रकारों को बताया कि उन्होंने वार्ता के दौरान अमेरिका द्वारा सुझाए गए 50-50 के विचार पर चर्चा नहीं की थी. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टीम ऐसी शर्तों पर सहमत नहीं होगी.

TSMC का निवेश और टैरिफ छूट की उम्मीद

ताइवान दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिपमेकर टीएसएमसी (TSMC) का हब है. टीएसएमसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एप्लीकेशन्स की मजबूत मांग की वजह से तेजी से आगे बढ़ रही है. टीएसएमसी मौजूदा वक्त में अमेरिका के एरिजोना स्टेट में चिप कारखाने बनाने के लिए $165 बिलियन का इन्वेस्टमेंट कर रही है. 

हालांकि, कंपनी का ज्यादातर प्रोडक्शन ताइवान में ही रहेगा. ताइवान की सरकार ने पिछले महीने उम्मीद जताई थी कि टैरिफ वार्ता में 'कुछ प्रगति' हासिल होने के बाद अमेरिका से ज्यादा अनुकूल टैरिफ दर मिलेगी.

कृषि खरीद और राजनयिक मुलाकात…

ताइवान के प्रधानमंत्री चो जुंग-ताई ने मंगलवार को ताइपे में संसद में कहा था कि चेंग ने टैरिफ मुद्दों पर अमेरिका के साथ कई बार बातचीत की है. चेंग ने एयरपोर्ट पर कहा कि विस्तृत चर्चा हुई है, जिससे कुछ प्रगति हुई है. इस बीच, ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने मंगलवार देर रात यूएस कृषि विभाग के अंडर सेक्रेटरी फॉर ट्रेड एंड फॉरेन एग्रीकल्चरल अफेयर्स ल्यूक जे. लिंडबर्ग से मुलाकात की. लाइ ने कहा कि सितंबर में अमेरिका का दौरा करने वाले ताइवान के कृषि प्रतिनिधिमंडल ने अगले चार वर्षों में $10 बिलियन के अमेरिकी कृषि सामान खरीदने की योजना बनाई है, जिसमें सोयाबीन, गेहूं, मक्का और बीफ शामिल हैं.

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Wed, 01 Oct 2025 15:25:45 +0530 news desk MPcg
फिलीपींस में 6.9 तीव्रता का भूकंप, कई इमारतें ढहीं, 60 लोगों की दर्दनाक मौत https://citytoday.co.in/3764 https://citytoday.co.in/3764 मनीला

फिलीपींस में  6.9 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसने देश के कई हिस्सों में तबाही मचाई. इस प्राकृतिक आपदा के कारण कई इमारतें ढह गईं और 60 लोगों की मौत हो गई. एक वरिष्ठ अधिकारी ने ये जानकारी दी है. भूकंप के केंद्र और प्रभावित क्षेत्रों का विवरण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट्स में भारी नुकसान और हताहतों की पुष्टि हुई है.

अधिकारी ने बताया कि स्थानीय समयानुसार दोपहर बाद कई इलाकों में भूकंप के तेज झटके महसूस हुए, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई और लोग घरों-ऑफिस से बाहर निकल आए. भूकंप के झटके इतने तीव्र थे कि कई इमारतें, खासकर पुरानी संरचनाएं, पूरी तरह ढह गईं. इससे कई लोग मलबे में दब गए. 

बढ़ सकती है मृतकों की संख्या
फिलीपींस के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं. मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव टीमें दिन-रात काम कर रही हैं. मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि कई लोग अभी भी लापता हैं. जबकि घायलों को नजदीकी अस्पतालों में ले जाया गया है, जहां चिकित्सा टीमें उनकी देखभाल में जुटी हैं.

बचाव एवं राहत कार्य शुरू

एक वरिष्ठ आपदा प्रबंधन अधिकारी ने कहा, '6.9 तीव्रता का भूकंप बेहद शक्तिशाली था. कई इमारतें ढह गईं और 60 लोगों की जान चली गई. हम प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्यों को तेज कर रहे हैं.'

उन्होंने ये भी बताया कि बिजली और संचार सेवाएं कुछ क्षेत्रों में बाधित हो गई हैं, जिससे राहत कार्यों में चुनौतियां आ रही हैं.

हमेशा बना रहता है भूकंप का खतरा

फिलीपींस में भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है, क्योंकि यह प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियां बार-बार भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट का कारण बनती हैं. हाल के सालों में फिलीपींस में कई बड़े भूकंपों आए हैं, जिनमें 2013 का बोहोल भूकंप (7.2 तीव्रता) शामिल है, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे.

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Wed, 01 Oct 2025 15:14:48 +0530 news desk MPcg
गाजा और ईरान से तनाव के बीच इज़राइल ने बेचे 14 अरब डॉलर के हथियार https://citytoday.co.in/3746 https://citytoday.co.in/3746 तेल अवीव

इजरायल दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में से एक है, लेकिन वह जंग लड़ते हुए भी बड़ा व्यापार कर रहा है. गाजा में लंबी जंग और ईरान के साथ तनाव के बावजूद, 2024 में इजरायल ने रिकॉर्ड 14.7 अरब डॉलर (करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये) के हथियार बेचे.

सबसे हैरानी की बात ये है कि इनमें से आधे से ज्यादा यूरोपीय देशों ने खरीदे. इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने जून 2025 में यह आंकड़ा जारी किया. यह चौथा साल लगातार है जब इजरायल के हथियार निर्यात ने नया रिकॉर्ड बनाया. 
2024 में हथियार बिक्री का रिकॉर्ड: आंकड़े क्या कहते हैं?

इजरायल के रक्षा उद्योग ने 2024 में 13% की बढ़ोतरी के साथ 14.7 अरब डॉलर का टर्नओवर किया. यह 2023 की तुलना में 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा है. मुख्य खरीदार यूरोप था, जिसने कुल निर्यात का 54% (करीब 8 अरब डॉलर) लिया. 2023 में यह हिस्सा सिर्फ 35% था. एशिया-पैसिफिक दूसरे नंबर पर रहा, लेकिन यूरोप ने सबको पछाड़ दिया.

सबसे ज्यादा बिके हवाई रक्षा सिस्टम, जैसे आयरन डोम के हिस्से. इनकी बिक्री 48% रही. इसके अलावा मिसाइलें, ड्रोन, रडार और साइबर हथियार भी लोकप्रिय रहे. इजरायल एयर इंडस्ट्रीज (आईएआई), राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स और एल्बिट सिस्टम्स जैसी कंपनियों ने बड़ा योगदान दिया.
जंग के बीच व्यापार कैसे फला-फूला?

गाजा में 2023 से चल रही जंग ने इजरायल को भारी नुकसान दिया. हजारों सैनिक घायल हुए, लेकिन इसने इजरायली हथियारों की ताकत दिखाई. यूरोपीय देशों को लगा कि इजरायल के हथियार असली जंग में काम करते हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध से यूरोप को हथियारों की भारी जरूरत पड़ी. इजरायल ने मौका लपका और तेजी से डिलीवरी दी.

ईरान के साथ तनाव ने भी मदद की. ईरान ने अप्रैल 2024 में इजरायल पर मिसाइल हमला किया, लेकिन इजरायल ने उसे रोक लिया. इससे उसके डिफेंस सिस्टम की डिमांड बढ़ी. यूरोप में भी रूस का खतरा है, इसलिए वे इजरायली तकनीक चाहते हैं. बावजूद बॉयकॉट कॉल्स के (गाजा जंग पर निंदा के कारण) बिक्री बढ़ी.

यूरोपीय देश क्यों खरीद रहे?

यूरोप इजरायल का सबसे बड़ा पार्टनर बन गया. जर्मनी, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन जैसे देशों ने बड़े ऑर्डर दिए. उदाहरण के लिए…

    जर्मनी: आयरन डोम जैसे सिस्टम के लिए अरबों डॉलर खर्च.
    पोलैंड: ड्रोन और मिसाइल सिस्टम.
    रोमानिया: रडार और एयर डिफेंस.

यूरोपीय संघ (ईयू) ने गाजा पर सख्त बातें कीं, लेकिन व्यापार जारी रहा. ईयू इजरायल का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, जिसने 2024 में 45.5 अरब डॉलर का व्यापार किया. हथियारों पर दबाव है, लेकिन अभी कोई बड़ा प्रतिबंध नहीं. कुछ देशों ने कहा कि अगर गाजा जंग न रुकी, तो ट्रेड बेनिफिट्स काट देंगे.
इजरायल के लिए फायदे और चुनौतियां

यह बिक्री इजरायल की अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है. रक्षा उद्योग 7% जीडीपी देता है. 50 हजार नौकरियां पैदा करता है. जंग के खर्च (करीब 60 अरब डॉलर) को पूरा करने में मदद मिलती है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय निंदा बढ़ रही है.

संयुक्त राष्ट्र ने गाजा में 'नरसंहार' का आरोप लगाया. अमेरिका ने 18 अरब डॉलर की मदद दी, लेकिन यूरोप में बॉयकॉट मूवमेंट तेज हो रहा. नेतन्याहू सरकार ने कहा कि यह आत्मनिर्भरता का सबूत है. वे और निर्यात बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, खासकर एशिया और अफ्रीका में. 

दुनिया पर असर: शांति या हथियार दौड़?

यह खबर दिखाती है कि जंग के बीच भी पैसा कमाया जा सकता है. लेकिन गाजा में 40000 से ज्यादा मौतें हो चुकीं हैं. ईरान तनाव बढ़ रहा है. यूरोप के हथियार खरीदने से मिडिल ईस्ट में संतुलन बिगड़ सकता है. हथियार व्यापार को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक नियम सख्त करने चाहिए. इजरायल की यह सफलता तकनीकी ताकत दिखाती है, लेकिन नैतिक सवाल भी खड़े करती है. क्या जंग के बीच हथियार बेचना सही है?

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Wed, 24 Sep 2025 15:43:19 +0530 news desk MPcg
भारत वैश्विक शांति में निभा सकता है अहम भूमिका: इटली की पीएम मेलोनी https://citytoday.co.in/3745 https://citytoday.co.in/3745 रोम

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने  कहा कि भारत दुनिया में चल रहे संघर्षों को समाप्त करने में अहम भूमिका निभा सकता है. न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान जब उनसे रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसी चल रही युद्ध स्थितियों में भारत की भूमिका के बारे में पूछा गया, तो मेलोनी ने कहा, मुझे लगता है कि भारत इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

मेलोनी की टिप्पणियों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन पर आरोप लगाया था कि वे रूस से तेल खरीदकर युद्ध को आर्थिक मदद दे रहे हैं. ट्रंप ने कहा, चीन और भारत इस युद्ध को धन मुहैया कराने वाले मुख्य देश हैं क्योंकि वे रूस से तेल खरीदना जारी रख रहे हैं. इतना ही नहीं, यूएन में भाषण के दौरान उन्‍होंने यूरोपीय देशों को भी सुनाया. कहा, आप हमसे तो कहते हैं क‍ि अमेर‍िका चीन को रूसी तेल खरीदने से रोको, लेकिन खुद रूस से खरीदारी कर रहे हैं.

यूरोप के नेता लगातार पीएम मोदी के संपर्क में
इससे पहले बीते दिनों फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी समेत यूरोप के ज्‍यादातर देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्षों के फोन आए. सबने एक बात जरूर कही क‍ि अगर भारत चाहे तो यह जंग रुक सकती है. यहां तक क‍ि अमेर‍िका के राष्‍ट्रपत‍ि ट्रंप ने भी पीएम मोदी से बातचीत के बाद जो कहा, उससे भी साफ संकेत मिलते हैं क‍ि सबको भारत पर भरोसा है. ट्रंप ने लिखा, पीएम मोदी यूक्रेन संकट को सुलझाने के ल‍िए जो मदद कर रहे हैं, उसके ल‍िए धन्‍यवाद.

भारत पर पूरी दुनिया को भरोसा क्यों
पूरी दुनिया भारत पर इसलिए भरोसा करती है क्योंकि भारत हमेशा संतुलित और निष्पक्ष कूटनीति करता है. चाहे रूस हो या यूक्रेन, भारत के संबंध दोनों देशों के साथ बराबरी के हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ही समय में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात कर सकते हैं और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी. दुनिया जानती है कि भारत का उद्देश्य किसी युद्ध या संघर्ष से राजनीतिक या आर्थिक फायदा उठाना नहीं है. भारत हमेशा शांतिपूर्ण समाधान और वार्ता की पैरवी करता है. यही कारण है कि वैश्विक मंच पर भारत को एक विश्वसनीय और स्थिर साझेदार माना जाता है. भारत का यह संतुलित रुख यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी द्विपक्षीय विवाद में वह पक्षपात नहीं करेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भरोसा है कि भारत किसी भी संकट में स्थिर और जिम्मेदार निर्णय लेगा.

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Wed, 24 Sep 2025 15:40:36 +0530 news desk MPcg
इजरायली रक्षा मंत्री का तेज हमला: अब तुम्हारा नंबर आएगा, दी जान से मारने की धमकी https://citytoday.co.in/3702 https://citytoday.co.in/3702 गाजा 
गाजा में इजरायल हमास पर कहर बरपा रहा है। स्थानीय लोग शहर छोड़कर अन्य स्थानों पर जा रहे हैं। इजरायल कई समूहों से एक साथ संघर्ष कर रहा है और किसी से भी टकराव से पीछे नहीं हट रहा। इस बीच, यमन और इजरायल के बीच तनाव भी बढ़ता जा रहा है। हूती विद्रोहियों के खिलाफ भी इजरायल कार्रवाई कर रहा है। हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों के जवाब में अब इजरायल बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।

इजरायली रक्षा मंत्री ने दी जान से मारने की धमकी
इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती को जान से मारने की धमकी दी है। काट्ज ने कहा है कि जल्द ही तुम्हारा नंबर आएगा। इससे पहले 28 अगस्त को इजरायल ने यमन में हवाई हमला कर हूती सरकार के प्रधानमंत्री और कई महत्वपूर्ण सदस्यों को मार दिया था। अब इजरायल ने फिर से ऐसे हमले की धमकी दी है।

दरअसल, गुरुवार को इजरायल के दक्षिणी शहर ऐलात के एक होटल पर हूती विस्फोटक ड्रोन से हमला हुआ था। इस दौरान एक बैलिस्टिक मिसाइल और दो अन्य ड्रोनों को भी रोका गया। इस हमले के बाद काट्ज ने एक्स पर लिखा कि अब्दुल-मलिक अल-हूती… तुम्हारा समय आ गया है। तुम्हें अपनी सरकार के अन्य लोगों के पास भेजा जाएगा। हूती झंडे पर लिखे नारे 'इजरायल की मौत, यहूदियों पर अभिशाप' की जगह इजरायली नीला-सफेद झंडा यमन की एकीकृत राजधानी पर लहराएगा।

अब्दुल-मलिक कौन है?
अब्दुल-मलिक हूती आंदोलन के संस्थापक हुसैन अल-हूती के भाई हैं। 2004 में हुसैन की मौत के बाद अब्दुल-मलिक ने संगठन की कमान संभाली। 2015 में हूतियों ने यमन की सरकार को उखाड़ फेंका और राजधानी सना सहित बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इस संघर्ष में मलिक ने एक मजबूत नेता और कमांडर के रूप में पहचान बनाई।

अब्दुल-मलिक के बारे में कहा जाता है कि वह लंबे समय तक एक जगह नहीं ठहरता और बार-बार अपनी लोकेशन बदलता रहता है। वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लेता। यह भी कहा जाता है कि उसके अपने लोगों को भी उसकी सटीक जानकारी नहीं होती कि वह कहां है और क्या कर रहा है। हालांकि, वह समय-समय पर वीडियो संदेश जारी करता रहता है।

बढ़ रही हूतियों की लगातार ताकत
बताया जाता है कि अब्दुल-मलिक के नेतृत्व में हूतियों की ताकत लगातार बढ़ी है। खासकर लाल सागर में उसने इजरायल, अमेरिका और उनके सहयोगियों को कड़ी चुनौती दी है। हूती विद्रोही अक्सर इजरायल के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हैं और लाल सागर में इजरायल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाते रहते हैं। वे आए दिन इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले करते रहते हैं।

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Sat, 20 Sep 2025 17:33:53 +0530 news desk MPcg
सऊदी के बाद UAE और कतर भी पाक से रक्षा समझौते पर विचार, भारत ने दिया सख्त संदेश https://citytoday.co.in/3701 https://citytoday.co.in/3701 नई दिल्ली

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए “स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट” को लेकर भारत ने शुक्रवार को एक बार फिर प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और सऊदी अरब के बीच गहरी और व्यापक रणनीतिक साझेदारी है और भारत अपेक्षा करता है कि इस रिश्ते में दोनों देशों के आपसी हितों और संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा जाएगा। इसके अलावा, पाक मंत्री ने दावा किया है कि अन्य मुस्लिम देश भी पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता कर सकते हैं। इस पर भी भारत की प्रतिक्रिया सामने आई है।

यह रक्षा समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बुधवार को साइन किया। समझौते में स्पष्ट किया गया है कि “किसी भी देश पर आक्रामक कार्रवाई दोनों देशों पर हमला मानी जाएगी”। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब इजरायल ने हाल ही में कतर में हमास नेताओं पर सैन्य हमले किए हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “भारत और सऊदी अरब की साझेदारी हाल के वर्षों में काफी मजबूत हुई है। हम उम्मीद करते हैं कि यह साझेदारी आपसी हितों और संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ेगी।” उन्होंने यह भी बताया कि भारत को इस बात की जानकारी थी कि पाकिस्तान और सऊदी अरब लंबे समय से इस तरह के समझौते पर विचार कर रहे थे, और अब इसे औपचारिक रूप दिया गया है।

भारतीय अधिकारियों ने कहा कि वे इस समझौते के राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, समझौते में और क्या-क्या लिखा है इसको लेकर अभी तक कुछ भी सार्वजनिक नहीं किया गया है और सामूहिक रक्षा का उल्लेख केवल एक संयुक्त बयान में किया गया है। इसलिए, सामूहिक रक्षा से संबंधित कानूनी बाध्यताओं का आकलन करना आवश्यक होगा।
पाकिस्तान-सऊदी संबंध और भारत की स्थिति

सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से रक्षा और सुरक्षा संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में, सऊदी अरब ने पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूसरी ओर, भारत और सऊदी अरब के बीच पिछले एक दशक में रणनीतिक सहयोग गहरा हुआ है, जिसमें संयुक्त सेना और नौसेना अभ्यास शामिल हैं। हालांकि, यह समझौता पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच हुआ है। अरब देशों ने हाल के महीनों में इजरायल की आक्रामक कार्रवाइयों, विशेष रूप से ईरान और कतर पर सैन्य हमलों के बाद, अमेरिका की सुरक्षा साझेदार के रूप में विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। इस पृष्ठभूमि में, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता को और जटिल बना सकता है।
भारत की सुरक्षा चिंताएं

भारत पश्चिम एशिया को अपने “विस्तारित पड़ोस” का हिस्सा मानता है और उसने साफ कहा है कि राष्ट्रीय हितों और व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान-सऊदी समझौते के प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है, खासकर इस संभावना के मद्देनजर कि अगर पाकिस्तान-भारत के बीच तनाव बढ़ा तो इस समझौते का हवाला दिया जा सकता है।
अन्य अरब देशों के जुड़ने की संभावना

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने गुरुवार को एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा कि इस समझौते में अन्य अरब देशों, जैसे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर, के शामिल होने की संभावना से इंकार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, "इस समझौते में कोई ऐसी धारा नहीं है जो किसी अन्य देश के प्रवेश को रोके।" आसिफ ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की परमाणु क्षमताएं इस समझौते के तहत उपलब्ध होंगी।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, जायसवाल ने कहा कि भारत के यूएई और कतर के साथ व्यापक संबंध हैं। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के बीच हुई बातचीत और यूएई की विदेश मामलों की राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी की नई दिल्ली यात्रा का उल्लेख किया। जायसवाल ने इन संबंधों को "विस्तृत" बताते हुए कहा कि ये वार्ताएं निरंतर जारी हैं।

इस बीच, भारत ने सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के साथ अपने मजबूत संबंधों का लाभ उठाने की योजना बनाई है ताकि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जा सके। यह समझौता भारत के लिए एक चुनौती हो सकता है, लेकिन भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और क्षेत्र में उसकी सक्रिय भूमिका इसे प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाती है।

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Sat, 20 Sep 2025 16:49:19 +0530 news desk MPcg
मालदीव में प्रेस की आज़ादी पर खतरा: राष्ट्रपति मुइज्जु ने विवादास्पद मीडिया कानून को दी मंजूरी https://citytoday.co.in/3683 https://citytoday.co.in/3683 मालदीव 
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु ने बृहस्पतिवार को एक विवादास्पद नए मीडिया विधेयक पर हस्ताक्षर कर उसे मंजूरी दी, जिसके तहत उल्लंघन की स्थिति में भारी जुर्माने और मीडिया संस्थानों को अस्थायी या स्थायी रूप से बंद करने का प्रावधान है। इस कानून के तहत उल्लंघन की स्थिति में पत्रकारों पर 1,620 अमेरिकी डॉलर तक और मीडिया कंपनियों पर 6,485 अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

कानून में जांच पूरी होने तक मीडिया लाइसेंस निलंबित करने, मीडिया लाइसेंस रद्द करने के लिए मुकदमा दायर करने या नए कानून का उल्लंघन करते हुए पाए जाने पर पुलिस को बीच में ही प्रसारण रोकने के लिए भेजने का प्रावधान है। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि मुइज्जु ने ‘मालदीव मीडिया और प्रसारण विनियमन अधिनियम' को मंजूरी दे दी है, जिसे पिछले मंगलवार को संसद में भारी बहुमत से पारित किया गया था।

संसद के 93 सदस्यों में 60 सत्तारूढ़ सांसदों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जबकि विपक्षी सदस्यों को विरोध प्रदर्शन के बीच सदन से बाहर कर दिया गया। नए कानून के अनुसार, पत्रकारों को देश के संविधान, इस्लाम, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक मूल्यों का सम्मान करना होगा और व्यक्तिगत सम्मान व मानवाधिकारों की रक्षा करनी होगी। इस कानून के तहत अनुपालन सुनिश्चित करने और कथित अपराधों की जांच के लिए सात सदस्यीय समिति नियुक्त की जाएगी।  

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Fri, 19 Sep 2025 17:03:52 +0530 news desk MPcg
रूस में फिर कांपी धरती: 7.8 तीव्रता का भूकंप, लोगों में दहशत का माहौल https://citytoday.co.in/3680 https://citytoday.co.in/3680 मॉस्को 

रूस के पूर्वी क्षेत्र कामचटका में शुक्रवार को 7.8 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए। इस शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। हालांकि, भूकंप की वजह से अभी तक किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है। भूकंप का केंद्र जमीन के 10 किलोमीटर नीचे था।

मुख्य भूकंप के बाद 6 घंटे तक झटकों का सिलसिला जारी रहा। USGS के आंकड़ों के अनुसार, 30 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए, जिनकी तीव्रता 4.4 से 5.8 के बीच रही। इन झटकों ने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी और कई लोग घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों में चले गए।। क्षेत्रीय गवर्नर व्लादिमीर सोलोदोव ने कहा कि आपातकालीन टीमें हाई अलर्ट पर हैं।

भूकंप के तेज झटकों के बाद लोगों में दहशत का माहौल है। सोशल मीडिया पर भूकंप के कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें फर्नीचर, कारें, लाइट्स तेजी के साथ हिलते दिखाई दे रहे हैं।

आफ्टरशॉक्स के सिलसिले

    12:28 AM – 7.8 (मुख्य झटका)
    12:38 AM – 5.8
    12:56 AM – 5.6
    1:33 AM – 5.6
    3:07 AM – 5.7
    5:52 AM – 5.4

इसके अलावा, दर्जनों झटके 4.4 से 5.4 तीव्रता के बीच रहे।
सुनामी का अलर्ट जारी

भूकंप के कुछ ही मिनटों के भीतर आवासीय भवनों और सार्वजनिक सुविधाओं का निरीक्षण शुरू कर दिया गया। कई तटीय क्षेत्रों में 0.5 मीटर से 1.5 मीटर ऊंची लहरें उठने का अनुमान है। अधिकारियों ने निवासियों से तटीय इलाकों से दूर रहने की अपील की है।

इससे पहले शनिवार (13 सितंबर) को भी कामचटका में 7.4 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी।

7.8 रही भूकंप की तीव्रता

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की मानें तो भूकंप का केंद्र कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट से के पास धरती से करीब 85 किलोमीटर नीचे था. तो वहीं दूसरे भूकंप का केंद्र धरती के नीचे 30 किलोमीटर नीचे था. रूस की स्टेट जियोफिजिकल सर्विस के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 7.8 रही और उसके बाद करीब 5 आफ्टरशॉक लगे. भूकंप के झटकों के तुरंत बाद अमेरिकी मौसम विभाग ने सुनामी का अलर्ट जारी किया है. इसके साथ ही लोगों से समुद्री तटों से दूर रहने की अपील की है.

क्यों कामचटका में आते हैं भूकंप?
पेट्रोपावलोव्स्क-कमचाट्स्की दुनिया के सबसे भूकंपीय सक्रिय क्षेत्रों में आता है. यहां प्रशांत प्लेट और उत्तरी अमेरिकी प्लेट आपस में टकराती हैं, जिसके चलते अक्सर भूकंप आते रहते हैं. एक सप्ताह पहले शनिवार को इसी इलाके में 7.4 तीव्रता का भूकंप आया था. हालांकि, तब प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र (PTWC) ने कहा था कि सुनामी का कोई खतरा नहीं है.

लगातार खतरे में कामचटका
लगातार आने वाले तेज भूकंप यह दिखाते हैं कि रूस का यह इलाका हमेशा खतरे में रहता है. यहां रहने वाले लोग हर बार नई दहशत के बीच जीते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार नज़र बनाए हुए हैं. इससे पहले बुधवार को भी नेपाल में भूकंप आया था. तब 4 की तीव्रता वाले भूकंप से देश हिला था. भूकंप की गहराई 10 किमी थी.

एक हफ्ते में तीसरी बार भूकंप के झटके

रूस के कामचटका में पिछले एक महीने के भीतर कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. बीते एक सप्ताह में ये तीसरी बार है कि जब कामचटका की धरती भूकंप के कारण कांपी है. शुक्रवार रात को यहां 2 बार झटके महसूस किए गए हैं.

इससे पहले, 29 जुलाई 2025 को कामचटका तट के पास 8.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था. इसे पिछले एक दशक के सबसे बड़े भूकंपों में गिना गया. इस भूकंप के बाद कई देशों में अलर्ट जारी किया गया था. भूकंप के बाद समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठने लगी थी. हालांकि मौसम विभाग के अलर्ट के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया था.

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Fri, 19 Sep 2025 16:39:19 +0530 news desk MPcg
अमेरिका भारत को F&35 फाइटर जेट बेचना चाहता है, कनाडा को धमकी भी दी गई https://citytoday.co.in/3660 https://citytoday.co.in/3660 न्यूयॉर्क

कनाडा और अमेरिका के बीच रक्षा सौदे को लेकर तनाव बढ़ गया है. कनाडा अपने 88 F-35 फाइटर जेट्स खरीदने के प्लान की समीक्षा कर रहा है. 22 सितंबर तक फैसला आने की उम्मीद है. अगर कनाडा इस डील को रद्द करता है, तो अमेरिका ने गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है. कनाडा स्वीडिश ग्रिपेन जेट को विकल्प के रूप में देख रहा है, लेकिन अमेरिका दो अलग-अलग फाइटर फ्लीट चलाने के खिलाफ है. यही विमान अमेरिका भारत को भी बेंचना चाहता है. लेकिन अभी तक भारत ने इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. 

 F-35 डील क्या है और कनाडा क्यों कर रहा है समीक्षा?

F-35 अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा बनाया गया एक एडवांस स्टील्थ फाइटर जेट है. यह पांचवीं पीढ़ी का विमान है, जो रडार से बचने की क्षमता रखता है. आधुनिक हथियारों से लैस है. कनाडा ने 2010 के दशक में 88 ऐसे जेट्स खरीदने का फैसला किया था, जिसकी अनुमानित लागत 19 बिलियन कनाडाई डॉलर (करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये) है. यह सौदा कनाडा की पुरानी CF-18 फाइटर जेट्स को बदलने के लिए था.

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लिबरल सरकार ने इस साल मार्च में इस डील की समीक्षा शुरू की. कारण ये है कि F-35 प्रोग्राम में देरी और लागत में बढ़ोतरी हो रही है. अमेरिकी सरकारी संगठन GAO (गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस) ने 3 सितंबर 2025 को रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया कि F-35 प्रोजेक्ट में और देरी और खर्च बढ़ रहा है.

कनाडा के तत्कालीन डिफेंस मिनिस्टर (अब प्रधानमंत्री) मार्क कार्नी ने समीक्षा का आदेश दिया, ताकि यह देखा जा सके कि क्या यह सौदा देश के हित में है. कनाडा की सेना ने अगस्त 2025 में सिफारिश की कि F-35 ही खरीदना चाहिए, लेकिन सरकार अभी फैसला ले रही है.

अमेरिका ने साफ कह दिया है कि अगर कनाडा F-35 डील रद्द करता है, तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. अमेरिकी राजदूत पीट होकस्ट्रा ने मई 2025 में CTV को इंटरव्यू में कहा कि यह कनाडा-अमेरिका के संयुक्त NORAD (नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड) गठबंधन को खतरा पहुंचा सकता है.

NORAD दोनों देशों की हवाई रक्षा के लिए है. इसके लिए दोनों को एक ही तरह के विमान उड़ाने चाहिए. होकस्ट्रा ने कहा कि अगर कनाडा एक विमान उड़ाएगा और हम दूसरा, तो वे एक-दूसरे के साथ बदलाव योग्य नहीं रहेंगे. अगस्त 2025 में होकस्ट्रा ने पॉडकास्टर जैस्मिन लेन को बताया कि कनाडा दो फाइटर प्रोग्राम नहीं चला सकता.

होकस्टा ने कहा कि आपको फैसला करना चाहिए कि F-35 चाहिए या कोई और. लेकिन दोनों नहीं चला सकते. अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि F-35 डील रद्द करने से कनाडा को स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव और ट्रेनिंग में दिक्कत होगी. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते भी प्रभावित हो सकते हैं. 

डिफेंस इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने कनाडा को चेतावनी दी है कि यह सौदा रद्द करने से रक्षा सहयोग कमजोर हो जाएगा.

ग्रिपेन: कनाडा का विकल्प क्यों?

कनाडा स्वीडन की कंपनी साब द्वारा बनाए गए ग्रिपेन (JAS 39 Gripen) जेट को वैकल्पिक विकल्प के रूप में देख रहा है. ग्रिपेन एक हल्का, सस्ता और बहुमुखी फाइटर जेट है, जो F-35 से कम खर्चीला है. कनाडा को लगता है कि इससे पैसे बचेंगे और घरेलू उद्योग को फायदा होगा. लेकिन अमेरिका इसका विरोध कर रहा है, क्योंकि ग्रिपेन F-35 जितना उन्नत नहीं है और NORAD में एकरूपता बिगड़ जाएगी. कनाडा पहले से ही पुराने F-18 जेट्स चला रहा है. दो अलग फ्लीट चलाना महंगा और जटिल होगा.

कनाडा का फाइटर जेट प्रोग्राम

कनाडा की वायुसेना को नई फाइटर जेट्स की सख्त जरूरत है. पुराने CF-18 जेट्स 1980 के दशक के हैं और अब खराब हो रहे हैं. 2010 में कनाडा ने F-35 चुना लेकिन लागत और देरी की शिकायतें बढ़ीं. 2022 में कनाडा ने औपचारिक रूप से F-35 के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया, लेकिन अब समीक्षा हो रही है. यह विवाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को दिखाता है, खासकर ट्रेड और डिफेंस में.

दुनिया में F-35 प्रोग्राम

एफ-35 कार्यक्रम में वर्तमान में 17 देश भाग ले रहे हैं. अब तक, 1870 से अधिक पायलटों और 13,500 रखरखाव कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है. एफ-35 बेड़े ने 602,000 से अधिक संचयी उड़ान घंटों को पार कर लिया है.

क्रैश होने का खतरा 

दुनिया का सबसे खतरनाक स्टेल्थ फाइटर जेट F-35 कई बार क्रैश हो चुका है. एक विमान गिरने पर अमेरिका को करीब 832 करोड़ रुपए का नुकसान होता. यह अमेरिका का सबसे महंगे जेट प्रोग्राम का विमान था. पिछले साल न्यू मेक्सिको के अल्बुकर्क इंटरनेशनल एयरपोर्ट से टेकऑफ करते ही अमेरिकी एयरफोर्स का F-35 लाइटनिंग-2 स्टेल्थ फाइटर जेट क्रैश हो गया. 

इससे पहले साउथ कैरोलिना में ऐसा ही एक फाइटर जेट लापता हो गया था. जो बाद में एक घर के पीछे क्रैश मिला. इसका मलबा साउथ कैरोलिना के ज्वाइंट बेस चार्ल्सटन से 96 KM दूर विलियम्सबर्ग काउंटी में मिला. 

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Thu, 18 Sep 2025 17:54:57 +0530 news desk MPcg
फुटबॉल के बहाने मानव तस्करी: जापान ने नकली पाकिस्तानी टीम को किया देश से बाहर https://citytoday.co.in/3659 https://citytoday.co.in/3659 इस्लामाबाद 
पाकिस्तान से भेजी गई एक ‘नकली’ फुटबॉल टीम को जापानी अधिकारियों ने धोखाधड़ी पकड़ने के बाद वापस भेज दिया। संघीय जांच एजेंसी (FIA) ने बुधवार को यह जानकारी दी। FIA ने बयान में कहा कि एक मानव तस्करी गिरोह फुटबॉल टीम की आड़ में 22 लोगों को जापान भेजने में शामिल था। नकली खिलाड़ी फुटबॉल किट पहने हुए थे और दावा कर रहे थे कि वे पाकिस्तान फुटबॉल महासंघ में पंजीकृत हैं। उन्होंने एक जापानी क्लब के साथ मैच निर्धारित होने का भी दावा किया। बयान में कहा गया, ‘‘22 सदस्यीय नकली फुटबॉल टीम, जो 15 दिन का वीजा पाने में कामयाब रही, जून 2025 में जापान पहुंची।

हालांकि, जापानी आव्रजन अधिकारियों ने इसे हवाई अड्डे से ही वापस भेज दिया और फिर मामले की सूचना FIA को दी गई  ने मामले की जांच शुरू की और मंगलवार को उसने इस घटना में संलिप्त मानव तस्करी गिरोह के एक प्रमुख संदिग्ध वकास अली को गिरफ्तार किया। जांच ​​के दौरान, संदिग्ध ने खुलासा किया कि उसका गिरोह 2024 में पाकिस्तान फुटबॉल टीम के सदस्य बताकर 17 लोगों को जापान भेजने में कामयाब रहा था जो कभी वापस नहीं लौटे।

संदिग्ध ने खुलासा किया कि इस उद्देश्य के लिए पाकिस्तान फुटबॉल महासंघ (PFF) और विदेश मंत्रालय के जाली पत्रों और एनओसी का इस्तेमाल किया गया था। FIA ने कहा, ‘‘प्रत्येक व्यक्ति (खिलाड़ी) ने अपने जापान वीजा की व्यवस्था के लिए 45 लाख पाकिस्तानी रुपये का भुगतान किया।'' उसने कहा कि गिरोह के अन्य सदस्यों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी जारी है।

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Thu, 18 Sep 2025 17:51:45 +0530 news desk MPcg
बांग्लादेश में चुपचाप तैनात अमेरिकी सैनिक! रजिस्टर में नाम तक नहीं, भारत की बढ़ी चिंता https://citytoday.co.in/3658 https://citytoday.co.in/3658 ढाका
मोहम्मद यूनुस के राज में अमेरिका बांग्लादेश में अपनी पैठ बढ़ा रहा है। हाल ही में अमेरिका सेना और वायुसेना के कई अधिकारी बांग्लादेश के रणनीतिक चटगांव इलाके में पहुंचे हैं। इससे भारत और म्यांमार के लिए टेंशन बढ़ गई है। 'द इकनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का सी-130J सुपर हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट विमान पिछले दिनों चटगांव के अमानत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा है। यह आमतौर पर जापान में अमेरिकी वायुसेना के योकोटा स्टेशन पर तैनात रहता है। इसमें से 120 अमेरिकी अधिकारी चटगांव के एक होटल में गुपचुप पहुंचे। यहां पर उनके लिए पहले से ही कमरे बुक थे, लेकिन खास बात यह थी कि रजिस्टर में उनके नामों की एंट्री नहीं हुई।

मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश का प्रमुख बनने के बाद से ही अमेरिकी गतिविधियां बांग्लादेश में काफी बढ़ गई हैं। अमेरिका और चीन दोनों ही म्यांमार के विद्रोही ग्रुप्स को अपनी ओर कोशिश करने में लगे हुए हैं। अमेरिकी सेना कई बार चटगांव में रुकी है। इसमें बांग्लादेश और अमेरिका के बीच संयुक्त अभ्यास और टोही यात्राएं तक शामिल हैं। इस साल की शुरुआत में भी दोनों देशों ने चटगांव में ही ऑपरेशन पैसिफिक एंजेल-25 और टाइगर लाइटनिंग-2025 अभ्यास को अंजाम दिया था। अब एक बार फिर से अभ्यास हो रहा है।

'नॉर्थईस्ट न्यूज' के अनुसार, अमेरिकी सेना से लगभग 120 अधिकारी 10 सितंबर को चटगांव पहुंचे और यहां पर एक होटल में चेक-इन किया। यहां पर उनके लिए लगभग 85 कमरे पहले से ही बुक किए गए थे। इसके बाद अमेरिका के सैनिकों ने एयरपोर्ट से सटे बांग्लादेश वायुसेना के पटेंगा एयरबेस का भी दौरा किया। वहीं, मिस्त्र की वायुसेना का एक ट्रांसपोर्ट विमान भी 14 सितंबर को चटगांव के एयरपोर्ट पर लैंड किया। हालांकि, इस दौरान किसी भी अमेरिकी सैनिक का नाम होटल के रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया, जिससे संदेह पैदा होता है कि आखिर ऐसा क्यों किया गया। दुनिया से कौन सी बात छिपाई जा रही है।

बांग्लादेश क्यों पहुंची है अमेरिकी सेना?
दरअसल, अमेरिकी सेना के साथ-साथ श्रीलंका की वायुसेना भी बांग्लादेश पहुंची है। यहां पर तीनों देशों की मिलिट्री एक्सरसाइज पैसिफिक एंजेल 25-3 की शुरुआत हुई है। इस अभ्यास के साथ, 15 सितंबर को आपदा प्रतिक्रिया, मानव सहायता और क्षेत्रीय साझेदारी के लिए चार दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण अभ्यास भी किया गया। यह एक अमेरिकी पहल है, जो पिछले एक दशक से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आयोजित की जाती रही है।

भारत के लिए कैसे टेंशन देने वाली है बांग्लादेश में अमेरिकी मौजूदगी?
भारत और अमेरिका के बीच हाल के दिनों में तनाव में इजाफा हुआ है। टैरिफ और रूस से तेल आयात के चलते दोनों देशों में संबंध खराब हुए हैं। हालांकि, अब ट्रंप को अपनी गलती का एहसास हुआ और फिर से भारत के करीब आने की कोशिश करने लगे। लेकिन पूरी तरह से अब भी हालात पहले जैसे नहीं हुए हैं। ऐसे में अमेरिकी सेना की मौजूदगी भले ही बांग्लादेश में हो, लेकिन यह भारत के लिए भी टेंशन देने वाली बात है। चटगांव का इलाका भारतीय सीमा के पास है और अन्य देशों पर नजर रखने के लिए अमेरिका इस क्षेत्र को अपने अड्डे के लिए इस्तेमाल कर सकता है।

 

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Thu, 18 Sep 2025 17:41:49 +0530 news desk MPcg
गाजा में इजरायल के 150 हमले, 4 लाख लोगों ने छोड़ा घर; UN रिपोर्ट को बताया पक्षपाती https://citytoday.co.in/3657 https://citytoday.co.in/3657 तेल अवीव

संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट को इजरायल ने खारिज कर दिया है, जिसमें 'फिलिस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार' का आरोप लगाया गया था। इजरायल ने इसे 'विकृत और झूठा' करार दिया और लेखकों को 'हमास प्रॉक्सी' बताकर खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र जांच आयोग की 72 पृष्ठों की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल गाजा में नरसंहारकारी कृत्य कर रहा है।

इजरायल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से हमास के झूठ पर आधारित है, जिसे दूसरों ने दोहराया और प्रचारित किया। इजरायल इस विकृत और झूठी रिपोर्ट को स्पष्ट रूप से खारिज करता है और इस जांच आयोग को तत्काल समाप्त करने की मांग करता है। मंत्रालय ने आयोग के लेखकों पर यहूदी-विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि तीनों सदस्यों ने जुलाई में अपने इस्तीफे की घोषणा की थी, जबकि अध्यक्ष नवी पिल्लै का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है।
इजरायल विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि इजरायल नागरिक हताहतों से बचने की कोशिश करता है और हमास पर गैर-लड़ाकों को खतरे में डालने का आरोप लगाया। मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्ट के झूठ के विपरीत, हमास ने ही इजरायल में नरसंहार की कोशिश की, 1200 लोगों की हत्या की, महिलाओं के साथ बलात्कार किया, परिवारों को जिंदा जलाया और हर यहूदी को मारने के अपने लक्ष्य की खुलेआम घोषणा की।

इजरायली विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को झूठे दावों की पुनरावृत्ति बताकर खारिज किया, जिन्हें स्वतंत्र शोध, जिसमें सितंबर की शुरुआत में जारी एक अध्ययन शामिल है, पहले ही खारिज किया जा चुका है। बार-इलान विश्वविद्यालय के बेगिन-सादात सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज की रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि नरसंहार के दावे त्रुटिपूर्ण आंकड़ों पर आधारित हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून को कमजोर करते हैं।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र आयोग ने दावा किया कि 7 अक्टूबर 2023 को दक्षिणी इजरायल में हुए हमले क्रूर युद्ध अपराध थे, लेकिन इनसे इजरायल के अस्तित्व को कोई खतरा नहीं था। इजरायल अपनी आबादी की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, लेकिन इसके तरीकों में यह तथ्य ध्यान में रखना होगा कि उसने बलपूर्वक फिलिस्तीनी क्षेत्र पर कब्जा किया है और अवैध रूप से बस रहा है, जिससे फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का हनन हो रहा है।

गाजा में धमाकों के बीच गुजरी रात; 4 लाख भागे
इजरायल की ओर से गाजा पर लगातार भीषण हमले जारी हैं।  रात को इजरायल ने कुल 50 हमले गाजा पर किए हैं। इसके साथ ही बीते एक दिन के अंदर इजरायल ने गाजा पर 150 से ज्यादा हमले किए हैं। हालात ऐसे हैं कि गाजा से कुछ दिनों के अंदर ही 4 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। गाजा की आबादी 10 लाख के करीब थी और वहां से लगभग 4 लाख लोग पलायन कर गए हैं। स्पष्ट है कि करीब 40 फीसदी आबादी गाजा से पलायन कर चुकी है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बीते दो दिनों के अंदर ही 150 ठिकानों पर गाजा में हमले किए गए हैं।

बीती रात में ही 12 लोगों की इजरायली हमलों से मौत हो गई है। इजरायली सेना का कहना है कि उन्होंने अपने हमलों में सुरंगों को टारगेट किया है तो वहीं कई इमारतों को भी निशाना बनाया है। इजरायल का कहना है कि इन इमारतों में हमास के आतंकी छिपे हुए थे। इजरायली सेना ने कहा कि हमारे सुरक्षा बल लगातार आतंकियों को खत्म कर रहे हैं। अब तक आतंकी संगठन के कई ढांचों को ध्वस्त किया जा चुका है। गाजा को हमास का शक्ति केंद्र माना जाता है। ऐसे में इजरायल का कहना है कि हमास को खत्म करने के लिए गाजा को टारगेट करना होगा। सोमवार से ही इजरायल की सेना ने गाजा पर जमीनी हमले शुरू कर दिए हैं।

इससे पहले बीते सप्ताह इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमला कर दिया था। इस हमले के बाद से मुसलमान देशों में गुस्सा है। मंगलवार को दोहा में 60 मुसलमान देशों की मीटिंग थी, जिसमें इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। इस मीटिंग में आने वाले देशों में पाकिस्तान, सऊदी अरब, ईरान, तुर्की और बहरीन जैसे मुस्लिम देश शामिल थे। इस दौरान मौजूद नेताओं ने कहा कि इजरायल के खिलाफ एकजुट होना होगा। यही नहीं पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों ने तो इस्लामिक नाटो की स्थापना की भी बात की। हालांकि किसी चीज पर सहमति नहीं बनी है बल्कि एक निंदा प्रस्ताव ही पारित किया जा सका।

आरोपों पर नई बहस

आयोग के तीन सदस्यों (नवी पिल्लै, क्रिस सिडोटी और मिलून कोठारी) ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में इजरायल-विरोधी पूर्वाग्रह के आरोपों पर नई बहस छेड़ दी है। 2014 में अमेरिकी कांग्रेस के 100 से अधिक सदस्यों ने उनके नेतृत्व की निंदा करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसमें कहा गया कि परिषद इजरायल के प्रति पूर्वाग्रह का पैटर्न दर्शाता है और इसे मानवाधिकार संगठन के रूप में गंभीरता से नहीं लिया जा सकता।

कोठारी 2022 में विवाद के केंद्र में थे, जब उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया 'काफी हद तक यहूदी लॉबी द्वारा नियंत्रित' है और इजरायल की संयुक्त राष्ट्र सदस्यता पर सवाल उठाया। उनके बयान की यहूदी-विरोधी बताकर निंदा की गई। पिल्लै ने इस प्रतिक्रिया को 'दिखावा' बताकर खारिज किया और यहूदी-विरोधी चिंताओं को 'झूठ' करार दिया। सिडोटी की भी यहूदी समूहों पर यहूदी-विरोधी आरोपों को 'शादी में चावल की तरह' उछालने के लिए आलोचना हुई।

2021 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा स्थापित इस आयोग को इजरायल और फिलिस्तीनी पक्षों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के कथित उल्लंघनों की जांच का कार्य सौंपा गया था। लेकिन इसके निष्कर्षों ने मुख्य रूप से इजरायल को निशाना बनाया, जिसके कारण यरुशलम, दुनिया भर के यहूदी संगठनों और कई पश्चिमी सरकारों ने इसकी निंदा की। यह आयोग अभूतपूर्व था, क्योंकि इसकी कोई निश्चित समाप्ति तिथि नहीं थी और यह परिषद की सर्वोच्च स्तर की जांच थी।

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Thu, 18 Sep 2025 17:39:45 +0530 news desk MPcg
सऊदी और पाकिस्तान में डिफेंस डील, अब एक पर हमला मतलब दोनों पर वार! बदल गया रणनीतिक समीकरण https://citytoday.co.in/3656 https://citytoday.co.in/3656 दुबई 

 पाकिस्तान और सऊदी अरब ने बुधवार (17 सितंबर 2025) को एक अहम रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए. ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ नाम के इस समझौते के तहत यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सऊदी अरब दौरे के दौरान हुआ. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपने राजकीय दौरे पर रियाद पहुंचे थे, जहां सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने अल-यमामा पैलेस में उनका स्वागत किया. इसी मौके पर यह रक्षा समझौता किया गया.

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम कार्यालय की ओर से जारी बयान में साफ कहा गया कि किसी भी तरह की आक्रामकता दोनों देशों के खिलाफ मानी जाएगी. संयुक्त बयान में कहा गया कि यह समझौता आठ दशकों पुराने रिश्तों, भाईचारे, इस्लामी एकजुटता और साझा रणनीतिक हितों पर आधारित है. इसका मकसद रक्षा सहयोग को और गहरा करना और किसी भी हमले के खिलाफ साझा रोकथाम क्षमता को मजबूत बनाना है. इसमें साफ तौर पर लिखा है कि किसी एक देश पर आक्रामक कार्रवाई दोनों देशों पर आक्रमण मानी जाएगी.
खाड़ी देशों के दौरे पर शहबाज

पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ विदेश मंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब, सूचना मंत्री अताउल्लाह तारड़, पर्यावरण मंत्री मुसादिक मलिक और विशेष सहायक तारिक फातमी मौजूद थे. यह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक हफ्ते में खाड़ी क्षेत्र का तीसरा दौरा है. इससे पहले वे कतर दो बार गए- 11 और 15 सितंबर को जहां उन्होंने इजरायल के हमले के बाद हमास नेतृत्व के समर्थन में और अरब-इस्लामिक देशों की आपात बैठक में हिस्सा लिया.
डील नहीं ये बदलाव का संकेत!

यह समझौता 9 सितंबर 2025 को कतर की राजधानी दोहा में इजरायल के हमले के ठीक एक हफ्ते बाद हुआ, जिसमें हमास नेताओं को निशाना बनाया गया. किसी ने सोचा नहीं था कि कतर पर इजरायल हमला कर देगा. यह हमला अमेरिकी मंजूरी के साथ हुआ था, जिससे खाड़ी देशों (सऊदी, कतर, यूएई) में अमेरिकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे. सऊदी राजपरिवार के लिए भी यह झटका है, क्योंकि कतर भी अमेरिकी सैन्य अड्डे वाला सहयोगी है. वह अमेरिका के साथ एक नई सैन्य डील चाहता है, जिसमें उसके सुरक्षा की गारंटी हो. हालांकि अभी इसमें सऊदी कामयाब नहीं हुआ है.

वहीं पाकिस्तान भी ऐसा ही कोई सहयोगी चाहता है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद उसने देख लिया कि कोई भी उसे बचाने नहीं आया. यह डील ईरान को भी सीधा संदेश देती है. सऊदी अरब और ईरान के बीच हाल ही में रिश्ते सामान्य करने की कोशिश हुई थी, लेकिन पाकिस्तान के साथ यह समझौता फिर से ईरान-सऊदी प्रतिस्पर्धा को हवा दे सकता है.

सऊदी की क्या मजबूरी?

दरअसल, परमाणु हथियार संपन्न पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी का सैन्य साझेदार रहा है. सऊदी अरब ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता प्रदान की है. साफ-साफ कहें तो पाकिस्तान ने यह डील केवल भारत से बचने के लिए की है. मगर सऊदी अरब की ओर से यह डील मजबूरी के साथ-साथ सोची-समझी चाल है. सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब को अब पहले की तरह अमेरिका पर भरोसा नहीं है. कहा जाता है कि यह समझौता अमेरिका की ‘धोखेबाजी’ का नतीजा है. अमेरिका शुरू से चाहता है कि सऊदी अरब इजरायल संग अपने रिश्ते सामान्य करे. सऊदी को अब अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर यकीन नहीं.

पांच प्वाइंट में जानिए डिफेंस डील के पीछे सऊदी अरब की मजबूरी

    इजरायल का कतर की राजधानी दोहा में अटैक
    ईरान से सऊदी अरब के तल्ख रिश्ते
    अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर सऊदी को भरोसा नहीं
    पाकिस्तान का परमाणु संपन्न देश होना
    इस्लामिक मुल्कों को एकजुट करना

यह भी कारण है

जिस तरह इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमला किया, इसने भी सऊदी अरब की चिंता को और बढ़ा दिया. जी हां, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच यह रणनीतिक रक्षा समझौता पड़ोसी कतर की राजधानी दोहा में हुए हमले के ठीक बाद हुआ है. इजरायल ने दोहा में हमास नेताओं पर हमला किया था. हालांकि, दोहा में हुए हवाई हमले की अमेरिका ने निंदा की, मगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया. इसलिए सऊदी को हमेशा यह डर सता रहा है कि इजरायल कहीं सऊदी तक न अपनी नजर बढ़ा ले. वैसे भी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गाजा युद्ध को ‘नरसंहार’ करार दिया था. सऊदी ने अक्सर इजरायल की आलोचना की है.

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Thu, 18 Sep 2025 17:38:11 +0530 news desk MPcg
तोप&गोलों का युग खत्म! जापान नेवी ने पेश की सुपरफास्ट रेलगन, 8000 KM/घंटा की रफ्तार से फायर https://citytoday.co.in/3618 https://citytoday.co.in/3618 टोक्यो
 जापान ने अपनी नेवी के जहाज से पहली बार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन फायरिंग का सफल टेस्ट कर इतिहास रच दिया है. समुद्र में तैनात टारगेट शिप पर दागे गए इस ‘शॉक वेपन’ ने साफ कर दिया कि परंपरागत तोप-गोलों का जमाना अब धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है. जापान के रक्षा मंत्रालय की अधिग्रहण, तकनीक और लॉजिस्टिक्स एजेंसी (ATLA) ने खुलासा किया कि जून से जुलाई के बीच टेस्ट शिप JS Asuka से रेलगन के ट्रायल किए गए. चार तस्वीरें जारी करते हुए ATLA ने लिखा, ‘यह पहली बार है जब किसी वारशिप से रेलगन का टेस्ट किया गया और वह भी सीधे एक असली जहाज पर.’

क्या है रेलगन?

रेलगन बारूद नहीं, बल्कि बिजली की ताकत से गोला दागती है. प्रोजेक्टाइल को इतनी गति मिलती है कि वह परंपरागत तोपों से कहीं अधिक दूरी और शक्ति के साथ टारगेट भेदता है. जापान की यह रेलगन करीब Mach 6.5 की स्पीड यानी आवाज की रफ्तार से साढ़े छह गुना (8,000 किलोमीटर प्रति घंटा) तक प्रोजेक्टाइल दाग सकती है. खास बात यह कि 120 लगातार फायरिंग के बाद भी बैरल की स्पीड में गिरावट दर्ज नहीं हुई.

चीन और अमेरिका भी इस टेक पर लगे

चीन भी इसी तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है और उसके पास सतत फायरिंग के सफल टेस्ट की खबरें आई हैं, लेकिन वह इसे अब तक तैनात नहीं कर पाया है. अमेरिका ने भी एक समय रेलगन प्रोजेक्ट पर अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन 2021 में तकनीकी चुनौतियों और लागत के चलते इसे बंद कर दिया. वहीं जापान अब इस हथियार को वास्तविक तैनाती की दिशा में सबसे आगे निकल आया है.

क्यों इतनी खास है यह तकनीक?

डिफेंस एक्सपर्ट मसाशी मुरानो ने जापान टाइम्स को बताया कि हाई-स्पीड एंटी-शिप मिसाइलों को परंपरागत मिसाइलों से इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है. रेलगन इस चुनौती का जवाब हो सकता है. इसके दागे प्रोजेक्टाइल न सिर्फ बेहद तेज होते हैं, बल्कि पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में सस्ते भी हैं. जहां एयर डिफेंस मिसाइल की एक शॉट की कीमत करोड़ों-करोड़ होती है, वहीं रेलगन अपेक्षाकृत किफायती है.

इसके अलावा, रेलगन से एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए ‘एयरबर्स्ट म्युनिशन’ भी विकसित किए जा रहे हैं, जो हवा में ही फटकर घातक टुकड़े छोड़ते हैं. यह मिसाइलों और ड्रोन जैसे खतरों से निपटने में बेहद कारगर हो सकता है.

जापान रेलगन को सिर्फ नौसैनिक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहता. योजना है कि इसे जमीन पर भी तैनात किया जाए, ताकि दुश्मन के आर्टिलरी यूनिट्स को निशाना बनाया जा सके और तटीय सुरक्षा को मजबूत किया जा सके. ATLA अब प्रोजेक्टाइल की उड़ान स्थिरता, फायर-कंट्रोल सिस्टम और सतत फायरिंग क्षमता को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है. हालांकि, अभी तक इसकी अधिकतम रेंज और रैपिड फायर की क्षमता उजागर नहीं की गई है.

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Sat, 13 Sep 2025 17:13:05 +0530 Newsdesk
रूस में 7.1 तीव्रता का भूकंप, अमेरिका और चीन ने जारी किया सुनामी अलर्ट https://citytoday.co.in/3617 https://citytoday.co.in/3617 मॉस्को 

रूस के कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी तट के पास शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया है. जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस ने बताया कि भूकंप की तीव्रता 7.1 दर्ज की गई और यह समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में था.

वहीं, यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने भूकंप की तीव्रता 7.4 और गहराई 39.5 किलोमीटर बताई. आंकड़ों में अंतर के बावजूद, दोनों एजेंसियों ने इसे गहरा और शक्तिशाली भूकंप माना है. भूकंप के बाद पैसिफिक सुनामी वार्निंग सिस्टम ने संभावित सुनामी का अलर्ट जारी किया और कहा कि इस क्षेत्र में खतरा पैदा हो सकता है. 

चीन के सुनामी वार्निंग सेंटर ने भी सुबह 10:37 बजे (बीजिंग समयानुसार) सूचना जारी करते हुए कहा कि भूकंप कामचटका प्रायद्वीप के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में दर्ज किया गया है. केंद्र ने भूकंप की तीव्रता 7.1 और गहराई 15 किलोमीटर बताई. स्थानीय स्तर पर सुनामी का खतरा है.

जापान ब्रॉडकास्टर ने जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के हवाले से बताया कि जापान, जो कामचटका के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, ने किसी भी तरह का सुनामी अलर्ट जारी नहीं किया है.

सुनामी की चेतावनी पर लेटेस्ट अपडेट: पूर्वी कामचटका, रूस के पास आए भूकंप के बाद अब सुनामी का कोई खतरा नहीं है. अधिकारियों ने चेतावनी को रद्द कर दिया है और स्थानीय लोगों को सुरक्षित रहने के लिए सामान्य सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. भूकंप की तीव्रता और संभावित प्रभावों का अभी भी मूल्यांकन किया जा रहा है लेकिन फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है.

जुलाई में 8.8 तीव्रता का दर्ज किया गया था झटका

यह भूकंप उसी क्षेत्र में आया है जहां जुलाई में 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली झटका महसूस किया गया था. उस समय जापान, अमेरिका और कई प्रशांत द्वीपीय देशों – जैसे हवाई, चिली और कोस्टा रिका – के लिए सुनामी चेतावनियां जारी की गई थीं.

पैसिफिक रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है कामचटका 

कामचटका प्रायद्वीप भूवैज्ञानिक दृष्टि से बेहद सक्रिय क्षेत्र है और इसे पैसिफिक रिंग ऑफ फायर का हिस्सा माना जाता है. यहां आए दिन भूकंपीय और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं. इस इलाके में बड़े स्तर पर विनाशकारी भूकंप आते रहे हैं.

1952 के भूकंप से मची थी भारी तबाही

साल 1952 में कामचटका को 9.0 तीव्रता के एक भीषण भूकंप ने झकझोर दिया था. यह भूकंप अब तक दर्ज किए गए सबसे ताकतवर भूकंपों में से एक माना जाता है. उस समय भूकंप के झटकों ने भारी तबाही मचाई थी और बड़े स्तर पर सुनामी भी आई थी.

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Sat, 13 Sep 2025 17:08:32 +0530 Newsdesk
काठमांडू में कर्फ्यू और निषेधाज्ञा हटी, पूर्व न्यायाधीश कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ ली https://citytoday.co.in/3615 https://citytoday.co.in/3615  काठमांडू 

हिंसा, उपद्रव और आगजनी के बाद अब नेपाल में शांति लौट रही है. राजधानी काठमांडू में सेना की ओर से लगाया गया कर्फ्यू और निषेधाज्ञा आज सुबह 5 बजे से हटा दिया गया है. अंतरिम सरकार बनने के बाद सुरक्षा बलों ने हालात को देखते हुए यह फैसला लिया. हालांकि सड़कों पर सेना की मौजूदगी अभी कुछ दिन और रहने की उम्मीद है.

अंतरिम सरकार की कमान पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने संभाली है. उन्होंने कल प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. राजधानी की सड़कों पर अब धीरे-धीरे सामान्य माहौल लौटता दिख रहा है. स्थानीय निवासी सुमन सिवाकोटी ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि सुशीला कार्की नेपाल के लिए एक नए युग की शुरुआत करेंगी. देश को और सुरक्षित रखने के साथ विकास को आगे बढ़ाना जरूरी है.'

सुशीला कार्की के अंतरिम प्रधानमंत्री बनने के बाद नेपाल के बीरगंज में भी लोगों को उम्मीद है कि एक भ्रष्टाचार मुक्त सरकार बनेगी और प्रधानमंत्री समेत तमाम मंत्री जो भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त हैं सब की संपत्ति की जांच होगी और नेपाल भ्रष्टाचार मुक्त होगा.

होटल इंडस्ट्री को 25 अरब का घाटा

पिछले दिनों हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों में हिंसा के चलते हालात बिगड़ गए थे. पुलिस के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 51 हो गई है. इसमें 21 प्रदर्शनकारी, 9 कैदी, 3 पुलिसकर्मी और 18 अन्य लोग शामिल हैं.

हिंसा का सबसे ज्यादा असर नेपाल की होटल इंडस्ट्री पर पड़ा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब दो दर्जन होटलों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाओं से इस सेक्टर को 25 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है.

पुलिस मांग रही उपद्रवियों के वीडियो

नेपाल पुलिस ने देशभर में हुई हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं को लेकर जनता से सहयोग की अपील की है. पुलिस ने कहा है कि जिनके पास भी इन घटनाओं से जुड़े वीडियो या सबूत हैं, वे उन्हें साझा करें ताकि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके. इसके लिए पुलिस ने एक आधिकारिक ईमेल जारी कर ऐसे सभी वीडियो भेजने की अपील की है.

हुआ क्या था?

बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था. सैकड़ों प्रदर्शनकारी उनके दफ्तर में घुस गए थे और सोमवार के प्रदर्शन में हुई मौतों को लेकर उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे. सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध सोमवार रात को ही हटा लिया गया था.

ओली के इस्तीफे के बाद भी हिंसा थमी नहीं और प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास, सरकारी दफ्तरों, राजनीतिक दलों के दफ्तरों और वरिष्ठ नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया.

1700 लोगों को आई चोटें

शुक्रवार दोपहर कई मृतकों का अंतिम संस्कार काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर परिसर स्थित आर्यघाट पर बागमती नदी के किनारे किया गया. पुलिस के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान करीब 1,700 लोग घायल हुए. इनमें से लगभग 1,000 लोग स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं.

अधिकारियों के मुताबिक, काठमांडू घाटी में नेपाल पुलिस की गतिविधियां धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही हैं और जिन थानों व पुलिस चौकियों को प्रदर्शनकारियों ने तोड़ा-फोड़ा या आग के हवाले कर दिया था, वे फिर से संचालन में आ रही हैं.

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Sat, 13 Sep 2025 17:05:02 +0530 Newsdesk
कुलमान घिसिंग: नेपाल के संभावित नए प्रधानमंत्री, क्यों बन गए युवाओं के फेवरेट? https://citytoday.co.in/3603 https://citytoday.co.in/3603 नेपाल 
नेपाल में कई दिनों तक चले खूनी प्रदर्शनों के बाद अब हिंसा में कमी आई है। जेन-जी प्रदर्शनकारी नई सरकार के गठन में लग गए हैं। अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए हर दिन नया नाम सामने आ रहा है। काठमांडू मेयर बालेन शाह, पूर्व सीजेआई सुशीला कार्की के बाद अब 54 वर्षीय कुलमान घिसिंग रेस में सबसे आगे हो गए हैं। पहले बालेन शाह ने अपना नाम वापस ले लिया तो वहीं, सुशीला कार्की की उम्र उनके प्रमुख बनने के आड़े आ रही है।

कुलमान घिसिंग नेपाल के बिजली बोर्ड के पूर्व प्रमुख हैं। उन्हें पड़ोसी देश की बिजली व्यवस्था को सुधारने का श्रेय दिया जाता है। उनके ही नेतृत्व में नेपाल को बिजली की कमी से छुटकारा मिला और उन्हें जेन-जी प्रदर्शनकारियों का विश्वास भी हासिल है। घिसिंग ने एक अंतरिम सरकार के गठन की मांग की है, जिसमें स्वच्छ छवि वाले व्यक्ति हों और उसमें जेन-जी युवाओं को भी शामिल किया जाए। इसके साथ ही तत्काल चुनावों की घोषणा भी की जाए। इसी वजह से प्रदर्शनकारी जेन-जी समूह ने के वे फेवरेट बन गए और अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए उनके नाम पर विचार हो रहा।

इससे पहले, पूर्व सीजेआई सुशीला कार्की का नाम रेस में सबसे आगे था। हालांकि, अब लगता है कि प्रदर्शनकारियों का एक गुट उनके नाम से सहमत नहीं है। उनका मानना है कि चूंकि सुशीला कार्की की उम्र 73 साल है तो ऐसे में वह नेपाल का नेतृत्व करने के लिए बहुत बुजुर्ग हैं। साथ ही, संविधान पूर्व जजों को प्रधानमंत्री बनाने से भी रोकता है। ऐसे में उनके नाम की जगह कुलमान घिसिंग को चुना गया है। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

कौन हैं कुलमान घिसिंग
25 नवंबर 1970 को बेथन, रामेछाप में जन्मे घिसिंग ने भारत के जमशेदपुर में क्षेत्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में नेपाल में पुलचौक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई की। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अपने नेतृत्व कौशल को बढ़ाने के लिए एमबीए की पढ़ाई भी की। नेपाल के अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे आगे चल रहे 54 वर्षीय कुलमान घिसिंग देश के बिजली बोर्ड के पूर्व प्रमुख हैं। काठमांडू घाटी में लंबे समय से चली आ रही बिजली कटौती को खत्म करने के लिए उन्हें व्यापक प्रशंसा मिली थी। उन्होंने साल 1994 में एनईए में एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू किया।

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Fri, 12 Sep 2025 19:07:17 +0530 Newsdesk
नेपाल में आधी रात का उलटफेर! सुशीला पीएम पद की रेस में सबसे आगे, Gen&Z गुटों में तकरार https://citytoday.co.in/3602 https://citytoday.co.in/3602 काठमांडू 

नेपाल में सियासी संकट बरकरार है. Gen-Z प्रदर्शन के बाद नेपाल की कमान किसके हाथों में होगी, अब तक सस्पेंस से पर्दा नहीं हट पाया है. Gen-Z के विरोध प्रदर्शन के बाद ओली की सरकार गिर गई. केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद अंतरिम पीएम की तलाश जारी है. अंतरिम नेता चुनने को लेकर संवैधानिक संकट का समाधान ढूंढा जा रहा है. इस बीच नेपाल में एक और यूटर्न देखने को मिला है. नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की एक बार फिर नेपाली अंतरिम पीएम की रेस में आगे हो गई हैं. नेपाल में आधी रात को हुई एक बैठक में बाजी पलट गई.

जी हां, नेपाल में अंतरिम सरकार के गठन को लेकर कवायद जारी है. सूत्रों का कहना है कि इसे लेकर गुरुवार देर रात एक सीक्रेट बैठक हुई. यह बैठक राष्ट्रपति भवन में हुई, जिसे शीतल निवास के नाम से जाना जाता है. इस अहम बैठक में नेपाली आर्मी चीफ अशोक राज सिग्देल और सुशीला कार्की मौजूद थीं. उनके अलावा, स्पीकर, राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायण दहल और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस प्रकाश सिंह राउत भी थे. इस मीटिंग में कई मसलों पर अलग-अलग संविधान विशेषज्ञों से बात हुई. बताया गया कि इस बैठक में भी यह सहमति बनी है कि सुशीला कार्की को ही नेपाल की कमान दी जाए.

आधी रात वाली मीटिंग में बदली बाजी!

सूत्रों का कहना है कि सुशीला कार्की पर ही अब तक सहमति बनती दिख रही है. नेपाल में ओली की सरकार को उखाड़ने वाले Gen-Z की भी पहली पसंद सुशीला कार्की ही हैं. शीर्ष सूत्रों के अनुसार, सुशीला कार्की के प्रधानमंत्री बनने की प्रबल संभावना है और गुरुवार रात ही इस पर सहमति बनी है. आज यानी शुक्रवार को इसका ऐलान हो सकता है. काठमांडू के मेयर बालेन उर्फ बालेंद्र शाह का भी सुशीला कार्की को समर्थन है. सूत्रों का दावा है कि बालेन शाह चुनाव जीत कर पीएम बनना चाहते हैं. यही कारण है कि उन्होंने खुद अंतरिम पीएम बनने के प्रस्ताव को ठुकराया है और सुशीला कार्की का समर्थन किया है.
कैसे पीएम बनेंगी सुशीला कार्की?

सूत्रों के मुताबिक, नेपाल सरकार चलाने के लिए अंतरिम प्रमुख के चयन को लेकर गतिरोध को दूर करने के लिए आधी रात को संकट प्रबंधन दल की बैठक हुई. इस अशांति के बीच राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने गुरुवार को शांति की अपील की और कहा कि उनका लक्ष्य संवैधानिक ढांचे के भीतर राजनीतिक संकट का समाधान खोजना है. सूत्रों ने न्यूज18 को बताया कि सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा और पहले उन्हें संसद के उच्च सदन में पेश किया जाएगा.
आज होगा आधिकारिक ऐलान!

सूत्रों ने बताया कि पौडेल 2015 के संविधान के आधार पर समाधान पर जोर दे रही हैं. उन्होंने बताया कि हालांकि राजनीतिक अंतरिम प्रधानमंत्री का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन कार्की को उच्च सदन में नामित करके एक जगह बनाई जाएगी और फिर उन्हें प्रधानमंत्री बनाया जाएगा. सूत्रों ने बताया कि इस प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति आवश्यक प्रावधान करने के लिए एक अध्यादेश जारी कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि यह घोषणा आज होने की संभावना है.
सुशीला का हां ना और फिर  हां

दरअसल, गुरुवार को दिन में खबर आई थी कि सुशीला कार्की ने पीएम की रेस से अपना नाम वापस ले लिया है. इसके बाद जेन जी ने कुलमन घिसिंग का नाम आगे बढ़ाया था. मगर कुलमन घिसिंग के नाम पर भी सहमति नहीं बनी. बताया जा रहा है कि आर्मी चीफ ने सुशीला कार्की को करीब 15 घंटे तक मनाया. फिलहाल, नेपाल में अब भी उथल-पुथल जारी है. आज का दिन नेपाल की सियासत में अहम है. आज आधिकारिक तौर पर ऐलान हो सकता है कि नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री कौन होगा? यहां एक बात और सामने आई है कि नेपाल में अगले 6 महीने में चुनाव कराने की जिम्मेवारी अंतरिम सरकार पर ही होगी.

नेपाल में आपस में ही भिड़े Gen-Z के गुट, सेना ने कर दिया 'खेला'

नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर बैन के बाद भड़की Gen-Z ने सड़कों पर उतरकर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सत्ता की कुर्सी से उतरने पर मजबूर कर दिया. देश में जारी हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अंतरिम सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है. केपी ओली ने मंगलवार (9 सितंबर 2025) को अपने पद से इस्तीफा दिया और तब से अंतरिम पीएम को लेकर कई नामों पर सियासी पारा चढ़ा हुआ है.

आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर भिड़े युवा

काठमांडू में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन के बाद अब नेपाल के युवा अंतरिम प्रधानमंत्री के नाम पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं. आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर उम्मीदवारों के नाम पर युवाओं के बीच हाथापाई हुई. 9 सितंबर को काठमांडू के मेयर और रैपर बैलेन शाह, 10 सितंबर को पूर्व चीफ जस्टिस सुशील कार्की और 11 सितंबर को कुलमान घीसिंग का नाम अंतरिम पीएम रेस में सबसे आगे रहा.

अब इस लिस्ट में धरान के वर्तमान मेयर हरका राज संपांग राय उर्फ हरका संपांग का नाम भी शामिल हो गया है. पत्रकार से राजनेता बने रबी लामिछाने भी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं, जिन्हें विरोध प्रदर्शन के दौरान जेल से छुड़ाया गया था.

अंतरिम पीएम के नामों को लेकर मचा घमासान

नेपाली मीडिया के मुताबिक कई युवा चाहते हैं कि बालेन, सुशीला कार्की या संपांग को अंतरिम पीएम बनाया जाए, जिसे लेकर गुरुवार (11 सितंबर 2025) को युवाओं में झड़प भी हुई. हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. फिलहाल Gen-Z, प्रतिनिधियों, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख के बीच बातचीत चल रही है.

पौडेल ने कहा, "मैं सभी पक्षों से अपील करता हूं कि वे इस बात पर विश्वास रखें कि आंदोलनकारी नागरिकों की मांगों को पूरा करने के लिए समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकाला जा रहा है. संयम के साथ देश में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।" कई लोगों को उम्मीद थी कि राष्ट्रपति इस घटना के बाद सार्वजनिक रूप से सामने आएंगे और राष्ट्र को संबोधित करेंगे.

आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर इंतजार कर रहे युवा

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबकि सेना के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हम अलग-अलग लोगों के साथ कई दौर की बातचीत कर रहे हैं. बातचीत मुख्य रूप से मौजूदा गतिरोध से बाहर निकलने और साथ ही देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर केंद्रित है. नया शासन प्रमुख वह होगा जो एक निश्चित समय सीमा के भीतर नए चुनाव कराएगा." बैठक के दौरान सेना मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में युवा बेसब्री से फैसला सुनने का इंतजार करते दिखे. इसी तरह की एक बैठक बुधवार (10 सितंबर 2025) को भी हुई थी, लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला.

सेना ने कर दिया 'खेला'

आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर Gen-Z समर्थकों के बीच आपस में ही मारपीट ने नए सवाल को जन्म दे दिया है. दक्षिणपंथी नेता और मेडिकल कारोबारी दुर्गा प्रसाई को बातचीत के लिए आर्मी हेडक्वार्टर लाया गया. बताया जा रहा है कि उन्हें सेना ने बातचीत के लिए बुलाया है. इस खबर को सुनते ही युवाओं का गुस्सा और भड़क गया. इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं सेना अपने उम्मीदवार को रेस में तो नहीं ला रही.

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Fri, 12 Sep 2025 18:54:39 +0530 Newsdesk
ब्राज़ील में तख्तापलट की साजिश के आरोप में पूर्व राष्ट्रपति को 27 साल की जेल https://citytoday.co.in/3601 https://citytoday.co.in/3601 ब्रासीलिया 12 सितंबर (वार्ता) ब्राज़ील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो (70) को सैन्य तख्तापलट की साजिश रचने का दोषी पाए जाने पर 27 साल तीन महीने जेल की सजा सुनाई गई है।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के पाँच न्यायाधीशों के एक पैनल ने पूर्व राष्ट्रपति को दोषी ठहराए जाने के कुछ ही घंटों बाद यह सजा सुनाई।

बोल्सोनारो पर 2022 का चुनाव अपने वामपंथी प्रतिद्वंद्वी लुईज़ इनासियो लूला दा सिल्वा से हारने के बाद सत्ता में बने रहने के उद्देश्य से रची गई एक साजिश का नेतृत्व करने का आरोप है।

चार न्यायाधीशों ने उन्हें दोषी पाया जबकि एक ने उन्हें बरी करने को कहा।

घर में नज़रबंद बोल्सोनारो इस मुकदमे में शामिल नहीं हुए।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ब्राज़ील के सर्वोच्च न्यायालय ने “पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को कैद करने का अन्यायपूर्ण फैसला सुनाया है” और “इस षडयंत्र का जवाब देने” की धमकी दी।

ब्राज़ील के विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक्स पर पोस्ट किया कि “अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आज दी गई धमकियाँ एक ब्राज़ीलियाई प्राधिकरण पर हमला करने वाले और रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों और ठोस सबूतों की अनदेखी करने वाले बयान हमारे लोकतंत्र को प्रभावित नहीं करेंगी”।

इस फैसले से बोल्सोनारो को अब अपना शेष जीवन जेल में बिताने की आशंका का सामना करना पड़ रहा है।

पूर्व राष्ट्रपति के वकीलों से यह तर्क देने की उम्मीद है कि उन्हें जेल भेजने के बजाय नज़रबंद रखा जाना चाहिए। वे कम सजा की भी गुहार लगाएंगे। हालाँकि वे फैसले के खिलाफ अपील नहीं कर पाएंगे।

बोल्सोनारो को पाँच आरोपों में दोषी पाया गया, ये सभी 2022 के चुनाव में हार के बाद सत्ता पर काबिज रहने की उनकी कोशिश से संबंधित थे।

अभियोजकों ने तर्क दिया कि उन्होंने सत्ता में बने रहने की साज़िश बहुत पहले ही शुरू कर दी थी, सैन्य कमांडरों को तख्तापलट का प्रस्ताव दिया था और चुनावी व्यवस्था पर बेबुनियाद संदेह पैदा किए थे।

न्यायाधीशों ने कहा कि उन्होंने एक साज़िश रची थी और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों सहित उनके सात सह-साज़िशकर्ताओं को भी दोषी ठहराया था। इनमें दो पूर्व रक्षा मंत्री, एक पूर्व जासूस प्रमुख और एक पूर्व सुरक्षा मंत्री शामिल हैं।

पाँच सदस्यीय पैनल में एकमात्र न्यायाधीश लुईज़ फ़क्स ने बुधवार को तर्क दिया कि जायर बोल्सोनारो के ख़िलाफ़ आरोप निराधार थे और उन्हें बरी करने को कहा।

पैनल की एकमात्र महिला न्यायाधीश कारमेन लूसिया ने गुरुवार को ज़ोर देकर कहा कि ब्राज़ील की लोकतांत्रिक व्यवस्था ख़तरे में है और चेतावनी दी कि “अधिनायकवाद से कोई छूट नहीं है”।

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Fri, 12 Sep 2025 18:29:18 +0530 Newsdesk
रूस ने पोलैंड से बेलारूस के साथ सीमा बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार का आह्वान किया https://citytoday.co.in/3600 https://citytoday.co.in/3600 मास्को 12 सितंबर (वार्ता) रूस ने पोलैंड से बेलारूस के साथ सीमा बंद करने के अपने फैसले पर जल्द से जल्द पुनर्विचार करने का आह्वान किया है।

रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि पोलैंड की कार्रवाई का उद्देश्य “यूरोप के मध्य में तनाव को और बढ़ाने की नीति को उचित ठहराना है।”

उन्होंने कहा, “पोलैंड की एकतरफा कार्रवाई से उसके उन अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को गंभीर नुकसान होगा जो पोलैंड-बेलारूसी सीमा का इस्तेमाल व्यापारिक आदान-प्रदान के लिए करते हैं।”

पौलेंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने मंगलवार को कहा कि उनका देश “बेहद आक्रामक” रूस-बेलारूस सैन्य अभ्यास “ज़ापद-2025” के सिलसिले में गुरुवार आधी रात से बेलारूस के साथ अपनी सीमा पूरी तरह से बंद कर देगा।

सुश्री ज़खारोवा ने ज़ोर देकर कहा कि ये अभ्यास नियमित रूप से उचित सार्वजनिक कवरेज के साथ आयोजित किए जाते हैं और पोलैंड सहित यूरोपीय सुरक्षा और सहयोग संगठन के सभी भागीदार देशों के प्रतिनिधियों को अभ्यास देखने के लिए आमंत्रित किया गया था।

बेलारूस विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को पोलैंड के प्रभारी राजदूत को तलब किया और पोलैंड के इस फैसले पर मौखिक विरोध दर्ज कराया।

मंत्रालय ने कहा कि पोलैंड के इस एकतरफा कदम से पूरी यूरोपीय संघ-बेलारूस सीमा प्रभावित होने की आशंका है, जिससे लोगों और सामानों की आवाजाही बाधित होगी।

 

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Fri, 12 Sep 2025 17:49:44 +0530 Newsdesk
ट्रंप की नीति पर सवाल: महंगाई बढ़ी, जॉब कम हुए, फिर भी टैरिफ का दबाव जारी https://citytoday.co.in/3599 https://citytoday.co.in/3599 न्यूयॉर्क

अमेरिका की खराब हालत आंकड़ों में साफ नजर आने लगी है. यहां महंगाई से लेकर बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है, अमेरिका पर कर्ज भी लगातार बढ़ रहा है. डॉलर इंडेक्‍स रिस्‍क का संकेत दे रहा है, तो एक्‍सपर्ट्स मंदी का अंदेशा लगा रहे हैं. ये सभी चीजें सिर्फ टैरिफ की वजह से हो रही हैं, क्‍योंकि अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप आए दिन किसी ना किसी सेक्‍टर या देश पर टैरिफ बम फोड़ते रहते हैं. 

अगस्त में अमेरिका में महंगाई दर में तेजी आई है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्‍याज दर कटौती को लेकर चिंता बढ़ गई है. गुरुवार को जारी श्रम विभाग ने आंकड़ों के अनुसार, कंज्‍यूमर प्राइस पिछले साल की तुलना में 2.9 प्रतिशत बढ़ा है. यह जुलाई के 2.7 प्रतिशत से ज्‍यादा है और जनवरी के बाद से सबसे तेज सालाना ग्रोथ है. 

फूड और एनर्जी को छोड़कर, मुख्‍य महंगाई दर 3.1 फीसदी पर स्थिर रही. दोनों ही आंकड़े फेड के 2 फीसदी के टारगेट से ऊपर हैं, जो दो साल की सख्‍ती के बाद भी कम नहीं हुए हैं. अमेरिका में महंगाई को लेकर ये सबसे बड़ा डर है. 

कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
अमेरिका में किराने के सामान हर महीने 0.6 प्रतिशत बढ़ा, कॉफी 21 फीसदी और बीफ स्‍टेक पिछले साल की तुलना में 17 फीसदी बढ़ा है. जुलाई से पेट्रोल की कीमतों में 1.9 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है, जबकि हवाई किराया, कपड़े, फर्नीचर और होटल की कीमतें भी बढ़ गई हैं. 

नौकरी में गिरावट 
श्रम विभाग की एक अन्‍य रिपोर्ट ने बड़ी टेंशन पैदा की है. बेरोजगारी सहायता के लिए साप्ताहिक आवेदन 27,000 बढ़कर 2,63,000 हो गए, जो 2021 के बाद से सबसे ज्यादा और लगभग चार वर्षों में सबसे तेज उछाल है. यह संख्‍या छंटनी का एक संकेत है और पहले के रोजगार के आंकड़ों में कमी के बाद आई है. मई और जून के शुरुआती अनुमानों में कुल मिलाकर 2,58,000 पदों की कटौती की गई थी, जो यह बताती है कि नियुक्तियां अनुमान से कम रही हैं. 

स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी रिसर्च के डैनियल हॉर्नंग ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा है कि महंगाई और बेरोजगारी का ये आंकड़ा- अमेरिका को काफी कमजोर करने वाला है. 

फिर होने लगी मंदी की चर्चा 
अमेरिका में आए इन दोनों रिपोर्ट ने एक बार फिर मंदी की चर्चा छेंड़ दी है. इकोनॉमिस्‍ट कह रहे हैं कि इकोनॉमी की धीमी ग्रोथ, जॉब में बड़ी कटौती और महंगाई जैसे आंकड़ों का मिश्रण 1970 के दशक के बाद से नहीं देखा गया था. उनका कहना है कि आमतौर पर धीमी विकास दर से महंगाई भी कम होती है, लेकिन टैरिफ की वजह से ऐसा नहीं हो रहा है. 

वेल्स फार्गो की सीनियर इकोनॉमिस्‍ट सारा हाउस ने डब्ल्यूएसजे को बताया कि टैरिफ का बोझ एक साथ कंज्यूमर्स पर नहीं डाला जा रहा है, लेकिन अगर आप सभी का कैलकुलेशन देखें, तो आप अभी भी वस्तुओं की कीमतों में उछाल देख रहे हैं. 

ट्रंप टैरिफ से बढ़ी टेंशन
इकोनॉमिस्‍ट का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी ट्रंप की टैरिफ की वजह से हुआ है. व्यवसाय धीरे-धीरे इस लागत का बोझ लोगों पर डाल रहे हैं. वॉलमार्ट ने तो साफ कहा है कि जैसे-जैसे स्‍टॉक बढ़ेगा, कीमतों में और भी ज्‍यादा उछाल देखने को मिलेगा. जबकि छोटे व्‍यवसाय लागत वहन करने के लिए स्‍ट्रगल कर रहे हैं. अमेरिका में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में 10 फीसदी की ग्रोथ, मसालों ओर चॉकलेट जैसे उत्‍पाद की कीमतों में 3 अंकों की ग्रोथ हुई है. 

फेडरल रिजर्व कट करेगा रेट? 
फेडरल रिजर्व नीतिगत जाल में फंसा हुआ है. अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने स्वीकार किया है कि जोखिम बढ़ रहे हैं. एक्‍सपर्ट्स अनुमान लगा रहे हैं कि फेडरल रिजर्व एक बार फिर रेट में कटौती कर सकता है और महंगाई को स्थिर करने की कोश‍िश कर सकता है. 

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Fri, 12 Sep 2025 17:41:15 +0530 Newsdesk
भयानक तस्वीरें: बिहार के इस गांव में नेपाल से लगी आग, घर और बाइकें जलते देख लोग सहम गए https://citytoday.co.in/3590 https://citytoday.co.in/3590 नेपाल 
नेपाल में हाल ही में हुए तख्तापलट और उसके बाद भड़के विरोध-प्रदर्शनों का असर अब भारत की सीमाओं तक पहुंचने लगा है। नेपाल की सीमा से सटे बिहार के अररिया जिले के जोगबनी क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है। सीमा पार हो रही हिंसा के चलते भारत की ओर अलर्ट घोषित कर दिया गया है और सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद हो गई हैं।

नेपाल में हिंसा, भारत में दहशत
नेपाल के रानी भंसार क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए उग्र प्रदर्शन, आगजनी और नारेबाजी की घटनाएं जोगबनी बॉर्डर से महज 400 मीटर की दूरी पर घटीं। स्थानीय निवासी अजय प्रसाद के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने रंगेली महानगरपालिका समेत कई सरकारी भवनों और घरों में आग लगा दी। बिराटनगर के टॉवर चौक पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया गया और करीब 20 बाइकें फूंक दी गईं। इस हिंसा के बाद जोगबनी बाजार की अधिकांश दुकानें स्वतः बंद हो गईं।

सीमा सील, आवाजाही पर रोक
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जोगबनी बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया है। नेपाल की ओर जाने वाली सड़क पर वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। स्कूल और कॉलेज भी अगले आदेश तक बंद कर दिए गए हैं। अररिया और किशनगंज जैसे खुली सीमा वाले जिलों में माइकिंग कर लोगों से नेपाल न जाने की अपील की जा रही है।

सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट
बिहार के सात नेपाल सीमावर्ती जिलों पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज — में प्रशासन हाई अलर्ट पर है। पुलिस और एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) की तैनाती बढ़ा दी गई है। जोगबनी बॉर्डर पर तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। जिलाधिकारी ने स्वयं सीमा का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।
 
कड़ी निगरानी और तलाशी अभियान
किशनगंज जिले में नेपाल और बंगाल से सटे क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। एसपी सागर कुमार लगातार थानों से रिपोर्ट ले रहे हैं। गलगलिया, जियापोखर, सुखानी, फतेहपुर, दिघलबैंक जैसे नेपाल से लगे थानों में विशेष निगरानी और चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। वाहनों की डिक्की तक की तलाशी ली जा रही है ताकि कोई संदिग्ध गतिविधि भारत में प्रवेश न कर सके। हालांकि, इलाज के लिए आने-जाने वाले एम्बुलेंस को सीमा पार जाने की अनुमति दी जा रही है। इसके अलावा, कोई अन्य आवाजाही अनुमति के बिना नहीं हो रही है।

वर्तमान स्थिति
फिलहाल जोगबनी और आसपास के क्षेत्रों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जनता से संयम बरतने और अफवाहों से बचने की अपील की गई है।

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Thu, 11 Sep 2025 17:04:26 +0530 Newsdesk
नेपाल की पूर्व CJI सुशीला कार्की: पहली महिला चीफ़ जस्टिस, अब अंतरिम प्रधानमंत्री की दौड़ में https://citytoday.co.in/3588 https://citytoday.co.in/3588 काठमांडू 
नेपाल में तख्तापलट और खूनी हिंसा के बाद अब नई सरकार का इंतजार किया जा रहा है। जेन-जी प्रदर्शनकारी पहले काठमांडू के मेयर बालेन शाह को देश की कमान देना चाहते थे, लेकिन अब नया नाम सामने आया है। प्रदर्शनकारी नेपाल की पूर्व सीजेआई सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं। यह दावा नेपाल के सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव ने किया। नेपाल की अंतरिम सरकार के मुखिया को चुनने के लिए आयोजित की गई एक वर्चुअल मीटिंग में करीब पांच हजार से ज्यादा जेन-जी युवा शामिल हुए। इसमें सुशीला कार्की को सबसे ज्यादा समर्थन मिला। उनका भारत से भी कनेक्शन है। दरअसल, कार्की ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से पोस्ट ग्रैजुएट की पढ़ाई की है।

भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दों पर नेपाल पिछले तीन दिनों से जल रहा है। केपी ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा, जिसके बाद बालेन शाह का नाम सबसे आगे आया, लेकिन सूत्रों के अनुसार, उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांग पर अपनी सहमति नहीं दी, जिसके बाद दूसरे नामों पर विचार किया जाने लगा। सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बनती दिख रही है।

कौन हैं सुशीला कार्की?
नेपाल के विराटनगर में सात जून, 1952 को जन्मीं सुशीला कार्की वहां की पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं। वह नेपाल की पहली और एकमात्र महिला सीजेआई हैं। उन्होंने 2016 में सीजेआई का पद संभाला। विराटनगर के कार्की परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुशीला कार्की अपने माता-पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी हैं।

साल 1972 में उन्होंने विराटनगर में ही महेंद्र मोरंग कैंपस से बीए की डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने 1975 में वाराणसी की बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में पीजी किया। उन्होंने 1978 में त्रिभुवन यूनिवर्सिटी से फिर बैचलर की डिग्री हासिल की। उन्होंने 1979 में विराटनगर में ही वकालत की शुरुआत की और फिर असिस्टेंट टीचर के रूप में भी काम किया। 2009 में उन्हें नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में एडहॉक जज के रूप में नियुक्त किया गया। वहीं, 2016 में वे अपने देश की सीजेआई बनीं और सात जून, 2017 तक इस पद पर रहीं।

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Thu, 11 Sep 2025 17:02:13 +0530 Newsdesk
चीन की ‘ग्रे जोन रणनीति’ से बढ़ा तनाव: हाई अलर्ट पर ताइवान, मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक्टिव https://citytoday.co.in/3587 https://citytoday.co.in/3587 ताइपे 
ताइवान जलडमरूमध्य में चीनी सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से अलर्ट हो गया है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय (एमएनडी) ने पिछले 24 घंटों में चीन की सैन्य गतिविधियों की निगरानी की सूचना दी। खबर के अनुसार, मंगलवार सुबह 6 बजे से बुधवार सुबह 6 बजे तक द्वीप के आसपास 13 चीनी सैन्य विमान, 6 नौसैनिक जहाज और एक सरकारी जहाज देखे गए। एमएनडी ने बताया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सभी 13 विमान ताइवान जलडमरूमध्य की मध्य रेखा पार करके ताइवान के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में घुस आए। जवाब में ताइवानी सेना ने लड़ाकू जेट भेजे, नौसैनिक जहाज तैनात किए और तटीय मिसाइल रक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर स्थिति पर नजर रखी।

खबर के मुताबिक, यह बीजिंग की 'ग्रे जोन रणनीति' का हिस्सा है, जो ताइवान पर उत्तेजक कार्रवाइयों से दबाव बनाने की रणनीति है, जो युद्ध से पहले रुक जाती है। इसमें धीरे-धीरे सैन्य तैनाती बढ़ाकर ताइवान की सुरक्षा कमजोर करने और उसकी प्रतिक्रिया क्षमता की जांच करने का लक्ष्य होता है। एमएनडी ने सितंबर में ऐसी गतिविधियों में तेज वृद्धि दर्ज की। इस महीने अब तक ताइवान ने 134 चीनी विमान और 68 नौसैनिक जहाजों को ट्रैक किया। ये आंकड़े बताते हैं कि पीएलए ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। वहीं एक्सपर्ट का कहना है कि इसका मकसद ताइवान पर निरंतर सैन्य दबाव बनाए रखना और ताइपे एवं अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश देना है।

खबर के अनुसार, सितंबर 2020 से चीन लगातार द्वीप के पास अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। ये सैन्य अभियान ताइवान की संप्रभुता को चुनौती देते हैं, लेकिन सीधा संघर्ष टालते हैं। ताइवानी सेना ने पीएलए के खतरों से देश के हवाई और समुद्री क्षेत्र की रक्षा की प्रतिबद्धता दोहराई है।

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Thu, 11 Sep 2025 17:00:10 +0530 Newsdesk
भारत&ईयू का साझा मोर्चा: आतंकवाद और क्रॉस&बॉर्डर हमलों पर सख़्त रुख https://citytoday.co.in/3586 https://citytoday.co.in/3586 ब्रसेल्स
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने ब्रसेल्स में आयोजित आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यकारी समूह की 15वीं बैठक में आतंकवाद के सभी स्वरूपों और खासतौर पर सीमा-पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है और इससे निपटने के लिए सतत एवं व्यापक वैश्विक सहयोग की जरूरत है। बैठक की सह-अध्यक्षता यूरोपीय बाहरी कार्य सेवा (ईईएएस) के सुरक्षा एवं रक्षा नीति निदेशक मचीज स्टाडेजेक और भारत के विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (आतंकवाद-रोधी) के. डी. देवाल ने की। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, “भारत और ईयू ने संयुक्त राष्ट्र, ग्लोबल काउंटर टेररिज्म फोरम और एफएटीएफ जैसे बहुपक्षीय मंचों में सहयोग की अहमियत पर बल दिया। बैठक के दौरान घरेलू, क्षेत्रीय और वैश्विक खतरे के आकलनों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने कहा कि विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में अस्थिरता और संघर्ष आतंकवाद व उग्रवाद को बढ़ावा देते हैं।”

बैठक में आतंकवाद के वित्त पोषण को रोकने, ऑनलाइन कट्टरपंथ की रोकथाम, आतंकियों और आतंकी संगठनों की सूचीबद्धता में सहयोग तथा नई उभरती प्रौद्योगिकियों के दुष्प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने भविष्य में आतंकवाद-रोधी सहयोग को और मजबूत करने के रास्तों की पहचान की। अगली बैठक नई दिल्ली में पारस्परिक सहमति से तय तिथि पर होगी। भारत और ईयू ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी निंदा की। ईयू ने निर्दोष नागरिकों की हत्या पर भारत के प्रति संवेदना व्यक्त की।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से फोन पर बातचीत की थी। बातचीत में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को जल्द निष्कर्ष तक पहुंचाने और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर के क्रियान्वयन पर सहमति जताई गई। दोनों नेताओं ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश, नवाचार, सतत विकास, रक्षा, सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति का स्वागत किया। पीएम मोदी ने दोनों नेताओं को भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने का आमंत्रण दिया।

प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान में कहा गया, “दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के रूप में भारत और यूरोपीय संघ के बीच भरोसे, साझा मूल्यों और साझा दृष्टिकोण पर आधारित मजबूत संबंध हैं। नेताओं ने वैश्विक मुद्दों से निपटने, स्थिरता लाने और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने में भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी की अहम भूमिका को रेखांकित किया।” बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान और जल्द से जल्द शांति एवं स्थिरता बहाल करने के प्रति भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया।

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Thu, 11 Sep 2025 16:55:52 +0530 Newsdesk
मोदी जी को नमस्कार…’ नेपाल की नई प्रमुख सुशीला कार्की ने भारत पर क्या कहा? https://citytoday.co.in/3585 https://citytoday.co.in/3585 नई दिल्ली/काठमांडू 

हिंसा से जूझ रहा नेपाल धीरे-धीरे शांति की ओर बढ़ रहा है. पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की नेपाल की अंतिरम सरकार की प्रमुख बनने के लिए रजामंद हो गई हैं. नेपाल की कमान संभालने से पहले ही कार्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है.

कार्की ने कहा कि मैं मोदी जी को नमस्कार करती हूं. मुझ पर मोदी जी का बहुत अच्छा प्रभाव है. उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि वह इस जिम्मेदारी के लिए तैयार हैं. नेपाल में हालिया मूवमेंट की अगुवाई कर रहे Gen-Z ग्रुप ने मुझ पर विश्वास जताया है कि मैं भले ही छोटी अवधि के लिए लेकिन सरकार की अगुवाई करूं.

उन्होंने कहा कि मेरी पहली प्राथमिकता उन लोगों का सम्मान करने की होगी, जिन्होंने प्रदर्शनों में अपनी जान खोई है. कार्की ने कहा कि हमारा पहला काम प्रोटेस्ट के दौरान मारे गए लोगों के परिवार वालों के लिए कुछ करने का होगा. 

कार्की ने नेपाल का समर्थन को लेकर भारत की भूमिका की बात करते हुए कहा कि मैं भारत का बहुत सम्मान करती हूं और उनसे प्यार करती हूं. मैं मोदी जी की कार्यशैली से प्रभावित हूं. भारत ने नेपाल की बहुत मदद की है.

नेपाल के अस्थिर राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कार्की ने कहा कि नेपाल में शुरू से ही समस्याएं रही हैं. अब स्थिति मुश्किल है. हम नेपाल के विकास के लिए काम करेंगे. हम देश की नई शुरुआत करेंगे.

बता दें कि कार्की नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रही हैं. उन्होंने 2016 में यह पद संभाला था. लेकिन उन पर सरकार के काम में दखल देने का  आरोप लगाकर महाभियोग लाया गया था. लेकिन कार्की ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, कोर्ट ने इसके बाद उन्हें राहत देने से फैसले को पलट दिया था. 

नेपाल में बवाल: जेलब्रेक के दौरान कैदियों पर सेना की फायरिंग, 2 की मौत

नेपाल में उथल-पुथल और राजनीतिक अस्थिरता का दौर जारी है. इस बीच नेपाल के रामेछाप में कैदियों ने जेल से भागने की कोशिश की, जिसके बाद सेना ने गोली चला दी.

सेना की गोली लगने से दो कैदियों की मौत हो गई है. सेना से झड़प के दौरान 10 और कैदियों को गोली लगी है. नेपाल में सेना का नियंत्रण होने के बाद गोलीबारी की ये पहली घटना है. 

इससे पहले काठमांडू जेल ब्रेक से भागे बांग्लादेशी नागरिक को एसएसबी ने पकड़ा. यह शख्स सोने की तस्करी के आरोप में पांच साल से नेपाल में बंद था.

बिहार-नेपाल सीमा के रक्सौल सीमा की सुरक्षा में लगी SSB की 47 बटालियन ने एक बांग्लादेशी नागरिक महमद अबुल हसन ढाली को हिरासत में लिया. SSB 47वीं बटालियन के कमांडेंट संजय पांडे ने बताया कि नेपाल में तीन दिनों से बदले स्थिति को देखते हुए सीमा पर गश्त बढ़ा दी गई है. बुधवार लगभग तीन बजे दिन में संदेह के आधार पर एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया.

जांच में महमद अबुल हसन ढली ने बताया कि यह नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित जेल में पांच साल से कैद है और नेपाल में हुए जेल ब्रेक में भाग कर यह रक्सौल पहुंचा है, जिससे आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए हरपुर थाना को सौंपा जा रहा है.

बता दे कि नेपाल में ओली सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दूसरे ओर तीसरे दिन नेपाल के विभिन्न जिलों से लगभग 15000 कैदी जेल से भाग निकले हैं.

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Thu, 11 Sep 2025 16:54:13 +0530 Newsdesk
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की दक्षिण कोरिया यात्रा, चीन और उत्तर कोरिया से भी हो सकती मुलाकात https://citytoday.co.in/3575 https://citytoday.co.in/3575 वाशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके शीर्ष सलाहकार एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) व्यापार मंत्रियों की बैठक के लिए अक्टूबर में दक्षिण कोरिया की यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात संभव है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी सरकार की टैरिफ नीतियों को लेकर दुनियाभर के देश चिंता में हैं। वहीं, इसका वैश्विक व्यापार पर भी असर देखा जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि एपेक के दौरान द्विपक्षीय बैठक के बारे में गंभीर चर्चा हुई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस योजना नहीं बनी है।

अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में ग्योंगजू शहर में होने वाले इस शिखर सम्मेलन को ट्रंप के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने का एक अहम अवसर माना जा रहा है। पिछले महीने एक फोन कॉल में जिनपिंग ने ट्रंप और उनकी पत्नी को चीन आने का निमंत्रण दिया था। इस निमंत्रण का अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी स्वागत किया था, हालांकि अभी तक तारीख तय नहीं हुई है।

अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिका में अधिक आर्थिक निवेश हासिल करने के अवसर के रूप में भी देख रहा है। ट्रंप की सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात की यात्राओं सहित हालिया विदेश यात्राओं का मुख्य केंद्र यही रहा है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सीएनएन को बताया, "दक्षिण कोरिया की यात्रा पर चर्चा हो रही है। यह यात्रा आर्थिक सहयोग पर केंद्रित होगी।"

अधिकारी ने बताया कि अन्य लक्ष्यों में व्यापार, रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग पर चर्चा पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है। इस क्षेत्र में ट्रंप की मौजूदगी उन्हें उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ एक बार फिर बातचीत करने की स्थिति में ला सकती है, हालांकि किम इसमें शामिल होंगे या नहीं, यह अभी भी सवाल है।

अधिकारियों का कहना है कि शी जिनपिंग के साथ संभावित बैठक के आयोजन पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने पिछले हफ्ते ट्रंप के साथ बैठक के दौरान उन्हें एपेक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। इस दौरान उन्होंने सुझाव दिया था कि यह आयोजन ट्रंप को किम से मिलने का अवसर प्रदान कर सकता है।

शनिवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह किम से मिलने के इच्छुक हैं। उत्तर कोरियाई नेता के बारे में ट्रंप ने दावा किया, "मैं ऐसा करूंगा और हम बातचीत करेंगे। वह मुझसे मिलना चाहेंगे। हम उनसे मिलने के लिए उत्सुक हैं और हम संबंधों को बेहतर बनाएंगे।" अमेरिकी राष्ट्रपति की दक्षिण कोरिया की अपेक्षित यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब शी जिनपिंग और किम दोनों के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण हैं। शी जिनपिंग ने इस हफ्ते बीजिंग में किम, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी की थी।

जिनपिंग के साथ संभावित बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वाशिंगटन और बीजिंग ट्रंप के टैरिफ को लेकर आमने-सामने हैं। अमेरिका और चीन के अधिकारी एक व्यापार समझौते पर कई वार्ताओं में शामिल रहे हैं, जिसमें यूरोप में दोनों देशों के शीर्ष आर्थिक सलाहकारों के साथ दो आमने-सामने की बैठकें भी शामिल हैं।

ट्रंप ने अप्रैल में चीन के आयात पर 145 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी वस्तुओं पर 125 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। टैरिफ पिछले महीने लागू होने वाले थे। लेकिन, ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके नवंबर तक बढ़ी हुई टैरिफ पर रोक लगा दी।

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Mon, 08 Sep 2025 13:37:11 +0530 City Today Bhopal
रूस ने कैंसर के खिलाफ ऐतिहासिक कदम: नई वैक्सीन ने ट्रायल में दिखाई 100% सफलता https://citytoday.co.in/3576 https://citytoday.co.in/3576 रूस 
रूस ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक नई सफलता हासिल की है. वहां की फेडरल मेडिकल एंड बायोलॉजिकल एजेंसी (FMBA) FMBA ने कैंसर की वैक्सीन तैयार की है. FMBD प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने कहा कि रूसी एंटरोमिक्स कैंसर वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है. mRNA-बेस्ड इस वैक्सीन ने सभी प्रीक्लिनिकल टेस्ट को सफलतापूर्वक पार कर लिया है जिससे इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता साबित हो गई है. इस टीके का प्रारंभिक लक्ष्य कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) होगा. 

वैक्सीन ने पार किए सभी ट्रायल्स
रिपोर्ट के अनुसार, रूस के कैंसर वैक्सीन ने शानदार प्रदर्शन किया है और FMBA की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (EEF) में इसकी घोषणा की है. 

वैज्ञानिकों को अब अप्रूवल का इंतजार
स्कवोर्त्सोवा ने कहा, 'यह शोध कई वर्षों तक चला जिसमें से पिछले तीन साल सिर्फ मैंडेटरी प्रीक्लिनिकल स्टडीज को ही समर्पित थे. वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है. हम आधिकारिक स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे हैं.'

उन्होंने कहा कि प्रीक्लिनिकल ट्रायल्स टीके की सुरक्षा, बार-बार इस्तेमाल के बावजूद इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि करते हैं. शोधकर्ताओं ने इस दौरान ट्यूमर के आकार में कमी और ट्यूमर के विकास में कमी देखी. इसके अलावा अध्ययनों ने टीके के कारण मरीज की जीवित रहने की दर में वृद्धि का भी संकेत दिया.

कई और प्रकार के कैंसर के टीकों पर भी काम जारी
इस टीके का शुरुआती टार्गेट कोलोरेक्टल कैंसर होगा. इसके अलावा ग्लियोब्लास्टोमा (ब्रेन कैंसर) और विशिष्ट प्रकार के मेलेनोमा जिनमें ऑक्यूलर मेलेनोमा (एक प्रकार का आंख का कैंसर) के लिए टीके विकसित करने में उम्मीद बांधने वाली प्रगति हुई है जो वर्तमान में अपनी एंडवांस स्टेज पर हैं.

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Mon, 08 Sep 2025 13:37:11 +0530 City Today Bhopal
जापान में राजनीति में हड़कंप: प्रधानमंत्री ने पार्टी बचाने के लिए दिया इस्तीफा! https://citytoday.co.in/3577 https://citytoday.co.in/3577 टोक्यो 
जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इशिबा ने सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) में फूट से बचने के लिए यह कदम उठाया। जापानी मीडिया NHK ने इसकी पुष्टि की है। दरअसल, इशिबा की गठबंधन सरकार जुलाई में हुए ऊपरी सदन (हाउस ऑफ काउंसलर्स) के चुनाव में हार गई थी। इसके लिए इशिबा ने हाल ही में माफी मांगी थी और कहा था कि वह इस्तीफे पर विचार करेंगे। गौरतलब है कि चुनावी हार के बाद LDP में 'इशिबा को हटाओ' आंदोलन जोर पकड़ गया था। पार्टी के कुछ नेताओं और सांसदों ने उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद से पार्टी के भीतर विरोध और तेज हो गया था।

बता दें कि ऊपरी सदन के चुनाव परिणामों ने शिगेरू इशिबा की पार्टी पर उनकी पकड़ को कमजोर कर दिया था। इसके बावजूद उन्होंने कहा था कि वह अपने पद पर बने रहेंगे। उस समय जापान और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही थी। वहीं, अमेरिका ने जापान पर टैरिफ को 25 से घटाकर 15 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था।

गौरतलब है कि पिछले साल इशिबा की पार्टी का निचले सदन में चुनावी प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। यह पार्टी का 15 साल में सबसे खराब प्रदर्शन था। इसके बाद जुलाई में ऊपरी सदन के चुनाव हुए, जहां पार्टी को एक बार फिर खराब प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। तब इशिबा ने कहा था कि अभी अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण चर्चा चल रही है। ऐसे में इस चर्चा को बाधित करना बड़ी भूल हो सकती है।

 

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Mon, 08 Sep 2025 13:37:11 +0530 City Today Bhopal
गाजा युद्ध में शांति की उम्मीद: बंधकों की रिहाई पर टिकी इजरायल की शर्त https://citytoday.co.in/3578 https://citytoday.co.in/3578 गाजा
इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने गाजा युद्ध को लेकर रविवार को यरुशलम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि गाजा में चल रहा युद्ध तब समाप्त हो सकता है, जब बंधकों को रिहा कर दिया जाए। साथ ही, फिलिस्तीनी उग्रवादी समूह हमास अपने हथियार डाल दे। यह बयान हमास की ओर से अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराए जाने के एक दिन बाद आया है, जिसमें उसने कहा था कि वह सभी बंधकों को रिहा कर देगा, बशर्ते इजरायल युद्ध समाप्त करने और गाजा शहर से अपनी सेना वापस बुलाने पर सहमत हो।

गिदोन सार का यह बयान इजरायल-हमास संघर्ष के बीच शांति स्थापना की दिशा में अहम कदम हो सकता है, क्योंकि यह युद्ध को समाप्त करने की शर्तों को स्पष्ट करता है। हालांकि, यह बयान दोनों पक्षों की परस्पर विरोधी मांगों को भी उजागर करता है, क्योंकि हमास की शर्तें इजरायल की मांगों से पूरी तरह भिन्न हैं। यह बयान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को तेज कर सकता है, क्योंकि इससे मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के लिए नई संभावनाएं खुलती हैं। यह दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास को भी दर्शाता है, जो शांति वार्ता को और जटिल बना सकता है।

शहर को खाली करने का निर्देश
इस बीच, इजरायल की सेना ने गाजा शहर के फिलिस्तीनियों को निर्देश दिया कि वे शहर को खाली कर दें और दक्षिण स्थित मानवीय क्षेत्र में चले जाएं। इजरायल ने शनिवार को इसी के साथ शहर की बहुमंजिला इमारतों को निशाना बनाया। सहायता समूहों ने चेतावनी दी कि गाजा से बड़े पैमाने पर लोगों को निकालने से मानवीय संकट की स्थिति और विकराल हो सकती है। खाद्य संकट के मद्देनजर दुनिया के अग्रणी संगठन ने शहर को अकालग्रस्त घोषित कर दिया है। अधिकांश परिवार लगभग 2 वर्ष से चल रहे इजराइल-हमास युद्ध के कारण कई बार विस्थापित हो चुके हैं। उनका कहना है कि उनके पास जाने के लिए कोई स्थान नहीं बचा है, क्योंकि इजरायली सेना ने बार-बार उन शिविरों पर बमबारी की है, जिन्हें उसने मानवीय क्षेत्र घोषित किया था।

 

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Mon, 08 Sep 2025 13:37:11 +0530 City Today Bhopal
टैरिफ विवाद के बीच ट्रंप से मिले भारतीय लॉबीिस्ट जेसन मिलर, मोदी सरकार के लिए बढ़ा रहे दबाव https://citytoday.co.in/3579 https://citytoday.co.in/3579 वाशिंगटन
भारत और अमेरिका के बीच चल रहे टैरिफ विवाद के बीच जानी-मानी राजनीतिक लॉबिस्ट और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी जेसन मिलर ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की है। मिलर वही लॉबिस्ट हैं जिन्हें कुछ महीने पहले भारत सरकार ने ट्रंप प्रशासन तक अपनी कूटनीतिक पहुंच मजबूत करने के लिए नियुक्त किया था। जेसन मिलर ने एक्स पर राष्ट्रपति ट्रंप संग अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “वॉशिंगटन में शानदार सप्ताह बिताया। सबसे खास रहा हमारे राष्ट्रपति को ऐक्शन में देखने का मौका।”

सार्वजनिक खुलासों के अनुसार मिलर भारतीय हितों की वकालत करने वाले रजिस्टर्ड विदेशी एजेंट हैं। भारत सरकार ने अप्रैल 2024 में उनकी लॉबिंग फर्म एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी को नियुक्त किया था। इस अनुबंध के तहत भारत हर महीने फर्म को 1.5 लाख डॉलर करीब 1.25 करोड़ रुपये फीस देती है। एक साल का यह अनुबंध 1.8 मिलियन डॉलर करीब 15 करोड़ रुपये का है। फर्म को अमेरिकी सरकार, कांग्रेस, थिंक टैंक और अन्य संस्थानों के साथ भारत से जुड़े मुद्दों पर रणनीतिक सलाह और सरकारी संपर्क बढ़ाने का काम सौंपा गया है।
ट्रंप के भरोसेमंद सहयोगी

जेसन मिलर ट्रंप के पुराने राजनीतिक सहयोगी हैं और 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में उनके मुख्य मीडिया प्रवक्ता के तौर पर सुर्खियों में आए थे। उन्हें वाइट हाउस का कम्युनिकेशंस डायरेक्टर बनना था, लेकिन निजी विवादों के चलते पद संभालने से पहले ही रेस से हटना पड़ा। उन पर ट्रंप कैंपेन की एक अन्य अधिकारी से संबंध और यौन उत्पीड़न के आरोप भी लगे। विवादों के बावजूद वे ट्रंप के करीबी बने रहे और 2020 व 2024 के चुनावों में भी अहम सलाहकार की भूमिका निभाई।

मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा सामने नहीं आया है, लेकिन यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में फिर से खींचतान बढ़ी है। दोनों देशों के बीच टैरिफ व आर्थिक रणनीतियों पर चर्चा हो रही है।

 

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Mon, 08 Sep 2025 13:37:11 +0530 City Today Bhopal
अफगानिस्तान के तखर प्रांत में 78 किग्रा अफीम के साथ एक तस्कर गिरफ्तार https://citytoday.co.in/3568 https://citytoday.co.in/3568 काबुल 04 सितंबर (वार्ता)

उत्तरी अफगानिस्तान के तखर प्रांत में पुलिस ने एक तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 78 किलोग्राम अफीम बरामद किया है।
प्रांतीय पुलिस प्रवक्ता निज़ामुद्दीन ओमीर ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने कथित नशीले पदार्थों के तस्कर की कार की डिक्की से 78 किलोग्राम अफीम बरामद किया और वह मादक पदार्थ को तखर से किसी अज्ञात स्थान पर ले जा रहा था लेकिन पुलिस ने नियमित तलाशी के दौरान मादक पदार्थ बरामद कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
गौरतलब है कि पिछले तीन दिनों में अफ़ग़ानिस्तान के उत्तरी क्षेत्र में प्रतिबंधित मादक पदार्थों की यह दूसरी बरामदगी है। इससे पहले पुलिस ने मंगलवार को उत्तरी बगलान प्रांत में 18 किलोग्राम अफीम बरामद कर पुलिस ने दो तस्करों को हिरासत में लिया था।

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Thu, 04 Sep 2025 14:28:44 +0530 Newsdesk
नाइजीरिया में नाव दुर्घटना में 60 लोगों की मौत https://citytoday.co.in/3567 https://citytoday.co.in/3567 अबुजा, 04 सितंबर (वार्ता)

 नाइजीरिया के उत्तर-मध्य नाइजर राज्य में एक नाव के पलट जाने से कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोगों को बचा लिया गया। स्थानीय अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

बोर्गु स्थानीय सरकारी क्षेत्र के अध्यक्ष अब्दुल्लाही बाबा आरा ने कहा, “नाव दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है और हताहतों की संख्या बढ़ रही है।” उन्होंने आगे बताया कि 10 लोगों की हालत गंभीर है और कई अन्य अभी भी लापता हैं।

नाइजर राज्य आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, आपातकालीन कर्मी और स्थानीय गोताखोर पीड़ितों की तलाश कर रहे हैं।

यह दुर्घटना मंगलवार को स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 11 बजे हुई, जब बोर्गु स्थानीय सरकारी क्षेत्र में गौसावा समुदाय के पास एक अतिभारित नाव एक पेड़ के ठूंठ से टकराकर पलट गई।

शगुमी के जिला प्रमुख सादु इनुवा मुहम्मद ने बताया कि नाव में 100 से ज़्यादा लोग सवार थे, जिनमें ज़्यादातर महिलाएं और बच्चे थे।

नाइजीरिया में अक्सर नाव दुर्घटनाएँ, जो अक्सर क्षमता से अधिक सामान लादने, खराब मौसम और संचालन संबंधी त्रुटियों के कारण होती हैं, आम हैं।

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Thu, 04 Sep 2025 14:22:46 +0530 Newsdesk
रूस का बड़ा हमला: यूक्रेन पर 629 मिसाइलें और ड्रोन दागे, 14 की मौत https://citytoday.co.in/3531 https://citytoday.co.in/3531 कीव 

रूस और यूक्रेन के बीच करीब चार साल से जंग जारी है और कोई भी देश बीच हटने को तैयार नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस-यूक्रेन जंग को खत्म कराने की तमाम कोशिश की हैं. हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिले थे और उसके बाद उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी. हालांकि दोनों ही बैठकें बेनतीजा रहीं और जंग खत्म करने की दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं हो सका.

रूसी हमले में 14 लोगों की मौत

अब रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधिमंडल भवन पर हमला किया है. यूक्रेन का कहना है कि रूस ने कीव पर बड़े पैमाने पर हमले में किए हैं, जिनमें कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है और 48 घायल हुए हैं. यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि रूसी हमले में यूक्रेन में यूरोपीय संघ के मिशन की एक इमारत को भी नुकसान पहुंचा है.

राष्ट्रपति ज़लेंस्की ने कहा कि कीव पर रूसी हमले में 14 लोग मारे गए, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल थे. उन्होंने बताया कि यूरोपीय यूनियम की बिल्डिंग सहित कई सुविधाएं क्षतिग्रस्त हो गईं.

उन्होंने कहा, 'इस रूसी हमले के लिए न सिर्फ यूरोपीय संघ की तरफ से, बल्कि विश्वव्यापी निंदा की जरूरत है.' यूक्रेन में यूरोपीय संघ के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने भी इस हमले की पुष्टि की है. उन्होंने हमले में क्षतिग्रस्त हुई इमारत फोटो शेयर करते हुए एक्स पर लिखा, 'यूक्रेन पर घातक रूसी मिसाइल हमलों की एक और रात से भयभीत हूं.'

'जंग खत्म नहीं करना चाहता रूस' 

उन्होंने कहा कि रूस जंग खत्म करने का विकल्प नहीं चुन रहा है, बल्कि नए हमले कर रहा है. कीव में रातोरात दर्जनों इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं, रिहायशी इलाके, ऑफिस सेंटर्स को नुकसान पहुंचा है. इनमें वह इमारत भी शामिल है जहां यूक्रेन में यूरोपीय संघ का प्रतिनिधिमंडल स्थित है. अब यह ज़रूरी है कि दुनिया मज़बूती से जवाब दे. रूस को यह युद्ध रोकना होगा जो उसने शुरू किया था और जारी है. 

जेलेंस्की ने कहा कि सीजफायर को नकारने और बातचीत से बचने की रूस की लगातार कोशिशों के लिए, नए और कड़े प्रतिबंधों की ज़रूरत है. सिर्फ़ यही कारगर हो सकता है. रूस सिर्फ़ ताकत और दबाव समझता है. हर हमले के लिए, मास्को को नतीजे भुगतने होंगे.

'यूक्रेन पर दागीं 629 मिसाइलें और ड्रोन'

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया है कि, 'यूक्रेन पर एक ही रात में 629 मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए गए, यही रूस की शांति की अवधारणा है. आतंक और बर्बरता.' उन्होंने आगे कहा कि बच्चों समेत एक दर्जन से ज़्यादा लोग मारे गए. रिहायशी इलाकों और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को जानबूझकर निशाना बनाया गया. यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधिमंडल और ब्रिटिश काउंसिल के कार्यालयों को नुकसान पहुंचाया गया. फ्रांस इन मूर्खतापूर्ण और क्रूर हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करता है. यूक्रेनी जनता के प्रति पूरा समर्थन और सभी शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताता है.

हमले को लेकर रूसी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसने अपने सभी टारगेट अचीव किए हैं. उसने हाइपरसोनिक 'किंजल' मिसाइलों, ड्रोन और सटीक हवाई मिसाइलों का इस्तेमाल किया. मंत्रालय ने कहा कि रूसी सेना ने यूक्रेन के निगरानी जहाज पर हमला किया. साथ ही यूक्रेन के सैन्य ठिकानों और हवाई अड्डों को भी निशाना बनाया गया है. रूसी सेना ने पूर्वी यूक्रेन के नेलिपिवका पर कब्ज़ा करने का भी दावा किया है.

'यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़े हैं'

एंटोनियो कोस्टा ने कहा, 'मेरी संवेदनाएं यूक्रेनी पीड़ितों और वहां के कर्मचारियों के साथ हैं, जिनकी इमारत इस जानबूझकर किए गए रूसी हमले में क्षतिग्रस्त हुई है. यूरोपीय संघ इससे नहीं डरेगा. रूस की आक्रामकता यूक्रेन और उसके लोगों के साथ खड़े होने के हमारे संकल्प को और मज़बूत करती है.' रूस के खिलाफ जंग में यूरोपीय नेता यूक्रेन का खुलकर समर्थन कर रहे हैं. हाल ही ट्रंप के साथ मुलाकात के दौरान तमाम यूरोपीय नेता भी जेलेंस्की के साथ वॉशिंगटन पहुंचे थे.

पिछले दिनों रूस ने यूक्रेन के पश्चिमी इलाके में 500 से ज्यादा मिसाइलें और ड्रोन दागे थे और यह पहला मौका था जब संघर्ष के दौरान यूक्रेन के पश्चिमी छोर को निशाना बनाया था. इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि 15 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. रूस ने पश्चिमी देशों से यूक्रेन को मिलने वाली मदद को निशाना बनाते हुए पश्चिमी इलाके को चुना था, हमले में एक अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी को निशाना बनाया गया था.

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Fri, 29 Aug 2025 19:21:26 +0530 Newsdesk
लाहौर में पानी घुसा तो पाकिस्तान ने भारत पर फोड़ा ठीकरा, सिंधु जल समझौते का रोना रोया https://citytoday.co.in/3530 https://citytoday.co.in/3530 लाहौर 


रावी, सतलुज और ब्यास नदियों के जलस्तर में अप्रत्याशित इजाफा होने से पंजाब में बाढ़ आ गई है। राज्य के ज्यादातर जिलों के निचले इलाके डूबे हुए हैं। सैकड़ों गांवों में जलस्तर इतना बढ़ गया है कि दूर तक पानी-पानी ही दिख रहा है। हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा है। यही नहीं रावी नदी के बढ़े जलस्तर से सीमा पार यानी पाकिस्तान में भी बाढ़ आ गई है। पाकिस्तानी पंजाब के बड़े शहर लाहौर में भी पानी घुस गया है। इससे बौखलाये पाकिस्तान ने बाढ़ के लिए भी भारत को ही जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि रावी नदी पर भारत में बने माधोपुर हेडवर्क्स में तकनीकी समस्या के चलते यह स्थिति पैदा हुई है।

पाकिस्तान का कहना है कि इसी के कारण तेजी से पानी का बहाव इस तरफ आया है। यही नहीं पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने इसकी सूचना नहीं दी और हमें तैयारी का भी मौका नहीं मिली। मीडिया रिपोर्ट में पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि यह सबसे चिंता की बात है कि भारत ने एक बार जानकारी तक नहीं दी कि ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। पाकिस्तान का कहना है कि सिंधु जल समझौते को रोकने के चलते ऐसे हालात बने हैं वरना ऐसा नहीं होता। पाकिस्तान का कहना है कि रविवार के बाद से अब तीन बार ही भारत से सूचना मिली थी।

पहली सूचना यह मिली कि तवी नदी में जलस्तर बढ़ने वाला है। फिर दो बार सतलुज नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के बारे में बताया गया। लेकिन रावी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। द न्यूज लिखता है कि ऐसे हालात बने हैं कि पाकिस्तान का सिंधु जल आयोग भारत से इस बारे में बात भी नहीं कर पा रहा है ताकि समस्या का समाधान किया जा सके। पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि माधोपुर हेडवर्क्स के कम से कम 4 गेट खराब हो गए हैं। इसके कारण बड़ी संख्या में खेती की जमीन डूब गई है। गांवों में भी पानी घुस आया है और लोग पलायन को मजबूर हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि कुल 54 फ्लडगेट्स हैं, जिनमें से किसी को भी बीते कई सालों से अपग्रेड नहीं किया गया है।

माधोपुर हेडवर्क रावी नदी पर गुरदासपुर जिले में स्थित है। इसी के माध्यम से ऊपरी बारी दोआब नहर में सिंचाई के लिए पानी डाला जाता है। यह नहर पंजाब के गुरदासपुर, अमृतसर, तरन तानर और अन्य इलाकों में सिंचाई की व्यवस्था करती है। पाकिस्तान का कहना है कि लाहौर के पास स्थित शाहदरा में अचानक ही रावी नदी में 2 लाख 20 हजार क्यूसेक पानी आ गया। इसके चलते हालात बिगड़ गए हैं।

क्या होता है हेडवर्क, जिसमें खराबी की बात कर रहा पाकिस्तान
नदी में डायवर्जन हेडवर्क्स का निर्माण किया जाता है ताकि नहर में आने वाले पानी को नियंत्रित किया जा सके। ये नहर में गाद के प्रवेश को नियंत्रित करते हैं। ये बैराज से थोड़े छोटे होते हैं। हेडवर्क्स एक इंजीनियरिंग का शब्द है, जिसका उपयोग जलमार्ग के शीर्ष या मोड़ बिंदु पर किसी भी संरचना के लिए किया जाता है। इसका उपयोग नदी के पानी को नहर में या बड़ी नहर के पानी को छोटी नहर में मोड़ने के लिए किया जाता है।

 

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Fri, 29 Aug 2025 19:19:06 +0530 Newsdesk
गाजा के बच्चों का दर्द: यूएन से मदद की गुहार, युद्ध के बीच क्यों खामोश हैं बच्चों की चीखें? https://citytoday.co.in/3515 https://citytoday.co.in/3515 गाजा पट्टी, 28 अगस्त। गाजा में जारी संघर्ष के कारण बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। चारों तरफ बमबारी और विनाश के कारण बच्चों की चीखें सुनाई नहीं दे रही हैं, क्योंकि वे डर और सदमे में हैं। इस भयानक स्थिति को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से बच्चों को बचाने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई गई है।

क्यों तड़प रहे हैं गाजा के बच्चे?

गाजा में हजारों बच्चे बिना भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता के जीने को मजबूर हैं। बमबारी से उनके घर तबाह हो गए हैं, जिससे वे बेघर हो गए हैं। युद्ध के कारण स्कूलों को बंद कर दिया गया है, और बच्चों का बचपन छीन गया है। उन्हें हर दिन हिंसा और मौत का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

किसने लगाई है यूएन से गुहार?

गाजा में सक्रिय कई मानवीय सहायता संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि वे युद्ध को रोकने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को भोजन, चिकित्सा और मानसिक सहायता की सख्त जरूरत है। उन्होंने यह भी मांग की कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय गलियारे बनाए जाएं, ताकि सहायता सामग्री बिना किसी बाधा के बच्चों तक पहुंच सके।

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Thu, 28 Aug 2025 16:47:32 +0530 Newsdesk
पाकिस्तान में सियासी जंग तेज, इमरान खान ने किया चौंकाने वाला दावा https://citytoday.co.in/3514 https://citytoday.co.in/3514 पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान ने बुधवार को सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर तीखा हमला बोला है।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संरक्षक इमरान खान ने बुधवार को सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर कड़ा प्रहार किया। इमरान ने मुनीर को “सत्ता का लालची” बताते हुए आरोप लगाते हुए कहा कि वह देश में “सबसे बदतर किस्म की तानाशाही” थोप रहे हैं।

लगभग दो वर्षों से कई मामलों में जेल की सजा काट रहे 72 वर्षीय इमरान खान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर असीम मुनीर पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा कि “जनरल असीम मुनीर सत्ता की भूख में इतने अंधे हो चुके हैं कि पाकिस्तान में लोकतंत्र को पूरी तरह रौंद दिया है और तानाशाही की हद पार कर दी है। न तो उनके भीतर नैतिक मूल्यों की समझ है और न ही इस्लामी सिद्धांतों की।”

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Thu, 28 Aug 2025 16:42:23 +0530 Newsdesk
सर्वे: रूस के कारण भारत समेत कई देशों पर प्रतिबंध चाहते हैं आधे से ज्यादा अमेरिकी https://citytoday.co.in/3513 https://citytoday.co.in/3513 नई दिल्ली

भारत के साथ जारी अमेरिका के टैरिफ वॉर के बीच एक अहम सर्वे सामने आया है। इस सर्वे में आधे से ज्यादा अमेरिकी चाहते हैं कि यूक्रेन में युद्ध रोकने के लिए रूस से व्यापार कर रहे देशों पर प्रतिबंध लगने चाहिए। खास बात है कि यह सर्वे ऐसे समय पर सामने आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूसी तेल की खरीद का हवाला देकर भारत को निशाना बना रहे हैं।

नए रॉयटर्स/Ipsos पोल में बताया गया है कि अधिकांश अमेरिकी चाहते हैं कि रूस से व्यापार करने वालों पर प्रतिबंध लगे, ताकि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध रोकने के लिए उसे मजबूर किया जा सके। सर्वे में शामिल 62 प्रतिशत लोग रूस के ट्रेडिंग पार्टनर के खिलाफ प्रतिबंधों के पक्ष में हैं। साल 2022 में रूस ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी।

भारत को बना रहे निशाना

भारत पहले ही साफ कर चुका है कि रूसी तेल खरीद के कारण उसे अमेरिकी और यूरोपीय संघ की तरफ से निशाना बनाया जा रहा है। खास बात है कि भारत ने यह भी बताया था कि अमेरिका और ईयू दोनों ही रूस के साथ व्यापार करते हैं। इधर, ट्रंप ने पहले 25 फीसदी टैरिफ के ऐलान के समय भी भारत पर रूसी तेल के चलते जुर्माना लगाया था।

इसके बाद दूसरी बार 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने से पहले भी वह भारत पर वॉर मशीन की मदद करने के आरोप लगा चुके हैं। साथ ही उन्होंने भारत और रूस की अर्थव्यवस्था को मरी हुई बता दिया था। खास बात है कि चीन भी रूसी सामान का खरीदार है, लेकिन ट्रंप ने वहां 30 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जो भारत से 20 फीसदी कम है।

ट्रंप के दावे

खास बात है कि ट्रंप लगातार यूक्रेन और रूस में शांति समझौता कराने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई खास सफलता नहीं मिली है। उनके विशेष दूत कीथ केलॉग ने सोमवार को कहा कि अधिकारी रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से जारी युद्ध को समाप्त कराने के लिए 'बहुत कड़ी मेहनत' कर रहे हैं।

हाल ही में ट्रंप नेकहा था कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच सीधी शांति वार्ता की व्यवस्था शुरू कर दी है। लेकिन रूसी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ऐसी कोई शिखर वार्ता जल्द नहीं होगी। ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि यदि सीधी वार्ता निर्धारित नहीं होती है तो वे अगले कदम पर दो सप्ताह में निर्णय लेंगे।

भारत का युद्ध पर क्या है रुख

फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बातचीत की। पीएमओे के बयान के अनुसार स्टब ने यूक्रेन में संघर्ष के समाधान पर वाशिंगटन में यूरोप, अमेरिका और यूक्रेन के नेताओं के बीच हुई हालिया बैठकों पर अपना आकलन मोदी के साथ साझा किया। बयान में कहा गया है कि पीएम मोदी ने संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान और शांति एवं स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया।

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Thu, 28 Aug 2025 16:38:36 +0530 Newsdesk
ट्रंप प्रशासन का एक और बड़ा कदम: वीजा नियमों को सख्त बनाने की तैयारी, प्रवासी भारतीय हो सकते हैं प्रभावित https://citytoday.co.in/3512 https://citytoday.co.in/3512 वाशिंगटन, 28 अगस्त

अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लगाने के बाद ट्रंप प्रशासन अब वीजा नियमों को और सख्त बनाने की तैयारी में है। ट्रंप प्रशासन ने वीजा नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है, जिसका सीधा असर प्रवासी भारतीयों और भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है।

नए नियमों का प्रस्ताव

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, एच-1बी वीजा और अन्य वर्क वीजा के लिए आवेदन प्रक्रिया को और अधिक जटिल बनाया जाएगा। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन उन विदेशी नागरिकों के लिए भी नियमों को कड़ा कर रहा है जो अमेरिका में रहना और काम करना चाहते हैं। इन बदलावों का उद्देश्य ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को बढ़ावा देना और अमेरिकी श्रमिकों के लिए अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना है।

प्रवासी भारतीयों पर असर

ट्रंप प्रशासन के इस कदम से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं, जो काम के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं। कई भारतीय कंपनियां एच-1बी वीजा का उपयोग करके अपने कर्मचारियों को अमेरिका भेजती हैं। नए नियमों से उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

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Thu, 28 Aug 2025 16:35:23 +0530 Newsdesk
अमेरिका से पैदा हुए आर्थिक खतरे ने भारत&चीन की नजदीक बढायी: जॉनसन https://citytoday.co.in/3511 https://citytoday.co.in/3511 वाशिंगटन 28 अगस्त (वार्ता) 

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए से सेवानिवृत और विदेश विभाग के अधिकारी लॉरी जॉनसन ने कहा है कि अमेरिकी धमकियों के आगे न झुकने और रूस से तेल ख़रीदना बंद करने के बजाय भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और व्हाइट हाउस की धमकियों का डटकर सामना करने का फ़ैसला किया है।
श्री जॉनसन ने स्पूतनिक को बताया कि अब जब अमेरिका को “धमकाने वाला” और “अनुचित मांग करने वाला” माना जा रहा है, दूसरी ओर भारत “अपने पुराने दुश्मन चीन” के साथ संबंधों को और मज़बूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
हाल ही तक कई भारतीय उद्यमी और उद्योगपति अमेरिका के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखने और “मूल रूप से अमेरिका को समायोजित करने की कोशिश” करने के बारे में काफ़ी मुखर थे लेकिन व्हाइट हाउस ने भारत पर थोपी की अत्यधिक आयात शुल्क ने इस स्थिति को बदल दिया है।
श्री जाॅनसन ने कहा, “ वे नाराज़ हैं। वे चिढ़े हुए हैं और अब वे अमेरिका से निपटने के विकल्प तलाश रहे हैं,”

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Thu, 28 Aug 2025 16:32:29 +0530 Newsdesk
उत्तर&पश्चिमी पाकिस्तान में आतंकवाद&रोधी अभियान में पांच आतंकवादी मारे गए https://citytoday.co.in/3482 https://citytoday.co.in/3482 इस्लामाबाद, 26 अगस्त (वार्ता) 

पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पुलिस और आतंकवाद-रोधी विभाग (सीटीडी) के संयुक्त अभियान में पाँच आतंकवादी और एक राहगीर मारे गए और आठ पुलिसकर्मी घायल हो गए। सीटीडी ने एक बयान में यह जानकारी दी।

बयान में कहा गया है कि खुफिया जानकारी के आधार पर यह अभियान रविवार को प्रांत के अपर दीर जिले में शुरू किया गया और सोमवार तड़के तक भारी गोलीबारी जारी रही।

बयान में आगे कहा गया है कि घायल पुलिसकर्मियों को पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर है।

पुलिस ने कहा कि मारे गए आतंकवादी पुलिस पर पहले हुए एक हमले से जुड़े थे, जिसमें तीन पुलिसकर्मी मारे गए थे और छह अन्य घायल हुए थे।

अधिकारियों ने चार आतंकवादियों के शव बरामद किए हैं, जबकि इलाके में अभी भी आतंकवादियों को खदेड़ने का अभियान जारी है।

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Tue, 26 Aug 2025 17:44:11 +0530 Newsdesk
ट्रंप ने कोरियाई राष्ट्रपति के सामने कहा, ‘चीन को बर्बाद कर सकता हूं, मेरे पास तुरुप के कई पत्ते हैं’ https://citytoday.co.in/3481 https://citytoday.co.in/3481 वाशिंगटन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बगल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग बैठे थे. दक्षिण कोरिया और चीन तगड़े प्रतिद्वंद्वी हैं. इस दरम्यान डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं अगर वे चाहें तो चीन को बर्बाद कर सकते हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे. ट्रंप ने कहा कि उनके पास ऐसे-ऐसे कार्ड्स जो चीन को तबाह कर सकता है. 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान कहा कि अमेरिका चीन के साथ "बेहतरीन संबंध" बनाए रखेगा, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि वह ऐसे कदम नहीं उठाएंगे जो इस देश को तबाह कर दें. ट्रंप ने कहा, "चीन के साथ हमारे अच्छे संबंध होंगे… उनके पास कुछ कार्ड हैं. हमारे पास तुरुप के कई पत्ते हैं, लेकिन मैं उन कार्डों का इस्तेमाल नहीं करना चाहता. अगर मैं उन कार्ड्स का इस्तेमाल करता हूं, तो इससे चीन बर्बाद हो जाएगा. मैं उन कार्ड्स का इस्तेमाल नहीं करने वाला."

कभी पुचकराना, कभी दुत्कारना

ट्रंप की कूटनीति कभी पुचकराने तो कभी दुत्कारने की रही है. समय-समय पर वे इसका इस्तेमाल करते रहते हैं. ट्रंप ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि चीन को अपना मैग्नेट अमेरिका को देना ही पड़ेगा. अगर चीन ऐसा नहीं करता है कि उसे 200 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा. 

यहां मैग्नेट का अर्थ 'रेयर अर्थ मैग्नेट' या 'रेयर अर्थ एलिमेंट'से है. 

ये मैग्नेट उच्च-तकनीकी और औद्योगिक प्रयोगों में महत्वपूर्ण घटक हैं, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहन मोटर, पवन टर्बाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मिसाइल मार्गदर्शन प्रणाली जैसी रक्षा प्रणालियां शामिल हैं. चीन दुर्लभ 'रेयर अर्थ एलिमेंट' वैश्विक आपूर्ति में अग्रणी है, और दुनिया के लगभग 90% दुर्लभ रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन करता है.

गौरतलब है कि जब से अमेरिका चीन पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे रहा है तब चीन ने भी रेयर अर्थ एलिमेंट के निर्यात को कंट्रोल कर दिया है. चीन ने इसे एक्सपोर्ट कंट्रोल की सूची में डाल दिया है इससे अमेरिका को इसका निर्यात बंद हो गया है और अमेरिका उद्योग प्रभावित हुए है. 

उनके पास रेयर अर्थ है, हमारे पास टैरिफ

राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन पर इस महत्वपूर्ण मैटेरियल की सप्लाई के लिए दबाव डालते हए कहा, "लेकिन हमारे पास टैरिफ जैसी बहुत शक्तिशाली चीज है. अगर हम 100% या 200% टैरिफ लगाना चाहें, तो हम चीन के साथ कोई व्यापार नहीं करेंगे. और अगर ऐसा करना पड़ा तो भी ठीक होगा. लेकिन जहां तक मैग्नेट की बात है हमारे पास उनके लिए बहुत शक्ति है, और उनके पास भी हमारे खिलाफ कुछ शक्ति है."

राष्ट्रपति ट्रंप ने मैग्नेट को लेकर आगे का प्लान बताते हुए कहा कि हमारे पास बहुत सारे मैग्नेट होंगे. वास्तव में इतने ज्यादा होंगे कि हमें समझ नहीं आएगा कि उनके साथ क्या करना है. मैग्नेट की कहानी बहुत दिलचस्प है. यह इसलिए हुआ क्योंकि हमारे राष्ट्रपति बिजनेसमैन नहीं थे, इसलिए उन्होंने ऐसा होने दिया, जो नहीं होना चाहिए था. 

उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास बहुत बेहतर और बड़े विकल्प हैं. फिर भी मेरा मानना है कि हमारा चीन के साथ अच्छा रिश्ता है. मैंने हाल ही में राष्ट्रपति शी से बात की थी, और इस साल या उसके बाद, हम शायद चीन जाएंगे और वहां कुछ शानदार देखेंगे. यह एक महान देश है."

बता दें कि अभी अमेरिका चीन से आने वाले अधिकांश वस्त्रों पर औसतन 145% टैरिफ वसूल रहा है, जबकि चीन अमेरिका से आयात होने वाली अधिकांश वस्तुओं पर 125% टैरिफ लगा रहा है. 

अमेरिका ने अपने सुरक्षा, ड्रग तस्करी (फेंटेनल) और तकनीकी हितों के चलते टैरिफ बढ़ाए हैं, जिससे व्यापक तौर पर चीनी सामान पर 145% तक का टैरिफ लागू है.

चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सामानों पर टैरिफ 125% तक बढ़ा दिए हैं, खासकर एग्रीकल्चर, ऑटो पार्ट्स और हाई-टेक प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगाए हैं. 

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Tue, 26 Aug 2025 17:36:55 +0530 Newsdesk
ईरान, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस के उप विदेश मंत्री परमाणु वार्ता पर करेंगे बैठक https://citytoday.co.in/3480 https://citytoday.co.in/3480 जेनेवा, 26 अगस्त (वार्ता) 

ईरान, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के उप विदेश मंत्री मंगलवार को जेनेवा में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए बैठक करेंगे। ईरान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रवांची करेंगे।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अगस्त में कहा था कि फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट, जर्मन विदेश मंत्री जोहान वेडफुल, ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी और यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास के साथ टेलीफोन पर बातचीत के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 26 अगस्त को उप विदेश मंत्रियों के स्तर पर एक बैठक आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की थी।

उल्लेखनीय है कि 2015 में ब्रिटेन, जर्मनी, चीन, रूस, अमेरिका, फ्रांस और ईरान ने संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) पर हस्ताक्षर किया था जिसके अंतर्गत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करने के बदले में उस पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने का प्रावधान था। हालांकि अमेरिका ने 2018 में जेसीपीओए से अपना नाम वापस ले लिया और ईरान पर पुनः प्रतिबंध लगा दिया, जिसने परमाणु अनुसंधान एवं यूरेनियम संवर्धन पर अपनी प्रतिबद्धताओं में क्रमिक कमी लानी की घोषणा की थी।

ईरान और इजरायल के बीच 13 जून से शुरू हुए तनाव के बाद ईरान और अमेरिका के बीच प्रतिबंध हटाने पर बातचीत रोक दी गई थी। अमेरिका ने 22 जून को ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला किया जिसके बाद ईरान ने कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला शुरू कर दिया।

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Tue, 26 Aug 2025 17:32:59 +0530 Newsdesk
भीषण हादसा: टूरिस्ट बस पलटी, एक भारतीय समेत 5 की मौत, कई घायल https://citytoday.co.in/3459 https://citytoday.co.in/3459 न्यूयॉर्क

नियाग्रा फॉल्स से न्यूयॉर्क सिटी लौट रही एक टूरिस्ट बस के पलटने से उसमें सवार एक भारतीय समेत पांच लोगों की मौत हो गई है जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। बस में भारतीय और चीनी नागरिकों सहित कुल 54 यात्री सवार थे। पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह हादसा ड्राइवर का ध्यान भटकने की वजह से हुआ है।

मृतकों की पहचान
रिपोर्ट के अनुसार मृतकों में बिहार के शंकर कुमार झा (65), न्यू जर्सी की पिंकी चांगरानी (60), चीन के झी होंगझुओ (22) और न्यू जर्सी के झांग शियाओलान (55) और जियान मिंगली (56) शामिल हैं।

हादसा कैसे हुआ?
न्यूयॉर्क के पेमब्रोक इलाके में अंतरराज्यीय राजमार्ग-90 पर शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे यह दर्दनाक हादसा हुआ। प्रांतीय पुलिस प्रमुख आंद्रे रे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि ड्राइवर का ध्यान भटक गया जिससे उसने बस पर से नियंत्रण खो दिया और बस पलट गई।

रे ने बताया कि हादसा इतना भीषण था कि कई यात्री बस से बाहर गिर गए और मौके पर ही पांच वयस्क यात्रियों की मौत हो गई। कई यात्री बस के अंदर फंस गए थे जिन्हें बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाला। घायलों को इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया। पुलिस का कहना है कि किसी भी अन्य यात्री को जानलेवा चोटें नहीं आई हैं और हादसे के कारणों की आगे जांच जारी है।

 

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Mon, 25 Aug 2025 18:20:46 +0530 Newsdesk
हूतियों ने पहली बार इज़रायल पर क्लस्टर मिसाइल से हमला किया https://citytoday.co.in/3458 https://citytoday.co.in/3458 तेल अवीव, 25 अगस्त (वार्ता) 

यमन के हूतियों ने इस सप्ताह पहली बार इज़रायल पर क्लस्टर वारहेड वाली बैलिस्टिक मिसाइल दागी।

इजरायली संवाददाता समिति कान ने बताया कि शुक्रवार रात इज़राइल पर दागी गई मिसाइल हवा में ही टूट गई। कान की रिपोर्ट के अनुसार, इज़रायली वायु रक्षा प्रणालियाँ इस प्रकार की मिसाइलों को रोकने में सक्षम हैं। हूती मिसाइल को रोकने के मामले की जाँच की जा रही है।

विदित हो कि उत्तरी यमन और यमन के लाल सागर तट के अधिकांश हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले हूतियों ने 2023 के अंत में फ़िलिस्तीन के समर्थन की घोषणा की थी। अक्टूबर 2023 में गाजा पट्टी में संघर्ष शुरू होने के बाद से, उन्होंने इज़राइल पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इज़रायली सेना ने यमन के हूतियों के कब्ज़े वाले हिस्सों में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं।

 

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Mon, 25 Aug 2025 18:12:14 +0530 Newsdesk
गर्भनिरोधक गोली से खुला राज, शख्स का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर हुआ सामने https://citytoday.co.in/3443 https://citytoday.co.in/3443  गुआंग्डोंग 
चीन में एक शख्स ने गर्भनिरोधक गोली खरीदने के लिए ऑनलाइन पेमेंट की कोशिश की थी. इस दौरान कुछ ऐसा हुआ  कि अनजाने में ही शख्स की पत्नी के हाथ कुछ सबूत लग गया. पत्नी जब मामले की तह तक गई तो उसे पति के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का पता चला. 

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार,  दक्षिणी चीन में एक चीनी व्यक्ति ने गुप्त रूप से गर्भनिरोधक गोलियां खरीदने का प्रयास किया. जब उसका ई-पेमेंट फेल हो गया, तो फार्मेसी कंपनी के कर्मियों ने भुगतान के लिए अनजाने में ही शख्स की पत्नी से संपर्क किया. इस तरह उस शख्स का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर सब के सामने आ गया.  

ऑनलाइन पेमेंट हो गया था फेल
व्यक्ति का नाम उजागर नहीं किया गया है. उसने एक वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बताया कि वह गुआंग्डोंग प्रांत के यांगजियांग में डैशेनलिन फार्मेसी की पिंगगांग शाखा में गया था. अपने मोबाइल भुगतान कोड का उपयोग करके गर्भनिरोधक गोलियों के लिए पेमेंट का प्रयास किया.

सिस्टम में समस्या के कारण, 15.8 युआन (2.2 अमेरिकी डॉलर) का भुगतान नहीं हो सका. इसके बाद स्टाफ ने शुल्क वसूलने के लिए उस व्यक्ति के मेंबरशिप वाले कार्ड से जुड़े फोन नंबर पर कॉल किया, लेकिन कॉल गलती से उसकी पत्नी को लग गया. 

फॉर्मेसी ने पेमेंट के लिए घर में लगा दिया फोन
जब उसकी पत्नी ने खरीदारी के बारे में पूछताछ की, तो स्टाफ ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की कि यह गर्भनिरोधक गोलियों के लिए है. इसके बाद उस व्यक्ति का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर राज नहीं रहा. उसने अपनी प्रेमिका और अपनी पत्नी, दोनों से अपनी शादी और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की बात छुपाई थी. 

अब दो परिवार टूटने के कागार पर
व्यक्ति ने दावा किया कि इस घटना के कारण दो परिवार टूट गए तथा उसने फार्मेसी से जवाबदेही की मांग की. उसने गुस्से से अपनी पोस्ट में लिखा कि अब मेरी पत्नी को सब पता चल गया है और दो परिवार टूटने की कगार पर हैं. मैं जानना चाहता हूं कि क्या आपकी फार्मेसी की कोई जिम्मेदारी है? 

उन्होंने साक्ष्य के तौर पर खरीदी गई दवा की रसीद और स्टोर क्लर्क तथा उनकी पत्नी के बीच हुई बातचीत का स्क्रीनशॉट भी शामिल किया. इसके अतिरिक्त, उन्होंने यांगजियांग सार्वजनिक सुरक्षा ब्यूरो की गाओक्सिन शाखा के अंतर्गत पिंगगांग पुलिस स्टेशन द्वारा 12 अगस्त को जारी की गई एक पुलिस रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई.

फॉर्मेसी पर कानूनी कार्रवाई करना होगा मुश्किल
हेनान ज़ेजिन लॉ फर्म के निदेशक फू जियान ने एलिफेंट न्यूज को बताया कि हालांकि व्यक्ति अपने अधिकारों की रक्षा करने की कोशिश कर सकता है, लेकिन ऐसा करना बहुत चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है.

फू ने कहा कि एक ओर, पुरुष की बेवफाई परिवार के टूटने का मुख्य कारण है और उसे अपने कार्यों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए. दूसरी ओर, अगर फार्मेसी ने उसकी निजता का उल्लंघन किया है, तो उसे भी कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.

मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर, फार्मेसी कर्मचारियों द्वारा किया गया फोन कॉल वैध प्रतीत होता है और जानकारी लीक करने के इरादे से नहीं किया गया था. इससे उस बेवफा व्यक्ति के लिए अपने अधिकारों के उल्लंघन का दावा करना बेहद मुश्किल हो जाएगा. 

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Sun, 24 Aug 2025 14:06:43 +0530 City Today Bhopal
पाकिस्तान की आर्थिक रिपोर्ट में खुलासा: फैक्ट्रियों से ज्यादा हैं मस्जिद और मदरसे https://citytoday.co.in/3444 https://citytoday.co.in/3444 इस्लामाबाद 

पाकिस्तान की इकॉनॉमिक सेंसस रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक देश में मस्जिदों और मदरसों की संख्या फैक्ट्रियों से कहीं ज्यादा है. पाकिस्तान में 6 लाख से ज्यादा मस्जिदें और 36 हजार से अधिक मदरसे मौजूद हैं, जबकि फैक्ट्रियों की संख्या केवल 23 हजार है. यह रिपोर्ट उस समय सामने आई है जब नकदी संकट से जूझ रहा पाकिस्तान इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) से 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट पैकेज की दूसरी समीक्षा पर बातचीत कर रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में कुल 40 मिलियन स्थायी इकाइयों में से 7.2 मिलियन रोजगार संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जहां 2023 तक 25.4 मिलियन लोग काम कर रहे थे. इनमें से सबसे बड़ा हिस्सा सर्विस सेक्टर का है, जिसमें 45% यानी 11.3 मिलियन लोग काम करते हैं. इसके बाद 30% यानी 7.6 मिलियन लोग सोशल सेक्टर में और सिर्फ 22% लोग प्रोडक्शन सेक्टर में कार्यरत हैं.

एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि यह आंकड़े इस मिथक को तोड़ते हैं कि इंडस्ट्री ही देश का मुख्य जॉब-क्रिएटिंग सेक्टर है, जबकि असल में सर्विस सेक्टर दुगुना रोजगार देता है.

6.04 लाख मस्जिदें और 36,331 मदरसे

रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान में कुल 7.2 मिलियन दर्ज प्रतिष्ठानों में 2.7 मिलियन रिटेल शॉप्स, 1.88 लाख होलसेल शॉप्स, 2.56 लाख होटल और 1.19 लाख हॉस्पिटल शामिल हैं. एजुकेशन सेक्टर में 2.42 लाख स्कूल, 11,568 कॉलेज, 214 यूनिवर्सिटी, 6.04 लाख मस्जिदें और 36,331 मदरसे दर्ज किए गए. इनमें से ज्यादातर स्कूल सरकारी हैं, जबकि कॉलेजों में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी थोड़ी ज्यादा है.

राज्यवार आंकड़े

पंजाब में सबसे ज्यादा 58% प्रतिष्ठान हैं. इसके बाद सिंध (20%), खैबर पख्तूनख्वा (15%) और बलूचिस्तान (6%) का स्थान है. इस्लामाबाद कैपिटल रीजन की हिस्सेदारी सबसे कम यानी 1% है. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के ज्यादातर बिज़नेस छोटे स्तर के हैं. लगभग 7.1 मिलियन इकॉनॉमिक स्ट्रक्चर्स 1 से 50 लोगों को रोजगार देते हैं. 51 से 250 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान केवल 35,351 हैं और 250 से ज्यादा लोगों को रोजगार देने वाले यूनिट्स सिर्फ 7,086 हैं.

रिपोर्ट पेश करते हुए योजना मंत्री अहसान इकबाल ने कहा कि "विश्वसनीय डेटा टिकाऊ विकास की रीढ़ है, क्योंकि यह एविडेंस-बेस्ड प्लानिंग और बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है."

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Sun, 24 Aug 2025 14:06:43 +0530 City Today Bhopal
अमेरिका के लिए डाक सेवाओं पर रोक के बीच भारत ने लिया बड़ा फैसला https://citytoday.co.in/3445 https://citytoday.co.in/3445 वाशिंगटन 
अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ लगने के बाद नियमों में बदलाव भी हो रहा है. अब भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. भारत 25 अगस्‍त से अमेरिका के लिए ज्‍यादातर डाक सर्विस को बंद कर देगा. यह कदम अमेरिकी सरकार की ओर से 30 जुलाई 2025 को जारी एक आदेश के बाद आया है, जिसमें 800 अमेरिकी डॉलर तक के आयातित सामानों पर टैरिफ छूट वापस ले ली गई है. 

अमेरिकी सरकार के नियम के तहत 29 अगस्त से, अमेरिका में प्रवेश करने वाले सभी सामान इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमी पॉवर एक्‍ट (IEEPA) टैरिफ इंफ्रा के तहत सीमा शुल्क को आकर्षित करेंगे. हालांकि 100 अमेरिकी डॉलर तक की वस्‍तुएं टैरिफ छूट के तहत रहेंगी. 
 
अमेरिकी आदेश के अनुसार, इंटरनेशनल डाक नेटवर्क के माध्‍यम से माल पहुंचाने वाले एयलाइंस या अमेरिकी सीमा शुल्‍क एवं सीमा सुरक्षा (CBP) की ओर से अप्रूव अन्‍य पार्टी को भी डाक शिपमेंट पर टैरिफ वसूलने और उसका पेमेंट करना आवश्‍यक है. इस संबंध में CBP ने 15 अगस्‍त को एक दिशानिर्देश भी जारी किया है, लेकिन अभी टैक्‍स कलेक्‍शन और उसे भेजने की व्‍यवस्‍था जैसी कई चीजें अभी तय नहीं हुई हैं. 

क्‍यों भारत ने रोकी डाक सर्विस
जिस कारण अमेरिका जाने वाली एयरलाइंस ने परिचालन और तकनीकी तैयारी की कमी का हवाला देते हुए 25 अगस्त, 2025 के बाद डाक खेप स्वीकार करने में असमर्थता व्यक्त की है. इन सभी वजहों को ध्‍यान में रखते हुए डा‍क विभाग ने 25 अगस्‍त से अमेरिका जाने वाली सभी प्रकार की डाक वस्‍तुओं की बुकिंग अस्‍थायी तौर से रोकने का फैसला किया है. लेकिन अभी 100 अमेरिकी डॉलर तक के डाक भेजे जा सकते हैं. 

स्‍पष्‍टीकरण के बाद ही फिर शुरू होगी सर्विस 
पीआईबी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, सीबीपी और यूएसपीएस से आगे स्पष्टीकरण मिलने के बाद, इन छूट प्राप्त श्रेणियों को अमेरिका में स्वीकार और भेजा जाता रहेगा. वहीं डाक विभाग सभी हितधारकों के साथ समन्वय में उभरती स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और जल्द से जल्द सेवाओं को सामान्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है. 

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Sun, 24 Aug 2025 14:06:43 +0530 City Today Bhopal
इजराइल की कड़ी चेतावनी: शर्तें न मानने पर गाजा होगा मलबे में तब्दील, 17 की मौत https://citytoday.co.in/3446 https://citytoday.co.in/3446 इजराइल 
इजराइल के रक्षा मंत्री ने गाजा सिटी में हमले का दायरा बढ़ाने की तैयारी के बीच शुक्रवार को चेतावनी दी कि अगर हमास उसकी शर्तों को स्वीकार नहीं करता है तो इस शहर को तबाह किया जा सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को गाजा सिटी पर कब्जा करने की अनुमति देने का एलान किया। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने चेतावनी दी कि गाजा पट्टी का सबसे बड़ा शहर ‘‘रफाह और बैत हानून'' इलाकों की तरह मलबे में तब्दील हो सकता है, जिन्हें युद्ध के शुरुआती चरण में तबाह कर दिया गया था। उन्होंने ‘एक्स' पर कहा, ‘‘गाजा में हमास के हत्यारे और बलात्कारी अगर युद्ध को समाप्त करने के लिए इजराइल की शर्तों को स्वीकार नहीं करते हैं, तो उनके लिए जल्द ही नरक के दरवाजे खुलने वाले हैं।''

काट्ज ने इजराइल की युद्ध-विराम शर्तों को दोहराया, जिसमें सभी बंधकों की रिहाई और हमास का पूरी तरह निरस्त्रीकरण शामिल है। वहीं, हमास का कहना है कि वह युद्ध खत्म करने के बदले बंधकों को रिहा कर सकता है, लेकिन फलस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के बिना निरस्त्रीकरण को स्वीकार नहीं करेगा। गाजा सिटी में व्यापक पैमाने पर सैन्य अभियान कुछ ही दिनों में शुरू हो सकता है। गाजा सिटी हमास की गतिविधियों का गढ़ है और इजराइल का मानना ​​है कि शहर में हमास का सुरंगों का विशाल नेटवर्क है। गाजा सिटी में लाखों नागरिक भी शरण लिए हुए हैं और वहां अब भी गाजा पट्टी के कुछ महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे एवं स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं।

हमास ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि वह अरब मध्यस्थों के युद्ध-विराम प्रस्ताव पर सहमत हो गया है, जिसे अगर इजराइल स्वीकार कर लेता है, तो हमलों को रोका जा सकता है। दोनों पक्ष सीधे तौर पर बातचीत नहीं कर रहे हैं और अतीत में भी ऐसी घोषणाएं की गई हैं, जिनसे युद्ध-विराम नहीं हो सका। कई इजराइलियों को डर है कि अगर हमला हुआ, तो हमास समर्थित आतंकवादियों के सात अक्तूबर 2023 के हमले के बाद अब भी जीवित बचे लगभग 20 बंधकों की जान खतरे में पड़ सकती है। सहायता समूहों और अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि इससे गाजा पट्टी का मानवीय संकट और भी बदतर हो जाएगा। वहीं, नेतन्याहू का कहना है कि सैन्य अभियान ही बंधकों को छुड़ाने और हमास को कुचलने का सबसे ठोस उपाय है।

 उन्होंने बृहस्पतिवार को दक्षिणी इजराइल में एक कमांड सेंटर के दौरे के दौरान कहा, ‘‘ये दोनों चीजें-हमास को हराना और हमारे सभी बंधकों को मुक्त कराना, साथ-साथ चलेंगी।'' गाजा शहर में स्थित शिफा अस्पताल ने बताया कि इजराइल द्वारा शुक्रवार को किए गए व्यापक हमले में कम से कम 17 फिलीस्तीनियों की मौत हो गयी। इजराइल ने शेख रादवान स्थित एक स्कूल पर हवाई हमला किया। शेख रादवान गाजा शहर का एक ऐसा इलाका है, जहां दर्जनों फलस्तीनी स्कूल के प्रांगण में अस्थायी तंबुओं में शरण लिए हुए हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी और अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, इस हमले में कम से कम सात लोग मारे गए। इजराइली सेना ने कहा कि उन्हें इस क्षेत्र में किसी हमले की जानकारी नहीं थी।  

 

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Sun, 24 Aug 2025 14:06:43 +0530 City Today Bhopal
ईरानी तेल पर अमेरिकी कार्रवाई: चीन के 2 टर्मिनल और ग्रीक शिपिंग नेटवर्क पर बैन https://citytoday.co.in/3447 https://citytoday.co.in/3447 वाशिंगटन

अमेरिका ईरान के अवैध क्रूड ऑयल (Iran Crude Oil) निर्यात पर शिकंजा कसने के लिए सख्त रुख अपना रहा है और इसके तहत US ने ईरानी तेल एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए चीन के दो ऑयल टर्मिनल पर कार्रवाई करते हुए उन्हें बैन कर दिया है. इसके अलावा एक ग्रीक शिपिंग नेटवर्थ ऑपरेटर एंटोनियोस मार्गारिटिस पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. अमेरिका के इस एक्शन का उद्देश्य तेहरान के हथियार कार्यक्रमों और आतंकवाद से होने वाले राजस्व में कटौती करना है.

विदेश विभाग ने बताई बैन की वजह
अमेरिका के विदेश विभाग (US Department of State) ने चीन स्थित दो कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट टर्मिनल्स संचालकों पर प्रतिबंधों का ऐलान किया है. उनपर यह कार्रवाई इन आरोपों के तहत की गई है, कि उन्होंने कई अमेरिकी-निर्धारित टैंकरों पर लाखों बैरल अवैध ईरानी तेल आयात करने में मदद की थी. यह ईरान के तेल व्यापार नेटवर्क में चीनी संचालकों को टारगेट करते हुए अमेरिका प्रतिबंधों का चौथा चरण है. विदेश विभाग के प्रवक्ता के मुताबिक, ये दोनों टर्मिनल ऑपरेटर Iranian Crude Oil के व्यापार नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, जो विदेशों में ईरान के आतंकवाद को वित्तपोषित करता है और क्षेत्र को अस्थिर करता है.

दोनों टर्मिनल के बारे में विस्तार से बात करें, तो मार्शल आइलैंड स्थित चांगबाई ग्लोरी शिपिंग लिमिटेड, लाइबेरियाई फ्लैग्ड वाले LAFIT (IMO 9379698) का रजिस्टर्ड ऑनर है, जिसने मार्च 2025 से अब तक चीन में ग्राहकों तक 4 मिलियन बैरल से ज्यादा ईरानी तेल पहुंचाया है. वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड स्थित रीगल लिबर्टी लिमिटेड, हांगकांग फ्लैग्ड GIANT (IMO 9238868) का मालिक है, जिसने 2025 की शुरुआत में OFAC द्वारा स्वीकृत SALVIA (IMO 9297319) के साथ लगभग 2 मिलियन बैरल ईरानी तेल चीन पहुंचाया.

ग्रीक नागरिक निभा रहा था अहम रोल
China के दो ऑयल टर्मिनल पर बैन लगाने के साथ ही विदेश विभाग की ओर से ग्रीक मूल के नागरिक एंटोनियोस मार्गारिटिस, उसकी कंपनियों के नेटवर्क और ईरान के सीक्रेट बेड़े से जुड़े करीब एक दर्जन जहाजों पर भी कार्रवाई की गई है. इस ग्रीक नागरिक ने कथित तौर पर शिपिंग के अपने लंबे एक्सपीरियंस का इस्तेमाल ईरानी पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की अवैध बिक्री और ट्रांसपोर्टेशन को सुगम बनाने के लिए किया है. इस संबंध में जानकारी देते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री (Finance Minister Of US) ने कहा कि Antonios Margaritis और उसके नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेहरान (Tehran) के हथियार कार्यक्रमों को वित्तीय मदद करने, आतंकवादी समूहों का समर्थन करने के चलते की गई है. 

ईरान पर आर्थिक दबाव के लिए एक्शन
Scott Bessent के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के नेतृत्व में वित्त मंत्रालय उन सभी लोगों को जवाबदेह ठहराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, जो ईरानी शासन की सहायता करना चाहते हैं और वैश्विक सुरक्षा (Global security) के लिए खतरा हैं. इन प्रतिबंध को कार्यकारी आदेश 13902 के तहत लगाया जा रहा है और ये राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति ज्ञापन 2 (NSPM-2) के तहत शुरू किए गए व्यापक अभियान का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य ईरानी शासन पर आर्थिक दबाव को अधिकतम करना है.

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Sun, 24 Aug 2025 14:06:43 +0530 City Today Bhopal
यांगून में भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये https://citytoday.co.in/3413 https://citytoday.co.in/3413 यांगून, 21 अगस्त (वार्ता)

 म्यांमार के यांगून शहर में गुरुवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.1 मापी गयी।

म्यांमार के मौसम विज्ञान एवं जल विज्ञान विभाग (डीएमएच) ने बताया कि स्थानीय समयानुसार लगभग आज पूर्वाह्न नौ बजकर 28 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए। भूकंप के झटके कुछ सेकेंड तक महसूस किय गये।

भूकंप का केंद्र यांगून क्षेत्र के कुंगयांगून शहर से लगभग 28 मील दक्षिण-पूर्व में 16.08 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 96.22 डिग्री पूर्वी देशांतर पर जमीनी स्तर से 28 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।

भूकंप से किसी के हताहत और संपत्ति के नुकसान की अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आयी है।

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Thu, 21 Aug 2025 18:27:16 +0530 Newsdesk
चीन ने अफ़ग़ानिस्तान&पाक से आतंकवाद पर चर्चा की https://citytoday.co.in/3412 https://citytoday.co.in/3412 काबुल, 21 अगस्त (वार्ता) चीन के विदेश मंत्री यांग वी ने कहा है कि आम सहमति पर आधारित व्यापक उपायों से आतंकवाद के मूल कारणों का समाधान करना चाहिए। उन्होंने यह बात यहां अफगानिस्तान और पाकिस्तान से साथ त्रिपक्षीय बातचीत के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि तीनों पक्षों को सहयोग विस्तार, सुरक्षा वार्ता तंत्र, कानून प्रवर्तन और सुरक्षा सहयोग को गहरा करते हुए अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के प्रयासों को मज़बूत करना चाहिए।

चीन, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच छठी त्रिपक्षीय बातचीत में चीनी विदेश मंत्री और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य वांग यी के अलावा अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार भी शामिल हुए।

इस वार्ता में श्री वांग ने कहा कि चीन, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के साथ विश्वास को गहरा करने, एक-दूसरे के मूल हितों से जुड़े मुद्दों पर समर्थन देने, इस क्षेत्र में किसी भी बाहरी ताकत के हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करता है। उन्होंने आगे कहा कि चीन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियों में शामिल किसी भी संगठन या व्यक्ति का कड़ा विरोध करने को तैयार है जो एक-दूसरे की राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुँचाती हैं।

उन्होंने बताया कि चीन और पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के स्थिरीकरण और पुनर्निर्माण के प्रयासों के साथ-साथ उसके विदेशी संबंधों के विस्तार में सहायता करने में मदद की है और वह बहुपक्षीय मंचों पर अफ़ग़ानिस्तान के हितों की वकालत करना जारी रखेगा,

श्री मुत्ताकी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान मैत्रीपूर्ण संबंधों को गहरा करने, समन्वय और सहयोग को मज़बूत करने और अधिक त्रिपक्षीय सहयोग की आशा करता है।

श्री डार ने कहा कि त्रिपक्षीय सहयोग में अपार संभावनाएँ हैं और साझा विकास के लिए इसे और सशक्त करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि पड़ोसी होने के नाते, पाकिस्तान अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया आगे बढ़ाने, वहां पर आजीविका सुधारने में योगदान देने को तैयार है। उन्होंने तीनों पक्षों से सीमा पार आतंकवादी हमलों सहित सभी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों का संयुक्त रूप से मुकाबला करने का भी आह्वान किया।

 

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Thu, 21 Aug 2025 18:24:25 +0530 Newsdesk
बोलीविया की अदालत ने संसद में लिथियम खनन चर्चा पर लगाई रोक https://citytoday.co.in/3411 https://citytoday.co.in/3411 ब्यूनस आयर्स 21 अगस्त(वार्ता)

ला पाज़ के पर्यावरण न्यायालय ने बोलीविया में लिथियम खनन को लेकर रुस और चीन के साथ अनुबंध के विषय पर संसद में हो रही चर्चा पर रोक लगा दिया है।
बोलीविया के लोकपाल कार्यालय ने बताया कि ला पाज़ न्यायालय ने लिथियम खनन से संबंधित विधेयकों पर किसी भी प्रकार की चर्चा पर अस्थाई रोक लगा दिया है।
एक लोकपाल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने फैसला सुनाया कि यह रोक तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक प्रशासन जल संसाधनों के संरक्षण से संबंधित शर्तों को पूरा नहीं कर देता और जब तक स्थानीय लोगों से खनन के विषय में विचार विमर्श नहीं कर लिया जाता।
11 सितंबर 2024 को बोलीविया सरकार ने रूस की रोसाटॉम की सहायक कंपनी ‘यूरेनियम वन ग्रुप’ के साथ 97 करोड़ डॉलर का निवेश समझौता किया था। इस समझौते में 14,000 टन वार्षिक क्षमता वाली बैटरियों के लिए लिथियम कार्बोनेट संयंत्र बनाने हेतु एक अनुबंध किया गया था। दो सप्ताह बाद चीन की हांगकांग स्थित सीबीसी के साथ भी इतने ही निवेश से दो लिथियम कार्बोनेट संयंत्र बनाने हेतु एक समझौता किया गया था।
बोलीविया लिथियम त्रिभुज का हिस्सा है, जहाँ लिथियम का सबसे बड़ा वैश्विक भंडार है। यह त्रिभुज बोलीविया के अलावा अर्जेंटीना और चिली तक फैला हुआ है। उल्लेखनीय है कि बोलीविया में 2.3 करोड़ टन लिथियम भंडार है , अर्जेंटीना में 1.9 करोड़ टन और चिली में 90 लाख टन लिथियम भंडार हैं।

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Thu, 21 Aug 2025 18:21:58 +0530 Newsdesk
भारतीय विमानों पर पाबंदी, पाकिस्तान ने 23 सितंबर तक बढ़ाया हवाई प्रतिबंध https://citytoday.co.in/3410 https://citytoday.co.in/3410 लाहौर
 पाकिस्तान के अधिकारियों ने बुधवार को भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध 23 सितंबर तक बढ़ा दिया। पाकिस्तान हवाई अड्डा प्राधिकरण ने एक नया नोटम (नोटिस टू एयरमैन) जारी किया है, जिसमें पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में भारतीय विमानों पर प्रतिबंध को एक महीने के लिए बढ़ाने की घोषणा की गई है।

हवाई अड्डा प्राधिकरण ने कहा कि भारतीय एयरलाइनों द्वारा संचालित सभी विमानों को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। यह प्रतिबंध भारत के स्वामित्व वाले या पट्टे पर लिए गए सैन्य और नागरिक विमानों पर भी लागू रहेगा।

पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव के मद्देनजर यह प्रतिबंध सबसे पहले 23 अप्रैल को एक महीने के लिए लगाया गया था। इस कदम से भारतीय विमानों के पाकिस्तानी क्षेत्र में उड़ान भरने पर रोक लग गई।

पाकिस्‍तान को हो रहा मोटा नुकसान

पाकिस्तान के एयरपोर्ट प्राधिकरण को भारतीय एयरलाइंस के लिए हवाई क्षेत्र बंद करने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. दो महीने में ही पाकिस्‍तान को 4.1 अरब रुपये (127 करोड़ भारतीय रुपये) का नुकसान झेलना पड़ा है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने संसद में पिछले दिनों यह जानकारी दी थी.  पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि भारतीय पंजीकृत विमानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद करने से पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) को 4.1 अरब रुपये का ओवरफ्लाइंग राजस्व नुकसान हुआ है.
2019 में भी हुआ था नुकसान

पाकिस्तान को 2019 में भी भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का खामियाजा भुगतना पड़ा था. तब प्रतिबंध लगाने से लगभग 451 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ था. पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने से भारतीय एयरलाइन कंपनियों को भी नुकसान हो रहा है.

30 अप्रैल को एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारतीय एयरलाइनों को हर महीने करीब 306 करोड़ रुपए से ज्यादा एक्स्ट्रा खर्च करने पड़ सकता है. एअर इंडिया ने अनुमान लगाया था कि अगर एक साल तक एयर स्पेस बंद रहता है तो उसे करीब 5081 करोड़ रुपए का वित्‍तीय नुकसान होगा.

कुछ दिनों बाद 30 अप्रैल को भारत ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी विमानों और एयरलाइनों के लिए हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। इस प्रतिबंध को पहली बार 23 मई को बढ़ाया गया था।

ऑपरेशन सिंदूर के समय लगाई थी पाबंदी

पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष के मद्देनजर यह प्रतिबंध सबसे पहले 23 अप्रैल को एक महीने के लिए लगाया गया था. 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जो पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में आतंकी ढांचों को निशाना बनाकर एक विशाल सैन्य अभियान था.

जिसके बाद पाकिस्तान की ओर से भी भारत पर हमले किए गए, जिनका भारत ने मुंह तोड़ जवाब दिया था. दोनों देशों के बीच 4 दिन संघर्ष चलने के बाद सीजफायर हो गया, लेकिन पाकिस्तान ने अभी तक हवाई क्षेत्र से पाबंदी नहीं हटाई है.
एक तरफ संबंध सुधारने की बात

वहीं पाकिस्तान के मुख्य सहयोगी चीन ने इच्छा जताई है कि भारत पाकिस्तान रिश्तों में सुधार करें, साथ ही दोनों के बीच चीन ने मध्यस्थता कराने की भी पेशकश की है. लेकिन पाकिस्तान का कदम भविष्य में होने वाली ऐसी किसी भी वार्ता पर असर डाल सकता है.

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Thu, 21 Aug 2025 18:19:10 +0530 Newsdesk
यूक्रेन पर रूस का साल का तीसरा बड़ा हमला, जेलेंस्की बोले& पुतिन शांति नहीं चाहते https://citytoday.co.in/3409 https://citytoday.co.in/3409 कीव 

अलास्का से लेकर वॉशिंगटन तक रूस-यूक्रेन के बीच करीब चार साल से चल रहे संघर्ष को खत्म करने की कोशिश चल रही है. लेकिन दोनों ही देश पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलास्का में मीटिंग की थी, जो बेनतीजा रही. इसके बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी यूरोपीय नेताओं के साथ वॉशिंगटन में ट्रंप से मुलाकात की, ताकि संघर्ष को रोका जा सके. बावजूद इसके अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है.  

जेलेंस्की ने मॉस्को पर साधा निशाना

दूसरी ओर यूक्रेनी एयरफोर्स ने गुरुवार को दावा किया कि रूस ने इस साल यूक्रेन पर अपना सबसे बड़ा हवाई हमला किया है, जिसमें 574 ड्रोन और 40 मिसाइलें दागी गई हैं. एयरफोर्स का दावा है कि ज्यादातर हमले यूक्रेन के पश्चिमी इलाकों को निशाना बनाकर किए गए. अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए. ताजा हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि मॉस्को से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि वे युद्ध खत्म करने के लिए तैयार हैं और उनके बीच ठोस बातचीत चल रही है.

यूक्रेनी पत्रकारों के साथ बातचीत में जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिकी कंपनी पर हुए इस रूसी हमले में 15 लोग घायल हुए हैं. उन्होंने कहा कि वह यूरोप के किसी तटस्थ हिस्से में पुतिन से मिलना चाहते हैं. इनमें स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया और तुर्की जैसे देश शामिल हो सकते हैं. हंगरी की ओर से यूक्रेन का समर्थन करने के विरोध का हवाला देते हुए बुडापेस्ट में बैठक का प्रस्ताव रद्द कर दिया गया था.

यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री साइबिहा ने कहा कि रूस ने पश्चिमी यूक्रेन में एक 'प्रमुख अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चर' पर हमला किया. उन्होंने और कोई जानकारी नहीं दी. यूक्रेन के पश्चिमी हिस्से देश के पूर्व और दक्षिण में युद्धक्षेत्र की फ्रंटलाइन से बहुत दूर हैं. ऐसा माना जाता है कि यूक्रेन के पश्चिमी सहयोगियों की ओर से दी जाने वाली ज्यादातर सैन्य सहायता वहीं पहुंचाई जाती है. शायद यही वजह है कि इस बार रूस ने पश्चिमी यूक्रेन को टारगेट किया है.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ड्रोनों की संख्या के आधार पर यह इस साल रूस का तीसरा सबसे बड़ा हवाई हमला था, और मिसाइलों की संख्या के आधार पर यह आठवां सबसे बड़ा हमला था.

यूक्रेन ने रूस को पहुंचाया था बड़ा नुकसान

इससे पहले जून में यूक्रेन की स्पेशल फोर्स ने रूस पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए थे. यूक्रेन ने रूस के हवाई ठिकानों को निशाना बनाया और जमीन पर मौजूद 41 रूसी बॉम्बर को तबाह कर दिया. अनुमान है कि इस हमले में रूस के 30 फीसदी से ज्यादा बॉम्बर्स फ्लीट और रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचा था.

यूक्रेन ने रूस पर यह हमला उस कार्रवाई के जवाब में दिया था जब रूस ने 477 ड्रोन से यूक्रेनी क्षेत्र को दहला दिया था. इस हमले में रूस ने कुल 537 हवाई हथियार दागे, जिनमें 477 ड्रोन और 60 मिसाइलें शामिल थीं. यूक्रेनी एयरफोर्स ने दावा किया कि इनमें से 249 को मार गिराया गया, जबकि 226 हथियार इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के कारण अपने टारगेट तक पहुंचने में नाकाम रहे.

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Thu, 21 Aug 2025 18:17:17 +0530 Newsdesk
अमेरिकी टैरिफ का तोड़: रूस ने बढ़ाया भारत से हाथ, कहा& सामान और तेल दोनों का स्वागत https://citytoday.co.in/3396 https://citytoday.co.in/3396 नई दिल्ली

अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ के बीच रूस का बड़ा बयान है। रूस का कहना है कि यदि किसी देश में भारतीय उत्पादों पर रोक लग रही है तो रूस के बाजार में उनका स्वागत है। भारत में रूसी मिशन के डिप्टी चीफ रोमन बाबूश्किन ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अर्थव्यवस्था को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है, लेकिन उसे यह ध्यान रखना चाहिए कि दोस्त कभी पाबंदियां नहीं लगाते। रूस कभी इस तरह की पाबंदियां नहीं लगाएगा। उन्होंने कहा कि भारत और रूस ने हमेशा कठिन समय में सहयोग कायम रखा है। हम भारत को कच्चे तेल की सप्लाई जारी रखेंगे और इसके लिए मेकेनिज्म तैयार किया है।

इसके अलावा रोमन बाबूश्किन ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन की मीटिंग से इतर पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात होगी। इस मीटिंग में कई अहम मसलों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि उन्होंने व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे को लेकर कहा कि इसकी तारीखें तय नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और 2030 तक यह 100 अरब डॉलर के पार हो जाएगा। इसके अलावा भारत को फर्टिलाइजर और तेल, गैस आदि की सप्लाई करने में रूस पहले नंबर पर कायम है। रूसी राजदूत ने कहा कि अमेरिका की रणनीति गलत है और उस पर ही भारी पड़ रही है। टैरिफ वार के चलते डॉलर पर भरोसा कमजोर हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत के साथ व्यापारिक असंतुलन को खत्म करने के लिए रूस कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि भारतीय निर्यात रूस में बढ़े। हम चाहते हैं कि मशीनरी, फार्मा, चाय और चावल जैसी चीजों का आयात भारत से बढ़ा लें। यही नहीं उनका कहना था कि अमेरिका ने टैरिफ अटैक का जो फैसला लिया है, वह गलत और एकतरफा है। यही नहीं उनसे मीडिया से सवाल किया कि क्या भारत की ओर से रूस से तेल खरीद रोकी जा सकती है। इस पर उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा नहीं लगता है। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ चर्चा करेंगे और सारे मसलों को दूर करेंगे।

रूसी दूत बोले- भारत को देते हैं तेल में एक्स्ट्रा डिस्काउंट, सप्लाई चलती रहेगी
रूसी राजनयिक ने कहा कि भारत हमारे लिए बहुत मायने रखता है। राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के मसले पर पीएम मोदी से दो बार फोन पर बात की है। उन्होंने कहा कि भारत की जरूरत का 40 फीसदी तेल रूस मुहैया करा रहा है और दुनिया भर के अन्य देशों के मुकाबले 5 फीसदी डिस्काउंट देता है। उन्होंने कहा कि भारत और रूस की दोस्ती स्वाभाविक है। हमने साथ मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल तैयार की है। इसके अलावा अन्य हथियारों पर भी काम कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने चीनी विदेश मंत्री के भारत दौरे का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि रूस, भारत और चीन का सहयोग महत्वपूर्ण है। हम चाहते हैं कि यह जल्दी और मजबूती से आगे बढ़े।

'ऑपरेशन सिंदूर में हो गई रूसी हथियारों की टेस्टिंग'
उन्होंने भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया और कहा कि यह रूसी हथियारों की टेस्टिंग का भी मौका था। उन्होंने कहा कि हमारे एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की इस जंग में टेस्टिंग हो गई। भारत जब भी एयर डिफेंस सिस्टम तैयार करेगा तो रूस उसका हिस्सा रहेगा।

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Wed, 20 Aug 2025 18:57:51 +0530 Newsdesk
इज़रायल ने लेबनान में नई सैन्य चौकी स्थापित की https://citytoday.co.in/3386 https://citytoday.co.in/3386 बेरूत 19 अगस्त (वार्ता)

 इज़रायल की सेना ने सोमवार को दक्षिणी लेबनान के सीमावर्ती क्षेत्र में एक नई सैन्य चौकी स्थापित की। लेबनानी सुरक्षा और स्वास्थ्य सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

सूत्र ने बताया कि यह नई चौकी कफ़र किला गाँव के उत्तरी प्रवेश द्वार पर स्थापित की गई है जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित ब्लू लाइन से लगभग 15 मीटर दूर है।

सूत्र ने कहा कि ”यह एक मिट्टी के अवरोध से घिरा हुआ है, निगरानी उपकरणों और भारी मशीनगनों से लैस है और इसमें एक मर्कवा टैंक भी है।”

लेबनानी सूत्र ने दावा किया कि यह कदम इज़रायल द्वारा मिस्गाव आम की इज़रायली बस्ती के पास एक चौकी स्थापित करने के एक सप्ताह बाद उठाया गया है। यह लेबनानी क्षेत्र में लगभग 800 मीटर अंदर है।

इस बीच लेबनान के जन स्वास्थ्य मंत्रालय के जन स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र ने एक बयान में कहा कि ”इज़रायली दुश्मन के ड्रोन द्वारा गिराए गए बम से चार लोग घायल हो गए, ये सभी सीरियाई नागरिक थे।”

उल्लेखनीय है कि 27 नवंबर 2024 से अमेरिका और फ्रांस की मध्यस्थता से हिज़्बुल्लाह और इज़रायल के बीच युद्धविराम औपचारिक रूप से लागू हो गया है, जिससे एक साल से भी ज़्यादा समय से चल रही सीमा पार झड़पें समाप्त हो गई हैं। इस समझौते में दक्षिणी लेबनान से इज़रायल की वापसी का प्रावधान था लेकिन इज़रायली सेना ने सीमा पर कई चौकियाँ बना रखी हैं और हिज़्बुल्लाह से ”खतरे” का हवाला देते हुए हवाई हमले जारी रखे हुए हैं।

 

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Tue, 19 Aug 2025 18:51:44 +0530 Newsdesk
गाजा में इजरायली हमलों में मरने वालों की संख्या पहुंची 62,000 के पार https://citytoday.co.in/3385 https://citytoday.co.in/3385 गाजा, 19 अगस्त (वार्ता) गाजा स्थित स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि 07 अक्टूबर, 2023 से तटीय क्षेत्र पर जारी इज़राली हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 62,000 से अधिक हो गयी है, जो मानवीय और स्वास्थ्य स्थितियों के बिगड़ने का संकेत है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि पिछले 24 घंटों में 60 लोग मारे गए और 344 अन्य घायल हुए हैं। बयान में कहा गया है कि कई पीड़ित मलबे में फंसे हुए हैं। निरंतर बमबारी और सीमित संसाधनों के कारण एम्बुलेंस और नागरिक सुरक्षा दल उन तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से मरने वालों की कुल संख्या 62,004 हो गयी है, और 156,230 लोग घायल हुए हैं।

इस बीच, पिछले 24 घंटों में भुखमरी और कुपोषण के कारण दो बच्चों सहित पांच लोगों की मौत हो गयी। इसके बाद इसके कारण अक्टूबर 2023 से अब तक 112 बच्चों सहित कुल 263 लोगों की मौत हो चुकी है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा कि ईंधन, दवाओं और चिकित्सा आपूर्ति की कमी के कारण गाजा के अस्पताल बेहद कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मानवीय स्थिति के लगातार बिगड़ने से और अधिक नागरिक मौतें हो सकती हैं।

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Tue, 19 Aug 2025 18:43:43 +0530 Newsdesk
जॉर्डन सम्राट ने गाजा में युद्धविराम, मानवीय सहायता की आपूर्ति का किया आह्वान https://citytoday.co.in/3384 https://citytoday.co.in/3384 अम्मान, 19 अगस्त (वार्ता)

जॉर्डन के सम्राट अब्दुल्ला द्वितीय ने सोमवार को गाजा में तत्काल युद्धविराम और मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति का आह्वान किया। रॉयल हाशमाइट कोर्ट ने एक बयान में यह जानकारी दी है।
बयान में कहा गया है कि बैठक के दौरान सम्राट अब्दुल्ला ने गाजा पर अपने कब्जे को मजबूत करने और वहाँ सैन्य नियंत्रण का विस्तार करने की इजरायल की योजनाओं को जॉर्डन द्वारा अस्वीकार किए जाने की बात दोहराई और चेतावनी दी कि इस तरह के ”एकतरफा कदम” क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा पैदा करते हैं।
उन्होंने तथाकथित “ग्रेटर इजरायल” दृष्टिकोण पर इजरायल के बयानों को भी खारिज कर दिया और पश्चिमी तट पर बस्तियों के विस्तार की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता है और फिलिस्तीनियों के एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना के अधिकार को कमजोर करता है।
बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा हुई और श्री अब्दुल्ला ने सीरिया की सुरक्षा, स्थिरता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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Tue, 19 Aug 2025 17:35:50 +0530 Newsdesk
ट्रंप&जेलेंस्की की वार्ता: 3 प्वॉइंट में समझें बैठक का नतीजा https://citytoday.co.in/3383 https://citytoday.co.in/3383 राष्ट्रपति ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की मुलाकात से जुड़ी अहम जानकारी, रूस-यूक्रेन युद्ध पर हुई चर्चा।

वाशिंगटन, 19 अगस्त (वार्ता): अमेरिका के राष्ट्रपति और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद, रूस-यूक्रेन युद्ध के भविष्य को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। बैठक का मुख्य फोकस यूक्रेन में शांति स्थापित करना और अमेरिका की भूमिका पर रहा।

यहां 3 प्वॉइंट में बैठक का नतीजा समझें:

1. शांति योजना पर सहमति: राष्ट्रपति ट्रंप और जेलेंस्की ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए एक शांति योजना पर चर्चा की। इस योजना में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए एक समझौते का प्रस्ताव शामिल है।

2. वित्तीय सहायता का वादा: अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूक्रेन को आर्थिक और सैन्य सहायता जारी रखने का वादा किया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन को भी इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए गंभीर कदम उठाने होंगे।

3. रूस पर दबाव: ट्रंप ने कहा कि वह रूस पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बनाएंगे, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को बातचीत के जरिए ही सुलझाया जा सकता है।

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Tue, 19 Aug 2025 16:07:52 +0530 Newsdesk
पुतिन& जेलेंस्की वार्ता के लिये प्रयास जारी : ट्रम्प https://citytoday.co.in/3381 https://citytoday.co.in/3381 वाशिंगटन 19 अगस्त (वार्ता) श्री ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में श्री ज़ेलेंस्की और यूरोपीय देशों के कुछ नेताओं के साथ एक वार्ता के बाद सोमवार को यह बात कही।
श्री ट्रम्प ने कहा कि व्हाईट हाउस में हुयी वार्ताओं के दौरान उन्होंने श्री पुतिन से फ़ोन पर बात की। यह बातचीत अलास्का में दोनों नेताओं के बीच हुयी बैठक के बाद हुयी।
व्हाइट हाउस की बैठकों में यूक्रेन के लिए संभावित दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी पर ध्यान केंद्रित किया गया जिसे श्री ट्रम्प और यूरोपीय नेताओं ने संघर्ष को समाप्त करने के लिए ज़रूरी क़दम बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इन वार्ताओं को “बहुत अच्छा” बताते हुये कहा कि इसने संभावित ज़ेलेंस्की-पुतिन शिखर सम्मेलन की दिशा में गति प्रदान की है । यह तीन साल से भी ज़्यादा समय पहले रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण शुरू करने के बाद से दोनों नेताओं के बीच पहली मुलाक़ात होगी।
श्री ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल मंच पर लिखा “मुझे लगता है कि अगर हम उस बैठक तक पहुँच जाते हैं तो युद्ध समाप्त होने की ज्यादा संभावना होगी।” उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते को स्थायी होना चाहिए न कि उसका उद्देश्य केवल संघर्ष रोकना होना चाहिए।
अमेरिका राष्ट्रपति ने लिखा “रूस/यूक्रेन के लिए शांति की संभावना को लेकर हर कोई बहुत खुश है,।” उन्होंने युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त करने के अपने वादे पर ज़ोर दिया।
उधर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिकी प्रशासन श्री ज़ेलेंस्की और श्री पुतिन के बीच एक “अप्रत्याशित” बैठक आयोजित करने के लिए काम कर रहा है । उन्होंने इसे युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
श्री रुबियो ने फॉक्स न्यूज़ पर एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह प्रयास अंततः श्री ट्रम्प के साथ एक त्रिपक्षीय बैठक का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा “हम अभी उस मुकाम तक नहीं पहुँचे हैं लेकिन हमारा लक्ष्य यही है। आज जिन मुद्दों पर चर्चा हुई उनमें से एक यह है कि उस मुकाम तक कैसे पहुँचा जाए।”
गौरतलब है कि यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के लिये संभावित वार्ता के लिए श्री ट्रम्प, श्री ज़ेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं ने भाग लिया। ये सभी अलास्का में श्री पुतिन के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति की शिखर वार्ता के बाद एकत्र हुए थे।
इस बीच श्री ट्रम्प ने श्री ज़ेलेंस्की और अपने यूरोपीय समकक्षों के साथ दोबारा वार्ता शुरू करने से पहले ओवल ऑफिस से श्री पुतिन से फ़ोन पर बात की।
उधर फ़्रांसिसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि इन वार्ताओं का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यूक्रेन के लिए ठोस सुरक्षा गारंटी प्रदान करने के लिए अमेरिका की तत्परता थी जिसे उन्होंने एक निर्णायक बदलाव बताया।
श्री मैक्रों ने कहा “आज इस बात पर सहमति हुयी है कि हम इन सुरक्षा गारंटियों की विषय-वस्तु और प्रत्येक पक्ष द्वारा प्रदान किए जाने वाले सहयोग पर अमेरिका के साथ मिलकर काम करेंगे।” उन्होंने कहा कि यूरोपीय नेताओं का “इच्छुक गठबंधन” अब 30 देशों तक फैल गया है।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि श्री ज़ेलेंस्की और श्री पुतिन के बीच कोई भी बातचीत द्विपक्षीय रूप से शुरू होनी चाहिए और यह केवल युद्धविराम के तहत ही होनी चाहिए। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति की श्री पुतिन के साथ समझौता करने की क्षमता के बारे में उनके विश्वास का स्वागत किया । लेकिन श्री मैक्रों ने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत रुकती है तो यूरोप को कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
उधर श्री ज़ेलेंस्की ने संवाददाताओं को बताया कि चर्चा में यूक्रेन के सुरक्षा ढाँचे के तौर पर यूरोपीय वित्तपोषण से 90 अरब डॉलर के अमेरिकी हथियार खरीदने की योजना और ड्रोन बनाने का प्रस्ताव शामिल था जिसकी खरीद में अमेरिका मदद कर सकता है। उन्होंने आगाह किया कि समझौते पर अभी भी बातचीत ही चल रही है लेकिन इस बाबत ब्यौरे को 10 दिनों के भीतर अंतिम रूप दिया जा सकता हैं।
उन्होंने ओवल ऑफिस में रूस के कब्जे वाले इलाकों को दर्शाने वाले एक नक्शे पर श्री ट्रम्प के साथ हुई लंबी बातचीत का भी ज़िक्र किया और इसे एक “गर्मजोशी भरी और सार्थक बातचीत” बताया। हालाँकि इसमें किसी भी क्षेत्रीय पुनर्निर्धारण पर सहमति नहीं बनी।
इस बीच फ़िनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्ज़ेंडर स्टब ने पुष्टि की है कि यूरोपीय नेताओं ने व्हाइट हाउस की बैठकों के नतीजों से श्री पुतिन को अवगत कराने के लिए श्री ट्रंप द्वारा उन्हें फोन किये जाने के बारे में समन्वित सहयोग किया है।
श्री ज़ेलेंस्की ने बिना किसी शर्त के “किसी भी प्रारूप” में श्री पुतिन से मिलने की अपनी तत्परता दोहराई। उन्होंने कहा “मेरा मानना है कि हमें बिना शर्त मिलना चाहिए और युद्ध की समाप्ति के इस रास्ते के आगे के विकास के बारे में सोचना चाहिए।”
उन्होंने संकेत दिया कि रूस ने पहले एक द्विपक्षीय बैठक का सुझाव दिया था जिसके बाद श्री ट्रंप के साथ एक त्रिपक्षीय बैठक होने की संभावना है। लेकिन उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि पूर्व शर्तों का इंतज़ार करने से रूस की ओर से केवल और मांगें ही सामने आएंगी।
इस बीच श्री ट्रम्प और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस शिखर सम्मेलन में युद्ध के दौरान अपहृत बच्चों की दुर्दशा पर भी प्रकाश डाला। श्री ट्रम्प ने लापता बच्चों की समस्या को एक “विश्वव्यापी” संकट बताया ।
उधर श्री ज़ेलेंस्की ने अपनी पत्नी का एक पत्र श्रीमती ट्रम्प को सौंपकर एक निजी संदेश भी दिया जिसमें उनके द्वारा श्री पुतिन को की गयी अपील के लिये उनका धन्यवाद किया गया।

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Tue, 19 Aug 2025 16:02:00 +0530 Newsdesk
अमेरिका का बी&2 बॉम्बर अलास्का में उतरा, ट्रंप ने पुतिन का किया धमाकेदार स्वागत https://citytoday.co.in/3355 https://citytoday.co.in/3355

वाशिंगटन 
अलास्का में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का वेलकम किया तब उन दोनों के ऊपर B-2 न्यूक्लियर स्टील्थ बॉम्बर ने उड़ान भरी. अमेरिका ने अपने सबसे घातक हथियार, B-2 स्पिरिट न्यूक्लियर स्टील्थ बॉम्बर को दिखाया.  

B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर: अदृश्य विनाशक
     रडार से छिपा हुआ: इसकी खास डिजाइन और कोटिंग की वजह से यह दुश्मन के रडार पर आसानी से नहीं दिखता. इसका आकार और सतह ऐसी बनाई गई है कि यह रडार तरंगों को वापस नहीं करती.
    शक्तिशाली हमला: यह विमान 16 परमाणु बम या 80 सामान्य बम तक ले जा सकता है. यह एक साथ कई लक्ष्यों को नष्ट करने की क्षमता रखता है.
    लंबी दूरी: यह एक बार में 11,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है बिना रुके, जिससे यह दुश्मन के इलाके में गहरे तक घुस सकता है.
    रात का राजा: यह दिन और रात दोनों समय हमला कर सकता है. इसकी गति और ऊंचाई इसे दुश्मन के लिए मुश्किल बनाती है.

शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ के खिलाफ हमले के लिए डिज़ाइन किया गया यह बॉम्बर आज भी दुनिया का सबसे घातक सैन्य हथियार है.
 
अलास्का अमेरिका और रूस के बीच करीब है, और यह इलाका सैन्य गतिविधियों के लिए संवेदनशील है. हो सकता है कि यह किसी कूटनीतिक संदेश या सैन्य प्रदर्शन का हिस्सा रहा हो, लेकिन यह केवल एक दावा है. ट्रंप के कार्यकाल (2017-2021) में बी-2 का इस्तेमाल कई अभ्यासों में हुआ, लेकिन पुतिन से जुड़ा यह घटनाक्रम अभी साफ नहीं है. इसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है, लेकिन बिना सबूत के इसे सच मानना मुश्किल है.

B-2 की तकनीकी विशेषताएं
आकार और वजन: B-2 की लंबाई 69 फीट, पंखों की चौड़ाई 172 फीट और ऊंचाई 17 फीट है. इसका खाली वजन 71,700 किलोग्राम है, लेकिन पूरे हथियारों के साथ यह 1.70 लाख किलोग्राम तक का वजन लेकर उड़ान भर सकता है.
 
गति और ऊंचाई: इसकी अधिकतम गति 1010 किलोमीटर प्रति घंटा है. यह आमतौर पर 900 किलोमीटर प्रति घंटा की क्रूज़िंग स्पीड पर उड़ता है. यह 50,000 फीट (लगभग 15 किलोमीटर) की ऊंचाई तक उड़ सकता है, जिससे यह दुश्मन के रडार और मिसाइलों से बच निकलता है.

चालक दल: इसे केवल दो लोग संचालित करते हैं—एक पायलट और एक मिशन कमांडर.
रेंज: इसकी रेंज 11000 किलोमीटर है. हवा में ईंधन भरने की सुविधा के साथ यह और भी लंबी दूरी तय कर सकता है.

हथियारों की क्षमता
B-2 बॉम्बर अपनी दो इंटरनल बे (आंतरिक हथियार डिब्बों) में कई प्रकार के हथियार ले जा सकता है, जो इसे विभिन्न मिशनों के लिए बहुमुखी बनाते हैं. इसके हथियारों में शामिल हैं…

पारंपरिक बम: 80 छोटे बम (230 किलोग्राम के Mk-82 या GBU-38) या 36 CBU क्लास बम (340 किलोग्राम).
परमाणु बम: 16 B61 या B83 न्यूक्लियर बम, जो बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकते हैं.
बंकर बस्टर बम: दो GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP), जिनका वजन 13,600 किलोग्राम है और जो 200 फीट गहरे कंक्रीट बंकरों को भेद सकते हैं.
मिसाइलें: AGM-154 ज्वाइंट स्टैंडऑफ वेपन और AGM-158 ज्वाइंट एयर टू सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल (JASSM), जो सटीक हमले के लिए डिज़ाइन की गई हैं.

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Sat, 16 Aug 2025 18:33:01 +0530 Newsdesk
अलास्का से जीतकर लौटे पुतिन, ट्रंप खाली हाथ, अगला फोन किसे करेंगे? https://citytoday.co.in/3354 https://citytoday.co.in/3354 वाशिंगटन 
दुनिया की निगाहें अलास्का की बहुप्रतीक्षित बैठक पर टिकी थीं। उसका नतीजा अब सभी के सामने है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन पर हमला जारी रहेगा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोई ठोस समझौता कराने में नाकाम रहे। बैठक की शुरुआत गर्मजोशी भरे स्वागत से हुई। पुतिन और ट्रंप एक ही बुलेटप्रूफ लिमोजिन में बैठे, मुस्कुराते और हाथ मिलाते दिखे। लेकिन इस सौहार्द का असर बैठक के नतीजों पर नहीं पड़ा।

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुतिन ने कहा कि रूस को युद्ध के मूल कारणों को खत्म करना है। यानी नाटो की सीमा पर मौजूदगी। इस बयान से स्पष्ट हो गया कि युद्ध का अंत फिलहाल संभव नहीं है। पुतिन ने यह भी कहा कि अगली बैठक मॉस्को में होनी चाहिए, जिसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की भूमिका संदिग्ध हो जाएगी। ट्रंप लगातार संवाद और मीडिया से बातचीत में रुचि रखते हैं। वह मात्र साढ़े तीन मिनट बोले और एक भी सवाल नहीं लिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि वह नाटो और जेलेंस्की को बैठक के बारे में बताने के लिए कुछ फोन कॉल करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बेहद कमजोर परिणाम माना जा रहा है।

बैठक में रूस की ओर से शीर्ष आर्थिक सलाहकार भी मौजूद थे। हार्वर्ड-शिक्षित किरील दिमित्रिएव समेत कई प्रतिनिधियों की मौजूदगी यह दिखाती है कि रूस ने इस शिखर वार्ता को व्यापारिक अवसर के रूप में भी देखा। यूरोपीय नेताओं और यूक्रेन को यह राहत जरूर मिली कि बैठक में यूक्रेन की सीमाओं को फिर से परिभाषित करने पर कोई चर्चा नहीं हुई। हालांकि, पुतिन का मूल कारणों के उन्मूलन वाला बयान संकेत देता है कि युद्ध और लंबा खिंच सकता है।

किसके खाते में जीत?
ट्रंप के लिए जीत तब होती यदि वह तत्काल युद्धविराम करवा पाते। पुतिन के लिए जीत यही थी कि वे अस्पष्ट शब्दों में आगे की बातचीत पर सहमति जताएं और युद्ध जारी रख सकें। नतीजा साफ है। अलास्का में हुई इस ऐतिहासिक भेंट से पुतिन ने पूर्ण जीत हासिल की। 1867 में रूस ने पैसों की तंगी में अलास्का अमेरिका को बेच दिया था। लेकिन 2025 में भू-राजनीतिक मुकाबले में पुतिन अलास्का से विजयी लौटे।

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Sat, 16 Aug 2025 18:31:17 +0530 Newsdesk
पुतिन से मुलाकात के बाद बदला ट्रंप का रुख, तेल आयात पर टैरिफ को लेकर नरम रुख अपनाया https://citytoday.co.in/3352 https://citytoday.co.in/3352 वाशिंगटन 
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर हाल ही में भारी टैरिफ और प्रतिबंध लगाने की बात कही थी। उन्होंने भारत पर भी रूस की आर्थिक मदद कर यूक्रेन युद्ध (Ukraine War) को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था।

इस बीच अलास्का में ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के बीच मुलाकात हुई। बैठक के बाद ट्रंप ने अपने बयान में नरमी दिखाते हुए कहा कि अभी उन्हें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर जवाबी टैरिफ लगाने की जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाले दो से तीन हफ्तों में इस पर विचार करना पड़ सकता है।
  
फिलहाल इसकी कोई जरूरत नहीं है- ट्रंप
सीन हैनिटी से बातचीत में ट्रंप ने कहा, "आज जो हुआ, उसके बाद मुझे लगता है कि इस विषय पर सोचने की आवश्यकता नहीं है। हो सकता है दो या तीन हफ्तों में मुझे इस पर विचार करना पड़े, लेकिन फिलहाल इसकी कोई जरूरत नहीं है।" ट्रंप ने यह भी कहा कि पुतिन से हुई बैठक काफी अच्छी रही। गौरतलब है कि ट्रंप और पुतिन की यह मुलाकात यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के रुख के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ट्रंप के बदले सुर
पहले जहां अमेरिकी पू्र्व राष्ट्रपति ट्रंप का रुख सख्त नजर आ रहा था और वह रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कड़े कदम उठाने की चेतावनी दे रहे थे, वहीं मुलाकात के बाद उनका रुख अपेक्षाकृत नरम दिखा। इससे संकेत मिलते हैं कि आने वाले हफ्तों में उनकी नीति को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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Sat, 16 Aug 2025 18:26:42 +0530 Newsdesk
इस यान की लंबाई दिल्ली से बड़ी, अंतरिक्ष में जीवन की नई संभावना https://citytoday.co.in/3351 https://citytoday.co.in/3351 नई दिल्ली

वैज्ञानिकों ने एक अनोखा अंतरिक्ष यान 'क्रिसालिस' डिजाइन किया है, जो लंबाई में दिल्ली से भी ज्यादा है. इसकी लंबाई 58 किलोमीटर है. जबकि दिल्ली की लंबाई 51.9 km है. ये यान 2400 लोगों को पृथ्वी से सबसे नजदीक स्टार सिस्टम अल्फा सेंचुरी तक ले जा सकता है. यह यात्रा एक तरफा होगी. करीब 400 साल लग सकते है. आइए, समझते हैं कि यह यान कैसे बनेगा? लोग उसमें कैसे रहेंगे? यह प्रोजेक्ट क्या है? 

अल्फा सेंचुरी तक की यात्रा

अल्फा सेंचुरी पृथ्वी से 25 ट्रिलियन मील (40 ट्रिलियन किलोमीटर) दूर है, जो हमारा सबसे नजदीक स्टार सिस्टम है. 'क्रिसालिस' नाम का यह यान 400 साल में इस यात्रा को पूरा कर सकता है. इसका मतलब है कि कई पीढ़ियां इस यान में ही जन्म लेंगी और मरेंगी, क्योंकि उनके पूर्वज ही इस यात्रा की शुरुआत करेंगे. यह यान प्रॉक्सिमा सेंचुरी बी नामक एक ग्रह पर लोगों को उतारेगा, जो एक ऐसा ग्रह है जिसे रहने लायक माना जाता है. यह पृथ्वी के आकार का है.

यह परियोजना 'प्रोजेक्ट हाइपरियन डिजाइन प्रतियोगिता' में पहला स्थान जीत चुकी है, जिसमें टीमों को अंतरिक्ष में कई पीढ़ियों के लिए रहने वाले जहाज डिजाइन करने की चुनौती दी गई थी. विजेता टीम को 5,000 अमेरिकी डॉलर का इनाम मिला.

'क्रिसालिस' में जिंदगी कैसे होगी?

इस यान में रहने के लिए पहले लोगों को तैयार करना होगा. वैज्ञानिकों का प्लान है कि शुरुआती पीढ़ियों को 70-80 साल तक अंटार्कटिका जैसे अलग-थलग इलाके में रहकर अनुकूलन करना होगा, ताकि उनकी मानसिक सेहत अच्छी रहे. इसके बाद यान को 20-25 साल में बनाया जा सकता है.

    यान का आकार और गुरुत्वाकर्षण: 'क्रिसालिस' 36 मील (58 किलोमीटर) लंबा होगा. इसमें कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण बनाया जाएगा, ताकि लोग पृथ्वी की तरह महसूस करें.
    रूसी गुड़िया जैसा डिजाइन: यह यान कई परतों में बनेगा, जैसे रूसी गुड़िया. बीच में एक कोर होगा. उसके चारों तरफ अलग-अलग परतें होंगी.
    कोर: इसमें शटल होंगे जो लोगों को प्रॉक्सिमा सेंचुरी बी पर उतारेंगे, साथ ही संचार उपकरण भी होंगे.
    पहली परत: खाना पैदा करने के लिए होगी, जिसमें पेड़-पौधे, फफूंद, कीट और पशु-पक्षी होंगे. उष्णकटिबंधीय और ठंडे जंगलों जैसे माहौल बनाए जाएंगे ताकि जैव विविधता बनी रहे.
    दूसरी परत: पार्क, स्कूल, अस्पताल और लाइब्रेरी जैसे स्थान होंगे.
    तीसरी परत: घर होंगे, जिनमें हवा और गर्मी का प्रबंध होगा.
    चौथी परत: काम के लिए होगी, जिसमें रिसाइकलिंग, दवाइयां और मैन्युफैक्चरिंग की सुविधाएं होंगी.
    पांचवीं परत: गोदाम होगा, जहां संसाधन, सामग्री और मशीनें रखी जाएंगी. रोबोट इस स्तर को चलाएंगे, ताकि इंसानों को कम मेहनत करनी पड़े.
    बिजली: यान में न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर से बिजली बनेगी, जो अभी तक व्यावसायिक स्तर पर उपलब्ध नहीं है.
    जनसंख्या नियंत्रण: जन्म को नियोजित किया जाएगा ताकि आबादी 1500 के आसपास रहे, जो यान की क्षमता (2400) से कम है.

शासन और तकनीक

यान का शासन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के साथ मिलकर चलेगा. इससे समाज की स्थिरता बनी रहेगी, पीढ़ियों के बीच ज्ञान साझा होगा. यान की पूरी व्यवस्था पर नजर रखी जा सकेगी.

यह योजना कितनी सच्ची है?

यह अभी सिर्फ एक काल्पनिक योजना है. न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर जैसी तकनीक अभी तैयार नहीं हुई है, लेकिन इस तरह के प्रोजेक्ट हमारे ज्ञान को बढ़ाने और भविष्य के डिजाइनों में सुधार करने में मदद करेंगे. 'प्रोजेक्ट हाइपरियन' की जूरी ने 'क्रिसालिस' की डिजाइन और विस्तृत योजना की तारीफ की है.

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Sat, 16 Aug 2025 18:18:57 +0530 Newsdesk
चीन में जन्म दर में गिरावट, क्या कैश सब्सिडी से बनेगा समाधान? https://citytoday.co.in/3350 https://citytoday.co.in/3350 बीजिंग
चीन की जनसंख्या में लगातार तीसरे साल कमी आयी है. राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 2023 में चीन की कुल जनसंख्या 1.408 अरब थी. जिसमें 2022 की तुलना में 20.8 लाख की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट पिछले छह दशकों में सबसे तेज है. यह भी ध्यान देने योग्य है कि 2022 में भी 13.9 लाख की कमी आई थी. यह दिखाता है कि चीन में जन्म दर, मृत्यु दर से लगातार कम हो रही है. जिससे देश की जनसंख्या में गिरावट आ रही है. इस स्थिति से निपटने के लिए अब चीन की सरकार कदम उठा रही है.

चीनी सरकार ने 28 जुलाई को 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सालाना 3,600 युआन (£376) की राष्ट्रव्यापी चाइल्डकेयर सब्सिडी की घोषणा की है. यह योजना जनवरी 2025 से लागू होगी और 2022 से 2024 के बीच जन्मे बच्चों को भी इसका लाभ मिलेगा. यह सब्सिडी कर-योग्य आय (taxable income) नहीं मानी जाएगी और न ही इसका असर गरीबी सहायता की पात्रता पर पड़ेगा. इस कदम से पता चलता है कि सरकार का उद्देश्य इस सब्सिडी को प्रभावी ढंग से लागू करना है, न कि इसे नौकरशाही में फंसाना.

गिरती जन्मदर बनी राष्ट्रीय इमरजेंसी
यह नई नीति पिछले तरीकों से अलग है, जहां जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी प्रांतीय और शहरी सरकारों पर छोड़ दी गई थी. पिछले कुछ सालों में 20 से ज्यादा क्षेत्रों ने छोटे-छोटे प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाए, जैसे आवास छूट, मासिक भत्ते और बेबी बोनस. लेकिन कोई भी जनसंख्या में गिरावट को रोकने में कामयाब नहीं हुआ. इस सीधे हस्तक्षेप से बीजिंग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह गिरती जन्म दर को अब सिर्फ एक जनसांख्यिकी चिंता नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय इमरजेंसी मानता है. चीन के सामने अपनी आर्थिक वृद्धि, श्रम शक्ति, पेंशन प्रणाली और स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने की चुनौती है. जिस तरह से चीन की जनसंख्या बूढ़ी हो रही है और युवा आबादी कम हो रही है. उसे देखते हुए यह खतरा है कि चीन ‘अमीर बनने से पहले ही बूढ़ा’ हो जाएगा.

चीन में लोग बच्चे क्यों नहीं पैदा कर रहे हैं?
चीन में जनसंख्या घटने के कई कारण हैं, जिनमें सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह के बदलाव शामिल हैं.

विवाह की संख्या में कमी: चीन में लोग अब शादी करने से बच रहे हैं या देर से शादी कर रहे हैं. जिससे बच्चों की संख्या में कमी आ रही है. 2024 में सिर्फ 61 लाख शादियाx हुईं, जबकि 2023 में यह संख्या 77 लाख थी. यह एक बड़ा बदलाव है, जो सिर्फ चीन ही नहीं बल्कि जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी देखा जा रहा है.

बच्चों की परवरिश का खर्च: चीन में बच्चों को पालना बहुत महंगा हो गया है. 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार एक बच्चे को 18 साल तक पालने में शहरी चीन में लगभग 538,000 युआन (लगभग ₹62 लाख) का खर्च आता है. यह चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी से 6.3 गुना ज्यादा है. इसी वजह से बच्चों को ‘तुंजिनशौ’ या ‘सोना खाने वाले जानवर’ भी कहा जाने लगा है.

कार्यस्थल पर महिलाओं की समस्याएं: चीन में महिलाओं को मां बनने के बाद नौकरी में भेदभाव का सामना करना पड़ता है. कई महिलाओं को मातृत्व अवकाश (maternity leave) के कारण नौकरी से निकाल दिया जाता है या प्रमोशन नहीं मिलता है. हालांकि महिलाओं को 128 से 158 दिन की छुट्टी मिलती है, लेकिन पुरुषों को बहुत कम छुट्टी मिलती है. इससे बच्चे पालने की जिम्मेदारी ज्यादातर महिलाओं पर आ जाती है.

आधुनिक जीवन का दबाव: आधुनिक जीवनशैली में बच्चों को पालने का दबाव भी बढ़ गया है. शहरों में घर बहुत महंगे हैं, शिक्षा में बहुत प्रतिस्पर्धा है और अच्छी व सस्ती चाइल्डकेयर की कमी है. इन सब वजहों से परिवार बनाना एक बोझ जैसा लगने लगा है. खासकर बड़े शहरों में जहां रहने का खर्च बहुत ज्यादा है और वेतन या नौकरी की सुरक्षा उतनी नहीं है.

प्रांतीय सरकारों द्वारा उठाए गए कदम
होहोट, आंतरिक मंगोलिया: दूसरे या तीसरे बच्चे के लिए 100,000 युआन (£10,400) तक की वार्षिक सब्सिडी, जो बच्चे के 10 साल का होने तक दी जाती है. इसके अलावा नई माताओं को मुफ्त दूध और 3,000 युआन का डेयरी उत्पाद वाउचर भी मिलता है.
तियानमेन: तीसरे बच्चे के माता-पिता को नए घर खरीदने पर 12,500 पाउंड की छूट.
हांग्जो: चाइल्डकेयर वाउचर वितरित किए गए़.

शेनयांग और चांगचुन: प्रति बच्चे सालाना 1,800 से 3,600 युआन तक की नकद सब्सिडी।

इन प्रयासों के विफल होने के कारण
ये सभी प्रोत्साहन कागज पर तो अच्छे लगते हैं, लेकिन असल में ये बच्चों को पालने के भारी खर्च के सामने बहुत कम हैं. जैसा कि निंग्ज़िया की एक मां ने बताया, इन सब्सिडी से बच्चे के लिए डायपर और फॉर्मूला दूध जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल है. ये प्रोत्साहन मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए कोई बड़ा बदलाव नहीं ला पाए हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि ये योजनाएं उन बड़ी समस्याओं को हल करने में नाकाम रहीं, जो बच्चों को पैदा न करने का मुख्य कारण हैं. ये समस्याएं हैं- नौकरी की असुरक्षा, महंगे घर, असमान अवकाश नीतियां और बच्चों को पालने की जिम्मेदारी में लिंग-भेद. 2022 में हुए एक ऑनलाइन सर्वेक्षण में लगभग 90% चीनी लोगों ने कहा था कि अगर उन्हें सालाना 12,000 युआन भी दिए जाएं, जो अभी दी जा रही राशि से चार गुना ज्यादा है, तब भी वे और बच्चे पैदा करने के बारे में नहीं सोचेंगे. यह साफ दिखाता है कि लोग पैसों से कहीं ज्यादा, सामाजिक और आर्थिक स्थिरता चाहते हैं.

अभी पर्याप्त क्यों नहीं सब्सिडी
राष्ट्रीय चाइल्डकेअर सब्सिडी चीन सरकार द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है. क्योंकि यह पहली बार है जब प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए सीधे वित्तीय मदद दी जा रही है. इस योजना के तहत देश भर में मुफ्त प्रीस्कूल की भी बात कही गई है, जिससे माता-पिता पर वित्तीय दबाव कम होगा. इस सब्सिडी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे पाना बहुत आसान है. इसमें कोई जटिल आवेदन प्रक्रिया नहीं है, न ही इसे कर योग्य आय माना जाएगा. राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग का अनुमान है कि इससे लगभग 2 करोड़ परिवार लाभ उठा सकते हैं.

विशेषज्ञों का क्या है मानन?
हालांकि यह योजना एक अच्छी शुरुआत है. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका असर सीमित हो सकता है. येल विश्वविद्यालय की जनसांख्यिकी विशेषज्ञ एम्मा ज़ैंग के अनुसार जब तक सरकार सस्ती चाइल्डकेयर, महिलाओं के लिए नौकरी की सुरक्षा और पुरुषों के लिए उचित पितृत्व अवकाश जैसी समस्याओं को हल नहीं करती, तब तक इस योजना का असर बहुत कम होगा. दक्षिण कोरिया इसका एक बड़ा उदाहरण है. दशकों से वहां की सरकार उदार शिशु बोनस, आवास भत्ते और छुट्टी की नीतियां दे रही है, लेकिन फिर भी उसकी जन्म दर दुनिया में सबसे कम है. इसका मतलब यह है कि एक बार जब समाज में जन्म दर कम होने की सोच गहरी हो जाती है, तो उसे सिर्फ पैसों से बदलना लगभग नामुमकिन हो जाता है. सामाजिक बदलाव सिर्फ आर्थिक प्रोत्साहन से नहीं होते, बल्कि इसके लिए एक बड़ा सामाजिक और ढांचागत परिवर्तन चाहिए होता है.

क्या सांस्कृतिक बदलाव की जरूरत?
चीन को अपनी जनसंख्या में गिरावट रोकने के लिए सिर्फ पैसों से ज्यादा, एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव लाना होगा. अगर चीन को इस समस्या से निपटना है तो उसे लैंगिक असमानता को खत्म करना होगा, जो घर और दफ्तर दोनों जगहों पर दशकों से मौजूद है. मां और बाप, दोनों के लिए पालन-पोषण को आसान और आर्थिक रूप से संभव बनाना होगा. समाज से भी उन्हें समर्थन मिले, यह सुनिश्चित करना होगा. यह स्वीकार करना होगा कि एक-संतान नीति ने सिर्फ परिवारों का आकार ही छोटा नहीं किया, बल्कि बच्चों और परिवार के बारे में लोगों की सोच भी बदल दी है. 

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2024 से 2054 के बीच चीन की आबादी 20.4 करोड़ तक कम हो सकती है. और सदी के अंत तक यह संख्या 78.6 करोड़ तक पहुंच सकती है, जो 1950 के दशक के बाद सबसे कम होगी. यह देखना अभी बाकी है कि सरकार की नई नीतियां इस समस्या को हल करने में कामयाब होंगी या ये सिर्फ आखिरी कोशिश बनकर रह जाएंगी.

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Sat, 16 Aug 2025 18:13:07 +0530 Newsdesk
जापान में जनसंख्या संकट: जन्म से 10 लाख ज्यादा मौतें, बढ़ी चिंता ‘साइलेंट इमरजेंसी’ https://citytoday.co.in/3330 https://citytoday.co.in/3330 टोक्यो 

दुनिया के ऐसे कई देश हैं, जहां आबादी का संकट गहरा रहा है। इनमें भारत का मित्र देश जापान प्रमुख है, जहां आबादी लगातार 16वें साल गिरी है। 2024 में जापान की आबादी में 9 लाख 8 से ज्यादा की गिरावट आ गई। इसका अर्थ हुआ कि देश में पैदा होने वाले लोगों से कहीं ज्यादा संख्या मरने वालों की है। यदि ऐसी ही स्थिति जारी रही तो जापान आने वाले कुछ सालों में अस्तित्व के संकट से जूझ रहा होगा। जापान को स्वस्थ लोगों और दीर्घायु जीवन के लिए जाता है। लेकिन लगातार युवा आबादी कम होना और बुजुर्गों की संख्या में इजाफा होना वहां के स्वास्थ्य ढांचे पर भी बोझ बढ़ा रहा है।

ऐसे हालात को जापान के पीएम शिगेरू इशिबा ने 'साइलेंट इमरजेंसी' करार दिया है। उनका कहना है कि देश में इंसानों की आबादी का संकट गहरा रहा है। उन्होंने कहा कि हम फैमिली फ्रेंडली पॉलिसीज पर और फोकस करेंगे, जैसे फ्री चाइल्डकेयर और वर्किंग आवर्स के मामले में लचीला रुख अपनाया जाएगा। अब भी जापान में ऐसी कई नीतियां हैं, लेकिन महिलाएं ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए राजी नहीं हैं। यही नहीं जापान में महिलाओं की ऐसी बड़ी संख्या है, जिन्होंने एक भी बच्चे को जन्म नहीं दिया है और ना ही देना चाहती हैं।

125 साल में पहली बार पैदा होने वाले बच्चों की इतनी कम संख्या

जापान में फिलहाल जन्मदर 1.2 है। डराने वाला आंकड़ा यह है कि वर्ष 2024 में जापान में सिर्फ 6,86,061 बच्चों का ही जन्म हुआ तो वहीं 1.6 मिलियन लोगों की मौत हो गई। इस तरह पैदा होने वालों की तुलना में 10 लाख ज्यादा लोगों की मौत हो गई। सीधे-सीधे कहें तो एक बच्चा पैदा हुआ तो दो लोग मर गए। फिलहाल जापान की आबादी 12 करोड़ है और यदि इसी तरह संख्या में कमी आती रही तो देश में मानव संसाधन का ही संकट पैदा हो जाएगा। इससे अर्थव्यवस्था से लेकर सामान्य मानवीय जीवन तक कठिन होगा। जापान में बीते 125 सालों के इतिहास में 2024 में सबसे कम बच्चे पैदा हुए हैं।

लगातार 16वें साल जापान की आबादी में गिरावट

इसके अलावा यह लगातार 16वां साल है, जब जापान की आबादी में इतनी बड़ी गिरावट आई है। यह स्थिति तब है, जबकि जापान में बड़ी संख्या में विदेशी बस गए हैं। 1 जनवरी, 2025 के डेटा के अनुसार जापान की कुल आबादी में 3 फीसदी हिस्सेदारी बाहरी लोगों की है। बीते एक साल के अंदर ही जापान की कुल आबादी में 0.44 फीसदी की कमी आई है। इसकी भरपाई के लिए जापान ने विदेशी लोगों को आमंत्रित करने की कोशिश की है, लेकिन यह योजना भी सिरे नहीं चढ़ पा रही।

65 साल से ज्यादा आयु के बुजुर्गों की संख्या 30 फीसदी

जापान की कुल आबादी में 65 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों का आंकड़ा अब 30 फीसदी हो गया है। यह दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा डेटा है, पहले नंबर पर मोनाको है। जापान में फिलहाल 60 फीसदी आबादी ही वर्किंग एज में है यानी 15 से 64 साल के बीच की है। यही नहीं जिस तरह से जन्मदर में कमी चल रही है, उससे आने वाले कुछ सालों में बुजुर्गों की संख्या युवाओं से भी अधिक हो सकती है।

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Thu, 14 Aug 2025 13:41:23 +0530 Newsdesk
PAK से अमेरिका की नजदीकियों पर व्हाइट हाउस ने दिया खास संदेश: रिश्तों में बदलाव मुश्किल https://citytoday.co.in/3318 https://citytoday.co.in/3318 वाशिंगटन

पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की अमेरिकी यात्रा इस समय चर्चा में है. बीते दो महीने में यह अमेरिका का उनका दूसरा दौरा रहा. इस बीच अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष था और दोनों देशों के बीच की स्थिति और भयावह हो सकती थी. इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका ने तत्काल कदम उठाए. 

ब्रूस ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच मई में चार दिनों तक चले सैन्य तनाव को खत्म करने के लिए अमेरिका ने सक्रिय भूमिका निभाई. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फोन कॉल कर कूटनीतिक प्रयासों के जरिए दोनों देशों को शांत करने और इन हमलों को रोकने में मदद की.

उन्होंने इसे अमेरिका के लिए गर्व का पल बताया क्योंकि अमेरिकी नेतृत्व के तह एक संभावित विनाशकारी स्थिति को टाल दिया.  ब्रूस ने कहा कि इन प्रयासों से दोनों पक्षों को एक साथ लाया गया और एक स्थायी समाधान की दिशा में काम किया गया.

ब्रूस ने कहा कि अमेरिका के भारत और पाकिस्तान के साथ संबंधों को बदला नहीं जा सकता. दोनों देशों के साथ अमेरिका की कूटनीतिक प्रतिबद्धता बरकरार है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि यह क्षेत्र और विश्व के लिए फायदेमंद हैं. हम अपने रिश्तों को नहीं बदल सकते.

टैमी ब्रूस ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर क्या-क्या कहा?

विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने कहा कि मैं उस समय विदेश विभाग में ही था. भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष जब चरम पर पहुंच गया तो राष्ट्रपति से लेकर उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री चिंतित थे और इसे सुलझाने में लग गए. हमारी पूरी कोशिश थी कि इस स्थिति को सामान्य किया जाए और हमलों को रोका जाए. 

उन्होंने कहा कि मैं कहना चाहूंगी कि हमारे रिश्ते दोनों देशों के साथ अच्छे हैं और ऐसे राष्ट्रपति के होने से फायदा है, जो सबकुछ जानता हो, हर किसी से बात करता हो और इसी वजह से हम स्थिति को संभाल पाएं.

बता दें कि 12 अगस्त को इस्लामाबाद में अमेरिका-पाकिस्तान आतंकवाद-रोधी वार्ता आयोजित की गई. इस वार्ता में दोनों देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से निपटने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया.

आसिम मुनीर की अमेरिका यात्राएं चर्चा में क्यों?

आसिम मुनीर दो महीने में दूसरी बार अमेरिका गए. इससे पहले जून 2025 में उनकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ निजी भोज पर मुलाकात हुई थी. वहीं, हाल ही में मुनीर ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर जनरल माइकल कुरिला की विदाई समारोह में भाग लिया और नए कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर को बधाई दी. कुरिला ने पाकिस्तान को आतंकवाद रोधी प्रयासों में शानदार साझेदार बताया था.

टैमी ब्रूस का यह बयान तब सामने आया, जब फ्लोरिडा में आसिम मुनीर ने कथित तौर पर कहा था कि अगर पाकिस्तान को अस्तित्व का खतरा हुआ तो वह भारत और आधे विश्व को नष्ट करने के लिए परमाणु हथियारों का उपयोग कर सकता है. 

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Wed, 13 Aug 2025 16:10:07 +0530 Newsdesk
‘भारत एक बूंद पानी नहीं छीन सकता…’ : मुनीर&भुट्टो के बाद PAK पीएम शहबाज शरीफ की नई धमकी https://citytoday.co.in/3317 https://citytoday.co.in/3317 कराची 

सिंधु जल समझौता अस्थायी रूप से स्थगित होने के बाद से पाकिस्तान बूंद-बूंद पानी के लिए तड़प रहा है. पाकिस्तान की बौखलाहट अब खुलकर सामने आ रही है. पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के बाद अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी पानी को लेकर भारत को गीदड़भभकी दी है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हक के पानी की एक भी बूंद भारत नहीं छीन पाएगा.

वहीं दूसरी ओर भारत ने चिनाब नदी पर नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है. यह प्रोजेक्ट जम्मू कश्मीर के सिंधु गांव के पास बनना है और इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है. भारत के इस कदम से पाकिस्तान को डर है कि भारत उसका पानी रोक देगा. इसी डर के कारण पाकिस्तान ने परमाणु बम की धमकियां देना शुरू कर दिया है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?

इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि उनका देश भारत को उसके हक का 'एक बूंद' पानी भी छिनने नहीं देगा. वे नदी के प्रवाह को रोकने की कोशिश न करें. 

उन्होंने कहा, 'मैं आज दुश्मन को बता देना चाहता हूं कि अगर वह पानी को रोकने की धमकी देता है तो याद रखना पाकिस्तान का एक भी बूंद पानी छीना नहीं जा सकता है. अगर ऐसे करने की कोशिश की तो याद रखना सबक सिखाया जाएगा और कान पकड़ने के लिए मजबूर हो जाओगे.'

सिंधु जल समझौते पर रोक 

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी घटना के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल समझौते पर औपचारिक रूप से रोक लगा दी थी. कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में इसे रद्द करने का फैसला लिया गया था. इसका उद्देश्य साफ था कि पाकिस्तान को आतंकवाद का संरक्षण देने के लिए सबक सिखाया जाए. 

भारत ने पहले भी इस समझौते की शर्तों पर पुनर्विचार करने और संशोधन करने की मांग की थी, हालांकि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान इसमें सहयोग नहीं कर रहा था. 

भारत का यह फैसला पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका रहा. क्योंकि पाकिस्तान की सिंचाई, कृषि और बिजली उत्पादन सतलज, ब्यास, रावी नदियों के पानी से होता है. 

बिलावल भुट्टो बोले – पीछे नहीं हटेगा पाकिस्तान

पूर्व विदेश मंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने भी सिंधु जल समझौते को रद्द करने के फैसले के ख़िलाफ जहर उगला है. भुट्टो ने निलंबन के फैसले को सिंधु घाटी सभ्यता और संस्कृति पर हमला बताया है. 

भुट्टो ने गीदड़भभकी देते हुए कहा कि अगर युद्ध हुआ तो हम झुकेंगे नहीं और सिंधु पर अतिक्रमण करने की हिम्मत की तो पाकिस्तान के लोग आपका मुकाबला करने के लिए तैयार हैं. मैंने पूरी दुनिया तक पैगाम पहुंचाया कि सिंधु जल समझौते पर भारत ने एकतरफा फैसला लिया है. पाकिस्तान और भारत की आवाम भी इस फैसले को गलत मानती है.

जब तिलमिलाया PAK सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर

इससे पहले पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अपने अमेरिका दौरे के दौरान सिंधु जल समझौते पर बयान दिया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुनीर ने कहा था कि अगर भारत सिंधु नदी पर डैम बनाता है तो उसे बनाने देंगे. जब तक डैम बनने का काम पूरा होगा तब तक हम इंतज़ार करेंगे और भारत जब ऐसा कर लेगा तो मिसाइल मारकर उसे गिरा देंगे. 

सेना प्रमुख जनरल मुनीर ने कहा कि भारत का एकतरफा फैसले ने पाकिस्तान के 25 करोड़ लोगों को भुखमरी की ओर ढकेल दिया है. सिंधु नदी भारत की पारिवारिक संपत्ति नहीं है. पाकिस्तान परमाणु संपन्न देश है. हमारे पास मिसाइलों की कमी नहीं है. अगर हमें लगता है कि हम डूब रहे हैं तो आधी दुनिया को साथ ले डूबेंगे. 

पाकिस्तान के लिए सिंधु जल समझौता रद्द होने के मायने क्या हैं?

पाकिस्तान का ज़रूरत का अधिकांश पानी भारत की नदियों से बहकर आता है. सिंधु, झेलम, और चिनाब जैसे नदियों से पाकिस्तान का 80 फीसदी सिंचाई और कृषि उत्पादन निर्भर करता है. पाकिस्तान की 70 फीसदी पानी की जरूरतें भी यही नदियां करती हैं. ख़रीफ़ और रबी सीज़न के दौरान पानी की बुवाई-कटाई के दौरान सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है. अगर ऐसे समय भारत पानी रोक देगा तो पाकिस्तान में पानी की किल्लत हो जाएगी. वहां के लाखों किसानों की आजीविका खत्म हो जाएगा. पाकिस्तान में भुखमरी छा जाएगी. 

खेती के अलावा पाकिस्तान में पेयजल का भी संकट झा जाएगा. उनके प्रमुख शहर जैसे – लाहौर, कराची और इस्लामाबाद की पानी की जरूरतों को भी इन्हीं से पूरा किया जाता है. पानी के किल्लत से वहां का टेक्सटाइल उद्योग बुरी तरह से प्रभावित होगा. पाक का कुल निर्यात का 60 फीसदी इसी सेक्टर से होता है. 

पानी के रोक से बिजली की भी किल्लत हो जाएगा. उनके ऊर्जा उत्पादन पर इसका गंभीर असर पड़ेगा. पड़ोसी मुल्क की 33 फीसदी ऊर्जा हाइड्रोपावर के ज़रिए आपूर्ती की जाती है.  

सिंधु जल संधि और विवाद

1960 की सिंधु जल संधि में भारत को रावी, व्यास और सतलुज नदियों का नियंत्रण मिला था, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया.

हाल में भारत ने यह संधि स्थगित कर दी और झेलम नदी पर जलविद्युत परियोजना शुरू करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी. यही बात पाकिस्तान को खटक रही है और वह डर के मारे एटम बम की धमकी दे रहा है.

मौजूदा हालात

रिपोर्ट है कि पाकिस्तान ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के कर्मचारियों के पानी और गैस की सप्लाई रोकने की कोशिश की है. यदि पाकिस्तान ने अपनी हरकतें नहीं रोकीं, तो भारत की सेना और सरकार कड़े कदम उठा सकती हैं.

गिड़गिड़ा रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान पानी के मुद्दे पर युद्ध की धमकी दे रहा है, लेकिन असल में वह भारत के सामने संधि बहाल करने की अपील भी कर रहा है. भारत अपने हितों को देखते हुए सावधानी से कदम बढ़ा रहा है और हर परिस्थिति के लिए तैयार है.

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Wed, 13 Aug 2025 15:56:14 +0530 Newsdesk
ट्रंप प्रशासन के निर्वासन फैसले पर रोक, लाखों प्रवासियों को राहत https://citytoday.co.in/3213 https://citytoday.co.in/3213

वॉशिंगटन

अमेरिका की एक संघीय जज ने ट्रंप प्रशासन के त्वरित निर्वासन के आदेश पर रोक लगा दी है। दरअसल ट्रंप प्रशासन ने मानवीय पैरोल पर अमेरिका आए अप्रवासियों को निर्वासित करने के लिए त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए थे, जिसके तहत होमलैंड सिक्योरिटी को अप्रवासियों को जज के सामने पेश किए बिना उन्हें निर्वासित करने की शक्ति मिल गई थी। हालांकि अब अदालत ने इस पर रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले से लाखों लोगों को फायदा हो सकता है।

अप्रवासी अधिकार समूहों ने दायर की थी याचिका
मानवीय पैरोल, अमेरिकी कानून का ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत विदेशी नागरिकों को मानवीय आधार पर अमेरिका में कुछ समय तक रहने की इजाजत दी जाती है। यह होमलैंड सिक्योरिटी विभाग द्वारा दी जाती है, लेकिन हाल ही में होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम ने मानवीय पैरोल पर अमेरिका में रह रहे अप्रवासियों को तुरंत निर्वासित करने का आदेश दिया था। इसके बाद बड़ी संख्या में अप्रवासियों को हिरासत में लिया गया। अप्रवासी अधिकार समूहों ने होमलैंड सिक्योरिटी के इस एक्शन के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए वॉशिंगटन में यूएस डिस्ट्रिक्ट जज जियो कोब ने ट्रंप प्रशासन के आदेश पर रोक लगा दी।

मानवीय पैरोल पर अमेरिका में रह रहे लोगों को मिलेगा फायदा
जज का आदेश सिर्फ उन अप्रवासियों पर लागू होगा, जो मानवीय पैरोल के तहत अमेरिका आए हैं। साथ ही यह रोक अभी अस्थायी तौर पर है और मामले की सुनवाई पूरी होने तक ही फिलहाल ये रोक रहेगी। जज ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में सवाल ये है कि क्या उत्पीड़न और शोषण से बचकर भागे लोगों को नियमों से चलने वाली व्यवस्था में सुनवाई हो सकती है या नहीं। 

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Sat, 02 Aug 2025 18:27:36 +0530 news desk MPcg
‘पोर्टा पॉटी पार्टी’ का सच आया सामने, यूक्रेनी मॉडल ने दुबई की उस रात का किया खुलासा https://citytoday.co.in/3119 https://citytoday.co.in/3119 दुबई
दुबई की 'पोर्टा पॉटी पार्टी' तब सुर्खियों में आया, जब यूक्रेन की एक मॉडल सड़क किनारे बुरी तरह से जख्मी हालत में मिली थी. उसकी रीढ़ की हड्डी टूट चुकी थी. परिवार वालों ने दावा किया था कि वह दुबई के उस बदनाम पार्टी में शामिल हुई थी, जिसके बाद उसका ये हाल हुआ.  फिर दावा किया गया कि मॉडल की मौत हो चुकी है, लेकिन वह कोमा में थी . अब वह सामने आई है और उसने उस रात की सच्चाई बताई कि वाकई में उसके साथ दुबई में क्या हुआ था?  

डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेनी पोर्टा पॉटी पार्टी मॉडल ने माना कि दुबई के एक फाइव स्टार होटल में आयोजित पार्टी में लोगों ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया था. इस मॉडल का नाम मारिया कोवलचुक है, जिसे दुबई में छुट्टियों के दौरान एक खतरनाक और जोखिम भरी पार्टी में आमंत्रित किया गया था.  मारिया ने बताया कि वह पोर्टा पॉटी पार्टी थी, जिसमें उन्हें बुलाया गया था और फिर उस रात मेजबानों ने उसके साथ गंभीर दुर्व्यवहार किया. 

यूक्रेनी मॉडल ने दावा किया है कि पोर्टा पॉटी पार्टी के दौरान दुर्व्यवहार करने वालों ने उसके शरीर के विभिन्न हिस्सों में गंभीर चोट पहुंचाई. 21 साल की मारिया कोवलचुक जब दुबई की यात्रा पर रही थीं, तो उन्हें इस खूबसूरत शहर में एक शानदार पार्टी में आमंत्रित किया गया था. वह बिना कुछ सोचे दो लोगों के साथ पार्टी करने चली गई थीं. 

पार्टी में जाने के बाद मॉडल को बना लिया था बंधक
कुछ दिनों बाद वह दुबई में सड़क के किनारे गंभीर रूप से जख्मी हालत में मिली और फिर कोमा में चली गई. क्योंकि उसके शरीर और मस्तिष्क पर भयानक चोटें आई थीं. मॉडल का दावा है कि दुर्व्यवहार के दौरान उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी. मारिया ने बताया कि पार्टी में जाने के बाद उन्हें इनवाइट करने वालों ने  किडनैप कर लिया था. उनलोगों ने कहा कि तुम मेरी हो और हम जो चाहे तुम्हारे साथ कर सकते हैं. 

उनलोगों ने उसके सिर की चमड़ी उधेड़ने की कोशिश की, इस वजह से सिर पर गंभीर जख्म हो गया.  उसके हाथ-पैर तोड़ दिए गए, चेहरे पर भी चोट पहुंचाई गई. 

खोपड़ी चीरने की गई थी कोशिश
यूक्रेनी टीवी शो में मारिया की मां अन्ना ने बताया था कि वह मार्च में दुबई से लापता हो गई थी. उसके बाद मॉडल दुबई में ही सड़क किनारे कोमा में मिली थी. उसके माथे से लेकर खोपड़ी के ऊपर तक चाकू से वार कर एक बड़ा निशान बना दिया गया था और रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई थी. तब से अब तक वह कोमा में थी. अन्ना ने कहा कि डॉक्टरों ने उनके सिर की त्वचा को फिर से जोड़ने के लिए अथक प्रयास किया, और उनके सिर के पिछले हिस्से पर टांके भी लगाने पड़े. 

मारिया दुबई के एक पांच सितारा होटल में एक पार्टी में गई थीं, जहां अगले कुछ दिनों तक उसे बंधक बनाकर रखा गया और पार्टी के नाम पर  उनके साथ गंभीर दुर्व्यवहार हुआ. अन्ना ने बताया कि मारिया के शरीर पर इतने गहरे जख्म थे कि कई सारी सर्जरी की गई.

दुबई के शेखों की नहीं बल्कि रूसी लोगों की थी पार्टी
अन्ना ने बताया कि उनकी बेटी के साथ दुबई में ही एक बड़ी पार्टी में दुर्व्यवहार जरूर हुआ, लेकिन ये हिंसा 'शेखों' ने नहीं, बल्कि वहां रहने वाले रईस रूसियों ने की थी. उन्होंने  कहा कि मेरा मानना है कि वेलोग एक मानव तस्करी रैकेट चला रहे हैं. क्योंकि उन लोगों ने मारिया का पासपोर्ट और फोन भी ले लिया था और कहा कि वह उनकी है और वे जो कहेंगे उसे वह करना होगा. वे उसे मानसिक रूप से तोड़ना चाहते थे.

दो रूसियों को पूछताछ के बाद दुबई पुलिस ने छोड़ा
इस साज़िश में शामिल होने के आरोपी दो रूसियों ने सार्वजनिक रूप से इस बात से इनकार किया है कि मारिया के साथ जो कुछ भी हुआ, उससे उनका कोई लेना-देना है.  19 साल के आर्टेम पापाजोव और एलेक्जेंड्रा मेर्टसालोवा, रूस के प्रमुख व्यापारिक परिवारों से ताल्लुक रखते  हैं.दोनों से संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने पूछताछ की थी, लेकिन उन्हें जांच से मुक्त कर दिया गया.

कार से फेंकने की वजह से आई गंभीर चोट
दुबई पुलिस ने उस थ्योरी की भी जांच की जिसमें कहा गया था कि मारिया ने पार्टी छोड़कर आठ मंजिल की बालकनी से पास के एक निर्माण स्थल पर कूदकर आत्महत्या की कोशिश की होगी. हालांकि, एक न्यूरोसर्जन ने बताया कि चोटें गिरने से नहीं, बल्कि पिटाई और कार से फेंके जाने से आई होंगी.

नतीजतन, कहानी में पांच घंटे का गैप है. मारिया कैसे पार्टी छोड़कर बाहर कोमा में चली गई, इसकी वजह अब भी अज्ञात है.  घटना के बाद से, मारिया नॉर्वे में रह रही है और उसकी मां अन्ना उसकी देखभाल कर रही है.

मॉडल को अब भी मिल रही धमकी
मारिया अब धीरे-धीरे ठीक हो रही है. बैसाखियों के सहारे चलना सीख रही है.  साथ ही अपने साथ हुए भयानक दुर्व्यवहार को भी स्वीकार किया है कि उसे कथित पोर्टा पॉटी पार्टी में ले जाया गया था, जहां उसे टॉर्चर किया गया.  हालांकि, मारिया और अन्ना अभी भी डरी हुई हैं क्योंकि उन्हें अनजान नंबरों से गुमनाम संदेश मिले हैं, जिनमें लिखा है -हम तुम्हें ढूंढ लेंगे, नॉर्वे में भी.

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Mon, 28 Jul 2025 12:46:50 +0530 City Today Bhopal
इजरायली युवतियों की जासूसी! युवक बना रहा था आपत्तिजनक वीडियो, तुर्की दूतावास से कनेक्शन https://citytoday.co.in/3120 https://citytoday.co.in/3120 तेल अवीव

इज़रायल पुलिस ने 29 वर्षीय विदेशी नागरिक को यौन उत्पीड़न के संदेह में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने तेल अवीव में बीच स्थित महिलाओं के चेंजिंग रूम में नाबालिग लड़कियों की मोबाइल से वीडियो बना रहा था। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि आरोपी तुर्की दूतावासा का कर्मचारी है।

रविवार को जारी पुलिस बयान के अनुसार, 100 इमरजेंसी हेल्पलाइन पर एक कॉल आया, जिसमें बताया गया कि एक व्यक्ति महिलाओं के चेंजिंग एरिया में घुसकर वहां मौजूद लड़कियों की वीडियो बना रहा है। तेल अवीव सेंट्रल स्टेशन और स्पेशल पेट्रोल यूनिट के अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को बीच के पास ही पकड़ लिया।

आरोपी का तुर्की दूतावास से संबंध

इज़रायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी व्यक्ति तुर्की दूतावास में कार्यरत बताया जा रहा है। हालांकि, इस बारे में आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ की और उसे हिरासत में ले लिया गया। शनिवार रात उसे तेल अवीव मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसकी हिरासत को 28 जुलाई तक बढ़ा दिया गया।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और इज़राइली पुलिस इस गंभीर घटना को लेकर सतर्क है, खासकर चूंकि इसमें एक विदेशी मिशन से जुड़े व्यक्ति का नाम आ रहा है।

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Mon, 28 Jul 2025 12:46:50 +0530 City Today Bhopal
कांगो: चर्च पर IS समर्थित हमलावरों का हमला, 21 की दर्दनाक मौत https://citytoday.co.in/3121 https://citytoday.co.in/3121 कांगो 

पूर्वी कांगो के कोमांडा में रविवार को इस्लामिक स्टेट समर्थित विद्रोहियों द्वारा एक चर्च पर किए गए हमले में कम से कम 21 लोग मारे गए. समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्स (ADF) के सदस्यों द्वारा कोमांडा में एक कैथोलिक चर्च के परिसर के अंदर रात के लगभग 1 बजे किया गया. 

कोमांडा में सिविल सोसाइटी को-ऑर्डिनेटर, डियूडोने डुरानथाबो ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया, '21 से ज्यादा लोगों को अंदर और बाहर गोली मार दी गई और हमने कम से कम तीन जले हुए शव और कई घरों के जल जाने की सूचना दी है. जलाए गए घरों में और किसी के होने को लेकर तलाश जारी है.'

डुरानथाबो ने कहा, 'हम सचमुच निराश हैं क्योंकि यह अविश्वसनीय है कि ऐसे शहर में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है जहां सभी सुरक्षा अधिकारी मौजूद हैं.' उन्होंने आगे कहा, 'कुछ नागरिक इलाके से भागने लगे हैं और बुनिया की ओर बढ़ रहे हैं. हम यथाशीघ्र सैन्य हस्तक्षेप की मांग करते हैं, क्योंकि हमें बताया गया है कि दुश्मन अभी भी हमारे शहर के निकट है.'

एडीएफ नागरिकों को बनाता है निशाना

कांगो सेना के प्रवक्ता ने 10 लोगों की मौत की पुष्टि की है. इतुरी में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जूल्स एनगोंगो ने कहा, 'आज सुबह हमें पता चला कि कोमांडा से कुछ ही दूरी पर एक चर्च में हथियारबंद लोगों ने घुसपैठ की, जहां लगभग 10 लोगों की हत्या कर दी गई और कुछ दुकानों में आग लगा दी गई.'

इस महीने की शुरुआत में, इस्लामिक स्टेट समर्थित विद्रोहियों ने इतुरी में दर्जनों लोगों की हत्या कर दी थी, जिसे संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने रक्तपात बताया था. एडीएफ, जिसका इस्लामिक स्टेट से संबंध है, एक विद्रोही समूह है जो युगांडा और कांगो के बीच सीमा क्षेत्र में सक्रिय है. यह समूह नियमित रूप से नागरिकों पर हमले करता रहा है.

एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्स 1990 में बना

एडीएफ का गठन 1990 के दशक के अंत में युगांडा में राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी के साथ कथित असंतोष के बाद अलग-अलग छोटे समूहों द्वारा किया गया था. युगांडा की सेनाओं द्वारा 2002 में हमलों के बाद, एडीएफ ने अपनी गतिविधियां पड़ोसी देश कांगो में शुरू कर दीं और तब से यह समू​ह हजारों नागरिकों की हत्याओं के लिए जिम्मेदार रहा है. 2019 में, इसने इस्लामिक स्टेट के प्रति निष्ठा की शपथ ली. एडीएफ का नेतृत्व इस पूर्वी अफ्रीकी देश में एक इस्लामी सरकार की कल्पना करता है. 

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Mon, 28 Jul 2025 12:46:50 +0530 City Today Bhopal
टेकऑफ से पहले बड़ा हादसा टला, लैंडिंग गियर में आग के बावजूद सुरक्षित बचा विमान https://citytoday.co.in/3122 https://citytoday.co.in/3122 डेनवर 

अमेरिका एक बड़ा विमान हादसे का गवाह बनने से बाल-बाल बचा है। डेनवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर  दोपहर एक बड़ा विमान हादसा उस समय टल गया जब अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट AA3023 के लैंडिंग गियर में आग लग गई। यह घटना उस समय हुई जब विमान टेकऑफ की तैयारी ही कर रहा था। विमान में सवार सभी 173 यात्री और 6 क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। हालांकि, एक यात्री को मामूली चोट के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अन्य पांच यात्रियों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार के बाद छोड़ दिया गया।

यह घटना शनिवार दोपहर लगभग 2:45 बजे (अमेरिका के समय के मुताबिक) हुई, जब फ्लाइट AA3023 डेनवर से मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (MIA) के लिए उड़ान भरने वाली थी। विमान रनवे 34L पर टेकऑफ की तैयारी में था, तभी लैंडिंग गियर में एक टायर में खराबी सामने आई। इसके कारण उसमें आग लग गई। डेनवर फायर डिपार्टमेंट और एयरपोर्ट प्रशासन ने तुरंत मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया। सभी यात्रियों को आपातकालीन स्लाइड्स के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला गया।

अमेरिकन एयरलाइंस ने इस घटना की पुष्टि की है कि विमान बोइंग 737 मैक्स 8 था और उसमें टायर से संबंधित तकनीकी समस्या आई थी। एयरलाइन ने कहा कि प्रभावित विमान को सेवा से हटा दिया गया है और पूरी जांच की जाएगी। विमान को गेट C34 से रवाना होना था और निर्धारित समय दोपहर 1:12 बजे था। FAA (फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन) ने इसे संभावित लैंडिंग गियर की खराबी के रूप में रिपोर्ट किया है।

इस घटना के चलते डेनवर एयरपोर्ट पर दोपहर 2:00 बजे से 3:00 बजे तक ग्राउंड स्टॉप लागू किया गया, जिससे 87 उड़ानों में देरी हुई। हालांकि शाम तक सभी सेवाएं सामान्य रूप से शुरू हो गई थीं।

गौरतलब है कि अमेरिकन एयरलाइंस के साथ डेनवर में यह दूसरी बड़ी घटना है। मार्च 2025 में, इसी एयरलाइन के एक अन्य विमान में इंजन में खराबी आने के कारण आपात लैंडिंग करनी पड़ी थी। अमेरिकन एयरलाइंस ने यात्रियों को मियामी ले जाने के लिए एक वैकल्पिक विमान की व्यवस्था की, जिसने शाम को उड़ान भरी।

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Mon, 28 Jul 2025 12:46:50 +0530 City Today Bhopal
गाजा में भुखमरी के बीच इजरायल का फैसला, तीन क्षेत्रों में रोकेगा सैन्य कार्रवाई https://citytoday.co.in/3118 https://citytoday.co.in/3118 गाजा में बिगड़ती मानवीय स्थिति के बीच इजरायल कुछ क्षेत्रों में अस्थायी रूप से रोकेगा सैन्य अभियान
तेल अवीव: इजरायल की सेना ने रविवार को घोषणा की कि वह गाजा पट्टी में बिगड़ती मानवीय स्थिति को देखते हुए तीन क्षेत्रों में अस्थायी रूप से सैन्य अभियान रोक रही है। सेना के अनुसार, यह अस्थायी रोक हर दिन स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक लागू रहेगी। यह निर्णय मुवासी, दीर अल-बलाह और गाजा सिटी क्षेत्रों के लिए प्रभावी होगा।

सेना ने एक बयान में कहा कि यह कदम मानवीय सहायता एजेंसियों को गाजा के नागरिकों तक भोजन और जरूरी आपूर्ति पहुँचाने में सहयोग देने के लिए उठाया गया है। साथ ही, सेना सुरक्षित मार्ग भी निर्धारित करेगी ताकि राहत सामग्री निर्बाध रूप से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच सके।

भुखमरी के चलते जा रही लोगों की जान
इससे पहले शनिवार को इजरायली सेना ने कहा था कि गाजा में हवाई मार्ग के जरिए राहत सामाग्री की आपूर्ति की जाएगी। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के काफिलों के लिए गलियारे की व्यवस्था की जाएगी। उसने यह बयान ऐसे समय में जारी किया था जब गाजा में भुखमरी के कारण होने वाली मौतों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों ने कई महीनों तक वहां अकाल पड़ने की चेतावनी दी है। मार्च में इजरायल द्वारा सभी क्रॉसिंग बंद कर दिए जाने के बाद यहां आवश्यक वस्तुओं की पहुंच गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। गाजा में हाल के सप्ताह में राहत-सामाग्री प्राप्त करने के प्रयास के दौरान कई फिलस्तीनी मारे गए हैं। इस बीच फिलिस्तीनी सूत्रों एवं प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि शनिवार शाम को उत्तरी गाजा के विभिन्न स्थानों पर मानवीय सहायता का हवाई वितरण फिर से शुरू हुआ।

मिस्र फ्रांस में चर्चा
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने शनिवार को अपने फ्रांसीसी समकक्ष इमैनुएल मैक्रों के साथ फोन पर बातचीत कर गाजा पट्टी में युद्धविराम के लिए मध्यस्थता के प्रयासों पर चर्चा की। यह जानकारी रविवार को मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान में दी। दोनों नेताओं ने गाजा के लोगों को पर्याप्त मानवीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तावों के अनुसार फिलिस्तीन मुद्दे का न्यायसंगत एवं व्यापक समाधान निकालने की आवश्यकता पर भी बल दिया। सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के आगामी 80वें सत्र के दौरान फिलिस्तीन को आधिकारिक रूप से मान्यता देने के श्री मैक्रों की हालिया घोषणा का स्वागत करते हुए श्री सिसी ने कहा कि यह निर्णय दो-राष्ट्र समाधान को लागू करने के लिए फ्रांस के प्रयासों का हिस्सा है।

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Mon, 28 Jul 2025 12:37:10 +0530 news desk MPcg
इस्लाम और अरबी अब इजरायली सैनिकों के लिए अनिवार्य, क्या है इसके पीछे की रणनीति? https://citytoday.co.in/3112 https://citytoday.co.in/3112 तेल अवीव

इजरायल डिफेंस फोर्स (IMF) ने खुफिया विभाग के सैनिकों और अधिकारियों के लिए अरबी भाषा व इस्लामी स्टडी की ट्रेनिंग जरूरी कर दी है। रिपोर्ट में बताया गया कि 7 अक्टूबर, 2023 को हुई खुफिया विफलता को देखते हुए यह फैसला लिया गया। माना जा रहा है कि इस पहल से खुफिया अफसरों की जांच का दायरा और बढ़ेगा। अगले साल के अंत तक AMAN (इजरायल के सैन्य खुफिया निदेशालय का हिब्रू में नाम) के सभी कर्मियों से इस्लामी अध्ययन कराया जाएगा। साथ ही, 50 प्रतिशत कर्मियों को अरबी भाषा सिखाई जाएगी। यह आदेश अमन के प्रमुख मेजर जनरल श्लोमी बाइंडर ने जारी किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आईडीएफ के इस कार्यक्रम में हूती और इराकी बोलियों पर भी ध्यान दिया जाएगा। खुफिया कर्मियों को फिलहाल हूती में बातों को समझने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट में बताया गया कि यमन और अन्य अरब क्षेत्रों के ज्यादातर लोगों को कात (हल्का नशीला पौधा) चबाने की आदत है। इससे साफ बोलने में दिक्कत आने लगती है। सीनियर अधिकारी ने आर्मी रेडियो को बताया, 'अब तक हम संस्कृति, भाषा और इस्लाम के क्षेत्रों में सक्षम नहीं रहे हैं। हमें इनमें सुधार करने की जरूरत है। हम अपने खुफिया अधिकारियों और सैनिकों को अरब गांवों में पले-बढ़े बच्चों जैसा तो नहीं बना सकते, लेकिन भाषा और सांस्कृतिक अध्ययन से उनकी समझ को बढ़ाया जा सकता है।'

स्कूल में अरबी को बढ़ावा

आर्मी रेडियो के सैन्य संवाददाता डोरोन कादोश ने बताया कि अरबी और इस्लामी शिक्षा के लिए एक नया विभाग स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, आईडीएफ ने मिडिल और हाई स्कूलों में अरबी को बढ़ावा देने के लिए टेलेम विभाग को फिर से खोलने की योजना बनाई है। पहले यह विभाग बजट की कमी के कारण बंद कर दिया गया था। इसके चलते अरबी पढ़ने वाले कर्मियों की संख्या में भारी कमी आई है। अब जरूरत महसूस होने पर इसे दोबारा शुरू करने की तैयारी है।

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Sat, 26 Jul 2025 17:30:29 +0530 City Today Bhopal
बांग्लादेश बैंक की कपड़ों पर पाबंदी जारी रही कुछ घंटे, फैशन को तय करने का फैसला वापस लिया गया https://citytoday.co.in/3113 https://citytoday.co.in/3113 ढाका 
बांग्लादेश में तालिबान की तरह मोरल पुलिसिंग करने की मोहम्मद यूनुस सरकार की कोशिश मुंह के बल गिरी है. बांग्लादेश के सेंट्रल बैंक ने ऑर्डर जारी कर कहा था कि दफ्तर महिला अधिकारियों को शॉर्ट ड्रेस, शॉर्ट स्लीव और लेगिंग्स पहनने की अनुमति नहीं होगी.

बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ने तीन दिन पहले महिला कर्मचारियों को 'शालीन और पेशेवर' कपड़े पहनकर दफ्तर आने कहा था. बांग्लादेश बैंक के मानव संसाधन विभाग ने यह भी चेतावनी दी थी कि आदेश का पालन न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. लेकिन सोशल मीडिया में तूफान उठ खड़ा हुआ.

लोग बांग्लादेश बैंक मैनेजमेंट को फेसबुक और एक्स पर 'शालीन और पेशेवर' की परिभाषा बताने लगे. बात इतनी बढ़ी कि फिलहाल बांग्लादेश बैंक ने आदेश वापस ले लिया है. कई लोगों ने इस आदेश की तुलना तालिबानी ऑर्डर की. 

रद्द किए गए आदेश के तहत पुरुष कर्मचारियों को लंबी या आधी बाजू वाली औपचारिक शर्ट, औपचारिक पैंट और जूते पहनने का निर्देश दिया गया था, जबकि जींस और फैंसी पजामे पहनने की अनुमति नहीं थी. 

महिलाओं के लिए जारी निर्देश में सभी महिलाओं को साड़ी, सलवार-कमीज, कोई अन्य सादा, शालीन, पेशेवर परिधान, साधारण हेडस्कार्फ़ अथवा हिजाब पहनने के लिए कहा गया था. इस आदेश के तहत उन्हें औपचारिक सैंडल या जूते पहनने की अनुमति दी.

केंद्रीय बैंक के आदेश में महिलाओं को छोटी बाजू के कपड़े या लंबे ढीले पोशाक और लेगिंग पहनने से मना किया गया था. 

निर्देश में कहा गया था कि, "सभी स्तरों के अधिकारियों और कर्मचारियों को देश के सामाजिक मानदंडों के अनुरूप शालीन और पेशेवर ढंग से कपड़े पहनने चाहिए."

इस आदेश का विरोध करते हुए एक्स पर एक यूजर ने लिखा कि इस्लामिक एजेंडे के तहत बांग्लादेश बैंक ने महिला अधिकारियों को शॉर्ट स्लीव और लैंगिंग्स नहीं पहनने को कहा है. लेकिन बांग्लादेश बैंक के गवर्नर की बेटी अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी पहनती है.

इसके अलावा सभी विभागों को ड्रेस कोड दिशानिर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए एक अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था. 

कुछ लोगों ने इस आदेश की तुलना अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन के आदेशों से भी की जिसमें सभी महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर सिर से पांव तक कपड़े पहनने का आदेश दिया गया है.

एक यूजर ने ट्वीट किया, "नए तालिबानी युग में एक सतर्क तानाशाह का शासन."

बांग्लादेश महिला परिषद की अध्यक्ष फ़ौजिया मुस्लिम ने स्थानीय मीडिया को बताया कि बांग्लादेश में ऐसा निर्देश अभूतपूर्व है. उन्होंने कहा, "एक खास सांस्कृतिक माहौल को आकार दिया जा रहा है, और यह निर्देश उसी प्रयास को दर्शाता है."

सोशल मीडिया पर मचे बवाल के बीच बांग्लादेश बैंक ने गुरुवार को यह निर्देश वापस ले लिया. प्रवक्ता आरिफ़ हुसैन खान ने कहा कि, "यह सर्कुलर पूरी तरह से एक सलाह है. हिजाब या बुर्का पहनने के संबंध में कोई बाध्यता नहीं लगाई गई है."

वहीं इस विवाद के बीच बुधवार रात पारित एक अध्यादेश ने नागरिकों को और भी ज्यादा नाराज कर दिया है. इसमें सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव है.

बांग्लादेश में बढ़ता तालिबानी असर

गौरतलब है कि बांग्लादेश में हाल के कुछ महीनों में कट्टरपंथी तत्वों का उभार हुआ है. यहां तालिबानी विचारधारा का फुटप्रिंट भी बढ़ा है. रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में इस्लामिक विचारधारा का प्रभाव इतना बढ़ा है कि युवा अब तालिबान और TTP की ओर आकर्षित हो रहे हैं. बांग्लादेश से कम से कम दो पाकिस्तानी तालिबानी सदस्यों के पाकिस्तान होते हुए अफ़ग़ानिस्तान जाने के सबूत मिले हैं. उनमें से एक अप्रैल में वज़ीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना के साथ मुठभेड़ में मारा गया था.

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मलेशिया ने जून में 36 बांग्लादेशी नागरिकों को आतंकवादी नेटवर्क से कथित संबंधों के आरोप में हिरासत में लिया था. 

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Sat, 26 Jul 2025 17:30:29 +0530 City Today Bhopal
कोल्डप्ले कॉन्सर्ट का वीडियो वायरल, HR हेड ने सार्वजनिक विवाद के बाद दिया इस्तीफा https://citytoday.co.in/3114 https://citytoday.co.in/3114 वाशिंगटन

पिछले दिनों अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी एस्ट्रोनॉमर (Astronomer) के सीईओ एंडी बायरन और कंपनी की एचआर हेड क्रिस्टिन कैबोट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वायरल वीडियो में वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में नजर आ रहे हैं. ये वीडियो बोस्टन के गिलेट स्टेडियम में कोल्डप्ले के हालिया कॉन्सर्ट के वक्त बनाया गया था.

वीडियो वायरल होने के बाद पहले एंडी बायरन ने इस्तीफा दिया और अब क्रिस्टिन कैबोट ने भी टेक फर्म छोड़ दिया है. 

कैबोट और एंडी बायरन उस वक्त शॉक हो गए थे, जब बोस्टन के जिलेट स्टेडियम में 55 हजार लोगों के सामने एक बड़ी स्क्रीन पर उनके मुस्कुराते हुए चेहरे दिखाई दिए थे.

स्क्रीन पर खुद की तस्वीरें देखने के बाद बायरन और सुश्री कैबोट खचाखच भरे स्टेडियम में शर्मिंदगी महसूस करने के बाद छिपने के लिए दौड़ते देखे गए थे. बता दें कि दोनों के पास अपना परिवार है.

विदेशी मीडिया के मुताबिक, एस्ट्रोनॉमर के एक कर्मचारी ने बताया, "क्रिस्टिन कैबोट अब एस्ट्रोनॉमर में नहीं हैं, उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है."

'आचरण और जवाबदेही…'

यह खबर बायरन द्वारा 'कंपनी के मानकों पर खरा न उतरने' के बाद अपने पद से इस्तीफ़ा देने के कुछ ही दिनों बाद आई है. कंपनी ने एक बयान में कहा, "जैसा कि पहले कहा गया है, एस्ट्रोनॉमर उन मूल्यों और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्ध है, जो हमारी फाउंडिंग के वक्त से ही हमें आगे का रास्ता दिखाते रहे हैं. हमारे ऑफिसर्स से आचरण और जवाबदेही दोनों में मानक स्थापित करने की अपेक्षा की जाती है, और हाल ही में, उस मानक को पूरा नहीं किया गया."

कंपनी ने कहा कि एंडी बायरन ने अपना इस्तीफ़ा दे दिया है और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने उसे स्वीकार कर लिया है. बोर्ड हमारे अगले मुख्य कार्यकारी अधिकारी की तलाश शुरू करेगा क्योंकि को-फाउंडर और चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर पीट डेजॉय अंतरिम सीईओ के रूप में काम करना जारी रखेंगे.

ऐसे नजर आया कपल…

दरअसल, बुधवार रात कोल्डप्ले के कॉन्सर्ट के दौरान जब किस कैम ने दर्शकों में मौजूद कपल्स पर फोकस किया तो कैमरा एंडी बायरन और क्रिस्टिन कैबोट पर रुक गया. वीडियो में दोनों एक-दूसरे की बाहों में नजर आए. लेकिन जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि वह स्क्रीन पर दिखाए जा रहे हैं, तो बायरन ने जल्दी से खुद को छिपाने की कोशिश की और कैबोट ने अपने चेहरे को हाथों से ढक लिया. इसके बाद मौके की नजाकत को समझते हुए सिंगर क्रिस मार्टिन ने कहा, 'ओह… या तो ये दोनों अफेयर में हैं या फिर बहुत शर्मीले हैं.'

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Sat, 26 Jul 2025 17:30:29 +0530 City Today Bhopal
थाईलैंड ने लॉन्च किया ऑपरेशन ‘Yuttha&Bodin’, रूसी रॉकेट से कंबोडिया का पलटवार https://citytoday.co.in/3115 https://citytoday.co.in/3115 बैंकॉक/नोम पेन्ह
 थाईलैंड और कंबोडिया के बीच युद्ध भयानक होता जा रहा है। थाईलैंड की सेना ने अब कंबोडिया के खिलाफ 'ऑपरेशन युथा बोडिन' लॉन्च करने का ऐलान किया है। थाई सेना ने कहा है कि वो 'पवित्र भूमि के लिए युद्ध' शुरू कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक थाईलैंड की सेना ने ऑपरेशन लॉन्च करने की घोषणा करते हुए कहा है कि उसका मकसद 'थाई भूमि पर अतिक्रमण करने वालों को कुचलने' की है। कंबोडिया की सेना पर जबरदस्त हमला करते हुए थाईलैंड की सेना ने 'युथा बोडिन' नाम से जबरदस्त जमीनी और हवाई हमला शुरू कर दिया है। जिसके बाद सीमा पर जारी हिंसक झड़पों के दूसरे दिन थाईलैंड की सरकार ने 4 सीमावर्ती प्रांतों से एक लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अब तक 15 लोगों की मौत की रिपोर्ट दर्ज दी गई है, जिनमें 14 आम नागरिक हैं।

आपको बता दें कि गुरुवार को सुबह सुबह दोनों देशों की सेनाओं के बीच एक विवादित इलाके में गोलीबारी शुरू होने के साथ युद्ध शुरू हो गई थी। जल्द ही यह झड़प भारी हथियारों और रॉकेट हमलों में तब्दील हो गई। थाई सेना ने बयान में कहा है कि कंबोडियाई सेना ने BM-21 ग्रैड रॉकेट सिस्टम और फील्ड आर्टिलरी का इस्तेमाल किया है। इसके अलावा थाईलैंड की सेना ने कहा है कि 'स्थिति के मुताबिक उचित कार्रवाई की जा रही है।' जबकि कंबोडिया ने दावा किया कि थाई सैनिकों ने बिना उकसावे के उनके इलाके में घुसपैठ की, जिसके जवाब में उन्होंने 'आत्मरक्षा के अधिकार' के तहत कार्रवाई की है।

थाईलैंड का 'युथा बोडिन' ऑपरेशन कितना खतरनाक?
आपको बता दें कि थाईलैंड की भाषा में 'युथा बोडिन' का मतलब "भूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च युद्ध" होता है। 'युथा' युद्ध का प्रतीक है, जबकि 'बोडिन' पवित्र भूमि को दर्शाता है। थाईलैंड के सैन्य अधिकारियों के मुताबिक यह नाम थाईलैंड की संप्रभुता का उल्लंघन करने की हिम्मत करने वाले किसी भी विरोधी के खिलाफ एक निर्णायक और वैध रणनीतिक प्रतिक्रिया को दर्शाता है। इसके अलावा थाईलैंड की सेना ने अपने अभियान में कहा है कि "थाई भूमि पर अतिक्रमण करने वाले सभी लोगों को कुचल दो, जमीन के लिए, लोगों के लिए, थाई सम्मान के लिए।" थाईलैंड की सेना ने शुक्रवार को उबोन रत्चथानी और सुरिन प्रांतों में झड़पों की सूचना दी है। इसने कहा है कि कंबोडिया ने तोपखाने और रूस के बने रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल किया है। थाई सेना ने एक बयान में कहा है कि "कंबोडियाई बलों ने भारी हथियारों, फील्ड आर्टिलरी और बीएम-21 रॉकेट सिस्टम का उपयोग करके लगातार बमबारी की है।"

रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच की ये झड़प करीब 209 किलोमीटर के दायरे में हो रही है। जिसमें कम से कम 6 जगहों पर भारी गोलीबारी हो रही है। दोनों देशों के बीच 13 वर्षों में सबसे भीषण लड़ाई तब शुरू हुई, जब थाईलैंड ने बुधवार को नोम पेन्ह स्थित अपने राजदूत को वापस बुला लिया और कंबोडिया के दूत को निष्कासित कर दिया। यह घटना उस घटना के बाद हुई जिसमें एक अन्य थाई सैनिक बारूदी सुरंग हमले में घायल हो गया। बैंकॉक का आरोप है कि कंबोडिया ने ये बारूदी सुरंग बिछाया था। थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथाम वेचायाचाई ने कहा है कि "हम शांति से समाधान चाहते हैं, लेकिन यह एक जानबूझकर उकसावे वाली कार्रवाई है। हमें अपनी सीमाओं की रक्षा करनी पड़ी।"

कंबोडिया-थाईलैंड टकराव बना साल का छठा संघर्ष, यूक्रेन से PAK तक दुनिया में अशांति

2025 दुनिया के लिए युद्धों का साल बन गया है. कंबोडिया-थाईलैंड युद्ध इस साल का पांचवां बड़ा संघर्ष है, जो प्रीह विहार और ता मुएन थोम मंदिरों के पास सीमा विवाद से शुरू हुआ. इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान युद्ध, यूक्रेन-रूस, इज़रायल-हमास, सूडान गृहयुद्ध और ईरान-पाकिस्तान तनाव ने दुनिया को हिलाकर रख दिया,

इन युद्धों ने लाखों लोगों की जान ली, इमारतों को मलबे में बदला और हथियारों की बिक्री को आसमान पर पहुंचा दिया. आइए, इन पांच युद्धों की तबाही, मौतें, इमारतों का नुकसान और हथियारों की बिक्री को समझते हैं.

1. भारत-पाकिस्तान युद्ध (2025)

क्या हुआ?

7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए. ये कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (26 नागरिक मारे गए) के जवाब में थी.

पाकिस्तान ने इसे युद्ध की कार्रवाई बताकर जवाबी हमले शुरू किए, जिसमें ड्रोन, मिसाइल और फाइटर जेट्स का इस्तेमाल हुआ. 10 मई को युद्धविराम हुआ. 

तबाही और मौतें

भारत

मौतें: 16 नागरिक (पुंछ में 5 बच्चे शामिल).   
नुकसान
: जम्मू, श्रीनगर, पुंछ और राजौरी में गोलाबारी से घर, एक हिंदू मंदिर और बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त. 
विस्थापन: हजारों लोग जम्मू-कश्मीर और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों से भागे.

पाकिस्तान

मौतें: 40 नागरिक (7 महिलाएं, 15 बच्चे) और 11 सैनिक मारे गए. 100+ आतंकी मारे गए.
नुकसान: मुरीदके, बहावलपुर, और 11 एयरबेस (सूरतगढ़, सिरसा, आदि) तबाह.
विस्थापन: लाहौर और सियालकोट में लोग सुरक्षित ठिकानों पर गए.

हथियारों की बिक्री

भारत: राफेल जेट्स, ब्रह्मोस मिसाइल, S-400 डिफेंस सिस्टम और इज़रायल-भारत ड्रोन का इस्तेमाल.  
पाकिस्तान: JF-17 जेट्स (चीन), शाहेद-136 ड्रोन (ईरान) और 122 मिमी रॉकेट।  
विश्लेषण: इस युद्ध ने $5-10 बिलियन की हथियार खरीद को बढ़ावा दिया, खासकर ड्रोन और मिसाइल सिस्टम की मांग बढ़ी.  

2. कंबोडिया-थाईलैंड युद्ध (2025)

क्या हुआ?

24 जुलाई 2025 को थाईलैंड ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर F-16 जेट्स से हवाई हमले किए, क्योंकि कंबोडिया ने ड्रोन और रॉकेट से हमला किया था. ये विवाद प्रीह विहार और ता मुएन थोम मंदिरों के सीमा क्षेत्र को लेकर था.  

तबाही और मौतें

थाईलैंड

मौतें: 14 लोग मारे गए (13 नागरिक, 1 सैनिक), 46 घायल.  
नुकसान: सिसाकेट और सुरिन में गैस स्टेशन, अस्पताल और प्रीह विहार मंदिर को नुकसान.  
विस्थापन: 40,000-1,00,000 लोग विस्थापित.

कंबोडिया

मौतें: 20 लोग मारे गए, दावे की पुष्टि नहीं.  
नुकसान: ओड्डार मीनचे में सैन्य ठिकाने और पगोडा रोड नष्ट.

हथियारों की बिक्री

थाईलैंड: F-16 (अमेरिका) और SAAB ग्रिपेन.  
कंबोडिया: BM-21 रॉकेट (चीन/रूस).  
विश्लेषण: ड्रोन और रॉकेट सिस्टम की मांग बढ़ी.

3. यूक्रेन-रूस युद्ध (2022-2025)

क्या हुआ?

रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला शुरू किया, जो 2025 तक जारी है. ये युद्ध नाटो विस्तार और ऊर्जा संसाधनों को लेकर है.

तबाही और मौतें

मौतें: 10,000+ नागरिक, 5 लाख सैनिक (रूस: 3.5 लाख, यूक्रेन: 1.5 लाख). 2025 में और बढ़ोतरी.  
नुकसान: यूक्रेन के 70% बुनियादी ढांचे (स्कूल, अस्पताल) नष्ट. कीव, खार्किव में हजारों इमारतें गिरीं.  
विस्थापन: 1.2 करोड़ लोग विस्थापित, 50 लाख शरणार्थी.

हथियारों की बिक्री

रूस: S-400, T-90 टैंक, कामिकेज ड्रोन.  
यूक्रेन: जेवलिन मिसाइल, बायारक्तर ड्रोन, HIMARS.  
विश्लेषण: $80 बिलियन से ज्यादा हथियार बिके (2022-2024).

4. इज़रायल-हमास युद्ध (2023-2025)

क्या हुआ?

7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इज़रायल ने गाजा पर जवाबी हमले शुरू किए. 2025 में मानवीय संकट गहरा गया.  

तबाही और मौतें

गाजा: 43,000+ मौतें (70% महिलाएं/बच्चे), 1,00,000+ घायल.  
इज़रायल: 1,200 मौतें, 3,000 घायल (2023).  
नुकसान: गाजा में 80% इमारतें नष्ट. UNRWA स्कूल, अल-शिफा अस्पताल मलबे में.  
विस्थापन: 20 लाख लोग (90% गाजा आबादी) विस्थापित. 50% बच्चे कुपोषित.

हथियारों की बिक्री

इज़रायल: F-35, आयरन डोम.  
हमास: रॉकेट, ड्रोन (ईरान).  
विश्लेषण: $10 बिलियन से ज्यादा हथियार बिके.  

5. सूडान गृहयुद्ध (2023-2025)

क्या हुआ?

रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) और सूडानी सेना के बीच अप्रैल 2023 से गृहयुद्ध.

तबाही और मौतें

मौतें: 20,000+, 33,000 घायल.  
नुकसान: खार्तूम, दारफुर में 60% इमारतें नष्ट.  
विस्थापन: 1 करोड़ लोग विस्थापित, 2.5 करोड़ भुखमरी का सामना.

हथियारों की बिक्री

RSF: ड्रोन (यूएई, रूस).  
सूडानी सेना: टैंक, आर्टिलरी (चीन, मिस्र).  
विश्लेषण: $5 बिलियन हथियार बिके.

6. ईरान-पाकिस्तान तनाव (2024-2025)

क्या हुआ?

जनवरी 2024 में ईरान ने जैश अल-अदल आतंकियों पर पाकिस्तान में हमला किया. पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए.

तबाही और मौतें

मौतें: 20 लोग (ज्यादातर आतंकी).  
नुकसान: बलूचिस्तान में गांवों और ठिकानों को नुकसान  
विस्थापन: हजारों प्रभावित.

हथियारों की बिक्री

ईरान: शाहेद-136 ड्रोन.  
पाकिस्तान: JF-17 जेट्स.  
विश्लेषण: $2 बिलियन हथियार बिके.

भारत के लिए क्या मायने?

क्षेत्रीय स्थिरता

भारत-पाकिस्तान: युद्ध ने दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ाया. भारत को चाबहार पोर्ट और Act East Policy पर असर पड़ा. 
कंबोडिया-थाईलैंड: ASEAN में अस्थिरता भारत की नीतियों को प्रभावित कर सकती है.
हथियारों की दौड़: ड्रोन, AI और मिसाइल की मांग बढ़ी. भारत को तेजस, स्वदेशी ड्रोन और S-400 पर फोकस करना चाहिए.
मानवीय संकट: गाजा और सूडान में भुखमरी भारत के लिए सबक है. भारत को आपदा प्रबंधन मजबूत करना होगा.

 

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Sat, 26 Jul 2025 17:30:29 +0530 City Today Bhopal
फिलीपींस में ‘को&मे’ तूफान की तबाही: 25 की मौत, लाखों विस्थापित https://citytoday.co.in/3116 https://citytoday.co.in/3116 मनीला

फिलीपींस में पिछले एक हफ्ते से जारी मूसलधार बारिश और भूस्खलन के बीच अब ट्रॉपिकल तूफान 'को-मे' ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे फिलीपींस के लिए यह तूफान एक और बड़ा झटका साबित हुआ है। ऐसे में सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका अहम बन जाती है ताकि लाखों लोगों को सुरक्षित और आवश्यक मदद मिल सके।

इस खतरनाक तूफान के कारण अब तक कम से कम 25 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 2.78 लाख लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है। तूफान शुक्रवार को देश के उत्तरी पहाड़ी इलाकों से गुजरा।

इतनी रफ्तार से आया तूफान
'को-मे' नाम का यह तूफान गुरुवार की रात पांगासिनान प्रांत के अग्नो कस्बे में 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टकराया। इसके झोंकों की गति 165 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। शुक्रवार सुबह तक इसकी ताकत थोड़ी कम हुई और यह 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूर्वोत्तर दिशा की ओर बढ़ता दिखा।

मॉनसून को भी किया और भयानक
तूफान ने देश में पहले से ही चल रही मौसमी बारिश को और ज्यादा तीव्र बना दिया। पिछले एक हफ्ते से लगातार हो रही बारिश से कई इलाकों में बाढ़, पेड़ों के गिरने, भूस्खलन और बिजली के झटकों से लोगों की जान गई है। फिलहाल आठ लोग लापता हैं। हालांकि, तूफान 'को-मे' से सीधे मौत की कोई पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

स्कूल बंद, 35 प्रांतों में क्लास सस्पेंड
सरकार ने राजधानी मनीला में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन स्कूल बंद रखने का आदेश दिया है। लुजोन के मुख्य उत्तरी इलाके के 35 प्रांतों में कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। कम से कम 77 शहरों और कस्बों में 'आपातकाल' घोषित किया गया है, जिससे राहत फंड जल्दी मिल सके और जरूरी सामान जैसे चावल की कीमतें न बढ़ें।

278,000 लोगों का विस्थापन, सेना तैनात
सरकारी आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, 2.78 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ और तूफान के कारण अपने घरों को छोड़ चुके हैं। इनमें से अधिकांश को आपातकालीन शेल्टर या रिश्तेदारों के घरों में शरण लेनी पड़ी। अब तक लगभग 3,000 घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। राहत और बचाव के लिए सेना, पुलिस, कोस्ट गार्ड, दमकल कर्मियों और स्थानीय वॉलंटियरों को तैनात किया गया है।

राष्ट्रपति की चेतावनी और अमेरिकी मदद का वादा
राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने व्हाइट हाउस यात्रा से लौटने के बाद राहत शिविरों का दौरा किया और लोगों को खाद्य सामग्री वितरित की। उन्होंने एक आपात बैठक में कहा कि अब जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी आपदाएं और ज्यादा और अनिश्चित होंगी। अमेरिकी सरकार ने राहत सामग्री और भोजन को दूर-दराज के क्षेत्रों में पहुंचाने के लिए अपने सैन्य विमानों की मदद देने का वादा किया है।

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Sat, 26 Jul 2025 17:30:29 +0530 City Today Bhopal
गाजा में तबाही की इंतहा: भूख&प्यास से तड़पते लोग, बमबारी के बीच गूंजती युद्धविराम की पुकार https://citytoday.co.in/3081 https://citytoday.co.in/3081 गाजा 

गाजा में इजरायली हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. यहां के लोग दोतरफा मार का शिकार हो रहे हैं. एक तरफ बारूद और दूसरी तरफ भूख, दोनों फिलिस्तीनियों की जान के दुश्मन बने हुए हैं. युद्ध की भयावहता अब उस स्तर पर पहुंच चुकी है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. इन हालातों को देखते हुए ब्रिटेन, कनाडा, जापान समेत 26 देशों ने गाजा में तत्काल युद्धविराम की अपील की है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने गाजा में राहत की उम्मीद में खाने के लिए जुटे 800 से ज्यादा लोगों की मौत को असहनीय और अमानवीय करार देते हुए इजरायल की आलोचना की है. यह पहली बार नहीं है जब यूरोपीय देश युद्धविराम की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी आवाज इजरायली सत्ता के कानों तक नहीं पहुंच सकी. गाजा के लोगों के दर्द की गूंज ब्रिटिश संसद में भी गूंजी है.

लंदन के सांसद एंडी स्लॉटर ने कहा, "हर सुबह नए कत्लेआम, नई विस्थापन की तस्वीरें आती हैं. लोग कतारों में लगकर रोटी मांगते हैं और वहीं गोली खा जाते हैं. अब वक्त है कि केवल बयान नहीं, ठोस कार्रवाई हो." उनकी यह अपील सीधे ब्रिटिश सरकार और विदेश मंत्रालय को थी कि अब केवल निंदा करने से काम नहीं चलेगा. सबको मिलकर इजरायल पर असरदार दबाव बनाने की कोशिश करनी चाहिए.

पोप लियो की पुकार, बंद करो नरसंहार

रविवार को वेटिकन से पोप लियो ने भी गाजा में हो रहे नरसंहार को लेकर अपनी एंजेलस प्रार्थना में तत्काल युद्धविराम की मांग की है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और मानवाधिकार कानूनों का सम्मान करते हुए निर्दोष नागरिकों की रक्षा की जाए. उनका कहना था कि राहत सामग्री के रास्ते खोले जाएं, ताकि फंसे हुए लोगों को तत्काल राहत सहायता मिल सके.

कतर में हो रही अप्रत्यक्ष बातचीत जारी

वहीं, कतर की राजधानी में अमेरिका की मध्यस्थता में हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम को लेकर अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही है. युद्धविराम और बंधकों की अदला-बदली को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई व्यावहारिक सफलता नहीं मिली है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी गाजा की स्थिति को अमानवीय और क्रूर बताते हुए युद्ध को तत्काल रोकने की मांग की है. 

इलाज के बिना दम तोड़ रहे मासूम बच्चे

उन्होंने कहा, "हमने गाजा में संयुक्त राष्ट्र की राहत कतारों पर लोगों को गोली मारते देखा है. यह एक बर्बर और नीच हरकत है, जिसकी मैं घोर निंदा करता हूं. युद्धविराम, बंधकों की रिहाई और मानवीय मदद की अबाध पहुंच प्राथमिक आवश्यकता है." गाजा के रंतिसी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर राघेब वारशाघा ने बताया कि गंभीर रूप से बीमार बच्चे इलाज के बिना दम तोड़ रहे हैं. 

कुपोषण, दूध की कमी से जूझ रही मांएं

नवजात बच्चों को जन्म देने वाली मांएं कुपोषण और दूध की कमी से जूझ रही हैं. अस्पतालों में दवाएं खत्म हो चुकी हैं. गाजा में अब भोजन का संकट जानलेवा हो चुका है. लोग अपने घरों से निकलकर बंद रसोई के बाहर लाइन लगाकर बैठ जाते हैं. हाथों में खाली बर्तन और आंखों में भूख. लेकिन रसोई भी अब खाली हो चुकी है. जो भी चूल्हा जलता था, अब वो राख हो चुका है.

59 हजार मौतें, खंडहर में तब्दील गाजा

गाजा में इजरायली हमलों में अबतक 59 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है. इजरायली सेना जमीनी और हवाई दोनों मोर्चों पर हमले तेज कर चुकी है. महिलाओं और बच्चों को भी निशाना बनाया जा रहा है. जो जिंदा हैं, वे भूख से मरने को मजबूर हैं. दुनिया के 26 देशों का संयुक्त बयान, संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी, पोप लियो की प्रार्थना और कतर में चल रही बातचीत नरसंहार को रोकने की कोशिश है.

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Wed, 23 Jul 2025 17:17:17 +0530 City Today Bhopal
अपनी ही मिसाइल से बाल&बाल बचा पाकिस्तान! न्यूक्लियर फैसिलिटी के पास गिरी शाहीन&3 https://citytoday.co.in/3082 https://citytoday.co.in/3082  बलूचिस्तान 

पाकिस्तान की सेना ने हाल ही में अपनी शाहीन-3 मिसाइल का टेस्ट किया, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. लेकिन ये टेस्ट बुरी तरह नाकाम रहा. मिसाइल निशाना चूक गई और डेरा गाजी खान (पंजाब प्रांत) में एक परमाणु केंद्र के पास धमाका हुआ.

इसका मलबा बलूचिस्तान के डेरा बुगटी जिले में गिरा, जो नागरिक बस्तियों के बेहद करीब था. इस घटना ने न सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य क्षमता पर सवाल उठाए, बल्कि बलूचिस्तान के लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया. 22 जुलाई 2025 को हुए इस हादसे के बाद पाकिस्तानी सेना ने इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया, मीडिया को रोका और लोगों को घरों में रहने को कहा.

 शाहीन-3 मिसाइल क्या है?

शाहीन-3 पाकिस्तान की सबसे ताकतवर मिसाइलों में से एक है. ये एक सतह से सतह (सरफेस-टू-सरफेस) बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 2750 किलोमीटर तक मार कर सकती है. यानी ये भारत के कई शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु तक पहुंच सकती है. इसकी खासियतें हैं…

    परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता: ये 20-25 से 300-500 किलोटन तक के परमाणु हथियार ले जा सकती है.
    सॉलिड फ्यूल: ये ठोस ईंधन पर चलती है, जो इसे जल्दी लॉन्च करने में मदद करता है.
    चीन की मदद: पाकिस्तान ने इसे 2000 के दशक में चीन की तकनीकी मदद से बनाना शुरू किया.

पाकिस्तान इसे अपनी रक्षा रणनीति का हिस्सा मानता है, खासकर भारत की सैन्य ताकत का जवाब देने के लिए. लेकिन बार-बार टेस्ट फेल होने से इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं.

क्या हुआ 22 जुलाई 2025 को?

22 जुलाई 2025 को पाकिस्तान ने डेरा गाजी खान के राखी इलाके से शाहीन-3 मिसाइल का टेस्ट किया. लेकिन मिसाइल अपने निशाने से भटक गई. बलूचिस्तान के डेरा बुगटी जिले में मट्ट इलाके में जा गिरी. ये जगह नागरिक बस्तियों से सिर्फ 500 मीटर दूर थी. लूप सेहरानी लेवी स्टेशन के पास ग्रेपन रवाइन में मलबा गिरा, जिससे बड़ा धमाका हुआ.

    धमाके की आवाज: धमाका इतना जोरदार था कि 20-50 किलोमीटर दूर तक सुनाई दिया, जिसमें बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के इलाके भी शामिल थे.

    सोशल मीडिया पर हंगामा: कुछ वीडियो में लोग डरकर भागते दिखे. कुछ ने दावा किया कि मिसाइल डेरा गाजी खान के परमाणु केंद्र पर गिरी, तो कुछ ने कहा कि ये किसी दुश्मन ड्रोन का हमला था.

    पाकिस्तानी सेना की प्रतिक्रिया: सेना ने तुरंत इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया, मीडिया को रोका और लोगों को घरों में रहने को कहा.
    DG खान कमिश्नर के प्रवक्ता मझर शीरानी ने कहा कि ये शायद किसी फाइटर जेट की सोनिक बूम (ध्वनि की दीवार टूटने की आवाज) थी, लेकिन पक्की जांच का इंतजार है.

 रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान नाम के संगठन ने इस टेस्ट की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि मिसाइल टेस्ट ने बलूचिस्तान के लोगों की जान खतरे में डाली. अगर मलबा थोड़ा और इधर-उधर गिरता, तो सैकड़ों लोग मारे जा सकते थे.

डेरा गाजी खान क्यों खास है?

डेरा गाजी खान पाकिस्तान का सबसे बड़ा परमाणु केंद्र है. यहां यूरेनियम का भंडारण और प्रोसेसिंग होती है. 1970 में पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमीशन (PAEC) ने यहां एक पायलट प्लांट बनाया था, जो रोजाना 10,000 पाउंड यूरेनियम प्रोसेस करता है.

ये जगह पाकिस्तान के परमाणु हथियार प्रोग्राम का दिल है. अगर मिसाइल सचमुच इस केंद्र पर गिरी, तो ये बहुत बड़ा हादसा हो सकता था. लेकिन अधिकारियों ने दावा किया कि कोई नुकसान नहीं हुआ.

पहले भी हुए हैं ऐसे हादसे

ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान का मिसाइल टेस्ट फेल हुआ. पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है…

    2023 में डेरा गाजी खान: अक्टूबर 2023 में भी शाहीन-3 का टेस्ट फेल हुआ था. उस बार भी धमाका डेरा गाजी खान के पास हुआ, जिसकी आवाज 30-50 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी. कुछ ने दावा किया कि मिसाइल परमाणु केंद्र पर गिरी, लेकिन सरकार ने इसे सोनिक बूम बताया.
    2021 में डेरा बुगटी: जनवरी 2021 में शाहीन-3 का टेस्ट फेल हुआ और मिसाइल डेरा बुगटी के नागरिक इलाके में गिरी. कई घर तबाह हुए और लोग घायल हुए. बलूच रिपब्लिकन पार्टी ने इसे बलूचिस्तान को पाकिस्तानी सेना की प्रयोगशाला बनाने का सबूत बताया.
    2020 में बाबर-II मिसाइल: बाबर-II मिसाइल, जो जमीन और समुद्र से लॉन्च हो सकती है, बलूचिस्तान में टेस्ट के दौरान क्रैश हो गई.
    2022 में जमशोरो: एक अज्ञात मिसाइल सिंध के जमशोरो शहर में गिरी. कुछ का दावा था कि ये भारत के ब्रह्मोस मिसाइल हादसे का जवाब देने की कोशिश थी.

ये हादसे दिखाते हैं कि पाकिस्तान की मिसाइल तकनीक में अभी भी खामियां हैं.

बलूचिस्तान का गुस्सा

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान और स्थानीय लोग इस टेस्ट से बहुत नाराज हैं. उनका कहना है…

बलूचिस्तान को प्रयोगशाला बनाया जा रहा है: पाकिस्तानी सेना बार-बार बलूचिस्तान में मिसाइल और परमाणु टेस्ट करती है, जिससे वहां के लोग खतरे में रहते हैं. 1998 में छागाई में हुए परमाणु टेस्ट की वजह से आज भी वहां कैंसर और त्वचा रोग जैसी बीमारियां फैली हैं.

जबरन विस्थापन: सेना टेस्ट से पहले बलूच लोगों को उनके घरों से निकाल देती है. डेरा बुगटी और काहन जैसे इलाकों में ये आम बात हो गई है. इसका मकसद वहां के प्राकृतिक संसाधनों (जैसे गैस और खनिज) का दोहन करना बताया जाता है.

सुरक्षा की कमी: मिसाइल टेस्ट के दौरान नागरिकों को पहले से नहीं बताया जाता, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ती है.

बलूच रिपब्लिकन पार्टी के प्रवक्ता शेर मोहम्मद बुगटी ने कहा कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान को अपनी हथियारों की प्रयोगशाला बना दिया है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से इसकी जांच करने की मांग की.

पाकिस्तान का परमाणु प्रोग्राम

पाकिस्तान दुनिया के उन नौ देशों में शामिल है, जिनके पास परमाणु हथियार हैं. 2025 तक उसके पास 170 परमाणु हथियार होने का अनुमान है, जो 2026 तक 200 तक पहुंच सकते हैं. पाकिस्तान की नीति न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध (मिनिमम क्रेडिबल डिटरेंस) की है, यानी वो भारत जैसे पड़ोसियों के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है.

    शाहीन सीरीज: ये मिसाइलें 1250 से 2750 किलोमीटर तक की रेंज वाली हैं. शाहीन-3 को खास तौर पर भारत के अग्नि-III मिसाइल का जवाब देने के लिए बनाया गया.
    चीन का सहयोग: पाकिस्तान का परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम चीन की मदद से चलता है.

    डेरा गाजी खान का महत्व: ये शहर यूरेनियम प्रोसेसिंग और परमाणु भंडारण का केंद्र है. 1970 में बने प्लांट से 360 ग्राम हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम हर साल निकाला जाता है.

क्या कह रही है दुनिया?

भारत की नजर: भारत ने इस हादसे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) के बाद भारत-पाक तनाव बढ़ा है. तब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तानी एयरबेस पर हमले किए थे. डेरा गाजी खान की घटना ने भारत में भी चर्चा छेड़ दी है. कुछ लोग इसे पाक की कमजोरी मान रहे हैं.

अमेरिका की चिंता: 2023 में डेरा गाजी खान धमाके के बाद एक अमेरिकी न्यूक्लियर स्निफर विमान वहां देखा गया था. इससे अटकलें लगीं कि शायद कोई परमाणु हादसा हुआ हो. इस बार भी अमेरिका चुप है, लेकिन वो पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर नजर रखता है.

संयुक्त राष्ट्र से मांग: बलूच संगठनों ने UN और UN सिक्योरिटी काउंसिल से पाकिस्तान के मिसाइल और परमाणु प्रोग्राम पर पाबंदी लगाने की मांग की है.

पाकिस्तान की सफाई

पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि कोई आतंकी हमला नहीं हुआ. DG खान कमिश्नर ने दावा किया कि ये धमाका शायद किसी फाइटर जेट की सोनिक बूम की वजह से हुआ. उन्होंने कहा कि कोई नुकसान या हताहत नहीं हुआ. लेकिन कई सवाल बने हुए हैं… 

    अगर ये सोनिक बूम था, तो मिसाइल का मलबा डेरा बुगटी में कैसे पहुंचा?
    सेना ने इंटरनेट और मीडिया क्यों रोका?
    क्या वाकई परमाणु केंद्र पर कोई खतरा नहीं था?

पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया.

भारत के लिए क्या मायने?

पाकिस्तान का बार-बार मिसाइल टेस्ट फेल होना भारत के लिए अच्छी खबर हो सकती है. शाहीन-3 भारत को निशाना बनाने के लिए बनाई गई है. इसके फेल होने से पाकिस्तान की सैन्य विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं. लेकिन…

    परमाणु खतरा: डेरा गाजी खान जैसे परमाणु केंद्र पर हादसा बड़ा खतरा पैदा कर सकता है, जो भारत के लिए भी चिंता की बात है.
    बलूचिस्तान का गुस्सा: बलूच लोग पाकिस्तान के खिलाफ बगावत कर रहे हैं. अगर ये गुस्सा बढ़ा, तो क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है, जो भारत-पाक सीमा को प्रभावित करेगा.
    ऑपरेशन सिंदूर: मई 2025 में भारत ने पाकिस्तानी एयरबेस पर हमले किए थे. इस हादसे से पाकिस्तान की जवाबी ताकत पर सवाल उठ रहे हैं.

 

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Wed, 23 Jul 2025 17:17:17 +0530 City Today Bhopal
पाकिस्तान में बारिश का कहर: अब तक 221 लोगों की मौत, हालात बदतर https://citytoday.co.in/3083 https://citytoday.co.in/3083 इस्लामाबाद 
पाकिस्तान में जून के अंत से भारी मानसूनी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ और बारिश से हुई अन्य घटनाओं में कम से कम 221 लोगों की मौत और 592 अन्य घायल हुए हैं। यह जानकारी पाकिस्तान के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने दी है। ताजा स्थिति रिपोर्ट में, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने कहा कि हताहतों की संख्या 26 जून से 21 जुलाई के बीच दर्ज की गई, जिसमें पिछले 24 घंटों में पांच नई मौतें और 10 घायल होने की सूचना है।
पूर्वी पंजाब प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां 135 लोगों की मौत हुई और 470 घायल हुए। उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में 46 लोगों की जान चली गई और 69 अन्य घायल हुए।
दक्षिणी सिंध प्रांत में 22 लोगों की मौत और 40 घायल होने की सूचना है, जबकि दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में 16 लोगों की मौत और चार घायल होने की सूचना है। एनडीएमए ने पुष्टि की है कि इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र में एक बच्चा घायल हुआ है। अधिकारियों ने बाढ़ की चेतावनी जारी की है। वे लगातार हो रही बारिश के बीच राहत अभियान चलाने और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए प्रांतीय सरकारों के साथ समन्वय कर रहे हैं।
क्योंकि पाकिस्तान में लगातार मानसून का प्रकोप जारी है, इसलिए अधिकारियों ने कई अलर्ट जारी किए हैं। इनमें मध्यम से भारी बारिश, नदियों का जलस्तर बढ़ने और संवेदनशील क्षेत्रों में संभावित बाढ़ की चेतावनी दी गई है।
पाकिस्तान के एनडीएमए और पंजाब के प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) ने निवासियों से सतर्क रहने और निचले व जलमग्न इलाकों से दूर रहने का आग्रह किया है। बता दें कि अरब सागर से आ रही नमी से तीव्र मानसूनी गतिविधि पूरे पंजाब में सक्रिय बनी हुई है, जहां लाहौर में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने आर्द्रता के स्तर को बढ़ा दिया है।

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Wed, 23 Jul 2025 17:17:17 +0530 City Today Bhopal
रूस से तेल खरीदा तो भुगतना पड़ेगा अंजाम: अमेरिका की भारत को खुली धमकी https://citytoday.co.in/3084 https://citytoday.co.in/3084 वाशिंगटन 
नाटो चीफ के बाद अब  अमेरिका ने रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों को अब खुली धमकी दी है। अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर  लिंडसे ग्राहम  ने कहा है कि अगर भारत, चीन और ब्राजील ने रूस से तेल लेना बंद नहीं किया, तो अमेरिका उनकी अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रहार करेगा। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप  रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगा देंगे।

इससे पहले  NATO महासचिव मार्क रूट ने सीधे चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ये देश अब भी रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं तो उन पर 100% सेकेंडरी सैंक्शंस  (अमेरिकी टैरिफ) लगाए जाएंगे। उन्होंने बेहद सख्त शब्दों में कहा था  “अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, भारत के प्रधानमंत्री हैं या ब्राज़ील के राष्ट्रपति हैं तो तैयार रहिए। पुतिन पर दबाव डालिए कि वो शांति समझौता करें, नहीं तो भारी कीमत चुकानी होगी।” 

ग्राहम की पुतिन को चेतावनी 
मार्क रूट की तरह ही धमकाते हुए अमेरिका का कहना है कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश रूस से सस्ता तेल खरीदकर  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  को यूक्रेन पर हमला जारी रखने में मदद कर रहे हैं। ग्राहम के मुताबिक, रूस अपनी आधी से ज्यादा कमाई कच्चे तेल के निर्यात से ही करता है और इसमें से 80% से ज़्यादा तेल भारत, चीन और ब्राजील को ही जाता है। ग्राहम ने कहा कि पुतिन ने ट्रंप को कमजोर समझकर बहुत बड़ी गलती कर दी है। उन्होंने कहा- “हम यूक्रेन को और हथियार देंगे, ताकि पुतिन को पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके। रूस की अर्थव्यवस्था पहले से ही बुरी हालत में है और अब इसे और नुकसान होगा।” 
  
भारत-चीन-ब्राजील के लिए सख्त संदेश 
ग्राहम ने साफ कहा कि इन तीनों देशों को अब तय करना होगा कि वे अमेरिका के साथ व्यापार चाहते हैं या रूस का सस्ता तेल। “अगर आप रूस से तेल खरीदते रहेंगे तो यह खून के पैसों जैसा है। आप पुतिन की जंग को जिंदा रख रहे हैं। हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे।” ग्राहम ने ट्रंप की तुलना एक बेहतरीन गोल्फ खिलाड़ी स्कॉटी शेफ़लर से करते हुए कहा- “डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राजनीति के स्कॉटी शेफ़लर हैं और अब वो अपने विरोधियों को सबक सिखाने वाले हैं।”*
 
यूक्रेन युद्ध से जुड़ा  विवाद
2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए। लेकिन भारत, चीन और ब्राजील ने सस्ता तेल खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी करनी जारी रखी हैं। अब अमेरिका चाहता है कि रूस को और कमजोर किया जाए ताकि युद्ध जल्द रुके।

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Wed, 23 Jul 2025 17:17:17 +0530 City Today Bhopal
तुर्की में फिर आमने&सामने होंगे यूक्रेन और रूस, पुतिन बोले& जेलेंस्की सही नेता नहीं https://citytoday.co.in/3085 https://citytoday.co.in/3085 तुर्की 
यूक्रेन और रूस के बीच लंबे समय से चल रही जंग को खत्म करने के लिए नई कोशिशें फिर शुरू होने वाली हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति  वलोडिमिर ज़ेलेंस्की  ने बताया कि यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा परिषद के प्रमुख रुस्तम उमरोव के हवाले से पुष्टि हुई है कि शांति वार्ता का अगला दौर बुधवार को तुर्की में होगा। जेलेंस्की ने अपने वीडियो संदेश में कहा,  “आज मैंने अपने प्रमुख नेता रुस्तम उमरोव के साथ कैदियों की अदला-बदली की तैयारी और रूसी पक्ष के साथ तुर्की में बैठक पर चर्चा की। उमरोव ने बताया कि बैठक बुधवार को तय है, और बाकी जानकारी कल दी जाएगी।” 

रुस्तम उमरोव हाल ही में यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा परिषद के सचिव नियुक्त किए गए हैं। इससे पहले वह देश के रक्षा मंत्री रह चुके हैं और रूस के साथ पहले दो दौर की शांति वार्ता का नेतृत्व भी कर चुके हैं। कीव में अपने राजनयिकों की बैठक में ज़ेलेंस्की ने साफ कहा था कि  “युद्ध खत्म करने के लिए हमें वार्ता में तेजी लानी होगी। हमारा एजेंडा बिलकुल साफ है  युद्धबंदियों की वापसी, रूस द्वारा अगवा किए गए बच्चों की घर वापसी और नेताओं की सीधी मुलाकात की तैयारी।” क्रेमलिन ने कहा है कि वह वार्ता की तारीख को लेकर सहमत होने का इंतजार कर रहा है, लेकिन दोनों पक्ष अब भी युद्ध खत्म करने के तरीके पर एक-दूसरे से काफी अलग हैं।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले जेलेंस्की के आमने-सामने मिलने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। पुतिन का कहना है कि ज़ेलेंस्की को वह सही नेता नहीं मानते क्योंकि यूक्रेन ने उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद नया चुनाव नहीं कराया। यूक्रेन और रूस ने इस साल 16 मई और 2 जून को इस्तांबुल में दो दौर की वार्ता की थी। इसके बाद हजारों युद्धबंदियों और मृत सैनिकों के शवों का आदान-प्रदान किया गया। हालांकि संघर्ष विराम या शांति समझौते को लेकर अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  ने चेतावनी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं होता तो वह रूस और उसके तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 50 दिनों के भीतर नए कड़े प्रतिबंध लगा देंगे।

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Wed, 23 Jul 2025 17:17:17 +0530 City Today Bhopal
नियोम प्रोजेक्ट को झटका: 20% कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी, ड्रीम सिटी पर संकट https://citytoday.co.in/3075 https://citytoday.co.in/3075 रियाद
सऊदी अरब के ड्रीम प्रोजेक्ट नियोम सिटी संकट में फंसता दिख रहा है। सेमाफोर ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में बताया है कि निओम 1,000 कर्मचारियों की छंटनी करने पर विचार कर रहा है। यह इस प्रोजेक्ट में काम कर रहे कुल कर्मचारियों का 20 प्रतिशत है। इससे पता चलता है कि सऊदी अरब सरकार अपनी अपनी प्रमुख गीगा प्रोजेक्ट को छोटा कर रहा है।

सेमाफोर ने बताया है कि निओम एक व्यापक बदलाव के तहत छंटनी पर विचार कर रहा है। इसके तहत 1,000 से ज्यादा कर्मचारी उत्तर-पश्चिमी लाल सागर तट पर स्थित नियोम की साइट को छोड़कर रियाद ट्रांसफर हो सकते है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह योजनाएं अभी अंतिम रूप नहीं ले पाई हैं। इनमें और बदलाव हो सकते हैं।

नियोम सऊदी सरकार की योजना
सेमाफोर की यह रिपोर्ट उन लेखों की श्रृंखला में सबसे नई है। इससे पता चलता है कि सऊदी अरब सरकार नियोम के मामले में अपनी महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश लगा रही है। नियोम का उद्देश्य सऊदी अरब के लाल सागर तट को लग्जरी होटलों, स्की रिसॉर्ट, द लाइन नाम का 170 किलोमीटर लंबा शहर और एक औद्योगिक पार्क बनना है।

निओम ग्रीक शब्द नियोस (नया) और अरबी शब्द मुस्तकबाल (भविष्य) के मिश्रण से बना है। ऐसे में नियोम का अर्थ नया भविष्य है। यह मोहम्मद बिन सलमान के प्रोजेक्ट 2030 का हिस्सा है। नियोम शहर 2,63,000 हेक्टेयर में फैला होगा। इसके जरिए मोहम्मद बिन सलमान का मकसद सऊदी की अर्थव्यवस्था की तेल से निर्भरता कम करनी है।

प्रोजेक्ट पर संदेह!
सेमाफोर से पहले ब्लूमबर्ग ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि सऊदी अरब ने कई कंस्लटिंग फर्म से 'द लाइन' की व्यवहार्यता की समीक्षा करने के लिए कहा है। द फाइनेंशियल टाइम्स ने इस साल की शुरुआत में दावा किया था कि सऊदी अरब ने नियोम की व्यापक समीक्षा शुरू की है क्योंकि इस पर कई सवाल हैं।

नियोम की व्यावहारिकता लंबे समय से बहस का विषय रही है। खासतौर उन निवेशकों के बीच संदेह है, जिन्हें लगता है कि सऊदी अरब शायद ही इस भविष्यवादी दूरस्थ शहर में लोगों को रहने के लिए आकर्षित कर पाएगा। सऊदी अरब का 1 ट्रिलियन डॉलर का सार्वजनिक निवेश कोष (पीआईएफ) से फिलहाल नियोम की फंडिंग हो रही है। हालांकि विदेशी निवेशकों की सीमित रुचि के कारण इस परियोजना को असफलताओं का सामना करना पड़ा है।

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Mon, 21 Jul 2025 17:50:42 +0530 News desk Hindi
ढाका में वायुसेना का विमान स्कूल पर क्रैश, कई मौतों की आशंका https://citytoday.co.in/3074 https://citytoday.co.in/3074 ढाका

बांग्लादेशी वायुसेना का एक एफ-7 प्रशिक्षण विमान सोमवार को कॉलेज परिसर में हादसे का शिकार हो गया। विमान कॉलेज की बिल्डिंग से जा टकराया। हादसे में एक युवक की मौत हो गई। जबकि चार लोग घायल हो गया। हादसे के वक्त माइलस्टोन कॉलेज में बच्चे मौजूद थे। प्लेन क्रैश होने के बाद स्कूल-कॉलेज में अफरातफरी मच गई। मौके पर अग्निशमन और बचाव दलों ने पहुंचकर बचाव कार्य शुरू कर दिया है।

बांग्लादेश सेना के जनसंपर्क कार्यालय ने बताया कि वायुसेना का प्रशिक्षण विमान F-7 BGI ढाका के उत्तरा क्षेत्र के दियाबारी इलाके में माइलस्टोन स्कूल और कॉलेज परिसर में गिर गया। अग्निशमन अधिकारी लीमा खान ने बताया कि हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।

अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण विमान ने दोपहर लगभग 1:06 बजे उड़ान भरी थी और उड़ान भरने के तुरंत बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद विमान में आग लग गई। आग बुझाने के लिए अग्निशमन दल की आठ दमकल मौके पर पहुंच गईं। माइलस्टोन स्कूल और कॉलेज के प्रवक्ता ने कहा कि विमान स्कूल के गेट के पास गिरा। स्कूल परिसर में जहां विमान हादसा हुआ, वहां कक्षा चल रही थी। घायलों को एक-एक करके बाहर निकाला जा रहा है।

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Mon, 21 Jul 2025 17:48:25 +0530 News desk Hindi
पुतिन की दिल्ली यात्रा: अमेरिका&नाटो की चिंता के बीच क्या है रूस का एजेंडा? https://citytoday.co.in/3057 https://citytoday.co.in/3057 नई दिल्ली

रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते बढ़ते वैश्विक तनाव और अमेरिका-नाटो के तीखे ऐतराज के बावजूद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल के अंत में भारत दौरे पर आने वाले हैं। उनका यह दौरा भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के सिलसिले में होगा, जो 2021 के बाद पहली बार नई दिल्ली में आयोजित होगा। यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब अमेरिका और नाटो (NATO) में शामिल देश रूस पर लगातार प्रतिबंध बढ़ा रहे हैं और भारत से रूसी रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर पुनर्विचार करने का दबाव बना रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस सम्मेलन के दौरान रक्षा उद्योग में सहयोग, ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी, परमाणु ऊर्जा सहयोग, आर्कटिक क्षेत्र में भारत की भूमिका का विस्तार और हाई-टेक सेक्टर में संयुक्त रोडमैप पर काम जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। हाल ही में पुतिन ने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर रूस ने भारत को उर्वरक निर्यात बढ़ाया है, जिससे भारतीय खाद्य सुरक्षा को बल मिला। वहीं, भारत और रूस के बीच नए परमाणु संयंत्र के दूसरे स्थान को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी इस शिखर सम्मेलन के दौरान पूरी हो सकती है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा था कि भारत-रूस शिखर सम्मेलन महत्वपूर्ण है। पिछली बार यह मॉस्को में हुआ था, अब बारी भारत की है। तारीखें आपसी सहमति से तय की जाएंगी।

अमेरिका और NATO को क्यों है आपत्ति?
रूस के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीद और रक्षा साझेदारी जारी रखी है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से दूरी बनाए, खासकर उच्च तकनीक और सैन्य मामलों में कोई व्यापार नहीं करे। वहीं, NATO देश इस बात चिंतित हैं कि भारत का यह रुख G7 और पश्चिमी दुनिया की रणनीति को कमजोर कर सकता है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से तय करता है। रूस एक पुराना और भरोसेमंद सहयोगी है।

ऑपरेशन सिंदूर से पहले पुतिन ने दिया था भारत को समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच आखिरी बातचीत ऑपरेशन सिंदूर से ठीक पहले हुई थी। रूस ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का समर्थन किया था। इस सैन्य अभियान में रूसी रक्षा प्रणालियों की अहम भूमिका रही। रूसी S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली और भारत-रूस संयुक्त ब्रह्मोस प्रोजेक्ट ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। इन प्रणालियों ने पाकिस्तान की चीन निर्मित सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक निष्क्रिय किया।

SCO समिट में भी हो सकती है मोदी-पुतिन मुलाकात
अगर प्रधानमंत्री मोदी चीन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेते हैं, तो वहां भी उनकी पुतिन से अलग से मुलाकात संभव है।

 

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Sun, 20 Jul 2025 14:36:42 +0530 City Today Bhopal
UAE और चीन का 1 अरब डॉलर का E20 फ्लाइंग टैक्सी का सौदा, इलेक्ट्रिक विमानन की दुनिया में क्रांति https://citytoday.co.in/3058 https://citytoday.co.in/3058 दुबई 

चीन ने इलेक्ट्रिक और हवाई तकनीक में एक बड़ी छलांग लगाई है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने चीन की E20 फ्लाइंग टैक्सियों के लिए 1 अरब डॉलर का सौदा किया है, जिसमें 350 टैक्सियां शामिल हैं. यह अब तक का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) ऑर्डर है.

ये टैक्सियां 5 सीटों वाली हैं, 320 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ सकती हैं. 200 किमी की रेंज रखती हैं. यह सौदा चीन के इलेक्ट्रिक विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. 

कैसे होगी बुकिंग?
लोग मोबाइल ऐप से एयर टैक्सी बुक कर सकेंगे। यह Uber की तरह ही होगा। Joby, Uber का ग्लोबल पार्टनर है। इसलिए मुमकिन है कि लोग एक ही ऐप से टैक्सी बुक कर सकें, उसमें चढ़ सकें और पैसे भी दे सकें। धीरे-धीरे, यह सेवा होटलों और खास जगहों तक भी पहुंच जाएगी। इससे एयरपोर्ट से सीधे अपनी मंजिल तक जाना आसान हो जाएगा।

कितना होगा किराया?
अभी तक किराये की सही जानकारी नहीं मिली है। लेकिन Conde Nast Traveller के अनुसार Joby का अनुमान है कि एक ट्रिप का किराया लगभग 75 डॉलर (करीब 6464 रुपये) होगा। यह उबर ब्लैक की महंगी राइड जैसा होगा। टैक्सी के अंदर कांच की दीवारें और छत तक विंडशील्ड होगी। इससे उड़ान के दौरान दुबई शहर का शानदार नजारा देखने को मिलेगा।

कितने यात्री बैठ सकेंगे?
जॉबी का कहना है कि एयर टैक्सी की सैकड़ों टेस्ट उड़ानें हो चुकी हैं। ये उड़ानें 60,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक हुई हैं। सभी विमानों को लाइसेंस वाले पायलट उड़ाएंगे। कंपनी का कहना है कि लोगों के लिए शुरू करने से पहले सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। हर एयर टैक्सी में एक पायलट और चार यात्री बैठ सकेंगे। इसकी टॉप स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

E20 फ्लाइंग टैक्सी क्या है?

E20 एक आधुनिक इलेक्ट्रिक विमान है, जो वर्टिकल टेकऑफ कर सकता है. बिना रनवे के उतर सकता है. इसे शंघाई की TCab टेक्नोलॉजी कंपनी ने बनाया है. इसकी खासियतें हैं…

    सीटें: 5 लोग (1 पायलट और 4 यात्री).
    रफ्तार: अधिकतम 320 किमी/घंटा.
    रेंज: 200 किमी तक उड़ान.
    वजन: हल्का और पर्यावरण के लिए सुरक्षित.
    डिजाइन: टिल्ट-रोटर तकनीक, जो इसे हेलिकॉप्टर और हवाई जहाज का मिश्रण बनाती है.

यह टैक्सी शोर कम करती है. प्रदूषण भी कम करती है, जो इसे शहरों के लिए आदर्श बनाता है.

यूएई और चीन का सौदा

यह सौदा पिछले साल चीन इंटरनेशनल इम्पोर्ट एक्सपो में शुरू हुई साझेदारी का नतीजा है. यूएई की कंपनी ऑटोक्राफ्ट ने TCab टेक्नोलॉजी के साथ 350 E20 टैक्सियों के लिए करार किया. पहली डिलीवरी तभी होगी, जब चीन की सिविल एविएशन अथॉरिटी (CAAC) से एयरवर्थीनेस सर्टिफिकेट मिलेगा. यह सौदा मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में कम ऊंचाई वाले पर्यटन और शहरी हवाई गतिशीलता के लिए होगा.

चीन के लिए यह क्यों खास है?

चीन ने अपने ‘लो-ऑल्टिट्यूड इकोनॉमी’ प्रोग्राम के तहत इस तकनीक को बढ़ावा दिया है. सरकार का लक्ष्य 2030 तक 1 लाख ड्रोन और eVTOL विमान हवा में लाना है. E20 का सौदा दिखाता है कि चीन की तकनीक अंतरराष्ट्रीय बाजार में भरोसा जीत रही है. इसके पीछे चीन की सस्ती एविएशन और बैटरी सप्लाई चेन है, जो इसे यूरोप और अमेरिका से सस्ता बनाती है.

यूएई को क्या फायदा?

यूएई, जो पर्यटन और आधुनिक तकनीक में आगे है, इस सौदे से कई लाभ लेगा…

    पर्यटन: दुबई और अबू धाबी में हवाई पर्यटन को नया रूप मिलेगा.
    शहरी यातायात: भीड़भाड़ से बचने के लिए हवाई टैक्सी सेवा शुरू हो सकती है.
    आर्थिक विकास: यह सौदा UAE की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा और नई नौकरियां पैदा करेगा.

चुनौतियां और भविष्य

इस तकनीक को लागू करने में रेगिस्तानी मौसम, नियामक मंजूरी और बुनियादी ढांचे की जरूरतें चुनौती हैं. फिर भी, TCab टेक्नोलॉजी का प्लान अबू धाबी से शुरू कर आसपास के शहरों तक विस्तार करना है. कुछ लोग मानते हैं कि यह सौदा चीन को इलेक्ट्रिक विमानन में विश्व नेता बना सकता है.

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Sun, 20 Jul 2025 14:36:42 +0530 City Today Bhopal
दुनिया का सबसे तेज इंटरनेट इस देश के पास, जापान&अमेरिका भी पीछे https://citytoday.co.in/3059 https://citytoday.co.in/3059 जापान 
जापान ने हाल ही में इंटरनेट स्पीड के मामले में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। जापान के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (NICT) के वैज्ञानिकों ने दुनिया की अब तक की सबसे तेज़ इंटरनेट स्पीड का परीक्षण कर सबको चौंका दिया है। वैज्ञानिकों ने 1.02 पेटाबिट्स प्रति सेकंड यानी लगभग 1,27,500 Gbps की स्पीड से इंटरनेट डेटा ट्रांसफर करके एक नया रिकॉर्ड बनाया है। यह स्पीड अमेरिका के औसत होम ब्रॉडबैंड की स्पीड से लगभग 30 लाख गुना अधिक है। यह सफलता एक खास ऑप्टिकल फाइबर टेक्नोलॉजी के ज़रिए संभव हो सकी है, जो भविष्य में इंटरनेट की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकती है।

हालांकि, इतना तेज़ इंटरनेट हासिल करने के बावजूद जापान का नाम फिलहाल उन देशों की सूची में शामिल नहीं है जो इंटरनेट सर्विस स्पीड में सबसे आगे हैं। Speedtest Global Index की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल इंटरनेट स्पीड के मामले में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शीर्ष पर है, जहां औसत मोबाइल इंटरनेट स्पीड 546.14 Mbps है। वहीं, होम ब्रॉडबैंड इंटरनेट की बात करें तो सिंगापुर पहले स्थान पर है, जहां की औसत स्पीड 393.15 Mbps है। भारत, अमेरिका, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भले ही दुनिया में सबसे अधिक इंटरनेट उपयोग करने वाले देशों में शामिल हैं, लेकिन इंटरनेट की औसत स्पीड के मामले में यह देश अभी भी पीछे हैं।

भारत की क्या स्थिति है?
भारत की स्थिति देखें तो मोबाइल इंटरनेट स्पीड में देश ने 26वां स्थान प्राप्त किया है और औसत स्पीड 133.51 Mbps है। लेकिन होम ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में भारत काफी पिछड़ा हुआ है और 98वें स्थान पर है, जहां औसत ब्रॉडबैंड स्पीड केवल 59.51 Mbps है। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में भारत नेपाल से भी पीछे है। नेपाल 88वें स्थान पर है और वहां की औसत ब्रॉडबैंड स्पीड 77.90 Mbps दर्ज की गई है। यह स्थिति भारत के टेलीकॉम सेक्टर के लिए एक संकेत है कि अभी भी ब्रॉडबैंड इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्पीड सुधारने के लिए बहुत काम करना बाकी है।

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Sun, 20 Jul 2025 14:36:42 +0530 City Today Bhopal
‘सिंदूर’ के वार की गूंज अब तक कायम, दो महीने से ठप पड़ा पाकिस्तान का रहीम यार खान एयरबेस https://citytoday.co.in/3060 https://citytoday.co.in/3060 इस्लामाबाद 

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की ओर से किए गए हमले में पाकिस्तान के रहीम यार खान एयरबेस का इकलौता रनवे पूरी तरह बर्बाद हो गया था. इस एयरबेस पर हुए नुकसान का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसका रनवे अभी तक बंद है. पाकिस्तान ने तीसरी बार इस रनवे की मरम्मत के चलते उड़ान संचालन पर रोक को आगे बढ़ा दिया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारतीय हमले से हुए नुकसान की गंभीरता काफी ज्यादा थी.

पाकिस्तान की ओर से हाल ही में जारी की गई NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) में कहा गया है कि रहीम यार खान एयरबेस का रनवे अब 5 अगस्त तक उड़ानों के लिए बंद रहेगा. नोटिस में कोई ठोस वजह नहीं दी गई है, सिर्फ यह कहा गया है कि मरम्मत का काम जारी है.

10 मई को जारी की गई थी नोटिस

पहली NOTAM 10 मई को जारी की गई थी, यानी उसी दिन जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत हवाई हमले किए थे. नोटिस में बताया गया था कि पंजाब प्रांत में स्थित इस रणनीतिक एयरबेस का रनवे एक हफ्ते तक संचालन के लिए अनुपलब्ध रहेगा. फिर 4 जून को दूसरी NOTAM जारी कर प्रतिबंध की अवधि 4 जुलाई तक बढ़ा दी गई.

मिलिट्री एयरबेस भी और इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी

आजतक को मिलीं हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों में यह साफ देखा जा सकता है कि एयरबेस के रनवे के बीचोंबीच एक बड़ा और गहरा गड्ढा बन गया है. इसके अलावा, एयरबेस की एक इमारत को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है. गौरतलब है कि रहीम यार खान एक ऐसा एयरपोर्ट है जहां सैन्य हवाई अड्डे के साथ-साथ शेख जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी स्थित है.

पीएम मोदी ने भी रैली में किया था जिक्र

यह एयरबेस उन 11 सैन्य ठिकानों में शामिल था जिन्हें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत निशाना बनाया था. यह ऑपरेशन कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे) के जवाब में किया गया था. भारत के इन हमलों के बाद ही पाकिस्तान ने सीजफायर के लिए संपर्क किया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजस्थान के बीकानेर में एक चुनावी रैली के दौरान इस एयरबेस का जिक्र करते हुए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान का रहीम यार खान एयरबेस आज भी ICU में पड़ा है, पता नहीं कब तक ठीक होगा.'

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Sun, 20 Jul 2025 14:36:42 +0530 City Today Bhopal
पाकिस्तान ने सभी उड़ानों पर लगाई रोक: एयरस्पेस को किया अलर्ट https://citytoday.co.in/3061 https://citytoday.co.in/3061 इस्लामाबाद 
पाकिस्तान में अगले हफ्ते यात्रियों और एयरलाइंस को कुछ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अनिर्दिष्ट ‘ऑपरेशनल कारणों’  का हवाला देते हुए देश के कुछ चुनिंदा हवाई मार्गों को दो दिन के लिए बंद करने  का ऐलान किया है। पाकिस्तान एयरपोर्ट अथॉरिटी (PAA)  ने ‘ नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) ’ जारी कर बताया कि ये प्रतिबंध 22 जुलाई और 23 जुलाई को लागू रहेंगे। इन दोनों दिन सुबह  5:15 बजे से रात 8:15 बजे तक  कुछ तय हवाई मार्गों पर उड़ान संचालन नहीं होगा।
 
पीएए के मुताबिक, ये बंदिशें पाकिस्तान के कराची और लाहौर उड़ान सूचना क्षेत्र (Flight Information Region) के तहत आने वाले कुछ मार्गों पर लागू होंगी। यानी कराची और लाहौर एयरस्पेस के कुछ हिस्सों में दो दिन तक सामान्य हवाई यातायात प्रभावित रहेगा।पीएए ने नोटिस में बंद के पीछे ‘परिचालन कारण’ बताए हैं। हालांकि अभी तक इन परिचालन कारणों का कोई स्पष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। न ही यह साफ है कि इसका सैन्य अभ्यास से कोई संबंध है या किसी तकनीकी या सुरक्षा वजह से यह फैसला लिया गया है।

नोटिस में कहा गया है कि इन मार्गों को  सभी तरह के विमानों के लिए बंद किया जाएगा  यानी यात्री विमान, मालवाहक विमान या कोई अन्य। इसके अलावा, जिन मार्गों को बंद किया गया है, उनका पूरा विवरण और वैकल्पिक मार्ग भी नोटिस में जारी किया गया है ताकि एयरलाइंस अपने रूट की योजना दोबारा बना सकें। फिलहाल पाकिस्तान के नागरिक उड्डयन विभाग ने यात्रियों और एयरलाइंस को सलाह दी है कि वे अपनी यात्रा से पहले उड़ान का स्टेटस जरूर जांच लें। 

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Sun, 20 Jul 2025 14:36:42 +0530 City Today Bhopal
पाकिस्तान में छिपा है मसूद अजहर? आतंक के आका की लोकेशन का बड़ा खुलासा https://citytoday.co.in/3042 https://citytoday.co.in/3042 नई दिल्ली 
भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकी और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर एक बड़ी खुफिया जानकारी सामने आई है। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक मसूद अजहर पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में छिपा हुआ देखा गया है। उसे उसके गढ़ बहावलपुर से कई किलोमीटर दूर इस क्षेत्र में देखा गया है।

स्कर्दू के सदपारा रोड इलाके में देखा गया
खुफिया जानकारी से पता चला है कि मसूद अजहर को हाल ही में स्कर्दू में विशेष रूप से सदपारा रोड इलाके में देखा गया था। यह इलाका महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां दो मस्जिदें और कई निजी व सरकारी गेस्ट हाउस मौजूद हैं। यह जानकारी मसूद अजहर के नए ठिकाने की ओर इशारा कर रही है।

पाकिस्तान में अन्य आतंकियों को भी पनाह
मसूद अजहर का पारंपरिक गढ़ पाकिस्तान का बहावलपुर माना जाता है। बहावलपुर में उसके दो मुख्य ठिकाने हैं। गौरतलब है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर और मदरसे को निशाना बनाकर हमला किया था। अजहर अकेला ऐसा आतंकी नहीं है जिसे पाकिस्तान में सुरक्षित पनाह मिली है। एक अन्य आतंकी हिजबुल मुजाहिदीन का चीफ सैयद सलाहुद्दीन भी इस्लामाबाद से ही ऑपरेट करता है जो पाकिस्तान में आतंकियों की मौजूदगी पर सवाल खड़े करता है।

बिलावल भुट्टो ने कहा था 'अफगानिस्तान में हो सकता है'
हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने दावा किया था कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में हो सकता है। बिलावल ने अल जज़ीरा को दिए एक इंटरव्यू में यहां तक कहा था कि "अगर मसूद अजहर पाकिस्तान की सरजमीं पर पाया गया तो उसे हम उसे भारत को सौंप देंगे। जब भी भारत सरकार हमसे जानकारी शेयर करेगी कि मसूद अजहर को पाकिस्तानी सरजमीं पर देखा गया तो हम उसे अरेस्ट कर भारत को सौंपकर खुश होंगे।" हालांकि नई खुफिया जानकारी बिलावल के इस दावे के विपरीत है और अजहर के पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में होने की पुष्टि करती है।
 
भारत में कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड
बता दें कि मसूद अजहर भारत में कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड रहा है। इनमें 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला और 2019 का पुलवामा हमला प्रमुख हैं। भारत लंबे समय से मसूद अजहर को सौंपने की मांग करता रहा है। इस नई खुफिया जानकारी के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान पर मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ने की संभावना है।

 

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Sat, 19 Jul 2025 12:11:19 +0530 City Today Bhopal
OIC में पाकिस्तान की शिकयत: सिंधु जल समझौते पर फिर छलका पानी का दर्द https://citytoday.co.in/3043 https://citytoday.co.in/3043 इस्लामाबाद
भारत की तरफ से सिंधु जल समझौते को रोके जाने का दुख़ा पाकिस्तान ने मुस्लिम देशों के संगठन OIC में भी सुनाया है। पाकिस्तान 57 मुसलमान देशों की संस्था इस्लामिक सहयोग संगठन की मीटिंग में यह बात रखी और कहा कि भारत ने एकतरफा तौर पर यह फैसला लिया है। जेद्दा में आयोजित OIC के ह्यूमन राइट्स कमिशन के 25वें सत्र में पाकिस्तान ने कहा कि हमारे अधिकारों का भारत की ओर से हनन किया जा रहा है। पाकिस्तान ने 'राइट टू वार' नाम से आयोजित सेशन को संबोधित करते हुए कहा कि यह फैसला मनमाना है।

टीवी के मुताबिक सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि सैयद फवाद शेर ने कहा भारत ने एकतरफा तौर पर यह निर्णय लिया है और इससे वर्ल्ड बैंक की ओर से तय शर्तों का भी उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि पानी तो हमारे लिए मूल अधिकार की तरह है, लेकिन भारत उसे भी हमसे छीनने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने कहा कि हम तो पहले ही पानी के संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यदि भारत से आने वाली नदियों में पानी की कमी हुई तो हमारे आगे मुश्किल हालात होंगे। उन्होंने कहा कि इससे हमारे इलाके में जलवायु का संकट पैदा हो सकता है। पानी की किल्लत होगी और खेती से लेकर तमाम जरूरी चीजों पर खतरा पैदा होगा।

सैयद फवाद शेर ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से इस मसले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह बड़ी परेशानी है। हालांकि पाकिस्तान के इस रुख के बाद भी मुस्लिम देशों के संगठन ने अब तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिसमें इस मसले का कोई जिक्र हो। बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को रोक दिया है। इसके अलावा सिंधु समेत सभी नदियों पर बांध आदि परियोजनाओं पर तेजी लाई जा रही है। इनके माध्यम से पाकिस्तान की ओर से जाने वाले पानी का इस्तेमाल किया जाएगा।

 

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Sat, 19 Jul 2025 12:11:19 +0530 City Today Bhopal
विदेशी कर्ज़ में डूबा पाकिस्तान: कितनी बड़ी है रकम और कौन देगा मदद? https://citytoday.co.in/3044 https://citytoday.co.in/3044 इस्लामाबाद
पाकिस्तान भारी विदेशी कर्ज में डूबा हुआ है। हाल ही में पाकिस्तान से आई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 23 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का विदेशी कर्ज चुकाना होगा। अब पाकिस्तान को अपने मित्र देशों से मदद की उम्मीद है। पाकिस्तान एक जुलाई से 30 जून तक के वित्त वर्ष का अनुसरण करता है। पाकिस्तान की आर्थिक समीक्षा 2024-25 के अनुसार, इस साल मार्च के अंत में पाकिस्तान पर कुल 76010 अरब रुपए का कर्ज था। इसमें 51520 अरब रुपए (करीब 180 अरब अमेरिकी डॉलर) का घरेलू कर्ज और 24490 अरब रुपए (87.4 अरब डॉलर) का विदेशी कर्ज शामिल है।

पांच मित्र देशों पर नजर
पाकिस्तान पर जो 87.4 अरब अमेरिकी डॉलर का कर्ज है, उसके दो हिस्से हैं। एक तो सरकारी विदेशी कर्ज है। वहीं, दूसरा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिला कर्ज शामिल है। खबर के अनुसार, 2025-26 में कुल 23 अरब अमेरिकी डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है। इसमें से 12 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि ‘मित्र देशों’ द्वारा रखी गई अस्थायी जमा के रूप में है। उम्मीद की जा रही है कि ये मित्र देश इस 12 अरब डॉलर की राशि की वापसी की तारीख को आगे बढ़ा देंगे। इस अस्थायी जमा राशि में सऊदी अरब से पांच अरब डॉलर, चीन से चार अरब डॉलर, संयुक्त अरब अमीरात से दो अरब डॉलर और कतर से करीब एक अरब डॉलर शामिल हैं।

कर्ज भुगतान के लिए बजट
वहीं, पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष में बहुपक्षीय, द्विपक्षीय ऋणदाताओं, अंतरराष्ट्रीय बान्डधारकों और वाणिज्यिक उधारदाताओं को करीब 11 अरब अमेरिकी डॉलर का बाह्य ऋण चुकाना होगा। कर्ज का भुगतान वर्तमान में वार्षिक बजट का सबसे बड़ा व्यय है। पाकिस्तान ने 2025-26 में घरेलू एवं और बाह्य ऋण को चुकाने के लिए 8200 अरब रुपए आवंटित किए हैं। यह 17573 अरब रुपए के कुल संघीय बजट का 46.7 प्रतिशत है।

 

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Sat, 19 Jul 2025 12:11:19 +0530 City Today Bhopal
गीता ने बदल दी ज़िंदगी! पाकिस्तानी आरिफ ने क्यों अपनाया हिंदू धर्म, जानिए बाबा बागेश्वर से पूछा सवाल https://citytoday.co.in/3045 https://citytoday.co.in/3045 लदन 
बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री  जिन्हें लोग बाबा बागेश्व के नाम से जानते हैं, एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो कथित तौर पर बाबा बागेश्वर के ब्रिटेन दौरे का है, जहां पाकिस्तान में जन्मे  मोहम्मद आरिफ अजाकिया  ने उनसे सार्वजनिक मंच पर एक अहम सवाल पूछ लिया। वीडियो में मोहम्मद आरिफ अजाकिया कहते हैं कि उनका जन्म पाकिस्तान में हुआ, जबकि उनके माता-पिता भारत में पैदा हुए थे और 1947 के बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए थे। उन्होंने बताया कि वह मुस्लिम परिवार में पैदा हुए, लेकिन  भागवत गीता पढ़ने के बाद उन्होंने हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया।

आरिफ अजाकिया ने बाबा बागेश्वर से पूछा “आप सब खुशनसीब हैं कि सनातन में पैदा हुए, लेकिन मैं मुस्लिम परिवार में जन्मा हूं। गीता पढ़कर हिंदू बना हूं, पर लोग मुझसे कहते हैं कि मुझे अपना नाम बदल लेना चाहिए। क्या हिंदू होने के लिए नाम बदलना जरूरी है? नाम बदलने में बड़ी दिक्कत आती है बच्चों के दस्तावेज़, जन्म प्रमाण पत्र, सब जगह नाम बदलवाना होता है। क्या नाम बदले बिना मैं हिंदू नहीं रह सकता?” इतना ही नहीं, आरिफ ने यह भी पूछा कि,  “आपने कहा कि भारतीय बनकर रहो। तो क्या पाकिस्तान में जन्मा शख्स भारतीय नहीं हो सकता, अगर वह दिल से हिंदुस्तानी हो?”
  
इस पर बाबा बागेश्वर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हिंदुत्व कोई धर्म नहीं है, यह मानवता की विचारधारा है। इसमें नाम, रंग, रूप या देश से फर्क नहीं पड़ता। आप गीता का पालन कर रहे हैं तो आप हमारे हैं। रहीम-रसखान के गीत हम गाते हैं, और अब्दुल कलाम को सलाम करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि, “अगर आपने खुद को हिंदू मान लिया तो हमारे लिए इतना काफी है। नाम बदलें या न बदलें, अगर विचार बदल गए तो आप हमारे हैं। और जो आपने पूछा कि पाकिस्तान में जन्मा भारतीय नहीं हो सकता? तो सच ये है कि पाकिस्तान भी कभी हमारा ही था। 1947 के पहले आप हमारे थे, बंटवारे ने एक दीवार खड़ी कर दी। आज भी अगर पाकिस्तानियों का दिल काटेंगे तो भारतीय ही निकलेगा।” बाबा बागेश्वर के इस जवाब पर वहां मौजूद लोगों ने खूब तालियां बजाईं। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को खूब शेयर कर रहे हैं और बाबा बागेश्वर के बेबाक अंदाज की तारीफ कर रहे हैं। हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

 

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Sat, 19 Jul 2025 12:11:19 +0530 City Today Bhopal
यूक्रेन को मिली नई प्रधानमंत्री, ट्रंप से डील कराने वाली मंत्री को मिला बड़ा इनाम https://citytoday.co.in/3046 https://citytoday.co.in/3046 वाशिंगटन 
रूस के खिलाफ युद्ध में चौथे साल में प्रवेश करने जा रहे यूक्रेन में बड़े राजनीतिक बदलाव हुए हैं। वोलोदोमिर जेलेंस्की ने यूक्रेन की वित्त मंत्री यूलिया स्विरीडेन्को को प्रमोट करते हुए देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। वह 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद यूक्रेन की पहली नई प्रधानमंत्री बनी हैं। दरअसल, यूलिया ने अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण मिनरल डील में मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभाई थी, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली।

राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने युद्ध से थके राष्ट्र को नई ऊर्जा देने और घरेलू हथियार उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कैबिनेट में बड़े फेरबदल की शुरुआत की है। इसी के तहत उन्होंने मौजूदा प्रधानमंत्री डेनिस शमीहाल को रक्षा मंत्री बनाने और वित्त मंत्री स्विरीडेन्को को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। हालांकि यूक्रेन के भीतर इस बदलाव को किसी बड़े राजनीतिक मोड़ के रूप में नहीं देखा जा रहा, क्योंकि शमीहाल की तरह स्विरीडेन्को भी राष्ट्रपति के वफादार अधिकारियों में शामिल हैं।

मिनरल डील की बड़ी भूमिका
यूलिया स्विरीडेन्को अमेरिका और यूक्रेन के बीच महत्वपूर्ण खनिज समझौते की वार्ताकार रही हैं, जिसे ट्रंप प्रशासन के साथ आगे बढ़ाया गया था। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि समझौते की शर्तें यूक्रेन के हितों के अनुकूल रहें। यूक्रेन और अमेरिका में रक्षा सहयोग और आर्थिक पुनर्निर्माण को लेकर वे लगातार पश्चिमी साझेदारों के साथ उच्च-स्तरीय बैठकों में यूक्रेन का प्रतिनिधित्व करती रही हैं।

यूक्रेन के इतिहास में सबसे लंबे समय तक के पीएम रहे शमीहाल
इससे पहले डेनिस शमीहाल ने मंगलवार को अपने इस्तीफे की घोषणा की थी। वह 4 मार्च 2020 से प्रधानमंत्री पद पर थे और यूक्रेन के सबसे लंबे समय तक कार्यरत पीएम रहे हैं। हालांकि उन्हें कैबिनेट से बाहर नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें रक्षा मंत्री बनाया जा रहा है। यह मंत्रालय युद्धकाल में सबसे बड़े बजट और रणनीतिक महत्व वाला विभाग है। वे रुस्तम उमेरोव की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल आंतरिक अस्थिरता और रक्षा खरीद व्यवस्था में गड़बड़ियों के आरोपों से घिरा रहा। आलोचकों का कहना है कि उनके कार्यकाल में मंत्रालय में बदइंतजामी और कुप्रबंधन की समस्याएं बनी रहीं।

 

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Sat, 19 Jul 2025 12:11:19 +0530 City Today Bhopal
राष्ट्रपति बनेंगे जनरल आसिम मुनीर? शहबाज शरीफ से मुलाकात के बाद अटकलें तेज https://citytoday.co.in/3018 https://citytoday.co.in/3018

कराची 

पाकिस्तान में बड़े सियासी बदलाव की अटकलें हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ सेना प्रमुख आसिम मुनीर और राष्ट्रपति आसिफ जरदारी की मुलाकात ने चर्चाएं और बढ़ा दी हैं। कहा जा रहा था कि मुनीर राष्ट्रपति पद पर जरदारी की जगह ले सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। पाकिस्तान सरकार के मंत्री भी इन्हें खारिज कर रहे हैं।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति आवास में पीएम शरीफ ने जरदारी से मुलाकात की। इसके कुछ देर पहले ही मुनीर पीएम आवास पर पहुंचे और शरीफ से मीटिंग की। मंगलवार शाम हुईं एक के बाद एक उच्च स्तरीय बैठक ने राष्ट्रपति बदलने की अटकलों को हवा दे दी है।

अखबार से बातचीत में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि राष्ट्रपति के इस्तीफे और उनकी जगह सेना प्रमुख के लेने का मुद्दा राष्ट्रपति जरदारी और पीएम शहबाज की मीटिंग में उठा जरूर था, लेकिन उन्होंने ऐसी सभी खबरों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि ये अटकलें एक मीडिया स्टोरी के बाद सामने लगने लगी थी, जिसे बाद में संभवत: वापस ले लिया था।

आसिफ ने सभी अटकलों को खारिज किया है और कहा है कि राष्ट्रपति जरदारी को सभी घटनाक्रमों की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने सरकार और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में पूरा भरोसा दिखाया है। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति इस मुद्दे से अवगत हैं और सरकार में पूरा भरोसा दिखाया है।' उन्होंने कहा कि पीएम ने राष्ट्रपति को अपुष्ट खबरों और घटनाक्रमों से अवगत कराया है।

रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की है कि पीएम की अगुवाई वाली प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रपति से मिलने से पहले शहबाज शरीफ ने आसिम मुनीर से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है, क्योंकि प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा के लिए हफ्ते में तीन बार मुलाकात करते हैं। आसिफ ने कहा, 'सेना प्रमुख को राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है।'

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Thu, 17 Jul 2025 12:43:40 +0530 news desk MPcg
रूस&उत्तर कोरिया की नजदीकी परवान पर, लावरोव की किम जोंग उन से मुलाकात, अमेरिका&जापान को चेतावनी https://citytoday.co.in/2976 https://citytoday.co.in/2976 उत्तर कोरिया 
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से मुलाकात की और अमेरिका, दक्षिण कोरिया तथा जापान को उत्तर कोरिया के खिलाफ सुरक्षा साझेदारी बनाने के सिलसिले में चेतावनी दी। लावरोव रूस तथा उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सैन्य व अन्य सहयोग को और प्रगाढ़ करने के वास्ते बातचीत के लिए उत्तर कोरिया के दौरे पर हैं। उन्होंने शनिवार को उत्तर कोरिया के पूर्वी शहर वोनसान में देश के नेता किम जोंग उन से मुलाकात की और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दीं।

बैठक के दौरान किम ने यूक्रेन के खिलाफ संघर्ष में रूस द्वारा उठाए गए ‘‘सभी कदमों का बिना शर्त समर्थन और प्रोत्साहन'' देने की अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार समिति ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी' ने अपनी एक खबर में कहा कि किम ने कहा कि प्योंगयांग और मॉस्को गठबंधन के स्तर के अनुरूप सभी रणनीतिक मुद्दों पर समान विचार रखते हैं। केसीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, लावरोव ने दोनों देशों से अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपने ‘‘रणनीतिक एवं सामरिक सहयोग को और मजबूत करने तथा संयुक्त कार्रवाई को तेज करने'' का आह्वान किया। हाल के वर्षों में रूस और उत्तर कोरिया के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं।
 
उत्तर कोरिया ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध में समर्थन देने के लिए सैनिकों और गोला-बारूद की आपूर्ति की है, जिसके बदले में उसे सैन्य और आर्थिक सहायता मिली है। उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चो सोन हुई के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में लावरोव ने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान पर उत्तर कोरिया के चारों ओर सैन्य जमावड़ा करने का आरोप लगाया। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तास' के अनुसार, लावरोव ने कहा, ‘‘हम इन संबंधों का इस्तेमाल उत्तर कोरिया और निश्चित रूप से रूस सहित किसी के भी खिलाफ गठबंधन बनाने को लेकर चेतावनी देते हैं।''  

 

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Tue, 15 Jul 2025 17:21:29 +0530 City Today Bhopal
बांग्लादेश में हिंदू व्यापारी की पीट&पीटकर हत्या, हमलावरों ने शव पर किया नाच https://citytoday.co.in/2977 https://citytoday.co.in/2977 ढाका
बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस सरकार बनने के बाद से ही हिंदुओं को प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। राजधानी ढाका में हिंदू व्यापारी की हत्या कर दी गई, जिससे एक बार फिर से पड़ोसी देश में हिंदुओं की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। लाल चंद सोहाग कबाड़ व्यापारी थे और उनकी पीट-पीटकर हत्या किए जाने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया। सैकड़ों छात्र शनिवार को सड़कों पर उतर आए और अंतरिम सरकार पर भीड़ हिंसा को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया। पुलिस ने कबाड़ व्यापारी लाल चंद सोहाग की पीट-पीटकर हत्या के सिलसिले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से दो के पास अवैध रूप से हथियार थे।

ढाका के कई विश्वविद्यालय परिसरों में छात्रों ने बुधवार को हुई इस घटना के विरोध में रैलियां निकालीं। जबरन वसूली करने वालों ने पुराने ढाका इलाके में मिटफोर्ड अस्पताल के सामने कबाड़ व्यापारी सोहाग की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। बीते दिनों वायरल हुए इस घटना के एक वीडियो में सोहाग को कंक्रीट के स्लैब के टुकड़ों से पीट-पीटकर मार डाला गया और फिर उसकी मौत की पुष्टि होने के बाद, हमलावर उसके शव पर नाचते हुए दिखाई दिए।

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, "तुम दरिंदों को लोगों को मारने का अधिकार किसने दिया? जब जबरन वसूली करने वाले उत्पात मचा रहे हैं, तो अंतरिम (सरकार) क्या कर रही है?" ये नारे छात्रों ने अपने परिसरों में लगाए। बीआरएसी विश्वविद्यालय, एनएसयू, ईस्ट वेस्ट विश्वविद्यालय और सरकारी ईडन कॉलेज जैसे निजी विश्वविद्यालयों के छात्रों ने शनिवार को प्रदर्शन किया, जबकि लाल की नृशंस हत्या का वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद प्रमुख ढाका विश्वविद्यालय और जगन्नाथ विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

प्रथम अलो अखबार के अनुसार, लाल चंद की बहन मंजुआरा बेगम (42) ने गुरुवार को राजधानी के कोतवाली पुलिस स्टेशन में हत्या का मामला दर्ज कराया। इस मामले में 19 आरोपियों के नाम हैं और 15-20 अज्ञात संदिग्ध भी शामिल हैं। बीडीन्यूज24 ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के युवा मोर्चे के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने कथित तौर पर सोहाग की हत्या कर दी, जो उसी संगठन का एक पूर्व कार्यकर्ता था। पार्टी ने कहा कि उसने लिंचिंग के आरोपी चार अपराधियों को तुरंत पार्टी से निष्कासित कर दिया।

 

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Tue, 15 Jul 2025 17:21:29 +0530 City Today Bhopal
इजरायली हमले में घायल हुए ईरान के राष्ट्रपति, वरिष्ठ अधिकारी भी चमत्कारिक रूप से बचे https://citytoday.co.in/2978 https://citytoday.co.in/2978 वाशिंगटन 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या का इरादा रखने वाले देश ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान एक इजरायली हवाई हमले में हल्के रूप से घायल हो गए हैं। यह हमला 16 जून को तेहरान के पश्चिमी हिस्से में स्थित एक इमारत पर हुआ था, जहां ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक चल रही थी। इस खबर की पुष्टि आईआरजीसी (IRGC) से जुड़ी फार्स न्यूज़ एजेंसी ने रविवार को की।

इस हमले के समय राष्ट्रपति पेजेश्कियान के अलावा संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर घालिबाफ, मुख्य न्यायाधीश मोहसनी एजेई और अन्य शीर्ष सुरक्षा व सैन्य अधिकारी बैठक में मौजूद थे। पेजेश्कियान के पैर में चोट आई, वहीं अन्य अधिकारी भी निकलते समय हल्की चोटों से घायल हुए।

फार्स रिपोर्ट के अनुसार, हमला छह मिसाइलों से किया गया था। यह हमला हसन नसरल्लाह की हत्या की तर्ज पर किया गया था।मिसाइलें इमारत के प्रवेश और निकास मार्गों को निशाना बनाकर दागी गईं। विस्फोट के बाद बिजली काट दी गई और भवन के ऊपरी हिस्से में तबाही मच गई। अधिकारी भवन के निचले फ्लोर में मौजूद थे। एक आपातकालीन निकासी मार्ग पहले से तैयार था, जिससे सभी अधिकारी निकलने में सफल रहे।

अंदरूनी साजिश की आशंका?
हमले की सटीकता और मिसाइलों का सटीक टारगेटिंग अब ईरानी अधिकारियों को किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका की आशंका दे रही है। सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गई हैं। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने हाल ही में टकर कार्लसन को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "उन्होंने मुझे मारने की कोशिश की थी। हां, उन्होंने कोशिश की लेकिन नाकाम रहे।"

आपको बता दें कि इजरायल ने जंग में ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडरों और परमाणु वैज्ञानिकों को मार गिराया। मारे गए अधिकारियों में IRGC कमांडर होसैन सलामी, सशस्त्र बलों के प्रमुख मोहम्मद बाघेरी और IRGC एयर फोर्स कमांडर आमिर अली हाजीजादेह शामिल थे। पहले आई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि इजरायल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई को भी हत्या की योजना में शामिल किया था, लेकिन उपयुक्त समय नहीं मिला।

 

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Tue, 15 Jul 2025 17:21:29 +0530 City Today Bhopal
दुष्कर्मी को सर्जरी से बनाया जाएगा नपुंसक, मासूम बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को मिली ऐसी सजा https://citytoday.co.in/2979 https://citytoday.co.in/2979 अंटानानारिवो

छह साल की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले शख्स को कोर्ट ने दोषी पाने पर ऐसी सजा सुनाई, जिसके बारे में शायद ही कभी सुना गया होगा. दोषी शख्स को सर्जिकल तरीके से नपुंसक बना देने का कोर्ट ने आदेश दिया. इसके साथ ही उसे ताउम्र जेल में रहना पड़ेगा.

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार,  मेडागास्कर की एक अदालत ने एक व्यक्ति को 2024 में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म के लिए सर्जिकल नपुंसक बनाने की सजा सुनाई है. न्यायिक अधिकारी ने बताया कि हिंद महासागर के इस द्वीप पर यह पहला ऐसा कदम है.

दुष्कर्म के बाद हत्या का किया था प्रयास
अपील न्यायालय के अटॉर्नी जनरल डिडिएर रजाफिंद्रलाम्बो ने बताया कि यह मामला राजधानी एंटानानारिवो से 30 किलोमीटर पश्चिम में स्थित इमेरिंटसियाटोसिका का है. वहां छह साल की बच्ची के साथ आरोपी ने दुष्कर्म किया था. फिर उसकी हत्या की भी कोशिश की थी. 

नपुंसक बनाने के साथ ही ताउम्र कैद
मेडागास्कर के न्याय मंत्रालय द्वारा मीडिया के लिए जारी एक वीडियो में बताया गया कि इस मामले में आरोपी व्यक्ति को न्यायालय ने कठोर श्रम और सर्जरी के द्वारा नपुंसक बनाने सहित आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. 

पिछले साल मेडागास्कर में बना था नया कानून
यह सजा पिछले साल मेडागास्कर में 10 वर्ष या उससे कम आयु की नाबालिगों के साथ यौन अत्याचारों के मामलों से निपटने के लिए 2024 के कानून के हिस्से के रूप में पेश की गई थी. सरकार ने कहा कि यह कानून इसलिए पेश किया गया,  क्योंकि अदालतों में ऐसे कई मामले दर्ज थे.

रजाफिंद्रलाम्बो ने कहा कि कोर्ट का निर्णय न्याय प्रणाली की ओर से एक मजबूत और महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया है. इसका उद्देश्य ऐसे दुर्भावनापूर्ण इरादे रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए चेतावनी के रूप में कार्य करना है.वैसे चेक गणराज्य और जर्मनी में कुछ यौन अपराधियों पर  प्रतिवादी की सहमति से सर्जिकल बधियाकरण किए जाने के मामले सामने आते रहे हैं.

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Tue, 15 Jul 2025 17:21:29 +0530 City Today Bhopal
गाजा की भूख की कहानी: खाना बनने से पहले ही लग जाती है लंबी लाइन https://citytoday.co.in/2975 https://citytoday.co.in/2975 गाजा 
गाजा के कम्यूनिटी किचन का यह नजारा है। यहां पर खाना बंटने से पहले फिलिस्तीनी लोग खाने के लिए कुछ इस तरह से संघर्ष करते हैं। गाजा पट्टी में खाने के लिए जबर्दस्त मारा-मारी मची हुई है। इस तस्वीर को देखिए, कैसे खाना बनने से पहले ही यहां पर लोग बर्तन लेकर खाने के लिए कतार में खड़े हो जाते हैं।

खाना न मिलने की बेबसी इन मासूमों के चेहरे पर साफ नजर आती है। हाथों में बर्तन थामे यह सब इंतजार कर रहे हैं कि कब खाना मिलेगा। गाजा में इजरायल के हमलों के बीच बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हैं। इनके बीच खाने को मारा-मारी की नौबत आ जाती है।

गाजा में खाना नहीं मिलने से लोग बेहद परेशान हैं। कई बार तो खाना नहीं मिलने की हालत में लोग पानी से ही काम चला रहे हैं। यह नजारा गाजा में बांटे जाने वाले फूड सेंटर का है। यहां पर लोग खाने के लिए अपना रजिस्ट्रेनशन कराने पहुंच हुए हैं। यह बच्चियां भी खाने के इंतजार में बैठी हुई हैं। इनके चेहरे देखकर लग रहा है कि इन्हें कई दिनों से खाना नहीं मिला है। जब कई दिनों से इंसान भूखा हो और उसकी प्लेट में खाना जाए तो चेहरे पर संतुष्टि का कुछ ऐसा ही भाव आता है।

यह व्यक्ति अपने परिवार के साथ खाना खा रहा है। लंबे समय से चल रहे युद्ध के चलते यहां पर बड़ी संख्या में लोग भूख और तबाही से बेजार हैं। खाना मिलने का इंतजार बड़ा भारी होता है। ऐसे में गाजापट्टी के रहने वाले इन मासूमों ने सोचा कि चलो तब तक खेल-कूद कर अपना समय गुजारते हैं।

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Tue, 15 Jul 2025 17:09:51 +0530 news desk MPcg
भारत&पाकिस्तान युद्ध में तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं… खुलासे से बौखलाए सेनाध्यक्ष मुल्‍ला मुनीर https://citytoday.co.in/2935 https://citytoday.co.in/2935 इस्लामाबाद
भारत के खिलाफ चीन और तुर्की की मदद के बाद भी बुरी तरह हाल झेलने वाले पाकिस्तान के आर्मी चीफ बौखला गये हैं। भारत के खिलाफ चीन और तुर्की के हथियार बुरी तरह से नाकाम रहे थे, जिससे चीन की पूरी दुनिया में कलई खुल गई है। वहीं तुर्की की ड्रोन इंडस्ट्री भी, जिसने पिछले कुछ सालों से भ्रम पैदा किया था, उसकी भी पोल खुल गई है। जिसके बाद अब पाकिस्तान आर्मी चीफ, चीन और तुर्की को बचाने में लगे हैं। इसीलिए उन्होंने कहा है कि 'भारत के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान की किसी ने मदद नहीं की थी।' जबकि पूरी दुनिया जान गई है कि किस तरह से चीन और तुर्की लगातार पाकिस्तान की मदद कर रहे थे। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने रावलपिंडी में दावा करते हुए कहा है कि ' भारत औप पाकिस्तान के बीच का संघर्ष पूरी तरह से द्विपक्षीय था।' यानि उन्होंने किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को नकारा है, जबकि भारतीय सेना ने सबूत देकर कहे हैं कि किस तरह से चीन, पाकिस्तान की लगातार लाइव मदद कर रहा था।

पाकिस्तान के फील्ड मार्शल रावलपिंडी में पूरी तरह से बौखलाए थे और अनाप शनाप आरोप लगा रहे थे। अपनी हार छिपाने और पाकिस्तान की जनता को बर्गलाने के लिए असीम मुनीर ने अपनी हताशा छिपाते हुए कहा कि "भारत की यह रणनीति ब्लॉक पॉलिटिक्स के जरिये पश्चिमी देशों की सहानुभूति लेने और खुद को क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता साबित करने की नाकाम कोशिश है।" आपको बता दें कि मई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था और पीओके और पाकिस्तान स्थिति 9 आतंकवादी शिविरों पर सटीक हमले किए थे, जिनमें दर्जनों आतंकवादी मारे गये थे और इसके बाद भारत और पाकिस्तान की सेना के बीच करीब 4 दिनों तक संघर्ष चला था। ये 1971 के बाद पहली बार था जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर हमला किया था। भारत ने लाहौर के रडार सिस्टम को युद्ध के पहले ही दिन तबाह कर दिया था, जिससे पाकिस्तान सेना असहाय हो गई थी।

पाकिस्तानी सेना ने 'तीसरे पक्ष' की भूमिका को नकारा
पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR के मुताबिक सम्मेलन में भारत पर पाकिस्तान में होने वाले आतंकवादी हमलों का आरोप लगाया गया है और मारे गये जवानों के लिए फातेहा पढ़ा गया। रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में फैसला लिया गया है कि "भारत के एजेंटों और आतंकवादी प्रॉक्सी नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।" फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने कहा कि "पहलगाम के बाद की बौखलाहट" में भारत अब नए-नए प्रॉक्सी इस्तेमाल कर रहा है, जिनमें 'फितना अल खवारिज' और 'फितना अल हिंदुस्तान' जैसी शक्तियां शामिल हैं। आपको बता दें कि मई महीने में चले भारत और पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भारत ने पाकिस्तान के करीब 11 एयरबेस पर सटीक हमले किए थे। जिनमें रावलपिंडी स्थिति नूर खान एयरबेस था। नूर खान एयरबेस पर भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस मिसाइल दागी थी, जिसे इंटरसेप्ट करने में पाकिस्तान नाकाम रहा था।

आपको बता दें कि तमाम रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि चीन ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ युद्ध के दौरान भारतीय सैन्य ठिकानों को लेकर लाइव फीड पाकिस्तान को दी थी। इसके अलावा भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पहले तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन भेजे थे, जिसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया था। हालांकि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के तमाम तुर्की ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। जिससे तुर्की के बायरकतार टीबी-2 ड्रोन का भ्रम भी टूट गया।

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Sat, 12 Jul 2025 12:42:51 +0530 news desk MPcg
ईरान का दावा: कतर में अमेरिकी सैन्य संचार प्रणाली को किया नष्ट, सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा https://citytoday.co.in/2924 https://citytoday.co.in/2924 नई दिल्ली

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. हाल ही में एक बड़ी घटना ने इस तनाव को और ज्यादा उजागर किया है. ईरान के भारत में दूतावास (@Iran_in_India) ने ट्विटर पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें कहा गया कि ईरान ने कतर में अमेरिकी सैन्य की प्राथमिक संचार प्रणाली (रेडोम) को नष्ट कर दिया है.

सैटेलाइट तस्वीरें दिखाती हैं कि अल उदीद एयर बेस (Al Udeid Air Base) पर ईरान के मिसाइल हमले से एक उपग्रह संचार एंटीना पूरा तबाह हो गया है. इस घटना ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि इससे पहले कतर और अमेरिका द्वारा किए गए दावों को भी चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि कोई नुकसान नहीं हुआ. 

क्या है रेडोम और इसका महत्व?

रेडोम (Radome) एक बड़ा, गोलाकार ढांचा होता है, जो उपग्रह और रेडियो संचार एंटीना को सुरक्षा प्रदान करता है. यह ढांचा मजबूत सामग्री से बना होता है, जो एंटीना को मौसम और बाहरी खतरों से बचाता है, जबकि संचार सिग्नल को बाधित नहीं करता. अमेरिकी सैन्य के लिए ये रेडोम्स मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये उनकी संचार क्षमताओं को बनाए रखते हैं. इनके बिना, सैन्य ऑपरेशंस, निगरानी और कम्युनिकेशन प्रभावित हो सकते हैं.

कतर में अल उदीद एयर बेस अमेरिकी सैन्य का सबसे बड़ा बेस है, जहां से मध्य पूर्व में सभी हवाई ऑपरेशंस का नियंत्रण होता है. यहां एक प्राथमिक रेडोम था, जो अब नष्ट हो गया है. दूसरा रेडोम कुवैत में स्थित है, जो अभी सुरक्षित है.

उपग्रह तस्वीरें क्या दिखाती हैं?

ईरान के भारत में दूतावास ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उनमें स्पष्ट दिखाई देता है कि जहां पहले रेडोम था, वहां अब एक काला धब्बा है. यह धब्बा बताता है कि मिसाइल हमले से एंटीना पूरी तरह से नष्ट हो गया है. पास के एक हैंगर पर भी नुकसान हुआ है. ये तस्वीरें 10 जुलाई 2025 को ली गईं. इन्हें अब जारी किया गया है. 

इससे पहले, कतर और अमेरिका ने दावा किया था कि मिसाइल हमले से कोई नुकसान नहीं हुआ है. लेकिन ये तस्वीरें उनके दावों को गलत साबित करती हैं. ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका द्वारा उनके परमाणु प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों का जवाब था.

लंबे समय से तनाव जारी है

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लंबे समय से जारी है, खासकर परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर. 2025 की शुरुआत में, अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु सुविधाओं पर हमला किया, जिसके बाद ईरान ने कतर में अल उदीद एयर बेस को निशाना बनाया. इस हमले में 14 मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से कुछ को कतर की एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया, लेकिन कुछ मिसाइलें बेस तक पहुंचीं.

ईरान का दावा है कि इस हमले से अमेरिकी सैन्य की संचार क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है, जबकि अमेरिका और कतर ने शुरुआत में कहा था कि कोई नुकसान नहीं हुआ. लेकिन अब सैटेलाइट तस्वीरें साफ तौर पर दिखाती हैं कि नुकसान हुआ है.

नुकसान का आकलन

    संचार प्रणाली का नुकसान: रेडोम के नष्ट होने से अमेरिकी सैन्य की संचार क्षमता प्रभावित हुई है. यह क्षमता निगरानी, निर्देश और ऑपरेशंस के लिए जरूरी है.

    हैंगर का नुकसान: पास के हैंगर पर नुकसान हुआ है, जो हवाई जहाज और उपकरणों को रखने के लिए इस्तेमाल होता है. यह नुकसान अमेरिकी सैन्य की तैयारियों को भी प्रभावित कर सकता है. 

    क्षेत्रीय तनाव: इस घटना से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है. ईरान और अमेरिका के बीच की लड़ाई अब सीधे सैन्य ठिकानों पर पहुंच गई है, जो और ज्यादा खतरनाक हो सकता है.

 

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Fri, 11 Jul 2025 17:41:14 +0530 news desk MPcg
Scary Afghanistan Tourism Promo: बंधक बनाएं टूरिस्ट को घेरे और हाथ में बंदूकों के साथ तालिबानियों ने शेयर किया अफगानिस्तान टूरिज्म प्रोमो, आक्रोश में लोग https://citytoday.co.in/2923 https://citytoday.co.in/2923 अमेरिकी पर्यटकों को अफ़ग़ानिस्तान आने का न्योता देने वाला तालिबान से जुड़ा एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसके कंटेंट को लेकर व्यापक आलोचना हो रही है. तालिबान से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स पर शेयर किए गए इस वीडियो की शुरुआत एक नकली बंधक दृश्य से होती है, जो आतंकवाद के साथ देश के वैश्विक जुड़ाव का मज़ाक उड़ाता प्रतीत होता है. इसके बाद अफ़ग़ानिस्तान के मनोरम दृश्यों का एक अनोखा मिश्रण दिखाया गया है. सशस्त्र लड़ाके कलाश्निकोव के साथ पोज देते नजर आते हैं, तालिबान सैनिकों की सैन्य परेड दिखाई जाती है, जिन्हें पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्साहवर्धक संगीत के साथ जोड़ा गया है. इस विचित्र विरोधाभास ने दुनिया भर में आक्रोश पैदा कर दिया है, तथा कई लोगों ने इस क्लिप की निंदा करते हुए इसे अब तक जारी सबसे विचलित करने वाला तथा निरर्थक पर्यटक प्रचार बताया है.

यह असामान्य अभियान ऐसे समय में सामने आया है जब तालिबान अगस्त 2021 में सत्ता हासिल करने के बाद से अपने शासन की अधिक “सामान्यीकृत” छवि पेश करने के अपने प्रयासों को जारी रखे हुए है. अपनी कट्टर प्रतिष्ठा और प्रतिबंधात्मक नीतियों के बावजूद, समूह अब अंतरराष्ट्रीय वैधता के लिए अपने व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है.

हालांकि, इस प्रचार वीडियो ने ऑनलाइन आलोचनाओं का तूफान खड़ा कर दिया है. सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस क्लिप को "डरावना", "परेशान करने वाला" और "बेहद विडंबनापूर्ण" बताया है. एक दर्शक ने टिप्पणी की, "युद्ध अपराध जैसी दिखने वाली तस्वीरों के ज़रिए वे पर्यटन को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं?" जबकि दूसरे ने लिखा, "यह कोई यात्रा विज्ञापन नहीं, बल्कि एक चेतावनी है."

तालिबान भले ही सावधानीपूर्वक तैयार किए गए दृश्यों के ज़रिए वैश्विक धारणाओं को बदलने और पर्यटकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन संदेश और ज़मीनी हकीकत के बीच गहरे अंतर को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है.

कई लोगों की नजर में यह वीडियो यात्रा को बढ़ावा नहीं देता, बल्कि यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि अफगानिस्तान अभी भी दुनिया के लिए खतरनाक है.

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Fri, 11 Jul 2025 17:18:12 +0530 news desk MPcg
Japan: जापानी सैन्य विमानों के बेहद करीब लड़ाकू विमान उड़ाना बंद करे चीन; जापान https://citytoday.co.in/2921 https://citytoday.co.in/2921 जापान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि बुधवार और बृहस्पतिवार को चीनी ‘जेएच-7’ लड़ाकू-बमवर्षक विमान ने जापान ‘एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स’ के ‘वाईएस-11ईबी’ ‘इलेक्ट्रॉनिक-इंटेलिजेंस विमान’ के पास से उड़ान भरी. मंत्रालय ने कहा कि यह घटना पूर्वी चीन सागर के ऊपर हुई, हालांकि यह जापानी हवाई क्षेत्र नहीं था और इससे जापानी पक्ष को कोई नुकसान भी नहीं हुआ.

चीन ने इस पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की. इससे पहले, चीन ने आरोप लगाया था कि जापानी विमान उसके विमान के करीब से उड़ान भर रहे हैं और चीन की सैन्य गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं तथा उसने जापान से इन गतिविधियों को बंद करने को कहा था. 

जापान के विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार देर रात जारी एक बयान में कहा कि उप मंत्री ताकेहिरो फुनाकोशी ने जापान में मौजूद चीनी राजदूत वू जियांगहाओ के समक्ष ‘‘गंभीर चिंता’’ व्यक्त की और चीन से ऐसी गतिविधि को रोकने का कहा. बयान के अनुसार जापान ने कहा कि चीन की इस तरह की कार्रवाई ‘टकराव भड़का सकती है’, साथ ही चीन से यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि ऐसी कार्रवाइयां दोबारा नहीं हों.

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Fri, 11 Jul 2025 16:52:45 +0530 news desk MPcg
भारत के पड़ोसी बांग्लादेश में लागू होगा शरीयत कानून, फैजुल ने किया तालिबानी शासन लाने का ऐलान https://citytoday.co.in/2882 https://citytoday.co.in/2882 ढाका 

बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी संगठन जमात-चर मोंई के प्रमुख पिर मुफ्ती सैयद मुहम्मद फैज़ुल करीम ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह देश में तालिबान शासित अफगानिस्तान की तर्ज पर शरीयत कानून लागू करेंगे। अमेरिका स्थित बंग्ला मीडिया संस्था 'ठिकाना न्यूज' के संपादक खालिद मुहीउद्दीन को दिए गए इंटरव्यू में फैजुल करीम ने कहा, “अगर राष्ट्रीय चुनाव जीतकर सरकार बनी तो 'इस्लामिक मूवमेंट बांग्लादेश' देश में शरीयत कानून लागू करेगा।”

फैजुल करीम ने अफगानिस्तान के वर्तमान शासन प्रणाली की सराहना करते हुए कहा, "हम अफगानिस्तान की शासन प्रणाली को अपनाएंगे। तालिबान सरकार ने जो अच्छा किया है, उसे लागू करेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि यदि सत्ता में आए तो हिंदुओं समेत सभी अल्पसंख्यकों को शरीयत के तहत अधिकार दिए जाएंगे।

फैजुल करीम ने यह भी कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन और रूस जैसे देशों की कुछ अच्छी बातें होंगी तो उन्हें भी अपनाया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह कहा कि वे शरीयत के विरोध में नहीं हों।

जमात-चर मोंई जैसे संगठनों का खुलेआम चुनाव लड़ने और शरीयत लागू करने की बातें करना यह दर्शाता है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के दौरान इस्लामी कट्टरपंथी संगठन राजनीतिक रूप से सक्रिय हो रहे हैं। बांग्लादेश में हाल ही में सत्ता परिवर्तन हुआ है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को छात्रों के आंदोलन के बाद अपदस्थ किया गया था और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाई गई है।

हालांकि करीम ने आश्वासन दिया कि अल्पसंख्यकों को शरीयत के तहत अधिकार मिलेंगे, लेकिन तालिबान जैसे शासन मॉडल के उदाहरण को देखते हुए यह बयान अल्पसंख्यकों के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी विचारधारा देश की धर्मनिरपेक्षता, महिला अधिकारों और न्याय व्यवस्था को कमजोर कर सकती है।

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Fri, 04 Jul 2025 19:07:08 +0530 news desk MPcg
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ धार्मिक उत्पीड़न का दौर जारी, भयावह स्थिति को ब्रिटेन की संसद सत्र में उजागर किया https://citytoday.co.in/2881 https://citytoday.co.in/2881 लंदन 

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ धार्मिक उत्पीड़न का दौर जारी है। इस भयावह स्थिति को ब्रिटेन की संसद में आयोजित एक सत्र में उजागर किया गया। ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन फ्रीडम ऑफ रिलीजन ऑर बिलीफ की ओर से यह सेशन बुलाया गया था। इसमें सांसदों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान हिंदुओं, ईसाइयों, शियाओं और अहमदियों के खिलाफ अत्याचारों को व्यवस्थित और राज्य प्रायोजित बताया गया। सबूतों से पता चला कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं, बल्कि पाकिस्तानी राज्य और सैन्य तंत्र के समर्थन से सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हैं।

सिंध प्रांत में हिंदू और ईसाई समुदायों की नाबालिग लड़कियों का अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन हो रहा है। इस गंभीर समस्या पर सत्र में विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। अनुमान है कि हर साल 500 से 1,000 लड़कियों का अपहरण किया जाता है। ये अक्सर राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मौलवियों की ओर से संचालित धार्मिक स्थलों के जरिए तस्करी की जाती हैं। इसके अलावा, हिंदू मंदिरों और धर्मशालाओं पर हमले सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को मिटाने की कोशिश का हिस्सा हैं। साल 2023 में कश्मीर में एक मंदिर पर रॉकेट हमला इसका उदाहरण है।

पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की मांग

शिया और अहमदी समुदायों के खिलाफ जबरन गायब करने, सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक अधिकारों से वंचित करने की घटनाएं भी सामने आईं। सत्र में सिंध फ्रीडम मूवमेंट के अध्यक्ष सोहैल अबरो और दूसरे समुदायों के प्रतिनिधियों ने आवाज उठाई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की मांग की। इसके अलावा, ब्रिटिश सांसदों फ्लेर एंडरसन और डेविड स्मिथ ने विस्तृत आंकड़े और प्रत्यक्षदर्शी डिटेल पेश किए। सत्र के अंत में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन अत्याचारों की स्वतंत्र जांच, जबरन धर्म परिवर्तन और धार्मिक संस्थानों पर हमलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही, इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने की भी चर्चा हुई।

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Fri, 04 Jul 2025 19:05:55 +0530 news desk MPcg
शहबाज ने कबूला, भारत नहीं मानेगा, पाकिस्तान को जल भंडारण क्षमता बढ़ानी होगी https://citytoday.co.in/2864 https://citytoday.co.in/2864  इस्लामाबाद
 पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार पानी के भंडारण के तरीके को मजबूत करेगी। ये फैसला ऐसे वक्त में आया है जब भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को स्थगित करने का कदम उठाया था।

पाकिस्तान की बडे़ पैमाने पर खेती-बाड़ी सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर निर्भर है। अगर इन नदियों के जलस्तर में कमी आई तो पाकिस्तान दाने-दाने को मोहताज हो जाएगा और बूंद-बूंद पानी को तरस जाएगा।

पाक पीएम शहबाज शरीफ ने  नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर के दौरे के दौरान इस मसले पर बात की। सरकारी न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक, उन्होंने कहा कि दुश्मन जल समझौते के खिलाफ कदम उठाना चाहता है।

जियो न्यूज के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने देश में जल भंडारण क्षमता बढ़ाने का फैसला किया है। ऐसे में उन्होंने संभावित विभागों को वाटर स्टोरेज परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। शरीफ ने भारत पर झुंझलाहट निकालते हुए कहा कि देश में पानी की सुरक्षा को लेकर फैसला लेना जरूरी है क्योंकि दिल्ली की मंशा पानी को हथियार बनाने की है।

भारत नहीं तोड़ सकता सिंधु समझौता
शहबाज शरीफ ने देश का जल भंडारण बनाने की बात कही तो साथ ही भारत पर गुस्सा भी निकाला। उन्होंन कहा कि भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का ऐलान किया है लेकिन वह इसे एकतरफा तरीके से निलंबित नहीं कर सकता है। शरीफ ने स्थायी मध्यस्थता न्यायालय के आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत ने भी साफ किया है भारत को सिंधु जल संधि को एकतरफा निलंबित करने का कोई अधिकार नहीं है।

शरीफ ने आगे कहा, 'सिंधु जल संधि पर अंतरराष्ट्रीय बाध्यताओं के बावजूद पाकिस्तान के लिए भारत के इरादे अच्छे नहीं हैं। वह पानी को हमारे खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की तरफ देख रहा है। इस खतरे को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने अपनी प्रांतों की सरकारों के साथ गैर-विवादास्पद जल भंडारण क्षमता परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का फैसला किया है।

पहलगाम के बाद शुरू हुआ विवाद
भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव की शुरुआत 22 अप्रैल के बाद हुई। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की बर्बरता से हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ कई स्तरों पर संबंध तोड़ने का फैसला लिया। इसमें सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय भी है। ये संधि भारत-पाक में नदियों का पानी बांटती है। भारत ने इस समझौते से हटते हुए पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोकने की बात कही है।

'हम पानी को स्टोर करने के लिए कोशिशें करेंगे'

शहबाज शरीफ ने कहा, "हमारी हुकूमत ने फैसला किया है कि हम अपनी पानी के भंडार बनाएंगे।" उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तानी सरकार पानी को बरतने के तरीके पर काम करेगी और भंडारण इसमें अहम कड़ी होगी, जिसमें डायमर भाशा डैम जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

उन्होंने कहा, "हम अपनी ताकत से अगले कुछ सालों में पानी को स्टोर करने की क्षमता तैयार कर लेंगे। इसमें नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी का अहम किरदार होगा।"

पहलगाम हमले के बाद अब पाकिस्तान को सता रही पानी की चिंता

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाए। भारत सरकार ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया। ये समझौता दोनों मुल्कों के बीच पानी के बंटवारे का अहम जरिया है। पाकिस्तान का मानना है कि पानी के बहाव में किसी भी तरह की रुकावट उसकी खेती के लिए बड़ा खतरा है।

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Thu, 03 Jul 2025 11:59:50 +0530 news desk MPcg
10,500 फीट नीचे गिरा विमान, डर के मारे यात्रियों ने लिखी वसीयत, कैमरे में कैद हुआ खौफनाक मंजर https://citytoday.co.in/2859 https://citytoday.co.in/2859 टोक्यो
शंघाई से जापान की राजधानी टोक्यो जा रही जापान एयरलाइंस की एक फ्लाइट में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब बोइंग 737 विमान को अचानक 10,500 फीट नीचे उतारना पड़ा और ऑक्सीजन मास्क तैनात करने पड़े। यह हादसा 30 जून की शाम को हुआ, जब विमान ने चीन के शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी और टोक्यो के नारिता एयरपोर्ट की ओर जा रहा था। यह विमान जापान एयरलाइंस और इसकी कम लागत वाली सहयोगी एयरलाइन ‘स्प्रिंग जापान’ के कोडशेयर समझौते के तहत संचालित हो रहा था। विमान में कुल 191 लोग सवार थे।

अचानक 10 मिनट में 36,000 फीट से 10,500 फीट पर आ गया विमान
रिपोर्ट के अनुसार, विमान ने उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही तकनीकी खराबी का सामना किया। जापान के क्यूशू द्वीप के ऊपर उड़ान भरते समय विमान के केबिन प्रेशर सिस्टम में खराबी का अलर्ट मिला। इसके चलते विमान को तेजी से नीचे लाना पड़ा, जिसे इमरजेंसी डिसेंट कहा जाता है। महज 10 मिनट में यह लगभग 36,000 फीट से घटकर 10,500 फीट की ऊंचाई पर आ गया। यात्रियों ने बताया कि एक "मफल्ड बूम" की आवाज सुनाई दी और कुछ ही सेकंड में ऑक्सीजन मास्क गिर गए। केबिन में अराजकता का माहौल बन गया, जिसमें फ्लाइट अटेंडेंट्स जोर-जोर से यात्रियों को मास्क पहनने के लिए कह रही थीं।

डर के मारे वसीयत लिखने लगे यात्री
कई यात्री उस समय सो रहे थे और घबरा गए। कुछ यात्रियों ने तो इस डर से अपनी वसीयत लिख दी और अपने परिजनों को एटीएम पिन व बीमा की जानकारी भेज दी। एक यात्री ने बताया, “मैं सो रहा था, तभी अचानक ऑक्सीजन मास्क नीचे गिरने लगे। कुछ ही पलों में अफरा-तफरी मच गई। फ्लाइट अटेंडेंट रोते हुए कह रही थी कि विमान में तकनीकी खराबी आ गई है और सभी लोग मास्क पहन लें।”

घबराए यात्रियों ने की रिकॉर्डिंग, वीडियो हुआ वायरल
इस डरावने लम्हे को कुछ यात्रियों ने मोबाइल पर रिकॉर्ड भी किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि यात्री ऑक्सीजन मास्क पकड़े हुए हैं और एक फ्लाइट अटेंडेंट घबराए हुए स्वर में घोषणा कर रही है।

ओसाका में इमरजेंसी लैंडिंग, कोई घायल नहीं
विमान के पायलट ने तत्काल एयर ट्रैफिक कंट्रोल को आपात स्थिति की सूचना दी और विमान को ओसाका के कंसाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया। विमान ने शाम 8:50 बजे सुरक्षित लैंडिंग की। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई भी यात्री या क्रू मेंबर घायल नहीं हुआ।

जांच शुरू, यात्रियों को मुआवजा
एयरलाइन की ओर से यात्रियों को 15,000 येन (लगभग 93 अमेरिकी डॉलर) का परिवहन मुआवजा और एक रात के होटल ठहराव की सुविधा दी गई है। विमान की तकनीकी खराबी की जांच शुरू कर दी गई है।

बोइंग विमानों पर फिर सवाल
यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब बोइंग विमानों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ती जा रही है। पिछले महीने अहमदाबाद से लंदन जा रही एक बोइंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 241 यात्रियों समेत 270 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इस नई घटना ने बोइंग विमानों की सुरक्षा पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Wed, 02 Jul 2025 18:59:29 +0530 news desk MPcg
VIDEO: ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय ने ईरान पर हमले को लेकर ट्रंप को लताड़ा? जानें वायरल वीडियो की असली सच्चाई https://citytoday.co.in/2842 https://citytoday.co.in/2842 Fact Ckeck: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान हमले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. वीडियो में राजा चार्ल्स को यह कहते हुए दिखाया गया, "जब डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि ईरान का सफाया हो जाएगा...जब जनरल बंकर बस्टर और फायरपावर की बात करते हैं...और जब इजरायल का आसमान बदले की चिंगारी से चमकता है...तो मैं चुप नहीं रह सकता. मिस्टर ट्रंप, यह मिसाइलों का खेल नहीं है, यह लाखों लोगों का भविष्य है..."

यह वीडियो X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया गया और रिपोर्ट लिखे जाने तक इसे 18 हजार से ज्यादा बार देखा जा चुका था. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वीडियो असली है?

वायरल वीडियो की सच्चाई जानें

जांच में सामने आया कि यह वीडियो असली नहीं है, बल्कि AI (Artificial Intelligence) की मदद से तैयार किया गया है. वीडियो में किंग चार्ल्स के होंठों की हरकत और उनके बोले गए शब्द आपस में मेल नहीं खाते, जिससे साफ होता है कि यह डिपफेक वीडियो है.

असली वीडियो कहां से मिला?

असली वीडियो Fox News के यूट्यूब चैनल पर 9 सितंबर 2022 को अपलोड किया गया था. इस वीडियो में किंग चार्ल्स ने अपनी मां क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के निधन पर ब्रिटिश जनता को संबोधित किया था. पूरी स्पीच में कहीं भी ईरान, अमेरिका या ट्रंप का कोई जिक्र नहीं है.

AI से तैयार किया गया है वीडियो

यह वायरल वीडियो पूरी तरह से फर्जी है और AI से तैयार किया गया है. इसका मकसद लोगों को भड़काना और भ्रम फैलाना हो सकता है. इसलिए सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो को देखकर तुरंत यकीन न करें, पहले उसकी सच्चाई जरूर जांचें.

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Tue, 01 Jul 2025 12:39:56 +0530 news desk MPcg
बांग्लादेश में फिर हिंदू महिला से रेप, वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल https://citytoday.co.in/2827 https://citytoday.co.in/2827 ढाका 

बांग्लादेश के कुमिल्ला जिले के मुरादनगर क्षेत्र में एक 21 वर्षीय हिंदू युवती के साथ हुई बलात्कार की बर्बर घटना से देशभर में आक्रोश फैल गया है. युवती अपने पिता से मिलने 'हरिसेवा' नामक स्थानीय धार्मिक उत्सव के मौके पर आई थी, जब यह जघन्य वारदात हुई.

जानकारी के अनुसार, आरोपी ने चाकू के बल पर युवती के घर में जबरन घुसकर उसके साथ बलात्कार किया और घटना का वीडियो भी बनाया. पीड़िता को धमकी दी गई कि अगर उसने पुलिस में शिकायत की तो उसे जान से मार दिया जाएगा.

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी से जुड़ा है आरोपी

इस मामले का मुख्य आरोपी एक स्थानीय BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) नेता बताया जा रहा है, जिसने न सिर्फ दुष्कर्म किया बल्कि पीड़िता का वीडियो भी रिकॉर्ड किया. अब तक तीन लोगों को पीड़िता का वीडियो रिकॉर्ड और वायरल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

सड़कों पर फूटा लोगों का गुस्सा

घटना के बाद मुरादनगर और कुमिल्ला के आसपास के इलाकों में लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा. स्थानीय लोगों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग की है. पूरे बांग्लादेश में इस घटना को लेकर आक्रोश है और सोशल मीडिया पर भी लोग खुलकर इंसाफ की मांग कर रहे हैं.

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और उनके पूजा स्थलों पर हमले किसी से छिपे नहीं हैं. भारत लगातर अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को उठाता रहा है. इसी साल फरवरी में जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भी उल्लेख किया गया था कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसक भीड़ के हमले शेख हसीना के भारत भागने से पहले ही शुरू हो गए थे. रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया था कि हिंदुओं के साथ-साथ चटगांव हिल ट्रैक्ट्स में अहमदिया मुसलमानों और स्वदेशी समूहों को भी बांग्लादेश में अत्याचारों का सामना करना पड़ा. 

रिपोर्ट में कहा गया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान और उसके बाद चटगांव पहाड़ी क्षेत्र में हिंदू समुदाय, अहमदिया मुसलमानों और स्थानीय समूहों के सदस्यों पर भीड़ की ओर से हिंसक हमले किए गए, जिनमें घरों को जलाना और पूजा स्थलों पर हमले शामिल थे.

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Mon, 30 Jun 2025 17:15:27 +0530 news desk MPcg
रूसी सेना ने पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में कब्जा, लिथियम भंडार है यहाँ, तीन साल की जंग में बड़ी कामयाबी https://citytoday.co.in/2817 https://citytoday.co.in/2817 मॉस्को 

रूसी सेना ने पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में स्थित शेवचेंको गांव पर कब्जा कर लिया है। यह इलाका यूक्रेन के लिथियम भंडार के पास स्थित है और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। तीन साल की जंग में रूस की यह बढ़त बड़ी कामयाबी बताई जा रही है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि शेवचेंको और नोवोसेरहीवका नामक दो बस्तियों पर कब्जा कर लिया गया है। हालांकि, यूक्रेन सरकार की ओर से इस दावे पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
कितना अहम शेवचेंको गांव

शेवचेंको गांव, डोनेट्स्क और ड्नीप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र की सीमा पर स्थित है और लगभग 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले एक प्रमुख लिथियम खनिज भंडार के करीब है। 1982 में सोवियत भूवैज्ञानिकों ने यहां लिथियम के विशाल भंडार की खोज की थी, जिसकी गहराई व्यावसायिक खनन के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

रूस की लिथियम पर नजर

रूसी-नियुक्त डोनेट्स्क अधिकारी इगोर क्लिमाकोवस्की ने कहा, “शेवचेंको गांव में मौजूद लिथियम भंडार के कारण ही यूक्रेन ने बड़ी संख्या में सैनिकों को यहां तैनात किया था।” उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र को जब परिस्थितियां अनुकूल होंगी, तो खनन के लिए विकसित किया जाएगा।

कितना अहम शेवचेंको गांव
शेवचेंको गांव, डोनेट्स्क और ड्नीप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र की सीमा पर स्थित है और लगभग 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले एक प्रमुख लिथियम खनिज भंडार के करीब है। 1982 में सोवियत भूवैज्ञानिकों ने यहां लिथियम के विशाल भंडार की खोज की थी, जिसकी गहराई व्यावसायिक खनन के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

रूस की लिथियम पर नजर
रूसी-नियुक्त डोनेट्स्क अधिकारी इगोर क्लिमाकोवस्की ने कहा, “शेवचेंको गांव में मौजूद लिथियम भंडार के कारण ही यूक्रेन ने बड़ी संख्या में सैनिकों को यहां तैनात किया था।” उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र को जब परिस्थितियां अनुकूल होंगी, तो खनन के लिए विकसित किया जाएगा।

रूसी कब्जे की पहले भी उड़ी अफवाह
जनवरी में रूसी मीडिया ने गलत रिपोर्ट दी थी कि शेवचेंको का लिथियम क्षेत्र पहले ही कब्जे में ले लिया गया है, लेकिन तब किसी और नाम के गांव से भ्रम हुआ था। बता दें कि लिथियम आज के दौर की सबसे कीमती धातुओं में से एक है। इसका इस्तेमाल मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों और हाईटेक उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है। अमेरिका के अनुसार, यूक्रेन में करीब 5 लाख टन लिथियम भंडार है, जबकि रूस के पास दोगुना भंडार मौजूद है।

रूसी कब्जे की पहले भी उड़ी अफवाह

जनवरी में रूसी मीडिया ने गलत रिपोर्ट दी थी कि शेवचेंको का लिथियम क्षेत्र पहले ही कब्जे में ले लिया गया है, लेकिन तब किसी और नाम के गांव से भ्रम हुआ था। बता दें कि लिथियम आज के दौर की सबसे कीमती धातुओं में से एक है। इसका इस्तेमाल मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों और हाईटेक उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है। अमेरिका के अनुसार, यूक्रेन में करीब 5 लाख टन लिथियम भंडार है, जबकि रूस के पास दोगुना भंडार मौजूद है।

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Sat, 28 Jun 2025 12:09:04 +0530 News desk Hindi
"मंगोलिया में खसरे का प्रकोप, 10 हजार से ज्यादा लोग बीमार" https://citytoday.co.in/2812 https://citytoday.co.in/2812

उलान बटोर, 27 जून 

 मंगोलिया में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। नेशनल सेंटर फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीसीडी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में खसरे के 232 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे कुल संक्रमितों की संख्या 10,065 तक पहुंच गई है। वहीं, 260 मरीजों के ठीक होने के साथ कुल रिकवरी की संख्या 8,405 हो गई है।

एनसीसीडी का कहना है कि नए मामलों में अधिकांश स्कूल जाने वाले बच्चे शामिल हैं, जिन्हें खसरे के टीके की केवल एक ही खुराक दी गई थी। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए एनसीसीडी ने परिजनों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को खसरे से बचाने के लिए वैक्सीन की दोनों खुराक जरूर दिलवाएं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति की खांसी, छींक या सांस के जरिए तेजी से फैलती है। यह बीमारी मृत्यु का कारण भी बन सकती है। खसरा मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है, लेकिन बिना टीकाकरण वाले व कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, नाक बहना और शरीर पर चकत्ते शामिल हैं।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि टीकाकरण ही खसरे से बचाव और इसके प्रसार को रोकने का सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका है। वैक्सीन शरीर को वायरस से लड़ने की ताकत देता है और समाज में सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (हर्ड इम्यूनिटी) को बढ़ाता है।

सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां जनता से अपील कर रही हैं कि वे अपने बच्चों के टीकाकरण की स्थिति की जांच करें और यदि जरूरत हो, तो उन्हें दूसरी खुराक अवश्य दिलवाएं।

  1. इतिहास और प्रभाव:

    • 1963 से पहले: खसरे से हर 2–3 साल में महामारी फैलती थी और हर साल लगभग 26 लाख लोगों की मौत होती थी।

    • 2023 में भी, वैक्सीन की उपलब्धता के बावजूद 1,07,500 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें ज़्यादातर 5 साल से कम उम्र के बच्चे थे।

  2. मंगोलिया की स्थिति:

    • खसरे के मामले उन क्षेत्रों में ज्यादा हैं जहां स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर हैं

    • एनसीसीडी (National Center for Communicable Diseases) ने चेतावनी दी है कि बिना वैक्सीनेशन वाले बच्चे और गर्भवती महिलाएं सबसे ज़्यादा जोखिम में हैं।

  3. विशेषज्ञों की सलाह:

    • खसरे को रोकने के लिए वैक्सीनेशन कैंपेन को तेज़ी से फैलाना अत्यंत आवश्यक है।


समाधान की दिशा:

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों को मजबूत करना — खासकर दूरदराज़ और पिछड़े इलाकों में।

  • जनजागरूकता अभियान चलाना ताकि लोग खसरे के लक्षण, खतरे और वैक्सीनेशन की अहमियत को समझ सकें।

  • स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करना और मोबाइल टीकाकरण यूनिट्स की मदद से टीकाकरण कवरेज बढ़ाना।

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Fri, 27 Jun 2025 16:23:57 +0530 news desk MPcg
इजरायल ने ईरान पर हमला किया तो तेहरान के पुराने मित्र चीन ने तुरंत हरकत में आते हुए हमलों की निंदा की https://citytoday.co.in/2802 https://citytoday.co.in/2802 इजरायल
इजरायल ने जब दो सप्ताह पहले ईरान पर हमला किया तो तेहरान के पुराने मित्र चीन ने तुरंत हरकत में आते हुए हमलों की निंदा की। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फोन करके संघर्ष विराम कराने का आह्वान किया। विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से फोन पर बात की।
लेकिन इसके बाद चीन यहीं थम गया। फिर हमेशा की तरह ही बयानबाजी की गई। तनाव कम करने और बातचीत का आह्वान किया गया। लेकिन ईरान को उसने कोई सहायता नहीं दी। अमेरिका को टक्कर देने वाले देश के रूप में अपने प्रभाव और वैश्विक मंच पर बड़ी भूमिका निभाने की महत्वाकांक्षा के बावजूद चीन ने ईरान को सैन्य सहायता देने से परहेज किया। इस फैसले ने पश्चिम एशिया में उसके सामने मौजूद सीमाओं को उजागर कर दिया।

गैर-लाभकारी वैश्विक नीति थिंकटैंक ‘रैंड’ में चाइना रिसर्च सेंटर के निदेशक जूड ब्लैंचैट ने कहा, 'बीजिंग के पास कूटनीतिक क्षमता और जोखिम उठाने के माद्दे का अभाव है, जिसके दम पर वह इस तेजी से बदलते और अस्थिर हालात में तुरंत हस्तक्षेप करके उनसे सफलतापूर्वक निपट सके।' उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की उलझी हुई राजनीति को देखते हुए चीन वहां के मामलों में पड़ने का इच्छुक नहीं है, इसके बजाय वह 'एक संतुलित, जोखिम से बचने वाला सहयोगी बने रहने का विकल्प चुनता है। पूर्वी चीन में नानजिंग विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंध विद्यालय के डीन झू फेंग का मानना है कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता चीन के हित में नहीं है। झू ने कहा, "चीन के दृष्टिकोण से, इजरायल-ईरान संघर्ष से चीन के व्यापारिक हितों और आर्थिक सुरक्षा के सामने चुनौती पैदा होती है। और वह ऐसा नहीं होने देना चाहता।"

ईरान की संसद में पिछले हफ्ते के आखिर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की योजना पेश की गई, जिसका चीन ने विरोध किया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने ईरानी संसद में योजना पेश किए जाने के बाद कहा, "चीन अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संघर्षों को खत्म करने और क्षेत्रीय उथल-पुथल से वैश्विक आर्थिक विकास पर पड़ने वाले प्रभाव को रोकने के लिए प्रयास तेज करने का आह्वान करता है।” मंगलवार को युद्ध विराम की घोषणा के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, "चीन अब ईरान से तेल खरीदना जारी रख सकता है।" ट्रंप के इस बयान से संकेत मिलता है कि युद्ध विराम से ईरानी तेल उत्पादन में व्यवधान को रोका जा सकेगा।

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन की 2024 की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि ईरान द्वारा निर्यात किए जाने वाले तेल का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा चीन को जाता है। ईरान से मिलने वाले लगभग 1.2 मिलियन बैरल तेल और अन्य जीवाश्म ईंधन के बिना चीन को अपने औद्योगिक उत्पादन को बरकरार रखने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। वाशिंगटन में स्थित थिंक टैंक ‘फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज’ के वरिष्ठ चीनी फेलो क्रेग सिंगलटन ने बीजिंग की प्रतिक्रिया को "तेल की निरंतर खरीद और बातचीत के लिए औपचारिक आह्वान" करार दिया।

सिंगलटन ने कहा, "बस यही बात है। चीन ने ईरान को न तो कोई ड्रोन या मिसाइल उपकरण दिए और न ही कोई आपातकालीन ऋण प्रदान किया। तेहरान को शांत करने के लिए सिर्फ बयान जारी किए ताकि सऊदी अरब को कोई समस्या न हो और न ही अमेरिका कोई प्रतिबंध लगाए।” सिंगलटन ने कहा, "चीन का मकसद खाड़ी के देशों के साथ व्यापार करना है, युद्ध में उलझना नहीं। ईरान से उसकी बहुचर्चित रणनीतिक साझेदारी युद्ध के समय केवल बयानबाजी तक सीमित रह जाती है।” चीन ने बयानबाजी के जरिए ईरान का पक्ष लिया और मध्यस्थता कराने का वादा किया। युद्ध की शुरुआत के बाद से चीन ईरान के पक्ष में खड़ा रहा और बातचीत का आग्रह किया। चीन ने 2023 में ईरान और सऊदी अरब के बीच कूटनीतिक तालमेल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

संयुक्त राष्ट्र में, सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन ने रूस और पाकिस्तान के साथ मिलकर ईरान में परमाणु स्थलों और सुविधाओं पर हमलों की "कड़े शब्दों में" निंदा करते हुए एक मसौदा प्रस्ताव पेश किया। दोनों देशों ने "तत्काल और बिना शर्त युद्ध विराम" का आह्वान किया। हालांकि परिषद के एक अन्य स्थायी सदस्य अमेरिका द्वारा प्रस्ताव को वीटो करना लगभग तय था। ईरान शी चिनफिंग की महत्वाकांक्षी वैश्विक परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में एक महत्वपूर्ण कड़ी है और वह 2023 में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में शामिल हुआ था। एससीओ अमेरिका के नेतृत्व वाले उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का मुकाबला करने के लिए बनाया गया रूस और चीन का एक सुरक्षा समूह है। चीन ने ईरान के साथ संयुक्त अभ्यास किए हैं, जिसमें इस साल ओमान की खाड़ी में 'समुद्री सुरक्षा बेल्ट 2025' भी शामिल है। इस अभ्यास में रूस ने भी हिस्सा लिया था। बुधवार को बीजिंग एससीओ सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक बुलाएगा।

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Wed, 25 Jun 2025 15:39:15 +0530 news desk MPcg
यूक्रेन और रूस के जंग को तीन साल से ज्यादा हुआ समय, जंग में मारे गए पुतिन के 10 लाख सैनिक https://citytoday.co.in/2796 https://citytoday.co.in/2796 मॉस्को
 तीन साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध दोनों देशों को भारी कीमत चुका रहा है. यूक्रेन का दावा है कि फरवरी 2022 से अब तक रूस के 10 लाख से ज्यादा सैनिक मारे जा चुके हैं. युद्ध में रूस की हालत पतली होती दिख रही है, और अब उसके लिए एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है- उत्तर कोरिया रूस को सैनिक भेजने की तैयारी में है. ऐसे वक्त में जब रूस को फौज की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, उत्तर कोरिया की यह ‘मदद’ युद्ध को और गंभीर बना सकती है.

यूक्रेनी सेना के जनरल स्टाफ के मुताबिक, रूस ने अब तक कुल 10,07,160 सैनिक खो दिए हैं. सिर्फ पिछले 24 घंटे में ही 1,040 रूसी सैनिक मारे गए. इसके अलावा रूस के 10,947 टैंक, 22,845 बख्तरबंद वाहन, 52,312 सैन्य वाहन और ईंधन टैंकर, 29,265 तोप प्रणाली, 1,420 रॉकेट लॉन्चर, 1,187 एयर डिफेंस सिस्टम, 416 विमान, 337 हेलीकॉप्टर, 41,165 ड्रोन, 3,369 क्रूज मिसाइलें, 28 नौकाएं और एक पनडुब्बी भी तबाह हो चुकी है.
उत्तर कोरिया भेजेगा 5,000 सैनिक

रूसी समाचार एजेंसियों के मुताबिक, उत्तर कोरिया रूस के कुर्स्क क्षेत्र में अपने 5,000 सैनिक और 1,000 माइंस हटाने वाले विशेषज्ञ भेजने वाला है. इससे पहले भी उत्तर कोरिया के करीब 10,000 सैनिक रूस भेजे गए थे, जिनमें से 6,000 की जान जा चुकी है. यह जानकारी ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने इस सप्ताह दी है.
G-7 में पुतिन पर निशाना

G-7 सम्मेलन के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ‘अंतरराष्ट्रीय माहौल का फायदा उठाकर पुतिन निर्दोष नागरिकों पर हमला कर रहे हैं.’ इस हमले में एक अमेरिकी नागरिक की भी मौत हुई है.
कीव में मिसाइल हमला, 18 की मौत

रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने कीव शहर में तबाही मचा दी. अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 18 लोगों की मौत और 151 लोग घायल हो गए. कीव के सोलोमियन्स्की जिले में नौ मंजिला बिल्डिंग को मिसाइल ने निशाना बनाया. घटनास्थल पर मौजूद 57 वर्षीय विक्टोरिया वोवचेंको ने कहा, ‘ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा… यह आम लोगों को लगातार प्रताड़ित करने जैसा है.’

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Tue, 24 Jun 2025 12:05:45 +0530 news desk MPcg
Pakistan on US&Iran Conflict: ईरान मुद्दे पर पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया झटका, चीन&रूस के साथ खड़ा हुआ इस्लामाबाद https://citytoday.co.in/2792 https://citytoday.co.in/2792 Pakistan on US-Iran Conflict: पाकिस्तान ने ईरान के मुद्दे पर अमेरिका को बड़ा झटका दे दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हाल ही में पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर की मुलाकात हुई थी. ये मानते हुए कि पाकिस्तान में वास्तविक सत्ता सेना के पास है, डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को मुनीर की व्हाइट हाउस में मेजबानी की. वाशिंगटन में असीम मुनीर के लिए जबरदस्त बंदोबस्त किए गए थे. इससे इस्लामाबाद और वाशिंगटन के बीच नजदीकियां बढ़ने की अटकलें लगाई जाने लगीं. हालांकि पाकिस्तान ने ईरान के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में अमेरिका के खिलाफ जाकर चीन और रूस का साथ दिया है.

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने रविवार को ईरान पर हुई आपात बैठक में कहा कि इस्लामाबाद "ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों पर अमेरिका की ओर से किए गए हमलों की कड़ी निंदा करता है."
अहमद ने बताया कि पाकिस्तान अपने मित्र चीन और सहयोगी रूस के साथ मिलकर सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव का मसौदा प्रसारित कर रहा है ताकि इसे अपनाया जा सके।" यह आपात बैठक ईरान के अनुरोध पर बुलाई गई थी. अमेरिका की ओर से उसकी तीन परमाणु साइटों पर बमबारी के बाद ये बैठक हुई.

अहमद ने कहा कि सुरक्षा परिषद को "13 जून से ईरान पर किए गए हमलों की स्पष्ट रूप से निंदा करनी चाहिए और उन्हें खारिज करना चाहिए, क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन हैं."

उन्होंने कहा कि ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फाहान स्थित परमाणु केंद्रों पर हालिया हमले अमेरिका की ओर से किए गए हैं. अहमद ने कहा, "परिषद को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की ओर से संरक्षित परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों की निंदा करनी चाहिए, जो सुरक्षा परिषद और आईएईए के प्रस्तावों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन करते हैं."

अहमद ने कहा, "हम इजरायल के कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. हम चीन और रूस के साथ मिलकर ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करते हैं."

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Mon, 23 Jun 2025 13:16:04 +0530 news desk MPcg
Iran&Israel War: पश्चिम एशिया में तनाव के चलते भारत ने अपनाई खास रणनीति, रूस से बढ़ाया कच्चे तेल का आयात https://citytoday.co.in/2787 https://citytoday.co.in/2787 ईरान-इस्राइल युद्ध में अमेरिका की एंट्री के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ना तय है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में उछाल की आशंका है। हालात को भांपते हुए भारत ने जून महीने में रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है।

ईरान-इस्राइल युद्ध के बीच भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ाया

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इस्राइल युद्ध में अमेरिका के शामिल होने के बाद भारत ने अपनी तेल आयात रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। वैश्विक व्यापार विश्लेषक फर्म कैपलर के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने जून महीने में रूस से हर दिन करीब 20–22 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद की, जो बीते दो वर्षों में सबसे ज्यादा है। मई में यह आंकड़ा सिर्फ 11 लाख बैरल प्रतिदिन था।

कुछ साल पहले तक भारत अपनी जरूरत का महज 1% कच्चा तेल रूस से मंगाता था, लेकिन अब यह हिस्सा 40–44% तक पहुंच चुका है। यह बदलाव पश्चिम एशिया में अस्थिरता को लेकर भारत की रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा, तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका युद्ध में सक्रिय रूप से शामिल होता है, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाएगा। भारत का करीब 40% तेल आयात इसी मार्ग से होता है। साथ ही, ईरान समर्थित हूती विद्रोही भी लाल सागर में जहाजों पर हमले कर सकते हैं, जिससे खाड़ी देशों से तेल लाना और मुश्किल हो सकता है।

इसी वजह से भारत ने इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आयात घटाकर, जून में इन देशों से केवल 20 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा है।

अमेरिका से भी बढ़ा तेल आयात

भारत अब केवल खाड़ी देशों या रूस पर निर्भर नहीं है। अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों से भी तेल आयात बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, अमेरिकी तेल की लागत अधिक है, फिर भी जून में भारत ने अमेरिका से 4.39 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया, जो पहले केवल 2.80 लाख बैरल था।

भारत फिलहाल कुल करीब 51 लाख बैरल प्रति दिन कच्चे तेल की खरीद करता है, जिससे देश की रिफाइनरियों में पेट्रोल और डीजल जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

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Sun, 22 Jun 2025 12:27:29 +0530 news desk MPcg
ईरान&इजरायल जंग: न्यूक्लियर सिटी इस्फहान में धमाके, UAV कमांडर ढेर, तेल अवीव पर मिसाइल स्ट्राइक https://citytoday.co.in/2780 https://citytoday.co.in/2780

ईरान और इज़रायल के बीच तनाव खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है. दोनों देश एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं, जिससे पूरी दुनिया में चिंता का माहौल है. आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर हो क्या रहा है.

ईरान ने इज़रायल पर किया बड़ा हमला

ताजा घटना में ईरान ने इज़रायल की राजधानी तेल अवीव पर बैलिस्टिक मिसाइलों और रॉकेटों से जोरदार हमला किया. इस हमले के बाद पूरे सेंट्रल इज़रायल में खतरे के सायरन बजने लगे और आसमान में धमाकों की आवाज़ गूंज उठी.

क्या हुआ: ईरान ने एक के बाद एक कई रॉकेट दागे

इज़रायल का बचाव: इज़रायल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जिसे हवाई सुरक्षा कवच भी कह सकते हैं) ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया.

नुकसान: ईरानी हमले से मध्य इज़रायल में एक चार मंजिला इमारत की छत पर आग लग गई. इसके अलावा, हाइफा शहर में एक पुरानी मस्जिद और पास की एक सरकारी इमारत को भी नुकसान पहुंचा है. इन हमलों में कम से कम दो लोगों के घायल होने की खबर है. ईरानी सेना का कहना है कि उन्होंने लंबी दूरी की भारी मिसाइलों से इज़रायल के सैन्य ठिकानों और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया है.

इज़रायल का करारा जवाब 

ईरान के हमलों के जवाब में इज़रायल भी चुप नहीं बैठा है और लगातार पलटवार कर रहा है.

बड़ा दावा: इज़रायली वायुसेना ने ईरान के एक बड़े कमांडर, अमीनपुर जौदकी को मार गिराने का दावा किया है. जौदकी ईरान के ड्रोन (UAV) हमलों का एक अहम हिस्सा था.

अन्य हमले: इज़रायल ने पश्चिमी ईरान में उस जगह पर भी हमला किया, जहाँ से मिसाइलें लॉन्च की जा रही थीं. इसके अलावा, दक्षिण-पश्चिमी ईरान में भी इज़रायली लड़ाकू विमानों ने हमला किया, जिसमें कम से कम चार लोगों के मारे जाने की खबर है. इज़रायल का कहना है कि उसका मकसद ईरान की हवाई ताकत को कमजोर करना है.

सबसे बड़ी चिंता: परमाणु ठिकानों पर हमला 

इस लड़ाई में सबसे खतरनाक मोड़ तब आया, जब ईरान के इस्फहान शहर में धमाकों की आवाज़ सुनी गई. इस्फहान वही जगह है, जहां ईरान का एक बहुत बड़ा परमाणु रिसर्च सेंटर है. खबरों के मुताबिक, इज़रायल ने इस शहर पर मिसाइलों से हमला किया है. यह घटना बहुत गंभीर है क्योंकि इससे परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ सकता है.

क्या है दोनों देशों का कहना?

इज़रायल: संयुक्त राष्ट्र में इज़रायल ने साफ कर दिया है कि वह अपने हमले तब तक नहीं रोकेगा, जब तक "ईरान का परमाणु खतरा" खत्म नहीं हो जाता. इज़रायल को डर है कि ईरान परमाणु बम बना रहा है.

ईरान: ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कामों के लिए है. ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में दखल देने की अपील की है. ईरान ने यह भी कहा है कि वह यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसे पूरी तरह से बंद करने की शर्त कभी नहीं मानेगा, खासकर तब जब उस पर हमले हो रहे हैं.

इस बीच, अमेरिका के इस युद्ध में शामिल होने की भी अटकलें हैं, जिससे ईरान की चिंता और बढ़ गई है. कुल मिलाकर, स्थिति बहुत नाजुक है और दोनों देशों के बीच यह टकराव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की नज़रें टिकी हुई हैं.

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Sat, 21 Jun 2025 12:32:15 +0530 news desk MPcg
ऑपरेशन सिंदूर के बीच PAK के डिप्टी PM को आया सऊदी प्रिंस का फोन कहा ‘ब्रदर, क्या मैं जयशंकर से बात करूं… https://citytoday.co.in/2769 https://citytoday.co.in/2769 ऑपरेशन सिंदूर: भारत के हमले से घबराया पाकिस्तान, सऊदी से लगाई गुहार

कराची – पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान जवाब देने की तैयारी ही कर रहा था कि भारत ने दोबारा हमला कर दिया। उन्होंने बताया कि इस दौरान सऊदी अरब ने बीच-बचाव की कोशिश की थी।

भारत ने पहले हमला किया

डार ने बताया कि भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में 7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस आतंकी हमले में 26 निर्दोष सैलानियों की मौत हुई थी।

भारत ने नूर खान एयरबेस और शोरकोट एयरबेस जैसे पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। इशाक डार ने माना कि पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की योजना बनाई थी, लेकिन भारत ने पहले ही हमला कर दिया।

'ब्रदर, आप बात कर सकते हैं'

डार ने बताया कि हमले के 45 मिनट बाद उन्हें सऊदी प्रिंस फैसल का फोन आया। प्रिंस ने पूछा, "क्या मैं भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात करने के लिए अधिकृत हूं? अगर आप रुकने को तैयार हैं तो मैं भारत से भी कहूं कि वे रुक जाएं।"

डार ने जवाब दिया, "हां, पाकिस्तान इसके लिए तैयार है। आप जयशंकर से बात कर सकते हैं।"

बाद में प्रिंस ने बताया कि उन्होंने जयशंकर से बात कर ली है। इससे साफ होता है कि सऊदी अरब ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने की कोशिश की।

पाकिस्तान का फोकस सिर्फ बचाव में

इशाक डार के इस बयान से साफ हो गया है कि पाकिस्तान ने भारत को कोई सख्त जवाब नहीं दिया, बल्कि वह हमलों से बचने और अमेरिका, सऊदी अरब, कतर जैसे देशों से मदद मांगने में लगा था।

डार का यह बयान पाक पीएम शहबाज शरीफ के पुराने दावे का भी खंडन करता है। पहले शरीफ ने कहा था कि पाकिस्तान ने भारत को कड़ा जवाब दिया, लेकिन अब वे भी मान चुके हैं कि भारत ने पहले हमला किया और कई पाक एयरबेस तबाह कर दिए।

भारत का ऑपरेशन सिंदूर

भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पीओके में आतंकी शिविरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तान ने 8, 9 और 10 मई को जवाबी हमला करने की नाकाम कोशिश की, लेकिन भारत ने हर बार और ताकतवर जवाब दिया।

आखिरकार 10 मई को पाकिस्तान की अपील पर भारत युद्धविराम के लिए तैयार हुआ।

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Fri, 20 Jun 2025 17:43:08 +0530 news desk MPcg
US ने कतर एयरबेस से चुपचाप हटाए सैन्य विमान, ईरान से हमले की आशंका के चलते लिया फैसला https://citytoday.co.in/2768 https://citytoday.co.in/2768 मध्य पूर्व में खतरा: अमेरिका ने कतर से हटाए अपने सैन्य विमान

ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल हमले करने के बाद अब अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों की सुरक्षा को लेकर चिंता सताने लगी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कतर में अमेरिका के सबसे बड़े एयरबेस अल उदीद से पिछले दो हफ्तों में करीब 40 अमेरिकी सैन्य विमान गायब हो गए हैं। माना जा रहा है कि ये विमान ईरानी हमले की आशंका के कारण वहां से हटा दिए गए हैं।

सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

5 जून की सैटेलाइट तस्वीरों में एयरबेस पर C-130 हरक्यूलिस और टोही जेट जैसे करीब 40 विमान खड़े दिखे थे, जबकि 19 जून की तस्वीरों में केवल तीन विमान ही बचे हैं। इससे साफ है कि अमेरिका ने अपनी सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर विमानों को वहां से हटा लिया है।

दूतावास ने दी चेतावनी

कतर में अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि अब इस एयरबेस तक पहुंच सीमित कर दी गई है, और कर्मियों को अधिक सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

ट्रंप ने अभी तक नहीं लिया फैसला

इजरायल और ईरान के बीच जंग शुरू होने के एक सप्ताह बाद भी अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ है। 19 जून को वॉइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले दो सप्ताह में इस बारे में फैसला लेंगे। एएफपी ने विमानों पर नजर रखने वाले ओपेन-सोर्स डेटा के विश्लेषण से बताया है कि कम से कम 27 सैन्य ईंधन भरने वाले विमान- केसी-46ए पेगासस और केसी-135 स्ट्रेटोटैंकर विमान- 15 से 18 जून के बीच अमेरिका से यूरोप की यात्रा पर गए।

अमेरिका ने शुरू कर दी तैयारी

उनमें से केवल दो विमान ही अमेरिका लौटे, जबकि 25 विमान बुधवार देर रात तक यूरोप में थे। हवा में ईंधन भरने वाले विमान लंबी दूरी के हवाई अभियानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और यह इस बात का संकेत हो सकता है कि अमेरिका लंबे मिशनों के लिए तैयारी कर रहा है।

अमेरिका को किस बात का डर?

अमेरिकी सेना में पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल और रैंड कॉरपोरेशन में डिफेंस रिसर्चर मार्क श्वार्ट्ज ने एएफपी को बताया कि ईरान के बेहद नजदीक होने के कारण अल-उदीद में विमान बेहद असुरक्षित होंगे। मध्य पूर्व में सेवा दे चुके श्वार्ट्ज ने कहा कि छर्रे भी विमान को मिशन के लिए अयोग्य बना सकते हैं। उन्होंने कहा, ऐसा करके (विमानों को हटाकर) अमेरिकी सेना, कर्मियों और उपकरणों दोनों के लिए जोखिम को कम करना चाहती है।

अमेरिका के 40000 सैनिक तैनात

इजरायल और ईरान में जंग के बीच मध्य पूर्व में अमेरिकी सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं। वर्तमान में पूरे क्षेत्र में लगभग 40,000 सैनिक तैनात है। जबकि सामान्य तौर पर यहां 30,000 की तैनाती रहती है। अक्टूबर में इजरायल और ईरान के बीच तनाव के दौरान और लाल सागर में जहाजों पर हूतियों के हमले के समय यह संख्या कुछ समय के लिए बढ़कर 43,000 हो गई थी।

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Fri, 20 Jun 2025 17:35:33 +0530 news desk MPcg
खामेनेई के भतीजे ने किया ईरान में सत्ता पलट का आह्वान, कहा& शांति के लिए इस शासन का अंत जरूरी https://citytoday.co.in/2761 https://citytoday.co.in/2761 तेहरान 

ईरान और इज़राइल के बीच युद्ध दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, और इस बीच खुद ईरान के शासक वर्ग से एक चौंकाने वाली आवाज़ उठी है, वह भी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के परिवार से. फ्रांस में रह रहे खामेनेई के निर्वासित भतीजे महमूद मोरदखानी ने एक साक्षात्कार में कहा कि वह युद्ध के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि इस्लामिक गणराज्य का अंत ही असली शांति का रास्ता है.

मोरदखानी ने कहा, “जो भी इस शासन को मिटा सके, वो ज़रूरी है. अब जब हम यहां तक आ पहुंचे हैं, तो ये करना ही होगा.”  1986 में ईरान छोड़ चुके मोरदखानी अपने चाचा के निरंकुश शासन के कटु आलोचक रहे हैं. उन्होंने रॉयटर्स को बताया कि इज़राइल से सैन्य टकराव दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन ऐसी व्यवस्था में यह अपरिहार्य है जो न तो झुकती है और न ही सुधार स्वीकार करती है.

खत्म हो इस्लामी शासन- मोरदखानी

मोरदखानी ने कहा, “मुझे गहरा दुख है कि बात यहां तक पहुंच गई है… लेकिन क्या खामेनेई की हत्या से शासन तुरंत खत्म हो जाएगा? ये अलग सवाल है.”  ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण मोरदखानी अपने लोगों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि “कई ईरानी लोग शासन की कमजोरी के संकेत देखकर खुश हैं.”

उन्होंने कहा, “जितनी जल्दी यह खत्म हो, उतना अच्छा है. इसका अंत इस्लामिक गणराज्य के खात्मे से होना चाहिए. वरना यह एक बेकार हार होगी और मेरा अब भी मानना है कि यह शासन बदला जरूर लेगा.” 

इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग करते हुए खामेनेई की हत्या को लेकर भी संकेत दिए. उनके सहयोगियों के अनुसार, ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के सैन्य विकल्पों को निजी रूप से मंजूरी दे दी है, हालांकि अंतिम आदेश अब तक नहीं दिया गया है.

पूर्व शाह के बेटे रेज़ा पहलवी का तीखा हमला
ईरान के पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रेजा पहलवी ने भी सोशल मीडिया पर शासन बदलाव का आह्वान किया. उन्होंने दावा किया कि खामेनेई “किसी डरे हुए चूहे की तरह अंडरग्राउंड हो गए हैं और इस्लामिक गणराज्य अपने अंत की तरफ है.'

उन्होंने आगे कहा, “इस्लामिक गणराज्य का अंत आ चुका है. जो शुरू हुआ है, वह अब पलटाया नहीं जा सकता. भविष्य उज्जवल है, और हम इतिहास के इस तीखे मोड़ से साथ मिलकर गुजरेंगे. खामेनेई ने हालात पर से नियंत्रण खो दिया है. 46 वर्षों से ईरानी जनता के खिलाफ छेड़े गए युद्ध का अंत इस शासन के अंत से ही होगा.”
 

 

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Thu, 19 Jun 2025 12:55:44 +0530 news desk MPcg
राजधानी तेहरान में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी, सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह https://citytoday.co.in/2728 https://citytoday.co.in/2728 तेहरान 

 ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बाद दोनों देशों में फंसे भारतीयों को वापस अपने देश  लाने के लिए अभियान तेज हो गया है। सबसे पहले ईरान से सभी भारतीय छात्रों को सुरक्षित भारत  लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भारत ने सोमवार (16 जून) से ईरान में फंसे अपने नागरिकों को निकालना शुरू किया। कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 100 भारतीयों का पहला जत्था ईरान से निकाल लिया गया है। बताया जा रहा है कि वे आर्मेनिया सीमा पर पहुंच गए हैं। सोमवार को केंद्र ने कहा कि तेहरान में भारतीय दूतावास लगातार सुरक्षा स्थिति की निगरानी कर रहा है।

ईरान में भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनसे संपर्क कर रहा है। साथ ही कुछ मामलों में उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भी पहुंचाया जा रहा है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि ईरान का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण भारतीय छात्रों को आर्मेनिया के रास्ते निकाला जा रहा है। आर्मेनिया से उनको जॉर्जिया और फिर पश्चिम एशिया के रास्ते भारत लाया जा सकता है। 110 छात्रों का पहला दल आर्मेनिया सीमा पर पहुंच चुका है।

बताया जा रहा है कि तीन यूनिवर्सिटी के छात्रों को फिलहाल सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है। अन्य छात्रों को भी शिफ्ट किया जा रहा है। ईरान में करीब डेढ़ हजार कश्मीरियों समेत 10,000 भारतीय छात्र हैं। अधिकतर छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने  के लिए ईरान गए हैं।

भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी

इस बीच, ईरान में भारत के दूतावास की एक ताजा एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि जो भी भारतीय या भारतीय मूल के लोग अपने संसाधनों के जरिए तेहरान से बाहर निकल सकते हैं वो शहर के बाहर सुरक्षित ठिकानों पर चले जाएं।

ईरान में भारतीय दूतावास ने कहा, "सभी भारतीय नागरिक और पीआईओ (भारतीय मूल के व्यक्ति) जो अपने संसाधनों का उपयोग करके तेहरान से बाहर जा सकते हैं, उन्हें शहर के बाहर सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जाती है।"

भारतीय छात्रों को लेकर सरकार अलर्ट

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, "तेहरान में भारतीय दूतावास लगातार सुरक्षा स्थिति पर नजर रखे हुए है और ईरान में भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनसे संपर्क कर रहा है।"

बयान में कहा गया है, "कुछ मामलों में छात्रों को दूतावास की मदद से ईरान में ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। अन्य व्यवहार्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। और जानकारी बाद में दी जाएगी।" इस बयान के अनुसार, दूतावास समुदाय के नेताओं से भी सतत संपर्क बनाए हुए है।

इजरायल और ईरान में भारतीय दूतावासों ने स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपने X हैंडल पर एडवाइजरी जारी किए हैं। ईरान में भारतीय दूतावास की ओर से X पर एक पोस्ट में कहा गया है, "ईरान में मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, परामर्श के तहत यहां रह रहे सभी भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें, किसी भी तरह की अनावश्यक गतिविधियों से बचें, दूतावास के सोशल मीडिया अकाउंट पर दी जा रही सूचना को ध्यान में रखें। स्थानीय अधिकारियों द्वारा बताए गए सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें।"

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Tue, 17 Jun 2025 12:12:15 +0530 Newsdesk
जापान में चावल इतना महंगा क्यों हो गया है? https://citytoday.co.in/2725 https://citytoday.co.in/2725 जापान में चावल की कीमतें पिछले साल की तुलना में दोगुनी हो गई हैं. मुश्किल इतनी बड़ी है कि इसे राष्ट्रीय संकट कहा जाने लगा है. सरकार और आम लोग, दोनों की नींद उड़ी हुई है. आखिर चावलों की कीमत बढ़ने के पीछे क्या कारण है?जापान में चावल को एक तरह से पवित्र भोजन का दर्जा हासिल है जो यहां की संस्कृति, भाषा और परंपरा में गहराई तक समाया हुआ है. देसी बाजार को आयातित चावल से बचाने के लिए उस पर भारी आयात शुल्क लगाया जाता है. हालांकि अब हालत यह है कि घरेलू चावल इतना महंगा हो गया है कि शुल्कों की परवाह किए बगैर भारी मात्रा में चावल विदेशों से मंगाया जा रहा है.

रोजमर्रा का खाना जापान में बहुत से लोगों के लिए लग्जरी बन गया है. उनकी मुसीबत हल करना इस वक्त जापान के नेताओं के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है. आने वाले हफ्तों में यहां संसदीय चुनाव होने हैं.

कब से शुरू हुई समस्या

इस संकट की शुरुआत तो 2023 में फसलों की कटाई के समय ही हो गई थी. अत्यधिक लू चलने की वजह से फसल खराब हुई और उपज इतनी भी नहीं थी कि उसे बाजार में बेचा जा सके. चावल उत्पादक और व्यापारी 2024 की शुरुआत में ही इस जंजाल में उलझ गए थे. जहां भी, जैसा भी चावल मिल रहा था उसे खरीद कर उन्होंने कमी दूर करने की कोशिश की गई.
इस चेतावनी के बाद लोगों में हड़कंप मच गया और लोगों ने चावल खरीद कर भंडार करना शुरू कर दिया. इसके नतीजे में दुकानों के शेल्फ खाली हो गए और बाजार में चावल मिलना मुश्किल हो गया. इसी दौर में विदेशियों के आने से चावल की मांग और बढ़ी.

इन सबका नतीजा अगस्त 2024 में जापान में 4,00,000 मीट्रिक टन चावल की कमी के रूप में आया. 2024 में उपजे चावल का भंडार बाजार में तय समय से दो महीने पहले ही खत्म हो गया. सितंबर 2024 में थोक बाजार में चावल की कीमत अगस्त की तुलना में 41 फीसदी बढ़ गई. इसके बाद से लगभग हर महीने यह कीमत बढ़ती जा रही है.
1970 के दशक से ही सरकार ने देश में पैदा होने वाले चावल की मात्रा को नियंत्रित किया है. इसके जरिए सरकार मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखती है. इसकी वजह से किसान चावल कम उगाते हैं.

सरकार ने क्या किया है

बढ़ती कीमतों की सुर्खियां बनने के बाद सरकार ने फरवरी में आपातकालीन भंडार से चावल निकाल बाजार में छोड़ने की घोषणा की. जापान की सरकार को पहली बार कीमत नियंत्रित करने कि लिए ऐसा करना पड़ा है.

चावल को पहले नीलामी के जरिए सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को बेचा गया. उसके बाद इसे जापान एग्रीकल्चर कॉपरेटिव्स के जरिए बांटा गया. इस चावल के लोगों तक पहुंचने में देर लगी. खुदरा बाजार में इससे कीमतें घटाने में कोई खास फायदा नहीं हुआ और साथ ही लोगों को यह आसानी से मिला नहीं.

चावल की वजह से कृषि मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और मई में नए कृषि मंत्री शिनिजिरो कोईजुमी के आने के बाद लोगों तक चावल पहुंचाने में थोड़ी तेजी आई. कोईजुमी ने खुदरा बाजारों को सीधे चावल बेचना शुरू किया जिसके कि वह पांच किलो चावल 2000 येन यानी तकरीबन 13.85 अमेरिकी डॉलर की दर से बेच सकें. यह सुपरमार्केट में मिलने वाले चावल की कीमत का करीब आधा था. यह सप्लाई ग्राहकों तक जल्दी से ही पहुंचने लगी.

फिलहाल सिर्फ सरकारी आपूर्ति वाला चावल ही सस्ता है लेकिन यह बहुत कम है. देश भर के सुपरमार्केट में 5 किलो चावल की कीमत मार्च से ही 4,000 येन यानी 27 डॉलर से ज्यादा है. प्रधानमंत्री इशिबा इसे नीचे ले जाना चाहते हैं. कोईजुमी ने शपथ ली है कि वह सरकार के पास मौजूद 9,10,000 टन के समूचे भंडार को बाहर निकालेंगे और इसके साथ ही आयात के भरोसे कीमतों को कम करेंगे.

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Tue, 17 Jun 2025 11:45:50 +0530 news desk MPcg
ईरान&इजरायल में मिसाइल अटैक, पाकिस्तान में मचा हाहाकार, पेट्रोल&डीजल महंगा https://citytoday.co.in/2714 https://citytoday.co.in/2714 ईरान-इजरायल के बीच जंग (Iran-Israel War) बढ़ती जा रही है , जिससे ग्लोबल टेंशन में इजाफा हुआ है. इसका असर न केवल दुनियाभर के शेयर बाजारों पर दिख रहा है, बल्कि क्रूड ऑयल की कीमतें भी लगातार चढ़ती (Crude Oil Price Rise) जा रही हैं. कच्चा तेल महंगा होने के कारण पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में हाहाकार सा मच गया, दरअसल सरकार ने अचानक देश में पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की कीमतों में इजाफा (Pakistan Petrol-Diesel Price Hike) कर दिया है और नई कीमतें आज से लागू कर दी गई हैं.  

सरकार ने अचानक महंगा किया पेट्रोल-डीजल 

पहले से आर्थिक संकट झेल रहे पाकिस्तान की जनता के लिए ईरान-इजरायल के बीच बढ़ता संघर्ष नई मुसीबत लेकर आया है. क्रूड की कीमतों में लगातार इजाफा होने के चलते पाकिस्तान में सरकार ने रविवार रात एक बड़ा फैसला लेते हुए जनता पर बोझ बढ़ा दिया है. पाकिस्तानी वित्त विभाग ने पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में भारी वृद्धि की अधिसूचना जारी की है. इसके तहत High Speed Diesel Price में 7.95 पाकिस्तानी रुपये और Petrol Price में 4.80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है. 

अब यहां पहुंची पेट्रोल-डीजल की कीमतें

पाकिस्तान मीडिया डॉन डॉट कॉम पर सरकारी नोटिफिकेशन के हवाले से जानकारी देते हुए बताया गया है कि Petrol-High Speed Diesel की नई कीमतें ओगरा (तेल और गैस नियामक प्राधिकरण) और संबंधित मंत्रालयों की सिफारिशों के आधार पर निर्धारित की गई हैं. ताजा बढ़ोतरी के बाद नई कीमतें आज 16 जून 205 से प्रभावी कर दी गई हैं. अब पाकिस्तान में हाई-स्पीड डीजल (HSD Price In Pakistan) पहले के 254.64 रुपये प्रति लीटर की तुलना में बढ़कर 262.59 पाकिस्तानी रुपये हो गया है. वहीं दूसरी ओर Pakistan Petrol Price पहले के 253.63 रुपये प्रति लीटर के बजाय अब 258.43 रुपये हो गया है. 

हालांकि, सरकार की ओर से कहा गया है कि फ्यूल प्राइस में ये वृद्धि सरकार की ओर से इन्हें एडजस्ट करने के तौर पर की गई है, जिसके 15 दिन बाद एडजस्ट कर दिया जाएगा. लेकिन अगले रिव्यू तक कीमतें इसी प्रकार रहेंगी.

क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने का असर !

बता दें कि Israel-Iran Conflict के चलते क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Crude Oil Price में इजाफे का असर तमाम देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर देखने को मिलने लगा है और पाकिस्तान की जनता पर सबसे पहले आफत फूटी है. बता दें कि ब्रेंट क्रूड का दाम 75 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है, जबकि WTI क्रूड का जुलाई वायदा भाव भी 73.99 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. 

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Mon, 16 Jun 2025 15:33:19 +0530 news desk MPcg
इजरायल और ईरान की जंग में यूक्रेन से युद्ध लड़ रहे पुतिन बनेंगे शांतिदूत ! https://citytoday.co.in/2701 https://citytoday.co.in/2701 मिडिल ईस्ट में युद्ध की आग: पुतिन-ट्रंप की 50 मिनट लंबी बातचीत, इजरायल-ईरान संघर्ष पर गहरी चिंता

मॉस्को/वॉशिंगटन/तेल अवीव/तेहरान: 

मिडिल ईस्ट एक बार फिर जंग की भट्टी में तप रहा है। इजरायल और ईरान के बीच बीते 48 घंटों में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। दोनों देश एक-दूसरे पर भीषण मिसाइल हमले कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव का स्तर चरम पर पहुंच गया है। इसी संकट के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच टेलीफोन पर 50 मिनट तक अहम बातचीत हुई। क्रेमलिन कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी यूरी उशाकोव के मुताबिक, यह वार्ता मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर केंद्रित रही और काफी "लाभप्रद" रही।

पुतिन ने की इजरायल की आलोचना, जताई गहरी चिंता
पुतिन ने इस दौरान ट्रंप को ईरान और इजरायल के राष्ट्रप्रमुखों से हुई अपनी पिछली बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने इजरायल के सैन्य अभियान की निंदा करते हुए कहा कि यह संघर्ष पूरे मिडिल ईस्ट को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। पुतिन ने युद्ध को रोकने की दिशा में रूस की मध्यस्थता की इच्छा भी जाहिर की।

ट्रंप बोले- बातचीत जरूरी, अमेरिका तैयार
ट्रंप ने भी मौजूदा हालात को "बेहद चिंताजनक" बताते हुए कहा कि ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर आना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से बातचीत के लिए वार्ताकारों की टीम तैयार है और वह ईरानी प्रतिनिधियों से वार्ता करना चाहते हैं।

यूक्रेन मसले पर भी हुई चर्चा
बातचीत के दौरान पुतिन ने ट्रंप को रूस-यूक्रेन के बीच 2 जून को इस्तांबुल में हुई सहमति की जानकारी दी। साथ ही, 22 जून के बाद यूक्रेन से पुनः बातचीत की इच्छा भी जताई।

युद्ध के ताजा हालात

ईरानी हमला:
ईरान ने इजरायल पर बीती रात 80 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें से करीब 40 मिसाइलें उत्तरी इजरायल में गिरीं। इन हमलों में अब तक 10 इजरायली नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक घायल हुए हैं। 7 लोग अभी भी लापता हैं।

इजरायली पलटवार:
इजरायल ने पश्चिमी ईरान में मिसाइल स्टोरेज और लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया। इजरायली हमले में ईरानी सेना के 6 शीर्ष जनरलों की मौत की खबर है। साथ ही, न्यूक्लियर वैज्ञानिकों सहित 130 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। 300 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।

सुरक्षा कड़ी, तनाव चरम पर
ईरान ने देश के कई हिस्सों में एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव कर दिए हैं। वहीं, इजरायल ने ईरान के मिलिट्री जोन और आसपास के इलाकों को खाली करने की चेतावनी जारी कर दी है।

इजरायल-ईरान के बीच तेज होता यह संघर्ष अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। पुतिन और ट्रंप जैसे बड़े नेताओं की बातचीत से उम्मीद तो बंधती है, लेकिन मिडिल ईस्ट में शांति बहाल करने के लिए अभी ठोस कदमों की सख्त जरूरत है।

"यह युद्ध सिर्फ दो देशों की नहीं, पूरे क्षेत्र की त्रासदी बनता जा रहा है।" — पुतिन
"बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। अमेरिका तैयार है।" — ट्रंप

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Sun, 15 Jun 2025 17:34:05 +0530 news desk MPcg
ईरान की IRNA के अनुसार, मेजर जनरल अमीर हातामी को ईरान की सेना का नया चीफ कमांडर नियुक्त किया गया https://citytoday.co.in/2693 https://citytoday.co.in/2693 तेहरान
इजरायल द्वारा ईरान के शीर्ष सैन्य नेताओं की हत्या के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई ने देश की सैन्य संरचना में बड़े पैमाने पर बदलाव की घोषणा की है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, मेजर जनरल अमीर हातामी को ईरान की सेना (आर्मी ऑफ द इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान) का नया चीफ कमांडर नियुक्त किया गया है। हातामी इससे पहले 2013 से 2021 तक ईरान के रक्षा मंत्री रह चुके हैं। खामेनेई ने अपनी नियुक्ति पत्र में हातामी की "निष्ठा, क्षमता और अनुभव" की प्रशंसा की और उनसे "परिवर्तनकारी और क्रांतिकारी दृष्टिकोण" की अपेक्षा जताई। इसके साथ ही, पूर्व आर्मी चीफ मेजर जनरल सैय्यद अब्दुल रहीम मुसवी को 'शहीद' चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मोहम्मद हुसैन बाघेरी की जगह नया चीफ ऑफ स्टाफ ऑफ द आर्म्ड फोर्सेज नियुक्त किया गया है।

खामेनेई ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "दुष्ट यहूदी शासन द्वारा लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद हुसैन बाघेरी की शहादत को देखते हुए, और मेजर जनरल सैय्यद अब्दुल रहीम मुसवी की सराहनीय सेवाओं और मूल्यवान अनुभव को ध्यान में रखते हुए, मैं उन्हें सशस्त्र बलों का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त करता हूं।"

आईआरजीसी के नए प्रमुख की नियुक्ति
इजरायल के ऑपरेशन "राइजिंग लायन" में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हुसैन सलामी की मौत के बाद, खामेनेई ने मेजर जनरल मोहम्मद पाकपौर को नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, "दुष्ट जायोनी शासन द्वारा लेफ्टिनेंट जनरल हुसैन सलामी की शहादत को ध्यान में रखते हुए, और मेजर जनरल मोहम्मद पाकपौर की सेवाओं को देखते हुए, मैं उन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त करता हूं।" इसके अलावा, खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गुलामअली राशिद की मौत के बाद मेजर जनरल अली शादमानी को उस पद पर नियुक्त किया गया है।

ऑपरेशन "राइजिंग लायन" में मारे गए ईरानी अधिकारी
इजरायल ने शुक्रवार तड़के 200 से अधिक फाइटर जेट्स के साथ ईरान की राजधानी तेहरान, इस्फहान, और फोर्डो जैसे इलाकों में सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों, बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, और परमाणु संयंत्रों को निशाना बनाया गया। इजरायली सेना ने दावा किया कि ईरान के पास परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त यूरेनियम जमा हो रहा था, जिसे रोकने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। हमले में ईरान के कई शीर्ष अधिकारी और वैज्ञानिक मारे गए।

ईरान का जवाबी हमला
हमले के बाद ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई शुरू की। ईरानी सेना ने इजरायल पर 100 से अधिक ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। ईरान ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर बयान जारी कर कहा, "हमने युद्ध शुरू नहीं किया, लेकिन हम जवाब जरूर देंगे।" ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों के लिए इजरायल और उसके सहयोगी अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया, यह दावा करते हुए कि हमले इराकी हवाई क्षेत्र से किए गए, जो अमेरिकी नियंत्रण में है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इजरायल को "कठोर सजा" देने की कसम खाई। उन्होंने कहा, "इजरायल ने हमारी संप्रभुता का उल्लंघन किया है, और इसके गंभीर परिणाम होंगे।"

इजरायल की रणनीति
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले को "ईरानी परमाणु खतरे को कम करने" का कदम बताया। उन्होंने कहा कि सितंबर 2024 में हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह की हत्या के बाद ईरान का क्षेत्रीय गठबंधन कमजोर हुआ था, जिसके कारण ईरान ने परमाणु हथियार बनाने की गति तेज कर दी थी। नेतन्याहू ने दावा किया कि यह हमला इजरायल के अस्तित्व की रक्षा के लिए जरूरी था। इजरायली सेना ने पूरे देश में रिजर्व सैनिकों को तैनात करना शुरू कर दिया है, और आपातकाल की घोषणा की गई है, क्योंकि ईरान के जवाबी हमलों की आशंका बढ़ गई है।

 

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Sat, 14 Jun 2025 18:07:11 +0530 news desk MPcg
‘अभी तो और तबाही मचेगी, ये सिर्फ शुरुआत…’, नेतन्याहू की ईरान को वॉर्निंग https://citytoday.co.in/2683 https://citytoday.co.in/2683 तेल अवीव

इजरायल और ईरान की जंग ने मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है. दोनों ओर से अंधाधुंध हमले जारी है. इस बीच ईरान के खिलाफ ऑपरेशन राइजिंग शुरू करने पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ खुलकर हल्ला बोला है.

नेतन्याहू ने ईरान को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि ये तो अभी सिर्फ शुरुआत है. अभी और तबाही मचनी बाकी है. बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा.  हमारा मकसद इजरायल के अस्तित्व के समक्ष बने ईरान के खतरे को खत्म करना है. इस ऑपरेशन को तब तक जारी रखा जाएगा, जब तक इस खतरे को जड़ से खत्म नहीं कर दिया जाता.

उन्होंने कहा कि ईरान का बर्बर शासन दशकों से खुले तौर पर इजरायल की तबाही की धमकी देता रहा है. हाल के महीनों में, हमें खुफिया जानकारी मिली है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने के करीब है. हाल के सालों में ईरान ने नौ परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त यूरेनियम हासिल कर लिया है. यह न केवल इजरायल के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर खतरा है. हम यह अनुमति नहीं दे सकते कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करे क्योंकि यह हमारे देश और हमारे बच्चों के भविष्य के लिए खतरा है.

नेतन्याहू ने इससे पहले कहा था बीते कुछ महीने में ईरान ने ऐसे कदम उठाए हैं, जो उन्होंने पहले कभी नहीं उठाए थे. परमाणु हथियार तैयार करने के कदम. अगर इसे नहीं रोका गया तो ईरान बहुत कम समय में परमाणु हथियार तैयार कर लेगा. यह समय एक साल भी हो सकता है, कुछ महीने भी या उससे भी कम.यह इजरायल के अस्तित्व के समक्ष स्पष्ट और मौजूदा खतरा है. 80 साल पहले यहूदी लोग नाजी होलोकॉस्ट के शिकार हुए थे. आज हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यहूदी ईरान के परमाणु नरसंहार का शिकार नहीं हो. हम उन लोगों को कभी भी अपने विनाश के साधन विकसित करने की अनुमति नहीं देंगे.

उन्होंने कहा कि मैं अपने नागरिकों से अपील करता हूं कि वे शांत रहें और इजरायली रक्षा बल (IDF) के होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करें. यह लड़ाई कुछ घंटों या दिनों की नहीं है, बल्कि यह तब तक चलेगी जब तक हमारे लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते. हमें जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है और इसके लिए हमें तैयार रहना होगा लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि हमारी सेना पूरी तरह सक्षम है और हम अपने देश की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे.  

इजरायली हमले में ईरान के 78 लोगों की मौत

इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह कॉल ईरान के साथ जारी ताजा संघर्ष के सिलसिले में किया. शुक्रवार को इजरायल ने ईरान की परमाणु सुविधाओं, मिसाइल निर्माण स्थलों और सैन्य कमांडरों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए. इसमें 78 लोगों की मौत हुई है और तीनों से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं.

इजरायल ने इस अभियान को 'ऑपरेशन राइजिंग लायन' नाम दिया है. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इसे देश के इतिहास का निर्णायक पल बताया और कहा कि इस हमले में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के सेंटर ” को निशाना बनाया गया है.

भारत पहले ही जता चुका गहरी चिंता

भारत पहले ही इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता जाहिर कर चुका है. विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है और दोनों देशों से किसी भी तरह की स्थिति को और भड़काने से बचने की अपील करता है.

नेतन्याहू ने इस तनाव के बीच दुनिया के कई नेताओं से बात की, जिनमें जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों शामिल हैं.

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया के सबसे घातक हथियार बनाता है और उनमें से कई इजरायल के पास हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को अब भी दूसरा मौका मिल सकता है समझौता करने के लिए.

मारा गया हाजीजादेह

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख अमीर अली हाजीजादेह की मौत ने इस टकराव को एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है. हाजीजादेह मिसाइल कार्यक्रम को लीड कर रहा था. उसके पास ईरान के हवाई क्षेत्र की रक्षा करने और विदेशों में हमले करने से जुड़ी रणनीति पर काम करने की जिम्मेदारी थी. 

इजरायली सेना ने कहा कि हाजीजादेह अन्य वरिष्ठ वायु सेना के अधिकारियों के साथ हमले में मारे गए. घटना के वक्त वो एक अंडरग्राउंड कमांड सेंटर में मौजूद था. कहा जा रहा है कि अमीर अली हाजीजादेह की हत्या के जरिए ईरान के डिफेंस स्ट्रक्चर की रीढ़ पर हमला हुआ है. दोनों देशों के बीच चल रहा पुराना संघर्ष भी सबसे खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है.

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Sat, 14 Jun 2025 16:37:05 +0530 news desk MPcg
इजराइल ईरान युद्ध: इजराइल का ईरान पर फिर से हमला, तेहरान सहित कई प्रमुख शहरों में मस्जिदें शामिल हैं https://citytoday.co.in/2665 https://citytoday.co.in/2665 इसराइल ईरान वॉर : शुक्रवार देर रात ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं. यह धमाके इजरायल की ओर से किए गए एक और बड़े हवाई हमले के संकेत हैं, जिसमें खासतौर पर परमाणु संयंत्रों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया. ईरानी मीडिया फार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, दो बड़े धमाके फोर्दो परमाणु केंद्र के पास हुए, जो ईरान का सबसे संरक्षित यूरेनियम संवर्धन केंद्र माना जाता है. प्रेस टीवी ने बताया कि ईरान की वायुसेना ने फोर्दो के पास एक इजरायली ड्रोन को मार गिराया.

ईरान पर हमले के बाद इजरायली PM नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को किया कॉल, जानें क्या बातचीत हुई.

इस बार इजरायल ने न सिर्फ सैन्य ठिकानों को, बल्कि ईरान के पवित्र शिया मुस्लिम शहर क़ोम को भी निशाना बनाया. मेहर न्यूज़ एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है. यह हमला इजरायल के ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ के तहत किया गया, जिसमें उसने ईरान के भीतर कई गहरे और संवेदनशील ठिकानों पर हमला बोला.

यरुशलम में भी बजा खतरे का अलार्म
एक तरफ ईरान पर हमले हो रहे थे, तो दूसरी तरफ यरुशलम में एयर रेड सायरन बजने लगे. इजरायली सेना ने जानकारी दी कि यमन से एक मिसाइल दागी गई थी, जिसे वायु सुरक्षा प्रणाली ने हवा में ही रोक लिया. धमाकों की आवाज़ यरुशलम में भी सुनी गई, जिससे वहां के नागरिकों में भय का माहौल बन गया.

इजरायल ने मारे ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर
इस हमले में इजरायल ने दावा किया कि उसने ईरान के तीन प्रमुख सैन्य अधिकारियों को मार गिराया है. ईरान की सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख • जनरल मोहम्मद बाघेरी, रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर जनरल हुसैन सलामी, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के प्रमुख जनरल अमीर अली हाजीजादेह. इसके अलावा, दो वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिकों की भी मौत की पुष्टि हुई है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमलों का बचाव करते हुए कहा कि, “ईरान बहुत जल्द परमाणु हथियार बना सकता है, और ये हमले उसे रोकने के लिए आवश्यक थे.”

ईरान ने लिया बदला: 100 से ज्यादा ड्रोन से जवाबी हमला
इजरायल के हमले के बाद ईरान ने पलटवार करते हुए 100 से ज्यादा ड्रोन इजरायल की ओर छोड़े. इजरायल की वायु रक्षा प्रणाली ने इनमें से अधिकांश को नष्ट कर दिया. इजरायली सेना ने अस्थायी रूप से नागरिकों को आश्रय छोड़ने की अनुमति दी, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि खतरा अभी टला नहीं है. इजरायल ने अपने आरक्षित सैनिकों को बुलाकर सीमाओं को और कड़ा कर दिया है.

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने चेतावनी दी: “इजरायल को इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा, और हम पीछे नहीं हटेंगे.”

अमेरिका का रुख: समर्थन नहीं, लेकिन जानकारी थी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किसी भी अमेरिकी भागीदारी से इनकार किया, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका को इजरायल के हमले की पूर्व जानकारी थी. ट्रंप ने ईरान से बातचीत की अपील करते हुए चेतावनी दी, “अगर ईरान समझौते की टेबल पर नहीं लौटा, तो इजरायल के हमले और भी भयावह होंगे.”

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Sat, 14 Jun 2025 11:51:35 +0530 news desk MPcg
एस जयशंकर ने पाकिस्तान को चेतावनी दी, कहा& हमला हुआ तो भारत फिर से करारा जवाब देने में बिल्कुल नहीं हिचकेगा https://citytoday.co.in/2639 https://citytoday.co.in/2639 ब्रूसेल्स 
जयशंकर ने कहा कि 'भारत के हमले में पाकिस्तान को काफी नुकसान उठाना पड़ा और भारत के लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों ने बेहद सटीकता से हमले किए और पाकिस्तान के तबाह एयरबेस की तस्वीरें गूगल पर मौजूद हैं।' भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के करीब तीन हफ्ते बाद भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है औऱ कहा है कि अगर फिर से आतंकी हमला हुआ तो भारत फिर से करारा जवाब देने में बिल्कुल नहीं हिचकेगा। जयशंकर इन दिनों ब्रूसेल्स के दौरे पर हैं। वहां एक इंटरव्यू के दौरान जयशंकर ने कहा कि 'अगर आतंकी ठिकाने पाकिस्तान के भीतर मौजूद हैं तो हम पाकिस्तान में भीतर जाकर ही हमला करेंगे।' भारत सरकार की तरफ से लगातार कहा जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और अगर पाकिस्तान की तरफ से फिर से आतंकी हमला हुआ तो भारत फिर से सैन्य कार्रवाई से हिचकेगा नहीं। विदेश मंत्री ने भी सरकार के इसी स्टैंड को दोहराया। विदेश मंत्री ने कहा कि 'आतंकवाद इस देश (पाकिस्तान) की राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है। यही समस्या है।'

पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुआ संघर्ष
बीती अप्रैल में भारत के जम्मू कश्मीर में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की धर्म पूछकर हत्या कर दी गई थी। भारत ने इसका आरोप पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन पर लगाया। इसके बाद मई में भारत ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर हमला किया, जिसके जवाब में पाकिस्तान ने भारत पर हमले की कोशिश की। भारत ने 10 मई को बड़ा हमला कर पाकिस्तान के कई एयरबेस तबाह कर दिए। जिसके बाद पाकिस्तान ने लड़ाई रोकने की अपील की, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया। 
 
लड़ाकू विमान गिराने के दावे पर क्या बोले विदेश मंत्री
पाकिस्तान ने भारत के लड़ाकू विमान गिराने का दावा किया था। जब इसे लेकर विदेश मंत्री से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि 'वह इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन जल्द ही संबंधित प्राधिकरण द्वारा सही समय आने पर इस पर पूरी जानकारी दी जाएगी।' जयशंकर ने कहा कि 'भारत के हमले में पाकिस्तान को काफी नुकसान उठाना पड़ा और भारत के लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों ने बेहद सटीकता से हमले किए और पाकिस्तान के तबाह एयरबेस की तस्वीरें गूगल पर मौजूद हैं।'

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Wed, 11 Jun 2025 12:34:45 +0530 news desk MPcg
तुर्कमेनिस्तान में 50 सालों से जल रहा ‘गेटवे टू हेल’ क्रेटर अब ‘अंतिम सांसे’ ले रहा, क्या अब बंद हो जाएगा https://citytoday.co.in/2638 https://citytoday.co.in/2638 नई दिल्ली
तुर्कमेनिस्तान में 50 सालों से जल रहा ‘गेटवे टू हेल’ क्रेटर अब ले रहा है। विज्ञानियों का कहना है कि यह अद्भुत क्रेटर अब बुझने वाला है। आइए जानते हैं क्यों अब तक जल रहा है यह क्रेटर?

क्या है गेटवे टू हेल?
‘गेटवे टू हेल’, जिसे आधिकारिक तौर पर ‘शाइनिंग ऑफ काराकुम’ के नाम से जाना जाता है। यह तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान में स्थित 230-फुट चौड़ा (70 मीटर) सिंकहोल है। यह गड्ढा मीथेन के विशाल भूमिगत भंडार से जुड़ा हुआ है, जिससे इसे जलाने के लिए गैस की लगभग असीमित आपूर्ति मिलती है। इस गड्ढे में सैकड़ों गैस की आग लगी हुई है, जो इसे एक अलौकिक चमक देती है।

एक दुर्घटना के कारण बना था क्रेटर जब यह क्रेटर बना था उस समय तुर्कमेनिस्तान सोवियत संघ का हिस्सा था। तब अधिकारियों ने क्रेटर से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया था। अब क्रेटर को लेकर सबसे आम सिद्धांत यह है कि यह प्राकृतिक गैस की खोज में हुई दुर्घटना के कारण बना था। 1971 में एक सोवियत गैस ड्रिलिंग स्टेशन ने एक गैस पाकेट को छेद दिया, जिससे एक गड्ढा बन गया और हवा में गैस लीक होने लगी। विज्ञानियों ने जहरीली गैसों को बाहर निकलने से रोकने के लिए गड्ढे को जलाने का निर्णय लिया। विज्ञानियों को उम्मीद थी कि आग कुछ दिनों में बुझ जाएगी, लेकिन नरक के प्रवेश द्वार की आग तब से जल रही है।

सरकारी स्वामित्व वाली ऊर्जा कंपनी तुर्कमेनगाज की निदेशक इरिना लुरीवा कहती हैं कि पहले आग की एक चमक कई किलोमीटर दूर से दिखाई देती थी, अब इसे केवल आस-पास के इलाकों से ही देखा जा सकता है। आज केवल आग का एक हल्का स्रोत बचा हुआ है। तुर्कमेनिस्तान में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार है, जो रेगिस्तान के नीचे बड़े पैमाने पर फैला हुआ है।

आग बुझाने के लिए शुरू की थी परियोजना?
पहले की तुलना में तीन गुना छोटी हो गई आग 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति बर्डीमुखमेदोव ने आग को बुझाने के लिए एक परियोजना शुरू की थी। उन्होंने कहा था कि हम मूल्यवान प्राकृतिक संसाधनों को खो रहे हैं। इस परियोजना के तहत आग को बढ़ाने वाली गैस को बाहर निकालने के लिए कई नए गैस कुएं खोदे गए। प्राकृतिक ज्वलनशील गैस के कम प्रवाह के कारण क्रेटर में लपटें कम होने लगी हैं। आग अब पहले की तुलना में तीन गुना छोटी हो गई है।

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Wed, 11 Jun 2025 12:22:48 +0530 news desk MPcg
लॉस एंजेलिस में खराब होते जा रही स्थिती ट्रंप प्रशासन ने तैनात किए 700 मरीन सैनिक https://citytoday.co.in/2618 https://citytoday.co.in/2618 लॉस एंजेलिस
 कैलिफोर्निया में इमिग्रेशन और सीमा शुल्क प्रवर्तन के कदमों के खिलाफ लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए ट्रंप प्रशासन ने लॉस एंजिल्स में नेशनल गार्ड को तैनात किया। हालांकि, ट्रंप  के इस फैसले की काफी आलोचना हो रही है।

वहीं, ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कैलिफोर्निया में नेशनल गार्ड की तैनाती करके 'बहुत बढ़िया फैसला' लिया है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में कहा, अगर हमने ऐसा नहीं किया होता, तो लॉस एंजिल्स पूरी तरह से नष्ट हो गया होता। ट्रंप ने यह संकेत भी दिया कि वह कैलिफोर्निया के गवर्नर की गिरफ्तारी का समर्थन करेंगे।

इसी बीच ट्रंप प्रशासन ने एलान किया है कि अमेरिकी सेना अस्थायी रूप से लॉस एंजिल्स में लगभग 700 मरीन तैनात करेगी, जब तक कि अधिक संख्या में नेशनल गार्ड सैनिक वहां नहीं पहुंच जाते।  नाम न बताने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि जब तक नेशनल गार्ड के और सैनिक घटनास्थल पर नहीं पहुंच जाते, तब तक एक बटालियन को अस्थायी ड्यूटी पर भेजा जाएगा।

पिछले चार दिनों से प्रदर्शनकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। देश में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को निर्वासित करने की नीतियों के खिलाफ इस प्रदर्शन को डेमोक्रेट्स पार्टी का भी साथ मिल रहा है।

ट्रंप पर दर्ज होगा मुकदमा:  गैविन न्यूसम

इसी बीच राज्य के नेशनल गार्ड का नियंत्रण अपने हाथ में लेने और उसे लॉस एंजिल्स की सड़कों पर तैनात करने के ट्रंप के फैसले को कैलिफोर्निया के अधिकारी अदालत में चुनौती देंगे।

कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम ने सोमवार को एक्स पर पोस्ट किया,"यह बिल्कुल वही है जो ट्रंप चाहते थे। उन्होंने आग भड़काई और अवैध रूप से नेशनल गार्ड को संघीय बनाने का काम किया। हम उन पर मुकदमा करने जा रहे हैं।"

ट्रंप सरकार ने उतारे आर्मी के लगभग 700 मरीन

वहीं, लॉस एंजेलिस में स्टोर की लूट तस्वीर बताती है कि हालात कितने खराब हैं। अब सिर्फ नेशनल गार्ड्स से काम नहीं चल रहा है। लिहाजा ट्रंप सरकार ने अब यूएस आर्मी के लगभग 700 मरीन को लॉस एंजेलिस की सड़कों पर उतार दिए हैं। ये मरीन कैलिफोर्निया के मरीन कॉर्प्स एयर ग्राउंड कॉम्बैट सेंटर के दस्ते से हैं। ट्रंप द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन पर डेमोक्रेट्स द्वारा उनका राजनीतिक विरोध हो रहा है, जो मरीन बटालियन की तैनाती से और ज्यादा बढ़ेगा। ये मरीन, नेशनल गार्ड्स के साथ मिलकर काम करेंगे।

गवर्नर ने ट्रंप के फैसले को लेकर कड़ी निंदा की

लॉस एंजिल्स में हो रहे विरोध प्रदर्शन का यह चौथा दिन था। यहां माइग्रेंट्स को कैद में रखे जाने वाले एक डिटेंशन सेंटर के सामने कई लोगों का जमावड़ा हो गया। कई लोगों ने आग लगाकर कई गाड़ियों को उसके हवाले कर दिया। शहर के हाइवे को भी जाम कर दिया। वहीं, पुलिस ने प्रदर्शन करने वालों पर आंसू गैस के गोले छोड़े।

वहीं, इन सबके बीच कैलिफोर्निया राज्य ने नेशनल गार्ड और मरीन की तैनाती के खिलाफ ट्रंप प्रशासन पर मुकदमा दायर किया है। इससे पहले कैलिफोर्निया के गवर्नर ने बताया था कि अब नेशनल गार्ड सैनिकों को तैनात किया जा रहा है। ट्रंप के इस फैसले की गवर्नर ने कड़ी निंदा की है।

 

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Tue, 10 Jun 2025 15:01:05 +0530 news desk MPcg
हांगकांग, सिंगापुर और अन्य देशों में कोरोना संक्रमण की नई लहर, मामले तेजी से बढ़े https://citytoday.co.in/2486 https://citytoday.co.in/2486 कोराना महामारी के काल को कोई भूल नहीं है। इसके पांच साल बाद, दुनिया भर में कोविड-19 के मामले फिर से बढ़े हैं, खासकर हांगकांग और सिंगापुर में मामले तेजी से बढ़े है। सिंगापुर में मामलों की संख्या 28 प्रतिशत बढ़ गई है, जबकि हांगकांग में सिर्फ एक हफ्ते में 31 गंभीर मामले दर्ज हुए हैं।

सिंगापुर में मई महीने के पहले वीकेंड तक कोरोना मामलों की अनुमानित संख्या 11,100 से बढ़कर 14,200 हुई। रोज़ाना अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या में भी करीब 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार हांगकांग में वायरस हाई इंटेंसिटी पर पहुंच गया है। कोविड-19 मामलों में इस अचानक वृद्धि ने एक नए वेरिएंट की आशंका को भी जन्म दे दिया है।

सिंगापुर: देश में कोविड-19 मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है। सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि एलएफ.7 और एनबी.1.8, जो जेएन.1 वेरिएंट का एक प्रकार है और नए कोविड-19 टीकों में उपयोग किए जाते हैं, देश में फैल रहे हैं। रोजाना अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या 102 से बढ़कर 133 हो गई, लेकिन रोज आईसीयू में भर्ती होने वालों की संख्या 3 से घटकर 2 हई है।

हांगकांग: हांगकांग में कोविड-19 मामलों में वृद्धि हुई है। चार हफ्ते पहले 6.21 प्रतिशत सैंपल्स के पॉजिटिव होने से बढ़कर 10 मई को वीकेंड में 13.66 प्रतिशत हो गए।

चीन: चीन में कोरोना के मामले फिर से बढ़ रहे हैं, जो बीते साल की वायरल लहर के चरम के करीब पहुंच रहे हैं। चीनी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक हाल के हफ्तों में कोरोना पॉजिटिव लोगों की दर दोगुनी से अधिक हो गई है।

भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविड-19 बुलेटिन के अनुसार, भारत में 93 सक्रिय मामले हैं, लेकिन नई कोरोनावायरस लहर की कोई रिपोर्ट नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को घबराने की बजाय बुनियादी सावधानियों का पालन करने की सलाह दी है। हालांकि भारत में गंभीर लहर की संभावना कम है, लेकिन सतर्कता बनाए रखनी होगी।

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Tue, 20 May 2025 13:58:35 +0530 news desk MPcg
शहबाज का ऑफर: बोले& कश्मीर पर सहमति बनेगी तो मिलकर खत्म करेंगे आतंकवाद https://citytoday.co.in/2451 https://citytoday.co.in/2451 ऑपरेशन सिंदूर के बाद घुटनों पर आया पाकिस्तान अब शांति और सौहार्द की मांग  कर रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि भारत के साथ बैठक होना चाहिए। उसमें कश्मीर सहित तमाम मसलों पर बात हो जाए। सहमति बनने के बाद दोनों देश मिलकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ सकते हैं। बेचारे, शहबाज को शायद नहीं पता कि कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और रहेगा। यदि बात करना ही है तो पीओके पर करें।
 
रिपोर्ट के अनुसार इस्लामाबाद में यौम-ए-ताश्कर में लोगों को संबोधित कर रहे शहबाज ने कहा कि भारत और पाकिस्तान अभी तक तीन पूर्ण युद्ध लड़ चुके हैं.. लेकिन दोनों ही देशों को इससे ज्यादा कुछ फायदा नहीं मिला है। शहबाज ने कहा, इससे एक सीख मिलती है कि आप एक शांतिप्रिय पड़ोसी की तरह बैठें और कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर चर्चा शुरू करें। अगर दोनों देशों में शांति आती है, तो फिर हम साथ मिलकर आतंकवाद के खात्मे पर भी बात कर सकते हैं। बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच में फिलहाल शांति है। दोनों ही तरफ से नेता बयानों के जरिए एक-दूसरे को चेतावनी दे रहे हैं। इसी कड़ी में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को कहा कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद को शांति पूर्ण पड़ोसियों की तरह टेबल पर बैठना चाहिए और दशकों से जो मुद्दे लंबित हैं..कश्मीर सहित, उनको सुलझाना चाहिए।

राजनाथ सिंह बोले- तो पाकिस्तान को पूरी फिल्म दिखाएंगे

युद्ध और बदले की बात करने वाले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है। अभी तक जो कुछ भी हुआ है वह एक ट्रेलर था.. अगर पाकिस्तान नहीं सुधरा तो हम दुनिया को पूरी फिल्म दिखाएंगे। हम पाकिस्तान की हरकतों पर नजर रख रहे हैं अगर वह सुधार करता है तो ठीक है वरना उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।इससे पहले पहलगाम आतंकी हमले के बाद चले घटनाक्रम में भारत और पाकिस्तान के बीच लगभग चार दिन रॉकेट्स मिसाइल और ड्रोन्स के जरिए लड़ाई हुई थी।

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Sat, 17 May 2025 12:30:22 +0530 news desk MPcg
अजरबैजान में पुराना हिंदू मंदिर, दीवार पर लिखा हैं संस्कृत श्लोक https://citytoday.co.in/2441 https://citytoday.co.in/2441 ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान में तनाव जारी है, अब ये भी तथ्य सामने आ रहा है कि इस मु्श्किल में विश्व के किस देश ने भारत का साथ दिया। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा तुर्किए और अजरबैजान की है। इसमें भी अजरबैजान की चर्चा इसलिए जरूरी है कि उसने भारत के साथ प्राचीन संस्कृति की साझी विरासत होने के बावजूद पाकिस्तान का साथ दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारतीय बलों ने पाकिस्तान में सैन्य कार्रवाई कर आतंक के ठिकानों को निशाना बनाया था। पाकिस्तान ने भी भारत पर हमले की कोशिश की लेकिन भारत की मजबूत हवाई रक्षा प्रणाली ने उसके प्रयासों को नाकाम कर दिया। इस पूरे तनाव में पाकिस्तान अकेला नजर आया। उसे केवल चीन, तुर्कीए और अजरबैजान जैसे देशों का ही साथ मिला। चीन और तुर्कीए ने जहां पाकिस्तान को सैन्य सहायता दी तो वहीं अजरबैजान ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज को पत्र लिखकर अपना समर्थन दिया था। इसके बाद से भारत में भी इस देश के प्रति लोगों में उबाल है। इन देशों के साथ पर्यटन और ट्रेड आदि के बहिष्कार की मांग की जा रही है।

अजरबैजान को लेकर लोगों में गु्स्सा इसलिए भी है, क्योंकि भले ही अजरबैजान मुस्लिम राष्ट्र हो, लेकिन वहां की प्राचीन संस्कृति भारत से मेल खाती है। इसकी गवाही देता है, अजरबैजान की राजधानी में मौजूद एक प्राचीन मंदिर। इस मंदिर में साल 2018 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी पहुंची थीं। उस दौरान उनकी एक तस्वीर काफी चर्चा में रही थी। तस्वीर में सुषमा स्वराज हाथ जोड़े खड़ी थीं और उनके सामने ज्वाला धधक रही थी। तस्वीर इसलिए चर्चा में रही, क्योंकि अजरबैजान इस्लामिक देश है और सुषमा स्वराज राजधानी बाकू में ऐसी जगह खड़ी थीं वहां पास ही लगे एक शिलालेख पर संस्कृत श्लोक लिखे थे।

बाकू के मंदिर में अग्नि और गणेश पूजा होने के सबूत ये बताते हैं कि भारतीय सनातन परंपरा नक्शे और ग्लोब की मानव निर्मित सीमाओं से परे आस्था का ऐसा विषय हैं, जिसे इस देश की सभ्यता और संस्कृति किसी न किसी रूप में अपना आराध्य मानती रही है और उन्हें उस आले दर्जे पर बिठाती है, जो जगह उनके मन में ईश्वर के लिए है। सनातन में गणेश शब्द का अर्थ भी, गणों का देवता, गण का स्वामी और अगुआ के तौर पर प्रयोग किया जाता है। ऐसे में श्रीगणेश सहज ही किसी भी जनजाति, उपजाति, वर्ग या समुदाय के देवता-अधिष्ठाता बन जाते हैं। यह गुण उनके गणेश नाम को सार्थक भी करता है।

अजरबैजान की राजधानी बाकू में मौजूद इस मंदिर को आतेशगाह के नाम से जाना जाता है। आतेश शब्द फारसी के आतिश से लिया गया है और इसका अर्थ आग होता है। गाह का अर्थ होता है, निवास स्थान या फिर सिंहासन या तख्त। आतेशगाह का अर्थ हुआ आग का निवास स्थान या अग्नि स्थान इसे ज्वाला मंदिर भी कहा जाता है और ऐसे ऐतिहासिक तथ्य मिले हैं कि सत्रहवीं सदी तक इस स्थान को इसी ज्वाला मंदिर के नाम से भी जाना जाता रहा है। बाकू के पास के सुराख़ानी शहर में स्थित यह एक मध्यकालीन सनातनी धार्मिक स्थल है, इसमें एक पंचभुजा अकार के अहाते के बीच में एक मंदिर है। पंचभुज भी सनातनी आकृति है, जिस आकार में अक्सर यज्ञ कुंड बनाए जाते हैं और कई देवी-देवताओं के तांत्रिक शक्ति यंत्र भी इसी आकार में हैं। इस स्थल पर बाहरी दीवारों के साथ कमरे बने हुए हैं और माना जाता है कि जिनमें कभी उपासक रहा करते थे।

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Fri, 16 May 2025 12:10:53 +0530 news desk MPcg
अमेरिका में दवाओं की कीमतों में 80% तक कटौती: ट्रंप की ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ नीति का ऐलान https://citytoday.co.in/2407 https://citytoday.co.in/2407 वाशिंगटन, 12 मई 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक ऐतिहासिक कदम की घोषणा की, जिसके तहत अमेरिका में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतों को 30% से 80% तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है। इस नई नीति, जिसे ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) नीति कहा जा रहा है, को लागू करने के लिए ट्रंप सोमवार सुबह 9 बजे एक कार्यकारी आदेश (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) पर हस्ताक्षर करेंगे। इस नीति का उद्देश्य अमेरिका में दवाओं की कीमतों को अन्य विकसित देशों के समान स्तर पर लाना है, जहां दवाएं अक्सर अमेरिका की तुलना में कई गुना सस्ती होती हैं।

‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ नीति क्या है?

‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ नीति के तहत, अमेरिका में दवाओं की कीमतें उन देशों के बराबर की जाएंगी, जो विश्व में सबसे कम कीमत पर दवाएं खरीदते हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस नीति की घोषणा करते हुए कहा, “अमेरिका अब उन देशों की तरह ही कीमत चुकाएगा, जो विश्व में सबसे कम कीमत पर दवाएं खरीदते हैं। यह हमारे देश के लिए निष्पक्षता लाएगा और नागरिकों के स्वास्थ्य देखभाल खर्च को अभूतपूर्व स्तर तक कम करेगा।”

इस नीति के तहत, विशेष रूप से मेडिकेयर प्रोग्राम के तहत कुछ दवाओं की कीमतों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदर्भित किया जाएगा। मेडिकेयर अमेरिका का एक प्रमुख स्वास्थ्य बीमा प्रोग्राम है, जो मुख्य रूप से वरिष्ठ नागरिकों और कुछ विशेष जरूरतों वाले लोगों को कवर करता है। ट्रंप का दावा है कि इस कदम से न केवल अमेरिकी नागरिकों को सस्ती दवाएं मिलेंगी, बल्कि देश को लंबे समय में खरबों डॉलर की बचत होगी।

फार्मास्युटिकल उद्योग का विरोध

ट्रंप की इस घोषणा के बाद फार्मास्युटिकल उद्योग ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। फार्मास्युटिकल रिसर्च एंड मैन्युफैक्चरर्स ऑफ अमेरिका (PhRMA) के सीईओ स्टीफन उब्ल ने इस नीति को “अमेरिकी मरीजों के लिए हानिकारक” करार दिया। उनका कहना है कि विदेशी कीमतों को आयात करने से मेडिकेयर के लिए अरबों डॉलर की कटौती होगी, लेकिन इससे मरीजों को दवाओं तक पहुंच में सुधार की कोई गारंटी नहीं है। इसके अलावा, उद्योग का तर्क है कि इस नीति से दवा कंपनियों का मुनाफा कम होगा, जिससे नए दवाओं के अनुसंधान और विकास पर असर पड़ सकता है।

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Mon, 12 May 2025 12:15:07 +0530 news desk MPcg
चीन & लियाओनिंग प्रांत के एक रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग https://citytoday.co.in/2306 https://citytoday.co.in/2306 लियाओयांग, 30 अप्रैल 2025: चीन के उत्तर-पूर्वी लियाओनिंग प्रांत के लियाओयांग शहर में मंगलवार, 29 अप्रैल को एक रेस्टोरेंट में भीषण आग लगने से 22 लोगों की जान चली गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दिल दहला देने वाला हादसा दोपहर करीब 12:25 बजे हुआ, जब रेस्टोरेंट में कई लोग दोपहर का भोजन कर रहे थे। आग की लपटों ने तेजी से पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया।

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेज थी कि रेस्टोरेंट की खिड़कियों और दरवाजों से लपटें और धुआं बाहर निकलता दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में दो से तीन मंजिला इमारत पूरी तरह धधकती नजर आई, और लोग मदद के लिए चीखते-पुकारते सुनाई दिए। सूचना मिलते ही दमकल विभाग और आपातकालीन टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं, लेकिन आग की भयावहता के कारण बचाव कार्य में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

आग का कारण अभी अस्पष्ट

प्रारंभिक जांच में आग का कारण रसोई में खुली लपटों पर खाना पकाने की प्रक्रिया से जुड़ा हो सकता है, क्योंकि चीन में "हॉट पॉट" जैसी पारंपरिक डिश तैयार करने के लिए खुले चूल्हों का इस्तेमाल आम है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक आग लगने की सटीक वजह की पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपर्याप्त सुरक्षा मानकों और अग्निशमन उपकरणों की कमी इस हादसे को और गंभीर बना सकती है।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बयान

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे "गंभीर मानवीय क्षति" करार दिया। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को घायलों के इलाज के लिए हर संभव प्रयास करने और मृतकों के परिजनों को सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उन्होंने आग के कारणों की गहन जांच के आदेश दिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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Wed, 30 Apr 2025 12:49:07 +0530 news desk MPcg
पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड हाशिम मूसा पाकिस्तानी सेना का पूर्व कमांडो निकला, ISI के इनपुट पर करता है काम https://citytoday.co.in/2289 https://citytoday.co.in/2289 जांच एजेंसियों ने की महत्वपुर्ण पुष्टि 

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच एजेंसियों ने पुष्टि की है कि इस हमले के पीछे हाशिम मूसा नाम का पाकिस्तानी आतंकवादी है, जो पहले पाकिस्तान सेना के स्पेशल फोर्स 'स्पेशल सर्विस ग्रुप' (SSG) का पैरा कमांडो था. सूत्रों के मुताबिक, हाशिम मूसा अब लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा है. उसे पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर इसलिए भेजा गया था, ताकि गैर-स्थानीय लोगों और सुरक्षाबलों को निशाना बनाया जा सके. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मूसा को पाकिस्तानी सेना ने लश्कर-ए-तैयबा को "लोन" पर दिया था, जो भारत में आतंक फैलाने की साजिश का हिस्सा है.

बड़े स्तर पर चलाया जा रहा ऑपरेशन
इन हमलों में मूसा के साथ दो और स्थानीय आतंकी, जुनैद अहमद भट और अरबाज़ मीर भी शामिल थे, जिन्हें नवंबर और दिसंबर 2024 में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया. लेकिन हाशिम मूसा अभी भी सक्रिय है और उसके खिलाफ बड़े स्तर पर ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं.

इस पूरे घटनाक्रम से एक बार फिर पाकिस्तान की आतंकवाद को पालने-पोसने वाली भूमिका बेनकाब हो गई है. साथ ही, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों की सतर्कता और ऑपरेशन तेज किए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सके.

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Tue, 29 Apr 2025 11:34:53 +0530 news desk MPcg
खैबर पख्तूनख्वा में बम विस्फोट में 7 लोगों की मौत, 9 घायल; शांति समिति के ऑफिस में हुआ धमाका https://citytoday.co.in/2287 https://citytoday.co.in/2287 शांति समिति की बैठक में हुआ धमाका 
पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक शांति समिति के कार्यालय में सोमवार को हुए शक्तिशाली बम विस्फोट में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और नौ लोग घायल है। मामले में पुलिस ने बताया कि बम विस्फोट दक्षिण वजीरिस्तान जिले के मुख्यालय वाना में एक स्थानीय शांति समिति के कार्यालय में हुआ।

इस भीषण विस्पोट से पूरी इमारत नष्ट हो गई 
घायलों का इलाज कर रहे अस्पताल प्रशासन के अनुसार, विस्फोट के बाद 16 घायल लोगों को अस्पताल लाया गया, जिनमें से सात की मौत हो गई। वहीं अभी तक किसी भी समूह ने विस्फोट की जिम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस ने बताया कि विस्फोट इतना भीषण था कि इसने शांति समिति के कार्यालय की इमारत को नष्ट कर दिया और कई लोग मलबे में दब गए। सूचना मिलने पर बचाव दल और स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचे और घायलों को मलबे से निकालने का अभियान शुरू किया।

घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती करवाया गया 
घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, घायलों में से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा है कि घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं और विस्फोट के लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाने के लिए कई पहलुओं की जांच की जा रही है।

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Mon, 28 Apr 2025 18:05:29 +0530 news desk MPcg
पाक पीएम शहबाज शरीफ की धमकी, ‘हम पहलगाम हमले की निष्पक्ष जांच के लिए तैयार, लेकिन पानी रोका तो देंगे जोरदार जवाब’... https://citytoday.co.in/2275 https://citytoday.co.in/2275 पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव है। इस बीच, पड़ोसी देश की कुछ हरकतें आग में घी का काम कर रही हैं।पाकिस्तान ने सीमा पर एक बार फिर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। बीती रात सीमा से सटी चौकियों पर पाकिस्तान की ओर से फायरिंग की गई। भारतीय सेना ने भी इसका करारा जवाब दिया।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को सेना के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहां पीएम शरीफ ने कहा, हम भारत में पर्यटकों पर हुए हमले की किसी भी निष्पक्ष जांच में भाग लेने के लिए तैयार हैं। शांति हमारा लक्ष्य है, लेकिन इसे कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, हम दोनों देशों के बीच हुए सिंधु जल बंटवारे समझौते के किसी भी भारतीय उल्लंघन का जोरदार तरीके से जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं। 

पीएम पहले ही कह चुके थे -  कल्पना से बड़ी सजा मिलेगी
इससे पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा की कि भारत पहलगाम नरसंहार में शामिल हर आतंकवादी और उनके समर्थकों की पहचान करेगा, उनका पता लगाएगा और उन्हें दंडित करेगा। इसके लिए हत्यारों का दुनिया के छोर तक पीछा करेगा।

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Sat, 26 Apr 2025 13:42:14 +0530 News desk Hindi
पाकिस्तानियों की एक और शर्मनाक हरकत, लंदन में भारतीय प्रदर्शनकारियों को गला काटने का इशारा https://citytoday.co.in/2268 https://citytoday.co.in/2268 पाकिस्तानी सेना अधिकारी ने आपत्तिजनक इशारा किया 
पहलगाम हमले की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है, लेकिन पाकिस्तानियों को इसकी जरा भी परवाह नहीं है। शुक्रवार को लंदन में बड़ी संख्या में भारतीय और भारतीय मूल के लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी ने भारतीयों की तरफ आपत्तिजनक इशारा किया। दरअसल पाकिस्तानी अधिकारी ने भारतीयों की तरफ गला काटने का इशारा किया। पाकिस्तानी अधिकारी का वीडियो कैमरे में कैद हो गया और अब यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 

पहलगाम पीड़ितों के लिए न्याय की मांग करने पहुँचे थे भारतीय 
पहलगाम हमले के विरोध में 500 से ज्यादा ब्रिटिश हिंदुओं ने शुक्रवार को लंदन में पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और प्लेकार्ड पकड़े हुए थे और प्रदर्शनकारी नारेबाजी कर रहे थे और पहलगाम पीड़ितों के लिए न्याय की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए और पाकिस्तान पर आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया। इस दौरान लंदन में पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात पाकिस्तानी सेना के कर्नल तैमूर राहत ने उच्चायोग की बालकनी से भारतीय प्रदर्शनकारियों को सार्वजनिक तौर पर गला काटने का इशारा किया। कर्नल राहत पाकिस्तानी उच्चायोग में सेना और वायु सलाहकार के रूप में काम कर रहा है। 

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Sat, 26 Apr 2025 11:05:11 +0530 News desk Hindi
Harvard University ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ ठोका मुकदमा, 2.2 अरब डॉलर की फंडिंग रोकने पर लिया कड़ा रुख https://citytoday.co.in/2213 https://citytoday.co.in/2213 वाशिंगटन, 22 अप्रैल 2025: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शुमार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। यह कदम ट्रंप प्रशासन द्वारा यूनिवर्सिटी की 2.2 अरब डॉलर की संघीय फंडिंग पर रोक लगाने के फैसले के जवाब में उठाया गया है। हार्वर्ड ने इस कार्रवाई को असंवैधानिक और अपनी स्वायत्तता पर हमला करार देते हुए कहा है कि वह सरकारी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

विवाद की जड़: यहूदी-विरोधी आरोप और प्रदर्शन

ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड पर यहूदी छात्रों और प्रोफेसरों के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाया है। प्रशासन का दावा है कि 2023 में गाजा में इजरायल के सैन्य अभियानों के खिलाफ हार्वर्ड कैंपस में हुए प्रदर्शनों में यहूदी-विरोधी भावनाएं भड़कीं, जिन्हें यूनिवर्सिटी प्रशासन ने नियंत्रित नहीं किया। इन प्रदर्शनों में कुछ स्थानों पर यहूदी-विरोधी नारे और बयान सामने आए, जिसके बाद यहूदी छात्रों ने उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कीं। ट्रंप प्रशासन ने इसे संघीय कानूनों का उल्लंघन मानते हुए हार्वर्ड की फंडिंग रोक दी।

इसके अलावा, प्रशासन ने हार्वर्ड से कई नीतिगत बदलावों की मांग की, जिनमें मेरिट-आधारित प्रवेश और भर्ती प्रक्रिया लागू करना, कैंपस में मास्क पहनकर प्रदर्शन पर रोक लगाना, और डाइवर्सिटी, इक्विटी, और इंक्लूजन (DEI) कार्यक्रमों को समाप्त करना शामिल है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि DEI कार्यक्रम गैर-यहूदी और गैर-अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं।

हार्वर्ड का जवाब: संवैधानिक अधिकारों का हनन

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया और ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई को शैक्षणिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया। यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष एलन गार्बर ने कहा, “कोई भी सरकार, चाहे वह किसी भी पार्टी की हो, यह तय नहीं कर सकती कि निजी विश्वविद्यालय क्या पढ़ाएंगे, किसे प्रवेश देंगे, या किसे नियुक्त करेंगे। यह हमारी स्वायत्तता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।”

मैसाचुसेट्स की संघीय अदालत में दायर मुकदमे में हार्वर्ड ने दावा किया कि फंडिंग रोकना न केवल अवैध है, बल्कि यह नागरिक अधिकार अधिनियम (टाइटल VI) के तहत आवश्यक प्रक्रियाओं को दरकिनार करता है। यूनिवर्सिटी ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन यहूदी-विरोधी भावनाओं का हवाला देकर शैक्षणिक संस्थानों पर राजनीतिक नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

फंडिंग का महत्व

हार्वर्ड को हर साल संघीय सरकार से लगभग 2.2 अरब डॉलर का अनुदान और 60 मिलियन डॉलर के अनुबंध मिलते हैं, जो अनुसंधान, छात्रवृत्ति, और विज्ञान परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। यूनिवर्सिटी का कहना है कि इस फंडिंग पर रोक से शैक्षणिक गतिविधियां और अनुसंधान कार्य बुरी तरह प्रभावित होंगे। इसके बावजूद, हार्वर्ड ने स्पष्ट किया कि वह अपनी नीतियों और मूल्यों से समझौता नहीं करेगा।

ट्रंप का रुख: अन्य विश्वविद्यालय भी निशाने पर

ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड के अलावा कोलंबिया यूनिवर्सिटी, पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी, और ब्राउन यूनिवर्सिटी जैसे अन्य प्रमुख संस्थानों की फंडिंग पर भी रोक लगाई या धमकी दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर लिखा, “हार्वर्ड अब शिक्षा के लिए उपयुक्त स्थान नहीं है। यह वामपंथी और कट्टरपंथी विचारों का गढ़ बन गया है।” उन्होंने यह भी धमकी दी कि अगर हार्वर्ड अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करता, तो उसका कर-मुक्त दर्जा छीना जा सकता है।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद उच्च शिक्षा और सरकार के बीच बढ़ते तनाव का प्रतीक है। कुछ का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की नीतियां शैक्षणिक स्वतंत्रता को कमजोर कर सकती हैं, जबकि अन्य का मानना है कि विश्वविद्यालयों को सार्वजनिक धन का उपयोग करने में अधिक जवाबदेही बरतनी चाहिए। प्रोफेसर डैन कैसिनो ने एक लेख में लिखा, “हार्वर्ड जैसे बड़े संस्थान शायद इस वित्तीय झटके से उबर जाएं, लेकिन छोटे विश्वविद्यालयों के लिए यह संकट गंभीर हो सकता है।”

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Tue, 22 Apr 2025 14:39:33 +0530 news desk MPcg
चंडीगढ़ ग्रेनेड हमले में एनआईए की बड़ी कार्रवाई, आतंकी हैप्पी पासिया का नाम चार्जशीट में शामिल https://citytoday.co.in/2178 https://citytoday.co.in/2178 चंडीगढ़: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सितंबर 2024 में चंडीगढ़ में हुए ग्रेनेड हमले के मामले में बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के चार आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। 23 मार्च 2025 को दायर की गई चार्जशीट में पाकिस्तान में छिपे नामित आतंकवादी हरविंदर सिंह संधू उर्फ रिंदा और अमेरिका में रहने वाले हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी पासिया का नाम शामिल है। ये दोनों इस हमले के मुख्य साजिशकर्ता और संचालक बताए गए हैं। 

हमले का मकसद: आतंक और दहशत फैलाना

एनआईए की जांच के अनुसार, रिंदा और हैप्पी पासिया ने चंडीगढ़ में ग्रेनेड हमले की योजना बनाई थी, जिसका उद्देश्य पंजाब पुलिस के एक पूर्व अधिकारी को निशाना बनाना और आम लोगों के बीच दहशत फैलाना था। इस हमले के लिए उन्होंने भारत में मौजूद अपने गुर्गों को हथियार, गोला-बारूद, आतंकी फंड और अन्य संसाधन मुहैया कराए। जांच में खुलासा हुआ कि रिंदा और हैप्पी ने स्थानीय अपराधियों रोहन मसीह और विशाल मसीह को भर्ती किया, जिन्हें हमले को अंजाम देने का जिम्मा सौंपा गया। दोनों को हमले से पहले दो बार लक्ष्य की टोह लेने के निर्देश दिए गए थे। 

आतंकी साजिश का पर्दाफाश

एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि इस हमले का मकसद न केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों को चुनौती देना था, बल्कि बीकेआई के आतंकी एजेंडे को बढ़ावा देना भी था। रिंदा और हैप्पी ने मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची, जिसके तहत चंडीगढ़ में बड़े पैमाने पर अशांति फैलाने की कोशिश की गई। 

पंजाब पुलिस ने तोड़ा था आतंकी नेटवर्क

इससे पहले, दिसंबर 2024 में पंजाब पुलिस ने बीकेआई के एक अन्य पाकिस्तान-आईएसआई समर्थित आतंकी मॉड्यूल को नष्ट किया था। इस मॉड्यूल का संचालन हैप्पी पासिया और शमशेर उर्फ हनी कर रहे थे। पुलिस ने इस कार्रवाई में मास्टरमाइंड अभिजोत सिंह सहित पांच आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था। ये सभी बटाला और गुरदासपुर में दो पुलिस ठिकानों पर ग्रेनेड हमलों में शामिल थे। 

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Fri, 18 Apr 2025 14:00:53 +0530 news desk MPcg
हडसन नदी में हेलीकॉप्टर क्रैश: सिएमंस स्पेन के सीईओ और उनके परिवार की दुखद मौत https://citytoday.co.in/2112 https://citytoday.co.in/2112 हडसन नदी में हेलीकॉप्टर क्रैश: सिएमंस स्पेन के सीईओ और उनके परिवार की दुखद मौत

न्यूयॉर्क: गुरुवार दोपहर न्यूयॉर्क शहर की हडसन नदी में एक भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे में सिएमंस स्पेन के सीईओ अगस्टिन एस्कोबार, उनकी पत्नी मेर्से कैम्प्रुबी मॉन्टाल और उनके तीन बच्चों (4, 5 और 11 साल) सहित छह लोगों की मौत हो गई। हेलीकॉप्टर के पायलट की भी इस त्रासदी में जान चली गई।

क्या हुआ हादसे के पीछे?

यह हेलीकॉप्टर, एक बेल 206, न्यूयॉर्क हेलीकॉप्टर्स द्वारा संचालित एक पर्यटक उड़ान पर था। दोपहर करीब 2:59 बजे मैनहट्टन के वॉल स्ट्रीट हेलीपोर्ट से उड़ान भरने के बाद, यह जॉर्ज वाशिंगटन ब्रिज तक गया और फिर न्यू जर्सी तट की ओर मुड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हेलीकॉप्टर अचानक हवा में दो टुकड़ों में बंट गया और तेजी से पियर 40 के पास नदी में जा गिरा। कुछ लोगों ने इसे "सोनिक बूम" जैसी आवाज के साथ गिरते देखा, जबकि अन्य ने बताया कि रोटर ब्लेड्स अलग हो गए थे।

परिवार का आखिरी पल

एस्कोबार और उनका परिवार बार्सिलोना से न्यूयॉर्क छुट्टियां मनाने आए थे। हादसे से पहले की तस्वीरों में परिवार हेलीपोर्ट पर मुस्कुराते और उत्साहित नजर आया। यह उड़ान मैनहट्टन की खूबसूरत स्काईलाइन और स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का दीदार करने के लिए थी, लेकिन यह उनकी आखिरी यात्रा बन गई।

जांच शुरू, सवाल बरकरार

राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) और संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट्स में हेलीकॉप्टर के रोटर ब्लेड्स के अलग होने की बात सामने आई है। न्यूयॉर्क हेलीकॉप्टर्स के सीईओ माइकल रोथ ने कहा, "मैं 30 साल से इस व्यवसाय में हूं, लेकिन ऐसा कुछ कभी नहीं देखा।" कुछ सूत्रों ने बताया कि पायलट ने क्रैश से पहले ईंधन की कमी की चेतावनी दी थी, लेकिन इसका हादसे से सीधा संबंध अभी स्पष्ट नहीं है।

नेता और परिवार का नुकसान

अगस्टिन एस्कोबार सिएमंस में 27 साल से अधिक समय से थे और हाल ही में सिएमंस मोबिलिटी के रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर के ग्लोबल सीईओ बने थे। उनकी पत्नी मेर्से भी सिएमंस एनर्जी में ग्लोबल कमर्शियल मैनेजर थीं। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने इसे "अकल्पनीय त्रासदी" करार देते हुए शोक व्यक्त किया।

न्यूयॉर्क में शोक की लहर

न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स ने कहा, "हमारा दिल टूट गया है। यह परिवार हमारे शहर की खूबसूरती देखने आया था, लेकिन यह हादसा उनकी जिंदगी छीन ले गया।" बचाव दल ने तुरंत कार्रवाई की, लेकिन ठंडे पानी में उलटे हेलीकॉप्टर से कोई जीवित नहीं बचा। चार लोगों को मौके पर मृत घोषित किया गया, जबकि दो अन्य की अस्पताल में मौत हो गई।

क्या है आगे?

यह हादसा न्यूयॉर्क में हेलीकॉप्टर पर्यटन की सुरक्षा पर सवाल उठा रहा है। पहले भी 2009 और 2018 में हडसन और ईस्ट रिवर में हेलीकॉप्टर हादसे हो चुके हैं। जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही हादसे की असल वजह का पता चलेगा। इस दुखद घटना ने न केवल स्पेन, बल्कि पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। न्यूयॉर्क की चमकती स्काईलाइन अब इस परिवार की अनकही कहानी की गवाह बन गई है।

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Fri, 11 Apr 2025 15:59:46 +0530 news desk MPcg
भारत के पास एक शानदार प्रधानमंत्री..PM मोदी बहुत स्मार्ट इंसान है I https://citytoday.co.in/भारत-के-पास-एक-शानदार-प्रधानमंत्रीpm-मोदी-बहुत-स्मार्ट-इंसान-है-i https://citytoday.co.in/भारत-के-पास-एक-शानदार-प्रधानमंत्रीpm-मोदी-बहुत-स्मार्ट-इंसान-है-i Sat, 29 Mar 2025 16:08:37 +0530 Newsdesk "उपराष्ट्रपति धनखड़ और प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई बैठक, सुरक्षा और रक्षा मुद्दों पर विचार&विमर्श" https://citytoday.co.in/उपराष्ट्रपति-धनखड़-और-प्रबोवो-सुबियांतो-के-बीच-हुई-बैठक-सुरक्षा-और-रक्षा-मुद्दों-पर-विचार-विमर्श https://citytoday.co.in/उपराष्ट्रपति-धनखड़-और-प्रबोवो-सुबियांतो-के-बीच-हुई-बैठक-सुरक्षा-और-रक्षा-मुद्दों-पर-विचार-विमर्श इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने सुरक्षा, रक्षा सहयोग और अन्य सामरिक मुद्दों पर चर्चा की।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने भारत की ओर से इंडोनेशिया के साथ सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की, वहीं प्रबोवो सुबियांतो ने दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।


यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और इंडोनेशिया दोनों ही क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर एकजुटता से काम कर रहे हैं।

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Sat, 25 Jan 2025 17:58:55 +0530 Newsdesk
"अमेरिका में ट्रंप का पुनरागमन: 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण" https://citytoday.co.in/अमेरिका-में-ट्रंप-का-पुनरागमन-47वें-राष्ट्रपति-के-रूप-में-शपथ-ग्रहण https://citytoday.co.in/अमेरिका-में-ट्रंप-का-पुनरागमन-47वें-राष्ट्रपति-के-रूप-में-शपथ-ग्रहण Mon, 20 Jan 2025 16:55:19 +0530 Newsdesk "अमेरिका में टिकटॉक की फिर से शुरुआत, राष्ट्रपति ट्रम्प का बड़ा कदम" https://citytoday.co.in/अमेरिका-में-टिकटॉक-की-फिर-से-शुरुआत-राष्ट्रपति-ट्रम्प-का-बड़ा-कदम https://citytoday.co.in/अमेरिका-में-टिकटॉक-की-फिर-से-शुरुआत-राष्ट्रपति-ट्रम्प-का-बड़ा-कदम Mon, 20 Jan 2025 16:49:35 +0530 Newsdesk संघर्ष विराम से पहले गाजा में तबाही: इज़राइली हमलों में दर्जनों मौतें, उम्मीदों के बीच बढ़ता तनाव। https://citytoday.co.in/संघर्ष-विराम-से-पहले-गाजा-में-तबाही-इज़राइली-हमलों-में-दर्जनों-मौतें-उम्मीदों-के-बीच-बढ़ता-तनाव https://citytoday.co.in/संघर्ष-विराम-से-पहले-गाजा-में-तबाही-इज़राइली-हमलों-में-दर्जनों-मौतें-उम्मीदों-के-बीच-बढ़ता-तनाव Fri, 17 Jan 2025 14:23:44 +0530 Newsdesk बाइडेन का अंतिम संबोधन: लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए चेतावनी https://citytoday.co.in/बाइडेन-का-अंतिम-संबोधन-लोकतंत्र-और-स्वतंत्रता-के-लिए-चेतावनी https://citytoday.co.in/बाइडेन-का-अंतिम-संबोधन-लोकतंत्र-और-स्वतंत्रता-के-लिए-चेतावनी Thu, 16 Jan 2025 15:30:53 +0530 Newsdesk "मार्क जुकरबर्ग का बड़ा फैसला: मेटा ने बंद किया फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम, लाया नया 'कम्युनिटी नोट्स' मॉडल" https://citytoday.co.in/मार्क-जुकरबर्ग-का-बड़ा-फैसला-मेटा-ने-बंद-किया-फैक्ट-चेकिंग-प्रोग्राम-लाया-नया-कम्युनिटी-नोट्स-मॉडल https://citytoday.co.in/मार्क-जुकरबर्ग-का-बड़ा-फैसला-मेटा-ने-बंद-किया-फैक्ट-चेकिंग-प्रोग्राम-लाया-नया-कम्युनिटी-नोट्स-मॉडल Wed, 08 Jan 2025 15:16:34 +0530 Newsdesk "मार्क जुकरबर्ग का बड़ा फैसला: मेटा ने बंद किया फैक्ट चेकिंग प्रोग्राम, लाया नया 'कम्युनिटी नोट्स' मॉडल" https://citytoday.co.in/मार्क-जुकरबर्ग-का-बड़ा-फैसला-मेटा-ने-बंद-किया-फैक्ट-चेकिंग-प्रोग्राम-लाया-नया-कम्युनिटी-नोट्स-मॉडल-1897 https://citytoday.co.in/मार्क-जुकरबर्ग-का-बड़ा-फैसला-मेटा-ने-बंद-किया-फैक्ट-चेकिंग-प्रोग्राम-लाया-नया-कम्युनिटी-नोट्स-मॉडल-1897 Wed, 08 Jan 2025 15:16:34 +0530 Newsdesk ट्रंप का कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने का दावा, कनाडाई नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया https://citytoday.co.in/ट्रंप-का-कनाडा-को-अमेरिका-का-51वां-राज्य-बनाने-का-दावा-कनाडाई-नेताओं-की-तीखी-प्रतिक्रिया https://citytoday.co.in/ट्रंप-का-कनाडा-को-अमेरिका-का-51वां-राज्य-बनाने-का-दावा-कनाडाई-नेताओं-की-तीखी-प्रतिक्रिया Wed, 08 Jan 2025 15:08:01 +0530 Newsdesk "HMPV वायरस की वजह से चीन में स्वास्थ्य संकट की स्थिति: जानें लक्षण और सावधानियाँ" https://citytoday.co.in/hmpv-वायरस-की-वजह-से-चीन-में-स्वास्थ्य-संकट-की-स्थिति-जानें-लक्षण-और-सावधानियाँ https://citytoday.co.in/hmpv-वायरस-की-वजह-से-चीन-में-स्वास्थ्य-संकट-की-स्थिति-जानें-लक्षण-और-सावधानियाँ Sat, 04 Jan 2025 14:59:40 +0530 Newsdesk मालदीव के विदेश मंत्री खलील की यात्रा: भारत&मालदीव संबंधों में नया अध्याय https://citytoday.co.in/मालदीव-के-विदेश-मंत्री-खलील-की-यात्रा-भारत-मालदीव-संबंधों-में-नया-अध्याय https://citytoday.co.in/मालदीव-के-विदेश-मंत्री-खलील-की-यात्रा-भारत-मालदीव-संबंधों-में-नया-अध्याय Fri, 03 Jan 2025 15:42:22 +0530 Newsdesk "कैलिफोर्निया में विमान दुर्घटना: फुलर्टन में इमारत पर गिरा विमान, 2 की मौत, 18 घायल" https://citytoday.co.in/कैलिफोर्निया-में-विमान-दुर्घटना-फुलर्टन-में-इमारत-पर-गिरा-विमान-2-की-मौत-18-घायल https://citytoday.co.in/कैलिफोर्निया-में-विमान-दुर्घटना-फुलर्टन-में-इमारत-पर-गिरा-विमान-2-की-मौत-18-घायल Fri, 03 Jan 2025 12:27:54 +0530 Newsdesk न्यू ऑरलियन्स में आतंकी हमले ने मचाई दहशत, 15 लोग मारे गए https://citytoday.co.in/न्यू-ऑरलियन्स-में-आतंकी-हमले-ने-मचाई-दहशत-15-लोग-मारे-गए https://citytoday.co.in/न्यू-ऑरलियन्स-में-आतंकी-हमले-ने-मचाई-दहशत-15-लोग-मारे-गए Thu, 02 Jan 2025 14:38:29 +0530 Newsdesk साइबरट्रक ब्लास्ट: बैटरी तकनीक की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल? https://citytoday.co.in/साइबरट्रक-ब्लास्ट-बैटरी-तकनीक-की-विश्वसनीयता-पर-बड़ा-सवाल https://citytoday.co.in/साइबरट्रक-ब्लास्ट-बैटरी-तकनीक-की-विश्वसनीयता-पर-बड़ा-सवाल Thu, 02 Jan 2025 13:32:54 +0530 Newsdesk राष्ट्रपति चुनाव जीतने से 5 इलेक्टोरल वोट दूर ट्रंप, मीडिया समूह ने की जीत की पुष्टि https://citytoday.co.in/Trump-5-electoral-votes-away-from-winning-the-presidential-election-media-group-confirms-victory https://citytoday.co.in/Trump-5-electoral-votes-away-from-winning-the-presidential-election-media-group-confirms-victory

सीएनएन के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीतने से महज 5 इलेक्टोरल वोट दूर हैं। वह 265 वोट हासिल कर चुके हैं, जबकि कमला हैरिस 214 वोट पर हैं। फॉक्स न्यूज ने ट्रंप की जीत को पक्का बताया, और उन्हें 277 वोट मिलने का अनुमान जताया। ट्रंप को जीत के लिए 23 वोट और चाहिए।

जिसके बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि चुनाव परिणाम में देरी हो सकती है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रंप का दबदबा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में हैरिस को समर्थन मिल रहा है।

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Wed, 06 Nov 2024 12:51:15 +0530 Newsdesk
US में राष्ट्रपति चुनाव से पहले ड्रॉप बॉक्स में आग लगने से सैकड़ों मतपत्र नष्ट https://citytoday.co.in/Hundreds-of-ballot-papers-destroyed-in-fire-in-drop-box-before-US-presidential-elections https://citytoday.co.in/Hundreds-of-ballot-papers-destroyed-in-fire-in-drop-box-before-US-presidential-elections  अमेरिका के वाशिंगटन और ओरेगन राज्यों में बैलेट ड्रॉप बक्सों में आग लगाने की वजह से सैकड़ों बैलेट नष्ट हो गए. बता दें अमेरिका में 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं. पुलिस ने सोमवार को बताया कि ओरेगन के दक्षिण-पूर्व पोर्टलैंड में और वाशिंगटन के पास के वैंकूवर में एक-एक बैलेट बॉक्स में आग लग गई.पुलिस ने बताया कि पोर्टलैंड में बैलेट बॉक्स में सुबह-सुबह लगी आग को जल्दी बुझा लिया गया. उन्होंने बताया कि केवल तीन बैलेट बॉक्स को नुकसान पहुंचा. चुनाव अधिकारियों ने कहा कि वैंकूवर में आग लगने से सैकड़ों मतपत्र जल गए. समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, उन्होंने इस घटना को मतदाताओं को 'वोटिंग से वंचित करने की कोशिश' बताया।पोर्टलैंड पुलिस ब्यूरो ने सोमवार को एक बयान में कहा कि पोर्टलैंड में आग लगने की घटना के बाद वहां से निकलते हुए देखे गए एक 'संदिग्ध वाहन' की पहचान कर ली गई है, जिसके वैंकूवर में हुई दो समान घटनाओं से जुड़े होने का अनुमान है.पोर्टलैंड पुलिस ब्यूरो की सहायक प्रमुख अमांडा मैकमिलन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "हमें इन कृत्यों के पीछे का मकसद नहीं पता है लेकिन हमें पता है कि इस तरह के कृत्य जानबूझकर किए जाते हैं और हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जानबूझकर किए गए ऐसे काम चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं."

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Tue, 29 Oct 2024 16:03:26 +0530 Newsdesk
पीएम मोदी और पुतिन कजान में मिले , भारत&रूस के बीच द्विपक्षीय वार्ता जारी https://citytoday.co.in/PM-Modi-and-Putin-meet-in-Kazan-bilateral-talks-continue-between-India-and-Russia https://citytoday.co.in/PM-Modi-and-Putin-meet-in-Kazan-bilateral-talks-continue-between-India-and-Russia प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों के दौरे पर रूस के कजान पहुंच गए हैं. कजान में ही पीएम मोदी BRICS समिट में हिस्सा लेने वाले हैं. वहां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से दोपहर 3.30 बजे (भारतीय समयानुसार) मुलाकात करेंगे. पीएम मोदी, चार महीने में दूसरी बार रूस गए हैं. आज शाम पीएम मोदी द्विपक्षीय वार्ता में भी शिरकत करेंगे. अटकलें हैं कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी मुलाकात हो सकती है. हालांकि, इस मुलाकात को लेकर औपचारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. उससे पहले प्रधानमंत्री का कजान में भव्य स्वागत हुआ. बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग भी उनके स्वागत के लिए पहुंचे. रूस-यूक्रेन जंग के बीच ये BRICS समिट हो रहा है. इस पर पूरी दुनिया की नजरें हैं.. 

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Tue, 22 Oct 2024 16:28:46 +0530 Newsdesk
आसियान के साथ गहरे हो सकते हैं भारत के रिश्ते https://citytoday.co.in/Indias-relations-with-ASEAN-can-deepen https://citytoday.co.in/Indias-relations-with-ASEAN-can-deepen एशिया और दुनिया के लिए अहम कई मु्द्दों पर चर्चा करने के लिए एशियाई नेताओं के साथ अमेरिका और रूस के शीर्ष राजनयिक दक्षिण पूर्वी एशियाई देश लाओस के वियनतियाने शहर में आसियान की बैठक में इकठ्ठा हुए हैं.आसियान की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं. गुरुवार 10 अक्टूबर को मोदी 21वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में शामिल हुए और आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की.
उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में आसियान देशों के साथ भारत का व्यापार दोगुना होकर 130 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है. उन्होंने यह भी कहा आसियान देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी फंड, डिजिटल फंड और ग्रीन फंड स्थापित किए गए हैं और भारत ने इनमें 2.50 अरब रुपयों से ज्यादा का योगदान किया है.

अमेरिका और रूस के विदेश मंत्री भी मौजूद 
आसियान के साथ भारत के संबंधों को और गहरा करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने एक 10 सूत्रीय योजना साझा की. इनमें वर्ष 2025 को आसियान-भारत पर्यटन वर्ष के रूप में मनाना, आसियान-भारत महिला वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित करना, आसियान-भारत साइबर नीति वार्ता का एक नियमित तंत्र शुरू करना जैसे कदम शामिल हैं.इस सम्मेलन में एक दुर्लभ स्थिति भी बनी है जब यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका और रूस के विदेश मंत्री भी एक ही कमरे में मौजूद हैं. अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने आसियान के नेताओं से आग्रह किया कि वो यूक्रेन में रूस के "वॉर ऑफ अग्रेशन" के खिलाफ दृढ़ता दिखाएं. ब्लिंकेन का कहना था कि यह युद्ध आसियान और संयुक्त राष्ट्र दोनों के सिद्धांतों के खिलाफ है.अमेरिकी विदेश मंत्री की रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से अलग से मिलने की संभावना नहीं जताई गई है. ब्लिंकेन ने सम्मेलन के दौरान चीन की भी आलोचना करते हुए कहा, "हम दक्षिण और पूर्वी चीन सागरों में चीन के अवैध कदमों को लेकर चिंतित हैं, जो कि और ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं."
पत्रकारों से बात करते एशिया में अमेरिका के कदमों को "विनाशकारी" बताया और आरोप लगाया कि जापान के "सैन्यीकरण" और दूसरे देशों को रूस और चीन के खिलाफ करने के पीछे अमेरिका का हाथ है.इसी सम्मेलन में पहली बार जापान के नए प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा भी शामिल हुए और उन्होंने भी चीन का जिक्र किया. जापान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि इशिबा चीन के प्रधानमंत्री ली चियांग से मिले और उस बैठक में "जापान के इर्द-गिर्द के इलाकों में चीनी सैन्य गतिविधियों के बढ़ने" के बारे में अपनी "गंभीर चिंताएं" दोहराईं.

दुनिया भर के संघर्षों का 'ग्लोबल साउथ' पर असर

ब्लिंकेन ने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया, जिसमें भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड समेत 18 देशों ने हिस्सा लिया. प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन में युद्ध के अपने विरोध को दोहराते हुए कहा, "मैं बुद्ध की धरती से आता हूं, और मैंने बार-बार कहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है. समस्याओं का समाधान रणभूमि से नहीं निकल सकता."उन्होंने यह भी कहा कि विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों का सबसे नकारात्मक प्रभाव 'ग्लोबल साउथ' के देशों पर पड़ रहा है और सभी चाहते हैं कि "चाहे यूरेशिया हो या पश्चिम एशिया, जल्द से जल्द शांति और स्थिरता की बहाली हो."उन्होंने इंडो-पैसिफिक का भी जिक्र किया और कहा कि "एक मुक्त, खुला, समावेशी, समृद्ध और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक, पूरे क्षेत्र की शांति और प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है." दक्षिण चीन सागर के बारे में उन्होंने कहा कि उसकी शांति, सुरक्षा और स्थिरता पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के हित में है.

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Fri, 11 Oct 2024 19:56:14 +0530 Newsdesk
इजरायल के बंदरगाह शहर पर हमने किया ड्रोन हमला: इराकी आतंकवादी समूह https://citytoday.co.in/We-carried-out-drone-attack-on-Israeli-port-city-Iraqi-terrorist-group https://citytoday.co.in/We-carried-out-drone-attack-on-Israeli-port-city-Iraqi-terrorist-group शिया मिलिशिया समूह इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक (आईआरआई) ने इजरायल के दक्षिणी बंदरगाह शहर ईलाट में एक "महत्वपूर्ण" स्थल पर ड्रोन हमले की जिम्मेदारी ली है. समूह ने बुधवार रात एक बयान में कहा कि यह हमला "फिलिस्तीन और लेबनान वासियों के समर्थन में" किया गया. साथ ही कहा कि उन्होंने संकल्प लिया है कि वो "दुश्मन के गढ़ों" को निशाना बनाते रहेंगे.शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बयान में टारगेट स्थल के बारे में और विवरण नहीं दिया गया है तथा किसी के भी हताहत होने की सूचना नहीं दी गई. इससे पहले, इराकी आतंकवादी समूह ने इजरायल के चार "महत्वपूर्ण" स्थलों पर चार ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी ली थी.

7 अक्टूबर, 2023 को गाजा पट्टी में इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष के शुरू होने के बाद से, इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक गाजा में फिलिस्तीनियों के समर्थन में, इस इलाके में स्थित इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर बार-बार हमला किया है. इजरायल द्वारा लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ मुहिम तेज किए जाने के बाद मिलिशिया ने इजरायली शहरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.

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Thu, 10 Oct 2024 16:43:24 +0530 Newsdesk
इजरायल के बंदरगाह शहर पर हमने किया ड्रोन हमला: इराकी आतंकवादी समूह https://citytoday.co.in/We-carried-out-drone-attack-on-Israeli-port-city-Iraqi-terrorist-group-1763 https://citytoday.co.in/We-carried-out-drone-attack-on-Israeli-port-city-Iraqi-terrorist-group-1763 शिया मिलिशिया समूह इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक (आईआरआई) ने इजरायल के दक्षिणी बंदरगाह शहर ईलाट में एक "महत्वपूर्ण" स्थल पर ड्रोन हमले की जिम्मेदारी ली है. समूह ने बुधवार रात एक बयान में कहा कि यह हमला "फिलिस्तीन और लेबनान वासियों के समर्थन में" किया गया. साथ ही कहा कि उन्होंने संकल्प लिया है कि वो "दुश्मन के गढ़ों" को निशाना बनाते रहेंगे.शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बयान में टारगेट स्थल के बारे में और विवरण नहीं दिया गया है तथा किसी के भी हताहत होने की सूचना नहीं दी गई. इससे पहले, इराकी आतंकवादी समूह ने इजरायल के चार "महत्वपूर्ण" स्थलों पर चार ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी ली थी.

7 अक्टूबर, 2023 को गाजा पट्टी में इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष के शुरू होने के बाद से, इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक गाजा में फिलिस्तीनियों के समर्थन में, इस इलाके में स्थित इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर बार-बार हमला किया है. इजरायल द्वारा लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ मुहिम तेज किए जाने के बाद मिलिशिया ने इजरायली शहरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.

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Thu, 10 Oct 2024 16:43:24 +0530 Newsdesk
अगर इजरायल ने ईरान पर बमबारी की उसे भारी कीमत चुकानी होगी, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने नेतन्याहू को दी चेतानी https://citytoday.co.in/If-Israel-bombs-Iran-it-will-have-to-pay-a-heavy-price-President-Pezeshkian-warns-Netanyahu https://citytoday.co.in/If-Israel-bombs-Iran-it-will-have-to-pay-a-heavy-price-President-Pezeshkian-warns-Netanyahu राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि ईरान जंग नहीं चाहता, लेकिन इजरायल देश के खिलाफ कार्रवाई करता है तो जवाब दिया जाएगा. उन्होंने यह टिप्पणी बुधवार को कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ मुलाकात के बाद की. वह दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के लिए कतर गए हैं. बता दे  ईरान की ओर से मंगलवार रात इजरायल पर मिसाइल हमले करने के बाद इजरायल ने जवाबी कार्रवाई करने की कसम खाई है.

ईरानी हमले के कुछ घंटों बाद, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक के दौरान कहा, "ईरान ने आज रात एक बड़ी गलती की है, और उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी." इजरायल के चैनल 13 टीवी समाचार ने बताया कि ईरान से कम से कम 200 जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें दागी गईं, जिससे पूरे देश में सायरन बजने लगे और लाखों लोग शेलटर्स की ओर भागे. 


ईरान का कहना है कि यह बमबारी हमास के राजनीतिक नेता इस्माइल हानिया, हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अब्बास निलफोरुशन की हत्याओं के जवाब में की गई. बता दें ईरान हमास और हिजबुल्लाह को खुलकर समर्थन देता आया है. इजरायल पर ईरान ने तब हमला किया जब यहूदी राष्ट्र ने लेबनान में जमीनी सैन्य अभियान की घोषणा की. 23 सितंबर से, इजरायल ने लेबनान में हवाई हमले तेज कर दिए. उसका कहना है कि यह कार्रवाई लेबानानी संगठन हिजबुल्ला के खात्मे के लिए है.

पिछले शुक्रवार को बेरूत के दक्षिणी उपनगर में एक महत्वपूर्ण हमले में हिज्बुललाह चीफ हसन नसरल्लाह और उसके कई सहयोगी मारे गए. इस हफ्ते इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में जमीनी सैन्य अभियान भी शुरू कर दिया. बुधवार को उसने लेबनान के अंदर अपने आठ सैनिकों की मौत की पुष्टि की. 8 अक्टूबर, 2023 को हिजबुल्लाह ने गाजा में हमास के प्रति एकजुटता जाहिर करते हुए इजरायल पर रॉकेट दागने शुरू किए थे. नवीनतम घटनाक्रम इसी संघर्ष का विस्तार है.

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Thu, 03 Oct 2024 17:55:11 +0530 Newsdesk
बैंकॉक के स्कूल बस में लगी आग, 25 स्टूडेंट के मौत की आशंका https://citytoday.co.in/Fire-breaks-out-in-Bangkok-school-bus-25-students-feared-dead https://citytoday.co.in/Fire-breaks-out-in-Bangkok-school-bus-25-students-feared-dead  बैंकॉक के पथुम थानी प्रांत में दर्दनाक हादसा हुआ है. यहां छात्रों और शिक्षकों से भारी एक बस में आग लग जाने से उसकी चपेट में आ जाने से करीब करीब 25 लोगों के मारे जाने की आशंका है. मारने वालों में स्टूडेंट्स समेत शिक्षक भी शामिल हैं. बैंकॉक के पथुम थानी प्रांत हुए इस हादसे के बाद लोग सदमे में हैं. जिनके घर के बच्चे और अभिभावक की जान गई ही. उनका रोक-रोकर बुरा हाल हो रहा  है.


बैंकॉक के परिवहन मंत्री सुरिया जुंगरुंगरूंगकिट का बयान आया है. उन्होंने घटनास्थल पर पहुंचने के बाद मीडिया से बातचीत में बताया कि बस 44 यात्रियों को मध्य उथाई थानी प्रांत से स्कूल यात्रा के लिए अयुथया ले जा रही थी, तभी दोपहर के आसपास राजधानी के उत्तरी उपनगर पथुम थानी प्रांत में आग लग गई. जिससे यह हादसा हो गया. हादसे के बाद का वीडियो भी सामने आया है. वीडियो में देखा जा सकता है कि बस आग की पूरी तरह से चपेट में आ गई है और धू-धूकर जल रही है.

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Tue, 01 Oct 2024 19:15:59 +0530 Newsdesk
श्रीलंका की नई प्रधानमंत्री का भारत से है खास नाता, DU की रह चुकी है छात्रा https://citytoday.co.in/Sri-Lankas-new-Prime-Minister-has-a-special-relationship-with-India-she-has-been-a-student-of-DU https://citytoday.co.in/Sri-Lankas-new-Prime-Minister-has-a-special-relationship-with-India-she-has-been-a-student-of-DU हाल के कुछ सालों में भारत के लगभग सभी पड़ोसी देशों में अस्थिरता बनी ही हुई है. श्रीलंका का भी यहीं हाल है, बीते कुछ समय से ये देश आर्थिक तंगी और राजनैतिक उठापटक से जूझ रहा है. फिलहाल में वहां पर अनुरा कुमारा दिसानायके के नेतत्व में नई सरकार का गठन हो गया है. अनुरा कुमारा दिसानायके श्रीलंका के पहले मार्क्सवादी लीडर हैं, जो राष्ट्रपति का पद संभालने जा रहे हैं. वही अब श्रीलंका की राजनीति में एक नया और ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। 54 वर्षीय हरिनी अमरासूर्या को देश की 16वीं प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया. हरिनी अमरासूर्या, जो कभी दिल्ली के हिंदू कॉलेज की बेंचों पर बैठकर पढ़ाई करती थीं, अब श्रीलंका की सत्ता की बागडोर संभालेंगी. उनके इस ऐतिहासिक पद पर नियुक्ति ने हिंदू कॉलेज को गर्व से भर दिया है, जो अब तक कई महत्वपूर्ण शख्सियतों को देश को दे चुका है.

श्रीलंका की नई प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या DU के हिंदू कॉलेज के 1991 से 1994 बैच की छात्रा थी . दिल्ली से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन करने के बाद डॉ. हरिनी ने ऑस्ट्रेलिया से एंथ्रोपोलॉजी में मास्टर की डिग्री हासिल की. इसके अलावा आगे उन्होंने एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी से सोशल एंथ्रोपोलॉजी में पीएचडी भी किया. यही नहीं डॉ. हरिनी ने युवाओं, राजनीति, असहमति, एक्टिविज्म, बाल संरक्षण और विकास जैसे मुद्दों पर रिसर्च करने के साथ किताबें भी लिख चुकी हैं. 
हरिनी अमरासूर्या का हिंदू कॉलेज से जुड़ाव और उनके कॉलेज के अनुभवों ने भारत-श्रीलंका के बीच संबंधों को और मजबूत करने की उम्मीदें भी जगाई हैं. नलिन सिंह ने कहा, "जब दोनों देशों के संबंधों के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तब हरिनी का यह जुड़ाव निश्चित रूप से दोनों देशों के रिश्तों को सकारात्मक दिशा में ले जा सकता है."
हरिनी अमरासूर्या की नियुक्ति न केवल श्रीलंका बल्कि हिंदू कॉलेज के लिए भी एक ऐतिहासिक और गर्व का क्षण है. उनका अकादमिक और राजनीतिक सफर दोनों देशों के लिए एक प्रेरणा बना रहेगा.

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Wed, 25 Sep 2024 15:59:23 +0530 Newsdesk
जापान में 5.9 तीव्रता के भूकंप के बाद एक द्वीप पर आई 50 सेंटीमीटर ऊंची सुनामी https://citytoday.co.in/A-50-cm-high-tsunami-hits-an-island-after-a-5.9-magnitude-earthquake-in-Japan https://citytoday.co.in/A-50-cm-high-tsunami-hits-an-island-after-a-5.9-magnitude-earthquake-in-Japan जापानी मौसम एजेंसी ने कहा कि आज जापान में  5.9 तीव्रता के भूकंप के बाद टोक्यो के दक्षिण में एक द्वीप पर 50 सेंटीमीटर की सुनामी आई. यह जानकारी स्थानीय मीडिया ने दी.जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (जेएमए) ने भूकंप के तुरंत बाद इजू और ओगासावारा द्वीपों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की थी, लेकिन स्थानीय समयानुसार सुबह 11 बजे इसे हटा लिया गया. एजेंसी ने कहा कि सुनामी की गतिविधि पर्याप्त रूप से कम हो गई है. हालांकि, समुद्र के स्तर में मामूली उतार-चढ़ाव लगभग आधे दिन तक जारी रह सकता है. मौसम एजेंसी के अनुसार, सुबह 8:14 बजे  भूकंप का केंद्र इजू द्वीप श्रृंखला में टोरीशिमा के पास था, जो प्रशांत महासागर में लगभग 10 किलोमीटर जमीन के नीच स्थित है.

 यह भूकंप के केंद्र से लगभग 180 किलोमीटर उत्तर में है. मियाके द्वीप पर 10 सेमी की छोटी सुनामी का पता चला. टोक्यो पुलिस के अनुसार, अब तक किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है जेएमए ने शुरू में 1 मीटर तक की सुनामी लहरों की भविष्यवाणी की थी और लोगों को तटीय क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी थी.
आपको बता दे एजेंसी ने चेतावनी दी कि प्रशांत तट पर अभी भी ज्वार-भाटे में मामूली बदलाव देखे जा सकते हैं, लेकिन सुनामी से संबंधित नुकसान के बारे में कोई चिंता नहीं है. मंगलवार की सुबह जापानी द्वीपों पर आए 5.9 तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी संबंधी परामर्श जारी किया गया था. हालांकि परामर्श हटा लिया गया है, लेकिन एजेंसी संभावित समुद्री स्तर में बदलाव के कारण मछली पकड़ने और तैराकी जैसी गतिविधियों के प्रति चेतावनी जारी कर रही है.

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Tue, 24 Sep 2024 19:12:43 +0530 Newsdesk
जाने कौन होगा श्रीलंका का नया राष्ट्रपति ? राष्ट्रपति चुनाव की वोटिंग जारी, 2022 के संकट के बाद देश में यह पहला चुनाव https://citytoday.co.in/Know-who-will-be-the-new-President-of-Sri-Lanka-Voting-for-the-presidential-election-continues-this-is-the-first-election-in-the-country-after-the-crisis-of-2022 https://citytoday.co.in/Know-who-will-be-the-new-President-of-Sri-Lanka-Voting-for-the-presidential-election-continues-this-is-the-first-election-in-the-country-after-the-crisis-of-2022 भारत के पड़ोसी और चीन के कर्ज जाल की वजह से राजनीतिक अस्थिरता झेल रहे श्रीलंका में आज राष्ट्रपति चुनाव हो रहे हैं. देश में 2022 में आर्थिक पतन के बाद द्वीप राष्ट्र में यह पहला चुनाव हो रहा है। बता दे देश में राष्ट्रपति पद के लिए कुल 38 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. इस चुनाव पर भारत और चीन की गहरी नजर रहेगी, क्योंकि यह द्वीपीय देश दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है. देश भर में 13,400 से अधिक मतदान केंद्रों पर एक करोड़ 70 लाख लोग अपने मताधिकारों का इस्तेमाल करेंगे। मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ जो शाम 5 बजे तक जारी रहेगा। चुनाव परिणाम रविवार तक घोषित किए जाने की संभावना है। बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव की निगरानी के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय चुनाव निगरानी संगठनों के 116 प्रतिनिधि श्रीलंका पहुंचे हैं। पर्यवेक्षकों में 78 यूरोपियन यूनियन यानी कि EU से हैं। EU ने इससे पहले श्रीलंका में 6 बार चुनाव निगरानी की है।

आपको बता दे श्रीलंका के मौजूदा राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के अपने प्रयासों की सफलता के आधार पर एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। कई विशेषज्ञ इसके लिए 75 सील के विक्रमसिंघे की सराहना कर चुके हैं। विक्रमसिंघे ने बुधवार रात एक चुनावी रैली में कहा था, 'मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि हमने जो सुधार शुरू किए हैं, उनपर आगे बढ़ते हुए देश के दिवालियापन को समाप्त करूं।' त्रिकोणीय चुनावी लड़ाई में विक्रमसिंघे को नेशनल पीपुल्स पावर (NPP) के 56 वर्षीय अनुरा कुमारा दिसानायके और समागी जन बालावेगया (SJB) के 57 वर्षीय नेता साजिथ प्रेमदासा से कड़ी टक्कर मिल रही है।

श्रीलंका का अगला राष्ट्रपति भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा. भारत श्रीलंका में बीजिंग के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित है. श्रीलंका भारत का परंपरागत रूप से एक मजबूत सहयोगी रहा है. श्रीलंका इस समय चीन के कर्ज जाल में फंसा है. चीन का बहुत भारी भरकम कर्ज श्रीलंका के ऊपर है, जिसकी वजह से श्रीलंका को अपना हंबनटोटा बंदरगाह चीन को 99 साल के लिए लीज पर देना पड़ा था. साजित प्रेमदासा श्रीलंका में बीजिंग के बढ़ते प्रभाव और भागीदारी के सबसे अधिक आलोचक हैं.

 

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Sat, 21 Sep 2024 18:39:14 +0530 Newsdesk
Ukraine: पीएम मोदी का यूक्रेन दौरा: पहली बार भारतीय पीएम की ऐतिहासिक यात्रा https://citytoday.co.in/Ukraine:--Modis-visit-to-Ukraine:-Historic-visit-by-an-Indian-PM-for-the-first-time https://citytoday.co.in/Ukraine:--Modis-visit-to-Ukraine:-Historic-visit-by-an-Indian-PM-for-the-first-time सीटीटुडे | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक ऐतिहासिक दौरे पर यूक्रेन पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की से महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह पहला अवसर है जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री युद्धग्रस्त यूक्रेन का दौरा कर रहा है। पीएम मोदी के साथ इस दौरे में भारत के विदेश सचिव और उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हैं, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। 

मुलाकात के दौरान का गर्मजोशी भरा माहौल

कीव के सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया, जहां भारतीय समुदाय के सदस्यों ने उनका जोरदार स्वागत किया। राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ हुई मुलाकात में पीएम मोदी ने व्यक्तिगत रूप से उनके कंधे पर हाथ रखकर संबंधों को और भी घनिष्ठ बनाने का प्रयास किया। दोनों नेताओं के बीच हुई वार्ता में यूक्रेन में जारी संघर्ष और इससे उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा हुई। 

पौलेंड और अमेरिका की सराहना: भारत की भूमिका पर उम्मीदें

पीएम मोदी के इस दौरे की दुनियाभर में सराहना हो रही है। पौलेंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा, "भारत की भूमिका इस संघर्ष को समाप्त करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।" उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का यह दौरा ऐतिहासिक हो सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा। 

अमेरिकी उप विदेश मंत्री रिचर्ड आर वर्मा ने भी इस यात्रा की प्रशंसा की और कहा कि "यह यात्रा महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी की टिप्पणियों ने यह दर्शाया है कि यह युद्ध का युग नहीं है, बल्कि शांति का समय है।

पीएम मोदी का संदेश: युद्ध का समाधान नहीं

इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने कहा,यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष हम सभी के लिए चिंता का विषय है। भारत का दृढ़ विश्वास है कि किसी भी समस्या का समाधान रणभूमि में नहीं हो सकता।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मासूमों की जान की हानि पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 

वैश्विक स्थिरता की ओर कदम

पीएम मोदी का यह दौरा न केवल भारत और यूक्रेन के संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति और स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। यह यात्रा उन सभी देशों के लिए एक संदेश है, जो युद्ध और संघर्ष से प्रभावित हैं, कि बातचीत और सहयोग के माध्यम से ही समस्याओं का समाधान संभव है। 

 भविष्य की दिशा

इस दौरे के माध्यम से, भारत ने अपने वैश्विक कूटनीतिक दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है, जिसमें वह न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए अपनी भूमिका निभाने के लिए तत्पर है। पीएम मोदी का यह दौरा भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को और मजबूत करेगा और उम्मीद है कि इससे यूक्रेन के साथ भारत के संबंध और भी प्रगाढ़ होंगे।

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Fri, 23 Aug 2024 19:41:41 +0530 Newsdesk
US Election: डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव जीतने पर एलन मस्क को कैबिनेट पद की पेशकश की, मस्क ने जताई सहमति https://citytoday.co.in/US-Election:-Donald-Trump-offered-cabinet-post-to-Elon-Musk-if-he-wins-the-election,-Musk-agreed-Donald-Trump-offered-cabinet-post-to-Elon-Musk-if-he-wins-the-election,-Musk-agreed https://citytoday.co.in/US-Election:-Donald-Trump-offered-cabinet-post-to-Elon-Musk-if-he-wins-the-election,-Musk-agreed-Donald-Trump-offered-cabinet-post-to-Elon-Musk-if-he-wins-the-election,-Musk-agreed अमेरिका|  नवंबर में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अगर वह राष्ट्रपति चुने जाते हैं, तो वह एलन मस्क को अपनी कैबिनेट में स्थान देने या व्हाइट हाउस में सलाहकार बनाने पर विचार करेंगे। मस्क ने भी इस नई भूमिका के लिए अपनी सहमति जताई है। ट्रंप ने मस्क की तारीफ करते हुए कहा, वह बहुत ही स्मार्ट और समझदार व्यक्ति हैं। अगर वह कैबिनेट में शामिल होने के लिए तैयार होते हैं, तो मैं निश्चित रूप से उन्हें यह भूमिका सौंपूंगा।

मंगलवार को एलन मस्क ने एक पोस्ट में अपने इरादे साफ कर दिए, जिसमें उन्होंने कहा, "मैं सेवाएं देने के लिए तैयार हूं।" उन्होंने एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें लिखा था "डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी"। इससे यह संकेत मिलता है कि मस्क किस विभाग में काम करने को उत्सुक हो सकते हैं।

ट्रंप ने इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर मिलने वाले 7500 डॉलर के टैक्स क्रेडिट को खत्म करने पर भी विचार करने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है।

अमेरिका में कमला हैरिस की लोकप्रियता बढ़ी,डेमोक्रेटिक पार्टी में दिखा उत्साह

अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की लोकप्रियता में हाल के दिनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 48 प्रतिशत अमेरिकी वयस्क हैरिस के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, जो कि गर्मी की शुरुआत में 39 प्रतिशत था। इस वृद्धि से डेमोक्रेटिक पार्टी में नए उत्साह का संचार हुआ है। हैरिस जल्द ही डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेंगी, जहां वह पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले हुए राष्ट्रपति चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बहस में खराब प्रदर्शन के बाद जो बाइडन को उम्मीदवारी से हटना पड़ा था, जिससे पार्टी के भीतर हैरिस की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

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Tue, 20 Aug 2024 16:57:18 +0530 Newsdesk
Turkish :तुर्की संसद में हिंसा: सांसदों के बीच मारपीट, खून से सनी फर्श https://citytoday.co.in/Turkish-:Violence-in-Turkish-Parliament:-Fighting-between-MPs,-blood-stained-floor https://citytoday.co.in/Turkish-:Violence-in-Turkish-Parliament:-Fighting-between-MPs,-blood-stained-floor तुर्की| तुर्की की संसद में शुक्रवार को एक बड़े विवाद के दौरान हिंसक झड़प हुई, जहां दर्जनों सांसदों के बीच लात-घूंसे चले। इस हिंसा में दो सांसद घायल हो गए और फर्श पर खून बिखर गया। घटना के बाद सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी।

विवाद की शुरुआत:

इस हिंसक घटना की शुरुआत वामपंथी वर्कर्स पार्टी ऑफ तुर्की के सांसद अहमत सिक के भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने अपने जेल में बंद सहयोगी केन अताले को संसद में शामिल करने की मांग की। इस दौरान सत्तारूढ़ एकेपी पार्टी के सांसद अल्पे ओजालान ने उन पर हमला कर दिया, जिससे झगड़ा शुरू हुआ।

महिला सांसदों को भी चोट:

इस हिंसक झगड़े के दौरान महिला सांसदों को भी चोटें आईं, जिससे संसद का माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। घटना के बाद सदन की कार्यवाही लगभग आधे घंटे तक रोक दी गई।

अहमत सिक की प्रतिक्रिया:

अहमत सिक ने इस घटना के बाद कहा कि यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि सरकार उनके सहयोगी कैन अताले को आतंकवादी कहती है। उन्होंने सत्ताधारी दल की कड़ी आलोचना की और कहा कि देश के असली आतंकवादी वही लोग हैं जो सत्ता की बेंचों पर बैठे हैं।

विपक्ष का प्रस्ताव खारिज:

घटना के बाद संसद की कार्यवाही पुनः शुरू हुई और विपक्ष का कैन अताले को सदन में शामिल करने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। 

कौन हैं कैन अताले:

कैन अताले 2013 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कारण चर्चा में आए थे। उन पर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की साजिश रचने का आरोप है, जिसके चलते उन्हें 2022 में 18 साल की सजा सुनाई गई थी।

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Sat, 17 Aug 2024 20:13:44 +0530 Newsdesk
Iran&Israel :ईरान&इजरायल संकट पर बढ़ती चिंता: अमेरिका ने इजरायल को किया अलर्ट https://citytoday.co.in/Iran-Israel-:Growing-concern-over-Iran-Israel-crisis:-America-alerts-Israel https://citytoday.co.in/Iran-Israel-:Growing-concern-over-Iran-Israel-crisis:-America-alerts-Israel ईरान | ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, और इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। हाल ही में, अमेरिका ने इजरायल को एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि ईरान एक बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। 

अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने रविवार को इजराइल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट से मुलाकात की। इस मुलाकात में ऑस्टिन ने जानकारी दी कि अमेरिका को ईरान की सैन्य तैयारियों का पता चला है और यह आशंका जताई जा रही है कि ईरान इजरायल पर बड़े पैमाने पर हमला करने की योजना बना रहा है।

यह चेतावनी उस समय आई है जब इजरायल और गाजा के बीच गुरुवार को बंधक संकट और युद्ध विराम पर वार्ता होने की उम्मीद है। अमेरिका को शक है कि इस वार्ता से पहले ही ईरान हमला कर सकता है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

गाजा पट्टी में इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी, खान यूनिस को खाली करने का आदेश

गाजा पट्टी में हमास के आतंकियों के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई तेज हो गई है। हाल ही में गाजा के एक स्कूल पर हुए हवाई हमले में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद इजरायल की कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। इसके बावजूद, इजरायल का कहना है कि उसका उद्देश्य सिर्फ आतंकियों को निशाना बनाना है।

इसी के तहत, इजरायल ने अब गाजा पट्टी के दक्षिण में स्थित खान यूनिस को खाली करने का आदेश दिया है। इजरायल की सेना ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर स्थानीय लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

चीन का बयान: ईरान की संप्रभुता की रक्षा का समर्थन

इस संकट के बीच, चीन ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। चीन का कहना है कि ईरान को अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय गरिमा की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। 

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Mon, 12 Aug 2024 17:34:06 +0530 Newsdesk
ब्राज़ील विमान हादसा: 62 लोगों की मौत, राष्ट्रपति ने किया तीन दिन के शोक की घोषणा https://citytoday.co.in/Brazil-plane-crash:-62-people-died,-President-announced-three-days-of-mourning https://citytoday.co.in/Brazil-plane-crash:-62-people-died,-President-announced-three-days-of-mourning Brazil plane crash: ब्राज़ील के साओ पाउलो राज्य के विन्हेडो में एक बड़ा विमान हादसा हुआ, जिसमें 62 लोग सवार थे। विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा ने देश में तीन दिन के शोक की घोषणा की है। हादसे की वजह का अभी पता नहीं चल सका है, और इस मामले की जांच की जा रही है।

हवा में अनियंत्रित हुआ विमान, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

हादसे के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि विमान हवा में अनियंत्रित हो गया था और थोड़ी देर बाद जमीन पर गिरकर क्रैश हो गया। मौके पर ही विमान में आग लग गई और सभी यात्रियों की मौत हो गई। तस्वीरों में विमान के मलबे और यात्रियों के सामान को बिखरा हुआ देखा जा सकता है।

चमत्कार: फ्लाइट छूटने से बच गई कई लोगों की जान

इस हादसे से पहले कई लोगों की फ्लाइट छूट गई थी, जिससे उनकी जान बच गई। एद्रियानो असीस और जोस फेलिफ जैसे यात्रियों ने बताया कि उन्हें तकनीकी कारणों से विमान में चढ़ने से रोक दिया गया था। वे इस घटना को चमत्कार मानते हैं और भगवान का धन्यवाद कर रहे हैं कि उनकी जान बच गई।

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Sat, 10 Aug 2024 15:35:47 +0530 Newsdesk
मौलाना हसन शाह की गिरफ्तारी: न्यायपालिका के खिलाफ बयानबाजी पर कड़ी कार्रवाई https://citytoday.co.in/Arrest-of-Maulana-Hasan-Shah:-Strict-action-on-rhetoric-against-judiciary https://citytoday.co.in/Arrest-of-Maulana-Hasan-Shah:-Strict-action-on-rhetoric-against-judiciary सीटीटुडे |  पाकिस्तान में न्यायपालिका के खिलाफ भड़काऊ बयान देने के बाद तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान 
के प्रमुख नेता मौलाना हसन शाह को गिरफ्तार कर लिया गया है। मौलाना हसन शाह ने एक रैली में पाकिस्तान के चीफ जस्टिस काजी फैज ईसा का सिर कलम करने वाले को एक करोड़ रुपये का इनाम देने का ऐलान किया था। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश फैला और सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए उनके खिलाफ आतंकवाद निरोधक अधिनियम और धार्मिक घृणा फैलाने की धाराओं में मामला दर्ज किया।

घटना का पृष्ठभूमि:


मौलाना हसन शाह ने लाहौर में आयोजित एक रैली में यह बयान दिया था। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि चीफ जस्टिस का सिर कलम करने वाले को एक करोड़ रुपये का इनाम मिलेगा। उनके इस बयान ने देशभर में हंगामा खड़ा कर दिया। सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौलाना शाह को गिरफ्तार कर लिया। 

सरकार का सख्त रुख:


पाकिस्तान सरकार ने मौलाना हसन शाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए न्यायपालिका के खिलाफ नफरत फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही, उनकी पार्टी टीएलपी के 1500 कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि न्यायपालिका के खिलाफ किसी भी प्रकार की नफरत भरी बयानबाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 सुप्रीम कोर्ट का विवादित फैसला:


यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से जुड़ा हुआ है, जिसमें अहमदी समुदाय के एक ईशनिंदा संदिग्ध को जमानत दी गई थी। इस फैसले का विरोध हो रहा था, और इसी संदर्भ में मौलाना हसन शाह ने अपने भड़काऊ बयान दिए थे। उनके बयान के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

मौलाना हसन शाह की गिरफ्तारी से पाकिस्तान में एक बार फिर से न्यायपालिका और सरकार के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी के मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। सरकार ने अपने सख्त रुख से यह साफ कर दिया है कि न्यायपालिका के खिलाफ नफरत फैलाने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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Tue, 30 Jul 2024 19:53:07 +0530 Newsdesk
गोलान हाइट्स में रॉकेट हमले में 12 की मौत, इजरायल ने हिजबुल्लाह को जिम्मेदार ठहराया https://citytoday.co.in/12-killed-in-rocket-attack-in-Golan-Heights,-Israel-blames-Hezbollah https://citytoday.co.in/12-killed-in-rocket-attack-in-Golan-Heights,-Israel-blames-Hezbollah

येरुशलम: शनिवार को इजरायल के कब्जे वाले गोलान हाइट्स के एक गांव में हुए रॉकेट हमले ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हमले में बच्चों समेत कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 29 लोग घायल हो गए। इजरायल ने इसे 7 अक्टूबर के बाद से अपने खिलाफ सबसे घातक हमला करार दिया है।

इजरायल का कहना है कि उसने लेबनान से इजरायली क्षेत्र में घुसने वाले लगभग 30 रॉकेटों की पहचान की है और इस हमले के लिए ईरान समर्थित लेबनानी आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह को जिम्मेदार ठहराया है। इस घटना ने इजरायल-लेबनान सीमा पर लंबे समय से जारी संघर्ष में नई वृद्धि की आशंका पैदा कर दी है। कई इजरायली राजनेताओं ने इस हमले का जवाब देने की मांग की है।

आयरन डोम की विफलता:

इस हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इजरायल का आयरन डोम सिस्टम, जिसे उसकी रक्षा कवच माना जाता है, इस घटना में क्यों नाकाम रहा। आयरन डोम अरबों डॉलर की लागत से बनाया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य रॉकेट हमलों को रोकना है। हालांकि, पिछले साल अक्टूबर में जब हमास ने इजरायल पर हमला किया था, तब भी आयरन डोम की क्षमता पर सवाल उठे थे। बड़े हमलों के समय यह प्रणाली अपनी प्रभावशीलता साबित करने में विफल रही है, जिससे हर एंटी मिसाइल सिस्टम की कमियां उजागर होती हैं।

हिजबुल्लाह का खंडन:

हिजबुल्लाह ने इस हमले में अपनी भूमिका से साफ इनकार किया है। गोलान हाइट्स के मजदल शम्स गांव में हुए इस हमले में हुई 12 मौतों के अलावा, कम से कम 29 लोग घायल हुए हैं। मजदल शम्स एक बड़े ड्रूज समुदाय का घर है। गोलान हाइट्स में करीब 20,000 ड्रूज़ अरब निवास करते हैं, जिन्हें इजरायल ने 1967 की छह दिन की जंग के दौरान सीरिया से छीन लिया था और 1981 में अपने साथ मिला लिया था। अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत यह इलाका कब्जे वाला माना जाता है। इस इलाके में लगभग 50,000 इजरायली यहूदी और ड्रूज़ निवास करते हैं, जिनमें से अधिकांश ड्रूज़ खुद को सीरियाई मानते हैं और इजरायली नागरिकता के प्रस्ताव को ठुकरा चुके हैं।

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Mon, 29 Jul 2024 21:06:54 +0530 Newsdesk
PARIS 2024  : मानु भाकर ने रचा इतिहास, ओलंपिक में पहली भारतीय महिला https://citytoday.co.in/PARIS-2024:-Manu-Bhaker-created-history,-first-Indian-woman-in-Olympics https://citytoday.co.in/PARIS-2024:-Manu-Bhaker-created-history,-first-Indian-woman-in-Olympics सीटीटुडे|पेरिस ओलंपिक 2024 में भारतीय शूटर मनु भाकर ने इतिहास रचा है।  मनु ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता है । इसके जरिए वह पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं, जिन्होंने शूटिंग में ओलंपिक पदक जीता। बतादे कि,फाइनल में मनु भाकर ने कुल 221.7 अंक हासिल करके तीसरे स्थान पर रहकर इस उपलब्धि को हासिल किया। उन्होंने कोरिया की खिलाड़ी से तकरार करते हुए अपने प्रदर्शन से भारत का नाम रोशन किया।

मनु भाकर की यह सफलता भारतीय शूटिंग के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षण है, जो उन्होंने अपनी युवा उम्र में हासिल की है। उन्होंने पहली सीरीज में 97, दूसरी में 97, तीसरी में 98, चौथी में 96, पांचवीं में 96 और छठी में 96 अंक बनाए और फिर फाइनल में उन्होंने दमदार प्रदर्शन करके जवाबी कदम रखा।

इससे पहले भारत के लिए शूटिंग में पदक जीतने वाली अन्य खिलाड़ियों में राजवर्धन सिंह राठोड़ (2004, सिल्वर), अभिनव बिंद्रा (2008, गोल्ड), गगन नारंग (2012, सिल्वर), और विजय कुमार (2012, सिल्वर) शामिल हैं। मनु भाकर ने इस श्रृंखला में अपनी जगह बनाकर शूटिंग के इतिहास में अपना स्थान बनाया है।

मनु भाकर की इस उपलब्धि से भारतीय खिलाड़ीयों को नई प्रेरणा मिली है, और वे देश के लिए और अधिक पदकों की उम्मीदें लेकर आगे बढ़ सकती हैं। उनकी यह जीत भारतीय खेल प्रेमियों के लिए गर्व का सबब बनी है और देशवासियों के लिए एक बड़ी खुशी का कारण है।

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Sun, 28 Jul 2024 21:30:21 +0530 Newsdesk
Astrologer: ज्योतिषी एमी ट्रिप की सटीक भविष्वाणी :बाइडन की वपसी  https://citytoday.co.in/Astrologer:-Astrologer-Amy-Tripps-accurate-prediction:-Bidens-return https://citytoday.co.in/Astrologer:-Astrologer-Amy-Tripps-accurate-prediction:-Bidens-return सीटीटुडे | यह खबर राष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी है, जहां मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन ने स्वास्थ्य कारणों से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है, और कमला हैरिस को डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से उम्मीदवार बनाया गया है। डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि कमला हैरिस के आने से उनकी जीत की संभावना बढ़ गई है।

इस बीच, ज्योतिषी एमी ट्रिप ने बाइडन के उम्मीदवारी से हटने की सटीक भविष्यवाणी की थी। उन्होंने अब यह भी भविष्यवाणी की है कि डोनाल्ड ट्रंप अगले राष्ट्रपति बन सकते हैं। एमी ट्रिप ने 11 जुलाई को एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी दी थी। उनका कहना है कि मकर राशि और वृद्धावस्था के कारण बाइडन को उम्मीदवारी छोड़नी पड़ी।

एमी ट्रिप का मानना है कि अगस्त का महीना अमेरिका के लिए निर्णायक हो सकता है और राजनीतिक अशांति बढ़ सकती है। डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन 19 अगस्त से शुरू होने वाला है, जिससे भविष्य की राजनीति पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है।

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Sun, 28 Jul 2024 20:43:57 +0530 Newsdesk
JAPAN:उत्तरी जापान में बाढ़ और भूस्खलन से व्यापक तबाही https://citytoday.co.in/JAPAN:Floods-and-landslides-cause-widespread-devastation-in-northern-Japan https://citytoday.co.in/JAPAN:Floods-and-landslides-cause-widespread-devastation-in-northern-Japan सीटीटुडे | उत्तरी जापान में हालिया भारी बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन ने कई इलाकों में तबाही मचा दी है। यामागाटा और अकिता प्रांत के कई शहरों में आवागमन बाधित हो गया है और सैकड़ों लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। जापान मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों के लिए चेतावनी जारी की है, जबकि गर्म हवाओं के कारण पहले से ही लोग परेशान थे।

व्यक्ति सड़क निर्माण स्थल पर भूस्खलन

युजावा शहर में एक व्यक्ति सड़क निर्माण स्थल पर भूस्खलन की चपेट में आकर लापता हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बचाव कर्मियों ने नाव की मदद से बाढ़ग्रस्त क्षेत्र से 11 लोगों को सुरक्षित निकाला है। यामागाटा प्रांत के युजा और सकाटा कस्बों में एक घंटे के भीतर 4 इंच से अधिक बारिश हो चुकी है। हजारों लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई है, लेकिन शरण लेने वाले लोगों की सटीक संख्या अभी तक ज्ञात नहीं हो पाई है।

पूर्वी जापान की यामागाटा शिंकानसेन बुलेट ट्रेन सेवाएं आंशिक रूप से निलंबित कर दी गई हैं। भारी बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने का आग्रह किया गया है। जापानी प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से मौसम संबंधी जानकारियों पर नजर बनाए रखने और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है।

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Fri, 26 Jul 2024 22:33:48 +0530 Newsdesk
Tokyo:अफ्रीका में हर पांचवा व्यक्ति भुखमरी का शिकार  https://citytoday.co.in/Tokyo:Every-fifth-person-in-Africa-is-a-victim-of-starvation https://citytoday.co.in/Tokyo:Every-fifth-person-in-Africa-is-a-victim-of-starvation सीटीटुडे | दुनिया की खाद्य सुरक्षा की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुनिया की खाद्य सुरक्षा की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। "द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन 2024" रिपोर्ट में बताया गया है कि 73.3 करोड़ लोग अब भी भूख का सामना कर रहे हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है। 2019 में कॉविड-19 के पहले जो स्थिति थी। उससे भयावह स्थिति में 2024 मे हो गई है।भुखमरी की स्थिति केवल 15.2 करोड़ लोगों की थी, लेकिन अब यह आंकड़ा 73.3 करोड़ तक पहुँच चुका है। अफ्रीका के देशों में स्थिति सबसे खराब है, जहाँ हर पांचवां व्यक्ति भुखमरी का शिकार है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर 11 इंसान मे 1 इंसान खाली पेट सोने के लिए मजबूर हो गया है| 

 कुपोषण बढ़ा रहे पेकफूड के उत्पाद 

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक खाद्य पदार्थों के विक्रेताओं द्वारा बेचे जा रहे 90% उत्पाद कुपोषण को बढ़ावा दे रहे हैं। वर्तमान में, 233 करोड़ लोग पर्याप्त भोजन की कमी का सामना कर रहे हैं और 86.4 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का शिकार हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 15 वर्षों में खाद्य सुरक्षा की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, और हालात 2008-09 की तुलना में और भी खराब हो गए हैं। यह स्थिति विश्व के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

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Fri, 26 Jul 2024 22:21:54 +0530 Newsdesk
PARIS:पेरिस में सर्वसम्मति से नीता अंबानी को चुना गया आईओसी सदस्य https://citytoday.co.in/PARIS:Nita-Ambani-unanimously-elected-as-IOC-member-in-Paris https://citytoday.co.in/PARIS:Nita-Ambani-unanimously-elected-as-IOC-member-in-Paris सीटीटुडे| रिलायंस फाउंडेशन की संस्थापक नीता अंबानी को दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) का सदस्य चुना गया है। पेरिस में आयोजित आईओसी के 142वें सत्र के दौरान हुए मतदान में उन्हें सर्वसम्मति से चुना गया। इससे भारतीय खेल संघों को वैश्विक स्तर पर सहयोग और समर्थन मिलने की संभावना है।

नीता अंबानी ने इस अवसर पर सम्मानित महसूस करते हुए आईओसी अध्यक्ष थॉमस बाक और अपने सहयोगियों का धन्यवाद किया। उन्होंने इसे व्यक्तिगत मील का पत्थर और वैश्विक खेल क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक बताया। नीता ने 2016 में रियो डि जिनेरियो ओलंपिक खेलों के दौरान पहली बार आईओसी में प्रवेश किया था और वे इस प्रतिष्ठित संस्था में शामिल होने वाली भारत की पहली महिला हैं। नीता अंबानी एक प्रतिष्ठित व्यवसायी और समाजसेवी हैं, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अहम योगदान दे रही हैं।

वहीं नीता ने दोबार आईओसी सदस्य चुने जाने के बाद कहा, ‘‘मैं अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्य के रूप में फिर से चुने जाने पर बहुत सम्मानित महसूस कर रही हूं। मैं आईओसी अध्यक्ष थॉमस बाक और आईओसी में अपने सभी सहयोगियों को मुझ पर भरोसे जताने के लिए धन्यवाद देना चाहती हूं।
उन्होंने कहा , ‘‘फिर से सदस्य चुना जाना ना केवल एक व्यक्तिगत मील का पत्थर है बल्कि वैश्विक खेल क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव को भी दिखाता है। मैं हर भारतीय के साथ खुशी और गर्व के इस पल को साझा करती हूं और भारत तथा दुनिया भर में ओलंपिक आंदोलन को मजबूत करने के हमारे प्रयासों को जारी रखने के लिए उत्साहित हूं।

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Thu, 25 Jul 2024 20:27:22 +0530 Newsdesk
Nepal : त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटना, 18 की मौत https://citytoday.co.in/Nepal-:-Plane-crash-at-Tribhuvan-International-Airport,-18-dead https://citytoday.co.in/Nepal-:-Plane-crash-at-Tribhuvan-International-Airport,-18-dead

काठमांडू : नेपाल की राजधानी काठमांडू में त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बुधवार सुबह एक गंभीर विमान दुर्घटना हुई। सौर्य एयरलाइंस का विमान, जो पोखरा की ओर जा रहा था, उड़ान भरने के दौरान रनवे से फिसल गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 19 लोगों में से 18 की मौत हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उसमें आग लग गई, जिसे दमकलकर्मियों ने बुझा दिया। पायलट को गंभीर स्थिति में अस्पताल ले जाया गया है। हवाई अड्डे पर धुएं का घना गुबार देखा गया और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। हादसे के कारण त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को एहतियातन बंद कर दिया गया है।

इस हादसे में प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पांच शव बरामद किए गए हैं। हाल के वर्षों में यह नेपाल का दूसरा बड़ा विमान हादसा है, जिसमें पिछले साल यति एयरलाइंस का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 72 लोग मारे गए थे, जिनमें पांच भारतीय भी शामिल थे।

फिलहाल, दुर्घटना की जांच जारी है और नेपाल में विमान सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

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Wed, 24 Jul 2024 19:33:06 +0530 Newsdesk
PRESIDENT:राष्ट्रपति जो बाइडेन की तबियत को लेके उड़ी अफवाहे  https://citytoday.co.in/PRESIDENT:Rumors-about-President-Joe-Bidens-health https://citytoday.co.in/PRESIDENT:Rumors-about-President-Joe-Bidens-health सीटीटुडे |  बीते एक सप्ताह से अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन को लेकर कई तरह की अफवाह चल रहीं हैं। चुनावी समय होने के बाद भी बाइडेन जनता के बीच नहीं पहुंच पा रहे थे। उनकी सेहत में भी सुधार अपेक्षानुसार नहीं हो रहा है। इसके बाद ही अफवाहें भी उड़ने लगी थीं कि बाइडेन की तबियत तेजी से बिगड़ रही है। कुछ अफवाहें ये भी थीं कि 81 वर्षीय नेता अस्पताल की देखरेख में हैं और उनका रातभर जीवित रहना भी मुश्किल है। 

एक्स पर जो कहा वह वगि ट्रेंड कर गया 

इतना ही नहीं एक्स पर जो कहां है वह भी ट्रेंड कर गया था। चुनावी रेस से बाहर हो चुके अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन एक बार फिर नजर आए। इसके साथ ही उनके स्वास्थ्य से जुड़ी कई अफवाहों पर विराम लग गया है। खास बात है कि डेमोक्रेटिक नेता कोविड-19 का शिकार होने के बाद आइसोलेशन में थे। बुधवार को बाइडेन ने व्हाइट हाउस में वापसी की। खबर है कि डॉक्टर भी उनकी स्वास्थ्य में सुधार की बात कह रहे हैं।

 
हालांकि, इस दौरान बाइडेन ने पत्रकारों से ज्यादा बात नहीं की। जबकि, उन्होंने एक्स पर लिखा है, व्हाइट हाउस में वापस आकर अच्छा लग रहा है। आज दोपहर मैं ओवल ऑफिस में वापस आ गया और डेली इंटेलीजेंस ब्रीफिंग के लिए नेशनल सिक्युरिटी टीम के साथ बैठा। आपके कमांडर-इन-चीफ के तौर पर काम करना मेरे लिए बड़ा सम्मान है। डेमोक्रेटिक नेता के चुनाव लड़ने को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। इतना ही नहीं पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा समेत कई बड़े नेता भी उनकी दावेदारी पर मजबूत प्रतिक्रियाएं नहीं दे पा रहे थे।

 कोविड का शिकार होने के बाद उन्होंने खुद ही रेस से बाहर होने का ऐलान कर दिया था और उप राष्ट्रपति कमला हैरिस का नाम आगे बढ़ाया था।हालांकि अब तक साफ नहीं है कि बाइडेन ने राष्ट्रपति चुनाव से नाम वापस क्यों लिया। बुधवार को भी उन्होंने इस संबंध में पत्रकारों से कुछ नहीं कहा। अब उन्होंने ऐलान किया है कि वह शुक्रवार को देश को संबोधित करेंगे। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि उस दौरान वह अपने फैसले पर खुलकर बात कर सकते हैं।

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Wed, 24 Jul 2024 16:27:17 +0530 Newsdesk
CHINA:अनंत अम्बानी की शादी देख उड़े चीन के होश  https://citytoday.co.in/CHINA:Chinas-senses-blown-away-after-seeing-Anant-Ambanis-wedding https://citytoday.co.in/CHINA:Chinas-senses-blown-away-after-seeing-Anant-Ambanis-wedding सीटीटुडे । भारत के खिलाफ जहरीले बयान देने वाला चीन अब शादी को लेकर निशाना बना रहे हैं। अनंत अंबानी की शादी देख चीन के होश उड़े गए हैं। भारत की प्रगत‍ि से नफरत करने वाला चीन सोशल मीडिया में अनंत अंबानी की शादी के खिलाफ प्रोपेगैंडा फैला रहा है। चीनी सोशल मीडिया वॉरियर झाओ दाशुआई ने पीएम मोदी के खिलाफ निशाना साधा है। उसने कहा कि भारत के पीएम मोदी इस सबसे धनी आदमी की शादी में गए जबकि पांच साल में भारत के बच्‍चों की 46 फीसदी आबादी कुपोषण का शिकार है।

 चीनी प्रोपेगैंडा वॉरियर को भारतीयों ने भी करारा जवाब दिया और याद दिलाया कि इस शादी में खुद चीनी राजदूत आए थे और उन्‍होंने इसे यादगार बताया था।झाओ दाशुआई ने अंबानी परिवार पर भी निशाना साधा और कहा कि अंबानी परिवार को यह पता है कि उन्‍हें यह पैसा पीएम मोदी और क्रोनी कैपटलिज्‍म की वजह से मिला है। चीनी प्रोपेगैंडा फैलाने वाले वॉरियर को अमेरिका के सीनियर फेलो तन्‍वी मदान ने करारा जवाब दिया है। तन्‍वी ने एक्‍स पर लिखा, अजीब। चीनी प्रोपेगैंडा भारत की शाही शादी के पीछे लग गया है जिसमें चीन के राजदूत भी शामिल हुए थे और जिसे एक ऐसे परिवार ने आयोजित किया था जिसके साथ चीनी कंपनियां खुद व्यापार करना चाहती हैं।


इससे पहले भारत में चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने इस शादी में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर शानदार शादी बताया था। चीनी राजदूत ने इस शादी की तस्‍वीरें भी पोस्‍ट की थीं। उन्‍होंने लिखा था-नए कपल और दोहरी खुशी के लिए बहुत शुभकामनाएं। चीनी राजदूत की तस्‍वीरों पर कई तरह के रिएक्‍शन आए हैं। चीनी राजदूत शू चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के सीपीसी कम‍िटी में सदस्‍य हैं।

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Wed, 24 Jul 2024 15:16:32 +0530 Newsdesk
ISRAEL:अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने दिया इजरायल को तगड़ा झटका https://citytoday.co.in/Israel:-International-Court-gave-a-big-blow-to-Israel https://citytoday.co.in/Israel:-International-Court-gave-a-big-blow-to-Israel MPसीटीटुडे । गाजा में इजराइल और हमास के बीच जंग जारी है इस जंग में हजारों बेगुनाह फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हैं लेकिन फिर भी इजराइल राहत शिविरों को निशाना बनाने से बाज नहीं आ रहा है। इन सब के बीच अब अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने इजरायल को तगड़ा झटका दिया है। अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ऑफ जस्टिस ने अपने फैसले में कहा है कि इजरायल का फिलिस्तीनी इलाकों पर कई दशकों से अवैध कब्जा है। इसे जल्द से जल्द खत्म किया जाना चाहिए। इजराइल ने 1967 में अरब देशों को हराने के बाद वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम और गाजा पट्टी पर कब्जा कर लिया था। कोर्ट ने ये टिप्पणी इन्हीं इलाकों को लेकर की है।

अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने कहा-कानूनों का उल्लंघन कर रहा है यहूदी देश

अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने कहा कि इजरायल अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर रहा है। फिलिस्तीनियों के अधिकारों को छीन लिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा इजरायल अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रहा है। उसे इन इलाकों पर इतने सालों तक कब्जा करने के कारण फिलिस्तीनियों को मुआवजा देना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट के पीठासीन न्यायाधीश नवाफ सलाम ने कहा इजरायल को अपना कब्जा छोड़ देना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ऑफ जस्टिस का ये फैसला एक सलाह है। इसे मानने के लिए इजरायल को मजबूर नहीं किया जा सकता। हालांकि संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीनी राजदूत रियाद मंसूर ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कोर्ट का शुक्रिया अदा किया है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस फैसले को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यहूदी लोगों ने फिलिस्तीनियों की जमीन पर कब्जा नहीं किया है।

हमास के साथ जंग के बीच अब हिजुबल्ला और हूति विद्रोही, इजरायल पर हमले कर रहे हैं। तेल अवीव में जबरदस्त विस्फोट हुआ, जिसमें एक की मौत हो गई। कम से कम 10 लोग घायल हुए है। इस दौरान कई इमारतों को भी नुकसान हुआ है। इस हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद कर दिया गया। हूति विद्रोहियों ने कई बार इजरायल को गाजा में हमले बंद करने की चेतावनी दी है। इन हमलों से साफ है कि आने वाले दिनों में वह इजरायल की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा में रफाह क्रॉसिंग का दौरा किया और पूरे गाजा-मिस्र सीमा पर इजरायल के नियंत्रण को बनाए रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि युद्ध विराम समझौता होने के बाद भी मिस्र और गाजा के सीमा पर मौजूद रफाह क्रासिंग पर इजरायल का कब्जा बना रहेगा।

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Sun, 21 Jul 2024 19:58:01 +0530 Newsdesk
चीन में पुल का गिरना: 11 लोगों की मौत, 30 लापता https://citytoday.co.in/Bridge-collapse-in-China:-11-dead,-30-missing https://citytoday.co.in/Bridge-collapse-in-China:-11-dead,-30-missing चीन के उत्तर-पश्चिमी शांक्सी प्रांत में अचानक आई बाढ़ के कारण एक पुल का आंशिक रूप से गिर जाने से कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई है। शनिवार को यह दुखद समाचार सामने आया है।

चीनी सरकारी अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ के अचानक आने से शांग्लुओ शहर के झाशुई काउंटी में स्थित एक पुल ढह गया। इस दुर्घटना में कुछ वाहन पुल के नीचे जिन्कियन नदी में गिर गए हैं।

अभी तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग 30 लोग अभी भी लापता हैं। आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने तत्काल बचाव कार्यों की शुरुआत कर दी है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस हादसे के बाद लोगों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए व्यापक बचाव और राहत प्रयासों का आग्रह किया है।

आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय के अनुसार, बचाव प्रयासों का मार्गदर्शन करने के लिए 736 लोगों, 76 वाहनों, 18 नावों और 32 ड्रोन को भेजा गया है। बचाव दल ने नदी में गिरे पांच वाहनों को बरामद कर लिया है और बचाव अभियान जारी है।

बाढ़ की वजह से पुल का एक हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था, जिससे यह दुर्घटना हुई। अब भी बचाव कार्य जारी है और सरकारी अधिकारियों ने बचाव में जुटे सभी संभावनाओं को बढ़ावा दिया है।

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Sat, 20 Jul 2024 20:20:18 +0530 Newsdesk
America : डोनाल्ड ट्रंप पर हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों का अलर्ट https://citytoday.co.in/America:-Security-agencies-alert-after-attack-on-Donald-Trump https://citytoday.co.in/America:-Security-agencies-alert-after-attack-on-Donald-Trump अमेरिका: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक चुनावी रैली में हुए गोलीबारी के बाद, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ चुकी हैं। इस घटना के संबंध में सूत्रों के मुताबिक, गोलीबारी के समय सुरक्षा में चूक हो गई थी। विशेष जांच के दौरान पाया गया है कि एक स्नाइपर ने सीक्रेट सर्विस एजेंट्स को चकमा देकर ट्रंप के भाषण के बजाय एक स्थान पर छत पर चढ़ गया था और कई गोलियां चलाईं थीं।

सुरक्षा घेरे से बाहर था हमलावर - रिपोर्ट

मामले में एक समाचार एजेंसी के  एक व्यक्ति ने बताया कि हमलावर, जिसने गोलीबारी की थी, रैली की सुरक्षा घेरे के बाहर था। उसने पुलिस और सीक्रेट सर्विस को सचेत करने की कोशिश की, लेकिन वहां कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

आलोचना और जांच की मांग :

इसके बाद, डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने सीक्रेट सर्विस पर आलोचना की, जिनकी जिम्मेदारी राष्ट्रपति की सुरक्षा होती है। उन्होंने आगामी समितियों में इस मामले की जांच करने की मांग की है।

सुरक्षा की समीक्षा की जरूरत :

पूर्व सीक्रेट सर्विस एजेंट ने कहा कि इस घटना के बाद ट्रंप की सुरक्षा की गहन समीक्षा होनी चाहिए और उन्हें भविष्य में भी समर्थन की जरूरत है।

सीक्रेट सर्विस की जांच जारी :

सीक्रेट सर्विस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और बताया कि वे अपने प्रोटोकॉल के अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं। इसके अलावा, पेंसिल्वेनिया राज्य पुलिस ने भी सीक्रेट सर्विस से कई सवाल पूछे हैं।

इस घटना ने संदेह उत्पन्न किया है कि कैसे सुरक्षा घटना से चूक हो सकती है, और आगामी समारोहों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर उपाय अपनाए जाएं।

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Fri, 19 Jul 2024 20:36:33 +0530 Newsdesk
Bangladesh : छात्रों द्वारा सरकारी नौकरियों में लागू कोटा प्रणाली में सुधार की मांग https://citytoday.co.in/Bangladesh-:-Students-demand-improvement-in-quota-system-implemented-in-government-jobs https://citytoday.co.in/Bangladesh-:-Students-demand-improvement-in-quota-system-implemented-in-government-jobs


बांग्लादेश के प्रमुख शहरों में छात्र सरकारी नौकरियों में लागू कोटा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था सरकारी सेवाओं में मेधावी छात्रों के नामांकन को काफी हद तक रोक रही है। ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने फर्स्ट और सेकंड क्लास की सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए चल रहे विरोध प्रदर्शन में अग्रणी भूमिका निभाई है। छात्रों की मांग है कि मौजूदा आरक्षण प्रणाली में सुधार करते हुए प्रतिभा के आधार पर सीटें भरी जाएं।

हालांकि, देखा जाए तो छात्र जिस आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने की मांग कर रहे हैं वह मौजूदा समय में है ही नहीं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के बच्चों और पौत्र-पौत्रियों के लिए 30 फीसदी आरक्षण लागू करने के हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई हुई है।

झड़प के बाद विरोध-प्रदर्शन तेज :

ढाका के विभिन्न स्थानों पर गुरुवार को छात्रों और पुलिस के बीच झड़प के बाद विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए। बीआरएसी विश्वविद्यालय के पास मेरुल बड्डा में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया और पुलिस से भिड़ गए। इस हिंसा में कई लोग घायल हो गए। ढाका ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, सुबह तक पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे इलाके में यातायात बाधित हो गया।

इसके अलावा, छात्रों ने प्रगति सरनी पर बसुंधरा आवासीय क्षेत्र के प्रवेश द्वार को जाम कर दिया और जतराबाड़ी में ढाका-चटगांव राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया। इससे सार्वजनिक परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ। मीरपुर 10 गोल चक्कर और आसपास के इलाकों में भी भारी पुलिस बल तैनात है, कई स्थानीय बाजार और दुकानें बंद हैं।

कई विपक्षी दलों की भी एंट्री :

शुरुआत में छात्रों का प्रदर्शन काफी शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में इसमें विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी समेत कई विपक्षी दलों की भी एंट्री हो गई। बाद में विपक्ष के छात्र संगठनों और सत्ता पक्ष के छात्र संगठनों में हुई झड़पों के बाद प्रदर्शन हिंसक हो गए। सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर छात्रों को भड़काने और प्रदर्शन की आड़ में अपने सियासी हित साधने के आरोप लगाए हैं।

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Thu, 18 Jul 2024 20:57:43 +0530 Newsdesk
Nepal : नेपाल में भूस्खलन से तबाही, चार भारतीयों सहित अब तक 19 लोगों के शव बरामद, राहत&बचाव जारी https://citytoday.co.in/Nepal:-Devastation-caused-by-landslide-in-Nepal,-bodies-of-19-people-including-four-Indians-recovered-so-far,Relief-and-rescue-continues https://citytoday.co.in/Nepal:-Devastation-caused-by-landslide-in-Nepal,-bodies-of-19-people-including-four-Indians-recovered-so-far,Relief-and-rescue-continues
काठमांडू। नेपाल में पिछले हफ्ते भारी बारिश के कारण भूस्खलन से चितवन जिले में तबाही मच गई है। इस भूस्खलन के बाद दो बसें उफनती नदी में बह गईं, जिसमें चार भारतीयों सहित अब तक 19 लोगों के शव बरामद किए गए हैं। घटना के समय 54 लोग मुगलिंग रोड पर यात्रा कर रहे थे, जिनमें से तीन लोग घटना के तुरंत बाद तैरकर सुरक्षित बाहर आ गए।

पहली बस, जो बीरगंज से काठमांडू की ओर जा रही थी, उसमें सात भारतीय नागरिकों सहित 24 लोग सवार थे। दूसरी बस, जो काठमांडू से गौर जा रही थी, उसमें 30 लोग यात्रा कर रहे थे। भूस्खलन के कारण दोनों बसें त्रिशुली नदी में गिर गईं।

स्थानीय अधिकारी बचाव कार्यों के लिए बिहार और यूपी में भारतीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, गुरुवार को भी खोज और बचाव कार्य जारी रहा। बुधवार को 27 वर्षीय भारतीय नागरिक विवेक कुमार का शव बरामद हुआ। इससे पहले, 28 वर्षीय ऋषि पाल शाह, 30 वर्षीय जय प्रकाश ठाकुर, और 23 वर्षीय सज्जाद अंसारी के शव भी बरामद किए गए थे।

बचाव कार्यों में हाई क्वालिटी वाले सोनार कैमरे, शक्तिशाली चुंबक, और जल ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है। दोनों बसों के शव त्रिशुली नदी में 100 किलोमीटर तक बह गए हैं। पहाड़ी इलाका होने के कारण नेपाल की नदियां तेज बहती हैं और मानसूनी बारिश ने जलमार्गों को मटमैले भूरे रंग में बदल दिया है, जिससे मलबे को देखना मुश्किल हो गया है।

गौरतलब है कि जून से सितंबर तक नेपाल में मानसून के दौरान भारी बारिश होती है, जिससे अक्सर भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। इस बार भी, भारी बारिश के कारण जलमार्गों में बाढ़ आ गई है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों के साथ बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। राहत-बचाव कार्य अभी भी जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही और भी लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकेगा।

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Thu, 18 Jul 2024 20:41:20 +0530 Newsdesk
न्यूजीलैंड में मिली दुनिया की सबसे दुर्लभ व्हेल, दांतों के आधार पर रखा गया है नाम https://citytoday.co.in/Worlds-rarest-whale-found-in-New-Zealand,-named-after-its-teeth https://citytoday.co.in/Worlds-rarest-whale-found-in-New-Zealand,-named-after-its-teeth सिटी टुडे । न्यूजीलैंड के समुद्र तट पर वैज्ञानिकों को एक मरी हुई व्हेल मिली है, जो दुनिया की सबसे दुर्लभ प्रजातियों में से एक है। यह व्हेल इतनी गहराई में रहती है कि इसे कभी भी किसी ने जिंदा नहीं देखा है। व्हेल की चोंच पांच मीटर लंबी है और वैज्ञानिकों ने इसे कोल्ड स्टोरेज में रखा है ताकि इसकी और जांच की जा सके। अब तक केवल छह नमूने ही पाए गए हैं।

यह दुर्लभ व्हेल 4 जुलाई को दक्षिणी ओटागो प्रांत में एक नदी के मुहाने के पास मिली थी। वैज्ञानिकों की जांच के अनुसार, यह कुदाल-दांतेदार व्हेल है, जिसका नाम इसके दांतों के आकार के कारण रखा गया है। इसकी पुष्टि के लिए डीएनए जांच की जा रही है।

न्यूजीलैंड के संरक्षण विभाग के तटीय ओटागो संचालन प्रबंधक, गेबे डेविस ने बताया कि 1800 के दशक के बाद से दुनिया भर में केवल छह नमूने ही दस्तावेजीकृत किए गए हैं और उनमें से एक को छोड़कर सभी न्यूजीलैंड से थे। यह दुर्लभ व्हेल प्रजाति बेहद कम दिखाई देती है और इस प्रजाति की गहराई में रहने वाली प्रकृति के कारण इसके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।

व्हेल का भोजन और जीवनशैली :

संरक्षण विभाग के तकनीकी सलाहकार के अनुसार, इस व्हेल प्रजाति के बारे में जानकारी बहुत कम है। यह अवसर वैज्ञानिकों को इस दुर्लभ प्रजाति के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने का मौका देता है, जैसे कि यह जानवर कहां रहता है और क्या खाता है। वैज्ञानिकों ने समुद्र तट पर मिलने वाले इस शव का पूरी तरह निरीक्षण किया और उनका मानना है कि यह नर कुदाल-दांतेदार व्हेल का शव है। हालांकि, इसकी पूरी तरह से पुष्टि अभी बाकी है।

कोल्ड स्टोरेज में रखा गया शव :

गेबे डेविस ने आगे बताया कि व्हेल के शरीर को कोल्ड स्टोरेज में रखा गया है और आनुवंशिक नमूने न्यूजीलैंड सिटासियन टिशू आर्काइव के क्यूरेटर को भेजे गए हैं। डीएनए जांच और अंतिम पहचान की पुष्टि होने में कई हफ्ते या महीने लग सकते हैं।

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Wed, 17 Jul 2024 21:45:51 +0530 Newsdesk
आतंकी हमले में पाकिस्तान में 8 सुरक्षाकर्मियों की मौत, सेना ने इलाके को सील किया https://citytoday.co.in/8-security-personnel-killed-in-terrorist-attack-in-Pakistan,-army-sealed-the-area https://citytoday.co.in/8-security-personnel-killed-in-terrorist-attack-in-Pakistan,-army-sealed-the-area

सिटी टुडे : पाकिस्तान में आतंकी हमले जारी हैं, जिसमें उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के एक सैन्य अड्डे पर हमला हुआ है। इस हमले में 8 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई है। यह हमला इस्लामवादी आतंकवादियों की ओर से किया गया था।

घटना के बाद पाकिस्तानी सेना ने इस इलाके को सील कर दिया है और गोलाबारी जारी की है। इस हमले में एक आत्मघाती ने विस्फोटकों से भरे एक वाहन को सैन्य अड्डे की दीवार पर फेंक दिया था।

पहले भी पाकिस्तान के बन्नू शहर में एक भीषण विस्फोट हुआ था, जिससे कई इमारतें और दुकानें नुकसान उठा रही हैं। सुरक्षा बलों ने उत्तरी वजीरिस्तान के जनजातीय क्षेत्र की सीमा पर ऑपरेशन के दौरान बन्नू में बेस को निशाना बनाने वाले 10 हमलावरों को मार गिराया था। इस इलाके को इस्लामी उग्रवाद के केंद्र के रूप में जाना जाता है और यह अफगानिस्तान सीमा के करीब है।

पाकिस्तानी सेना ने इस हमले के बाद तुरंत कार्रवाई की और कई निर्दोष लोगों की जान बचाई गई। इस हमले में सात सेना के जवान और एक अर्धसैनिक बल का जवान भी शामिल था ।

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Tue, 16 Jul 2024 19:48:59 +0530 Newsdesk
Russian Army:रूस की सेना में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर पुतिन ने दिया आश्वासन https://citytoday.co.in/Russian-Army:-Asabath-gave-regarding-friendly-Indian-citizens-in-Russian-army https://citytoday.co.in/Russian-Army:-Asabath-gave-regarding-friendly-Indian-citizens-in-Russian-army Citytoday: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालही में रूसी दौरे के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की, जहां उन्होंने रूसी सेना में फंसे हुए भारतीय नागरिकों के मुद्दे को उठाया। पुतिन ने मुलाकात के दौरान आश्वासन दिया कि रूस उन भारतीय नागरिकों की मदद करेगा जो सेना में फंसे हैं।

इसी दौरान एक वीडियो संदेश में एक फंसे हुए भारतीय नागरिक ने बताया कि उनके दल के 15 सदस्यों में से 13 की मौत हो चुकी है, जबकि केवल दो लोग बचे हैं। उन्होंने अपील की है कि पुतिन से मुलाकात के बाद उनकी वापसी की जाए।

इस घटना के संबंध में पश्चिम बंगाल के कलिमपोंग के नागरिक उर्गेन तमांग ने बताया कि उन्हें धोखे से रूस ले जाया गया और फिर सेना में भर्ती किया गया, जहां उन्हें यूक्रेन के साथ संघर्ष में शामिल कर दिया गया। उर्गेन ने अपील की है कि वे और उनके साथियों को जल्दी से वापस लाया जाए ताकि वे अपने देश वापस जा सकें।वही कलिमपोंग के प्रधान रबी प्रधान ने बताया कि उन्होंने उर्गेन से बातचीत की है और उनकी मदद के लिए विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है। उन्होंने इस मामले को जरूरी मदद के लिए मॉस्को में भारतीय दूतावास के साथ उठाया गया है।

बतादे कि,उर्गेन तमांग ने वीडियो मैसेज में कहा, "मैं रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसा हूं। यहां 15 गैर-रूसी थे, लेकिन 13 मारे गए हैं। केवल दो बचे हैं मैं और श्रीलंका का एक व्यक्ति है। मुझे और अन्य भारतीयों को रिहा करवाने की कृपया करें। जय हिंद, जय भारत।"

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Sat, 13 Jul 2024 20:24:18 +0530 Newsdesk
भारत रुकवा सकता है रूस और यूक्रेन के बीच जंग, मोदी और पुतिन की दोस्ती देख बदल गए अमेरिका के सुर https://citytoday.co.in/India-can-stop-the-war-between-Russia-and-Ukraine-Americas-tone-changed-after-seeing-the-friendship-between-Modi-and-Putin https://citytoday.co.in/India-can-stop-the-war-between-Russia-and-Ukraine-Americas-tone-changed-after-seeing-the-friendship-between-Modi-and-Putin नई दिल्ली: भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा ने अमेरिका में उत्पन्न चर्चा को बढ़ावा दिया है, जहां व्हाइट हाउस ने उनके बीच हो रहे बातचीत की संभावना जताई है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि भारत अपने अच्छे संबंध के कारण रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने में सक्षम हो सकता है। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव ने बताया कि भारत के पास रूस को युद्ध रोकने की क्षमता है और उसे इस दिशा में प्रेरित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने रूस की यात्रा के दौरान मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की, जिसमें दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध के मामले पर विचार-विमर्श किया। पीएम मोदी ने युद्ध के मैदान में शांति वार्ता की अपील की और कहा कि वर्तमान समय में युद्ध का कोई स्थान नहीं है।

इस दौरान, भारत-रूस के बीच मंगलवार को हुए 22वें शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने भारतीय राजनीतिक परंपराओं के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध के मुद्दे को भी उठाया।

यह रूसी यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारत और रूस के राजनीतिक संबंधों में नए आयाम और संदेशों की समझ प्राप्त हो सकती है।

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Wed, 10 Jul 2024 14:38:54 +0530 Newsdesk
गाजा में इजराइली हमलों के बाद 90% लोगों ने छोड़े अपने घर: संयुक्त राष्ट्र https://citytoday.co.in/90-people-left-their-homes-after-Israeli-attacks-in-Gaza:-United-Nations https://citytoday.co.in/90-people-left-their-homes-after-Israeli-attacks-in-Gaza:-United-Nations  City today :गाजा में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी गंभीर है। इसके अनुसार, हाल ही में शुरू हुई 13 स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं, जिनमें दो अस्पताल, दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और नौ चिकित्सा केंद्र शामिल हैं। गाजा में कुल 36 अस्पतालों में से 13 केवल आंशिक रूप से काम कर रहे हैं। यूएन ने भी चेतावनी दी है कि हर दस में से नौ लोगों को विस्थापित होने का खतरा है, और विस्थापन की नई लहरें उन लोगों को अधिक प्रभावित कर रही हैं, जिन्होंने पहले भी विस्थापित होने का सामना किया है।

गाजा में आपूर्ति की कमी और विस्थापित लोगों की समस्याएं बढ़ रही हैं। उत्तरी गाजा में 80,000 लोगों के लिए आश्रय नहीं है, और कई लोग ठोस कचरे और मलबे के बीच सोते हैं, जहां उनके पास गद्दे या कपड़े भी नहीं हैं। इसके अलावा, गाजा में अन्य सामग्रियों और ईंधन की भी कमी है, जिससे मानवीय कार्यों को जारी रखना और स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरों को कम करना मुश्किल हो रहा है।

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Tue, 09 Jul 2024 19:30:35 +0530 Newsdesk
Parliamentary elections in France:ले पेन और मैक्रॉन को झटका,वामपंथी गठबंधन ने बाजी मारी  https://citytoday.co.in/Parliamentary-elections-in-France:-Shock-for-Le-Pen-and-Macron,-leftist-alliance-wins https://citytoday.co.in/Parliamentary-elections-in-France:-Shock-for-Le-Pen-and-Macron,-leftist-alliance-wins  रविवार को हुए फ्रांस संसदीय चुनाव के बाद फ्रांस को संभावित राजनीतिक गतिरोध का सामना करना पड़ा, किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला जिसके कारण यहां त्रिशंकु संसद बनी, हालांकि सर्वेक्षणकर्ता वामपंथी गठबंधन 198 सीटों के साथ पहले स्थान पर रहा। लेकिन किसी भी समूह को बहुमत नहीं मिला।मतदाताओं ने मरीन ले पेन की राष्ट्रवादी, यूरोसेप्टिक नेशनल रैली  के लिए एक बड़ा झटका दिया, जिसके बारे में जनमत सर्वेक्षणों ने भविष्यवाणी की थी कि वह दूसरे दौर के मतदान में जीत हासिल करेगी, लेकिन सर्वेक्षणकर्ताओं के अनुमान के अनुसार तीसरे स्थान पर रही। नतीजे मध्यमार्गी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के लिए भी एक झटका था, जिन्होंने पिछले महीने यूरोपीय संसद चुनावों में आरएन के हाथों हार के बाद राजनीतिक परिदृश्य को स्पष्ट करने के लिए आकस्मिक चुनाव का आह्वान किया था। उनका अंत बेहद खंडित संसद के साथ हुआ, जिससे यूरोपीय संघ और विदेशों में फ्रांस की भूमिका कमजोर हो जाएगी और किसी के लिए भी घरेलू एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाएगा।
चुनाव से संसद तीन बड़े समूहों में विभाजित हो जाएगी - वामपंथी, मध्यमार्गी और धुर दक्षिणपंथी - जिनके मंच बेहद अलग होंगे और साथ मिलकर काम करने की कोई परंपरा नहीं होगी। वामपंथी न्यू पॉपुलर फ्रंट (एनएफपी) गठबंधन, जो ईंधन और भोजन जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को सीमित करना चाहता है, न्यूनतम वेतन को शुद्ध 1,600 यूरो (1,732 रु) प्रति माह तक बढ़ाना चाहता है, सार्वजनिक क्षेत्र के श्रमिकों के लिए वेतन बढ़ाना और संपत्ति कर लगाना चाहता है। कट्टर वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलेनचॉन ने कहा, लोगों की इच्छा का सख्ती से सम्मान किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति को न्यू पॉपुलर फ्रंट को शासन करने के लिए आमंत्रित करना चाहिए।

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Mon, 08 Jul 2024 19:28:41 +0530 Newsdesk
हज करने मक्का गए 90 भारतीयों की भीषण गर्मी से मौत,भीषण गर्मी से 645 से अधिक लोगों की गई जान https://citytoday.co.in/90-Indians-who-went-to-Mecca-for-Hajj-died-due-to-extreme-heat-more-than-645-people-lost-their-lives-due-to-extreme-heat https://citytoday.co.in/90-Indians-who-went-to-Mecca-for-Hajj-died-due-to-extreme-heat-more-than-645-people-lost-their-lives-due-to-extreme-heat सऊदी अरब में भीषम गर्मी की वजह से हज यात्रा करने गए तीर्थयात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मक्का में अब तक 645 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें सबसे बड़ा कारण गर्मी है।जिसमें कम से कम 90 भारतीय शामिल हैं.  दो दिन पहले ख़बर आई थी कि गर्मी के बीच मक्का में 550 लोगों की मौत हुई, लेकिन तब यह ख़बर सामने नहीं आ पाई थी कि इसमें भारतीयों की संख्या कितनी थी।

बता दें कि इस साल दुनिया भर से लगभग 1.8 मिलियन लोग तीर्थयात्रा में शामिल हुए। हज यात्रा शुक्रवार(14.6.2024) को शुरू हुई और हर साल लाखों मुसलमान मक्का जाते हैं, जहाँ वे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। यह यात्रा बुधवार को समाप्त हो गई। हज यात्रा इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है, और सभी साधन संपन्न मुसलमानों को अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार इस धार्मिक दायित्व को पूरा करने की मान्यता है।एक सऊदी अध्ययन से पता चला है कि तीर्थयात्रा क्षेत्र में तापमान में हर दशक में 0.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। 2023 में हज के दौरान 200 से अधिक तीर्थयात्रियों की मृत्यु हुई थी और 2000 से अधिक व्यक्ति गर्मी से संबंधित तनाव से पीड़ित हुए। पिछले साल तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया था।

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Thu, 20 Jun 2024 18:07:55 +0530 Newsdesk
खालिस्तानियों ने इटली में तोड़ा महात्मा गांधी की प्रतिमा https://citytoday.co.in/Khalistanis-broke-the-statue-of-Mahatma-Gandhi-in-Italy https://citytoday.co.in/Khalistanis-broke-the-statue-of-Mahatma-Gandhi-in-Italy इटली में खालिस्तानियों ने महात्मा गांधी की प्रतिमाा को क्षतिग्रस्त कर दिया है। यह घटना जी7 बैठक के लिए प्रधानमंत्री मोदी की इटली यात्रा से कुछ दिन पहले हुई है। इस दौरान पीएम मोदी महात्मा गांधी की इस प्रतिमा का उद्घाटन करने वाले थे। खालिस्तानियों ने महात्मा गांधी की इस प्रतिमा की आधारशिला पर हरदीप सिंह निज्जर के समर्थन में नारे भी लिखे हैं। हालांकि, इटली के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने रिकॉर्ड समय में इस प्रतिमा को साफ कर दिया है।

भारत ने इस घटना का सख्त विरोध किया है और इटली सरकार से इस मामले में माँग की है कि दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए. विदेश मंत्री ने कहा है कि इस घटना से भारतीय जनता बहुत दुखी है. यह घटना एक बार फिर से खालिस्तानी आतंकवाद के ख़तरे को उजागर करती है. खालिस्तानी आतंकवाद का लक्ष्य भारत में अशांति फ़ैलाना है.

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Wed, 12 Jun 2024 20:24:07 +0530 Newsdesk
जापान में महसूस हुए भूकंप के झटके https://citytoday.co.in/Earthquake-tremors-felt-in-Japan https://citytoday.co.in/Earthquake-tremors-felt-in-Japan टोक्यो, सिटी टुडे। जापान के कोशिमा से 152 किलोमीटर एसएसई में शुक्रवार की देर रात भूकंप के मध्यम स्तर के झटके महसूस किये गये।जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.2 मापी गयी. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार अंतरराष्ट्रीय समयानुसार 2:37 बजे भूकंप महसूस की गई। भूकंप का केंद्र 28.94 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 131.08 डिग्री पूर्वी देशांतर तथा जमीन की सतह से 7.6 किलोमीटर की गहराई पर रहा।

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Sat, 01 Jun 2024 17:04:58 +0530 Newsdesk
ब्रिटेन में आम चुनाव चार जुलाई को: ऋषि सुनक https://citytoday.co.in/General-elections-in-Britain-on-4th-July-Rishi-Sunak https://citytoday.co.in/General-elections-in-Britain-on-4th-July-Rishi-Sunak ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने आगामी चार जुलाई को देश में आम चुनाव कराये जाने की घोषणा की है। सुनक ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा , “आज मैंने संसद को भंग करने का अनुरोध महामहिम सम्राट से किया। महामहिम ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। देश में 04 जुलाई को आम चुनाव होंगे।”प्रधानमंत्री की घोषणा नए आर्थिक आंकड़ों के आने के कुछ घंटों बाद हुई है जिससे पता चलता है कि देश में मुद्रास्फीति तेजी से गिरकर 2.3 प्रतिशत हो गई है, जो लगभग तीन वर्षों में सबसे निचला स्तर पर है। सत्तारुढ़ कंजर्वेटिव पार्टी इसे एक सुखद उपलब्धि मान रही है।जनवरी 2023 में प्रधानमंत्री की पांच प्रतिज्ञाओं में मुद्रास्फीति को आधा करना शामिल था, जो 2022 के अंत में 11 प्रतिशत हो गया था।सुनक ने कहा कि नवीनतम आंकड़े अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख क्षण को चिह्नित करते हैं और उज्जवल भविष्य दिखलाते हैं।

सुनक की घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर ने कहा कि यह एक ऐसा क्षण है जिसकी देश को आवश्यकता है और वह इसका इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि “देश का भविष्य आपके हाथों में है। एक साथ मिलकर हम अराजकता को रोक सकते हैं, भविष्य सकते हैं और देश का पुनर्निर्माण शुरू कर सकते हैं और अपने देश को बदल सकते हैं।”लिबरल डेमोक्रेट्स के नेता एड डेवी ने कहा कि यह सरकार संपर्क से बाहर है। इसके पास बहाने नहीं हैं और यह समय से बाहर है और इस कंजर्वेटिव सरकार को कार्यालय से बाहर करने का समय आ गया है।ब्रिटिश संसद 30 मई को औपचारिक रूप से भंग हो जाएगी, और चुनावी अभियान 04 जुलाई को मतदान के दिन तक चलेगा।

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Thu, 23 May 2024 17:13:39 +0530 Newsdesk
चीन में भूकंप के झटके महसूस किए गए https://citytoday.co.in/Earthquake-tremors-were-felt-in-China https://citytoday.co.in/Earthquake-tremors-were-felt-in-China चीन में ताइवान के हुलिएन काउंटी के समुद्री क्षेत्र के आसपास भूकंप के मध्यम झटके महसूस किए गए ।भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर पांच मापी गई ।चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (सीईएनसी) के अनुसार द्वीप देश में हुलिएन काउंटी के समुद्री क्षेत्र के आसपास स्थानीय समयानुसार शाम 3:30 के आस पास भूकंप के मध्यम झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र 23.80 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 121.74 डिग्री पूर्वी देशांतर तथा सतह से 10 किलोमीटर की गहराई पर रहा। अभी तक किसी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई  है।

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Wed, 22 May 2024 19:26:38 +0530 Newsdesk
राष्ट्रपति रायसी, विदेश मंत्री अब्दुल्लाहियन की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत https://citytoday.co.in/President-Raisi-Foreign-Minister-Abdullahiyan-die-in-helicopter-crash https://citytoday.co.in/President-Raisi-Foreign-Minister-Abdullahiyan-die-in-helicopter-crash ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी और विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन की रविवार को हुई एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई है। राष्ट्रपति रायसी और विदेश मंत्री अब्दुल्लाहियन को ले जा रहा हेलीकॉप्टर रविवार को पूर्वी अजरबैजान के ईरानी प्रांत के घने जंगली इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
हेलीकॉप्टर में सवार होने वालों में राष्ट्रपति रायसी, विदेश मंत्री अब्दुल्लाहियन, ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत के गवर्नर मालेक रहमती और पूर्वी अजरबैजान प्रांत में इस्लामी क्रांति के नेता के प्रतिनिधि अयातुल्ला मोहम्मद अली आले-हाशेम के साथ कई अन्य लोग शामिल थे।

राष्ट्रपति रायसी अजरबैजान गणराज्य के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ एक बांध का उद्घाटन करने के लिए रविवार सुबह पूर्वी अजरबैजान प्रांत की यात्रा की थी। यह दुर्घटना उस समय हुई जब राष्ट्रपति रायसी वापस लौट रहे थे और घना कोहरा छाये रहने से हेलिकॉप्टर की हार्ड लैंडिंग हुई।हेलीकॉप्टर सुंगुन नामक तांबे की खदान के करीब दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत में जोल्फा और वरजक़ान के बीच स्थित है और तबरीज़ शहर से लगभग 70 किमी से 100 किमी दूर है, जो ईरान के सबसे बड़े शहरों में से एक है और वह शहर भी है जहाँ ईरान के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री जा रहे थे।
हेलिकॉप्टर की दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद रविवार दोपहर से 40 अलग-अलग बचाव दल जंगली और पहाड़ी इलाके में भेजे गए हैं।

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Mon, 20 May 2024 18:20:59 +0530 Newsdesk
रिहर्सल के दौरान हवा में टकराए दो हेलिकॉप्टर,10 लोगों की मौत https://citytoday.co.in/Two-helicopters-collided-in-mid-air-during-rehearsal-10-people-died https://citytoday.co.in/Two-helicopters-collided-in-mid-air-during-rehearsal-10-people-died  मलेशिया में नौसेना के एक समारोह के लिए अभ्यास के दौरान हवा में दो हेलिकॉप्टर टकराकर क्रैश हो गए. मलेशियाई नौसेना के दोनों हेलिकॉप्टर रॉयल मलेशियन नेवी सेलिब्रेशन के लिए अभ्यास कर रहे थे. बताया जा रहा है कि दोनों हेलिकॉप्टर में कम से कम 10 क्रू मेंबर सवार थे.सभी पीड़ितों की घटनास्थल पर ही मौत की पुष्टि कर दी गई और उन्हें पहचान के लिए लुमुट आर्मी बेस अस्पताल भेज दिया गया.

बता दे मलेशिया नौसेना ने कहा कि दुर्घटना में शामिल विमान में सभी 10 चालक दल के सदस्य थे. सुबह 9.32 बजे पश्चिमी राज्य पेराक के लुमुट नौसैनिक अड्डे पर यह हादसा हआ है. नौसेना ने बताया कि 'सभी पीड़ितों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई  और उन्हें पहचान के लिए लुमुट आर्मी बेस अस्पताल भेज दिया गया.

 स्थानीय मीडिया में जारी की गई फुटेज के मुताबिक एक स्टेडियम में क्रैश होकर गिरने से पहले दोनों हेलिकॉप्टर आपस में टकराए. हेलिकॉप्टर टकराने का वीडियो अब तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.मलेशियन फ्री प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मलेशियन नेवी की 90वीं सालगिरह पर रॉयल सेलिब्रेशन परेड के लिए रिहर्सल चल रहा था. इसी बीच HOM (M503-3) हेलिकॉप्टर फेनेक हेलिकॉप्टर के रोटर से टकरा गया. हादसे के बाद फेनेक हेलिकॉप्टर पास के ही एक स्विमिंग पूल में जाकर गिर गया, वहीं होम हेलिकॉप्टर लुमुत नौसेना बेस के स्टेडियम के पास क्रैश हो गया. यह टक्कर क्यों और कैसे हुई, इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है. मलेशियाई नेवी ने कहा है कि पूरे मामले की जांच के लिए उनकी एक टीम काम कर रही है. 

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Tue, 23 Apr 2024 21:33:20 +0530 Newsdesk
बलूचिस्तान में हुआ दर्दनाक सड़क हादसा 17 तीर्थयात्रियों की मौत https://citytoday.co.in/Tragic-road-accident-in-Balochistan-17-pilgrims-died https://citytoday.co.in/Tragic-road-accident-in-Balochistan-17-pilgrims-died  पाकिस्तान के  बलूचिस्तान  सीमावर्ती शहर के पास तीर्थयात्रियों से भरी एक बस गहरी खाई में गिर गई, जिससे कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई और 38 अन्य घायल हो गए. पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. तीर्थयात्री बलूचिस्तान के खुजदार जिले में सुदूर मुस्लिम सूफी दरगाह शाह नूरानी जा रहे थे, तभी बुधवार को हब शहर में उनकी बस खाई में गिर गई. जिस जगह पर हादसा हुआ, वह कराची से करीब 100 किलोमीटर दूर है.हादसे के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। राहत और बचाव के काम में पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद भी ली। पुलिस की तरफ से आज हादसे के बारे में जानकारी दी गई। 

इसी बिच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन राजा नकवी ने घटना पर संवेदना व्यक्त की और कहा कि ऐसा लगता है कि चालक ने  मोड़ पर नियंत्रण खो दिया जिससे बस खाई में जा गिरी. सभी यात्री सिंध प्रांत के थट्टा शहर के रहने वाले थे. नकवी ने कहा, ''वाहन बुधवार को दोपहर करीब दो बजे थट्टा से निकला और बुधवार रात करीब आठ बजे दुर्घटना का शिकार हो गया.

जानकारी के मुताबिक  एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने कहा कि मृतकों और घायलों को कराची के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है . वही शवों की पहचान की गई, जिनमें से कुछ एक ही परिवार के थे. खराब सड़कें, सुरक्षा जागरूकता की कमी और यातायात नियमों की घोर उपेक्षा अक्सर पाकिस्तान में घातक दुर्घटनाओं का कारण बनती है.

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Thu, 11 Apr 2024 17:20:55 +0530 Newsdesk
जर्मनी ने भांग के उपयोग को किया वैध https://citytoday.co.in/Germany-legalized-the-use-of-cannabis https://citytoday.co.in/Germany-legalized-the-use-of-cannabis
जर्मनी में एक नए कानून के तहत 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को 25 ग्राम तक भांग रखने की अनुमति होगी.हालांकि, लोगों को सुबह 7 बजे से लेकर रात के 8 बजे के बीच स्कूलों, खेल केंद्रों के सामने या पैदल यात्री क्षेत्रों में मारिजुआना (भांग) पीने पर रोक रहेगी।
बता दें, सोशल डेमोक्रेटिक चांसलर (SPD) ओलाफ स्कोल्ज़ की सरकार का यह प्रमुख कानून 23 फरवरी, 2024 को संसद में काफी आलोचना और बहस के बाद 226 के मुकाबले 407 वोटों से पारित हुआ था.

अब सोमवार से कुछ शर्तों के साथ भांग को वैध बनाने वाला जर्मनी तीसरा यूरोपीय संघ देश बन जाएगा. इससे पहले बर्लिन लक्ज़मबर्ग और माल्टा ने अपने यहां भांग को उपयोग को मंजूरी दी थी.

इस नए कानून को लागू करके सरकार काला बाजारी को रोकना चाहती है और दूषित भांग का सेवन करने वालों को इससे बचाना चाहती है. वहीं स्वास्थ समूहों ने इस पर चिंता जताते हुए कहां कि इस कानून से युवा में इसका उपयोग बढ़ सकता है और उनके स्वास्थ को जोखिम पहुंच सकता है. देश के स्वास्थ मंत्री कार्ल लॉटरबैक ने कहा कि भांग का सेवन हानिकारक हो सकता है. सरकार ने इस कानून को लागू करने के साथ इससे होने वाले जोखिमों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कई सहायता अभियान का वादा किया है. इसके अलावा सरकार ने 18 साल से कम उम्र बच्चों, स्कूल और खेल के मैदानों से 100 मीटर की दूरी तक भांग पर प्रतिबंध लगाया है.

 

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Mon, 01 Apr 2024 19:04:30 +0530 Newsdesk
भारत के खिलाफ चीन ने फिर की गुस्ताखी अरुणाचल प्रदेश में बदले 30 जगहों के नाम https://citytoday.co.in/China-again-has-the-audacity-against-India-changed-the-names-of-30-places-in-Arunachal-Pradesh https://citytoday.co.in/China-again-has-the-audacity-against-India-changed-the-names-of-30-places-in-Arunachal-Pradesh पूर्वोत्तर राज्य अनुराचल प्रदेश को लेकर चीन ने एक बार फिर हिमाकत की है,इस बार उसने अनुराचल प्रदेश 30 जगहों के चाइनीज नाम जारी किये है PM मोदी के दौरे के बाद से ड्रैगन बौखलाया हुआ है,


 आपको बता दे चीन की साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक दो दिन पहले 30 मार्च 2024  को वहां के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने खास जानकारी साझा की है.  पोस्ट में बताया गया है कि चीन की सरकार भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश पर अपना कब्जा जमाता  है. पोस्ट के मुताबिक चीन इस क्षेत्र को जांगनान के रूप में दर्शाता है, जो तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र के अधीन आता है.


रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने जिन 30 जगहों के नाम बदले हैं. इसमें 11 जिले, 12 पहाड़, 1 झील, 1 पहाड़ी दर्रा और जमींन का एक बड़ा हिस्सा शामिल है. हालांकि हमेशा  भारत साफ कर चुका है कि अरूणाचल प्रदेश चीन का नहीं बल्कि भारत का हिस्सा हैं. इसलिए चीन इस तरह की कोई गुस्ताखी ना करें. 

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Mon, 01 Apr 2024 18:02:19 +0530 Newsdesk
जंग के बीच पुतिन का बड़ा आदेश,150000 रूसी नागरिकों को दी जाएगी आर्मी की ट्रेनिंग https://citytoday.co.in/Putins-big-order-amid-war-150000-Russian-citizens-will-be-given-army-training https://citytoday.co.in/Putins-big-order-amid-war-150000-Russian-citizens-will-be-given-army-training रूस में सभी पुरुषों को 18 वर्ष की आयु से एक वर्ष की अनिवार्य सैन्य सेवा करनी होती है, या उच्च शिक्षा के दौरान समकक्ष प्रशिक्षण प्राप्त करना होता है. जुलाई में, रूस की संसद के निचले सदन ने सैन्य सेवा के लिए अधिकतम आयु 27 से बढ़ाकर 30 वर्ष करने के लिए मतदान किया था। यह नया कानून 1 जनवरी, 2024 से लागू हुआ है. जिसके तहत वार्षिक वसंत ऋतु में सैन्य सेवा के लिए 150,000 नागरिकों को बुलाया जाएगा और उन्हें आर्मी की ट्रेनिंग दी जाएगी यह जानकारी क्रेमलिन की वेबसाइट पर रविवार को प्रकाशित एक दस्तावेज़ में दी गई है.

आपको बता दे रूस में अनिवार्य सैन्य सेवा लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, जहां कई पुरुष वर्ष में दो बार होने वाली भर्ती अवधि के दौरान सैन्य सेवा से बचने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं.

कानूनी तौर पर सैन्य सेवा में भर्ती हुए लोगों को रूस के बाहर लड़ने के लिए तैनात नहीं किया जा सकता है. 2022 में, जब यूक्रेन में लड़ने के लिए 300,000 से अधिक पूर्व सैन्य प्रशिक्षित लोगों को सीमित रूप से जुटाया गया था, तब भी सैन्य सेवा में भर्ती हुए लोगों को इससे छूट दी गई थी - हालाँकि कुछ को गलती से मोर्चे पर भेज दिया गया था.

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Sun, 31 Mar 2024 19:46:44 +0530 Newsdesk
World Happiness Report 2023: फिनलैंड सबसे खुशहाल देश https://citytoday.co.in/World-Happiness-Report-2023 https://citytoday.co.in/World-Happiness-Report-2023 दुनिया के महाशक्तिशाली देश खुशहाली में पीछे हैं। अमेरिका,चीन और भारत जैसे तमाम देशों को खुशहाली में पीछे छोड़ने वाले फिनलैंड ने सातवीं बार पहला स्थाना हासिल किया है। मतलब फिनलैंड दुनिया का सबसे खुशहाल देश है। 2024 के लिए दुनिया के खुशहाल देशों की रैंकिंग वाली लिस्ट आ गई है। संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक विश्व खुशहाली रिपोर्ट बुधवार को प्रकाशित हुई।

इस वार्षिक विश्व खुशहाली रिपोर्ट में फिनलैंड लगातार सातवें साल दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना रहा। खुशहाली रैंकिंग में भारत पिछले साल की तरह ही 126वें स्थान पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे खुशहाल देशों में अब दुनिया का कोई भी सबसे बड़ा देश शामिल नहीं है।

 टॉप 10 देशों में केवल नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया की आबादी 15 मिलियन से अधिक है। पूरे टॉप 20 देशों में केवल कनाडा और यूके की आबादी 30 मिलियन से अधिक है। साल 2006-10 के बाद से हैप्पीनेस इंडेक्स में सबसे तेज गिरावट अफगानिस्तान, लेबनान और जॉर्डन में देखी गई, जबकि पूर्वी यूरोपीय देशों सर्बिया, बुल्गारिया और लातविया में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है।हैप्पीनेस रैंकिंग व्यक्तियों के जीवन संतुष्टि के स्व-मूल्यांकन के साथ-साथ प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद, सामाजिक समर्थन, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, स्वतंत्रता, उदारता और भ्रष्टाचार पर आधारित है।

फिनलैंड में हेलसिंकी विश्वविद्यालय में हैप्पीनेस रिसर्चर जेनिफर डी पाओला ने बताया कि फिनलैंड में रहने वाले लोगों का प्रकृति से घनिष्ठ संबंध और स्वस्थ कार्य-जीवन संतुलन उनके जीवन की संतुष्टि में महत्वपूर्ण स्थान है। विश्व खुशहाली रैंकिंग में फिनलैंड के बाद डेनमार्क, आइसलैंड और स्वीडन का नंबर आता है। नॉर्डिक देशों ने 10 सबसे खुशहाल देशों में अपना स्थान बरकरार रखा है। इस रैंकिंग में तालिबान के राज वाला अफगानिस्तान सबसे नीचे है।

विश्व खुशहाली रिपोर्ट प्रकाशित होने के एक दशक से अधिक समय तक संयुक्त राज्य अमेरिका और जर्मनी टॉप 20 सबसे खुशहाल देशों में थे। मगर यह पहली बार है, जब नई रैंकिंग में अमेरिका 23वें और जर्मनी 24वें स्थान पर आ गए हैं। कोस्टा रिका और कुवैत ने 12 और 13वें स्थान पर टॉप 20 में एंट्री मार ली है।

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Wed, 20 Mar 2024 13:55:03 +0530 Newsdesk
Donald Trump: ट्रम्प ने फेसबुक के मुकाबले चीन के टिकटॉक की तारीफ की https://citytoday.co.in/Trump-praised-Chinas-TikTok-compared-to-Facebook https://citytoday.co.in/Trump-praised-Chinas-TikTok-compared-to-Facebook वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार चीन की टिकटॉक कंपनी की जमकर तारीफ की है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर फेसबुक का मुकाबला टिकटॉक से करते हुए कहा है कि“ अगर आप टिकटॉक से छुटकारा पाते हैं। तो फेसबुक अपना कारोबार दोगुना कर लेगा। ट्रंप ने कहा कि फेसबुक ने पिछले चुनाव में जमकर धोखाधड़ी की। 

आपको बता दें कि अमेरिका ने टिकटॉक जैसे ऐप्स को प्रतिबंधित कर दिया था। यह निर्देश सभी अमेरिकी सरकारी और कुछ राज्य सरकारों के उपकरणों के लिए है। गुरुवार को यूएस हाउस कमेटी ऑन एनर्जी एंड कॉमर्स ने एक अधिनियम को मंजूरी दी। जो विदेशी ऐप्स और डेटा दलालों को रोकने और अमेरिकी डेटा की सुरक्षा करने के लिए है। गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने शासनकाल में टिकटॉक को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा था। कि इस ऐप से डेटा संग्रह से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को अमेरिकियों की व्यक्तिगत और मालिकाना जानकारी तक पहुंचने की अनुमति मिलती है। संभावित रूप से ये चीनी ऐप संघीय कर्मचारियों और ठेकेदारों के स्थानों को ट्रैक करने, ब्लैकमेल के लिए व्यक्तिगत जानकारी के डोजियर बनाने और कॉर्पोरेट जासूसी करने की अनुमति देता है। जिस कारण इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

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Fri, 08 Mar 2024 16:54:46 +0530 Newsdesk
US Presidential Election 2024: राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप का बाइडेन से फिर हो सकता है मुकाबला https://citytoday.co.in/Trump-may-face-Biden-again-in-the-presidential-elections https://citytoday.co.in/Trump-may-face-Biden-again-in-the-presidential-elections वाशिंगटन।US Presidential Election 2024: अमेरिका में इस वर्ष राष्ट्रपति चुनाव होने है। जिसके कारण अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दोनों ही 2024 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अपनी तैयारी में लगे हुए है। दोनों अपनी-अपनी पार्टी  को जिताने की दौड़ में आगे बड़ रहे हैं। हाल ही में बीते दिन कैलिफ़ोर्निया और टेक्सास और अमेरिकी क्षेत्र में राष्ट्रपति चुनाव से प्री इलेक्शन का अहम दिन रहा था। जिसके तहत पंद्रह राज्यों में मंगलवार को प्राइमरी चुनाव हुए। जिसमें अमेरिका के 16 राज्यों और एक यूएस टेरीटरी के मतदाताओं ने अपने-अपने पसंदीदा प्रेसिडेंट कैंडिडेट के को मतदान किया।

बाइडेन ने इतने राज्यों में जीत हासिल की

राष्ट्रपति बाइडेन ने अब तक घोषित चुनावी नतीजों में अलाबामा, मिनेसोटा, अर्कांसस, कोलोराडो, आयोवा, मेन, मैसाचुसेट्स, नॉर्थ कैरोलिना, ओकलाहोमा, टेनीसी, टेक्सास, वर्जीनिया, और वर्मोंट में जीत हासिल की है। 

ट्रंप को इन प्रांतों मिली जीत

डोनाल्ड ट्रंप को अब तक अलाबामा,अर्कांसस,टेनेसी, मिनेसोटा,कोलोराडो, मेन, मैसाचुसेट्स, नॉर्थ कैरोलिना,ओकलाहोमा,टेक्सास और वर्जीनिया में जीत मिली है।अनुमान लगाया जा रहा है। कि इस मुकाबले में ट्रंप अपनी प्रतिद्वंद्वी निक्की हेली को हराकर बाइडेन का सामना करेंगे।

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Wed, 06 Mar 2024 14:16:58 +0530 Newsdesk
National Security Supplement Package: यूक्रेन के लिए सहायता पैकेज पर विचार कर सकता है अमेरिका https://citytoday.co.in/America-may-consider-aid-package-for-Ukraine https://citytoday.co.in/America-may-consider-aid-package-for-Ukraine वाशिंगटन।National Security Supplement Package: अमेरिका सदन के स्पीकर माइक जॉनसन मार्च के अंत या अप्रैल में नए बजट के दौरान एक विधेयक पर मतदान करा सकते हैं। जिसमें यूक्रेन, इजरायल और ताइवान को 66 अरब डॉलर की सहायता भी शामिल है। सीएनएन की सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार जॉनसन ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया है। और उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है। कि पहले सरकारी फंडिंग कानून को अंतिम रूप देना जरूरी है। 

फरवरी में सीनेट रिपब्लिकन ने 118 अरब डॉलर के राष्ट्रीय सुरक्षा पूरक पैकेज को रोक दिया था। जिसमें यूक्रेन के लिए 60 अरब डॉलर इज़रायल के लिए 14 अरब डॉलर और सीमा नीति सुधार शामिल थे। रिपब्लिकन का कहना है। कि बिल में सुधार अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर अवैध आप्रवासन को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे। सीनेट ने 95 अरब डॉलर का विदेशी सहायता बिल भेजा है। जिसमें सीमा सुरक्षा सुधारों को शामिल नहीं किया गया है और इसे प्रतिनिधि सभा में विचार के लिए भेजा गया है।



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Mon, 04 Mar 2024 16:00:45 +0530 Newsdesk
BAPS Mandir: यूएई में बना पहला हिंदु मंदिर जनता के लिए खुला  https://citytoday.co.in/The-first-Hindu-temple-built-in-UAE-opens-to-the-public https://citytoday.co.in/The-first-Hindu-temple-built-in-UAE-opens-to-the-public अबू धाबी।BAPS Mandir: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के पत्थर से निर्मित पहले हिंदू मंदिर को आम जनता के लिए खोल दिया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 फरवरी को अबू धाबी के इस पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया था। मंदिर दुबई-अबू धाबी शेख जायद राजमार्ग पर अल राहबा के पास 27 एकड़ क्षेत्र में लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। मंदिर के लिए जमीन यूएई सरकार ने दान में दी है। अबू धाबी के पहले हिंदू मंदिर का निर्माण नागर शैली में हुआ है। इसी शैली में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर में स्वंयसेवक उमेश राजा के अनुसार 20 हजार टन से अधिक चूना पत्थर के टुकड़ों को राजस्थान में तराशा गया और 700 कंटेनर में अबू धाबी लाया गया। बोचासनवासी अक्षर पुरूषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) ने कहा, ‘‘प्रतीक्षा समाप्त हुई! अबू धाबी मंदिर को अब सभी आगंतुकों और श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। इसमें उल्लेख किया गया है कि मंदिर सोमवार को छोड़कर सभी दिन सुबह नौ बजे से रात आठ बजे तक खुला रहेगा।

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Sat, 02 Mar 2024 18:16:40 +0530 Newsdesk
इजरायली बमबारी में फिलिस्तीनियों के 70 लोगों की मौत, 250 घायल https://citytoday.co.in/70-Palestinians-killed,-250-injured-in-Israeli-bombing https://citytoday.co.in/70-Palestinians-killed,-250-injured-in-Israeli-bombing गाजा।Israel bombing: गाजा शहर के पश्चिम में तटीय सड़क पर गुरुवार को मदद का इंतजार कर रहे फिलिस्तीनियों पर इजरायली बमबारी में 70 लोगों की मौत हो गयी और 250 अन्य घायल हो गये। फिलिस्तीनी चिकित्सा सूत्रों की जानकारी के मुताबिक उन्होंने बताया कि इजरायली बमबारी में कम से कम 70 लोग मारे गये और 250 अन्य घायल हो गये। उन्होंने बताया कि मृतकों और घायलों को अल-शिफा अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है। जहां चिकित्सा उपकरणों और क्षमताओं का अभाव है। घायलों में से कुछ की हालत गंभीर बतायी जा रही है। सूत्रों की मानों तो इजरायली सेना ने गाजा शहर के पश्चिम में अल-राशिद स्ट्रीट पर नागरिकों की एक सभा को निशाना बनाया। जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई।

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Thu, 29 Feb 2024 22:46:41 +0530 Newsdesk
new channel page: यूट्यूब के टीवी ऐप पर लॉन्च हुआ क्रिएटर्स के लिए नया चैनल पेज https://citytoday.co.in/YouTube-launches-new-channel-page-for-creators-on-its-TV-app https://citytoday.co.in/YouTube-launches-new-channel-page-for-creators-on-its-TV-app YouTube launches new channel page: यूट्यूब के टीवी ऐप पर क्रिएटर्स के लिए नया चैनल पेज लॉन्च हुआ। गूगल के स्वामित्व वाले यूट्यूब ने यूजर अनुभव को बेहतर बनाने और बड़ी स्क्रीन पर सामग्री को ज्यादा आसान बनाने के लक्ष्य के साथ अपने टीवी एप पर क्रिएटर्स के चैनलों के लिए एक नया लुक लेकर आया है। यूट्यूब ने अपने वीडियो में क्रिएटर्स के पेजों में बदलाव की घोषणा कर कहा कि अपडेट अधिक इमर्सिव लेआउट और सब्सक्राइब तक आसानी से पहुंचने पर केंद्रित है। नया डिजाइन कंपनी के नए डेटा की पृष्ठभूमि में लांच किया गया है जिसमें पता चला है कि शीर्ष क्रिएटर्स की संख्या में जिन्हें अपना ज्यादातर वॉच टाइम टीवी पर मिलता है। पिछले तीन वर्षों में 400 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। यूट्यूब के सीईओ, नील मोहन ने कहा कि दर्शक सब कुछ एक ही स्थान पर चाहते हैं। कंपनी के मुताबिक जनवरी से सितंबर 2023 तक कनेक्टेड टीवी पर यूट्यूब शॉर्ट्स के व्यूज 100 फीसदी से ज्यादा बढ़ गए हैं।
कंपनी ने कहा है कि विश्व स्तर पर दर्शक अब हर दिन अपने टीवी पर औसतन एक अरब घंटे से अधिक यूट्यूब कंटेंट देखते हैं। इनसाइट्स, डेटा और एनालिटिक्स में वैश्विक अग्रणी नीलसन ने यूट्यूब को पूरे एक साल तक देखे जाने के समय के हिसाब से अमेरिका में नंबर एक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म बताया है।

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Wed, 21 Feb 2024 21:56:07 +0530 Newsdesk
Mobile Ban In UK: ब्रिटेन सरकार ने स्कूलों में मोबाइल फोन पर लगाया प्रतिबंध https://citytoday.co.in/UK-government-bans-mobile-phones-in-schools https://citytoday.co.in/UK-government-bans-mobile-phones-in-schools लंदन।Mobile Ban In UK: ब्रिटेन सरकार ने प्रत्येक स्कूल में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिये हैं।ये निर्देश अधिकारियों को विद्यार्थियों के व्यवहार, ध्यान को बेहतर बनाने, सीखने में व्यवधान को रोकने तथा बच्चों को साइबरबुलिंग और चिंता से बचाने के लिए लिया गया है। ब्रिटेन के शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि मंत्रालय ने प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और स्कूल स्टाफ के लिए दिशानिर्देश जारी किया है। जिसमें स्कूलों में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने संबंधी निर्देश शामिल हैं। मंत्रालय की विज्ञप्ति में कहा गया कि हम इस बात के लिए दृढ़ हैं, कि सभी स्कूलों को स्कूल के दौरान दिन भर मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगानी चाहिए। केवल कक्षाओं के दौरान ही नहीं बल्कि ब्रेक और दोपहर के भोजन के समय भी। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी दस्तावेज में कहा गया कि स्कूल में मोबाइल फोन अध्ययन और मौज-मस्ती में व्यवधान का कारण बनते हैं। इसीलिए स्कूल के दिनों से मोबाइल फोन को हटाकर हम विद्यार्थियों के लिये एक सुरक्षित वातावरण बना सकते हैं। जहां विद्यार्थियों को सोशल मीडिया और साइबरबुलिंग से जुड़े जोखिमों तथा खतरों से बचाया जा सके। अगर कोई विद्यार्थी नए नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे स्कूल में रोक लिया जाएगा। और उनका फोन भी जब्त कर लिया जाएगा। शिक्षकों को बच्चों के बैग खोजने के लिए परमिशन दी गई है। और साथ ही जब्त किए गए फोन के नुकसान या क्षति से संबंधित संभावित मुकदमों से उनकी कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

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Mon, 19 Feb 2024 21:09:57 +0530 Newsdesk
Ukraine russia war: यूक्रेन ने किया काला सागर में रूसी लैंडिंग जहाज डुबाने का का दावा https://citytoday.co.in/Ukraine-claims-to-have-sunk-a-Russian-landing-ship-in-the-Black-Sea https://citytoday.co.in/Ukraine-claims-to-have-sunk-a-Russian-landing-ship-in-the-Black-Sea Ukraine russia war:  यूक्रेन के सुरक्षा बलों ने क्रीमिया के तट के पास काला सागर में रूसी लैंडिंग जहाज ‘सीजर कुनिकोव’ पर हमला करके उसे डुबा देने का दावा किया है।यूक्रेनी सशस्त्र बलों के प्रमुख ने बुधवार को टेलीग्राम पर बताया कि अलुपका शहर के पास ‘यूक्रेन के सशस्त्र बलों ने मुख्य खुफिया निदेशालय की इकाइयों के साथ मिलकर’ जहाज पर हमला किया था। उधर यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय के मुख्य खुफिया निदेशालय ने बताया कि जहाज पर पर ‘मगुरा वी5’ लड़ाकू समुद्री ड्रोन से हमला किया गया। जिसके परिणामस्वरूप बायीं ओर बड़े छेद हो गये। सूत्रों के हवाले से बताया कि हमले के बाद जहाज डूब गया। रूसी पक्ष ने हमले की पुष्टि नहीं की है। सीजर कुनिकोव को समुद्र तट पर उतरने के लिए डिजाइन किया गया था। और यह 500 टन तक माल वहन कर सकता था। यह अन्य हथियारों के अलावा एके-725 ऑटोकैनन और ग्रैड-एम रॉकेट लॉन्चर से लैस था। यूक्रेन की सेना ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि उसने फरवरी 2022 से अब तक 25 रूसी जहाजों या रूस के काला सागर बेड़े के लगभग 33 प्रतिशत को क्षतिग्रस्त कर दिया है।

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Thu, 15 Feb 2024 21:57:07 +0530 Newsdesk
USA: अमेरिका में हमले के शिकार भारतीय छात्र ने मांगी सोशल मी‎डिया पर मदद https://citytoday.co.in/Indian-student-attacked-in-America-seeks-help-on-social-media https://citytoday.co.in/Indian-student-attacked-in-America-seeks-help-on-social-media नई दिल्ली।USA: एक भारतीय छात्र ने अमे‎‎रिका में हुए हमले के बाद सोशल मी‎डिया पर मदद मांगी है। जानकारी के अनुसार हैदराबाद का रहने वाला सैयद मजाहिर अली शिकागो में इंडियाना वेसलेयान यूनिवर्सिटी से आईटी में मास्टर डिग्री कर रहा है। बीती 4 फरवरी को शिकागो में उसके घर के नजदीक तीन हमलावरों ने उस पर हमला किया। अमेरिका के शिकागो में जानलेवा हमले का शिकार हुए भारतीय छात्र ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मदद मांगी है। वीडियो में दिख रहा है कि भारतीय छात्र सैयद मजाहिर अली के सिर और नाक से खून बह रहा है। और वह मदद की गुहार लगा रहा है। वहीं हैदराबाद में रह रही छात्र की पत्नी ने विदेश मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि सरकार उसके और उसके तीन नाबालिग बच्चों को अमेरिका भेजने का इंतजाम करे। सैयद मजाहिर की पत्नी सैयदा रुकैया फातिमा रिजवी ने विदेश मंत्री को भेजे पत्र में लिखा कि मैं अपने पति की शिकागो में सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं। मैं अपील करती हूं कि कृप्या उनकी मदद करें और उनसे अच्छे से अच्छा इलाज मुहैया कराएं और अगर जरूरत पड़े तो मुझे और मेरे तीन नाबालिग बच्चों को अमेरिका भेजने का इंतजाम करें ताकि मैं अपने पति के साथ रह सकूं।

हैदराबाद के सैयद मजाहिर अली पर तीन लोगों ने हमला किया। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें हमलावर सैयद मजाहिर पर दौड़कर पकड़ने हुए दिखाई दे रहे हैं। घटना के बाद मजाहिर ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि चार लोगों ने मुझ पर उस वक्त हमला किया। जब मैं अपने घर वापस लौट रहा था। मैं अपने घर के नजदीक फिसलकर गिर गया और उन्होंने मुझ पर लात-घूंसे बरसाए। मेरी मदद करिए कृप्या मेरी मदद करिए। बता दें ‎कि हाल के दिनों में विदेशों में भारतीय छात्रों और नागरिकों पर हमले की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 

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Wed, 07 Feb 2024 22:01:48 +0530 Newsdesk
उनका देश भारत में ज्यादा से ज्यादा निवेश करना चाहता है : फ्रांसिस राष्ट्रपति मैक्रों https://citytoday.co.in/His-country-wants-to-invest-more-and-more-in-India https://citytoday.co.in/His-country-wants-to-invest-more-and-more-in-India पेरिस। फ्रांसिस राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक वीडियो साझा किया है। इसमें उनकी हालिया भारत दौरे की झलकियां दिखाई गई हैं। वीडियो के साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका देश भारत में ज्यादा से ज्यादा निवेश करना चाहता है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर नई दिल्ली आए थे, और वह 26 जनवरी को 75वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे। फ्रांसिस राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि विश्व में बदलाव की पहली पंक्ति में भारत आने वाला है। उन्होंने लिखा कि भारत जैसे देश के पास लोकतांत्रिक शक्ति, जनसांख्यिकी, आर्थिक और तकनीकी शक्ति है, जिससे वह दुनिया में बदलाव की पहली पंक्ति में होगा। उन्होंने कहा कि वह नई दिल्ली में 75वें गणतंत्र दिवस समारोह का हिस्सा बनकर बेहद सम्मानित महसूस कर रहे थे।

मैक्रों ने कहा कि हम इस तरह के एक महत्वपूर्ण और अनोखे दिन का हिस्सा बनने पर बेहद सम्मानित महसूस कर रहे थे। यह हमेशा हमारी यादों में रहेगा। उन्होंने कहा बीते कुछ वर्षों के दौरान हमने आपके देश के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और साझेदारियों को बढ़ाया है। हम निश्चित रूप से भारत में अधिक से अधिक निवेश करना चाहते हैं। भले ही हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं। लेकिन हम और भी बहुत कुछ कर सकते हैं। अब तक सबकुछ अच्छा है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि 2030 तक फ्रांस में तीस हजार छात्र भारत से आएं। राष्ट्रपति मुर्मू की ओर से आयोजित भोज में गर्मजोशी से उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करने के लिए मैक्रों ने आभार जताया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा था-फ्रांस और भारत की दोस्ती जिंदाबाद। मैक्रो ने कहा था कि दोनों देशों के बीच तालमेल अद्वितीय है और समय और साझा मूल्यों से परे है। वहीं फ्रांसिस राष्ट्रपति  मैक्रों के पोस्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मैक्रों की भारत यात्रा और गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने से निश्चित तौर पर भारत-फ्रांस की दोस्ती को बढ़ावा मिलेगा। पीएम ने मैक्रों के पोस्ट को टैग कर कहा कि भारत में आपका होना सम्मान की बात है।

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Mon, 05 Feb 2024 21:08:43 +0530 Newsdesk
US Presidential Election: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उपराष्ट्रपति पद के लिए नहीं जाहिर की अपनी पंसद  https://citytoday.co.in/Former-President-Donald-Trump-did-not-express-his-preference-for-the-post-of-Vice-President https://citytoday.co.in/Former-President-Donald-Trump-did-not-express-his-preference-for-the-post-of-Vice-President वाशिंगटनUS Presidential Election: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पूछा गया कि वह उपराष्ट्रपति पद के लिए अपनी पसंद कब बताएंगे। इस पर ट्रंप ने कहा कि फिलहाल कुछ समय नहीं, लेकिन बहुत सारे अच्छे लोग है। अमेरिका में फिर रिपब्लिकन पार्टी से उम्मीदवार पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही हो सकते हैं। आयोवा कॉकस में शानदार जीत के बाद उनकी दावेदारी और पुख्ता हुई है। इसके बाद सवाल उठ रहा है कि अगर ट्रंप 2024 में राष्ट्रपति चुने जाते हैं तब उपराष्ट्रपति कौन होगा। इस बीच पूर्व राष्ट्रपति ने उपराष्ट्रपति पद के लिए सीनेटर टिम स्कॉट और गवर्नर क्रिस्टी नोएम का नाम लेकर अफवाहों को हवा दी है। एक इंटरव्यू में ट्रंप से पूछा गया कि वह उपराष्ट्रपति पद के लिए अपनी पसंद कब बताएंगे, इस पर उन्होंने कहा कि फिलहाल कुछ समय नहीं। लेकिन बहुत सारे अच्छे लोग है। ट्रंप के जवाब पर पत्रकार ने सवाल किया कि क्या अभी तक आपने एक को चुना नहीं है? इस पर ट्रंप ने कहा, मैंने अभी चुनाव नहीं किया है और इसके पीछे कोई कारण नहीं है।

हालांकि इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह हर किसी से बात कर रहे हैं। इस दौरान यह भी खुलासा किया कि उन्होंने हाल ही में स्कॉट के साथ बात की थी। बता दें कि स्कॉट ने पिछले साल राष्ट्रपति पद के लिए अपना नामांकन वापस ले लिया था। और फिर ट्रंप का समर्थन किया था। ट्रंप ने कहा कि मैंने उसे फोन किया और कहा कि आप मेरे लिए बहुत अच्छे और बेहतर उम्मीदवार हैं, जितना आप अपने लिए थे। उन्होंने कहा, जब मैंने टिम को देखा तब वह ठीक था। वह अच्छा था, लेकिन वह बहुत कम महत्वपूर्ण था। मैंने पिछले हफ्ते उन्हें मेरा बचाव करते हुए देखा। वह मेरे लिए लड़ रहे थे।इसके बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ने कहा कि नोएम उनके साथ हमेशा खड़ी रहीं। वह उन्हें कभी चुनौती नहीं देंगी क्योंकि वह कभी भी हरा नहीं सकती हैं। द हिल के अनुसार, स्कॉट और नोएम के नाम हाल ही में कुछ अन्य लोगों के साथ चर्चाओं में रहे हैं।

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Mon, 05 Feb 2024 20:59:00 +0530 Newsdesk
रोहित की जगह कोहली कप्तान होते तो भारतीय टीम नहीं हारती : वॉन https://citytoday.co.in/Had-Kohli-been-captain-instead-of-Rohit,-Indian-team-would-not-have-lost:-Vaughan https://citytoday.co.in/Had-Kohli-been-captain-instead-of-Rohit,-Indian-team-would-not-have-lost:-Vaughan लंदन।Michael Vaughan sparks captaincy debate: इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने कहा है कि अगर रोहित शर्मा की जगह पर विराट कोहली भारतीय टीम के कप्तान होते तो उसे इंग्लैंड के खिलाफ पहले ही टेस्ट में हार का सामना नहीं करना पड़ता। वॉन के अनुसार रोहित खेल के दौरान पूरी तरह से लय में नहीं थे। इसी कारण टीम पहली पारी में 190 रन की बढ़त लेने के बाद भी हार गयी। वॉन के अनुसार स्पिन के अनुकूल हालातों में भी टीम को मिली 28 रन की हार हैरान करने वाली है। इससे इंग्लैंड की टीम को पांच मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त मिल गई। यह हैदराबाद में भारतीय टीम को मिली पहली टेस्ट हार थी। विराट निजी कारणों से सीरीज के पहले दो टेस्ट मैचों से बाहर रहे।  
वॉन ने कहा, उन्होंने  टेस्ट क्रिकेट में विराट की कप्तानी की कमी महसूस की। साथ ही कहा कि विराट की कप्तानी में भारतीय टीम ये मैच नहीं हारती। वॉन ने खेल के दौरान रोहित की कमजोर कप्तानी की आलोचना की। उन्होंने कहा, रोहित एक दिग्गज और महान खिलाड़ी हैं पर मुझे लगा कि वह पूरी तरह से लय से बाहर हैं।  वॉन ने पिछले सप्ताह ही सीरीज के शुरूआती मैच के दौरान सक्रिय भूमिका नहीं निभाने के लिए रोहित की आलोचना की थी। उन्होंने कहा,  रोहित शर्मा की कप्तानी बहुत ही औसत थी। मुझे नहीं लगता कि उसने अपने क्षेत्र में बदलाव किया था या अपनी गेंदबाजी में बदलाव के साथ सक्रिय था। वॉन ने कहा, और उनके पास ओली पोप के स्वीप या रिवर्स स्वीप का कोई जवाब नहीं था। 

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Wed, 31 Jan 2024 22:31:19 +0530 Newsdesk
भारतीय टीम ने इंग्लैंड को ज्यादा ही आजादी दे दी : पनेसर https://citytoday.co.in/Indian-team-gave-too-much-freedom-to-England:-Panesar https://citytoday.co.in/Indian-team-gave-too-much-freedom-to-England:-Panesar ल्यूटन । इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर मोंटी पनेसर ने कहा है कि भारतीय टीम के खिलाफ मिली जीत काफी बड़ी है और इसी ने भी इसकी कल्पना नहीं की थी। पनेसर के अनुसार भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा को भी इसका अंदेशा नहीं था। इस पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि अब आने वाले मैचों में भारतीय टीम को मेहमान टीम को अधिक आजादी नहीं देनी होगी। उन्होंने माना कि विराट कोहली टीम में होते तो वह उनकी टीम के लिए जीत दर्ज करना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड टीम अब भी आगामी चार टेस्ट मैचों में असफलता के डर के साथ खेलेगी। 
मोंटी ने कहा कि इंग्लैंड की टीम हार से नहीं डरती, अगर वे हारते हैं तो भी नहीं डरते। इसलिए अगले चार मैचों में भी वे असफल होने से डरे बिना खेलेंगे। यह एक बहुत बड़ी जीत है, किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह संभव होगा। सभी ने सोचा था कि इंग्लैंड 190 रनों से पीछे होन के बाद हार जाएगा पर ओली पोप ने शानदार पारी खेलकर बाजी पलट दी। ये सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक थी और रोहित इसका अंदाज नहीं लगा पाये थे। 
उन्होंने आगे कहा कि इंग्लैंड की भारत पर पहले टेस्ट मैच में 28 रनों की जीत से ऐसा लगा जैसे उन्होंने विश्व कप जीत लिया हो। यह इंग्लैंड की विदेश में अब तक की सबसे बड़ी जीतों में से एक थी। यह इंग्लैंड में एक बड़ी खबर है। ऐसा लगता है जैसे हमने विश्व कप जीत लिया है। इस स्पिनर ने कहा कि मेहमान टीम भारतीय क्रिकेटरों को देखकर सीख रही है। उन्होंने साथ ही कहा कि इंग्लैंड टीम ने भारत की कमजोरियों को देखा है और इसी कारण उन्हें समझ आया कि उन्होंने मेजबान टीम को कैसे हराया जाये। 

मोंटी ने कहा- कि मुझे लगता है कि इंग्लैंड एक ऐसी टीम है जो भारत से सीख रही है, वे भारत को देखते हैं, वे देखते हैं कि गेंदबाज कैसे गेंद डालते हैं, वे देखते हैं कि वे कैसे बल्लेबाजी करते हैं और उनकी शारीरिक भाषा कैसी है। वे भारतीय टीम में किसी भी कमजोरी को देखते हैं और फिर वे समझना शुरू करते हैं कि वे क्या कर रहे हैं। वहीं जब मोंटी से पूछा गया कि क्या रवींद्र जड़ेजा और केएल राहुल की चोट से दूसरे टेस्ट मैच में भारत के प्रदर्शन पर असर पड़ेगा तो उन्होंने कहा कि अब रोहित शर्मा अपनी असली कप्तानी दिखा सकते हैं। उन्होंने भारतीय कप्तान से कुछ संघर्ष दिखाने को भी कहा।

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Tue, 30 Jan 2024 23:00:19 +0530 Newsdesk
भारत में माक्रों के आने से पहले फ्रांसीसी पत्रकार को दिया देश से निकालने का नोटिस https://citytoday.co.in/French-journalist-given-deportation-notice-before-Macrons-arrival-in-India https://citytoday.co.in/French-journalist-given-deportation-notice-before-Macrons-arrival-in-India फ्रांसीसी पत्रकार वनेसा डोनियाक को भारत सरकार ने गृह मंत्रालय के खिलाफ हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाकर नोटिस जारी किया है। उन्हें देश से निकालने की संभावना है। डोनियाक ने पिछले 22 सालों से भारत में फ्रांसीसी भाषा में पत्रकारिता की है, और कई मुद्दों पर रिपोर्टिंग की है। उन्हें "द्वेषपूर्ण और आलोचनात्मक" काम करने का आरोप है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फ्रांसीसी पत्रकार वनेसा डोनियाक को भारत के हितों के खिलाफ काम करने पर आरोप लगाकर नोटिस भेजा है, और उनकी परमानेंट रेसीडेंसी को रद्द करने का निर्णय लिया है। लेकिन डोनियाक ने इस बात का खंडन किया है। और अपने बयान में भारत को अपना घर कहा है। उन्हें दो फरवरी तक इस आदेश का जवाब देने का समय है। और इस घड़ी में फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों भारत आ रहे हैं। जो गणतंत्र दिवस की परेड में मुख्य अतिथि होंगे। आपको बता दें कि माक्रो कल यानि की 25 जनवरी को भारत पहुंचेंगे। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी का समर्थन किया है। और हथियारों के खरीदार के रूप में बढ़ावा दिया है।

उनके पिछले साल के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बास्टील दिवस के जश्न में शामिलता दिखाई थी। मोदी सरकार पर स्वतंत्र मीडिया का दम घोंटने के आरोप लग रहे हैं। जिसके चलते भारत विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में गिरकर 161वें स्थान पर पहुंच गया है। इसके बावजूद, माक्रों इस साल गणतंत्र दिवस की परेड में मुख्य अतिथि होंगे और उन्होंने भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी और हथियारों के खरीदारी में योगदान करने की कोशिश की है। 80 देशों के विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में 21 अंक लुढ़क कर 161वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले साल बीबीसी ने 2002 के गोधरा दंगों में मोदी की भूमिका पर सवाल उठाती हुई एक डाक्यूमेंट्री चलाई थी। जिसके बाद भारत में बीबीसी के दफ्तरों पर आयकर विभाग ने छापे मारे थे।

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Wed, 24 Jan 2024 20:25:19 +0530 Newsdesk
Bangkok becomes Rammay: राममय हुआ बैंकॉक, राम नाम के नारों से झूमा पूरा शहर https://citytoday.co.in/Bangkok-becomes-Rammay:-Bangkok-becomes-Rammay,-the-whole-city-dances-with-slogans-in-the-name-of-Ram. https://citytoday.co.in/Bangkok-becomes-Rammay:-Bangkok-becomes-Rammay,-the-whole-city-dances-with-slogans-in-the-name-of-Ram. Bangkok becomes Rammay: आज पूरे देश में दिवाली का उत्साह है, क्योंकि अयोध्या में भगवान श्रीराम का प्राण प्रतिष्ठान हुआ है। इस खुशी के मौके पर विदेशों में भी राममंदिर का जश्न मना जा रहा है। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी राममय देखा जा रहा है, जहां लोग राममंदिर की उपासना कर रहे हैं। और राम आएंगे गाने के साथ त्योहार मना रहे हैं। यहां राजा को भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं, इसलिए वहां राजा को "रामा-1, रामा-2" के नाम से पुकारा जाता है। थाईलैंड में संस्कृत और पाली भाषाओं का प्रभाव है, और यहां के लोग राजा को भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं। यूनेस्को के अनुसार, अयोध्या के शाही दरबार में कई देशों के दूत भी आते थे, जैसे कि मुग़ल दरबार, जापान और चीनी साम्राज्यों के दूत।

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Mon, 22 Jan 2024 21:19:22 +0530 Newsdesk
US Hindus Unite for Ram Mandir: राम मंदिर के उत्सव को लेकर अमेरिका की सड़कों पर गूंजा 'जय श्री राम' का स्वर, 350 कारों का शानदार जुलूस https://citytoday.co.in/291 https://citytoday.co.in/291 न्यू जर्सीUS Hindus Unite for Ram Mandir: श्रीराम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के चलते भारत ही नहीं विदेंशो में भी माहौल भक्ति के सागर में डूबा हुआ है। जी हां अमेरिका के भारतीय समुदाय ने एक अद्वितीय इतिहास बनाया है। पिछले रविवार को न्यू जर्सी की सड़कों पर 350 से अधिक कारें निकलीं। जिससे न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के हिंदू समुदाय को भी एक साथ जोड़ा है।

एडिसन का पूरा शहर उठा हुआ था, उस झिलमिलाती सुबह के साथ। 350 रंग-बिरंगी कारें ...मालाओं से सजी, ऊपर फहराते भगवा ध्वज, और हाथों में उठे भारतीय और अमेरिकी झंडे, यह सब एक रूप में मिलकर एक अद्वितीय दृश्य प्रदर्शित कर रहे थे। हर कार की विंडो पर 'जय श्री राम' के पोस्टर लगे हुए थे। इस माहौल ने राहगीरों के साथ पूरे देश का दिल जीत लिया है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु समूह के भारतीय इस जुलूस में उत्साह से झूम रहे थे।

इस रैली का समापन बड़े मंदिर में किया। वहां महाआरती का आयोजन हुआ। एडिसन की यह रैली न केवल अमेरिका में बल्कि पूरी दुनिया में फैले हुए भारतीय समुदाय को एकत्र करने में सफल रही। यह राममय माहौल दिखाता है,जो भौगोलिक सीमाओं को तोड़कर दुनिया को एक सूत्र में बांधने का प्रयास हैं। हालांकि 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की खुशी अब से अमेरिका में भी महसूस की जा रही है।

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Sun, 14 Jan 2024 20:08:12 +0530 Newsdesk
गांधी स्मारक के दौरे के साथ राजनाथ सिंह ने की ब्रिटेन यात्रा की शुरुआत https://citytoday.co.in/241 https://citytoday.co.in/241 लंदनRajnath Singh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को मध्य लंदन के टैविस्टॉक स्क्वायर स्थित महात्मा गांधी स्मारक के दौरे के साथ अपनी ब्रिटेन यात्रा की शुरुआत की। सिंह ब्रिटेन की यात्रा करने वाले पहले भारतीय रक्षा मंत्री हैं, और इसमें उनकी 22 साल की यात्रा शामिल है। पहले भारत की ओर से रक्षा मंत्री की ब्रिटेन यात्रा जनवरी 2002 में हुई थी।

ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ, सिंह ने 20वीं सदी के स्मारक पर राष्ट्रपिता को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद सिंह ब्रिटेन के अपने समकक्ष ग्रांट शाप्स के साथ द्विपक्षीय बैठक से पहले ‘हॉर्स गार्ड्स’ परेड में औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ का निरीक्षण करने के लिए व्हाइटहॉल पहुंचे। दोनों नेताओं के रक्षा, सुरक्षा और औद्योगिक सहयोग के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने की उम्मीद है।

मंगलवार को सिंह ने लंदन में नेसडेन मंदिर के नाम से जाने जाने वाले बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर में पूजा-अर्चना करने से पहले उत्तरी लंदन में आंबेडकर संग्रहालय में जाकर डॉ. बी आर आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद, सिंह ने ब्रिटेन के अपने साथी ग्रांट शाप्स के साथ दोपहर में व्यापार संबंधों पर चर्चा की। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच सुरक्षा, रक्षा और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

सिंह, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के सेवा मुख्यालय, रक्षा विभाग, और रक्षा उत्पादन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ सोमवार रात लंदन पहुंचे।

इस यात्रा के दौरान, उनकी योजना में ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से मुलाकात करने और विदेश मंत्री डेविड कैमरन के साथ बैठक करने की उम्मीद है, साथ ही शाप्स के साथ बातचीत भी की जाएगी।

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Tue, 09 Jan 2024 22:50:46 +0530 Newsdesk
Israel Gaza War: भीषण लड़ाई के बीच गाजा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22,438 हुई https://citytoday.co.in/207 https://citytoday.co.in/207 Israel Gaza War: फिलीस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली सेना और हमास के बीच गाजा में हो रहा संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है। यह युद्ध अक्टूबर 2023 से शुरू हुआ है, और इस समय के दौरान घिरे गए क्षेत्र में मारे गए लोगों की संख्या अब 22,438 हो गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन सभी मौतों में से 70% बच्चे और महिलाएं हैं। पिछले 24 घंटों में कम से कम 125 फिलिस्तीनी की मौत हुई है और 318 और घायल हो गए हैं। इस समय के दौरान, घायलों की संख्या भी बढ़कर 57,614 हो गई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अशरफ अल-केदरा ने गुरुवार रात की बयान में बताया कि इजरायली बलों ने गाजा शहर और उत्तरी क्षेत्र में स्थित तीन प्रमुख अस्पतालों के निदेशकों सहित 99 स्वास्थ्य कर्मचारियों को पकड़ लिया है।जिसके बाद अल-केदरा ने चेतावनी दी है, कि दक्षिणी शहर खान यूनिस में नासिर मेडिकल कॉम्प्लेक्स और रेड क्रिसेंट सोसाइटी से संबद्ध अल-अमल अस्पताल इजरायली हमलों के शिकार हो गए हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अस्पतालों की सुरक्षा में कार्रवाई करने और घायलों और बीमारों को चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचाने के लिए तत्काल की जाने वाली कदमों की मांग की है।

2023 के अंत तक गाजा की कुल आबादी का लगभग 85 प्रतिशत यानी 1.9 मिलियन लोग आंतरिक युद्ध के कारण विस्थापित होने का आंकलन किया गया था, परिवारों को सुरक्षा की तलाश में बार-बार स्थानांतरित होना पड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, वेस्ट बैंक में शुक्रवार तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 314 हो गई है, जिसमें 80 बच्चे भी शामिल हैं।

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Fri, 05 Jan 2024 20:05:12 +0530 Newsdesk
Putin invited Modi: पुतिन ने मोदी को रूस आने का न्योता दिया, कहा यूक्रेन युद्ध के बारे में कई बार बताया https://citytoday.co.in/167 https://citytoday.co.in/167 Putin invited Modi: पुतिन ने मोदी को रूस आने का न्योता दिया और कहा कि उन्होंने यूक्रेन युद्ध के बारे में कई बार चर्चा की है। दरअसल बुधवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच मुलाकात हुई। इस मुलाकात में पुतिन ने मोदी को रूस में आने के लिए निमंत्रण दिया।

इस महत्वपूर्ण मुलाकात को खासा महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि रूसी राष्ट्रपति आमतौर पर विदेश मंत्रियों से नहीं मिलते हैं। इस मौके पर पुतिन ने जयशंकर से कहा कि वह मोदी को रूस में देखकर खुशी होगी। इस मुलाकात में व्यापार और यूक्रेन युद्ध पर चर्चा भी हुई। पुतिन ने यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के बारे में जयशंकर को जानकारी देने का भी दृष्टिकोण बताया।

पुतिन ने बताया कि- वे दुनिया में हो रही सभी कठिनाइयों के बावजूद खुश हैं, क्योंकि एशिया में हमारे परंपरागत दोस्त भारत और उनके लोगों के साथ संबंध स्थापित हो रहे हैं। उन्होंने कहा है। कि हम प्रधानमंत्री मोदी की स्थिति को समझते हैं, और हमने यूक्रेन के साथ हो रहे जटिल प्रक्रियाओं के प्रति उनके दृष्टिकोण के बारे में बातचीत की है। उन्होंने यह भी कहा है कि वह प्रधानमंत्री को इस संघर्ष से जुड़ी स्थिति के बारे में निरंतर सूचित कर रहे हैं। उन्होंने उनकी इच्छा को ध्यान में रखते हुए इस समस्या को शांतिपूर्ण तरीकों से हल करने के लिए सभी संभावनाओं का प्रयास करने की बात की है।

इससे पहले एससीओ की बैठक में पुतिन से मुलाकात के दौरान मोदी ने कहा था कि "आज का दौर युद्ध का दौर नहीं है." मोदी ने इसी साल जी-20 की बैठक में भी इस बात को दोहराया था.जयशंकर ने पुतिन के साथ बैठक में कहा, "हमारी व्यापार बातचीत को और अधिक टिकाऊ बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। हमें यह सोचने की जरूरत है, कि इसे कैसे हासिल किया जाए."

कई अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच चर्चा

रूस की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर मॉस्को पहुंचे जयशंकर ने इससे पहले अपने रूसी समकक्ष सर्गेइ लावरोव से मुलाकात की थी। रिपोर्टों के मुताबिक जयशंकर ने लावरोव के साथ बैठक के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्थिति और समसामयिक मुद्दों पर बात की। जयशंकर ने लावरोव के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र, यूक्रेन संघर्ष, गाजा स्थिति, अफगानिस्तान और मध्य एशिया, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन, जी-20 और संयुक्त राष्ट्र पर भी चर्चा की। लावरोव ने कहा कि उन्होंने जयशंकर के साथ "सैन्य-तकनीकी सहयोग की संभावनाओं" पर चर्चा की। जिसमें आधुनिक प्रकार के हथियारों का संयुक्त उत्पादन शामिल है।

वहीं जयशंकर ने कहा- कि हम इस तथ्‍य की तारीफ करते हैं, कि हमारा व्‍यापार अपने सर्वोच्‍च स्‍तर पर पहुंच गया है। उनके मुताबिक यह इस साल 50 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। और यह इस साल और बढ़ सकता है।

भारत और रूस के बीच शीर्ष नेताओं के स्तर पर हर साल सम्मेलन होता है। इस सम्मेलन के लिए एक बार रूसी राष्ट्रपति दिल्ली आते हैं, तो वहीं अगले साल भारतीय प्रधानमंत्री मॉस्को जाते हैं। अब तक भारत और रूस में बारी-बारी से 21 वार्षिक शिखर सम्मेलन हो चुके हैं। आखिर सम्मेलन दिल्ली में हुआ था। और इसमें रूसी राष्ट्रपति शामिल हुए थे। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पीएम मोदी 2022 में रूस के दौरे पर नहीं गए थे। आपको बता दें किजी-20 सम्मेलन के लिए भी रूसी राष्ट्रपति भारत दौरे पर नहीं आए थे। आखिरी बार पीएम मोदी 2019 में रूस के दौरे पर गए थे।

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Thu, 28 Dec 2023 18:48:33 +0530 Newsdesk
EAM Jaishankar Again Tears Pakistan Apart: सीमा पार आतंकवाद पर विदेश मंत्री जयशंकर बोले& मुकाबला करने की जरूरत है https://citytoday.co.in/125 https://citytoday.co.in/125  EAM Jaishankar Again Tears Pakistan Apart: आतंकवाद पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर कहते हैं, "...आतंकवाद हमारी आजादी के समय ही शुरू हो गया था, जब तथाकथित हमलावर पाकिस्तान से आए थे...आज इस देश में क्या बदलाव आया है, मुझे लगता है कि मुंबई 26/11, मैं, निर्णायक बिंदु था। बहुत से लोग तब तक बहुत भ्रमित थे।

जब तक उन्होंने 26/11 के आतंकवाद के वास्तविक प्रभावशाली प्रभावशाली चरण को नहीं देखा था। अब, हमें सबसे पहले जो करने की ज़रूरत है वह यह है कि हमें मुकाबला करने की ज़रूरत है। मैं जानता हूं कि जिन लोगों ने कहा था, ओह, हमारे पास दूसरा गाल आगे करने की बहुत ही चतुर रणनीति थी। मुझे नहीं लगता कि यह सिर्फ देश का मूड है। मुझे नहीं लगता कि इसका कोई मतलब है। मुझे नहीं लगता कि इसका कोई रणनीतिक मतलब है। अगर कोई अभ्यास कर रहा है, सीमा पार आतंकवाद का आपको जवाब देना होगा, आपको इसकी कीमत चुकानी होगी..."

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Sat, 23 Dec 2023 18:49:30 +0530 Newsdesk
Asim Munir America Tour: अमेरिका ने पाकिस्तान को चेताया, कहा चीन से संभलकर रहो और भारत से मिलाओ हाथ https://citytoday.co.in/79 https://citytoday.co.in/79

वाशिंगटनAsim Munir America Tour: चीन के साथ बढ़ती दोस्ती पर अमेरिका ने पाकिस्तान को चेताया है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख सैयद आसिम मुनीर के अमेरिका दौरे में यह नसीहत दी गई है। अमेरिका ने पाकिस्तान से कहा है कि वह चीन को आर्थिक गलियारे तक ही सीमित रखे और उसे अपने सुरक्षा प्रतिष्ठानों और व्यवस्था तक पहुंच न बनाने दे। इसके अलावा भारत से कारोबार शुरू करने की भी सलाह दी गई है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि चीन ने हाल ही में पाकिस्तान की सुरक्षा चौकियां स्थापित की हैं। इसी को लेकर अमेरिका ने पाकिस्तान को यह हिदायत दी है।

बीते कुछ सालों से पाकिस्तान ने अमेरिका की बजाय चीन की ओर से झुकाव दिखाया है। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद से पाकिस्तान का झुकाव चीन की ओर पहले से ज्यादा हुआ है। चीन ने चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर को तैयार किया है और सुरक्षा चौकियां भी स्थापित कर रहा है। पाकिस्तान की यूनिवर्सिटीज में भी चीन का दखल बढ़ा है और उसने प्रतिष्ठित कायदेआजम यूनिवर्सिटी समेत तमाम विश्वविद्यालयों में कन्फ्यूशियस सेंटर स्थापित किए हैं। चीन ने हाल ही में पाकिस्तान से यह मांग भी की है कि ग्वादर में काम कर रहे उसके नागरिकों को मिलिट्री पोस्ट्स में रहने की जगह दी जाए।

ग्वादर पोर्ट बलूचिस्तान में पड़ता है, जहां बड़े पैमाने पर चीनी नागरिक काम पर लगे हुए हैं। यहां कई बार बलूच विद्रोही चीनी नागरिकों और कर्मचारियों पर हमले कर चुके हैं। चीन ने यह मांग भी की है कि ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को वह अपने फाइटर जेट्स के लिए इस्तेमाल कर सके। सितंबर में अमेरिका के राजदूत डोनाल्ड ब्लोम ने ग्वादर पोर्ट का भी दौरा किया था। इसे लेकर कहा जा रहा है कि अमेरिका ने इसके जरिए पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश की है।

इसी कड़ी में अब अमेरिका की पाकिस्तान को नसीहत बताती है,वह चीन को काउंटर करने की कोशिश में है। ग्वादर पोर्ट की फंडिंग भी चीन ही कर रहा है, जो चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा है। इस कॉरिडोर पर 2015 से ही काम चल रहा है। खबर है कि अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान को फंड भी आॅफर किया है, लेकिन यह भी कहा है कि इसके लिए उन्हें कुछ शर्तें भी माननी होंगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत से जल्द से जल्द बातचीत भी शुरू करनी होगी। एलओसी पर शांति बनाए रखे और कारोबार भी शुरू करे

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Tue, 19 Dec 2023 19:54:30 +0530 Newsdesk
North Korea: नॉर्थ कोरिया ने अपने सबसे शक्तिशाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का किया सफल परीक्षण https://citytoday.co.in/74 https://citytoday.co.in/74 North Korea: नॉर्थ कोरिया ने अपने सबसे शक्तिशाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का  किया सफल परीक्षणनॉर्थ कोरिया ने हाल ही में अपने सबसे शक्तिशाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। इस मिसाइल का कहा जा रहा है कि इसकी रेंज 15,000 किलोमीटर से भी ज्यादा है, जिससे यह अमेरिका के सभी हिस्सों तक पहुंच सकता है। इस मिसाइल को सॉलिड-फ्यूल तकनीक पर आधारित किया गया है, जिससे इसे चलाना और ट्रांसपोर्ट करना आसान होता है। यह बताया जा रहा है कि यह मिसाइल 15,000 किलोमीटर से भी अधिक की दूरी तय कर सकती है, जिससे यह जापान और अमेरिका तक पहुंच सकती है।

18 दिसंबर को हुए परीक्षण से पहले भी इस मिसाइल का सॉलिड-फ्यूल आधारित टेस्ट किया गया था, और यह मिसाइल सॉलिड प्रोपेलेंट्स का उपयोग करती है, जो इसे अधिक तेजी से चला सकता है। सॉलिड-फ्यूल मिसाइलें लॉन्च करना आसान होता है और इन्हें चलाना और ऑपरेट करना सुरक्षित होता है, इसमें लिक्विड-फ्यूल से मिसाइलें पकड़ने की तुलना में  इन्हें पकड़ना ज्यादा मुश्किल है।

1970 के दशक की शुरुआत में, सोवियत संघ ने अपने पहले सॉलिड-फ्यूल आधारित आईसीबीएम आरटी-2 का सफल परीक्षण किया। इसके बाद, फ्रांस ने एस3 (या एसएसबीएस) नामक मध्य दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल का विकास किया। यह मिसाइल एक प्रकार की मध्य दूरी की बलिस्टिक मिसाइल है जिसे चीन ने 1990 के दशक में सॉलिड-फ्यूल आधारित आईसीबीएम का परीक्षण शुरू किया। इस मिसाइल की न्यूनतम दूरी 5,500 किलोमीटर है और इसे मुख्यतः न्यूक्लियर वॉरहेड्स के लिए डिजाइन किया गया है।

उत्तर कोरिया ने:
- 4 जुलाई, 2017 को कोह्वासोंग-14 मिसाइल का सफल परीक्षण किया, जिसकी पहुंच अलास्का तक थी।
- तीन साल बाद, ह्वासोंग-17 को प्रदर्शित किया, जो और भी ताकतवर था।
- नवंबर 2022 में, "मॉनस्टर मिसाइल" का सफल परीक्षण किया गया, जो ह्वासोंग-17 का पहला सफल परीक्षण था।
- इस साल, सॉलिड-फ्यूल आधारित ह्वासोंग-18 का सफल परीक्षण किया गया है।

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Mon, 18 Dec 2023 22:23:14 +0530 Newsdesk
America Flu: अमेरिका में इस मौसम में फ्लू से 2,300 से अधिक मौतें ,जानिए... https://citytoday.co.in/62 https://citytoday.co.in/62 America Flu:अनुमानों के अनुसार, अमेरिका में इस सीजन में कम से कम 2,300 मौतें फ्लू से हुई हैं, जो रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने जारी किए हैं। शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने सीडीसी की साप्ताहिक समीक्षा का हवाला देते हुए बताया है कि देश के अधिकांश हिस्सों में मौसमी इन्फ्लूएंजा गतिविधि में वृद्धि हो रही है। सीडीसी के अनुसार, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-मध्य, और पश्चिमी तट क्षेत्रों में गतिविधि के उच्चतम स्तर की रिपोर्ट है। 

सप्ताहिक फ्लू अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या में वृद्धि जारी रही है। सीडीसी के अनुसार, 9 दिसंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान इन्फ्लूएंजा से संबंधित दो बाल मृत्यु हुई हैं, जिससे 2023-2024 सीजन में कुल 14 बाल मृत्यु हो गई हैं। सीडीसी अनुशंसा करता है कि 6 महीने और उससे अधिक उम्र के सभी लोगों को वार्षिक फ्लू का टीका लगवाना चाहिए।

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Sat, 16 Dec 2023 20:18:22 +0530 Newsdesk
2023 Year of War: वैश्विक चुनौतियों में डूबी दुनिया, इजराइल&हमास युद्ध से यूक्रेन और सूडान तक विश्व में युध्द की घटनाएं https://citytoday.co.in/51 https://citytoday.co.in/51 2023  Year of War:इस समय, अफ्रीका में हिंसा की घटनाएं चरम पर हैं, और दक्षिण-पूर्व एशिया में असैन्य युद्ध की चुनौती बढ़ रही है। मध्य और दक्षिण अमेरिका में मादक पदार्थों के व्यापार से होने वाली हिंसा ने भी तबाही मचा दी है। परमाणु शक्तियों के बीच तनाव बना हुआ है, जैसे कि भारत और पाकिस्तान के बीच। उत्तर कोरिया का परमाणु आयुध बढ़ रहा है और ईरान भी यूरेनियम संयंत्र को विकसित कर रहा है। 

कुछ बड़े संघर्ष:

इजराइल-हमास युद्ध

सात अक्टूबर को इजराइल-हमास युद्ध ने दोनों देशों के बीच भयावह संघर्ष की शुरुआत की, जिसमें हमास ने इजराइल पर हमले करके 1,200 से अधिक लोगों को मार डाला और 200 से अधिक को बंधक बना लिया। इसका जवाब इजराइल ने भी गाजा पट्टी पर हमले करके दिया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जवाबी हमलों का एक बड़ा अभियान शुरू किया।

पिछले कुछ वर्षों में पहली बार, इजराइल के सैनिक गाजा पट्टी में पहुंचे और गाजा सिटी की ओर बढ़े। इस संघर्ष में गाजा पट्टी में 18,700 से अधिक लोगों की मौत की खबरें हैं। इजराइली और फलस्तीनी लोगों की बड़ी संख्या में मौत के खिलाफ दुनियाभर में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। लेबनान के हिजबुल्ला समेत ईरान समर्थित मिलिशिया ने भी इजराइल पर हमले किए। इजराइल बार-बार हमास को समाप्त करने के अपने मकसद को दोहरा रहा है।

इजराइल-हमास युद्ध ने 2023 के आखिर में यूक्रेन पर रूस के हमलों से ध्यान थोड़ा हटा लिया था. लेकिन इससे पहले के कुछ महीनों में दोनों ही तरफ युद्ध की स्थिति में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ था. यूक्रेन को नए सिरे से जवाबी हमला शुरू करने से पहले टैंक, हथियार और पश्चिमी देशों से प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, जिसका उद्देश्य अज़ोव सागर तक पहुंचना माना जाता है. लेकिन यूक्रेनी सेना को रूसी सैनिकों, कई रक्षा मोर्चों, बारूदी सुरंगों और अन्य खतरों का सामना करना पड़ा, जिससे या तो धीरे-धीरे लाभ हुआ, या बिल्कुल भी लाभ नहीं हुआ.

पश्चिमी देश यूक्रेन के साथ सार्वजनिक रूप से एकजुट रहे हैं और अगले साल होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव सहित अन्य चुनाव इस बात को प्रभावित कर सकते हैं कि भविष्य में कीव को कितनी सहायता मिलेगी. रूस को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है. निजी सैन्य समूह वैग्नर के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन द्वारा मास्को की ओर कूच करने से रूस के लिए चुनौती खड़ी हो गई थी. हालांकि प्रिगोझिन ने अपने अभियान को रोक दिया था और कुछ हफ्ते बाद एक रहस्यमय, भीषण विमान दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गई.

अफ्रीका में अशांति:

पूर्वी अफ्रीका के बड़े देश सूडान में अप्रैल में असैन्य युद्ध शुरू हो गया. देश की सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्स नामक अर्द्धसैनिक बल आमने सामने थे. दोनों के बीच संघर्ष में खारतूम के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर गोलीबारी में विमानों में आग लग गई और सूडान को उसके नागरिकों को समुद्री, हवाई और जमीनी मार्ग से सुरक्षित निकालना पड़ा. इस संघर्ष में अब तक 9,000 लोग मारे जा चुके है।

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Fri, 15 Dec 2023 19:55:15 +0530 Newsdesk
America: यूएस हाउस रिपब्लिकन ने राष्ट्रपति जो बाइडेन पर महाभियोग जांच के लिए किया मतदान... https://citytoday.co.in/45 https://citytoday.co.in/45

America: अमेरिकी संसद ने राष्ट्रपति जो बाइडेन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इस प्रस्ताव में राष्ट्रपति जो बाइडेन के बेटे हंटर बाइडेन के अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को लेकर जांच की मांग की गई है

रिपब्लिकन पार्टी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन इसमें उनकी संख्या कम थी, जिससे यह पास नहीं हुआ. बाइडेन ने इसे एक राजनीतिक खेल कहकर ठुकराया और कहा कि यह आधारहीन है.

उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ बयान किया, कहते हुए कि वे यूक्रेन और इजरायल को भेजे जाने वाले फंड को रोक रहे हैं और संसद में रिपब्लिकन उनकी मदद के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं. बाइडेन ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए फंडिंग की आवश्यकता है, लेकिन उन्हें संसद में मदद नहीं मिल रही.

इस तरह, वे यह सुनिश्चित करना चाह रहे हैं कि देश की जनता को उनके नेता के साथ है और उन्हें देश की महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करने का मौका मिले।

मौजूदा राष्ट्रपति के बेटे हंटर बाइडेन ने बुधवार को कैपिटल के बाहर एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में शामिल होकर रिपब्लिकन द्वारा मांग की गई बंद दरवाजे की गवाही में उपस्थित होने का इनकार किया। उन्होंने फिर से एक सार्वजनिक सुनवाई में गवाही देने की पेशकश की।

यह सभी मुद्दे से जुड़े हुए हैं और इस पर जांच होना जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके। हंटर बाइडेन ने खुद को निर्दोष साबित करने का प्रयास किया है और वह इस मामले में सही तरीके से समर्थन करने के लिए तैयार हैं।

इस विवाद में, कानूनी प्रक्रिया अहम है और उससे यह साबित हो सकता है कि क्या राष्ट्रपति के बेटे हंटर बाइडेन के खिलाफ कोई आरोप सही है या नहीं।

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Thu, 14 Dec 2023 21:24:05 +0530 Newsdesk
IPL 2024 Auction: 19 दिसंबर को होगी भारतीय प्रीमियर लीग 2024 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी, ऑक्शन की शेड्यूल से जुड़ी सभी बातें..... https://citytoday.co.in/33 https://citytoday.co.in/33
IPL 2024 Auction: भारतीय प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2024 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी 19 दिसंबर को दुबई में होगी, इस बार पहली बार ऑक्शन का आयोजन भारत के बाहर होगा। इस दौरान, 10 टीमों में से 70 खाली रोस्टर स्थानों को भरने के लिए 333 क्रिकेटरों का पूल बनाया जाएगा।

हर साल की तरह, आईपीएल इस नीलामी के माध्यम से हाई-स्टेक ड्रामा के साथ आगाज़ होगा, जिससे भारत और विश्वभर के क्रिकेट प्रेमियों को 'क्रिकेट के कॉकटेल' का आनंद लेने का मौका मिलेगा। इसलिए, नीलामी 2024 के लिए यह पहला कदम है,जो उत्साह और रोमांच को बढ़ाने का एक नया मौका प्रदान करेगा। फैंस उत्साह भरे क्रिकेट सप्ताह की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जब उनके पसंदीदा टीमें नए खिलाड़ियों को चुनने का निर्णय लेंगी और सीजन की शुरुआत के लिए तैयारी करेंगी। 

आईपीएल 2024 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी 19 दिसंबर को दुबई, यूएई में होगी, जिसका आयोजन भारतीय समयानुसार दोपहर 3:30 बजे शुरू होगा. इस बार टूर्नामेंट को भारत के बाहर आयोजित करने का निर्णय उस समय की आधारित है जब महामारी के प्रतिबंधों के कारण पिछले दो सीजन में भी आईपीएल को संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित करना पड़ा था।इस बार का आयोजन भी उसी प्रकार से किया जा रहा है।

इस साल उन्हें विदेशों में नीलामी करने का एकमात्र कारण यह था कि इस समय भारत में शादी का मौसम है।आईपीएल के एक अधिकारी के अनुसार, इस समय में होटल की उपलब्धता की समस्या उत्पन्न हो सकती है, इसलिए उन्होंने दुबई में नीलामी आयोजित करने का फैसला किया।

पिछले साल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने भी ऐसा ही करने की योजना बनाई थी. पहले यह सोचा गया था कि पिछले आईपीएल सीजन की नीलामी इस्तांबुल में होने वाली थी, लेकिन बीसीसीआई ने इसे आगे नहीं बढ़ाया. इस समय के फैसले के पीछे होटल उपलब्धता की समस्या और भारत में शादी सीज़न के आते ही बढ़ जाने वाली शादी से जुड़ी स्थिति को मद्दद करने की चुनौती बनी रही है। इसलिए, इस बार भी विदेश में नीलामी का आयोजन करने का फैसला किया गया है।

नीलामी प्रक्रिया: आईपीएल नीलामी में 10 टीमों के लिए 333 खिलाड़ियों का चयन करने के लिए विशेष त्वरित प्रक्रिया का उपयोग होता है.

प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी: 14 देशों से आए 333 क्रिकेटरों में से 214 भारतीय हैं, और 119 विदेशी खिलाड़ी हैं. नीलामी में 2 खिलाड़ी सहयोगी सदस्य देशों के हैं।

कैप्ड और अनकैप्ड:  प्रतियोगिता में 116 कैप्ड और 215 अनकैप्ड खिलाड़ी होंगे, और 23 एलीट खिलाड़ियों का रिजर्व प्राइस सबसे ज्यादा 2 करोड़ है।

मार्की नामों का आरक्षित मूल्यांकन:  2024 आईपीएल में मार्की नामों के लिए उच्चतम सोपानक का मूल्यांकन 2 करोड़ रुपये है। इसमें ऑस्ट्रेलिया के मिचेल स्टार्क, इंग्लैंड के बेन स्टोक्स और भारत के श्रेयस अय्यर और हर्षल पटेल जैसे खिलाड़ी शामिल हैं।

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Wed, 13 Dec 2023 21:51:22 +0530 Newsdesk
Israel&Hamas War: अमेरिका,इजरायल के खिलाफ हुआ भारत, संयुक्त राष्ट्र महासभा में शांति की मांग करते हुए किया मतदान https://citytoday.co.in/31 https://citytoday.co.in/31 Israel-Hamas War: इजराइल-हमास के बीच चल रही जंग में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में शांति की मांग करते हुए मतदान किया। भारत ने मसौदा प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें तत्काल मानवीय युद्धविराम के साथ-साथ सभी बंधकों की बिना शर्त रिहाई की मांग शामिल थी। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जो कि यूएन के 153 सदस्य देशों ने समर्थन दिया। इसके अतिरिक्त, 23 देश वोटिंग में शामिल नहीं हुए और 10 देश प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मंगलवार को 193 सदस्यीय आपातकालीन विशेष सत्र में मिस्र द्वारा पेश किए गए मसौदे प्रस्ताव को समर्थन देते हुए एडॉप्ट किया। यह समर्थन 27 अक्टूबर के पूर्व प्रस्ताव की तुलना में अधिक था, जिसमें 'मानवीय संघर्ष विराम' का आह्वान किया गया था। उस समय, प्रस्ताव के समर्थन में 120 और विरोध में 14 मत पड़े थे, जबकि 45 देश अनुपस्थित रहे।

अमेरिका, इजराइल,सहित ग्वाटेमाला, लाइबेरिया समेत 10 देश ने युद्ध विराम प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। प्रस्ताव में सभी बंधकों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, सभी पक्षों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का पालन करने की मांग की गई।

यह प्रस्ताव सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के खिलाफ है, लेकिन महासभा के प्रस्ताव को कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं ठहराया जाता है, बल्कि इसका संदेश दुनिया की राय को दिखाने का काम करता है। हमास के द्वारा इजराइल पर सात अक्टूबर को किए गए हमले के बाद, गाजा में चल रहे संघर्ष में हजारों की मौतें हो चुकी हैं।" जॉर्डन द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में पूरे गाजा पट्टी में नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के तत्काल, निरंतर, पर्याप्त और निर्बाध प्रावधान की भी मांग की गई थी.

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Wed, 13 Dec 2023 21:05:20 +0530 Newsdesk
IND vs SA 2nd T20I:टीम इंडिया और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला होगा आज.. https://citytoday.co.in/21 https://citytoday.co.in/21 IND vs SA 2nd T20I:टीम इंडिया और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला आज, यानी 12 दिसंबर को होगा। यह मुकाबला गकेबेरहा शहर के सेंट जॉर्ज पॉर्क में रात 8:30 बजे से खेला जाएगा। साउथ अफ्रीका में शाम 5 बजे इस मुकाबले की शुरुआत होगी।

इस सीरीज का पहला मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो गया था। इसलिए, बचे हुए दोनों मुकाबलों की जीतने वाली टीम ही सीरीज पर कब्जा करेगी। हर मुकाबला इस सीरीज के लिए महत्वपूर्ण होगा। टीम इंडिया की कमान सूर्यकुमार यादव के कंधों में है, जबकि साउथ अफ्रीका की कमान एडन मारक्रम के हाथों में है।

इस सीरीज के लिए टीम इंडिया के युवा खिलाड़ियों को मौका मिला है, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया में हुए हालिया टी20 सीरीज में अपने प्रदर्शन से जमकर सुर्खियां बटोरी थी। लेकिन साउथ अफ्रीकी सरजमीं पर असली परीक्षा होने जा रही है। दोनों टीमों के प्लेइंग इलेवन इस प्रकार है-

टीम इंडिया: यशस्वी जायसवाल, ऋतुराज गायकवाड़, श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), रिंकू सिंह, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, मुकेश कुमार, रवि बिश्नोई, मोहम्मद सिराज, अर्शदीप सिंह.

साउथ अफ्रीका: रीजा हेंडरिक्स, मैथ्यू ब्रीटज्के, एडन मारक्रम, हेनिरक क्लासेन (विकेटकीपर), डेविड मिलर, डोनोवन फेरिएरा, मार्को यान्सिन/ आंदिले फेहलुख्वायो, केशव महाराज, जेराल्ड कोएत्जी, नांद्रे बर्गर, तबरेज शम्सी.

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Tue, 12 Dec 2023 20:57:40 +0530 Newsdesk