City Today & : राजनीति https://citytoday.co.in/rss/category/Politics City Today & : राजनीति en Copyright 2022 citytoday.co.in& All Rights Reserved.CITYTODAY MEDIA PRIVATE LIMITED JP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास हिरासत में:जंतर&मंतर पर तिरंगा लहरा रहे थे; सरकार ने कल से ही यहां प्रदर्शन बैन किया https://citytoday.co.in/9338 https://citytoday.co.in/9338 जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास हिरासत में, तिरंगा लेकर की नारेबाजी
नई दिल्ली में प्रदर्शन स्थल को लेकर विवाद, जंतर-मंतर की सूची से हटाए जाने के बाद पुलिस ने की कार्रवाई
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए नेता
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। दोनों पार्टी समर्थकों के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे, जहां उन्होंने तिरंगा लहराते हुए नारेबाजी की। पुलिस ने मौके पर बैरिकेडिंग कर रखी थी और बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात थे।
प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया जंतर-मंतर
केंद्र सरकार ने सोमवार को जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया था। इसके बाद यहां प्रदर्शन करने को लेकर विवाद बढ़ गया। गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश पर दिल्ली में रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को प्रदर्शन स्थलों के रूप में निर्धारित किया गया है।
CJP ने पुलिस से मांगी थी प्रदर्शन की अनुमति
CJP नेताओं ने संसद मार्ग थाने पहुंचकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग की थी। पार्टी ने पुलिस से 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा था। सौरव दास ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को नागरिकों का अधिकार बताया था, जबकि आशुतोष रांका ने जवाब नहीं मिलने पर आगे के आंदोलन की तारीख घोषित करने की बात कही थी।
दो दिन पहले ही हिरासत से रिहा हुए थे नेता
इससे पहले 10 अक्टूबर को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था। 11 अक्टूबर को तीनों को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 50-50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा किया गया। रिहाई की शर्तों के अनुसार, उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखनी होगी और शांति भंग करने वाली गतिविधियों से दूर रहना होगा।
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर CJP का विरोध
CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में प्रदर्शन कर रही है। पार्टी ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया के साथ चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने भी SIR से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां जताई थीं।

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Tue, 13 Oct 2026 11:25:44 +0530 news desk MPcg
विपक्ष का मार्च शुरू, राहुल बस में बैठे:कहा& कोई भी आए, ये शिवजी की बारात; SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका देंगे https://citytoday.co.in/9319 https://citytoday.co.in/9319 विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च शुरू, राहुल गांधी बस में बैठे; बोले- शिवजी की बारात जैसा है प्रदर्शन, कोई भी हो सकता है शामिल

SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक का प्रदर्शन, संविधान बचाने की मुहिम बता रहे राहुल गांधी; सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी

राहुल गांधी बोले- शिवजी की बारात जैसा है मार्च

दिल्ली में कांग्रेस समेत INDIA ब्लॉक के विपक्षी दलों का ‘चलो दिल्ली मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ शुरू हो गया है। मार्च के दौरान राहुल गांधी बस में बैठे नजर आए। इससे पहले उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह मार्च शिवजी की बारात जैसा है, जिसमें कोई भी शामिल हो सकता है। राहुल गांधी ने प्रदर्शन को संविधान बचाने की मुहिम बताते हुए कहा कि यह किसी सरकार से लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा का प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, विपक्ष पीछे नहीं हटेगा।

सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाल रहे विपक्षी दल

कांग्रेस सहित INDIA ब्लॉक के नेता और कार्यकर्ता दिल्ली के बाराखंभा रोड पर एकत्र हुए। यहां से विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाल रहे हैं। इस प्रदर्शन के जरिए विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहा है। मार्च को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई है। विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान

राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक विपक्ष का प्रदर्शन जारी रहेगा। विपक्षी दल चुनाव आयोग की भूमिका और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनकी मांग है कि इन मुद्दों पर कार्रवाई की जाए और उनकी आपत्तियों पर उचित सुनवाई हो। विपक्ष ने अपने आंदोलन को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा से जोड़ते हुए आगे भी संघर्ष जारी रखने की बात कही है।

SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी

विपक्षी दल SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया को लेकर कई सवाल हैं, जिन पर न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है। मार्च के जरिए विपक्ष अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाना चाहता है। हालांकि, याचिका पर अदालत का रुख और आगे की कानूनी प्रक्रिया उसके समक्ष रखे जाने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली की व्यवस्था पर उठाए सवाल

मार्च से पहले राहुल गांधी ने दिल्ली के इंदिरा भवन में करीब 40 मिनट तक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली को किले में बदल दिया गया है और लोगों की आवाजाही प्रभावित करने के लिए ट्रेनें तथा बसें रोकी जा रही हैं। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों को बचाने के लिए है। अब मार्च शुरू होने के बाद राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और सभी की नजरें विपक्ष की मांगों तथा आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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Mon, 12 Oct 2026 14:46:18 +0530 news desk MPcg
CEC के खिलाफ विपक्ष का आज सुप्रीम कोर्ट तक मार्च:6 मेट्रो स्टेशन बंद; CJI सूर्यकांत का राहुल&खड़गे से मिलने से इनकार https://citytoday.co.in/9311 https://citytoday.co.in/9311 CEC के खिलाफ विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च आज: 6 मेट्रो स्टेशन बंद; CJI सूर्यकांत ने राहुल-खड़गे से मिलने से किया इनकार

‘चलो दिल्ली मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ के तहत जुटेगा विपक्ष
वोट चोरी के आरोपों और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस समेत INDIA ब्लॉक की विपक्षी पार्टियां आज दिल्ली में बड़ा मार्च निकालेंगी। इस प्रदर्शन को कांग्रेस ने ‘चलो दिल्ली मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया है। विपक्षी नेता दोपहर 1:30 बजे कनॉट प्लेस-बाराखंभा रोड जंक्शन पर जुटेंगे। यहां से सभी नेता सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने की कोशिश करेंगे।

CJI से मुलाकात की मांग, लेकिन नहीं मिला समय
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को CJI सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था। राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेता CJI को ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हालांकि, CJI ने मुलाकात से इनकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, CJI की ओर से कहा गया कि जिन मुद्दों को लेकर विपक्ष मिलना चाहता है, उनसे जुड़े मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। कांग्रेस ने कहा कि वह CJI के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेगी।

CEC के इस्तीफे और SIR रोकने की मांग
विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इसके अलावा SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाने और चुनाव में बैलट पेपर के इस्तेमाल की मांग भी की जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं और लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। विपक्षी दल इन मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

10 अक्टूबर की हिरासत और कथित मारपीट का भी विरोध
विपक्षी दल 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और उनके साथ कथित मारपीट का भी विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसी को लेकर विपक्ष ने आज के मार्च को व्यापक राजनीतिक विरोध का रूप दिया है।

दिल्ली में सुरक्षा बढ़ी, 6 मेट्रो स्टेशन बंद
विपक्ष के मार्च को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जनपथ, मंडी हाउस समेत 6 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए हैं। कई इलाकों में बैरिकेडिंग की गई है और पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रदर्शन के कारण मध्य दिल्ली के कई प्रमुख रास्तों पर यातायात प्रभावित होने की संभावना है। पुलिस और प्रशासन की ओर से लोगों को यात्रा की योजना बनाकर निकलने की सलाह दी गई है।

9 अक्टूबर को राष्ट्रपति मुर्मू को सौंपा था ज्ञापन
इससे पहले 9 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के नेताओं ने संसद से विजय चौक तक मार्च निकाला था। मार्च के बाद विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपा था। इसमें चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और SIR से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं रखी गई थीं। विपक्ष अब इन्हीं मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।

संजय राउत बोले- लोग इस फैसले को याद रखेंगे
शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने CJI से मुलाकात नहीं मिलने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि INDIA ब्लॉक ने चीफ जस्टिस से मिलने के लिए समय मांगा था, लेकिन मुलाकात से इनकार कर दिया गया। राउत ने कहा कि विपक्ष वोटों की चोरी, चुनावी धोखाधड़ी और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने जैसे मुद्दों पर अपनी शिकायत बताना चाहता है। उन्होंने कहा कि लोग इस फैसले को याद रखेंगे।

विपक्ष का कहना है कि यह मार्च केवल राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों को उठाने की कोशिश है। वहीं, दिल्ली पुलिस और प्रशासन की ओर से प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

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Mon, 12 Oct 2026 11:03:44 +0530 news desk MPcg
हिरासत के बाद अभिजीत दीपके का पहले से रिकॉर्ड वीडियो जारी, बोले& अब अजिंक्य शिंदे संभालेंगे आंदोलन; 1,000 समर्थक हिरासत में https://citytoday.co.in/9303 https://citytoday.co.in/9303 हिरासत के बाद अभिजीत दीपके का पहले से रिकॉर्ड वीडियो जारी, बोले- अब अजिंक्य शिंदे संभालेंगे आंदोलन; 1,000 समर्थक हिरासत में

दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई, कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को एयरपोर्ट पर हिरासत में लेने का दावा; ध्रुव राठी को भी गुरुग्राम स्थित घर से पकड़े जाने की खबर

दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए गए पार्टी नेता

नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रोकने की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस कार्रवाई की खबर सामने आई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई है। ये तीनों मुंबई से दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। पार्टी समर्थक जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

अभिजीत दीपके का पहले से रिकॉर्ड वीडियो जारी

हिरासत की खबरों के बीच CJP ने अभिजीत दीपके का पहले से रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो जारी किया है। इसमें दीपके कहते हैं कि यदि उन्हें हिरासत में ले लिया जाता है, तो उनके बाद आंदोलन की जिम्मेदारी अजिंक्य शिंदे संभालेंगे। वीडियो के जरिए उन्होंने प्रदर्शन जारी रखने के लिए अगले नेतृत्व का नाम बताया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में वीडियो रिकॉर्ड किए जाने का समय स्पष्ट नहीं है।

ध्रुव राठी समेत करीब 1,000 समर्थकों को हिरासत में लेने का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया। इसके अलावा राजधानी के अलग-अलग स्थानों से करीब 1,000 समर्थकों को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की कार्रवाई के बीच प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे लोगों को जंतर-मंतर तक पहुंचने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

सड़कों पर पुलिस की सख्ती, वाहनों को रोकने के इंतजाम

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की खबर है। रिपोर्ट के अनुसार, वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए कुछ सड़कों पर कीलें लगाई गई हैं। पुलिस जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे CJP समर्थकों को हिरासत में ले रही है। कार्रवाई के दौरान राजधानी के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है।

महाराष्ट्र में अभिजीत दीपके के घर की सुरक्षा बढ़ाई गई

दिल्ली में कार्रवाई के बीच महाराष्ट्र के संभाजीनगर में अभिजीत दीपके के घर की सुरक्षा बढ़ाए जाने की भी जानकारी दी गई है। प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दों में मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा और SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग शामिल है। फिलहाल, हिरासत में लिए गए लोगों की आगे की कार्रवाई और प्रदर्शन की अगली रणनीति को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

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Sat, 10 Oct 2026 13:25:23 +0530 news desk MPcg
CJI बोले& मक्खी मारने के लिए हथौड़ा न चलाएं:दिल्ली मेट्रो पूरी तरह बंद नहीं कर सकते; CJP प्रोटेस्ट से पहले सख्ती पर सरकार को फटकार https://citytoday.co.in/9293 https://citytoday.co.in/9293 CJI बोले- मक्खी मारने के लिए हथौड़ा न चलाएं: दिल्ली मेट्रो पूरी तरह बंद नहीं कर सकते

CJP के प्रदर्शन से पहले सख्ती पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, CJI सूर्यकांत ने कहा- रोकथाम के लिए उतनी ही कार्रवाई हो जितनी जरूरी

सख्ती के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शनिवार को होने वाले प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली में बढ़ाई गई सख्ती पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सवाल किए। CJI सूर्यकांत ने कहा कि कुछ गतिविधियों को रोकना जरूरी हो सकता है, लेकिन कार्रवाई उतनी ही होनी चाहिए जितनी वास्तव में आवश्यक हो।

मक्खी मारने के लिए हथौड़ा न चलाएं

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि किसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरत से ज्यादा कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा उपायों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

पूरी तरह मेट्रो बंद करने पर भी सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की मेट्रो सेवा को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के लिए कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसका भी ध्यान रखना होगा।

57 मेट्रो स्टेशन बंद रखने की तैयारी

प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में आज रात 9 बजे से 57 मेट्रो स्टेशन बंद रखने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन आने वाली सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को शनिवार के लिए रद्द किया गया है। रेलवे ने इन ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशनों से ही रद्द करने का फैसला लिया है।

दिल्ली बॉर्डर और जंतर-मंतर पर सुरक्षा बढ़ी

CJP के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली बॉर्डर और जंतर-मंतर समेत कई स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी में हैं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी में सुरक्षा व्यवस्था और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन रखने पर जोर दिया गया है।

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Fri, 09 Oct 2026 17:04:16 +0530 news desk MPcg
उपचुनाव की 6 सीटों पर काउंटिंग जारी, बंगाल में BJP आगे; तमिलनाडु में TVK को बढ़त https://citytoday.co.in/9277 https://citytoday.co.in/9277 चार राज्यों की 6 सीटों पर उपचुनाव की काउंटिंग जारी, बंगाल में BJP आगे; तमिलनाडु में TVK की बढ़त

चार राज्यों की 6 सीटों पर हुए उपचुनाव की मतगणना शुक्रवार को जारी है। शुरुआती रुझानों में पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर भाजपा उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम सीटों पर अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) आगे चल रही है। असम की नगांव लोकसभा सीट पर भी भाजपा को शुरुआती बढ़त मिली है।

नंदीग्राम सीट पर BJP-कांग्रेस में सीधा मुकाबला
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट इस उपचुनाव की सबसे चर्चित सीटों में शामिल है। यहां TMC उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दिया था। इसके बाद सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला बन गया। शुरुआती रुझानों में भाजपा उम्मीदवार आगे चल रहे हैं।

कांग्रेस उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के लिए मिली थी जमानत
नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार को एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें चुनाव लड़ने के लिए जमानत मिली। इसके बाद उन्होंने उपचुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। अब मतगणना के शुरुआती रुझानों में भाजपा प्रत्याशी बढ़त बनाए हुए हैं।

रेजीनगर में भी BJP ने बनाई बढ़त
पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी शुरुआती रुझानों में भाजपा आगे चल रही है। यहां भी मुकाबला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मतगणना के साथ तस्वीर लगातार साफ होती जा रही है और सभी दलों की नजर अंतिम नतीजों पर है।

तमिलनाडु की दोनों सीटों पर TVK आगे
तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर TVK उम्मीदवार शुरुआती रुझानों में बढ़त पर हैं। मुख्यमंत्री विजय की पार्टी के लिए ये उपचुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं। दोनों सीटों के नतीजे पार्टी के राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं।

असम की नगांव लोकसभा सीट पर BJP को बढ़त
असम की नगांव लोकसभा सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार शुरुआती रुझानों में आगे चल रहे हैं। यहां लोकसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा की बढ़त पर पार्टी कार्यकर्ताओं की नजर बनी हुई है। हालांकि अंतिम परिणाम आने तक रुझानों में बदलाव संभव है।

6 अक्टूबर को हुआ था मतदान
चार राज्यों की इन 6 सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान कराया गया था। अब शुक्रवार को वोटों की गिनती जारी है। शुरुआती रुझानों के आधार पर बंगाल की दो सीटों और असम की नगांव लोकसभा सीट पर भाजपा को बढ़त मिली है, जबकि तमिलनाडु की दोनों सीटों पर TVK आगे चल रही है। अंतिम परिणाम आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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Fri, 09 Oct 2026 11:29:38 +0530 news desk MPcg
विपक्ष का राजघाट मार्च, कल जंतर&मंतर गए थे:बस में राहुल&प्रियंका, सड़क पर सैकड़ों कार्यकर्ता; 300 सांसद के साथ होने का दावा https://citytoday.co.in/9275 https://citytoday.co.in/9275 विपक्ष का राजघाट मार्च: राहुल-प्रियंका बस से पहुंचे, सड़क पर सैकड़ों कार्यकर्ता; 300 सांसद साथ होने का दावा

नई दिल्ली में SIR को लेकर विपक्षी सांसदों का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन जारी है। गुरुवार को कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसद राजघाट की ओर मार्च के लिए रवाना हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सांसदों को लंच पर बुलाया, जिसके बाद सभी नेता और सांसद बसों से राजघाट के लिए निकले। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मार्च में शामिल रहे।

राजघाट जाने से पहले खड़गे ने की अपील
राजघाट के लिए रवाना होने से पहले मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्षी सांसद महात्मा गांधी की समाधि पर जाकर सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना करेंगे। विपक्षी दलों का कहना है कि SIR समेत कई मुद्दों को लेकर उनकी आपत्तियां हैं और वे सरकार के सामने अपनी मांगें रख रहे हैं।

राहुल-प्रियंका बस में, सड़क पर जुटे कार्यकर्ता
मार्च के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बस में नजर आए। उनके साथ समाजवादी पार्टी, TMC समेत कई विपक्षी दलों के सांसद भी मौजूद रहे। बसों के साथ बड़ी संख्या में विपक्षी कार्यकर्ता सड़क पर चलते हुए राजघाट की ओर बढ़े।

राहुल बोले- 300 से ज्यादा सांसद साथ
राहुल गांधी ने दावा किया कि इस मार्च में विपक्ष के 300 से ज्यादा सांसद उनके साथ हैं। विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेता भी मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान SIR के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।

बुधवार को जंतर-मंतर पर हुआ था प्रदर्शन
इससे पहले बुधवार को विपक्षी सांसद जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था। गुरुवार को विपक्ष ने एक बार फिर मार्च का कार्यक्रम बनाया और इस बार राजघाट जाने का फैसला किया।

राजघाट पर पहुंचने को लेकर सुरक्षा बढ़ाई गई
विपक्षी नेताओं के मार्च को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। पुलिस ने राजघाट और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग की है। मार्च के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

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Thu, 08 Oct 2026 16:49:52 +0530 news desk MPcg
राहुल&प्रियंका के खिलाफ दो दिन में दूसरी FIR:खड़गे ने फिर विपक्षी सांसदों को लंच पर बुलाया, कल इसी के बाद जंतर&मंतर प्रोटेस्ट हुआ था https://citytoday.co.in/9260 https://citytoday.co.in/9260 राहुल-प्रियंका के खिलाफ दो दिन में दूसरी FIR, SIR के विरोध में विपक्ष का लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन; खड़गे ने फिर बुलाई लंच मीटिंग

नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन जारी है। इसी बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस से कथित मारपीट के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस मामले में तीन FIR दर्ज हुई हैं।

दो दिन में राहुल-प्रियंका के खिलाफ दूसरी FIR

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ यह दो दिनों में दूसरी FIR बताई जा रही है। इससे पहले 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों के मार्च के दौरान आकाशवाणी भवन में प्रवेश करने के मामले में FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद बुधवार को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में भी पुलिस ने कार्रवाई की है।

राहुल बोले- FIR से नहीं डरता

FIR दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने कहा था कि वह FIR से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने दावा किया था कि उनके खिलाफ पहले ही 45 FIR हो चुकी हैं और वे चाहते हैं कि यह संख्या 100 तक पहुंचे। कांग्रेस लगातार SIR की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रही है।

जंतर-मंतर पर राहुल-प्रियंका ने किया था प्रदर्शन

बुधवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई। विपक्षी दल SIR को लेकर चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं।

खड़गे ने लगातार दूसरे दिन बुलाया लंच

इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने INDIA ब्लॉक के नेताओं और विपक्षी सांसदों के लिए लगातार दूसरे दिन लंच का आयोजन किया है। गुरुवार को लंच कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल स्थित मोएट्स रेस्टोरेंट में दोपहर 1:45 बजे रखा गया है। बुधवार को खड़गे ने कनॉट प्लेस के सागर रत्ना रेस्टोरेंट में विपक्षी सांसदों को लंच दिया था।

लंच के बाद राजघाट जाएंगे विपक्षी नेता

बुधवार के लंच के बाद विपक्षी सांसद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए रवाना हुए थे। गुरुवार को भी लंच के बाद कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेता राजघाट जाने की तैयारी में हैं। यहां वे महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे। राजघाट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और पुलिस की तैनाती की गई है।

मोएट्स रेस्टोरेंट के पास भारी सुरक्षा

कनॉट प्लेस स्थित मोएट्स रेस्टोरेंट के आसपास गुरुवार को भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इलाके में कई बसें भी लगाई गई हैं। विपक्षी नेताओं के कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की है। इसके बाद नेताओं के राजघाट जाने का कार्यक्रम है।

SIR के मुद्दे पर विपक्ष का विरोध जारी

SIR को लेकर विपक्षी दलों का विरोध लगातार तेज हो रहा है। कांग्रेस समेत INDIA ब्लॉक के नेता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर नहीं होने चाहिए। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।

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Thu, 08 Oct 2026 13:06:01 +0530 news desk MPcg
राहुल जंतर&मंतर पर धरना देने रवाना, विपक्षी सांसद साथ:कहा& ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा; कल प्रियंका के साथ 8 घंटे धरना दिया था https://citytoday.co.in/9249 https://citytoday.co.in/9249 राहुल गांधी जंतर-मंतर पर धरने के लिए रवाना, विपक्षी सांसद भी साथ: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग; कल 8 घंटे चला था प्रदर्शन

नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन बुधवार को भी जारी है। राहुल गांधी विपक्षी सांसदों के साथ जंतर-मंतर पर धरना देने के लिए रवाना हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई विपक्षी नेता भी उनके साथ बस में सवार हुए।

लंच के बाद जंतर-मंतर के लिए निकले सांसद
प्रदर्शन से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी सांसदों के लिए सागर रत्ना रेस्टोरेंट में लंच रखा। करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक के बाद राहुल गांधी, खड़गे और अन्य विपक्षी सांसद बस से जंतर-मंतर के लिए रवाना हुए।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं किया गया है।

कल संसद से चुनाव आयोग तक मार्च रोका गया था
इससे पहले मंगलवार को INDIA ब्लॉक के 200 से ज्यादा सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया था। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने आकाशवाणी परिसर में धरना दिया था।

करीब 8 घंटे चला धरना
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेताओं का धरना कई घंटे तक चला। बाद में पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को हिरासत में लिया। विपक्ष ने अब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

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Wed, 07 Oct 2026 16:26:08 +0530 news desk MPcg
मोदी 50 मिनट में 6 बार बोले&वी विल डू इट:कहा& भारत के विकसित होने तक न थकूंगा, न रुकूंगा; बतौर PM&CM 25 साल पूरे, रिकॉर्ड बनाया https://citytoday.co.in/9234 https://citytoday.co.in/9234 मोदी ने 50 मिनट में 6 बार कहा- “वी विल डू इट”: बोले- भारत के विकसित होने तक न थकूंगा, न रुकूंगा

पीएम मोदी ने सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। करीब 50 मिनट के भाषण में उन्होंने “वी विल डू इट... हम करके दिखाएंगे” का 6 बार जिक्र किया। मोदी ने कहा कि जब तक भारत विकसित नहीं हो जाता, तब तक वे न थकेंगे और न रुकेंगे।

मोदी ने कहा कि उनके लिए 25 साल का सफर केवल उपलब्धियों की कहानी नहीं है, बल्कि यह सीखने और कृतज्ञता का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि जीवन में हर घटना ने कुछ न कुछ सिखाया है। विरोध और कठिन परिस्थितियों ने उन्हें लोकतंत्र की ताकत समझाई और लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

पीएम ने कहा कि अब देश के लिए आराम करने का समय नहीं है। यह समय दूरदर्शी सोच के साथ आगे बढ़ने और देश के लिए खुद को खपा देने का है। उन्होंने युवाओं को भारत के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी के सामने इतिहास बदलने का बड़ा अवसर है, जिसे गंवाना नहीं चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत को टेक्नोलॉजी, खेल और उद्योग समेत हर क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करना है। एक दिन ऐसा आएगा जब दुनिया भारत में बने विमानों की चर्चा करेगी। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब देश दूरदर्शी नीतियां बनाएगा और हर क्षेत्र में परिश्रम की पराकाष्ठा करेगा।

पीएम मोदी ने भारत के बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय देश में ब्लैकआउट खबर बनती थी, जबकि आज सोलर पावर की चर्चा हो रही है। आज मेड इन इंडिया मोबाइल फोन दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने खेती का भी उदाहरण देते हुए कहा कि आजादी के बाद खेती की वृद्धि दर किसी दशक में सबसे अधिक रही तो वह 2015 से 2025 का दशक रहा।

मोदी ने भारत के पुराने गौरव और कठिन दौर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत कभी विश्व की अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करता था, लेकिन गुलामी के दौर में देश को लूटा गया और उसकी संस्थाओं तथा ज्ञान की परंपरा को नुकसान पहुंचाया गया। इसके बावजूद भारत की संतानों का साहस कभी नहीं टूटा।

उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक के दिल में यह संकल्प होना चाहिए कि प्राचीन भारत के गौरव को फिर से स्थापित करना है। भारत को दुनिया में अपनी मजबूत पहचान और नेतृत्व कायम करना है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल सरकार का नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयास से पूरा होगा।

दिल्ली में कार्यक्रम से पहले पीएम मोदी ने सरोजनी नगर स्थित श्री विनायक मंदिर में पूजा और आरती की। वे करीब 25 मिनट मंदिर में रहे। इसके बाद उन्होंने कार्यक्रम में पहुंचकर भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

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Wed, 07 Oct 2026 12:27:31 +0530 news desk MPcg
बंगाल उपचुनाव में भाजपा का बड़ा दांव, नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी के PA की मां को टिकट; रेजीनगर से शाश्वर सरकार उम्मीदवार https://citytoday.co.in/9001 https://citytoday.co.in/9001 पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा ने रेजीनगर और नंदीग्राम सीट के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने रेजीनगर से शाश्वर सरकार और नंदीग्राम से हसीरानी रथ को प्रत्याशी बनाया है। हसीरानी रथ भाजपा के वरिष्ठ नेता और बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के PA रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ की चुनावी नतीजों के कुछ दिन बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

नंदीग्राम से हसीरानी रथ को टिकट, पहले TMC से जुड़ा रहा परिवार

हसीरानी रथ नंदीग्राम इलाके में स्थानीय राजनीति से जुड़ी रही हैं और पंचायत सदस्य भी रह चुकी हैं। बताया गया है कि वह पहले TMC से जुड़ी थीं। अब भाजपा ने उन्हें नंदीग्राम जैसी हाई-प्रोफाइल सीट से मैदान में उतारकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।

इस सीट पर पहले से ही मुकाबला काफी अहम माना जा रहा है। नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से TMC और भाजपा के बीच टकराव का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में चंद्रनाथ रथ की हत्या और उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच हसीरानी को टिकट दिए जाने से चुनावी लड़ाई और चर्चा में आ गई है।

चुनाव परिणाम के तीसरे दिन चंद्रनाथ की गोली मारकर हत्या

6 मई की रात नॉर्थ 24 परगना के मध्यमग्राम में चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह 42 वर्ष के थे। घटना विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के तीसरे दिन हुई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रनाथ अपनी कार में थे, तभी बाइक से आए हमलावरों ने कार के पास पहुंचकर गोलीबारी की। हमलावरों ने कार की खिड़की के पास पिस्टल सटाकर फायरिंग की थी। कार के शीशे पर गोलियों के निशान भी मिले थे।

मामले में पुलिस ने हत्या की जांच शुरू की थी। हालांकि हत्या के पीछे की पूरी वजह और इसमें शामिल लोगों को लेकर जांच से जुड़े तथ्यों को आधिकारिक तौर पर सामने आना बाकी है।

## नंदीग्राम में TMC के दो गुटों की भी सीधी टक्कर

नंदीग्राम उपचुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां TMC के दो अलग-अलग गुट भी आमने-सामने हैं। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी TMC गुट ने मोहम्मद एतेशामुल हक को उम्मीदवार बनाया है।

वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने संचिता प्रधान डे को टिकट दिया है। दोनों पक्ष खुद को असली TMC बताते हुए पार्टी के चुनाव चिह्न ‘जोड़ा घास फूल’ पर अपना दावा कर रहे हैं।

चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे हैं और 16 सितंबर तक जवाब देने को कहा है। यदि चुनाव से पहले आयोग इस विवाद पर फैसला नहीं कर पाता है, तो मौजूदा चुनाव चिह्न को अस्थायी रूप से फ्रीज करने की स्थिति बन सकती है। ऐसी स्थिति में दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनाव मैदान में उतरना पड़ सकता है।

नंदीग्राम में भाजपा का मजबूत रिकॉर्ड, ममता को मिली थी हार

नंदीग्राम की राजनीति का बंगाल की सत्ता से सीधा संबंध रहा है। 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और TMC को राज्य की राजनीति में बड़ी ताकत बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसी आंदोलन के बाद नंदीग्राम TMC की राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस मुकाबले में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था। इसके बाद नंदीग्राम भाजपा और TMC के बीच राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र बना रहा।

2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर से भी चुनाव लड़ा और दोनों सीटों पर जीत हासिल की। भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराया। अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट मिले।

दोनों सीटों पर जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनी।

 चार राज्यों की छह सीटों पर होने हैं उपचुनाव

पश्चिम बंगाल की दो सीटों के अलावा तमिलनाडु, पुडुचेरी और असम में भी खाली हुई सीटों पर उपचुनाव होना है। तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटें विधायकों के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं।

पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी विधानसभा सीट भी एन. रंगासामी के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई। वहीं असम की नगांव लोकसभा सीट प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।

इन उपचुनावों में पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर खास नजर रहेगी। एक तरफ भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी के करीबी परिवार से हसीरानी रथ को मैदान में उतारा है, तो दूसरी तरफ TMC के दो गुटों के बीच मुकाबला पार्टी के लिए भी बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है।

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Tue, 15 Sep 2026 12:12:36 +0530 news desk MPcg
राहुल गांधी के कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ की मांग करने वाले BJP नेता खुद अटके, वीडियो वायरल https://citytoday.co.in/8845 https://citytoday.co.in/8845 राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले वंदे मातरम् पर विवाद

इंदौर में राहुल गांधी के 19 सितंबर को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले वंदे मातरम् को लेकर सियासी विवाद शुरू हो गया है। बीजेपी नेता और संस्था पुरुषार्थ के अध्यक्ष नानूराम कुमावत ने कार्यक्रम की शुरुआत या समापन वंदे मातरम् के सभी छह छंदों के सामूहिक गायन से करने की मांग की है। उन्होंने राहुल गांधी और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी को पत्र भेजकर 10 सितंबर तक इस पर रुख स्पष्ट करने को कहा है।

 पत्रकारों ने गाने को कहा तो खुद अटक गए

इसी बीच नानूराम कुमावत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि जब वह वंदे मातरम् के छह छंद गाने की मांग कर रहे हैं, तो क्या वह खुद इसे गाकर सुना सकते हैं। इसके बाद कैमरे के सामने गाते समय कुमावत शुरुआत की पंक्तियां भी सही तरीके से नहीं गा पाए और कई शब्दों पर अटकते नजर आए।

 दो छंदों की परंपरा पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश

नानूराम कुमावत की संस्था का आरोप है कि कांग्रेस अपने आयोजनों में वंदे मातरम् के केवल दो छंद गाने की परंपरा अपनाती रही है। इसी को लेकर संस्था ने राहुल गांधी के कार्यक्रम में सभी छह छंदों के सामूहिक गायन की मांग की है। संस्था ने मांग पूरी नहीं होने पर कार्यक्रम के बहिष्कार की चेतावनी भी दी है।

 वायरल वीडियो के बाद कांग्रेस को मिला पलटवार का मौका

बीजेपी नेता का वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस को भी बीजेपी पर पलटवार करने का मौका मिल गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ बीजेपी नेता कांग्रेस से वंदे मातरम् के छह छंद गाने की मांग कर रहे हैं, वहीं उनके खुद राष्ट्रगीत गाने में अटकने का वीडियो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

 19 सितंबर के कार्यक्रम से पहले बढ़ा सियासी तापमान

राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम से पहले वंदे मातरम् का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। संस्था की ओर से इसे राष्ट्रीय सम्मान और राष्ट्रभावना से जुड़ा विषय बताया गया है, जबकि बीजेपी नेता के वायरल वीडियो ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। अब 19 सितंबर के कार्यक्रम में वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस का क्या रुख रहता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

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Mon, 07 Sep 2026 17:18:40 +0530 news desk MPcg
यूपी में 2027 की तैयारी तेज, विनोद तावड़े ने BJP संगठन को दिया बूथ मजबूत करने का टारगेट https://citytoday.co.in/8827 https://citytoday.co.in/8827  मिशन 2027 के लिए संगठन मजबूत करने पर जोर

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय लखनऊ दौरे के दौरान संगठन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की। तावड़े ने संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल के साथ चुनाव की तैयारी करने पर जोर दिया।

 हर बूथ के लिए अलग कार्ययोजना बनाने के निर्देश

विनोद तावड़े ने पार्टी पदाधिकारियों को हर बूथ को मजबूत करने का लक्ष्य दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी बूथ को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 2022 के चुनाव में कमजोर रहे और हारे हुए बूथों की पहचान कर वहां विशेष रणनीति बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही शक्ति केंद्रों पर युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

 सभी जातियों को साधने की रणनीति

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में सभी सामाजिक वर्गों को साथ जोड़ने की रणनीति पर भी फोकस किया है। तावड़े ने पार्टी नेताओं से कहा कि किसी भी जाति को उसकी संख्या कम होने के कारण नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हर वर्ग के लोगों से संपर्क बढ़ाकर उन्हें पार्टी से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यह रणनीति समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले के मुकाबले बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने की कोशिश है।

 हारी सीटों और मजबूत विपक्षी उम्मीदवारों पर नजर

बीजेपी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में हारी सीटों की गहन समीक्षा करने की योजना बनाई है। पार्टी संगठन को ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने के लिए कहा गया है, जहां विपक्ष की स्थिति मजबूत है। इसके अलावा मजबूत विपक्षी नेताओं और संभावित उम्मीदवारों की राजनीतिक पकड़ का आकलन कर उनके मुकाबले की रणनीति तैयार करने पर भी जोर दिया गया है। पार्टी की कोशिश चुनाव से पहले कमजोर क्षेत्रों में अपना संगठन मजबूत करने की है।

 मार्च 2027 तक क्षेत्र में सक्रिय रहने का निर्देश

तावड़े ने पार्टी पदाधिकारियों को लखनऊ में समय बिताने के बजाय अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय रहने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्वागत-सत्कार और VIP कल्चर से दूरी बनाकर संगठन के काम पर ध्यान देने का संदेश दिया। मार्च 2027 तक पदाधिकारियों को लगातार क्षेत्र में प्रवास करने और कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क बनाए रखने को कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठकों में सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने के लिए संगठन के साथ बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हुई।

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Mon, 07 Sep 2026 13:10:47 +0530 news desk MPcg
मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चा, वैष्णव के प्रमोशन और गडकरी के विभाग बदलने की अटकलें https://citytoday.co.in/8730 https://citytoday.co.in/8730 बीजेपी संगठन में बदलाव के बाद अब मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े विस्तार और फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में ऐसी अटकलें हैं कि कैबिनेट में 16 से 17 नए चेहरों को जगह मिल सकती है। वहीं कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव या मंत्रिमंडल से विदाई की संभावना भी जताई जा रही है। माना जा रहा है कि संभावित बदलाव में 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव के राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखा जा सकता है।

 अश्विनी वैष्णव के प्रमोशन की चर्चा

कैबिनेट फेरबदल को लेकर चल रही चर्चाओं में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है। अटकलें हैं कि उनके प्रदर्शन और मौजूदा जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्हें बड़ी भूमिका दी जा सकती है। हालांकि, अभी तक सरकार या बीजेपी की ओर से कैबिनेट विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

 नितिन गडकरी के मंत्रालय में बदलाव की अटकलें

चर्चाओं में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मंत्रालय में बदलाव की संभावना भी बताई जा रही है। इसके अलावा कई पुराने और वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियों को लेकर भी पार्टी के भीतर समीक्षा की बात कही जा रही है। 'आजतक रेडियो' के पॉडकास्ट 'रिपोर्टर्स ऑफ एयर' में भी संभावित कैबिनेट विस्तार और बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं पर चर्चा हुई।

चुनावी तैयारियों के साथ मंत्रियों के प्रदर्शन पर फोकस

बीजेपी की नई संगठनात्मक टीम के गठन के बाद पार्टी का फोकस आगामी चुनावों पर बढ़ गया है। चर्चा के मुताबिक उत्तर प्रदेश और पंजाब के 2027 विधानसभा चुनावों के साथ 2029 लोकसभा चुनाव को भी ध्यान में रखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व मंत्रियों के कामकाज और जमीनी स्तर पर उनकी सक्रियता की समीक्षा कर रहा है। हालिया कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंत्रियों को जमीनी स्तर पर काम करने और जनता से बेहतर संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया था।

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Wed, 02 Sep 2026 14:48:56 +0530 news desk MPcg
बांकीपुर हार के बाद RJD में बड़ा संगठनात्मक रीसेट: जिला से पंचायत तक सभी कमेटियां भंग; नई टीम में युवा और जमीनी चेहरों पर नजर https://citytoday.co.in/7946 https://citytoday.co.in/7946 बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने संगठन में बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है। पार्टी ने बिहार में प्रदेश स्तर से लेकर जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक अपनी सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की ओर से 6 अगस्त को इस संबंध में आदेश जारी किया गया। अब पार्टी नए सिरे से संगठन खड़ा करने की तैयारी में है।

यह फैसला ऐसे समय हुआ है, जब बांकीपुर उपचुनाव में RJD उम्मीदवार रेखा गुप्ता को बड़ा झटका लगा। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने यह चुनाव जीता और BJP के लंबे समय से चले आ रहे प्रभाव को तोड़ा। RJD के लिए चिंता की बात यह रही कि उसकी उम्मीदवार न केवल चुनाव हार गईं, बल्कि उनकी जमानत भी जब्त हो गई।

बांकीपुर में क्या हुआ?

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से BJP का मजबूत गढ़ रही थी। 1995 से BJP लगातार इस सीट पर जीतती रही थी। 2026 के उपचुनाव में मुकाबला मुख्य रूप से BJP, RJD और जन सुराज के बीच था। RJD ने रेखा गुप्ता को फिर से उम्मीदवार बनाया था, जबकि जन सुराज ने अपने संस्थापक प्रशांत किशोर को मैदान में उतारा।

मतगणना के बाद प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज की। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में वोटों और जीत के अंतर के आंकड़ों में अंतर दिखा, लेकिन सभी प्रमुख रिपोर्टें उनकी जीत और BJP उम्मीदवार की हार की पुष्टि करती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक किशोर ने 64,151 वोट हासिल किए और BJP उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 वोटों से हराया।

इस जीत का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यह जन सुराज की पहली चुनावी जीत थी और बांकीपुर जैसी BJP की मजबूत सीट पर मिली।

RJD के लिए हार से ज्यादा चिंता वोट आधार की

बांकीपुर का परिणाम RJD के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी की पारंपरिक सामाजिक पकड़ को लेकर सवाल उठे हैं। चुनावी विश्लेषणों में यह चर्चा सामने आई कि RJD के पारंपरिक मुस्लिम-यादव समर्थन आधार का एक हिस्सा इस बार जन सुराज की ओर गया हो सकता है।

हालांकि, किसी पूरे सामाजिक समूह के वोट का सटीक बंटवारा केवल चुनाव परिणाम से तय नहीं किया जा सकता। इसलिए इसे निश्चित तथ्य के बजाय राजनीतिक विश्लेषण के रूप में देखना जरूरी है। इकनॉमिक टाइम्स ने भी RJD के लिए इस चुनाव में अपने पारंपरिक वोट आधार में बदलाव को बड़ी राजनीतिक चुनौती के रूप में रेखांकित किया है।

जिला से पंचायत तक संगठन भंग

बांकीपुर नतीजे के कुछ ही दिनों बाद RJD ने बिहार में अपनी संगठनात्मक इकाइयों को भंग करने का फैसला किया। इसमें प्रदेश, जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की कमेटियां शामिल हैं।

6 अगस्त को प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की ओर से जारी आदेश के बाद अब पार्टी को नई टीम तैयार करनी होगी। इस प्रक्रिया में पुराने पदाधिकारियों को दोबारा जिम्मेदारी मिलती है या नए चेहरों को मौका दिया जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

यह कदम केवल बांकीपुर की हार की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन पार्टी से जुड़े लोगों और रिपोर्टों में संगठन के पुराने ढांचे के पुनर्गठन की जरूरत की चर्चा पहले से भी थी।

मंगनी लाल मंडल अभी प्रदेश अध्यक्ष

इस बीच एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि RJD की आधिकारिक वेबसाइट पर मंगनी लाल मंडल अभी भी बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में दर्ज हैं। इसलिए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने की बात को फिलहाल पुष्ट तथ्य के रूप में नहीं लिखा जा सकता।

मंगनी लाल मंडल ने जून 2025 में RJD के बिहार प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला था। उस समय पार्टी ने उन्हें जगदानंद सिंह के स्थान पर जिम्मेदारी दी थी।

मई 2026 में उनकी खराब सेहत के कारण संगठन में कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर चर्चा जरूर सामने आई थी, लेकिन 10 अगस्त तक उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड में मंडल ही प्रदेश अध्यक्ष हैं।

नई टीम में किन चेहरों पर नजर?

RJD के संगठनात्मक बदलाव को लेकर पार्टी के अंदर कई नामों और समीकरणों पर चर्चा हो सकती है, लेकिन फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चार नामों की कोई आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है। इसलिए किसी भी संभावित नाम को तय उम्मीदवार या निश्चित दावेदार बताना जल्दबाजी होगी।

हालांकि पार्टी की मौजूदा राष्ट्रीय टीम में अब्दुल बारी सिद्दीकी, भोला यादव और सुनील कुमार सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। RJD की आधिकारिक सूची में अब्दुल बारी सिद्दीकी को राष्ट्रीय प्रधान महासचिव, सुनील कुमार सिंह को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और भोला यादव को राष्ट्रीय महासचिव बताया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि बांकीपुर उपचुनाव के लिए रेखा गुप्ता की उम्मीदवारी घोषित करते समय भी मंगनी लाल मंडल के साथ अब्दुल बारी सिद्दीकी, भोला यादव और सुनील कुमार सिंह मौजूद थे।

संगठन में युवाओं को मौका देने की चर्चा

RJD के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल नई कमेटियां बनाना नहीं, बल्कि ऐसी टीम तैयार करना है जो बूथ और पंचायत स्तर तक सक्रिय रहे।

बांकीपुर के नतीजे ने पार्टी के लिए शहरी इलाकों में संगठन की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में नई कमेटियों में सक्रिय युवाओं, स्थानीय कार्यकर्ताओं और चुनावी स्तर पर काम करने वाले नेताओं को अधिक जिम्मेदारी मिलने की संभावना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय है।

हालांकि, नई कमेटियों का अंतिम स्वरूप पार्टी नेतृत्व के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।

तेजस्वी के सामने तीन बड़ी चुनौतियां

संगठन भंग होने के बाद RJD के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव के सामने तीन बड़ी चुनौतियां दिखाई दे रही हैं।

1. जमीनी संगठन को मजबूत करना

नई कमेटियों को केवल पदाधिकारियों की सूची तक सीमित रखने के बजाय बूथ, पंचायत और प्रखंड स्तर पर सक्रिय करना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होगा।

2. वोट आधार को बनाए रखना

बांकीपुर में जन सुराज की जीत ने RJD के पारंपरिक सामाजिक समीकरण को लेकर बहस तेज कर दी है। पार्टी को यह समझना होगा कि स्थानीय स्तर पर मतदाताओं की प्राथमिकताएं किस तरह बदल रही हैं।

3. जन सुराज की चुनौती का जवाब

अब बिहार में RJD की मुख्य राजनीतिक चुनौती केवल NDA तक सीमित नहीं मानी जा रही। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बांकीपुर में जीत दर्ज कर अपनी चुनावी मौजूदगी साबित की है।

पार्टी के अंदर असंतोष भी सामने आया

बांकीपुर परिणाम के बाद RJD के भीतर संगठन और नेतृत्व को लेकर सवाल उठे हैं। विधायक भाई वीरेंद्र ने सार्वजनिक रूप से कहा कि तेजस्वी के आसपास ऐसे लोगों को हटाने की जरूरत है जिनका जमीनी प्रभाव नहीं है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को जमीनी वास्तविकता से जुड़ने की सलाह दी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी RJD के भीतर असंतोष और अलग-अलग नेताओं की नाराजगी का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव के आसपास के राजनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं की ओर से भी संगठन को लेकर चिंता सामने आई है।

इससे साफ है कि नई कमेटियों का गठन केवल संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर संतुलन बनाने की चुनौती भी होगा।

2025 में रेखा गुप्ता को मिले थे करीब 47 हजार वोट

बांकीपुर उपचुनाव में RJD ने रेखा गुप्ता पर दोबारा भरोसा जताया था। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने उम्मीदवार घोषित करते समय बताया था कि नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में रेखा गुप्ता को करीब 47 हजार वोट मिले थे। इसी आधार पर पार्टी ने उन्हें दोबारा मैदान में उतारा।

लेकिन उपचुनाव में उनका प्रदर्शन कमजोर रहा और रिपोर्टों के मुताबिक वह आवश्यक वोट प्रतिशत हासिल नहीं कर सकीं, जिसके चलते उनकी जमानत जब्त हो गई।

जन सुराज की जीत ने बदला राजनीतिक नैरेटिव

प्रशांत किशोर की जीत को बिहार की राजनीति में इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जन सुराज ने एक ऐसी सीट पर सफलता हासिल की, जिसे BJP लंबे समय से अपना मजबूत इलाका मानती रही थी।

यह जीत अपने आप में पूरे बिहार के राजनीतिक समीकरण बदलने का प्रमाण नहीं है, लेकिन इससे जन सुराज को संगठन विस्तार और भविष्य की चुनावी राजनीति के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ जरूर मिला है।

RJD के लिए चुनौती यह है कि वह इस नए राजनीतिक खिलाड़ी को केवल शहरी या सीमित प्रभाव वाली पार्टी मानकर नजरअंदाज न करे।

अब आगे क्या?

सभी संगठनात्मक इकाइयों के भंग होने के बाद अब RJD को नई कमेटियों के गठन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसमें प्रदेश से लेकर जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक नए पदाधिकारियों का चयन किया जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि नई टीम में पुराने अनुभवी नेताओं को कितना स्थान मिलता है और कितने नए चेहरे आगे आते हैं। साथ ही यह भी देखना होगा कि पार्टी संगठन में सामाजिक समीकरण और जमीनी सक्रियता के बीच किस तरह संतुलन बनाती है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बांकीपुर का नतीजा RJD के लिए सिर्फ एक उपचुनाव की हार नहीं रहा। इस हार के बाद पार्टी ने पूरे बिहार संगठन को रीसेट करने का फैसला किया है। अब इस रीसेट का असर नई कमेटियों, नेतृत्व के फैसलों और आने वाले चुनावों की रणनीति में दिखाई देगा।

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Mon, 10 Aug 2026 17:41:48 +0530 news desk MPcg
हल्द्वानी में खड़गे का BJP सरकार पर हमला: बोले& ‘ये झूठे लोगों की सरकार, मुख्यमंत्री गड्ढे तक नहीं भर पा रहे’; कांग्रेस की सरकार बनाने का दावा https://citytoday.co.in/7847 https://citytoday.co.in/7847 कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शनिवार को उत्तराखंड के हल्द्वानी पहुंचे। रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र और उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। खड़गे ने बेरोजगारी, खाली सरकारी पदों, सड़क और बुनियादी सुविधाओं समेत कई मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

खड़गे ने कहा कि हल्द्वानी से ही कांग्रेस के लिए विजय का शंखनाद होगा और आगामी विधानसभा चुनाव में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनेगी। उन्होंने उत्तराखंड को देवभूमि और वीरों की भूमि बताते हुए कहा कि यहां के लोग देश के लिए लड़ने वाले और बहादुर हैं।

‘ये झूठे लोगों की सरकार, मुख्यमंत्री गड्ढे नहीं भर पा रहे’

खड़गे ने अपने भाषण में उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार जनता से किए वादे पूरे नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य का मुख्यमंत्री गड्ढे तक नहीं भर पा रहा है।

उन्होंने बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में करीब 30 लाख सरकारी पद खाली हैं। खड़गे ने सवाल किया कि जब बड़ी संख्या में पद खाली हैं तो उन्हें भरा क्यों नहीं जा रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे में विकसित भारत की बात कैसे की जा सकती है।

खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के रोजगार संबंधी वादों का जिक्र करते हुए भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार देने के मामले में सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर सकी।

‘BJP-RSS ने आजादी की लड़ाई में कुछ नहीं किया’

कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा और RSS पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और संघ ने देश की आजादी के आंदोलन में कोई योगदान नहीं दिया और कांग्रेस नेताओं को देशभक्ति का पाठ पढ़ाने का उन्हें अधिकार नहीं है।

खड़गे ने कहा कि कांग्रेस संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के साथ गरीबों, महिलाओं और छात्रों के अधिकारों के लिए लड़ रही है। उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक पदयात्रा कर संविधान की रक्षा का संदेश दिया।

उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों से कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस सरकार और जनता के मुद्दों के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

राहुल गांधी का भी किया जिक्र

खड़गे ने अपने भाषण में राहुल गांधी को लेकर भी कहा कि भाजपा नेताओं में अगर कोई किसान, मजदूर और गरीबों से मिलने के लिए निकला है तो वह राहुल गांधी हैं।

उन्होंने राहुल गांधी की यात्राओं और बेरोजगारी, किसानों तथा संविधान से जुड़े मुद्दों को कांग्रेस के अभियान का हिस्सा बताया।

‘मनमोहन सिंह ने 62 हजार करोड़ का किसान कर्ज माफ किया’

कांग्रेस अध्यक्ष ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में किसानों का 62 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया गया था।

खड़गे ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए खाद्य सुरक्षा कानून और मनरेगा जैसे कानून लागू किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो वादे करेगी, उन्हें पूरा करेगी।

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी BJP को घेरा

खड़गे ने भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा जिन नेताओं को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजती है, बाद में उन्हीं नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर लेती है।

उन्होंने भाजपा पर ‘वॉशिंग मशीन’ की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के बाद भाजपा में शामिल होने पर उनके खिलाफ मामले कमजोर पड़ जाते हैं।

खड़गे ने कहा कि वह करीब 58 साल से राजनीति में हैं और ब्लॉक अध्यक्ष से लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता राजनीतिक दबाव से डरने वाले नहीं हैं।

‘नौकरी के लिए पैसा देना पड़ता है’ का आरोप

खड़गे ने उत्तराखंड में रोजगार और भर्ती व्यवस्था को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शासन में नौकरी के लिए पैसे देने पड़ते हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस बेरोजगार युवाओं, किसानों, मजदूरों और गरीबों के मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरेगी।

मंच से लगे SSP के खिलाफ नारे

खड़गे की जनसभा के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से नैनीताल के SSP मंजूनाथ टीसी के खिलाफ नारे लगाए गए। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस प्रशासन पर पार्टी कार्यकर्ताओं और जनसभा में आने वाली बसों को रोकने का आरोप लगाया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत पार्टी नेताओं ने SSP कार्यालय के बाहर धरना भी दिया।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बसों को अलग-अलग जगहों पर रोका जा रहा है। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया।

हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनसभा में आने वाले लोगों के वाहनों को रोका जा रहा है। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी।

रुद्रपुर में पूर्व विधायक और पुलिस अधिकारियों में बहस

खड़गे की जनसभा में शामिल होने के लिए आ रही बसों की पंतनगर मोड़ पर जांच के दौरान पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और पुलिस अधिकारियों के बीच विवाद की स्थिति बनी।

पूर्व विधायक ने पुलिस अधिकारियों पर कांग्रेस की सभा में जाने वाली बसों को रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताई।

जनसभा को लेकर बदली गई यातायात व्यवस्था

खड़गे की सभा को देखते हुए हल्द्वानी में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया था। पुलिस ने अलग-अलग मार्गों से आने वाले वाहनों के लिए पार्किंग स्थल निर्धारित किए थे।

रामपुर रोड से आने वाले वाहनों को एचएन इंटर कॉलेज में खड़ा करने की व्यवस्था की गई। बरेली रोड से आने वाले वाहनों के लिए लक्ष्मी शिशु मंदिर, मंगलपड़ाव में पार्किंग निर्धारित की गई।

खटीमा और सितारगंज की तरफ से आने वाले वाहनों के लिए गोलापार स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के फिटनेस केंद्र के सामने पार्किंग की व्यवस्था की गई।

पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले वाहनों के लिए ठंडी सड़क और खालसा इंटर कॉलेज मैदान निर्धारित किया गया था। वहीं कालाढूंगी और रामनगर की ओर से आने वाले वाहनों को जेल रोड तिराहे से पर्वतीय उत्थान मंच और लगन गार्डन की ओर भेजने की व्यवस्था की गई।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से निर्धारित यातायात व्यवस्था का पालन करने और पुलिसकर्मियों का सहयोग करने की अपील की।

चुनावी तैयारी के लिहाज से अहम दौरा

खड़गे का हल्द्वानी दौरा उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस के आगामी चुनावी अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जनसभा में उन्होंने स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसानों और संविधान से जुड़े मुद्दे उठाए।

अपने संबोधन के दौरान खड़गे ने कांग्रेस को राज्य में सत्ता में वापस लाने का आह्वान किया और हल्द्वानी से पार्टी के चुनावी अभियान की शुरुआत का संदेश दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी जनता से किए जाने वाले वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी।

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Sat, 08 Aug 2026 14:08:03 +0530 news desk MPcg
PM मोदी से मिले सुखबीर बादल, पंजाब में फिर साथ आ सकते हैं अकाली&BJP: गठबंधन की अटकलें तेज, AAP और कांग्रेस ने साधा निशाना https://citytoday.co.in/7813 https://citytoday.co.in/7813 विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली में मोदी-सुखबीर मुलाकात से बदले पंजाब के सियासी समीकरण; 25 साल पुराना गठबंधन टूटने के बाद दोनों दलों के दोबारा साथ आने की चर्चा

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर पुराने सियासी समीकरणों की वापसी के संकेत मिलने लगे हैं। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं की बैठक के बाद पंजाब में अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच दोबारा गठबंधन की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पंजाब विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने का समय बचा है। हालांकि अभी तक दोनों दलों की ओर से गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संसद भवन में हुई मोदी-सुखबीर की मुलाकात

जानकारी के मुताबिक, सुखबीर सिंह बादल शुक्रवार सुबह दिल्ली पहुंचे और संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं कि क्या पंजाब में एक बार फिर अकाली दल और भाजपा पुराने सहयोगी के रूप में चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।

दोनों दलों के बीच गठबंधन पहले करीब ढाई दशक तक चला था और पंजाब की राजनीति में इसे सबसे मजबूत राजनीतिक गठबंधनों में से एक माना जाता रहा है।

AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कसा तंज

मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात पर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के जरिए निशाना साधा।

केजरीवाल ने तंज करते हुए लिखा—

“ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे… तो क्या चंदा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है?”

केजरीवाल के इस बयान में उन्होंने भाजपा और अकाली दल पर पुराने विवादों को लेकर हमला बोला।

सुखबीर बादल ने केजरीवाल को दिया जवाब

केजरीवाल के बयान पर सुखबीर सिंह बादल ने भी पलटवार किया।

उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले AAP ने पंजाब में अवैध खनन को रोकने का दावा किया था, लेकिन अब हालात इसके उलट हैं।

सुखबीर बादल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की कई घोषणाएं और गारंटी जमीन पर पूरी नहीं हुई हैं।

कांग्रेस ने भी गठबंधन की संभावनाओं पर प्रतिक्रिया दी

पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी भाजपा-अकाली दल की संभावित नजदीकियों पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि दोनों दल दोबारा साथ आ सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इससे पंजाब की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा।

कांग्रेस का कहना है कि दोनों दलों की पुरानी छवि और पिछले विवादों के कारण मतदाताओं पर इसका सीमित असर पड़ेगा।

25 साल चला था अकाली-BJP गठबंधन

पंजाब की राजनीति में अकाली दल और भाजपा का गठबंधन काफी पुराना रहा है।

दोनों दलों के बीच वर्ष 1996 में गठबंधन हुआ था, जो करीब 25 वर्षों तक चला।

इस गठबंधन ने पंजाब में तीन बार सरकार बनाई:

1997 में पहली बार गठबंधन सरकार बनी
2007 में दोबारा सत्ता में वापसी हुई
2012 में लगातार दूसरी बार सरकार बनाई

पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के दिग्गज नेता प्रकाश सिंह बादल इस गठबंधन को कई बार “नाखून और मांस” जैसा रिश्ता बताते थे।

इसका मतलब था कि दोनों पार्टियां लंबे समय तक एक-दूसरे की राजनीतिक ताकत बनी रहीं।

क्यों सफल रहा था अकाली-BJP गठबंधन?

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, अकाली दल और भाजपा गठबंधन की सफलता के पीछे कई कारण थे।

1. अलग-अलग वोट बैंक पर मजबूत पकड़

अकाली दल की ग्रामीण पंजाब, किसानों और सिख समुदाय के बड़े हिस्से में मजबूत पकड़ थी।

वहीं भाजपा का आधार पंजाब के शहरी क्षेत्रों और हिंदू मतदाताओं के बीच मजबूत माना जाता था।

दोनों दलों के वोट बैंक अलग होने के कारण गठबंधन को चुनावों में फायदा मिलता था।

2. सीट शेयरिंग का मजबूत फॉर्मूला

गठबंधन के दौरान दोनों दलों के बीच सीटों का एक तय समीकरण था।

अकाली दल आमतौर पर ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ता था, जबकि भाजपा शहरी प्रभाव वाली सीटों पर मैदान में उतरती थी।

इस व्यवस्था से दोनों दल अपने मजबूत क्षेत्रों में चुनाव लड़ते थे और कार्यकर्ताओं का सहयोग भी मिलता था।

3. 2012 में बनाया था इतिहास

2012 का विधानसभा चुनाव अकाली-BJP गठबंधन के लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।

गठबंधन ने उस चुनाव में 68 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी।

पंजाब के राजनीतिक इतिहास में इससे पहले कोई भी पार्टी या गठबंधन लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी नहीं कर पाया था।

2020 में क्यों टूटा था गठबंधन?

अकाली दल और भाजपा का गठबंधन वर्ष 2020 में टूट गया था।

इसकी बड़ी वजह कृषि कानूनों को लेकर विवाद था।

किसान आंदोलन के दौरान अकाली दल ने भाजपा से अलग होने का फैसला लिया था। इसके बाद दोनों पार्टियों ने 2022 का विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा।

गठबंधन टूटने का 2022 चुनाव पर असर

2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा और अकाली दल के अलग-अलग चुनाव लड़ने का असर दोनों दलों के प्रदर्शन पर दिखाई दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार:

दोनों दलों का पारंपरिक वोट बैंक बंट गया।
आम आदमी पार्टी को इसका बड़ा फायदा मिला।
AAP ने खुद को कांग्रेस और अकाली-BJP गठबंधन के विकल्प के रूप में स्थापित किया।
कांग्रेस का भी पारंपरिक वोट प्रभावित हुआ।

2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल कर पंजाब में सरकार बनाई।

अगर दोबारा गठबंधन हुआ तो क्या बदलेगा समीकरण?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भाजपा और अकाली दल आगामी विधानसभा चुनाव में साथ आते हैं तो पंजाब की राजनीति का मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।

संभावित असर:

AAP के लिए चुनौती बढ़ सकती है

सत्ता में मौजूद आम आदमी पार्टी को दो बड़े राजनीतिक दलों के संयुक्त मुकाबले का सामना करना पड़ सकता है।

कांग्रेस की रणनीति प्रभावित हो सकती है

कांग्रेस को भाजपा-अकाली गठबंधन के खिलाफ अपनी चुनावी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी होगी।

वोट बैंक का पुनर्गठन संभव

दोनों दलों के पुराने समर्थक दोबारा एकजुट हो सकते हैं।

अभी गठबंधन पर अंतिम फैसला नहीं

हालांकि मोदी-सुखबीर मुलाकात के बाद चर्चाएं तेज हैं, लेकिन भाजपा और अकाली दल की ओर से अभी तक गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

दोनों दल आने वाले दिनों में राजनीतिक परिस्थितियों, सीटों के समीकरण और चुनावी रणनीति को देखते हुए फैसला ले सकते हैं।

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले यह मुलाकात राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।

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Fri, 07 Aug 2026 17:53:50 +0530 news desk MPcg
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर संसद में हंगामा, खड़गे ने पूछा& 'ED कहां है?', विपक्ष ने उठाई जांच की मांग https://citytoday.co.in/7643 https://citytoday.co.in/7643 अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को सदन में उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा और मामले में जांच की मांग की। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए।

खड़गे ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले का जिक्र करते हुए पूछा कि इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) कहां है और अब तक क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि राम मंदिर देश की आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए इससे जुड़े किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए।

संसद में इस मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों ने सरकार पर निशाना साधा और मामले की जांच कराने की मांग रखी। विपक्ष की ओर से कहा गया कि अगर किसी मामले में आर्थिक अनियमितता या किसी तरह की गड़बड़ी के आरोप सामने आते हैं तो उसकी जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस दौरान सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य मामलों में जांच एजेंसियां सक्रिय रहती हैं, तो इस मामले में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने कहा कि जनता को पूरे मामले की जानकारी मिलनी चाहिए।

इस मुद्दे को लेकर संसद परिसर में भी विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शन किया। नेताओं ने नारेबाजी करते हुए मामले की जांच और सरकार से जवाब की मांग की। विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार को इस मामले में स्थिति साफ करनी चाहिए और जांच की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

वहीं, सत्तापक्ष की ओर से विपक्ष के आरोपों को खारिज किया गया और कहा गया कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रहा है। दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी के चलते संसद का माहौल गर्म रहा और यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।

राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े इस मामले को लेकर अब सभी की नजर आगे की कार्रवाई पर है। फिलहाल यह मामला आरोपों और राजनीतिक बहस के बीच है। मामले से जुड़े तथ्यों और जांच की स्थिति को लेकर आने वाले समय में तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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Tue, 04 Aug 2026 17:11:49 +0530 news desk MPcg
दतिया उपचुनाव हार पर PM मोदी का मंथन, शिवराज सिंह चौहान से की मुलाकात; बीजेपी में समीक्षा शुरू https://citytoday.co.in/7639 https://citytoday.co.in/7639 मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मिली हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने नतीजों को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को संसद भवन में केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। इस दौरान दतिया उपचुनाव के परिणाम, संगठन की स्थिति और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।

दतिया उपचुनाव में बीजेपी को मिली हार को पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह सीट लंबे समय से बीजेपी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में शामिल रही है। चुनाव परिणाम आने के बाद अब पार्टी नेतृत्व हार के कारणों की समीक्षा में जुट गया है।

शिवराज सिंह चौहान से चुनाव परिणामों पर चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी और शिवराज सिंह चौहान की मुलाकात संसद भवन में हुई। बताया जा रहा है कि बैठक में दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों को लेकर बातचीत हुई। इसमें चुनाव के दौरान सामने आए स्थानीय मुद्दों, संगठन की भूमिका और पार्टी के प्रदर्शन पर चर्चा की गई।

हालांकि इस मुलाकात को लेकर दोनों नेताओं की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे उपचुनाव के परिणामों की समीक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।

दतिया सीट पर बीजेपी को क्यों लगा झटका

दतिया विधानसभा क्षेत्र बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। यहां पार्टी की लंबे समय से पकड़ रही है, लेकिन उपचुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। परिणामों के बाद बीजेपी के अंदर चुनावी प्रबंधन, स्थानीय स्तर पर समन्वय और कार्यकर्ताओं की सक्रियता जैसे मुद्दों पर मंथन शुरू हो गया है।

पार्टी संगठन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि चुनाव के दौरान किन स्तरों पर कमी रही और किन कारणों से मतदाताओं का रुख बदला।

बांकीपुर में हार के बाद भी बीजेपी का मंथन

दतिया के साथ-साथ बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर भी बीजेपी को झटका लगा है। बांकीपुर सीट को बीजेपी का पारंपरिक और मजबूत इलाका माना जाता रहा है। यहां पार्टी करीब 30 से 35 साल से मजबूत स्थिति में थी, लेकिन उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी नेतृत्व ने वहां के परिणामों का भी आकलन शुरू किया है।

इन दोनों उपचुनावों के नतीजों ने पार्टी को आगामी चुनावों की रणनीति पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर किया है।

PM मोदी ने नीतीश कुमार से भी की मुलाकात

दतिया और बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक हुई।

राजनीतिक जानकार इन मुलाकातों को हालिया चुनावी परिणामों और राज्यों में पार्टी की स्थिति की समीक्षा से जोड़कर देख रहे हैं।

बीजेपी में संगठन स्तर पर समीक्षा की तैयारी

उपचुनाव के परिणामों के बाद बीजेपी अब संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी को लेकर रणनीति बना रही है। पार्टी की ओर से बूथ स्तर पर प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं की भूमिका और स्थानीय नेतृत्व की सक्रियता की समीक्षा की जा रही है।

मध्य प्रदेश में दतिया उपचुनाव की हार के बाद प्रदेश संगठन स्तर पर भी बैठकों का दौर शुरू हो गया है। पार्टी यह समझने की कोशिश कर रही है कि मजबूत मानी जाने वाली सीट पर हार के पीछे मुख्य कारण क्या रहे।

आगे की रणनीति पर रहेगा फोकस

बीजेपी नेतृत्व अब आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए कमजोर कड़ियों को दूर करने पर जोर दे रहा है। पार्टी की कोशिश है कि उपचुनावों में मिली सीख के आधार पर संगठन को और मजबूत किया जाए और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए नई रणनीति तैयार की जाए।

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Tue, 04 Aug 2026 16:21:27 +0530 news desk MPcg
संसद के बाहर राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर विपक्ष का प्रदर्शन, लोकसभा&राज्यसभा में हंगामा; सरकार ने आरोपों को बताया राजनीति https://citytoday.co.in/7615 https://citytoday.co.in/7615 संसद के मानसून सत्र के 12वें दिन मंगलवार को राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) समेत अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद परिसर के मकर द्वार पर पहुंचकर नारेबाजी की और मामले में सरकार से जवाब की मांग की।

विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने "चंदा चोर" जैसे नारे लगाए और राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे, दान और अन्य आरोपों की जांच की मांग की।

लोकसभा की कार्यवाही 3 मिनट बाद स्थगित

संसद की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार हंगामे के कारण सदन का कामकाज प्रभावित हुआ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्थिति को देखते हुए सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी।

विपक्षी सांसदों का कहना था कि इस मामले में सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए और आरोपों पर चर्चा कराई जानी चाहिए।

राज्यसभा में भी विपक्ष का हंगामा

लोकसभा के अलावा राज्यसभा में भी राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और मामले पर चर्चा की मांग की। हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चढ़ावे, नकदी, गहने और जमीन के मामलों पर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और जांच एजेंसियों की भूमिका पर जवाब देना चाहिए।

खड़गे ने सरकार से मांगा जवाब

खड़गे ने सदन में कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की पहल पर हुआ था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राम मंदिर से जुड़े कई कार्यक्रमों में शामिल रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और अन्य जांच एजेंसियां क्या कार्रवाई कर रही हैं।

विपक्ष ने मांग की कि सरकार इस मामले में संसद के अंदर जवाब दे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

सरकार का पलटवार- विपक्ष कर रहा राजनीति

विपक्ष के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया और कहा कि जो लोग पहले राम मंदिर का विरोध करते थे, वही अब मंदिर से जुड़े मामलों पर सवाल उठा रहे हैं।

रिजिजू ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लंबे समय तक राम मंदिर निर्माण का विरोध करते रहे और अब राजनीतिक लाभ के लिए यह मुद्दा उठा रहे हैं।

NDA संसदीय दल की बैठक में बनी रणनीति

संसद की कार्यवाही से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में NDA संसदीय दल की बैठक हुई। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत NDA के कई नेता और सांसद मौजूद रहे।

बैठक में संसद की रणनीति, सरकार के विधायी एजेंडे और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।

कावेरी जल विवाद पर DMK सांसदों का प्रदर्शन

राम मंदिर मुद्दे के अलावा तमिलनाडु के DMK सांसदों ने संसद परिसर में कावेरी जल विवाद को लेकर भी प्रदर्शन किया। सांसदों ने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की।

मानसून सत्र में लगातार हंगामा

संसद का मौजूदा मानसून सत्र लगातार हंगामे की वजह से प्रभावित हो रहा है। पिछले कई दिनों से विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर है, जबकि सरकार विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगा रही है।

राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर शुरू हुआ विवाद अब संसद के अंदर राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

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Tue, 04 Aug 2026 11:46:00 +0530 news desk MPcg
लोकसभा में पेश हुआ आयकर संशोधन विधेयक 2026 https://citytoday.co.in/7612 https://citytoday.co.in/7612 विधेयक के तहत पात्र विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investors - FPIs) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities या G-Secs) पर मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) पर स्थायी रूप से आयकर छूट देने का प्रस्ताव है। यह कर राहत 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।

सरकार का मानना है कि इस कदम से भारत के सरकारी बॉन्ड बाजार को मजबूती मिलेगी, विदेशी निवेश बढ़ेगा, बाजार में तरलता (Liquidity) बेहतर होगी और वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय रुपये को स्थिरता मिल सकेगी।

विधेयक में डिजिटल टैक्स प्रशासन को भी मजबूत करने का प्रस्ताव है। इसके तहत औपचारिक जांच के दौरान, कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, कर अधिकारियों को डिजिटल खातों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच करने के लिए कानूनी अधिकार दिए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे कर चोरी पर अंकुश लगाने और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

हालांकि, यह विधेयक अभी संसद की प्रक्रिया से गुजरना बाकी है। लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने तथा राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून के रूप में लागू होगा।

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Mon, 03 Aug 2026 17:18:57 +0530 news desk MPcg
जंतर&मंतर प्रदर्शन पर दिए गए बयान के बाद अब कंगना रनौत के नए वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस तेज कर दी है। https://citytoday.co.in/7611 https://citytoday.co.in/7611 अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल कुछ युवाओं को लेकर दिए गए ‘गटर ट्रैश’ (Gutter Trash) वाले बयान के बाद अब उनका एक और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में कंगना रनौत ने शादी के लिए धर्म परिवर्तन करने वाली कुछ अभिनेत्रियों पर टिप्पणी की है। साथ ही उन्होंने हिंदू बेटियों के लिए समानता की मांग भी उठाई है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर पक्ष और विपक्ष में बहस शुरू हो गई है।

कंगना रनौत अक्सर सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखती हैं। यही वजह है कि उनके बयान अक्सर चर्चा का विषय बन जाते हैं। इस बार भी उनके ताजा बयान पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई यूजर्स उनकी टिप्पणी की आलोचना भी कर रहे हैं।

फिलहाल कंगना के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। इस मुद्दे पर संबंधित अभिनेत्रियों या अन्य पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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Mon, 03 Aug 2026 17:01:17 +0530 news desk MPcg
संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन के बाद पप्पू यादव पर शिकायत, संसदीय मर्यादा पर भी उठा सवाल https://citytoday.co.in/7564 https://citytoday.co.in/7564 संसद परिसर में कथित राम मंदिर चंदा गबन के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा किए गए प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन के बाद पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव कानूनी और राजनीतिक विवादों में घिर गए हैं। दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया और इससे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। समाचार एजेंसी ANI के हवाले से भी शिकायत दर्ज होने की पुष्टि की गई है।

क्या है पूरा मामला?

शुक्रवार को संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने कथित राम मंदिर दान राशि में अनियमितताओं को लेकर एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन को नुक्कड़ नाटक की शैली में प्रस्तुत किया गया, जिसमें सांसदों ने सरकार से इस मामले की जांच और जवाबदेही की मांग की।

इस दौरान पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर एक पुजारी की भूमिका में दिखाई दिए। उनके हाथ में भगवान राम की तस्वीर थी और सामने दानपात्र रखा गया था। प्रदर्शन में शामिल अन्य विपक्षी सांसद श्रद्धालुओं की भूमिका निभाते हुए दानपात्र में पैसे डालते दिखे, जबकि नाटक के हिस्से के रूप में पप्पू यादव उन पैसों को अपनी जेब में रखते नजर आए। विपक्ष का कहना था कि यह केवल कथित दान घोटाले पर सवाल उठाने के लिए किया गया प्रतीकात्मक प्रदर्शन था।

प्रदर्शन के दौरान "चंदा चोर, गद्दी छोड़", "जवाब तुमको देना होगा" और "अमित शाह सदन में आओ" जैसे नारे भी लगाए गए।

शिकायत में क्या आरोप लगाए गए?

जहांगीरपुरी थाने में दर्ज शिकायत में शिकायतकर्ता सूर्य मैथिल ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान भगवान रामलला विराजमान की तस्वीर को अनुचित ढंग से प्रस्तुत किया गया और धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया, जिससे सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाएं आहत हुईं। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि प्रदर्शन को INDI गठबंधन के कई सांसदों का समर्थन प्राप्त था।

ध्यान देने योग्य तथ्य: फिलहाल शिकायत दर्ज होने की पुष्टि हुई है। संबंधित धाराओं में औपचारिक एफआईआर दर्ज हुई है या नहीं तथा पुलिस की आगे की कार्रवाई क्या होगी, इस पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

संसद परिसर में प्रदर्शन पर सख्ती की तैयारी

घटनाक्रम के बाद संसद परिसर में इस प्रकार के वेशभूषा आधारित और नाटकीय प्रदर्शनों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। संसदीय सूत्रों के अनुसार लोकसभा सचिवालय ने संसद परिसर की गरिमा बनाए रखने के लिए ऐसे प्रदर्शनों पर सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताई है और मौजूदा दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करने की बात कही गई है। हालांकि इस संबंध में सचिवालय की ओर से विस्तृत आधिकारिक आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया है।

विपक्ष का पक्ष

समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने प्रदर्शन का बचाव करते हुए कहा कि यह पूरी तरह प्रतीकात्मक था और इसका उद्देश्य अयोध्या में दान राशि से जुड़े कथित आरोपों की ओर सरकार और देश का ध्यान आकर्षित करना था।

उन्होंने दावा किया कि श्रद्धालुओं से दान लेने, रसीद जारी न होने और कथित रूप से सीसीटीवी फुटेज हटाए जाने जैसे आरोपों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहा है।

बीजेपी का पलटवार

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष के प्रदर्शन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि धार्मिक प्रतीकों का इस प्रकार राजनीतिक प्रदर्शन में इस्तेमाल करना सनातन पर आघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष वोट बैंक की राजनीति के लिए धार्मिक आस्थाओं का अपमान कर रहा है।

उधर भाजपा के अन्य नेताओं ने भी संसद परिसर में इस तरह के विरोध प्रदर्शन को संसदीय परंपराओं के विपरीत बताया।

अब आगे क्या?

अब इस मामले में पुलिस शिकायत की जांच करेगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया आधार मिलता है तो कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। दूसरी ओर, विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बताते हुए अपने रुख पर कायम है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शनों की सीमा, संसदीय मर्यादा और धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल मामले पर पुलिस और संसद सचिवालय की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

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Sat, 01 Aug 2026 11:41:49 +0530 news desk MPcg
संसद में राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन, पप्पू यादव पुजारी के वेश में पहुंचे; राहुल गांधी ने दानपेटी में डाला चंदा https://citytoday.co.in/7550 https://citytoday.co.in/7550 मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को संसद परिसर में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा विवाद को लेकर विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव अलग अंदाज में नजर आए। वे पुजारी की वेशभूषा में दानपेटी लेकर संसद के मकर द्वार पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों ने पप्पू यादव की दानपेटी में चंदा डाला। विपक्षी सांसदों के हाथों में बैनर भी थे, जिन पर "अमित शाह संसद से गायब क्यों" जैसे संदेश लिखे हुए थे।

विपक्ष ने इस प्रदर्शन के जरिए राम मंदिर चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले पर सरकार से जवाब मांगा और जांच की मांग उठाई।

पप्पू यादव पुजारी की वेशभूषा में पहुंचे संसद

शुक्रवार सुबह संसद परिसर में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के दौरान सांसद पप्पू यादव सबसे अलग अंदाज में दिखाई दिए। वे पुजारी के कपड़ों में एक दानपेटी लेकर संसद पहुंचे।

उन्होंने दानपेटी को प्रतीकात्मक रूप से रखते हुए राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े मुद्दे पर सवाल उठाए। उनके साथ मौजूद विपक्षी सांसदों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने दानपेटी में चंदा डालकर इस प्रदर्शन का समर्थन किया।

विपक्ष ने उठाया राम मंदिर चढ़ावे का मुद्दा

विपक्षी नेताओं का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और उससे जुड़े मामलों पर सरकार से जवाब मांगा।

प्रदर्शनकारी सांसदों ने आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़े मामलों में सामने आए विवादों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

हालांकि, इस मामले पर सत्तारूढ़ दल की ओर से विपक्ष के आरोपों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सरकार पक्ष लगातार कहता रहा है कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।

लोकसभा में विपक्ष के हंगामे से कार्यवाही प्रभावित

संसद की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

हंगामे के बीच विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगते नजर आए।

दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई और जरूरी विधायी कामकाज आगे बढ़ाया गया।

लोकसभा में जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 पास

हंगामे के बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कराने का प्रस्ताव रखा।

यह विधेयक ध्वनि मत से लोकसभा में पारित हो गया।

विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने तथा संबंधित रिकॉर्ड व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़ा है।

इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को 3 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर सरकार पर साधा निशाना

इससे पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने जेन-जी और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

राहुल गांधी ने सरकार पर कार्रवाई और दबाव बनाने का आरोप लगाया।

राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस

इस बीच भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस दिया है।

भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी ने सदन में गृह मंत्री अमित शाह को लेकर आपत्तिजनक और आधारहीन टिप्पणी की।

दरअसल, पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को स्पीकर के निर्देश पर कार्यवाही से हटाया गया था।

संसद में पहले भी कई मुद्दों पर हुआ हंगामा

मानसून सत्र के दौरान पिछले कुछ दिनों से संसद में लगातार हंगामा देखने को मिल रहा है।

पेपर लीक संशोधन विधेयक

लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त प्रावधान करना है।

वंदे मातरम से जुड़ा विधेयक

संसद में राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में संशोधन को लेकर भी चर्चा हुई। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर विवाद

विपक्ष ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए थे। सत्ता पक्ष ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत का हवाला दिया।

संसद परिसर में बढ़ी राजनीतिक गर्मी

राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर विपक्ष का यह प्रदर्शन मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान का हिस्सा माना जा रहा है।

जहां विपक्ष लगातार विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं सरकार पक्ष अपने फैसलों और विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने में जुटा है।

आने वाले दिनों में संसद में इन मुद्दों को लेकर बहस और राजनीतिक टकराव जारी रहने की संभावना है।

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Fri, 31 Jul 2026 12:35:58 +0530 news desk MPcg
राज्यसभा में पेपर लीक रोकने वाला संशोधन बिल पेश: सजा बढ़ाने से लेकर 2 महीने में जांच और 3 महीने में ट्रायल का प्रावधान; लोकसभा से हो चुका है पास https://citytoday.co.in/7536 https://citytoday.co.in/7536 संसद के मानसून सत्र के 9वें दिन गुरुवार को पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों पर शिकंजा कसने वाला ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026’ राज्यसभा में पेश किया गया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बिल सदन में रखा। इससे एक दिन पहले, 29 जुलाई को लोकसभा ने करीब सात घंटे की चर्चा के बाद विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया था।

यह विधेयक 2024 के Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act में संशोधन करता है। मौजूदा कानून का उद्देश्य UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड, IBPS, NTA और केंद्र सरकार के मंत्रालयों जैसी निर्दिष्ट सार्वजनिक परीक्षा एजेंसियों की परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित साधनों पर रोक लगाना है। 2024 का कानून 21 जून 2024 से लागू है।

बिल में क्या बदलेगा?

संशोधन विधेयक में परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के लिए मौजूदा 3 से 5 साल की सजा बढ़ाकर 5 से 10 साल करने का प्रस्ताव है। जुर्माने की अधिकतम सीमा भी 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपए की जा रही है।

यानी परीक्षा में धोखाधड़ी या अनुचित साधनों के मामले में दोषी पाए जाने पर अब ज्यादा कड़ी सजा का प्रावधान होगा।

सर्विस प्रोवाइडर पर 5 करोड़ तक जुर्माना

परीक्षा कराने वाली एजेंसी या सर्विस प्रोवाइडर की भूमिका सामने आने पर भी सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव है। मौजूदा कानून में ऐसे सर्विस प्रोवाइडर पर अधिकतम 1 करोड़ रुपए का जुर्माना है, जिसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया जा रहा है।

इसके अलावा, परीक्षा संचालन में अनुचित साधनों में शामिल पाए गए सर्विस प्रोवाइडर को सार्वजनिक परीक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी देने पर रोक की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 8 साल करने का प्रस्ताव है।

कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी बढ़ेगी सजा

यदि किसी सर्विस प्रोवाइडर के निदेशक या वरिष्ठ प्रबंधन स्तर के अधिकारी परीक्षा में अनुचित साधनों के लिए जिम्मेदार पाए जाते हैं या उनकी मिलीभगत साबित होती है, तो न्यूनतम सजा को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल करने का प्रस्ताव है। ऐसे मामले में जुर्माना भी 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया जाएगा।

संगठित पेपर लीक गिरोह पर सबसे कड़ा प्रावधान

पेपर लीक को संगठित अपराध के रूप में अंजाम देने वाले गिरोहों और संस्थानों के लिए भी सजा बढ़ाई जा रही है।

मौजूदा कानून में संगठित अपराध के लिए न्यूनतम 5 साल की जेल और कम से कम 1 करोड़ रुपए का जुर्माना है। संशोधन में न्यूनतम सजा 7 साल और न्यूनतम जुर्माना 10 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है।

इसका उद्देश्य पेपर लीक को सिर्फ व्यक्तिगत नकल या धोखाधड़ी का मामला न मानकर संगठित नेटवर्क के रूप में चलने वाले अपराधों पर ज्यादा प्रभावी कार्रवाई करना है।

सिर्फ सजा नहीं, जांच और ट्रायल भी समयबद्ध होंगे

इस बिल की बड़ी खासियत सिर्फ सजा बढ़ाना नहीं है। इसमें पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को समयबद्ध करने का भी प्रावधान है।

प्रस्ताव के अनुसार, किसी मामले की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान होगा। केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर किसी मामले की जांच के लिए Special Task Force भी गठित कर सकेगी।

हर राज्य और UT में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक कोर्ट ऑफ सेशन को Special Fast Track Court के रूप में नामित करने का प्रस्ताव है। ये अदालतें इस कानून के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगी।

प्रस्ताव के अनुसार, ट्रायल रोजाना आधार पर चलाया जाएगा और चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लंबित मामलों को भी इन स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर करने का प्रावधान है।

इन अदालतों के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

हाईकोर्ट में अपील की भी समयसीमा

स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ अपील हाईकोर्ट की दो जजों वाली बेंच में की जा सकेगी।

बिल में अपील का निपटारा भी, जहां तक संभव हो, तीन महीने के भीतर करने का प्रावधान प्रस्तावित है। अपील सामान्यतः आदेश के 30 दिनों के भीतर दाखिल करनी होगी; हालांकि पर्याप्त कारण होने पर देरी को लेकर अदालत के पास सीमित अधिकार प्रस्तावित हैं।

2024 के कानून में क्या था?

पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 बनाया था। यह कानून 12 फरवरी 2024 को अधिनियमित हुआ और 21 जून 2024 से लागू हुआ।

इसमें अनुचित साधनों के मामलों में 3 से 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान था। सर्विस प्रोवाइडर पर 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना और परीक्षा संचालन से 4 साल तक प्रतिबंध का प्रावधान था। संगठित अपराध के लिए न्यूनतम 5 साल की सजा और कम से कम 1 करोड़ रुपए के जुर्माने का प्रावधान था।

अब 2026 का संशोधन इन्हीं प्रावधानों को और सख्त करने की कोशिश है।

किन परीक्षाओं पर लागू होता है कानून?

2024 का कानून केंद्र की निर्दिष्ट सार्वजनिक परीक्षा एजेंसियों की परीक्षाओं पर लागू होता है। इनमें प्रमुख रूप से:

UPSC
Staff Selection Commission यानी SSC
Railway Recruitment Boards
Institute of Banking Personnel Selection यानी IBPS
National Testing Agency यानी NTA
केंद्र सरकार के मंत्रालय और उनके अधीन कार्यालय
केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य प्राधिकरण

शामिल हैं।

NEET विवाद के बीच आया संशोधन

इस संशोधन की टाइमिंग भी महत्वपूर्ण है। 2026 में NEET-UG परीक्षा को लेकर विवाद के बाद परीक्षा रद्द कर दोबारा कराई गई। PRS के अनुसार मई 2026 में NEET-UG को रद्द किया गया और अगले महीने दोबारा परीक्षा कराई गई। विधेयक के उद्देश्य और कारण में भी हाल के वर्षों में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में गड़बड़ी की घटनाओं से सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है।

सरकार का तर्क है कि सख्त सजा, समयबद्ध जांच और फास्ट ट्रैक ट्रायल से पेपर लीक करने वाले व्यक्तियों, संगठित गिरोहों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े संस्थानों पर प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी।

विपक्ष ने उठाए सवाल

वहीं, विपक्ष ने विधेयक को लेकर सरकार से परीक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए सिर्फ सजा बढ़ाने से आगे जाकर सिस्टम में सुधार की मांग की है। लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने परीक्षा संचालन, पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने से जुड़े सवाल उठाए। कुछ विपक्षी सांसदों ने इसे छात्रों की समस्याओं के व्यापक समाधान के बजाय दंड बढ़ाने पर केंद्रित बताया।

संसद के बाहर भी विपक्ष का प्रदर्शन

पेपर लीक बिल के साथ गुरुवार को संसद परिसर में विपक्ष का विरोध भी जारी रहा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी सांसदों ने हालिया छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग की।

राज्यसभा में भी कार्यवाही शुरू होने के दौरान NEET पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्ष ने हंगामा किया। इसके बाद विपक्षी सांसदों के वॉकआउट की खबर सामने आई।

PM मोदी ने की हाईलेवल बैठक

इसी बीच संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय में एक हाईलेवल बैठक भी हुई। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, हरदीप सिंह पुरी, सर्बानंद सोनोवाल और NSA अजीत डोभाल शामिल हुए। प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा भी बैठक में मौजूद रहे।

बैठक के एजेंडे की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए इसे पेपर लीक बिल से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा।

आगे क्या होगा?

अब राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा और उसके बाद मतदान की प्रक्रिया होगी। चूंकि लोकसभा इसे 29 जुलाई को पारित कर चुकी है, इसलिए राज्यसभा की मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद अधिसूचना और लागू होने की प्रक्रिया पूरी होगी।

इस संशोधन का सबसे बड़ा असर तीन स्तरों पर दिखाई देने की उम्मीद है—दोषियों के लिए ज्यादा कड़ी सजा, परीक्षा से जुड़े संस्थानों की ज्यादा जवाबदेही और जांच-ट्रायल को समयबद्ध करने की कोशिश।

हालांकि, कानून के प्रभावी होने के बाद असली चुनौती इसका जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन होगी। पेपर लीक रोकने के लिए सिर्फ सजा बढ़ाना पर्याप्त होगा या परीक्षा प्रणाली, प्रश्नपत्र सुरक्षा, डिजिटल प्रक्रियाओं और एजेंसियों की जवाबदेही में भी बदलाव जरूरी होगा—यह आने वाले समय में इसकी सफलता का अहम पैमाना रहेगा।

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Thu, 30 Jul 2026 14:16:52 +0530 news desk MPcg
देहरा पंचायत समिति पर भाजपा का कब्जा, CM सुक्खू की पत्नी के क्षेत्र में कांग्रेस को झटका https://citytoday.co.in/7527 https://citytoday.co.in/7527 हिमाचल प्रदेश की सियासत में बुधवार को एक अहम स्थानीय चुनावी नतीजा सामने आया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी और देहरा विधानसभा क्षेत्र की विधायक कमलेश ठाकुर के गृह क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी ने पंचायत समिति अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है।

देहरा पंचायत समिति के चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए दोनों प्रमुख पदों पर कब्जा कर लिया। 23 सदस्यीय पंचायत समिति में भाजपा उम्मीदवारों को 15-15 वोट मिले, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार बहुमत से काफी पीछे रह गए।

भाजपा के विनोद बाबू अध्यक्ष और रूबीना चौधरी उपाध्यक्ष चुनी गईं

पंचायत समिति अध्यक्ष पद के लिए हार वार्ड से निर्वाचित विनोद बाबू को चुना गया। वहीं मयोल वार्ड की सदस्य रूबीना चौधरी ने उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की।

चुनाव में दोनों भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को 15-15 मत मिले। इससे साफ हो गया कि समिति के भीतर भाजपा समर्थित सदस्यों की संख्या बहुमत में थी।

कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

कमलेश ठाकुर के क्षेत्र में हार कांग्रेस के लिए बड़ा झटका

देहरा विधानसभा क्षेत्र राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2024 में हुए उपचुनाव के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर यहां से विधायक बनी थीं।

ऐसे में पंचायत समिति अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था।

मुख्यमंत्री की पत्नी के विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की इस जीत को स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं भाजपा इसे संगठन की मजबूती और स्थानीय जनसमर्थन के संकेत के तौर पर पेश कर रही है।

पहले टल चुका था चुनाव

देहरा पंचायत समिति अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया पहले भी प्रभावित हुई थी।

31 मई को पंचायत समिति चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद 9 जुलाई को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई थी। लेकिन उस समय पर्याप्त संख्या में सदस्य उपस्थित नहीं हो सके थे।

23 सदस्यीय पंचायत समिति में कोरम पूरा करने के लिए कम से कम 16 सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी, जबकि बैठक में केवल 15 सदस्य ही पहुंचे थे। इसके कारण चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी।

इसके बाद बुधवार को दोबारा बैठक आयोजित की गई, जिसमें भाजपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।

भाजपा की चुनावी रणनीति रही मजबूत

चुनाव से पहले भाजपा ने पंचायत समिति सदस्यों को एकजुट करने के लिए रणनीति तैयार की थी।

बताया गया कि भाजपा नेताओं और पदाधिकारियों ने सुबह से ही चुनावी तैयारियां शुरू कर दी थीं। जसवां-परागपुर विधायक और पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर तथा गगरेट के पूर्व विधायक राजेश ठाकुर ने निर्वाचित सदस्यों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति बनाई।

इसके बाद भाजपा समर्थित सदस्य एकजुट होकर बीडीओ कार्यालय स्थित सभागार पहुंचे, जहां चुनाव प्रक्रिया पूरी हुई।

वहीं कांग्रेस खेमे में चुनाव को लेकर वैसी सक्रियता नजर नहीं आई। कांग्रेस समर्थित सदस्य बैठक में देरी से पहुंचे और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौके पर मौजूद नहीं दिखे।

बिक्रम ठाकुर बोले- कांग्रेस की उल्टी गिनती शुरू

भाजपा नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर ने इस जीत को कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश बताया।

उन्होंने कहा कि देहरा पंचायत समिति चुनाव के नतीजे बताते हैं कि कांग्रेस का जनाधार कमजोर हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पूर्व विधायक होशियार सिंह को लगातार निशाना बना रही है और जनता ने इसका जवाब चुनाव के जरिए दिया है।

हालांकि कांग्रेस की ओर से इस हार को लेकर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

स्थानीय राजनीति पर पड़ेगा असर

राजनीतिक जानकारों के अनुसार पंचायत स्तर के चुनाव भले ही स्थानीय निकायों से जुड़े होते हैं, लेकिन इनका असर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति पर भी दिखाई देता है।

देहरा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में पंचायत समिति पर भाजपा का नियंत्रण आने वाले समय में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

भाजपा के लिए यह जीत संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं के मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है, जबकि कांग्रेस के लिए यह अपने स्थानीय संगठन और जनसंपर्क रणनीति की समीक्षा का संकेत हो सकती है।

क्या है देहरा का राजनीतिक महत्व?

देहरा विधानसभा क्षेत्र कांगड़ा जिले का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर के विधायक बनने के बाद यह सीट राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र रही है।

ऐसे में पंचायत समिति अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा की जीत को केवल स्थानीय निकाय चुनाव नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक संघर्ष की पृष्ठभूमि के तौर पर भी देखा जा रहा है।

फिलहाल इस चुनाव परिणाम ने हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच जारी राजनीतिक मुकाबले को और तेज कर दिया है।

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Wed, 29 Jul 2026 18:13:26 +0530 news desk MPcg
लोकसभा में राहुल गांधी के 'इडियट' शब्द पर हंगामा: एंटी&पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता&विपक्ष आमने&सामने, बयान हटाने की मांग https://citytoday.co.in/7518 https://citytoday.co.in/7518 लोकसभा में बुधवार को एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी की एक टिप्पणी को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। राहुल गांधी के भाषण के दौरान इस्तेमाल किए गए 'इडियट' शब्द पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई और इसे सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की।

मामला उस समय बढ़ गया, जब राहुल गांधी ने छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए अपने भाषण में कुछ शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और उनसे सदन में भाषा की मर्यादा बनाए रखने की अपील की।

एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान हुआ विवाद

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने परीक्षा व्यवस्था, छात्रों की परेशानियों और पेपर लीक के मुद्दे पर अपनी बात रखी।

उन्होंने छात्रों के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं की आवाज को समझना जरूरी है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन गुस्से, हिंसा या नफरत का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि देश के युवाओं और आने वाली पीढ़ी की भावनाओं की अभिव्यक्ति थी।

राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के मुद्दों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और उनकी चिंताओं का समाधान होना चाहिए।

'इडियट' शब्द पर सत्ता पक्ष ने जताई आपत्ति

राहुल गांधी के भाषण के दौरान उस समय विवाद शुरू हुआ, जब उन्होंने अपने संबोधन में 'इडियट' शब्द का इस्तेमाल किया।

राहुल गांधी ने कहा:

"तीन तरह के लोग होते हैं... विद्यार्थी, अंध भक्त और इडियट। जहां अंधभक्त को लगता है कि इडियट ही भगवान है। आप बताइए स्टूडेंट कौन है और इडियट कौन?"

उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने विरोध जताया। भाजपा सांसदों ने इसे आपत्तिजनक भाषा बताते हुए बयान को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की।

किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर उठाए सवाल

राहुल गांधी की टिप्पणी पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई।

रिजिजू ने कहा कि सदन में बोलते समय शब्दों का चयन सावधानी से किया जाना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की।

रिजिजू ने राहुल गांधी के कुछ आरोपों पर भी सवाल उठाए और कहा कि सदन में बिना प्रमाण किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं है।

राहुल गांधी बोले- अगर सिर्फ BJP को बोलना है तो मैं चुप हो जाऊंगा

किरेन रिजिजू की आपत्ति के बाद राहुल गांधी ने भी जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि जब भी वह सदन में बोलते हैं, सत्ता पक्ष की ओर से कोई न कोई बोलने लगता है।

राहुल गांधी ने कहा:

"अध्यक्ष जी, अगर आप चाहते हैं कि देश में सिर्फ BJP बोले तो मैं चुप होकर बैठ जाऊंगा। मैं जब भी बोलता हूं, BJP की तरफ से कोई न कोई बोलने लगता है।"

इसके बाद सदन में कुछ समय तक हंगामे की स्थिति बनी रही।

अमित शाह और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर भी उठाए सवाल

राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी टिप्पणी की।

उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सरकार की ओर से सख्ती की गई।

राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए।

हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के दावों को खारिज किया और उनसे अपने आरोपों को लेकर माफी मांगने की मांग की।

अखिलेश यादव ने भी उठाई आवाज

विवाद के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव भी राहुल गांधी के समर्थन में बोलने के लिए खड़े हुए।

हालांकि, किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष कार्रवाई की मांग कर सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति या संस्था पर इस तरह के आरोप लगाने से पहले तथ्यों का ध्यान रखना चाहिए।

पेपर लीक रोकने वाले बिल पर हो रही थी चर्चा

यह पूरा विवाद उस समय हुआ, जब लोकसभा में परीक्षा में अनुचित साधनों और पेपर लीक रोकने से जुड़े विधेयक पर चर्चा चल रही थी।

सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करना है।

वहीं विपक्ष लगातार परीक्षा व्यवस्था, छात्रों की समस्याओं और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार से सवाल करता रहा है।

संसद में लगातार गरमाया हुआ है परीक्षा मुद्दा

पिछले कुछ समय से पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे संसद में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

विपक्ष का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए।

वहीं सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

निष्कर्ष

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। 'इडियट' शब्द को लेकर हुए विवाद के बाद सदन में हंगामा हुआ और भाषा की मर्यादा को लेकर बहस शुरू हो गई। हालांकि, पेपर लीक रोकने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार का मुद्दा चर्चा के केंद्र में बना रहा।

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Wed, 29 Jul 2026 14:09:40 +0530 news desk MPcg
CJP प्रदर्शन पर राज्यसभा में सियासी घमासान: खरगे ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल, नड्डा बोले& कानून व्यवस्था के तहत हुई कार्रवाई https://citytoday.co.in/7513 https://citytoday.co.in/7513 संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को राज्यसभा में CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) प्रदर्शन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा सदन में उठा, जिस पर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार को घेरा। वहीं, केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमों के अनुसार कार्रवाई की।

मामला उस समय गरमा गया जब विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती बरती गई और पुलिस कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

खरगे ने उठाया छात्रों पर कार्रवाई का मुद्दा

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने CJP प्रदर्शन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर की गई पुलिस कार्रवाई की जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों ने कार्रवाई की, उनकी भूमिका की जांच कर उचित कदम उठाए जाएं।

खरगे ने सवाल उठाया कि प्रदर्शन स्थल पर पुलिस को भेजने का आदेश किसने दिया और किस आधार पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए।

उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले पर गृह मंत्री की ओर से जवाब देने की मांग भी की।

विपक्ष ने सरकार पर लगाए आरोप

खरगे के बयान के बाद विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया।

विपक्ष की ओर से मांग की गई कि प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अगर किसी अधिकारी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो।

जेपी नड्डा ने दिया सरकार की ओर से जवाब

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह मामला कानून व्यवस्था से जुड़ा सामान्य विषय है। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है और इसी जिम्मेदारी के तहत कार्रवाई की गई।

नड्डा ने कहा कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान प्रशासन को कई परिस्थितियों को संभालना पड़ता है। उन्होंने विपक्ष पर इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कानून के दायरे में कार्रवाई की।

नड्डा ने याद किया छात्र आंदोलन का दौर

बहस के दौरान जेपी नड्डा ने अपने छात्र राजनीति के दिनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह खुद छात्र कार्यकर्ता रहे हैं और आंदोलन के दौरान कई परिस्थितियों का सामना कर चुके हैं।

नड्डा ने आपातकाल के समय का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में छात्र आंदोलन से जुड़े रहने के कारण उन्हें भी गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति और एक्टिविज्म में इस तरह की परिस्थितियां सामने आती रहती हैं।

नड्डा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आंदोलन का अधिकार है, लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है।

'मामले को सनसनीखेज बनाया जा रहा है': नड्डा

केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह एक सामान्य कानून व्यवस्था के मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि घटना को जरूरत से ज्यादा बढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

नड्डा ने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य किसी की आवाज दबाना नहीं, बल्कि व्यवस्था बनाए रखना होता है।

क्या है पूरा मामला?

CJP प्रदर्शन को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी थी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया।

विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया, जबकि सरकार का कहना है कि पुलिस ने भीड़ नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।

संसद में जारी है सियासी टकराव

CJP प्रदर्शन को लेकर राज्यसभा में हुई बहस ने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को बढ़ा दिया है। विपक्ष जहां इसे छात्रों और प्रदर्शन के अधिकार से जोड़ रहा है, वहीं सरकार इसे कानून व्यवस्था का मामला बता रही है।

फिलहाल इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी जारी है और संसद में भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

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Wed, 29 Jul 2026 12:46:44 +0530 news desk MPcg
'सिर्फ सजा बढ़ाने से शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरेगी', परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पर लोकसभा में बोले गौरव गोगोई; सरकार पर लगाए गंभीर आरोप https://citytoday.co.in/7505 https://citytoday.co.in/7505 लोकसभा में मंगलवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुधारों को लेकर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केवल सजा बढ़ाने से परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियां खत्म नहीं होंगी, बल्कि इसके लिए पूरी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है।

गोगोई ने इस विधेयक को "दिखावा" बताते हुए कहा कि सरकार को पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने नीट-यूजी 2024 पेपर लीक विवाद का जिक्र करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

असम बाढ़ का मुद्दा उठाकर शुरू किया भाषण

लोकसभा में विधेयक पर चर्चा शुरू करते हुए गौरव गोगोई ने सबसे पहले असम में आई बाढ़ का मुद्दा उठाया।

उन्होंने सदन से अपील की कि असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए केंद्र सरकार विशेष राहत पैकेज की घोषणा करे। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता की जरूरत है।

'यह कानून नहीं, सरकार की नाकामी छिपाने की कोशिश'

परीक्षा संशोधन विधेयक पर बोलते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक केवल सजा और कानूनी प्रावधानों तक सीमित है, जबकि परीक्षा व्यवस्था की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

गौरव गोगोई ने कहा कि:

पेपर लीक रोकने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है।
परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
छात्रों का भरोसा बहाल करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि "सजा बढ़ाने से शिक्षा में सुधार नहीं होगा।"

नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले का उठाया मुद्दा

गौरव गोगोई ने अपने भाषण में नीट-यूजी 2024 पेपर लीक विवाद का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि नीट विवाद के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों ने प्रदर्शन किए। उनके अनुसार, छात्रों ने अपने भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर आंदोलन किया और अभिभावकों ने भी उनका समर्थन किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने परीक्षा में हुई अनियमितताओं को गंभीरता से नहीं लिया।

'2024 में कानून आया, फिर भी 2026 में पेपर लीक कैसे हुआ?'

कांग्रेस सांसद ने सरकार से सवाल किया कि अगर 2024 में सार्वजनिक परीक्षा कानून लाया गया था, तो उसके बाद भी परीक्षा संबंधी गड़बड़ियां क्यों सामने आईं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने 2024 में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया था, लेकिन इसके बावजूद आगे भी पेपर लीक जैसी घटनाओं के आरोप सामने आए।

गोगोई ने सवाल उठाया कि यदि कानून इतना प्रभावी था तो दो साल बाद भी ऐसी घटनाएं कैसे हुईं।

नीट मामले में जांच और कार्रवाई पर उठाए सवाल

गौरव गोगोई ने नीट-यूजी 2024 मामले की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने दावा किया कि मामले में चार्जशीट दाखिल किए गए कई आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच यह संदेश गया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही।

हालांकि, पेपर लीक मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में चलती है और अंतिम स्थिति अदालतों के फैसलों पर निर्भर करती है।

सरकार पर शिक्षा सुधारों को लेकर निशाना

गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में मूलभूत बदलाव करने के बजाय केवल नए कानून बनाकर समस्या का समाधान दिखाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए जरूरी है कि:

परीक्षा संचालन व्यवस्था मजबूत हो।
डिजिटल सुरक्षा बढ़ाई जाए।
प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए बेहतर व्यवस्था बनाई जाए।
सरकार ने विधेयक को बताया जरूरी कदम

वहीं, केंद्र सरकार की ओर से इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल रोकने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था जरूरी है।

सरकार पक्ष के नेताओं ने कहा कि परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखना और लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।

परीक्षा सुधारों पर संसद में बढ़ी बहस

सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

जहां सरकार इसे परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। विपक्ष लगातार परीक्षा संचालन, पेपर लीक और छात्रों की चिंताओं को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है।

नीट विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था पर बढ़ी निगरानी

नीट-यूजी 2024 विवाद के बाद देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता बड़ा मुद्दा बन गई है।

लाखों छात्र हर साल मेडिकल, इंजीनियरिंग और सरकारी नौकरियों से जुड़ी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली में भरोसे पर सीधा असर डालती हैं।

अब संसद में परीक्षा संशोधन विधेयक पर बहस के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नए कानूनी प्रावधान वास्तव में परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बना पाएंगे या इसके लिए प्रशासनिक सुधारों की भी जरूरत होगी।

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Tue, 28 Jul 2026 15:27:05 +0530 news desk MPcg
अन्ना हज़ारे का मौन आंदोलन: छात्र प्रदर्शन पर सरकार से संवाद की अपील https://citytoday.co.in/7448 https://citytoday.co.in/7448 देश में छात्र आंदोलन और परीक्षा प्रणाली को लेकर बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक विवाद के बीच वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हज़ारे एक बार फिर सार्वजनिक रूप से सक्रिय नजर आए हैं। गुरुवार को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में उन्होंने दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में दो घंटे का मौन आंदोलन (मौन सत्याग्रह) किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र लिखकर छात्रों के मुद्दों को संवेदनशीलता से देखने, संवाद स्थापित करने और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की।

हालांकि अन्ना हज़ारे ने स्वयं किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं किया, लेकिन उनका यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब छात्र आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। उनके पत्र में सरकार को टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लिया जाता है तो इससे सरकार कमजोर नहीं होगी, बल्कि जनता के बीच जवाबदेही और विश्वास का संदेश जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही अन्ना हज़ारे अब पहले की तरह लगातार राष्ट्रीय आंदोलनों का नेतृत्व नहीं करते हों, लेकिन सार्वजनिक जीवन में उनकी नैतिक साख और जनांदोलनों का लंबा अनुभव उनके हर बयान को महत्वपूर्ण बना देता है।

महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने दो घंटे का मौन सत्याग्रह

गुरुवार सुबह 11 बजे अन्ना हज़ारे अहिल्यानगर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने पहुंचे और वहां मौन आंदोलन शुरू किया। दोपहर 1 बजे तक उन्होंने बिना भाषण दिए शांतिपूर्वक धरना दिया। इसके बाद वे अपने गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए।

अन्ना हज़ारे वर्षों से गांधीवादी तरीकों—अनशन, मौन सत्याग्रह और शांतिपूर्ण धरने—को ही अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाते रहे हैं। इसलिए इस बार भी उन्होंने किसी आक्रामक विरोध के बजाय मौन प्रदर्शन के जरिए अपना संदेश देने का प्रयास किया।

पीएम मोदी को लिखे पत्र में क्या कहा?

बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए पत्र में अन्ना हज़ारे ने लिखा कि दिल्ली में छात्रों के आंदोलन के दौरान सामने आई हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें उन्हें अत्यंत दुखद लगीं।

उन्होंने कहा कि—

छात्रों के आक्रोश को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानना उचित नहीं होगा।
इसे समाज की अपेक्षाओं, युवाओं की पीड़ा और व्यवस्था के प्रति बढ़ते असंतोष के रूप में देखा जाना चाहिए।
सरकार को प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ विश्वास का वातावरण बनाकर बातचीत करनी चाहिए।
लोकतंत्र में संवाद हमेशा टकराव से बेहतर विकल्प होता है।
यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लिया जाता है तो इससे सरकार की जवाबदेही मजबूत होगी और जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा।

पत्रकारों से बातचीत में अन्ना हज़ारे ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के सर्वोच्च निर्वाचित नेता हैं, इसलिए जनता की समस्याओं से उन्हें अवगत कराना उनका दायित्व है।

दिल्ली छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि

हाल के दिनों में दिल्ली में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हुआ है। छात्र विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, जवाबदेही, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रहे हैं। इस दौरान कई बार प्रदर्शन और पुलिस के बीच टकराव की खबरें भी सामने आईं, जिसके बाद यह मुद्दा संसद तक पहुंच गया।

संसद के भीतर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसी बीच अन्ना हज़ारे का हस्तक्षेप इस बहस को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और नैतिक विमर्श का विषय भी बना देता है।

कौन हैं अन्ना हज़ारे?

अन्ना हज़ारे का वास्तविक नाम किसन बाबूराव हज़ारे है। उनका जन्म 15 जून 1937 को महाराष्ट्र में हुआ। आर्थिक रूप से साधारण परिवार से आने वाले हज़ारे ने युवावस्था में भारतीय सेना में नौकरी की और 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भी सेवा दी।

सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद वे अपने गांव रालेगण सिद्धि लौटे। उस समय गांव सूखा, गरीबी, बेरोजगारी और नशे जैसी समस्याओं से जूझ रहा था।

अन्ना हज़ारे ने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, सामुदायिक श्रमदान, वृक्षारोपण, नशाबंदी और ग्रामसभा की भागीदारी जैसे उपायों से गांव का व्यापक विकास किया। रालेगण सिद्धि आज ग्रामीण विकास के सफल मॉडलों में गिना जाता है।

यहीं से उनकी पहचान एक समाज सुधारक के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर बनी।

महाराष्ट्र से राष्ट्रीय आंदोलन तक

1990 के दशक में अन्ना हज़ारे ने महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ कई अभियान चलाए। उन्होंने सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई।

उन्होंने सूचना के अधिकार (Right to Information) को लेकर भी लंबा संघर्ष किया। महाराष्ट्र में सूचना का अधिकार कानून लागू कराने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। बाद में इसी विचार ने राष्ट्रीय स्तर पर सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) बनने की दिशा में भी माहौल तैयार किया।

2011 का जनलोकपाल आंदोलन: जिसने भारतीय राजनीति बदल दी

अन्ना हज़ारे का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक आंदोलन वर्ष 2011 में सामने आया।

उस समय देश में एक के बाद एक बड़े भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे थे—

2जी स्पेक्ट्रम मामला
कॉमनवेल्थ गेम्स विवाद
आदर्श हाउसिंग सोसायटी मामला
कोयला आवंटन जैसे मुद्दों पर सरकार सवालों के घेरे में थी।

इसी माहौल में अन्ना हज़ारे ने 5 अप्रैल 2011 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू किया।

उनकी मुख्य मांग थी कि एक स्वतंत्र और शक्तिशाली जनलोकपाल बनाया जाए जो प्रधानमंत्री से लेकर नौकरशाही तक भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच कर सके।

देशभर में अभूतपूर्व जनसमर्थन

अन्ना हज़ारे का आंदोलन स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े शांतिपूर्ण जन आंदोलनों में शामिल माना जाता है।

दिल्ली, मुंबई, पुणे, भोपाल, जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, बेंगलुरु सहित देश के सैकड़ों शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए।

युवाओं, छात्रों, आईटी पेशेवरों, डॉक्टरों, वकीलों, व्यापारियों और मध्यम वर्ग ने आंदोलन को खुलकर समर्थन दिया।

सोशल मीडिया के शुरुआती दौर में फेसबुक, ट्विटर और एसएमएस अभियान के जरिए यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया।

रामलीला मैदान और संसद पर दबाव

अगस्त 2011 में अन्ना हज़ारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में लंबा अनशन किया।

सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। संसद में भी इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई।

आखिरकार सरकार ने लोकपाल कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

क्या जनलोकपाल आंदोलन सफल रहा?

विश्लेषकों के अनुसार इस आंदोलन की सफलता और सीमाएं दोनों रहीं।

सफलताएं

भ्रष्टाचार राष्ट्रीय चुनावी मुद्दा बना।
लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 पारित हुआ।
सरकारी जवाबदेही और पारदर्शिता पर व्यापक राष्ट्रीय बहस शुरू हुई।
नागरिक भागीदारी और जन आंदोलनों की ताकत सामने आई।

सीमाएं

अन्ना हज़ारे जिस स्वरूप के जनलोकपाल की मांग कर रहे थे, वैसा कानून पूरी तरह लागू नहीं हो सका।
आंदोलन से जुड़े कई नेताओं के राजनीति में आने के बाद मूल टीम बिखर गई।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जन अपेक्षाएं जितनी थीं, उतने व्यापक संस्थागत बदलाव नहीं हो पाए।
आंदोलन से निकली नई राजनीति

जनलोकपाल आंदोलन से जुड़े कई प्रमुख चेहरे बाद में राजनीति में सक्रिय हुए।

सबसे प्रमुख नाम अरविंद केजरीवाल का रहा, जिन्होंने बाद में आम आदमी पार्टी (AAP) बनाई।

हालांकि अन्ना हज़ारे ने स्वयं चुनावी राजनीति में आने से हमेशा इनकार किया और कहा कि उनका उद्देश्य व्यवस्था परिवर्तन है, सत्ता प्राप्त करना नहीं।

किसानों और लोकतांत्रिक सुधारों के लिए भी उठाई आवाज

2018 और उसके बाद भी अन्ना हज़ारे समय-समय पर अनशन और आंदोलन करते रहे।

उनकी प्रमुख मांगों में शामिल थीं—

लोकपाल की प्रभावी नियुक्ति
किसानों के लिए बेहतर समर्थन मूल्य
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों का प्रभावी क्रियान्वयन
चुनाव सुधार
पारदर्शी शासन व्यवस्था
ग्रामीण विकास और विकेंद्रीकरण
इस बार के आंदोलन का क्या संदेश?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन 2011 जैसी जनलहर नहीं है, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व काफी बड़ा है।

इसके कई कारण हैं—

अन्ना हज़ारे ने किसी राजनीतिक दल का पक्ष लेने के बजाय संवाद पर जोर दिया।
उन्होंने लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को महत्व दिया।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का सुझाव देकर जवाबदेही की बहस को आगे बढ़ाया।
उन्होंने पुलिस कार्रवाई और हिंसा पर चिंता जताते हुए शांतिपूर्ण समाधान की अपील की।
क्या फिर बन सकता है बड़ा जन आंदोलन?

फिलहाल ऐसा संकेत नहीं है कि अन्ना हज़ारे देशव्यापी आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। उनका वर्तमान हस्तक्षेप अधिक नैतिक और प्रतीकात्मक दिखाई देता है। फिर भी भारतीय राजनीति में उनका नाम जन आंदोलनों की विश्वसनीय आवाज़ के रूप में जुड़ा रहा है, इसलिए उनके वक्तव्यों का प्रभाव राजनीतिक विमर्श पर पड़ता है।

यदि छात्र आंदोलन लंबा चलता है और व्यापक जनसमर्थन प्राप्त करता है, तो अन्ना हज़ारे की अपील सरकार और आंदोलनकारी पक्षों के बीच संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में देखी जा सकती है।

निष्कर्ष

अन्ना हज़ारे का दो घंटे का मौन आंदोलन केवल दिल्ली के छात्र आंदोलन के समर्थन का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उनके लंबे सार्वजनिक जीवन की उस विचारधारा की निरंतरता भी है जिसमें अहिंसा, सत्याग्रह, लोकतांत्रिक संवाद और जवाबदेही को सर्वोपरि माना गया है। 2011 के जनलोकपाल आंदोलन से लेकर वर्तमान छात्र आंदोलन तक उनका मूल संदेश लगभग एक जैसा रहा है—सरकार और जनता के बीच विश्वास, पारदर्शिता और संवाद लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं।

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Thu, 23 Jul 2026 18:00:31 +0530 news desk MPcg
संसद में NEET पेपर लीक पर घमासान: किरेन रिजिजू और मल्लिकार्जुन खरगे के बीच तीखी बहस, सरकार बोली& 'शर्तें मत थोपिए', विपक्ष ने मांगा शिक्षा मंत्री का इस्तीफा https://citytoday.co.in/7434 https://citytoday.co.in/7434 संसद के मानसून सत्र में NEET पेपर लीक विवाद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार को संसद में इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल और गरमा गया, जब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

एक ओर विपक्ष ने पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार की जवाबदेही तय करने, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाए, वहीं सरकार ने स्पष्ट किया कि वह संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार ने विपक्ष से चर्चा के लिए समय तय करने की अपील करते हुए कहा कि अनावश्यक शर्तें लगाकर बहाने न बनाए जाएं।

NEET विवाद पर संसद में बढ़ा राजनीतिक तनाव

NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच यह मुद्दा संसद के मानसून सत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक विषय बन चुका है।

गुरुवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने इस मामले को जोरदार तरीके से उठाया। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर खामियां सामने आई हैं और सरकार इस मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेने से बच रही है।

खरगे ने सरकार पर साधा निशाना

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए उन्हें "भड़काऊ" बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

खरगे ने केंद्र सरकार से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय करने की मांग दोहराई और कहा कि इतने बड़े परीक्षा विवाद के बाद जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

विपक्ष लगातार यह मांग कर रहा है कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर संसद में विस्तृत बयान दे और जिम्मेदार अधिकारियों तथा संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे।

किरेन रिजिजू ने विपक्ष से चर्चा की अपील की

लोकसभा में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार किसी भी दिन और जितने समय तक विपक्ष चाहे, NEET पेपर लीक सहित परीक्षा प्रणाली से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने विपक्षी नेताओं से व्यक्तिगत स्तर पर भी बातचीत की है और उन्हें अपने सुझाव साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

रिजिजू ने यह भी बताया कि इस विषय पर लोकसभा अध्यक्ष से भी चर्चा की गई है ताकि सदन में विस्तृत बहस कराई जा सके।

'शर्तें मत थोपिए, बहाने मत बनाइए'

संसद में बोलते हुए किरेन रिजिजू ने विपक्ष से कहा कि यदि सरकार चर्चा के लिए तैयार है तो विपक्ष को अनावश्यक शर्तें नहीं रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार NEET पेपर लीक पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है, बल्कि चाहती है कि सदन में इस पर खुलकर बहस हो।

रिजिजू ने कहा कि यदि विपक्ष लगातार शर्तें रखेगा और चर्चा शुरू नहीं होने देगा तो इससे यह संदेश जाएगा कि विपक्ष स्वयं बहस से बचना चाहता है।

'सिर्फ एक परीक्षा नहीं, पूरे देश की परीक्षा व्यवस्था पर चर्चा हो'

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल NEET ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में हुई अन्य परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक मामलों पर भी व्यापक चर्चा होनी चाहिए।

उनका कहना था कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए सभी राज्यों में सामने आए मामलों की समीक्षा आवश्यक है।

उन्होंने सदन से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने के बजाय छात्रों के भविष्य के दृष्टिकोण से देखा जाए।

NDA सांसदों ने भी उठाई चर्चा की मांग

रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने भी संसद में प्रदर्शन करते हुए मांग की कि NEET पेपर लीक सहित सभी परीक्षा घोटालों पर तत्काल चर्चा कराई जाए।

सरकार का कहना है कि वह इस विषय पर पारदर्शी चर्चा चाहती है और विपक्ष को भी इसमें सहयोग करना चाहिए।

संसद के बाहर भी जारी है विरोध

संसद में हंगामे के समानांतर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठनों और विपक्षी दलों का प्रदर्शन भी जारी है।

प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें हैं—

NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार
भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत कानून

इन प्रदर्शनों के कारण राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।

सरकार ने हाल ही में किया बड़ा एलान

इसी विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में घोषणा की है कि पेपर लीक से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाएगी, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा मिल सके।

सरकार का कहना है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

आगे क्या?

मानसून सत्र के दौरान NEET पेपर लीक का मुद्दा आने वाले दिनों में भी संसद की कार्यवाही का केंद्र बना रह सकता है। यदि सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा के प्रारूप पर सहमति बनती है, तो इस विषय पर विस्तृत बहस होने की संभावना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली, भर्ती प्रक्रियाओं और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में संसद में होने वाली चर्चा और सरकार की आगे की कार्रवाई पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजर बनी रहेगी।

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Thu, 23 Jul 2026 12:45:12 +0530 news desk MPcg
NEET विवाद पर संसद में घमासान: अखिलेश यादव और केसी वेणुगोपाल के बीच तीखी बहस, सपा प्रमुख ने पूछा& क्या सरकार और कांग्रेस में समझौता हुआ? https://citytoday.co.in/7419 https://citytoday.co.in/7419 छात्रों के प्रदर्शन, पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर मानसून सत्र में हंगामा; सरकार बोली- चर्चा के लिए तैयार

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का तीसरा दिन NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर हंगामेदार रहा। परीक्षा में कथित अनियमितताओं, छात्रों के प्रदर्शन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा में जोरदार विरोध किया।

बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने NEET मामले पर तत्काल चर्चा की मांग उठाई। इस दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव तथा कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के बीच सदन में तीखी बहस देखने को मिली।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि छात्रों के मुद्दे पर उन्हें बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा, जबकि कांग्रेस और सरकार के नेताओं को बोलने की अनुमति दी जा रही है। इसी दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार और कांग्रेस के बीच कोई समझौता हो गया है।

NEET पेपर लीक मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा

NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है।

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि NEET जैसी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है।

विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने में सरकार और संबंधित एजेंसियां असफल रही हैं। इसी को लेकर विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग कर रहा है।

वहीं, सरकार का कहना है कि मामले की जांच जारी है, दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है और वह संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है।

लोकसभा में अखिलेश यादव ने उठाई आवाज

बुधवार सुबह लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी सांसदों ने NEET पेपर लीक, छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग की।

हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कुछ सांसदों को अपनी बात रखने का मौका दिया। इसी दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अपनी बात रखी।

जब अखिलेश यादव को पर्याप्त अवसर नहीं मिला तो उन्होंने आपत्ति जताई।

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि देश के छात्रों और युवाओं का है। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों ने मेहनत की है, उनके भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब संसद में मिलना चाहिए।

अखिलेश यादव का सरकार और कांग्रेस पर सवाल

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सदन में नाराजगी जाहिर करते हुए सवाल किया कि जब सरकार और कांग्रेस के नेताओं को बोलने का मौका दिया जा रहा है तो अन्य विपक्षी दलों की बात क्यों नहीं सुनी जा रही।

उन्होंने पूछा कि क्या सरकार और कांग्रेस के बीच कोई आपसी समझ या समझौता हो गया है?

अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि NEET विवाद केवल परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि युवाओं के भरोसे और भविष्य का सवाल है।

अखिलेश ने छात्रों पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया

सपा प्रमुख ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के साथ सख्ती की गई।

अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों की मांगों को सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल किया कि जब प्रधानमंत्री संसद के बाहर इस मुद्दे पर बयान दे सकते हैं तो संसद के अंदर आकर छात्रों और विपक्ष के सवालों का जवाब क्यों नहीं देते।

केसी वेणुगोपाल ने जताई नाराजगी

अखिलेश यादव की टिप्पणी के बाद कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने नाराजगी जताई।

सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई। वेणुगोपाल ने अखिलेश यादव के बयान पर आपत्ति दर्ज कराई।

इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाना नहीं है। उनकी प्राथमिकता छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाना है।

उन्होंने कहा कि मंत्री का इस्तीफा एक अलग विषय है, लेकिन उससे पहले सरकार को छात्रों पर हुई कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था पर जवाब देना चाहिए।

सरकार ने कहा- NEET मामले पर चर्चा के लिए तैयार

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार पहले से ही NEET मामले पर चर्चा के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सदन में नियमों के तहत सकारात्मक और सार्थक चर्चा हो।

रिजिजू ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि जांच एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सदन में कहा कि विपक्ष की मांग स्पष्ट है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।

कांग्रेस का कहना है कि जब लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े हुए हैं तो सरकार को जवाबदेही तय करनी होगी।

विपक्षी नेताओं ने कहा कि केवल जांच शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

संसद की कार्यवाही बार-बार हुई स्थगित

NEET मामले को लेकर हुए हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई।

लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही समय बाद स्थगित करनी पड़ी। बाद में दोबारा कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण फिर से सदन स्थगित करना पड़ा।

राज्यसभा में भी विपक्ष ने NEET मामले और छात्रों पर कार्रवाई को लेकर चर्चा की मांग की।

काले कपड़े पहनकर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन

NEET विवाद और छात्रों पर कार्रवाई के विरोध में विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ विरोध जताया।

विपक्ष ने इसे छात्रों और युवाओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से जवाब मांगने की बात कही।

NEET विवाद बना संसद में बड़ा राजनीतिक मुद्दा

NEET-UG पेपर लीक विवाद अब संसद के भीतर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

विपक्ष जहां इसे परीक्षा प्रणाली की विफलता और छात्रों के साथ अन्याय बता रहा है, वहीं सरकार जांच और कार्रवाई का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रही है।

आने वाले दिनों में संसद में NEET मामले पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और सरकार के रुख के बीच गतिरोध बना हुआ है।

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Wed, 22 Jul 2026 15:06:35 +0530 news desk MPcg
भानु प्रताप शाही का मंत्री राधाकृष्ण किशोर को खुला पत्र, बोले& 'स्वाभिमान की रक्षा के लिए साहसिक फैसला लें' https://citytoday.co.in/7378 https://citytoday.co.in/7378 झारखंड की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। भवनाथपुर के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण किशोर को खुला पत्र लिखकर नौकरशाही के कामकाज और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अपने पत्र में उन्होंने मंत्री को सलाह दी है कि यदि उनकी बातों की लगातार अनदेखी की जा रही है और मंत्री पद की गरिमा प्रभावित हो रही है, तो उन्हें अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए साहसिक निर्णय लेने पर विचार करना चाहिए।

यह पत्र सामने आने के बाद झारखंड के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

19 जुलाई को लिखा गया खुला पत्र

पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने 19 जुलाई 2026 को यह खुला पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से उन्हें यह जानकारी मिली कि मंत्री राधाकृष्ण किशोर अपनी ही सरकार में अधिकारियों के रवैये से असंतुष्ट हैं और कई मामलों में उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

उन्होंने लिखा कि यदि एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री की बात को भी नौकरशाही नजरअंदाज कर रही है, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के सम्मान का भी प्रश्न है।

"पलामू की धरती का बेटा होने के नाते पीड़ा समझ सकता हूं"

पत्र में भानु प्रताप शाही ने भावनात्मक अंदाज में लिखा कि पलामू क्षेत्र से जुड़े होने के कारण वे राधाकृष्ण किशोर की स्थिति को समझ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि किसी वरिष्ठ मंत्री को इस तरह असहाय स्थिति में देखना पूरे क्षेत्र के लिए चिंताजनक है। उनका मानना है कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की बात यदि अधिकारी नहीं सुनते, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है।

नौकरशाही पर लगाए गंभीर आरोप

अपने पत्र में भानु प्रताप शाही ने राज्य की नौकरशाही के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बातों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं, तो यह शासन व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की भूमिका कमजोर होती दिखाई दे रही है और इससे जनता की अपेक्षाओं पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि, उन्होंने किसी विशेष अधिकारी का नाम नहीं लिया, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के कामकाज पर सवाल उठाए।

"सरकार को अनुभवी नेताओं की जरूरत नहीं"

पूर्व मंत्री ने अपने पत्र में यह भी कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में अनुभवी और स्वाभिमानी नेताओं की अपेक्षा केवल आदेशों का पालन करने वालों को अधिक महत्व दिया जा रहा है।

उन्होंने लिखा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि जनता के हित में अपनी बात मजबूती से रखता है, तो उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा। इस स्थिति पर उन्होंने चिंता व्यक्त की।

मंत्री को दी साहसिक फैसला लेने की सलाह

पत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह है, जिसमें भानु प्रताप शाही ने राधाकृष्ण किशोर को सलाह देते हुए कहा कि यदि लगातार मंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंच रही है और उनकी बातों को महत्व नहीं दिया जा रहा, तो उन्हें अपने राजनीतिक स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा के लिए साहसिक निर्णय लेने पर विचार करना चाहिए।

हालांकि, उन्होंने अपने पत्र में यह स्पष्ट नहीं किया कि साहसिक निर्णय से उनका आशय मंत्री पद से इस्तीफा देना है या कोई अन्य राजनीतिक कदम।

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर जताई चिंता

पूर्व मंत्री ने लिखा कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की भूमिका सर्वोपरि होती है। यदि मंत्री ही स्वयं को असहाय महसूस करें और प्रशासनिक तंत्र उनकी बातों पर ध्यान न दे, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति केवल एक मंत्री तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर पूरे शासन तंत्र और जनता के विश्वास पर पड़ता है।

राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा

भानु प्रताप शाही का यह खुला पत्र सामने आने के बाद झारखंड की राजनीति में इसे लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्ष इस मुद्दे को सरकार और नौकरशाही के संबंधों से जोड़कर देख रहा है, जबकि सत्तापक्ष की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

वहीं, मंत्री राधाकृष्ण किशोर की ओर से भी पत्र पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान जारी नहीं किया गया है।

आगे क्या?

फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मंत्री राधाकृष्ण किशोर इस खुले पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और राज्य सरकार या प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आता है या नहीं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विवाद आगे बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में नौकरशाही और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर नई बहस देखने को मिल सकती है।

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Mon, 20 Jul 2026 16:56:19 +0530 news desk MPcg
बिहार विधानसभा में बदला सियासी समीकरण: 21 साल बाद नहीं दिखे नीतीश, तेजस्वी भी गैरहाजिर https://citytoday.co.in/7372 https://citytoday.co.in/7372

बिहार विधानसभा का मानसून सत्र इस बार कई राजनीतिक बदलावों का गवाह बना। लंबे समय तक राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहली बार विधानसभा सत्र के दौरान सदन में नजर नहीं आए। करीब 21 वर्षों के बाद ऐसा मौका आया है, जब बिहार विधानमंडल की कार्यवाही में नीतीश कुमार की प्रत्यक्ष मौजूदगी नहीं रही।

वहीं, विपक्ष के नेता और राजद नेता तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति ने भी सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के प्रमुख चेहरे पहले दिन सदन में मौजूद नहीं रहे, जिससे मानसून सत्र का पहला दिन राजनीतिक रूप से काफी अलग दिखाई दिया।

यह सत्र मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का पहला विधानसभा सत्र भी है। ऐसे में सदन के भीतर सत्ता की कमान संभालने वाले चेहरे में बदलाव साफ नजर आया।


21 साल बाद विधानसभा की कार्यवाही से दूर रहे नीतीश कुमार

नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से अधिक समय तक बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने विधानसभा के लगभग हर महत्वपूर्ण सत्र में हिस्सा लिया और सदन में सरकार का नेतृत्व किया।

लेकिन इस बार मानसून सत्र में उनकी गैरमौजूदगी ने नई राजनीतिक तस्वीर पेश की। पिछले बजट सत्र तक मुख्यमंत्री के रूप में विधानसभा में मौजूद रहने वाले नीतीश कुमार अब राज्यसभा की राजनीति की ओर बढ़ चुके हैं।

जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार सोमवार शाम दिल्ली रवाना होंगे, जहां वे पहली बार राज्यसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।


सम्राट चौधरी सरकार का पहला विधानसभा सत्र

बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला विधानसभा सत्र है, जिसमें मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी सदन का नेतृत्व कर रहे हैं।

हालांकि, सरकार में कई पुराने चेहरे अब भी मौजूद हैं। दोनों उपमुख्यमंत्री भी सदन में मौजूद रहे। लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बदलाव ने विधानसभा के माहौल को नया रूप दिया।

एनडीए सरकार के लिए यह सत्र अपनी नीतियों और प्राथमिकताओं को सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।


स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पहली बार मंत्री के रूप में सदन पहुंचे

मानसून सत्र के पहले दिन एक और खास बात रही कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पहली बार मंत्री के रूप में विधानसभा पहुंचे।

निशांत कुमार ने सदन में अपने संबोधन में सभी सदस्यों से मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने के लिए सभी को एक टीम की भावना से काम करना चाहिए।

उन्होंने नए विधायकों को भी सदन की गरिमा और परंपराओं को समझने की सलाह दी।


निशांत कुमार ने पिता नीतीश कुमार के कार्यों का किया जिक्र

सदन में बोलते हुए निशांत कुमार ने कहा कि बिहार में "न्याय के साथ विकास" की जिस सोच के साथ सरकार ने काम किया, उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब भी जारी है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रही है।

निशांत कुमार ने विधायकों से सदन की मर्यादा बनाए रखने और जनता से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा करने की अपील की।


विपक्ष की ओर से भी दिखी कमी, तेजस्वी यादव रहे अनुपस्थित

सिर्फ सत्ता पक्ष ही नहीं, विपक्ष भी पहले दिन पूरी ताकत के साथ सदन में मौजूद नहीं दिखा।

राजद नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव मानसून सत्र के पहले दिन सदन में नहीं पहुंचे। बताया जा रहा है कि वह विदेश यात्रा पर हैं।

उनकी अनुपस्थिति को लेकर भाजपा और जदयू नेताओं ने सवाल उठाए और विपक्ष की भूमिका पर निशाना साधा।

सत्ता पक्ष के नेताओं ने कहा कि विधानसभा का सत्र जनता के मुद्दों को उठाने का सबसे बड़ा मंच होता है, ऐसे समय में नेता प्रतिपक्ष की गैरमौजूदगी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।


तेजस्वी की जगह विपक्षी रणनीति पर कुमार सर्वजीत संभालेंगे मोर्चा

राजद सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति में विपक्ष की रणनीति मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत और अन्य वरिष्ठ नेता तय करेंगे।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तेजस्वी यादव सत्र के अगले दिनों में शामिल होंगे या नहीं।

विपक्ष की ओर से बेरोजगारी, शिक्षा, कानून व्यवस्था और सरकार की नीतियों को लेकर मुद्दे उठाए जाने की संभावना है।


सत्ता और विपक्ष दोनों के प्रमुख चेहरे नहीं दिखे

बिहार विधानसभा के इतिहास में यह पहला मौका माना जा रहा है, जब एक ही सत्र के शुरुआती दिन सत्ता और विपक्ष के प्रमुख चेहरे सदन में मौजूद नहीं रहे।

एक ओर जहां नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद विधानसभा में उनकी भूमिका खत्म हुई, वहीं दूसरी ओर तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी ने विपक्षी राजनीति पर चर्चा शुरू कर दी है।


बिहार की राजनीति में नए दौर की शुरुआत

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत है।

नीतीश कुमार लंबे समय तक बिहार की सत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था के केंद्र में रहे हैं। अब उनके राज्यसभा जाने के बाद विधानसभा में एनडीए की कमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हाथों में है।

वहीं, विपक्ष को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार को घेरने की चुनौती होगी।


मानसून सत्र में इन मुद्दों पर हो सकती है बहस

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें शामिल हैं:

  • राज्य का अनुपूरक बजट
  • रोजगार और बेरोजगारी का मुद्दा
  • शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुधार
  • कानून व्यवस्था
  • विकास योजनाएं
  • स्वास्थ्य और कृषि से जुड़े विषय

निष्कर्ष

बिहार विधानसभा का यह मानसून सत्र सिर्फ विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक तस्वीर को भी दिखा रहा है। 21 साल बाद नीतीश कुमार की अनुपस्थिति और तेजस्वी यादव के सदन में नहीं आने से सत्ता और विपक्ष दोनों के समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार सदन में अपनी पकड़ कितनी मजबूत करती है और विपक्ष किन मुद्दों के जरिए सरकार को घेरने की रणनीति अपनाता है।

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Mon, 20 Jul 2026 15:10:41 +0530 news desk MPcg
बिहार विधानसभा मानसून सत्र में तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी पर सियासत तेज: BJP&JDU ने घेरा, RJD ने विदेश यात्रा का दिया हवाला https://citytoday.co.in/7365 https://citytoday.co.in/7365 बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले दिन ही विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सदन में मौजूद नहीं थे। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और जदयू नेताओं ने सवाल उठाते हुए उन पर निशाना साधा, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने उनका बचाव करते हुए कहा कि तेजस्वी यादव निजी यात्रा पर हैं।

सत्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि विधानसभा का मानसून सत्र राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का समय है और ऐसे मौके पर नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति विपक्ष की भूमिका पर सवाल खड़े करती है। वहीं राजद ने कहा कि पार्टी के विधायक सदन में मौजूद हैं और जनता के मुद्दे मजबूती से उठाए जाएंगे।

तेजस्वी की अनुपस्थिति पर मंत्री संजय सिंह ने उठाए सवाल

बिहार सरकार के मंत्री संजय सिंह ने तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी को लेकर विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र जैसे महत्वपूर्ण समय में नेता प्रतिपक्ष का सदन में मौजूद नहीं होना गंभीर विषय है।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव विपक्ष की जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का काम सदन में जनता के मुद्दों को उठाना और सरकार को जवाबदेह बनाना होता है।

JDU नेता खालिद अनवर का तेजस्वी पर हमला

जदयू विधान पार्षद खालिद अनवर ने भी तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता का सदन से दूर रहना कई सवाल खड़े करता है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष को बिहार के मुद्दों से ज्यादा अपने पारिवारिक कार्यक्रमों की चिंता है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता हर गतिविधि को देख रही है और समय आने पर जवाब देगी।

भाजपा ने बताया 'पार्ट टाइम पॉलिटिशियन'

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने तेजस्वी यादव पर हमला बोलते हुए उन्हें "पार्ट टाइम पॉलिटिशियन" बताया।

उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव बिहार और बिहार के लोगों के प्रति गंभीर नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी कभी-कभी आते हैं, राजनीतिक बयान देते हैं और फिर लंबे समय के लिए गायब हो जाते हैं।

भाजपा नेता ने दावा किया कि जनता विपक्ष के नेताओं की कार्यशैली को समझ चुकी है।

RJD ने किया तेजस्वी यादव का बचाव

तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति पर राजद ने सफाई देते हुए कहा कि वह विदेश यात्रा पर हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक, तेजस्वी यादव कुछ दिनों से यूरोप यात्रा पर हैं।

राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि पार्टी के सभी विधायक सदन में मौजूद हैं और तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी से संगठन या विपक्ष की भूमिका प्रभावित नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता और विधायक जनता के मुद्दों को सदन में उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

मानसून सत्र में विपक्ष के लिए अहम मुद्दे

बिहार विधानसभा का मानसून सत्र कई राजनीतिक और जनहित के मुद्दों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष सरकार को शिक्षा, रोजगार, कानून व्यवस्था, महंगाई और अन्य मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।

वहीं सत्ता पक्ष भी सरकार की उपलब्धियों और विकास योजनाओं को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति में है।

सत्र के पहले दिन ही तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गई। आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है, क्योंकि बिहार में विधानसभा चुनावों से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

राजनीतिक संदेश और चुनावी असर

विशेषज्ञों के अनुसार, विधानसभा सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष की मौजूदगी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। विपक्ष का प्रमुख चेहरा होने के कारण तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी को भाजपा और जदयू ने मुद्दा बनाने की कोशिश की है।

वहीं राजद इसे व्यक्तिगत कार्यक्रम बताते हुए विपक्ष की सक्रियता पर कोई असर नहीं होने का दावा कर रहा है।

बिहार की राजनीति में आने वाले महीनों में चुनावी गतिविधियां बढ़ने वाली हैं, ऐसे में नेताओं की मौजूदगी, सदन में सक्रियता और जनता से जुड़े मुद्दों पर भूमिका राजनीतिक संदेश देने का काम कर सकती है।

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Mon, 20 Jul 2026 13:37:52 +0530 news desk MPcg
अभिषेक बनर्जी के अमताला कार्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई, कथित अवैध निर्माण पर प्रशासन का एक्शन; TMC ने बताया राजनीतिक प्रतिशोध https://citytoday.co.in/7348 https://citytoday.co.in/7348  पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दक्षिण 24 परगना जिले के अमताला स्थित तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर प्रशासन ने कथित अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चलाए गए इस अतिक्रमण-विरोधी अभियान के दौरान पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद की गई, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।

कड़ी सुरक्षा के बीच चला अतिक्रमण हटाओ अभियान

शनिवार को सुबह से ही अमताला क्षेत्र में प्रशासन और पुलिस की टीमें तैनात कर दी गई थीं। डायमंड हार्बर पुलिस जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में बुलडोजर और अन्य मशीनरी मौके पर पहुंची। किसी भी संभावित विरोध प्रदर्शन या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

कार्रवाई के दौरान कार्यालय परिसर के आसपास बैरिकेडिंग की गई और आम लोगों की आवाजाही पर भी निगरानी रखी गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने कथित अवैध हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौके पर जमा हो गए।

क्या है प्रशासन का पक्ष?

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अमताला स्थित कार्यालय के निर्माण को लेकर पहले भी आपत्तियां दर्ज की गई थीं। जिला प्रशासन की ओर से संबंधित पक्ष को कथित अवैध निर्माण के संबंध में नोटिस जारी किया गया था और निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब देने या आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।

सूत्रों का दावा है कि नोटिस के बावजूद जिला परिषद अथवा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद नियमों के अनुसार अतिक्रमण हटाने और बेदखली की कार्रवाई शुरू की गई। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान किसी राजनीतिक आधार पर नहीं बल्कि प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत चलाया गया।

चुनाव के बाद से बंद बताया जा रहा था कार्यालय

स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से अमताला स्थित यह कार्यालय नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहा था। परिसर लंबे समय से बंद होने की बात भी सामने आई है। प्रशासन ने दावा किया कि भवन से जुड़े रिकॉर्ड और भूमि उपयोग की जांच के बाद कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

मौके पर जुटी लोगों की भीड़

बुलडोजर कार्रवाई की सूचना फैलते ही आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अमताला पहुंच गए। हालांकि पुलिस ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर स्थिति को नियंत्रण में रखा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता रही और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।

अभिषेक बनर्जी ने पहले भी लगाए थे गंभीर आरोप

इस कार्रवाई से पहले भी अभिषेक बनर्जी प्रशासनिक एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने 3 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया था कि उनके कार्यालय से जुड़े कई लोगों को पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) द्वारा कथित रूप से परेशान किया गया।

उन्होंने दावा किया था कि कार्यालय से जुड़े लगभग 25 लोगों को बिना पर्याप्त नोटिस के पूछताछ के लिए बुलाया गया या हिरासत में लिया गया। बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से की गई और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

TMC ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने बुलडोजर कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए इसकी आलोचना की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष के नेताओं और उनके कार्यालयों को निशाना बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।

हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कार्रवाई केवल कथित अवैध निर्माण के खिलाफ नियमों के अनुसार की गई है और इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है।

कानूनी प्रक्रिया पर रहेगी नजर

इस कार्रवाई के बाद मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। यदि संबंधित पक्ष प्रशासनिक कार्रवाई को चुनौती देता है तो मामला न्यायालय तक भी पहुंच सकता है। फिलहाल प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी है और पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।

फिलहाल क्या स्थिति है?

बुलडोजर कार्रवाई के बाद कार्यालय परिसर के प्रभावित हिस्से को खाली करा दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि आगे की कार्रवाई भी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले में कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी। पूरे घटनाक्रम पर राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।

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Sat, 18 Jul 2026 16:34:51 +0530 news desk MPcg
मध्य प्रदेश की राजनीति में बयान, धक्का&मुक्की और जनसुनवाई का विवाद: नरोत्तम मिश्रा के तेवर बदले, कांग्रेस मंच पर अव्यवस्था और भाजपा विधायक की जनसुनवाई में हंगामा https://citytoday.co.in/7317 https://citytoday.co.in/7317
मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को कई घटनाओं ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया। एक ओर दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद पहली बार पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक मंच से तीखे तेवर दिखाते हुए पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी, वहीं भोपाल में कांग्रेस के कार्यक्रम के दौरान मंच पर नेताओं के बीच धक्का-मुक्की का वीडियो चर्चा का विषय बन गया। दूसरी ओर शिवपुरी जिले की करैरा विधानसभा में भाजपा विधायक रमेश खटीक की जनसुनवाई के दौरान एक व्यक्ति ने अपनी शिकायत नहीं सुने जाने पर मासूम बच्चे को विधायक की कार के बोनट पर रख दिया, जिसके बाद मौके पर हंगामा खड़ा हो गया। इन तीनों घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

दतिया में बदले नरोत्तम मिश्रा के तेवर, पुलिस को दी चेतावनी

दतिया उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी का टिकट नहीं मिलने के बाद पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पहली बार बड़े राजनीतिक कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे। भाजपा कार्यालय में आयोजित बैठक में उन्होंने समर्थकों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ टिकट कटने के बाद हुए विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर खुलकर नाराजगी जताई।

अपने संबोधन में नरोत्तम मिश्रा ने पुलिस प्रशासन को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि निर्दोष कार्यकर्ताओं पर दर्ज किए गए मामले और उनके साथ हुई कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे अपने समर्थकों के साथ हमेशा खड़े रहेंगे और यदि आवश्यकता पड़ी तो उनके साथ जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे दोस्ती और दुश्मनी दोनों को याद रखते हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके बदले हुए रुख को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

टिकट कटने पर भी किया बड़ा इशारा

अपने भाषण के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ताओं से टिकट कटने को लेकर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि टिकट किसने काटा और अंतिम निर्णय किस स्तर पर हुआ, यह सभी जानते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अंतिम निर्णय लेने वाले शीर्ष नेतृत्व से वे उचित समय पर बात करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मिश्रा के इस बयान को भविष्य की राजनीतिक रणनीति के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

भोपाल में कांग्रेस के मंच पर धक्का-मुक्की

राजधानी भोपाल में कांग्रेस की साइक्लोथॉन यात्रा के समापन कार्यक्रम के दौरान मंच पर अव्यवस्था देखने को मिली। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के मंच पर पहुंचते ही कांग्रेस विधायक आतिफ अकील तेजी से आगे बढ़े। इस दौरान मंच पर मौजूद नेताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।

घटना के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा और सुखदेव पांसे भी भीड़ और धक्का-मुक्की के बीच दिखाई दिए। कार्यक्रम स्थल पर मंच पर नेताओं की संख्या काफी अधिक होने के कारण खड़े होने तक की पर्याप्त जगह नहीं बची थी। इसी दौरान आतिफ अकील आगे की पंक्ति में पहुंचने की कोशिश करते नजर आए।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद कांग्रेस के मंचीय अनुशासन और संगठनात्मक व्यवस्था को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। हालांकि पार्टी की ओर से इस घटनाक्रम पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

भाजपा विधायक की जनसुनवाई में हुआ हंगामा

शिवपुरी जिले की करैरा विधानसभा में भाजपा विधायक रमेश खटीक की जनसुनवाई के दौरान भी विवाद की स्थिति बन गई। जानकारी के अनुसार, पड़ोसी पोहरी विधानसभा के कुछ लोग भी अपनी शिकायत लेकर विधायक के पास पहुंचे। विधायक ने उन्हें बताया कि वे उनकी विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधि नहीं हैं और उन्हें अपने क्षेत्र के विधायक से संपर्क करना चाहिए।

इस जवाब के बाद मौके पर मौजूद कुछ लोग नाराज हो गए। इसी दौरान एक व्यक्ति ने विरोध जताते हुए अपने साथ आए छोटे बच्चे को विधायक की कार के बोनट पर रख दिया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत हस्तक्षेप कर बच्चे को सुरक्षित हटाया और स्थिति को शांत कराया। घटना के दौरान किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित व्यक्ति ने ऐसा विरोध स्वरूप किया या भावनात्मक प्रतिक्रिया में यह कदम उठाया।

जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर उठे सवाल

इस घटना के बाद विपक्ष और सोशल मीडिया पर यह बहस शुरू हो गई कि जनप्रतिनिधि चाहे किसी भी विधानसभा क्षेत्र के हों, जनता की शिकायत सुनना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। वहीं भाजपा समर्थकों का कहना है कि प्रत्येक विधायक की प्रशासनिक जिम्मेदारी अपने विधानसभा क्षेत्र तक सीमित होती है और संबंधित क्षेत्र के नागरिकों को अपने निर्वाचित प्रतिनिधि से संपर्क करना चाहिए।

राजनीतिक संदेश और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

दिनभर चली इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर तीनों घटनाएं ट्रेंड करती रहीं। नरोत्तम मिश्रा के बयान को उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा गया, जबकि कांग्रेस के मंच पर हुई धक्का-मुक्की को लेकर विपक्ष ने कांग्रेस पर संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सवाल उठाए। वहीं शिवपुरी की घटना ने जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली और जनता की अपेक्षाओं पर नई बहस छेड़ दी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव, कांग्रेस की सक्रियता और स्थानीय स्तर पर बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच इस तरह की घटनाएं आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति को और अधिक गर्मा सकती हैं।

मुख्य बिंदु
दतिया में नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई।
टिकट कटने के बाद पहली बार सार्वजनिक मंच से उन्होंने तीखे राजनीतिक संकेत दिए।
भोपाल में कांग्रेस के कार्यक्रम के दौरान मंच पर धक्का-मुक्की का वीडियो वायरल हुआ।
कांग्रेस विधायक आतिफ अकील मंच पर आगे बढ़ते समय अन्य नेताओं से टकराते नजर आए।
शिवपुरी में भाजपा विधायक रमेश खटीक की जनसुनवाई के दौरान शिकायत नहीं सुने जाने पर विवाद हुआ।
विरोध कर रहे एक व्यक्ति ने मासूम बच्चे को विधायक की कार के बोनट पर रख दिया, जिसे तुरंत सुरक्षित हटा लिया गया।
तीनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी, संगठनात्मक अनुशासन और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी।

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Fri, 17 Jul 2026 12:15:05 +0530 news desk MPcg
मध्य प्रदेश: मंत्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस लिया गया, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पास रखा प्रभार; अब सिर्फ आनंद विभाग संभालेंगे https://citytoday.co.in/7285 https://citytoday.co.in/7285  मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस ले लिया गया है। अब यह विभाग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने पास रखेंगे। विभाग हटाए जाने के बाद लखन पटेल के पास अब केवल आनंद विभाग की जिम्मेदारी रह गई है।

मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने विभागों के पुनर्वितरण का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस बदलाव के साथ ही प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री के पास संभाले जाने वाले विभागों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है।

स्टेट हैंगर पर मुलाकात के बाद हुआ फैसला

जानकारी के अनुसार, मंत्री लखन पटेल की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से स्टेट हैंगर पर मुलाकात हुई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री उज्जैन दौरे के लिए रवाना हो गए।

हालांकि सरकार की ओर से विभाग वापस लेने के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसे लेकर कई चर्चाएं चल रही हैं।

मुख्यमंत्री के पास अब पशुपालन समेत 11 विभाग

पशुपालन एवं डेयरी विभाग मिलने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास अब कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी हो गई है।

मुख्यमंत्री के पास वर्तमान में ये विभाग हैं—

सामान्य प्रशासन विभाग
गृह विभाग
जेल विभाग
औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग
जनसंपर्क विभाग
नर्मदा घाटी विकास विभाग
विमानन विभाग
खनिज साधन विभाग
लोक सेवा प्रबंधन विभाग
प्रवासी भारतीय विभाग
पशुपालन एवं डेयरी विभाग

इसके अलावा जो विभाग किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं हैं, वे भी मुख्यमंत्री के पास ही रहते हैं।

गोशाला योजना को लेकर उठे थे सवाल

सूत्रों के अनुसार, पशुपालन विभाग में स्वावलंबी गोशालाओं की योजना को लेकर कुछ मुद्दे सामने आए थे।

बताया जा रहा है कि सरकार प्रदेश में ऐसी गोशालाएं शुरू करने की योजना पर काम कर रही थी, जिन्हें आत्मनिर्भर मॉडल पर संचालित किया जाना था। इसके लिए कुछ संस्थाओं का चयन किया गया था।

हालांकि सूत्रों का कहना है कि चयनित संस्थाओं की कार्यप्रणाली और पात्रता को लेकर सरकार पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर आगे की प्रक्रिया बढ़ाने की तैयारी चल रही थी।

इन मामलों को लेकर पिछले कुछ महीनों में मुख्यमंत्री स्तर पर चर्चा होने की बात सामने आई है।

जमीन आवंटन को लेकर भी हुई थी शिकायत

सूत्रों के मुताबिक, स्वावलंबी गोशालाओं के लिए संस्थाओं को जमीन आवंटन से जुड़ा मामला भी चर्चा में रहा।

इस संबंध में कुछ शिकायतें संगठन स्तर तक पहुंचने की बात कही जा रही है। इसके बाद सरकार ने विभागीय कामकाज की समीक्षा की और अब पशुपालन विभाग मुख्यमंत्री ने अपने पास रखने का फैसला किया है।

हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

पहली बार सिर्फ आनंद विभाग संभालेंगे मंत्री

मंत्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग हटने के बाद अब वे केवल आनंद विभाग के मंत्री रह गए हैं।

मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने सोशल मीडिया पोस्ट में इस बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने वर्ष 2016 में आनंद विभाग का गठन किया था।

उन्होंने कहा कि आनंद विभाग अब तक किसी बड़े विभाग के साथ किसी मंत्री को दिया जाता रहा है, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि कोई मंत्री केवल आनंद विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे।

मोहन सरकार में पहले भी हो चुका है विभाग परिवर्तन

मोहन यादव सरकार में इससे पहले भी मंत्रियों से विभाग वापस लेने का मामला सामने आ चुका है।

करीब दो साल पहले मंत्री नागर सिंह चौहान से वन एवं पर्यावरण विभाग वापस लिया गया था। उस समय नागर सिंह चौहान के पास अनुसूचित जाति कल्याण, वन और पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी थी।

इसके बाद वन एवं पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी रामनिवास रावत को दी गई थी। हालांकि बाद में रावत उपचुनाव हार गए और तब से यह विभाग मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास ही है।

राजनीतिक नजरिए से अहम बदलाव

मध्य प्रदेश सरकार में विभागों का यह बदलाव प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग प्रदेश में गाय संरक्षण, गोशाला संचालन, दुग्ध उत्पादन और पशुपालन योजनाओं से जुड़ा अहम विभाग है।

अब मुख्यमंत्री के सीधे नियंत्रण में आने के बाद इस विभाग की योजनाओं और नीतियों पर मुख्यमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी रहेगी।

वहीं, मंत्री लखन पटेल के पास अब केवल आनंद विभाग की जिम्मेदारी होगी। आने वाले दिनों में इस बदलाव के प्रशासनिक और राजनीतिक असर पर भी नजर रहेगी।

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Wed, 15 Jul 2026 16:27:59 +0530 news desk MPcg
चारा घोटाला मामले में लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत, जमानत रद्द करने से इनकार; CBI की याचिका खारिज https://citytoday.co.in/7262 https://citytoday.co.in/7262 राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द करने की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की मांग को फिलहाल स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया, जिसके तहत लालू यादव को इस मामले में जमानत मिली थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट को लंबित अपील की सुनवाई जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है।

CBI ने दाखिल की थी जमानत रद्द करने की याचिका

चारा घोटाले के देवघर कोषागार मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने लालू यादव को जमानत दी थी। इसके खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

CBI ने अपनी याचिका में मांग की थी कि हाईकोर्ट के जमानत आदेश को रद्द किया जाए और लालू यादव की जमानत पर रोक लगाई जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मौजूदा स्थिति में हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए जमानत रद्द करने की मांग को खारिज कर दिया गया।

हाईकोर्ट को छह महीने में अपील निपटाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि मामले से जुड़ी लंबित अपील की सुनवाई जल्द पूरी की जाए।

अदालत ने कहा कि यदि संभव हो तो इस मामले का निपटारा करीब छह महीने के भीतर किया जाए।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। आगे की सुनवाई में इन मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

CBI ने हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए थे सवाल

सुनवाई के दौरान CBI की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने दलील रखी कि झारखंड हाईकोर्ट द्वारा सजा निलंबन और जमानत देने का आधार सही नहीं था।

CBI का कहना था कि लालू यादव की पहले की दो जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं, लेकिन तीसरी बार उन्हें इस आधार पर राहत दी गई कि उन्होंने सजा का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया है।

जांच एजेंसी ने अदालत के सामने तर्क दिया कि हाईकोर्ट के फैसले में कई कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर विचार नहीं किया गया।

क्या है देवघर कोषागार चारा घोटाला मामला?

चारा घोटाला बिहार के समय का एक बड़ा वित्तीय अनियमितता मामला है, जिसमें सरकारी कोष से फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये निकालने के आरोप लगे थे।

देवघर कोषागार मामले में आरोप था कि पशुपालन विभाग के नाम पर सरकारी खजाने से अवैध निकासी की गई।

इस मामले में लालू प्रसाद यादव समेत कई आरोपियों के खिलाफ जांच चली और बाद में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था।

लालू यादव को कई मामलों में मिली सजा

चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में लालू यादव को अदालतों से दोषी करार दिया जा चुका है।

देवघर कोषागार मामला चारा घोटाले के कई मामलों में से एक है। इसके अलावा डोरंडा कोषागार, चाईबासा और दुमका कोषागार से जुड़े मामलों में भी कानूनी कार्रवाई हुई है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में भी चर्चा तेज हो गई है। RJD नेताओं ने इसे राहत की खबर बताया है, जबकि विपक्षी दलों ने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लालू यादव की जमानत बरकरार रहेगी। वहीं, झारखंड हाईकोर्ट में लंबित अपील की सुनवाई आगे जारी रहेगी।

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Tue, 14 Jul 2026 13:03:40 +0530 news desk MPcg
TMC के 12 और बैंक खाते फ्रीज, 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पर रोक; कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत के बीच बढ़ीं मुश्किलें https://citytoday.co.in/7202 https://citytoday.co.in/7202 पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वित्तीय मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट से पार्टी को दैनिक खर्चों के संचालन के लिए आंशिक राहत मिलने के एक दिन बाद ही बिधाननगर साइबर थाना पुलिस ने विभिन्न सरकारी और निजी बैंकों में मौजूद 12 और बैंक खातों को फ्रीज करने का निर्देश जारी कर दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पहले फ्रीज किए गए खातों को मिलाकर अब जिन खातों पर रोक लगी है, उनमें कुल 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पार्टी पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस की जांच का सामना कर रही है। तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी है और मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना है।

हाई कोर्ट से राहत के बाद बढ़ी परेशानी

गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस को सीमित राहत देते हुए पार्टी के दैनिक खर्चों के संचालन के लिए एक विशेष अधिकारी (Special Officer) नियुक्त करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा जारी चेक विशेष अधिकारी के प्रति-हस्ताक्षर (Countersign) के बाद ही बैंक से भुगतान के लिए स्वीकार किए जाएंगे।

हालांकि, इस राहत के तुरंत बाद शुक्रवार को बिधाननगर साइबर पुलिस ने 12 अतिरिक्त बैंक खातों को भी फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी, जिससे पार्टी की वित्तीय गतिविधियां और प्रभावित हो गई हैं।

कितनी राशि पर लगी रोक?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में फ्रीज किए गए तीन खातों और अब फ्रीज किए गए 12 खातों को मिलाकर 15 बैंक खातों में जमा राशि 1000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि शुरुआती खातों के लेनदेन की जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर अन्य खातों की भी जांच शुरू की गई, जिसके बाद एहतियात के तौर पर इन खातों से लेनदेन पर रोक लगा दी गई।

किस शिकायत के आधार पर हुई कार्रवाई?

पूरी कार्रवाई की शुरुआत तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक विश्वनाथ दास द्वारा दर्ज कराई गई एक एफआईआर से हुई। इसी शिकायत के आधार पर बिधाननगर साइबर थाना पुलिस ने जांच शुरू की थी।

जांच के दौरान पुलिस ने शिकायतकर्ता विधायक सहित ऋतब्रत बनर्जी खेमे के सात से अधिक विधायकों के बयान दर्ज किए हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पार्टी के बैंक खातों में कथित अनियमित या अवैध वित्तीय लेनदेन के संदेह का आधार क्या था।

पहले तीन खाते भी किए गए थे फ्रीज

जांच के शुरुआती चरण में पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों को फ्रीज किया था। बाद में इन्हीं खातों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत फ्रीज कर दिया।

ईडी ने हाल ही में कोलकाता और आसपास के पांच ठिकानों पर छापेमारी के बाद दावा किया था कि एक निजी बैंक में मौजूद पार्टी के तीन खातों में 440 करोड़ 42 लाख रुपये जमा हैं। एजेंसी ने PMLA की धारा 17(1A) के तहत इन खातों में लेनदेन पर रोक लगा दी।

तीन वरिष्ठ नेताओं से पूछताछ की तैयारी

ईडी सूत्रों के अनुसार, जिन तीन खातों को एजेंसी ने फ्रीज किया है, उनमें से एक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता तृणमूल कांग्रेस के दो सांसद हैं। अन्य दो खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में एक पूर्व सांसद और एक पूर्व मंत्री शामिल हैं।

जांच एजेंसी इन तीनों नेताओं को जल्द पूछताछ के लिए समन भेज सकती है। हालांकि, अभी तक ईडी की ओर से आधिकारिक रूप से किसी तिथि की घोषणा नहीं की गई है।

हाई कोर्ट पहुंची तृणमूल कांग्रेस

बैंक खाते फ्रीज किए जाने के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति कृष्णा राव की अदालत में पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की अनुमति मांगी। अदालत ने याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी। मामले की सुनवाई सोमवार को होने की संभावना है।

पार्टी ने अदालत को बताया कि जिन तीन खातों को राज्य पुलिस ने फ्रीज किया था, उन्हें लेकर हाई कोर्ट पहले ही अंतरिम राहत दे चुका है। इसके बावजूद ईडी ने उन्हीं खातों को PMLA के तहत फ्रीज कर दिया, जिससे पार्टी के नियमित वित्तीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

पहले क्या आदेश दिया था हाई कोर्ट ने?

गुरुवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने आदेश दिया था कि फ्रीज किए गए तीन खातों का संचालन पूरी तरह बंद नहीं रहेगा।

अदालत ने निर्देश दिया कि खातों से भुगतान तभी किया जा सकेगा जब अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में से किसी भी दो के हस्ताक्षर वाले चेक पर अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी भी प्रति-हस्ताक्षर करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य पार्टी के दैनिक प्रशासनिक और संगठनात्मक खर्चों को जारी रखना था।

जांच का दायरा बढ़ा

बिधाननगर साइबर पुलिस अब शुरुआती तीन खातों से जुड़े वित्तीय लेनदेन के आधार पर अन्य बैंक खातों की भी जांच कर रही है। इसी कारण 12 अतिरिक्त खातों को फ्रीज किया गया है। जांच एजेंसियां बैंकिंग रिकॉर्ड, धन के स्रोत, लेनदेन के पैटर्न और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।

राजनीतिक और कानूनी असर

यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के वित्तीय संचालन से जुड़ा है। एक ओर पुलिस और ईडी जांच को आगे बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस अदालत में राहत की मांग कर रही है।

फिलहाल, 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वाले कई बैंक खातों पर रोक जारी है। अब सभी की नजरें कलकत्ता हाई कोर्ट की अगली सुनवाई और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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Fri, 10 Jul 2026 18:33:37 +0530 news desk MPcg
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का जन्मदिन: सीएम योगी समेत कई नेताओं ने दी शुभकामनाएं, 7 दशक से अधिक का सार्वजनिक जीवन बना करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा https://citytoday.co.in/7194 https://citytoday.co.in/7194 देश के रक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह शुक्रवार को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, भाजपा नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर संदेश जारी करते हुए राजनाथ सिंह को राष्ट्रहित के प्रति समर्पित, सरल व्यक्तित्व वाले और करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत नेता बताया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में लिखा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का सार्वजनिक जीवन राष्ट्रसेवा, सुशासन और जनकल्याण के मूल्यों पर आधारित रहा है। उन्होंने प्रभु श्रीराम से उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और यशस्वी जीवन की कामना की।

योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि राजनाथ सिंह एक प्रखर वक्ता, अनुभवी प्रशासक और लोकप्रिय जननेता हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित के प्रति उनका अटूट समर्पण, विनम्र व्यवहार और सरल व्यक्तित्व उन्हें भारतीय राजनीति के सबसे सम्मानित नेताओं में शामिल करता है।

योगी ने लिखा कि उनका जीवन सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण है और युवा पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

उपमुख्यमंत्रियों ने भी दी शुभकामनाएं

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने राजनाथ सिंह को देश का लोकप्रिय नेता और कार्यकर्ताओं का संरक्षक बताते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन की कामना की।

वहीं केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक अपनी मेहनत, संगठन क्षमता और प्रशासनिक अनुभव के दम पर अलग पहचान बनाई है। उन्होंने उनके उत्तम स्वास्थ्य और लंबे सार्वजनिक जीवन की प्रार्थना की।

चंदौली के गांव से देश के रक्षा मंत्री बनने तक का सफर

राजनाथ सिंह का जन्म 10 जुलाई 1951 को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले (तत्कालीन वाराणसी क्षेत्र) के भभौरा गांव में हुआ था। एक किसान परिवार में जन्मे राजनाथ सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान (Physics) में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की और कुछ समय तक कॉलेज में व्याख्याता (लेक्चरर) के रूप में भी कार्य किया।

युवा अवस्था से ही वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गए। छात्र जीवन के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संपर्क में आए। इसके बाद उन्होंने जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी के संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई।

राजनीतिक जीवन की प्रमुख उपलब्धियां

राजनाथ सिंह भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई अहम पद संभाले—

उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष (दो बार)
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
केंद्रीय कृषि मंत्री
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री
केंद्रीय गृह मंत्री
वर्तमान में भारत के रक्षा मंत्री

लगभग पांच दशक से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने संगठन निर्माण, प्रशासनिक सुधार और विकास से जुड़े अनेक फैसलों में भूमिका निभाई है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल

साल 2000 से 2002 के बीच राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, कानून-व्यवस्था, ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई फैसले लिए। उनके कार्यकाल में सरकारी व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया।

भाजपा संगठन को मजबूत करने में निभाई अहम भूमिका

राजनाथ सिंह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी ने कई राज्यों में संगठन का विस्तार किया और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन और सरकार दोनों में संतुलित नेतृत्व उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है।

गृह मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण फैसले

साल 2014 से 2019 तक केंद्रीय गृह मंत्री रहते हुए राजनाथ सिंह ने देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद विरोधी रणनीति और केंद्रीय सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया।

उन्होंने कई बार सीमा क्षेत्रों का दौरा कर सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाया और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों का नेतृत्व किया।

रक्षा मंत्री के रूप में निभा रहे बड़ी जिम्मेदारी

वर्तमान में राजनाथ सिंह भारत सरकार में रक्षा मंत्री हैं। उनके कार्यकाल में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया है।

उनके नेतृत्व में—

स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिला।
रक्षा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को प्राथमिकता दी गई।
आधुनिक हथियारों और तकनीकों की खरीद प्रक्रिया को गति मिली।
सीमाओं पर आधारभूत ढांचे के विकास पर लगातार निवेश बढ़ाया गया।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार भारत का रक्षा निर्यात पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है और देश कई मित्र देशों को रक्षा उपकरण उपलब्ध करा रहा है।

लखनऊ से लगातार मजबूत जनाधार

राजनाथ सिंह वर्तमान में लखनऊ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इससे पहले इस सीट का प्रतिनिधित्व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी करते थे।

राजनाथ सिंह को लखनऊ में विकास कार्यों से जोड़कर देखा जाता है। शहर में सड़क, फ्लाईओवर, आउटर रिंग रोड, यातायात सुधार, शहरी आधारभूत ढांचे और विभिन्न विकास परियोजनाओं में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर व्यस्त रहने के बावजूद वे समय-समय पर अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा करते हैं और आम नागरिकों से संवाद बनाए रखते हैं।

कार्यकर्ताओं के बीच अलग पहचान

राजनाथ सिंह की पहचान एक शांत, संयमित और संवादप्रिय नेता के रूप में रही है। भाजपा संगठन में उन्हें कार्यकर्ताओं का नेता माना जाता है। पार्टी नेताओं के अनुसार वे कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में शामिल होते हैं और व्यक्तिगत स्तर पर भी संपर्क बनाए रखते हैं।

राजनीतिक विरोधी भी कई बार उनके सौम्य व्यवहार और संसदीय मर्यादाओं के पालन की सराहना कर चुके हैं।

सोशल मीडिया पर छाए जन्मदिन की शुभकामनाएं

राजनाथ सिंह के जन्मदिन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स, फेसबुक और अन्य माध्यमों पर हजारों लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। भाजपा के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं, सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं ने उनके सार्वजनिक जीवन की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।

भारतीय राजनीति के अनुभवी नेताओं में शामिल

करीब पांच दशकों से अधिक के राजनीतिक अनुभव के साथ राजनाथ सिंह आज भारतीय राजनीति के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। संगठनात्मक क्षमता, प्रशासनिक अनुभव, संतुलित नेतृत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनकी भूमिका उन्हें देश के प्रमुख राजनीतिक व्यक्तित्वों में स्थापित करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संगठन से लेकर सरकार तक विभिन्न जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन और सभी दलों के नेताओं के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकतों में से एक रही है। रक्षा मंत्री के रूप में वे वर्तमान में भारत की सुरक्षा, रक्षा आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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Fri, 10 Jul 2026 14:06:33 +0530 news desk MPcg
JDU की नई प्रदेश टीम का ऐलान: संगठन में बड़ा फेरबदल, 12 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव और 74 सचिव नियुक्त; नीरज कुमार फिर बने मुख्य प्रवक्ता https://citytoday.co.in/7169 https://citytoday.co.in/7169 बिहार की राजनीति में संगठनात्मक स्तर पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। Janata Dal (United) (JDU) ने बुधवार को बिहार प्रदेश संगठन की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी। पार्टी ने संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय, प्रभावी तथा भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर पदाधिकारियों की नियुक्ति की है। नई टीम में विभिन्न स्तरों पर अनुभवी नेताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने नई प्रदेश टीम की सूची जारी की। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि यह संगठनात्मक पुनर्गठन केवल पदों का वितरण नहीं, बल्कि संगठन को नई ऊर्जा, नई दिशा और मजबूत कार्यप्रणाली देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

संगठन विस्तार के जरिए जमीनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश

नई प्रदेश कार्यकारिणी में बड़े स्तर पर नियुक्तियां की गई हैं। आधिकारिक सूची के अनुसार, पार्टी ने 12 प्रदेश उपाध्यक्ष, 38 प्रदेश महासचिव और 74 प्रदेश सचिव नियुक्त किए हैं। इसके अलावा मीडिया प्रबंधन और जनसंपर्क को भी नई मजबूती देने के लिए प्रवक्ताओं की टीम का गठन किया गया है।

JDU का मानना है कि प्रदेश स्तर पर मजबूत संगठन ही जिला, प्रखंड, पंचायत और बूथ स्तर तक प्रभावी राजनीतिक गतिविधियों की नींव तैयार करता है। इसी सोच के तहत संगठन का विस्तार किया गया है ताकि पार्टी के कार्यक्रमों और नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाया जा सके।

नीरज कुमार पर फिर जताया भरोसा

पार्टी ने मीडिया और जनसंपर्क के क्षेत्र में एक बार फिर अनुभव को प्राथमिकता दी है। विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को दोबारा मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। नीरज कुमार लंबे समय से JDU की ओर से राष्ट्रीय और राज्य स्तर के राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखते रहे हैं और मीडिया में पार्टी की प्रभावी आवाज माने जाते हैं।

उनके साथ पार्टी ने कुल नौ प्रदेश प्रवक्ताओं को भी जिम्मेदारी सौंपी है। इन प्रवक्ताओं का दायित्व विभिन्न समसामयिक, राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों पर पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया और नीतियों को मीडिया तथा जनता तक पहुंचाना होगा।

नीतीश कुमार के नेतृत्व में संगठन को नई दिशा

JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार लंबे समय से संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते रहे हैं। पार्टी का मानना है कि मजबूत संगठन ही सरकार की नीतियों को जनता तक पहुंचाने और जनता की समस्याओं को नेतृत्व तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम होता है।

नई टीम के गठन को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य संगठनात्मक ढांचे को इस प्रकार मजबूत करना है कि प्रदेश के हर जिले, प्रखंड और पंचायत स्तर पर सक्रिय नेतृत्व उपलब्ध हो सके।

क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर भी दिया गया ध्यान

पार्टी सूत्रों के अनुसार, नई टीम के गठन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, संगठनात्मक अनुभव और विभिन्न सामाजिक वर्गों की भागीदारी जैसे पहलुओं का ध्यान रखा गया है। इससे पार्टी को राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

JDU का प्रयास है कि संगठन में ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाए, जो लंबे समय से पार्टी के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं और संगठनात्मक कार्यों का अनुभव रखते हैं।

संगठनात्मक गतिविधियों को मिलेगी नई गति

नई कार्यकारिणी के गठन के बाद पार्टी सदस्यता अभियान, कार्यकर्ता सम्मेलन, प्रशिक्षण शिविर, जनसंपर्क कार्यक्रम और जिला स्तरीय बैठकों जैसी गतिविधियों को और तेज करने की तैयारी कर रही है।

पार्टी का मानना है कि यदि संगठन मजबूत होगा तो सरकारी योजनाओं, पार्टी की नीतियों और जनहित के मुद्दों को जनता तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद भी बेहतर होगा।

आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारी

हालांकि JDU ने आधिकारिक रूप से इस संगठनात्मक बदलाव को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

बिहार की राजनीति में संगठनात्मक मजबूती को हमेशा चुनावी सफलता का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ऐसे में नई प्रदेश टीम का गठन पार्टी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, इसका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव भविष्य में संगठन की सक्रियता और पार्टी के प्रदर्शन के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

क्या होगी नई टीम की जिम्मेदारी?

नई प्रदेश कार्यकारिणी का मुख्य उद्देश्य पार्टी संगठन को मजबूत करना, जिला और प्रखंड इकाइयों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना, सदस्यता अभियान को गति देना, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना और पार्टी की नीतियों एवं कार्यक्रमों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना होगा।

इसके अलावा मीडिया प्रबंधन, जनसंपर्क, राजनीतिक संवाद और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया को भी नई टीम के माध्यम से अधिक व्यवस्थित बनाने की योजना है।

आधिकारिक सूची जारी, पदाधिकारियों में उत्साह

प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा द्वारा नई टीम की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर उत्साह का माहौल देखा गया। नवनियुक्त पदाधिकारियों ने नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए संगठन को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। आने वाले दिनों में सभी नए पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक बैठकें आयोजित किए जाने की भी संभावना है, जिनमें भविष्य की रणनीति और कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी।

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Wed, 08 Jul 2026 16:40:27 +0530 news desk MPcg
अयोध्या श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर हिमाचल में सियासत तेज, CM सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रदर्शन; शिमला में की राम पूजा, निष्पक्ष जांच की मांग https://citytoday.co.in/7131 https://citytoday.co.in/7131 अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस ने शिमला में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, मंत्रिमंडल के सदस्य और पार्टी विधायक राम बाजार स्थित श्रीराम मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना की। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने जाखू स्थित हनुमान मंदिर में भी दर्शन किए।

कांग्रेस ने इस मामले को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। वहीं, इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भी कांग्रेस ने निशाने पर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में कथित रूप से चढ़ावे से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के आरोप सामने आने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मामले में जांच एजेंसियों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

इसी घटनाक्रम के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने भी इसे सार्वजनिक आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए विरोध प्रदर्शन आयोजित किया।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने की राम मंदिर में पूजा

प्रदर्शन समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पार्टी नेताओं के साथ शिमला के राम बाजार स्थित श्रीराम मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान श्रीराम की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की।

इसके बाद मुख्यमंत्री का प्रतिनिधिमंडल जाखू स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर भी पहुंचा, जहां दर्शन और पूजा की गई।

कांग्रेस ने लगाए ये आरोप

प्रदेश कांग्रेस का कहना है कि श्रीराम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। पार्टी का आरोप है कि यदि मंदिर के चढ़ावे से जुड़े किसी भी प्रकार के वित्तीय घोटाले या चोरी की शिकायत सामने आई है, तो उसकी निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा वर्षों से भगवान राम के नाम पर राजनीति करती रही है, लेकिन अब जब मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है, तब वह इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।

पार्टी का कहना है कि धार्मिक संस्थानों में आने वाला दान श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा होता है, इसलिए ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

पहले ही लिया गया था आंदोलन का फैसला

प्रदेश कांग्रेस की हाल ही में हुई बैठक में इस मुद्दे को लेकर राज्यभर में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। उसी रणनीति के तहत मंगलवार को शिमला में प्रदर्शन किया गया।

कांग्रेस का कहना है कि यह आंदोलन किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए है।

जांच जारी, आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार

श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है। अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और न ही किसी न्यायिक अथवा जांच एजेंसी ने अंतिम रिपोर्ट जारी की है। इसलिए मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही हो सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखना सार्वजनिक विश्वास के लिए आवश्यक है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई आवश्यक होगी।

राजनीतिक असर

अयोध्या श्रीराम मंदिर से जुड़ा यह मामला अब उत्तर प्रदेश से निकलकर अन्य राज्यों की राजनीति में भी प्रभाव डालने लगा है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध कार्यक्रम देखने को मिल सकते हैं। वहीं, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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Tue, 07 Jul 2026 11:31:05 +0530 news desk MPcg
पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव, चुनाव आयोग ने जारी किया कार्यक्रम; एक ही दिन होगा मतदान और मतगणना https://citytoday.co.in/7119 https://citytoday.co.in/7119 भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की तीन रिक्त सीटों पर उपचुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। आयोग के अनुसार इन तीनों सीटों के लिए 24 जुलाई 2026 को मतदान कराया जाएगा और उसी दिन शाम को मतगणना भी होगी। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि तीनों सीटों के लिए चुनाव अलग-अलग माना जाएगा और प्रत्येक सीट के लिए स्वतंत्र निर्वाचन प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

इन सीटों पर उपचुनाव हाल ही में राज्यसभा सदस्यों सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक के इस्तीफों के बाद आवश्यक हुआ है। तीनों ने जून 2026 में अलग-अलग तिथियों पर अपने पद से इस्तीफा दिया था, जिससे राज्यसभा की ये सीटें रिक्त हो गई थीं।

7 जुलाई से शुरू होगी चुनावी प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया 7 जुलाई को राजपत्र (गजट) अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू होगी।

निर्धारित कार्यक्रम इस प्रकार है:

7 जुलाई 2026: अधिसूचना जारी
14 जुलाई 2026: नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि
15 जुलाई 2026: नामांकन पत्रों की जांच
17 जुलाई 2026: नाम वापस लेने की अंतिम तिथि
24 जुलाई 2026 (सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक): मतदान
24 जुलाई 2026 (शाम 5 बजे से): मतगणना
इसके बाद निर्वाचन आयोग विजयी उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा करेगा।
विधानसभा के निर्वाचित सदस्य करेंगे मतदान

राज्यसभा के उपचुनाव में आम जनता मतदान नहीं करती। इन चुनावों में संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित विधायक (MLAs) मतदान करते हैं।

मतदान एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote - STV) तथा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation) के तहत कराया जाता है। प्रत्येक रिक्त सीट के लिए अलग मतदान और मतगणना की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

इस्तीफों के बाद खाली हुई थीं तीन सीटें

चुनाव आयोग के अनुसार यह उपचुनाव उन तीन सीटों के लिए कराया जा रहा है जो—

सुखेंदु शेखर राय
सुष्मिता देव
प्रकाश चिक बड़ाईक

के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थीं। तीनों सदस्य तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे।

राजनीतिक समीकरणों पर रहेगी नजर

इन उपचुनावों पर राजनीतिक दलों की विशेष नजर रहेगी क्योंकि राज्यसभा में प्रत्येक सीट का महत्व संसदीय संख्या बल के लिहाज से अहम होता है।

हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के कारण इन उपचुनावों के परिणाम उच्च सदन में दलों की संख्या पर भी प्रभाव डाल सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि चुनाव निर्विरोध नहीं हुए तो विधानसभा में वर्तमान संख्या बल के आधार पर मुकाबले की दिशा स्पष्ट होगी।

चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया की तैयारियां शुरू कीं

निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी करने के साथ ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी जारी किए हैं। नामांकन, जांच, मतदान और मतगणना की पूरी प्रक्रिया राज्यसभा चुनाव नियमों और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार संपन्न कराई जाएगी।

मतदान पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर में निर्धारित समय के दौरान होगा, जबकि मतगणना उसी दिन मतदान समाप्त होने के बाद शुरू कर दी जाएगी।

संवैधानिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण

राज्यसभा के रिक्त पदों को भरने के लिए उपचुनाव कराना भारतीय संसदीय व्यवस्था की नियमित संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे उच्च सदन में राज्यों का प्रतिनिधित्व बना रहता है और रिक्त सीटों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत समयबद्ध तरीके से भरा जाता है।

अब सभी की नजर 24 जुलाई पर रहेगी, जब मतदान और मतगणना के बाद यह स्पष्ट होगा कि पश्चिम बंगाल की इन तीन राज्यसभा सीटों पर कौन नए सदस्य के रूप में उच्च सदन पहुंचेंगे।

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Mon, 06 Jul 2026 13:11:50 +0530 news desk MPcg
बिहार विधानसभा मानसून सत्र 20 जुलाई से, टेंडर घोटाले, एनकाउंटर और महंगाई पर गरमाएगी सियासत https://citytoday.co.in/7105 https://citytoday.co.in/7105 बिहार विधान मंडल का आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है और 24 जुलाई तक चलने की संभावना है। हालांकि अभी तक संसदीय कार्य विभाग की ओर से इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन विधानसभा से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह सत्र पांच दिनों का होगा और इसमें सरकार के लिए विधायी कामकाज के साथ-साथ राजनीतिक चुनौतियाँ भी महत्वपूर्ण रहने वाली हैं। इस सत्र को राज्य की नई सरकार के लिए एक अहम परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का पहला मानसून सत्र माना जा रहा है।

सत्र की अवधि, कार्यवाही और प्रमुख एजेंडा

सूत्रों के अनुसार, मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगा और इसमें कुल पांच कार्यदिवस होंगे। पिछली बार भी विधानसभा का मानसून सत्र सीमित अवधि का ही था, जिससे इस बार भी समय प्रबंधन और हंगामे की संभावना को लेकर चर्चा तेज है।

इस सत्र के दौरान सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहला अनुपूरक बजट (First Supplementary Budget) पेश किया जाएगा, जिसकी अनुमानित राशि लगभग 50 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह बजट विभिन्न विभागों की अतिरिक्त आवश्यकताओं, विकास योजनाओं और प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए लाया जाएगा।

इसके अलावा, कई महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव भी सदन में पेश किए जाने की संभावना है, जिनमें प्रशासनिक सुधार, विकास योजनाओं का विस्तार और कानून व्यवस्था से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

विपक्ष की रणनीति: सरकार को घेरने के लिए व्यापक तैयारी

इस बार का मानसून सत्र राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि विपक्ष ने कई प्रमुख मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। विपक्ष का फोकस सिर्फ एक मुद्दे पर नहीं, बल्कि कई प्रशासनिक और सामाजिक विषयों पर रहने वाला है।

विपक्ष जिन प्रमुख मुद्दों को सदन में जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रहा है, उनमें शामिल हैं—

कथित टेंडर घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप
पुलिस एनकाउंटर मामलों और कानून-व्यवस्था पर सवाल
राज्य में बढ़ती महंगाई और आम जनता पर आर्थिक दबाव
अपराध की घटनाएँ और प्रशासनिक विफलता के आरोप
हाल के विवादित मामलों को लेकर सरकार की जवाबदेही

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, विपक्ष सदन में लगातार स्थगन प्रस्ताव, प्रश्नकाल में तीखे सवाल और बहस के जरिए सरकार को दबाव में लाने की कोशिश करेगा। इसके चलते सत्र के हंगामेदार रहने की पूरी संभावना है।

सरकार की तैयारी और सदन में रणनीति

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह सत्र राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है। यह सदन में उनकी सरकार का पहला बड़ा अवसर होगा, जहां वे विपक्ष के आरोपों का सीधा सामना करेंगे।

सरकारी खेमे का मानना है कि विपक्ष चाहे जितने भी मुद्दे उठाए, सरकार अपने विकास कार्यों, बजट प्रबंधन और प्रशासनिक उपलब्धियों के आधार पर जवाब देगी। साथ ही यह भी संकेत हैं कि सदन में अनुशासन बनाए रखने के लिए सरकार कड़ा रुख अपना सकती है और व्यवधान की स्थिति में कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार की प्राथमिकता होगी कि अनुपूरक बजट और महत्वपूर्ण विधेयकों को समय पर पारित कराया जाए, ताकि विकास योजनाओं पर कोई असर न पड़े।

राजनीतिक माहौल और टकराव की संभावना

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का मानसून सत्र सामान्य विधायी प्रक्रिया से अधिक राजनीतिक टकराव का मंच बन सकता है। विपक्ष की आक्रामक रणनीति और सत्ता पक्ष की जवाबी तैयारी के कारण सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है।

पिछले अनुभवों को देखते हुए यह भी संभावना जताई जा रही है कि प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान बार-बार व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। इससे सदन की कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका है।

विधायी कार्य और प्रशासनिक प्रस्ताव

सत्र के दौरान केवल राजनीतिक मुद्दे ही नहीं, बल्कि कई विधायी और प्रशासनिक कार्य भी पूरे किए जाएंगे। सरकार की ओर से विभिन्न विभागों से जुड़े संशोधन विधेयक पेश किए जा सकते हैं, जिनका उद्देश्य प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना और योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाना होगा।

इसके अलावा बजट से संबंधित चर्चाएं भी इस सत्र का प्रमुख हिस्सा होंगी, जिसमें विभिन्न विभागों के खर्च और योजनाओं पर विस्तार से बहस होने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

बिहार विधानसभा का यह मानसून सत्र न केवल विधायी कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राजनीतिक शक्ति परीक्षण का भी मंच बनने जा रहा है। एक ओर सरकार अपने पहले अनुपूरक बजट और विधेयकों को पारित कराने की कोशिश करेगी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष भ्रष्टाचार, एनकाउंटर और महंगाई जैसे मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाएगा।

इन परिस्थितियों में यह स्पष्ट है कि 20 जुलाई से शुरू होने वाला यह सत्र बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और संभावित रूप से तनावपूर्ण अध्याय साबित हो सकता है।

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Sat, 04 Jul 2026 14:59:33 +0530 news desk MPcg
बंगाल की राजनीति में भूचाल: चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा, TMC में गहराया आंतरिक संकट https://citytoday.co.in/7103 https://citytoday.co.in/7103 पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी मानी जाने वाली चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। यह कदम ऐसे समय आया है जब पार्टी पहले से ही आंतरिक असंतोष और गुटीय राजनीति को लेकर चर्चा में है। उनके इस फैसले को TMC के भीतर बढ़ते तनाव और नेतृत्व पर उठते सवालों के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

इस्तीफे का दायरा: केवल पद नहीं, पूरा संगठनात्मक ढांचा छोड़ा

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने केवल एक पद से इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि उन्होंने पार्टी संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्वों से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है।

सूत्रों के अनुसार उन्होंने जिन जिम्मेदारियों से इस्तीफा दिया, उनमें शामिल हैं—

पश्चिम बंगाल TMC अध्यक्ष पद
पार्टी के राज्य स्तरीय संगठनात्मक पद
पार्टी के बैंक खातों से जुड़े अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (authorized signatory) की भूमिका
चुनाव आयोग (Election Commission) के समक्ष पार्टी के प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी
संगठनात्मक वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों में सहभागिता

यह इस्तीफा उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखित पत्र के माध्यम से सौंपा। खास बात यह है कि उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मात्र 3 जून को सौंपी गई थी, यानी वह इस पद पर एक महीने से भी कम समय तक रहीं।

इस्तीफे की पृष्ठभूमि: अंदरूनी कलह और राजनीतिक तनाव

पार्टी के भीतर चल रही घटनाओं को देखते हुए यह इस्तीफा अचानक नहीं माना जा रहा। राजनीतिक हलकों में लंबे समय से TMC के भीतर विभिन्न गुटों के बीच तनाव की चर्चा थी।

सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में संगठन के भीतर दो प्रमुख धड़े सक्रिय बताए जा रहे हैं—

एक धड़ा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सीधे नेतृत्व के साथ जुड़ा हुआ माना जाता है
दूसरा धड़ा युवा और वैकल्पिक नेतृत्व की मांग के साथ उभरता हुआ समूह बताया जा रहा है

इसी पृष्ठभूमि में चंद्रिमा भट्टाचार्य के पुत्र सौरव बसु के एक कथित “बागी गुट” से जुड़ने की खबरों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया। यह गुट ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसने पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा को और तेज कर दिया।

“विश्वसनीयता पर सवाल” वाला बयान: राजनीतिक संदेश या असंतोष का संकेत?

इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में चंद्रिमा भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि उनका निर्णय किसी व्यक्तिगत विवाद से नहीं जुड़ा है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी नेता की “विश्वसनीयता और निष्ठा पर सवाल उठने लगें”, तो उस स्थिति में पद पर बने रहना संभव नहीं होता।

उनका यह बयान राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पार्टी के भीतर निर्णय प्रक्रिया, आंतरिक विश्वास और नेतृत्व शैली पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि संगठनात्मक असंतोष का संकेत भी हो सकता है।

ऋतब्रत बनर्जी का हमला और “प्राइवेट लिमिटेड कंपनी” टिप्पणी

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की कार्यशैली पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने पार्टी को “प्राइवेट लिमिटेड कंपनी” करार देते हुए नेतृत्व पर केंद्रीकृत नियंत्रण और आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाया।

उनकी यह टिप्पणी राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह TMC के भीतर चल रहे वैचारिक और संगठनात्मक मतभेदों को सार्वजनिक रूप से उजागर करती है। विपक्षी दलों के लिए भी यह मुद्दा राजनीतिक हमले का आधार बन सकता है।

संगठनात्मक प्रभाव: TMC के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह इस्तीफा?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि इसका संगठन पर कई स्तरों पर प्रभाव पड़ सकता है—

1. नेतृत्व पर दबाव

ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी लंबे समय से एक मजबूत केंद्रीकृत ढांचे के रूप में काम करती रही है, लेकिन इस तरह के इस्तीफे उस संरचना पर सवाल उठाते हैं।

2. आंतरिक अनुशासन पर असर

एक वरिष्ठ नेता का अचानक सभी पद छोड़ना यह संकेत देता है कि संगठनात्मक अनुशासन और संवाद में कमी हो सकती है।

3. गुटीय राजनीति का संकेत

यह घटना पार्टी के भीतर गुटों के और अधिक सक्रिय होने का संकेत भी देती है, जिससे भविष्य में और इस्तीफे या असंतोष सामने आ सकते हैं।

4. चुनावी असर

आगामी राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए, ऐसे घटनाक्रम विपक्षी दलों को हमले का अवसर दे सकते हैं, खासकर तब जब राज्य में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पहले से ही तेज है।

TMC की मौजूदा स्थिति और संभावित रणनीति

फिलहाल पार्टी की ओर से इस इस्तीफे पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि संगठन इस स्थिति को गंभीरता से ले रहा है और आंतरिक स्तर पर संवाद और पुनर्संतुलन की कोशिश की जा सकती है।

संभावित कदमों में शामिल हो सकते हैं—

संगठनात्मक पुनर्गठन
वरिष्ठ नेताओं के साथ आंतरिक बैठकें
गुटीय तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता प्रयास
नए नेतृत्व ढांचे पर विचार
निष्कर्ष: एक इस्तीफा या बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत?

चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा केवल एक प्रशासनिक घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे TMC के भीतर चल रही गहरी राजनीतिक खींचतान और नेतृत्व संरचना पर बढ़ते दबाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह मामला केवल एक व्यक्तिगत निर्णय तक सीमित रहता है या फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में किसी बड़े संगठनात्मक बदलाव की शुरुआत बनता है।

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Sat, 04 Jul 2026 14:46:55 +0530 news desk MPcg
लखनऊ दौरे पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, 41 स्वागत बिंदुओं पर 25 सामाजिक समूह करेंगे अभिनंदन; संगठनात्मक बैठकों और चुनावी रणनीति पर रहेगा फोकस https://citytoday.co.in/7090 https://citytoday.co.in/7090 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन शनिवार से दो दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे पर लखनऊ पहुंच रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह उनका पहला औपचारिक संगठनात्मक दौरा है, जिसमें वे प्रदेश संगठन, जनप्रतिनिधियों और एनडीए सहयोगी दलों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे। इस दौरे को आगामी चुनावों की तैयारियों, संगठन की मजबूती और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

भाजपा ने उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट से पार्टी प्रदेश मुख्यालय तक 41 स्वागत बिंदु निर्धारित किए हैं, जहां 25 अलग-अलग सामाजिक समूहों को स्वागत की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी इसे सामाजिक समावेश और व्यापक जनसंपर्क का प्रतीक बता रही है, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे उत्तर प्रदेश की सामाजिक और चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं।

सुबह लखनऊ पहुंचेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष

भाजपा के कार्यक्रम के अनुसार, नितिन नवीन शनिवार सुबह करीब 11 बजे चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। एयरपोर्ट पर पार्टी पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं द्वारा उनका स्वागत किया जाएगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष एयरपोर्ट से भाजपा प्रदेश मुख्यालय तक सड़क मार्ग से जाएंगे। पूरे मार्ग पर पार्टी कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

41 स्वागत बिंदु, 25 सामाजिक समूहों की भागीदारी

भाजपा ने स्वागत कार्यक्रम को सामाजिक प्रतिनिधित्व के आधार पर व्यवस्थित किया है। विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग समाजों और समुदायों को जिम्मेदारी दी गई है।

स्वागत में जिन प्रमुख सामाजिक समूहों की भागीदारी तय की गई है, उनमें शामिल हैं—

गौतम समाज
कायस्थ समाज
गाल समाज
राजभर समाज
पर्वतीय समाज
लोधी समाज
यादव समाज
ब्राह्मण समाज
मराठी समाज
अल्पसंख्यक एवं क्रिश्चियन समाज
पटेल समाज
मौर्य समाज
कुशवाहा समाज
वाल्मीकि समाज
पासी समाज
निषाद समाज
सिंधी समाज
साहू समाज
सिख एवं पंजाबी समाज
वैश्य समाज
बंगाली समाज
खत्री समाज
विश्वकर्मा समाज
क्षत्रिय समाज
सोनकर समाज
भोजपुरी समाज
ओबीसी मोर्चा

इन स्वागत स्थलों पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भी अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

110 पार्षदों की 30 टीमें रहेंगी सक्रिय

स्वागत कार्यक्रम को सुव्यवस्थित बनाने के लिए भाजपा ने 110 पार्षदों की 30 अलग-अलग टोलियां बनाई हैं। पूरे मार्ग पर कार्यकर्ताओं की मानव श्रृंखला भी बनाई जाएगी ताकि राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत व्यवस्थित ढंग से किया जा सके।

कार्यक्रम के अनुसार, नितिन नवीन केवल पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृतिका पर रुककर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद वे सीधे पार्टी कार्यालय पहुंचेंगे।

प्रदेश मुख्यालय में होगी पहली संगठनात्मक बैठक

दोपहर लगभग 12 बजे भाजपा प्रदेश मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदेश पदाधिकारियों के साथ परिचय एवं संगठनात्मक संवाद करेंगे।

यह बैठक कई कारणों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उत्तर प्रदेश संगठन के साथ उनकी यह पहली औपचारिक बैठक होगी। इसमें संगठन विस्तार, बूथ प्रबंधन, सदस्यता अभियान, आगामी चुनावों की तैयारी और कार्यकर्ताओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

हनुमान सेतु मंदिर में करेंगे दर्शन

कार्यक्रम के अनुसार शाम करीब 4 बजे नितिन नवीन लखनऊ के हनुमान सेतु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद वे प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, सांसदों, विधायकों तथा विधान परिषद सदस्यों के साथ अलग-अलग बैठकों में शामिल होंगे।

इन बैठकों में संगठन और सरकार के बीच समन्वय, विकास कार्यों तथा आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों पर चर्चा होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ रात्रि भोज

दौरे के पहले दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ रात्रि भोजन करेंगे। राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस दौरान प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, संगठनात्मक गतिविधियों, आगामी चुनावों और सरकार-संगठन के समन्वय सहित विभिन्न विषयों पर अनौपचारिक चर्चा हो सकती है।

हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई है।

दूसरे दिन एनडीए और संगठन की अहम बैठकें

रविवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यक्रम और भी व्यस्त रहेगा।

कार्यक्रम के अनुसार वे—

पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ चाय पर संवाद करेंगे।
सुबह लगभग 9:30 बजे एनडीए की बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
दोनों उपमुख्यमंत्रियों से अलग-अलग मुलाकात करेंगे।
प्रेरणा स्थल पहुंचकर शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
शाम को एक बूथ अध्यक्ष के आवास पर पहुंचकर बूथ स्तर की संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे।

भाजपा लंबे समय से बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है और इस दौरे को उसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जातीय प्रतिनिधित्व के क्या हैं राजनीतिक मायने?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विभिन्न सामाजिक समूहों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। भाजपा द्वारा स्वागत कार्यक्रम में अलग-अलग समाजों को जिम्मेदारी देना राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सामाजिक प्रतिनिधित्व और व्यापक संपर्क का संदेश देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि पार्टी की ओर से इसे केवल संगठनात्मक स्वागत कार्यक्रम बताया गया है। राजनीतिक महत्व को लेकर भाजपा ने कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

उत्तर प्रदेश संगठन के लिए अहम दौरा

भाजपा नेतृत्व का मानना है कि उत्तर प्रदेश संगठन आगामी चुनावों की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण इकाइयों में से एक है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा संगठनात्मक समीक्षा, कार्यकर्ताओं से संवाद और भविष्य की रणनीति तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस दौरान प्रदेश नेतृत्व, सांसदों, विधायकों, संगठन पदाधिकारियों और एनडीए सहयोगी दलों के साथ होने वाली बैठकों पर राजनीतिक हलकों की भी नजर रहेगी।

(यह समाचार भाजपा के घोषित कार्यक्रम, पार्टी पदाधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी तथा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक विवरणों के आधार पर तैयार किया गया है।)

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Sat, 04 Jul 2026 12:04:53 +0530 news desk MPcg
पश्चिम बंगाल: TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी कार्यालय पर अंडे और सब्जियां फेंके जाने का लगाया आरोप, BJP समर्थकों पर साधा निशाना https://citytoday.co.in/7034 https://citytoday.co.in/7034 पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को एक नया विवाद सामने आया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि नादिया जिले में स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कार्यालय की खिड़कियों पर अंडे और सब्जियां फेंकी। सांसद ने घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया और दावा किया कि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की।

हालांकि, इस घटना को लेकर भाजपा की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। वहीं, पुलिस की ओर से भी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

सोशल मीडिया पर साझा किया वीडियो

महुआ मोइत्रा ने बुधवार दोपहर अपने आधिकारिक X अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में पार्टी कार्यालय की खिड़की के बाहर कुछ लोगों की भीड़ दिखाई देती है, जबकि कार्यालय की ओर अंडे और अन्य वस्तुएं फेंके जाने का दृश्य भी नजर आता है।

वीडियो साझा करते हुए महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी एक घंटे से अधिक समय तक लगातार पार्टी कार्यालय को निशाना बनाते रहे।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्होंने इस संबंध में राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से भी संपर्क किया, लेकिन उनके अनुसार पुलिस ने देर से पहुंचने के बाद भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि पुलिस घटनास्थल पर मौजूद रही, लेकिन कथित तौर पर हमलावरों को रोकने या उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय केवल स्थिति देखती रही।

उन्होंने यह भी दावा किया कि स्थानीय पुलिस ने घटना के संबंध में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने से इनकार किया। सांसद ने आरोप लगाया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान भी मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने भी हस्तक्षेप नहीं किया।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सकी है।

BJP समर्थकों पर लगाया आरोप

TMC सांसद ने आरोप लगाया कि घटना में शामिल लोग भाजपा समर्थक थे और उनका उद्देश्य पार्टी कार्यालय में चल रही संगठनात्मक बैठक को बाधित करना था।

हालांकि, भाजपा की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है।

हाल के दिनों में TMC नेताओं के साथ ऐसी घटनाएं

महुआ मोइत्रा का दावा ऐसे समय सामने आया है जब हाल के सप्ताहों में TMC के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ भी विरोध प्रदर्शन के दौरान इसी तरह की घटनाएं सामने आई हैं।

30 मई 2026 को TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के काफिले के विरोध के दौरान सोनारपुर क्षेत्र में अंडे फेंके जाने की घटना सामने आई थी।
इसके बाद 15 जून 2026 को कोलकाता स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट आवास के बाहर TMC नेता कुणाल घोष पर भी अंडे फेंके जाने की घटना हुई थी।

इन घटनाओं के बाद राज्य की राजनीतिक सुरक्षा व्यवस्था और विरोध प्रदर्शनों के तौर-तरीकों को लेकर बहस तेज हो गई है।

पश्चिम बंगाल में बढ़ा राजनीतिक तनाव

पश्चिम बंगाल में हाल के महीनों में सत्तारूढ़ TMC और विपक्षी BJP के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ा है। पंचायत, नगर निकाय और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच कई बार तनावपूर्ण स्थितियां देखने को मिली हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान विरोध प्रदर्शनों और टकराव की घटनाएं राज्य की राजनीति में बढ़ती ध्रुवीकरण की स्थिति को दर्शाती हैं। हालांकि, किसी भी घटना की जिम्मेदारी तय करना जांच एजेंसियों का विषय है।

जांच और आधिकारिक स्थिति

समाचार लिखे जाने तक—

महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर आरोप लगाए हैं।
घटना की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस द्वारा सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।
भाजपा की ओर से आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
एफआईआर दर्ज हुई है या नहीं, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

यदि पुलिस जांच या संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट में नए तथ्य सामने आते हैं, तो मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

निष्कर्ष

नादिया में TMC सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा लगाए गए आरोपों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार घटना के वीडियो और सांसद के सार्वजनिक आरोप सामने आए हैं, जबकि भाजपा और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और सभी पक्षों के आधिकारिक बयान सामने आने के बाद ही निकाला जा सकता है।

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Wed, 01 Jul 2026 18:12:03 +0530 news desk MPcg
तमिलनाडु में ₹35 करोड़ की कथित रिश्वत, 15 विधायकों के इस्तीफे की साजिश और तीन गिरफ्तारियां: विजय सरकार को अस्थिर करने के आरोपों से मचा सियासी भूचाल https://citytoday.co.in/7032 https://citytoday.co.in/7032 तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया, जब अभिनेता से नेता बने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख विजय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के एक विधायक ने दावा किया कि उन्हें विधानसभा में प्रस्तावित मतदान को प्रभावित करने के बदले ₹35 करोड़ की रिश्वत की पेशकश की गई। विधायक की शिकायत के आधार पर चेन्नई पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

इस बीच, कुछ राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कथित साजिश केवल एक विधायक तक सीमित नहीं थी, बल्कि TVK के करीब 15 विधायकों से इस्तीफा दिलाकर सरकार का बहुमत गिराने की योजना भी इसमें शामिल थी। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि पुलिस ने अब तक नहीं की है और जांच जारी है।

क्या है पूरा मामला?

TVK विधायक एन. इलैयाराजा ने 29 जून 2026 को चेन्नई पुलिस आयुक्त के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, उनसे थिरुनावुक्करासु नामक व्यक्ति ने संपर्क किया, जिसने स्वयं को Indian Political Democratic Strategies (IPDS) नामक राजनीतिक परामर्श संस्था का प्रमुख बताया।

विधायक के अनुसार, आरोपी ने दावा किया कि वह एक प्रभावशाली राजनीतिक दल की ओर से बातचीत कर रहा है। उसने कहा कि जल्द ही तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर के खिलाफ एक प्रस्ताव लाया जाएगा और उस समय इलैयाराजा को अपनी पार्टी के निर्देशों के विपरीत मतदान करना होगा।

इसके बदले आरोपी ने कथित तौर पर ₹35 करोड़ देने की पेशकश की।

रिश्वत ठुकराने पर धमकी का आरोप

शिकायत में विधायक ने कहा कि उन्होंने प्रस्ताव को तुरंत अस्वीकार कर दिया और दोबारा संपर्क न करने की चेतावनी दी। इसके बावजूद आरोपी ने कथित रूप से उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

विधायक का आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि यदि वे सहयोग करेंगे तो उन्हें पूरी सुरक्षा और आर्थिक लाभ मिलेगा, जबकि इंकार करने पर राजनीतिक और व्यक्तिगत नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पुलिस जांच और तीन गिरफ्तारियां

शिकायत मिलने के बाद चेन्नई पुलिस ने विशेष जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने एक राजनीतिक परामर्श संस्था से जुड़े कर्मचारी सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया।

जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल संचार, बैंक खातों और कथित वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या यह प्रयास किसी बड़े राजनीतिक नेटवर्क का हिस्सा था या कुछ व्यक्तियों की स्वतंत्र कार्रवाई।

अधिकारियों ने फिलहाल विस्तृत जांच पूरी होने तक मामले पर अधिक टिप्पणी करने से परहेज किया है।

जांच में किन नेताओं का नाम सामने आया?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ और प्रारंभिक जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों के संपर्क डीएमके नेता एवं पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी तथा उनके भाई वी. अशोक कुमार से जुड़े होने की बात सामने आई है।

हालांकि, अब तक पुलिस ने किसी भी राजनीतिक नेता को इस मामले में आरोपी घोषित नहीं किया है और न ही किसी अदालत ने उनके खिलाफ कोई आरोप सिद्ध किया है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

15 विधायकों के इस्तीफे की कथित योजना

राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों द्वारा सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कथित योजना के तहत TVK के लगभग 15 विधायकों से एक साथ इस्तीफा दिलाकर सरकार को अल्पमत में लाने की रणनीति तैयार की गई थी।

बताया गया कि यदि पर्याप्त संख्या में विधायक इस्तीफा देते या दल-बदल करते, तो विधानसभा में सरकार का बहुमत प्रभावित हो सकता था।

हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस कथित योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह दावा फिलहाल जांच का विषय है।

TVK सरकार का आरोप

तमिलनाडु सरकार में मंत्री सी.टी. निर्मल कुमार ने प्रेस से बातचीत में आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम सरकार को अस्थिर करने और लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने की कोशिश है।

उन्होंने कहा कि—

कई TVK विधायकों से संपर्क किया गया।
अलग-अलग विधायकों को ₹10 करोड़ से ₹50 करोड़ तक की रकम की कथित पेशकश की गई।
इस पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

मंत्री ने पुलिस से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

डीएमके ने सभी आरोपों से किया इनकार

दूसरी ओर, डीएमके ने इन आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक बताया है।

पार्टी प्रवक्ता ए. सरवनन ने कहा कि TVK सरकार बिना जांच पूरी हुए मीडिया में जानकारियां लीक कर रही है ताकि जनता के बीच राजनीतिक माहौल बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास किसी भी डीएमके नेता के खिलाफ ठोस और कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य हैं तो वह अदालत और जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करे।

डीएमके का कहना है कि केवल राजनीतिक बयान देना किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि का आधार नहीं हो सकता।

कानूनी पहलू

यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि किसी विधायक को धन देकर मतदान प्रभावित करने या सरकार गिराने का प्रयास किया गया, तो संबंधित व्यक्तियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों तथा चुनाव एवं जनप्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।

हालांकि, किसी भी आरोपी की कानूनी जिम्मेदारी अदालत में आरोप सिद्ध होने के बाद ही तय होगी।

राजनीतिक महत्व

तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से डीएमके और एआईएडीएमके के इर्द-गिर्द घूमती रही है। विजय के नेतृत्व में TVK के सत्ता में आने के बाद राज्य की राजनीति में एक नया शक्ति संतुलन बना है।

ऐसे समय में यदि सरकार गिराने, विधायकों की खरीद-फरोख्त या सामूहिक इस्तीफे जैसी किसी साजिश के आरोप सामने आते हैं, तो यह राज्य की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक कथित रिश्वत प्रस्ताव तक सीमित नहीं है, बल्कि यदि जांच में बड़े राजनीतिक षड्यंत्र के प्रमाण मिलते हैं, तो यह तमिलनाडु की हालिया राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में शामिल हो सकता है।

अभी क्या स्थिति है?
विधायक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जांच जारी है।
तीन लोगों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है।
डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
कथित राजनीतिक संबंधों की भी पड़ताल हो रही है।
डीएमके ने सभी आरोपों से इनकार किया है।
किसी भी राजनीतिक नेता की भूमिका अभी जांच के दायरे में है; अदालत द्वारा किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है।

निष्कर्ष: यह मामला अभी जांच के शुरुआती चरण में है। रिश्वत, सरकार गिराने की कथित साजिश और राजनीतिक खरीद-फरोख्त से जुड़े सभी आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल उपलब्ध तथ्य शिकायत, पुलिस कार्रवाई और संबंधित पक्षों के सार्वजनिक बयानों पर आधारित हैं।

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Wed, 01 Jul 2026 17:13:19 +0530 news desk MPcg
राम मंदिर को लेकर केजरीवाल के सवालों पर बढ़ा राजनीतिक विवाद, अमित शाह से जुड़े बयान ने खड़ा किया नया सियासी मोर्चा https://citytoday.co.in/7031 https://citytoday.co.in/7031 दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर राम मंदिर से जुड़े व्यक्तिगत और राजनीतिक सवाल उठाने के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक आस्था और सत्ता राजनीति का टकराव तेज हो गया है। यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण और प्रबंधन को लेकर पहले से ही कई राजनीतिक दल आमने-सामने हैं।

ताजा बयान में केजरीवाल ने गृह मंत्री से जुड़ी आस्था और उनके अयोध्या स्थित राम मंदिर दर्शन को लेकर सवाल खड़े किए, जिसके बाद यह मुद्दा केवल धार्मिक भावनाओं तक सीमित न रहकर राजनीतिक बहस में बदल गया है।

केजरीवाल के सवाल: आस्था बनाम सार्वजनिक उपस्थिति की बहस

केजरीवाल द्वारा उठाए गए सवालों में मुख्य रूप से यह पूछा गया—

क्या अमित शाह अब तक राम मंदिर नहीं गए हैं?
क्या वे भगवान राम के दर्शन नहीं करना चाहते?
क्या उनके लिए राम मंदिर जाना आवश्यक नहीं है?
क्या वे भगवान राम को देवता के रूप में स्वीकार करते हैं?

इन सवालों को विपक्षी राजनीति की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें व्यक्तिगत आस्था और सार्वजनिक आचरण को जोड़कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि: राम मंदिर का बढ़ता प्रभाव

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भारतीय राजनीति के सबसे बड़े सांस्कृतिक और वैचारिक मुद्दों में से एक रहा है। मंदिर का निर्माण कार्य और 2024 में हुआ प्राण-प्रतिष्ठा समारोह देशभर में व्यापक रूप से चर्चा का विषय बना था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई शीर्ष नेता शामिल हुए थे।

राम मंदिर अब केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतीक बन चुका है, जिसे विभिन्न दल अपने-अपने तरीके से जनता के बीच पेश करते हैं—

सत्ता पक्ष इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक मानता है
विपक्ष इसे पारदर्शिता, ट्रस्ट प्रबंधन और राजनीतिक उपयोग से जोड़कर देखता है
ताजा विवाद कैसे शुरू हुआ?

हाल के दिनों में केजरीवाल ने राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े धन संग्रह (दान) पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़ी वित्तीय प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और जांच एजेंसियों की कार्रवाई संतोषजनक नहीं है।

इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि कुछ “बड़े नाम” इस मामले में शामिल हो सकते हैं और जांच एजेंसियां कार्रवाई नहीं कर रही हैं।

इसी पृष्ठभूमि में अब उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े व्यक्तिगत सवाल उठाकर विवाद को और आगे बढ़ा दिया है।

भाजपा और केंद्र सरकार का रुख

हालांकि इस ताजा बयान पर केंद्र सरकार या गृह मंत्रालय की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन भाजपा के नेता पहले भी ऐसे बयानों को “राजनीतिक नौटंकी” और “धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग” बताते रहे हैं।

भाजपा का कहना रहा है कि राम मंदिर का निर्माण एक ऐतिहासिक और न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है, जिसे राजनीतिक बहस से अलग रखा जाना चाहिए।

विपक्ष का आरोप: पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल

विपक्षी दलों का कहना है कि राम मंदिर से जुड़ी संस्थाओं और ट्रस्टों की गतिविधियों में पारदर्शिता होनी चाहिए, क्योंकि यह जनता के दान और आस्था से जुड़ा विषय है।

कुछ विपक्षी नेताओं ने पहले भी कहा है कि यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता होती है तो उसकी जांच स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा की जानी चाहिए।

विशेषज्ञों की राय: धार्मिक मुद्दे का राजनीतिक उपयोग

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत में राम मंदिर जैसे मुद्दे लंबे समय से भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर प्रभाव डालते रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार—

ऐसे बयान चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं
धार्मिक आस्था से जुड़े सवाल अक्सर जनभावनाओं को प्रभावित करते हैं
व्यक्तिगत नेताओं को लक्ष्य बनाना राजनीतिक तनाव को बढ़ाता है
कानूनी और संस्थागत दृष्टि से स्थिति

संवैधानिक रूप से किसी भी नागरिक या नेता की धार्मिक आस्था व्यक्तिगत विषय है, और सार्वजनिक पद पर होने के बावजूद किसी व्यक्ति की धार्मिक गतिविधियों पर सवाल उठाना केवल राजनीतिक और वैचारिक विमर्श के दायरे में आता है।

निष्कर्ष

राम मंदिर और अमित शाह से जुड़े इस विवाद ने एक बार फिर दिखा दिया है कि भारत की राजनीति में आस्था, प्रतीक और सत्ता के बीच की रेखा अक्सर धुंधली हो जाती है।

फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित है, लेकिन आने वाले दिनों में यदि दोनों पक्षों की ओर से और प्रतिक्रियाएं आती हैं तो यह विवाद और गहरा सकता है।

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Wed, 01 Jul 2026 15:59:58 +0530 news desk MPcg
राज्यसभा में NDA की बढ़ी ताकत, दो&तिहाई बहुमत से कुछ कदम दूर; लोकसभा में अभी भी चुनौती बरकरार https://citytoday.co.in/6990 https://citytoday.co.in/6990 संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की संसदीय स्थिति और मजबूत होती नजर आ रही है। राज्यसभा में नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद एनडीए उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच गया है। हालांकि, लोकसभा में संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल करना अभी भी गठबंधन के लिए चुनौती बना हुआ है।

राज्यसभा अध्यक्ष सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई, जिसके बाद सदन में दलों की संख्या में बदलाव देखने को मिला। मौजूदा स्थिति में 245 सदस्यीय राज्यसभा में एनडीए के पास 141 सांसद हैं, जो साधारण बहुमत से काफी आगे है और दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच चुका है।

राज्यसभा में कैसे मजबूत हुई NDA की स्थिति?

वर्तमान संख्या बल के अनुसार एनडीए के पास 141 सदस्य हैं। यदि मनोनीत और निर्दलीय सांसदों में से लगभग 10 सदस्यों का समर्थन सरकार को मिलता है, तो यह संख्या बढ़कर 151 तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, बीजू जनता दल (BJD) के पांच और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के चार सांसद कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर पहले भी केंद्र सरकार का समर्थन करते रहे हैं। इन दलों का समर्थन मिलने की स्थिति में एनडीए का आंकड़ा 160 तक पहुंच सकता है।

245 सदस्यीय राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सदस्यों का समर्थन आवश्यक माना जाता है। ऐसे में सरकार इस लक्ष्य से केवल चार सीट दूर रह जाएगी।

बंगाल की रिक्त सीटों से मिल सकती है बढ़त

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर पश्चिम बंगाल की तीन रिक्त राज्यसभा सीटों पर भी टिकी हुई है। भविष्य में इन सीटों पर उपचुनाव होने की स्थिति में भाजपा को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो एनडीए की संख्या 163 तक पहुंच सकती है, जो दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े 164 से केवल एक सीट कम होगी।

संविधान संशोधन विधेयकों के लिए अहम है संख्या बल

भारतीय संविधान में संशोधन से जुड़े किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन के साथ-साथ कुल सदस्य संख्या के बहुमत की आवश्यकता होती है।

सरकार भविष्य में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण, परिसीमन (Delimitation) और अन्य संवैधानिक सुधारों से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि सरकार ने आगामी मानसून सत्र के लिए अभी तक ऐसे किसी विधेयक को आधिकारिक रूप से सूचीबद्ध नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस संबंध में चर्चाएं तेज हैं।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर जारी है राजनीतिक बहस

संसद के पिछले सत्र के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर भी व्यापक चर्चा हुई थी। इस दौरान बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट रोडमैप पेश करने की मांग की थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार भविष्य में इस प्रकार का कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक लाती है, तो उसे क्षेत्रीय दलों का सहयोग निर्णायक रूप से प्रभावित करेगा।

लोकसभा में अभी भी आसान नहीं है राह

जहां राज्यसभा में एनडीए की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है, वहीं लोकसभा में समीकरण अभी भी सरकार के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। वर्तमान में लोकसभा की तीन सीटें रिक्त हैं। यदि इन सभी सीटों पर भी एनडीए जीत दर्ज कर लेता है, तब भी संविधान संशोधन के लिए आवश्यक लगभग 360 सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन के आंकड़े तक पहुंचना आसान नहीं होगा।

यानी उच्च सदन की तुलना में सरकार के सामने वास्तविक चुनौती अभी भी लोकसभा में ही बनी हुई है।

क्षेत्रीय दलों की भूमिका रहेगी निर्णायक

संसदीय गणित को देखते हुए बीजू जनता दल (BJD), वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) और अन्य गैर-एनडीए तथा गैर-इंडिया गठबंधन के दल आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कई मौकों पर इन दलों ने मुद्दों के आधार पर सरकार का समर्थन किया है।

इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ बागी नेताओं द्वारा पार्टी के भीतर संभावित राजनीतिक बदलाव और भविष्य में राज्यसभा सदस्यों के इस्तीफों को लेकर दिए गए बयानों ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मानसून सत्र पर रहेगी नजर

संसद का मानसून सत्र जल्द शुरू होने वाला है। ऐसे में सरकार की विधायी प्राथमिकताओं, संभावित संवैधानिक संशोधनों और दोनों सदनों में संख्या बल की राजनीति पर सभी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी। राज्यसभा में एनडीए पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है, लेकिन किसी भी बड़े संवैधानिक बदलाव के लिए लोकसभा में आवश्यक समर्थन जुटाना अभी भी सरकार के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बना हुआ है।

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Tue, 30 Jun 2026 11:27:13 +0530 news desk MPcg
बिहार के कथित 'रिशुश्री महाघोटाले' पर तेजस्वी यादव के 20 सवाल: NDA सरकार से मांगा जवाब, न्यायिक जांच की उठाई मांग https://citytoday.co.in/6971 https://citytoday.co.in/6971 बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव ने कथित 'रिशुश्री महाघोटाला' मामले को लेकर एक बार फिर राज्य की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोमवार को सोशल मीडिया पर साझा की गई विस्तृत पोस्ट में उन्होंने सरकार से 20 सवाल पूछते हुए आरोप लगाया कि मामले में हजारों करोड़ रुपये की अनियमितताओं की आशंका है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में पिछले 21 वर्षों से एनडीए सरकार सत्ता में है, इसलिए प्रशासनिक और वित्तीय जवाबदेही भी उसी की बनती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले से जुड़े प्रत्येक आरोप पर सार्वजनिक रूप से जवाब दिया जाए और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई फिलहाल केवल निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि कथित तौर पर बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसियों के पास पर्याप्त साक्ष्य हैं, तो कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

टेंडर प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल

तेजस्वी यादव ने पूछा कि यदि एक सामान्य ठेकेदार बताए जा रहे व्यक्ति के पास विभिन्न सरकारी विभागों के टेंडर प्रभावित करने की क्षमता थी, तो राज्य का निगरानी तंत्र इतने वर्षों तक निष्क्रिय क्यों रहा।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संबंधित विभागों के अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया या फिर निजी लाभ के लिए कथित अनियमितताओं को नजरअंदाज किया।

तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आए कथित चैट्स से कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संपर्क के संकेत मिले हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि ऐसा है तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की जा रही।

निलंबित अधिकारियों और चार्जशीट को लेकर उठाए सवाल

राजद नेता ने विशेष निगरानी इकाई (SVU) की चार्जशीट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जिन दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनका नाम चार्जशीट में शामिल क्यों नहीं किया गया और उनकी गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि जांच निष्पक्ष होती तो सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई होती।

कमीशन और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि जांच में बिल पास कराने और सरकारी टेंडर दिलाने के बदले दो से साढ़े तीन प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि यदि यह आरोप सही हैं, तो राज्य सरकार की घोषित 'जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन' नीति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि जिन विभागों के अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई है, उनके कार्यकाल में कितनी सरकारी राशि खर्च हुई और उसमें कितनी अनियमितताओं की जांच की जा रही है।

न्यायिक जांच की मांग

तेजस्वी यादव ने पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि कथित तौर पर रिशुश्री और उससे जुड़ी कंपनियों को मिले सभी सरकारी ठेकों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन कंपनियों को सरकारी ठेके मिले, उनकी चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा कराई जानी चाहिए।

99 संपत्तियों और कथित विदेशी यात्राओं का उल्लेख

तेजस्वी यादव ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि जांच के दौरान 99 संपत्तियों के दस्तावेज, नकदी और आभूषण बरामद होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों और उनके परिजनों की कथित विदेशी यात्राओं, हवाई टिकटों और महंगे उपहारों का खर्च भी उठाया गया।

उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि ऐसे वित्तीय लेन-देन हुए, तो आर्थिक अपराध इकाई (EOU), गृह विभाग, निगरानी विभाग और अन्य एजेंसियां समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं कर सकीं।

ई-टेंडरिंग व्यवस्था पर भी सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बिहार में अधिकांश सरकारी टेंडर ई-टेंडरिंग प्रणाली के माध्यम से जारी किए जाते हैं। ऐसे में यदि कथित टेंडर सिंडिकेट सक्रिय था, तो डिजिटल प्रणाली और निगरानी तंत्र उसे रोकने में विफल क्यों रहे।

उन्होंने आंतरिक ऑडिट प्रणाली, विजिलेंस व्यवस्था और विभागीय निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

विभागीय मंत्रियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग

तेजस्वी यादव ने कहा कि जिन विभागों में कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है, उनके विभागीय मंत्रियों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि केंद्रीय एजेंसियों को पहले से संकेत मिल चुके थे, तो राज्य स्तर पर एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई शुरू करने में कथित देरी क्यों हुई।

सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी उठाया मुद्दा

अपने 20वें सवाल में तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बड़े भ्रष्टाचार मामलों में अक्सर कार्रवाई का दायरा दलित, पिछड़े और मुस्लिम समुदाय के अधिकारियों तक सीमित रह जाता है, जबकि शीर्ष स्तर पर बैठे प्रभावशाली लोगों तक जांच नहीं पहुंचती। उन्होंने सरकार से इस आरोप पर भी स्पष्टीकरण मांगा।

सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

समाचार लिखे जाने तक बिहार सरकार या एनडीए के प्रमुख घटक दलों की ओर से तेजस्वी यादव द्वारा पूछे गए 20 सवालों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

गौरतलब है कि तेजस्वी यादव ने अपने सभी आरोप सोशल मीडिया पोस्ट और उपलब्ध जांच संबंधी रिपोर्टों के आधार पर लगाए हैं। इन आरोपों की न्यायिक या अंतिम जांच रिपोर्ट से पुष्टि होना अभी शेष है। मामले की जांच विभिन्न एजेंसियों के स्तर पर जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने तथा संबंधित न्यायिक प्रक्रियाओं के बाद ही सामने आएंगे।

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Mon, 29 Jun 2026 12:09:11 +0530 news desk MPcg
झारखंड राजनीति: कांग्रेस ने योगेंद्र साव का निष्कासन वापस लिया, JMM से बढ़ सकती है दूरी; राज्यसभा चुनाव के बाद महागठबंधन में बढ़ी सियासी हलचल https://citytoday.co.in/6959 https://citytoday.co.in/6959 झारखंड की राजनीति में महागठबंधन के भीतर नई सियासी हलचल देखने को मिल रही है। कांग्रेस ने पूर्व विधायक योगेंद्र साव का निष्कासन महज तीन महीने के भीतर वापस लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संबंधों में खटास की चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम केवल एक नेता की वापसी नहीं, बल्कि गठबंधन की आंतरिक राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी हो सकता है।

हालांकि कांग्रेस और झामुमो की ओर से गठबंधन टूटने जैसी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने दोनों दलों के बीच समन्वय और राजनीतिक विश्वास को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

तीन महीने में बदला कांग्रेस का फैसला

कांग्रेस ने योगेंद्र साव को पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तीन वर्ष के लिए प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया था। लेकिन अब केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर उनका निष्कासन वापस ले लिया गया है।

दिलचस्प बात यह रही कि पार्टी की अनुशासन समिति ने योगेंद्र साव से लिखित माफीनामा देने को कहा था। सूत्रों के अनुसार उन्होंने माफी मांगने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के बाद उनके निष्कासन को समाप्त कर दिया गया। इस निर्णय ने प्रदेश कांग्रेस की कार्यशैली और केंद्रीय नेतृत्व की प्राथमिकताओं को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

राज्यसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरण

कांग्रेस के भीतर यह धारणा मजबूत हुई है कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवार प्रणव झा को झामुमो से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।

सूत्रों के अनुसार शुरुआत में कांग्रेस प्रत्याशी के नाम को लेकर भी सहमति बनाने में समय लगा। बाद में शीर्ष स्तर पर बातचीत के बाद समर्थन तो मिला, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि चुनाव के दौरान जीत सुनिश्चित करने के लिए अपेक्षित राजनीतिक सक्रियता दिखाई नहीं गई।

इसी घटनाक्रम को कांग्रेस के भीतर बढ़ती नाराजगी की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

निर्दलीय उम्मीदवार की एंट्री भी बनी चर्चा का विषय

राज्यसभा चुनाव के दौरान निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी के चुनाव मैदान में उतरने को लेकर भी कांग्रेस के कुछ नेताओं ने सवाल उठाए।

पार्टी के भीतर यह चर्चा रही कि नथवाणी ने नामांकन प्रक्रिया के दौरान मुख्यमंत्री आवास जाकर अपनी चुनावी रणनीति की जानकारी दी थी। कांग्रेस ने उनके नामांकन को चुनौती देने की भी कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी।

हालांकि इन घटनाओं को लेकर किसी भी दल ने सार्वजनिक रूप से गठबंधन पर सवाल नहीं उठाए, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे महागठबंधन के भीतर असहजता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

योगेंद्र साव और अंबा प्रसाद लगातार कर रहे थे प्रयास

पूर्व विधायक योगेंद्र साव और उनकी पुत्री, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद, पिछले कई सप्ताह से पार्टी नेतृत्व के संपर्क में थे और निष्कासन वापस लेने की मांग कर रहे थे।

सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व तक लगातार पैरवी की गई, जिसके बाद निष्कासन समाप्त करने का फैसला लिया गया। इससे यह भी संकेत मिलता है कि कांग्रेस संगठन कुछ प्रभावशाली नेताओं को दोबारा सक्रिय भूमिका में लाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

अनुशासन समिति और केंद्रीय नेतृत्व के बीच अलग रुख

इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि प्रदेश अनुशासन समिति ने माफीनामा नहीं मिलने के कारण निष्कासन वापस लेने से इनकार कर दिया था।

इसके बावजूद केंद्रीय नेतृत्व ने अलग फैसला लेते हुए निष्कासन समाप्त करने के निर्देश जारी किए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि अंतिम निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व के स्तर पर लिया गया।

दूसरे नेताओं की वापसी अब भी लंबित

नगर निकाय चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किए गए लगभग एक दर्जन नेताओं की वापसी का मामला अभी भी लंबित है।

इन नेताओं में कांग्रेस की केंद्रीय सचिव जेबा खान का नाम भी शामिल है। प्रदेश अनुशासन समिति ने इन नेताओं की वापसी की अनुशंसा कर दी है, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व से अब तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है।

ऐसे में योगेंद्र साव की वापसी को विशेष राजनीतिक महत्व दिया जा रहा है।

क्या महागठबंधन में बढ़ रही है दूरी?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के हालिया फैसलों से यह संकेत जरूर मिलता है कि पार्टी अब अपने संगठनात्मक और राजनीतिक निर्णयों में पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्र रुख अपना रही है।

हालांकि अभी तक कांग्रेस और झामुमो दोनों ने सार्वजनिक रूप से गठबंधन जारी रहने की बात कही है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों दलों के रिश्तों में औपचारिक दरार आ गई है। लेकिन राज्यसभा चुनाव के बाद सामने आए घटनाक्रम ने गठबंधन के भीतर समन्वय को लेकर नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

आगे की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?

यदि कांग्रेस और झामुमो के बीच मतभेद बढ़ते हैं तो इसका असर आने वाले विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों की रणनीति पर पड़ सकता है। दूसरी ओर यदि दोनों दल बातचीत के जरिए मतभेद दूर कर लेते हैं तो महागठबंधन पहले की तरह एकजुट भी रह सकता है।

फिलहाल सभी की नजर कांग्रेस और झामुमो नेतृत्व की आगामी बैठकों तथा राजनीतिक निर्णयों पर टिकी हुई है।

मुख्य बिंदु 
कांग्रेस ने पूर्व विधायक योगेंद्र साव का निष्कासन तीन महीने में वापस लिया।
राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और झामुमो के संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हुईं।
कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
अनुशासन समिति के अलग रुख के बावजूद केंद्रीय नेतृत्व ने निष्कासन समाप्त किया।
अंबा प्रसाद और योगेंद्र साव लगातार पार्टी नेतृत्व के संपर्क में थे।
नगर निकाय चुनाव में निष्कासित कई अन्य नेताओं की वापसी अभी लंबित है।
महागठबंधन में औपचारिक टूट की कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में बदलते समीकरणों पर चर्चा जारी है।

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Sat, 27 Jun 2026 16:05:27 +0530 news desk MPcg
चंडीगढ़ में धर्मेंद्र प्रधान का विरोध: पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस का प्रदर्शन, यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता हिरासत में https://citytoday.co.in/6921 https://citytoday.co.in/6921 केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के चंडीगढ़ दौरे के दौरान गुरुवार को राजनीतिक माहौल गर्मा गया। भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे केंद्रीय मंत्री का कांग्रेस और यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कथित पेपर लीक मामलों को लेकर विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे दिखाए, नारेबाजी की और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।

टैगोर थिएटर में कार्यक्रम से पहले शुरू हुआ विरोध

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान गुरुवार को चंडीगढ़ पहुंचे, जहां उन्हें सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में भाजपा द्वारा आयोजित आपातकाल स्मृति कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में हिस्सा लेना था। मंत्री के पहुंचने से पहले ही कांग्रेस और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में काले झंडे लेकर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ नारे लगाए। उनका आरोप था कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है और इसके लिए केंद्र सरकार जवाबदेह है।

"शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो" के लगे नारे

विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस और यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने "शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो", "युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो" और "पेपर लीक पर जवाब दो" जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है।

यूथ कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने लाखों छात्रों की मेहनत और सपनों पर असर डाला है। उन्होंने कहा कि युवाओं के हितों की रक्षा के लिए जवाबदेही तय होना जरूरी है।

पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया

प्रदर्शन को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर-17 और सेक्टर-18 क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। जब प्रदर्शनकारी कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

इस दौरान कई यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए जाने के बावजूद कार्यकर्ता लगातार नारेबाजी करते रहे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कार्यक्रम की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कार्रवाई की गई।

कांग्रेस ने उठाए परीक्षा प्रणाली पर सवाल

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देशभर में आयोजित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के मामलों ने युवाओं में असंतोष बढ़ाया है। पार्टी का कहना है कि लाखों छात्र वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया में खामियों के कारण उनका भविष्य प्रभावित होता है।

कांग्रेस ने मांग की कि पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाए।

भाजपा कार्यक्रम में आपातकाल पर हुई चर्चा

दूसरी ओर टैगोर थिएटर में आयोजित भाजपा कार्यक्रम में 1975 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए चर्चा की गई। कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान ने लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान की रक्षा और आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों पर पड़े प्रभाव को लेकर अपने विचार रखे।

भाजपा नेताओं ने कहा कि आपातकाल का दौर लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय था और उससे सीख लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।

सुरक्षा के घेरे में रहा पूरा क्षेत्र

केंद्रीय मंत्री के दौरे और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा। कार्यक्रम स्थल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, बैरिकेडिंग की गई और निगरानी बढ़ाई गई। अधिकारियों के अनुसार पूरे कार्यक्रम के दौरान स्थिति नियंत्रण में रही और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

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Thu, 25 Jun 2026 15:11:34 +0530 news desk MPcg
भाजपा उत्तर प्रदेश की नई टीम का ऐलान, 19 उपाध्यक्ष और 8 महामंत्री नियुक्त; 2027 मिशन की तैयारी में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल https://citytoday.co.in/6917 https://citytoday.co.in/6917 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने गुरुवार को प्रदेश पदाधिकारियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और विभिन्न मोर्चों के अध्यक्षों की सूची जारी की। नई टीम के गठन को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों और आगामी संगठनात्मक अभियानों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रदेश संगठन में कई नए चेहरों को जगह दी गई है, जबकि अनुभवी नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पार्टी ने सामाजिक, क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने का प्रयास करते हुए 19 प्रदेश उपाध्यक्ष, 8 प्रदेश महामंत्री, 19 प्रदेश मंत्री, 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष तथा विभिन्न मोर्चों और विभागों के प्रमुखों की नियुक्ति की है।

सूची जारी होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच नई जिम्मेदारियों को लेकर उत्साह देखने को मिला। राजनीतिक गलियारों में भी नई टीम को आगामी चुनावी रणनीति का आधार माना जा रहा है।

शीर्ष नेतृत्व की सहमति के बाद बनी नई टीम

भाजपा सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की टीम को अंतिम रूप देने से पहले पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ कई दौर की चर्चा हुई। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की मंजूरी मिलने पर नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई।

नई टीम में संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेताओं के साथ-साथ युवाओं, महिलाओं, पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और अन्य सामाजिक समूहों को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है।

19 नेताओं को बनाया गया प्रदेश उपाध्यक्ष

भाजपा ने प्रदेश संगठन में 19 नेताओं को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें पूर्व मंत्री सुरेश राणा, सत्यपाल सैनी, ब्रज बहादुर, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, मोहित बेनीवाल, देवेश कोरी, प्रियंका रावत, दुर्विजय शाक्य, रमेश सिंह, नीरज सिंह, अर्चना मिश्रा, पूजा पाल, शंकर गिरी, कामेश्वर सिंह, डॉ. कृतिका अग्रवाल, सुरेश मौर्य, राजेश यादव, कृष्ण बिहारी राय और आलोक गुप्ता शामिल हैं।

इन नियुक्तियों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। नीरज सिंह पिछले कई वर्षों से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और उन्हें पार्टी के युवा नेतृत्व का अहम चेहरा माना जाता है।

आठ महामंत्रियों पर संगठन संचालन की जिम्मेदारी

प्रदेश संगठन की रीढ़ माने जाने वाले महामंत्री पद पर आठ नेताओं की नियुक्ति की गई है। इनमें रामप्रताप सिंह चौहान, गीता शाक्य, अभिजात मिश्रा, उपेंद्र रावत, संजय राय, शंकर लोधी, दिलीप पटेल और राजेश चौधरी शामिल हैं।

इन नेताओं को संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान, चुनावी रणनीति, बूथ प्रबंधन और पार्टी कार्यक्रमों के संचालन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी होंगी।

प्रदेश मंत्रियों में नए और युवा चेहरों को मिला मौका

प्रदेश मंत्री पद पर जिन नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है, उनमें विजय शिवहरे, बसंत त्यागी, शिवभूषण सिंह, सहजानंद राय, अंकुर शर्मा, अनिल यादव, अवधेश श्रीवास्तव, विजय राजभर, प्रमेन्द्र जांगड़ा विश्वकर्मा, किरण लोधी निषाद, राकेश बिंद, संचिता सिंह चौहान (लुनिया), रजनी पांडेय, राहुल वाल्मीकि, महामेधा नागर, दीपमाला संतोषी, सुहासिनी जायसवाल, यतेंद्र शर्मा और आकांक्षा सोनकर शामिल हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से भाजपा ने विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के नेताओं को संगठन में उचित प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।

छह क्षेत्रों की कमान नए क्षेत्रीय अध्यक्षों को

भाजपा ने प्रदेश के छह प्रमुख संगठनात्मक क्षेत्रों के लिए भी नए क्षेत्रीय अध्यक्ष नियुक्त किए हैं।

नबाब सिंह नागर – पश्चिम क्षेत्र
पूरन लाल लोधी – ब्रज क्षेत्र
राम किशोर साहू – कानपुर क्षेत्र
अवधेश द्विवेदी – अवध क्षेत्र
अशोक चौरसिया – काशी क्षेत्र
विनोद राय – गोरखपुर क्षेत्र

इन क्षेत्रीय अध्यक्षों पर अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की जिम्मेदारी होगी।

मीडिया और सोशल मीडिया टीम में भी बदलाव

भाजपा ने अपने मीडिया और संचार तंत्र को मजबूत करने के लिए भी नई नियुक्तियां की हैं।

दिनेश प्रताप सिंह को प्रदेश का मुख्य प्रवक्ता बनाया गया है। वहीं मनीष दीक्षित को प्रदेश मीडिया संयोजक और हिमांशु राज पंडित को सोशल मीडिया संयोजक नियुक्त किया गया है।

डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इन पदों को पार्टी की रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विभिन्न मोर्चों को मिला नया नेतृत्व

भाजपा ने अपने सभी प्रमुख मोर्चों में भी नए अध्यक्ष नियुक्त किए हैं।

रोहित मिश्रा – प्रदेश अध्यक्ष, युवा मोर्चा
प्रकाश पाल – प्रदेश अध्यक्ष, पिछड़ा वर्ग मोर्चा
देवेन्द्र सिंह – प्रदेश अध्यक्ष, किसान मोर्चा
अशोक रावत – प्रदेश अध्यक्ष, अनुसूचित जाति मोर्चा
सरोज कुशवाह – प्रदेश अध्यक्ष, महिला मोर्चा
विद्याभूषण गोंड – प्रदेश अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति मोर्चा

पार्टी का मानना है कि इन मोर्चों के माध्यम से विभिन्न वर्गों तक संगठन की पहुंच और मजबूत होगी।

2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति का संकेत

राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल नहीं है, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी का स्पष्ट संकेत भी है। पार्टी ने उन नेताओं को जिम्मेदारी दी है जिनकी अपने क्षेत्रों और समाज में मजबूत पकड़ मानी जाती है।

भाजपा नेतृत्व का लक्ष्य बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना, नए मतदाताओं तक पहुंच बनाना और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच पार्टी की पकड़ को और मजबूत करना है। नई टीम के गठन से यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी आने वाले समय में प्रदेशभर में बड़े संगठनात्मक अभियान चलाने की तैयारी कर रही है।

नई कार्यकारिणी के गठन के साथ ही उत्तर प्रदेश भाजपा ने आगामी चुनावी चुनौतियों और राजनीतिक मुकाबलों के लिए अपनी संगठनात्मक तैयारियों को नई दिशा देने का प्रयास किया है।

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Thu, 25 Jun 2026 13:41:44 +0530 news desk MPcg
MPSC अभ्यर्थियों के मुद्दों पर महाराष्ट्र विधानसभा परिसर में MVA का प्रदर्शन, परीक्षा अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया पर सरकार को घेरा https://citytoday.co.in/6889 https://citytoday.co.in/6889 महाराष्ट्र की राजनीति में मानसून सत्र के दौरान विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA) ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा परिसर की सीढ़ियों पर MVA नेताओं और विधायकों ने प्रदर्शन कर महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के अभ्यर्थियों से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं, पेपर लीक मामलों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

प्रदर्शन में शामिल विपक्षी नेताओं ने सरकार से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और अभ्यर्थियों की शिकायतों का समाधान करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई।

MPSC अभ्यर्थियों के समर्थन में उतरा विपक्ष

महा विकास अघाड़ी के नेताओं ने कहा कि महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों युवा लंबे समय से विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाली अनियमितताओं और कथित पेपर लीक घटनाओं ने अभ्यर्थियों का विश्वास कमजोर किया है।

विपक्षी नेताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों की मेहनत और आर्थिक संसाधन लगाने वाले छात्रों को हर बार नई अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका दावा है कि परीक्षा प्रणाली पर लगातार उठ रहे सवाल युवाओं के करियर को प्रभावित कर रहे हैं और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी असर डाल रहे हैं।

परीक्षा अनियमितताओं पर सरकार से मांगा जवाब

प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों के मामलों में पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। नेताओं ने मांग की कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।

MVA नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो युवाओं का सरकारी भर्ती प्रणाली पर भरोसा और कमजोर होगा। विपक्ष ने भविष्य में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को रोकने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने की मांग भी रखी।

विधानसभा सत्र में लगातार आक्रामक विपक्ष

MPSC अभ्यर्थियों का मुद्दा उठाने से पहले भी विपक्ष मानसून सत्र के दौरान कई जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरता रहा है। एक दिन पहले ही MVA नेताओं ने बढ़ती महंगाई और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन किया था।

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। उनका कहना है कि रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ रहा है।

महंगाई और गैस सिलेंडर की कीमतों पर भी विरोध

प्रदर्शन के दौरान विपक्षी विधायकों ने महंगाई और एलपीजी कीमतों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। नेताओं ने कहा कि पहले से बढ़ते घरेलू खर्च के बीच गैस सिलेंडर महंगा होने से परिवारों का बजट और अधिक प्रभावित हुआ है।

विपक्ष का आरोप है कि राज्य और केंद्र सरकार आम लोगों को राहत देने में असफल रही हैं, जबकि जीवन-यापन की लागत लगातार बढ़ रही है।

किसानों के मुद्दे भी बने सियासी संघर्ष का केंद्र

मानसून सत्र के दौरान किसानों की समस्याएं भी विपक्ष के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। सोमवार को MVA ने किसानों की कर्जमाफी की मांग को लेकर अलग प्रदर्शन किया था।

इस प्रदर्शन का नेतृत्व शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे, विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे और कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने किया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा घोषित कर्ज राहत योजना में ऐसी शर्तें शामिल हैं, जिनकी वजह से बड़ी संख्या में किसान इसका लाभ नहीं उठा पाएंगे।

संपूर्ण कर्जमाफी की मांग

विपक्षी दलों ने सरकार से किसानों के लिए व्यापक और बिना जटिल शर्तों वाली कर्जमाफी योजना लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि कृषि क्षेत्र आर्थिक दबाव से गुजर रहा है और किसानों को तत्काल राहत की आवश्यकता है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार भी पहले कर्ज राहत योजना को लेकर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने किसानों के लिए व्यापक कर्जमाफी की आवश्यकता पर जोर दिया था।

मानसून सत्र में छात्रों, किसानों और महंगाई के मुद्दे हावी

महाराष्ट्र विधानसभा का मौजूदा मानसून सत्र छात्रों की समस्याओं, महंगाई, एलपीजी कीमतों और किसानों की कर्जमाफी जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित होता दिखाई दे रहा है। विपक्ष इन मुद्दों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी योजनाओं और नीतियों का बचाव कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि MPSC अभ्यर्थियों का मुद्दा आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण विषय बन सकता है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर लाखों युवा और उनके परिवार प्रभावित होते हैं। ऐसे में विधानसभा सत्र के आगामी दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

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Wed, 24 Jun 2026 13:18:40 +0530 news desk MPcg
वीरभद्र सिंह की 93वीं जयंती पर भावुक हुआ हिमाचल, सीएम सुक्खू बोले& उनके जीवन और कार्यों से प्रेरणा लेने की जरूरत https://citytoday.co.in/6866 https://citytoday.co.in/6866 हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे दिवंगत कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह की 93वीं जयंती पर मंगलवार को शिमला के रिज मैदान में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी सहित कई जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वीरभद्र सिंह का जीवन, उनकी राजनीतिक कार्यशैली और हिमाचल प्रदेश के विकास में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों को उनके आदर्शों और जनसेवा की भावना से सीख लेने की आवश्यकता है।

हिमाचल के विकास पुरुष के रूप में याद किए गए वीरभद्र सिंह

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वीरभद्र सिंह ने छह बार मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा की और अपने लंबे राजनीतिक जीवन में हिमाचल प्रदेश को विकास की नई दिशा दी। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं को आगे बढ़ाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने में वीरभद्र सिंह की भूमिका ऐतिहासिक रही है। उनके योगदान को प्रदेश की जनता हमेशा याद रखेगी।

विकास और जनसेवा की राजनीति के प्रतीक थे वीरभद्र सिंह

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में राजनीति में जनसेवा और विकास की भावना को आगे बढ़ाने की जरूरत है। वीरभद्र सिंह ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में जनता से सीधा संवाद बनाए रखा और आम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता दी।

उन्होंने कहा कि हिमाचल के सामाजिक और आर्थिक विकास की कई बड़ी परियोजनाएं उनके नेतृत्व में शुरू हुईं, जिनका लाभ आज भी प्रदेशवासियों को मिल रहा है।

विक्रमादित्य सिंह ने पिता के आदर्शों को बताया मार्गदर्शक

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं है, बल्कि उनके विकासवादी दृष्टिकोण और जनकल्याणकारी सोच को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का दिन है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में वीरभद्र सिंह की सेवाएं हमेशा याद रखी जाएंगी। प्रदेश के लोगों ने उन्हें हमेशा अपार प्रेम और सम्मान दिया, जो उनकी लोकप्रियता और जनसंपर्क का प्रमाण है।

वीरभद्र फाउंडेशन के माध्यम से जारी है जनसेवा

विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि वीरभद्र फाउंडेशन के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को चिकित्सा उपकरण, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, हियरिंग एड और अन्य आवश्यक सहायता सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह पहल वीरभद्र सिंह की उस सोच को आगे बढ़ा रही है, जिसमें समाज के कमजोर, गरीब और वंचित वर्गों की सहायता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी।

शिक्षा, सड़क और पेयजल परियोजनाओं में रहा अहम योगदान

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश में कॉलेजों, स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों और पेयजल योजनाओं के विस्तार में वीरभद्र सिंह का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने विशेष रूप से शिमला की महत्वाकांक्षी सतलुज पेयजल परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 800 करोड़ रुपये की इस योजना की नींव उनके नेतृत्व में वर्ष 2015 में रखी गई थी।

आज इस परियोजना से हजारों परिवारों को नियमित पेयजल आपूर्ति का लाभ मिल रहा है और यह हिमाचल की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है।

सेब उत्पादकों के हितों को लेकर भी जताई चिंता

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रदेश के बागवानों और सेब उत्पादकों से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का प्रभाव हिमाचल के सेब उत्पादकों पर पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विषय को केंद्र सरकार के समक्ष गंभीरता से उठाया गया है और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ भी इस संबंध में चर्चा की गई है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बागवानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उनके आर्थिक हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

हिमाचल की राजनीति में वीरभद्र सिंह की विरासत आज भी प्रभावी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक रहे हैं। करीब छह दशकों तक सक्रिय राजनीति में रहने वाले वीरभद्र सिंह ने प्रदेश के राजनीतिक और विकासात्मक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित किया।

उनकी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम नागरिकों की उपस्थिति इस बात का संकेत थी कि हिमाचल की राजनीति में उनकी विरासत आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

प्रदेश के कई जिलों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां लोगों ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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Tue, 23 Jun 2026 14:11:54 +0530 news desk MPcg
तेज प्रताप यादव का बड़ा फैसला: मोतीलाल यादव निष्कासित, जनशक्ति जनता दल का राष्ट्रीय और प्रदेश संगठन भंग https://citytoday.co.in/6864 https://citytoday.co.in/6864 बिहार की राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब तेज प्रताप यादव ने अपने निजी सहायक (पीए) और जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के राष्ट्रीय महासचिव मोतीलाल यादव के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई। इसके साथ ही उन्होंने मोतीलाल यादव को पार्टी से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया और पार्टी के राष्ट्रीय एवं प्रदेश संगठन को भंग करने की घोषणा कर दी।

तेज प्रताप यादव की इस कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मोतीलाल यादव को लंबे समय से उनका करीबी सहयोगी माना जाता रहा है, ऐसे में उन पर चोरी के आरोप और संगठनात्मक कार्रवाई को महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

सरकारी आवास से नकदी और कीमती सामान चोरी का आरोप

सचिवालय थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया है कि उनके पटना स्थित 42 हार्डिंग रोड सरकारी आवास से लाखों रुपये नकद, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज चोरी हो गए हैं।

शिकायत में कहा गया है कि 22 जून की रात मोतीलाल यादव कथित तौर पर एक बैग लेकर आवास परिसर से बाहर जाते हुए देखे गए थे। इसके बाद जब आवास में रखे सामान की जांच की गई तो कई मूल्यवान वस्तुएं गायब मिलीं।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

पार्टी फंड के 20 लाख रुपये गायब होने का दावा

एफआईआर में तेज प्रताप यादव ने दावा किया है कि आवास में रखी अलमारी से पार्टी फंड के लगभग 20 लाख रुपये नकद गायब हैं। इसके अलावा चोरी हुए सामान में दो तोला सोने की चेन, एक सोने की अंगूठी, चार ड्रोन, दो हार्ड डिस्क, एक आईपैड, एक मैकबुक लैपटॉप, एक लेनोवो लैपटॉप और चार आईफोन 17 प्रो मैक्स मोबाइल फोन शामिल बताए गए हैं।

शिकायत के अनुसार, चोरी हुए सामान की कुल कीमत लाखों रुपये में है। पुलिस इन दावों की पुष्टि के लिए साक्ष्य जुटा रही है।

चालक और सहयोगी के बयान का हवाला

तेज प्रताप यादव ने अपनी शिकायत में कहा है कि घटना वाली रात उनके चालक और एक सहयोगी ने मोतीलाल यादव को एक बैग के साथ आवास से बाहर जाते हुए देखा था। इसी आधार पर उन पर संदेह जताया गया है।

हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। सभी पक्षों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

मोतीलाल यादव को पार्टी से किया निष्कासित

घटना सामने आने के बाद तेज प्रताप यादव ने तत्काल संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए मोतीलाल यादव को राष्ट्रीय महासचिव पद समेत पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया।

उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी पत्र में कहा कि पार्टी अनुशासन और संगठन की विश्वसनीयता सर्वोपरि है। इसलिए गंभीर आरोपों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

अब तक मोतीलाल यादव की ओर से इस मामले में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राष्ट्रीय और प्रदेश संगठन भंग

मोतीलाल यादव के निष्कासन के साथ ही तेज प्रताप यादव ने जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के संगठन को भी तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर व्यापक पुनर्गठन की तैयारी का संकेत भी देता है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में नई कार्यकारिणी और नए पदाधिकारियों की घोषणा की जा सकती है।

संगठन में बड़े बदलाव के संकेत

तेज प्रताप यादव ने संकेत दिए हैं कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव किए जाएंगे। उनका कहना है कि नए सिरे से संगठन खड़ा कर पार्टी को मजबूत और सक्रिय बनाया जाएगा।

विश्लेषकों का मानना है कि संगठन को भंग करने का निर्णय पार्टी के अंदर नई नेतृत्व संरचना तैयार करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

पुलिस जांच जारी

सचिवालय थाना पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन किया जा सकेगा। फिलहाल मामला जांच के अधीन है।

बिहार की राजनीति में बढ़ी चर्चा

तेज प्रताप यादव और मोतीलाल यादव के बीच लंबे समय से करीबी संबंध रहे हैं। ऐसे में चोरी के आरोप, एफआईआर, निष्कासन और पूरे संगठन को भंग करने जैसे फैसलों ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और जनशक्ति जनता दल के प्रस्तावित पुनर्गठन पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण रूप ले सकता है।

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Tue, 23 Jun 2026 13:32:13 +0530 news desk MPcg
तेज प्रताप यादव का बड़ा फैसला: मोतीलाल यादव निष्कासित, जनशक्ति जनता दल का राष्ट्रीय और प्रदेश संगठन भंग https://citytoday.co.in/6865 https://citytoday.co.in/6865 बिहार की राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब तेज प्रताप यादव ने अपने निजी सहायक (पीए) और जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के राष्ट्रीय महासचिव मोतीलाल यादव के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई। इसके साथ ही उन्होंने मोतीलाल यादव को पार्टी से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया और पार्टी के राष्ट्रीय एवं प्रदेश संगठन को भंग करने की घोषणा कर दी।

तेज प्रताप यादव की इस कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मोतीलाल यादव को लंबे समय से उनका करीबी सहयोगी माना जाता रहा है, ऐसे में उन पर चोरी के आरोप और संगठनात्मक कार्रवाई को महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

सरकारी आवास से नकदी और कीमती सामान चोरी का आरोप

सचिवालय थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया है कि उनके पटना स्थित 42 हार्डिंग रोड सरकारी आवास से लाखों रुपये नकद, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज चोरी हो गए हैं।

शिकायत में कहा गया है कि 22 जून की रात मोतीलाल यादव कथित तौर पर एक बैग लेकर आवास परिसर से बाहर जाते हुए देखे गए थे। इसके बाद जब आवास में रखे सामान की जांच की गई तो कई मूल्यवान वस्तुएं गायब मिलीं।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

पार्टी फंड के 20 लाख रुपये गायब होने का दावा

एफआईआर में तेज प्रताप यादव ने दावा किया है कि आवास में रखी अलमारी से पार्टी फंड के लगभग 20 लाख रुपये नकद गायब हैं। इसके अलावा चोरी हुए सामान में दो तोला सोने की चेन, एक सोने की अंगूठी, चार ड्रोन, दो हार्ड डिस्क, एक आईपैड, एक मैकबुक लैपटॉप, एक लेनोवो लैपटॉप और चार आईफोन 17 प्रो मैक्स मोबाइल फोन शामिल बताए गए हैं।

शिकायत के अनुसार, चोरी हुए सामान की कुल कीमत लाखों रुपये में है। पुलिस इन दावों की पुष्टि के लिए साक्ष्य जुटा रही है।

चालक और सहयोगी के बयान का हवाला

तेज प्रताप यादव ने अपनी शिकायत में कहा है कि घटना वाली रात उनके चालक और एक सहयोगी ने मोतीलाल यादव को एक बैग के साथ आवास से बाहर जाते हुए देखा था। इसी आधार पर उन पर संदेह जताया गया है।

हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। सभी पक्षों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

मोतीलाल यादव को पार्टी से किया निष्कासित

घटना सामने आने के बाद तेज प्रताप यादव ने तत्काल संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए मोतीलाल यादव को राष्ट्रीय महासचिव पद समेत पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया।

उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी पत्र में कहा कि पार्टी अनुशासन और संगठन की विश्वसनीयता सर्वोपरि है। इसलिए गंभीर आरोपों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

अब तक मोतीलाल यादव की ओर से इस मामले में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राष्ट्रीय और प्रदेश संगठन भंग

मोतीलाल यादव के निष्कासन के साथ ही तेज प्रताप यादव ने जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के संगठन को भी तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर व्यापक पुनर्गठन की तैयारी का संकेत भी देता है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में नई कार्यकारिणी और नए पदाधिकारियों की घोषणा की जा सकती है।

संगठन में बड़े बदलाव के संकेत

तेज प्रताप यादव ने संकेत दिए हैं कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव किए जाएंगे। उनका कहना है कि नए सिरे से संगठन खड़ा कर पार्टी को मजबूत और सक्रिय बनाया जाएगा।

विश्लेषकों का मानना है कि संगठन को भंग करने का निर्णय पार्टी के अंदर नई नेतृत्व संरचना तैयार करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

पुलिस जांच जारी

सचिवालय थाना पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन किया जा सकेगा। फिलहाल मामला जांच के अधीन है।

बिहार की राजनीति में बढ़ी चर्चा

तेज प्रताप यादव और मोतीलाल यादव के बीच लंबे समय से करीबी संबंध रहे हैं। ऐसे में चोरी के आरोप, एफआईआर, निष्कासन और पूरे संगठन को भंग करने जैसे फैसलों ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और जनशक्ति जनता दल के प्रस्तावित पुनर्गठन पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण रूप ले सकता है।

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Tue, 23 Jun 2026 13:32:13 +0530 news desk MPcg
"क्या पूरी बिहार पुलिस इन्हीं की सुरक्षा में लगा दें?" लालू परिवार पर CM सम्राट का तीखा हमला, सुरक्षा और सरकारी बंगलों को लेकर उठाए सवाल https://citytoday.co.in/6851 https://citytoday.co.in/6851  बिहार की राजनीति में सोमवार को उस समय सियासी तापमान बढ़ गया, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित भाजपा के अति पिछड़ा महासम्मेलन के मंच से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा व्यवस्था, सरकारी आवास और संपत्तियों के मुद्दे को लेकर विपक्ष को घेरते हुए कहा कि आखिर लालू परिवार को और कितनी सुविधाएं चाहिए। उन्होंने तंज भरे अंदाज में सवाल किया कि क्या पूरी बिहार पुलिस को सिर्फ उनकी सुरक्षा में ही लगा दिया जाए।

अति पिछड़ा समाज के सम्मान और अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता केवल कुछ नेताओं की सुरक्षा नहीं, बल्कि बिहार के 13 करोड़ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि राज्य की पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए है और उसका संतुलित उपयोग जरूरी है।

सुरक्षा को लेकर विपक्ष पर निशाना

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में आज भी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके आवासों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध है, साथ ही बुलेटप्रूफ वाहन और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी सरकार की ओर से दी गई हैं।

सम्राट चौधरी ने कहा, "आज भी बड़ी संख्या में पुलिस बल उनकी सुरक्षा में तैनात है। अगर पूरी पुलिस फोर्स को वहीं लगा दिया जाए तो बाकी बिहार के लोगों की सुरक्षा कौन करेगा?" मुख्यमंत्री का यह बयान सम्मेलन में मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया।

सरकारी बंगले और संपत्तियों का भी किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने लालू परिवार को सरकारी आवासों के मुद्दे पर भी घेरने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि विपक्ष के कुछ नेता सरकारी बंगलों को लेकर लगातार राजनीति कर रहे हैं, जबकि उनके पास पहले से कई निजी संपत्तियां मौजूद हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार के अलग-अलग सदस्यों के लिए अलग-अलग सरकारी आवास की मांग की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता जानना चाहती है कि जिन लोगों के पास निजी मकान और अन्य संसाधन उपलब्ध हैं, वे सरकारी सुविधाओं को लेकर इतना विवाद क्यों खड़ा कर रहे हैं।

हालांकि मुख्यमंत्री ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक मंच से प्रस्तुत नहीं किया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

'इतिहास का हिसाब होगा' बयान से बढ़ी राजनीतिक चर्चा

अपने भाषण के दौरान सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के राजनीतिक इतिहास का मूल्यांकन किया जा रहा है और जनता अब पहले की तुलना में अधिक जागरूक है। उन्होंने कहा कि राज्य में किस दौर में क्या हुआ, जनता सब जानती है और समय आने पर हर बात का हिसाब होगा।

मुख्यमंत्री के इस बयान को विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक हमले के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था के आधार पर सरकारों का आकलन कर रही है।

अपराध मुक्त बिहार सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। राज्य में कानून का राज स्थापित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं और किसी भी स्तर पर अपराध के प्रति नरमी नहीं बरती जाएगी। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सरकार युवाओं, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

अति पिछड़ा समाज को लेकर भाजपा का संदेश

अति पिछड़ा महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार अति पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं का लाभ इस वर्ग तक पहुंचा है।

समारोह में नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्यों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, केंद्रीय मंत्री राजभूषण निषाद, पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

चुनावी माहौल में तेज हुई बयानबाजी

बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। अति पिछड़ा महासम्मेलन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का लालू परिवार पर किया गया हमला इसी सियासी संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अति पिछड़ा वर्ग बिहार की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में इस वर्ग को साधने के लिए भाजपा और विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी और राजनीतिक गतिविधियां आने वाले महीनों में और तेज हो सकती हैं। अब सबकी नजर राजद और लालू परिवार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

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Mon, 22 Jun 2026 17:15:33 +0530 news desk MPcg
हरियाणा कैबिनेट की अहम बैठक आज: नई शिक्षक नीति समेत एक दर्जन प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर https://citytoday.co.in/6846 https://citytoday.co.in/6846 हरियाणा सरकार की मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की अहम बैठक आज सोमवार, 22 जून 2026 को आयोजित होने जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में कई महत्वपूर्ण नीतिगत और प्रशासनिक प्रस्तावों पर निर्णय लिए जाने की संभावना है। बैठक को लेकर सभी विभागों में पहले से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में लगभग एक दर्जन से अधिक प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय संभव है, जिनमें शिक्षा, कृषि, उद्योग, भर्ती प्रक्रिया और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं।

नई शिक्षक नीति को मिल सकती है मंजूरी

बैठक का सबसे अहम एजेंडा माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा तैयार नई शिक्षक नीति बताया जा रहा है। इस नीति के तहत राज्य में शिक्षकों की भर्ती, प्रशिक्षण, मूल्यांकन और स्थानांतरण व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रदर्शन आधारित बनाने पर जोर दे रही है। नई नीति लागू होने पर शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया और करियर प्रगति प्रणाली में सुधार देखने को मिल सकता है।

विकास परियोजनाओं और भर्ती पर भी चर्चा

कैबिनेट बैठक में राज्य की विभिन्न विकास परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी। इनमें सड़क, शहरी विकास, औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।

इसके अलावा, कई विभागों में भर्ती प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने से जुड़े प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल हैं। राज्य सरकार युवाओं के लिए रोजगार अवसर बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है।

कृषि और उद्योग से जुड़े प्रस्ताव

बैठक में कृषि क्षेत्र से जुड़े सुधारों और योजनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। इसमें किसानों के हित में नई योजनाएं और मौजूदा योजनाओं के विस्तार पर विचार संभव है।

इसी तरह, औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए निवेश प्रोत्साहन और नई औद्योगिक नीतियों पर भी चर्चा होने की संभावना है, जिससे राज्य में रोजगार और निवेश दोनों को बढ़ावा मिल सके।

सेवानिवृत्त अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति पर विचार

जानकारी के अनुसार, बैठक में कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति (re-appointment) के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि अनुभवी अधिकारियों की सेवाओं का उपयोग महत्वपूर्ण विभागों में किया जा सकता है।

समय में बदलाव, सभी मंत्रियों को सूचना

पहले यह बैठक सुबह 11 बजे निर्धारित थी, लेकिन प्रशासनिक कारणों से इसके समय में बदलाव किया गया है। अब कैबिनेट बैठक सुबह 10 बजे हरियाणा सचिवालय में आयोजित की जाएगी।

इस बदलाव की सूचना सभी मंत्रियों और संबंधित प्रशासनिक सचिवों को पहले ही दे दी गई है, ताकि बैठक में सभी की उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।

एक दर्जन से अधिक प्रस्तावों पर नजर

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में कुल मिलाकर करीब 12 से अधिक महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होगी। इनमें नीति संशोधन, प्रशासनिक सुधार और विकास परियोजनाओं से जुड़े निर्णय शामिल हैं।

बैठक के बाद सरकार द्वारा लिए गए फैसलों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।

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Mon, 22 Jun 2026 14:42:51 +0530 news desk MPcg
महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा सियासी भूचाल: ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच उद्धव ठाकरे ने बुलाई आपात बैठक, शिवसेना (UBT) में टूट की आशंका तेज https://citytoday.co.in/6843 https://citytoday.co.in/6843 महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी संकट गहराता दिख रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के भीतर संभावित टूट और बड़े पैमाने पर सांसदों के पाला बदलने की अटकलों के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को अपने सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक बुलाई। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत शिवसेना (UBT) के कई सांसदों के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले खेमे में शामिल होने की चर्चा तेज है।

छह सांसदों के पाला बदलने की चर्चा

सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों के शिंदे गुट में जाने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि ये सांसद पहले ही दिल्ली में लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर चुके हैं, जिसके बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।

शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि यह ‘ऑपरेशन टाइगर’ का हिस्सा है, जिसके तहत लगातार विपक्षी खेमे के सांसदों को अपने साथ जोड़ा जा रहा है। इस घटनाक्रम को शिवसेना के 2022 के विभाजन के बाद दूसरी बड़ी टूट के रूप में देखा जा रहा है।

उद्धव ठाकरे का कड़ा रुख

पार्टी में बढ़ते असंतोष के बीच उद्धव ठाकरे ने अपने सभी सांसदों और विधायकों को स्पष्ट संदेश देने के लिए बैठक बुलाई है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन को एकजुट रखना प्राथमिकता है और किसी भी तरह की टूट को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

पार्टी ने पहले ही व्हिप जारी कर सभी सांसदों को बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया था, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन नेता पार्टी के साथ खड़ा है और कौन नहीं।

आदित्य ठाकरे का तीखा बयान

इस राजनीतिक हलचल के बीच शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कुछ नेता अपनी “निष्ठा और राजनीतिक पहचान” को निजी लाभ के लिए दांव पर लगा रहे हैं।

आदित्य ठाकरे के इस बयान को पार्टी की ओर से सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें यह संकेत है कि आने वाले दिनों में संगठन विरोधी गतिविधियों पर कार्रवाई संभव है।

कांग्रेस का भाजपा पर निशाना

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह पूरा घटनाक्रम विपक्षी दलों को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है।

कांग्रेस का कहना है कि ऐसे राजनीतिक ऑपरेशन लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं और इससे विपक्षी एकता को नुकसान पहुंचता है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और बढ़ता तनाव

विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम 2022 में शिवसेना के विभाजन की याद दिलाता है, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक पार्टी छोड़कर अलग गुट में चले गए थे। उसी के बाद महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन हुआ था।

अब लोकसभा स्तर पर इसी तरह की संभावित टूट ने उद्धव ठाकरे खेमे की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह सांसदों का पलायन वास्तविक रूप लेता है, तो शिवसेना (UBT) की राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति कमजोर हो सकती है।

आगे क्या?

फिलहाल सभी की नजर उद्धव ठाकरे की बैठक और शिंदे गुट की अगली रणनीति पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि यह केवल राजनीतिक अटकलें हैं या महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है।

महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी है, जहां हर फैसला सत्ता समीकरणों को बदल सकता है।

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Mon, 22 Jun 2026 14:07:55 +0530 news desk MPcg
मानसून सत्र के बाद मोहन सरकार में बड़ा फेरबदल संभव, 5 नए विधायक बन सकते हैं मंत्री https://citytoday.co.in/6830 https://citytoday.co.in/6830 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav की सरकार जल्द ही अपने पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी कर रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधानसभा के मानसून सत्र के बाद मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण बदलाव किए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि सरकार में संतुलन बनाने और संगठन की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए कई नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इस संभावित विस्तार में 5 नए विधायकों को मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं, वर्तमान मंत्रिमंडल के तीन वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में बदलाव किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधना बताया जा रहा है।

रीति पाठक और मालिनी गौड़ के नाम चर्चा में

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि Riti Pathak और Malini Gaud जैसे नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, पार्टी और सरकार की ओर से अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

क्षेत्रीय संतुलन पर रहेगा ध्यान

भाजपा नेतृत्व आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दे सकता है। बुंदेलखंड, विंध्य, महाकौशल, मालवा और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने पर विचार किए जाने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने दिए बदलाव के संकेत

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान संकेत दिए कि मानसून सत्र के बाद सरकार में बदलाव संभव हैं। उनके इस बयान के बाद से राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व की सहमति के बाद ही लिया जाएगा।

बढ़ी राजनीतिक हलचल

संभावित मंत्रिमंडल विस्तार की खबरों के बीच भाजपा के कई विधायक और वरिष्ठ नेता सक्रिय हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल सरकार के कामकाज को और प्रभावी बनाने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए संगठन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

फिलहाल सभी की नजरें मानसून सत्र के बाद होने वाले संभावित फैसलों पर टिकी हुई हैं, जो मध्य प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बना सकते हैं।

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Mon, 22 Jun 2026 11:50:49 +0530 news desk MPcg
शरद पवार बनाम इंदिरा गांधी से लेकर शिवसेना तक महाराष्ट्र की राजनीति में बगावत और दल&बदल की पूरी इनसाइड स्टोरी https://citytoday.co.in/6808 https://citytoday.co.in/6808 महाराष्ट्र की राजनीति को अगर किसी एक शब्द में समझना हो, तो वह है—अस्थिरता। यहां सत्ता कभी स्थायी नहीं रही और गठबंधन कभी अंतिम नहीं माने गए। पिछले छह दशकों में राज्य ने ऐसे कई राजनीतिक भूचाल देखे हैं, जिनमें कांग्रेस का विभाजन, शरद पवार का उदय, शिवसेना का उभार और हालिया दल-बदल की लहर शामिल है।

यह कहानी सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि उस राजनीतिक संस्कृति की है जिसने महाराष्ट्र को भारतीय राजनीति का सबसे गतिशील राज्य बना दिया।

1969: इंदिरा गांधी बनाम संगठनात्मक कांग्रेस का ऐतिहासिक टकराव

महाराष्ट्र की राजनीतिक कहानी को समझने के लिए 1969 का वर्ष निर्णायक माना जाता है। इसी समय इंदिरा गांधी और कांग्रेस संगठन के बीच ऐतिहासिक टकराव हुआ, जिसने पार्टी को दो हिस्सों में बांट दिया।

राष्ट्रपति चुनाव के बाद उपजे मतभेदों ने इतना गहरा रूप ले लिया कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने इंदिरा गांधी को पार्टी से निष्कासित करने तक का निर्णय ले लिया। इसके जवाब में इंदिरा गांधी ने अपने समर्थकों के साथ अलग गुट बनाकर संगठनात्मक कांग्रेस को चुनौती दी।

यहीं से भारतीय राजनीति में “नेतृत्व बनाम संगठन” की नई परंपरा शुरू हुई, जिसका असर आने वाले दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति पर दिखता रहा।

शरद पवार का पहला राजनीतिक विद्रोह

इसी दौर में महाराष्ट्र में एक युवा नेता का उदय हुआ—शरद पवार।

1970 और 80 के दशक में पवार ने कांग्रेस की गुटीय राजनीति को नजदीक से देखा और धीरे-धीरे खुद को एक मजबूत क्षेत्रीय नेता के रूप में स्थापित किया।

1978 में उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाया—कांग्रेस से अलग होकर प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट बनाना और मात्र 38 वर्ष की उम्र में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन जाना। यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में “युवा विद्रोह” का प्रतीक बन गया।

हालांकि कुछ समय बाद केंद्र सरकार द्वारा उनकी सरकार गिरा दी गई, लेकिन पवार ने यह साबित कर दिया कि महाराष्ट्र में सत्ता समीकरण हमेशा स्थिर नहीं रहते।

1966 में शिवसेना का उदय और मराठी अस्मिता की राजनीति

इसी बीच महाराष्ट्र में एक और बड़ी राजनीतिक शक्ति उभर रही थी—शिवसेना।

1966 में बाल ठाकरे ने मराठी अस्मिता और स्थानीय अधिकारों के मुद्दे पर इस संगठन की नींव रखी।

शुरुआत में एक आंदोलन के रूप में शुरू हुई शिवसेना जल्द ही मुंबई की सड़कों पर मजबूत राजनीतिक शक्ति बन गई। इसके कार्यकर्ता संगठनात्मक अनुशासन और आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते थे।

बाद में शिवसेना ने भाजपा के साथ लंबा गठबंधन किया, जिसने राज्य की राजनीति को नया आकार दिया।

1995: पहली शिवसेना-भाजपा सरकार

महाराष्ट्र में 1995 का वर्ष ऐतिहासिक रहा जब पहली बार शिवसेना और भाजपा की सरकार बनी।

इस गठबंधन ने राज्य की सत्ता में नई राजनीतिक धुरी तैयार की, जिसमें मराठी क्षेत्रीय राजनीति और राष्ट्रीय विचारधारा का मिश्रण था।

हालांकि यह गठबंधन स्थायी नहीं रहा, लेकिन इसने यह साबित कर दिया कि महाराष्ट्र में राजनीति हमेशा समीकरणों पर आधारित रहती है, विचारधारा पर नहीं।

1999: कांग्रेस से अलग होकर NCP का गठन

1999 में एक और बड़ा राजनीतिक भूकंप आया जब शरद पवार ने कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बनाई—राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी। यह कदम सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर असहमति के बाद लिया गया था। इसके बाद महाराष्ट्र में नए गठबंधन बने, जहां कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर सरकार बनाई, जबकि शिवसेना-भाजपा विपक्ष में बैठी।

2014 और 2019: गठबंधन टूटने और नई सरकारों का दौर

2014 के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में तेजी से बदलाव देखने को मिले। भाजपा और शिवसेना के बीच रिश्ते कमजोर होने लगे और 2019 के चुनाव के बाद यह गठबंधन टूट गया।

इसके बाद जो हुआ वह महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे नाटकीय घटनाक्रम था।

23 नवंबर 2019 को अचानक सरकार गठन की कोशिश हुई जिसमें देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने सुबह-सुबह शपथ ली।

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Sat, 20 Jun 2026 13:15:34 +0530 News desk Hindi
झारखंड और कर्नाटक में क्रॉस वोटिंग से बदला सियासी समीकरण, राज्यसभा–एमएलसी चुनावों ने खोली गठबंधन राजनीति की पोल https://citytoday.co.in/6800 https://citytoday.co.in/6800 झारखंड राज्यसभा चुनाव और कर्नाटक विधान परिषद (MLC) चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग ने दोनों राज्यों की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। इन नतीजों ने न केवल सत्ताधारी और विपक्षी गठबंधनों की एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भारतीय राजनीति में “क्रॉस वोटिंग” की परिभाषा को भी फिर से बहस के केंद्र में ला दिया है।

दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) और कांग्रेस (Indian National Congress) ने परिस्थितियों के अनुसार क्रॉस वोटिंग को कभी “अंतरात्मा की आवाज” तो कभी “गद्दारी” करार दिया है।

झारखंड राज्यसभा चुनाव: संख्या बल के बावजूद उलटफेर

झारखंड में 81 सदस्यीय विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन (JMM-कांग्रेस-राजद) के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद चुनाव परिणाम चौंकाने वाले रहे।

चुनावी गणित:
कुल सीटें: 81
INDIA गठबंधन (JMM-कांग्रेस-राजद) के पास: लगभग 56 विधायक
दो राज्यसभा सीटों के लिए मतदान
परिणाम:
JMM प्रत्याशी बैद्यनाथ राम: 30 वोट
NDA समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवानी: 28 वोट
कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा: 20 वोट (हार)

स्पष्ट बहुमत के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की हार ने गठबंधन के भीतर गंभीर मतभेदों की ओर इशारा किया है।

आरोप-प्रत्यारोप: ‘गद्दारी’ की राजनीति

हार के बाद कांग्रेस ने सहयोगी दलों पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया।

वहीं सहयोगी दलों—विशेषकर CPI(ML)—ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर ही अपने विधायकों पर नियंत्रण न रखने का आरोप लगाया।

इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि गठबंधन राजनीति में अनुशासन और भरोसे की कमी चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित कर सकती है।

कर्नाटक MLC चुनाव: कांग्रेस को मिला क्रॉस वोटिंग का फायदा

कर्नाटक विधान परिषद की 6 सीटों के चुनाव में स्थिति झारखंड से बिल्कुल अलग रही।

परिणाम:
कांग्रेस ने 5 सीटें हासिल कीं
बीजेपी और जेडीएस को अपेक्षित परिणाम नहीं मिले

रिपोर्ट्स के अनुसार, बीजेपी और जेडीएस के 4–6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जिससे कांग्रेस को सीधा फायदा मिला।

‘अंतरात्मा की आवाज’ बनाम ‘ऑपरेशन गद्दारी’

जहां कांग्रेस ने कर्नाटक में हुए नतीजों को “लोकतंत्र की जीत” और विधायकों की “अंतरात्मा की आवाज” बताया, वहीं बीजेपी ने अपने विधायकों की क्रॉस वोटिंग को गंभीर अनुशासनहीनता माना है और कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

राजनीतिक विश्लेषण: दोहरे मानदंड या रणनीति?

विश्लेषकों के अनुसार, झारखंड और कर्नाटक के ये दोनों चुनाव भारतीय राजनीति के एक स्थायी पैटर्न को उजागर करते हैं:

जब क्रॉस वोटिंग से फायदा होता है, उसे “विवेक या अंतरात्मा” कहा जाता है
जब नुकसान होता है, वही “पार्टी से गद्दारी” बन जाती है

यह प्रवृत्ति गठबंधन राजनीति की अस्थिरता और विधायकों की व्यक्तिगत राजनीतिक गणना को भी दर्शाती है।

निष्कर्ष

झारखंड और कर्नाटक के चुनाव नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय राजनीति में दलगत एकजुटता अक्सर व्यक्तिगत और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के सामने कमजोर पड़ जाती है। क्रॉस वोटिंग अब सिर्फ एक चुनावी घटना नहीं, बल्कि सत्ता समीकरणों को बदलने वाला निर्णायक कारक बन चुकी है।

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Sat, 20 Jun 2026 11:49:07 +0530 news desk MPcg
चंडीगढ़ BJP मुख्यालय के बाहर AAP का जोरदार प्रदर्शन जतिंदर पाल मल्होत्रा की टिप्पणी पर बवाल, पुलिस से हुई नोकझोंक https://citytoday.co.in/6791 https://citytoday.co.in/6791 पंजाबियों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर चंडीगढ़ में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा के बयान के विरोध में सेक्टर-33 स्थित भाजपा मुख्यालय ‘कमलम’ के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।

AAP का आरोप और प्रदर्शन

AAP नेताओं का आरोप है कि मल्होत्रा की टिप्पणी पंजाबियों की भावनाओं को आहत करने वाली है। इसी के विरोध में पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की, पुतला दहन किया और भाजपा नेतृत्व से माफी की मांग की।

पुलिस के साथ नोकझोंक

प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली।

क्या है विवाद की वजह

AAP नेताओं का कहना है कि यह टिप्पणी केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि एक सोच को दर्शाती है, जो पंजाबियों के प्रति अपमानजनक है। पार्टी ने इसे पंजाब के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया।

मांग क्या है

AAP ने मांग की है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा को पद से हटाया जाए और वे सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

आगे क्या

AAP ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल इस मामले पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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Fri, 19 Jun 2026 18:40:37 +0530 news desk MPcg
ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका पूर्व मंत्री ज्योति प्रिया मल्लिक ने सभी पदों से दिया इस्तीफा, TMC में बढ़ी हलचल https://citytoday.co.in/6785 https://citytoday.co.in/6785 पश्चिम बंगाल की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ज्योति प्रिया मल्लिक ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले से पार्टी संगठन में हलचल तेज हो गई है।

स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा

सूत्रों के अनुसार, ज्योति प्रिया मल्लिक ने अपने इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष और हालिया चुनावी प्रदर्शन से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

सिलीगुड़ी मेयर गौतम देब का भी इस्तीफा

इसी दिन एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। एक ही दिन में दो बड़े नेताओं के इस्तीफे से TMC के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं।

चुनावी हार के बाद बढ़ा आंतरिक संकट

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 के हालिया विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी के अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के बाद TMC में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पार्टी के लिए संगठनात्मक चुनौती बन सकता है।

TMC में बढ़ती अस्थिरता पर नजर

लगातार इस्तीफों और नेतृत्व से जुड़े सवालों ने ममता बनर्जी की पार्टी के भीतर अस्थिरता को उजागर किया है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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Fri, 19 Jun 2026 15:57:44 +0530 news desk MPcg
हल्दीघाटी विजय समारोह में मोहन भागवत का संदेश, बोले& बाहरी और आंतरिक ताकतें भारत को कमजोर करने की कोशिश में https://citytoday.co.in/6772 https://citytoday.co.in/6772 राजस्थान के उदयपुर में हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देशवासियों को सतर्क रहने का संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत के विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा को प्रभावित करने के लिए बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार की शक्तियां सक्रिय हैं, जो गलत नैरेटिव और भ्रामक सूचनाओं के माध्यम से देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।

कार्यक्रम हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ और महाराणा प्रताप की वीरता को समर्पित था। इस दौरान मोहन भागवत ने कहा कि इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला माध्यम भी है। उन्होंने युवाओं से इतिहास को तथ्यों के आधार पर समझने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।

अपने संबोधन में उन्होंने महाराणा प्रताप के संघर्ष, स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया और स्वतंत्रता व सम्मान के लिए संघर्ष जारी रखा। भागवत ने कहा कि आज भी देश के सामने अनेक चुनौतियां हैं और उनसे निपटने के लिए समाज को एकजुटता, साहस और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के इतिहास को लेकर कई बार ऐसे नैरेटिव बनाए गए, जिनसे वास्तविक तथ्यों को पीछे धकेल दिया गया। उनके अनुसार समाज को अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को प्रमाणिक स्रोतों के आधार पर समझना चाहिए तथा भ्रम फैलाने वाले प्रयासों से सावधान रहना चाहिए।

हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच लड़ा गया था। यह युद्ध भारतीय इतिहास में वीरता, स्वाभिमान और संघर्ष के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में आयोजित इस समारोह में विभिन्न सामाजिक संगठनों, इतिहासकारों और बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

भागवत के इस संबोधन के बाद उनके बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए हैं। समर्थक इसे राष्ट्रीय चेतना और इतिहास के पुनर्पाठ का संदेश बता रहे हैं, जबकि विभिन्न वर्गों में इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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Fri, 19 Jun 2026 13:28:28 +0530 news desk MPcg
पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने राहुल गांधी को दी जन्मदिन की बधाई, सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की बाढ़ https://citytoday.co.in/6758 https://citytoday.co.in/6758 लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के जन्मदिन पर देशभर के प्रमुख राजनीतिक नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें बधाई देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की।

पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं और उनके अच्छे स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना करते हैं।

राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को दिल्ली के होली फैमिली हॉस्पिटल में हुआ था और वे इस वर्ष 56 वर्ष के हो गए हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का संदेश

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके राजनीतिक जीवन की सराहना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संविधान के आदर्शों, सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों की आवाज उठाने में लगातार सक्रिय रहे हैं।

खड़गे ने लिखा कि राहुल गांधी का जीवन सार्वजनिक सेवा, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहा है और वे लगातार वंचित वर्गों की आवाज बनकर उभरे हैं।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय की बधाई

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय (थलपति विजय) ने भी राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने राहुल गांधी को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और देश के विकास के लिए लगातार आवाज उठाने वाला नेता बताया।

उन्होंने उनके अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और सार्वजनिक जीवन में सफलता की कामना की।

अशोक गहलोत ने भी दी शुभकामनाएं

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राहुल गांधी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी को देश में सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूत आवाज बताया।

राजनीतिक हलकों में चर्चा

राहुल गांधी के जन्मदिन पर विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा दी गई शुभकामनाओं को राजनीतिक सौहार्द के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी दिनभर बधाइयों का सिलसिला चलता रहा।

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Fri, 19 Jun 2026 12:08:23 +0530 news desk MPcg
वाराणसी में राहुल गांधी के जन्मदिन पर कांग्रेस का अनोखा आयोजन, गंगा में जलाभिषेक और परशुराम रूप बना चर्चा का विषय https://citytoday.co.in/6747 https://citytoday.co.in/6747 काशी में शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जन्मदिन बेहद अनोखे और विवादित अंदाज में मनाया। कार्यकर्ताओं ने उन्हें भगवान परशुराम के रूप में प्रस्तुत करते हुए गंगा नदी में जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया, जिससे यह आयोजन राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का केंद्र बन गया।

कार्यक्रम के दौरान कुछ कांग्रेस समर्थकों ने राहुल गांधी की तस्वीर को भगवान परशुराम के स्वरूप में सजाया। उनके हाथ में फरसा और संविधान की प्रति दिखाई गई, जिसके साथ गंगा तट पर विधिवत पूजा-अर्चना, पुष्पार्पण और दुग्धाभिषेक किया गया। इसके अलावा मोतीचूर के लड्डू से केक काटकर भी जन्मदिन मनाया गया।

गंगा तट पर दिखा सियासी और धार्मिक रंग

इस आयोजन में काशी के कई घाटों पर कार्यकर्ता जुटे रहे और अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान किए गए। कुछ कार्यकर्ताओं ने मंदिरों में विशेष पूजा भी कराई। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि यह आयोजन राहुल गांधी के प्रति समर्थन और उनके विचारों के सम्मान का प्रतीक है।

स्थानीय नेताओं ने दावा किया कि राहुल गांधी ने हमेशा समाज के कमजोर वर्गों की आवाज उठाई है, इसलिए कार्यकर्ताओं ने उन्हें “धार्मिक प्रतीकात्मक रूप” में प्रस्तुत कर सम्मान व्यक्त किया।

विरोध और राजनीतिक बहस भी तेज

हालांकि, इस आयोजन को लेकर विरोधी दलों और स्थानीय लोगों के एक वर्ग में नाराजगी भी देखी गई। कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं के राजनीतिक उपयोग से जोड़कर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे कांग्रेस की “प्रदर्शनकारी राजनीति” बताया, जबकि कुछ ने इसे कार्यकर्ताओं की भावनात्मक अभिव्यक्ति करार दिया।

प्रधानमंत्री की शुभकामना भी चर्चा में

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने की बात भी राजनीतिक चर्चा में बनी रही। काशी में एक ही दिन दो अलग-अलग राजनीतिक भावनाएं देखने को मिलीं—एक ओर शुभकामनाएं, दूसरी ओर प्रतीकात्मक धार्मिक अनुष्ठान।

काशी में फिर दिखा सियासत का रंग

काशी में यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर दिखाता है कि राजनीतिक उत्सव यहां अक्सर धार्मिक प्रतीकों और जनभावनाओं से जुड़कर एक अलग ही रूप ले लेते हैं। राहुल गांधी के जन्मदिन का यह आयोजन अब सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहा है और बहस का विषय बना हुआ है।

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Fri, 19 Jun 2026 11:14:39 +0530 news desk MPcg
हरिद्वार में कोहराम: बेकाबू रफ्तार ने ली भाजपा नेता विकास गोयल की जान, टक्कर मारकर गाड़ी समेत फरार हुआ कातिल चालक https://citytoday.co.in/6708 https://citytoday.co.in/6708 तीर्थनगरी हरिद्वार से एक बेहद स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार कार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय नेता विकास गोयल को कुचल दिया। यह दर्दनाक हादसा इतना भीषण था कि टक्कर लगते ही विकास गोयल हवा में उछलकर काफी दूर जा गिरे और गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और भारी भीड़ जुटने लगी। स्थानीय लोगों और राहगीरों ने बिना वक्त गंवाए उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया, जिससे उनके समर्थकों और परिजनों में कोहराम मच गया है।

दिल दहला देने वाली इस वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी कार चालक इंसानियत को ताक पर रखकर मौके से वाहन सहित फरार हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार की गति तय सीमा से कहीं ज्यादा थी और चालक ने वाहन पर से पूरी तरह नियंत्रण खो दिया था। जैसे ही हादसा हुआ और लोग पीड़ित की मदद के लिए दौड़े, चालक ने भीड़ का फायदा उठाया और गाड़ी की रफ्तार बढ़ाकर वहां से रफूचक्कर हो गया। इस हिट-एंड-रन की घटना ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना की सूचना मिलते ही हरिद्वार पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस बल अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंचा। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि अज्ञात कार चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने और हत्या जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। फरार आरोपी को दबोचने के लिए पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के सभी रास्तों और चौराहों पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है, ताकि गाड़ी के नंबर और उसकी पहचान का सटीक सुराग मिल सके।

विकास गोयल हरिद्वार क्षेत्र में भाजपा के एक बेहद सक्रिय, ऊर्जावान और लोकप्रिय नेता माने जाते थे। उनके आकस्मिक और दर्दनाक निधन की खबर फैलते ही पूरी तीर्थनगरी और उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनाएं जताई हैं। साथ ही, आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि फरार हत्यारे चालक को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाए और उसे सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए।

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Thu, 18 Jun 2026 11:46:05 +0530 news desk MPcg
झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: 2 सीटों पर मतदान जारी, सियासी समीकरणों में जबरदस्त हलचल; परिमल नथवाणी ने कांग्रेस विधायकों के समर्थन का किया दावा https://citytoday.co.in/6707 https://citytoday.co.in/6707  झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान प्रक्रिया जारी है और पूरे दिन राजनीतिक हलचल तेज बनी हुई है। इस चुनाव में तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि INDIA गठबंधन और NDA दोनों ही अपने-अपने विधायकों की पूरी ताकत के साथ जीत सुनिश्चित करने की कोशिश में जुटे हैं।

तीन उम्मीदवारों के बीच मुकाबला, एक सीट लगभग तय

इस बार राज्यसभा चुनाव में कुल तीन प्रमुख उम्मीदवार हैं—

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की ओर से बैजनाथ राम
कांग्रेस की ओर से प्रणव झा
NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी

सूत्रों के अनुसार, एक सीट पर JMM उम्मीदवार बैजनाथ राम की स्थिति मजबूत मानी जा रही है और उनकी जीत लगभग तय बताई जा रही है। वहीं दूसरी सीट को लेकर कांग्रेस के प्रणव झा और परिमल नथवाणी के बीच कड़ा और निर्णायक मुकाबला देखा जा रहा है।

मतदान के दौरान बढ़ी सियासी हलचल, होटल राजनीति फिर सक्रिय

मतदान शुरू होने से पहले और उसके दौरान दोनों गठबंधनों ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए पूरी रणनीति अपनाई।

कांग्रेस के सभी 16 विधायक रांची के बीएनआर होटल में एकत्र हुए और वहां से बसों के जरिए एक साथ विधानसभा पहुंचे। इसी तरह JMM के सभी विधायक मुख्यमंत्री आवास से सीधे मतदान स्थल के लिए रवाना हुए।

NDA खेमे के विधायक भी रांची के रेडिसन ब्लू होटल में ठहरे रहे और निर्धारित समय पर बसों से विधानसभा पहुंचे। पूरे दिन होटल और विधानसभा परिसर के बाहर राजनीतिक गतिविधियां और निगरानी का माहौल बना रहा।

परिमल नथवाणी का बड़ा दावा, कांग्रेस समर्थन का संकेत

NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी ने मतदान से पहले बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें सभी विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिसमें कांग्रेस विधायकों का समर्थन भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि अगर उन्हें राज्यसभा में पहुंचने का अवसर मिलता है, तो वे झारखंड के विकास और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे। हालांकि उनके इस दावे को INDIA गठबंधन ने सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि सभी विधायक एकजुट हैं।

INDIA गठबंधन का दावा: पूर्ण एकता और स्पष्ट बढ़त

INDIA गठबंधन के नेताओं ने दावा किया है कि उनके सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और किसी भी प्रकार की टूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना नहीं है।

विधानसभा के वर्तमान आंकड़ों के अनुसार INDIA गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है, जिससे राजनीतिक समीकरण उसके पक्ष में नजर आते हैं। गठबंधन का कहना है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त जैसी किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

NDA का भरोसा: मुकाबला पूरी तरह खुला है

वहीं NDA खेमे का दावा है कि मुकाबला बेहद कड़ा है और अंतिम परिणाम में बड़ा उलटफेर संभव है। NDA नेताओं का कहना है कि परिमल नथवाणी को विभिन्न दलों के विधायकों का समर्थन मिल रहा है, जिससे दूसरी सीट का परिणाम अप्रत्याशित हो सकता है।

विधानसभा में संख्या बल की तस्वीर

वर्तमान राजनीतिक स्थिति के अनुसार विधानसभा में सीटों का गणित इस प्रकार है—

INDIA गठबंधन:

JMM: 34
कांग्रेस: 16
राजद: 4
भाकपा माले: 2
कुल: 56 विधायक

NDA गठबंधन:

भाजपा: 21
आजसू: 1
जदयू: 1
लोजपा (रामविलास): 1
कुल: 24 विधायक

इस गणित के आधार पर INDIA गठबंधन स्पष्ट रूप से मजबूत स्थिति में दिख रहा है, लेकिन दूसरी सीट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

सुरक्षा और निगरानी के कड़े इंतजाम

मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। सभी विधायकों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की अनियमितता रोकने के लिए विशेष टीमों को तैनात किया गया है।

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Thu, 18 Jun 2026 11:36:54 +0530 news desk MPcg
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में बड़ी टूट का दावा, 6 सांसदों ने शिंदे गुट को समर्थन देने की तैयारी; लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी चिट्ठी https://citytoday.co.in/6706 https://citytoday.co.in/6706 महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी हलचल का दावा सामने आया है। उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना UBT) को लोकसभा में बड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि पार्टी के 6 सांसदों के अलग गुट बनाने और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के साथ जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने अपने को एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इस कदम को संसद में शिवसेना के अंदरूनी विभाजन के रूप में देखा जा रहा है।

अलग गुट बनाने की प्रक्रिया तेज, राजनीतिक हलचल बढ़ी

जानकारी के अनुसार, इन 6 सांसदों ने लोकसभा में एक अलग संसदीय समूह बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। राजनीतिक हलकों में इसे बेहद अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि इससे संसद में पार्टी की ताकत और संख्या दोनों पर असर पड़ सकता है।

बताया जा रहा है कि ये सभी सांसद भविष्य में शिंदे गुट में शामिल होने की तैयारी में हैं। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।

2022 जैसी राजनीतिक स्थिति की फिर से चर्चा

यह घटनाक्रम 2022 की उस बड़ी राजनीतिक टूट की याद दिलाता है, जब शिवसेना के कई विधायक एकनाथ शिंदे के साथ जाकर पार्टी से अलग हो गए थे। उसी तरह अब लोकसभा में भी समान स्थिति बनने की आशंका राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा जताई जा रही है।

यदि यह विभाजन आगे बढ़ता है, तो उद्धव ठाकरे गुट के लिए यह एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।

उद्धव गुट की ओर से रोकने की कोशिशें

सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) नेतृत्व इस संभावित टूट को रोकने के लिए सक्रिय हो गया है। पार्टी की ओर से लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया गया है कि किसी भी अलग गुट को मान्यता देने से पहले सभी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं की पूरी जांच की जाए।

पार्टी का कहना है कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संगठनात्मक एकता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना

यदि 6 सांसद वास्तव में अलग होकर शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो इसका सीधा असर लोकसभा में शिवसेना (UBT) की स्थिति पर पड़ेगा। इससे न केवल महाराष्ट्र की राजनीति प्रभावित होगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन के समीकरण भी बदल सकते हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति में एक और बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है।

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Thu, 18 Jun 2026 11:29:04 +0530 news desk MPcg
राहुल गांधी को MP हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं: मानहानि मामले में सुनवाई 23 जून तक टली https://citytoday.co.in/6699 https://citytoday.co.in/6699 कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। यह मामला कार्तिकेय चौहान मानहानि प्रकरण से जुड़ा हुआ है, जिसमें भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट के समन को चुनौती दी गई थी।

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड तलब किए

जबलपुर स्थित मप्र हाई कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भोपाल एमपी-एमएलए कोर्ट की ऑर्डर शीट और संबंधित रिकॉर्ड तलब किए हैं। साथ ही राहुल गांधी की ओर से पेश वकीलों को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय दिया गया।

अगली सुनवाई 23 जून को

मामले की अगली सुनवाई अब 23 जून 2026 को होगी। तब तक कोर्ट ने दोनों पक्षों को रिकॉर्ड और दस्तावेज तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला

यह विवाद उस बयान से जुड़ा है जिसमें आरोप है कि राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक मंच से कार्तिकेय चौहान का नाम पनामा पेपर्स लीक मामले से जोड़कर टिप्पणी की थी। इसी बयान के आधार पर उनके खिलाफ मानहानि का केस दर्ज किया गया था।

राहुल गांधी ने भोपाल की विशेष अदालत द्वारा जारी समन को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने प्रक्रिया और आधार पर सवाल उठाए हैं।

कानूनी प्रक्रिया जारी

फिलहाल कोर्ट ने मामले पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है और पूरी सुनवाई प्रक्रिया जारी है।

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Wed, 17 Jun 2026 18:45:46 +0530 news desk MPcg
भवानीपुर चुनाव नतीजे पर ममता बनर्जी की बड़ी कानूनी लड़ाई कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर की याचिका, शुभेंदु अधिकारी से मिली थी हार https://citytoday.co.in/6648 https://citytoday.co.in/6648 पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव नतीजों को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की है। यह सीट राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक मानी जाती है और यहां का परिणाम लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने मंगलवार को हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में पहुंचकर याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान उनके साथ टीएमसी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष और डोला सेन भी मौजूद थे।

क्यों महत्वपूर्ण है भवानीपुर सीट

भवानीपुर विधानसभा सीट को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि यह न केवल एक शहरी और राजनीतिक रूप से सक्रिय क्षेत्र है, बल्कि यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पारंपरिक राजनीतिक जमीन भी रही है। यहां के चुनाव परिणाम अक्सर राज्य की राजनीतिक दिशा का संकेत देते हैं।

इस बार के चुनाव में उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता शुभेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा, जिसे लेकर अब कानूनी चुनौती दी गई है।

चुनाव परिणामों पर उठाए गए सवाल

टीएमसी की ओर से दायर याचिका में चुनाव प्रक्रिया और परिणामों को लेकर गंभीर सवाल उठाए जाने की संभावना है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी विस्तृत कानूनी आधार सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि याचिका में मतदान प्रक्रिया, गणना और प्रशासनिक पहलुओं को चुनौती दी गई है।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह कदम केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी है कि टीएमसी अपने गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में किसी भी तरह की हार को हल्के में नहीं लेगी।

हाईकोर्ट की भूमिका और आगे की प्रक्रिया

अब यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन होगा। अदालत यह तय करेगी कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, और यदि सुनवाई आगे बढ़ती है तो चुनावी रिकॉर्ड, ईवीएम डेटा, मतदान प्रक्रिया और प्रशासनिक रिपोर्टों की जांच की जा सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव याचिकाओं में अदालत आमतौर पर पूरी प्रक्रिया की बारीकी से जांच करती है और यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो परिणामों पर असर पड़ सकता है। हालांकि ऐसी प्रक्रियाएं लंबी और जटिल होती हैं।

राजनीतिक हलचल तेज

इस याचिका के बाद राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। टीएमसी और बीजेपी के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव अब एक बार फिर अदालत तक पहुंच गया है। विपक्ष का कहना है कि यह मामला राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति हो सकता है, जबकि टीएमसी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा बता रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम का असर आने वाले चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है, खासकर तब जब राज्य में पहले से ही राजनीतिक तापमान ऊंचा है।

अब सबकी नजर अदालत पर

फिलहाल सभी की निगाहें कलकत्ता हाईकोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि इस चुनाव याचिका पर आगे क्या कार्रवाई होती है। अदालत की प्रक्रिया और सुनवाई के नतीजे आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

यह मामला सिर्फ एक चुनावी विवाद नहीं, बल्कि राज्य की सत्ता-समीकरण और राजनीतिक भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

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Tue, 16 Jun 2026 16:43:33 +0530 news desk MPcg
एमपी कैबिनेट बैठक: चैतन्य कुमार काश्यप ने बताए मंत्रिपरिषद के अहम फैसले, विकास और जनकल्याण पर सरकार का जोर https://citytoday.co.in/6629 https://citytoday.co.in/6629 भोपाल: एमपी कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में राज्य के विकास, निवेश, उद्योग, कृषि और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने मीडिया को एमपी कैबिनेट निर्णय और सरकार द्वारा लिए गए प्रमुख फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के समग्र विकास और आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है।

मध्य प्रदेश कैबिनेट फैसले की जानकारी देते हुए मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि सरकार का उद्देश्य अधोसंरचना विकास, औद्योगिक निवेश, कृषि क्षेत्र को मजबूती और रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। उन्होंने बताया कि कैबिनेट में विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिससे विकास कार्यों को गति मिलेगी और जनहितकारी योजनाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचेगा।

उन्होंने कहा कि मोहन यादव कैबिनेट किसानों, युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए योजनाओं का विस्तार कर रही है। सरकार निवेश बढ़ाने, उद्योगों को प्रोत्साहन देने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है, ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

एमपी सरकार के फैसले के तहत विभिन्न विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे के विस्तार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि इन निर्णयों से प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय उद्योगों को भी नई ऊर्जा मिलेगी।

कैबिनेट बैठक भोपाल में लिए गए निर्णयों का उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी तथा निवेश का बेहतर माहौल तैयार होगा।

एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है। औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियों और योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एमपी कैबिनेट न्यूज के तहत घोषित ये फैसले प्रदेश के विकास को नई दिशा देंगे और विभिन्न वर्गों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण की भावना के साथ कार्य कर रही है तथा आने वाले समय में भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते रहेंगे।

प्रदेश सरकार का मानना है कि मध्य प्रदेश लेटेस्ट न्यूज में शामिल ये कैबिनेट फैसले राज्य की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास, कृषि क्षेत्र और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूती प्रदान करेंगे। यही कारण है कि एमपी कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों को राज्य के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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Tue, 16 Jun 2026 14:31:23 +0530 news desk MPcg
जयपुर हमले के बाद अभिजीत दीपके का बड़ा आरोप: 'RSS के लोगों ने किया हमला', नागपुर में प्रदर्शन से पहले बढ़ी सुरक्षा https://citytoday.co.in/6620 https://citytoday.co.in/6620 कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जयपुर में अपने ऊपर हुए हमले को लेकर बड़ा दावा किया है। नागपुर पहुंचने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि इस हमले के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोग थे। हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस ने अब तक ऐसी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

दीपके ने कहा कि "जो भी सरकार या उसकी विचारधारा के खिलाफ बोलता है, उसके साथ ऐसा ही होता है। इसमें कुछ नया नहीं है।" उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला बताया।

जयपुर में प्रदर्शन के दौरान हुआ हमला

सोमवार को जयपुर में शिक्षा व्यवस्था, नीट पेपर लीक और CBSE परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर CJP का प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान समर्थकों के कंधों पर बैठे अभिजीत दीपके के पास कुछ युवक पहुंचे और कथित तौर पर उनकी कॉलर पकड़कर थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

गुस्साए CJP कार्यकर्ताओं ने हमलावरों को घेरकर पीट दिया, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने रोहित शर्मा, राकेश गुर्जर, अजय शर्मा, कुलदीप सिंह शेखावत और निकेत नामक पांच लोगों को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किया है।

नागपुर में प्रदर्शन से पहले हाई अलर्ट

जयपुर की घटना के बाद नागपुर में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। पुलिस के अनुसार प्रदर्शन में 2,000 से अधिक युवाओं के शामिल होने की संभावना है।

सुरक्षा के लिए 4 डीसीपी, 3 एसीपी, 45 सब इंस्पेक्टर व असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर, 470 पुरुष और 170 महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा दो दंगा नियंत्रण प्लाटून (RCP) भी स्टैंडबाय पर रखे गए हैं।

इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में गिरावट

जयपुर विवाद के बीच CJP के सोशल मीडिया अकाउंट पर भी असर देखने को मिला है। पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट से करीब 2 लाख फॉलोअर्स कम हो गए हैं। पार्टी का दावा है कि वह देशभर में शिक्षा व्यवस्था और नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों पर आंदोलन चला रही है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।

छात्रों को दी श्रद्धांजलि

प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने नीट पेपर लीक से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों की स्मृति में दो मिनट का मौन भी रखवाया। इसके बाद माहौल शांत हुआ और कार्यक्रम आगे बढ़ा। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं दीपके के आरोपों पर RSS की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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Tue, 16 Jun 2026 13:30:57 +0530 news desk MPcg
हरियाणा कांग्रेस की भविष्य की राजनीति पर बड़ा मंथन: खरगे से मुलाकात में हुड्डा ने रखा संगठन और जनआंदोलन का पूरा रोडमैप https://citytoday.co.in/6614 https://citytoday.co.in/6614 हरियाणा कांग्रेस में संगठनात्मक बदलावों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सोमवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Bhupinder Singh Hooda ने कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge से नई दिल्ली में मुलाकात कर प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, संगठन की मजबूती और आगामी जनआंदोलनों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की। इस मुलाकात को हरियाणा कांग्रेस की भविष्य की रणनीति के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में इस बैठक की खास चर्चा इसलिए भी है क्योंकि हाल के महीनों में हरियाणा कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक पुनर्गठन और नेतृत्व को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद भी अभी तक प्रदेश कार्यकारिणी का पूर्ण गठन नहीं हो पाया है, जबकि राज्य प्रभारी के पद पर भी नए चेहरे की नियुक्ति की संभावना बनी हुई है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष के साथ हुड्डा की यह बैठक संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से अहम मानी जा रही है।

अलग-अलग मुलाकातों ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा

जानकारी के अनुसार, भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कांग्रेस अध्यक्ष से अलग से मुलाकात की, जबकि हरियाणा के पूर्व मंत्री Sukhbir Kataria और हरियाणा युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष Nishit Kataria ने संयुक्त रूप से कांग्रेस अध्यक्ष से भेंट की।

इन बैठकों के दौरान प्रदेश में चल रही राजनीतिक गतिविधियों, संगठनात्मक अभियानों, युवाओं से जुड़े मुद्दों और जनहित के सवालों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कांग्रेस नेतृत्व ने प्रदेश में पार्टी की सक्रियता बढ़ाने और जमीनी स्तर पर संगठन को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

हरियाणा कांग्रेस को मिल सकता है नया प्रभारी

राजनीतिक महत्व का एक अन्य पहलू यह भी है कि हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी रहे B. K. Hariprasad को हाल ही में कर्नाटक कांग्रेस की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके बाद हरियाणा में नए प्रभारी की नियुक्ति की संभावनाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व प्रदेश संगठन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव कर सकता है।

सूत्रों का कहना है कि इसी संदर्भ में हुड्डा और खरगे के बीच प्रदेश संगठन की भावी संरचना, विभिन्न नेताओं की भूमिकाओं और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर चर्चा हुई है।

मतदाता सूची पुनरीक्षण और राजनीतिक तैयारी

हरियाणा में इन दिनों मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण का अभियान भी चल रहा है। राजनीतिक दल इसे आगामी चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। कांग्रेस भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति बना रही है ताकि नए मतदाताओं तक पहुंच बनाई जा सके और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जा सके। बैठक में इस विषय पर भी चर्चा हुई कि पार्टी कार्यकर्ता मतदाता जागरूकता और संगठन विस्तार के कार्यक्रमों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं।

15 जुलाई के बाद बड़े आंदोलन की तैयारी

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आगामी जनआंदोलनों की रणनीति माना जा रहा है। कांग्रेस राज्य में किसानों, बेरोजगार युवाओं, महंगाई, शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को लेकर बड़े स्तर पर जनआंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रही है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, 15 जुलाई के बाद प्रदेशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान और आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की शुरुआत की जा सकती है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर निरंतर संघर्ष ही पार्टी को मजबूत बनाएगा और सरकार को जवाबदेह बनाए रखने में मदद करेगा।

इसी कारण भूपेंद्र हुड्डा और कांग्रेस अध्यक्ष खरगे की बैठक को आने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक माना जा रहा है।

NEET पेपर लीक विरोधी आंदोलन की हुई चर्चा

बैठक में हाल ही में Kurukshetra में आयोजित NEET पेपर लीक विरोधी आंदोलन का भी उल्लेख हुआ। यह आंदोलन सांसद Deepender Singh Hooda और भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष Uday Bhanu Chib के नेतृत्व में आयोजित किया गया था।

युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निशित कटारिया की अगुवाई में हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया था। प्रदर्शन के दौरान कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को चोटें भी आई थीं।

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने इस आंदोलन की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं, विद्यार्थियों और गरीब वर्ग के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष लगातार जारी रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा कांग्रेस की प्राथमिकताओं में शामिल है।

सुखबीर कटारिया ने रखी दक्षिण हरियाणा की तस्वीर

पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया ने कांग्रेस अध्यक्ष को दक्षिण हरियाणा में चलाए जा रहे जनसंपर्क अभियानों, संगठनात्मक गतिविधियों और जनता के मुद्दों पर चल रहे संघर्षों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लगातार लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को उठाने का काम कर रहे हैं। पार्टी का उद्देश्य जनता के वास्तविक मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाना है।

युवाओं को जोड़ने पर विशेष जोर

युवा कांग्रेस अध्यक्ष निशित कटारिया ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल का विवरण देते हुए बताया कि संगठन ने प्रदेशभर में युवाओं के अधिकारों, रोजगार, शिक्षा और पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं के लिए कई आंदोलन चलाए हैं।

उन्होंने कहा कि हरियाणा का युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। रोजगार के अवसरों की कमी, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और परीक्षा घोटालों जैसी घटनाओं ने युवाओं की चिंताओं को बढ़ाया है।

कटारिया ने कहा कि चाहे एचएसएससी कार्यालय का घेराव हो, बेरोजगारी का मुद्दा हो या फिर परीक्षा घोटालों के खिलाफ संघर्ष, युवा कांग्रेस हर मोर्चे पर युवाओं की आवाज बनकर खड़ी रही है। आने वाले समय में यह लड़ाई और अधिक मजबूती से जारी रखी जाएगी।

 जनता के बीच जाए कांग्रेस

बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों की आवाज रही है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए पार्टी को जनता के बीच और अधिक सक्रिय होना होगा। कांग्रेस की ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता और जनहित के लिए संघर्ष करने वाली विचारधारा है। खरगे ने कहा कि आने वाला समय जनता के मुद्दों पर आधारित राजनीति का होगा और कांग्रेस को उसी दिशा में अपने संगठन और आंदोलनों को आगे बढ़ाना चाहिए।

राजनीतिक संदेश और आगे की राह

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भूपेंद्र हुड्डा और मल्लिकार्जुन खरगे की यह मुलाकात केवल औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि हरियाणा कांग्रेस की आगामी रणनीति को आकार देने वाली एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कवायद भी थी। संगठनात्मक पुनर्गठन, नए प्रभारी की नियुक्ति, युवाओं के मुद्दे, जनआंदोलन और मतदाता संपर्क अभियान जैसे विषयों पर हुई चर्चा आने वाले महीनों में हरियाणा कांग्रेस की राजनीतिक दिशा तय कर सकती है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि कांग्रेस नेतृत्व हरियाणा में संगठन को मजबूत करने, युवाओं को जोड़ने और जनहित के मुद्दों को लेकर संघर्ष तेज करने की रणनीति पर काम कर रहा है। आने वाले समय में पार्टी की गतिविधियां और आंदोलन प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकते हैं।

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Tue, 16 Jun 2026 12:54:38 +0530 news desk MPcg
ममता बनर्जी की करीबी सायनी घोष अब क्यों चर्चा में, जानिए एक्ट्रेस से सांसद बनने की कहानी https://citytoday.co.in/6596 https://citytoday.co.in/6596 पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। चुनावी झटकों और संगठन के भीतर बढ़ती खींचतान के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की युवा और मुखर सांसद सायनी घोष का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। कभी पार्टी की आक्रामक प्रवक्ता और ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सायनी घोष अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई हैं।

हालांकि राजनीति में आने से पहले सायनी घोष बंगाली मनोरंजन जगत का एक जाना-पहचाना चेहरा थीं। उन्होंने फिल्मों, टीवी धारावाहिकों और वेब सीरीज में अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रदर्शन किया और लाखों प्रशंसकों का दिल जीता। मनोरंजन की दुनिया में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना और बहुत कम समय में टीएमसी की प्रमुख युवा नेताओं में अपनी जगह बना ली।

अभिनय से राजनीति तक का सफर

सायनी घोष का जन्म 27 जनवरी 1993 को कोलकाता में हुआ। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बंगाली फिल्मों और टेलीविजन इंडस्ट्री से की। अपनी बेहतरीन एक्टिंग और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के कारण वह जल्दी ही लोकप्रिय हो गईं। इसके बाद उन्होंने कई वेब सीरीज और टीवी शो में भी काम किया।

साल 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने आधिकारिक रूप से तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा। पार्टी ने उन्हें युवा चेहरों में प्रमुख स्थान दिया और वह जल्द ही टीएमसी की तेज-तर्रार प्रवक्ता बनकर उभरीं। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जादवपुर सीट से जीत दर्ज कर संसद पहुंचने में सफलता हासिल की।

'काबा-मदीना' विवाद से आईं राष्ट्रीय चर्चा में

सायनी घोष का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में तब आया जब उनके एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया। 'काबा-मदीना' से जुड़े पोस्ट पर विरोध प्रदर्शन हुए और राजनीतिक माहौल गरमा गया। इस विवाद ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया। हालांकि उन्होंने बाद में अपने पक्ष में सफाई भी दी, लेकिन यह विवाद लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा।

टीएमसी में बढ़ी चर्चाएं

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हालिया घटनाक्रम के बीच सायनी घोष का नाम फिर चर्चा में है। पार्टी के भीतर चल रही उठापटक और बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण उनकी भूमिका पर लगातार नजर रखी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी उनके बयान और राजनीतिक गतिविधियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़

सायनी घोष सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। वह राजनीतिक मुद्दों के अलावा सामाजिक विषयों और व्यक्तिगत विचारों को भी खुलकर साझा करती हैं। उनकी पोस्ट अक्सर वायरल होती हैं और लाखों लोग उन्हें विभिन्न प्लेटफॉर्म पर फॉलो करते हैं।

कितनी है सायनी घोष की नेटवर्थ

सार्वजनिक चुनावी हलफनामों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सायनी घोष की आय का प्रमुख स्रोत अभिनय, ब्रांड एंडोर्समेंट और राजनीति से जुड़े वैध स्रोत रहे हैं। उनकी कुल संपत्ति करोड़ों रुपये के आसपास बताई जाती है, हालांकि अलग-अलग रिपोर्ट्स में आंकड़े अलग-अलग हैं। उनके पास अचल संपत्ति, बैंक जमा और अन्य निवेश भी बताए जाते हैं।

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Mon, 15 Jun 2026 15:18:09 +0530 news desk MPcg
योगी आदित्यनाथ बोले 12 साल में आस्था, विकास और गरीब कल्याण का नया भारत बना https://citytoday.co.in/6570 https://citytoday.co.in/6570 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित विशेष मीडिया संवाद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन देखा है, जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में अभूतपूर्व है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने आस्था, विकास और गरीब कल्याण के नए मॉडल को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है। आज भारत केवल आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में नहीं बढ़ रहा, बल्कि सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक मूल्यों और आधुनिक विकास के संतुलन का भी वैश्विक उदाहरण बन चुका है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्हें जन आंदोलन का रूप दिया गया। उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।

योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि सरकार ने लगभग 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। उनका कहना था कि गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए चलाई गई योजनाओं का प्रभाव आज देश के हर कोने में दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य ने भी प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप विकास और सुशासन की नई पहचान बनाई है। बेहतर कानून व्यवस्था, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज, औद्योगिक निवेश और धार्मिक पर्यटन के विकास ने उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा लगातार मजबूत हो रही है। भारत अब केवल विकासशील देश नहीं, बल्कि विश्व की बड़ी शक्तियों में अपनी प्रभावी भूमिका निभा रहा है।

योगी आदित्यनाथ ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आने वाले वर्षों में विकसित भारत के लक्ष्य की ओर और तेजी से आगे बढ़ेगा तथा आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा।

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Fri, 12 Jun 2026 17:29:23 +0530 news desk MPcg
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर सियासी घमासान, चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार https://citytoday.co.in/6530 https://citytoday.co.in/6530 मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में चुनाव आयोग पहुंचा और रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को कानून के खिलाफ बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की। हालांकि, शिकायत दर्ज होने के कई घंटे बाद भी आयोग की ओर से कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया।

कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जिस आधार पर रद्द किया गया, उसका चुनावी कानून में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उनका कहना है कि जिस मामले का हवाला दिया गया, उसमें अदालत ने अभी संज्ञान तक नहीं लिया है और केवल नोटिस जारी किया गया था। ऐसे में उसे लंबित आपराधिक मामला मानकर नामांकन रद्द करना पूरी तरह गलत है।

दिल्ली में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, सचिन पायलट, भूपेश बघेल और विवेक तन्खा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने दो घंटे में फैसला देने का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया गया।

इधर भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यालय का गेट बंद मिलने पर प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वर्दी गेट पर टांगकर चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने नामांकन रद्द किए जाने को लोकतंत्र पर हमला और राज्यसभा सीट छीनने की साजिश करार दिया।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब रिटर्निंग ऑफिसर ने हलफनामे में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया। भाजपा का आरोप है कि उन्होंने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी अपने शपथ पत्र में छिपाई थी, जबकि कांग्रेस का कहना है कि वह मामला कानूनी रूप से ऐसी श्रेणी में नहीं आता जिसका खुलासा अनिवार्य हो।

कांग्रेस अब इस पूरे मामले को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर उठाने की तैयारी में है। पार्टी नेतृत्व आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहा है, जबकि चुनाव आयोग के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। आने वाले घंटों में आयोग का निर्णय राज्यसभा चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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Wed, 10 Jun 2026 17:46:23 +0530 news desk MPcg
बरनाला को मिलेगा पहला मेयर हसनप्रीत भारद्वाज की जीत लगभग तय, सीनियर और डिप्टी मेयर चुनाव पर सस्पेंस बरकरार https://citytoday.co.in/6528 https://citytoday.co.in/6528 पंजाब के बरनाला शहर के लिए आज का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद पहली बार शहर को अपना निर्वाचित मेयर मिलने वाला है। नगर निगम के पुस्तकालय सभागार में नव-निर्वाचित पार्षदों की बैठक के दौरान मेयर पद के चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सत्ताधारी दल के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण वार्ड नंबर 44 से निर्वाचित पार्षद हसनप्रीत भारद्वाज का मेयर चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे औपचारिक घोषणा भर माना जा रहा है, जबकि सबसे अधिक चर्चा सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों को लेकर हो रही है।

सूत्रों के अनुसार, इन दोनों पदों के लिए कई पार्षद अपनी दावेदारी जता रहे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व फिलहाल इन चुनावों को टालने के पक्ष में दिखाई दे रहा है, ताकि संगठन के भीतर किसी तरह की गुटबाजी या असंतोष की स्थिति पैदा न हो। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी बेहद सावधानी से राजनीतिक संतुलन साधना चाहती है।

बरनाला नगर निगम में कुल 50 वार्ड हैं। इनमें सत्ताधारी दल के 36 पार्षद हैं, जबकि भाजपा के सात, निर्दलीय पांच और कांग्रेस के दो पार्षद चुने गए हैं। स्पष्ट बहुमत के कारण मेयर पद पर सत्ताधारी दल की जीत तय मानी जा रही है।

हसनप्रीत भारद्वाज लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं और सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। इससे पहले वे राजस्व विभाग में पटवारी के पद पर तैनात थे, लेकिन वर्ष 2022 में सरकारी नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में आ गए। संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और मजबूत पकड़ के चलते उन्हें मेयर पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

अब पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बरनाला के पहले मेयर के रूप में हसनप्रीत भारद्वाज की औपचारिक घोषणा कब होती है और सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर पदों पर पार्टी नेतृत्व क्या फैसला लेता है।

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Wed, 10 Jun 2026 17:34:23 +0530 news desk MPcg
मोदी बने सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री, नेहरू का रिकॉर्ड टूटा https://citytoday.co.in/6527 https://citytoday.co.in/6527 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 4,399 दिन पूरे हो गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रियों ने खड़े होकर तालियां बजाकर प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन किया। सरकार की ओर से उनके नेतृत्व और लगातार तीन कार्यकाल तक जनता के विश्वास को देश के लोकतांत्रिक इतिहास की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया।

इधर, भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की बैठक में भी प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में विशेष प्रस्ताव पेश किया गया। प्रस्ताव में उन्हें भारत का सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाला निर्वाचित प्रधानमंत्री बताया गया। जानकारी के अनुसार, प्रस्ताव भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने रखा, जबकि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने उसका समर्थन किया।

बैठक में भाजपा और NDA शासित 22 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और गठबंधन के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में सभी सहयोगी दलों के नेताओं के साथ समूह फोटो भी खिंचवाई और बाद में उन्हें संबोधित किया।

गौरतलब है कि स्वतंत्रता के बाद जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से प्रधानमंत्री रहे, लेकिन 1952 के पहले आम चुनाव के बाद निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक 4,398 दिनों का रहा। अब नरेंद्र मोदी इस रिकॉर्ड को पार कर भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का यह तीसरा कार्यकाल है। वर्ष 2014 में पहली बार संसद पहुंचने पर उन्होंने संसद भवन की सीढ़ियों को नमन किया था। 2019 में उन्होंने संविधान को प्रणाम किया और 2024 में संसद में प्रवेश के दौरान संविधान की प्रति को माथे से लगाकर सम्मान व्यक्त किया था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह उपलब्धि भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

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Wed, 10 Jun 2026 17:28:32 +0530 news desk MPcg
भोपाल से दिल्ली रवाना होने से पहले CM डॉ. मोहन यादव का कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोले& हार के डर से नामांकन तक नहीं भर पाई पार्टी https://citytoday.co.in/6518 https://citytoday.co.in/6518 । मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी हार के डर और अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है। उन्होंने दावा किया कि यही वजह है कि कांग्रेस अपने राज्यसभा प्रत्याशी का नामांकन भी सही तरीके से दाखिल नहीं कर सकी।

दिल्ली रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित गुफा मंदिर में पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कांग्रेस की रणनीति और संगठनात्मक स्थिति पर सवाल उठाए। सीएम ने कहा कि कांग्रेस के भीतर आपसी मतभेद इतने बढ़ चुके हैं कि पार्टी चुनावी प्रक्रिया तक को गंभीरता से नहीं संभाल पा रही है।

उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति कमजोर नजर आ रही है और पार्टी के नेता आपसी खींचतान में उलझे हुए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, कांग्रेस को अपनी संभावित हार का आभास पहले से है, इसलिए पार्टी में असमंजस और अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है।

डॉ. मोहन यादव ने भारतीय जनता पार्टी की तैयारियों का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा पूरी मजबूती और संगठनात्मक एकजुटता के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि पार्टी के उम्मीदवारों को व्यापक समर्थन मिलेगा और भाजपा राज्यसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज होने की संभावना है। राज्यसभा चुनाव के बीच भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकते हैं।

अब सभी की नजर कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर टिकी है कि वह मुख्यमंत्री के आरोपों का किस तरह जवाब देती है और राज्यसभा चुनाव में अपनी रणनीति को किस रूप में आगे बढ़ाती है।

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Wed, 10 Jun 2026 12:15:51 +0530 news desk MPcg
INDIA ब्लॉक मंथन से यूपी की राजनीति पर क्या संकेत, अखिलेश–राहुल की मुलाकात से बढ़ी रणनीतिक हलचल https://citytoday.co.in/6517 https://citytoday.co.in/6517 दिल्ली में हुई INDIA ब्लॉक (Indian National Developmental Inclusive Alliance) की हालिया अहम बैठक ने विपक्षी राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की बातचीत को उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में विपक्षी गठबंधन ने संगठनात्मक मजबूती, सीट शेयरिंग और राज्यों में तालमेल जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। खासकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य पर सभी दलों की नजर रही, जहां 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अभी से तेज होने लगी है।

यूपी को लेकर क्या हुआ मंथन

बैठक में यह संकेत मिला कि विपक्षी दल अब उत्तर प्रदेश में एक अधिक समन्वित रणनीति अपनाने की कोशिश करेंगे। अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच हुई अनौपचारिक बातचीत को सीट बंटवारे और स्थानीय स्तर पर सहयोग की दिशा में अहम माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यूपी में विपक्षी गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक तालमेल और वोट ट्रांसफर की रही है। ऐसे में यह बैठक भविष्य की रणनीति तय करने की शुरुआती कोशिश मानी जा रही है।

गठबंधन में एकजुटता की कोशिश, लेकिन अंदरूनी मतभेद भी कायम

हालांकि बैठक में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की गई, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार गठबंधन के भीतर कई मुद्दों पर असहमति भी सामने आई। क्षेत्रीय दलों ने कांग्रेस से अधिक लचीले और सहयोगी रवैये की मांग की।

इसी बीच, कुछ दलों ने यह भी कहा कि विपक्षी गठबंधन को केवल चुनावी मंच नहीं बल्कि एक स्थायी समन्वय ढांचे की जरूरत है, ताकि भविष्य के चुनावों में बेहतर परिणाम मिल सकें।

यूपी में चुनावी समीकरणों पर असर

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित तालमेल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। जानकार मानते हैं कि यदि दोनों दल मजबूत समन्वय के साथ मैदान में उतरते हैं, तो यह राज्य के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

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Tue, 09 Jun 2026 19:13:11 +0530 news desk MPcg
TMC नेता जहांगीर खान नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार, अवैध वसूली और फरार होने की कोशिश का आरोप https://citytoday.co.in/6482 https://citytoday.co.in/6482 कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता जहांगीर खान को पुलिस ने नेपाल बॉर्डर के पास से गिरफ्तार कर लिया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की यह कार्रवाई सोमवार को हुई, जब वह कथित तौर पर देश छोड़कर नेपाल भागने की कोशिश कर रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, जहांगीर खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फालता पुलिस स्टेशन में कुल 7 FIR दर्ज हैं। उन पर अवैध वसूली और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि उनके समर्थकों पर महिलाओं को धमकी देने जैसे आरोप भी सामने आए थे, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

नेपाल भागने की कोशिश में थे जहांगीर

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के समय जहांगीर खान नेपाल सीमा के पास मौजूद थे और देश से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोलकाता लाया जा रहा है, जहां उनसे पूछताछ की जाएगी।

चुनावी हार और लगातार गायब रहने की स्थिति

जहांगीर खान ने 2026 का विधानसभा चुनाव फालता सीट से लड़ा था, लेकिन वे चुनाव हार गए थे। इसके बाद से वह लगातार सार्वजनिक जीवन से दूर थे। 24 मई को आए चुनाव परिणामों में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था।

इससे पहले 19 मई को उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव से अपना नाम वापस लेने का ऐलान किया था। इसके बाद से ही वे न तो अपने घर पर दिखे और न ही पार्टी कार्यालय में नजर आए।

हाईकोर्ट में याचिका और सुरक्षा वापसी

मई 2026 में जहांगीर खान ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज मामलों में गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग की थी। हालांकि, 26 मई को अदालत ने उन्हें दी गई सुरक्षा वापस ले ली थी।

‘पुष्पा’ स्टाइल छवि और राजनीतिक चर्चा

चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान ने खुद को फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार की तरह प्रस्तुत किया था और कई रैलियों में “पुष्पा झुकेगा नहीं साला” जैसे डायलॉग भी बोले थे। उनकी यह छवि काफी चर्चा में रही थी, लेकिन चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे।

राजनीतिक सरगर्मी तेज

इस गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि TMC की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच में जुटी है और जहांगीर खान से पूछताछ के बाद कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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Mon, 08 Jun 2026 17:47:26 +0530 news desk MPcg
अवध ओझा ने CJP को दिए आंदोलन के 'गुर', बोले& जंतर&मंतर पर 100 लोग बैठें, बाकी देशभर में दिखे समर्थन https://citytoday.co.in/6477 https://citytoday.co.in/6477 मशहूर कोचिंग शिक्षक और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता अवध ओझा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आंदोलन चलाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन की सफलता भीड़ या टकराव में नहीं, बल्कि अनुशासन, प्रतीकात्मकता और जनसमर्थन में छिपी होती है।

'हिंसा नहीं, अहिंसा से जीता जाता है आंदोलन'

अवध ओझा ने स्पष्ट कहा कि आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में रखा जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से हिंसा, अराजकता और कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कदमों से दूर रहने की अपील की। उनका कहना था कि जनहित के मुद्दों को मजबूत तरीके से उठाने के लिए लोकतांत्रिक रास्ता सबसे प्रभावी माध्यम है।

जंतर-मंतर पर सिर्फ 100 लोग करें अनशन

CJP को सुझाव देते हुए अवध ओझा ने कहा कि जंतर-मंतर पर केवल 100 प्रमुख लोग प्रतीकात्मक अनशन पर बैठें। इससे आंदोलन व्यवस्थित रहेगा और उसका संदेश भी स्पष्ट रूप से लोगों तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि अनावश्यक भीड़ जुटाने की बजाय रणनीतिक तरीके से आंदोलन चलाया जाए।

घर-घर झंडा लगाने की दी सलाह

अवध ओझा ने कहा कि बाकी समर्थक अपने-अपने घरों पर पार्टी का झंडा लगाकर समर्थन जताएं। उनका मानना है कि जब किसी आंदोलन का प्रतीक देशभर के घरों तक पहुंचता है, तब उसकी ताकत सरकार और समाज दोनों महसूस करते हैं। उन्होंने इसे शांतिपूर्ण जनभागीदारी का प्रभावी तरीका बताया।

सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहने की अपील

उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी बात रखने की भी सलाह दी। उनके अनुसार, आज के दौर में विचारों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के लिए डिजिटल अभियान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज

अवध ओझा के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। उनके सुझावों को कई लोग शांतिपूर्ण जनआंदोलन की रणनीति के रूप में देख रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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Mon, 08 Jun 2026 16:26:19 +0530 news desk MPcg
राम मंदिर के चढ़ावे पर सियासी संग्राम अखिलेश यादव के आरोपों पर चंपत राय का जवाब, भाजपा भी हुई हमलावर https://citytoday.co.in/6473 https://citytoday.co.in/6473 अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि को लेकर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी और करोड़ों रुपये गायब होने के आरोप लगाए जाने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भाजपा दोनों ने मोर्चा संभाल लिया है।

चंपत राय ने किया आरोपों का खंडन

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अखिलेश यादव के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है और नियमित रूप से आंतरिक ऑडिट कराया जाता है। इस प्रक्रिया में ट्रस्ट के अधिकारियों के साथ भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि भी शामिल रहते हैं।

चंपत राय के अनुसार, ऑडिट का कार्य कई दिनों तक चलता है और अब तक किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी सामने नहीं आई है।

अखिलेश यादव ने उठाए थे सवाल

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने दावा किया था कि मंदिर के चढ़ावे की राशि को लेकर पारदर्शिता नहीं दिखाई जा रही है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अखिलेश के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और विभिन्न दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का पलटवार

अखिलेश यादव के आरोपों पर भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी है। उन्होंने विपक्ष पर धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।

पंकज चौधरी ने कहा कि बिना तथ्यों के इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है और जनता सब कुछ देख रही है।

राम मंदिर पर राजनीति तेज

राम मंदिर देश की आस्था और राजनीति दोनों का बड़ा केंद्र रहा है। ऐसे में मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे आरोप और उसके बाद आई प्रतिक्रियाओं ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

ऑडिट प्रक्रिया पर ट्रस्ट का भरोसा

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि सभी आर्थिक गतिविधियां निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत संचालित की जाती हैं। ट्रस्ट ने दोहराया कि ऑडिट प्रक्रिया लगातार जारी है और किसी भी तरह की गड़बड़ी की बात अब तक सामने नहीं आई है। फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है, जबकि ट्रस्ट अपनी वित्तीय व्यवस्था को लेकर पूरी पारदर्शिता का दावा कर रहा है।

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Mon, 08 Jun 2026 15:03:29 +0530 news desk MPcg
टीएमसी में नहीं थम रहा इस्तीफों का दौर, अब राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने छोड़ा पद; ममता बनर्जी को बड़ा झटका https://citytoday.co.in/6467 https://citytoday.co.in/6467
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में राजनीतिक उथल-पुथल लगातार बढ़ती जा रही है। पार्टी के भीतर असंतोष और इस्तीफों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने अपने पद से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व को बड़ा झटका दिया है।

संसद पहुंचकर सौंपा इस्तीफा

जानकारी के अनुसार, सुखेंदु शेखर रे सोमवार सुबह संसद पहुंचे और राज्यसभा सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस कदम को टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराजगी और संगठनात्मक संकट से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने इस्तीफे के पीछे की विस्तृत वजहों को सार्वजनिक नहीं किया है।

ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में रही है गिनती

सुखेंदु शेखर रे लंबे समय से टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल रहे हैं। वर्ष 2011 में बंगाल में टीएमसी के सत्ता में आने के बाद से उन्होंने पार्टी के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और संसदीय मामलों में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में उनका इस्तीफा पार्टी के लिए एक बड़े राजनीतिक नुकसान के रूप में देखा जा रहा है।

टीएमसी में बढ़ रही अंदरूनी कलह

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व, रणनीति और भविष्य की दिशा को लेकर असंतोष बढ़ा है। कई नेताओं द्वारा लगातार पार्टी छोड़ने या पदों से इस्तीफा देने के कारण टीएमसी के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

विपक्षी बैठक के बीच आया बड़ा घटनाक्रम

सुखेंदु शेखर रे का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है जब ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की बैठकों में शामिल होने पहुंची हैं। ऐसे महत्वपूर्ण राजनीतिक दौर में पार्टी के वरिष्ठ नेता का इस्तीफा टीएमसी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

सुखेंदु शेखर रे के इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह केवल एक व्यक्तिगत फैसला है या फिर पार्टी के भीतर चल रही असंतोष की बड़ी लहर का संकेत। आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर और क्या बदलाव होते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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Mon, 08 Jun 2026 12:42:18 +0530 news desk MPcg
हावड़ा में TMC विधायक अरुणाभ सेन के घर के बाहर जोरदार विरोध, महिलाओं ने झाड़ू&जूते लेकर लगाए ‘चोर&चोर’ के नारे https://citytoday.co.in/6461 https://citytoday.co.in/6461 पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक अरुणाभ सेन के आवास के बाहर शुक्रवार को भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। बागनान इलाके में स्थानीय महिलाओं और लोगों ने झाड़ू और जूते लेकर विधायक के खिलाफ नारेबाजी की और माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण बना रहा।

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए और विधायक का पुतला व तस्वीर जलाकर अपना आक्रोश जताया। अचानक हुए इस प्रदर्शन से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विधायक और उनके समर्थकों ने लंबे समय से क्षेत्र में कथित रूप से लोगों के साथ अन्याय और उत्पीड़न किया है। उनका कहना है कि कई परिवारों के पुरुष सदस्य डर और दबाव के कारण लंबे समय तक घर छोड़कर रहने को मजबूर हुए।

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि क्षेत्र में विकास कार्यों की अनदेखी की गई है, जिसके चलते जनता में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही थी। इसी असंतोष के चलते महिलाओं ने संगठित होकर विधायक के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

घटना के बाद प्रशासनिक और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। फिलहाल इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

वहीं, इस पूरे मामले पर विधायक या उनकी ओर से अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है।

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Sat, 06 Jun 2026 19:07:32 +0530 news desk MPcg
बिहार MLC चुनाव में चिराग पासवान का बड़ा दांव, अशरफ अंसारी को टिकट देकर बदले सियासी समीकरण https://citytoday.co.in/6451 https://citytoday.co.in/6451 बिहार विधान परिषद (एमएलसी) द्विवार्षिक चुनाव को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए अशरफ अंसारी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी के इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे समावेशी राजनीति, सामाजिक संतुलन और जमीनी कार्यकर्ताओं के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

पार्टी नेतृत्व की ओर से कहा गया कि उम्मीदवार चयन का उद्देश्य ऐसे चेहरों को आगे लाना है, जिन्होंने लंबे समय तक संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है। पार्टी का मानना है कि यह फैसला संगठन को और मजबूत करेगा तथा विभिन्न वर्गों के बीच बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा।

अशरफ अंसारी के नाम की घोषणा के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया। कई नेताओं ने इसे दूरदर्शी निर्णय बताते हुए कहा कि इससे संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और पार्टी की सामाजिक पहुंच का विस्तार होगा। नेताओं ने दावा किया कि यह फैसला पार्टी के विकास और समावेशी सोच को नई दिशा देगा।

पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि यह निर्णय केवल एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं, बल्कि संगठन के प्रति वर्षों से काम कर रहे कार्यकर्ताओं के सम्मान का प्रतीक भी है। उनका मानना है कि ऐसे फैसले भविष्य में पार्टी को और मजबूत आधार प्रदान करेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधान परिषद चुनाव से पहले यह उम्मीदवार चयन बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है। पार्टी इस फैसले के जरिए अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने और व्यापक जनसमर्थन हासिल करने की रणनीति पर काम करती नजर आ रही है।

फिलहाल पार्टी कार्यकर्ता इस घोषणा का स्वागत कर रहे हैं और चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। अब सभी की नजर आगामी चुनावी मुकाबले और उसके राजनीतिक प्रभाव पर टिकी हुई है।

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Sat, 06 Jun 2026 16:03:06 +0530 news desk MPcg
कांग्रेस विवाद पर चंद्र कुमार का बयान युवा नेताओं की बात सुनी जाए, लेकिन अनुशासन जरूरी https://citytoday.co.in/6436 https://citytoday.co.in/6436

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में चल रहे आंतरिक विवाद और नीरज भारती के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस पूरे मामले पर कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को अनुशासन और संवाद का स्पष्ट संदेश दिया है।

शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए चंद्र कुमार ने कहा कि किसी भी राजनीतिक संगठन में मतभेद और असहमति स्वाभाविक होती है, लेकिन उन्हें सार्वजनिक मंच पर उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी से जुड़े मुद्दों को पहले संगठन के भीतर ही चर्चा करके सुलझाया जाना चाहिए, न कि सोशल मीडिया या सार्वजनिक बयानबाजी के जरिए।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में हर नेता को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन बिना तथ्य और विचार-विमर्श के लगाए गए आरोप पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे मामलों में जिम्मेदार नेताओं को संयम बरतना चाहिए और मुद्दों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखना चाहिए।

चंद्र कुमार ने जोर देकर कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की मजबूती उसकी एकजुटता और अनुशासन पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक बड़ा लोकतांत्रिक संगठन है, जहां हर कार्यकर्ता और नेता को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है, लेकिन इसके लिए उचित मंच मौजूद हैं।

उन्होंने युवा नेताओं की भावनाओं पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी बातों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए, लेकिन साथ ही संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी है। पार्टी के भीतर संवाद और समन्वय ही किसी भी विवाद का सबसे बेहतर समाधान है।

इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है कि पार्टी के भीतर मतभेदों को किस तरह संतुलित किया जाएगा और आने वाले समय में संगठनात्मक स्थिति क्या रूप लेगी।

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Sat, 06 Jun 2026 13:02:53 +0530 news desk MPcg
जंतर&मंतर पर तिरंगे, फूल और पोस्टरों के साथ जुटे प्रदर्शनकारी, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज https://citytoday.co.in/6433 https://citytoday.co.in/6433 दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके के आह्वान पर सैकड़ों की संख्या में समर्थक सुबह से ही धरना स्थल पर जुटने लगे। प्रदर्शन में लोगों ने तिरंगा झंडा, फूल और विभिन्न संदेश लिखे अनोखे पोस्टर लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया।

यह प्रदर्शन मुख्य रूप से देश की शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक मामलों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर किया गया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए और शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाने चाहिए।

जंतर-मंतर पर सुबह से ही बढ़ी हलचल

सुबह से ही जंतर-मंतर क्षेत्र में भारी भीड़ देखने को मिली। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और पूरे इलाके को निगरानी में रखा गया। प्रदर्शन स्थल पर प्रवेश से पहले सभी लोगों की गहन जांच की गई, जिसके बाद ही उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी गई।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स समेत अतिरिक्त बल तैनात किया था। ड्रोन कैमरों के जरिए भी पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जा रही थी।

तिरंगा, किताबें और फूलों के साथ प्रदर्शन

प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि लोग अपने साथ तिरंगा झंडा, किताबें और फूल लेकर पहुंचे। कई प्रदर्शनकारियों ने हाथों में ऐसे पोस्टर थाम रखे थे जिन पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक रोकने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने जैसे संदेश लिखे थे।

पार्टी की ओर से पहले ही समर्थकों से अपील की गई थी कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में शामिल हों और अपने परिवार के सदस्यों को भी साथ लेकर आएं।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

CJP की ओर से प्रदर्शन का केंद्र बिंदु शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा रहा। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि लगातार पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े विवादों ने छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है।

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। कई प्रदर्शनकारियों ने इसे युवाओं के भविष्य की लड़ाई बताया।

अभिजीत दिपके के दिल्ली आगमन पर चर्चा

पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके के दिल्ली पहुंचने के दौरान भी कई घटनाक्रम चर्चा में रहे। जानकारी के अनुसार, उन्होंने एयरपोर्ट पर VIP एग्जिट की मांग की थी, जिसे स्वीकार नहीं किया गया और उन्हें सामान्य प्रक्रिया से बाहर निकलना पड़ा।

एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय वे बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की एक किताब हाथ में लिए नजर आए, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं तेज हो गईं।

जंतर-मंतर पर भारी सुरक्षा व्यवस्था

प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी थी। संसद स्ट्रीट थाना क्षेत्र में भी अतिरिक्त बल तैनात किया गया था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए। ड्रोन और CCTV कैमरों के जरिए लगातार निगरानी की जा रही थी।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज

CJP के इस प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी हलचल देखने को मिली। समर्थकों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज बताया, जबकि कई लोगों ने इसे राजनीतिक प्रदर्शन के रूप में देखा।

हैशटैग #CJPProtest और #JantarMantar सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड करते नजर आए

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Sat, 06 Jun 2026 12:19:55 +0530 news desk MPcg
योगी के जन्मदिन पर काशी से पर्यावरण संरक्षण का संदेश, भाजपा ने शुरू किया सेवा&सुशासन का महाअभियान https://citytoday.co.in/6405 https://citytoday.co.in/6405 धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिकता की नगरी Varanasi में शुक्रवार को एक विशेष अवसर देखने को मिला, जब Yogi Adityanath के जन्मदिन को जनसेवा और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने न केवल मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं दीं, बल्कि पौधरोपण कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प भी लिया।

भाजपा महानगर कार्यालय सिगरा में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की। इसके बाद मिठाइयां वितरित कर खुशी मनाई गई और फिर पौधरोपण अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों का होगा प्रचार

यह कार्यक्रम केवल जन्मदिन समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके साथ ही केंद्र में Narendra Modi सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शुरू किए गए विशेष पखवाड़ा अभियान का भी शुभारंभ किया गया। भाजपा ने इस अभियान को "सेवा, संस्कार, सुशासन एवं सम्मान" की थीम पर आयोजित करने का निर्णय लिया है।

पार्टी नेताओं के अनुसार, सात जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस दौरान देश ने विकास, बुनियादी ढांचे, डिजिटल क्रांति, सामाजिक कल्याण और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इन्हीं उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आगामी 15 दिनों तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पखवाड़े भर चलेंगे जनसंपर्क और जनकल्याण कार्यक्रम

भाजपा द्वारा चलाए जाने वाले इस विशेष अभियान में समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रमों के तहत पौधरोपण, जनकल्याण मेले, स्वच्छता अभियान, योग शिविर, रक्तदान शिविर और जनसंपर्क अभियान आयोजित किए जाएंगे।

आठ जून को मंत्री, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी प्रबुद्ध वर्ग, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों से संपर्क कर सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी साझा करेंगे। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में लाभार्थियों से संवाद कर योजनाओं के प्रभाव को भी प्रस्तुत किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण को दिया गया विशेष महत्व

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित कर भाजपा कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष संदेश दिया। विश्व पर्यावरण दिवस के आसपास आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की गई।

कार्यकर्ताओं का कहना था कि विकास और पर्यावरण दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। हर नागरिक यदि एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।

सेवा और सुशासन के संदेश के साथ अभियान की शुरुआत

काशी से शुरू हुआ यह अभियान केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सामाजिक जागरूकता का भी माध्यम बनने जा रहा है। भाजपा का दावा है कि आगामी दिनों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के जरिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से लोगों को जोड़ने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन पर पौधरोपण, जनसेवा और सुशासन के संदेश के साथ शुरू हुआ यह अभियान आने वाले पखवाड़े में राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों का भी केंद्र बनने वाला है।

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Fri, 05 Jun 2026 13:19:35 +0530 news desk MPcg
क्या बिखरने वाली है TMC, 4 बड़े संकेतों ने बढ़ाई ममता बनर्जी की चिंता https://citytoday.co.in/6376 https://citytoday.co.in/6376 पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से देश की सबसे दिलचस्प और अप्रत्याशित राजनीति मानी जाती रही है। यहां एक अनोखा राजनीतिक ट्रेंड देखने को मिलता है—जो पार्टी एक बार सत्ता से बाहर हुई, वह दोबारा सत्ता में लौटने में लगभग नाकाम रही। कांग्रेस को छोड़ दें तो बंगाल का इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है।

इसी वजह से अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी उसी राह पर बढ़ रही है? क्या पार्टी के भीतर और बाहर ऐसे संकेत दिखाई दे रहे हैं जो भविष्य में उसके लिए खतरे की घंटी साबित हो सकते हैं?

पहला संकेत: नेताओं और कार्यकर्ताओं में बढ़ती बेचैनी

किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत उसका संगठन होता है। हाल के वर्षों में TMC के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भ्रष्टाचार, भर्ती घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। कई बड़े चेहरे जांच एजेंसियों के रडार पर आए हैं।

इन घटनाओं ने पार्टी की छवि को प्रभावित किया है और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी असर डाला है।

दूसरा संकेत: विपक्ष की बढ़ती ताकत

एक समय ऐसा था जब बंगाल में TMC का मुकाबला करने वाला कोई मजबूत विपक्ष नजर नहीं आता था। लेकिन अब राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। विपक्ष लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वोट प्रतिशत में हुए बदलावों ने यह संकेत दिया है कि TMC के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिशें तेज हो चुकी हैं।

तीसरा संकेत: नेतृत्व के बाद की चुनौती

ममता बनर्जी आज भी TMC की सबसे बड़ी ताकत हैं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी का पूरा ढांचा काफी हद तक उनके व्यक्तिगत नेतृत्व पर निर्भर है।

ऐसे में भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन या उत्तराधिकार को लेकर किसी भी तरह की अनिश्चितता पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

चौथा संकेत: सत्ता विरोधी माहौल

लगातार लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली सरकारों को अक्सर एंटी-इंकम्बेंसी यानी सत्ता विरोधी माहौल का सामना करना पड़ता है।

बंगाल में भी कई क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर विकास, रोजगार और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। यदि ये असंतोष व्यापक जनभावना में बदलता है, तो इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।

बंगाल में सत्ता खोने के बाद वापसी क्यों मुश्किल होती है

पश्चिम बंगाल की राजनीति की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि यहां जनता अक्सर बदलाव के बाद नए राजनीतिक विकल्प को लंबा मौका देती है।

कांग्रेस के बाद वाम मोर्चा करीब 34 साल तक सत्ता में रहा। फिर 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC सत्ता में आई और लगातार मजबूत बनी रही। ऐसे में इतिहास बताता है कि बंगाल में राजनीतिक बदलाव अक्सर बड़े और दीर्घकालिक होते हैं।

क्या TMC के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है

फिलहाल TMC पश्चिम बंगाल की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत बनी हुई है और ममता बनर्जी की लोकप्रियता भी कायम है। लेकिन राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं।

यही कारण है कि पार्टी के सामने मौजूद चुनौतियों और बदलते राजनीतिक संकेतों पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि TMC अपनी पकड़ बनाए रखती है या बंगाल की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करती है।

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Wed, 03 Jun 2026 14:23:54 +0530 news desk MPcg
हरियाणा भाजपा को मिली नई कमान, डॉ. अर्चना गुप्ता ने संभाला प्रदेश अध्यक्ष का पदभार https://citytoday.co.in/6370 https://citytoday.co.in/6370 हरियाणा भाजपा में संगठनात्मक बदलाव के तहत बुधवार को एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। भारतीय जनता पार्टी की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने पंचकूला स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय 'पंचकमल' में विधिवत रूप से अपना कार्यभार ग्रहण किया। इस मौके पर आयोजित भव्य समारोह में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बड़ी मौजूदगी देखने को मिली।

कार्यभार ग्रहण समारोह को भाजपा संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके अलावा भाजपा हरियाणा के प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, सह प्रभारी सुरेंद्र नागर, प्रदेश संगठन महामंत्री फणीन्द्रनाथ शर्मा, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी समारोह में शामिल हुए।

कार्यकर्ताओं ने किया जोरदार स्वागत

पंचकमल कार्यालय पहुंचने पर डॉ. अर्चना गुप्ता का कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। पूरे परिसर में उत्साह का माहौल देखने को मिला। भाजपा कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं और नारों के साथ अपनी नई प्रदेश अध्यक्ष का अभिनंदन किया।

समारोह के दौरान पार्टी नेताओं ने डॉ. अर्चना गुप्ता के नेतृत्व में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का भरोसा जताया। नेताओं ने कहा कि उनका अनुभव और संगठनात्मक क्षमता भाजपा को आगामी राजनीतिक चुनौतियों में नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

महिला नेतृत्व को मिला बड़ा अवसर

डॉ. अर्चना गुप्ता के प्रदेश अध्यक्ष बनने को भाजपा में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भाजपा हरियाणा में संगठनात्मक विस्तार और जनसंपर्क अभियान को नई गति देने का प्रयास करेगी।

आगामी रणनीति पर रहेगी नजर

हरियाणा में आगामी चुनावी और संगठनात्मक गतिविधियों को देखते हुए डॉ. अर्चना गुप्ता की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में भाजपा प्रदेश में अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करेगी।

कार्यभार ग्रहण समारोह ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि भाजपा हरियाणा में संगठन को नई दिशा और नई ऊर्जा देने की तैयारी में है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नई प्रदेश अध्यक्ष संगठन को किस तरह आगे बढ़ाती हैं और आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना कैसे करती हैं।

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Wed, 03 Jun 2026 12:45:12 +0530 news desk MPcg
अन्नामलाई ने बीजेपी से दिया इस्तीफा नितिन नवीन को सौंपा 5 पन्नों का त्यागपत्र, जल्द बनाएंगे नई पार्टी https://citytoday.co.in/6358 https://citytoday.co.in/6358 बीजेपी अध्यक्ष को सौंपा 5 पन्नों का इस्तीफा तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस (IPS) अधिकारी के. अन्नामलाई ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अलविदा कह दिया है। सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई ने नई दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष से विशेष मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने शीर्ष नेतृत्व को अपना 5 पन्नों का विस्तृत त्यागपत्र सौंप दिया।

'तमिल-प्रथम' और 'धर्मनिरपेक्ष' विचारधारा पर बनेगी नई पार्टी

बीजेपी छोड़ने के साथ ही अन्नामलाई ने दक्षिण की राजनीति में एक नए सफर की तैयारी शुरू कर दी है। खबरों के अनुसार, वे जल्द ही एक नई क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी की घोषणा करने वाले हैं। उनके करीबियों और राजनीतिक सहयोगियों का कहना है कि इस नई पार्टी का मूल आधार 'धर्मनिरपेक्ष' (Secular) और 'तमिल-प्रथम' (Tamil-First) की सोच पर टिका होगा, जो स्थानीय संस्कृति और अधिकारों को प्राथमिकता देगी।

द्रविड़ दलों और बीजेपी को त्रिकोणीय मुकाबले की चुनौती

अन्नामलाई की इस नई रणनीति को तमिलनाडु के पारंपरिक राजनीतिक ढांचे को बदलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है 6 से 8 महीने में लॉन्चिंग: सूत्रों का दावा है कि इस नए राजनीतिक संगठन को अगले छह से आठ महीनों के भीतर आधिकारिक तौर पर जमीन पर उतार दिया जाएगा।

मजबूत विकल्प बनने की तैयारी: यह पार्टी तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज द्रविड़ पार्टियों (DMK और AIADMK) के साथ-साथ बीजेपी के लिए भी एक मजबूत चुनौती बनेगी। अन्नामलाई खुद को राज्य में तीसरे और सबसे विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास करेंगे।

पूर्व आईपीएस की नई पारी पर टिकीं नजरें

एक कड़क आईपीएस अधिकारी से राजनेता बने के. अन्नामलाई ने तमिलनाडु में बीजेपी को आक्रामक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। अब उनके इस बड़े फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि उनका यह 'तमिल-प्रथम' दांव राज्य की जनता को कितना लुभा पाता है।

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Tue, 02 Jun 2026 17:19:03 +0530 news desk MPcg
राज्य के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं, TVK की जीत के बाद पहली रैली में CM विजय का विपक्ष पर तीखा हमला https://citytoday.co.in/6324 https://citytoday.co.in/6324 तमिलनाडु की राजनीति में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने अपनी पहली बड़ी जनसभा में जोरदार राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने साफ कहा कि राज्य के अधिकारों और उसकी स्वायत्तता पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह रैली Tamilaga Vettri Kazhagam की जीत के बाद आयोजित की गई, जहां मुख्यमंत्री विजय ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला और राज्य की राजनीति को लेकर अपनी सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं।

TVK बनाम DMK की सीधी राजनीतिक लड़ाई का दावा

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि तमिलनाडु की राजनीति में अब मुख्य मुकाबला केवल Dravida Munnetra Kazhagam और उनकी पार्टी TVK के बीच रह गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जनता ने बदलाव के पक्ष में जनादेश दिया है और अब राज्य नई राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहा है।

‘जनता का सेवक’ बताया खुद को

विजय ने अपने भाषण में खुद को मुख्यमंत्री नहीं बल्कि जनता का सेवक बताया। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें सत्ता इसलिए नहीं दी कि वे शासक बनें, बल्कि इसलिए दी है कि वे जनता की सेवा करें और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरें।

विपक्ष पर तीखा हमला

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने सरकार गिराने और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार जनता के जनादेश से बनी है और उसे कमजोर करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।

परिवारवाद और राजनीति पर बयान

अपने संबोधन में विजय ने DMK पर परिवारवादी राजनीति को लेकर भी निशाना साधा और कहा कि यह जनता की नाराजगी का एक बड़ा कारण रहा है। उन्होंने कहा कि जनता अब पारदर्शी और विकास आधारित राजनीति चाहती है।

विपक्ष के आरोपों का जवाब

विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार को कुछ ही समय में लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जबकि सरकार ने अभी अपना काम शुरू ही किया है।

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Mon, 01 Jun 2026 18:07:22 +0530 news desk MPcg
विधानसभा चुनाव से पहले बसपा का बड़ा संगठनात्मक बदलाव, अलीगढ़ मंडल में नई जिम्मेदारियां तय https://citytoday.co.in/6311 https://citytoday.co.in/6311

Bahujan Samaj Party की राष्ट्रीय अध्यक्ष Mayawati ने विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए अलीगढ़ मंडल में पदाधिकारियों की नई नियुक्तियां की हैं। इस कदम को पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

यह फेरबदल उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मंडल में किया गया है, जिसमें कई नेताओं की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। कुछ नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कुछ की भूमिका सीमित कर दी गई है। पार्टी की ओर से बताया गया कि यह बदलाव संगठन को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

Aligarh Division में हुए इस संगठनात्मक बदलाव के तहत कई नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। आगरा से विक्रम सिंह जाटव, कासगंज से अनिल बघेल, अलीगढ़ से विजेंद्र सिंह विक्रम, सुरेश गौतम एडवोकेट, मनीष अहमद गाजी, रणबीर सिंह कश्यप और एटा से राजू रामरतन को अलीगढ़ मंडल जोन प्रभारी बनाया गया है।

इसके अलावा हरेंद्र को अब Hathras जिले की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि अलीगढ़ जिले में संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए अशोक सिंह एडवोकेट और मोरध्वज कुशवाहा को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पार्टी के जिलाध्यक्ष रतनदीप सिंह के अनुसार, यह आदेश लखनऊ से जारी फोल्डर के माध्यम से रविवार रात लगभग 10:30 बजे जारी किया गया। उन्होंने कहा कि इस फेरबदल का मुख्य उद्देश्य पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और कार्यकर्ताओं को अधिक सक्रिय भूमिका में लाना है।

यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। माना जा रहा है कि Bahujan Samaj Party अपनी चुनावी रणनीति को मजबूत करने के लिए संगठन में लगातार बदलाव कर रही है।

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Mon, 01 Jun 2026 15:43:39 +0530 news desk MPcg
तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी पर जानलेवा हमला, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने की तीखी निंदा https://citytoday.co.in/6291 https://citytoday.co.in/6291 भाजपा की नफरत और हिंसा की राजनीति का परिणाम अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए जानलेवा हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए इस घटना को पूरी तरह सुनियोजित बताया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा निशाना साधा।

शुभेंदु अधिकारी सरकार पर साधा निशाना

अखिलेश यादव ने बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और वहां की कानून-व्यवस्था को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस हमले के लिए सीधे तौर पर शुभेंदु अधिकारी सरकार को आड़े हाथों लिया। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि यह हमला कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि विपक्ष को दबाने के लिए किया गया एक सोचा-समझा प्रयास है।

नफरत और नकारात्मक राजनीति का लगाया आरोप

सपा मुखिया ने भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा देश भर में नफरत भरी, नकारात्मक और हिंसक राजनीति को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक दल वैचारिक रूप से मुकाबला नहीं कर पाते, तो वे इस तरह के हिंसक रास्तों का सहारा लेते हैं, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में गरमाया माहौल

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी टीएमसी में दूसरे सबसे बड़े नेता माने जाते हैं। शनिवार को उन पर हुए इस हमले के बाद से राज्य के साथ-साथ देश की सियासत में भी उबाल आ गया है। विपक्षी दलों के नेता लगातार इस घटना के विरोध में बयान जारी कर रहे हैं और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

मामले की जांच और सुरक्षा बढ़ाने की मांग

इस जानलेवा हमले के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी आक्रोश है। विभिन्न विपक्षी दलों ने इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है ताकि हमले के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब किया जा सके। साथ ही, विपक्षी नेताओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं।

लोकतंत्र पर मंडराता खतरा

अखिलेश यादव ने अपने बयान के अंत में कहा कि राजनीति में हिंसा का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। ऐसी घटनाएं न केवल नेताओं की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं, बल्कि आम जनता के बीच भी असुरक्षा और भय का माहौल पैदा करती हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए इस तरह की हिंसक प्रवृत्तियों को तुरंत रोका जाना चाहिए।

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Sat, 30 May 2026 18:27:31 +0530 news desk MPcg
नितिन नवीन का BJP कार्यकर्ताओं को संदेशवोटर नहीं, रिश्ते बनाइए बंगाल मॉडल का दिया उदाहरण https://citytoday.co.in/6267 https://citytoday.co.in/6267 देहरादून में संगठन को मजबूत करने का मंत्र देहरादून में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं को संगठन विस्तार और जनसंपर्क को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी को सिर्फ चुनावी रणनीति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जनता के साथ स्थायी और मजबूत संबंध बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

“मतदाता नहीं, जनभागीदारी” पर जोर

अपने संबोधन में नितिन नवीन ने कहा कि जनता को केवल चुनाव के समय याद किया जाने वाला “मतदाता” नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे लोगों को पार्टी की विचारधारा और गतिविधियों से लगातार जोड़कर रखें, ताकि जनता स्वयं संगठन का हिस्सा बन सके।

वैचारिक लड़ाई को बताया अहम

उन्होंने कहा कि राजनीतिक संघर्ष केवल भाषणों, नारों और विज्ञापनों से नहीं जीता जा सकता। इसके लिए एक मजबूत वैचारिक आधार और निरंतर जनसमर्थन की आवश्यकता होती है, जिसमें लोग केवल समर्थक नहीं बल्कि सक्रिय सहभागी बनें।

पश्चिम बंगाल मॉडल का दिया उदाहरण

नितिन नवीन ने अपने संबोधन में पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भाजपा ने चुनाव से आगे बढ़कर एक वैचारिक अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने वहां अपने समर्थकों के भीतर यह भावना विकसित की कि वे केवल चुनाव नहीं, बल्कि एक वैचारिक संघर्ष का हिस्सा हैं।

संगठनात्मक विस्तार पर फोकस

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की सफलता का आधार उसका मजबूत संगठन और बूथ स्तर तक फैला नेटवर्क है। कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे लोगों के बीच लगातार संवाद बनाए रखें और उन्हें संगठन से भावनात्मक रूप से जोड़ें।

कार्यकर्ताओं के लिए नया दृष्टिकोण

कार्यक्रम में दिए गए संदेश को पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक नया दृष्टिकोण माना जा रहा है, जिसमें राजनीति को केवल चुनावी गतिविधि के बजाय एक सतत सामाजिक और वैचारिक प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक रणनीति पर चर्चा

नितिन नवीन के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा आने वाले समय में जमीनी स्तर पर अपने संगठनात्मक मॉडल को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

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Sat, 30 May 2026 14:44:49 +0530 news desk MPcg
गाजीपुर की सियासत में बड़ा ट्विस्ट, मनोज सिन्हा और अफजाल अंसारी की एक साथ तस्वीर से मचा राजनीतिक हलचल https://citytoday.co.in/6262 https://citytoday.co.in/6262 गाजीपुर की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सांसद अफजाल अंसारी की एक साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। दोनों नेताओं को लंबे समय से राजनीतिक रूप से एक-दूसरे का धुर विरोधी माना जाता है, ऐसे में यह तस्वीर चर्चा का बड़ा विषय बन गई है।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई तस्वीर

यह तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोग इसे राजनीतिक संकेत मान रहे हैं, तो कुछ इसे केवल एक औपचारिक मुलाकात बता रहे हैं। तस्वीर में दोनों नेता एक कार्यक्रम के दौरान एक-दूसरे के साथ नजर आ रहे हैं।

संसदीय समिति की बैठक के दौरान हुई मुलाकात

जानकारी के अनुसार यह मुलाकात किसी औपचारिक राजनीतिक समझौते के तहत नहीं बल्कि संसदीय समिति की बैठक के दौरान हुई थी। उद्योग संबंधी स्थायी समिति, जिसके अध्यक्ष वरिष्ठ सांसद तिरुचि शिवा हैं, देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा करती है और संबंधित विभागों की योजनाओं का मूल्यांकन करती है।

सामान्य प्रोटोकॉल के तहत हुई बातचीत

इस बैठक के दौरान संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल या मुख्यमंत्री से औपचारिक मुलाकात की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत यह बैठक जम्मू-कश्मीर में हुई, जहां मनोज सिन्हा और समिति के सदस्यों के बीच सामान्य प्रोटोकॉल के तहत बातचीत हुई।

राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई अटकलें

तस्वीर वायरल होने के बाद राजनीतिक विश्लेषक और स्थानीय लोग तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं। कुछ इसे महज एक औपचारिक मुलाकात मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे भविष्य की संभावित राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।

गाजीपुर की राजनीति में नई चर्चा

गाजीपुर में यह तस्वीर चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। दोनों नेताओं के समर्थक और विरोधी इसे अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। इससे स्थानीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई है कि क्या यह केवल एक औपचारिक मुलाकात थी या इसके पीछे कोई बड़ा संदेश छिपा है।

फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं

इस मामले पर अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन तस्वीर के वायरल होने के बाद यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

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Sat, 30 May 2026 13:27:19 +0530 news desk MPcg
बंगाल में 15 साल बाद जनगणना शुरू करने की तैयारी, राजनीतिक आरोप&प्रत्यारोप तेज https://citytoday.co.in/6248 https://citytoday.co.in/6248 पश्चिम बंगाल में लंबे अंतराल के बाद जनगणना प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। जानकारी के अनुसार राज्य में 1 अगस्त से जनगणना का काम शुरू किया जाएगा, जिससे प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं।

15 साल बाद फिर शुरू होगी जनगणना प्रक्रिया

राज्य में करीब 15 वर्षों के बाद जनगणना की प्रक्रिया दोबारा शुरू होने जा रही है। इसे लेकर प्रशासनिक बैठकों का दौर जारी है और डिजिटल तरीके से डेटा संग्रह की योजना पर काम किया जा रहा है।

डिजिटल जनगणना पर फोकस

इस बार जनगणना प्रक्रिया को अधिक आधुनिक और डिजिटल बनाने की तैयारी है। ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है ताकि प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो सके।

शुभेंदु अधिकारी का सरकार पर हमला

इस मामले को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पहले भेजे गए केंद्र के पत्रों पर कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रक्रिया में देरी हुई।

ममता बनर्जी सरकार पर आरोप

शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार ने राजनीतिक कारणों से जनगणना प्रक्रिया में देरी की, जिससे राज्य विकास की दौड़ में पीछे रह गया।

राजनीतिक माहौल हुआ गर्म

जनगणना की घोषणा के साथ ही राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

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Fri, 29 May 2026 18:02:52 +0530 news desk MPcg
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की हलचल तेज, सिद्दरमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार की ताजपोशी की चर्चा https://citytoday.co.in/6244 https://citytoday.co.in/6244 कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सिद्दरमैया के इस्तीफे के बाद अब डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व लगातार मंथन कर रहा है।

दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के साथ अहम बैठक

सिद्दरमैया और डीके शिवकुमार ने दिल्ली पहुंचकर मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मुलाकात की। बैठकों में नई कैबिनेट, संगठनात्मक संतुलन और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई।

डीके शिवकुमार के नेतृत्व पर नजर

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस अब कर्नाटक में नए नेतृत्व के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। डीके शिवकुमार को संगठन और सत्ता दोनों में मजबूत चेहरा माना जा रहा है।

नई कैबिनेट गठन पर मंथन

सूत्रों के अनुसार नई सरकार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाए रखने को लेकर भी चर्चा हुई। पार्टी चाहती है कि सत्ता परिवर्तन के बाद किसी तरह का अंदरूनी असंतोष सामने न आए।

कांग्रेस की चुनौतियां खत्म या नई शुरुआत?

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को कांग्रेस के लिए नई शुरुआत माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असली चुनौती अब सरकार और संगठन के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी।

देशभर की राजनीति पर नजर

कर्नाटक का यह घटनाक्रम राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।

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Fri, 29 May 2026 17:35:52 +0530 news desk MPcg
मरीज के पैर दबाकर बोले मंत्री मुझे फिर विधायक बनाना, MP की राजनीति में बढ़ी हलचल https://citytoday.co.in/6242 https://citytoday.co.in/6242 मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सियासी बयान, शक्ति प्रदर्शन और अंदरूनी खींचतान चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसी बीच एक मंत्री का मरीज के पैर दबाते हुए “मुझे फिर विधायक बनाना” कहना राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बटोर रहा है।

कांग्रेस में तेज हुई CM फेस की चर्चा

प्रदेश में कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर चर्चाएं तेज होती दिखाई दे रही हैं। पार्टी के कई बड़े नेताओं के नाम सामने आने से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।

गोपाल भार्गव को याद आया पुराना गाना

वहीं वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव ने भी अपने अंदाज में राजनीति पर टिप्पणी करते हुए 48 साल पुराना गाना याद किया, जिसकी चर्चा अब राजनीतिक हलकों में हो रही है।

जनता के बीच पहुंचने की कोशिश

प्रदेश के नेताओं द्वारा लगातार जनता के बीच जाकर अलग-अलग अंदाज में संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है। कोई अस्पताल पहुंच रहा है तो कोई जनसभाओं और सामाजिक कार्यक्रमों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है।

MP की राजनीति में बढ़ी हलचल

आने वाले चुनावों को देखते हुए मध्य प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। बयानबाजी, जनसंपर्क और अंदरूनी समीकरण अब खुलकर सामने आने लगे हैं।

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Fri, 29 May 2026 17:24:28 +0530 news desk MPcg
हिमाचल पंचायत चुनाव: ऊना की बदोली में रजत बने प्रधान, कुसमा ने हरोट में दर्ज की जीत https://citytoday.co.in/6213 https://citytoday.co.in/6213 हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के दूसरे चरण की मतगणना पूरी हो गई है, जिसके बाद ऊना और कांगड़ा जिलों की कई पंचायतों में नए प्रधान और उपप्रधान चुन लिए गए हैं। परिणाम घोषित होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में जीत-हार को लेकर हलचल तेज हो गई है।

 ऊना की बदोली पंचायत में रजत की जीत

जिला ऊना की बदोली पंचायत से रजत कुमार ने प्रधान पद का चुनाव जीत लिया है। उन्हें 380 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी अश्विनी कुमार को 280 वोट प्राप्त हुए। इस तरह रजत ने 100 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

उपप्रधान पद पर सत प्रकाश विजयी

इसी पंचायत में उपप्रधान पद पर सत प्रकाश ने जीत हासिल की। उन्हें 354 वोट मिले, जबकि सुरेश कुमार को 304 वोट प्राप्त हुए। सत प्रकाश ने 50 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

 कांगड़ा की जैंद पंचायत में नीलम बनीं प्रधान

लंबागांव ब्लॉक की जैंद पंचायत में नीलम कुमार ने प्रधान पद पर जीत दर्ज की। उन्होंने 540 में से 240 वोट हासिल किए, जबकि बलवीर सिंह उपप्रधान पद पर विजयी रहे।

हरोट पंचायत में कुसमा देवी की जीत

हरोट पंचायत में कुसमा देवी ने 201 वोट प्राप्त कर प्रधान पद का चुनाव जीता। कुलजीत चंद उपप्रधान बने।

अन्य पंचायतों में भी परिणाम घोषित

मोलग पंचायत में सपना देवी प्रधान चुनी गईं, जबकि ब्रह्मपुर पंचायत में जरनैल सिंह उपप्रधान पद पर विजयी रहे। कुल मिलाकर कई पंचायतों में नए प्रतिनिधियों का चयन हुआ है।

 ग्रामीण राजनीति में बदलाव

इन परिणामों से साफ है कि ग्रामीण राजनीति में नए चेहरे उभरकर सामने आए हैं और मतदाताओं ने बदलाव के संकेत दिए हैं।

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Thu, 28 May 2026 18:50:14 +0530 news desk MPcg
भाजपा का बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, दिल्ली&पंजाब&हरियाणा और त्रिपुरा में नए प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा https://citytoday.co.in/6188 https://citytoday.co.in/6188 भाजपा का बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, दिल्ली-पंजाब-हरियाणा और त्रिपुरा में नए प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा बीजेपी ने चार राज्यों में बदले प्रदेश अध्यक्ष, कई नए चेहरों को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और त्रिपुरा में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की है। इस फैसले को आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

दिल्ली में हर्ष मल्होत्रा को मिली कमान

हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे पूर्वी दिल्ली से सांसद हैं और केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री भी रह चुके हैं।

 पंजाब और त्रिपुरा में भी नई नियुक्तियां

पंजाब में केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि त्रिपुरा में अभिषेक देबरॉय को यह जिम्मेदारी दी गई है।

हरियाणा में महिला नेतृत्व को मौका

हरियाणा भाजपा की कमान अब अर्चना गुप्ता को सौंपी गई है। यह पहली बार है जब हरियाणा में किसी महिला को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।

संगठनात्मक रणनीति का अहम कदम

पार्टी के इस फैसले को आगामी चुनावों और संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। नए नेतृत्व से राज्यों में पार्टी की पकड़ और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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Thu, 28 May 2026 15:26:31 +0530 news desk MPcg
कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक बदलाव, सिद्दरमैया ने दिया इस्तीफा, डीके शिवकुमार बनेंगे नए मुख्यमंत्री https://citytoday.co.in/6174 https://citytoday.co.in/6174 र्नाटक में बड़ा राजनीतिक बदलाव, सिद्दरमैया ने इस्तीफे का किया एलान, डीके शिवकुमार बनेंगे नए मुख्यमंत्री बेंगलुरु में ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद फैसला, दोपहर 3 बजे इस्तीफा देने की घोषणा

कर्नाटक की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Siddaramaiah ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया है। बेंगलुरु स्थित मुख्यमंत्री आवास पर कैबिनेट सहयोगियों के साथ हुई नाश्ते की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।

डीके शिवकुमार होंगे नए मुख्यमंत्री

सूत्रों के अनुसार, D. K. Shivakumar को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने स्वयं यह संकेत दिया कि वह दोपहर 3 बजे लोकभवन जाकर औपचारिक रूप से इस्तीफा सौंपेंगे।

पार्टी आलाकमान के निर्देश के बाद फैसला

सीएम कार्यालय (CMO) से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन का निर्देश दिया था। इसी के बाद यह फैसला सामने आया। चर्चा यह भी है कि यह संकेत शीर्ष नेतृत्व, संभवतः पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से आया।

राज्यपाल से मुलाकात की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है, हालांकि राजभवन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अभी तक कोई औपचारिक समय तय नहीं हुआ है। राज्यपाल Thawar Chand Gehlot इस समय अपने निजी दौरे पर इंदौर में हैं।

 राजनीतिक हलचल तेज, कांग्रेस में नया समीकरण

इस फैसले के बाद कर्नाटक कांग्रेस में राजनीतिक समीकरण बदलते दिख रहे हैं। पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं को अब अंतिम रूप मिल गया है। आने वाले दिनों में नई सरकार के गठन और मंत्रिमंडल विस्तार पर भी चर्चा तेज होने की संभावना है।

 राहुल गांधी के संदेश से जुड़ रहा फैसला

सूत्रों के मुताबिक, इस निर्णय को पार्टी नेतृत्व के शीर्ष स्तर, संभवतः Rahul Gandhi से आए संकेतों से भी जोड़ा जा रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि कर्नाटक में नई सरकार किस तरह से आगे का राजनीतिक और प्रशासनिक रोडमैप तय करती है।

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Thu, 28 May 2026 12:57:06 +0530 news desk MPcg
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा भूचाल, मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने इस्तीफे का किया एलान, नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज https://citytoday.co.in/6165 https://citytoday.co.in/6165 कर्नाटक की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम उपशीर्षक: मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने इस्तीफे का लिया फैसला, राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज

कर्नाटक की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब Siddaramaiah ने इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। बेंगलुरु स्थित मुख्यमंत्री आवास पर सुबह कैबिनेट सहयोगियों के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद यह निर्णय सामने आया। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों को स्पष्ट रूप से बता दिया है कि वे पद छोड़ने जा रहे हैं और आज दोपहर 3 बजे लोकभवन जा सकते हैं।

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस नेतृत्व स्तर पर कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा चल रही थी। माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान ने संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाने का संकेत दिया था। इसी के बाद मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने इस्तीफे का निर्णय लिया।

हालांकि, राजभवन से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि अभी तक राज्यपाल Thawar Chand Gehlot से मुख्यमंत्री की मुलाकात का समय तय नहीं हुआ है। जानकारी के मुताबिक, राज्यपाल निजी कारणों से अपने गृह नगर इंदौर गए हुए हैं। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह चर्चा और तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में राज्य की सत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी और एआईसीसी महासचिव Randeep Singh Surjewala ने मीडिया से किसी भी तरह की अटकलों से बचने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी ने अभी तक विधायक दल की कोई बैठक नहीं बुलाई है और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर आधिकारिक रूप से कोई घोषणा नहीं की गई है।

सिद्दरमैया के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के भीतर नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नया नेतृत्व तय कर सकती है।

अब पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस आलाकमान अगला फैसला क्या लेता है और कर्नाटक का नया मुख्यमंत्री कौन होगा।

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Thu, 28 May 2026 11:55:36 +0530 news desk MPcg
धनबाद भाजपा में मोबाइल विवाद के बाद बड़ा एक्शन, महानगर उपाध्यक्ष पद से हटाए गए धनेश्वर महतो https://citytoday.co.in/6139 https://citytoday.co.in/6139 प्रशिक्षण शिविर में विवाद के बाद संगठन में सख्ती, अनुशासनहीनता पर कार्रवाई प्रशिक्षण शिविर में शुरू हुआ विवाद धनबाद में भाजपा के ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान’ के दौरान मोबाइल फोन को लेकर शुरू हुआ छोटा विवाद अब बड़ा राजनीतिक मामला बन गया है। 23 और 24 मई को आयोजित शिविर में हुई बहस ने पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को भी उजागर कर दिया।

अनुशासनहीनता के आरोप में कार्रवाई

विवाद के बाद पार्टी संगठन ने सख्त रुख अपनाते हुए महानगर उपाध्यक्ष धनेश्वर महतो को पद से हटा दिया है। उन पर अनुशासनहीनता के आरोप लगाए गए हैं।

आंतरिक गुटबाजी पर फिर उठे सवाल

इस घटना के बाद पार्टी के अंदरूनी मतभेद और गुटबाजी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। कार्यकर्ताओं के बीच हुई इस खींचतान ने संगठनात्मक अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशिक्षण अभियान पर असर

पार्टी द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण अभियान का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को वैचारिक और संगठनात्मक रूप से मजबूत करना था, लेकिन इस घटना ने अभियान की छवि पर भी असर डाला है।

संगठन का सख्त संदेश

पार्टी नेतृत्व की ओर से यह संकेत दिया गया है कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आगे भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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Wed, 27 May 2026 14:31:41 +0530 news desk MPcg
लखनऊ में सीएम योगी का तंज ढाई करोड़ की गाड़ी से 45 रुपये का गमला चोरी, कैसी है यह मानसिकता https://citytoday.co.in/6128 https://citytoday.co.in/6128 सीएम योगी ने सुनाया किस्सा लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक दिलचस्प लेकिन गंभीर घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ढाई करोड़ रुपये की गाड़ी रखने वाले व्यक्ति ने 45 रुपये का गमला चोरी कर लिया, जो सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर कैसी मानसिकता है।

चोरी की घटना पर जताई नाराजगी

सीएम योगी ने कहा कि अगर संबंधित व्यक्ति ने 45 रुपये का गमला खरीद लिया होता तो न सिर्फ उसका सम्मान बना रहता, बल्कि शहर की सुंदरता भी प्रभावित नहीं होती। उन्होंने इस तरह की घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

सीसीटीवी फुटेज का जिक्र

मुख्यमंत्री ने बताया कि घटना सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई थी। उन्होंने कहा कि ऐसी तस्वीरें समाज में एक संदेश देती हैं कि छोटे-छोटे गलत फैसले भी बड़ी चर्चा का विषय बन जाते हैं।

मानसिकता पर उठाए सवाल

योगी आदित्यनाथ ने इस घटना के जरिए लोगों की सोच और व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि सार्वजनिक संपत्ति और सामाजिक स्थलों का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

राष्ट्र प्रेरणा स्थल का महत्व

सीएम ने कहा कि राष्ट्र प्रेरणा स्थल केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि यह देश के महान नेताओं से प्रेरणा लेने का स्थान है। ऐसे स्थानों पर अनुशासन और मर्यादा का पालन होना चाहिए।

शहर के विकास का भी जिक्र

अपने संबोधन में उन्होंने लखनऊ में चल रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि शहर में ग्रीन कॉरिडोर, मेट्रो और अन्य जनसुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनका उद्देश्य नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाना

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Wed, 27 May 2026 12:57:32 +0530 news desk MPcg
तमिलनाडु कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक झटका, वी. श्रीनिधि ने पार्टी और पद से दिया इस्तीफा https://citytoday.co.in/6125 https://citytoday.co.in/6125 AIADMK विधायकों की एंट्री से बढ़ा विवाद तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कांग्रेस की राष्ट्रीय युवा विंग की सचिव और सिंगानल्लूर से उम्मीदवार रहीं वी. श्रीनिधि ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने राज्य कांग्रेस संगठन में हलचल मचा दी है।

गठबंधन और फैसलों पर उठाए सवाल

श्रीनिधि ने अपने इस्तीफे के पीछे हाल ही में बने राजनीतिक घटनाक्रमों को मुख्य वजह बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के बाद सहयोगी दलों की रणनीति और फैसले कांग्रेस के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं। खासकर AIADMK के कुछ पूर्व विधायकों के शामिल होने के फैसले पर उन्होंने गंभीर आपत्ति जताई है।

सिद्धांतों से समझौता स्वीकार नहीं

अपने बयान में वी. श्रीनिधि ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से वैचारिक स्पष्टता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की बात करती रही है, लेकिन हाल के घटनाक्रम इन सिद्धांतों से समझौता करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम उनके लिए सिर्फ एक राजनीतिक निर्णय नहीं बल्कि अंतरात्मा की आवाज है।

जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की भावनाओं और संघर्ष को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके अनुसार, शीर्ष नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच दूरी बढ़ती जा रही है, जिससे संगठन के भीतर असंतोष पैदा हो रहा है।

कांग्रेस में बढ़ी आंतरिक हलचल

इस इस्तीफे के बाद तमिलनाडु कांग्रेस में आंतरिक मतभेद और गठबंधन की रणनीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर असर डाल सकती है।

आगे की राजनीतिक दिशा पर नजर

अब सभी की नजर इस बात पर है कि वी. श्रीनिधि आगे किसी अन्य राजनीतिक दल से जुड़ती हैं या स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखती हैं।

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Wed, 27 May 2026 12:29:50 +0530 news desk MPcg
पवन कल्याण का बड़ा बयान, तमिलनाडु में TVK की तेज़ सफलता देखकर बोले मुझे विजय से जलन होती है https://citytoday.co.in/6103 https://citytoday.co.in/6103 तमिलनाडु में TVK की तेजी से बढ़ती सफलता पर डिप्टी सीएम ने जताई प्रतिक्रिया आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अभिनेता पवन कल्याण ने तमिलनाडु की राजनीति और अभिनेता विजय की पार्टी TVK की तेजी से मिल रही सफलता को लेकर एक दिलचस्प बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें विजय की राजनीतिक यात्रा देखकर “जलन” महसूस होती है।

कार्यक्रम में दिया बयान

15 साल की राजनीतिक यात्रा का किया जिक्र पवन कल्याण एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें राजनीति में आगे बढ़ने में लंबा समय लगा, जबकि कुछ लोगों को बहुत तेजी से सफलता मिल गई। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि वे पिछले 15 सालों से राजनीतिक संघर्ष कर रहे हैं, जबकि तमिलनाडु में कुछ लोग बहुत जल्दी लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं।

विजय और TVK पर टिप्पणी

बेफिक्री से मिली सफलता” का किया जिक्र अपने बयान में उन्होंने अभिनेता विजय की पार्टी TVK की ओर इशारा करते हुए कहा कि तमिलनाडु की राजनीति में उन्होंने देखा कि कैसे कटआउट, होलोग्राम और बड़े इवेंट्स के जरिए जनता का ध्यान तेजी से आकर्षित किया गया। उन्होंने कहा कि यह सब देखकर उन्हें हल्की-सी जलन महसूस हुई, हालांकि उनका लहजा पूरी तरह हल्का-फुल्का और व्यंग्यात्मक था।

राजनीतिक हलकों में चर्चा

बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज पवन कल्याण के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे उनके ईमानदार अनुभव के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक व्यंग्य मान रहे हैं।

लंबी राजनीतिक यात्रा का जिक्र

संघर्ष से मिली पहचान पवन कल्याण ने यह भी कहा कि राजनीति में उनकी यात्रा आसान नहीं रही और उन्हें वर्षों तक जमीन पर काम करना पड़ा। इसी अनुभव ने उन्हें आज की स्थिति तक पहुंचाया है।

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Tue, 26 May 2026 13:38:23 +0530 news desk MPcg
INDIA गठबंधन में नई हलचल कुछ दल अंदर, कुछ बाहर, बदलते राजनीतिक समीकरणों ने बढ़ाई सियासी गर्मी https://citytoday.co.in/6080 https://citytoday.co.in/6080 यह राजनीतिक चर्चा देश के विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक से जुड़ी है, जिसमें लोकसभा चुनावों और हाल के विधानसभा चुनावों के बाद नए राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं।

गठबंधन में बदलाव की स्थिति

विधानसभा चुनावों के बाद INDIA ब्लॉक के भीतर स्थिति बदलती दिख रही है। कुछ दलों का रुख गठबंधन के प्रति नरम हुआ है, जबकि कुछ पहले से दूरी बनाए हुए हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और आम आदमी पार्टी (AAP) के रुख में बदलाव की चर्चा है, वहीं कांग्रेस और अन्य सहयोगी दल अपने-अपने राजनीतिक हितों के अनुसार रणनीति तय करते नजर आ रहे हैं।

टीएमसी और ममता बनर्जी का रुख

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में INDIA ब्लॉक की एक बैठक बुलाने की बात कही है। इससे संकेत मिलता है कि टीएमसी पूरी तरह गठबंधन से बाहर नहीं है, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार अपनी भूमिका तय कर रही है।

डीएमके और अन्य दलों की स्थिति

तमिलनाडु की राजनीति में भी बदलाव के संकेत हैं। डीएमके और कांग्रेस के बीच कुछ मतभेदों की खबरें सामने आई हैं, जिसके कारण उनके गठबंधन में बने रहने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी तक किसी भी दल ने आधिकारिक रूप से INDIA ब्लॉक छोड़ने की घोषणा नहीं की है।

कांग्रेस की रणनीति

कांग्रेस पार्टी का दावा है कि चुनावी नतीजों के बाद उसका राजनीतिक प्रभाव बढ़ा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर हैं और विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने की बात कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषण

विशेषज्ञों का मानना है कि INDIA ब्लॉक अभी संक्रमण के दौर में है। विभिन्न क्षेत्रीय दल अपने-अपने राज्यों की राजनीति और चुनावी समीकरणों के अनुसार निर्णय ले रहे हैं। इसलिए गठबंधन में स्थिरता और अस्थिरता दोनों साथ-साथ दिखाई दे रही हैं। फिलहाल INDIA गठबंधन पूरी तरह टूटता या पूरी तरह मजबूत होता नहीं दिख रहा है, बल्कि यह राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदलता हुआ गठबंधन बन गया है, जिसमें हर दल अपने हितों के अनुसार आगे की रणनीति तय कर रहा है।

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Mon, 25 May 2026 15:54:12 +0530 news desk MPcg
पटना और दिल्ली एयरपोर्ट पर नीतीश कुमार को मिल सकती है विशेष एंट्री सुविधा https://citytoday.co.in/6042 https://citytoday.co.in/6042 नीतीश कुमार को केंद्र सरकार की ओर से बड़ा प्रोटोकॉल मिलने की तैयारी है, जिसके तहत उनकी गाड़ी अब सीधे एयरपोर्ट के रनवे तक जा सकेगी। यह सुविधा पहले केवल वर्तमान मुख्यमंत्रियों को दी जाती थी, लेकिन अब पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर भी उन्हें यह विशेष अधिकार दिए जाने की चर्चा है।

पटना और दिल्ली एयरपोर्ट पर विशेष सुविधा

नई व्यवस्था लागू होने के बाद पटना और दिल्ली एयरपोर्ट पर उनकी गाड़ी सीधे विमान या हेलीकॉप्टर तक पहुंच सकेगी। इससे उनके यात्रा प्रोटोकॉल में बड़ी सुविधा जुड़ जाएगी।

हाईलेवल मीटिंग में हुई सहमति

सूत्रों के अनुसार नागर विमानन विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। अब इसे औपचारिक आदेश में बदलने की प्रक्रिया चल रही है, जिसके बाद यह सुविधा लागू हो सकती है।

पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में मिलेगा नया दर्जा

नीतीश कुमार वर्तमान में राज्यसभा सांसद भी हैं और पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते उनके लिए यह विशेष प्रोटोकॉल तैयार किया जा रहा है।

प्रोटोकॉल बदलाव पर चर्चा तेज

इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आदेश जारी होने के बाद यह व्यवस्था तुरंत प्रभाव से लागू हो सकती है।

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Sat, 23 May 2026 15:20:46 +0530 news desk MPcg
संसद में दो&तिहाई बहुमत की तैयारी में BJP, स्टालिन को NDA में लाने की चर्चा तेज https://citytoday.co.in/6024 https://citytoday.co.in/6024 चेन्नई

तमिलनाडु की सत्ता से द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) बाहर हो चुकी है और टीवीके प्रमुख थलपति विजय मुख्यमंत्री हैं. सत्ता के बदलने के साथ ही चेन्नई से लेकर दिल्ली तक की सियासत भी बदलती दिख रही है. डीएमके का साथ छोड़कर कांग्रेस ने विजय सरकार में शामिल हो गई है तो बीजेपी की कोशिश डीएमके के साथ हाथ मिलाने की है.  इस दिशा में सियासी एक्सरसाइज भी शुरू हो गई है। 

दक्षिण के तमिलनाडु की सियासत बदलते ही कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़कर विजय के साथ हो गई. कांग्रेस के इस स्टैंड से एमके स्टालिन को गहरा झटका लगा है, जिसके बाद डीएमके ने विपक्षी इंडिया ब्लॉक से खुद को अलग कर लिया. अब मौके की नजाकत को देखते हुए बीजेपी ने डीएमके को एनडीए का हिस्सा बनाने की कवायद में जुट गई है। 

सूत्रों के मुताबिक एनडीए की नजर डीएमके के 22 लोकसभा सांसदों और राज्यसभा के 8 सांसदों पर है. बताया जा रहा है कि मुद्दों के आधार पर डीएमके से बाहर से समर्थन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, क्योंकि एनडीए संसद में दो-तिहाई बहुमत की तलाश में है। 

डीएमके को एनडीए में लाने का प्लान
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद ही  डीएमके
 ने कांग्रेस से रिश्ता तोड़ लिया है.  डीएमके ने बकायदा लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठने के लिए स्पीकर ओम बिरला को पत्र भी लिखा है. हालांकि, सनातन धर्म के मुद्दे पर डीएमके के सियासी रुख को देखते हुए औपचारिक गठबंधन की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन डीएमके का समर्थन हासिल करने के लिए एक अलग प्लानिंग की जा रही है। 

मोदी सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस और बीआरएस की तरह ही डीएमके भी मुद्दों के आधार पर एनडीए को समर्थन दे सकती है. सूत्रों के मुताबिक, डीएमके में टूट से कोई बड़ा फायदा नहीं होगा, इसलिए सभी 22 सांसदों का समर्थन ज्यादा अहम माना जा रहा है. अटल बिहारी वाजपेयी के समय डीएमके एनडीए का हिस्सा रह चुकी है। 

दो-तिहाई बहुमत का नंबर जुटाने का दांव
बीजेपी संसद में 'दो-तिहाई बहुमत' का जादुई आंकड़ा जुटाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और चौंकाने वाले मिशन पर काम कर रही है. इस मिशन के तह तमिलनाडु की सत्ता से बाहर होने वाली डीएमके को एनडीए के पाले में लाने की है. डीएमके के 22 लोकसभा सांसद और 8 राज्यसभा सांसद है, जिनका समर्थन अगर बीजेपी हासिल कर लेती है तो संसद में दो-तिहाई वाले बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच सकती है। 

हाल ही में संसद में परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान यह साफ हो गया कि साधारण बहुमत होने के बावजूद भाजपा बड़े संवैधानिक बदलावों के लिए दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से थोड़ी दूर रह गई थी। 

वन नेशन-वन इलेक्शन, परिसीमन और न्यायिक सुधार जैसे बड़े ऐतिहासिक फैसलों को बिना किसी संवैधानिक अड़चन के पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन चाहिए। 

एनडीए बहुमत में है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत (360+ सीटें) से दूर है. ऐसे में सांसदों के साथ आने से दो-तिहाई का आंकड़ा बेहद आसान हो जाएगा. ऐसे में बीजेपी की कोशिश है कि डीएमके को किसी न किसी तरह साथ लाया जाए, उससे लिए सीधे हाथ मिलाने के बजाय पर्दे के पीछे से समर्थन हासिल करने की है। 

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Fri, 22 May 2026 20:19:47 +0530 news desk MPcg
ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत, ED केस की सुनवाई 18 अगस्त तक टली https://citytoday.co.in/6012 https://citytoday.co.in/6012 Supreme Court of India ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई फिलहाल टाल दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

क्या है पूरा मामला

यह मामला राजनीतिक रणनीतिकार कंपनी Indian Political Action Committee (I-PAC) और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित दफ्तरों में हुई ED की छापेमारी से जुड़ा है।

ED का आरोप है कि इस साल जनवरी में कथित कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान जब एजेंसी I-PAC के दफ्तर और प्रतीक जैन के ठिकानों पर तलाशी अभियान चला रही थी, तब ममता बनर्जी और कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने वहां पहुंचकर जांच में दखल दिया। एजेंसी का दावा है कि तलाशी के दौरान अधिकारियों को रोका गया और दबाव बनाने की कोशिश की गई।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ

सुनवाई के दौरान जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त तय कर दी।

इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी वर्चुअल माध्यम से पेश हुए। सुनवाई के दौरान अदालत में हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत भी हुई, जब जस्टिस मिश्रा ने पूछा, “मिस्टर कल्याण बनर्जी कहां हैं?” इस पर उन्होंने बताया कि वह वर्चुअली उपस्थित हैं।

ममता बनर्जी ने क्या कहा

अपने जवाबी हलफनामे में ममता बनर्जी ने ED के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वह केवल पार्टी से जुड़े संवेदनशील राजनीतिक और रणनीतिक डेटा को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से परिसर में गई थीं।

उन्होंने दावा किया कि तलाशी के दौरान 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़ी गोपनीय जानकारी देखी जा रही थी, जिसे सुरक्षित रखना जरूरी था।

पहले क्या टिप्पणी कर चुका है सुप्रीम कोर्ट

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा चल रही जांच में कथित हस्तक्षेप लोकतंत्र और व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है मामला

यह मामला केवल ED की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें केंद्र और राज्य की संस्थाओं के बीच टकराव, राजनीतिक हस्तक्षेप और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता जैसे बड़े मुद्दे भी जुड़े हुए हैं।
अब सबकी नजर 18 अगस्त की अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील और राजनीतिक रूप से चर्चित मामले में आगे की दिशा तय करेगा

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Fri, 22 May 2026 17:33:43 +0530 news desk MPcg
PM मोदी और अमित शाह पर राहुल गांधी के बयान से मचा सियासी तूफान, BJP ने किया जोरदार पलटवार https://citytoday.co.in/5940 https://citytoday.co.in/5940  नई दिल्ली

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखी टिप्पणी की है. राहुल के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया। 

राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली के धुलवारी गांव में वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण किया. इस दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, जब ये आरएसएस कार्यकर्ता आपके सामने आएंगे तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंभी अमित शाह की बात करेंगे तो उनसे आप उसने खुलकर कहिएगा कि आपका प्रधानमंत्री गद्दार है. आपका गृह मंत्री गद्दार है, आपका संगठन गद्दार है, आपने हिंदुस्तान को बेचने को काम किया.  आपने संविधान पर हमला करने का काम किया है. आपने अंबेडकर पर हमला किया। 

पीएम मोदी और अमित शाह पर राहुल का हमला
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखी टिप्पणी की है. इस तीखी टिप्पणी पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया। 

राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, जब ये आरएसएस कार्यकर्ता आपके सामने आएंगे तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह की बात करेंगे, तब आपको उनके मुंह पर कहना होगा कि आपके प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और संगठन (भाजपा) गद्दार हैं, आपने हमारे देश को बेचने का काम किया है. आपने संविधान पर हमला करने का काम किया है. आपने अंबेडकर पर हमला किया. आपने गांधी जी पर आक्रमण किया है, ये बातें आप उनसे खुलकर कह दीजिए। 

राहुल गांधी के बयान पर नितिन नवीन का पलटवार
राहुल के इस बयान पर बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीखा पलटवार किया है. उन्होंने राहुल गांधी के बयान को भारतीय राजनीति की शुचिता और आपसी सम्मान के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही हार की निराशा अब राहुल के स्वभाव और चरित्र में साफ दिखने लगी है। 

नितिन नवीन ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी भारतीय राजनीति के 'राहू'  हैं जो देश के माहौल को गंदा कर रहे हैं.  उन्होंने कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी के पूर्वजों ने हमेशा देश की जमीन को गिरवी रखने का काम किया और कभी सैनिकों का मनोबल नहीं बढ़ाया. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में पूरी सरकार भ्रष्टाचार में डूबी रहती थी, जबकि मोदी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है. आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आतंकवाद पर पूर्ण लगाम लगी है और सेना स्वाभिमान से काम कर रही है। 

राहुल गांधी चुनावी हार के हताश-नितिन नवीन
बीजेपी अध्यक्ष ने राहुल से सवाल करते हुए कहा कि  क्या देश की जमीन सुरक्षित रखना और नक्सलवाद खत्म करना गद्दारी है?. राहुल गांधी आपके पूर्वजों ने इस देश की जमीन को हमेशा गिरवी रखने का काम किया, कभी हमारे सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने का काम नहीं किया, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस देश की जमीन भी सुरक्षित हुई है और देश की जमीन भी मजबूत हुई है. आपके शासन काल में देश की पूरी तरह से अखंड हो गई। 

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस तरह के बयान देकर राजनीतिक विरोधियों से नहीं, बल्कि सीधे भारतीय राज्य और लोकतंत्र से लड़ रहे हैं. भंडारी के अनुसार, ऐसी भाषा केवल पाकिस्तान या उसके द्वारा समर्थित आतंकवादी ही बोल सकते हैं। राहुल गांधी के इस कृत्य से साफ होता है कि वे देश के सभी 140 करोड़ नागरिकों का अपमान कर रहे हैं। 

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Wed, 20 May 2026 20:40:35 +0530 news desk MPcg
उद्धव ठाकरे की सीट पर कांग्रेस की नजर, कैंडिडेट उतारने की तैयारी; विपक्ष में मचा विवाद https://citytoday.co.in/5694 https://citytoday.co.in/5694 मुंबई 
उद्धव ठाकरे ने इस बार विधान परिषद सदस्य न बनने का फैसला लिया है। उनके स्थान पर उद्धव सेना चाहती है कि अंबादास दानवे को सदन में भेजा जाए। उद्धव ठाकरे ऐसे पहले सदस्य थे, जो ठाकरे फैमिली से सदन में पहुंचे थे। इसको लेकर यह भी कहा गया था कि यह गलत परंपरा है और बालासाहेब ठाकरे से अलग है, जो खुद कभी किसी सदन के लिए निर्वाचित नहीं हुए थे। ऐसे में उनके फैसले को खुद को सही करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच जानकारी मिली है कि भले ही उद्धव ठाकरे विधान परिषद के मेंबर नहीं बनना चाहते, लेकिन INDIA अलायंस अब उनके स्थान पर किसी उद्धव सेना के किसी और नेता के नाम पर सहमत नहीं दिख रहा है।

कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि यदि उद्धव ठाकरे खुद सदन नहीं जाएंगे तो फिर वह अपना कैंडिडेट उतार सकती है। महाराष्ट्र में विधान परिषद की कुल 9 सीटें खाली हो रही हैं और इनमें से एक सीट ही विपक्षी गठबंधन जीतने की स्थिति में है। ऐसे में हालात एक अनार सौ बीमार वाले बन रहे हैं। उद्धव ठाकरे बड़े नेता हैं तो उनके आगे कोई दावेदारी नहीं जता रहा था, लेकिन जब वह पैर पीछे हटा रहे हैं तो फिर कांग्रेस की उम्मीदें भी परवान चढ़ने लगी हैं। 2020 में जब उद्धव ठाकरे सीएम बने थे तो एनसीपी और कांग्रेस ने उन्हें विधान परिषद जाने को कहा था। इस तरह सत्ता के लिए तीनों दल एकजुट थे, लेकिन अब विपक्ष में रहने के दौरान एक-एक सीट के लिए संघर्ष की स्थिति बन रही है।

पिछले दिनों कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। उनका कहना था कि वह खुद चुनाव में उतरें। इसके अलावा उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि यदि सेना चीफ खुद नहीं विधान परिषद जाएंगे तो फिर कांग्रेस अपना कैंडिडेट उतारना चाहती है। बुधवार को हर्षवर्धन सकपाल दिल्ली में थे और पार्टी के सीनियर नेताओं से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि उन्होंने हाईकमान से यह मांग की है कि अब उद्धव की खाली हो रही सीट पर कांग्रेस को अपना कैंडिडेट उतारना चाहिए। हालांकि उद्धव सेना ऐलान कर चुकी है कि हम अंबादास दानवे को उद्धव के स्थान पर भेजेंगे।
कांग्रेस बोली- हम उद्धव सेना के खिलाफ उतार सकते हैं कैंडिडेट

ऐसे में यदि कांग्रेस की ओर से अपने कैंडिडेट के लिए दबाव बनाया गया तो तय है कि आपस में खींचतान शुरू हो जाएगी। कांग्रेस की एक दलील यह भी है कि आखिर उद्धव सेना सहयोगी दलों को भरोसे में लिए बिना एकतरफा फैसला कैसे कर सकती है। यही नहीं एक अन्य कांग्रेस नेता भाई जगताप ने तो दानवे के खिलाफ कैंडिडेट ही खड़े करने की बात कर दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में सही राय तो सकपाल रखेंगे, लेकिन मुझे इतनी जानकारी है कि अंबादास दानवे के खिलाफ कांग्रेस अपना कैंडिडेट उतार सकती है। अब यह मामला रोचक होता दिख रहा है क्योंकि विपक्ष में बंटवारा होते देख भाजपा और शिवसेना की ओर से एक अतिरिक्त कैंडिडेट भी उतारा जा सकता है।

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Thu, 30 Apr 2026 14:54:30 +0530 news desk MPcg
AAP को बड़ा झटका, 7 बागी सांसदों की बीजेपी में एंट्री को मिली सभापति की मंजूरी https://citytoday.co.in/5645 https://citytoday.co.in/5645 नई दिल्ली
 राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने सोमवार 27 अप्रैल 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में मर्जर को आधिकारिक मान लिया, जिससे उच्च सदन में अरविंद केजरीवाल की पार्टी के सांसदों की संख्या घटकर तीन रह गई है. इस बदलाव के बाद, राज्यसभा में बीजेपी के सांसदों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है। 

बता दें, राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता वे सात सांसद हैं जिन्होंने विलय किया है. राज्यसभा की वेबसाइट के मुताबिक सातों सांसद बीजेपी की मेंबर लिस्ट के हिस्सा हैं. सूत्रों ने बताया कि सातों सांसदों ने शुक्रवार को राज्यसभा चेयरमैन से अपील की थी कि मर्जर के बाद उन्हें बीजेपी का सांसद माना जाए और इसे मान भी लिया गया। 

वहीं, इससे पहले आम आदमी पार्टी ने रविवार को राज्यसभा चेयरमैन के सामने एक पिटीशन दी थी, जिसमें उन सात सांसदों की मेंबरशिप खत्म करने की मांग की गई थी, जिन्होंने पार्टी बदल ली थी. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने चेयरमैन राधाकृष्णन को एक पिटीशन दी है जिसमें राज्यसभा में पार्टी के उन सात सांसदों को अयोग्य करने की मांग की गई है, जिन्होंने हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में मर्जर का ऐलान किया था। 

बता दें, पिछले शुक्रवार को आप (AAP) को तब झटका लगा जब सात राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में मर्जर का ऐलान कर दिया. उनका आरोप था कि केजरीवाल की पार्टी अपने उसूलों, वैल्यूज और नैतिकता से भटक गई है। 

आप (AAP) के 7 सांसदों के बीजेपी में मर्जर पर राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि कुछ लोग मेरे फैसले के पीछे की वजह पूछ रहे हैं. मैं अपना करियर बनाने नहीं, बल्कि अपना करियर छोड़कर पॉलिटिक्स में आया था. आप अब उन लोगों के हाथ में चली गई है जो अपने फायदे के लिए काम कर रहे हैं. हम कुल 7 सांसदों ने इस पॉलिटिकल पार्टी को छोड़ने का फैसला किया था. मैं आपकी सभी समस्याओं को और भी मेहनत से उठाऊंगा और उनके सॉल्यूशन पर भी काम कर पाऊंगा। 

संजय सिंह का बीजेपी और बागी सांसदों पर हमला
सांसदों के दल बदल पर आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह भड़कते नजर आए थे. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उन्होंने 7 सांसदों का ऐसे आम आदमी पार्टी से अलग होना गैर कानूनी बताया था. संजय सिंह ने राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की बात कही थी. उनका कहना था कि बीजेपी ने नियमों के खिलाफ काम किया. इसके बावजूद, इन सांसदों को बीजेपी में शामिल होने की मंजूरी मिल गई है। आम आदमी पार्टी नेता और पंजाब के सीएम भगवंत मान ने राघव चड्ढा पर भड़कते नजर आए थे. उन्होंने राघव को 'गद्दार' बताया था। 

 

वहीं, आम आदमी पार्टी के 7 बागी सांसदों के बीजेपी में विलय पर पार्टी सांसद संजय सिंह ने कहा कि राज्यसभा चेयरमैन का यह फैसला 7 सांसदों के बीजेपी में मर्जर वाले लेटर पर आधारित है, लेकिन जब चेयरमैन मेरे लेटर पर ध्यान देंगे, जिसमें कहा गया है कि इन सांसदों की सदस्यता सस्पेंड कर दी जानी चाहिए, तो मुझे उम्मीद है कि वह संविधान और डेमोक्रेसी की रक्षा के लिए अपना फैसला देंगे. चेयरमैन के फैसले के बाद हम और बात करेंगे। 

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Mon, 27 Apr 2026 14:35:21 +0530 news desk MPcg
20 साल बाद कुर्सी छोड़ेंगे Nitish Kumar, आखिरी कैबिनेट में दिया बड़ा संदेश https://citytoday.co.in/5516 https://citytoday.co.in/5516 20 साल बाद कुर्सी छोड़ेंगे Nitish Kumar, आखिरी कैबिनेट में दिया बड़ा संदेश !

पटना: Nitish Kumar ने मंगलवार (14 अप्रैल 2026) को मुख्यमंत्री पद छोड़ने से पहले अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक की। बैठक में उन्होंने भावुक संबोधन देते हुए कहा कि बिहार में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान हुए विकास कार्यों का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि राज्य में प्रगति का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

बैठक के बाद Sanjay Singh ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों से नई सरकार में मिल-जुलकर काम करने की अपील की। इस दौरान मंत्रिमंडल के सदस्यों ने पिछले लगभग 20 वर्षों तक राज्य की बागडोर संभालने के लिए नीतीश कुमार का आभार जताया। बैठक के बाद सभी मंत्रियों ने ग्रुप फोटो भी खिंचवाई, जहां माहौल काफी भावुक रहा।

कैबिनेट बैठक में राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने और मंत्रिमंडल भंग करने की सिफारिश भी की गई। तय कार्यक्रम के अनुसार, नीतीश कुमार दोपहर 3:15 बजे अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपेंगे। वहीं, नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला एनडीए विधायक दल की बैठक में शाम 4 बजे होने की संभावना है।

इधर, सियासी हलचल के बीच कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है और राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। बिहार की राजनीति अब नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है, जहां सभी की नजरें अगले मुख्यमंत्री के नाम पर टिकी हैं। 

#nitishkumar #bihar 

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Tue, 14 Apr 2026 12:58:33 +0530 news desk MPcg
राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा& हम अभी नहीं देखेंगे… https://citytoday.co.in/5441 https://citytoday.co.in/5441  लखनऊ । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने फिलहाल इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए गोपनीय रिकॉर्ड की जांच करने से इनकार कर दिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह सुनवाई खुली अदालत के बजाय जज के चेंबर में आयोजित की गई, क्योंकि केंद्र सरकार ने इसे एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बताया था। इससे पहले की सुनवाइयों में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था कि राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से संबंधित शिकायतों पर अब तक क्या प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। इसके बाद अदालत ने स्वयं गृह मंत्रालय से संबंधित सभी मूल रिकॉर्ड तलब किए थे। हालांकि, मंगलवार को जारी आदेश के अनुसार, बेंच ने इन दस्तावेजों का परीक्षण करने से फिलहाल परहेज किया। हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार के अधिकारी रिकॉर्ड के साथ अदालत में उपस्थित थे, लेकिन बेंच ने स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच करने का प्रस्ताव नहीं करती है, इसलिए रिकॉर्ड को नहीं देखा गया। यह पूरी कानूनी प्रक्रिया भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका पर आधारित है। याचिकाकर्ता ने लखनऊ की विशेष एमपी-एमएलए अदालत के 28 जनवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया गया था। निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नागरिक की नागरिकता तय करने का वैधानिक अधिकार उसके कार्यक्षेत्र में नहीं आता है। याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में राहुल गांधी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत जांच की मांग की है। हाईकोर्ट में हुई इस सुनवाई के बाद अब मामले की अगली तारीख 15 अप्रैल तय की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस मामले में गहन जांच की आवश्यकता है, जबकि निचली अदालत ने तकनीकी आधार पर इसे खारिज कर दिया था। अब 15 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि क्या इस मामले में हस्तक्षेप की कोई कानूनी गुंजाइश है या नहीं। फिलहाल, राहुल गांधी के लिए राहत की बात यह है कि उच्च न्यायालय ने केंद्र के रिकॉर्ड पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी या तत्काल जांच शुरू नहीं की है।

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Wed, 08 Apr 2026 15:40:04 +0530 news desk MPcg
पश्चिम बंगाल में गरजे CM Mohan Yadav, बोले– अब जनता करेगी हिसाब ! https://citytoday.co.in/5392 https://citytoday.co.in/5392

पश्चिम बंगाल के Bankura ज़िले में राजनीतिक माहौल तेज होता जा रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) उम्मीदवारों के नामांकन कार्यक्रम में भाग लिया और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

अपने संबोधन में मोहन यादव ने राज्य की Mamata Banerjee सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में वर्तमान सरकार से लोग परेशान हैं और बदलाव की मांग तेज हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठ को बढ़ावा दिया गया है और आम जनता, खासकर हिंदू समुदाय, अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव जनता के लिए “हिसाब चुकता करने का अवसर” है। उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए दावा किया कि इस बार जनता का रुझान भाजपा की ओर है और पार्टी राज्य में मजबूत स्थिति में है।

मोहन यादव ने आगे कहा कि भाजपा विकास, सुरक्षा और सुशासन के मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे घर-घर जाकर पार्टी की नीतियों और योजनाओं को लोगों तक पहुंचाएं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार बड़े नेताओं को चुनाव प्रचार में उतार रही है, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है।

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Thu, 02 Apr 2026 15:59:07 +0530 news desk MPcg
केरल में BJP का बड़ा वादा: गरीबों को साल में 2 मुफ्त LPG सिलेंडर, महिलाओं को मिलेगा BAS कार्ड https://citytoday.co.in/5370 https://citytoday.co.in/5370 केरल

केरल के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को अपन घोषणापत्र जारी किया। इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद रहे। पार्टी ने कई एलान किए हैं। 

भाजपा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा, आज जिस क्षण हम आपको घोषणापत्र देने जा रहे हैं, उसी समय हमें यह भी जानना चाहिए कि अपार प्राकृतिक व मानवीय क्षमता के बावजूद एलडीएफ-यूडीएफ के 17 वर्षों के कुशासन के दौरान केरल में औद्योगिक विकास नगण्य रहा है, जिसके परिणामस्वरूप आर्थिक ठहराव और राजकोषीय कुप्रबंधन हुआ है। 

मैच फिक्सिंग का खेल खेल रहे एलडीएफ-यूडीएफ: नितिन नवीन

नवीन ने कहा, मैं हमेशा कहता हूं कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) केरल की जनता के साथ मैच फिक्सिंग का खेल खेल रहे हैं। उनके 17 वर्षों के शासन में जनता ने इसकी भारी कीमत चुकाई है। उन्होंने सत्ता हथियाने और केवल अपने परिवारों की मदद करने के लिए खेल खेला है और केरल में विकास को इसकी कीमत चुकानी पड़ी है। यूडीएफ और एलडीएफ ने केरल की जनता की प्रगति में कभी रुचि नहीं दिखाई। 

उन्होंने कहा, यह कोई रहस्य नहीं है कि कम्युनिस्ट और कांग्रेस हमेशा एक ही दल में रहे हैं, चाहे पड़ोसी राज्य तमिलनाडु हो या अन्य राज्य। यूपीए सरकार में भी वे गठबंधन सहयोगी थे। लेकिन उन्होंने केरल के बारे में कभी नहीं सोचा। 

भाजपा के घोषणापत्र में क्या-क्या वादे किए गए हैं?

भाजपा के घोषणा पत्र में केरल के लिए एम्स का वादा किया गया है। उन्होंने कहा, दवाइयों और किराने के सामान के लिए ढाई हजार रुपये के मासिक रिचार्ज वाला भक्ष्य आरोग्य सुरक्षा कार्ड दिया जाएगा। घोषणापत्र में जरूरतमंद महिलाओं, विधवाओं और 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को प्रति माह 3,000 रुपये की कल्याणकारी पेंशन देने का वादा किया गया है। इसके अलावा, भाजपा घोषणापत्र में तिरुवनंतपुरम को कन्नूर से जोड़ने वाले हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का वादा भी किया गया है।

'नागरिक सर्वोपरि की अवधारणा को साकार करेंगे'

भाजपा प्रमुख ने कहा, हम नागरिक सर्वोपरि की अवधारणा को साकार करेंगे। केरल के सभी 36 लाख लोगों को समान अधिकार, समान न्याय और विकास का समान अधिकार प्राप्त होगा। 

'गरीब परिवारों को प्रति वर्ष दो एलपीजी सिलिंडर प्रदान करेंगे'

नवीन ने एलान करते हुए कहा, हम केरल के गरीब परिवारों को प्रति वर्ष दो मुफ्त एलपीजी सिलिंडर प्रदान करेंगे- एक ओणम के दौरान और एक क्रिसमस के दौरान। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए उनकी आय सीमा बढ़ाकर आठ लाख रुपये की जाएगा। हम  यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक परिवार को प्रति माह 20 हजार लीटर पानी मुख्त उपलब्ध कराया जाए।  

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Tue, 31 Mar 2026 20:17:35 +0530 news desk MPcg
सिलचर में पीएम मोदी का कांग्रेस पर हमला: कहा– उनका काम सिर्फ मोदी को गाली देना और अफवाह फैलाना https://citytoday.co.in/5208 https://citytoday.co.in/5208 कांग्रेस का सिर्फ एक ही काम मोदी को गाली देना, अफवाहें फैलाना गुवाहाटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम दौरे के दूसरे दिन शनिवार को सिलचर में कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में असम के युवाओं को खूब गुमराह किया। उन्हें हिंसा और आतंकवाद के रास्ते पर धकेला। लेकिन आज यह राज्य सुनहरे अवसरों का सागर है। पीएम मोदी ने कहा कि असम सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए रास्ते खोले, युवाओं को स्कॉलरशिप दी। बीजेपी के शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थय सेवा बड़ी जिम्मेदारी रही हैं। असम ने पहले इस बारे में बहुत कुछ झेला है। लेकिन आज असम इन सब सेवाओं का बड़ा हब बनकर सामने आ रहा है। कांग्रेस ने असम को फूट डालो, राज करो नीति में रखा। आज असम खुला आसमान है। असम भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर का अहम हिस्सा बन रहा है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को भुला दिया था, लेकिन बीजेपी की डबल इंजन की सरकार ने असम को सीधे दिल्ली से कनेक्ट किया हैं, जिसकी हर जगह चर्चा है। नॉर्थ ईस्ट आज दक्षिण एशिया जोड़ने वाला सेतु बन रहा है। इसके पहले पीएम मोदी ने सिलचर में 23,550 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि सिचलर को बराक घाटी का गेटवे है। लेकिन कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को दिल्ली से और दिल से दूर रखा था। पीएम मोदी ने कहा कि आज असम मेडिकल कॉलेज, एम्स का सशक्त नेटवर्क बन रहा है। अब हम सभी लोगों को ऐसी हर ताकत को मुंहतोड़ जवाब देना है जो असम को पुराने दौर में ढकेलने की कोशिश करती है। पीएम मोदी ने कहा कि मैं सिलचर को सावधान करता हूं, देश का हर राज्य कांग्रेस को सबक सिखा रहा है। इसलिए कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है। सिलचर ने कांग्रेस को असम से बाहर निकाला है। कांग्रेस खुद हराने की ऐतिहासिक सेंचुरी बनाने वाली है। कांग्रेस के नेता देश को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। देश की राजधानी दिल्ली में इतनी बड़ी एआई समिट सफलतापूर्वक पूरी हुई, दुनियाभर के नेता, टेक्नोलॉजी कंपनी के लीडर दिल्ली आए थे। लेकिन हताश कांग्रेस ने एआई समिट को बदनाम के लिए कपड़ा फाड़ प्रदर्शन किया। पीएम मोदी ने कहा कि पूरे देश ने कांग्रेस के इस कपड़ा फाड़ भद्दे प्रदर्शन की बुराई की। लेकिन दिल्ली का कांग्रेस का सबसे बड़ा परिवार इस भददी हरकत को अपना मेडल मान रहा है। दुनिया में चारों तरफ, हमारे पड़ोस में युद्ध के हालात हैं। इसकारण बनी स्थितियों से निपटने के लिए हमारे देश के नागरिकों के लिए कम से कम मुसीबतें आए, इसके लिए हमारी सरकार दिनरात प्रयास कर रही हैं। इस समय कांग्रेस से उम्मीद थी कि वहां जिम्मेदार राजनैतिक दल की भूमिका निभाए, लेकिन वह एक बार फिर फेल हो गई। कांग्रेस कोशिश में है कि देश में पैनिक पैदा हो और देश मुश्किल में फंस जाए। 10 साल के अंदर हमारी सरकार यहां के किसानों की जेब में सीधे 20,000 करोड़ डाले हैं। कांग्रेस के 10 साल के शासन के दौरान, भले ही प्रधानमंत्री असम से चुने गए थे, लेकिन उन्होंने एक पैसा भी नहीं दिया। जब दुनिया युद्धों का सामना कर रही है। हमारी कोशिश है कि देश के लोगों पर असर कम कर सकें। लेकिन कांग्रेस ज़िम्मेदार राजनीतिक दल न बनकर लोगों के बीच घबराहट फैलाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के पास असम और देश के लिए कोई विजन नहीं है, वे बस मोदी को गाली देना, अफवाहें फैलाना और लोगों को गुमराह करने के लिए झूठ बोलना जानते हैं।

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Sat, 14 Mar 2026 17:29:36 +0530 news desk MPcg
MP राज्य अधिवक्ता परिषद चुनाव का ऐलान: 12 मई को वोटिंग, 16 जून से मतगणना https://citytoday.co.in/5164 https://citytoday.co.in/5164 इंदौर
राज्य अधिवक्ता परिषद के पांच साल में एक बार होने वाले चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके अनुसार पूरे प्रदेश में 12 मई 2026 को एक साथ मतदान कराया जाएगा, जबकि मतगणना 16 जून 2026 से शुरू होगी। कार्यकारिणी सदस्य के कुल 25 पदों में से इस बार सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें से पांच पदों पर चुनाव होगा, जबकि दो पदों पर मनोनयन किया जाएगा। इस चुनाव में प्रदेशभर के लगभग 87 हजार वकील हिस्सा लेंगे।

राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव के लिए प्रारंभिक मतदाता सूची 16 मार्च 2026 को जारी की जाएगी। इस सूची को लेकर 24 मार्च 2026 तक दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकेंगी। इसके बाद एक अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी। मतदान का अधिकार केवल उन्हीं वकीलों को मिलेगा, जिन्होंने निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अपना सत्यापन करा लिया है।
 
नामांकन के लिए तीन दिन का समय
प्रत्याशियों को नामांकन फार्म जमा करने के लिए तीन दिन का समय मिलेगा। आठ, नौ और दस अप्रैल को नामांकन फार्म जमा किए जा सकेंगे। 15 और 16 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। वहीं 20 से 22 अप्रैल शाम चार बजे तक नाम वापस लिया जा सकेगा। 22 अप्रैल 2026 को शाम पांच बजे प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी।

दो महीने से अधिक चलती है मतगणना
मतदान के बाद सभी मतपेटियों को सीलबंद कर जबलपुर भेजा जाएगा। वहां 16 जून 2026 से मतगणना शुरू होगी। आमतौर पर राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव की मतगणना लगभग दो महीने तक चलती है।

महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी
इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना तय है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 25 में से सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। पिछली कार्यकारिणी में 25 सदस्यों में से केवल एक महिला थी, लेकिन इस बार यह संख्या सात तक पहुंच जाएगी।

प्रत्याशियों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा चुनाव
पिछले चुनाव की तुलना में इस बार चुनाव अधिक चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसका कारण यह है कि पुरुष प्रत्याशियों के लिए 25 के बजाय सिर्फ 18 पद ही उपलब्ध होंगे। अनुमान के अनुसार प्रथम वरीयता के लगभग 2500 मत पाने वाले प्रत्याशी खुद को सुरक्षित स्थिति में मान सकते हैं।

इंदौर से 30 से ज्यादा संभावित प्रत्याशी
नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही संभावित प्रत्याशियों ने प्रचार शुरू कर दिया है। इंटरनेट मीडिया के साथ-साथ प्रत्यक्ष संपर्क के माध्यम से भी प्रचार किया जा रहा है। प्रत्याशी वकीलों के कार्यालयों और घरों तक पहुंचकर प्रथम वरीयता का मत देने की अपील कर रहे हैं। इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव में अकेले इंदौर से 30 से अधिक प्रत्याशियों के मैदान में उतरने की तैयारी है, जिनमें वर्तमान कार्यकारिणी के पांच सदस्य भी शामिल हैं।

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Tue, 10 Mar 2026 14:04:05 +0530 news desk MPcg
राहुल गांधी ने पीएम मोदी को घेरा और बोले & दो दबाव में पीएम ने किया ट्रेड डील https://citytoday.co.in/5057 https://citytoday.co.in/5057 Wed, 25 Feb 2026 15:10:00 +0530 news desk MPcg स्पीकर ओम बिरला के AI वीडियो पर कांग्रेस मीडिया सेल को नोटिस, सुप्रिया श्रीनेत समेत 8 से मांगा जवाब https://citytoday.co.in/5022 https://citytoday.co.in/5022 Thu, 19 Feb 2026 17:40:13 +0530 news desk MPcg यूपी बजट 2026&27: ₹9.12 लाख करोड़ का ऐतिहासिक खाका, ‘वन ट्रिलियन डॉलर’ अर्थव्यवस्था की ओर बड़ा कदम https://citytoday.co.in/4960 https://citytoday.co.in/4960 Wed, 11 Feb 2026 17:16:10 +0530 news desk MPcg बच्चों के बीच उमड़ा ‘बाबा’ का बालप्रेम, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड के अपने पैतृक गांव पंचूर में किया रात्रि विश्राम https://citytoday.co.in/4944 https://citytoday.co.in/4944 Sat, 07 Feb 2026 15:58:04 +0530 news desk MPcg अभ्युदय योजना से जुड़े 77 अभ्यर्थी यूपीपीसीएस&2024 मुख्य परीक्षा में सफल https://citytoday.co.in/4932 https://citytoday.co.in/4932 Thu, 05 Feb 2026 20:13:56 +0530 news desk MPcg आज तिरुवनंतपुरम में भारत vs न्यूजीलैंड पांचवां टी20, जानें प्लेइंग इलेवन, पिच रिपोर्ट और मैच प्रिडिक्शन https://citytoday.co.in/4886 https://citytoday.co.in/4886 Sat, 31 Jan 2026 17:48:13 +0530 news desk MPcg पश्चिम बंगाल: ताज़ा सर्वे आया, अगर आज चुनाव होते तो ममता या भाजपा में से कौन जीतता? https://citytoday.co.in/4874 https://citytoday.co.in/4874 Fri, 30 Jan 2026 13:10:16 +0530 news desk MPcg ट्रंप के खिलाफ 57 मुस्लिम देशों के साथ आया चीन, ‘जंगल का कानून नहीं लौटने देंगे’ https://citytoday.co.in/4855 https://citytoday.co.in/4855 Tue, 27 Jan 2026 16:52:18 +0530 news desk MPcg भोपाल को भारत का सबसे सुरक्षित शहर बनाने की पहल, ‘अराइव अलाइव इंडिया रोड सेफ्टी समिट 2026’ में सामूहिक संकल्प https://citytoday.co.in/4811 https://citytoday.co.in/4811 Sat, 17 Jan 2026 20:22:44 +0530 news desk MPcg BMC चुनाव परिणाम: BJP–शिंदे गुट को बहुमत, 4 सीटों से सत्ता पर मजबूत पकड़ https://citytoday.co.in/4806 https://citytoday.co.in/4806 Sat, 17 Jan 2026 14:43:32 +0530 news desk MPcg ED बनाम ममता बनर्जी मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट हंगामे पर सख्त टिप्पणी https://citytoday.co.in/4793 https://citytoday.co.in/4793 Thu, 15 Jan 2026 17:43:21 +0530 news desk MPcg बंगाल चुनाव से पहले ED का बड़ा एक्शन, I&PAC दफ्तर पर छापे से सियासी भूचाल https://citytoday.co.in/4770 https://citytoday.co.in/4770 Fri, 09 Jan 2026 13:10:30 +0530 news desk MPcg ट्रंप का बड़ा फैसला: रूस प्रतिबंध बिल को हरी झंडी, भारत पर 500% टैरिफ का खतरा https://citytoday.co.in/4766 https://citytoday.co.in/4766 Thu, 08 Jan 2026 13:59:40 +0530 news desk MPcg प्रदेश के विकास की गति अब होगी और भी तेज : मुख्यमंत्री डॉ. यादव https://citytoday.co.in/4745 https://citytoday.co.in/4745 Fri, 02 Jan 2026 20:09:09 +0530 news desk MPcg भारत&पाक सीजफायर पर चीन के दावे से मचा सियासी घमासान, कांग्रेस ने सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब https://citytoday.co.in/4738 https://citytoday.co.in/4738 नई दिल्ली 
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर अभी तक सिर्फ अमेरिका दावा कर रहा था, लेकिन अब चीन ने भी अपना दावा ठोक दिया है। इस बीच कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता संबंधी चीन का दावा चिंताजनक है और ऐसे में सरकार के स्तर पर इसमें स्पष्टता आनी चाहिए।

जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने 10 मई, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया था। वह यह दावा कम से कम सात अलग-अलग देशों में, विभिन्न मंचों पर, 65 बार कर चुके हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तथाकथित अच्छे मित्र द्वारा किए गए इन दावों पर आज तक अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है।

जयराम रमेश का कहना है, "अब चीन के विदेश मंत्री भी ऐसा ही दावा कर रहे हैं और कह रहे हैं कि चीन ने भी मध्यस्थता की थी। 4 जुलाई 2025 को सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत असल में चीन का सामना कर रहा था और उससे लड़ रहा था।"

कांग्रेस नेता के अनुसार, चीन निर्णायक रूप से पाकिस्तान के साथ खड़ा था, ऐसे में भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के चीन के दावे चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक सिर्फ इसलिए नहीं कि यह देश की जनता को अब तक बताई गई बातों के उलट हैं, बल्कि इसलिए भी कि यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का मजाक बनाता प्रतीत होता है।

कांग्रेस नेता ने कहा, "इस दावे को चीन के साथ हमारे संबंधों के संदर्भ में भी समझा जाना चाहिए। हमने चीन के साथ फिर से बातचीत शुरू की है, लेकिन दुर्भाग्यवश यह बातचीत चीन की शर्तों पर हो रही है। 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री द्वारा चीन को दी गई क्लीन चिट ने भारत की बातचीत की स्थिति को काफ़ी कमज़ोर कर दिया है। हमारा व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर है और हमारे निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन से होने वाले आयात पर निर्भर है। अरुणाचल प्रदेश के संबंध में चीन की उकसाने वाली हरकतें लगातार जारी हैं। " उन्होंने कहा कि ऐसे एकतरफा और शत्रुतापूर्ण संबंधों के बीच, भारत की जनता को यह स्पष्टता चाहिए कि ऑपरेशन सिंदूर को अचानक रोकने में चीन ने क्या भूमिका निभाई।

आपको बता दें कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उन प्रमुख मुद्दों में रहा जिन्हें चीन की मध्यस्थता से हल किया गया। भारत का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 7-10 मई के संघर्ष को दोनों देशों की सेनाओं के डीजीएमओ (सैन्य संचालन महानिदेशक) के बीच सीधी बातचीत के माध्यम से हल किया गया था। भारत यह भी लगातार कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान से संबंधित मामलों में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है।

 

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Wed, 31 Dec 2025 19:39:15 +0530 news desk MPcg
दिग्विजय सिंह का कांग्रेस से सवाल: RSS नहीं तो किससे सीखोगे? साथी दल शिवसेना का नाम लिया https://citytoday.co.in/4725 https://citytoday.co.in/4725 भोपाल 

BMC यानी बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस में तनातनी जारी है। अब उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाले दल ने कांग्रेस को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से सीख लेने की सलाह दी है। खास बात है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की तरफ से हाल ही में आरएसएस की तारीफ की गई थी, जिसपर पार्टी के कई नेताओं ने आपत्ति जताई थी।

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा, 'आरएसएस पूरे देश में 60-70 लाख स्वयं सेवकों के माध्यम से देश की सेवा कर रहा है। हालांकि, वो राजनीति में सक्रिय नहीं होते, लेकिन पीछे से राजनीतिक दलों की मदद करते हैं। हम तो यही कहेंगे कि आरएसएस का जो संगठन है, जो अनुशासन है, मातृभूमि के प्रति जो समर्पण है, उससे कांग्रेस को सीखना चाहिए। दिग्विजय सिंह वही बात कर रहे हैं, जो सब बात करते हैं।'

इस दौरान उन्होंने संघ की जमकर तारीफ की। दुबे ने कहा, 'देखिए आरएसएस देश की परंपरा चलाने वाली, धरोहर चलाने वाली सांस्कृतिक संगठन है। तो उसके जैसा कौन बन पाएगा। जो नरेंद्र मोदी जी को उठाकर प्रधानमंत्री बना सकती है संगठन। जो सारे बड़े बड़े हिन्दुत्व के आंदोलन में आगे रहती है। हमारी शिवसेना के भी साथ आंदोलन में भी आरएसएस साथ रहती है।'

उन्होंने कहा, 'ऐसी आरएसएस से कांग्रेस नहीं सीखेगी, तो क्या कांग्रेस से कांग्रेस सीखेगी। जहां खुद ही नहीं पता कि कांग्रेस में क्या अनुशासन है, क्या रणनीति है, क्या उनकी बैठकें हैं, कौन कहां गठबंधन करेगा, कौन क्या बनाएगा। कुछ पता ही नहीं है। सब राम भरोसा चल रहे हो आप।'
दिग्विजय ने क्या कहा

दिग्विजय सिंह ने शनिवार को आरएसएस-भाजपा की संगठनात्मक शक्ति की सराहना करते एक पुरानी तस्वीर साझा की थी। फोटो में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगे की तरफ नीचे बैठे हुए हैं तथा उनके पीछे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं।

सिंह ने पोस्ट किया, 'कोरा वेबसाइट पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सियाराम।'

विवाद खड़ा होने पर सिंह ने कहा कि उन्होंने केवल संगठन और इसकी शक्ति की तारीफ की है, अन्यथा वह आरएसएस और मोदी के घोर विरोधी हैं।

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Mon, 29 Dec 2025 20:02:39 +0530 news desk MPcg
बंगाल में राजनीति गर्माई, हुमायूं कबीर और 3 मुस्लिम नेताओं ने ममता के लिए बढ़ाया पारा https://citytoday.co.in/4706 https://citytoday.co.in/4706

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल की राजनीति तेजी से गरमा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होना है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यहां सत्ता बचाने की चुनौती है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) यहां पहली बार सरकार बनाने तमन्ना लिए बैठी है। इस सबके बीच चुनावी बिसात पर बागी विधायक हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी की दिक्कतें बढ़ा दी है। कबीर के एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन औवेसी और इंडिया सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) के प्रमुख पीरजादा अब्बास सिद्दीकी से संपर्क साधने से राज्य की राजनीति में गरमाहट आ गई है।

दूसरी तरफ तो भाजपा ने अपने मजबूत बूथ प्रबंधन से बदलाव की स्थिति बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच लगभग सीधा मुकाबला है। कांग्रेस और तीन दशक तक राज्य में सत्ता पर काबिज रही माकपा और उसके सहयोगी दल हाशिए पर जा चुके हैं। ऐसे में तृणमूल से बाहर निकले हुमायूं तीसरी ताकत के रूप में उभरने की कोशिश में है। हालांकि वह अकेले एक क्षेत्र विशेष तक सीमित है पर यदि उनको औवेसी व पीरजादा का साथ मिला तो कई सीटों पर समीकरण प्रभावित कर सकते हैं।

तीन मुस्लिम नेता एक साथ

औवेसी ने हाल में बिहार में जो सफलता हासिल की है उससे साफ हुआ है कि मुस्लिम मतदाताओं ने इस पार्टी को स्वीकार करना शुरू कर दिया है। आईएसएफ ने पिछले चुनाव में ही अपनी स्थिति साफ कर दी थी, जब उसने एक सीट जीत ली थी। ऐसे में अगर तीन प्रमुख मुस्लिम नेता एक मंच पर आते हैं तो मुसलमानों के बीच वह अपनी पैठ बढ़ा सकते हैं।

ध्रुवीकरण से ममता को नुकसान

बंगाल की लगभग 30% मुस्लिम आबादी है। हुमायूं कबीर जिस तरह से माहौल बना रहे हैं उसमें वह अगर मुस्लिम मतों का थोड़ा भी ध्रुवीकरण करने में सफल रहते हैं तो ममता बनर्जी को काफी नुकसान हो सकता है। इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।

भाजपा विधायक भी मैदान में डटे

भाजपा ने तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी अपना विस्तार किया है। उसके विधायक मैदान में डटे रहे हैं। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व पहले से ही आक्रामक और राज्य की मौजूदा स्थितियों में और ज्यादा आक्रामकता दिखाकर ममता बनर्जी की दिक्कतें बढ़ाएगा। पिछली बार भाजपा अपने बूथ प्रबंधन में कमजोर रही थी, इसलिए पार्टी ने इस बार पूरा जोर बूथ प्रबंधन पर लगाया है।

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Fri, 26 Dec 2025 16:12:05 +0530 news desk MPcg
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने रायपुर में की धर्मांतरण पर चिंता व्यक्त, कहा& भारत में कैंसर से भी ज्यादा खतरनाक https://citytoday.co.in/4695 https://citytoday.co.in/4695 रायपुर

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आज भिलाई में पंच दिवसीय हनुमंत कथा करने छत्तीसगढ़ पहुंचे. रायपुर एयर पोर्ट पर उतरते ही उन्होंने पत्रकारों से चर्चा के दौरान धर्मांतरण को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत में कैंस से बड़ा खतरा धर्मांतरण है.

बता दें, भिलाई में आज से पंच दिवसीय हनुमंत कथा का आयोजन किया जा रहा है. इस दौरान एक दिवसीय दिव्य दरबार भी लगाया जाएगा. इस दौरान उन्होंने कहा कि हम भारत में एक संदेश देना चाहते हैं कि यदि भारत में बांगलादेश जैसी स्थिति नहीं चाहते, तो यही समया है, सही समय है. अगर हिन्दू एकजुट नहीं हुआ, तो वह दिन दूर नहीं… जो बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हुआ, वह भारत देश और छत्तीसगढ़ के चौक-चौराहों में देखा न जाए.

पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कांकेर में धर्मांतरण पर मचे बवाल को लेकर भी बयान दिया है. उन्होंने कहा कि कांकेर में जो हुआ, वह अच्छा नहीं हुआ. लेकिन हिंदुओं ने एकता दिखाई उसके लिए धन्यवाद !  उन्होंने आगे कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में शांति और उन्नति हो… भारत विश्व गुरु बने. अंत में उन्होंने कहा कि जबतक भारत हिन्दू राष्ट्र नहीं बन जाएगा, तब तक हम यात्रा करते रहेंगे.

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Thu, 25 Dec 2025 19:23:41 +0530 news desk MPcg
उद्धव–राज गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार: आखिरी वक्त पर टला ऐलान, ‘ठाकरे ब्रांड’ की अग्निपरीक्षा https://citytoday.co.in/4667 https://citytoday.co.in/4667 मुंबई 

महाराष्ट्र में 288 नगर परिषद और नगर पंचायत के चुनाव नतीजे 'ब्रांड ठाकरे' के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है. यही वजह है कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे आपसी दुश्मनी भुलाकर एक साथ मिलकर बीएमसी सहित 29 नगर निगम के चुनाव लड़ने का फैसला किया है, लेकिन अचानक एक मोड़ आ गया. उद्धव की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की मनसे के गठबंधन का औपचारिक ऐलान मंगलवार को टल गया है.

उद्धव ठाकरे भले ही 2019 में बीजेपी से अलग होकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो गए थे, लेकिन शिवसेना और 'ब्रांड ठाकरे' को बचाकर नहीं रख पाए. एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर उद्धव ठाकरे की सारी सियासत खत्म कर दी है. पहले विधानसभा की सियासी बाजी अपने नाम की और अब नगर परिषद व नगर पंचायत के चुनाव जीतकर उद्धव के लिए सियासी संकट खड़ा कर दिया है.

महाराष्ट्र के 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायत के लिए हुए चुनाव में 70 प्रतिशत से अधिक नगर अध्यक्ष बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति के जीतकर आए हैं. उद्धव ठाकरे की शिवसेना सिंगल डिजिट में सीमित रह गई तो राज ठाकरे की पार्टी का खाता नहीं खुला.

अब बीएमसी सहित 29 नगर निगम का चुनाव 'ठाकरे ब्रांड' का फाइनल इम्तिहान उद्धव के लिए बन गया है. मुंबई के बीएमसी पर ठाकरे परिवार का करीब 30 साल कब्जा है, जिसको बचाने के लिए 20 साल का सियासी दुश्मनी को भुलाकर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने हाथ मिलाया है, लेकिन लगता है कि उसमें ग्रहण लग गया है. 

बीएमसी चुनाव के लिए नामांकन शुरू

बीएमसी सहित राज्य की 29 नगर निगम चुनाव के लिए मंगलवार से अधिसूचना जारी हो रही जिसके साथ नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. नामांकन पत्र भरने की अंतिम तारीख 30 दिसंबर है. इसके बाद 31 दिसंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी जबकि 2 जनवरी 2026 तक नाम वापस लेने की अंतिम तारीख है. इसके बाद चुनाव चिन्ह का आवंटन किया जाएगा.

महाराष्ट्र में बीएमसी सहित सभी 29 नगर निगम के कुल 2869 पार्षद सीटों पर 15 जनवरी को मतदान होगा जबकि नतीजे 16 जनवरी को आएंगे. बीएमसी के अलावा, जिन नगर निगम में चुनाव है, उसमें नवी मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक, नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर, वसई-विरार, कल्याण-डोंबिवली, कोल्हापुर, उल्हासनगर, पिंपरी-चिंचवड, सोलापुर, अमरावती, अकोला, लातूर, परभणी, चंद्रपुर, भिवंडी-निजामपुर, मालेगांव, पनवेल, मीरा-भायंदर, नांदेड़-वाघाला, सांगली-मिराज, कुपवाड, जलगांव, धुले, अहिल्यानगर, इचलकरंजी और जालना शामिल हैं.

'ठाकरे ब्रदर्स' के बीच गठबंधन पर सस्पेंस

बीजेपी ने बीएमसी और बाकी के नगर निगम चुनाव एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ मिलकर लड़ने का फैसला किया है. बीजेपी ने अजित पवार के साथ 'फ्रेंडली फाइट' करने की प्लानिंग की है. महायुति की रणनीति को देखते हुए 'ठाकरे ब्रदर्स' ने 20 साल पुरानी राजनीतिक रंजिश को भुलाकर एक साथ आने का फैसला किया ताकि बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना की जोड़ी से दो-दो हाथ कर सकें.

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच बीएमसी सहित राज्य के बाकी नगर निगम चुनाव के लिए सीटों का बंटवारे पर सहमति बन गई थी. ऐसे में माना जा रहा था कि मंगलवार को शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के गठबंधन का औपचारिक ऐलान होना होगा. 

शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के बीच गठबंधन का आधिकारिक ऐलान वर्ली स्थित एनएससीआई डोम में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए किए जाने की संभावना खी. इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा थे, लेकिन अचानक कैंसिल हो गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्या वजह है कि प्रेस कॉफ्रेंस को टालना पड़ा.

सीट शेयरिंग तय हो गई थी, फिर क्या हुआ

एमएनएस नेता नितिन सरदेसाई और बाला नांदगांवकर सोमवार देर शाम ‘मातोश्री’ पहुंचे, जहां उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर गठबंधन को अंतिम रूप दिया गया. सूत्रों के अनुसार, बीएमसी की कुल 227 सीटों में से शिवसेना (यूबीटी) 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

वहीं, राज ठाकरे की एमएनएस 60 से 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. इसके अलावा बची सीटें एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) और अन्य छोटे सहयोगी दलों को दिए जाने की संभावना है.  इस तरह सीट शेयरिंग का फॉर्मूला बन रहा था, लेकिन माना जा रहा है कि कांग्रेस को महाविकास अघाड़ी में शामिल करने को लेकर सहमति बनाई जा रही है. इसीलिए शिवसेना ने मंगलवार को होने वाली प्रेस कॉफ्रेंस को टाल दिया है. 

कांग्रेस को साधने में जुटे संजय राउत

महायुति के नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव में प्रदर्शन को देकते हुए उद्धव ठाकरे की शिवसेना अपना आखिरी किला बचाए रखने की हरसंभव कवायद में जुट गई है. एक तरफ राज ठाकरे के साथ हाथ मिलाने की प्लानिंग है तो दूसरी तरफ कांग्रेस को साथ लेने की कोशिश तेज कर दी है. शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से फोन पर बात की और आगामी बीएमसी चुनावों के लिए संयुक्त रणनीति पर चर्चा की.

संजय राउत लगातार राहुल गांधी के संपर्क में भी हैं, ताकि कांग्रेस को महा विकास आघाड़ी में बनाए रखा जा सके. शरद पवार की एनसीपी (एसपी) भी सभी दलों को एकजुट रखने के लिए सक्रिय मध्यस्थता कर रही है. विपक्षी गठबंधन में शामिल दलों का मानना है कि एकजुट रहकर ही महायुति को चुनौती दी जा सकती है.

हालांकि, संजय राउत की असल चुनौती राज ठाकरे की मनसे के साथ कांग्रेस के साथ संबंधों को संतुलित करने की है. कांग्रेस ने राज ठाकरे के साथ मंच साझा करने से साफ इनकार किया है, क्योंकि मनसे की उत्तर भारतीयों और मुस्लिमों के खिलाफ आक्रामक छवि कांग्रेस के वैचारिक आधार से टकराती है.

कांग्रेस को साथ लेने का रास्ता बनाया जा रहा है, जिसके चलते मंगलवार को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की होने वाली संयुक्त प्रेस कॉफ्रेंस को टाल दिया गया है. 

उद्धव के लिए आखिरी किला बचाने का चैलेंज

महाराष्ट्र की राजनीति में बीएमसी का नियंत्रण राज्य की सत्ता के समान माना जाता है. बीजेपी की पूरी कोशिश बीएमसी से ठाकरे परिवार के वर्चस्व को खत्म करना चाहती है, जबकि उद्धव ठाकरे के लिए यह चुनाव अपनी साख बचाने का आखिरी मौका है. महाराष्ट्र में पिछले पांच सालों के सियासी संग्राम में सबसे ज्यादा नुकसान तो ब्रांड ठाकरे को हुआ है, जिसके चलते उद्धव ठाकरे की पूरी सियासत हाशिए पर पहुंच गई है.

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Tue, 23 Dec 2025 13:36:06 +0530 news desk MPcg
महाराष्ट्र निकाय चुनाव 2025: राज ठाकरे का सूपड़ा साफ, उद्धव–शरद की पार्टियां सिंगल डिजिट में https://citytoday.co.in/4659 https://citytoday.co.in/4659 मुंबई 
महाराष्ट्र के नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के नतीजों ने राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के लिए चिंता बढ़ा दी है. राज्य की 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों में हुए चुनावों में MNS एक भी नगराध्यक्ष पद जीतने में असफल रही. यह परिणाम पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 21 दिसंबर को जारी नतीजों के मुताबिक, BJP-नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने कुल 207 नगराध्यक्ष पदों पर जीत दर्ज की. इसमें BJP को 117, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 53 और अजित पवार गुट की NCP को 37 पद मिले.

वहीं, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) को कुल 44 नगराध्यक्ष पदों पर जीत मिली. कांग्रेस ने 28, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने 9 और शरद पवार गुट की NCP ने 7 पद जीते. इन सबके बीच MNS का खाता तक न खुलना पार्टी की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करता है.

MNS को लगातार करना पड़ रहा हार का सामना

यह पहली बार नहीं है जब MNS को इस तरह की हार झेलनी पड़ी हो. अगस्त 2025 में हुए मुंबई BEST कर्मचारी को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी चुनाव में भी MNS और शिवसेना (UBT) की संयुक्त पैनल को एक भी सीट नहीं मिली थी. उस चुनाव में BJP-समर्थित पैनल ने सभी 21 सीटों पर कब्जा जमाया था.

इससे पहले नवंबर 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भी MNS का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था. पार्टी ने 135 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी सीट जीतने में नाकाम रही थी. लगातार मिल रही इन हार से पार्टी की राजनीतिक रणनीति और भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

15 जनवरी को होना है बीएमसी चुनाव

हालांकि, आगे की राजनीति को लेकर MNS की तरफ से कुछ प्रतिक्रिया नहीं आई है. राज्य निर्वाचन आयोग ने 15 दिसंबर को इसका ऐलान किया था कि महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के चुनाव एक ही चरण में 15 जनवरी 2026 को ही कराए जाएंगे. इसमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी भी शामिल है. आयोग के अनुसार इन चुनावों के नतीजे 16 जनवरी 2026 को घोषित किए जाएंगे. इसमें राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की पार्टियां गठबंधन में होंगी या नहीं यह निकाय चुनाव के नतीजे के बाद फिलहाल स्पष्ट नहीं है.

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Mon, 22 Dec 2025 19:58:57 +0530 news desk MPcg
कर्नाटक में CM बदलने की अटकलें तेज, डिनर टेबल पर जुटे 30+ विधायक https://citytoday.co.in/4630 https://citytoday.co.in/4630 बेंगलुरु

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद के लिए चल रही खींचतान और बदलाव की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। बेलगावी में वरिष्ठ लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली द्वारा बुधवार रात आयोजित एक रात्रिभोज में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का समर्थन करने वाले विधायक शामिल हुए। इसमें जमावड़े में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र और विधान परिषद सदस्य यतींद्र सिद्धारमैया तथा विधायक के एन राजन्ना सहित तीस से अधिक विधायक शामिल हुए। हालांकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वास्थ्य कारणों से इस कार्यक्रम में खुद उपस्थित नहीं हो सके।

जारकीहोली ने इस बैठक को राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान एक सामान्य सामाजिक मेलजोल करार दिया है लेकिन इसमें शामिल कई विधायकों ने संकेत दिया कि वहां राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले के एन राजन्ना ने पुष्टि की कि पार्टी की रणनीति और नेतृत्व से जुड़े मामले बातचीत का हिस्सा थे।
डीके शिवकुमार ने भी दिया था डिनर

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की बैठकें केवल सामाजिक मेलजोल के अलावा कई अन्य उद्देश्यों को भी पूरा करती हैं। यह रात्रिभोज उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के इसी तरह के एक कार्यक्रम की मेजबानी किए जाने के एक सप्ताह बाद हुआ है। इससे राज्य कांग्रेस के भीतर स्पष्ट गुटबाजी और अलग अलग ध्रुवों का पता चलता है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के 20 नवंबर को अपना ढाई साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं ने जोर पकड़ लिया है।

सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच साल 2023 के सत्ता साझाकरण समझौते की खबरें लगातार चर्चा में हैं हालांकि पार्टी आलाकमान के निर्देश पर दोनों नेताओं ने हाल ही में एक दूसरे के आवास पर मुलाकात की है। इससे फिलहाल श्री सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने और नेतृत्व की खींचतान में अस्थायी विराम का संकेत मिलता है।

विधायक राजन्ना ने संभावित कैबिनेट विस्तार में वाल्मीकि (अनुसूचित जनजाति ) समुदाय के पर्याप्त प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला और कहा कि वह मंत्रिमंडल में अपनी संभावनाओं को लेकर चिंतित नहीं हैं। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के श्री सिद्धारमैया को विदा होने वाला मुख्यमंत्री कहे जाने पर यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा कि ऐसी आलोचनाएं लंबे समय से चल रही हैं और इनका कोई विशेष महत्व नहीं है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सत्र के दौरान ऐसी बैठकें सामान्य होती हैं लेकिन ये पार्टी विधायकों के भीतर आंतरिक समीकरणों और निष्ठाओं को जरूर प्रदर्शित करती हैं।

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Fri, 19 Dec 2025 19:06:28 +0530 news desk MPcg
BMC चुनाव में कांग्रेस अकेली, ठाकरे बंधुओं और शरद पवार ने बनाया फासला https://citytoday.co.in/4603 https://citytoday.co.in/4603 मुंबई 

मुंबई नगरपालिका के चुनाव में कांग्रेस पार्टी अलग-थलग पड़ती दिख रही है. राज्य विधानसभा और उससे पहले लोकसभा चुनाव में जो महाविकास अघाड़ी बनी थी वो अब दरकती दिख रही है. महाविकास अघाड़ी के दो दल शिव सेना उद्धव गुट और एनसीपी शरद गुट ने हाथ मिला लिया है. इन दोनों ने कांग्रेस को दरकिनार कर इस गठबंधन में मनसे को शामिल किया है. इससे बीएमसी चुनाव काफी दिलचस्प होते जा रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक बीएमसी चुनाव की घोषणा के साथ ही उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच सीट बंटवारे पर चर्चा शुरू हो चुकी है. ऐसी प्रबल संभावना है कि ठाकरे समूह और राष्ट्रवादी शरद पवार समूह मुंबई नगर निगम चुनाव में एमएनएस के साथ गठबंधन करेंगे. ठाकरे बंधुओं का गठबंधन लगभग पक्का हो चुका है और दूसरी ओर, ऐसी खबरें हैं कि सीट बंटवारे का फॉर्मूला भी लगभग अंतिम रूप ले चुका है.

गठबंधन में कौन-कौन हैं शामिल?

शिवसेना (ठाकरे गुट), एमएनएस और एनसीपी शरद गुट ने मुंबई नगर निगम का चुनाव संयुक्त रूप से लड़ने पर लगभग सहमति बना ली है. इस बात की प्रबल संभावना है कि वामपंथी दल भी इस गठबंधन में शामिल होंगे. लेकिन, इस पूरे गठबंधन से कांग्रेस को अलग रखा गया है. यह भी कहा जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी ने खुद को गठबंधन से अलग रखा है.

ठाकरे गुट के एक नेता के मुताबिक प्रारंभिक चर्चा के आधार पर ठाकरे गुट 120 से 125 वार्डों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है. संभावना है कि 75 से 80 वार्ड एमएनएस को और 20 से 27 वार्ड एनसीपी शरद गुट को मिलेंगे. चूंकि यह लगभग तय है कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी, इसलिए माना जा रहा है कि इन तीनों पार्टियों ने गठबंधन किया है.

फरवरी 2017 में हुए नगर निगम चुनावों में शिवसेना के 84 पार्षद चुने गए थे. ठाकरे समूह ने 36 से 40 नए वार्डों पर दावा किया है, जबकि मौजूदा वार्डों को बरकरार रखा है. हालांकि गठबंधन में वार्डों के आवंटन पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन पार्टी कम से कम 120 से 125 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए अड़ी हुई है. जानकारी मिली है कि एमएनएस और शिवसेना के वरिष्ठ नेता इस बात पर चर्चा करेंगे कि कौन से वार्ड किसे दिए जाएं और फिर अंतिम निर्णय लेंगे.

एमएनएस को कितनी सीटें मिलेंगी?

एमएनएस को 75 से 80 वार्ड मिलने की संभावना है और एमएनएस ठाकरे समूह द्वारा पिछले चुनावों में जीते गए कुछ वार्डों की मांग कर सकती है, जिनमें 2017 में चुने गए सात पार्षदों के वार्ड भी शामिल हैं. इनमें माहिम, सेवरी, वर्ली, भांडुप और विक्रोली विधानसभा क्षेत्रों के वार्ड शामिल हैं. इसलिए, इन स्थानों पर सीटों के आवंटन के दौरान तकरार की संभावना है. हालांकि, नगर निगम चुनाव एक साथ लड़ने का निर्णय लिया जा चुका है, इसलिए ठाकरे समूह को कुछ रियायतें देनी होंगी और कुछ वार्ड छोड़ने होंगे.

एनसीपी के लिए कितनी सीटें हैं?

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में फूट पड़ने के कारण मुंबई में शरद पवार गुट का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो गया है. फिर भी, महा विकास अघाड़ी में घटक दल होने के नाते एनसीपी को 20 से 27 वार्ड मिल सकते हैं. 2017 के चुनावों में एनसीपी के नौ पार्षद चुने गए थे. इन वार्डों के अलावा एनसीपी शरद ने घाटकोपर, कुर्ला, चुनाभट्टी, मलाड, भांडुप, कंजूरमार्ग, अनुशक्ति नगर, बायकुला आदि क्षेत्रों में 10 से 15 अन्य वार्डों पर भी दावा किया है. यहां एनसीपी का काफी प्रभाव है.

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Wed, 17 Dec 2025 12:44:57 +0530 news desk MPcg
दिल्ली में राहुल गांधी का सख्त संदेश: मंच से चुनाव अधिकारियों को चेतावनी, कहा– कानून बदलेगा, होगी कार्रवाई https://citytoday.co.in/4586 https://citytoday.co.in/4586 नई दिल्ली
दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की रैली में रविवार को सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला। साथ ही चुनाव अधिकारियों को हिदायत दी कि वे इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी विचारधारा, हिंदुस्तान की विचारधारा, हिंदू धर्म और दुनिया के हर धर्म की विचारधारा कहती है कि सत्य सबसे जरूरी है। हिंदुस्तान में सत्य और असत्य के बीच लड़ाई हो रही है। इस लड़ाई में चुनाव आयोग, भाजपा की सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू, विवेक जोशी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्य-असत्य की इस लड़ाई में ये चुनाव आयुक्त भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने चुनाव आयुक्तों को बचाने के लिए कानून बदल दिया, जिसमें ये कुछ भी करें, इन पर कोई एक्शन नहीं लिया जा सकता, लेकिन याद रखिए हम इन चुनाव आयुक्तों की रक्षा करने वाले कानून को बदलेंगे और इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।
उन्होंने कहा कि गांधीजी कहते थे, सत्य सबसे जरूरी चीज है। हमारे धर्म में ‘सत्यम शिवम् सुंदरम्’ और ‘सत्यमेव जयते’ के बारे में भी कहा गया है, लेकिन मोहन भागवत कहते हैं, विश्व सत्य को नहीं, शक्ति को देखता है। जिसके पास शक्ति है, उसे माना जाता है। यह आरएसएस और मोहन भागवत की सोच है। जहां एक तरफ हमारा धर्म कहता है कि सत्य सबसे जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ मोहन भागवत कहते हैं, सत्य का कोई मतलब नहीं है, सत्ता जरूरी है। आज देश में सत्य और असत्य के बीच लड़ाई है। हम सत्य के लिए नरेंद्र मोदी, अमित शाह और आरएसएस की सरकार को हिंदुस्तान से हटाएंगे।
राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा का आत्मविश्वास खत्म हो चुका है क्योंकि उन्हें पता है कि हमारी वोट चोरी पकड़ी गई है। अमित शाह भी तभी तक बहादुर हैं, जब तक इनके हाथ में सत्ता है। वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने चुनाव आयोग पर हमला बोलते हुए कहा कि आज भाजपा को चुनाव आयोग की जरूरत है, क्योंकि उसके बिना नरेंद्र मोदी चुनाव नहीं जीत सकते। हमें चुनाव आयोग के तीन अधिकारियों के नाम नहीं भूलने हैं, क्योंकि ये लोग लोकतंत्र पर वार कर रहे हैं। इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है, जब पूरा विपक्ष कह रहा है कि चुनाव आयोग पर हमें भरोसा नहीं रहा। चुनाव प्रक्रिया के हर कदम को चुनाव आयोग ने संदिग्ध बना दिया है। आज देश की हर संस्था को मोदी सरकार ने अपने सामने झुका दिया है।
उन्होंने कहा कि मैं चुनौती देती हूं, भाजपा एक बार बैलेट पेपर पर निष्पक्ष चुनाव लड़ ले। ये कभी नहीं जीत पाएंगे और यह बात भाजपा भी जानती है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज हालात ये हैं कि पिछले आम चुनाव में मुख्यमंत्रियों को जेल में डाला गया, कांग्रेस का बैंक अकाउंट बंद कर दिया गया, भ्रष्टाचार के नाम पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का दिल कमजोर था, जो इस दबाव को सह नहीं पाए, वे भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ऐसे नेताओं को अपने वॉशिंग मशीन में धोकर पाक-साफ बनाती रही।
उन्होंने यह भी कहा कि संसद में जब मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने वोट चोरी का मुद्दा उठाया तो मोदी सरकार नहीं मानी। आखिर में सरकार ने कहा कि हम पहले ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा करेंगे, फिर एसआईआर और वोट चोरी पर बात करेंगे। सदन में हम ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा करते रहे, लेकिन मोदी सरकार में जनता के मुद्दों पर बात करने की हिम्मत नहीं दिखी।

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Mon, 15 Dec 2025 19:06:30 +0530 news desk MPcg
कांग्रेस, BJP और लेफ्ट ने मिलाया हाथ, किसे हराने के लिए हुआ ये सियासी गठबंधन? https://citytoday.co.in/4568 https://citytoday.co.in/4568  कोल्लम 
केरल की राजनीति में हमेशा कुछ न कुछ अनोखा होता रहता है. ऐसे प्रयोग होते हैं, जिसे राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अपनाया जाता है और उसकी चर्चा भी होती है. केरल में इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है. प्रदेश में लोकल बॉडी यानी स्‍थानीय निकाय के लिए चुनाव होने हैं. उससे पहले एक दिलचस्‍प राजनीतिक वाकया हुआ है. कांग्रेस, CPI(M) और BJP ने एकजुट होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्‍या हुआ कि तीनों धुर विरोधी पार्टियां एकजुट हो गईं? सामान्‍य स्थिति में इसके बारे में सोचना भी असंभव सा लगता है, पर ऐसा ही हुआ है.

केरल की राजनीति में इस बार अनोखा समीकरण देखने को मिल रहा है. कोच्चि के पास स्थित किटेक्स ग्रुप की राजनीतिक इकाई ट्वेंटी20 (Twenty20) के तेजी से बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए कांग्रेस, CPI(M) और BJP (तीनों प्रतिद्वंद्वी दल) एक साथ खड़े हो गए हैं. 9 और 11 दिसंबर को होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में इन दलों ने किज़क्कम्बलम में साझा निर्दलीय उम्‍मीदवार उतारे हैं, ताकि कॉरपोरेट समर्थित इस पार्टी को टक्कर दी जा सके. Twenty20 की शुरुआत 2013 में किटेक्स ग्रुप ने CSR कार्यक्रम के रूप में की थी. उद्देश्य था – किज़क्कम्बलम गांव का विकास, जहां कंपनी का बड़ा गारमेंट यूनिट स्थित है. साल 2015 में इस समूह ने पहली बार पंचायत चुनाव जीता और 2020 में जाकर तीन और पंचायतें अपने कब्जे में कर लीं.

क्‍यों घबराईं पार्टियां?

अब सवाल उठता है कि केरल की तीनों बड़ी पार्टियां क्‍यों घबराई हुई हैं? इस बार संगठन 48 पंचायतों, कोच्चि नगर निगम, तीन नगरपालिकाओं और कई जिलों में चुनाव लड़ रहा है. कुछ पंचायतों में सभी सीटों पर इनके उम्मीदवार हैं. पूथ्रिक्का पंचायत में सभी उम्मीदवार महिलाएं हैं. Twenty20 की इस प्‍लानिंग से माकपा के साथ ही भाजपा और कांग्रेस घबरा गई हैं. Twenty20 के अध्यक्ष और किटेक्स के एमडी साबू एम जैकब कहते हैं कि उनकी पार्टी ने चार पंचायतों में भ्रष्टाचार खत्म किया है और लगभग 50 करोड़ रुपये बचाए हैं. किज़क्कम्बलम में 50% सब्सिडी पर सामान देने वाले फूड सेफ्टी मार्केट ने पार्टी को बड़ी लोकप्रियता दिलाई. हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव से पहले बड़े राजनीतिक दलों की शिकायत पर यह बाजार बंद कर दिया गया था.

किज़क्कम्बलम पंचायत की 21 सीटों का हाल

    कांग्रेस सिर्फ 2 सीटों पर
    CPI(M) 1 सीट पर
    BJP 2 सीटों पर
    बाकी पर साझा इंडिपेंडेंट कैंडिडेट्स

जनता क्‍यों मेहरबान?

 रिपोर्ट के अनुसार, साबू ने वादा किया है कि पंचायतों की 50 करोड़ रुपये की सरप्लस राशि का उपयोग कर लोगों को बिजली और गैस बिल पर 25% सब्सिडी दी जाएगी. उनका कहना है कि राज्य सरकार ने योजना को मंजूरी नहीं दी, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट में गया है. CPI(M) का आरोप है कि ट्वेंटी20 CSR के नाम पर लोगों को प्रभावित कर रही है. कांग्रेस का आरोप है कि साबू गरीबी का फायदा उठाकर फ्रीबीज़ देकर राजनीति कर रहे हैं. BJP का कहना है कि महिलाओं में सब्सिडी योजनाओं को लेकर पार्टी की पकड़ मजबूत है, इसलिए उनके पास उम्मीदवार भी कम हैं.

Twenty20 पार्टी का क्‍या है पक्ष?

साबू सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि किटेक्स का सालाना CSR फंड सिर्फ 2.5 करोड़ रुपये है और उसके दुरुपयोग का सवाल ही नहीं उठता. वे दावा करते हैं कि पिछले 5 साल में सरकार ने उनके चार पंचायतों में 84 बार छापे और जांच कीं, लेकिन कोई गड़बड़ी नहीं मिली. साबू ने प्रमुख दलों पर आरोप लगाया कि वे SDPI और वेलफेयर पार्टी के साथ मिलकर 25 दलों का गठबंधन बनाकर ट्वेंटी20 को रोकना चाहते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टियां पंचायत के 32 करोड़ रुपये के सरप्लस फंड पर नजर गड़ाए बैठी हैं.

चुनावों में दिलचस्प मुकाबला

Twenty20 का चुनाव चिन्ह आम (मैंगो) है, लेकिन इस बार उसके खिलाफ उतरे कई स्वतंत्र उम्मीदवार भी अलग-अलग फलों के प्रतीक लेकर मैदान में हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है. कुल मिलाकर किटेक्स समूह की राजनीतिक इकाई ट्वेंटी20 के बढ़ते प्रभाव ने केरल की पारंपरिक राजनीति को नया मोड़ दे दिया है. अब देखने वाली बात होगी कि क्या तीनों बड़े दलों की संयुक्त रणनीति इस कॉरपोरेट-समर्थित मॉडल को रोक पाएगी या फिर ट्वेंटी20 अपने प्रभाव का विस्तार करने में कामयाब होती है.

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Sat, 06 Dec 2025 16:49:58 +0530 news desk MPcg
बीजेपी अध्यक्ष कौन होंगे? पीएम मोदी, अमित शाह और नड्डा की बैठक में तय होगा फैसला, नेताओं के नाम की अटकलें तेज https://citytoday.co.in/4545 https://citytoday.co.in/4545 नई दिल्ली

जेपी नड्डा के बाद अगला बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, इसको लेकर लंबे समय से अटकलें जारी हैं। बिहार चुनाव के दौरान एक इंटरव्यू में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया था कि चुनाव खत्म होने के बाद अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो जाएगा। इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा, बीएल संतोष के बीच संसद भवन में एक अहम बैठक हुई। लगभग घंटेभर तक चली बैठक में अगले बीजेपी चीफ और यूपी बीजेपी चीफ पर चर्चा हुई।

बीजेपी अध्यक्ष नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव से पहले ही खत्म हो गया था, लेकिन आम चुनाव तक पहले उसे बढ़ाया गया। इसके बाद फिर से उसे बढ़ाया जा चुका है। पार्टी के भीतर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। पिछले कुछ महीनों में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान समेत कई नाम सामने आए हैं, जिनके रेस में होने की चर्चा है। हालांकि, आधिकारिक रूप से कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है। बीजेपी के नियम के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने से पहले पार्टी को 50 फीसदी स्टेट यूनिट्स में चुनाव करवाने होते हैं और अब तक यह पूरा भी हो चुका है।
अध्यक्ष पद की रेस में कौन-कौन से नाम?

पिछले एक दशक में बीजेपी का नया रूप देखने को मिला है, जिसके तहत बड़े पदों पर चुने जाने वाले नाम अक्सर चौंकाने वाले होते हैं। फिर चाहे वह यूपी 2017 में योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाया जाना हो या फिर हाल ही में दिल्ली में रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री चुना जाना हो। ऐसे में मौजूदा भाजपा में अगले अध्यक्ष के नाम का अंदाजा लगाना आसान नहीं होगा। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, रेस में कई नाम हैं। धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान के अलावा, भूपेंद्र यादव, देवेंद्र फडणवीस, निर्मला सीतारमण, विनोद तावड़े आदि के नाम भी रेस में चल रहे हैं।
यूपी बीजेपी चीफ के लिए घंटों बैठक

 यूपी में एक अहम बैठक हुई, जोकि तीन घंटे तक चली। सीएम योगी आदित्यनाथ के आवास पर भाजपा और आरएसएस के बीच समन्वय बैठक हुई। माना जा रहा है कि इसी हफ्ते यूपी बीजेपी के अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए एक ब्राह्मण, दलित और तीन ओबीसी नेताओं के नाम रेस में आगे चल रहे हैं।

नया अध्यक्ष, इन नेताओं के नाम की अटकलें

भारतीय जनता पार्टी को जल्द ही नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने के संकेत हैं। खबर है कि बुधवार को कई उच्च स्तरीय बैठकें हुई हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नाम शामिल हुए। अटकलें ये भी हैं कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश अध्यक्ष के नाम का भी फैसला कर लिया है और सिर्फ ऐलान बाकी है। हालांकि, पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। अब संभावनाएं जताई जा रही हैं कि भाजपा 15 दिसंबर से पहले नया अध्यक्ष चुन सकती है।

15 दिसंबर से पहले क्यों

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा में चर्चाएं हैं कि 15 दिसंबर से पहले नया अध्यक्ष चुना जा सकता है। इसकी वजह 16 दिसंबर से खरमास महीना शुरू होना है। हालांकि, पार्टी ने अब तक साफ नहीं किया है कब तक नए अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के अनुसार, अगले साल यानी 2026 में कई राज्यों में चुनाव होने के चलते कई नेताओं का मानना है कि इन चुनावों से पहले नए अध्यक्ष का चुनाव हो।

2026 में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और असम में विधानसभा चुनाव होने हैं। बुधवार को एक के बाद एक हुईं बैठकों में पीएम मोदी, गृहमंत्री शाह, मौजूदा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और भाजपा महासचिव बीएल संतोष शामिल रहे।

यूपी अध्यक्ष का भी जल्द हो सकता है ऐलान

खास बात है कि कुछ दिनों पहले संतोष यूपी में भी थे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार समेत कई बड़े नामों से मुलाकात की थी। अटकलें हैं कि यूपी के लिए भाजपा अध्यक्ष के नाम पर मुहर लग गई है और इसे लेकर जल्द ही बड़ी घोषणा हो सकती है। फिलहाल, इसे लेकर आधिकारिक घोषणा बाकी है।
ये नाम आगे

अब तक साफ नहीं है कि भाजपा किसके नाम पर मुहर लगाएगी। हालांकि, अटकलें हैं कि रेस में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र यादव और भाजपा नेता विनोद तावड़े का नाम है। महिला नेताओं में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, डी पुरंदेश्वरी और वनति श्रीनिवासन का नाम आगे चल रहा है।

बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद माना जा रहा है कि प्रधान का नाम रेस में सबसे आगे है। हालांकि, पार्टी ने इसपर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। प्रधान बिहार चुनाव प्रभारी थे।
नड्डा का कार्यकाल

साल 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले ही मौजूदा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री नड्डा का कार्यकाल पूरा हो चुका है। हालांकि, बाद में उन्हें कई बार विस्तार दिया गया।

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Fri, 05 Dec 2025 12:24:45 +0530 news desk MPcg
झारखंड की राजनीति में हलचल: पोस्टर हटे, साथी गायब और हेमंत सोरेन दिल्ली रवाना—कुछ तो बड़ा पक रहा है! https://citytoday.co.in/4524 https://citytoday.co.in/4524 रांची. 
अब नया बम झारखंड में हेमंत अब जीवंत होंगे… 14 नवंबर को बिहार चुनाव परिणाम के तीसरे दिन 17 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट किया था. उस समय से ही यह कयास लगने लगे थे कि संभव है कि झारखंड में कुछ राजनीतिक उथल-पुथल हो. इस एक लाइन ने पूरे झारखंड में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया. वजह भी साफ थी- बिहार चुनाव के दौरान सीट शेयरिंग को लेकर झामुमो और महागठबंधन में जारी तनातनी ने पहले ही संकेत दे दिया था कि रिश्तों में दरार गहरी हो रही है. बिहार सीमा से लगी 12 सीटों पर लड़ने का दावा करने वाला झामुमो जब सीटें नहीं मिलीं तो उसने सीधा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था. तब से ही चर्चा थी कि – बिहार की हार, झारखंड की राजनीति बदल देगी! इसकी पृष्ठभूमि बनी और सियासी कहानी क्रमवार बढ़ती गई है.

बिहार में हार… और झारखंड में वार?

दरअसल, इसकी वजह बिहार चुनाव के दौरान से ही दिख रही थी, क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर जिस तरह झारखंड मुक्ति मोर्चा और महागठबंधन के दलों में समन्वय की कमी दिखी, वह कुछ तो संकेत कर रही थी. बिहार झारखंड सीमा से लगी 12 सीटों पर झामुमो चुनाव लड़ने का दावा कर रहा था तो दूसरी ओर महागठबंधन की ओर से झामुमो के लिए किसी भी प्रकार की तवज्जो नहीं देना, इसकी पृष्ठभूमि तैयार करता हुआ दिखा. बाद में यह भी चर्चा हुई कि जेएमएम को 3 सीटें दिए जाने पर सहमति बन गई है. लेकिन, तभी खबर आई कि झामुमो ने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने से ही इनकार कर दिया है. महागठबंधन में सीटें नहीं मिलने पर जेएमएम ने उम्मीदवार खड़े नहीं किए और बिहार चुनाव बाद झारखंड में गठबंधन को लेकर समीक्षा यानी रिव्यू की बात कही थी. बिहार में चुनाव हुए फिर परिणाम भी आए और महागठबंधन की करारी हार हुई. इसके बाद अजय आलोक के इस पोस्ट ने झारखंड में सियासी सरगर्मी भी तेज कर दी.

हेमंत-कल्पना दिल्ली में, झारखंड में हलचल

इसके बाद तो भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की लगातार चुप्पी और फिर महागठबंधन को लेकर हेमंत सोरेन की लंबी खामोशी और संशय के माहौल में पत्नी कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली दौरा और वहां कथित तौर पर भाजपा नेताओं से गुप्त मुलाकात… जाहिर है कयासों ने सियासी कहानी गढ़ दी है. दरअसल, इसकी पृष्ठभूमि भी साफ-साफ दिख रही है क्योंकि, पिछले कुछ दिनों से हेमंत सोरेन और कांग्रेस की दूरी साफ-साफ दिख रही है. मुख्यमंत्री का सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में उपस्थित नहीं होना और कार्यक्रम कैंसल होना भी कुछ तो संकेत कर रहा था. बता दें कि पिछले साल इसी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जिला-जिला जाते थे और जिक्र करते थे कि सरकार AC कमरे से नहीं गांव से चल रही है, पर इस बार किसी जिले में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम नहीं हुआ.

महागठबंधन में दरार की चर्चा तेज

बात और आगे तब बढ़ती दिखी जब दुमका में फ्लाईंग इंस्टिट्यूट के उद्घाटन कार्यक्रम के मौके पर सीएम हेमंत सोरेन के मंच पर सहयोगी कंग्रेस एवं राजद के मंत्री और विधायक नदारद रहे. बता दें कि इससे पहले महागठबंधन में जब भी मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यक्रम किया तो दोनों दल के मंत्री मौजूद रहते थे. इसके आगे की कहानी बढ़ी तो मोरहाबादी मैदान में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के पोस्टर से राजद और कांग्रेस के नेताओं के पोस्टर नहीं लगे थे.पोस्टर नहीं लगने के बाद कांग्रेस और राजद के कुछ नेताओं के बीच यह बात चर्चा का विषय रही. इसके बाद तो झारखंड में इस सियासी सस्पेंस को और मजबूत किया मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चुप्पी और उनके दिल्ली दौरे ने.
क्या झारखंड की सियासत में परिवर्तन की तैयारी है?

पत्नी कल्पना सोरेन के साथ हेमंत सोरेन का दिल्ली में कई दिनों तक रहना और वहां भाजपा नेताओं के साथ कथित गोपनीय मुलाकातों की खबरें, गठबंधन में असहजता के संकेत देती दिख रही हैं. उसके बाद सरकार-आपके-द्वार जैसे बड़े कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी, दुमका फ्लाइंग इंस्टिट्यूट के मंच से कांग्रेस-राजद के नेताओं की दूरी और सरकारी पोस्टरों से सहयोगियों की गायब तस्वीरों ने सवालों को और गहरा कर दिया. अब परिस्थिति इस मोड़ पर है कि सियासत सिर्फ अफवाहों पर नहीं चल रही, बल्कि घटनाएं खुद कहानी लिख रही हैं. फिलहाल स्थिति साफ नहीं है और न ही किसी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि, लेकिन सत्ता गलियारों की भाषा बताती है कि झारखंड की राजनीति अगले कुछ दिनों शांत नहीं रहने वाली.

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Thu, 04 Dec 2025 13:49:54 +0530 news desk MPcg
केंद्रीय मंत्री की सलाह: अभी के अभी डिलीट करें Sanchar Saathi ऐप https://citytoday.co.in/4505 https://citytoday.co.in/4505 नई दिल्ली

केंद्र सरकार द्वारा 'संचार साथी'  नामक साइबर सुरक्षा ऐप को सभी फोन्स में इंस्टॉल करने के निर्देश के बाद उपजे विवाद पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने साफ किया है कि यह ऐप अनिवार्य नहीं है और यूज़र्स इसे अपनी मर्ज़ी से डिलीट कर सकते हैं।

 डिलीट करने का विकल्प खुला
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा- "अगर आप संचार साथी ऐप नहीं चाहते हैं तो आप इसे डिलीट कर सकते हैं। यह ऐप वैकल्पिक है।" उन्होंने कहा कि सरकार का कर्तव्य है कि वह इस ऐप को सभी नागरिकों तक पहुंचाए लेकिन इसे अपने डिवाइस में रखना है या नहीं यह पूरी तरह से यूज़र पर निर्भर करता है।

विवाद की शुरुआत क्या थी?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब केंद्र सरकार ने 28 नवंबर को सभी मोबाइल कंपनियों को एक निर्देश जारी किया था। सरकार ने कंपनियों से कहा था कि वे 90 दिनों के भीतर भारत सरकार की साइबर सुरक्षा से जुड़ी ऐप 'संचार साथी' को सभी फोन्स में इंस्टॉल करें। निर्देशों में इस बात को भी सुनिश्चित करने को कहा गया था कि यूज़र्स इस ऐप को खुद से डिलीट या अनइंस्टॉल न कर सकें।

विपक्ष का कड़ा विरोध
इस खबर के सामने आते ही विपक्ष और कई नागरिक समूहों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया था। कांग्रेस सहित विपक्ष के कई नेताओं ने सरकार के इस कदम को असंवैधानिक और जनता के आजादी के हक का हनन बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी। विरोध करने वालों ने नागरिकों की निजता पर संभावित खतरे और सरकारी निगरानीको लेकर चिंता व्यक्त की थी। अब केंद्र सरकार की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि यूजर्स चाहें तो इस ऐप को डिलीट कर सकते हैं जिससे इस विवाद पर विराम लगने की उम्मीद है।

 

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Wed, 03 Dec 2025 12:00:07 +0530 news desk MPcg
सोनिया गांधी और राहुल गांधी देश के सर्वमान्य और जनप्रिय नेता हैं – अरुण वोरा https://citytoday.co.in/4478 https://citytoday.co.in/4478 नईदिल्ली 

नेशनल हेराल्ड प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित कई वरिष्ठ नेताओं के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने पर पूर्व विधायक अरुण वोरा ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं का खुला दुरुपयोग कहा है। वोरा ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी देश के सर्वमान्य और जनप्रिय नेता हैं। वे करोड़ों भारतीयों के संवैधानिक मूल्यों की आवाज़ हैं। उनकी निष्ठा और त्याग पर कभी कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगा है।

दोनों बेदाग हैं, निर्भीक हैं और सत्य के मार्ग पर अडिग हैं। उनके विरुद्ध इस प्रकार की राजनीतिक प्रेरित कार्रवाइयाँ न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं बल्कि, केंद्र सरकार की असुरक्षा और घबराहट को भी उजागर करती हैं।
वोरा ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएँ ईडी, सीबीआई और पुलिस किसी भी व्यवस्था की रीढ़ होती हैं, लेकिन आज यही संस्थाएँ राजनीतिक दबाव और सत्ता की मंशा के आगे झुकाकर विपक्ष को बदनाम करने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। वोरा ने कहा कि केंद्र सरकार अपनी नाकामियों, आर्थिक संकट और जनविरोधी नीतियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसे मामलों को हवा दे रही है। कांग्रेस कभी ऐसे दमन से नहीं झुकेगी। न्याय, सत्य और संविधान की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

इधर, पूर्व महापौर आरएन वर्मा ने इस मामले में केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जब कार्रवाई देश के दो शीर्ष नेताओं पर हो और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। लोकतांत्रिक संस्थाओं का इस प्रकार राजनीतिक मामलों में इस्तेमाल होना बेहद चिंताजनक है। यह प्रवृत्ति लंबी अवधि में लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती है।

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Mon, 01 Dec 2025 18:26:17 +0530 news desk MPcg
कर्नाटक में सत्ता की रस्साकशी: DK या सिद्धारमैया? इस दिग्गज नेता को मिला सबसे बड़ा समर्थन https://citytoday.co.in/4464 https://citytoday.co.in/4464

बेंगलुरु 
कर्नाटक सरकार में मचे घमासान को लेकर दिल्ली में जल्द बैठक हो सकती है। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। खबर है कि ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री की कथित सीक्रेट डील को लेकर सीएम सिद्धारमैया और उनके डिप्टी डीके शिवकुमार के बीच तकरार जारी है। हालांकि, अटकलें हैं कि सिद्धारमैया का पलड़ा भारी हो सकता है। मीडिया की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि फिलहाल सिद्धारमैया के पद पर आंच नहीं आएगी। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी जानती है कि वह OBC यानी अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय के बड़े नेता हैं। साथ ही उन्हें अहिंदा समुदाय के साथ पार्टी के 100 से ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल है। कांग्रेस के कुल 137 विधायक हैं। ऐसे में उनकी सहमति के बगैर नेतृत्व परिवर्तन आलाकमान के लिए भी आसान नहीं होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री शिवकुमार और उनके समर्थकों की तरफ से डाला जा रहा दबाव कैबिनेट फेरबदल टाल सकता है। माना जा रहा था कि सिद्धारमैया कैबिनेट में फेरबदल करना चाह रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, शिवकुमार के प्रयासों को आंतरिक समर्थन में कमी के चलते कमजोर माना जा रहा है। हालांकि, वोक्कलिगा समुदाय उनका समर्थक माना जाता है।

दोनों पक्षों के लिए अड़े समर्थक
सिद्धारमैया और शिवकुमार का समर्थन करने वाले जाति समूह खुलकर उनके पक्ष में आ गए है। एक समूह ने कांग्रेस को मौजूदा मुख्यमंत्री को हटाने के खिलाफ चेतावनी दी, जबकि दूसरे समुदाय ने शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने का पुरजोर समर्थन किया। कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग समुदाय महासंघ (केएसएफबीसीसी) ने कांग्रेस को चेतावनी दी है कि राज्य इकाई में अंदरूनी कलह के मद्देनजर सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री पद से हटाने का कोई भी प्रयास पार्टी पर असर डालेगा, जबकि कर्नाटक राज्य वोक्कालिगारा संघ ने चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के साथ अगर अन्याय हुआ तो वह इसका कड़ा विरोध करेगा।

अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित समुदायों के लिए संक्षिप्त कन्नड़ नाम) सिद्धरमैया का प्रमुख वोटबैंक माना जाता है, वहीं कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं जो एक प्रभावशाली कृषक समुदाय है जिसके कई नेता जैसे के. हनुमंतैया, के.सी. रेड्डी, एच.डी. देवगौड़ा, एस.एम. कृष्णा, सदानंद गौड़ा और एच.डी. कुमारस्वामी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

वोक्कालिगारा संघ के अध्यक्ष एल. श्रीनिवास ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘विधानसभा चुनाव के दौरान शिवकुमार ने कड़ी मेहनत की, पूरे राज्य का दौरा किया, संगठन को मजबूत किया और उनके प्रयासों के कारण कांग्रेस को 140 सीट पर जीत मिली।’’ उन्होंने 2023 में हुए कथित ‘‘सत्ता-साझाकरण’’ समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों में इस बात को लेकर संदेह है कि सिद्धरमैया शिवकुमार को जिम्मेदारी हस्तांतरित करेंगे या नहीं।

संघ के अध्यक्ष ने कहा, ‘‘हम वोक्कालिगा संघ की ओर से कांग्रेस आलाकमान से अनुरोध करते हैं कि शिवकुमार को कम से कम उनके प्रयासों के लिए तो ‘कुली’ (ईनाम) दिया जाए।’’ श्रीनिवास ने शिवकुमार से कांग्रेस आलाकमान द्वारा किए गए वादे को पूरा करने का अनुरोध करते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री पार्टी के लिए जेल भी जा चुके हैं।

हालांकि, केएसएफबीसीसी ने सिद्धारमैया का समर्थन किया और कहा कि अनुभवी नेता को हटाने की किसी भी कोशिश का पार्टी पर बड़ा असर पड़ेगा। केएसएफबीसीसी के अध्यक्ष के. एम. रामचंद्रप्पा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि अहिंदा इस बदलाव के घटनाक्रम से बेहद दुखी है। उन्होंने कहा कि यहां तक ​​कि धार्मिक प्रमुख भी इस चर्चा में भाग ले रहे हैं और धमकी दे रहे हैं कि वे भी मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को हटाने की मांग करने वालों में शामिल होंगे।

केएसएफबीसीसी अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ये धमकियां नई नहीं हैं, बल्कि बहुत लंबे समय से दी जाती रही हैं। आजादी के बाद से ही ऐसा होता आ रहा है। हम दलित समुदाय इन धमकियों के आगे नहीं झुकेंगे।’’ रामचंद्रप्पा ने कहा, ‘‘अगर धर्मगुरु और वोक्कालिगा संघ आंदोलन करने को तैयार हैं, तो हम भी अपने नेता को नहीं छोड़ेंगे। अहिंदा समुदाय की 70 प्रतिशत आबादी ने इस सरकार को समर्थन दिया है। हम अहिंदा समुदाय के किसी नेता को गिराने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’

 

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Fri, 28 Nov 2025 17:24:52 +0530 news desk MPcg
राहुल पर उठे सवाल: कांग्रेस नेता बोले— प्रियंका ही संभालें पार्टी की कमान https://citytoday.co.in/4454 https://citytoday.co.in/4454 नई दिल्ली 
कांग्रेस के सीनियर नेता राशिद अल्वी ने पार्टी के हालात पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थिति कमजोर है। अल्वी ने कहा है कि कांग्रेस संगठन का हाल दयनीय हो गया है और इसके लिए सीधे तौर पर कांग्रेस लीडरशिप जिम्मेदार है। अल्वी ने कहा है कि कांग्रेस संगठन का हाल दयनीय हो गया है और इसके लिए सीधे तौर पर कांग्रेस लीडरशिप जिम्मेदार है। अल्वी के मुताबिक चुनावी मेहनत और तैयारी के मामले में भाजपा से मुकाबला करना तो दूर, कांग्रेस कहीं ठहर ही नहीं पा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ज़मीन पर काम कर रही है, लेकिन कांग्रेस की मेहनत कहीं दिखाई नहीं देती।

राशिद अल्वी ने कांग्रेस हाईकमान की कार्यशैली पर भी तीखा सवाल किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से मुलाकात करना कांग्रेस नेताओं के लिए भी आसान नहीं है, जबकि इंदिरा गांधी से तो आसानी से मुलाकात हो जाती थी। अल्वी ने सुझाव दिया कि प्रियंका गांधी को पार्टी की बागडोर संभालनी चाहिए क्योंकि प्रियंका गांधी में इंदिरा गांधी की छवि दिखती है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आज हाशिये पर हैं। इसके लिए भी पार्टी लीडरशिप ही जिम्मेदार है। कांग्रेस के भीतर उठी इस आवाज़ ने संगठनात्मक हालत और नेतृत्व की शैली पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। उन्होंने बातचीत में कहा कि कांग्रेस पार्टी के अंदर जो सीनियर लीडर्स हैं, उन्हें लगता है कि उन्हें जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है। वे महसूस करते हैं कि उनकी तरफ से कांग्रेस को मजबूत किया जा सकता है। आज सबसे ज्यादा जरूरी है कि हम उन लोगों की नाराजगी दूर करें, जिन लोगों को किनारे लगाया गया है। उन्हें मुख्यधारा में लाना चाहिए। यही नहीं उन्होंने कर्नाटक में सीएम की कुर्सी को लेकर चल रही रस्साकशी को भी खत्म करने की अपील की। भाजपा नेता और राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का उदाहरण देते हुए राशिद अल्वी ने कहा कि हर पार्टी में उतार-चढ़ाव का दौर आता है। फिलहाल कर्नाटक में जो चल रहा है, वह चिंताजनक है।

वसुंधरा राजे के साथ राजस्थान में क्या हुआ? यह ध्यान देना चाहिए
राशिद अल्वी ने कहा, 'हर राजनीतिक दल के साथ ऐसा होता है। हम जानते हैं कि राजस्थान में वसुंधरा राजे के साथ क्या हुआ। हमें कर्नाटक की चिंता है। कांग्रेस पार्टी के मुखिया राहुल गांधी नहीं हैं बल्कि मल्लिकार्जुन खरगे हैं। उन्हें इस मसले को जल्दी से जल्दी हल करना चाहिए।' दरअसल कर्नाटक में डीके शिवकुमार के समर्थकों का कहना है कि सरकार गठन के दौरान ढाई-ढाई साल के लिए करार हुआ था और अब सिद्धारमैया को पद छोड़ देना चाहिए।

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Thu, 27 Nov 2025 19:44:36 +0530 news desk MPcg
कांग्रेस का बड़ा फेरबदल: पीसी शर्मा ग्वालियर सिटी और रूरल संभालेंगे, इंदौर ग्रामीण में बदलाव https://citytoday.co.in/4445 https://citytoday.co.in/4445 भोपाल 

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने जिला स्तर पर संगठन को फिर से व्यवस्थित करने के लिए व्यापक बदलाव किए हैं। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने लगभग सभी जिलों में नए प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पटवारी के गृह जिले इंदौर ग्रामीण की जिम्मेदारी फिलहाल खाली रखी गई है, जबकि बाकी 70 जिलों में प्रभारियों की घोषणा कर दी गई है। पार्टी के इस कदम को आगामी राजनीतिक गतिविधियों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रमोट हुए नेताओं की जगह नए प्रभारी

    पीसीसी अध्यक्ष ने खासतौर पर खंडवा सिटी, नरसिंहपुर और ग्वालियर सिटी जैसे अहम जिलों के प्रभारी बदले हैं। खंडवा सिटी की पूर्व प्रभारी रीना बौरासी, अब महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष बनाई गई हैं।

    इनके स्थान पर खंडवा ग्रामीण के जिला प्रभारी आरके दोगने को प्रभारी बनाया गया है। ये हरदा के विधायक भी हैं। इनको दोनों जिलों का प्रभारी बनाया गया है।

ग्वालियर सिटी की प्रभारी हिना कांवरे राष्ट्रीय सचिव बनी हैं। इसके बाद ग्वालियर शहर और ग्रामीण दोनों जिलों का जिम्मा पीसी शर्मा को सौंपा गया है। पीसी शर्मा पूर्व मंत्री हैं।

वहीं, सुखदेव पांसे को कांग्रेस के संगठन प्रभारी के तौर पर नरसिंहपुर जिले का जिम्मा सौंपा गया था। इनकी जगह नरसिंहपुर की जिम्मेदारी आलोक मिश्रा को दी गई है।

जीतू पटवारी का गृह जिला इसलिए खाली

पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का गृह जिला इंदौर ग्रामीण के जिला प्रभारी अवनीश भार्गव मध्य प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के मुख्य संगठक बनाए गए हैं। भार्गव जैसे सीनियर और समन्वय बनाने वाले नेता का नाम तय नहीं हो पाया। इसलिए फिलहाल इंदौर ग्रामीण के जिला प्रभारी को घोषित नहीं किया गया है।

अब जिले वार कांग्रेस के प्रभारियों की लिस्ट देखिए

    मुरैना सिटी– राम किंकर गुर्जर
    मुरैना ग्रामीण– लाखन सिंह यादव (उपाध्यक्ष)
    श्योपुर– सुनील शर्मा (महासचिव)
    भिंड शहर व ग्रामीण– बैजनाथ कुशवाह (महासचिव)
    ग्वालियर शहर व ग्रामीण– पीसी शर्मा (पूर्व मंत्री)
    अशोकनगर– रोशनी यादव (महासचिव)
    दतिया- गुड्डू राजा (महासचिव)
    शिवपुरी- देवेंद्र शर्मा
    गुना- दिनेश गुर्जर (महासचिव)
    सागर सिटी- मनोज कपूर (सचिव)
    सागर ग्रामीण- घनश्याम सिंह (महासचिव)
    छतरपुर- सुरेश राजे (महासचिव)
    दमोह- हर्ष यादव (महासचिव)
    पन्ना- राजभान सिंह (सचिव)
    टीकमगढ़- राव यादवेंद्र सिंह यादव (महासचिव)
    निवाड़ी– रामलखन दंडोतिया
    रीवा शहर व ग्रामीण- संजय शर्मा (महासचिव)
    मऊगंज– मकसूद अहमद
    सतना सिटी– सुनील सर्राफ (सचिव)
    सतना ग्रामीण- विनय सक्सेना (महासचिव)
    मैहर– गुरमीत सिंह (मंगू) (महासचिव)
    सीधी– दिलीप मिश्रा
    सिंगरौली शहर व ग्रामीण- कविता पांडे (महासचिव)
    शहडोल– नारायण पट्टा (महासचिव)
    अनूपपुर– सुखेन्द्र सिंह बन्ना
    उमरिया – नीरज बघेल (सचिव)
    डिंडोरी – फुंदेलाल मार्को (महासचिव)
    जबलपुर सिटी – राजकुमार खुराना
    जबलपुर ग्रामीण- रजनीश सिंह (महासचिव)
    कटनी शहर व ग्रामीण – वीरेंद्र द्विवेदी (महासचिव)
    बालाघाट – लखन घनघोरिया (उपाध्यक्ष)
    छिंदवाड़ा सिटी – सुनील जायसवाल (महासचिव)
    पांढुर्ना – रामू टेकाम (महासचिव)
    मंडला – किरण अहिरवार (महासचिव)
    नरसिंहपुर – आलोक मिश्रा
    सिवनी – सोहन वाल्मीकि (महासचिव)
    नर्मदापुरम – ओम पटेल
    बैतूल – सुनील उइके
    हरदा – रचना जैन (संयुक्त सचिव)
    भोपाल सिटी – रवि जोशी (उपाध्यक्ष)
    भोपाल ग्रामीण – विनय बाकलीवाल (महासचिव)
    रायसेन – शैलेन्द्र पटेल (महासचिव)
    राजगढ़ – सुरेंद्र सिंह हनी बघेल (उपाध्यक्ष)
    सीहोर – जयश्री हरिकिरण (महासचिव)
    विदिशा – प्रभु सिंह ठाकुर (महासचिव)
    उज्जैन सिटी – अमित शर्मा (महासचिव)
    उज्जैन ग्रामीण – चंदर सौंधिया (महासचिव)
    देवास सिटी – सुरेंद्र सिंह (शेरा)
    देवास ग्रामीण – सदाशिव यादव
    रतलाम शहर व ग्रामीण- प्रताप ग्रेवाल (महासचिव)
    शाजापुर – निर्मल मेहता
    मंदसौर – मनोज राजानी
    नीमच – अरविंद बागड़ी
    आगर–मालवा – आतिफ अकील (महासचिव)
    इंदौर सिटी – संजीव सक्सेना (महासचिव)
    इंदौर ग्रामीण- (रिक्त)
    खंडवा शहर व ग्रामीण- आरके दोगने (महासचिव)
    बुरहानपुर शहर व ग्रामीण- ग्यारसीलाल रावत (महासचिव)
    धार – रघु परमार (महासचिव)
    झाबुआ – अमन बजाज
    खरगोन – जय सिंह ठाकुर (महासचिव)
    अलीराजपुर – रामवीर सिकरवार (महासचिव)
    बड़वानी – झूमा सोलंकी (उपाध्यक्ष)

पदाधिकारियों के प्रमोशन से खाली हुई जगह

कुछ जिलों में प्रभारी इसलिए बदले गए क्योंकि मौजूदा पदाधिकारी प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट हो चुके हैं। खंडवा सिटी की प्रभारी रीना बौरासी महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष बनाई गई हैं। उनकी जगह खंडवा ग्रामीण के प्रभारी आरके दोगने को खंडवा शहर और ग्रामीण दोनों की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह ग्वालियर शहर की प्रभारी हिना कांवरे के राष्ट्रीय सचिव बनने के बाद ग्वालियर ग्रामीण के प्रभारी पीसी शर्मा को शहर और ग्रामीण दोनों का प्रभार सौंपा गया है। नरसिंहपुर में भी बदलाव हुआ है। यहां संगठन प्रभारी सुखदेव पांसे के पास जिले का प्रभार था, जिसे अब आलोक मिश्रा को सौंप दिया गया है।

गृह जिले इंदौर ग्रामीण का प्रभार खाली क्यों रखा गया

इंदौर ग्रामीण के प्रभारी अवनीश भार्गव को मध्य प्रदेश कांग्रेस सेवा दल का मुख्य संगठक नियुक्त किया गया है। पार्टी अंदरूनी तौर पर ऐसे वरिष्ठ और सर्वमान्य नेता की तलाश में है, जो इस महत्वपूर्ण जिले में समन्वय कायम रख सके। इसी वजह से इंदौर ग्रामीण की जिम्मेदारी फिलहाल रिक्त रखी गई है।

जिलों के हिसाब से नियुक्त किए गए नए प्रभारी

मुरैना जिले में राम किंकर गुर्जर (सिटी) और लाखन सिंह यादव (उपाध्यक्ष, ग्रामीण) को प्रभार मिला है। श्योपुर में सुनील शर्मा (महासचिव), भिंड में बैजनाथ कुशवाह (महासचिव), ग्वालियर शहर और ग्रामीण दोनों में पीसी शर्मा (पूर्व मंत्री) की नियुक्ति की गई है। अशोकनगर में रोशनी यादव (महासचिव), दतिया में गुड्डू राजा (महासचिव), शिवपुरी में देवेंद्र शर्मा और गुना में दिनेश गुर्जर (महासचिव) को दायित्व दिया गया है। सागर सिटी में मनोज कपूर (सचिव) और सागर ग्रामीण में घनश्याम सिंह (महासचिव) को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

छतरपुर में सुरेश राजे (महासचिव), दमोह में हर्ष यादव (महासचिव), पन्ना में राजभान सिंह (सचिव) और टीकमगढ़ में राव यादवेंद्र सिंह यादव (महासचिव) को प्रभार दिया गया है। निवाड़ी में रामलखन दंडोतिया, रीवा शहर और ग्रामीण दोनों में संजय शर्मा (महासचिव), मऊगंज में मकसूद अहमद और सतना सिटी में सुनील सर्राफ (सचिव) तथा सतना ग्रामीण में विनय सक्सेना (महासचिव) को नई जिम्मेदारी दी गई है। मैहर क्षेत्र की जिम्मेदारी गुरमीत सिंह मंगू (महासचिव) को मिली है।

सीधी में दिलीप मिश्रा, सिंगरौली शहर और ग्रामीण में कविता पांडे (महासचिव), शहडोल में नारायण पट्टा (महासचिव) और अनूपपुर में सुखेंद्र सिंह बन्ना को प्रभार मिला है। उमरिया में नीरज बघेल (सचिव), डिंडोरी में फुंदेलाल मार्को (महासचिव), जबलपुर सिटी में राजकुमार खुराना और जबलपुर ग्रामीण में रजनीश सिंह (महासचिव) को कमान दी गई है। कटनी शहर और ग्रामीण दोनों का प्रभार वीरेंद्र द्विवेदी (महासचिव) को मिला है।

बालाघाट में लखन घनघोरिया (उपाध्यक्ष), छिंदवाड़ा सिटी में सुनील जायसवाल (महासचिव), पांढुर्ना में रामू टेकाम (महासचिव) और मंडला में किरण अहिरवार (महासचिव) को जिम्मेदारी दी गई है। नरसिंहपुर का प्रभार आलोक मिश्रा संभालेंगे, जबकि सिवनी में सोहन वाल्मीकि (महासचिव), नर्मदापुरम में ओम पटेल और बैतूल में सुनील उइके को नियुक्त किया गया है। हरदा में रचना जैन (संयुक्त सचिव), भोपाल सिटी में रवि जोशी (उपाध्यक्ष) और भोपाल ग्रामीण में विनय बाकलीवाल (महासचिव) को कमान दी गई है।

रायसेन में शैलेन्द्र पटेल (महासचिव), राजगढ़ में सुरेंद्र सिंह हनी बघेल (उपाध्यक्ष), सीहोर में जयश्री हरिकिरण (महासचिव) और विदिशा में प्रभु सिंह ठाकुर (महासचिव) को जिम्मेदारी मिली है। उज्जैन सिटी में अमित शर्मा (महासचिव) और उज्जैन ग्रामीण में चंदर सौंधिया (महासचिव) को नियुक्त किया गया है। देवास सिटी में सुरेंद्र सिंह शेरा और देवास ग्रामीण में सदाशिव यादव को प्रभार मिला है। रतलाम शहर और ग्रामीण दोनों में प्रताप ग्रेवाल (महासचिव), शाजापुर में निर्मल मेहता, मंदसौर में मनोज राजानी और नीमच में अरविंद बागड़ी की नियुक्ति हुई है।

आगर मालवा में आतिफ अकील (महासचिव), इंदौर सिटी में संजीव सक्सेना (महासचिव) और इंदौर ग्रामीण को रिक्त रखा गया है। खंडवा शहर और ग्रामीण दोनों की कमान आरके दोगने (महासचिव) के पास होगी। बुरहानपुर में ग्यारसीलाल रावत (महासचिव), धार में रघु परमार (महासचिव), झाबुआ में अमन बजाज, खरगोन में जय सिंह ठाकुर (महासचिव), अलीराजपुर में रामवीर सिकरवार (महासचिव) और बड़वानी में झूमा सोलंकी (उपाध्यक्ष) को जिम्मेदारी दी गई है।

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Tue, 25 Nov 2025 17:12:15 +0530 news desk MPcg
बिहार के बाद महाराष्ट्र से बीजेपी के लिए बड़ी खुशखबरी, बिना चुनाव लड़े बढ़ी पार्टी की सीटें; विपक्ष हुआ आगबबूला https://citytoday.co.in/4429 https://citytoday.co.in/4429 मुंबई 

बिहार विधानसभा चुनाव में शानदान जीत के बाद अब महाराष्ट्र में बीजेपी को बड़ी खूबखबरी मिल गई है. पार्टी ने 2 दिसंबर को होने वाले नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव से पहले ही बढ़त बना ली है. राज्य के बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने बताया कि पार्टी के 100 पार्षद बिना किसी मुकाबले के ही जीत गए हैं. इसके अलावा तीन नगर परिषद अध्यक्ष भी बिना चुनाव के ही चुने गए हैं.

चव्हाण ने इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व को दिया है. चव्हाण के अनुसार निर्विरोध जीतने वाले इन 100 पार्षदों में 4 कोंकण क्षेत्र से 49 उत्तर महाराष्ट्र से 41 पश्चिम महाराष्ट्र से 3-3 मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र से हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि मतदान से पहले ही इतनी सीटें मिलना बीजेपी संगठन की मजबूती को दर्शाता है.

बीजेपी के ही उम्मीदवार कैसे जीत रहे?

हालांकि बीजेपी के इस दावे पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) का कहना है कि निर्विरोध चुनाव पर आपत्ति नहीं है, लेकिन बार-बार केवल बीजेपी के ही उम्मीदवार बिना मुकाबले कैसे जीत रहे हैं? विपक्ष का आरोप है कि पैसे, ताकत और सत्ता का इस्तेमाल कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है.

विवाद इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि कई जगह बीजेपी नेताओं के परिजन भी बिन मुकाबला जीत गए हैं. जामनेर में जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन की पत्नी साधना महाजन नगर परिषद की अध्यक्ष बिना चुनाव के ही चुनी गईं, क्योंकि उनके सामने खड़े सभी उम्मीदवारों ने अंतिम समय पर नाम वापस ले लिया.

कांग्रेस नेता का बड़ा आरोप

धुले जिले में मार्केटिंग मंत्री जयकुमार रावल की मां नयन कुंवर रावल भी विरोधी उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद अध्यक्ष बन गईं. चिखलदरा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के चचेरे भाई अल्हद कालोटी भी बिना मुकाबले पार्षद चुन लिए गए. कांग्रेस नेता यशोमती ठाकुर का आरोप है कि अन्य उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए धमकाया गया.

इन घटनाओं के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. बीजेपी इसे अपनी लोकप्रियता और जनता के समर्थन का नतीजा मान रही है, जबकि विपक्ष दावा कर रहा है कि लोकतंत्र को दबाने की कोशिश हो रही है, क्योंकि नामांकन वापस लेने या रद्द होने का फायदा हर बार केवल बीजेपी को ही मिलता है.

राज्य में 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए मतदान 2 दिसंबर को होगा और मतगणना 3 दिसंबर को की जाएगी. इसके साथ-साथ यह विवाद भी चुनावी माहौल का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है.

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Mon, 24 Nov 2025 15:30:26 +0530 news desk MPcg
202 सीटों की भारी जीत, पर अखिलेश यादव को अभी भी पच नहीं रही NDA की जीत https://citytoday.co.in/4331 https://citytoday.co.in/4331

बेंगलुरु

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिहार चुनाव के रिजल्ट पर बड़ा बयान दिया। रविवार को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि नतीजे हजम नहीं हो रहे। अखिलेश ने कहा, 'आप चुनाव जीत सकते हैं या हार सकते हैं। हम लोग उनसे सीखते रहते हैं। आप लोकप्रिय हो सकते हैं, लेकिन भाजपा की मशीनरी और उनका काम करने का तरीका देखिए, जो ग्रासरूट स्तर तक जाते हैं। उदाहरण के लिए, उन्होंने कहना शुरू कर दिया है कि महिलाओं ने उन्हें बहुत ज्यादा वोट दिए। ये तो कहा जा सकता है कि उन्हें ज्यादा महिलाओं के वोट मिले। लेकिन आप कब तक 10 हजार रुपये देंगे? आप सम्मान की जिंदगी कब देंगे?' उन्होंने कहा कि अब आप 10 हजार उन लोगों को दे रहे हैं, जिनके अपने साथ रह नहीं पाते। ये दुखद है।

अखिलेश यादव ने कहा, 'बिहार और यूपी ऐसे राज्य हैं जहां सबसे ज्यादा लोग पलायन करते हैं। वे अपने परिवारों को छोड़कर चले जाते हैं। परिवार की तरह परिवार के साथ रहे, सरकार उसके लिए काम नहीं कर रही। बस 10 हजार दे दो और वोट ले लो। बाद में तो जैसा अन्य राज्यों में किया, नंबर्स कम कर दो, नियम बना दो। फिर पता चला कि हमारी मां-बहनें मदद नहीं ले पा रही हैं। महाराष्ट्र या किसी भी राज्य में ऐसा ही होता है।' एनडीए की इतनी बड़ी जीत पर अखिलेश यादव ने कहा, '202 – डबल सेंचुरी! हजम नहीं हो रहा है। मैं समझ नहीं पा रहा कि रिजल्ट कैसा है। अगर हम 200 सीटें पा सकते हैं, तो जहां ज्यादा सीटें हों – 70-80% – कोई भी राजनीतिक पार्टी जीत सकती है। तो अन्य पार्टियां, जो 90% लोगों के साथ काम कर रही हैं, वे उनसे बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। अगर ये बेंचमार्क है, तो हमें इसे पार करना होगा।'

डबल इंजन को झटके की दिलाई याद

सपा अध्यक्ष ने कहा कि हम हार से सीखते हैं। और सीखने का अवसर मिलता है जब आप नीचे पहुंच जाते हैं। तब सोचते हैं कि वे ऊपर कैसे आएं। उन्होंने कहा, 'मुझे याद है कि हमें 5 सीटें मिली थीं। मैं सरकार को मनाने में असमर्थ था। उसके बाद डबल इंजन आया। हमने उन दो डबल इंजनों को हराया। उन्होंने इतनी सीटें गंवाईं कि शायद वे अभी भी कल्पना न कर पाएं।' उन्होंने कहा कि अब बिहार की जीत यूपी की जीत के बराबर नहीं हो सकती। यूपी ने अलग जीत हासिल की है, बिहार की जीत अलग है। आप बिहार को जीत सकते हैं, लेकिन यूपी में जो हुआ, वो देखा है। हमारे पास बिहार को जीत में बदलने का समय है। इसके लिए हम तैयार हैं। यूपी में विधानसभा चुनाव दूर नहीं है।

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Sun, 16 Nov 2025 16:43:19 +0530 news desk MPcg
विधायक की सदस्यता पर संशय कायम, निर्मला सप्रे का पलटवार—‘पद का मोह होता तो मैं मंत्री होती’ https://citytoday.co.in/4316 https://citytoday.co.in/4316 भोपाल

मध्यप्रदेश के बीना विधायक निर्मला सप्रे की बहुचर्चित सदस्यता मामले में संशय अभी भी बरकार है। लोगों और खुद विधायक को कोर्ट के निर्णय का इंतजार है। इस बीच निर्मला सप्रे का बड़ा बयान सामने आया है।

आमंत्रण के लिए सीएम से मिलने आती हूं
विधायक निर्मला सप्रे ने कहा- विधायक पद का मोह होता तो मैं मंत्री होती। कोर्ट के निर्णय का इंतजार करें, कोर्ट जो भी निर्णय देगा वह मंजूर है। मैं कोर्ट में अपना जवाब दूंगी, सार्वजनिक मंच पर नहीं। मैं जनता की विधायक हूं, मैं जनता के लिए काम कर रही हूं। 177 करोड़ के काम सरकार ने स्वीकृत किए हैं उनके शिलान्यास भूमिपूजन के आमंत्रण के लिए सीएम से मिलने आती हूं। मुझे विधायक पद का मोह नहीं है। अगर मोह होता तो मैं मंत्री होती।

बीना जल्द ही जिला बनेगा, जनता की यही इच्छा
बीजेपी को आज की स्थिति में किसी दूसरे दल के विधायक की जरूरत नहीं है। मैं जनता की सेवा के लिए काम कर हूं, जनता मेरे काम से बहुत खुश है। बीना जल्द ही जिला बनेगा, जनता की यही इच्छा है। बीना को जिला बनाने के लिए मैं खुद धरने पर बैठी हूं। सीएम ने बीना के विकास के लिए बहुत काम किया है।

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Sat, 15 Nov 2025 17:50:47 +0530 news desk MPcg
एग्जिट पोल में बढ़त के बावजूद NDA की बढ़ी टेंशन, किस आंकड़े से बजा अलार्म? https://citytoday.co.in/4299 https://citytoday.co.in/4299 नई दिल्ली 
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे 14 नवंबर को आने वाले हैं। उससे पहले आए ज्यादातर एग्जिट पोल्स में एनडीए की वापसी का अनुमान जताया गया है। इन सर्वे में बताया गया है कि एनडीए को 150 से 170 सीटें हासिल हो सकती हैं, जबकि महागठबंधन के 100 से नीचे ही रह जाने का अनुमान है। ऐसे दो ही सर्वे हैं, जिनमें टाइट फाइट की बात कही गई है। फिर भी एनडीए के लिए एक आंकड़ा चिंता की वजह है। यह आंकड़ा बिहार में बढ़े हुए मतदान का है। बिहार में इस बार के मतदान ने सभी को चौंका दिया है। 1952 के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा मतदान इस बार बिहार में हुआ है।

कुल मिलाकर 66.91 फीसदी वोटिंग हुई है। 2020 के मुकाबले यह मतदान 9 फीसदी ज्यादा है। 2020 में 57.29% वोटिंग ही हुई थी। यही आंकड़ा एनडीए के लिए चिंता की भी बात है। ऐसा इसलिए क्योंकि बिहार के चुनावी इतिहास में जब भी वोटिंग में इजाफा हुआ है तो परिवर्तन हुआ है। इसीलिए विपक्ष के लोग बढ़े हुए मतदान को परिवर्तन के लिए पड़ा वोट बता रहे हैं। बीते चुनाव का डेटा देखें तो तीन बार सरकार बदली है, जब मतदान 5 फीसदी अधिक बढ़ा है। 1967 के चुनाव में 1962 की तुलना में 7 फीसदी वोट बढ़ा था और नतीजा आया कि कांग्रेस की सरकार बदल गई। यहीं से बिहार में गैर-कांग्रेसी सरकारों के गठन की शुरुआत हुई।

एग्जिट पोल्स के बाद भी क्यों बढ़ी है धुकधुकी
इसके बाद 1980 के चुनाव का एक उदाहरण है। तब 57.3 फीसदी वोट हुआ था, जबकि 1977 में 50.5 पर्सेंट ही वोटिंग हुई थी। इस तरह करीब 7 फीसदी वोट बढ़ा और नतीजा था कि सत्ता बदल गई। ऐसी ही स्थिति 1990 में भी दोहराई गई। तब मतदान में 5.7 पर्सेंट का इजाफा हुआ और कांग्रेस की सरकार चली गई। जनता दल की वापसी हुई। ऐसे में इस आंकड़े को लेकर धुकधुकी बढ़ी हुई है। कहा जा रहा है कि बिहार में कहीं फिर से सत्ता ना बदल जाए। हालांकि एनडीए को बढ़े हुए मतदान से अपनी जीत की उम्मीद इसलिए है क्योंकि महिलाओं ने बढ़-चढ़कर मतदान किया है।

महिलाओं का वोट पुरुषों से 9 फीसदी ज्यादा पड़ा
चुनाव आयोग का कहना है कि महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में ज्यादा वोट किया है। बिहार में यदि कुल मतदान 66.9 फीसदी है तो वहीं पुरुषों का आंकड़ा 62.8 पर्सेंट ही है। वहीं महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.6% है। महिलाओं को नीतीश कुमार का समर्थक वर्ग माना जाता है। इसलिए एनडीए को उम्मीद है कि शायद बढ़े वोट का उन्हें फायदा मिले। फिर भी नतीजे आने तक चिंता तो बनी ही हुई है।

 

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Thu, 13 Nov 2025 18:34:37 +0530 news desk MPcg
दिग्विजय सिंह ने दिल्ली धमाके को बिहार चुनाव से जोड़ा, केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप https://citytoday.co.in/4263 https://citytoday.co.in/4263  देश की राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक लालकिला के बाहर सोमवार शाम को हुए भीषण विस्फोट ने पूरे देश को दहला दिया। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। धमाका इतना ज़ोरदार था कि आसपास खड़े कई वाहन जलकर खाक हो गए। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां सभी एंगल से जांच में जुटी हैं और इलाके को सील कर दिया गया है। वहीं इस संवेदनशील माहौल में मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार पर विस्फोटक आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मैं इस घटना को बिहार चुनाव में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण करने के प्रयास के रूप में देख रहा हूं।”

दिग्विजय सिंह ने ट्विट के जरिए लिखा- अमित शाह जी आप #BiharElection2025 में व्यस्त हैं और दिल्ली में लाल क़िले पर बम फट रहा है। NSA IB CP-दिल्ली क्या कर रहे थे? क्या इन लोगों पर जिम्मेदारी तय की जाएगी? क्या इन पर कोई कार्रवाई होगी? या फिर इसे बिहार चुनाव में हिंदू मुस्लिम ध्रुवीकरण करने का प्रयास होगा? देखते हैं।

उनका यह बयान सामने आते ही सियासी हलकों में भूचाल आ गया। भाजपा नेताओं ने इसे “शर्मनाक और संवेदनहीन राजनीति” बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। कई नेताओं ने कहा कि जब देश शोक में है, तब इस तरह के बयान जांच को प्रभावित करने वाले और राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश हैं।
पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान

यह पहली बार नहीं है जब दिग्विजय सिंह ने ऐसे विवादित बयान दिए हों। इससे पहले भी वे कई बार आतंकी घटनाओं पर टिप्पणी कर विवादों के घेरे में आ चुके हैं। 
सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, मास्टरमाइंड की तलाश जारी

इस बीच जांच एजेंसियां धमाके के पीछे के असल मास्टरमाइंड को खोजने में जुटी हैं। घटना स्थल से बरामद मलबे में रासायनिक विस्फोटक के अंश मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं घायल लोगों का इलाज दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।

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Tue, 11 Nov 2025 17:39:58 +0530 news desk MPcg
हैदराबाद में हिंदू लड़कियों के साथ कथित अपराध, मंत्री ने AIMIM पर गंभीर आरोप लगाए https://citytoday.co.in/4242 https://citytoday.co.in/4242 हैदराबाद
केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने आरोप लगाए हैं कि अन्य राज्यों से हैदराबाद आ रहीं हिंदू लड़कियों पर अत्याचार हो रहा है। उन्होंने इसके आरोप 'असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM के समर्थन' से संचालित एक मादक पदार्थ गिरोह पर लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि यहां पुराने शहर में हिंदू नाबालिग लड़कियों को निशाना बना रहा है, उनका अपहरण कर रहा है और उन पर हमला कर रहा है। भाजपा नेता ने कहा है कि उन्होंने निशाना बनी महिलाओं के परिवार से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।

 रिपोर्ट के अनुसार, संजय ने कहा, 'पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के पास कोई सेफ्टी कवर नहीं है…। अब वो ऐसी ही स्थिति का सामना हैदराबाद के पुराने शहर में कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'शुरुआत में वो बर्थडे पार्टी के नाम पर स्कूल से एक लड़की को फुसलाकर मुस्लिम क्लासमेट के घर ले गए, जहां उसे ड्रग्स मिली हुई चॉकलेट दी गई…। बाद में उसे किडनैप किया गया और 6 दिनों तक उनपर अत्याचार किया गया।'

उन्होंने कहा, 'जब लड़की के माता-पिता पुलिस के पास पहुंचे, तो वापस भेज दिया गया और बगैर किसी जांच के केस बंद कर दिया गया। बाद में उस लड़की को वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल किया गया और अन्य दोस्तों को भी लाने के लिए दबाव बनाया गया।'

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीड़िता ने 9 और ऐसी ही लड़कियों के नाम बताए हैं, जो ऐसे ही हालात से गुजरी हैं। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि स्थानीय पुलिस डरी हुई है, क्योंकि वह AIMIM के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाए कि एक नाबालिग को नशेड़ियों के एक गिरोह ने अगवा कर लिया था। उन्होंने कहा कि जब वह घर लौटी और परिवार ने पुलिस में शिकायत की, तो मामले को बगैर उचित जांच के बंद कर दिया गया।

उन्होंने कहा, 'लड़की अब लत से जूझ रही है और उसका बर्ताव बदल गया है। सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य सबूत होते के बाद भी गैंग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।' खास बात है कि उन्होंने सीसीटीवी की तस्वीरें भी दिखाईं, जहां दो युवक एक लड़की का अपहरण करते नजर आ रहे हैं।
हिंदू स्क्वॉड बनाने की चेतावनी

संजय का कहना है कि ऐसे कथित अपराध की एक पीड़िता के पैरेंट्स ने आत्महत्या की कोशिश की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी से तत्काल कार्रवाई करने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि पुराने शहर में हिंदू प्रोटेक्शन स्क्वॉड तैयार किए जाएंगे।
पुलिस क्या बोली

इधर, चार मीनार पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा, 'एक जांच की गई थी और लड़की का पता लगा लिया गया था, लेकिन हमें यौन उत्पीड़न के कोई भी सबूत नहीं मिले। लड़की पहले भी दो बार गुमशुदा हो चुकी थी।' रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा, 'सबसे ताजा मामले में ही, एक लड़की का कहा है कि वह आरोपी के साथ मर्जी से गई थी। वह नाबालिग है और ऐसे में आरोपी के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज किया गया है।'

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Mon, 10 Nov 2025 16:56:51 +0530 news desk MPcg
AAP का आरोप: भाजपा ने ट्रेन टिकट देकर वोटर्स को भेजा बिहार, बढ़ी बंपर वोटिंग https://citytoday.co.in/4227 https://citytoday.co.in/4227 पटना 

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्डतोड़ वोटिंग को राजनीतिक दल अलग-अलग चश्मे से देख रहे हैं। कोई इसे सरकार के पक्ष में जनता का समर्थन बता रहा है तो किसी को बदलाव की बयार दिख रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने इसमें एक नया एंगल जोड़ दिया है। पार्टी ने इसे 'वोट चोरी' का दूसरा हिस्सा बताते हुए कहा है कि भाजपा ने अपने वोटर्स को टिकट देकर दूसरे शहरों से बिहार भेजा, इसी वजह से 75 साल में सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक यूट्यूब वीडियो के सहारे दावा किया कि लाखों वोटर्स को भाजपा ने अलग-अलग शहरों से बिहार भेजा था। उन्होंने जिस वीडियो को शेयर किया है उसमें कुछ लोग गले में भाजपा का पटका लटकाए दिख रहे हैं। वह कहते हैं कि वोट देने के लिए बिहार जा रहे हैं और टिकट की व्यवस्था भाजपा की ओर से की गई है। बताया गया कि हरियाणा के करनाल से भाजपा ने वोटर्स को बिहार भेजा था।

भारद्वाज ने वीडियो के साथ लिखा, 'भाजपा के करनाल के जिला अध्यक्ष स्टेशन पर मौजूद हैं। भाजपा ने संगठित तरीके से वोटरों को चिन्हित किया। SIR में भाजपा के द्वारा चिन्हित वोटरों की वोट नहीं काटी गई। फिर लाखों तादाद में वोटरों को अलग अलग शहरों से चुनाव से पहले बिहार भेजा गया। ट्रेन की टिकट आदि सारे इंतजाम भाजपा ने किए। इस तरीके से बिहार की वोटिंग 75 साल के सबसे ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची।'

बिहार में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान

बिहार विधानसभा के लिए पहले चरण के मतदान में गुरुवार को 3.75 करोड़ से अधिक मतदाताओं में से 64.66 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जो राज्य में 'अब तक का सबसे ज्यादा' मतदान प्रतिशत है। इसमें अभी और इजाफे की संभावना है। पहले चरण में 18 जिलों के कुल 121 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ, जहां मतदाताओं की कुल संख्या 3.75 करोड़ से अधिक थी। बिहार में इससे पहले सबसे ज्यादा 62.57 प्रतिशत मतदान 2000 में दर्ज किया गया था। कोविड-19 महामारी के साये में हुए 2020 के विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत 57.29 रहा था।

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Fri, 07 Nov 2025 15:42:21 +0530 news desk MPcg
बिहार में अशांत राज का दौर खत्म: शहाबुद्दीन जैसे बाहुबली अब नहीं उभरेंगे – अमित शाह https://citytoday.co.in/4224 https://citytoday.co.in/4224 मोतिहारी 
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह गुरुवार को मोतिहारी जिले में एक चुनावी सभा को संबोधित किया। अमित शाह ने अपने संबोधन में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि जंगलराज में अपहरण, खून, डकैती-फिरौती करने वाले कभी बिहार का भला नहीं कर सकते हैं। पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि बिहार में जंगलराज को रोकने का काम पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार की जोड़ी कर सकती है। राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि अभी दो माह पहले राहुल गांधी ने यात्रा निकाली। यह यात्रा किसानों, युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि घुसपैठियों को बचाने के लिए निकाली गई थी। मैं राहुल गांधी को बताना चाहता हूं कि वे घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं, लेकिन हमारी सरकार ने प्रण लिया है कि देश और बिहार से एक-एक घुसपैठियों को बाहर निकाला जाएगा।
राजद पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि राजद के लोग बिहार में आज भी शहाबुद्दीन का जमाना फिर से लाना चाहते हैं। लालू यादव के बेटे ने नारा लगाया, 'शहाबुद्दीन अमर रहे', उनके बेटे को टिकट दी, लेकिन मैं आज बता कर जाता हूं कि लालू यादव आपकी तीन पीढ़ी भी आ जाए तब भी बिहार में शहाबुद्दीन जैसे बाहुबली पैदा नहीं हो सकते। अमित शाह ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी लालू यादव के कंधों पर सवार होकर बिहार की सत्ता में वापसी करना चाहती है। लेकिन मैं राहुल गांधी को बता देना चाहता हूं कि जिनके कंधों पर आप सवार हैं, वो तो हारेंगे ही, आप भी हारने वाले हैं।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि अभी-अभी पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार ने 1 करोड़ 41 लाख जीविका दीदियों के बैंक खातों में 10 हजार रुपए डालने का काम किया है। विपक्ष के लोग भ्रम फैला रहे हैं कि हम जीविका दीदियों से ये 10 हजार रुपए वापस ले लेंगे। मैं आज मोतिहारी की जीविका दीदियों से कहकर जाता हूं कि लालू यादव की चार-चार पीढ़ी भी आ जाए, लेकिन आप ये 10 हजार रुपए वापस नहीं ले सकते।
पीएम मोदी का जिक्र करते हुए उन्होंने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 10 साल तक मनमोहन सिंह का शासन रहा, लेकिन वे बिहार में सिर्फ 5 ही बार आए, जबकि पीएम मोदी अपने 10 साल के शासन में बिहार में 55 बार आए हैं। 10 साल में मनमोहन-सोनिया सरकार ने बिहार के लिए सिर्फ 2 लाख, 80 हजार करोड़ रुपए भेजे, जबकि पीएम मोदी ने 10 साल में 18 लाख, 70 हजार करोड़ रुपए भेजने का काम किया है। बिहार में अगली सरकार एनडीए की बनेगी और विकास के पथ पर बिहार आगे बढ़ेगा।

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Fri, 07 Nov 2025 13:58:01 +0530 news desk MPcg
पचमढ़ी में कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर: 71 जिला अध्यक्ष सीखेंगे चुनावी रणनीति https://citytoday.co.in/4187 https://citytoday.co.in/4187 पचमढ़ी में कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर: 71 जिला अध्यक्ष सीखेंगे चुनावी रणनीति

हसीन वादियों में चुनावी गुर सीखेंगे कांग्रेसी, जल्द मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी भी होंगे शामिल

पचमढ़ी में कांग्रेस का क्लासरूम: नेताओं ने उठाए अहम मुद्दे, तैयारी जीत की रणनीति की

पचमढ़ी
मध्य प्रदेश कांग्रेस का 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर रविवार से शुरू हो गया है. पहले दिन प्रदेश के 71 जिला अध्यक्ष इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए. जहां सभी जिला अध्यक्षों को दलित पीड़ितों और शोषितों को लेकर आगे चलने का प्रशिक्षण दिया गया. जिससे कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी पीड़ित शोषित और दलितों के मुद्दे लेकर आगामी विधानसभा चुनाव में उतरने वाली है. यही कारण है कि पहले दिन सत्र में सभी को समाज के शोषित वर्गों को साथ लेकर चलने वाली का प्रशिक्षण दिया गया.

एमपी विधानसभा चुनाव की तैयारी

इस प्रशिक्षण शिविर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल होने वाले है. हालांकि प्रशिक्षण सेवा में उनके आने की अभी तिथि निर्धारित नहीं की गई है. इस 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता संगठन मजबूत करने के तरीके सिखाए जाएंगे. शिविर में उमंग सिंघार जीतू पटवारी सहित कांग्रेस के बड़े नेता शामिल हुए. कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर सभी जिला अध्यक्षों को यह प्रशिक्षण दे रही है. जिसके माध्यम से जिला अध्यक्षों को उनका पावर बताया जाएगा.

इसी को लेकर यहां वरिष्ठ नेता प्रशिक्षण देने आ रहे हैं. 10 दिनों में हर दिन कोई न कोई वरिष्ठ कांग्रेस नेता पचमढ़ी में प्रशिक्षण देने पहुंचेंगे. इस दौरान सभी जिला अध्यक्षों को 10 दिन एक ही स्थान पर रहना होगा. इसके लिए कांग्रेस संगठन द्वारा एक साथ रहने के लिए नियम तरीका भी बताएगा.

कांग्रेस शिविर में कई मुद्दों पर चर्चा

कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता आनंद जाट ने बताया कि "पचमढ़ी में कांग्रेस के महामंथन शिविर में SIR सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी. नए नियुक्त जिलाध्यक्षों को पार्टी की रीति-नीति, विचारधारा और संगठनात्मक ढांचे की ट्रेनिंग दी जाएगी. संगठन सृजन अभियान के बाद यह प्रशिक्षण जिला स्तर पर पार्टी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम होगा. शराब और नशे से युवा पीढ़ी को बचाना हमारी प्राथमिकता है.

उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार शराब से 17 हजार करोड़ का राजस्व लक्ष्य रखकर युवाओं को बर्बाद कर रही है. कानून-व्यवस्था शून्य है. बीजेपी के सांसद और विधायक जनता से दुर्व्यवहार कर रहे हैं. सतना में बीजेपी सांसद गणेश सिंह ने आम जनता को थप्पड़ मार दिया. यही उनकी संस्कृति है. उन्होंने आगे कहा, बीजेपी की सरकार 50% कमीशन की सरकार है. घर-घर शराब पहुंचाने का काम हो रहा है. किसानों को यातनाएं दी जा रही है. ओबीसी आरक्षण रोका गया है. 27 विभागों के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा, वहीं मुख्यमंत्री 200 करोड़ का हवाई जहाज खरीद रहे हैं और रोज 25 लाख रुपए उस पर खर्च कर रहे हैं."

विचारों का आदान-प्रदान होगा

कांग्रेस के संगठन सर्जन प्रशिक्षण कार्यक्रम में आए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बताया कि "पहला दिन सभी जिला अध्यक्षों से मेल मुलाकात का रहा. इस दौरान विचारों का आदान-प्रदान हुआ और 10 दिनों तक सभी के विचारों का आदान-प्रदान होगा. उमंग सिंघार ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यशाला से कांग्रेस को आगे बढ़ने का कार्य होगा."

 

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Tue, 04 Nov 2025 15:27:08 +0530 news desk MPcg
अलीनगर का जातीय संग्राम: वोटों के नए समीकरण ने बढ़ाई सियासी गर्मी https://citytoday.co.in/4153 https://citytoday.co.in/4153 दरभंगा
विधानसभा चुनाव में अपनी सफलता के लिए सभी राजनीतिक दल जातीय समीकरण दुरुस्त करने में जुट गए हैं। सभी दल विभिन्न जातियों पर पकड़ रखने वाले नेताओं को अपनी ओर खींचने में लगे हैं। पार्टियां चुनाव प्रचार के बहाने जाति बहुल विधानसभा में संबंधित जातियों के स्टार प्रचारकों को भेज रहे हैं, ताकि उनके प्रभाव वाली जाति को अपने पक्ष में लाकर अपने दल के प्रत्याशी को विजयी माला पहनाई जा सके।

इसके लिए अलग-अलग जाति को साधने की भरपूर कोशिश की जा रही है। सभी तिकड़म लगाए जा रहे हैं। हालांकि, जातीय समीकरण के अनुसार ही क्षेत्र में प्रत्याशियों को भी उतारा गया है। इसके बावजूद संतोष नहीं है कि वह अपनी जाति के मतदाताओं को साध सकें। मिथिला में चुनाव पहले से ही जातीय आधार पर लड़े जाते रहे हैं। इसी कारण क्षेत्र विशेष में विभिन्न राजनीतिक दल प्रत्याशियों का चयन करते समय क्षेत्र विशेष में जाति विशेष की बहुलता पर विशेष ध्यान देते रहे हैं। दरभंगा के बेनीपुर विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की आबादी बहुतायत में है, इसलिए 2015 में भाजपा से गोपालजी ठाकुर और जदयू से सुनील कुमार चौधरी को मैदान में उतारा गया था।

वर्ष 2020 में जदयू के विनय कुमार चौधरी कांग्रेस के मिथिलेश कुमार चौधरी पर भारी पड़े थे। इस बार भी यही दोनों प्रतिद्वंद्वी मैदान में हैं। रोचक तथ्य तो यह है कि दोनों मजबूत ब्राह्मण उम्मीदवारों के बीच त्रिकोण बनाने वाले निर्दलीय प्रत्याशी अवधेश कुमार झा भी इसी समुदाय से आते हैं। महागठबंधन और राजग दोनों ने इस क्षेत्र में अपने-अपने प्रत्याशियों के प्रचार के लिए जिन स्टार प्रचारकों को भेजा है, उनमें भी अधिकांश उसी समुदाय के हैं।

पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र अलीनगर में ब्राह्मण समुदाय के मतदाताओं की प्रभावी संख्या है। इसको देखते हुए राजग ने मैथिली ठाकुर, महागठबंधन ने विनोद मिश्र और जन सुराज ने विप्लव झा को प्रत्याशी बनाया है। अब प्रत्याशी का समुदाय किसके साथ जाएगा। इस गुत्थी को सुलझाने के लिए क्षेत्र में उसी समुदाय के स्टार प्रचारक की फौज भी उतारी जा रही है। वह अपने प्रत्याशी के पक्ष में अपनी जाति के कितने मतदाताओं को गोलबंद करेंगे, या मतदाता उनकी बात का कितना असर लेते हैं। यह तो चुनाव के बाद पता चलेगा, लेकिन जातीय गणित सुलझाने की गुत्थी में कोई भी गठबंधन या दल किसी से पीछे नहीं है।

ऐसा ही जातीय गणित का खेल जाले विधानसभा क्षेत्र में भी देखा जा रहा है कि जहां एनडीए ने अपने काबीना मंत्री जीवेश कुमार को तीसरी बार मैदान में उतारा है, जबकि महागठबंधन ने राजद से कांग्रेस में लाकर पूर्व विधायक ऋषि मिश्रा को मैदान में उतार दिया है, जबकि वर्ष 2005 और 2010 के विधानसभा चुनाव में हालांकि जाति-कार्ड के बजाय विकास को मुख्य मुद्दा बनते देखा गया था।

मिथिला के लोग जातीय भावना से अब ऊपर उठ गए हैं, लेकिन वर्ष 2025 आते-आते सभी दलों का जोर फिर जातीय समीकरण बिठाने पर हैं। जिले के 10 विधानसभा सीटों पर पिछले विधानसभा में नौ पर एनडीए ने कब्जा जमाया था। लेकिन इस बार जातीय समीकरण के चक्र के सामने बड़े-बड़े प्रत्याशी धूल फांकते नजर आ रहे हैं।

 

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Sat, 01 Nov 2025 19:05:28 +0530 news desk MPcg
BJP की जिला कार्यकारिणी घोषित, सिंधिया समर्थकों का दबदबा, बागियों को बाहर का रास्ता https://citytoday.co.in/4135 https://citytoday.co.in/4135

गुना

नौ महीने से बहुप्रतीक्षित गुना भाजपा की जिला कार्यकारिणी में महामंत्री पद पाने की दौड़ में लगी जोड़-तोड़ की राजनीति को उस समय विराम लग गया जब गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिकरवार ने अपने नौ महीने के कार्यकाल के बाद अपनी जिला कार्यकारिणी घोषित कर दी। इस 22 सदस्यीय कार्यकारिणी में 9 केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों को महत्वपूर्ण पद मिले है।

विधायक के एक समर्थक को मिली जगह, बागी बाहर

विधायक पन्नालाल शाक्य के एक मात्र समर्थक संतोष धाकड़ को महामंत्री पद से नवाजा गया है। वहीं सिंधिया समर्थक के रूप में पूर्व पार्षद रविन्द्र रघुवंशी और चन्द्रप्रकाश अहिरवार को महामंत्री बनाया गया है। इस कार्यकारिणी में आपस में लड़ने वाले भाजपा के उपाध्यक्ष आरएन यादव और हीरेन्द्र सिंह चौहान बंटी बना को बाहर का रास्ता दिखाया है।

इस समाज ने किया कार्यकारिणी का विरोध

इस कार्यकारिणी के बनते ही विरोध के स्वर शुरू हो गए हैं। गुर्जर समाज के सीताराम गुर्जर ने कहा कि इस कार्यकारिणी में गुर्जर समाज को स्थान नहीं देकर हमारे समाज के साथ धोखा किया है। जबकि यह समाज जिले में बहुतायत संख्या में है। भाजपा की जिला कार्यकारिणी को घोषित न किए जाने को लेकर पत्रिका ने 25 अक्टूबर के अंक में खबर प्रकाशित की थी। 

जिला कार्यकारिणी में इन नेताओं मिले ये पद

    जिला उपाध्यक्षः गिर्राज भार्गव,प्रबल प्रताप सिंह, महेन्द्र किरार, शिवपाल परमार, सुशील दहीफले, जगदीश मीना रिटायर्ड आरटीओ, गायत्री भील. गोमती ओझा
    जिला महामंत्रीः संतोष धाकड़, रविन्द्र रघुवंशी, चन्द्रप्रकाश अहिरवार
    जिला मंत्रीः
 कुसुमलता कुशवाह, रुद्र देव सिंह, श्रीकृष्ण भोला सोनी, अनिल जैन रुपश्री, सुनीता बंजारा, वीर बहादुर यादव, उमा लोधी, आशा शर्मा
    कोषाध्यक्ष- मोहित नामदेव
    सह कोषाध्यक्ष- राजेश साहू
    कार्यालय मंत्री- सुरेन्द्र जीत सिंह
    सह कार्यालय मंत्री बृज नारायण शर्मा
    सह कार्यालय मंत्री- शंभू सेन
    मीडिया प्रभारी अंकुर श्रीवास्तव
    सह मीडिया प्रभारी-ओमप्रकाश राठौर

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Fri, 31 Oct 2025 17:35:27 +0530 news desk MPcg
26 सेकेंड में जारी हुआ NDA का घोषणापत्र, कांग्रेस बोली& झूठ का पुलिंदा! https://citytoday.co.in/4133 https://citytoday.co.in/4133 पटना 
बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एनडीए के ‘संकल्प पत्र 2025’ पर विपक्ष ने जबरदस्त हमला बोला है। कांग्रेस के वरीय पर्यवेक्षक अशोक गहलोत ने इसे झूठ का पुलिंदा करार दिया। उन्होंने कहा, “सिर्फ 26 सेकेंड में घोषणापत्र जारी किया गया और फिर मीडिया के सवालों से बचकर भाग खड़े हुए। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।” पटना के होटल मौर्या में आयोजित प्रेस वार्ता में गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा, “बीस साल से सरकार में रहकर एनडीए ने क्या काम किए, कौन-से वादे पूरे हुए, इसका जवाब क्यों नहीं दे रहे? और इस मौके पर नीतीश कुमार कहां थे? क्या वे बीमार हैं, या फिर उन्हें खुद अपने वादों पर भरोसा नहीं रहा?”

गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से भागने का लगाया आरोप
उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो वादे कर रही है, उसे निभाने का साहस रखती है। गहलोत ने कहा, “हम हर वादा कैबिनेट से पास कराकर पूरा करेंगे। जनता अब जुमले नहीं, जवाब चाहती है।”

मोकामा कांड की जांच हो: अनुपम
कांग्रेस नेता अनुपम ने मोकामा में हुई हत्या की घटना पर कहा कि “एनडीए प्रत्याशी के काफिले में हथियार कहां से आया? इसकी न्यायिक जांच जरूरी है।”
आरजेडी बोली- एनडीए का घोषणापत्र एक थका हुआ भाषण है

कांग्रेस की बातों का समर्थन देते हुए आरजेडी प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि एनडीए का घोषणापत्र एक थका हुआ भाषण है जिसमें न योजना है, न नीयत। उन्होंने कहा, “महागठबंधन के काम को कॉपी करके अपने नाम पर बेचने की कोशिश की जा रही है। मगर जनता अब समझ चुकी है कि असली मुद्दा रोजगार, शिक्षा और उद्योग का है, और उस पर एनडीए के पास कोई जवाब नहीं।” गगन ने तंज करते हुए कहा, “नीतीश कुमार अब एनडीए में मुख्यमंत्री कम, मेहमान ज्यादा लग रहे हैं। बीजेपी ने उन्हें किनारे कर दिया है, और जनता इसे साफ देख रही है।”

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Fri, 31 Oct 2025 17:31:22 +0530 news desk MPcg
मोदी का पलटवार: राहुल और तेजस्वी पर साधा निशाना, बोले& ‘सबसे भ्रष्ट परिवार के दो युवराज मुझे गालियां दे रहे’ https://citytoday.co.in/4116 https://citytoday.co.in/4116 मुजफ्फरपुर
मिशन बिहार पर मुजफ्फरपुर पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने मोतीपुर चीनी मिल मैदान की रैली से राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर बड़ा हमला किया। उन्होंने कहा कि एक देश के सबसे भ्रष्ट परिवार के युवराज हैं तो दूसरे बिहार से सबसे करप्ट परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इन दोनों युवकों ने मिलकर आजकल झूठे वायदों की दुकान खोल दी है। दोनों भर-भर कर मुझे गालियां दे रहे हैं। लेकिन बिहार के लोग इनके झांसे में नहीं आएंगे। बिहार विकास की रफ्तार पकड़ चुका है।

पीएम ने कहा कि दोनों युवराज हजारों करोड़ के घोटालों के मामले में जमानत पर हैं और जो जमानत पर होते हैं उनका सम्मान नहीं होता। चर्चा में बने रहने के लिए ये नामदार लोग कामदार को गालियां देते रहते हैं। इसके बगैर इनका खाना हजम नहीं होता। पिछड़ों, दलितों को गाली देना ये अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। एक चाय बेचने वाला पिछड़े गरीब घर का व्यक्ति यहां तक पहुंच गया, यह बर्दाश्त इन्हें नहीं होता।

मोदी ने कहा कि आरजेडी और कांग्रेस का रिश्ता तेल और पानी की तरह है। कभी इनमें मेल नहीं हो सकता। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता आपस में एक दूसरे को नीचा दिखाने का खेल कर रहे हैं। बाहर से एक दिखते हैं पर अंदर से अलग-अलग हैं। इनका मकसद सिर्फ सत्ता पर कब्जा करना है। बस इसी लालच में एक साथ हैं ताकि फिर से बिहार को लूट सकें। पीएम मोदी ने लालू यादव पर भी निशाना साधा। कहा कि जिन बाबा साहेब आंबेडकर को पूरा देश पूजता है उन्हें ये पैर के पास रखते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजद और कांग्रेस की अब तक की सबसे बड़ी हार होने जा रही है वहीं एनडीए की सबसे बड़ी जीत होने जा रही है। बिहार चुनाव में राजद और कांग्रेस को अब तक की सबसे कम सीट देकर बिहार के मतदाता इतिहास बनाएंगे। इससे ये दोनों दल घबरा गए हैं और अपनी घोषणा पत्र में इतना झूठ डाल रहे हैं कि इनके समर्थकों को भी विश्वास नहीं हो रहा है। सोशल मीडिया पर बिहार के युवा इनका मजाक उड़ा रहे हैं। आने वाले छह नवम्बर को वोटिंग के दिन ही मतदाता इन्हें इनका असली स्थान दिखा देंगे।

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Thu, 30 Oct 2025 17:02:10 +0530 news desk MPcg
खड़गे का दावा: केरल में 2026 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस होगी शत&प्रतिशत विजेता https://citytoday.co.in/4100 https://citytoday.co.in/4100

नई दिल्ली
 कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आगामी केरल विधानसभा चुनावों की रणनीति पर चर्चा करने के लिए राज्य के पार्टी नेताओं के साथ नई दिल्ली के इंदिरा भवन में बैठक के बाद आगामी केरल विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत पर विश्वास व्यक्त किया.

कांग्रेस पार्टी ने राज्य के पार्टी नेताओं के साथ लगभग छह घंटे लंबी बैठक की. इसमें पार्टी को मजबूत करने और आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों पर चर्चा हुई. बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव दीपा दासमुनि, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पार्टी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल, सांसद शशि थरूर, सांसद प्रियंका गांधी और अन्य कई नेता मौजूद थे.

खड़गे ने  पार्टी मुख्यालय के बाहर पत्रकारों से कहा, 'हम 100 फीसदी जीतेंगे. खड़गे ने पार्टी की राज्य इकाई में गुटबाजी की किसी भी अफवाह को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी नेता और पूर्व केपीसीसी प्रमुख के सुधाकरन के साथ चुनावों की रणनीतियों पर चर्चा की है. खड़गे ने आगे कहा, 'उन्होंने आपको (कथित गुटबाजी के बारे में) बताया होगा, लेकिन उन्होंने हमारी बैठक में कुछ ऐसा बताया है जिसका मैं खुलासा नहीं करना चाहता.'

पार्टी नेता के. सुधाकरन भी इंदिरा भवन में हुई बैठक में शामिल हुए थे और उन्होंने बताया कि नेताओं ने अपनी राय साझा की और आगामी चुनावों पर चर्चा की. केपीसीसी के पूर्व प्रमुख के. सुधाकरन ने यहाँ संवाददाताओं से कहा, 'हमने वर्तमान राजनीति, आगामी चुनावों और पार्टी को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की. हमने अपनी राय साझा की और अब पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस पर चर्चा करके निर्णय लेगा. उसके अनुसार हम चुनावों का सामना करेंगे.'

गहन चर्चा के तुरंत बाद पार्टी नेता दीपा दासमुंशी ने भी कांग्रेस की केरल इकाई में गुटबाजी की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य में आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी एकजुट है. मंगलवार को बैठक के बाद राष्ट्रीय राजधानी में पत्रकारों से बात करते हुए दासमुंशी ने कहा कि इस तरह के आरोप राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा कृत्रिम रूप से गढ़े जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, 'केरल में कांग्रेस पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है. यह एलडीएफ के लोगों और भाजपा द्वारा मानव निर्मित है. मैं गर्व से कह सकती हूं कि कोई गुटबाजी नहीं है और यहां सभी लोग एकजुट होकर कांग्रेस पार्टी के लिए खड़े हैं.' उन्होंने कहा कि केरल से संबंधित कई राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई.

इसमें सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और भाजपा के खिलाफ विपक्ष की रणनीति भी शामिल है. उन्होंने कहा, 'आगामी चुनावों – स्थानीय निकाय चुनाव और केरल विधानसभा चुनाव – के लिए केरल में कई मुद्दे हैं. इनमें एलडीएफ और भाजपा के खिलाफ राजनीतिक मुद्दे भी शामिल हैं. कई बिंदुओं पर ध्यान देने और चर्चा करने की आवश्यकता है. यह एक बहुत ही गंभीर बैठक थी.' केरल विधानसभा चुनाव 2026 में होने हैं, जबकि केरल में स्थानीय निकाय चुनावों की तारीखों की घोषणा अभी नहीं की गई है.

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Wed, 29 Oct 2025 17:28:26 +0530 news desk MPcg
तेजस्वी के वादों पर प्रशांत किशोर का तगड़ा हमला, शेर कंगन और लालू&राबड़ी भी निशाने पर https://citytoday.co.in/4061 https://citytoday.co.in/4061 सीतामढ़ी 
नेता प्रतिपक्ष और बिहार महागठबंधन के सीएम फेस तेजस्वी यादव ने रविवार को चुनावी वायदों का दूसरा पिटारा खोला। कहा कि महागठबंधन की सरकार बनी तो पंचायती राज के पूर्व जन प्रतिनिधियों को पेंशन दिया जाएगा और उनका भत्ता दोगुना कर दिया जाएगा। कुम्हार, नाई, लोहार, बढ़ई जैसे कारीगरों को पांच साल के लिए ब्याज रहित पांच लाख का लोन दिया जाएगा। राजद के चुनाव वायदों पर प्रशांत किशोर ने तंज कसा है। कहा है कि लोगों को फंसाने के लिए शेर कंगन का लालच दे रहा है।

सीतामढ़ी के परिहार में जन सुराज प्रत्याशी अवधेश कुशवाहा का चुनाव प्रचार करने पहुंचे प्रशांत किशोर ने कहा कि 18 सालों तक सत्ता में रहकर तेजस्वी यादव के माता पिता ने बिहार को बर्बाद कर दिया। तेजस्वी यादव अगर आ गए तो बिहार का भला नहीं होने वाला है। ये लोग फिर से लूटपाट, अपहरण, रंगदारी का राज लाएंगे। वे कह रहे हैं कि सब घर में नौकरी दे देंगे। महिला सब को ढाई हजार देंगे। मानदेय बढ़ा देंगे। लेकिन शेर बुढ़ा भी हो जाएगा तो मांस ही खाएगा। उनका वादा शेर के कंगन वाला लालच जैसा है जो फंसाता था और मारकर खा जाता था।

पीके ने कहा कि तेजस्वी यादव अगर नायक हैं तो खलनायक कौन है। अपने बारे में जो चाहे बोल लें। मुंह से ही कहना है तो कुछ भी कह सकते हैं। अब हम लोगों को यह सुनना बाकी रह गया है कि वे पूरे बिहार को सोने की लंका बना देंगे।

प्रशांत किशोर ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर भी हमला बोला। कहा कि नीतीश कुमार को बीजेपी अगला मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी। अगर ऐसी बात है तो मोदी और शाह खुद से कह दें कि 2025 चुनाव में एनडीए की जीत होने पर नीतीश कुमार ही सीएम बनेंगे। सिर्फ कहते हैं कि नीतीश जी के नेतृत्व में एनडीए चुनाव लड़ रही है।

 

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Mon, 27 Oct 2025 17:32:06 +0530 news desk MPcg
मध्य प्रदेश बीजेपी की नई टीम में हेमंत खंडेलवाल का दबदबा, मोहन यादव, शिवराज और सिंधिया से भी आगे https://citytoday.co.in/4046 https://citytoday.co.in/4046 भोपाल
 प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अपनी नई टीम बना ली है। वह अन्य प्रदेश अध्यक्षों से अपनी टीम बनाने में काफी आगे रहे हैं। अध्यक्ष बनने के साढ़े तीन महीने बाद ही उन्होंने अपनी नई टीम बना ली है। नई टीम में प्रदेश के बड़े नेताओं की छाप दिखी है। हर खेमे के लोगों को समयोजित किया गया है।

सबसे अधिक हितानंद शर्मा के लोग
हेमंत खंडेलवाल की नई टीम में सबसे अधिक दबदबा प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा का रहा है। उनके पांच करीबियों को जगह मिली है। इसमें कांतदेव सिंह, शैलेंद्र बरूआ, सुरेंद्र शर्मा, गौरव रणदिवे और लोकेंद्र पराशर हैं। इसके बाद सीएम मोहन यादव के चार करीबी लोगों को जगह मिली है। इसमें लता वानखेड़े, प्रभुलाल जाटव, राहुल कोठारी और आशीष अग्रवाल हैं। शिवराज सिंह चौहान के राजेंद्र सिंह और बबीता परमार को जगह मिली है। नरेंद्र सिंह तोमर के दो रणवीर सिंह रावत और अर्चना सिंह हैं। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के भी दो लोगों को जगह मिली है। इनमें प्रभुराम चौधरी और अर्चना सिंह शामिल हैं।

संघ और संगठन से जुड़े लोगों को भी मिली तरजीह
इसके साथ ही नई टीम में संघ और संगठन से जुड़े लोगों को भी तरजीह मिली है। सुमेर सिंह सोलंकी, रजनीश अग्रवाल, निशांत खरे, मनीषा सिंह, नंदिता पाठक, जयदीप पटेल, संगीता सोनी, राजो मालवीय, अखिलेश जैन और श्याम महाजन हैं।

इनको रखा गया है होल्ड पर
वहीं, कुछ पदों पर अभी नियुक्ति नहीं हुई है। इसमें महिला, युवा और अल्पसंख्यक मोर्चा है। अभी इन पदों पर अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हुई है। वहीं, वीडी शर्मा के कार्यकाल में सर्वाधिक सक्रिय रहे महामंत्री और कार्यालय प्रभारी भगवान दास सबनानी को नई टीम में जगह नहीं मिली है। वनवास झेल रहे राजेंद्र सिंह की वापसी हुई है।

अभी है छोटी टीम
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल काफी सुलझे हुए हैं। उन्होंने अपनी टीम भी छोटी बनाई है। सभी कैटगरी में एक-एक पद खाली रखे गए हैं। आने वाले दिनों इन पदों पर नियुक्ति होगी। सभी बड़े नेताओं ने नई टीम को शुभकामनाएं दी हैं।

जानिए किस पद पर कौन सा चेहरा, सिंधिया गुट से बस एक

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साढे़ 3 महीने बाद आखिरकार अपनी टीम का एलान कर दिया है. खंडेलवाल की टीम में 9 उपाध्यक्ष 3 महामंत्री और 9 मंत्री बनाए गए हैं. इसके साथ ही किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति, अनसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग इन चार मोर्चे के अध्यक्षों के भी नाम घोषित कर दिए गए हैं. खंडेलवाल की मोर्चे समेत घोषित हुई टीम 29 में वीडी शर्मा की टीम के कई भरोसेमंद चेहरों को भी जगह मिली है.

खंडेलवाल की टीम 29 में किन्हें मिली जगह

हेमंत खंडेलवाल ने पूरे साढे़ तीन महीने के इंतजार के बाद अपनी टीम का एलान किया, लेकिन जिस तरह की अटकलें थी कि उनकी कार्यकारिणी में पूरे चेहरे बदल जाएंगे. वो तस्वीर दिखाई नहीं दी. खंडेलवाल ने जो 29 सदस्यीय टीम घोषित की है. उसमें उपाध्यक्ष पद पर 9 नाम हैं. जबकि 4 महामंत्री और 9 मंत्री घोषित किए गए हैं. इसके अलावा कोषाध्यक्ष कार्यालय मंत्री और मीडिया प्रभारी का पद है. उपाध्यक्ष पद पर रणवीर सिंह रावत, कांतदेव सिंह, प्रभुराम चौधरी, शैलेन्द्र बरुआ, मनीषा सिंह, डॉ नन्दिता पाठक, सुरेन्द्र शर्मा, निशांत खरे, प्रभुलाल जाटव के नाम है.

जबकि महामंत्री के पद पर सांसद लता वानखेड़े, राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी, राहुल कोठारी, गौरव रणदिवे का नाम है. टीम में 9 मंत्री बनाए गए हैं. जिनमें रजनीश अग्रवाल, लोकेन्द्र पाराशर, जयदीप पटेल, क्षितिज भट्ट, संगीता सोनी, राजेन्द्र सिंह, अर्चना सिंह, राजो मालवीय और बबीता परमार हैं. कोषाध्यक्ष के पद पर अखिलेश जैन, कार्यालय मंत्री श्याम महाजन और मीडिया प्रभारी के पद पर आशीष उषा अग्रवाल हैं.

टीम खंडेलवाल में वीडी के भरोसेमंदों को भी जगह

टीम खंडेलवाल में पूर्व प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा के भरोसेमंद चेहरों को भी जगह मिली है. इनमें कई वो चेहरे हैं, जो वीडी शर्मा की टीम में बने हुए थे. जिनमें प्रमुख रुप से लता वानखेड़े, संगीता सोनी, रजनीश अग्रवाल, लोकेन्द्र पाराशर, राहुल कोठारी और मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल प्रमुख नाम है.

7 महिलाएं भी, सिंधिया खेमे से केवल एक

खंडेलवाल ने अपनी 29 सदस्यीय टीम में सात महिलाओं को भी जगह दी है. उपाध्यक्ष पद पर मनीषा सिंह, डॉ नन्दिता पाठक, महामंत्री के पद पर लता वानखेड़े हैं. जबकि प्रदेश मंत्री के पद पर संगीता सोनी, अर्चना सिंह, राजो मालवीय और बबीता परमार को जगह मिली है. सिंधिया खेमे से इस सूची में केवल एक प्रभुराम चौधरी का नाम है.

कार्यकारिणी के साथ चार मोर्चे भी घोषित

कार्यकारिणी के साथ प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने चार मोर्चे के अध्यक्ष भी घोषित कर दिए हैं. किसान मोर्चे का अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा को बनाया गया है. जबकि एससी मोर्चे की जिममेदारी भगवान सिंह परमार के पास है. एसटी मोर्चे पर पंकज टेकाम हैं और पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष पवन पाटीदार हैं.

ऐसी है कार्यकारिणी पदाधिकारी– दायित्व

    रणवीर सिंह रावत– उपाध्यक्ष (पहले महामंत्री रहे)
    कांतदेव सिंह — उपाध्यक्ष (पहले उपाध्यक्ष रहे)
    प्रभुराम चौधरी– उपाध्यक्ष (सिंधिया समर्थक)
    शैलेंद्र बरूआ– उपाध्यक्ष (संभागीय संगठन मंत्री रहे)
    मनीषा सिंह — उपाध्यक्ष (पहले प्रदेश मंत्री रहीं)
    नंदिता पाठक– उपाध्यक्ष
    सुरेंद्र शर्मा– उपाध्यक्ष
    निशांत खरे– उपाध्यक्ष
    प्रभुलाल जाटव — उपाध्यक्ष
    लता वानखेड़े– महामंत्री (पहले प्रदेश मंत्री रहीं)
    सुमेर सिंह सोलंकी– महामंत्री (राज्यसभा सदस्य रहे)
    राहुल कोठारी– महामंत्री (पहले मंत्री रहे जैन, अल्पसंख्यक)
    गौरव रणदिवे– महामंत्री (इंदौर नगर अध्यक्ष रहे)
    रजनीश अग्रवाल — मंत्री (पहले मंत्री रहे)
    लोकेंद्र पाराशर– मंत्री (पहले मंत्री रहे)
    जयदीप पटेल– मंत्री (पहले मंत्री रहे)
    क्षितिज भट्ट– मंत्री (पहले मंत्री रहे)
    संगीता सोनी– मंत्री (पहले मंत्री रही)
    राजेंद्र सिंह — मंत्री अर्चना सिंह– मंत्री
    राजो मालवीय– मंत्री (पहले प्रदेश प्रवक्ता रहीं)
    बबीता परमार– मंत्री
    सीए अखिलेश जैन– कोषाध्यक्ष (पद पर यथावत)
    श्याम महाजन– कार्यालय मंत्री (प्रदेश उपाध्यक्ष थे)
    आशीष अग्रवाल– मीडिया प्रभारी (पद पर यथावत)
    जयपाल सिंह चावड़ा– किसान मोर्चा (संभागीय संगठन मंत्री रहे)
    भगवान सिंह परमार– एससी मोर्चा
    पंकज टेकाम – एसटी मोर्चा
    पवन पाटीदार– पिछड़ा वर्ग मोर्चा

 

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Fri, 24 Oct 2025 17:42:00 +0530 News desk Hindi
तेजस्वी को ‘फेस’ बनाओ, नीतीश को शिंदे मत बनाओः RJD का NDA पर पलटवार https://citytoday.co.in/4045 https://citytoday.co.in/4045

नई दिल्ली
कांग्रेस ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए तेजस्वी यादव को महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। इसके बाद से कांग्रेस और तमाम विपक्षी दल एनडीए से उनका चेहरा के बारे में पूछ रहे हैं। इस सबके बीच कांग्रेस नेता उदित राज ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तरह हाशिए पर करने की साजिश रच रही है।

उदित राज ने कहा, “जब बार-बार एनडीए से पूछा जा रहा था कि तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे या नहीं, तो हमने करके दिखा दिया। अब आप बताइए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाएंगे या नहीं? साफ कहिए कि उन्हें ‘एकनाथ शिंदे’ बना देंगे। बिहार के ‘एकनाथ शिंदे’ तो नीतीश कुमार हैं। उनके साथ धोखा हुआ है, साजिश की गई है।”

उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व को कमजोर करने की पूरी रणनीति बना ली है, जैसे महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे को उपमुख्यमंत्री पद पर सीमित कर दिया गया था। आपको बता दें कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) के गठबंधन महायूति ने निर्णायक जीत हासिल की थी। हालांकि, एकनाथ शिंदे, जो जून 2022 से मुख्यमंत्री थे, चुनाव के बाद उपमुख्यमंत्री पद पर आ गए, जबकि भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला। इसी घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उदित राज ने कहा कि भाजपा सत्ता में रहते हुए अपने सहयोगियों को कमजोर करती है और बिहार में भी वही दोहराया जा रहा है।

INDIA गठबंधन ने तेजस्वी यादव को बनाया सीएम फेस
दूसरी ओर, विपक्षी INDIA गठबंधन ने बिहार में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की घोषणा कर दी है। यह ऐलान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने गुरुवार को किया, जिन्होंने राज्य में सहयोगियों के बीच चल रही तनातनी को दूर करने के लिए पटना का दौरा किया था। अशोक गहलोत के ऐलान के बाद गठबंधन में शामिल कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के कुछ उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए, ताकि सीटों पर मित्रवत मुकाबले की स्थिति खत्म हो सके। तेजस्वी यादव ने इस मौके पर कहा, “हम उस अक्षम और भ्रष्ट डबल इंजन सरकार को हराएंगे, जिसका एक इंजन अपराध है और दूसरा भ्रष्टाचार।”

एनडीए का पलटवार
तेजस्वी के नामांकन से चिंतित एनडीए ने विपक्षी गठबंधन को भ्रष्टाचार और अवसरवाद की शर्मनाक साजिश बताया। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि तेजस्वी पंजीकृत अपराधी हैं। उनके पिता लालू प्रसाद यादव के दबाव में सीएम उम्मीदवार घोषित किया गया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि आरजेडी अपने सहयोगियों को भी प्रताड़ित कर रही है और यह गठबंधन बिहार को जंगलराज की ओर ले जाएगा।

 

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Fri, 24 Oct 2025 17:30:00 +0530 News desk Hindi
मिशन 2026: बंगाल फतह के लिए BJP का नया गेमप्लान, एक्सपर्ट टीम मैदान में उतरी https://citytoday.co.in/4036 https://citytoday.co.in/4036 कोलकाता
पिछली गलतियों से सबक लेते हुए भाजपा अगले साल बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार में इस बार मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत हमलों से परहेज करेगी। भाजपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश भाजपा नेताओं को इस संबंध में सावधान किया है। पार्टी के एक वर्ग के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस पर राजनीतिक हमला तेज करते हुए मुख्यमंत्री पर निजी जुबानी हमले नहीं दोहराए जाएंगे। मालूम हो कि 2021 के पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा नेताओं ने तृणमूल पर निशाना साधते हुए ममता पर निजी हमले किए थे।

भाजपा की रणनीति में बदलाव
तृणमूल ने इसे मुद्दा बना दिया। इसलिए भाजपा नेताओं को लगता है कि बंगाल की जनता ने ममता पर निजी हमलों को पसंद नहीं किया और पार्टी पिछले चुनाव में उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसलिए इस बार भाजपा सतर्क है। बताते चलें कि 2021 के चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी जनसभाओं में ममता को दीदी ओ दीदी…कहकर संबोधित किया था, जिसपर तृणमूल ने कड़ी आपत्ति जताई थी। तृणमूल ने इसे महिला मुख्यमंत्री का अपमान बताया था। तृणमूल ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था।

दूसरे राज्यों से पांच इंटरनेट मीडिया एक्सपर्ट बंगाल लाएगी भाजपा
दूसरी ओर, राज्य में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर डिजिटल प्लेटफार्म पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के अभियानों का जवाब देने के लिए भाजपा दूसरे राज्यों से पांच इंटरनेट मीडिया विशेषज्ञों को बंगाल लाने जा रही है। वे चुनाव तक यहां रहेंगे। इंटरनेट मीडिया पर सक्रियता बढ़ाने को लेकर बंगाल भाजपा के नेताओं ने कोलकाता में एक विशेष बैठक व कार्यशाला भी आयोजित की है। इसमें भाजपा के आइटी सेल के प्रमुख व बंगाल में पार्टी के सह-प्रभारी अमित मालवीय, प्रदेश भाजपा के संगठन महासचिव अमिताभ चक्रवर्ती, आइटी सेल के प्रदेश संयोजक सप्तर्षि चौधरी व अन्य मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, इस कार्यशाला में फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म का अधिक से अधिक इस्तेमाल, बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार करने आदि के तरीके पर चर्चा की गई।

मालूम हो कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी ने डिजिटल योद्धा नाम से इंटरनेट मीडिया पर एक नई लड़ाई (अभियान) की हाल में घोषणा की है। जिसके बाद भाजपा ने भी इसके जवाब में डिजिटल मोर्चे पर लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है।

 

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Thu, 23 Oct 2025 18:41:04 +0530 News desk Hindi
बिहार के बाद महाराष्ट्र में भी सियासी घमासान, कांग्रेस के फैसले से बढ़ी विपक्ष की मुश्किलें https://citytoday.co.in/4022 https://citytoday.co.in/4022

मुंबई
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के बीच सीटों का बंटवारा सही से नहीं हो सका है। करीब आधा दर्जन सीटें तो ऐसी ही हैं, जहां महागठबंधन के ही दल यानी आरजेडी, कांग्रेस, वामदल ही फ्रेंडली फाइट में उतरेंगे। वहीं पूरे देश में INDIA अलायंस नाम वाले इस गठबंधन में महाराष्ट्र में भी खटास पैदा होती दिख रही है। महाराष्ट्र में कांग्रेस का कहना है कि हम निकाय चुनाव में अकेले उतरना पसंद करेंगे। पार्टी का कहना है कि हम उस गठबंधन में चुनाव नहीं लड़ना चाहेंगे, जिसमें राज ठाकरे होंगे। सीनियर कांग्रेस लीडर और मुंबई के पूर्व अध्यक्ष भाई जगताप ने मंगलवार को यह बात कही।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज ठाकरे के साथ चुनाव में नहीं रहना चाहेगी और ना ही हम ऐसी स्थिति में उद्धव ठाकरे के साथ रहना चाहेंगे। हम अकेले लड़ना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के प्रभारी रमेश चेन्निथला के साथ नई गठित कमेटी ने मीटिंग की थी और तब यह मसला उठा था। फिलहाल इस बारे में कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया गया है। वहीं शिवसेना नेता आनंद दुबे ने भी भाई जगताप को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई फैसला तो राहुल गांधी या फिर मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे या फिर शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे लेंगे। भाई जगताप किस हैसियत से ऐसा बोल रहे हैं।

शिवसेना लीडर ने कहा कि हमें चुनौती मत दीजिए। हम शिवसेना हैं और पिछले चुनाव में हमने अकेले चुनाव लड़ा था और भाजपा को हराया था। हम अपने गठबंधन सहयोगियों का सम्मान करते हैं, लेकिन अकेले चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार हैं। कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की पार्टी 2019 से सहयोगी हैं। इस गठबंधन की नींव एनसीपी नेता शरद पवार की ओर से 2019 में तब रखी गई थी, जब भाजपा और शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर विवाद हुआ था। तब उद्धव ठाकरे को सीएम बनाते हुए गठबंधन किया गया था। हालांकि 2022 में तब चीजें पलट गईं, जब एकनाथ शिंदे ने पार्टी में ही फूट कर दी और 40 विधायक लेकर खुद ही भाजपा के सहयोग से सीएम बन गए।

हालांकि अब चीजें फिर से महाराष्ट्र में बदल रही हैं। उद्धव ठाकरे की अपने अपने बिछड़े चचेरे भाई के साथ फिर से नज़दीकी बढ़ती दिख रही है। तभी से सवाल उठ रहा है कि क्या वे गठबंधन का हिस्सा बनेंगे, जिसमें कांग्रेस और एनसीपी भी शामिल हैं। गौरतलब है कि बीएमसी को एशिया का सबसे अमीर नगर निकाय कहा जाता है। इसी को लेकर राज और उद्धव के बीच समझौते की चर्चाएं हैं। महा विकास अघाड़ी के दूसरे सहयोगी शरद पवार इस पर क्या प्रतिक्रिया देंगे, इसका फिलहाल इंतजार है। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के दबाव ने महागठबंधन के सहयोगियों को अलग कर दिया है। हालांकि कांग्रेस या लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल की ओर से ऐसा कोई कड़ा बयान नहीं आया है, लेकिन दोनों ही सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बना पाए हैं।

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Wed, 22 Oct 2025 17:03:01 +0530 News desk Hindi
बिहार में गरजेगी डबल इंजन की जोड़ी: 24 अक्टूबर को मोदी&शाह की अलग&अलग रैलियाँ https://citytoday.co.in/4021 https://citytoday.co.in/4021 पटना
बिहार चुनाव को लेकर एनडीए ने चुनावी अभियान का बिगुल फूंक दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अक्टूबर को समस्तीपुर और बेगूसराय में चुनावी रैली करेंगे, तो वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उसी दिन सीवान और बक्सर में चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे। 5 दिनों के अंतराल में एक बार फिर शाह बिहार के दौरे पर आ रहे हैं। अमित शाह की 24 अक्तूबर को बिहार में दो सभाएं होंगी। इससे पहले उन्होने छपरा के तरैया में चुनावी रैली की थी। इसी महीने 16 से 18 अक्टूबर तक शाह बिहार दौरे पर रहे थे।

वहीं बिहार चुनाव के ऐलान के बाद पहली बार पीएम मोदी 24 अक्टूबर से मिशन बिहार पर आएंगे। जिसकी शुरुआत कर्पूरी ठाकुर की धरती से करेंगे। 24 अक्टूबर को समस्तीपुर और बेगूसराय में चुनावी रैली में लोगों को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 30 अक्टूबर को दूसरा बिहार दौरा प्रस्तावित है। इस दिन पीएम मुजफ्फरपुर और छपरा में जनसभा को संबोधित करेंगे।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा, "प्रधानमंत्री का प्रस्तावित बिहार दौरा 24 अक्टूबर को है। बिहार में वह दो जगहों पर जनसभाओं को संबोधित करेंगे। उनका चुनाव अभियान 24 अक्टूबर को समस्तीपुर से शुरू होगा। वहां से वह बेगूसराय जाएंगे और वहां एक जनसभा को संबोधित करेंगे। उनका दूसरा प्रस्तावित दौरा 29 अक्टूबर को है, जिसकी सूचना बाद में दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि चूंकि सुरक्षा का मामला है, इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि छठ मनाने वाले आम लोगों को कोई परेशानी न हो, उनका छठ पर ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं है। वह आना चाहते थे, लेकिन छठ मनाने वाले आम लोगों को असुविधा होती। इसलिए ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं है।

लेकिन 24 अक्टूबर को बिहार में चुनावी समर अपने चरम पर होगा। जब पीएम मोदी और अमित शाह एक साथ, एक दिन बिहार के अलग-अलग जिलों में चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे। वहीं कल (23 अक्टूबर) को पटना में महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस है। जिसके बाद गठबंधन के सहयोगी दल चुनार प्रचार करेंगे।

पीएम मोदी की रैली का ऐलान
चुनावी अभियान की शुरुआत समस्तीपुर से होगी, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर्पूरी ग्राम जाकर समाजवादी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के घर पहुंचेंगे। वहां वह कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि देंगे। इसी कार्यक्रम से प्रधानमंत्री अपने बिहार दौरे और चुनावी रैलियों की औपचारिक शुरुआत करेंगे।

पीएम मोदी की बिहार चुनाव के लिए रैली
प्रधानमंत्री के दौरे का यह आगाज बेहद प्रतीकात्मक माना जा रहा है, क्योंकि कर्पूरी ठाकुर को बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा और सामाजिक न्याय का प्रतीक माना जाता है। कर्पूरी ग्राम से शुरुआत करके पीएम मोदी एक बार फिर 'सबका साथ, सबका विकास' के संदेश के साथ बिहार में एनडीए की ताकत को और मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
जानिए पीएम मोदी की रैली का शेड्यूल
जानकारी के मुताबिक, 24 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समस्तीपुर और बेगूसराय में दो बड़ी चुनावी सभाएं करेंगे। इसके बाद उनका अगला चरण 30 अक्टूबर को तय है, जब वह मुजफ्फरपुर और छपरा में रैलियां संबोधित करेंगे। सूत्रों के अनुसार, 2 नवंबर, 3 नवंबर, 6 नवंबर और 7 नवंबर को भी प्रधानमंत्री बिहार के अलग-अलग जिलों में जनसभाएं करेंगे। इन रैलियों के कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

मोदी के रथ पर सवार बिहार बीजेपी
भाजपा नेताओं का कहना है कि पीएम मोदी की रैलियों से बिहार में एनडीए के चुनावी अभियान को नई ऊर्जा मिलेगी। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि समस्तीपुर से शुरुआत करना एक रणनीतिक कदम है, क्योंकि यह क्षेत्र न सिर्फ समाजवादी राजनीति की धरती रहा है, बल्कि उत्तर बिहार की राजनीति में इसका विशेष प्रभाव है। बिहार में पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर को होनी है और दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी और इसके साथ ही चुनाव के नतीजे सामने आ जाएंगे।

 

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Wed, 22 Oct 2025 16:56:30 +0530 News desk Hindi
यूथ कांग्रेस मेंबरशिप घोटाला? 5.16 लाख युवाओं के 2.58 करोड़ फंसे, साढ़े तीन लाख सदस्यता अधर में https://citytoday.co.in/3998 https://citytoday.co.in/3998 भोपाल 
मध्यप्रदेश में यूथ कांग्रेस के चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने वाले युवा नेताओं को बड़ी निराशा हाथ लगी है। वहीं, युवा कांग्रेस के सदस्य बनने के इच्छुक 5 लाख 16 हजार युवाओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।दरअसल, 18 अप्रैल को एमपी में यूथ कांग्रेस के चुनावों की घोषणा के साथ ही सदस्यता शुरू हुई थी। ऑनलाइन मोड पर एप के जरिए कराई गई मेंबरशिप में हर नए सदस्य को 50 रुपए सदस्यता शुल्क भी अदा करना था। 20 जून से 19 जुलाई तक चलाए गए सदस्यता अभियान में 15,37,527 युवाओं ने सदस्यता फॉर्म भरे। इनमें से 63,153 युवाओं ने सदस्यता शुल्क जमा नहीं किया। सदस्यता शुल्क के साथ 14लाख 74 हजार 374 युवाओं ने मेंबरशिप के लिए फॉर्म भरे।

सिर्फ 6 लाख की मेंबरशिप ही मान्य हुई

50 रुपए के सदस्यता शुल्क के साथ मेंबरशिप फॉर्म भरने वाले 14 लाख 74 हजार 374 युवाओं में मात्र 6 लाख 1,917 युवाओं की मेंबरशिप ही मान्य की गई है। 5,16,155 युवाओं की मेंबरशिप रिजेक्ट हुई है। 3,56,302 युवाओं के सदस्यता फॉर्म गलतियों के कारण होल्ड किए गए हैं।

एआई से कराया मेंबरशिप वेरिफिकेशन, इसलिए रिजेक्शन युवा कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि इलेक्शन अथॉरिटी ने सदस्यता का वेरिफिकेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कराया है। एआई ने मामूली खामियों पर आवेदन रिजेक्ट और होल्ड कर दिए हैं।

    रिजेक्शन का कारण डुप्लीकेट रिकॉर्ड, डुप्लीकेट फोटो, मोबाइल डुप्लीकेट, अवैध मेंबरशिप, इनवैलिड जन्मतिथि, उम्र सीमा पार होना, डुप्लीकेट आईडी
    होल्ड के कारण: गलत नाम, पिता का नाम गलत, जन्मतिथि मिसमैच, गलत मोबाइल

एमपी में युवा कांग्रेस की सदस्यता के आंकड़े

    कुल सदस्यता आवेदन: 14,74,374
    सदस्यता निरस्त हुई: 5,16,155
    सदस्यता होल्ड हुई: 3,56,302
    सदस्यता आवेदन मान्य हुए: 6,01,917

राष्ट्रीय अध्यक्ष से हुई शिकायत पहली बार एमपी में रिकॉर्ड मेंबरशिप होने के बाद बडे़ पैमाने पर रिजेक्शन और सदस्यता होल्ड किए जाने के मामले में युवा कांग्रेस नेता शिवराज यादव ने यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केन्द्रीय चुनाव प्राधिकरण, प्रदेश प्रभारी से शिकायत की है।

शिवराज का कहना है कि यदि इतने उत्साह के साथ मेंबरशिप कराई गई और 15 लाख के करीब सदस्य बने हैं तो 5 लाख से ज्यादा रिजेक्ट होना और साढ़े तीन लाख की सदस्यता होल्ड होना ये बड़ी चूक है। होल्ड आवेदनों को सुधारने के लिए मात्र 7 दिनों का समय दिया गया है। वो एप भी काम नहीं कर रहा है। मेंबरशिप के डेटा की क्रॉस चेकिंग कराकर रिजेक्शन और होल्ड को हटाना चाहिए।
2 करोड़ 58 लाख रुपए डूबे

50 रुपए प्रति सदस्य के हिसाब से जोड़ें तो जिन 5,16,155 युवाओं की मेंबरशिप रिजेक्ट हुई है। उनके द्वारा जमा किए गए सदस्यता शुल्क की राशि 2 करोड़ 58 लाख 7 हजार 750 रुपए होती है। दूसरी तरफ जिन 3,56,302 युवाओं की सदस्यता होल्ड की गई है। उनकी मेंबरशिप फीस का आंकड़ा जोड़ें तो करीब 1 करोड़ 78 लाख 15 हजार 100 रुपए होता है।

गलतियां सुधारने एप ही नहीं कर रहा काम भारतीय युवा कांग्रेस चुनाव प्राधिकरण की ओर से होल्ड किए गए सदस्यता फॉर्म की गलतियों को सुधारने के लिए 17 अक्टूबर तक का समय दिया है। लेकिन, यूथ कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि वह एप काम ही नहीं कर रहा है। ऐसे में जिन 3,56,302 युवाओं की मेंबरशिप होल्ड है उनमें से 30% फीसदी के सुधार आवेदन दर्ज होकर मंजूर हो जाएं तो बड़ी बात होगी।

तीन शहरों से प्रदेश अध्यक्ष के लिए तीन मुख्य उम्मीदवार युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की रेस में तीन बडे़ शहरों से तीन मुख्य दावेदार हैं। जबलपुर पूर्व सीट से विधायक और पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया के बेटे यश घनघोरिया इस रेस में सबसे आगे हैं। यश को पूर्व सीएम कमलनाथ और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का समर्थन हासिल है।

वहीं भोपाल से अभिषेक परमार को दिग्विजय और जीतू पटवारी का पर्दे के पीछे से सपोर्ट मिल रहा है। ग्वालियर के शिवराज यादव अपने काम और युवाओं की दम पर प्रदेश अध्यक्ष के लिए जोर लगा रहे हैं।

भोपाल जिले में सदस्यता के हाल जान लीजिए
जिला विधानसभा मेंबरशिप फॉर्म भरे रिजेक्ट होल्ड वोटर बचे
भोपाल ग्रामीण बैरसिया 6620 1105 1537 3978
हुजूर 5253 791 1171 3291
भोपाल शहर उत्तर 5175 1697 894 2584
दक्षिण-पश्चिम 10592 3513 1886 5193
गोविंदपुरा: 12856 7882 1678 3296
मध्य: 12586 4830 2071 5685
नरेला: 12141 4996 1857 5288

जहां से प्रदेश अध्यक्ष के उम्मीदवार, उसी विधानसभा में सबसे ज्यादा मेंबरशिप

युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की रेस में जबलपुर के यश घनघोरिया पूरी ताकत लगा रहे हैं। यश के पिता लखन घनघोरिया जबलपुर पूर्व सीट से विधायक हैं। जबलपुर शहर और ग्रामीण जिले की सभी विधानसभाओं में सबसे ज्यादा 26254 मेंबरशिप जबलपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में हुई है। हालांकि, 10259 मेंबरशिप रिजेक्ट कर दी गई है। 4220 युवाओं की मेंबरशिप होल्ड है। 11775 युवाओं की मेंबरशिप अप्रूव की गई है।

जबलपुर जिले में सदस्यता के हाल जान लीजिए
जिला विधानसभा मेंबरशिप फॉर्म भरे रिजेक्ट होल्ड वोटर बचे
जबलपुर ग्रामीण बरगी 5348 2305 790 2253
पनागर 7387 1963 1583 3841
पाटन 5853 3692 645 1516
सिहोरा 7184 3922 1557 1705
जबलपुर शहर कैंट 6991 2969 1295 2727
उत्तर 17779 6575 2424 8780
पश्चिम 5728 3155 667 1906
पूर्व 26254 10259 4220 11775
ग्वालियर जिले में सदस्यता के हाल जान लीजिए
जिला विधानसभा मेंबरशिप फॉर्म भरे रिजेक्ट होल्ड वोटर बचे

ग्वालियर

ग्रामीण

भितरवार 13647 4138 2506 7003
ड़बरा 8834 4018 1301 3515
ग्वालियर ग्रामीण 10751 6213 1572 2966
ग्वालियर शहर ग्वालियर 16638 3364 3659 9615
पूर्व 13718 6960 2497 4261
दक्षिण 12344
6598  
2469 3277

युकां प्रदेश अध्यक्ष के उम्मीदवार योगिता सिंह, जावेद पटेल, अभिषेक परमार, नीरज पटेल, गीता कड़वे, प्रमोद सिंह, विश्वजीत सिंह चौहान, विनय पांडेय, राजवीर कुडिया, प्रियेश चौकडे़, अब्दुल करीम सिद्दीकी, शुभांगना राजे जामनिया, आशीष चौबे, यश घनघोरिया, देवेन्द्र सिंह दादू, स्वीटी पाटिल, शिवराज यादव, मोनिका मांडरे।

प्रदेश महासचिव के 182 उम्मीदवार

  • किशोर सोलंकी, ऋतिक नाथ चौहान, राहुल हितेश ठाकुर राज नेमा, शुभम दुबे, अक्षय जायसवाल, सत्यम सिंह गुर्जर, अली शान मोहम्मद, इरफान खान,
  • जयंत जोशी, आदित्य मिश्रा, गौरव विनोद दीक्षित, सुमन मौर्य, धीरज सिंह परिहार, अभिषेक पांडे, दिगंबर पारधी, अखंड प्रताप सिंह चौहान,
  • अभिषेक जाट, आशुतोष सिंह, विनोद नाथ, प्रीतेश पटेल, सुनील कुमार जायसवाल, पंकज सिंह, शिवदीप रघुवंशी, आसिफ मोहम्मद, मानवेंद्र सिंह गुर्जर,
  • यशवीर सिंह गोयल, धनजी गिरी, आशुतोष आर्य, राहुल राजपूत, अमन सिद्दीकी, जितेंद्र लोधी, मोहम्मद अली हुसैन, हेमंत कुमार मेहता, दीपक ठाकुर,
  • रितेश रोहित, देवांशु सिंह परिहार, रोहित राजोरिया, शिव शंकर पोगरा, सांवरिया पटेल, अर्जुन गुर्जर, भागीरथ ख़तवासे, सुरेखा शाह, शहरयार, शेखर शर्मा,
  • सद्दाम पटेल, अमित कुमार सोहेल पटेल, अनुज पटेल, योगेश एरोलू, मोहम्मद इरफान मनोज पाटीदार, लोकेश दीक्षित, सोपान कोहली, मोहम्मद यावर चौधरी,
  • प्रांजल तिवारी, सागर मोतियानी, मोहम्मद जैद, अनिकेत द्विवेदी, शिवम सिंह परिहार, विजय सिंह बिष्ट, गौरी पारुलेकर प्राची पारधी, यश संजय दवे, धनंजय मिश्रा,
  • राहुल डी, गीता मेहता, नमन दुबे, भूमन्यु सिंह, शुभम चौहान, जितेंद्र सिंह, अपूर्व जैन, सुष्मिता सिंह, सिद्धांत तिवारी, कुणाल सोलंकी, प्रतीक जैन, ऋषभ मिश्रा, मुस्तकीम कुरैशी,
  • नरेंद्र यादव, कृष्णा पंडित, प्रमोद पटेल, ज्योति सनेरिया, दिव्यांशु मिश्रा, मेहताब मावई गुर्जर, शुभम बागरी, विकास चौधरी, कुणाल गजभिए, शिवम पांडे, नितेश आर्य, रवि मुकाती,
  • जितेंद्र इवने, हर्षल आंजना, लोकेंद्र शर्मा, सौम्या राज परते, श्रद्धा सिंह, सोहेब कुरैशी, पवन भिलाला, राहुल वामनिया, अर्जुन नरवाले, रवि दुधानिया, विक्की भदोरिया, दीपेंद्र सोलंकी,
  • प्रिंस नवांगे, मोहम्मद शाहबाज खान, बलवान कुशवाहा, जगदीश सूर्यवंशी, रोहित राजोरिया, विपिन सिंह चौहान, सलमान गौरी, श्रेया यादव, अब्दुल आमिर, सागर शुक्ला, जुनैद अली,
  • पायल जैन, आशुतोष चौधरी, शालू पुरोहित, हाजी मुजाहिद अली, अंकित दुबे, स्मिता तोमर, गंगा पट्टा, राजमल, पंकज कुमार सिंह, मोहित सक्सेना, अंकित यादव, सिद्धार्थ रैकवार, खुशी गुर्जर,
  • निखिल चौकसे, राधा मालवीय, उदित देव परमार, अभिषेक पटेल, आदित्य शर्मा, अतुल मिश्रा, अक्षय दुबे, सक्षम गुलाटी, दीपक तिवारी, प्रवीण चौधरी, संजय पटेल, रेणुका गांधी, मोहम्मद आतीक खान,
  • अर्पित तिवारी, चेतन चौधरी, दर्शन कोरी, लुकमान कुरेशी, रोहित वंशकार, अतीक मंसूरी, विक्रम सिंह, शेख सलमान, विनोद पाटीदार, संदीप अग्रहरि, अदनान अंसारी, अभिषेक शुक्ला, अभिजीत तोमर,
  • गौरव परमार, रजा कादरी, विजय यादव, युवराज सिंह सूरमा, मंजू गुर्जर, शांभवी शुक्ला, अभय सोलंकी, बृजपाल राजावत, गौरीशंकर गुर्जर, वीरेश जादौन, प्रियंका केसरवानी, तारिक खान,
  • अमनदीप सिंह, किशन गुर्जर, जितेंद्र पाटीदार, उबेद अल्लाह, विपुल दीक्षित, निर्देश सोनगरा, प्रशांत सांवले, मौज कामिल, हेमंत कुमार शर्मा, रवि सोनी, हरि कृष्ण शर्मा, नरेंद्र सिंह दांगी, अनुराग रघु, इम्तियाज़ खान।
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Wed, 15 Oct 2025 17:41:56 +0530 news desk MPcg
अमित शाह के आवास पर उपेंद्र कुशवाहा की मुलाकात, नित्यानंद राय भी रहे साथ https://citytoday.co.in/3997 https://citytoday.co.in/3997 विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) के भीतर सीट बंटवारे से असंतुष्ट उपेंद्र कुशवाहा केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मिलने उनके घर पहुंचे हैं। वहीं नित्यानंद राय भी मौके पर मौजूद हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, कुशवाहा अपनी पार्टी को आवंटित छह सीटों से खुश नहीं हैं। वह महुआ सीट एनडीए के एक अन्य घटक, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की अध्यक्षता वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को आवंटित किए जाने से भी खुश नहीं हैं। पटना में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं द्वारा कुशवाहा को मनाने की कोशिशें नाकाम रहीं।

बता दें कि केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और राज्य के अन्य भाजपा नेताओं ने मंगलवार शाम यहां कुशवाहा से मुलाकात की। बैठक देर रात तक चली, जिसके बाद कुशवाहा ने संवाददाताओं से कहा, "इस बार एनडीए में कुछ भी ठीक नहीं है…एनडीए नेताओं ने मंगलवार को दावा किया था कि गठबंधन सहयोगियों के बीच सीटों का बंटवारा सौहार्दपूर्ण ढंग से हो गया है और चर्चा अंतिम चरण में है। हालाँकि, इसके तुरंत बाद छोटे सहयोगियों में असंतोष सामने आ गया।

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Wed, 15 Oct 2025 17:38:20 +0530 news desk MPcg
‘जमीन तो ले लेंगे, नौकरी नहीं देंगे’ — तेजस्वी यादव पर भाजपा का तगड़ा पलटवार https://citytoday.co.in/3972 https://citytoday.co.in/3972 नई दिल्ली
बिहार विधानसभा चुनाव के विमर्श में जगह बना रहे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर महागठबंधन के विरुद्ध बाजी सजाने का मौका भाजपा को मिल गया है। आईआरसीटीसी के होटलों को लीज पर देने के मामले में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव पर आरोप तय होते ही भाजपा ने लालू परिवार को निशाने पर ले लिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता व सांसद रविशंकर प्रसाद ने सत्ता में आने पर युवाओं को नौकरी देने के तेजस्वी यादव के वादे पर कटाक्ष किया कि बिहार की जनता झांसे में न आए, तेजस्वी यादव जमीन तो ले लेंगे, लेकिन नौकरी नहीं देंगे। यह इनका टेस्टेड मॉडल है।

अदालत ने तय किए आरोप
पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आज अदालत ने लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उनके पुत्र तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय किए हैं। ये आरोप बहुत गंभीर हैं, जिनमें सरकारी संपत्ति के आवंटन में भ्रष्टाचार, षड्यंत्र रचना और बेईमानी से सरकार की निर्णय प्रक्रिया में गड़बड़ी करने जैसे अपराध शामिल हैं। इन मामलों में आईपीसी की धारा 120-बी और 420 दोनों शामिल हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव बिहार बदलने निकले हैं, जबकि उन्हीं के खिलाफ 420 का आरोप अदालत ने तय किया है। सवाल यह है कि जब किसी की ऐसी छवि और ऐसे आरोप हों, तो वह बिहार को कैसे बदल सकता है?

'जमीन ले लेंगे, लेकिन नौकरी नहीं देंगे'
अपने प्रहार को धार देते हुए प्रसाद ने कहा कि अगर लालू प्रसाद के पूरे शासनकाल को तीन वाक्यों में कहा जाए तो वह होंगे- चारा खाना, अलकतरा पीना और सरकारी संपत्ति तथा टेंडर में हेराफेरी कर जमीन हड़पना। इसमें एक चौथा मॉडल भी जोड़ना चाहिए, 'जमीन दो, नौकरी लो।' यह चारों मॉडल लालू राज की पहचान रहे हैं। इस मॉडल की सबसे खास बात यह रही कि इसका सारा लाभ सिर्फ परिवार तक सीमित रहा, बाहर किसी को नहीं मिला।

उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन दो, नौकरी लो योजना का सबसे बड़ा शिकार गरीब लोग हुए हैं। यह जमीन मजदूरों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से ली गई। नौकरी देने से पहले उनसे जमीन छीनी गई। यही कांग्रेस और राजद का तथाकथित सामाजिक न्याय है। मुकदमे की चार्जशीट में दर्ज तथ्यों को दोहराने के साथ ही सांसद रविशंकर प्रसाद ने तेजस्वी यादव का वर्ष 2020 के चुनाव का हलफनामा भी दिखाया।

सवाल उठाया कि 17 साल की उम्र में तेजस्वी के पास 11 संपत्ति कैसे हो गईं? राबड़ी देवी के नाम पद दर्ज संपत्तियों का ब्योरा साझा करते हुए प्रश्न किया कि राबड़ी देवी ऐसा क्या कार्य करती हैं? और आय का स्रोत क्या है? आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में दाखिल चार्जशीट की बात करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि लालू परिवार के भ्रष्ट आचरण की पोल एक बार फिर खुल गई है। यह विषय बिहार में बड़ा मुद्दा है और जनता इस पर जरूर विचार करेगी।

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Tue, 14 Oct 2025 18:45:25 +0530 news desk MPcg
एनडीए आज शाम करेगा उम्मीदवारों की घोषणा, दिलीप जायसवाल बोले& एकजुट होकर लड़ेंगे https://citytoday.co.in/3951 https://citytoday.co.in/3951 पटना

बिहार विधानसभा चुनाव के अंतर्गत एनडीए आज (सोमवार) की शाम अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेगा। यह जानकारी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने दी। उन्होंने रविवार को घोषित सीट बंटवारे को लेकर एनडीए के भीतर किसी तरह के मतभेद होने से इनकार किया और कहा कि गठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा।

दिलीप जायसवाल ने पत्रकारों से कहा कि एनडीए ने पहले ही सीट बंटवारे की घोषणा कर दी है। अब भाजपा समेत राजग के सभी घटक दलों के उम्मीदवारों की घोषणा शाम में की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में राजग के पांच घटक दल ‘पांच पांडव’ की तरह हैं और सभी मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे तथा भारी बहुमत से सरकार बनाएंगे।

बता दें कि सीट बंटवारे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू और भाजपा 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जबकि शेष 243 सीटें छोटे सहयोगी दलों को दी गई हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की एलजेपी (राम विलास) 29 सीटों पर, जबकि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम छह-छह सीटों पर चुनाव लड़ेंगी।

हम और आरएलएम ने सीट बंटवारे को लेकर नाराजगी जताई है। सुबह दिल्ली से लौटने के बाद उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि सीट बंटवारे की व्यवस्था आपसी सहमति से तय की गई है। उन्होंने दावा किया कि हम पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएंगे।

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Mon, 13 Oct 2025 20:06:42 +0530 news desk MPcg
दिग्विजय सिंह का आह्वान: विधायक&सांसद दें पार्टी को आर्थिक सहयोग, भारत जोड़ो जैसी यात्रा निकालने का सुझाव https://citytoday.co.in/3914 https://citytoday.co.in/3914 भोपाल 

भारत जोड़ों यात्रा की तर्ज पर मध्य प्रदेश में पदयात्रा होगी. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जिला प्रभारियों की बैठक में प्रस्ताव दिया. मध्य प्रदेश में पदयात्रा निकालने का प्रस्ताव दिया. इस प्रस्ताव के बाद बैठक में दिग्विजय पदयात्रा को लेकर प्लानिंग करेंगे. जनता से जुड़े मुद्दे पदयात्रा में उठाए जाएंगे. भारत जोड़ो यात्रा का ब्लूप्रिंट भी दिग्विजय सिंह ने तैयार किया था. कांग्रेस को उम्मीद पदयात्रा के जरिए एमपी कांग्रेस मजबूत होगी.

मध्य प्रदेश कांग्रेस की नई रणनीति: बूथों के बीच यात्रा और हस्ताक्षर अभियान

हाल ही में मध्य प्रदेश कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी और सह प्रभारी संजय दत्त मौजूद थे। इस बैठक में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर मध्य प्रदेश में बूथों के बीच यात्रा निकालने का प्रस्ताव रखा गया। यह यात्रा कांग्रेस पार्टी के स्थापना दिवस, जो कि 28 दिसंबर को है, से शुरू होकर महात्मा गांधी की पुण्यतिथि तक चलेगी। यह कदम पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति मानी जा रही है।

बैठक में दिग्विजय सिंह ने कहा कि पिछले कुछ समय से पार्टी ने बूथ स्तर पर संगठनात्मक काम नहीं किया है। उन्होंने यह भी बताया कि अब बिहार की तरह मध्य प्रदेश में एसआईआर (सर्वे इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट) कराने की योजना बनाई जा रही है। उनके अनुसार, पार्टी को यह सुनिश्चित करना होगा कि कांग्रेस का समर्थक मतदाता वोटर लिस्ट से न हटाया जाए और कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे। इसके लिए वोटर लिस्ट में होने वाली गड़बड़ी पर बारीकी से नजर रखने की आवश्यकता है।

बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने वोट चोर गद्दी छोड़ अभियान के तहत हस्ताक्षर किए।
बूथ से बूथ तक यात्रा का प्रस्ताव

दिग्विजय सिंह ने सुझाव दिया कि पार्टी को भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर एक बूथ से दूसरे बूथ तक पदयात्रा निकालनी चाहिए। इस यात्रा के दौरान बूथ की बैठकें आयोजित की जाएंगी, जहां बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) के काम की समीक्षा की जाएगी और वोट चोर गद्दी छोड़ अभियान को गति दी जाएगी। यह यात्रा न केवल पार्टी के कार्यकर्ताओं को एकजुट करेगी, बल्कि मतदाताओं के बीच पार्टी की उपस्थिति भी बढ़ाएगी।

इसके अलावा, उन्होंने जिला और ब्लॉक अध्यक्षों को यह भी कहा कि उन्हें संगठन का काम करने के लिए किसी नेता की तरफ पैसे के लिए नहीं देखना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने यह सुझाव दिया कि सक्षम कार्यकर्ताओं को खुद पार्टी की मदद करनी चाहिए। इसमें ऐसे कार्यकर्ताओं को बीएलए बनाया जाना चाहिए जो बूथ पर मजबूती और सक्रियता से काम कर सकें।
हस्ताक्षर अभियान का लक्ष्य

बैठक में जीतू पटवारी ने भी अपनी बात रखी और कहा कि हमें पूरे मध्य प्रदेश से 5 करोड़ मतदाताओं के हस्ताक्षर कराने हैं। इसके लिए हर विधानसभा क्षेत्र से 20 हजार मतदाताओं के हस्ताक्षर करने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान वोट चोर गद्दी छोड़ मुहिम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पार्टी की रणनीतिक दिशा को मजबूत बनाने में सहायक साबित होगा।

कांग्रेस पार्टी का यह नया कदम मध्य प्रदेश में आगामी चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है। बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और मतदाता जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए यह यात्रा और हस्ताक्षर अभियान, पार्टी की संगठनात्मक मजबूती के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार के प्रयासों से कांग्रेस पार्टी अपनी स्थिति को मजबूत बनाने का प्रयास कर रही है, ताकि आगामी चुनावों में सफलता हासिल की जा सके।

कुल मिलाकर, यह बैठक और उसके परिणाम कांग्रेस पार्टी के लिए एक नई दिशा दिखाने वाले हैं। पार्टी के नेता अब बूथ स्तर पर अधिक सक्रियता और जागरूकता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो कि आने वाले चुनावों में उनकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

आपको बता दें कि इस रणनीति के तहत कांग्रेस पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के साथ-साथ मतदाताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रही है। यह अभियान न केवल कांग्रेस के नेताओं के लिए, बल्कि पार्टी के समर्थकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

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Sat, 11 Oct 2025 16:04:16 +0530 news desk MPcg
MP भाजपा की नई कार्यकारिणी में 60% नए चेहरे, टीम तैयार, दिल्ली की मंजूरी शेष https://citytoday.co.in/3877 https://citytoday.co.in/3877 भोपाल 

मध्यप्रदेश बीजेपी की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा का काम अब लगभग पूरा हो चुका है। अब जल्द टीम का ऐलान होगा। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मिलकर प्रदेश पदाधिकारियों के नामों पर चर्चा की और लिस्ट तैयार की। अब यह लिस्ट केंद्रीय नेतृत्व से मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि जल्द इस लिस्ट पर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से फाइनल मुहर लग जाएगी। 

हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष बने लगभग 100 दिन पूरे होने वाले हैं। उन्हें 2 जुलाई को अध्यक्ष बनाया गया था और तब से वे पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा की टीम के साथ काम कर रहे हैं। पिछले तीन महीनों से वे लगातार कार्यकर्ताओं से मिलकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी दिवाली से पहले घोषित हो सकती है। इसके बाद एमपी बीजेपी प्रदेश कार्यकारिणी बैठक होगी। 

हेमंत खंडेलवाल की टीम में होंगे 60 फीसदी नए चेहरे

वीडी शर्मा मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे और उन्होंने 5 साल 4 महीने 17 दिन तक इस पद पर काम किया। उन्हें 15 फरवरी 2020 को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। कोरोना के कारण उनका कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया गया था, फिर संगठन चुनाव में देरी के कारण उनका कार्यकाल बढ़ता गया। वीडी शर्मा की टीम में रहे 8 पदाधिकारी अब सांसद बन चुके हैं, जबकि 8 अन्य विधायक बन चुके हैं। 

वीडी की टीम में रहे 60% चेहरे बाहर होंगे वीडी शर्मा मध्य प्रदेश भाजपा के 5 साल 4 महीने 17 दिन तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। उन्हें 15 फरवरी 2020 को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। कोरोना संकट के चलते उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया गया था। फिर संगठन चुनाव में हुई देरी के कारण उनका कार्यकाल अघोषित रूप से बढ़ता गया।

वीडी शर्मा के साथ प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल रहे 8 पदाधिकारी सांसद और 8 पदाधिकारी विधायक बन चुके हैं। किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा, महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी सांसद और मंत्री बन गए हैं।

नई कार्यकारिणी में टीम वीडी में शामिल रहे पदाधिकारियों में से 60% चेहरे बदले जाएंगे।

पुराने संगठन मंत्रियों की वापसी संभव सितंबर 2021 में बीजेपी ने संभागीय संगठन मंत्रियों को हटा दिया था। बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शैलेंद्र बरुआ (जबलपुर और होशंगाबाद), आशुतोष तिवारी (भोपाल और ग्वालियर), जितेंद्र लिटोरिया (उज्जैन), श्याम महाजन (रीवा और शहडोल), जयपाल चावड़ा (इंदौर) और केशव सिंह भदौरिया (सागर और चंबल) को संभागीय संगठन मंत्री पद से हटाकर प्रदेश कार्यसमिति में सदस्य बनाया था।

इन संगठन मंत्रियों में केशव भदौरिया को छोड़कर 5 नेताओं को राज्य सरकार ने मंत्री का दर्जा देकर निगम मंडलों में एडजस्ट किया था। अब बीजेपी की नई प्रदेश कार्यकारिणी में इन पुराने संगठन मंत्रियों की वापसी हो सकती है।

इस बार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की टीम में करीब 60% नए चेहरे होंगे। इसके अलावा किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा और महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी अब सांसद और मंत्री बन गए हैं।

सितंबर 2021 में बीजेपी ने अपने संभागीय संगठन मंत्रियों को हटा दिया था। उस समय बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शैलेंद्र बरुआ (जबलपुर और होशंगाबाद), आशुतोष तिवारी (भोपाल और ग्वालियर), जितेंद्र लिटोरिया (उज्जैन), श्याम महाजन (रीवा और शहडोल), जयपाल चावड़ा (इंदौर) और केशव सिंह भदौरिया (सागर और चंबल) को हटाकर उन्हें प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बना दिया था।

इनमें से पांच नेताओं को राज्य सरकार ने मंत्री का दर्जा देकर निगम मंडलों में जगह दी थी, लेकिन केशव भदौरिया को इसमें शामिल नहीं किया गया था। अब बीजेपी की नई टीम में इन पुराने मंत्रियों की फिर से वापसी हो सकती है।

मौजूदा प्रदेश कार्यकारिणी में इतने नेता

मध्यप्रदेश बीजेपी की मौजूदा प्रदेश कार्यकारिणी के प्रदेश उपाध्यक्ष में एक मंत्री, तीन सांसद और दो विधायक हैं। वहीं, प्रदेश महामंत्री में दो विधायक और एक सांसद हैं। साथ ही, प्रदेश मंत्री में दो सांसद और एक विधायक है। वहीं, संयुक्त कोषाध्यक्ष में अनिल जैन कालूहेड़ा से विधायक हैं। 

 

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Wed, 08 Oct 2025 12:28:31 +0530 news desk MPcg
बिहार BJP में बड़े बदलाव की तैयारी, गुजरात मॉडल पर कटेंगे नेताओं के टिकट https://citytoday.co.in/3829 https://citytoday.co.in/3829 पटना
 बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा अगले कुछ दिनों में हो सकती है. दोनों प्रमुख गठबंधनों में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है. भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती एंटी इनकंबेंसी से निबटना है. जनता के बीच लंबे समय से जीत रहे विधायकों और मंत्रियों को लेकर बेहद नाराजगी है. इस चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए भाजपा बिहार में गुजरात मॉडल लागू करने जा रही है. गुजरात की तरह बिहार में भी मौजूदा कई मंत्रियों और विधायकों का टिकट काटा जायेगा. ऐसे करीब 30 विधायकों की सूची तैयार की गयी है, जिन्हें पार्टी इस बार बेटिकट कर सकती है.

वोटरों की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी बाधा

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भाजपा का प्रदर्शन संतोषप्रद रहा था. नीतीश कुमार की कम सीटें आने के बाद भी बिहार में एनडीए की सरकार बनी. नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए पांचवीं बार चुनाव जीतने की उम्मीद कर रहा है. भाजपा के पास अभी 80 विधायक हैं, जिनमें 22 मंत्री हैं. कई सीटों पर इस बार स्थानीय विधायक के प्रति विरोधी लहर पहले के मुकाबले मजबूत है. भाजपा ऐसे विधायकों की जगह नये चेहरों को मौका देने पर विचार कर रही है. वैसे जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए ऐसा करना आसान नहीं है. बिहार में भाजपा एक वरीय नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि सरकार की योजनाओं के कारण जनता में पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी नहीं है, लेकिन स्थानीय विधायकों से जनता नाराज है. मौजूदा विधायकों के प्रति मतदाताओं की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी बाधा बन सकती है.

गुजरात की तरह कई कद्दावर नेता होंगे बेटिकट

पार्टी का जनाधार बढ़ाने और एंटी इनकंबेंसी को साधने के लिए अमित शाह लगातार बिहार की टीम के साथ विचार मंथन कर रहे हैं. उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने से पहले एक फार्मूले पर काम किया जा रहा है. पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा बिहार में भी गुजरात मॉडल लागू कर सकती है. भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में इसपर गंभीरता से विचार-विर्मश हुआ है. भाजपा ने 2022 में गुजरात चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की सूची में बड़ा बदलाव किया था. उसी तर्ज पर बिहार में भी एक व्यापक फेरबदल किया जा सकता है. लगातार सातवीं बार गुजरात जीतने के लिए भाजपा ने पूरा मंत्रिमंडल बदल दिया था. साथ ही अपने 108 मौजूदा विधायकों में से 45 का टिकट काट दिया था, जिनमें कई वरिष्ठ नेता और मंत्री शामिल थे. बिहार में भी भाजपा इसी रास्ते सत्ता में वापसी का प्लान बना रही है.

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Sat, 04 Oct 2025 17:06:16 +0530 news desk MPcg
इमर्जेंसी का जिक्र कर कांग्रेस पर बरसे निशिकांत दुबे, बोले& 82 साल के बुजुर्ग भी थे जेल में https://citytoday.co.in/3828 https://citytoday.co.in/3828 लद्दाख
लद्दाख में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का विरोध करने पर कांग्रेस को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने खूब सुनाया है। दुबे ने कहा कि कांग्रेस शायद आपातकाल के समय को भूल गई है जब इंदिरा गांधी की सरकार ने विजय राजे सिंधिया और आंध्र प्रदेश के पूर्व राज्यपाल भीम सेन सचर को गिरफ्तार करवा लिया था। उन्होंने कहा, कांग्रस जिस संविधान का हवाला दे रही है, वह 1975 में कहा चला गया था। उन्होंने कहा, बीजेपी की संस्थापक सदस्य राज माता सिंधिया को गिरफ्तार कर लिया गया। आयकर विभाग ने छापे डाले। गायत्री देवी और उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कर दिया गया। उन्हें ऐसी कालकोठरी में डाला गया जिसमें बाथरूम तक नहीं था और आप महिलासशक्तीकरण की बात करते हैं।

निशिकांत दुबे ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछ विदेशी ताकतों का हाथ था। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग पूरी कर दी है। उन्होंने कहा, आज आप लद्दाख की बात करते हैं। लद्दाख में लोग मारे गए। पहले वही वांगचुक केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग करते थे और विदेशी ताकत के शामिल होने के बाद वह पूर्ण राज्य की मांग करने लगे। कांग्रेस ने पिछले 30 साल में कुछ नहीं किया लेकिन मोदी जी की सरकार ने लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया।

निशिकांत दुबे ने कहा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आंध्र प्रदेश के पूर्व राज्यपाल 82 साल के सचर को घसीटकर जेल में बंद कर दिया गया था। आप लोकतंत्र की बात कैसे कर सकते हैं। कांग्रेस को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। इससे पहले निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिा पर कहा था कि कांग्रेस लद्दाख के मामले में घड़ियाली आंसूबहा रही है।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र से मांग की है कि वह लद्दाख के लोगों से बात करे और लद्दाख में लोगों को डराना धमकाना बंद करे। उन्होंने हाल में हुई हिंसा को लेकर न्यायिक जांच की मांग की है। राहुल गांधी ने कहा था कि लद्दाख में मारा गया एक शख्स जवान के परिवार से था। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक बहादुर और देशभक्त की जान ले ली क्योंकि वह लद्दाख के अधिकार की मांग कर रहा था। उसके पिता का सवाल है कि क्या देश की सेवा करने का यही इनाम है? बता दें कि सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है और जोधपुर जेल में रखा गया है।

 

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Sat, 04 Oct 2025 17:04:14 +0530 news desk MPcg
कांग्रेसी नेता संजय दत्त RSS की तारीफ पर भड़के, बोले – ‘नायक नहीं, नालायक है तू’ https://citytoday.co.in/3827 https://citytoday.co.in/3827  मुंबई 

हाल ही मैं एक नए वीडियो ने सियासी हलचल मचा दी है जिसमे बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की 100वीं वर्षगांठ पर अपने भाव साझा कर रहे हैं  उस वीडियो में संजय दत्त आरएसएस की तारीफ करते हुए 100वीं वर्षगांठ पर शुभकामना दे रहे हैं। कांग्रेस को यह पसंद नहीं आया और देश की सबसे पुरानी पार्टी ने संजय दत्त को नालायक तक कह दिया।

संजय दत्त ने 2 अक्टूबर के दिन अपने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था, “संघ हमेशा देश के साथ खड़ा रहा है, खासकर संकट और मुश्किल समय में।” इस बयान के बाद से ही सोशल मीडिया पर विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है।

कांग्रेस का तीखा हमला

कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने संजय दत्त पर बेहद कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “नायक नहीं, खलनायक है तू। अपने पिता का नालायक है तू।” आपको बता दें कि संजय दत्त के पिता सुनील दत्त कांग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे। वह सांसद भी रहे। वहीं, उनकी बहन प्रिया दत्त भी कांग्रेस से जुड़ी हैं। संजय दत्त ने दोनों की विचारधारा के विपरीत जाकर RSS की प्रशंसा की है।

सुरेंद्र राजपूत के बयान पर अब तक संजय दत्त की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आपको बता दें कि संजय दत्त पहले कई विवादों में घिरे थे। 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में उन्हें गैरकानूनी हथियार रखने के आरोप में TADA कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। बाद में वे TADA के आरोपों से बरी हुए, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाए गए और उन्हें जेल की सजा भी काटनी पड़ी थी।

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Sat, 04 Oct 2025 16:58:04 +0530 news desk MPcg
राहुल गांधी के सवालों पर भाजपा की प्रतिक्रिया और चुनाव आयोग पर उठते सवाल: शरद पवार का बड़ा बयान https://citytoday.co.in/3734 https://citytoday.co.in/3734 मुंबई 
राहुल गांधी बीते कई महीनों से वोटर लिस्ट में धांधली समेत कई आरोप चुनाव आयोग पर लगा रहे हैं। इस मामले में अकसर भाजपा जवाब देती नजर आती है। इसी को लेकर एनसीपी-एसपी के नेता शरद पवार ने कहा है कि इससे तो चुनाव आयोग पर भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि जब भी कांग्रेस सांसद राहुल गांधी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं तो भाजपा नेता नियमित रूप से प्रतिक्रिया देते हैं। इससे चुनाव आयोग पर 'अविश्वास' बढ़ता है। पवार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि इन सवालों पर आयोग की ओर से जवाब देने के बजाय भाजपा और उसके नेता प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने कहा, 'लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जब संसद में यह मुद्दा उठाते हैं तो संबंधित संस्था को इसका संज्ञान लेना चाहिए था। लेकिन हो यह रहा है कि जब गांधी चुनाव आयोग की आलोचना करते हैं तो आयोग जवाब नहीं देता बल्कि भाजपा और उसके नेता प्रतिक्रिया देते हैं।' पवार ने आगे कहा कि चुनाव आयोग की बजाय मुख्यमंत्री और अन्य नेता ऐसे मुद्दों पर जवाब दे रहे हैं, जिससे आयोग के प्रति अविश्वास की भावना बढ़ रही है। ऐसा होना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

राहुल गांधी ने हाल ही में 'वोट चोरी' के मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की थी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र को नष्ट करने वालों की रक्षा करने का आरोप लगाया था। गांधी ने कर्नाटक और महाराष्ट्र की दो विधानसभा सीटों के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया था कि वहां मतदाताओं के नाम धोखाधड़ी से हटाए या जोड़े गए हैं। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को गलत और निराधार बताया है और कहा है कि 'किसी भी आम नागरिक द्वारा ऑनलाइन वोट डिलीट नहीं किया जा सकता जैसा राहुल गांधी का दावा है।'

आयोग ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए केवल उसी बूथ के अन्य मतदाता फॉर्म 7 के जरिए आवेदन कर सकते हैं न कि कोई भी आम नागरिक। राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद विपक्षी दलों में एकजुटता देखी गई है, जिसमें शरद पवार और अन्य नेताओं ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में 'वोट चोरी' के उदाहरण दिए हैं।

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Wed, 24 Sep 2025 13:45:05 +0530 news desk MPcg
त्रिची रैली में हंगामे के बाद एक्टर विजय हुए सतर्क, पार्टी ने जारी किए नए दौरे के नियम https://citytoday.co.in/3711 https://citytoday.co.in/3711 पेरंबलूर

अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने त्रिची में पिछले सप्ताह हुई रैली के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और अव्यवस्था के बाद अपने कार्यकर्ताओं के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मद्रास उच्च न्यायालय की टिप्पणियों के बाद पार्टी ने विजय के राज्यव्यापी अभियान के लिए सुरक्षा और आचरण नियमों को दोहराया है। टीवीके ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को विजय के लिए सार्वजनिक स्वागत समारोह आयोजित करने, उनके वाहन या काफिले का पीछा करने और खतरनाक गतिविधियों जैसे लैंप पोस्ट, बिजली के खंभे, छतों, वाहनों, पेड़ों या फ्लेक्स बोर्ड पर चढ़ने से मना किया है। साथ ही, पटाखे फोड़ने पर भी रोक लगा दी गई है।

पार्टी ने गर्भवती महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और बीमार लोगों को रैलियों में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के बजाय ऑनलाइन आयोजनों को फॉलो करने की सलाह दी है। टीवीके ने कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान न पहुंचाने और जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले बयानों से बचने की चेतावनी दी है। मद्रास उच्च न्यायालय ने टीवीके की याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस द्वारा लगाए गए कठिन और अव्यवहारिक शर्तों पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या ऐसी शर्तें सभी पार्टियों पर लागू की जा रही हैं। न्यायमूर्ति एन. सतीश कुमार ने त्रिची रैली के हंगामे का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कुछ अनहोनी हुई तो जिम्मेदारी कौन लेगा और विजय को पार्टी अध्यक्ष के रूप में भीड़ को नियंत्रित करना चाहिए।

भरपाई के लिए मुआवजा वसूला?

न्यायालय ने यह भी पूछा कि क्या नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा वसूला गया है और तमिलनाडु सरकार को सभी राजनीतिक दलों के लिए एकसमान दिशा-निर्देश तैयार करने का निर्देश दिया, जिसमें संभावित नुकसान के लिए जमा राशि का प्रावधान शामिल है। सरकार को 24 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है। विजय ने पिछले शनिवार को त्रिची से अपने राज्यव्यापी दौरे की शुरुआत की थी और उसी दिन आरियालुर भी गए। त्रिची में हजारों कार्यकर्ताओं के काफिले में शामिल होने से शहर ठप हो गया और सामान्य रूप से 20 मिनट का सफर छह घंटे तक खिंच गया।

मयिलादुथुराई का दौरा रद्द किया

पिछले सप्ताह विजय को पेरंबलूर का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था और इस बार उन्होंने मयिलादुथुराई का दौरा रद्द किया है। वह कल नागपट्टिनम और तिरुवारुर में प्रचार करेंगे। उनका अभियान दिसंबर तक मुख्य रूप से शनिवार को और एक रविवार को पहले से निर्धारित है। अपने अभिनय करियर के चरम पर चुनावी मैदान में उतरे विजय को उम्मीद है कि वह 1967 और 1977 के तमिलनाडु चुनाव परिणामों को दोहरा सकेंगे, जब अन्नादुराई और एमजीआर ने क्रमशः कांग्रेस और डीएमके सरकारों को सत्ता से बेदखल किया था। हालांकि, सत्तारूढ़ डीएमके और मुख्य विपक्षी एआईएडीएमके का दावा है कि वे इससे बेपरवाह हैं, क्योंकि विजय की रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ जरूरी नहीं कि वोटों में तब्दील हो।

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Sat, 20 Sep 2025 18:16:00 +0530 news desk MPcg
BJP&JDU सीट शेयरिंग फाइनल, अब चिराग और मांझी से होगी बातचीत https://citytoday.co.in/3710 https://citytoday.co.in/3710 नई दिल्ली 
बिहार की राजनीति में गुरुवार को उस समय नई हलचल मच गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। शाह उसी दिन पटना में आयोजित अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने पहुंचे थे। दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं कि यह आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे की तैयारियों का हिस्सा है। आपको बता दें कि इस मुलाकात के दौरान बिहार भाजपा के नेताओं के अलावा नीतीश कुमार के दो खास सिपहसालार संजय झा और विजय चौधरी भी इस बैठक में शामिल हुए।

सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU)के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर शुरुआती खाका तैयार हो चुका है। अब इसे लेकर लोजपा (LJP), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) जैसे सहयोगी दलों से भी बातचीत चल रही है। गठबंधन के भीतर सभी दलों को संतुलित हिस्सेदारी देने का प्रयास किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, सीट बंटवारे को लेकर अंतिम फैसला नवरात्र के पावन पर्व के दौरान घोषित किया जा सकता है, जिसकी शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है। पटना के सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि NDA इस अवसर को शुभ मानते हुए एकजुटता का संदेश जनता तक पहुंचाना चाहता है। यह वही समय होगा जब से आम लोगों को जीएसटी की नई दरों का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। दुर्गा पूजा के बाद कभी भी इसका ऐलन हो सकता है। इस साल छठ के बाद वोटिंग की संभावना है। 2020 के चुनावों में जेडीयू की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही थी, जबकि बीजेपी बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। लेकिन हाल के दिनों में नीतीश कुमार के एनडीए में लौटने के बाद समीकरण फिर बदल गए हैं। बीजेपी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि गठबंधन की एकता बनी रहे और विपक्षी गठबंधन INDIA को चुनौती दी जा सके। वहीं, नीतीश कुमार भी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सतर्क हैं और चाहते हैं कि उन्हें गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी मिले।

 

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Sat, 20 Sep 2025 18:13:58 +0530 news desk MPcg
हाइड्रोजन बम से तुलना, फुलझड़ी से काम! अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर साधा तंज https://citytoday.co.in/3662 https://citytoday.co.in/3662 नई दिल्ली
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस कर वोटर लिस्ट में फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। इसे लेकर बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार चुनावी हार और जनता द्वारा खारिज किए जाने से हताश और निराश हैं। ठाकुर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने 'आरोपों की राजनीति' को अपना आभूषण बना लिया है, लेकिन जब इन्हीं आरोपों को साबित करने की बात आती है तो पीठ दिखाकर भाग जाते हैं।
 
झूठे आरोप लगाने की आदत: अनुराग ठाकुर
अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी की आदत गलत और निराधार आरोप लगाने की बन गई है। उन्होंने दावा किया कि जब चुनाव आयोग उनके आरोपों को सत्यापित करने के लिए कहता है, तो वह पीछे हट जाते हैं। इसके अलावा, जब उन्हें शपथ पत्र देने के लिए कहा जाता है, तो वह मुकर जाते हैं। ठाकुर ने आगे कहा, "आरोप लगाने के बाद माफी मांगने और कोर्ट से फटकार खाने का काम राहुल गांधी का हो गया है। हर मामले में उनको फटकार ही लगी है।"

हाइड्रोजन बम की जगह फुलझड़ी
राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस पर तंज कसते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रेस कांफ्रेंस में हाइड्रोजन बम फोड़ने वाले थे, फुलझड़ी से काम चलाना पड़ा।
"राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस 90 चुनाव हारी है" अनुराग ठाकुर ने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी लगभग 90 चुनाव हारी है, जिससे उनकी हताशा और निराशा दिन व दिन बढ़ती जा रही है।
 
रोज प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और झूठ बोलते हैं: अमित साटम
मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने कहा, "राहुल गांधी हमेशा ऐसे बयान देकर देश को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। चुनाव आयोग ने उन्हें तकनीकी और संवैधानिक तौर पर जो करने को कहा है, वो वो नहीं करते। वो रोज़ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और झूठ बोलते हैं। मुझे लगता है कि अगर वो थोड़ा आत्मचिंतन करें कि उन्हें इतने कम वोट क्यों मिले और वो क्यों हारे, तो शायद वो ज़िंदगी में थोड़ा आगे बढ़ जाएं, क्योंकि जब भी कोई व्यक्ति आत्मचिंतन करता है, तो उसे अपनी गलतियां समझ आती हैं और उन्हें सुधारने का मौका मिलता है। मुझे लगता है कि देश उन पर ध्यान नहीं दे रहा है और अगर उनके पास कोई सही आरोप है, तो उन्हें संवैधानिक, तकनीकी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। वो प्रक्रिया का पालन इसलिए नहीं कर रहे, क्योंकि उन्हें पता है कि उनका झूठ उजागर होने वाला है।"

ये दिवालियापन है: संजय सेठ
केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कहा, "ये दिवालियापन है। आप नेता प्रतिपक्ष हैं। आप संवैधानिक संस्था पर आरोप लगा रहे हैं। आपको ना ED पर विश्वास ना CBI, ना चुनाव आयोग, ना EVM, ना जनता पर विश्वास, कभी-कभी आप सिंदूर पर प्रश्न चिन्ह खड़े करते हैं… क्या हो गया है? देश की जनता इसलिए आपको सीरियस नहीं लेती है। आपको तीसरी बार किनारे बिठा दिया तो आप अपना खीझपन चुनाव आयोग पर निकाल रहे हैं। देश की जनता फिर आपको किनारे बिठाएगी, बिहार में भी किनारे बिठाएगी।"

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Thu, 18 Sep 2025 18:56:18 +0530 news desk MPcg
कांग्रेस जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पर विवाद, CWC मेंबर ने समन्वय की कमी पर उठाए सवाल https://citytoday.co.in/3632 https://citytoday.co.in/3632 भोपाल 

मध्य प्रदेश में दो दशक से सत्ता से बाहर कांग्रेस में गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही। प्रदेश में हाल ही में हुई जिला अध्यक्षों की नियुक्ति अभी तक विवादों में घिरी हुई है। कई दिग्गजों को जिला अध्यक्ष बनाए जाने से नाराजगी है। वहीं कई सीनियर नेताओं के क्षेत्रों में उनकी राय के खिलाफ जिलाध्यक्ष बनाए जाने से वे नाराज हैं। अब CWC मेंबर और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने प्रदेश प्रभारी और पीसीसी चीफ पर सवाल खड़े पर किए हैं। कमलेश्वर पटेल ने एमपी में संगठन सृजन अभियान के तहत जिलाध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी पर अपना बयान जारी किया है।

इतनी गुटबाजी नहीं होना चाहिए
उन्होंने कहा है कि गुटबाजी और प्रतिस्पर्धा हमेशा रही है। लेकिन इतनी गुटबाजी नहीं होना चाहिए, जो जिम्मेदार लोग हैं। उनकी जिम्मेदारी है। प्रदेश प्रभारी का काम समन्वय बनाने का है, न कि पार्टी बनने का। उन्होंने कहा कि मेरा तो प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष से निवेदन है कि आपको खरगे जी, राहुल जी ने प्रदेश का महत्वपूर्ण पद दिया है, मुखिया बनाया है। आप सबको साथ लेकर चलिए।

समाधान हो सकता है 
पटेल ने एक दोहा बोलते हुए कहा कि मुखिया मुख सों चाहिए, खान पान को एक, पालै पोसै सकल अंग, तुलसी सहित विवेक। इस तरह की भावना के साथ जिस दिन काम करना शुरू कर देंगे तो हम समझते हैं कि थोड़ी बहुत प्रतिस्पर्धा को लेकर आपस में नाराजगी हो सकती है लेकिन कोई बहुत बड़ी नाराजगी नहीं हैं। इसका समाधान किया जा सकता है और हमारे नेता कर भी रहे हैं। पटेल ने जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए चलाए गए संगठन सृजन अभियान को लेकर कहा कि संगठन सृजन में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल की भावनाओं को दरकिनार करने की कोशिश हुई है। जहां गड़बड़ियां हुई हैं, उनकी जांच कर रहे हैं

जमीनी नेताओं को दरकिनार करना गलत
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को लेकर हाईकमान ने जाहिर भी किया कि गड़बड़ी हुई है। जमीनी नेताओं को दरकिनार करना गलत है। यह विसंगतियां हाईकमान के संज्ञान में हैं। व्यापार करने वालों को नहीं, जमीनी लोगों को मिलना चाहिए मौका।

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Tue, 16 Sep 2025 14:52:10 +0530 news desk MPcg
CM ममता बनर्जी का हमला& वोटिंग का हक किसी से नहीं छिनने दूंगी https://citytoday.co.in/3525 https://citytoday.co.in/3525 कोलकाता 
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को TMC छात्र परिषद की रैली में भाजपा पर जोरदार हमले किए हैं। ममता बनर्जी ने कहा है कि भाजपा 500 लोगों की टीम ले कर बंगाल आई है और लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए सर्वे किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लेकिन उनके होते हुए किसी भी बंगाली के मतदान के अधिकार को नहीं छीनने दिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने ‘भाषाई आतंकवाद’ का भी जिक्र किया है। CM ममता ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा है कि भाषाई आतंकवाद को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कोलकाता में छात्र शाखा की एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा, "आपको खुद जांच करनी चाहिए कि आपका नाम अभी भी मतदाता सूची में है या हटा दिया गया है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके पास आधार कार्ड हैं।" उन्होंने आगे कहा, "जब तक मैं ज़िंदा हूं, किसी को भी लोगों का मताधिकार नहीं छीनने दूंगी।" ममता बनर्जी ने इस दौरान चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राज्य सरकार के अधिकारियों को धमका रहा है। उन्होंने दावा किया, "चुनाव आयोग हमारे अधिकारियों को धमका रहा है। आयोग का अधिकार क्षेत्र चुनाव के दौरान केवल तीन महीनों तक ही है, पूरे साल नहीं।"

बंगालियों की भूमिका भुलाने की कोशिश
ममता बनर्जी ने दावा किया है कि भाजपा स्वतंत्रता आंदोलन में बंगालियों द्वारा निभाई गई भूमिका को भुलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “अगर बंगाली भाषा ही नहीं है, तो राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत किस भाषा में लिखे गए हैं? वे चाहते हैं कि लोग स्वतंत्रता आंदोलन में बंगालियों द्वारा निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को भूल जाएं। हम इस भाषाई आतंक को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

भाजपा के पास 'भ्रष्टाचार भंडार
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी ममता बनर्जी ने जवाब दिया। CM ममता ने दावा किया कि TMC सरकार ने कई सामाजिक कल्याणकारी पहल की हैं। वहीं केंद्र की भाजपा सरकार विकास के नाम पर भ्रष्टाचार में लिप्त है। उन्होंने कहा, "हम महिलाओं के लिए 'लक्ष्मी भंडार' योजना लेकर आए हैं, जबकि भाजपा के पास 'भ्रष्टाचार भंडार' और भाई-भतीजावाद है। वे देश को लूट रहे हैं, जबकि हम महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं।"

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Fri, 29 Aug 2025 16:10:43 +0530 Newsdesk
GST काउंसिल का बड़ा फैसला! 31 अक्टूबर तक खत्म हो सकता है सेस https://citytoday.co.in/3517 https://citytoday.co.in/3517 नई दिल्ली
वस्तु एवं सेवा कर परिषद की बैठक 3 सितंबर को होने जा रही है। इस बैठक में 31 अक्टूबर तक क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त करने पर चर्चा की जा सकती है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर 31 मार्च, 2026 को समाप्त होने वाला था। हालांकि, उपकर संग्रह को पहले ही समाप्त करने के लिए चर्चाएं शुरू हो गई हैं, क्योंकि कोरोना महामारी के दौरान राज्यों को राजस्व की कमी की भरपाई के लिए, लिए गए ऋण पूरी तरह से चुकाने के करीब पहुंच रहे हैं।

यह पुनर्भुगतान 18 अक्टूबर के आसपास पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन सरकार सुचारू संचालन के लिए इसे अक्टूबर के अंत तक बढ़ा सकती है। सरकारी सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि उपकर संग्रह से लगभग 2,000-3,000 करोड़ रुपए का अधिशेष प्राप्त हो सकता है, जिसे केंद्र और राज्यों के बीच समान रूप से साझा किया जाएगा।

कानून में क्षतिपूर्ति के लिए उपकर को केवल पांच वर्षों के लिए अनिवार्य किया गया था, क्योंकि राज्यों को चिंता थी कि 2017 में जीएसटी लागू होने पर उन्हें कर राजस्व का नुकसान होगा। इसलिए राज्य के राजस्व में कमी की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति उपकर लगाया गया था। केंद्र ने राज्यों की ओर से 2.69 लाख करोड़ रुपए उधार लिए और वित्तीय प्रबंधन में सहायता के लिए उन्हें ऋण के रूप में प्रदान किए।

हालांकि, महामारी के दौरान लिए गए ऋणों के भुगतान हेतु, जब राजस्व में तेज गिरावट आई थी, इस उपकर को जून 2022 से मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया था। वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम, 2017 के अनुसार, ऋणों का भुगतान पूरा होने के बाद उपकर संग्रह बंद हो जाएगा।

वित्त मंत्रालय ने सभी वस्तुओं पर 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो जीएसटी दरों के लिए जीएसटी परिषद को अपना प्रस्ताव भेजा है, जो मौजूदा चार स्लैब संरचना का स्थान लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के अनुसार, गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को कम करने के उद्देश्य से एक नियोजित जीएसटी सुधार के माध्यम से नागरिकों को इस दिवाली दोहरा बोनस मिलेगा।

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Thu, 28 Aug 2025 18:55:17 +0530 Newsdesk
भाजपा अध्यक्ष पद की दौड़ में शिवराज सबसे आगे, भागवत से मुलाकात ने बढ़ाई चर्चा https://citytoday.co.in/3516 https://citytoday.co.in/3516 नई दिल्ली 
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के नाम पर अब तक मुहर नहीं लग सकी है। साथ ही पार्टी की तरफ से कोई तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है। अब कहा जा रहा है कि बीजेपी बिहार विधानसभा चुनाव का शेड्यूल आने से पहले अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर सकती है। साथ ही RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख प्रमुख मोहन भागवत के साथ केंद्रीय मंत्री की मुलाकात ने अटकलें तेज कर दी हैं। हालांकि, भाजपा की तरफ से आधिकारिक तौर पर साफ नहीं किया गया है कि अगले प्रमुख के नाम की घोषणा कब होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि पार्टी आलाकमान की तरफ से संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कर ली गई है। वहीं, इस पर 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया है कि इसके बाद नए अध्यक्ष के चुनाव की जानकारी दी जा सकती है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों के प्रमुख पहले चुने जाएंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने यह भी कहा है कि अगर अध्यक्ष बिहार चुनाव की घोषणा से पहले नहीं चुना गया, तो नियुक्ति चुनाव के बाद ही की जाएगी। फिलहाल, भाजपा ने अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए किसी शेड्यूल का ऐलान नहीं किया है।

दिल्ली में बड़ी मीटिंग
रविवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और संघ प्रमुख भागवत की मीटिंग की खबरें हैं। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि यह बैठक बंद कमरे में 45 मिनट तक चली। खास बात है कि चौहान को भी अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदारों में से एक माना जा रहा है। खास बात है कि यह मीटिंग दो साल के लंबे अंतराल के बाद हुई थी।

इन नामों की भी चर्चा
इससे पहले कहा जा रहा था कि केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी, आंध्र प्रदेश की भाजपा प्रमुख डी पुरंदेश्वरी, भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वनति श्रीनिवासन, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव, भाजपा नेता विनोद तावड़े के नाम की भी चर्चाएं चल रही थीं। हालांकि, इन्हें लेकर भाजपा ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है।

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Thu, 28 Aug 2025 18:52:52 +0530 Newsdesk
नगर परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया ने भाजपा छोड़ी, कांग्रेस में शामिल https://citytoday.co.in/3467 https://citytoday.co.in/3467 आगर मालवा

मध्य प्रदेश के आगर मालवा की नगर परिषद सुसनेर में बड़ा सियासी उलटफेर सामने आया है। नगर परिषद सुसनेर की अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया ने भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया। बताया जाता है कि विधायक भैरोसिंह परिहार एवं अन्य कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में लक्ष्मी सिसोदिया ने कांग्रेस की सदस्यता ली। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने दुपट्टा पहनाकर उनका स्वागत किया।
पार्षदों ने खोला था मोर्चा

दरअसल, नगर परिषद की अध्यक्ष लक्ष्मी सिसोदिया के खिलाफ दो दिन पहले तक भाजपा और कांग्रेस के पार्षद अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में थे। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले ही भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने सिसोदिया के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू की थी। दोनों दल के पार्षदों ने अध्यक्ष लक्ष्मी सिसोदिया पर भ्रस्टाचार के आरोप लगाते हुए पद छोड़ने को लेकर मुहिम चला रखी थी। इसके लिए कलेक्टर कार्यलय समेत एसडीएम को पत्र भी लिखा जा चुका था।
कलेक्टर कार्यालय में दिया था आवेदन

इन पार्षदों ने कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दिया था। शनिवार को इन्हीं पार्षदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिसोदिया पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। सुसनेर में 15 पार्षद हैं। इनमें से 12 पार्षदों ने अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। पार्षदों ने उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लागते हुए अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू की थी। इसमे भाजपा के 8 और कांग्रेस के 4 पार्षद शामिल थे।
ई-रिक्शा ओर डीजल घोटाले के आरोप

शनिवार को रेस्ट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्षदों ने ई रिक्शा से लेकर डीजल घोटाले के आरोप लगाए थे। पार्षदों का आरोप था कि अध्यक्ष और उनके परिजनों के निजी वाहनों में नगर परिषद से डीजल भरवाया गया। इसके सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं। पार्षदों का आरोप था कि एक व्यक्ति से नौकरी के नाम पर 1 लाख रुपए लिए गए।
घोटाले का आरोप

पार्षदों का दावा था कि उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने लाखा प्रवेश द्वार को बेच दिया गया है। ई-रिक्शा कचरा वाहन खरीदी में घोटाला हुआ है। लोकायुक्त की जांच में इसकी पुष्टि हुई है। हाथ ठेला कचरा गाड़ी में भी गबन किया गया है।
धार्मिक ग्रंथ ओर देवी देवताओं की खाई कसम

प्रेस वार्ता के बाद सभी पार्षदों ने धार्मिक ग्रंथों और देवी-देवताओं की कसम खाकर अध्यक्ष को हटाने का संकल्प लिया था। इस दौरान पार्षद प्रतिनिधि जितेंद्र सांवला ने बताया कि नगर परिषद कार्यालय से एलईडी लैंप चोरी का मामला दर्ज है। नए बसस्टैंड तालाब से जलकुंभी हटाने पर लाखों खर्च किए गए। जलकुंभी कंठाल नदी में फैलकर किटखेड़ी तक पहुंच गई है। इससे नलजल योजना का पानी दूषित हो रहा है।
एक दिन पहले हुई थी प्रेस कॉन्फ्रेंस

 सुसनेर डाक बंगला स्थित विश्राम गृह पर आयोजित प्रेस वार्ता में सत्तापक्ष के भीतर गहराते असंतोष को को लेकर पार्षदों और उनके प्रतिनिधियों ने एक स्वर में अध्यक्ष पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उन्हें कुर्सी से हटाने की कसम खाई। उनको कहना था कि अब उनका धैर्य जवाब दे चुका है। वे अध्यक्ष को हटाने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। इस बार विपक्षी कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा के पार्षद भी अध्यक्ष के विरोध में खड़े दिख रहे थे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए आरोप

प्रेस वार्ता के दौरान पार्षदों ने आरोप लगाया कि परिषद में ई-रिक्शा की खरीदी से लेकर लोहे की हाथ गाड़ियों, एलईडी लाइटों और मरम्मत कार्यों में बड़े पैमाने पर कथित तौर पर अनियमितताएं हुई हैं। पार्षदों ने कहा कि मरम्मत के नाम पर दो वर्षों में लगभग 20 लाख रुपए का भुगतान किया गया, लेकिन सुधार कार्य कहीं दिखाई नहीं दे रहे।
लक्ष्मी सिसोदिया ने नकारे आरोप

सुसनेर पार्षदों के आरोपों को परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया सिरे से नकार दिया। उनका कहना है कि पार्षदों के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। विकास और निर्माण कार्य नियमानुसार हुए हैं। विधायक भैरोंसिंह परिहार ने कहा कि सिसोदिया को उनकी ही पार्टी के लोग पद से हटाने की कोशिश कर रहे थे। उनके कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी और मजबूत होगी।

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Mon, 25 Aug 2025 18:39:55 +0530 Newsdesk
विधायक का नाती बताकर सरपंच की दबंगई! जमीन मालिक की पिटाई, हत्या की धमकी, केस दर्ज https://citytoday.co.in/3442 https://citytoday.co.in/3442 बिलासपुर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सरपंच साहिल मधुकर द्वारा गुंडगर्दी करने और जान मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है. आरोप है कि सरपंच ने खुद को विधायक का नाती बताते हुए समर्थकों के साथ जमीन की बाउंड्री वॉल तोड़ दी. आरोपियों ने जमीन मालिक को इस दौरान जान से मारने की भी धमकी दी. घटना का वीडियो भी सामने आया है.

जानकारी के मुताबिक, सामने आया वीडियो मस्तूरी थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है. जहां सरपंच साहिल मधुकर ने जमीन मालिक के साथ गुंडागर्डी की है. अपने समर्थकों के साथ मिलकर गाली-गलौच करते हुए पिटाई कर दी. बदमाशों के हौसले इतने बुलंद है कि वह वायरल वीडियो में बाउंड्री वॉल तोड़ने के साथ स्माइल करते हुए विक्ट्री साइन दिखा रहे हैं.

पीड़ित की शिकायत के बाद मस्तूरी थाने में अपराध दर्ज कर लिया गया है. वहीं सरपंच के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है. वहीं सरपंच के खिलाफ स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है.

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Sat, 23 Aug 2025 18:32:37 +0530 Newsdesk
MLA पूजा पाल का आरोप: “मेरी हत्या हुई तो सपा जिम्मेदार” – चिट्ठी में अखिलेश यादव को लिखा संदेश https://citytoday.co.in/3441 https://citytoday.co.in/3441 कौशांबी 

यूपी में कौशांबी जिले की चायल सीट से विधायक पूजा पाल ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने अपनी हत्या की आशंका जताई है. उन्होंने साफ कहा है कि यदि मेरी हत्या होती है तो इसके लिए समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव जिम्मेदार होंगे.

पूजा पाल ने अपनी चिट्ठी में उल्लेख किया है कि उन्होंने जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया है. उनके पति की हत्या के दोषियों को सजा मिल चुकी है. उन्होंने लिखा, मैंने अपना वास्तविक लक्ष्य प्राप्त कर लिया है, मेरे पति के हत्यारों को सजा मिल गई है. अब मुझे मौत भी मिले तो भी गर्व ही होगा.

पत्र के अंतिम हिस्से में उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि अखिलेश यादव ने उन्हें बीच रास्ते में अपमानित करके छोड़ दिया है. इस कारण समाजवादी पार्टी के अपराधी समर्थकों का मनोबल काफी बढ़ गया है और ठीक वैसे ही जैसे उनके पति की हत्या हुई थी, वैसे ही उनकी हत्या भी हो सकती है.

पूजा पाल ने पत्र में कहा, यदि ऐसा होता है तो मैं सरकार और प्रशासन से मांग करती हूं कि मेरी हत्या की वास्तविक दोषी समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को ही माना जाए.

कौन हैं पूजा पाल?

पूजा पाल की शादी 16 जनवरी 2005 को राजू पाल से हुई थी. राजू इलाहाबाद (पश्चिमी) विधानसभा सीट से बसपा विधायक थे. शादी के महज 9 दिन बाद 25 जनवरी 2005 को राजू की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई. यह हत्या इलाहाबाद की सियासत में भूचाल लाने वाली घटना थी.

पूजा पाल ने अपने पति की हत्या के बाद अतीक अहमद और उसके गुर्गों के खिलाफ FIR दर्ज कराई, जिसके चलते वो 'अतीक गैंग से लोहा लेने वाली' नेता के रूप में उभरीं.

पति की हत्या के बाद उन्होंने उपचुनाव लड़ा लेकिन हार गईं. उसके बाद 2007 और 2012 में इलाहाबाद शहर (पश्चिम) से BSP से विधायक चुनी गईं. हालांकि 2017 में वे हार गईं. बाद में 2022 में सपा के टिकट पर चायल विधानसभा सीट से विधायक बनीं.

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Sat, 23 Aug 2025 18:27:28 +0530 Newsdesk
चिदंबरम ने कहा: जेल में बंद मंत्रियों को बर्खास्त करने वाला विधेयक सबसे अजीब https://citytoday.co.in/3417 https://citytoday.co.in/3417 नई दिल्ली 
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने गुरुवार को 130वें संविधान संशोधन विधेयक को अजीब और असंवैधानिक बताया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर किसी को 30 दिनों तक जमानत नहीं मिलती तो क्या वह मुख्यमंत्री या मंत्री नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि जनता का फैसला किसी एक गिरफ्तारी की वजह से पलट दिया जा सकता है। दुनिया में इससे ज्यादा अजीब कोई भी बात नहीं सुनी जा सकती। पेशे से वकील पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर इस विधेयक के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने लिखा, "कोई आरोप नहीं, कोई मुकदमा नहीं, कोई दोष सिद्दी नहीं… लोकतांत्रिक देश में एक गिरफ्तारी (आम तौर पर फर्जी आरोपों के आधार पर) के आधार पर जनता के फैसले को पलट दिया जाएगा।"

निचली अदालतें नहीं देती जमानत: चिदंबरम
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आजकल निचली अदालतें शायद ही कभी जमानत देती हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट भी इसमें आनाकानी करता है। उन्होंने न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा, “हर महीने सुप्रीम कोर्ट में हजारों जमानत याचिकाएं आती हैं। इस प्रक्रिया में कई हफ्ते लग जाते हैं। इसी बीच, जो 30 दिन की मोहलत सरकार दे रही है उसकी तारीख भी निकल जाएगी। परिणामस्वरूप गलत आरोपों के आधार पर एक सरकार अस्थिर हो जाएगी। क्या इससे ज्यादा गैर-कानूनी, असंवैधानिक और लोकतंत्र विरोधी या संघीय विरोधी कुछ हो सकता है?” गौरतलब है कि कल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच लोकसभा में यह बिल पेश किया था। इसके बाद विपक्ष के प्रदर्शन को देखते हुए इस विधेयक को संसद की संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया, इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्य सभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। इस विधेयक के मुताबिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद पर रहते हुए अगर किसी पांच साल तक की सजा हो सकने वाले अपराध के तहत 30 दिन तक जेल में गुजारते हैं। तो ऐसे मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों या पीएम को पद से हटाया जा सकता है। फिर चाहें वह दोषी साबित हुए हों या फिर नहीं।

इस विधेयक को लेकर विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के कानून के जरिए राज्य सरकारें, खासकर विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य सरकारें अस्थिर हो जाएंगी। विपक्ष ने दावा किया कि भाजपा शासित केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों को फंसाने, उन्हें सलाखों के पीछे डालने और फिर उन्हें पद से हटाने की योजना बना रही है। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए राजनीति में गिरते नैतिक मानकों को ऊपर उठाना और इसे ईमानदार बनाए रखने वाला बताया।

आपको बता दें यह बिल ऐसे समय में आया है जब कुछ महीने पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री पद अरविंद केजरीवाल जेल से सरकार चला रहे थे। वहीं दूसरी ओर झारखंड के मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन ने भी जेल गए थे। हालांकि उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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Thu, 21 Aug 2025 18:41:30 +0530 Newsdesk
इंडिया गठबंधन का नया अभियान: घर&घर पहुंचेगा अधिकार पर्चा, शेखपुरा से तेजस्वी की यात्रा शुरू https://citytoday.co.in/3416 https://citytoday.co.in/3416 पटना 


बिहार में विधानसाभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन वोट अधिकार यात्रा कर रहा है। इंडिया गठबंधन ने मतदाता अधिकार यात्रा के साथ अपने वादों की पोटली भी खोल दी है। गठबंधन के कार्यकर्ता यात्रा के दौरान घर-घर अधिकार का पर्चा भी बांटेंगे। गुरुवार को 5वें दिन की यात्रा शेखपुरा से शुरू होगी। रात्रि विश्राम मुंगेर में होगा। वहीं राहुल गांधी दिल्ली में उपराष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी गतिविधियों में व्यस्त रहने के चलते गुरुवार की शाम से यात्रा में शामिल होंगे। गुरुवार की सुबह शेखपुरा से यात्रा में तेजस्वी यादव और अन्य नेता मौजूद रहेंगे। बुधवार को यात्रा का विश्राम दिन रहा।

वहीं, यात्रा में 28 अगस्त को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल होंगे। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में अखिलेश यादव का जुड़ना वोट चोरी के ख़िलाफ़ हमारे इस जन आंदोलन को और मज़बूत करेगा।

घर-घर अधिकार का पर्चा में वादों का गुलदस्ता समाहित किया गया है। इस पर्चे में गठबंधन के सभी नेताओं को जगह दी गई है। राहुल-तेजस्वी संग माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, भाकपा के डी राजा को भी जगह दी गई है। इसमें कमाई, दवाई, पढ़ाई और सामाजिक न्याय के अधिकार से संबंधित वादे गिनाए गए हैं। गठबंधन ने इसी के इर्द-गिर्द चुनावी घोषणा पत्र तैयार करने का मन बनाया है।

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Thu, 21 Aug 2025 18:39:26 +0530 Newsdesk
7 अगस्त को राहुल गांधी के आवास पर INDIA गठबंधन की अहम बैठक, कई बड़े नेता होंगे शामिल https://citytoday.co.in/3227 https://citytoday.co.in/3227 नई दिल्ली

विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ब्लॉक की अगली बैठक 7 अगस्त को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आवास पर होगी। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक डिनर के दौरान होगी और इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बता दें कि, विपक्षी इंडिया गठबंधन की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब विपक्ष केंद्र सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर गंभीर आरोप लगा रहा है। 7 अगस्त की डिनर मीटिंग में आने वाले दिनों की राजनीतिक रणनीति और संभावित आंदोलन की रूपरेखा भी बन सकती है।

बता दें कि, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि 2024 के लोकसभा चुनावों में करीब 70-80 सीटों पर धांधली हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बहुत मामूली बहुमत से जीते हैं और यदि 15 सीटें भी सही तरीके से हुई होतीं, तो वो प्रधानमंत्री नहीं बन पाते। इसके साथ ही, बैठक में कई मुद्दे उठाए जा सकते हैं। जिसमें बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया, महाराष्ट्र में फर्जी वोटर जोड़ने का आरोप, ऑपरेशन सिंदूर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से संभावित टैरिफ धमकी शामिल है।

बता दें कि, इससे पहले इंडिया गठबंधन की पिछली बैठक 19 जुलाई को वर्चुअल हुई थी, जिसमें 24 से ज्यादा दलों के नेता शामिल हुए थे। संसद के मानसून सत्र की रणनीति बनाने को लेकर यह बैठक वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से हुई थी।

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Mon, 04 Aug 2025 12:06:18 +0530 Newsdesk
शिवराज दिल्ली में, फोकस एमपी पर! क्या है इसके पीछे की राजनीति? https://citytoday.co.in/3151 https://citytoday.co.in/3151 दिल्ली में मंत्री, दिल अब भी एमपी में: शिवराज की सक्रियता के पीछे क्या है राजनीतिक संकेत?

भोपाल।
केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद भी शिवराज सिंह चौहान की सक्रियता मध्य प्रदेश की सियासत में लगातार बनी हुई है। चाहे आदिवासी समुदाय के हितों की बात हो, किसान संगठनों की बैठकें हों या पदयात्राएं—शिवराज की हर गतिविधि संकेत देती है कि उनका दिल अब भी मध्य प्रदेश की धरती से जुड़ा है। यह सक्रियता महज औपचारिक नहीं, बल्कि एक नई राजनीतिक पटकथा का हिस्सा भी मानी जा रही है।

20 वर्षों तक मुख्यमंत्री पद पर रह चुके शिवराज सिंह की जड़ें गहराई तक मध्यप्रदेश की मिट्टी से जुड़ी हैं। जानकार मानते हैं कि उनकी राज्य में बढ़ती सक्रियता, विशेषकर सीहोर से इंदौर तक की यात्रा और जनसंवाद, सिर्फ सरकारी दौरे नहीं, बल्कि भावी रणनीति का संकेत हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

वरिष्ठ पत्रकार देवश्री माली मानते हैं कि शिवराज सिंह चौहान की सक्रियता का मुख्यमंत्री मोहन यादव के पद पर कोई सीधा खतरा नहीं है। वे कहते हैं,

"बीजेपी का इतिहास देखेंगे तो पाएंगे कि जब शिवराज को पहली बार लाया गया था, तब भी उमा भारती और बाबूलाल गौर जैसे बड़े नेता मौजूद थे। आज शिवराज एक चरित्र अभिनेता की भूमिका में हैं—ऐसे नेता जो अब केंद्रीय राजनीति में जा चुके हैं, लेकिन जिनका अनुभव पार्टी के लिए पूंजी है।"

उनके अनुसार, पार्टी के कैडर में विद्रोह की प्रवृत्ति नहीं होती। शिवराज राष्ट्रीय राजनीति में होने के बावजूद मध्य प्रदेश में सामाजिक जुड़ाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषक प्रो. लोकेंद्र सिंह इसे स्वाभाविक बताते हैं।

"मध्य प्रदेश उनका घर है, कार्यक्षेत्र है। वे यहीं से चुने जाते हैं और यहां उनकी उपस्थिति स्वाभाविक है। इसमें किसी रणनीति की तलाश करना ज़रूरी नहीं।"

उनका मानना है कि शिवराज का केंद्र में मंत्री बनना उनकी प्रशासनिक क्षमता और अनुभव का सम्मान है।

"बीस साल मुख्यमंत्री रहने वाले नेता को सामान्य सांसद नहीं बनाया जा सकता। उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करना तार्किक भी था और राजनीतिक रूप से जरूरी भी।"

सक्रियता या रणनीति?

एक वरिष्ठ पत्रकार के अनुसार, राजनीति में पद और प्रतिष्ठा परिस्थितियों और समीकरणों से तय होते हैं।

"एक समय ऐसा था जब शिवराज को लाने के लिए उमा भारती जैसे दिग्गज नेता को हटाया गया था। आज केंद्र में पूर्ण बहुमत न होने की स्थिति में, शिवराज जैसे सर्वमान्य चेहरों की आवश्यकता है।"

उनके अनुसार, शिवराज की वर्तमान सक्रियता केवल कार्यक्षेत्र से जुड़ाव नहीं है।

"चाहे अधिकारियों को डांटना हो, मुख्यमंत्री निवास पर आदिवासी समूहों को लेकर पहुंचना हो, या पदयात्राएं—यह सब किसी सोची-समझी स्क्रिप्ट का हिस्सा लगता है।"

'मामा' की वापसी की पटकथा?

शिवराज सिंह चौहान के पुराने क्षेत्रों में लगातार जनसंपर्क, जनसभाएं और जनहित मुद्दों पर स्पष्ट बयान—यह सब केवल संयोग नहीं लगते। जानकारों की मानें तो शिवराज सिंह मध्य प्रदेश की राजनीति से ‘रिटायर्ड हर्ट’ नहीं हुए हैं। उनकी सक्रियता न केवल पार्टी के भीतर संतुलन को प्रभावित कर रही है, बल्कि यह भी संकेत दे रही है कि उनका राजनीतिक सफर अब भी अधूरा है।

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Wed, 30 Jul 2025 11:57:17 +0530 news desk MPcg
अध्यक्ष पद की रेस में मतभेद? RSS की प्राथमिकताओं को लेकर संगठन में हलचल https://citytoday.co.in/3146 https://citytoday.co.in/3146 नई दिल्ली

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद के चुनाव के बीच उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के इस्तीफे ने पार्टी की चुनौतियों को बढ़ा दिया है। अब भाजपा के सामने दो महत्वपूर्ण पदों के लिए उम्मीदवार चुनने का दवाब है। सूत्रों की मानें तो भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच अध्यक्ष पद के उम्मीदवार पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है, जिसके कारण नाम घोषित करने में देरी हो रही है। हालांकि पार्टी ने इस पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा दोनों पदों पर राजनीतिक और जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन कर रही है। पार्टी अगस्त के अंत तक नए उपराष्ट्रपति का चुनाव करना चाहती है, जबकि उसी समय भाजपा अध्यक्ष का नाम भी घोषित करना चाहती है। संभावना जताई जा रही है कि अगर उपराष्ट्रपति पद के लिए उच्च जाति के नेता को चुना जाता है, तो भाजपा अध्यक्ष के रूप में ओबीसी या दलित समुदाय से उम्मीदवार की घोषणा की जाएगी।

विशेष बात यह है कि 2022 में द्रौपदी मुर्मू भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनी थीं, जबकि उसी वर्ष जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति बने थे, जिनका संबंध किसान परिवार से था। माना जाता है कि यह चयन जाट किसानों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाने की रणनीति का हिस्सा था, जो 2020-21 के कृषि कानून विरोधी आंदोलन में सक्रिय थे।

चुनाव प्रक्रिया को लेकर सूत्र बताते हैं कि उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार भाजपा का होगा, लेकिन अंतिम नाम एनडीए के सहयोगी दलों के साथ चर्चा के बाद तय होगा। वहीं, भाजपा अध्यक्ष के नाम को लेकर भाजपा और RSS के बीच अभी भी विचार-विमर्श जारी है। संघ एक ‘मजबूत संगठन नेता’ के पक्ष में है।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हो सकते हैं और इस मुद्दे को RSS नेतृत्व के साथ सुलझाने का प्रयास होगा। कहा जा रहा है कि भाजपा ने दो ओबीसी मंत्री — शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव — के नाम प्रस्तावित किए हैं, लेकिन संघ की सहमति अभी नहीं मिली है। प्रधानमंत्री मोदी के हस्तक्षेप से इस गतिरोध को दूर किया जा सकता है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “मोदी जी स्वयं संघ नेतृत्व से बात कर गतिरोध को समाप्त कर सकते हैं। उपराष्ट्रपति पद के लिए नाम पर भी जल्द चर्चा होगी।”

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Tue, 29 Jul 2025 15:52:45 +0530 news desk MPcg
धनखड़ के इस्तीफे से BJP की रणनीति पर असर, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में लग सकती है देरी https://citytoday.co.in/3123 https://citytoday.co.in/3123 नई दिल्ली

देश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति में फंसती जा रही है। पहले उसके सामने पार्टी के सर्वोच्च पद के लिए अपने वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ सहमति बनाने की चुनौती थी। अब भाजपा को देश के नए उपराष्ट्रपति पद के लिए भी माथापच्ची करनी पड़ेगी। भाजपा अध्यक्ष का चुनाव और लंबा खिंच गया है। उपराष्ट्रपति के अचानक इस्तीफा देने से यह स्थिति पैदा हुई है। पार्टी का पूरा ध्यान अब नए उपराष्ट्रपति के चुनाव पर केंद्रित हो गया है और संगठन के चुनाव का मामला एक बार फिर ठंडा पड़ गया है।

नए पार्टी अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं फिर से बंद हो गई हैं और इसके चलते कई राज्यों के अध्यक्षों का मामला भी लटक गया है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पार्टी के संगठन चुनाव अब कब पूरे होंगे, लेकिन फिलहाल मॉनसून सत्र में ऐसा होता नहीं दिख रहा है। उसके बाद की स्थितियां भी साफ नहीं है, क्योंकि इसके बाद बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ जाएगी। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी उन राज्यों में हैं, जहां अभी तक अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका। इनमें उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक जैसे बड़े राज्य भी शामिल हैं। इन राज्यों के पार्टी कार्यकर्ताओं को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

रेस में इन दिग्गजों के नाम
आपको बता दें कि राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए जिन दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में हैं, उनमें धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय मंत्री), शिवराज सिंह चौहान (कैबिनेट मंत्री), मनोहर लाल खट्टर (कैबिनेट मंत्री), भूपेंद्र यादव (कैबिनेट मंत्री) जैसे दिग्गज शामिल हैं। इनमें से कुछ नाम संगठनात्मक अनुभव के आधार पर मजबूत माने जा रहे हैं, तो कुछ नाम राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर सामने आए हैं।

28 प्रदेश अध्यक्ष बदले गए
BJP ने अब तक 36 में से 28 राज्यों में नए या फिर से नियुक्त अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। बाकी महत्वपूर्ण राज्य जैसे कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और गुजरात की घोषणा बाकी है। इस जमीनी पुनर्गठन से पार्टी एक नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के लिए मंच तैयार कर रही है।

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Mon, 28 Jul 2025 12:42:52 +0530 news desk MPcg
ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में आज मैराथन बहस: राजनाथ सिंह देंगे शुरुआत https://citytoday.co.in/3117 https://citytoday.co.in/3117 नई दिल्ली

संसद के मॉनसून सत्र में ऑपरेशन सिंदूर पर 16 घंटे की लंबी बहस शुरू होगी
लोकसभा में सोमवार को 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर 16 घंटे की विशेष चर्चा की शुरुआत होगी। इस बहस की अगुवाई रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दोपहर 12 बजे करेंगे। इसके बाद मंगलवार से राज्यसभा में भी इसी विषय पर 16 घंटे तक चर्चा जारी रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी इस चर्चा में भाग लेने की संभावना जताई जा रही है।

संसद में इस महत्वपूर्ण विषय पर सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है. इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस चर्चा के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान, डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह और तीनों सेना प्रमुखों के साथ कई बैठकें की हैं. मिली जानकारी के मुताबिक, चर्चा में गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर और निशिकांत दुबे भी शामिल होंगे.

सरकार इस चर्चा को पूरी आक्रामकता के साथ रखने की तैयारी में है. खास बात ये है कि ये बहस करगिल विजय दिवस (26 जुलाई) के ठीक बाद हो रही है, और सरकार इसे 'विजय दिवस' की तरह पेश करने की तैयारी में है.

पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को  "विजय उत्सव" बताया है

ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई को की गई थी. ये ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना द्वारा चलाया गया एक सैन्य अभियान था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऑपरेशन को "विजय उत्सव" बताया और कहा कि यह भारत की स्वदेशी डिफेंस कैपेबिलिटी का प्रमाण है.

सरकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ़ 22 मिनट में पूरा हुआ और इसमें सभी आतंकियों को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया गया. इसे 100% सफल ऑपरेशन बताया जा रहा है.

विपक्ष मांग रहा सरकार से जवाब

ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर विपक्ष भी सरकार से जवाब मांग रहा है. इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए. बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने इस बहस के लिए समय निर्धारित किया. सरकार ने स्पष्ट किया है कि वो ऑपरेशन सिंदूर पर विस्तार से चर्चा के लिए तैयार है. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा था कि सरकार देश के सामने सभी सच्चाई रखने को तैयार है. 

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Mon, 28 Jul 2025 12:33:34 +0530 news desk MPcg
वकील उज्ज्वल निकम की राज्यसभा में एंट्री क्या मराठी पॉलिटिक्स की काट है? https://citytoday.co.in/2970 https://citytoday.co.in/2970 मुंबई 

महाराष्ट्र में भाषा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. मराठी और अंग्रेजी के साथ एक से पांचवीं कक्षा तक तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को अनिवार्य करने के महाराष्ट्र सरकार के आदेश के खिलाफ उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने आंदोलन का ऐलान किया था. महाराष्ट्र सरकार ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का आदेश वापस ले लिया, लेकिन यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा.

महाराष्ट्र में जल्द ही बीएमसी और अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव होने हैं और सत्ताधारी महायुति की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मराठी अस्मिता की सियासी पिच पर घिरी नजर आ रही है. महाराष्ट्र में जारी भाषा विवाद के बीच राज्यसभा में चार सदस्य मनोनीत किए गए.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिन चार सदस्यों को उच्च सदन के लिए मनोनीत किया है, उनमें एक नाम चर्चित सरकारी वकील उज्ज्वल निकम का भी है. उज्ज्वल निकम के राज्यसभा सदस्य मनोनीत होने के बाद अब बात इसे लेकर भी हो रही है कि क्या उनका मनोनयन उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की मराठी पॉलिटिक्स की काट है?

मराठी पॉलिटिक्स की चर्चा क्यों

उज्ज्वल निकम एक मराठी परिवार से आते हैं. निकम का जन्म जलगांव के एक संभ्रांत मराठी परिवार में हुआ था और उनके पिता न्यायिक सेवा में जज थे. उज्ज्वल निकम को पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने टिकट दिया था. हालांकि, कोर्ट रूम में अजेय निकम सियासत में अपना डेब्यू मैच हार गए थे. बीजेपी संदेश, संकेत और प्रतीकों की सियासत में दक्ष मानी जाती है और मराठी विवाद के बीच अब मराठा उज्ज्वल निकम का देश के उच्च सदन में मनोनयन भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

क्या कहते हैं जानकार

महाराष्ट्र के मुंबई में ही रहने वाले राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने कहा कि उज्ज्वल निकम बड़े वकील हैं, लेकिन एंटी मराठी नैरेटिव काउंटर करने में कारगर होंगे भी या नहीं? यह भविष्य ही बताएगा. हां, बीजेपी ने ठाकरे बंधुओं के इस नैरेटिव को काउंटर करने के लिए अपने सबसे बड़े चेहरे को आगे कर दिया है.

उन्होंने कहा कि उज्ज्वल निकम से पीएम मोदी का मराठी में बात करना मराठी समुदाय के लिए बीजेपी की ओर से यह संदेश है कि हमारा सबसे बड़ा नेता भी मराठी बोलता है, मराठी जानता है, उसका सम्मान करता है और यह मुद्दा अब यहीं पर समाप्त हो जाना चाहिए. महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव संदेश की पॉलिटिक्स का लिटमस टेस्ट होंगे.

महाराष्ट्र में एमपी-छत्तीसगढ़ वाली रणनीति!

राज्यसभा में उज्ज्वल निकम के मनोनयन को बीजेपी की मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले वाली रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. दोनों राज्यों में छिटके अनुसूचित जनजाति (एसटी) के मतदाताओं को फिर से अपने पाले में लाने की कोशिश में बीजेपी ने रानी दुर्गावती गौरव यात्रा निकाली और सरकार ने भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति के नाम पर कर दिया.

आदिवासी समाज के बीच भगवान का दर्जा रखने वाले बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई और जबलपुर में शंकर शाह-रघुनाथ शाह के नाम पर स्मारक भी बनवाया गया. छत्तीसगढ़ में पुरखौती सम्मान यात्रा भी इसी रणनीति का हिस्सा थी.

दोनों राज्यों में मतदान से ठीक पहले पीएम मोदी ने बिरसा मुंडा की जयंती पर उनके गांव उलिहातु जाकर भी आदिवासी समाज को संदेश दिया था और यह चुनाव में कारगर भी साबित हुआ था. अब उज्ज्वल निकम के राज्यसभा में मनोनयन को भी मराठी पॉलिटिक्स की मुश्किल दिख रही पिच पर बीजेपी की संदेश और प्रतीक की सियासत वाली रणनीति से जोड़कर ही देखा जा रहा है.

संजय दत्त अगर हथियार के बारे में बता देते तो मुंबई में नहीं होते धमाके

राज्यसभा जाने की तैयारी कर रहे मशहूर वकील उज्ज्वल निकम ने मुंबई धमाकों को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अभिनेता अगर संजय दत्त हथियारों से लदे वाहन की जानकारी दे देते, तो मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट टल सकते थे। 1993 में देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई में हुए धमाकों में 267 लोगों की मौत हो गई थी।

 निकम ने कहा, 'मैं सिर्फ एक ही बात कहना चाहता हूं। धमाका 12 मार्च को हुआ। इससे एक दिन पहले वैन उनके (संजय दत्त) के घर पहुंची थी। वह हथियारों हैंड ग्रेनेड, एके 47 से लदी हुई थी। अबू सलेम उसे लेकर आया था। संजय ने कुछ हैंड ग्रेनेड और बंदूकें उठा ली थीं। इसके बाद उन्होंने सबकुछ वापस कर दिया और सिर्फ एक एके 47 रखी।'

वकील ने कहा, 'अगर वह उस समय पुलिस को घर कर देते, तो पुलिस जांच करती और मुंबई धमाके कभी नहीं होते।' निकम ने कहा कि उन्होंने इस बारे में दत्त के वकील को भी बताया था कि एके 47 का नहीं चलना और उसका पास में होना एक बात है, लेकिन उनकी तरफ से पुलिस को नहीं बताए जाने के चलते ब्लास्ट हुए और बहुत सारे लोगों की जान गई।

निकम ने चैनल को बताया कि तब संजय दत्त निर्दोष थे और बंदूकों के प्रति आकर्षण होने के कारण हथियार उठा लिया था। उन्होंने कहा, 'कानून की नजरों में जुर्म किया है, लेकिन वह सीधे व्यक्ति हैं…। मैं उन्हें निर्दोष मानता हूं।'

कोर्ट ने TADA केस में दत्त को बरी कर दिया था, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी 6 साल की सजा को घटाकर 5 साल कर दिया था। दत्त इस दौरान महाराष्ट्र के पुणे स्थित येरवाड़ा जेल में बंद थे।
संजय दत्त से क्या हुई थी बात

निकम बताते हैं कि आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाए जाने के बाद संजय दत्त को बड़ा झटका लगा था। उन्होंने कहा, 'मैंने उनकी बॉडी लैंग्वेज बदलते देखी। मैंने महसूस किया कि उन्हें झटका लगा है। वह फैसले को सहन नहीं कर पा रहे थे और घबराए लग रहे थे।'

 बातचीत में निकम ने 'राज' का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा, 'मैंने संजय से कहा था कि संजय ऐसा मत करो। मीडिया आपको देख रही है। आप एक एक्टर हैं। अगर आप सजा से डरे हुए लगेंगे, तो लोग आपको दोषी समझेंगे। आपके पास अपील करने का मौका है। इसपर उन्होंने कहा हां सर।'

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Tue, 15 Jul 2025 16:43:06 +0530 news desk MPcg
टी राजा सिंह के इस्तीफे से आया राजनीतिक भूचाल—तेलंगाना का समीकरण किस दिशा में? https://citytoday.co.in/2947 https://citytoday.co.in/2947 हैदराबाद 
 बीजेपी के बड़े नेताओं ने गोशामहल के MLA और हिंदुत्व के पोस्टर बॉय टी राजा सिंह का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। इससे तेलंगाना की राजनीति में और बीजेपी के अंदर बड़ा बदलाव आया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने एक पत्र में इस्तीफे की मंजूरी की जानकारी दी। उन्होंने साफ कहा कि टी राजा सिंह ने इस्तीफे में जो कारण बताए हैं, वे अप्रासंगिक हैं। ये कारण पार्टी की विचारधारा, काम करने के तरीके, सिद्धांतों और अनुशासन से मेल नहीं खाते।

टी राजा सिंह ने पहले राज्य के नेताओं को इस्तीफा सौंपा था। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आदेश के बाद इसे तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया गया।

क्या बोले टी राजा सिंह
इस्तीफा मंजूर होने के बाद टी राजा सिंह ने कहा कि मैं 11 साल पहले बिना किसी निजी महत्वाकांक्षा के पार्टी में शामिल हुआ था। मैं ईमानदारी और निष्ठा से हिंदुत्व के लिए काम करता रहूंगा। उनका ये बयान दिखाता है कि वे अभी भी अपने विचारों पर कायम हैं।

एकला चलो की राह पर टी राजा सिंह?
पहले ये अटकलें लगाई जा रही थीं कि टी राजा सिंह उद्धव ठाकरे की शिवसेना या पवन कल्याण की जन सेना में शामिल हो सकते हैं। लेकिन, शुक्रवार को उन्होंने कहा कि वे फिलहाल किसी भी पार्टी में शामिल नहीं हो रहे हैं। इससे उनके समर्थकों में थोड़ा असमंजस है।

तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष पद को लेकर विवाद?
दस दिन पहले, उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने यह इस्तीफा केंद्रीय नेतृत्व के उस फैसले के विरोध में दिया था, जिसमें पूर्व MLC एन रामचंदर राव को तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरने को कहा गया था। टी राजा सिंह भी इस पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेताओं ने, जिनमें केंद्रीय मंत्री और चुनाव प्रभारी शोभा करंदलाजे भी शामिल थीं, उनकी उम्मीदवारी को बाधित किया।

तेलंगाना बीजेपी ने क्या कहा
हालांकि, तेलंगाना बीजेपी ने इन आरोपों को गलत बताया है। पार्टी का कहना है कि सिंह के पास राज्य कार्यकारिणी समिति के 10 सदस्यों का समर्थन नहीं था, जो कि जरूरी है। अभी तक सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा नहीं सौंपा है। इसलिए, उनकी विधानसभा सीट का क्या होगा, ये अभी साफ नहीं है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ये अभी तय नहीं है कि केंद्रीय नेतृत्व उनका इस्तीफा स्पीकर को भेजेगा या ये फैसला सिंह पर ही छोड़ देगा।

निलंबित भी किए गए थे टी राजा सिंह
टी राजा सिंह की बीजेपी से दूरी उनके दूसरे कार्यकाल में लगातार बढ़ती गई। इसकी वजह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी के साथ उनकी अनबन बताई जा रही है। उन्हें पहले कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी पर विवादित टिप्पणी करने के कारण निलंबित भी किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें वापस ले लिया गया था।

भाजपा ने मुझ पर विश्वास करते हुए लगातार तीन बार तेलंगाना विधानसभा चुनाव में गोशामहल से विधायक पद का टिकट दिया। इस विश्वास के लिए मैं भाजपा के सभी पदाधिकारियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। आज भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।शायद मैं तेलंगाना में भाजपा की सरकार बनाने का सपना लेकर दिन-रात मेहनत कर रहे लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं की पीड़ा दिल्ली तक नहीं पहुंचा सका।मैं यह बात स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह निर्णय मैंने किसी पद, सत्ता या व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण नहीं लिया है। मेरा जन्म हिंदुत्व की सेवा के लिए हुआ है, और मैं अंतिम सांस तक हिंदुत्व के लिए कार्य करता रहूंगा। मैं सदैव पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और सनातन धर्म की रक्षा हेतु कार्य करता रहूंगा। समाज की सेवा और हिन्दू समाज के अधिकारों के लिए मैं अंतिम सांस तक अपनी आवाज बुलंद करता रहूंगा।जय श्री राम।

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Sat, 12 Jul 2025 15:56:22 +0530 news desk MPcg
शशि थरूर का इमरजेंसी पर लेख: आज का भारत 1975 जैसा नहीं है https://citytoday.co.in/2920 https://citytoday.co.in/2920 नई दिल्ली

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से लगाए गए आपातकाल की कड़ी आलोचना करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि इससे पता चलता है कि किस तरह से अक्सर आजादी को छीना जाता है. उन्होंने कहा कि आपातकाल यह भी दिखाता है कि कैसे दुनिया 'मानवाधिकारों के हनन' से अनजान रही. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 1975 की इमरजेंसी पर एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने इंदिरा गांधी के इस फैसले की जमकर आलोचना की है.

लोकतंत्र के समर्थक रहें सतर्क

प्रोजेक्ट सिंडीकेट की तरफ से प्रकाशित लेख में थरूर ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सत्तावादी नजरिये ने सार्वजनिक जीवन को डर और दमन की स्थिति में धकेल दिया. थरूर ने लिखा कि पचास साल पहले प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से लगाए गए आपातकाल ने दिखाया था कि कैसे आज़ादी को छीना जाता है, शुरू में तो धीरे-धीरे, भले-बुरे लगने वाले मकसद के नाम पर छोटी-छोटी लगने वाली आजादियों को छीन लिया जाता है. इसलिए यह एक ज़बरदस्त चेतावनी है और लोकतंत्र के समर्थकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए.

थरूर ने लिखा, 'इंदिरा गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि कठोर कदम जरूरी थे, सिर्फ आपातकाल की स्थिति ही आंतरिक अव्यवस्था और बाहरी खतरों से निपट सकती थी, और अराजक देश में अनुशासन और दक्षता ला सकती थी.' जून 1975 से मार्च 1977 तक करीब दो साल तक चले आपातकाल में नागरिक स्वतंत्रताएं निलंबित कर दी गईं और विपक्षी नेताओं को जेल में भर दिया गया. 

उन्होंने कहा कि अनुशासन और व्यवस्था की चाहत अक्सर बिना कहे ही क्रूरता में तब्दील हो जाती थी, जिसका उदाहरण इंदिराजी के बेटे संजय गांधी की ओर से चलाए गए जबरन नसबंदी अभियान थे, जो गरीब और ग्रामीण इलाकों में केंद्रित थे, जहां मनमाने लक्ष्य हासिल करने के लिए ज़बरदस्ती और हिंसा का इस्तेमाल किया जाता था.

इमरजेंसी में हजारों लोग हुए बेघर

उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे शहरी केंद्रों में बेरहमी से की गई झुग्गी-झोपड़ियों को ढहाने की कार्रवाई ने हज़ारों लोगों को बेघर कर दिया और उनके कल्याण की कोई चिंता नहीं की गई.

उन्होंने लिखा कि आपातकाल ने इस बात का ज्वलंत उदाहरण पेश किया कि लोकतांत्रिक संस्थाएं कितनी कमज़ोर हो सकती हैं, यहां तक कि ऐसे देश में भी जहां वे मज़बूत दिखती हैं. इसने हमें याद दिलाया कि एक सरकार अपनी नैतिक दिशा और उन लोगों के प्रति जवाबदेही की भावना खो सकती है जिनकी वह सेवा करने का दावा करती है.

वरिष्ठ कांग्रेस नेता थरूर ने यह भी बताया कि किस तरह अहम लोकतांत्रिक स्तंभों को खामोश कर दिया गया और हिरासत में यातनाएं दी गईं. एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल हत्याएं बड़े पैमाने पर की गईं, जिससे उन लोगों के लिए 'काली सच्चाई' की तस्वीर सामने आई, जिन्होंने शासन की अवहेलना करने की हिम्मत दिखाई थी. 

थरूर ने कहा कि न्यायपालिका भी भारी दबाव के आगे झुक गई, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण और नागरिकों के स्वतंत्रता के अधिकार को निलंबित कर दिया. उन्होंने कहा, 'पत्रकार, कार्यकर्ता और विपक्षी नेता सलाखों के पीछे पाए गए. व्यापक संवैधानिक उल्लंघनों ने मानवाधिकारों के हनन की एक भयावह सीरीज को को जन्म दिया.

आज का भारत ज्यादा मजबूत

अपने लेख में थरूर ने कहा कि आज का भारत 1975 का भारत नहीं है. हम ज़्यादा आत्मविश्वासी, ज़्यादा समृद्ध और कई मायनों में ज़्यादा मज़बूत लोकतंत्र हैं. फिर भी आपातकाल के सबक चिंताजनक रूप से प्रासंगिक बने हुए हैं. सत्ता को केंद्रीकृत करने, आलोचकों को चुप कराने और संवैधानिक सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने का लालच कई रूपों में उभर सकता है.

उन्होंने कहा कि अक्सर राष्ट्रीय हित, इस अर्थ में आपातकाल एक ज़बरदस्त चेतावनी के रूप में काम करना चाहिए और लोकतंत्र के समर्थकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए.

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Fri, 11 Jul 2025 16:26:08 +0530 news desk MPcg
कर्नाटक में सीएम बदलाव की चर्चा तेज, सिद्धारमैया की राहुल गांधी से मुलाकात बढ़ा रही सस्पेंस https://citytoday.co.in/2919 https://citytoday.co.in/2919 नई दिल्ली/बेंगलुरु
कर्नाटक में फिर से नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों का बाजार गर्म है। इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं। दिल्ली पहुंचने पर उन्होंने कहा, "…मैंने आज राहुल गांधी से मिलने के लिए समय मांगा था लेकिन अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है।" कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद के बारे में पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा कि वहां कोई वैकेंसी नहीं है। मैं पांच साल पूरा करूंगा। सिद्धारमैया ने कहा, "डीके शिवकुमार ने खुद कहा है कि मुख्यमंत्री पद के लिए कोई रिक्ति नहीं है।" हालांकि, इस बीच राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने बेंगलुरु में गुरुवार को यह कहकर सस्पेंस बढ़ा दिया है कि इस मुद्दे पर पार्टी आलाकमान ही निर्णय करेगा। उन्होंने कहा, “पार्टी नेतृत्व सब देख रहा है और समय आने पर वह निर्णय करेगा।”

एक और नाटक कंपनी खोलने की इच्छा नहीं
प्रदेश में संभावित नेतृत्व परिवर्तन और कुछ पार्टी नेताओं एवं विधायकों के सार्वजनिक बयानों के बारे में एक सवाल के जवाब में परमेश्वर ने स्वीकार किया कि वास्तव में ‘नाटक’ हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इसपर टिप्पणी करके उनकी ‘‘एक और नाटक कंपनी खोलने की इच्छा नहीं है।’’

पार्टी आलाकमान सब देख रहा है
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘जैसा कि आप (मीडियाकर्मियों) ने कहा, एक नाटक जारी है। इस (नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे) पर न तो बार-बार चर्चा होनी चाहिए और न ही बयानबाजी। प्रशासन में कोई समस्या नहीं है, यह सुचारू रूप से चल रहा है और मुख्यमंत्री (सिद्धरमैया) प्रभावी रूप से इसका संचालन कर रहे हैं। मैं एक और नाटक कंपनी (बयान देने से) नहीं खोलना चाहता।’’ उन्होंने कहा कि पार्टी आलाकमान सब देख रहा है और समय आने वह निर्णय करेगा।

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Fri, 11 Jul 2025 16:00:35 +0530 news desk MPcg
समिक भट्टाचार्य बने बंगाल भाजपा के नए अध्यक्ष, रविशंकर प्रसाद ने किया ऐलान https://citytoday.co.in/2883 https://citytoday.co.in/2883 कोलकाता 
राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य पश्चिम बंगाल भाजपा के नए अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने उनके नाम का एलान किया।  वरिष्ठ भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य को आधिकारिक तौर पर पश्चिम बंगाल इकाई का नया अध्यक्ष घोषित किया गया। वह 2026 के विधानसभा चुनावों में पार्टी का नेतृत्व करेंगे। कोलकाता में साइंस सिटी में आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भट्टाचार्य को निर्वाचन का प्रमाण पत्र सौंपा।

नवनियुक्त भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कसा टीएमसी पर तंज
प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने के बाद समिक भट्टाचार्य ने टीएमसी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि  टीएमसी शासन में बंगाल की संस्कृति, बहुलवाद, विरासत खतरे में है। 2026 का विधानसभा चुनाव इनके अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने विधानसभा चुनावों में भ्रष्ट टीएमसी सरकार के कुशासन को समाप्त करने का मन बना लिया है। बंगाल भाजपा अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंसा और सांप्रदायिकता की राजनीति का विरोध करती है। 

यह एक सतत रिले रेस-  सुकांत मजूमदार
भाजपा नेता समिक भट्टाचार्य के पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष चुने जाने पर पश्चिम बंगाल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि यह एक सतत रिले रेस है। पहले, लड़ाई मेरे नेतृत्व में होती थी, अब लड़ाई एक नए अध्यक्ष के नेतृत्व में होगी। हम ममता बनर्जी की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। 

समिक भट्टाचार्य का चुनाव पहले से ही तय माना जा रहा था, क्योंकि उनके खिलाफ किसी ने नामांकन दाखिल नहीं किया था। रविशंकर प्रसाद ने उन्हें प्रमाण पत्र सौंपते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष पद के लिए केवल एक नामांकन दाखिल हुआ है। इससे पहले, भट्टाचार्य ने बुधवार दोपहर साल्ट लेक स्थित भाजपा के राज्य मुख्यालय में निवर्तमान अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। गौरतलब है कि 2026 के विधानसभा चुनाव बहुत दूर नहीं हैं, इसलिए भाजपा संगठनात्मक बदलाव के लिए कमर कस रही है और भट्टाचार्य की नियुक्ति को उस बड़ी योजना का हिस्सा माना जा रहा है।  

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Fri, 04 Jul 2025 19:09:48 +0530 news desk MPcg
कांग्रेस नेता ने भारतीय राज्य को बताया ‘पड़ोसी देश’, माफी में कहा – जुबान फिसल गई https://citytoday.co.in/2855 https://citytoday.co.in/2855

नई दिल्ली 
कांग्रेस नेता अजय कुमार की सिक्किम को ‘‘पड़ोसी देश’’ बताने संबंधी टिप्पणी की राज्य के राजनीतिक दलों सहित समाज के विभिन्न वर्गों ने कड़ी आलोचना की है। कुमार ने मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान राज्य को बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के साथ पड़ोसी देश बताया था। हालांकि, इस मुद्दे पर विवाद उठने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने मंगलवार को माफी मांगते हुए कहा कि ‘‘उनकी जबान फिसल’’ गई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘कल ‘सेल (भारतीय इस्पात प्राधिकरण) 400 करोड़ का घोटाला’ पर अपनी प्रेस वार्ता में जब मैं अपने पड़ोसी देशों के साथ बिगड़ते संबंधों पर बोल रहा था तो मैंने गलती से एक राज्य का नाम ले लिया जिसके लिए मैं ईमानदारी से माफी मांगता हूं क्योंकि यह सिर्फ जुबान फिसलने की वजह से हुआ… भाजपा की विपक्षी दलों के नेताओं की छोटी-छोटी गलतियों पर भी नजर रहती है।’’

सिक्किम के एकमात्र लोकसभा सदस्य इंद्र हंग सुब्बा ने कहा कि कुमार की टिप्पणी ‘‘गैर-जिम्मेदाराना और अपमानजनक’’ है और ‘‘राज्य के लोगों का गंभीर अपमान है, जो हमेशा राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा के साथ खड़े रहे हैं’’। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘फेसबुक’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘इस तरह की विभाजनकारी बयानबाजी हमारी, संवैधानिक एकता के बारे में गहरी अज्ञानता को दर्शाती है और पूर्वोत्तर की गौरवशाली पहचान का अपमान करती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम इस महान राष्ट्र से हमारे जुड़ाव पर सवाल उठाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’ इसी तरह, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सिक्किम इकाई ने इस बयान को ‘‘अपमानजनक और अज्ञानता से भरा’’ बताया। भाजपा की सिक्किम इकाई के मीडिया प्रभारी निरेन भंडारी ने कांग्रेस नेता, विशेषकर ऐसे व्यक्ति जो पूर्व में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी और संसद सदस्य के रूप में काम कर चुके हैं, उनकी ‘‘भारत के इतिहास और भूगोल के बारे में जानकारी की कमी’’ पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस को अपने नेताओं को शिक्षित करने और ऐसी शर्मनाक गलतियों को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।’’

उन्होंने 1975 से भारत के अभिन्न अंग के रूप में सिक्किम की पहचान के प्रति जवाबदेही और सम्मान का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘‘सिक्किम के लोग गौरवान्वित भारतीय हैं और राज्य ने राष्ट्र के विकास में बहुत योगदान दिया है। इस तरह की टिप्पणी उन लोगों का अपमान करती है, जिनमें से कई ने राष्ट्र की सेवा के लिए अपना खून और पसीना बहाया है।’’ सिटिजंस एक्शन पार्टी (सीएपी) ने भी टिप्पणी की निंदा की और असंतोष व्यक्त किया।

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Wed, 02 Jul 2025 18:03:32 +0530 news desk MPcg
मध्य प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष बने हेमंत खंडेलवाल, धर्मेन्द्र प्रधान ने की घोषणा https://citytoday.co.in/2850 https://citytoday.co.in/2850 भोपाल
 बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल मध्य प्रदेश भाजपा के निर्विरोध नए प्रदेश अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। इसकी औपचारिक घोषणा धर्मेन्द्रप्रधान ने की और मंच पर सीएम डॉ. मोहन यादव सहित अन्य नेताओं ने खंडेलवाल को प्रमाण-पत्र देकर उनका स्वागत किया।

मंगलवार को केंद्रीय मंत्री और चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति में प्रदेश अध्यक्ष के लिए उनका इकलौता नामांकन आया। इस पद के लिए खंडेलवाल का नाम लंबे समय से चर्चा में सबसे आगे था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पसंद के चलते वह अध्यक्ष बने हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव भी खंडेलवाल के पक्ष में थे। खंडेलवाल ने प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा का स्थान लिया।

प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया के दौरान विष्णु दत्त शर्मा, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, वीरेंद्र कुमार, सावित्री ठाकुर, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ल, प्रदेश शासन के मंत्री राकेश सिंह, प्रहलाद सिंह पटेल एवं कैलाश विजयवर्गीय की ओर से पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसौदिया ने हेमंत खंडेलवाल के नाम का प्रस्ताव रखा।

मंगलवार को प्रदेश कार्यालय में हुई भाजपा की वृहद कार्यसमिति की बैठक में निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान खंडेलवाल पहली पंक्ति में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक और विधायक गोपाल भार्गव के बीच बैठे थे।

नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद का इशारा मिलते ही मुख्यमंत्री यादव, खंडेलवाल की पीठ पर हाथ रखकर मंच की ओर बढ़े।

फिर हाथ पकड़ केंद्रीय मंत्री व मध्य प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद सदस्यों के चुनाव अधिकारी धर्मेंद्र प्रधान, पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक सरोज पांडेय और राज्य निर्वाचन अधिकारी विवेक नारायण शेजवलकर के समक्ष प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन-पत्र जमा कराया।

नामांकन जमा करने के लिए निर्धारित समय अवधि में आधा घंटा शेष था ऐसे में चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने प्रदेश कार्यालय में मंच से ही कहा कि किसी अन्य को नामांकन पत्र जमा करना हो तो आधा घंटा है, वह जमा कर सकते हैं लेकिन कोई अन्य नामांकन नहीं आया।

मथुरा में जन्मे हेमंत, पिता के निधन के बाद राजनीति में आए

    उत्तर प्रदेश के मथुरा में तीन सितंबर 1964 को जन्मे हेमंत खंडेलवाल को राजनीति और समाजसेवा के संस्कार पिता स्वर्गीय विजय कुमार खंडेलवाल से विरासत में मिले।

    उनके पिता विजय खंडेलवाल भाजपा से बैतूल हरदा संसदीय सीट से सांसद रह चुके हैं। पिता के निधन के बाद खाली हुई इसी सीट से उप चुनाव में हेमंत खंडेलवाल कांग्रेस प्रत्याशी सुखदेव पांसे को हराकर निर्वाचित हुए और राजनीतिक व सामाजिक विरासत संभाली।

    2008-09 तक लोकसभा सदस्य रहे। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हेमंत वागद्रे को हराकर विधायक बने और 2018 तक बैतूल विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

    2018 के विस चुनाव में भाजपा ने उन्हें फिर से प्रत्याशी बनाया, लेकिन इस बार वह कांग्रेस के निलय डागा से चुनाव हार गए। वर्ष 2014 से 2018 तक मध्य प्रदेश भाजपा के कोषाध्यक्ष रहे।

    पांच साल बाद 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर खंडेलवाल पर भरोसा जताया। इस दौरान निलय डागा को हराकर उन्होंने अपनी पारिवारिक सीट पर विजय हासिल की।

मालवा-निमाड़ से 8 बार बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष बने मालवा-निमाड़ क्षेत्र से भाजपा ने सबसे ज्यादा 8 बार संगठन को नेतृत्व दिया। भाजपा के पहले प्रदेशाध्यक्ष रहे सुंदरलाल पटवा (सामान्य) मंदसौर के थे। इस पद पर वे दो बार रहे। पहली बार 1980 से 1983 तक और दूसरी बार 1986 से 1990 तक। इसके बाद रतलाम के लक्ष्मीनारायण पाण्डे (सामान्य) 1994 से 1997 तके प्रदेशाध्यक्ष रहे।

मालवा क्षेत्र से धार के विक्रम वर्मा (ओबीसी) 2000 से 2002 तक प्रदेशाध्यक्ष रहे। इसी तरह देवास से पूर्व सीएम कैलाश जोशी (सामान्य) ने 2002 से 2005 तक संगठन का नेतृत्व किया। उज्जैन के सत्यनारायण जटिया (एससी) फरवरी 2006 से नवंबर 2006 तक प्रदेशाध्यक्ष रहे। खंडवा सांसद रहे नंदकुमार सिंह चौहान (सामान्य) इस पद पर 2016 से 2018 तक रहे।

2019 में रहे प्रदेश चुनाव अधिकारी, प्रदेश संयोजक रहते लोकसभा चुनाव कराया संपन्न

बीकाॅम-एलएलबी की शिक्षा प्राप्त हेमंत खंडेलवाल कृषि क्षेत्र से जुड़े है एवं व्यवसायी है। वर्ष 2019 में संगठन चुनाव के प्रदेश चुनाव अधिकारी रहे। वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रवासी कार्यकर्ता की जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 15 जिलों के 61 विधानसभा क्षेत्रों में प्रवासी कार्यकर्ता के प्रभारी का दायित्व निर्वहन किया। वर्ष 2024 में प्रदेश संयोजक रहते लोकसभा चुनाव कराया। खंडेलवाल, कुशाभाऊ ठाकरे जन्म शताब्दी समारोह के सचिव रहे। वर्तमान में कुशाभाऊ ठाकरे ट्रस्ट के अध्यक्ष है।

इनके अलावा राजेंद्र शुक्ला, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मंत्री प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह ने भी पत्र दिया। कैलाश विजयवर्गीय नहीं पहुंचे। बुधवार को रहेंगे उपस्थित। यशपाल सिसोदिया ने भी नामांकन का प्रस्ताव दिया। धर्मेंद्र प्रधान ने हेमंत खंडेलवाल के अलावा अन्य किसी अन्य के नाम के प्रस्ताव के लिए भी पूछा और इसके लिए 10 मिनट का समय दिया। इसके बाद राष्ट्रीय परिषद के नामांकन पत्र आमंत्रित किए गए।

बीजेपी के लिए क्यों खास हैं खंडेलवाल?

रिपोर्ट्स के अनुसार, हेमंत खंडेलवाल सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बनाने के लिए भी जाने जाते हैं। बताया जाता है कि उनका राजनीतिक सफर उनके पिता विजय कुमार खंडेलवाल की देखरेख में शुरू हुआ। उनके पिता भी हमेशा बीजेपी के साथ जुड़े रहे। वह बीजेपी के एक दिग्गज नेता रहे। साल 2007 में उनका निधन हो गया था। 
पिता ने सिखाई राजनीति की ABCD

जानकारी के अनुसार, जब हेमंत खंडेलवाल ने अपनी बीकॉम एलएलबी की पढ़ाई पूरी कर ली इसके बाद वह अपने पिता के साथ राजनीति में सक्रिय हो गए थे। हेमंत खंडेलवाल के पिता विजय कुमार खंडेलवाल साल 1996 से साल 2004 तक लगातार चार बार बैतूल से सांसद रहे।

बता दें कि साल 2007 में विजय कुमार खंडेलवाल का निधन हो गया। इसके बाद हुए लोकसभा उप चुनाव में पहली बार हेमंत खंडेलवाल ने किस्मत आजमाई और सफलता भी पाई। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के सुखदेव पांसे को भारी अंतर से हराया था। इस जीत के साथ ही हेमंत खंडेलवाल ने पहली बार सांसद बनकर राजनीति प्रवेश किया।
बैतूल बीजेपी के जिला अध्यक्ष भी रहे हेमंत खंडेलवाल

गौरतलब है कि साल 2008 में हुए परिसीमव के बाद बैतूल लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व हो गई। इसके बाद पार्टी हाईकमान ने हेमंत खंडेलवाल को साल 2010 में बैतूल बीजेपी का जिला अध्यक्ष बनाया गया।

बता दें कि साल 2013 में वह बीजेपी के टिकट से पहली बार विधानसभा चुनाव में उतरे। इस चुनाव के दौरान उन्होंने जीत हासिल की। कहा जाता है कि तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा जो भी जिम्मेदारियों उनको दी गई उन्होंने बखूबी निभाया। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में हेमंत खंडेलवाल को हार का सामना करना पड़ा था। हार के बाद भी वह पार्टी और संगठन के साथ कदम से कदम मिलकर चलते रहे।
2023 में दूसरी बार पहुंच विधानसभा

इसके बाद साल 2023 में हुए विधान सभा चुनाव में हेमंत खंडेलवाल को दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। कई राज्यों में हुए कई चुनावों में उनको पार्टी की ओर से बड़ी जिम्मेदारियां मिली, जिसको उन्होंने बखूबी निभाया।

नामांकन पत्र देने वालों में मुख्यमंत्री मोहन, विष्णुदत्त शर्मा, शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, विरेंद्र खटीक, राजेंद्र शुक्ल, जगदीश देवड़ा, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह, सावित्री ठाकुर, दुर्गादास उईके, फग्गन सिंह कुलस्ते, लाल सिंह आर्य, ओम प्रकाश धुर्वे, सत्यानरण जटिया, जयभान सिंह पवैया, जयंत मलैया, हिमाद्रि सिंह, भारती पराधी, इंदर सिंह परमार, सुधीर गुप्ता, नीना वर्मा, गणेश सिंह, कांत देव सिंह, गोपाल भार्गव, डा नरोत्तम मिश्रा, योगेश ताम्रकार, ब्रहेंद प्रताप सिंह, आलोक संजर, गौतम टेटवाल, कुंवर टैकम, गौरी शंकर बिसेन, उमा शंकर गुप्ता, कमल पटेल, ब्रजेंद्र पटेल, अर्चना चिटनीस, सुमेर सोलंकी कविता पाटीदार।

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Wed, 02 Jul 2025 15:15:06 +0530 news desk MPcg
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को जुलाई में नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा, भाजपा का फोकस आदिवासी और महिला वर्ग पर https://citytoday.co.in/2840 https://citytoday.co.in/2840 भोपाल
 मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रदेश अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी कड़ी में आज एक जुलाई को केंद्रीय चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान भोपाल आएंगे। वे शाम 4 बजे भोपाल आएंगे। 2 जुलाई को प्रदेश अध्यक्ष चयन को लेकर बैठक होगी। बैठक में अध्यक्ष पद के लिए नाम रखा जाएगा। पार्टी सूत्रों की मानें तो आम सहमति से चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। चुनाव प्रक्रिया के तहत चुनावी कार्यक्रम जारी । कार्यक्रम के साथ वोटर लिस्ट भी जारी हो सकती है। चुनाव के पहले कल शाम को पार्टी की अहम बैठक होगी। बैठक में वरिष्ठ नेता अध्यक्ष चयन प्रक्रिया को लेकर आपस में चर्चा करेंगे।

पार्टी ने इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी है। वैसे तो अब तक नए अध्यक्ष की दौड़ में हेमंत खंडेलवाल का नाम सबसे अधिक चर्चा में है, लेकिन भाजपा आदिवासी और महिला वर्ग के बीच भी प्रदेश अध्यक्ष का चेहरा टटोल रही है।

वर्तमान में विष्णुदत्त शर्मा सामान्य वर्ग से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं और साढ़े पांच वर्ष का लंबा कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। डॉ. मोहन यादव ओबीसी वर्ग से मुख्यमंत्री और अनुसूचित जाति वर्ग व ब्राह्मण वर्ग से दो उप मुख्यमंत्री हैं। यही वजह है कि भाजपा अब प्रदेश अध्यक्ष की कमान आदिवासी या महिला के हाथों में सौंप सकती है।

दावेदारों में कड़ा मुकाबला

एमपी में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की रेस में बैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल और केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उईके के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, हेमंत खंडेलवाल को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और आरएसएस दोनों का समर्थन प्राप्त है, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। वहीं, दुर्गादास उईके जो बैतूल से सांसद और गोंड समाज से ताल्लुक रखते हैं को आदिवासी वर्ग का एक मजबूत चेहरा माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में 22% आदिवासी आबादी, जिसमें 13% गोंड समाज शामिल है, को देखते हुए पार्टी उनके नाम पर विचार कर सकती है।

वर्गवार दावेदारी

पार्टी जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अध्यक्ष का चयन कर रही है। विभिन्न वर्गों से प्रमुख दावेदार इस प्रकार हैं:

    ब्राह्मण वर्ग: डॉ. नरोत्तम मिश्रा (पूर्व गृह मंत्री), राजेन्द्र शुक्ल (उपमुख्यमंत्री), रामेश्वर शर्मा (विधायक )
    वैश्य वर्ग: हेमंत खंडेलवाल (विधायक, बैतूल), सुधीर गुप्ता (सांसद, मंदसौर)
    क्षत्रिय वर्ग: अरविंद भदौरिया (पूर्व मंत्री), बृजेन्द्र प्रताप सिंह (विधायक व पूर्व मंत्री)
    अनुसूचित जाति: प्रदीप लारिया (विधायक, नरयावली), लाल सिंह आर्य (राष्ट्रीय अध्यक्ष, एससी मोर्चा), हरिशंकर खटीक (विधायक व प्रदेश महामंत्री, बीजेपी)
    अनुसूचित जनजाति: गजेन्द्र सिंह पटेल (सांसद, खरगोन), दुर्गादास उईके (केंद्रीय राज्य मंत्री), फग्गन सिंह कुलस्ते (सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री), सुमेर सिंह सोलंकी (राज्यसभा सांसद)

आदिवासी और महिला नेतृत्व पर विचार

सूत्रों के अनुसार, इस दौड़ में आदिवासी वर्ग को प्राथमिकता देने की संभावना है क्योंकि मध्य प्रदेश में 47 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा, 2028 के विधानसभा चुनाव में महिला आरक्षण और नए परिसीमन को ध्यान में रखते हुए पार्टी किसी महिला नेता को भी कमान सौंपने पर विचार कर रही है।
धर्मेंद्र प्रधान की निगरानी में होगी प्रक्रिया

बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने संगठनात्मक चुनावों के लिए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मध्य प्रदेश का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। वे 1 जुलाई को भोपाल पहुंचेंगे और पूरी नामांकन प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। इसके बाद 2 जुलाई को होने वाली कार्यसमिति की बैठक में नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा होने की संभावना है।

जुलाई के पहले सप्ताह में ही पूरी होगी प्रक्रिया

हालांकि यह केंद्रीय नेतृत्व ही तय करेगा, लेकिन एक जुलाई को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव अधिकारी धर्मेंद्र प्रधान का मध्य प्रदेश में दौरा इस बात का संकेत है कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। दो जुलाई को भी बैठक रखी गई है। दो दिन में नामांकन से लेकर चुनाव की सारी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

खंडेलवाल, उइके और पटेल के नाम पर भी मंथन तेज

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के दावेदारों में आदिवासी वर्ग के नेता बैतूल सीट से सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके और खरगोन सीट से सांसद गजेंद्र पटेल के नाम पर भी मंथन तेज हुआ है। इधर उइके की दावेदारी इसलिए भी प्रबल दिखाई दे रही है क्योंकि गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल हैं और वह केंद्रीय मंत्री भी है। ऐसे में यह प्रयोग पार्टी मध्य प्रदेश में उइके को लेकर कर सकती है।

महिला वर्ग से भी कुछ नाम चर्चा में

मध्य प्रदेश में भाजपा संगठन काफी मजबूत है। यहां पार्टी जो भी प्रयोग करती है वे सफल रहे हैं। इसलिए पार्टी इस बार महिला प्रदेश अध्यक्ष बनाने का प्रयोग भी कर सकती है। महिला नेत्रियों में पूर्व मंत्री व बुरहानपुर से विधायक अर्चना चिटनीस, आदिवासी नेत्री पूर्व मंत्री रंजना बघेल के नाम भी चर्चा में हैं। रंजना बघेल कई बार की विधायक रही हैं और संगठन में भी उपाध्यक्ष रही हैं।

1980 से अध्यक्षों का कार्यकाल

  • अध्यक्ष – जिला – क्षेत्र – माह
  • सुंदरलाल पटवा – नीमच- मालवा- 36 महीने
  • कैलाश जोशी – देवास – मालवा – 16 महीने
  • शिवप्रसाद – चैनपुरिया -जबलपुर – महाकौशल – 9 महीने
  • सुंदरलाल पटवा- मालवा – 50 महीने
  • लख्खीराम अग्रवाल – रायगढ़ – (छग)
  • लक्ष्मीनारायण पांडे – रतलाम – मालवा – 41 महीने
  • नंदकुमार साय – रायगढ़ (छ्ग)
  • विक्रम वर्मा- धार- मालवा- 26 महीने
  • कैलाश जोशी – देवास – मालवा – 32 महीने
  • शिवराज सिंह चौहान – विदिशा – मध्य – 9 महीने
  • सत्यनारायण जटिया – उज्जैन – मालवा – 9 महीने
  • नरेंद्र सिंह तोमर – ग्वालियर – ग्वालियर-चंबल – 42 महीने
  • प्रभात झा – ग्वालियर – ग्वालियर-चंबल – 20 महीने
  • नरेंद्र सिंह तोमर – ग्वालियर – ग्वालियर-चंबल – 20 महीने
  • नंद कुमार सिंह चौहान – खंडवा – मालवा – 17 महीने
  • नंद कुमार सिंह चौहान – खंडवा – मालवा – 28 महीने
  • राकेश सिंह – जबलपुर – महाकौशल – 21 महीने
  • वीडी शर्मा – मुरैना – ग्वालियर-चंबल – 63 महीने
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Tue, 01 Jul 2025 11:50:04 +0530 news desk MPcg
एमपी : बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पर फैसला जल्द, शिवराज सिंह चौहान और कैलाश विजयवर्गीय किसकी जमाएंगे फील्डिंग ? https://citytoday.co.in/2816 https://citytoday.co.in/2816 भोपाल
मध्य प्रदेश में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का कार्यकाल पूरा हो गया है। अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा, इसे लेकर सहमति नहीं बन पाई है। हालांकि अटकलें हैं कि अब जल्द ही किसी नाम पर मुहर लग जाएगी। इस बीच केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय में इंदौर में गुप्तगू हुई है। इसके बाद इन अटकलों को बल मिलने लगा है कि प्रदेश को जल्द ही कोई नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है। प्रदेश के बड़े नेता अपनी पसंद का भी ख्याल रखवाना जाता है। वहीं, नाम की घोषणा से पहले सीएम मोहन यादव से भी सहमति ली जाएगी।
जुलाई के पहले सप्ताह में आ रहे हैं धर्मेंद्र प्रधान

वहीं, इन अटकलों के बीच चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान जुलाई के पहले सप्ताह में भोपाल आएंगे। सूत्रों के अनुसार वह एक या दो जुलाई को आ सकते हैं। इस संगठन नेताओं के साथ प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। हालांकि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व को लेना है। इस रेस में प्रदेश के कई बड़े चेहरे शामिल हैं। साथ ही कुछ लो प्रोफाइल नामों की भी चर्चा है। लेकिन बीजेपी हमेशा अपने फैसलों से चौंकाती है।

शिवराज और कैलाश की मीटिंग के मायने

दरअसल, शिवराज सिंह चौहान और कैलाश विजयवर्गीय अच्छे मित्र हैं। केंद्रीय नेतृत्व में कैलाश विजयवर्गीय की अच्छी पकड़ है। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के वह भरोसेमंद हैं। कैलाश और शिवराज में इंदौर लंबी चर्चा हुई है। अटकलें हैं कि प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर एक राय बनाने पर बात हुई होगी। हालांकि दावेदारों की सूची में कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी आता है।

डेप्युटी सीएम राजेंद्र शुक्ल का नाम भी

इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष की रेस में डेप्युटी सीएम राजेंद्र शुक्ल का नाम भी है। शुक्ल संगठन और सरकार में समन्वय बनाकर चलते हैं। साथ ही निर्विवाद छवि है। हाल के दिनों में उनका दिल्ली दौरा भी बढ़ा है। कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात हुई थी।

शिवराज सिंह चौहान से नजदीकी

वहीं, राजेंद्र शुक्ल की गिनती शिवराज सिंह चौहान के करीबी नेताओं में होती है। वह लंबे समय तक शिवराज कैबिनेट में मंत्री भी रहे हैं। साथ ही विंध्य इलाके में अच्छी पकड़ है। अभी प्रदेश अध्यक्ष के पद पर ब्राह्मण ही हैं। ऐसे में यह संभावना दिख रही है कि राजेंद्र शुक्ल पर पार्टी दांव लगा सकती है।

इसके साथ ही कई अन्य चेहरे भी रेस में हैं। इनमें पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के नाम की चर्चा सबसे अधिक होती है। इसके अलावे कई सांसद भी इस रेस में हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी जातीय और क्षेत्रीय समीकरण का भी ख्याल रखेगी। यह तय है कि जुलाई महीने में नए प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव हो जाएगा।

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Sat, 28 Jun 2025 12:04:12 +0530 News desk Hindi
अमेरिका की तरफ से अपने नागरिकों के लिए भारत भ्रमण के संबंध में ट्रैवल एडवाइजरी जारी करने की निंदा की: सुप्रिया श्रीनेत https://citytoday.co.in/2804 https://citytoday.co.in/2804 नई दिल्ली
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने अमेरिका की तरफ से अपने नागरिकों के लिए भारत भ्रमण के संबंध में ट्रैवल एडवाइजरी जारी करने की निंदा की। उन्होंने मीडिया  से बातचीत में कहा कि अमेरिका भारत का एक अच्छा मित्र है। उसके साथ हमारे अच्छे रिश्ते हैं। इसके बावजूद वो इस तरह की एडवाइजरी जारी कर रहा है। वो अपनी एडवाइजरी में कह रहा है कि अमेरिकी महिलाओं को भारत अकेले नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि अब समय आ चुका है कि जब अमेरिका को वैश्विक मंच पर भारत को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर लेनी चाहिए, क्योंकि एक तरफ जहां वो पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष असीम मुनीर को अपने यहां पर दावत के लिए बुलाता है, उसे महान व्यक्ति बताता है। वहीं दूसरी तरफ से भारत के लिए ऐसी एडवाइजरी जारी करता है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

अमेरिका ने 16 जून को भारत यात्रा के लिए अपने नागरिकों के लिए लेवल-2 ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है, जिसमें सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। यह एडवाइजरी अपराध, आतंकवाद और कुछ क्षेत्रों में बढ़े जोखिमों के कारण जारी की गई है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि अमेरिका की तरफ से जारी की इस ट्रैवल एडवाइजरी से वैश्विक मंच पर भारत की साख कम हुई है। मोदी सरकार को इस मामले में अमेरिका के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन, उनके रवैये से यह साफ जाहिर हो रहा है कि वो इस मामले में कोई भी कार्रवाई करते हुए नजर नहीं आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को सामने आकर अमेरिका के इस कदम की आलोचना करनी चाहिए, क्योंकि अमेरिका की तरफ से जारी यह एडवाइजरी भारत के पर्यटन को नुकसान पहुंचाएगा। इससे वैश्विक मंच पर हमारी छवि धूमिल होगी। भारत सरकार को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन, पीएम मोदी ने चुप्पी साध रखी है। ना ही वो घरेलू मोर्चे पर महिलाओं को सुरक्षित कर पा रहे हैं और ना ही वैश्विक मंच पर अमेरिका के खिलाफ कोई कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप 17 बार सीजफायर का श्रेय ले चुके हैं। लेकिन, पीएम मोदी एक शब्द भी बोलने की जहमत नहीं उठाते हैं।

उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में संलिप्त आतंकियों के खिलाफ मोदी सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन, इस दिशा में वो कोई भी कदम उठाते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। हाल ही में एक जानकारी सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि बीते दिनों पहलगाम आतंकी हमले में संलिप्त जिन आतंकियों की स्कैच जारी की गई थी, वो असल में उन आतंकियों की नहीं, बल्कि किसी और की थी। ऐसा करके लोगों को मूर्ख बनाने की कोशिश की गई। अभी तक पांच सालों में एक भी आतंकी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। आखिर क्यों?

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि अमित शाह गृहमंत्री हैं और उनके कार्यकाल में इस देश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है। लोगों में कानून- व्यवस्था को लेकर बिल्कुल भी गंभीरता नहीं है। पिछले दो साल से मणिपुर जल रहा है। लेकिन, वो कोई भी कार्रवाई करते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हो जाता है, मासूम लोगों की जान चली जाती है। लेकिन, वो कुछ भी नहीं कर पाते हैं। वो सुरक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह से विफल साबित हुए हैं।

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Wed, 25 Jun 2025 15:45:25 +0530 news desk MPcg
तमिलनाडु में क्या थलपति विजय BJP के लिए ‘चंद्रबाबू नायडू’ साबित हो सकते हैं? https://citytoday.co.in/2793 https://citytoday.co.in/2793 चेन्नई

तमिलनाडु में अप्रैल-मई, 2026 तक नई सरकार चुनने के लिए मतदान होना है. विधानसभा चुनाव में करीब एक साल का समय बाकी है, लेकिन राजनीतिक दल अभी से चुनावी मोड में आ गए हैं. तमिलनाडु के सत्ताधारी गठबंधन की अगुवाई कर रही डीएमके ने 200 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. सत्ताधारी गठबंधन में वीसीके और लेफ्ट पार्टियां अधिक सीटों की डिमांड कर रही हैं. वहीं, तमिल पॉलिटिक्स में अपनी जमीन तलाशने में जुटी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी एक्टिव मोड में आ गई है.

गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही तमिलनाडु का दौरा किया था. शाह ने स्टालिन सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जमकर घेरा था और दावा किया था कि अगले साल होने वाले चुनाव में विजय के साथ सूबे में एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार बनाने जा रहा है. अमित शाह तमिलनाडु बीजेपी कोर कमेटी की मीटिंग में भी शामिल हुए. अब चर्चा यह भी है कि बीजेपी की रणनीति तमिलनाडु में एनडीए का कुनबा बढ़ाने की है. बीजेपी ने पहले अपनी पुरानी गठबंधन सहयोगी एआईएडीएमके को साथ लिया और अब उसकी नजर सिने स्टार थलपति विजय की पार्टी टीवीके पर है.

तमिलनाडु बीजेपी की वरिष्ठ नेता और तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने पिछले दिनों इस बात के संकेत दे दिए थे कि पार्टी जल्द ही विजय की पार्टी से संपर्क करेगी. उन्होंने कहा था कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही टीवीके समेत डीएमके विरोधी पार्टियों के साथ बातचीत शुरू करेगा. सही समय पर समान विचारधारा वाली सभी पार्टियों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जाएगी, जिससे डीएमके को शिकस्त देने के लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सके. सवाल है कि क्या विजय और उनकी पार्टी तमिलनाडु में बीजेपी के लिए वह कर सकते हैं, जो आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू और उनकी पार्टी ने किया था?

बीजेपी को विजय से उम्मीद क्यों?

तमिलनाडु बीजेपी को थलपति विजय से उम्मीद है, तो इसके पीछे भी अपनी वजहें हैं, अपने तर्क हैं. तमिल पॉलिटिक्स में बीजेपी की पार्टनर एआईएडीएमके अब उतनी ताकतवर नहीं रही, जितनी जयललिता के दौर में हुआ करती थी. 

विजय की पार्टी इसी वैक्यूम को भरने की, डीएमके के खिलाफ विकल्प बनने की कोशिश कर रही है. ऐसे मतदाता जो डीएमके के साथ नहीं जा सकते, टीवीके की रणनीति उन्हें अपने पाले में करने की है. अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा मतलब होगा कि डीएमके विरोधी वोट बंटेंगे, जिसका फायदा सत्ताधारी गठबंधन को मिल सकता है. विजय और उनकी पार्टी कितना सफल रहेगी? ये देखने वाली बात होगी. लेकिन तमिल पॉलिटिक्स का इतिहास देखें तो यह स्टार पॉलिटिक्स को सूट करती है.

तमिलनाडु को सूट करती है स्टार पॉलिटिक्स

तमिलनाडु की सियासत में पहली बार ग्लैमर तड़का लगाया था एआईएडीएमके के संस्थापक एमजी रामचंद्रन यानी एमजीआर ने. एमजीआर ने कांग्रेस से सियासी सफर की शुरुआत की और डीएमके से विधान परिषद, विधानसभा पहुंचे. 1972 में एआईएडीएमके पार्टी बनाई और इसके पांच साल बाद 1977 में पहली बार सीएम बने.

तीन बार तमिलनाडु के सीएम रहे एमजी रामचंद्रन पहली बार जून 1977 से फरवरी 1980, दूसरी बार जून 1980 से नवंबर 1984 और तीसरी बार फरवरी 1985 से 24 दिसंबर 1987 को अपने निधन तक मुख्यमंत्री रहे. फिल्मों से सियासत में आईं जानकी रामचंद्रन भी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचीं. जानकी, एमजीआर की पत्नी थीं और वही उन्हें राजनीति में लेकर आए थे. एमजीआर से जानकी की दूसरी शादी थी. दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया था और एमजीआर के निधन के बाद जानकी सीएम बनी थीं.

तमिलनाडु की पहली महिला मुख्यमंत्री जानकी रामचंद्रन 7 जनवरी 1988 से 30 जनवरी 1988 तक सीएम रहीं. पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि का बैकग्राउंड भी फिल्म जगत से जुड़ा रहा है, जो सूबे के मुख्यमंत्री स्टालिन के पिता भी हैं. करुणानिधि डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुरई के निधन के बाद पार्टी के नेता बने और पांच बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे.

जयललिता भी फिल्मी दुनिया से ही राजनीति में आई थीं. 1982 में एआईएडीएमके के साथ राजनीति की शुरुआत करने वाली जयललिता 1991 में पहली बार मुख्यमंत्री बनी थीं. वह छह बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं. विजय भी तमिल फिल्मों के सुपरस्टार हैं और तमिलनाडु की पॉलिटिक्स भी स्टार पॉलिटिक्स के मुफीद रही है. ऐसे में बीजेपी को उनके साथ आने से बेहतर की उम्मीद है.

 

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Mon, 23 Jun 2025 13:28:20 +0530 news desk MPcg
Tejashwi Yadav on PM Modi: बिहार में प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों पर अब तक 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किये गए; तेजस्वी यादव https://citytoday.co.in/2786 https://citytoday.co.in/2786 पटना, 21 जून : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने ‘पॉकेटमार’ संबंधी अपना बयान शनिवार को जारी रखते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैलियों पर बिहार में अब तक 20,000 करोड़ रुपये खर्च किये गए हैं. भाजपा ने भी जवाबी हमला तेज कर दिया और राज्य की राजधानी में पोस्टर लगाए हैं, जिनमें लिखा है, ‘‘मेरा बाप चारा चोर, मुझे वोट दो.’’ तेजस्वी ने एक दिन पहले यह आरोप लगाते हुए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की आलोचना की थी कि ‘वंदे भारत’ ट्रेनों के अत्यधिक किराये ने मोदी को "पॉकेटमार" जैसा बना दिया है. राजद नेता ने सोशल मीडिया पोस्ट में भी इसी तरह की बात कही.

उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में 2014 से अब तक मोदी की ‘‘ऐसी 200 जनसभा’’ हुई है, और ‘‘प्रत्येक पर 100 करोड़ रुपये खर्च’’ किये गए. पूर्व उपमुख्यमंत्री ने दावा किया, ‘‘इस अवधि के दौरान कुल खर्च 20,000 करोड़ रुपये हुए हैं, जिस दौरान पांच (लोकसभा के तीन और विधानसभा के दो) चुनाव भी हुए हैं...सरकार द्वारा ऐसी कई सभाएं आयोजित की गई हैं, जबकि उनका उद्देश्य स्पष्ट रूप से चुनावी रहा है.’’ शुक्रवार को मोदी बिहार के सिवान जिले में थे, जो इस साल राज्य का उनका पांचवां दौरा था. यह एक महीने से भी कम समय में उनका दूसरा और प्रधानमंत्री बनने के बाद से ‘‘51वां’’ दौरा था. राज्य में आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. तेजस्वी ने आरोप लगाया, ‘‘हमें उस व्यक्ति को क्या कहना चाहिए जो अपने प्रचार पर चालाकी से सार्वजनिक धन का इस्तेमाल करता है...और ईमानदार व्यक्ति होने का दिखावा करता है...बेशक वह मददगार नहीं, बल्कि पॉकेटमार है.

भाजपा की प्रदेश इकाई के पूर्व अध्यक्ष और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 'दीवार' फिल्म के मशहूर संवाद ‘‘मेरा बाप चोर है’’ का इस्तेमाल करते हुए, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर कटाक्ष करते हुए तेजस्वी पर एक दिन पहले निशाना साधा था, जिसके बाद पार्टी (भाजपा) ने ‘‘पोस्टर अभियान’’ शुरू किया. इन पोस्टरों में पिता-पुत्र (लालू और तेजस्वी) भैंस पर बैठे दिख रहे हैं, जो चारा घोटाले का स्पष्ट संदर्भ है.

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Sat, 21 Jun 2025 16:39:32 +0530 news desk MPcg
'गरीबी हटाने के नाम पर कुछ लोग 'अरबपति' बन गए': पीएम मोदी का सिवान से तीखा वार, कांग्रेस&RJD पर कसा तंज https://citytoday.co.in/2764 https://citytoday.co.in/2764 PM Modi Siwan Rally: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बिहार के सिवान से विपक्ष पर बड़ा हमला बोला. एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने आरजेडी और कांग्रेस पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सत्ता के लिए लालायित ये पार्टियां सिर्फ अपने परिवारों का विकास चाहती हैं, जबकि हमारी सरकार पूरे देश के समग्र विकास के लिए काम कर रही है. बिहार को एक बार फिर पुराने ‘जंगलराज’ से बचाना है. पीएम मोदी ने जनता से अपील की है कि वे आने वाले चुनाव में उन लोगों को पूरी तरह से नकार दें, जिन्होंने बिहार को लूटा और विकास को पीछे धकेल दिया.

प्रधानमंत्री ने कहा, “हम कहते हैं ‘सबका साथ, सबका विकास’, लेकिन कांग्रेस और आरजेडी का नारा है ‘परिवार का साथ, परिवार का विकास’. कांग्रेस के ‘लाइसेंस राज’ की वजह से देश में गरीबी आई. उनके नेता अमीर होते गए और जनता गरीब बनी रही.”

जनता का भरोसा जीतने की कोशिश
पीएम मोदी ने मंच से कहा, ''आज का बिहार नए विकास के रास्ते पर बढ़ रहा है. अब सड़कें, बिजली, शिक्षा, और स्वास्थ्य सुविधाएं हर गांव तक पहुंच रही हैं. जो लोग कल तक अपराध को बढ़ावा देते थे, अब उन्हें जवाब जनता देगी.”

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कैसे केंद्र सरकार गरीबों के लिए आवास, मुफ्त राशन, शौचालय और आयुष्मान भारत योजना के जरिए असली बदलाव लेकर आई है.

RJD के गढ़ में सीधी टक्कर
सिवान और उसके आसपास के जिले जैसे गोपालगंज और छपरा आरजेडी के मजबूत गढ़ माने जाते हैं. ऐसे में यहां से पीएम मोदी का परिवारवाद पर हमला करना साफ संकेत देता है कि बीजेपी-जेडीयू गठबंधन इन इलाकों में भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है.

पिछले पांच महीनों में प्रधानमंत्री मोदी की यह पांचवीं बिहार यात्रा है, जो इस बात का संकेत है कि एनडीए बिहार में चुनाव को लेकर पूरी तरह एक्टिव मोड में आ चुका है.

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Fri, 20 Jun 2025 15:24:50 +0530 news desk MPcg
पीएम मोदी ने मध्यस्थता को किया खारिज: 'मध्यस्थता न कभी मानेगी, न मानेंगे', पीएम मोदी ने बेचारे को दिया घटिया संदेश, 'ऑपरेशन सिन्दूर' पर हुई चर्चा https://citytoday.co.in/2743 https://citytoday.co.in/2743 नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बुधवार को फोन पर लंबी बातचीत हुई. करीब 35 मिनट चली इस बातचीत में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, खासकर आतंकवाद और भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर.

क्यों हुई फोन पर बात?

असल में, पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की G7 समिट के दौरान मुलाकात होनी थी. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप को किसी कारण से जल्दी अमेरिका वापस लौटना पड़ा, जिस वजह से यह मीटिंग नहीं हो सकी. इसके बाद खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन करने की इच्छा जताई और दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत हुई.
आतंकवाद और पाकिस्तान पर क्या बोले पीएम मोदी?

इस बातचीत में पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा. उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव पर भी बात की. पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को कुछ बातें बिल्कुल साफ कर दीं:

कोई मध्यस्थता नहीं: मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत अपने और पाकिस्तान के मामले में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता न तो कभी मानता था, न आज मानता है और न ही भविष्य में कभी मानेगा. उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर भारत की सभी राजनीतिक पार्टियां एकमत हैं.

पाकिस्तान के कहने पर हुई बातचीत: उन्होंने यह भी साफ किया कि तनाव कम करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच जो भी बातचीत हुई, उसकी पहल पाकिस्तान की तरफ से की गई थी.

ट्रेड डील पर कोई बात नहीं: पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि तनाव के उस दौर में अमेरिका के साथ किसी भी ट्रेड डील या मध्यस्थता जैसे विषय पर कोई बात नहीं हुई थी.

'ऑपरेशन सिंदूर' का भी हुआ जिक्र

पीएम मोदी ने बातचीत में 'ऑपरेशन सिंदूर' का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत अब आतंकवाद को एक तरह का छद्म युद्ध (छिपी हुई लड़ाई) मानता है और इस आतंकवाद के खिलाफ भारत का 'ऑपरेशन सिंदूर' अभी भी जारी है.

ट्रंप ने दिया भारत का साथ

राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी की सभी बातों को ध्यान से समझा. उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की इस लड़ाई का पूरा समर्थन किया.

ट्रंप का न्योता और मोदी का जवाब

बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी से पूछा कि क्या वह कनाडा दौरे से लौटते समय अमेरिका आ सकते हैं. हालांकि, अपने पहले से तय कार्यक्रमों की वजह से पीएम मोदी ने इस पर अपनी असमर्थता जताई. दोनों नेताओं ने यह तय किया कि वे जल्द ही मुलाकात करने की कोशिश करेंगे. इस पूरी बातचीत की जानकारी विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दी.

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Wed, 18 Jun 2025 11:23:02 +0530 news desk MPcg
लुधियाना वेस्ट विधानसभा उपचुनाव में सियासी तापमान तेज, कांग्रेस ने लुधियाना में निकाली कुर्सी यात्रा https://citytoday.co.in/2703 https://citytoday.co.in/2703 लुधियाना.....

कुर्सी की लालसा या जनसेवा? लुधियाना वेस्ट उपचुनाव में कांग्रेस का AAP पर तीखा वार

लुधियाना वेस्ट विधानसभा उपचुनाव में सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने शुक्रवार को एक प्रतीकात्मक "कुर्सी यात्रा" निकालकर आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल पर जमकर हमला बोला। इस यात्रा के जरिए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केजरीवाल पंजाब की राजनीति का इस्तेमाल कर राज्यसभा की कुर्सी तक पहुंचना चाहते हैं।

यात्रा में एक रथ पर अरविंद केजरीवाल की डमी को एक विशाल कुर्सी पर बैठा दिखाया गया था। रथ के चारों ओर कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी के झंडे लहराते हुए ‘राज्यसभा की कुर्सी की भूख’ जैसे नारे लगा रहे थे। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि लुधियाना वेस्ट का यह उपचुनाव AAP प्रत्याशी संजीव अरोड़ा की जीत नहीं, बल्कि केजरीवाल की ‘राजनीतिक पुनर्स्थापना’ का माध्यम है।

इस मौके पर महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लाम्बा और पंजाब कांग्रेस के सह-प्रभारी राणा गुरजीत सिंह ने भाग लिया। अलका लाम्बा ने केजरीवाल पर हमला करते हुए कहा, "दिल्ली की सत्ता से बाहर होने के बाद अब वे पंजाब के सहारे राज्यसभा में प्रवेश की फिराक में हैं। भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे अपने करीबियों को बचाने के लिए वह पंजाब में दखल बढ़ा रहे हैं।"

लाम्बा ने आरोप लगाया कि केजरीवाल अब मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और विभव कुमार जैसे अपने सहयोगियों को पंजाब की सत्ता के माध्यम से संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि "Z+ सुरक्षा और शाही जीवनशैली के आदी हो चुके केजरीवाल अब एक नई साजिश रच रहे हैं।"

कांग्रेस उम्मीदवार भारत भूषण आशु ने भी तीखा तंज कसते हुए कहा, "यह उपचुनाव केजरीवाल की बेरोजगारी खत्म करने की कोशिश है, ना कि जनता के विकास का चुनाव।" उन्होंने कहा कि नई दिल्ली विधानसभा सीट से हार के बाद केजरीवाल अपनी खोई हुई हैसियत को राज्यसभा के जरिए फिर से हासिल करना चाहते हैं।

आशु ने यह भी जोड़ा कि "यह सिर्फ एक विधायक का चुनाव नहीं, बल्कि एक पंजाबी की राज्यसभा सीट की बलि चढ़ाकर एक बाहरी नेता को सत्ता में लाने की कोशिश है।"

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह "कुर्सी यात्रा" AAP के इरादों पर सवाल उठाने और अपने वोट बैंक को एकजुट करने की एक आक्रामक रणनीति है। चुनावी जंग में अब प्रतीकों के जरिए भी भावनाएं भड़काई जा रही हैं और जनता के सामने एक नई राजनीतिक कहानी रची जा रही है।

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Sun, 15 Jun 2025 18:01:52 +0530 news desk MPcg
PM मोदी कल से मेगा डिप्लोमैटिक मिशन पर निकलेंगे, 5 दिन, 3 देश और G7 समिट… https://citytoday.co.in/2694 https://citytoday.co.in/2694 नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी कल साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया की पांच दिन की यात्रा पर जाएंगे। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी कल साइप्रस की आधिकारिक यात्रा पर जायेंगे। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की दो दशक में साइप्रस की यह पहली यात्रा होगी। निकोसिया में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस के साथ वार्ता करेंगे और लिमासोल में व्यापार जगत के नेताओं को संबोधित करेंगे। इस यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने और भूमध्यसागरीय क्षेत्र और यूरोपीय संघ के साथ भारत की भागीदारी को मजबूत करने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को मज़बूती मिलेगी। 

साइप्रस यात्रा: दो दशक बाद भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा

साइप्रस गणराज्य के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडूलाइड्स के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी 15-16 जून को साइप्रस की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे. यह पिछले दो दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की साइप्रस की पहली यात्रा होगी. निकोसिया में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति क्रिस्टोडूलाइड्स के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और लिमासोल में व्यापार जगत के नेताओं को संबोधित करेंगे. यह यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का संदेश देगी और मेडिटेरेनियन क्षेत्र और यूरोपीय संघ के साथ भारत की साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में सहयोग बढ़ाएगी.

कनाडा यात्रा: PM मोदी छठी बार G-7 समिट में होंगे शामिल

यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कनाडा पहुंचेंगे. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के निमंत्रण पर पीएम मोदी 16-17 जून को कनानास्किस में आयोजित होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. प्रधानमंत्री मोदी लगातार छठी बार G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी G-7 देशों, आमंत्रित आउटरीच देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के साथ ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार, विशेषकर AI-ऊर्जा संबंध, और क्वांटम तकनीक से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे. प्रधानमंत्री इस दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे.

क्रोएशिया यात्रा: भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा

यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को क्रोएशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे. क्रोएशिया गणराज्य के प्रधानमंत्री आंद्रे प्लेंकोविच के निमंत्रण पर भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी. प्रधानमंत्री मोदी अपने समकक्ष प्लेंकोविच के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और क्रोएशिया के राष्ट्रपति जोरान मिलानोविच से भेंट करेंगे. यह यात्रा भारत की यूरोपीय संघ के साझेदार देशों के साथ संबंधों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करेगी. यात्रा के दूसरे चरण में, श्री मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 16 जून को कनाडा जाएंगे। यह दौरा कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के निमंत्रण पर हो रहा है। शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री जी-7 देशों के नेताओं, अन्य आमंत्रित आउटरीच देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के साथ ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), सहित महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। श्री मोदी शिखर सम्मेलन के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।  
 
यात्रा के अंतिम चरण में, प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को क्रोएशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की क्रोएशिया की पहली यात्रा होगी, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

प्रधानमंत्री मोदी क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे और क्रोएशिया के राष्ट्रपति ज़ोरान मिलनोविच से मुलाकात करेंगे। क्रोएशिया की यात्रा यूरोपीय संघ में भागीदारों के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करेगी।

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Sat, 14 Jun 2025 18:23:53 +0530 news desk MPcg
कांग्रेस का चुनावी तैयारी पर जोर, 15 जून को होगी विधायक दल की बैठक https://citytoday.co.in/2676 https://citytoday.co.in/2676 बिहार में कांग्रेस की नई रणनीति: जनता से संवाद और जमीनी मुद्दों पर फोकस, 15 जून को विधायक दल की बैठक

पटना
बिहार में तीन दशकों से कमजोर होती चली आ रही कांग्रेस अब अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए सक्रिय हो गई है। पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए पार्टी ने अब जनता से सीधा संवाद और जमीनी मुद्दों पर मुखरता को अपनी नई रणनीति का हिस्सा बनाया है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है।

जन सरोकार से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस आक्रामक
कांग्रेस अब बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अभ्यर्थियों की समस्याओं, युवाओं के पलायन, रोजगार के अभाव और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली जैसे जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रही है। पार्टी नेतृत्व मान रहा है कि इन मुद्दों पर खुलकर बात करके वह जनता के करीब आ सकती है।

15 जून को विधायक दल की अहम बैठक 

इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस ने 15 जून को पटना में विधायक दल की बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी के विधायक, विधान पार्षद और वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार और पार्टी प्रभारी कृष्णा अल्लावारू भी मौजूद रहेंगे।

बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा होगी। 

ज्वलंत जनहित मुद्दों की समीक्षा और उन पर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।

चरणबद्ध राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।

महागठबंधन में तालमेल को लेकर भी होगी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक महागठबंधन की हालिया बैठक के बाद बुलाई गई है। इसमें कांग्रेस उन सीटों की पहचान करेगी जहां वह मजबूत स्थिति में है। इन सीटों की सूची तैयार कर महागठबंधन की समन्वय समिति को सौंपने की योजना है, ताकि सीट बंटवारे के दौरान कांग्रेस को उसका वाजिब हिस्सा मिल सके।

राज्य में कांग्रेस की सक्रियता बढ़ी , पार्टी ने अपने सभी विधायकों, विधान पार्षदों और वरिष्ठ नेताओं को बैठक का पूर्व सूचना भेज दी है। इसके साथ ही कांग्रेस अब जन आंदोलन, संपर्क अभियान और मीडिया संवाद के ज़रिए बिहार में अपनी उपस्थिति फिर से दर्ज कराने की कोशिश में है।

बिहार में कांग्रेस अब सिर्फ चुनावी गठबंधन पर नहीं, बल्कि स्वयं की सांगठनिक ताकत और जनसरोकार के मुद्दों पर भरोसा करके आगे बढ़ने की रणनीति अपना रही है। देखना यह होगा कि आने वाले समय में यह सक्रियता उसे कितनी राजनीतिक जमीन वापस दिला पाती है।

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Sat, 14 Jun 2025 14:43:26 +0530 news desk MPcg
लक्ष्मण सिंह को कांग्रेस ने किया निष्कासित, राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा पर की थी टिप्पणी https://citytoday.co.in/2651 https://citytoday.co.in/2651 कांग्रेस ने लक्ष्मण सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया, राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा पर टिप्पणी पड़ी भारी

भोपाल। कांग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के छोटे भाई और पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। पार्टी की अनुशासनात्मक समिति ने यह कार्रवाई उनके वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ दिए गए बयानों को गंभीर मानते हुए की है।

राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा पर की थी तीखी टिप्पणी

लक्ष्मण सिंह ने बीते दिनों राहुल गांधी, रॉबर्ट वाड्रा और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर कई विवादास्पद बयान दिए थे। उन्होंने वाड्रा की एक टिप्पणी को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया और उमर अब्दुल्ला पर आतंकवादियों से मिलीभगत का आरोप लगाया।

'अगर पार्टी को निकालना है तो आज ही निकाल दे'

अपने बयानों के दौरान लक्ष्मण सिंह ने खुद कहा था कि अगर पार्टी को उन्हें निकालना है तो तुरंत निकाल दे। उनके अनुसार, पार्टी को चुनावी नुकसान से बचने के लिए नेताओं को सोच-समझकर बोलना चाहिए। उन्होंने वाड्रा के बयान को "गैर-जिम्मेदाराना" और "देश की सुरक्षा के लिए खतरा" बताया था।

कांग्रेस की सख्ती: 'पार्टी विरोधी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं'

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल में भोपाल में संगठन की बैठक के दौरान स्पष्ट कहा था कि पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके बाद ही लक्ष्मण सिंह पर कार्रवाई तय मानी जा रही थी।

आधिकारिक बयान

कांग्रेस अनुशासन समिति के सदस्य सचिव तारिक अनवर द्वारा जारी बयान में कहा गया“कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लक्ष्मण सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते तत्काल प्रभाव से कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है।”

कौन हैं लक्ष्मण सिंह?

लक्ष्मण सिंह दिग्विजय सिंह के छोटे भाई हैं और मध्य प्रदेश की राजनीति में जाना-पहचाना नाम हैं। वे पांच बार सांसद रह चुके हैं और कुछ समय पहले तक राघोगढ़ सीट से कांग्रेस विधायक भी रहे हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में उनकी सक्रियता में कमी आई थी।

कांग्रेस ने लक्ष्मण सिंह को निष्कासित कर यह स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी अब अनुशासनहीनता और सार्वजनिक तौर पर वरिष्ठ नेतृत्व की आलोचना को बर्दाश्त नहीं करेगी। यह कार्रवाई आगामी चुनावों के मद्देनज़र पार्टी की सख्त रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

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Wed, 11 Jun 2025 15:02:15 +0530 news desk MPcg
BJP को जुलाई में मिलेगा नया अध्यक्ष, नाम तय? फैसले पर राष्ट्रीय परिषद की मुहर बाकी https://citytoday.co.in/2644 https://citytoday.co.in/2644 जुलाई में बीजेपी को मिलेगा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष, दिल्ली में बड़े फैसले की तैयारी

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर अब विराम लगने वाला है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक जुलाई माह में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा तय मानी जा रही है। इससे पहले 21 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद सत्र से पूर्व राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाकर नए अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगाई जाएगी।

प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति पहले

राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले पार्टी 10 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों के नामों की घोषणा करेगी।

  • उत्तराखंड में ब्राह्मण चेहरा प्रमुख दावेदार

  • उत्तर प्रदेश में अब पिछड़ा वर्ग से अध्यक्ष की मांग

  • मध्य प्रदेश में जनजातीय नेता को मौका मिलने की संभावना

इन दिग्गजों के नाम चर्चा में

भाजपा के नए अध्यक्ष पद के लिए जिन नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें शामिल हैं:

  • धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय मंत्री)

  • शिवराज सिंह चौहान (कैबिनेट मंत्री)

  • मनोहर लाल खट्टर (कैबिनेट मंत्री)

किसी को संगठनात्मक अनुभव तो किसी को सामाजिक संतुलन के लिहाज से मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

जेपी नड्डा का कार्यकाल समाप्त, अब नया चेहरा तय

जेपी नड्डा जनवरी 2020 में भाजपा अध्यक्ष बने थे। उनका कार्यकाल 2023 में समाप्त होना था, जिसे लोकसभा चुनाव 2024 तक बढ़ा दिया गया था। अब चुनाव संपन्न होने के बाद पार्टी में संगठनात्मक पुनर्गठन की कवायद तेज हो गई है।

चुनाव प्रक्रिया की अधिसूचना जल्द

सूत्रों के मुताबिक, जून के दूसरे सप्ताह में चुनाव अधिसूचना जारी की जाएगी। पहले राज्य स्तरीय संगठनात्मक चुनाव होंगे, फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन होगा। पूरी प्रक्रिया पार्टी संविधान के अनुसार पारदर्शी तरीके से होगी। इसके लिए केंद्रीय चुनाव समिति का गठन किया जाएगा।

राजनीतिक दृष्टिकोण से अहम चुनाव

भाजपा का नया अध्यक्ष सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि पार्टी के आगामी 2026 विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए रणनीतिक दिशानिर्देशक होगा। विपक्ष की भी इस चुनाव पर नजर बनी हुई है, क्योंकि इससे भाजपा की नीति, संगठनात्मक प्राथमिकताएं और आगामी राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा।

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Wed, 11 Jun 2025 13:45:06 +0530 news desk MPcg
प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा है जिला अध्यक्षों की नियुक्ति आम सहमति से की जाएगी https://citytoday.co.in/2624 https://citytoday.co.in/2624 भोपाल

कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत नए शहर अध्यक्ष के लिए रायशुमारी की जा रही है। अमृतसर सांसद गुरमीत सिंह औजला ने तीन दिन शहर में रहकर इसके लिए मंथन किया। इस दौरान कई नाम सामने आए, लेकिन प्रदेश प्रभारी के एक बयान से कई दावेदारों के माथे पर चिंता की लकीर है।

नियुक्ति आम सहमति से की जाएगी
एक दिन पहले प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी(Harish Chaudhary) और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया विभाग की वर्चुअली मीटिंग ली थी। इसमें चौधरी ने कहा था कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति आम सहमति से की जाएगी, लेकिन 45 वर्ष से अधिक के नेताओं को अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा।

कई नेताओं की उम्र 45 वर्ष से अधिक
इंदौर में दावेदारी करने वाले कई नेता 45 वर्ष से अधिक की उम्र के हैं। ऐसे में अरविंद बागड़ी, अश्विन जोशी जैसे नेताओं की दावेदारी खटाई में पड़ सकती है। हालांकि चौधरी ने विशेष परिस्थितियों में रियायत देने की बात भी कही है।

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Tue, 10 Jun 2025 16:38:48 +0530 news desk MPcg
छत्तीसगढ़ में कृषि के साथ साथ उद्योगों के विकास के लिए है अनुकूल वातावरण : कैरियर निर्माण में अपनी क्षमता का बेहतर उपयोग करें युवा – मुख्यमंत्री https://citytoday.co.in/2616 https://citytoday.co.in/2616  

मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की

मुख्यमंत्री ने मुलाकात के दौरान दंतेवाड़ा के युवा उद्यमियों को किया प्रोत्साहित:आईआईएम में दंतेवाड़ा के 50 युवा उद्यमी ले रहे हैं प्रशिक्षण

छत्तीसगढ़ में खनिज, वन सहित अन्य प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इसके फलस्वरूप कृषि के साथ-साथ उद्योग-धंधों सहित प्रत्येक क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी मौजूदा क्षमताओं का सही ढंग से उपयोग कर प्रदेश और देश के नव निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करें। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विगत दिवस नवा रायपुर स्थित आईआईएम परिसर में दंतेवाड़ा के नवोदित उद्यमियों को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि दंतेवाड़ा जिले के 50 युवाओं का एक बैच देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान आईआईएम में उद्यमिता का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि यह प्रशिक्षण उनके कैरियर निर्माण एवं जीवन संवारने में अत्यंत कारगर सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जब कोई युवा उद्यमी अपने सपनों को साकार करता है, तो वह अनेक युवाओं के लिए प्रेरणा और अवसर का द्वार खोलता है। यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप सभी बस्तर क्षेत्र से हैं और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। आज बस्तर को सबसे संभावनाओं वाला क्षेत्र माना जा रहा है। प्रशिक्षण में आपने उद्यमिता से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें सीख ली हैं। अब उन्हें लागू कर अपने उद्यम को आरंभ कीजिए। शासन की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र के साथ-साथ उद्योगों के विकास के लिए भी अनुकूल वातावरण है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के समग्र विकास के लिए हम निरंतर नवाचार, अनुसंधान तथा उद्यमिता को प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए हमने ‘नई औद्योगिक नीति 2024-30’ लागू की है। इस नीति का मूल मंत्र है: “न्यूनतम शासन, अधिकतम प्रोत्साहन।” इसके तहत उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ‘सिंगल विंडो 2.0’ व्यवस्था लागू की गई है, जिसके माध्यम से सभी आवश्यक क्लीयरेंस सुलभता से प्रदान किए जा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति में प्रदेश के पिछड़े माने जाने वाले बस्तर और सरगुजा अंचल को सर्वाधिक निवेश प्रोत्साहन क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है, ताकि उनका त्वरित विकास सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री साय ने चर्चा के दौरान यह भी बताया कि नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत बस्तर में उद्योग स्थापित करने पर विशेष अनुदान का प्रावधान किया गया है। बस्तर के विकास का रोडमैप भी गत माह तैयार किया गया है, जिसमें कृषि, वनोपज आधारित व्यवसाय और पर्यटन सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों के लिए योजनाएं बनाई गई हैं। बस्तर की कनेक्टिविटी अब उत्कृष्ट हो गई है, जिससे उद्यमियों के उत्पाद देश भर के बाजारों तक आसानी से पहुँच सकें। सड़कों के सशक्त जाल के माध्यम से विकास को प्रोत्साहन मिलता है।

मुख्यमंत्री साय से मुलाकात के दौरान युवा अत्यंत उत्साहित नजर आए और उन्होंने भी अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर बड़े बचेली से चंद्रकुमार साहू, किरंदुल-बैलाडीला से अभिषेक गुप्ता, बचेली से अनिरुद्ध कुमार, बीजापुर से तेजस्व कुमार एवं नीलम पांडे, बचेली से कु. शिल्पा कुमारी तथा दंतेवाड़ा से राकेश यादव सहित कुल 50 युवा उद्यमी उपस्थित थे।

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Tue, 10 Jun 2025 14:12:25 +0530 news desk MPcg
बीजेपी से दिया इस्तीफा कहा& अब मैं भाजपा का सदस्य नहीं हूं, मैं इसकी घोषणा करता हूं: मनीष कश्यप https://citytoday.co.in/2609 https://citytoday.co.in/2609 पटना 

मनीष कश्यप ने बीजेपी से दिया इस्तीफा। बीजेपी से इस्तीफा देने का ऐलान मनीष कश्यप ने अपने फेसबुक पेज पर किया है। इसी के साथ मनीष कश्यप ने अपने फेसबुक पर लाइव आकर इस मुद्दे पर कई सारी बातें कही हैं। मनीश कश्यप ने कहा, 'मैं मनीष कश्यप अब भाजपा में नहीं हूं। अब मैं भाजपा का सदस्य नहीं हूं, मैं इसकी घोषणा करता हूं। मैं अपने क्षेत्र चनपटिया में गया था और वहां भ्रमण के दौरान मैंने कई लोगों से मुलाकात की थी। जिसके बाद अब मैं इस निर्णय पर पहुंचा कि मुझे बिहार और बिहारियों के लिए लड़ना है। बिहार से जो पलायन हो रहा है उसको रोकने के लिए लड़ना है। मैं जब पार्टी में था तब भी इस संबंध में लगातार आवाज उठाता रहा हूं।

अब मुझे लग रहा है कि मैं पार्टी में रहकर इन सभी चीजों को अच्छे ढंग से नहीं उठा पाऊंगा। हालांकि, इस निर्णय से बहुत सारे लोग खुश भी होंगे और बहुत सारे लोगों दुखी भी होंगे। जो लोग दुखी हैं उनसे मैं हाथ जोड़कर निवेदन करना चाहता हूं कि इस निर्णय के लिए मुझे मजबूर किया गया था। मैंने अपने तन-मन और धन सबकुछ पार्टी के लिए लगा दिया। कुछ लोग कहते हैं कि मनीष कश्यप महत्वकांक्षी है। लेकिन मैं महत्वकांक्षी नहीं हूं। अगर मैं महत्वकांक्षी होता तो 2024 का चुनाव लड़कर उनका खेल बिगाड़ देता।' 

मनीष कश्यप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा मैं कभी भी पीएम मोदी के खिलाफ एकतरफा नहीं बोलूंगा। ऐसा नहीं है कि मनीष कश्यप पार्टी में नहीं रहा तो अब मर्यादा लांघ कर पीएम मोदी से सवाल करेगा, ऐसा कभी नहीं होगा। मेरे लिए आप कल भी देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी थे और आज भी हैं तथा आगे भी रहेंगे। मुझे चीनी मिल बिहार के लिए चाहिए। आप दीजिए और अगर आप नहीं देंगे तो मैं आप तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास करूंगा। मुझे बिहार में अच्छे अस्पताल चाहिए, आप नहीं देंगे तो आपके कानों तक मैं अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश करूंगा। 

मनीष कश्यप ने इस पर कहा मैं मर्यादा नहीं तोड़ूंगा – 
मनीष कश्यप ने कहा कि मैं किसी के खिलाफ नहीं हूं। मैं उस कुर्सी के खिलााफ हूं जिसपर बैठ कर कुछ लोग बिहार को लूट रहे हैं। आखिर गरीब कहां जाए। मैं अनेकों कहानी आपके सामने लेकर आऊंगा। मैं उन सभी लोगों से हाथ जोड़कर माफी करना चाहता हूं जिन्होंने एक साल एक महीने तक मुझे भारतीय जनता पार्टी का सदस्य रखा। इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया। मैं मर्यादा में रहूंगा और यह मेरा वादा है। मैं कभी भी मर्यादा का सीमा नहीं पार करूंगा। मनीष कश्यप को आप लोगों ने बहुत परेशान किया लेकिन कोई बात नहीं। मैं जितने भी बीजेपी का सदस्य रहा उतने दिन मैंने पार्टी के लिए काम की थी।

बिहार चुनाव को लेकर कही यह बात
मनीष कश्यप ने आगे कहा, ‘जो मनीष कश्यप इन लोगों के साथ रहकर खुद की मदद नहीं कर पाया वो दूसरे के लिए क्या कर पाएगा। अब किसी ना किसी प्लेटफॉर्म की तलाश रहेगी। यहां पर रहने का मतलब है कि आप भ्रष्टाचार पर पर्दा डालें। बिहार में इसी साल चुनाव होने हैं। ऐसे कायस लगाए जा रहे थे कि मनीष कश्यप एक बार फिर चनपटिया से अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। बिहार चुनाव में किस्मत आजमाने को लेकर मनीष कश्यप ने कहा, 'मुझे कहां से चुनाव लड़ना चाहिए और किस पार्टी से चुनाव लड़ना चाहिए या फिर मुझे अकेले लड़ना चाहिए? इसके बारे में आप बताइएगा। मैं स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ आवाज उठाऊंगा।’

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Sun, 08 Jun 2025 16:23:34 +0530 news desk MPcg
प्रशांत किशोर जदयू में आये थे तो अपने लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उपमुख्यमंत्री का पद मांगा था, JDU पार्षद का दावा https://citytoday.co.in/2608 https://citytoday.co.in/2608 पटना   

प्रशांत किशोर पर जदयू पार्षद का बड़ा हमला: उपमुख्यमंत्री पद मांगने का आरोप, 'सिर्फ सत्ता की चाह में कर रहे राजनीति'

बिहार में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, सियासी माहौल गर्माता जा रहा है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर और उनकी जनसुराज पार्टी ने इस बार राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। अब जनता दल (यूनाइटेड) के एक वरिष्ठ नेता ने प्रशांत किशोर पर सीधा आरोप लगाते हुए बड़ा दावा किया है।

जदयू विधान पार्षद संजय सिंह ने रविवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि जब प्रशांत किशोर जदयू में शामिल हुए थे, तब उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उपमुख्यमंत्री पद की मांग की थी। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर सत्ता की राजनीति करते हैं, जनता की सेवा उनका उद्देश्य नहीं है। 

नीतीश कुमार ने उन्हें सम्मान दिया, लेकिन आज वही व्यक्ति उनके खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। इस पर संजय सिंह, विधान पार्षद, जदयू ने यह वयान दिया है कि उनकी राजनीति का मकसद सिर्फ कुर्सी है, सेवा नहीं।  ये सिर्फ कुर्सी के लिए काम करते हैं ना कि जनता के लिए। नीतीश कुमार ने इनको काफी सम्मान दिया पर, वो उन्हीं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं। ये शुद्ध रूप से व्यापारी हैं। पैसा खपाने के लिए उन्होंने यह पार्टी (जनसुराज पार्टी) बनाया है। 

बिहार में इसी साल यानि 2025 में ही  विधानसभा चुनाव होने हैं। इस बार बिहार चुनाव कई मायनों में खास है। दरअसल चुनावी रणनीतिकार कहे जाने वाले प्रशांत किशोर ने चुनाव से पहले जनसुराज पार्टी का ऐलान किया था। जनसुराज पार्टी भी बिहार चुनाव में ताल ठोक रही है। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर खुद बिहार में घूम-घूम कर जनता के बीच जा रहे हैं और जदयू, राजद, कांग्रेस तथा बीजेपी पर एक साथ हमला बोल रहे हैं। इस बीच जनता दल (यूनाइटेड) के एक पार्षद ने प्रशांत किशोर को घेरा है और एक पीके को लेकर एक बड़ा दावा कर दिया है।
 
संजय सिंह ने रविवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत किशोर पर जमकर प्रहार किया है। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को नई पहचान दी। बिहार आज देश मे सबसे अधिक तेजी से विकास करने वाला राज्य है।

JDU के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने थे प्रशांत किशोर
आपको बता दें कि साल 2015 में बिहार में नीतीश कुमार की जीत का श्रेय प्रशांत किशोर को ही दिया जाता है। साल 2018 में प्रशांत किशोर जेडीयू के उपाध्यक्ष बनाए गए थे। हालांकि, साल 2020 में प्रशांत किशोर जदयू से अलग हो गए थे। कहा जाता है कि नागरिकता संसोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर संसद के अंदर जदयू द्वारा नरेंद्र मोदी सरकार का समर्थन किए जाने के बाद प्रशांत किशोर की जदयू के प्रति तल्खी बढ़ गई थी। प्रशांत किशोर ने सवाल उठाया था कि पार्टी की बैठक में नीतीश कुमार ने सीएए और एनआरसी पर आपत्ति जताई थी लेकिन संसद में पार्टी ने इस मुद्दे पर सरकार का समर्थन कैसे कर दिया था।

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Sun, 08 Jun 2025 15:51:44 +0530 news desk MPcg
पीएम मोदी ने कहा& भविष्य के लिए मजबूत और आपदा&रोधी बुनियादी ढांचा बनाएं https://citytoday.co.in/2607 https://citytoday.co.in/2607 नई दिल्ली 

प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान: “भविष्य के लिए मजबूत और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचा विकसित करें”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक अहम संदेश देते हुए देश और दुनिया के नीति-निर्माताओं, इंजीनियरों और शहरी नियोजकों से आह्वान किया कि भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे बुनियादी ढांचे (infrastructure) का निर्माण करें जो न सिर्फ टिकाऊ हो, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति प्रतिरोधक भी हो। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर देते हुए वैश्विक स्तर पर इस दिशा में प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। वह यूरोप में पहली बार आयोजित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन "डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर" को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और फ्रांसीसी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा, "मैं अपने मित्र राष्ट्रपति मैक्रों और फ्रांस सरकार का समर्थन के लिए धन्यवाद करता हूं। साथ ही आगामी संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं देता हूं।"

प्रधानमंत्री ने भारत की पुरानी आपदाओं की याद दिलाते हुए कहा, "भारत ने 1999 के सुपर साइक्लोन और 2004 की सुनामी की पीड़ा को झेला है। हमने इससे सीखते हुए लचीलापन अपनाया और तटीय इलाकों में चक्रवात शेल्टर बनाए। साथ ही, 29 देशों के लिए एक सुनामी चेतावनी प्रणाली विकसित करने में भी भारत ने मदद की।" भारत की वैश्विक भूमिका पर उन्होंने कहा कि "कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई)" 25 छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के साथ कार्य कर रही है, जिसमें मजबूत घर, अस्पताल, स्कूल, ऊर्जा प्रणालियां, जल सुरक्षा तंत्र और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि तटीय और द्वीपीय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अत्यधिक खतरे में हैं। उन्होंने कहा, "इस सम्मेलन की थीम है: तटीय क्षेत्रों के लिए एक लचीले भविष्य का निर्माण। भारत और बांग्लादेश में चक्रवात 'रेमाल', कैरेबियन में 'हैरिकेन बेरिल', अमेरिका में 'हेलीन', दक्षिण-पूर्व एशिया में 'यागी' और फिलीपींस में 'उसागी' जैसी आपदाओं से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से कमजोर देशों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा, "हम छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को बड़े महासागरीय देश मानते हैं। इनकी संवेदनशीलता को देखते हुए इन्हें विशेष ध्यान मिलना चाहिए।" अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से ऐसा बुनियादी ढांचा बनाने की अपील की जो समय और आपदाओं की कसौटी पर खरा उतरे। उन्होंने एक मजबूत और प्रेरणादायक भविष्य का निर्माण करने का आह्वान किया।

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Sun, 08 Jun 2025 15:28:11 +0530 news desk MPcg
लालू ने RJD से बेटे को दिखाया बाहर का रास्ता, तेजप्रताप की 'अनुष्का संग 12 साल' पोस्ट से गुस्सा https://citytoday.co.in/2537 https://citytoday.co.in/2537

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इसकी वजह बनी तेजप्रताप की एक सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें उन्होंने दावा किया कि वह पिछले 12 साल से अनुष्का यादव के साथ रिलेशनशिप में हैं। इस पोस्ट ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, बल्कि लालू यादव को भी गहरे तौर पर नाराज कर दिया।

तेजप्रताप की इस पोस्ट को लालू ने पार्टी की छवि और पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ माना। इसके बाद, उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए तेजप्रताप को RJD से निष्कासित करने का फैसला लिया। लालू ने कहा, "पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है। ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।"

दरअसल, शनिवार रात को तेज प्रताप यादव के फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट की.जिसमे एक फोटो में वह एक लड़की के साथ दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने लिखा कि मैं तेज प्रताप यादव और मेरे साथ इस तस्वीर में जो दिख रही हैं उनका नाम अनुष्का यादव है। हम दोनों पिछले 12 सालों से एक दूसरे को जानते हैं। प्यार भी करते हैं। हमलोग पिछले 12 सालों से एक रिलेशनशिप में रह रहें हैं। मैं बहुत दिनों से आपलोगों से यह बात कहना चाहता था, लेकिन समझ नहीं आ रहा था कैसे कहूं? इसलिए आज इस पोस्ट के माध्यम से अपने दिल की बात आप सब के बीच रख रहा हूं। आशा करता हूं आपलोग मेरी बातों को समझेंगे।

तेजप्रताप की इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर तूफान मचा दिया है, जहां लोग अनुष्का यादव के बारे में तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं। हालांकि, अभी तक अनुष्का यादव की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस घटना ने बिहार की सियासत में एक नया मोड़ ला दिया है, और RJD के भीतर भी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।

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Sun, 25 May 2025 17:07:19 +0530 News desk Hindi
राहुल गांधी ने पुंछ में पाकिस्तानी गोलाबारी के पीड़ितों से मुलाकात कर बढ़ाया हौसला https://citytoday.co.in/2524 https://citytoday.co.in/2524 कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पाकिस्तानी गोलाबारी के पीड़ितों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था, जिसके विरोध में नियंत्रण रेखा के पार से हुई गोलाबारी में स्थानीय लोगों के जान-माल का भारी नुकसान हुआ।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुंछ पहुंचकर प्रभावित गांवों, शिक्षण संस्थानों, धार्मिक स्थलों और शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने एक स्कूल में जाकर बच्चों से संवाद किया और कहा, आपने बड़ा खतरा और भयावह स्थिति देखी है, लेकिन चिंता न करें, सब कुछ सामान्य हो जाएगा। पढ़ाई करें, खेलें और ढेर सारे दोस्त बनाएं। यही इस संकट से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है।

पहलगाम हमले के बाद दूसरी बार जम्मू-कश्मीर पहुंचे राहुल गांधी ने सीमा पार से हुई गोलाबारी में नष्ट हुए घरों और सार्वजनिक संपत्तियों का भी निरीक्षण किया। इस अवसर पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि, राहुल गांधी ने उन संस्थानों का दौरा किया जिन्हें गोलाबारी में नुकसान पहुँचा है। उन्होंने उन गुरुद्वारों और मंदिरों में भी जाने की योजना बनाई है जिन्हें पाकिस्तान की गोलीबारी से क्षति पहुँची है।

गोलीबारी के कारण हालात गंभीर

पुंछ में पाकिस्तान द्वारा की गई आर्टिलरी और मोर्टार से गोलाबारी के चलते अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है और 70 से अधिक घायल हुए हैं। हजारों लोग एलओसी से सटे गांवों से पलायन कर सरकारी राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा तनाव

यह गोलाबारी 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पीओके में नौ आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई के बाद शुरू हुई। इस संघर्ष में चार दिन तक दोनों देशों के बीच तनाव रहा, जिसके बाद 10 मई को संघर्षविराम पर सहमति बनी।

राहुल गांधी की जम्मू-कश्मीर में सक्रियता

यह राहुल गांधी की इस महीने जम्मू-कश्मीर की दूसरी यात्रा है। इससे पहले वह 25 अप्रैल को श्रीनगर गए थे और आतंकवादी हमले में घायल हुए लोगों से मुलाकात की थी। उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सीएम उमर अब्दुल्ला सहित कई प्रमुख नेताओं से भी मुलाकात की थी। राहुल गांधी के इस दौरे को मानवता और साहस के प्रतीकात्मक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है, जो कठिन परिस्थितियों में नागरिकों के साथ खड़े होने की राजनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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Sat, 24 May 2025 15:35:54 +0530 news desk MPcg
फिल्ममेकर अनुराग कश्यप के खिलाफ ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी को लेकर रायपुर में FIR दर्ज https://citytoday.co.in/2232 https://citytoday.co.in/2232 FIR रायपुर कोतवाली में दर्ज की गई
ब्राह्मण समाज को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप के खिलाफ रायपुर के कोतवाली थाने में एफआइआर दर्ज की गई है। यह मामला समाज में विभिन्न वर्गों के बीच फैलाने और धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में दर्ज किया गया है। एफआइआर सोमवार देर रात सिटी कोतवाली थाना रायपुर में दर्ज की गई। शिकायत रायपुर निवासी पंडित नीलकंठ त्रिपाठी द्वारा दर्ज कराई गई, जो राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और छत्तीसगढ़ प्रभारी हैं।
 
अनुराग कश्यप पर दर्ज धाराएं  
शिकायत में कहा गया है कि अनुराग कश्यप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समाज को लेकर जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणी की थी, जो समाज की भावना को आहत करती है। पुलिस ने अनुराग कश्यप के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (धर्म, जाति, जन्म स्थान आदि के आधार पर समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना) और धारा 302 (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए शब्दों का प्रयोग) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की आगे जांच की जा रही है।

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Wed, 23 Apr 2025 14:17:24 +0530 News desk Hindi
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले रेलवे की सौगात, नई ट्रेनें और बेहतर कनेक्टिविटी का तोहफा https://citytoday.co.in/2205 https://citytoday.co.in/2205 पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले ही राजनीतिक गतिविधियां जोर पकड़ रही हैं। विभिन्न दलों के नेता बिहार का दौरा शुरू कर चुके हैं। इस बीच, भारतीय रेलवे ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। रेलवे ने अगले छह महीनों में बिहार के लिए छह नई ट्रेनें शुरू करने की घोषणा की है, जिसमें अमृत भारत एक्सप्रेस, वंदे भारत एक्सप्रेस और वंदे मेट्रो जैसी आधुनिक ट्रेनें शामिल हैं। इन नई ट्रेनों से बिहार से दिल्ली, मुंबई, पुणे और हैदराबाद जैसे व्यस्त मार्गों पर यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, साथ ही टिकट की किल्लत से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

24 अप्रैल को पीएम मोदी देंगे नई ट्रेनों की सौगात

रेलवे सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अप्रैल को मधुबनी जिले के दौरे के दौरान वर्चुअल रूप से कई नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे। इनमें बिहार की दूसरी अमृत भारत एक्सप्रेस शामिल है, जो सहरसा से मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस तक चलेगी। यह ट्रेन सहरसा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और पाटलिपुत्र (पटना) होकर जाएगी। पहले इस ट्रेन को दिल्ली और अमृतसर तक चलाने की योजना थी, लेकिन अब इसे मुंबई तक चलाने का फैसला लिया गया है। 

इसके अलावा, पीएम मोदी दो नई मेमू पैसेंजर ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाएंगे। पहली ट्रेन सहरसा से सुपौल होते हुए पिपरा तक चलेगी, जबकि दूसरी सहरसा से खगड़िया और अलौली होकर समस्तीपुर तक जाएगी। साथ ही, बिहार की पहली वंदे मेट्रो (नमो भारत एक्सप्रेस) का भी शुभारंभ होगा, जो पटना से जयनगर (मधुबनी) के बीच चलेगी। यह ट्रेन रैपिड रेल तकनीक पर आधारित है और वर्तमान में केवल अहमदाबाद-भुज मार्ग पर ही ऐसी ट्रेन चल रही है।

पटना-दिल्ली स्लीपर वंदे भारत जल्द

रेलवे के मुताबिक, इस साल के अंत तक पटना से नई दिल्ली के बीच स्लीपर वंदे भारत ट्रेन शुरू होने की संभावना है। यह ट्रेन लंबी दूरी के यात्रियों के लिए समय और सुविधा दोनों के लिहाज से फायदेमंद होगी। इसके अलावा, पुणे, बेंगलुरु और सिकंदराबाद जैसे मार्गों के लिए नई सुपरफास्ट ट्रेनों का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है।

रेलवे बजट में बिहार को विशेष ध्यान

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रेलवे को 2.52 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसमें बिहार को 10,066 करोड़ रुपये मिले हैं। यह राशि यूपीए सरकार के समय (2004-2014) के औसत 1,132 करोड़ रुपये से नौ गुना अधिक है। बिहार में रेलवे परियोजनाओं पर कुल 90,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अमृत स्टेशन योजना के तहत बिहार के 98 स्टेशनों को 3,164 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक बनाया जा रहा है। इन स्टेशनों पर लिफ्ट, एस्केलेटर, वाई-फाई और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। 

बिहार में रेलवे का विस्तार और उपलब्धियां

वर्तमान में बिहार में 12 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं, जो 15 जिलों को जोड़ती हैं और 22 स्टेशनों पर रुकती हैं। इसके अलावा, एक अमृत भारत एक्सप्रेस (दरभंगा-आनंद विहार) भी संचालित हो रही है, जो चार जिलों को कवर करती है। बिहार में रेलवे ने 100% इलेक्ट्रिफिकेशन का लक्ष्य हासिल कर लिया है। 2014 से अब तक 3,020 किलोमीटर ट्रैक का इलेक्ट्रिफिकेशन किया गया है। 2009-14 के दौरान जहां प्रतिवर्ष 30 किलोमीटर ट्रैक का इलेक्ट्रिफिकेशन होता था, वहीं 2014-25 में यह बढ़कर 275 किलोमीटर प्रति वर्ष हो गया। इसी तरह, नई रेल लाइनों का निर्माण भी ढाई गुना बढ़कर 167 किलोमीटर प्रति वर्ष हो गया है।

यात्रियों को मिलेगी राहत

रेलवे की इन नई पहलों से बिहार में कनेक्टिविटी बढ़ेगी और यात्रियों को टिकट की मारामारी से राहत मिलेगी। नई ट्रेनों और आधुनिक स्टेशनों के साथ बिहार में रेल यात्रा अब और सुविधाजनक होने वाली है। चुनावी साल में रेलवे की यह सौगात बिहारवासियों के लिए एक बड़ा उपहार साबित होगी।

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Mon, 21 Apr 2025 17:58:28 +0530 news desk MPcg
Bihar: तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, भ्रष्टाचार और खजाने की लूट का दावा https://citytoday.co.in/2190 https://citytoday.co.in/2190 पटना: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और इंडिया गठबंधन की समन्वय समिति के अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार की नीतीश कुमार सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार पर भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने की लूट के गंभीर आरोप लगाए। RJD कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग जान चुके हैं कि उनकी सरकार दोबारा नहीं बनने वाली, इसलिए वे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं।

"NDA सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर"

तेजस्वी ने दावा किया कि एनडीए सरकार में भ्रष्टाचार ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा, "जनता भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और दलाली से तंग आ चुकी है। सत्ताधारी दल अपनी हार को देखकर सरकारी खजाने को लूटने में जुटे हैं।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जनता के पैसे का इस्तेमाल अपने निजी और राजनीतिक हितों के लिए कर रही है।

महिला संवाद अभियान पर सवाल

तेजस्वी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'महिला संवाद अभियान' को भी निशाने पर लिया। उन्होंने इसे जनता दल यूनाइटेड (JDU) का चुनावी प्रचार करार देते हुए कहा कि इसके लिए सरकारी फंड का दुरुपयोग हो रहा है। तेजस्वी ने दावा किया कि इस अभियान के तहत 225 करोड़ रुपये की लागत से 600 प्रचार रथ खरीदे गए हैं, जिनमें 30 प्रतिशत कमीशन ठेकेदारों के जरिए मंत्रियों को दिया जा रहा है। उन्होंने इसकी जांच की मांग की।

"बाहरी ठेकेदारों को टेंडर, बिहार के लोग उपेक्षित"

तेजस्वी ने सरकार पर बिहार के स्थानीय ठेकेदारों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कई टेंडर निकाले जा रहे हैं, लेकिन ये टेंडर बाहरी लोगों को दिए जा रहे हैं। "ग्लोबल टेंडर के नाम पर कमीशन लिया जा रहा है। सरकार जल्दबाजी में जनता का पैसा लूट रही है। यह गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए," तेजस्वी ने जोर देकर कहा।

जनता से अपील

तेजस्वी ने बिहार की जनता से अपील की कि वे इस "लूट और भ्रष्टाचार" के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि RJD जनता के हितों के लिए लड़ता रहेगा और नीतीश सरकार की कथित गड़बड़ियों को उजागर करता रहेगा।

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Sat, 19 Apr 2025 14:41:26 +0530 news desk MPcg
ईडी के फेर में फंसे राहुल&सोनिया और रॉबर्ट वाड्रा, कई मामलों में घिरा है गांधी परिवार https://citytoday.co.in/2166 https://citytoday.co.in/2166 कई केस में घिरा है गाँधी परिवार 
ED ने मंगलवार को नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। आरोपपत्र में इन पर एसोसिएट्स जर्नल लिमिटेड (एजेएल) के अंतर्गत आने वाली 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति को हड़पने का आरोप है। सोनिया गांधी के दामाद और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा से भी ईडी जमीन के लेनदेन से जुड़े मामले में पूछताछ कर रही है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब गांधी परिवार के सदस्यों पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी हो। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी पर कुल मिलाकर 20 से ज्यादा केस दर्ज हैं, जिन पर कार्रवाई जारी है।

पॉक्सो एक्स से लेकर मानहानि तक  मामले 
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 2024 को लोकसभा चुनाव में दिए गए चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उन पर कुल 18 मामले दर्ज हैं। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भी दो अन्य मामलों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई हैं। यानी उनके ऊपर चल रहे मामलों की संख्या 20 के ऊपर पहुंच गई है। राहुल पर जिन मामलों में केस दर्ज हुए हैं, उनमें पॉक्सो एक्ट से लेकर मानहानि तक की धाराओं में मामले हैं।

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Thu, 17 Apr 2025 13:58:59 +0530 News desk Hindi
पीएम मोदी वक्फ बिल पर बोले 'वक्फ की जमीनों का सही इस्तेमाल होता, तो मुस्लिम युवाओं को पंचर बनाकर गुजारा नहीं करना पड़ता' https://citytoday.co.in/2130 https://citytoday.co.in/2130 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को हरियाणा के दौरे पर हैं। जहाँ उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा की, कांग्रेस ने वक्फ कानून को संविधान से ऊपर कर दिया था। कांग्रेस ने कभी मुसलमानों का भला नहीं किया। भला किया होता तो आज युवाओं को पंचर नहीं बनाने पड़ते। कांग्रेस किसी मुसलमान को पार्टी अध्यक्ष क्यों नहीं बनाती? कांग्रेस की नियत मुसलमानों भला करना नहीं है. अगर वक्फ की जमीनों और संपत्तियों का सही तरीके से इस्तेमाल होता, तो मुस्लिम युवाओं को साइकिलों के पंचर बनाकर गुजारा नहीं करना पड़ता।

इसी के साथ PM मोदी ने कहा की कांग्रेस ने सिर्फ कुछ कट्टरपंथियों को ही खुश किया है। बाकी समाज बेहाल रहा, अशिक्षित रहा, गरीब रहा। कांग्रेस की इस कुनीति का सबसे बड़ा प्रमाण वक्फ कानून है।

हिसार में पीएम मोदी ने संबोधन में बड़ी बातें भी कही, ''अब नए वक्फ कानून के तहत किसी भी आदिवासी की जमीन को हिंदुस्तान के किसी भी कोने में उसकी संपत्ति को ये वक्फ बोर्ड हाथ भी नहीं लगा पाएगा। नए प्रावधानों से वक्फ की पवित्र भावना का सम्मान होगा।''

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Mon, 14 Apr 2025 12:33:45 +0530 News desk Hindi
जम्मू&कश्मीर: विधानसभा के बाहर विधायकों में टकराव, हाथापाई; वक्फ कानून को लेकर सदन में जोरदार हंगामा https://citytoday.co.in/jammu-and-kashmir-clashes-and-scuffles-between-mlas-outside-the-assembly-huge-uproar-in-the-house-over-waqf-law https://citytoday.co.in/jammu-and-kashmir-clashes-and-scuffles-between-mlas-outside-the-assembly-huge-uproar-in-the-house-over-waqf-law जम्मू-कश्मीर विधानसभा में लगातार तीसरे दिन वक्फ कानून को लेकर हंगामा जारी रहा। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के विधायकों ने वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा किया, जिसके बाद विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प तक हो गई। यह टकराव न सिर्फ सदन के भीतर बल्कि बाहर परिसर में भी देखने को मिला। हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही दोपहर 1 बजे तक स्थगित कर दी गई।

आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक मेहराज मलिक पर भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने गंभीर आरोप लगाए। रंधावा ने कहा कि मलिक ने हिंदुओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की और कहा कि हिंदू तिलक लगाने का पाप करते हैं। रंधावा ने इसे असहनीय बताते हुए कहा कि वे इसका जवाब जरूर देंगे।
इस बीच, विधानसभा परिसर में भी विधायकों के बीच तनातनी देखी गई। भाजपा विधायक राज्य में बेरोजगारी और दिहाड़ी मजदूरों के मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर बाहर धरने पर बैठे थे। इस दौरान दोनों पक्षों के विधायक आपस में भिड़ गए। नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह मुद्दों से ध्यान भटकाने और चर्चा से बचने की कोशिश कर रही है।

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को निरस्त करने की मांग भी तेज हो गई है। मंगलवार को एनसी, कांग्रेस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायकों ने इस मुद्दे पर हंगामा किया था। पीडीपी ने एक प्रस्ताव पेश कर केंद्र से इस कानून को वापस लेने की मांग की, जिसके बाद सदन आधे घंटे के लिए स्थगित हो गया था।नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने एनसी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके विधायक सिर्फ ड्रामा कर रहे हैं। उन्होंने इसे ट्रेजरी बेंच और चेयर के बीच पहले से तय खेल करार दिया। शर्मा ने कहा कि एनसी कश्मीर के युवाओं की भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रही है, जबकि लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान उनके सांसद नदारद थे। उन्होंने यह भी तंज कसा कि मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का स्वागत तो अच्छे से किया, जिन्होंने यह विधेयक पेश किया था, लेकिन अब विरोध का दिखावा हो रहा है।

एनसी विधायक मुबारक गुल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर मुस्लिम बहुल राज्य है और वक्फ कानून पर चर्चा जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनता इस कानून के खिलाफ है और भाजपा को सदन में यह साबित करना चाहिए कि यह मुसलमानों के लिए कैसे फायदेमंद है। गुल ने आरोप लगाया कि चर्चा की मांग पर भाजपा विधायक हाथापाई पर उतर आए, जबकि गैर-मुस्लिम सांसदों ने भी इस विधेयक का विरोध किया है।

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Wed, 09 Apr 2025 12:59:53 +0530 Newsdesk
महाराष्ट्र: पूर्व क्रिकेटर केदार जाधव BJP में शामिल, कहा& पीएम मोदी के काम से मिली प्रेरणा https://citytoday.co.in/Maharashtra:-Former-Cricketer-Kedar-Jadhav-Joins-BJP,-Says-PM-Modis-Achievements-Inspire-Me https://citytoday.co.in/Maharashtra:-Former-Cricketer-Kedar-Jadhav-Joins-BJP,-Says-PM-Modis-Achievements-Inspire-Me Tue, 08 Apr 2025 17:23:51 +0530 Newsdesk कांग्रेस हाईकमान ने शुरू किया आगामी चुनावों की रणनीति पर विचार&मंथन, संगठन में सुधार पर फोकस; राहुल गांधी का बड़ा बयान https://citytoday.co.in/Here’s-an-English-slug-for-your-headline:--congress-strategizes-for-upcoming-elections-focuses-on-organization-reform-rahul-gandhi-statement https://citytoday.co.in/Here’s-an-English-slug-for-your-headline:--congress-strategizes-for-upcoming-elections-focuses-on-organization-reform-rahul-gandhi-statement Tue, 08 Apr 2025 14:59:19 +0530 Newsdesk वक्फ की लूट का खेल खत्म: सांसद आलोक शर्मा की हुंकार & 'अब जेल में ठिकाना, भोपाल का बेटा खोलेगा भ्रष्टाचार का काला चिट्ठा ! https://citytoday.co.in/वक्फ-की-लूट-का-खेल-खत्म-सांसद-आलोक-शर्मा-की-हुंकार-अब-जेल-में-ठिकाना-भोपाल-का-बेटा-खोलेगा-भ्रष्टाचार-का-काला-चिट्ठा https://citytoday.co.in/वक्फ-की-लूट-का-खेल-खत्म-सांसद-आलोक-शर्मा-की-हुंकार-अब-जेल-में-ठिकाना-भोपाल-का-बेटा-खोलेगा-भ्रष्टाचार-का-काला-चिट्ठा Sat, 05 Apr 2025 18:00:25 +0530 Newsdesk तमिलनाडु में वक्फ बिल को लेकर बवाल तय! विजय ने किया विरोध प्रदर्शन का एलान ! https://citytoday.co.in/तमिलनाडु-में-वक्फ-बिल-को-लेकर-बवाल-तय-विजय-ने-किया-विरोध-प्रदर्शन-का-एलान https://citytoday.co.in/तमिलनाडु-में-वक्फ-बिल-को-लेकर-बवाल-तय-विजय-ने-किया-विरोध-प्रदर्शन-का-एलान Fri, 04 Apr 2025 17:51:39 +0530 Newsdesk प्रवेश वर्मा: मैनेजमेंट की डिग्री, दो बार सांसद... फिर भी दिल्ली सीएम की रेस से बाहर, क्या हैं कारण ? https://citytoday.co.in/प्रवेश-वर्मा-मैनेजमेंट-की-डिग्री-दो-बार-सांसद-फिर-भी-दिल्ली-सीएम-की-रेस-से-बाहर-क्या-हैं-कारण https://citytoday.co.in/प्रवेश-वर्मा-मैनेजमेंट-की-डिग्री-दो-बार-सांसद-फिर-भी-दिल्ली-सीएम-की-रेस-से-बाहर-क्या-हैं-कारण Thu, 20 Feb 2025 20:22:02 +0530 Newsdesk दिल्ली की नई मुख्यमंत्री चुनी गईं रेखा गुप्ता को हार्दिक बधाई ! Rekha gupta https://citytoday.co.in/दिल्ली-की-नई-मुख्यमंत्री-चुनी-गईं-रेखा-गुप्ता-को-हार्दिक-बधाई-rekha-gupta https://citytoday.co.in/दिल्ली-की-नई-मुख्यमंत्री-चुनी-गईं-रेखा-गुप्ता-को-हार्दिक-बधाई-rekha-gupta Wed, 19 Feb 2025 20:59:17 +0530 Newsdesk "मातृ वंदना योजना: महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए सहायता" https://citytoday.co.in/मातृ-वंदना-योजना-महिलाओं-के-स्वास्थ्य-और-सुरक्षा-के-लिए-सहायता https://citytoday.co.in/मातृ-वंदना-योजना-महिलाओं-के-स्वास्थ्य-और-सुरक्षा-के-लिए-सहायता Mon, 20 Jan 2025 16:07:26 +0530 Newsdesk महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने आज शिरडी स्थित साईं बाबा मंदिर में दर्शन किए! https://citytoday.co.in/महाराष्ट्र-के-उपमुख्यमंत्री-अजित-पवार-ने-आज-शिरडी-स्थित-साईं-बाबा-मंदिर-में-दर्शन-किए https://citytoday.co.in/महाराष्ट्र-के-उपमुख्यमंत्री-अजित-पवार-ने-आज-शिरडी-स्थित-साईं-बाबा-मंदिर-में-दर्शन-किए Sat, 18 Jan 2025 17:42:44 +0530 Newsdesk नितिन गडकरी ने उठाया बड़ा कदम: सड़क हादसों के लिए शुरू की कैशलेस ट्रीटमेंट योजना! https://citytoday.co.in/नितिन-गडकरी-ने-उठाया-बड़ा-कदम-सड़क-हादसों-के-लिए-शुरू-की-कैशलेस-ट्रीटमेंट-योजना https://citytoday.co.in/नितिन-गडकरी-ने-उठाया-बड़ा-कदम-सड़क-हादसों-के-लिए-शुरू-की-कैशलेस-ट्रीटमेंट-योजना Wed, 08 Jan 2025 14:53:10 +0530 Newsdesk शीशमहल पर सियासी ड्रामा https://citytoday.co.in/शीशमहल-पर-सियासी-ड्रामा https://citytoday.co.in/शीशमहल-पर-सियासी-ड्रामा Wed, 08 Jan 2025 13:44:19 +0530 Newsdesk दिल्ली सीएम आतिशी का भावुक बयान: रमेश बिधूड़ी के विवादित टिप्पणी पर प्रतिक्रिया https://citytoday.co.in/दिल्ली-सीएम-आतिशी-का-भावुक-बयान-रमेश-बिधूड़ी-के-विवादित-टिप्पणी-पर-प्रतिक्रिया https://citytoday.co.in/दिल्ली-सीएम-आतिशी-का-भावुक-बयान-रमेश-बिधूड़ी-के-विवादित-टिप्पणी-पर-प्रतिक्रिया Mon, 06 Jan 2025 15:23:39 +0530 Newsdesk दिल्ली में मोदी का ऐतिहासिक दिन: विकास पहलों का आगाज़ https://citytoday.co.in/दिल्ली-में-मोदी-का-ऐतिहासिक-दिन-विकास-पहलों-का-आगाज़-aap-की-बेचैनी https://citytoday.co.in/दिल्ली-में-मोदी-का-ऐतिहासिक-दिन-विकास-पहलों-का-आगाज़-aap-की-बेचैनी Sun, 05 Jan 2025 16:48:29 +0530 Newsdesk परिवर्तन रैली में पीएम मोदी ने कहा: "दिल्ली का भविष्य बीजेपी के हाथों में" https://citytoday.co.in/परिवर्तन-रैली-में-पीएम-मोदी-ने-कहा-दिल्ली-का-भविष्य-बीजेपी-के-हाथों-में https://citytoday.co.in/परिवर्तन-रैली-में-पीएम-मोदी-ने-कहा-दिल्ली-का-भविष्य-बीजेपी-के-हाथों-में Sun, 05 Jan 2025 14:15:24 +0530 Newsdesk "केजरीवाल का प्रदर्शनकारियों के आरोपों पर जवाब: 'ये महिलाएं कांग्रेस और बीजेपी से संबंधित हैं' https://citytoday.co.in/केजरीवाल-का-प्रदर्शनकारियों-के-आरोपों-पर-जवाब-ये-महिलाएं-कांग्रेस-और-बीजेपी-से-संबंधित-हैं https://citytoday.co.in/केजरीवाल-का-प्रदर्शनकारियों-के-आरोपों-पर-जवाब-ये-महिलाएं-कांग्रेस-और-बीजेपी-से-संबंधित-हैं Sat, 04 Jan 2025 15:19:10 +0530 Newsdesk "दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: बीजेपी ने जारी की प्रत्याशियों की लिस्ट, देखें कौन&कौन है शामिल" https://citytoday.co.in/दिल्ली-विधानसभा-चुनाव-2025-बीजेपी-ने-जारी-की-प्रत्याशियों-की-लिस्ट-देखें-कौन-कौन-है-शामिल https://citytoday.co.in/दिल्ली-विधानसभा-चुनाव-2025-बीजेपी-ने-जारी-की-प्रत्याशियों-की-लिस्ट-देखें-कौन-कौन-है-शामिल Sat, 04 Jan 2025 14:07:02 +0530 Newsdesk "पीएम मोदी की चादर लेकर अजमेर पहुंचे किरेन रिजिजू, 813वें उर्स का आयोजन" https://citytoday.co.in/पीएम-मोदी-की-चादर-लेकर-अजमेर-पहुंचे-किरेन-रिजिजू-813वें-उर्स-का-आयोजन https://citytoday.co.in/पीएम-मोदी-की-चादर-लेकर-अजमेर-पहुंचे-किरेन-रिजिजू-813वें-उर्स-का-आयोजन Sat, 04 Jan 2025 13:14:03 +0530 Newsdesk . https://citytoday.co.in/सियासी-बयानबाजी-के-घेरे-में-भाजपा-आपदा-की-चर्चा-तेज़ https://citytoday.co.in/सियासी-बयानबाजी-के-घेरे-में-भाजपा-आपदा-की-चर्चा-तेज़ Sat, 04 Jan 2025 12:16:49 +0530 Newsdesk "पीएम मोदी ने झुग्गी&झोपड़ी के निवासियों को दिए सपनों के घर, 1,675 फ्लैट्स का उद्घाटन" https://citytoday.co.in/पीएम-मोदी-ने-हमें-नरक-से-स्वर्ग-में-भेज-दिया-है https://citytoday.co.in/पीएम-मोदी-ने-हमें-नरक-से-स्वर्ग-में-भेज-दिया-है Fri, 03 Jan 2025 15:25:46 +0530 Newsdesk दिल्ली विश्वविद्यालय में वीर सावरकर कॉलेज का शिलान्यास: पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन https://citytoday.co.in/दिल्ली-विश्वविद्यालय-में-वीर-सावरकर-कॉलेज-का-शिलान्यास-पीएम-मोदी-करेंगे-उद्घाटन https://citytoday.co.in/दिल्ली-विश्वविद्यालय-में-वीर-सावरकर-कॉलेज-का-शिलान्यास-पीएम-मोदी-करेंगे-उद्घाटन Fri, 03 Jan 2025 13:01:28 +0530 Newsdesk "सावरकर के नाम पर कॉलेज: दिल्ली विश्वविद्यालय में सियासी हंगामा" https://citytoday.co.in/सावरकर-के-नाम-पर-कॉलेज-दिल्ली-विश्वविद्यालय-में-सियासी-हंगामा https://citytoday.co.in/सावरकर-के-नाम-पर-कॉलेज-दिल्ली-विश्वविद्यालय-में-सियासी-हंगामा Fri, 03 Jan 2025 12:57:38 +0530 Newsdesk "पप्पू यादव के समर्थकों का अररिया में सड़क जाम: बीपीएससी 70वीं प्रारंभिक परीक्षा की पुनः परीक्षा की मांग" https://citytoday.co.in/पप्पू-यादव-के-समर्थकों-का-अररिया-में-सड़क-जाम-बीपीएससी-70वीं-प्रारंभिक-परीक्षा-की-पुनः-परीक्षा-की-मांग https://citytoday.co.in/पप्पू-यादव-के-समर्थकों-का-अररिया-में-सड़क-जाम-बीपीएससी-70वीं-प्रारंभिक-परीक्षा-की-पुनः-परीक्षा-की-मांग Fri, 03 Jan 2025 12:22:33 +0530 Newsdesk "दिल्ली चुनावों में आरोप&प्रत्यारोप की बाढ़: बीजेपी और AAP के बीच पोस्टर वॉर" https://citytoday.co.in/दिल्ली-चुनावों-में-आरोप-प्रत्यारोप-की-बाढ़-बीजेपी-और-aap-के-बीच-पोस्टर-वॉर https://citytoday.co.in/दिल्ली-चुनावों-में-आरोप-प्रत्यारोप-की-बाढ़-बीजेपी-और-aap-के-बीच-पोस्टर-वॉर Thu, 02 Jan 2025 14:59:12 +0530 Newsdesk "किलोकरी गांव के मंदिर में पुजारियों ने केजरीवाल की जीत के लिए की प्रार्थना" https://citytoday.co.in/किलोकरी-गांव-के-मंदिर-में-पुजारियों-ने-केजरीवाल-की-जीत-के-लिए-की-प्रार्थना https://citytoday.co.in/किलोकरी-गांव-के-मंदिर-में-पुजारियों-ने-केजरीवाल-की-जीत-के-लिए-की-प्रार्थना Tue, 31 Dec 2024 17:30:35 +0530 Newsdesk निर्मला सीतारमण की जोरदार प्रतिक्रिया https://citytoday.co.in/निर्मला-सीतारमण-की-जोरदार-प्रतिक्रिया https://citytoday.co.in/निर्मला-सीतारमण-की-जोरदार-प्रतिक्रिया Tue, 31 Dec 2024 17:01:53 +0530 Newsdesk देश में पहली बार: केजरीवाल सरकार का बड़ा ऐलान, पुजारियों और ग्रंथियों को हर महीने मिलेंगे ₹18,000 https://citytoday.co.in/देश-में-पहली-बार-केजरीवाल-सरकार-का-बड़ा-ऐलान-पुजारियों-और-ग्रंथियों-को-हर-महीने-मिलेंगे-18000 https://citytoday.co.in/देश-में-पहली-बार-केजरीवाल-सरकार-का-बड़ा-ऐलान-पुजारियों-और-ग्रंथियों-को-हर-महीने-मिलेंगे-18000 Tue, 31 Dec 2024 16:19:28 +0530 Newsdesk कांग्रेस नेता अजय माकन बोले & #kejriwal देश के Fraud King. | https://citytoday.co.in/कांग्रेस-नेता-अजय-माकन-बोले-kejriwal-देश-के-fraud-king https://citytoday.co.in/कांग्रेस-नेता-अजय-माकन-बोले-kejriwal-देश-के-fraud-king Thu, 26 Dec 2024 14:29:43 +0530 Newsdesk Arvind Kejriwal भगवान श्री कृष्ण के अवतार है ? & Awadh Ojha https://citytoday.co.in/arvind-kejriwal-भगवान-श्री-कृष्ण-के-अवतार-है-awadh-ojha https://citytoday.co.in/arvind-kejriwal-भगवान-श्री-कृष्ण-के-अवतार-है-awadh-ojha Tue, 24 Dec 2024 18:15:12 +0530 Newsdesk BJP :बीजेपी को बहुमत के लिए एनडीए के सहयोगियों की जरूरत  https://citytoday.co.in/BJP-:BJP-needs-NDA-allies-for-majority https://citytoday.co.in/BJP-:BJP-needs-NDA-allies-for-majority सीटीटुडे | केंद्र सरकार ने हाल ही में बिना आरक्षण वाले मंत्रालयों में यूपीएससी की लेटरल एंट्री नोटिफिकेशन को वापस ले लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर इस नोटिफिकेशन को वापस लिया गया, लेकिन इस कदम पर विपक्ष ने इसे अपनी जीत बताया है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, और तेजस्वी यादव ने इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे पर एनडीए की सरकार और बीजेपी के बहुमत वाली सरकार में अंतर बताते हुए ट्वीट किया। यह पहली बार नहीं है जब मोदी सरकार ने जनभावना को देखते हुए कोई बिल वापस लिया हो। 

मोदी सरकार के फैसले जो जनभावनाओं के चलते वापस लिए गए

2014 के लोकसभा चुनावों में 'मोदी लहर' मानी जा रही थी, और 2019 के चुनावों में 'मोदी मैजिक' ने बीजेपी को 303 सीटें दिलाई थीं। हालांकि, 2024 के 18वीं लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उम्मीद के मुताबिक सीटें नहीं मिलीं, और 240 सीटों पर सिमट गई। इसके बावजूद एनडीए को 392 सीटें हासिल हुईं और पीएम मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बनी। पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए, जिनमें से कई का विपक्ष ने कड़ा विरोध किया। फिर भी, सरकार अपने बहुमत के दम पर इन्हें पारित कराने में सफल रही। लेकिन 2024 में जब बीजेपी को बहुमत के लिए एनडीए के सहयोगियों की जरूरत पड़ी, तब मोदी सरकार को कुछ फैसलों पर पीछे हटना पड़ा।

विवादास्पद बिल जिन्हें सरकार को वापस लेना पड़ा

केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में लेटरल एंट्री:हाल ही में यूपीएससी ने केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में 45 पदों के लिए लेटरल एंट्री का नोटिफिकेशन जारी किया था। इस पर आरक्षण को लेकर विपक्ष और बीजेपी की सहयोगी पार्टियों ने कड़ा विरोध जताया। प्रधानमंत्री मोदी के हस्तक्षेप के बाद इस विज्ञापन को वापस लिया गया।

वक्फ बोर्ड बिल: मोदी सरकार तीसरे कार्यकाल में वक्फ बोर्ड संशोधन बिल लेकर आई थी। लेकिन सदन में इस पर जमकर हंगामा हुआ और विपक्ष के साथ-साथ कुछ सहयोगी दलों ने भी इसका विरोध किया। आखिरकार, सरकार ने बिल को जेपीसी को भेज दिया।

ब्रॉडकास्ट बिल 2024: तीसरे कार्यकाल के पहले ही मानसून सत्र में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बिल को पेश किया था। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स और इंडिविजुअल कंटेंट क्रिएटर्स ने इस बिल का कड़ा विरोध किया, जिसके बाद सरकार ने इसे वापस ले लिया और नए मसौदे के साथ फिर से लाने का फैसला किया।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस बिल: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई को बजट सत्र में यह बिल पेश किया था। इस बिल में किए गए कुछ प्रावधानों से बिजनेसमैन और आम आदमी दोनों ने नाराजगी जाहिर की। चौतरफा आलोचना के बाद सरकार ने इसमें संशोधन करते हुए इसे जनता के पक्ष में कर दिया।

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Thu, 22 Aug 2024 17:22:53 +0530 Newsdesk
Manipur:मणिपुर में शांति, पर सियासी उथल&पुथल बढ़ी https://citytoday.co.in/Manipur:Peace-in-Manipur,-but-political-turmoil-increases https://citytoday.co.in/Manipur:Peace-in-Manipur,-but-political-turmoil-increases मणिपुर|  मणिपुर में भले ही हिंसा और तनाव का माहौल थम गया हो, लेकिन राजनीतिक घमासान और अधिक तेज हो गया है। राज्य के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह पर अब विपक्ष ही नहीं, बल्कि उनकी खुद की पार्टी के विधायकों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। 

भाजपा के सात विधायकों समेत कुल 10 कूकी विधायकों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच की मांग की है। इन विधायकों का कहना है कि मणिपुर में हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग गठित किया जाना चाहिए, और यदि इस जांच में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को दोषी पाया जाता है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 

इन विधायकों ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कूकी समुदाय के नरसंहार के दौरान मैतेई समुदाय के उपद्रवी तत्वों को खुली छूट दी थी। वहीं, राज्य सरकार ने 7 अगस्त को जारी हुए टेप को फर्जी करार दिया है और कहा है कि इस टेप के माध्यम से अफवाहें फैलाई जा रही हैं। सरकार ने इस मामले में केस दर्ज कर कार्रवाई की बात भी कही है।

भाजपा के विधायकों के विरोध के बाद सीएम बीरेन सिंह पर बढ़ा दबाव

भाजपा के सात विधायकों के इस विरोध के बाद पार्टी के भीतर ही सीएम बीरेन सिंह पर दबाव बढ़ गया है। इन विधायकों ने एक ऑडियो टेप जारी करते हुए आरोप लगाया है कि सीएम ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए हिंसा की छूट दी थी, और इस दौरान पुलिस से लूटे गए हथियारों का भी प्रयोग हुआ था। 

इसके साथ ही, विधायकों ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मणिपुर दौरे के दौरान भी सीएम बीरेन सिंह को इस मामले में फटकार मिली थी, और उन्हें जनता पर बमों के प्रयोग से बचने की सलाह दी गई थी। 

इस तरह की गंभीर आरोपों के बाद अब भाजपा के लिए भी स्थिति काफी पेचीदा हो गई है, और सीएम बीरेन सिंह पर कार्रवाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

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Thu, 22 Aug 2024 16:15:51 +0530 Newsdesk
Haryana:हरियाणा विधानसभा चुनाव लड़ेंगी विनेश फोगाट?  https://citytoday.co.in/Haryana:Will-Vinesh-Phogat-contest-Haryana-Assembly-elections https://citytoday.co.in/Haryana:Will-Vinesh-Phogat-contest-Haryana-Assembly-elections हरियाणा | पेरिस ओलंपिक में विनेश फोगाट की उम्मीदें तब धराशायी हो गईं जब वे अपनी वेट कैटेगरी से मात्र 100 ग्राम अधिक वजन के कारण बाहर हो गईं। लेकिन अब खेल जगत से हटकर एक नई चर्चा ने जोर पकड़ा है—हरियाणा की इस दिग्गज पहलवान के विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावनाएं। सूत्रों के अनुसार, विनेश राजनीति में कदम रख सकती हैं, और कुछ प्रमुख राजनीतिक दल उन्हें मनाने में जुटे हुए हैं।

पेरिस से लौटने पर जोरदार स्वागत
पेरिस से वापस आने के बाद सोनीपत के बलाली गांव में विनेश का भव्य स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर उनके परिवार, दोस्त, और सैकड़ों प्रशंसक मौजूद थे। उनकी बहन बबीता फोगाट और साथी पहलवान बजरंग पुनिया ने भी विनेश का स्वागत किया। इस मौके पर विनेश ने कहा, "लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, यह जारी रहेगी। मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि सच्चाई की जीत हो।

राजनीति में विनेश का कदम
 विनेश हरियाणा विधानसभा चुनाव में उतर सकती हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वे किस पार्टी में शामिल होंगी। अगर विनेश चुनाव लड़ती हैं, तो यह हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि हरियाणा विधानसभा में विनेश का मुकाबला उनकी बहन बबीता फोगाट से हो सकता है, और साथ ही बजरंग पुनिया का योगेश्वर दत्त से चुनावी टकराव हो सकता है।

विनेश का बयान और भविष्य की योजनाएं
विनेश फोगाट, जिन्होंने पहले राजनीति से दूरी बनाने की बात कही थी, अब अपने बयान पर पुनर्विचार कर सकती हैं। उन्होंने पेरिस ओलंपिक में पोडियम पर चूकने पर गहरा दुख व्यक्त किया और इसे भारत में महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई के साथ जोड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक मुद्दों से जुड़ी है।

अगर विनेश फोगाट हरियाणा विधानसभा चुनाव लड़ती हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि उनका राजनीतिक सफर कैसा रहता है। फिलहाल, हरियाणा की राजनीति में विनेश का प्रवेश एक संभावित बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है।

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Wed, 21 Aug 2024 18:29:02 +0530 Newsdesk
Bihar politics: बिहार की राजनीति में उबाल:नीतीश कुमार के करीबी मंत्री अशोक चौधरी का बड़ा दावा https://citytoday.co.in/Bihar-politics-in-turmoil:-Big-claim-of-Nitish-Kumars-close-minister-Ashok-Chaudhary https://citytoday.co.in/Bihar-politics-in-turmoil:-Big-claim-of-Nitish-Kumars-close-minister-Ashok-Chaudhary झारखंड| झारखंड की राजनीति में हाल ही में हो रहे बदलावों का असर बिहार में भी दिखने लगा है। बिहार के ग्रामीण कार्य मंत्री और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी, अशोक चौधरी ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि झारखंड की महागठबंधन सरकार में विधायकों के विद्रोह का असर बिहार में भी पड़ सकता है। चौधरी के अनुसार, बिहार में भी आरजेडी और कांग्रेस के कई विधायक एनडीए के संपर्क में हैं और जल्द ही वे महागठबंधन से अलग हो सकते हैं।


झारखंड में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम की बात करें तो पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन दिल्ली में बीजेपी नेताओं के संपर्क में हैं, जिससे जेएमएम (झारखंड मुक्ति मोर्चा) वेट एंड वाच की स्थिति में है। जेएमएम को सोरेन के अगले कदम का इंतजार है, जो झारखंड की महागठबंधन सरकार के भविष्य पर भारी असर डाल सकता है। 

बिहार के संदर्भ में, अशोक चौधरी ने कहा कि आरजेडी और कांग्रेस के कई विधायकों को बड़े-बड़े वादे किए गए थे, जो अब तक पूरे नहीं हुए हैं, जिससे उनकी नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में महागठबंधन सरकार की मुश्किलें बढ़ने से बिहार में भी आरजेडी और कांग्रेस के विधायक बेचैन हो रहे हैं और वे एनडीए के संपर्क में हैं। 

इस पर पलटवार करते हुए आरजेडी की प्रवक्ता एजया यादव ने चौधरी के दावे को खारिज करते हुए कहा कि जदयू नेता खुशफहमी में हैं और उनका दावा भी हवा में उड़ जाएगा। 

यह घटनाक्रम बिहार और झारखंड दोनों ही राज्यों की राजनीति में उथल-पुथल मचाने का संकेत दे रहा है, जिससे आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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Tue, 20 Aug 2024 18:49:46 +0530 Newsdesk
Rajya Sabha:जया बच्चन के 'अमिताभ' नाम पर राज्यसभा में हंसी के ठहाके, उप राष्ट्रपति धनखड़ भी हंस https://citytoday.co.in/Rajya-Sabha:Laughter-in-Rajya-Sabha-on-Jaya-Bachchans-name-Amitabh,-Vice-President-Dhankhar-also-laughed https://citytoday.co.in/Rajya-Sabha:Laughter-in-Rajya-Sabha-on-Jaya-Bachchans-name-Amitabh,-Vice-President-Dhankhar-also-laughed सीटीटुडे | समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार उनके ठहाकों की वजह से। हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें जया बच्चन राज्यसभा में ठहाके लगाते हुए नजर आ रही हैं। शुक्रवार को उन्होंने अपने पूरे नाम, "जया अमिताभ बच्चन" का उपयोग किया, जिस पर सदन में हंसी-ठिठोली हुई। उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी इस पर जोर-जोर से हंसते हुए दिखाई दिए।

इस घटना की शुरुआत लोकसभा में हुई थी जब उपसभापति हरिवंश ने जया बच्चन को बोलने के लिए आमंत्रित करते हुए उनका नाम "जया अमिताभ बच्चन" कहा था, जिससे जया बच्चन नाराज हो गईं थीं। उन्होंने उपसभापति से कहा था कि सिर्फ "जया बच्चन" कहना काफी था।

जया बच्चन की चुटकी: 'जयराम रमेश का नाम लिए बिना खाना नहीं पचता
इस बार जया बच्चन ने सभा में अपने नाम के साथ मजाक करते हुए पूछा कि क्या सर ने लंच किया|  उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जब तक उप राष्ट्रपति जयराम रमेश का नाम नहीं लेंगे, तब तक उन्हें खाना नहीं पचता। इस पर उप राष्ट्रपति ने जवाब दिया कि भले ही उन्होंने लंच सेशन में खाना नहीं खाया, लेकिन उन्होंने जयराम जी के साथ लंच किया।

इसके अलावा, जया बच्चन ने हाल ही में दिल्ली कोचिंग सेंटर हादसे पर भी चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि हादसे में मारे गए बच्चों और उनके परिवारों के बारे में किसी ने कुछ नहीं कहा।

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Sat, 03 Aug 2024 18:34:06 +0530 Newsdesk
राहुल गांधी ने बजट पर चर्चा में भाजपा को लेकर तीखे बयान दिए, लोकसभा में हंगामा https://citytoday.co.in/Rahul-Gandhi-gave-sharp-statements-about-BJP-in-the-discussion-on-budget,-ruckus-in-Lok-Sabha https://citytoday.co.in/Rahul-Gandhi-gave-sharp-statements-about-BJP-in-the-discussion-on-budget,-ruckus-in-Lok-Sabha राहुल गांधी ने हाल ही में लोकसभा में बजट पर चर्चा करते हुए भाजपा के खिलाफ तीखे टिप्पणियां की हैं। उन्होंने महाभारत के अभिमन्यु के चक्रव्यूह का उदाहरण देकर कहा कि भारतीय जनता को भाजपा ने एक चक्रव्यूह में फंसाया है। उन्होंने इस उदाहरण के माध्यम से बताया कि वही चीजें आज भारत में हो रही हैं जो अभिमन्यु के साथ हुआ था।

राहुल गांधी ने इसके अलावा बजट पर भी कड़ी आलोचना की, कहा कि सरकार का एकाधिकारवादी बजट उद्योगपतियों और राजनीतिक एजेंसियों को मजबूत करने के लिए है, जबकि देश में बढ़ते कर आतंकवाद को रोकने के लिए कुछ नहीं किया गया। उन्होंने शिक्षा सेक्टर को लेकर भी गंभीर आलोचना की, कहा कि शिक्षा पर सबसे कम बजट इस सरकार ने दिया है।

उन्होंने बजट में हुए 'पेपर लीक' मामले पर भी सरकार को घेरा, कहा कि वित्त मंत्री ने इस मामले पर कोई भी व्याख्या नहीं दी है। इसके साथ ही राहुल गांधी ने भाजपा को इंटरर्नशिप स्कीम से लेकर विभिन्न विवादित मुद्दों पर भी निशाना साधा।

सदन में उनके बयानों के बाद हंगामा भी हुआ, जिसमें दोनों पक्षों के सांसदों के बीच तीखी बहस हुई। राहुल गांधी की इन टिप्पणियों से संसद में राजनीतिक हलचल बढ़ गई और बजट की चर्चा नए आयाम में ले ली गई।

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Mon, 29 Jul 2024 18:54:37 +0530 Newsdesk
DELHI: दिल्ली में भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की पहली बैठक  https://citytoday.co.in/DELHI:-First-meeting-of-Chief-Ministers-of-BJP-ruled-states-in-Delhi https://citytoday.co.in/DELHI:-First-meeting-of-Chief-Ministers-of-BJP-ruled-states-in-Delhi सीटीटुडे |लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री की पहली बैठक शनिवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में होगी। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव विभिन्न योजनाओं में प्रदेश की उपलब्धि बताएंगे। इसके पहले नीति आयोग की बैठक में भी मुख्यमंत्री भाग लेंगे। 

आज दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की पहली बैठक होगी।जिसमें, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस बैठक में प्रदेश की विभिन्न योजनाओं की उपलब्धियों पर प्रकाश डालेंगे। इसके पहले वह नीति आयोग की बैठक में भी शामिल होंगे।मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि इस बैठक में आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास, नई शिक्षा नीति, स्वनिधि, किसान क्रेडिट कार्ड सहित विभिन्न योजनाओं पर चर्चा होगी। साथ ही हितग्राहियों से जुड़ी योजनाओं पर फीडबैक लिया जाएगा और बजट प्रावधानों पर भी बात होगी।

प्रदेश में पांच करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य :

 इंदौर में एक दिन में सर्वाधिक पौधे लगाने का रिकॉर्ड बनाया जा चुका है। इस बैठक में प्रदेश में पांच करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य और अन्य योजनाओं पर भी चर्चा होगी।आयुष्मान भारत योजना में  65 -70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को शामिल करने, प्रधानमंत्री आवास योजना के नए दिशानिर्देश, किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने, स्वनिधि योजना को आगे जारी रखने, एक पेड मां के नाम अभियान को लेकर चर्चा की जाएगी। प्रदेश में पांच करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इंदौर में एक दिन में सर्वाधिक पौधे लगाने का रिकार्ड बनाया जा चुका है।

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Sat, 27 Jul 2024 17:02:09 +0530 Newsdesk
Mamta Banerjee:ममता बनर्जी कि टिप्पणियां पूरी तरह से गलत।,उठने लगे सवाल https://citytoday.co.in/Mamta-Banerjee:Mamta-Banerjees-comments-are-completely-wrong,-questions-are-being-raised https://citytoday.co.in/Mamta-Banerjee:Mamta-Banerjees-comments-are-completely-wrong,-questions-are-being-raised सीटीटुडे ।  सीएम ममता बनर्जी ने बांग्लादेश में संकट में फंसे लोगों को शरण देने की पेशकश के कुछ ही घंटे बाद केंद्र सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि राज्य प्रशासन को इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। सूत्रों ने बताया कि ये मामले केंद्र सरकार के अधीन आते हैं। साथ ही सीएम ममता बनर्जी की टिप्पणी पूरी तरह से अनुचित है।

 भारत के पड़ोसी दोस्त बांग्‍लादेश आरक्षण विरोधी हिंसा की आग में जल रहा है। इसकी आंच पश्चिम बंगाल में भी महसूस होने लगी है। बांग्‍लादेश की सीमा से लगे पश्चिम बंगाल में इसकी सियासी गर्मी पहुंचने लगी है। एक रैली में बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के दिए बयान ने सियासत गर्मा दी है। दरअसल, ममता बनर्जी ने कहा कि पड़ोसी देश में जारी हिंसा के पीड़ितों के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं और वह उन्‍हें पश्चिम बंगाल में शरण देने के लिए तैयार है। उनके बयान के बाद सियासी भूचाल आ गया है। अब सवाल यह है कि क्‍या राज्‍यों को दूसरे देश से आने वाले शरणार्थियों को शरण देने का अधिकार है?


ममता ने बांग्लादेश में संकट में फंसे लोगों को शरण देने की पेशकश के कुछ ही घंटे बाद केंद्र सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि राज्य प्रशासन को इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। सूत्रों ने बताया कि ये मामले केंद्र सरकार के अधीन आते हैं। साथ ही सीएम ममता बनर्जी की टिप्पणी पूरी तरह से अनुचित है।

बता दें कोलकाता में एक रैली में अपने संबोधन में सीएम ममता बनर्जी ने हिंसा प्रभावित बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि वह पड़ोसी देश से संकट में फंसे लोगों के लिए पश्चिम बंगाल के दरवाजे खुले रखेंगी और उन्हें शरण देंगी। अब केंद्र सरकार के एक सूत्र ने कहा कि ये ऐसे मामले हैं जिन्हें केंद्र सरकार देखती है। केंद्र से जुड़े सूत्र ने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार का कोई अधिकार नहीं है और इसलिए उनकी टिप्पणियां पूरी तरह से गलत हैं। ममता ने अपनी बात के समर्थन में शरणार्थियों पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लेख किया था। पिछले कुछ दिनों में बांग्लादेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति खराब है और इस कारण वहां मानवीय संकट की आशंका है। सीएम ममता ने कहा कि मुझे बांग्लादेश के मामलों पर नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि वह एक संप्रभु राष्ट्र है और इस मुद्दे पर जो कुछ भी कहा जाना चाहिए वह केंद्र का विषय है।

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Mon, 22 Jul 2024 19:34:34 +0530 Newsdesk
MP Politics: कांग्रेस प्रवक्ता ने एक्स हैंडल पर लिखा& 'पार्टी गई तेल लेने' https://citytoday.co.in/MP-Politics:-Congress-spokesperson-wrote-on-X-handle---Party-went-to-get-oil https://citytoday.co.in/MP-Politics:-Congress-spokesperson-wrote-on-X-handle---Party-went-to-get-oil MP : मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें खत्म होती नहीं दिख रही हैं। अब कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. अमीनूल सूरी ने चुनाव के दौरान वायरल हुए पटवारी के एक डायलॉग 'पार्टी गई तेल लेने' को लेकर उन पर निशाना साधा है। सूरी ने अपने एक्स हैंडल पर एक खुला पत्र साझा करते हुए यह बात लिखी है।

इंदौर के कांग्रेस कार्यालय गांधी भवन में भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के स्वागत पर कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. अमीनूल सूरी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने पार्टी के फोरम पर बात रखने के बजाय खुला पत्र जारी किया और इसे एक्स हैंडल पर पोस्ट किया। सूरी ने पत्र में लिखा, 'पार्टी गई तेल लेने'।

कुछ वर्षों पहले राऊ से चुनाव लड़ रहे जीतू पटवारी का एक वीडियो काफी चर्चा में था, जिसमें उन्होंने मतदाता से वोट की अपील करते हुए कहा था, 'पार्टी गई तेल लेने, आप तो मुझे देखकर वोट दो'। इसी डायलॉग को सूरी ने अपने पत्र में तंज की तरह उपयोग किया है। उन्होंने लिखा कि इंदौर में कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ताओं का सिर शर्म से झुक गया है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा नेता विजयवर्गीय का स्वागत करके यह सिद्ध हो गया कि पार्टी गई तेल लेने। उन्होंने लिखा, 'यह वह व्यक्ति हैं जिन्होंने गंदी राजनीति खेलते हुए कांग्रेस प्रत्याशी का फार्म उठवाया, लेकिन कांग्रेस कार्यालय में मौजूद किसी कांग्रेसी की हिम्मत नहीं हुई कि उनसे सवाल करे।'

दो दिन में दूसरा विरोध
कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को अपने ही क्षेत्र इंदौर में दो दिनों में विरोध का दूसरा झटका सहना पड़ा है। सोमवार को उद्योग व्यापार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अजय चौरड़िया ने पटवारी के खिलाफ पत्रकार वार्ता की थी और अब प्रवक्ता सूरी ने विजयवर्गीय का स्वागत करवाने पर सार्वजनिक आलोचना की है।

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Thu, 18 Jul 2024 21:37:02 +0530 Newsdesk
अमित शाह : 'हरियाणा में पिछड़े वर्गों का आरक्षण छीनकर मुस्लिमों को नहीं देने दूंगा', बोले गृह मंत्री https://citytoday.co.in/Amit-Shah:-I-will-not-allow-reservation-to-be-taken-away-from-backward-classes-in-Haryana-and-given-to-Muslims,-said-Home-Minister https://citytoday.co.in/Amit-Shah:-I-will-not-allow-reservation-to-be-taken-away-from-backward-classes-in-Haryana-and-given-to-Muslims,-said-Home-Minister

महेंद्रगढ़, हरियाणा: हरियाणा के महेंद्रगढ़ में एक समाज सम्मेलन के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने आज आरक्षण के मुद्दे पर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक में पिछड़े वर्ग का आरक्षण छीनकर मुसलमानों को देने का काम किया है। वे यकीन दिलाया कि अगर कांग्रेस हरियाणा में शक्तिशाली हुई, तो यहां भी पिछड़े वर्गों का आरक्षण हटा देगी और मुस्लिमों को इसे दे देगी।

उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम हरियाणा में किसी भी हालत में मुस्लिम रिजर्वेशन लागू नहीं होने देंगे।"

अमित शाह ने अपने बयान में आरक्षण के मुद्दे पर जनसभा में उपस्थित लोगों को यह समझाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा से पिछड़े वर्गों के हित में काम किया है और वह इस कार्य में भी निरंतर प्रयासरत रहेगी।

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Tue, 16 Jul 2024 20:22:58 +0530 Newsdesk
President Trump:पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप पर हमला: 20 वर्षीय युवक ने किया हमला https://citytoday.co.in/President-Trump:Attack-on-former-President-Trump:-20-year-old-youth-attacked https://citytoday.co.in/President-Trump:Attack-on-former-President-Trump:-20-year-old-youth-attacked सीटीटुडे । बटलर में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रैली के दौरान गोलीबारी की घटना हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए। एक गोली ट्रंप के दाहिने कान के ऊपरी हिस्से को चीरकर निकल गई।

ट्रंप पर हमला करने वाले की हुई पहचान

हमलावर की पहचान बेथेल पार्क, पेंसिल्वेनिया के रहने वाले थॉमस मैथ्यू क्रुक्स के रूप में हुई है, जो एक 20 वर्षीय युवक था। बेथेल पार्क बटलर से लगभग 40 मील दक्षिण में स्थित है। घटनास्थल से एक एआर-15 सेमी-ऑटोमेटिक राइफल बरामद हुई है। संभवत: इसी हथियार से युवक ने डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रैली को निशाना बनाकर फायरिंग की थी। यूएस सीक्रेट सर्विस की जवाबी कार्रवाई में हमलावर के सिर में गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात

अमेरिकी जांच एजेंसियां इस हमले को डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के प्रयास के रूप में देख रही हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात यूएस सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स ने हमलावर को मौके पर ही मार गिराया। ट्रंप जिस मंच से भाषण दे रहे थे, बंदूकधारी वहां से करीब 120 मीटर दूर एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की छत पर खड़ा था। उसने वहीं से ट्रंप पर निशाना साधकर गोलीबारी की। डोनाल्ड ट्रंप का ओपन-एयर कैंपेन बटलर फार्म शो ग्राउंड में आयोजित किया गया था। यह इतना ओपन स्पेस था कि स्नाइपर को निशाना साधने में कोई परेशानी नहीं हुई। वह अपने स्थान से पूर्व राष्ट्रपति को बिना किसी बाधा के देख पाने में सक्षम था। डोनाल्ड ट्रंप जहां खड़े होकर स्पीच दे रहे थे ठीक उसके पीछे एक और स्ट्रक्चर (किसी कंपनी के गोदाम की तरह का) था, जिस पर यूएस सीक्रेट सर्विस की काउंटर-स्नाइपर टीम तैनात थी। हमलावर के गोली चलाते ही काउंटर-स्नाइपर टीम एक्टिव हो गई और करीब 200 मीटर दूर से जवाबी कार्रवाई करते हुए, उसे मार गिराया। जिस इमारत में हमलावर का शव बरामद हुआ, वह एजीआर इंटरनेशनल कंपनी की है। यह कंपनी ग्लास और प्लास्टिक पैकेजिंग इंडस्ट्री के लिए स्वचालित उपकरणों की आपूर्ति करती है।

डोनाल्ड ट्रंप पर हमला होते ही सीक्रेट सर्विस के जवानों ने फुर्ती दिखाते हुए उनकी ओर दौड़ लगायी और उन्हें चारों ओर से कवर कर लिया। फिर ट्रंप उठे और अपने समर्थकों की तरफ हाथ लहराते हुए दिखाई दिए। घेराबंदी में ही पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति को उनकी गाड़ी तक पहुंचाया गया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। कान पर लगी चोट का प्राथमिक उपचार करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बंदूकधारी ने जिस इमारत से गोलीबारी की थी वह बटलर फार्म शो ग्राउंड से सटी हुई है और दोनों के बीच केवल कंटीले तार की बाड़ लगी हुई है। गोलीबारी इमारत के ऊपर से हुई, जो रैली से आए दर्शकों से भरे स्टैंड के पीछे और बाईं ओर स्थित थी। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक हमलावर ने करीब ताबड़तोड़ 10 राउंड फायर किए, जिसमें से एक गोली डोनाल्ड ट्रंप के दाहिने कान को घायल करती हुई निकली। यूएस सीक्रेट सर्विस के जवान जब ट्रंप को घटनास्थल से दूर ले जा रहे थे, तो उनके कान के पास से खून निकल रहा था। चेहरे पर भी खून लगा था।

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Sun, 14 Jul 2024 20:13:30 +0530 Newsdesk
India alliance:एनडीए को उपचुनाव में झटका, इंडिया गठबंधन हुआ मजबू https://citytoday.co.in/India-alliance:NDA-gets-blow-in-by-elections,-India-alliance-strengthened https://citytoday.co.in/India-alliance:NDA-gets-blow-in-by-elections,-India-alliance-strengthened सिटी टुडे । भले ही केंद्र में एनडीए ने तीसरी बार सरकार बना ली हो, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू अब देशवासियों के सिर चढ़कर नहीं बोल रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण 07 राज्यों की 13 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणाम हैं, जहां 13 सीटों में से करीब 10 पर इंडिया गठबंधन ने जीत हासिल कर ली है।

राज्यों का हाल:

मध्य प्रदेश: अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी कमलेश शाह ने 3252 मतों से जीत हासिल की। कांग्रेस ने इस जीत पर शंका जाहिर करते हुए दोबारा मतगणना की मांग की है।

पंजाब: जालंधर पश्चिम सीट पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार मोहिंदर भगत ने भाजपा उम्मीदवार शीतल अंगुराल को 37,325 वोटों से हराया।
हिमाचल प्रदेश: तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने दो सीटों (नालागढ़ और देहरा) पर जीत हासिल की, जबकि हमीरपुर सीट पर भाजपा को जीत मिली।

उत्तराखंड: मंगलौर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा प्रत्याशी को 449 मतों से पराजित किया। बद्रीनाथ विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी लखपत सिंह भटोला ने 5224 मतों से जीत हासिल की।

बिहार: रुपौली सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी शंकर सिंह ने जीत दर्ज की। भाजपा के कलाधर मंडल दूसरे स्थान पर रहे, जबकि आरजेडी की बीमा भारती तीसरे स्थान पर आ गईं।

पश्चिम बंगाल: चार सीटों पर टीएमसी ने जीत हासिल की।

निष्कर्ष : 

इन उपचुनाव परिणामों से विपक्ष को आत्मविश्वास मिला है, जबकि मोदी सरकार के लिए खतरे की घंटी बजती नजर आ रही है। विपक्षी दलों ने इसे अपनी मजबूत स्थिति के संकेत के रूप में देखा है, जो आगामी चुनावों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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Sat, 13 Jul 2024 20:55:14 +0530 Newsdesk
राजनीति :जातिवाद पर नितिन गडकरी का तीखा प्रहार: "जात&पात की राजनीति को नहीं मानता https://citytoday.co.in/Nitin-Gadkaris-sharp-attack-on-casteism:-Does-not-believe-in-caste-based-politics https://citytoday.co.in/Nitin-Gadkaris-sharp-attack-on-casteism:-Does-not-believe-in-caste-based-politics
सिटीटुडे :केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक बयान में जातिवाद की राजनीति करने वाले नेताओं पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में वर्तमान में जातिवाद की राजनीति हो रही है और उन्होंने इसे नकारात्मक रूप से देखा। गडकरी ने यह भी बताया कि वह किसी भी तरह के जात-पात को नहीं मानते हैं और जो भी इसके बारे में बात करेगा, उसे वे कड़ी प्रतिक्रिया देंगे।

गडकरी ने अपने संसदीय क्षेत्र में मौजूद 40 फीसदी मुस्लिम वोटरों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें पहले ही साफ कर दिया था कि वे आरएसएस से जुड़े हुए हैं। उन्होंने वोटरों को यह भी कहा कि वोट देने से पहले सोच लें ताकि बाद में पछताना न पड़े। गडकरी ने भरोसा दिलाया कि वे सभी का काम करेंगे, चाहे उन्होंने वोट दिया हो या नहीं।

उन्होंने यह भी कहा कि कोई व्यक्ति जाति के आधार पर बड़ा नहीं होता है और गरीबी, भूखमरी और रोजगार जैसी समस्याएं सभी के लिए समान हैं। गडकरी ने उदाहरण देते हुए कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें, जैसे सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल, सभी जातियों और धर्मों के लिए समान हैं।

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Fri, 12 Jul 2024 21:31:12 +0530 Newsdesk
DELHI:केजरीवाल को ईडी मामले में मिली अंतरिम जमानत, लेकिन जेल से रिहाई अभी दूर https://citytoday.co.in/Kejriwal-gets-interim-bail-in-ED-case,-but-release-from-jail-still-far-away https://citytoday.co.in/Kejriwal-gets-interim-bail-in-ED-case,-but-release-from-jail-still-far-away  सीटीटुडे: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की स्थिति इन दिनों ठीक नहीं चल रही है। लंबे समय के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली है, लेकिन उनकी जेल से रिहाई में एक बड़ा अड़चन आ गई है। इसके कारण उनकी जेल से रिहाई संभव नहीं हो पाएगी। वजह यह है कि दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी है, जबकि सीबीआई मामले में वह अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। जेल से बाहर आने के लिए उन्हें सीबीआई मामले में भी जमानत लेनी होगी।

मुख्यमंत्री अरविंद को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। एक निचली अदालत ने उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर 20 जून को जमानत दी थी। हालांकि, ईडी ने अगले दिन दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और दलील दी कि केजरीवाल को जमानत देने का निचली अदालत का आदेश एकतरफा और गलत था। अरविंद केजरीवाल को कथित आबकारी नीति घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में 26 जून को सीबीआई ने भी गिरफ्तार किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने तय किए तीन सवाल

दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल ने ईडी की गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। अरविंद केजरीवाल की याचिका पर फैसले के समय उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी और ईडी के वकील एसजी तुषार मेहता अदालत में मौजूद थे। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तीन सवाल तय किए, हालांकि मामले को बड़ी बेंच के समक्ष भेज दिया।

जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह फैसला सुनाया। पीठ ने 17 मई को अरविंद केजरीवाल की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। पीठ में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर ईडी से जवाब मांगा था। आम आदमी पार्टी के संयोजक ने दिल्ली हाईकोर्ट के 9 अप्रैल के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी को बरकरार रखते हुए कहा था कि इसमें कोई अवैधता नहीं है और जांच में उनके शामिल होने से बार-बार इनकार करने के बाद ईडी के पास कोई विकल्प नहीं बचा था।

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Fri, 12 Jul 2024 16:19:02 +0530 Newsdesk
क्या आप Chirag Paswan को देंगे समर्थन? इस सवाल पर पशुपति पारस ने तोड़ी चुप्पी; बोले& अगर हमारा... https://citytoday.co.in/Will-you-support-Chirag-Paswan-Pashupati-Paras-broke-his-silence-on-this-question-Said--If-ours... https://citytoday.co.in/Will-you-support-Chirag-Paswan-Pashupati-Paras-broke-his-silence-on-this-question-Said--If-ours...

 बिहार की सियासत में एक तरफ बीमा भारती और पप्पू यादव की चर्चा है तो दूसरी तरफ पशुपति पारस और चिराग भी सुर्खियों में बने हुए हैं। सारी टेंशन खत्म होने के बाद पारस एनडीए में तो आ गए, लेकिन क्या वो हाजीपुर में चिराग का समर्थन करेंगे? ये सवाल अभी भी सबके मन में है।
बुधवार को चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने इस सवाल पर भी विराम लगा दिया। पशुपति पारस ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वो 40 की 40 सीटों पर एनडीए का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि फिर चाहे लोजपा की सीट हो या चिराग पासवान की, वो उनका समर्थन करेंगे।

'अगर हमारा किसी से विरोध है तो...'
पशुपति पारस ने कहा कि वो एनडीए के सभी दलों का समर्थन करेंगे। सीट किसी की भी हो हम सपोर्ट करेंगे। हम नीति के साथ चलने वाले लोग हैं। अगर हमारा किसी से विरोध है तो उसे हम सार्वजनिक नहीं करते हैं। हमारा लक्ष्य है देश में तीसरी बार मोदी जी की सरकार बने।

जेपी नड्डा से मिले थे पशुपति पारस
इससे पहले, मंगलवार को पशुपति पारस ने अपने भतीजे प्रिंस राज के साथ दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। नड्डा ने भी मुलाकात की तस्वीर एक्स पर शेयर की।

जेपी नड्डा ने लिखा- आने वाले चुनाव में भी हमारा गठबंधन मजबूती से बना रहेगा और पशुपति जी की पार्टी बिहार में एनडीए के सभी 40 उम्मीदवारों का पूर्ण समर्थन करेगी। साथ ही उनकी जीत सुनिश्चित करने में हरसंभव सहयोग देगी।

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Wed, 03 Apr 2024 20:35:36 +0530 Newsdesk
' तेरे टुकड़े&टुकड़े ना कर दिए तो...; कन्नौज में अखिलेश यादव के सामने सपा नेता ने दी बीजेपी सांसद सुब्रत पाठक को धमकी, FIR दर्ज https://citytoday.co.in/If-I-dont-cut-you-into-pieces...-SP-leader-threatens-BJP-MP-Subrata-Pathak-in-front-of-Akhilesh-Yadav-in-Kannauj-FIR-registered https://citytoday.co.in/If-I-dont-cut-you-into-pieces...-SP-leader-threatens-BJP-MP-Subrata-Pathak-in-front-of-Akhilesh-Yadav-in-Kannauj-FIR-registered अखिलेश यादव के सामने मंच से एक सपा नेता ने कन्नौज के बीजेपी सांसद सुब्रत पाठक पर विवादित टिप्पणी कर डाली. पा नेता ने कहा कि तेरे टुकड़े-टुकड़े ना कर दिए तो मेरा नाम मनोज दीक्षित  नहीं. इस मामले ने तूल पकड़ा तो सपा के स्थानीय नेता मनोज दीक्षित उर्फ ननकू के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया.   

लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर सपा मुखिया अखिलेश यादव कन्नौज पहुंचे. यहां उन्होंने एक जनसभा को संबोधित किया. लेकिन इस दौरान मंच से एक सपा नेता ने कन्नौज के बीजेपी सांसद सुब्रत पाठक पर विवादित टिप्पणी कर डाली. सपा नेता ने कहा कि तेरे टुकड़े-टुकड़े ना कर दिए तो मेरा नाम मनोज दीक्षित नहीं. इस मामले ने तूल पकड़ा तो सपा के स्थानीय नेता मनोज दीक्षित उर्फ ननकू के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया.   

बता दें कि घटना 2 अप्रैल की है जब अखिलेश यादव कन्नौज पहुंचे थे. उन्हें मंच से सपा कार्यकर्ताओं/समर्थकों को संबोधित करना था. इससे पहले स्थानीय नेता भाषण दे रहे थे. इनमें सपा के मनोज दीक्षित उर्फ ननकू भी थे. लेकिन अखिलेश यादव के सामने भाषण देते-देते उनकी जुबान बेलगाम हो गई और उन्होंने बीजेपी सांसद सुब्रत पाठक पर विवादास्पद बयान दे डाला.

मनोज दीक्षित ने कन्नौज से बीजेपी सांसद/प्रत्याशी सुब्रत पाठक के लिए अपशब्द कहे और उनके टुकड़े-टुकड़े करने की धमकी दे डाली. सपा नेता ने मंच से बोलते हुए कहा कि "ब्राह्मण समाज का डर यह है कि अगर खुल के वोट दे दिया तो हो सकता है कि उसपर मुकदमा दर्ज हो जाए. मैं अपने ब्राह्मण समाज से कहना चाहता हूं आप अकेले नहीं है आपके साथ यह मनोज दीक्षित है. घर से निकलो और दारूबाज सांसद से बदला लेकर रहो. वो शाम को 7 के बाद सब भूल जाते हैं. मैं अपनी मां की कसम खाता हूं कि तेरे टुकड़े-टुकड़े ना करवा दिए तो मनोज दीक्षित नाम नहीं मेरा. वोटों के टुकड़े ना कर दिए तो कहना... तुम्हारी जमानत नहीं बचेगी."

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Wed, 03 Apr 2024 20:23:45 +0530 Newsdesk
बॉक्सर विजेंदर सिंह थोड़ी देर में बीजेपी की सदस्यता करेंगे ग्रहण, कहां से मिलेगा टिकट? https://citytoday.co.in/Boxer-Vijender-Singh-will-join-BJP-soon-where-will-he-get-the-ticket https://citytoday.co.in/Boxer-Vijender-Singh-will-join-BJP-soon-where-will-he-get-the-ticket

आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कई बड़ी हस्तियों का राजनीतिक पार्टी ज्वॉइन करने का सिलसिला अभी भी जारी है। इस बीच, बॉक्सर विजेंदर सिंह आज बुधवार को बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं। विजेंदर सिंह आज दोपहर 3:00 बजे दिल्ली भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। 

रमेश बिधूड़ी से हार गए थे

विजेंदर सिंह के बीजेपी में शामिल होने से कांग्रेस को एक और झटका लग सकता है। चर्चा थी कि विजेंदर सिंह कांग्रेस के टिकट पर मथुरा से चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर की तरफ से इसे लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। विजेंदर सिंह वर्ष 2019 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर दक्षिण दिल्ली से लड़ चुके हैं। वो बीजेपी के रमेश बिधूड़ी से 6 लाख वोटों से हार गए थे।
दिसंबर 2023 में उन्होंने सोशल मीडिया पर राजनीति को राम-राम करने का ऐलान किया। इसके बाद कयास लगाए गए कि विजेंद्र राजनीति से दूरी बना चुके हैं। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। अब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के मन बना लिया है। विजेंदर सिंह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी शामिल में हो रहे है। ऐसे में देखना होगा कि उन्हें पार्टी कहां से चुनाव मैदान में उतारती है।  

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Wed, 03 Apr 2024 18:47:50 +0530 Newsdesk
Lok Sabha Election 2024 : खरगे ने अपनी पारंपरिक सीट से दामाद को मैदान में उतारा https://citytoday.co.in/Kharge-fields-son-in-law-from-his-traditional-seat https://citytoday.co.in/Kharge-fields-son-in-law-from-his-traditional-seat Lok Sabha Election 2024: बीते गुरुवार को कांग्रेस उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी कर दी गई थी। जिसमें खरगे का नाम नहीं था। जिसको लेकर चर्चा तेज हो गई थी। लेकिन सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष के मल्लिकार्जुन खरगे इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते है। इसी कारण खरगे ने अपनी पारंपरिक सीट गुलबर्गा से दामाद राधाकृष्ण डोड्डामणि को मैदान में उतारा है। 

प्रियांक खरगे भी नहीं लड़ना चाहते चुनाव

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे को लोकसभा चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं थी। वर्तमान में गुलबर्गा में चित्तपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। और कर्नाटक सरकार में मंत्री पद पर हैं। इसलिए कांग्रेस ने खरगे के दामाद को टिकट देकर मैदान में उतारा है। वे कर्नाटक की पारंपरिक सीट गुलबर्गा से 2009 और 2014 में चुनाव जीत चुके हैं। लेकिन 2019 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

राज्यसभा का कार्यकाल खत्म न होना है कारण

खरगे को टिकट न देने पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कहा कि खरगे के पास पार्टी का बहुत काम हैं। क्योंकि उनके पास कई जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी मामलों के प्रबंधन के अलावा उन्हें इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों के साथ समन्वय करना होगा। साथ ही राज्यसभा में उनका कार्यकाल अभी खत्म नहीं हुआ है।

चुनाव लड़ने को दामाद भी इच्छुक नहीं थे 

आपको बता दें कि मल्लिकार्जुन खरगे के दामाद डोड्डामणि एक व्यवसायी होने के साथ -साथ शैक्षणिक संस्थानों का प्रबंधन भी करते हैं। सूत्रों की मानें तो वह भी चुनाव लड़ने का तैयार नहीं है। लेकिन ससुर और कांग्रेस के समझाने पर उन्होंने बात मान ली। उन्होंने अपने ससुर खरगे के चुनावी अभियानों के प्रबंधन और रणनीति बनाने में हमेशा पर्दे के पीछे से ही काम को अंजाम दिया है।

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Fri, 22 Mar 2024 16:36:56 +0530 Newsdesk
Lok Sabha Election 2024: इलेक्शन कमीशन केंद्र सरकार पर हुआ सख्त, 'विकसित भारत' व्हाट्सएप मैसेज पर लगाई रोक https://citytoday.co.in/Election-Commission-becomes-strict-on-Central-Government-bans-Developed-India-WhatsApp-messages https://citytoday.co.in/Election-Commission-becomes-strict-on-Central-Government-bans-Developed-India-WhatsApp-messages Lok Sabha Election 2024: हाल ही में चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार पर सख्ती दिखाते हुए विकसित भारत के संदेशो पर रोक लगाई है । साथ ही कहा है। यह चुनाव का समय है। और इस समय आचार संहिता भी लागू हो गई है। चुनाव आयोग ने तुरंत इस मामलें पर MeitY से रिपोर्ट मांगी गई है। कयास लगाए जा रहे है। कि कुछ समय से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय व्हाट्सएप पर 'विकासशील भारत' संदेशों की डिलीवरी कर रहा था। जिसकी सूचना मिलते ही चुनाव आयोग ने मामले पर अनुपालन रिपोर्ट की MeitY से मांग की।

यहीं नहीं आपको बता दें कि EC ने अनुसार आयोग को कई शिकायतें मिली थीं। कि आम चुनाव की घोषणा के बाद और आदर्श आचार संहिता के लागू होने के बावजूद नागरिकों के फोन पर ऐसे संदेश अभी भी भेजे जा रहे हैं। जिसके जवाब में MeitY ने चुनाव आयोग को सूचित किया और बताया कि ये मैसेज आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले भेजे गए थे। उनमें से कुछ सिस्टेमैटिक और नेटवर्क के कारण देरी से प्राप्तकर्ताओं तक पहुंचे हैं। 

माना जा रहा है। कि सरकार के आईटी मंत्रालय द्वारा 'विकसित भारत संपर्क' नाम से लोगों के वाट्सऐप पर मैसेज भेजे जा रहे थे। जिसमें पीएम मोदी का गारंटी नाम से एक वीडियो भेजा जा रहा था। जिसको लेकर चुनाव आयोग के पास कई सारी शिकायतें की गई थीं। मैसेज में यह लिखा गया,"नमस्ते, यह संदेश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भारत सरकार के विकसित भारत संपर्क केंद्र द्वारा भेजा गया है।"

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Thu, 21 Mar 2024 15:01:27 +0530 Newsdesk
Pasupati Paras Resigns: पशुपति पारस ने मोदी कैबिनेट से दे दिया इस्तीफा, थामेंगे महागठबंधन का हाथ https://citytoday.co.in/Pashupati-Paras-resigns-from-Modi-cabinet-will-join-hands-of-Grand-Alliance https://citytoday.co.in/Pashupati-Paras-resigns-from-Modi-cabinet-will-join-hands-of-Grand-Alliance नई दिल्ली। Pasupati Paras Resigns: एनडीए के गठबंधन में आरएलजेपी को एक भी सीट नहीं मिलने से पार्टी प्रमुख पशुपति पारस भड़क गए। उन्होंने सीट बंटवारे के दूसरे ही दिन तेस में आकर केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने की घोषणा की है। पारस की एनडीए में सीटों को लेकर क्यों बात नहीं बनी इसको लेकर उन्होंने कोई बयान नहीं दिया। महज 2 मिनट से भी कम समय में उन्होंने अपनी बात कही और पत्रकारों के सवाल का जवाब दिए बगैर ही निकल गए। 

इस्तीफा के बाद पशुपति पारस ने कहा...

मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पशुपति पारस ने कहा, "कल एनडीए गठबंधन ने बिहार लोकसभा के लिए 40 सीटों में से किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी। इसका ऐलान हुआ। मैंने आज से पांच-छह दिन पहले कहा था कि हम तब तक इंतजार करेंगे, जब तक एनडीए का विधिवत घोषणा नहीं होती है। लेकिन कल विधिवत एनडीए की तरफ से सीटों की घोषणा हो गई।

NDA की लगन से सेवा की: पशुपति पारस

उन्होंने आगे कहा..हमारी पार्टी के पांच सांसद हैं,और मैंने बहुत लगन, वफादारी और ईमानदारी से एनडीए की सेवा की। आज भी मैं माननीय प्रधानमंत्री जी का शुक्रगुजार हूं. हमारी पार्टी और व्यक्तिगत रूप से हमारे साथ नाइंसाफी हुई है।. इसलिए मैं भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा देता हूं" पशुपति पारस इतना कहकर चले गए।

बिहार में सीटें नहीं मिलने के कारण दिया इस्तीफा    

बिहार में सीट बंटवारे के बाद एनडीए ने बीजेपी को 17 सीटें, जेडीयू को 16 सीटें और चिराग पासवान की एलजेपी को 5 सीटें दीं। हालांकि पशुपति पारस की आरएलजेपी को कोई सीट नहीं मिली। जिससे उन्हें नाराजगी हुई। उन्होंने हाजीपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान किया था।हालांकि सीट बंटवारे में पशुपति पारस की आरएलजेपी को एक भी सीट नहीं दी गई। इस बात से वह काफी नाराज चल रहे थे। 

पारस खटखटा रहे महागठबंधन का दरवाजा

इससे पहले राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल ने कहा कि हमारी पीठ में छूरा घोंपा गया है। हमारे साथ अन्याय हुआ है। आरजेडी से संपर्क में होने के सवाल पर पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि हमलोग राजनीति में भजन कीर्तन करने नहीं आए हैं। सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर है। कि हाजीपुर से पशुपति कुमार पारस चुनाव लड़ेंगे। पशुपति कुमार पारस इस सीट से अपने भतीजे चिराग पासवान के खिलाफ लड़ेंगे। चुनाव से ठीक पहले महागठबंधन का दरवाजा खटखटा रहे पारस ने महागठबंधन में समस्तीपुर और नवादा सीटें भी मांगी हैं लेकिन उनकी महागठबंधन में एंट्री आसान नहीं दिख रही हैं।

 दलित सम्मान का मुद्दा उठाने की तैयारी में है पारस

सूत्रों के मुताबिक आरजेडी से उनकी बातचीत जारी है। पशुपति पारस दलित सम्मान का मुद्दा उठाने की तैयारी में हैं। एनडीए में अपने साथ हुए अन्याय को लेकर जनता के बीच जाने की पारस की तैयारी है। मालूम हो कि सोमवार की शाम बिहार की सीटों को लेकर एनडीए में बंटवारा हो गया है। पशुपति पारस जिनकी पार्टी में फिलहाल 5 सांसद है। इन्हें बिहार में एक भी सीटें नहीं मिली हैं। पारस के खाते की सभी सीटें उनके भतीजे चिराग पासवान को दे दी गई हैं। पशुपति कुमार पारस केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री भी हैं।

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Tue, 19 Mar 2024 14:42:18 +0530 Newsdesk
Delhi Jal Board Case: शराब घोटाले के बाद जल बोर्ड मामले में फंसे केजरीवाल, ED के सामने नहीं होंगे पेश https://citytoday.co.in/Kejriwal-trapped-in-Jal-Board-case-after-liquor-scam,-will-not-appear-before-ED https://citytoday.co.in/Kejriwal-trapped-in-Jal-Board-case-after-liquor-scam,-will-not-appear-before-ED नई दिल्ली।Delhi Jal Board Case:  ईडी दिल्ली जल बोर्ड में अवैध टेंडरिंग और अपराध की आय के शोधन की जांच कर रही है। जिसके लिए सीएम केजरीवाल से पूछताछ के लिए उन्हें ईडी के समक्ष पेश होना था। लेकिन केजरीवाल ने इसे इनकार कर दिया। उसके बावजूद उन्हें फिर से प्रवर्तन निदेशालय से समन भेजा गया है। शराब घोटाला केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस के बाद ईडी ने जल बोर्ड से जुड़े एक मामले में भी केजरीवाल को समन भेजा था। जिसके मुताबिक सोमवार 18 मार्च यानि के आज उन्हें ईडी के सामने पेश होना है।

धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 50 के तहत भेजा गया समन

प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली जल बोर्ड मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 50 के तहत केजरीवाल को समन जारी किया था। जिसके तहत ईडी दिल्ली जल बोर्ड में अवैध टेंडरिंग और अपराध की कथित आय के शोधन की जांच कर रही है। जिसको लेकर सीएम केजरीवाल से पूछताछ की जानी थी। जिसके लिए उन्हें ईडी के समक्ष पेश होना था। लेकिन केजरीवाल ने जाने से साफ इनकार कर दिया।

ईडी बीजेपी के इशारों पर काम कर रही : AAP

ईडी के समन को लेकर आम आदमी पार्टी का कहना है। कि जब केजरीवालस को कोर्ट से जमानत मिली हुई है तो ऐसे में ईडी बार बार उन्हें समन क्यों भेज रही है। AAP पार्टी का कहना है, कि ईडी का समन पूरी तरह से गैर कानूनी हैं। उसका मकसद केजरीवाल को हर हाल में गिरफ्तार करना है। क्योंकि ईडी बीजेपी के इशारों पर काम कर रही है।

ईडी मोदी जी के गुंडे हो गए: आतिशी

ईडी के समन मिलने को लेकर दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि सीबीआई और ईडी मोदी जी के गुंडे हो गए हैं। और ये गुंडे विपक्ष के नेताओं को टारगेट कर रहे हैं। आतिशी ने कहा कि सीबीआई और ईडी मोदी जी के गुंडे हो गए हैं। मोदी जी के इन गुंडों ने एक-एक करके विपक्ष के नेताओं को टारगेट कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि बीजेपी ईडी के पीछे छिपकर क्यों चुनाव लड़ना चाहती है। वो चुनाव से पहले दिल्ली के सीएम को गिरफ्तार करवाना चाहती है।

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Mon, 18 Mar 2024 16:43:22 +0530 Newsdesk
Lok Sabha Election: देश की कई सीटें पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर https://citytoday.co.in/Close-contest-between-BJP-and-Congress-on-many-seats-in-the-country https://citytoday.co.in/Close-contest-between-BJP-and-Congress-on-many-seats-in-the-country नई दिल्ली।Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव में इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। जहां एक ओर भाजपा दावा कर रही है। कि वो एनडीए से 400 सीटों से ज्यादा जीतेगी। लेकिन यह चुनावी जंग आसान नहीं है। क्योंकि कई सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा और कांग्रेस मजबूती से आमने-सामने है। जिसके चलते विपक्ष और सत्ता पक्ष द्वारा उठाए मुद्दें उठाए जा रहे है। विपक्ष मुस्लिम के वोटबैंक के समूहों को लुभाने के लिए जनता के मुद्दों को उठाते हुए भाजपा की कमियां दिखाने की कोशिशें कर रहा है। 

राजस्थान में मजबूत भाजपा सरकार

पहले राजस्थान की बात करते हैं, जहां भाजपा मजबूत नजर आ रही है, लेकिन नए मुख्यमंत्री के साथ बदलते समीकरणों में कांग्रेस के लिए भी अवसर हैं। असम में राहुल गांधी ने भारत जोड़ो न्याय यात्रा से दमखम दिखाया है, लेकिन इसका लोकसभा चुनाव पर क्या प्रभाव होगा, यह देखना होगा। 

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को उम्मीद

छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपनी सत्ता गवादी। लेकिन यहां पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कुछ वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारकर अपनी उम्मीद बनाए रखी है। हरियाणा में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को उम्मीद है।कि वे इस बार साथ मिलकर कुछ सीटें जीत सकें। दिल्ली में सात सीटों पर सीधा मुकाबला होगा। क्योंकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भाजपा के खिलाफ साथ में लड़ेंगी।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस मिलकर करेगी मुकाबला

जानकारों के अनुसार इंडिया गठबंधन के तहत कांग्रेस उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, दिल्ली में आम आदमी पार्टी, बिहार में आरजेडी और तमिलनाडु में डीएमके के साथ मिलकर मुकाबला कर रही है। 

कांग्रेस और आप की सहमति पर क्या होगा बदलाव?

कांग्रेस और आप के बंधन के बावजूद कई राज्यों में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने होगी। सीधे मुकाबले में भाजपा की पहली जैसी बढ़त के मुकाबले विपक्ष की स्थिति में सुधार के द्वार खुले हैं। पिछली बार कांग्रेस मध्य प्रदेश में एक भी सीट नहीं जीत सकी। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा था। पिछले दो चुनाव में कांग्रेस गुजरात में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। इस बार कांग्रेस और आप की सहमति से क्या बदलाव हो सकता है। देखना बाकी है।



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Sat, 16 Mar 2024 15:02:00 +0530 Newsdesk
Loksabha Election 2024: नरेला में लोकसभा चुनाव के बहिष्कार पर जोर पकड़ रहा है यह नारा https://citytoday.co.in/This-slogan-is-gaining-momentum-in-Narela-to-boycott-Loksabha-elections https://citytoday.co.in/This-slogan-is-gaining-momentum-in-Narela-to-boycott-Loksabha-elections नई दिल्ली।Loksabha Election 2024: केंद्र सरकार की दिल्ली को दो नए मेट्रो कॉरिडोर की सौगात देने के बाद जनता में खुशी का माहौल छाया हुआ है।बीते बुधवार को ही केंद्र ने मेट्रो के चौथे फेज को मंजूरी दी थी। जिससे लाजपत नगर से साकेत और इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ तक के लोग खुश थे। लेकिन इसी फेज के रिठाला-बवाना-नरेला से होते हुए कुंडली (हरियाणा) तक विस्तार होने वाले लंबित कॉरिडोर को अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। जिसके कारण सभी के बीच नाराजगी का माहौल है। जिसका प्रभाव इस बार होने वाले लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है। दरअसल यहां के लोग चुनाव में भाग नहीं लेने का मन बना रहे है।  

उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लोगों का कहना है। बहुत समय पहले से उन्हें सरकार और संबंधित विभाग डीएमआरसी की तरफ से भरोसा दिलाया जा कहा है। कि जल्द ही इस रूट पर सरकारी मंजूरी मिल जाएगी। लेकिन मंजूरी नहीं मिली है। जिसके कारण लंबे समय से लोगों को ट्रांसपोर्टेशन के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी कारण लोगों ने यह मन बनाया है कि ''नरेला में मेट्रो नहीं तो लोकसभा चुनाव में वोट भी नहीं देंगे ' इस बात पर यहां के लोग विचार कर रहे हैं।क्योंकि करीब 20 साल से यहां के लोग इस मेट्रो लाइन का इंतजार कर रहे हैं।  रिठाला-बवाना-नरेला मेट्रो रूट संघर्ष के संयोजक हेमराज बंसल ने बताया कि पहले यह मेट्रो नरेला तक ही आनी थी। बाद में इसका कुंडली, हरियाणा तक विस्तार किया गया। लेकिन काम नहीं किया गया।

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Fri, 15 Mar 2024 14:55:11 +0530 Newsdesk
BJP Candidates List 2024: बीजेपी के उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी, इन दिग्गजों को मिला टिकट https://citytoday.co.in/Second-list-of-BJP-candidates-released,-these-veterans-got-tickets https://citytoday.co.in/Second-list-of-BJP-candidates-released,-these-veterans-got-tickets BJP Candidates List 2024: लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है।इस लिस्ट में पार्टी ने दिल्ली की बची हुई दो सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है।इसमें उत्तर पश्चिम दिल्ली से योगेंद्र चंदोलिया को चुना गया है। इसके अलावा पूर्वी दिल्ली से हर्ष मल्होत्रा को उम्मीदवार बनाया गया है। दादर और नगर हवेली से कलाबेन देलकर को टिकट दिया गया है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को हिमाचल प्रदेश की हमीरपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा धारवाड़ से प्रहलाद जोशी, नागपुर से नितिन गडकरी, करनाल से मनोहर लाल खट्टर को प्रत्याशी घोषित किया गया है।वहीं अशोक तंवर को सिरसा से टिकट मिला है।

दूसरी सूची में बीजेपी ने इन उम्मीदवारों को दिया टिकट

मध्य प्रदेश
बालाघाट- डॉ. भारती पारथी
छिंदवाड़ा- विवेक 'बंटी' साहू
उज्जैन (एससी)- अनिल फिरोजिया
धार (एसटी)- सावित्री ठाकुर
इंदौर- शंकर लालवानी

दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव
दादर एवं नगर हवेली- कलाबेन देलकर

दिल्ली
पूर्वी दिल्ली- हर्ष मल्होत्रा
उत्तर पश्चिम दिल्ली (एससी)- योगेन्द्र चंदोलिया

गुजरात
साबरकांठा- भीखाजी दुधाजी ठाकोर
अहमदाबाद पूर्व- हसमुखभाई सोमाभाई पटेल
भावनगर- निमुबेन बम्भानिया
वड़ोदरा- रंजनबेन धनंजय भट्ट
छोटा उदयपुर (एसटी)- जशुभाई भीलुभाई राठवा
सूरत- मुकेशभाई चंद्रकांत दलाल
वलसाड (एसटी)- धवल पटेल

हरियाणा
अंबाला- बंतो कटारिया
सिरसा- अशोक तंवर
करनाल- मनोहर लाल खट्टर
भिवानी-महेंद्रगढ़- चौधरी धरमबीर सिंह
गुड़गांव- राव इंद्रजीत सिंह यादव
फरीदाबाद- कृष्ण पाल गुर्जर

हिमाचल प्रदेश
हमीरपुर- अनुराग सिंह ठाकुर
शिमला (एससी)- सुरेश कुमार कश्यप

कर्नाटक
चिक्कोडी- अन्नासाहेब शंकर जोल्ले
बागलकोट- पीसी गद्दीगौडर
बीजापुर (एससी)- रमेश जिगजिणगी
गुलबर्गा (एससी)- उमेश जी जाधव
बीदर- भगवंत खूबा
कोप्पल- बसवराज क्यावातूर
बेल्लारी (एसटी)- बी श्रीरामुलू
हावेरी- बसवराज बोम्मई
धारवाड़- प्रल्हाद जोशी
दावणगेरे- गायत्री सिद्देश्वर
शिमोगा- श्री वाई राघवेंद्र
उडुपी चिकमंगलूर- कोटा श्रीनिवास पूजारी
दक्षिण कन्नड़- कैप्टन ब्रिजेश चौटा
तुमकुर- वी सोमन्णा
मैसूर- यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार
चामराजनगर (एससी)- एस बालराज
बेंगलुरु ग्रामीण- डॉ. सीएन मंजूनाथ
बेंगलुरु उत्तर- कुमारी शोभा करंदलाजे
बेंगलुरु सेंट्रल- पीसी मोहन
बेंगलुरु साउथ- तेजस्वी सूर्या

महाराष्ट्र
नंदुरबार (एसटी)- डॉ. हिना विजयकुमार गावित
धुले- डॉ. सुभाष रामराव भामरे
जलगांव- स्मिता वाघ
रावेर- रक्षा निखिल खडसे
अकोला- अनूप धोत्रे
वर्धा- रामदास चंद्रभानजी तडस
नागपुर- नितिन जयराम गडकरी
चंद्रपुर- सुधीर मुंगंटीवार
नांदेड़- प्रतापराव पाटिल चिखलिकर
जालना- रावसाहेब दादाराव दानवे
डिंडोरी (एसटी)- डॉ. भारती प्रवीण पवार
भिवंडी- कपिल मोरेश्वर पाटिल
मुंबई उत्तर- पीयूष गोयल
मुंबई उत्तर पूर्व- मिहिर कोटेचा
पुणे- मुरलीधर किशन मोहोल
अहमदनगर- डॉ. सुजय राधाकृष्ण विखे पाटिल
बीड- पंकजा मुंडे
लातूर (एससी)- सुधाकर तुकाराम श्रृंगारे
माढा- रणजीतसिन्हा हिंदूराव नाइक निंबालकर
सांगली- संजयकाका पाटिल

तेलंगाना
आदिलाबाद (एसटी)- गोदाम नागेश
पेद्दापल्ले (एससी)- गोमासा श्रीनिवास
मेडक- माधवनेनी रघुनंदन राव
महबूबनगर- डीके अरुणा
नल्गोंडा- सईदा रेड्डी
महबुबाबाद (एसटी)- प्रोफेसर अजमीरा सीताराम नाइक

त्रिपुरा
त्रिपुरा पूर्व (एसटी)- महारानी कृति सिंह देबबर्मा

उत्तराखंड
गढ़वाल- अनिल बलूनी
हरिद्वार- त्रिवेन्द्र सिंह रावत

पहली सूची में थे 195 उम्मीदवारों के नाम

आपको बता दें कि बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची 2 मार्च की जारी की थी। इस सूची में 195 नाम थे। पहली सूची में प्रधानमंत्री मोदी का नाम वाराणसी से तथा अमितशाह (गांधीनगर) और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का नाम लखनऊ से शामिल था।आपको बता दें कि बीजेपी की पहली सूची में 34 केंद्रीय मंत्रियों के नाम थे। जबकि तीन मंत्रियों के टिकट काट दिए गए थे। पहली लिस्ट में उत्तर प्रदेश की 51 सीट, पश्चिम बंगाल की 20, मध्य प्रदेश की 24, गुजरात और राजस्थान की 15-15 सीट, केरल और तेलंगाना की 12-12 सीट, झारखंड, छत्तीसगढ़ और असम की 11-11 सीट और दिल्ली की पांच सीट सहित कुछ अन्य प्रदेशों और केंद्र शासित प्रदेशों में उम्मीदवारों की घोषणा की गई थी।

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Thu, 14 Mar 2024 15:33:15 +0530 Newsdesk
Lok Sabha Election 2024: कांग्रेस ने की महिला न्याय गारंटी योजना की घोषणा, गरीब महिलाओं को देगी 1 लाख रुपये https://citytoday.co.in/Congress-announces-Women-Justice-Guarantee-Scheme-will-give-Rs-1-lakh-to-poor-women https://citytoday.co.in/Congress-announces-Women-Justice-Guarantee-Scheme-will-give-Rs-1-lakh-to-poor-women Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी की खोखली घोषणांए शुरु हो गयी है। सभी राजनातिक पार्टियां अपनी घोषणाओं से जनता को लुभाने का कार्य कर रही है। हाल ही में कांगेस नेता राहुल गांधी ने महिलाओं के हित में कई बड़े ऐलान किए है। कांग्रेस नेता ने 'महिला न्याय' गारंटी की घोषणा करते हुए गरीब महिलाओं को सालाना1 लाख रुपये, सरकारी नौकरियों में 50 प्रतिशत कोटा और महिलाओं के लिए छात्रावास देने का वादा किया है। 

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा -

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कहा सबसे पहले नारी शक्ति को प्रणाम किया। और कहा कि कांग्रेस आपको 5 ऐसी गारंटियां दे रही है जिनसे देश में महिलाओं का जीवन हमेशा के लिए बदल जाएगा। सबसे गरीब परिवारों की एक महिला को हर वर्ष 1 लाख रुपए की गारंटी दी जाएगी। साथ ही केंद्र सरकार में सभी नई भर्तियों का आधा हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित करने की गारंटी देने की बात कही। आशा, आंगनवाड़ी और मिड-डे मील बनाने वाली महिलाओं के वेतन में केंद्र सरकार का योगदान दोगुना करने की गारंटी।सभी पंचायत में एक अधिकार मैत्री की नियुक्ति की गारंटी, जो महिलाओं को जागरूक कर उन्हें उनके कानूनी अधिकार दिलाने में मदद करेंगे।  देश में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल की संख्या दोगुनी कर, हर ज़िले में कम से कम एक हॉस्टल सुनिश्चित करने की गारंटी। कांग्रेस का लक्ष्य देश की आधी आबादी को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और बराबरी का प्रतिनिधित्व देना है। यह 5 ऐतिहासिक कदम महिलाओं के लिए ‘समृद्धि का द्वार’ खोलने जा रहे हैं।

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Wed, 13 Mar 2024 17:38:23 +0530 Newsdesk
Loksabha Election 2024: कांग्रेस की दूसरी लिस्ट जारी, इन उम्मीदवारों के नाम पर लगी मुहर https://citytoday.co.in/Second-list-of-Congress-released-names-of-these-candidates-approved https://citytoday.co.in/Second-list-of-Congress-released-names-of-these-candidates-approved Loksabha Election 2024: लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने उम्मदवारो की दूसरी सूची जारी कर दी है। दूसरी लिस्ट में असम गुजरात, मध्य प्रदेश,उत्तराखंड, राजस्थान और दमन दीव के लिए कुल 43 उम्मीदवारों का ऐलान किया गया है। इस लिस्ट में कई बड़े नामों को जगह दी गई है। जिसमे कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ का मान शामिल है। जिन्हें मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा सीट से टिकट दिया गया है। वहीं भिंड से फूल सिंह बरैया का नाम है। 

राजस्थान से 10 पर उम्मीदवार घोषित

वहीं राजस्थान में 25 लोकसभा सीटों में से 10 पर उम्मीदवार घोषित कर दिये गए है। इनमें बीकानेर से गोविंद मेघवाल, चूरू से राहुल कस्वा, झुंझुनू से बृजेंद्र ओला, अलवर से ललित यादव, भरतपुर से संजना जाटव, टोंक से हरीश मीणा, जोधपुर से करण सिंह उचियारड़ा,जालौर सिरोही से वैभव गहलोत, उदयपुर से ताराचंद मीणा, चित्तौड़ से उदयलाल आंजना को टिकट दिया है। 

मध्यप्रदेश में 10 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित

मध्यप्रदेश में भिंड से फूल सिंह बरैया, टीकमगढ़- पंकज अहिरवार, सतना- सिद्धार्थ कुशवाहा, सीधी- कमलेश्वर पटेल, मंडला - ओंकार सिंह मरकाम, छिंदवाड़ा- नकुलनाथ, देवास - राजेंद्र मालवीय, धार - राधेश्याम मुवेल, खरगोन - पोरलाल खरते, बैतूल - रामू टेकाम को टिकट दिया गया है।

गुजरात में 7 सीटों पर उम्मीदवार  हुए घोषित

कांग्रेस पार्टी की दूसरी लिस्ट में गुजरात की 26 सीटों में से 7 पर उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी ने बांसकांठा से गेनीबेन ठाकोर, अहमदाबाद पूर्व से रोहन गुप्ता, कच्छ से नितीश भाई ललन अहमदाबाद पश्चिम से भारत मकवाना, पोरबंदर से ललित भाई वसोया, बारडोली से सिद्धार्थ चौधरी, वलसाड से अनंत भाई पटेल को उम्मीदवार बनाया है।  

असम की 12 सीट पर उम्मीदवार घोषित

कांग्रेस पार्टी ने असम की 14 में से 12 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिये है। पार्टी ने कोकराझार से गरजन मैशरे, ढुबरी से रकीबुल हसन, बारपेटा से दीप बयान, दर्रा उदलगुरी से मधाब राजवंशी, गुवाहाटी से मीरा बोर्थाकुर गोस्वामी, दिफू से जयराम एंगलोंग, करीमगंज से हाफिज राशिद अहम चौधरी, सिलचर से सुरज्य कांत सरकार, नगांव से प्रद्युत बोरदोलोई, काजीरंगा से रोजेलिना तिरके, सोनितपुर से प्रेम लाल गंजु और जोरहाट से गौरव गोगोई को उम्मीदवार घोषित किया है।

उत्तराखंड की चार सीटों पर उम्मीदवार

उत्तराखंड की चार सीटों पर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। जिसमें टिहरी गढ़वाल से जोत सिंह गुंटसोला, गढ़वाल से गणेश गोदियाल, अल्मोड़ा प्रदीप टम्टा का नाम और दमन और दीव में केतन दहयाभाई पटेल को टिकट दिया गया है।

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Wed, 13 Mar 2024 13:44:05 +0530 Newsdesk
Congress Candidate List: कांग्रेस की लोकसभा उम्मीदवारों की पहली सूची में 39 नामों का ऐलान... https://citytoday.co.in/39-names-announced-in-the-first-list-of-Congress-Lok-Sabha-candidates https://citytoday.co.in/39-names-announced-in-the-first-list-of-Congress-Lok-Sabha-candidates Congress Candidate List: लोकसभा चुनावों के करीब आते ही भाजपा की 195 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी होने के एक सप्ताह में ही कांग्रेस ने अपनी उम्मीदवारों की लिस्ट घोषित कर दी है l बता दे कि कांग्रेस में अपनी 39 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है l बड़े नामों की बात करें तो राहुल गांधी, भूपेश बघेल और शशि थरूर का नाम शामिल है। हालांकि सूची में मुख्य रूप से दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों की सीटों पर उम्मीदवारों का नाम ऐलान किया गया है l

जानिए कौन कहां से लड़ेगा चुनाव

इस जारी सूची से स्‍पष्‍ट हो गया है कि राहुल गांधी वायनाड से चुनाव लड़ेंगे। हालांकि कोई अधिकारिक जानकारी नहीं है। कि 2019 की तरह वह अमेठी से भी चुनाव मैदान में उतरेंगे या नहीं। इस लिस्ट में शशि थरूर का नाम है जो तिरुवनंतपुरम से चुनाव लड़ेंगे। खास बात यह है कि इस सीट पर शशि थरूर लगातार तीन बार से सांसद हैं। इसी के चलते उन्हे यह सीट दी गई है।वहीं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल की बात करें तो  पार्टी ने राजनांदगांव से चुनाव मैदान में उतारा है। इसके साथ ही कांग्रेस ने महासचिव केसी वेणुगोपाल को केरल के अलप्पुझा से चुनाव मैदान में उतारा गया है। यह सीट उन्‍होंने 2009 में जीती थी। वहीं डीके सुरेश को पार्टी ने बेंगलुरु ग्रामीण चुनाव मैदान में उतार दिया है। डीके सुरेश कर्नाटक के उपमुख्‍यमंत्री डीके शिवकुमार के भाई है।

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16 उम्‍मीदवारों के नामों की घोषणा केरल से

इस सूची में सर्वाधिक 16 उम्‍मीदवारों के नामों की घोषणा केरल से की गई है।अन्‍य राज्‍यों में केवल छत्तीसगढ़ और केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप हैं। इसके बाद कर्नाटक से सात, छत्तीसगढ़ से छह और तेलंगाना से चार नामों की घोषणा की गई है। शेष मेघालय, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और लक्षद्वीप की सीटों के लिए नामों की घोषणा की गई है। कुछ दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों की सीटों के लिए उम्‍मीदवारों के नाम हैं। 

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Sat, 09 Mar 2024 16:41:21 +0530 Newsdesk
LokSabha Elections: अभिनेता कमल हासन नहीं लड़ेंगे लोकसभा चुनाव... https://citytoday.co.in/Actor-Kamal-Haasan-will-not-contest-Lok-Sabha-elections... https://citytoday.co.in/Actor-Kamal-Haasan-will-not-contest-Lok-Sabha-elections... Kamal Haasan Not Contest LS Elections: हाल ही में खबर आई है कि तमिल सुपरस्टार कमल हासन आगामी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।कमल हासन मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) के अध्यक्ष है। लेकिन वह इन चुनावों में भाग नहीं लेंगे। हालांकि द्रमुक कमल हासन को कोयंबटूर लोकसभा सीट से मैदान में उतारना चाहते थे। लेकिन माकपा इस बात पर अड़ी है। कि वह कोयंबटूर सीट नहीं छोड़ेगी। इसी कारण ऐसा माना जा रहा है। कि कमल हासन को गठबंधन से राज्यसभा सीट दी जाएगी। द्रमुक ने अपने गठबंधन सहयोगी कांग्रेस से भी अपनी एक सीट एमएनएम के लिए छोड़ने के लिए कहा था। लेकिन कांग्रेस ने अभिनेता कमल हासन को कांग्रेस के निशान पर चुनाव लड़ने के लिए कहा है। फिलहाल कई तरह के कयास लगाए जा रहे है। 

सूत्रों की मानें तो चूंकि कमल हासन का मुद्दा सुलझ गया है।देखना यह होगा कि द्रमुक गठबंधन अब अगले कुछ दिनों में अपनी सीट-बंटवारे की प्रक्रिया पूरी कर सकेगा। हासन सिर्फ द्रमुक गठबंधन के स्टार प्रचारक होंगे। इसका कारण यह है। कि उनकी पार्टी औपचारिक रूप से गठबंधन में शामिल हो गई है। जिसको लेकर राजनीतिक विश्लेषक जॉर्ज अब्राहम ने आईएएनएस से कहा कि यह अच्छा फैसला है। कि कमल हासन चुनाव लड़ने की बजाय स्टार प्रचारक बनेंगे। अब्राहम ने कहा, “चुनाव प्रचार में वह द्रमुक के लिए कीमती होंगे.”

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Sat, 09 Mar 2024 16:17:25 +0530 Newsdesk
Loksabha Election 2024: गौतम गंभीर ने लोकसभा चुनाव न लड़ने की जतायी इच्छा https://citytoday.co.in/Gautam-Gambhir-expressed-his-desire-not-to-contest-Lok-Sabha-elections https://citytoday.co.in/Gautam-Gambhir-expressed-his-desire-not-to-contest-Lok-Sabha-elections नयी दिल्ली।East Delhi lok sabha constituency: पूर्वी दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने अपनी एक्स पोस्ट में इस बात की जानकारी दी है। गंभीर ने भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से उन्हें राजनीतिक कर्तव्यों से मुक्त करने का अनुरोध किया है ताकि वह अपनी क्रिकेट प्रतिबद्धताओं पर ध्यान केन्द्रित कर सकें।
उन्होंने श्री नड्डा को संबोधित एक एक्स पोस्ट में कहा कि उन्हें लोगों की सेवा करने का अवसर देने के लिये वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद देते हैं।

अब कौन होगा बीजेपी का उम्मीदवार?

दिल्ली के सियासी गलियारों में चर्चा थी कि बीजेपी इस बार गौतम गंभीर को टिकट नहीं देगी।लेकिन गंभीर ने एक ट्वीट के माध्यम से इसे स्पष्ट कर दिया है। पूर्वी दिल्ली में बीजेपी के संभावित चेहरे में हर्ष मल्होत्रा, कुलजीत सिंह चहल और अक्षय कुमार का नाम है। आम आदमी पार्टी ने कुलदीप कुमार को इस सीट के लिए उम्मीदवार घोषित किया है। जो कांग्रेस के साथ गठबंधन के तहत चुनाव लड़ेंगे।आज बीजेपी की पहली लिस्ट में 100 नामों की उम्मीदवारों की जानकारी हो सकती है, जिसमें दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों के उम्मीदवारों का भी ऐलान हो सकता है। इससे पूर्वी दिल्ली के लिए बीजेपी का लोकसभा कैंडिडेट स्पष्ट हो सकता है। 

गंभीर दिल्ली से पूर्वी सांसद हैं 

आपको बता दें कि पूर्वी दिल्ली से सांसद हैं गंभीर। उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में 6,96,158 वोट मिले थे। जिससे वह कांग्रेस के अरविंदर सिंह लोवली और AAP की आतिशी मार्लेना को हराकर विजयी हुए थे। लवली को 3,04,934 और आतिशी को 2,19,328 वोट मिले थे।

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Sat, 02 Mar 2024 17:44:28 +0530 Newsdesk
Himachal Politics: कांग्रेस के 6 बागी विधायक हुए अयोग्य घोषित, क्रॉस वोटिंग के कारण स्पीकर ने लिया एक्शन https://citytoday.co.in/6-Congress-MLAs-disqualified https://citytoday.co.in/6-Congress-MLAs-disqualified Himachal Politics: हिमाचल प्रदेश के स्पीकर सतपाल पठानिया ने राज्यसभा चुनाव में बगावत करने वाले 6 विधायकों को अयोग्य घोषित किया है। इन विधायकों ने दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों को आकर्षित किया। और उन्हें अपने खिलाफ घोषित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप ये छह लोग अब हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य नहीं रहेंगे। स्पीकर सतपाल पठानिया ने बताया कि विधायकों ने कांग्रेस पार्टी के खिलाफ विधानों का उल्लंघन करते हुए चुनाव लड़ा, और पार्टी के पक्ष में वोट नहीं दिया। उन्होंने कहा कि दल-बदल कानून के तहत शिकायत विधायक और मंत्री हर्ष वर्धन के माध्यम से हमारे सचिवालय को मिली।  जिसके बाद उन्होंने दोनों पक्षों को सुना और अपना फैसला सुनाया। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट पर चुनाव में कांग्रेस के पास थे 40 विधायक और बीजेपी के पास 25 विधायक थे। उसके पास 10 वोट कम थे। लेकिन कांग्रेस पार्टी को 3 निर्दलीयों का समर्थन भी था। जिसके बाद कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी की जीत तय मानी जा रही थी। लेकिन कांग्रेस के 6 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर बीजेपी समर्थन में वोट दिया। साथ ही निर्दलीय विधायकों ने भी बीजेपी का साथ दिया।जिससे दोनों पार्टियों में वोटों के लेकर समानता की स्थिति आ गई। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की चुनाव में कांग्रेस और निर्दलीय मिलाकर कुल 9 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।जिससे बीजेपी को 9 विधायकों का समर्थन मिला। आपको बता दें कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों को 34-34 वोट मिले है। जिसके बाद फैसले के लिए टॉस किया गया। इसमें बीजेपी के उम्मीदवार हर्ष महाजन की जीत हुई। जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी को हार का सामना पड़ा।

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Thu, 29 Feb 2024 19:24:34 +0530 Newsdesk
Rajya Sabha Election 2024: एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने बनाया मिलिंद देवड़ा को राज्यसभा का उम्मीदवार https://citytoday.co.in/Eknath-Shindes-Shiv-Sena-made-Milind-Deora-its-Rajya-Sabha-candidate. https://citytoday.co.in/Eknath-Shindes-Shiv-Sena-made-Milind-Deora-its-Rajya-Sabha-candidate. Milind Deora News: देवड़ा के लोकसभा में लड़ने की अटकलों के बीच उन्हें पार्टी ने राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। शिवसेना की शिंदे गुट ने मिलिंद देवड़ा को राज्यसभा उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है। देवड़ा गुरुवार को नामांकन दाखिल करेंगे। उन्होंने हाल ही में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। और शिंदे गुट में शामिल हो गए थे।अब राज्यसभा में छह सीटों की खाली होने के बाद अब चुनाव आगे है। महाराष्ट्र से वी मुरलीधरन, नारायण राणे, प्रकाश जावड़ेकर, कुमार केतकर, वंदना चव्हाण, और अनिल देसाई की सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। बीजेपी ने अशोक चव्हाण, मेधा कुलकर्णी, और अजीत गोपछड़े को उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस ने चंद्रकांत हंगोड़े को उम्मीदवार घोषित किया है। शरद पवार गुट और उद्धव ठाकरे गुट ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। आपको बता दें कि राज्यसभा के 56 सीटों के लिए 27 फरवरी को चुनाव होने वाला है। नामांकन की अंतिम तिथि 15 फरवरी है। यदि आवश्यक होगी तो 27 फरवरी को मतदान होगा।

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Wed, 14 Feb 2024 20:05:10 +0530 Newsdesk
Rajya Sabha Election: बीजेपी ने महाराष्ट्र से राज्यसभा के उम्मीदवारों का किया एलान https://citytoday.co.in/Rajya-Sabha-Election:-BJP-announced-Rajya-Sabha-candidates-from-Maharashtra-629 https://citytoday.co.in/Rajya-Sabha-Election:-BJP-announced-Rajya-Sabha-candidates-from-Maharashtra-629 Rajya Sabha Election: भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए तीसरी सूची जारी की है। तीसरी लिस्ट में कुल सात उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। महाराष्ट्र के साथ गुजरात के लिए बीजेपी ने राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण सहित 5 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। जिसमें मेधा कुलकर्णी, और अजीत गोपछड़े शामिल है। चव्हाण ने कांग्रेस को छोड़कर एक दिन पहले ही बीजेपी में शामिल हो गए थे। वहीं गुजरात काी बात करें तो भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा गुजरात से राज्यसभा जाएंगे। भारतीय जनता पार्टी ने जगत प्रकाश नड्डा के अलावा गोविंदभाई ढोलकिया, मयंकभाई नायक, और जशवंतसिंह सलामसिंह परमार को राज्यसभा का टिकट दिया है। वहीं महाराष्ट्र से पार्टी ने अशोक चव्हाण के अलावा मेधा कुलकर्णी और अजीत गोपघड़े को उम्मीदवार बनाया है। इस तरह तीसरी सूची में पार्टी ने कुल 7 लोगों को राज्यसभा का टिकट दिया है।

पहली सूची में कुल 14 लोगों के नाम की लिस्ट जारी 

पहली सूची में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश से 7 उम्मीदवारों का ऐलान किया था, जिनमें सुधांशु त्रिवेदी, आरपीएन सिंह, तेजवीर सिंह, साधना सिंह, संगीता बलवंत, नवीन जैन और अमरपाल मौर्या थे। बिहार से डॉक्टर धर्मशीला गुप्ता और भीम सिंह भी उम्मीदवार थे। छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हरियाणा, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल से भी पार्टी ने उम्मीदवारों का चयन किया। जिसमें पार्टी ने छत्तीसगढ़ से राजा देवेंद्र प्रताप सिंह, उत्तराखंड से महेंद्र भट्ट, हरियाणा से सुभाष बराला, कर्नाटक से नारायण कृष्णासा भांडगे, पश्चिम बंगाल से सामिक भट्टाचार्य को राज्यसभा का टिकट दिया था।

दूसरी सूची में थे 5 नाम

दूसरी सूची में पार्टी ने ओडिशा से केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, मध्य प्रदेश से माया नरोलिया, एल मुरुगन, बंसीलाल गुर्जर, और उमेश नाथ महाराज को उम्मीदवार बनाया था।आपको बता दें कि महीने के आखिर में 15 राज्यों की 55 सीटों पर चुनाव होना है। पहली लिस्ट में पार्टी ने उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और कुछ अन्य राज्यों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान किया था। आज तक दो लिस्टें जारी की गई हैं।

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Wed, 14 Feb 2024 19:32:23 +0530 Newsdesk
Rajya Sabha Election: बीजेपी ने महाराष्ट्र से राज्यसभा के उम्मीदवारों का किया एलान https://citytoday.co.in/Rajya-Sabha-Election:-BJP-announced-Rajya-Sabha-candidates-from-Maharashtra https://citytoday.co.in/Rajya-Sabha-Election:-BJP-announced-Rajya-Sabha-candidates-from-Maharashtra Rajya Sabha Election: भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए तीसरी सूची जारी की है। तीसरी लिस्ट में कुल सात उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। महाराष्ट्र के साथ गुजरात के लिए बीजेपी ने राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण सहित 5 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। जिसमें मेधा कुलकर्णी, और अजीत गोपछड़े शामिल है। चव्हाण ने कांग्रेस को छोड़कर एक दिन पहले ही बीजेपी में शामिल हो गए थे। वहीं गुजरात काी बात करें तो भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा गुजरात से राज्यसभा जाएंगे। भारतीय जनता पार्टी ने जगत प्रकाश नड्डा के अलावा गोविंदभाई ढोलकिया, मयंकभाई नायक, और जशवंतसिंह सलामसिंह परमार को राज्यसभा का टिकट दिया है। वहीं महाराष्ट्र से पार्टी ने अशोक चव्हाण के अलावा मेधा कुलकर्णी और अजीत गोपघड़े को उम्मीदवार बनाया है। इस तरह तीसरी सूची में पार्टी ने कुल 7 लोगों को राज्यसभा का टिकट दिया है।

पहली सूची में कुल 14 लोगों के नाम की लिस्ट जारी 

पहली सूची में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश से 7 उम्मीदवारों का ऐलान किया था, जिनमें सुधांशु त्रिवेदी, आरपीएन सिंह, तेजवीर सिंह, साधना सिंह, संगीता बलवंत, नवीन जैन और अमरपाल मौर्या थे। बिहार से डॉक्टर धर्मशीला गुप्ता और भीम सिंह भी उम्मीदवार थे। छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हरियाणा, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल से भी पार्टी ने उम्मीदवारों का चयन किया। जिसमें पार्टी ने छत्तीसगढ़ से राजा देवेंद्र प्रताप सिंह, उत्तराखंड से महेंद्र भट्ट, हरियाणा से सुभाष बराला, कर्नाटक से नारायण कृष्णासा भांडगे, पश्चिम बंगाल से सामिक भट्टाचार्य को राज्यसभा का टिकट दिया था।

दूसरी सूची में थे 5 नाम

दूसरी सूची में पार्टी ने ओडिशा से केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, मध्य प्रदेश से माया नरोलिया, एल मुरुगन, बंसीलाल गुर्जर, और उमेश नाथ महाराज को उम्मीदवार बनाया था।आपको बता दें कि महीने के आखिर में 15 राज्यों की 55 सीटों पर चुनाव होना है। पहली लिस्ट में पार्टी ने उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और कुछ अन्य राज्यों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान किया था। आज तक दो लिस्टें जारी की गई हैं।

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Wed, 14 Feb 2024 19:32:22 +0530 Newsdesk
Vibhakar Shastri Resigned: लाल बहादुर शास्त्री के पोते विभाकर ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा https://citytoday.co.in/Vibhakar-Shastri-Resigned:-Lal-Bahadur-Shastris-grandson-Vibhakar-resigns-from-Congress. https://citytoday.co.in/Vibhakar-Shastri-Resigned:-Lal-Bahadur-Shastris-grandson-Vibhakar-resigns-from-Congress. Vibhakar Shastri Resigned: लोकसभा चुनाव के आते ही उथल-पुथल का दौर भी शुरु हो गया है। कांग्रेस पार्टी की सत्ता धीरे-धीरे अपने पक्ष का दामन छोड़ने में लगी हुई है। जिसके कारण एक केल बाद झटके कांग्रेस को खाने पड़ रहे है। हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोते विभाकर शास्त्री ने आज कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। और बीजेपी में शामिल हो गए। उन्होंने अपने इस्तीफे की जानकारी एक ट्वीट के माध्यम से दी और कहा कि उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दिया है। विभाकर ने अपने ट्वीट में इसकी जानकारी केंद्रीय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को दी। उनके शामिल होने के साथ ही उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। इस इस्तीफे का निर्णय लोकसभा चुनावों के समय में लिया गया है। विभाकर शास्त्री ने ट्वीट किया, 'माननीय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी, मैंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपना इस्तीफा दे दिया है।' और अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं, और इस दौरान बीजेपी के कई नेता उपस्थित थे। यह इस समय में हुआ है। जब लोकसभा चुनाव कुछ महीनों में होने की संभावना है।

आपको बता दें कि अभी कुछ समय पहले ही अशोक चव्हाण भी कांग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। उन्होंने महाराष्ट्र कांग्रेस से इस्तीफा दिया और बीजेपी में शामिल होते ही नया राजनीतिक करियर की शुरुआत की। इसी तरह असम कांग्रेस के विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने भी पद से इस्तीफा दिया। 

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Wed, 14 Feb 2024 19:02:07 +0530 Newsdesk
Rajya Sabha Election: सोनिया गांधी ने राजस्थान से भरा राज्यसभा के लिए नामांकन https://citytoday.co.in/Sonia-Gandhi-files-nomination-for-Rajya-Sabha-from-Rajasthan https://citytoday.co.in/Sonia-Gandhi-files-nomination-for-Rajya-Sabha-from-Rajasthan  राजस्थान। Rajya Sabha Election: सोनिया गांधी ने राजस्थान से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भरा है।नामांकन भरते समय उनके साथ राहुल और प्रियंका गांधी भी थे। सोनिया गांधी ने लगभग 22 वर्षों तक कांग्रेस के अध्यक्ष पद को भी संभाला है, और लोकसभा में पांच बार सांसद रही हैं। यह पहली बार होगा जब उन्होंने राज्यसभा से प्रतिनिधित्व किया है। यानि की सोनिया राजस्थान का प्रतिनिधित्व करेंगी। वर्तमान में उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उन्होंने पहली बार संसद के उच्च सदन में जाने का निर्णय लिया है। इससे पहले सोनिया गांधी अमेठी से भी लोकसभा सदस्य रह चुकी हैं। आज सोनिया गांधी के नामांकन के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के आवास पर सभी विधायकों ने हस्ताक्षर किए। कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर, डूंगराराम गेदर, रीटा चौधरी, भीमराज भाटी, शिमला नायक, गीता बरवड़, सी एल प्रेमी ने भी नामांकन सेट पर हस्ताक्षर किए। सोनिया गांधी वर्ष 1999 से लगातार लोकसभा सदस्य हैं।वही रायबरेली की सीट पर प्रियंका गांधी की एंट्री हो सकती है।

आपको बता दें कि राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 8 फरवरी से शुरू हो चुकी है।और नामांकन पत्रों की जांच 16 फरवरी को होगी। उम्मीदवार 20 फरवरी तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान का दिन 27 फरवरी को होगा। जहाँ सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। और मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे से शुरू होगी।

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Wed, 14 Feb 2024 18:00:37 +0530 Newsdesk
Ashok Chavan: चुनाव के पहले कांग्रेस को लगा झटका, वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण ने पार्टी से दिया इस्तीफा https://citytoday.co.in/Congress-got-a-shock-before-the-elections,-senior-leader-Ashok-Chavan-resigned-from-the-party. https://citytoday.co.in/Congress-got-a-shock-before-the-elections,-senior-leader-Ashok-Chavan-resigned-from-the-party. Maharashtra Politics: लोकसभा चुनाव के करीब आते ही सियासी हलचल तेज हो गयी। पार्टियों में उथल पुथल का दौर जारी है। हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से मुलाकात के बाद इस्तीफा दे दिया। अब चव्हाण की बीजेपी में शामिल होने की चर्चाएं हैं। आपको बता दें कि अशोक चव्हाण महाराष्ट्र के बड़े मराठा कांग्रेस नेता हैं, और पहले भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनका पहला कार्यकाल दिसंबर 2008 से नवंबर 2009 तक रहा। उसके बाद उन्होंने दूसरे कार्यकाल में नवंबर 2009 से नवंबर 2010 तक महाराष्ट् मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। कांग्रॅेस पार्टी अबी लगातार झटकों भरें दौर से गुजर रही है। क्योंकि लोकसभा चुनावों में अब सिर्फ कुछ ही महीनें शेष बचे है। और इसी बीच अशोक चव्हाण जैसे अनुभवी कांग्रेसी नेता का इस्तीफा देना पार्टी के लिए बड़ा झटका है। चव्हाण के इस्तीफे से पहले मुंबई कांग्रेस के प्रमुख और गांधी परिवार के करीबी मिलिंद देवड़ा भी इस्तीफा दे चुके हैं। पार्टी हाल ही में हुए बाबा सिद्दीकी के इस्तीफे से भी अब तक उभर ही रही थी। कि अब एक और बड़े नेता के इस्तीफे ने पार्टी की महाराष्ट्र में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पूर्व महाराष्ट्र मुख्यमंत्री के इस्तीफे पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है, कि कई बड़े नेता अब भाजपा में शामिल होना चाहते हैं, खासकर कांग्रेस के कई नेता हमारे संपर्क में हैं। उन्होंने कहा है, कि कांग्रेस के कई नेता पार्टी के नेतृत्व से नाराज हैं, और वहाँ घुटन का माहौल है। वे बहुत जल्द और नेताओं के नाम बताने की बात की है।

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Mon, 12 Feb 2024 18:46:13 +0530 Newsdesk
Mandi Lok Sabha Seat: मंडी से कांग्रेस और बीजेपी की कांटे की टक्कर, जल्द होगा टिकट का ऐलान https://citytoday.co.in/Congress-and-BJP-have-a-tough-fight-from-Mandi,-ticket-will-be-announced-soon https://citytoday.co.in/Congress-and-BJP-have-a-tough-fight-from-Mandi,-ticket-will-be-announced-soon Mandi Lok Sabha Seat: हिमाचल प्रदेश की मंडी संसदीय सीट भी इन सीटों में शामिल है। हिमाचल प्रदेश की लोकसभा की यह इकलौती सीट है,जो कांग्रेस के पास है। हालांकि यह सीट पहले भाजपा के पास ही थी। लेकिन 2021 में यहां उपचुनाव हुए थे। जिसके बाद यह सीट कांग्रेस की झोली में चली गई। सूत्र बताते हैं, कि दिल्ली में जिन सीटों पर पहले प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करने की चर्चा चल रही है। उसमें मंडी संसदीय सीट भी शामिल है। यहां तय समय से पहले प्रत्याशी के नाम का ऐलान हो सकता है। भाजपा की रणनीति है, कि हारी हुई सीटों पर पहले से प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर प्रचार को समय से पहले शुरू कर दिया जाए।

इन नामों पर चल रही चर्चा

मंडी संसदीय सीट पर भाजपा के टिकट के तलबगारों की एक लंबी सूची सामने आ रही है। हालांकि सबसे पहला नाम पूर्व सीएम एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का चल रहा है। लेकिन जयराम ठाकुर चुनाव न लड़ने की बात पहले ही कह चुके हैं। इसके अलावा पूर्व में भाजपा के प्रत्याशी रह चुके ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर, नगर परिषद मनाली के अध्यक्ष एवं हिप्र नगर निकाय अध्यक्ष/उपाध्यक्ष फेडरेशन के अध्यक्ष चमन कपूर, भाजपा नेता अजय राणा और पूर्व में लोकसभा का चुनाव लड़ चुके आश्रय शर्मा के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में चल रहे हैं।

प्रत्याशी रह चुके हैं लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए थे

ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर कारगिल हीरो के नाम से जाने जाते हैं। खुशाल ठाकुर पूर्व में लोकसभा के उपचुनाव में भाजपा के प्रत्याशी रह चुके हैं, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए थे। चमन कपूर मंडी और कुल्लू जिलों में अपनी अच्छी पकड़ रखते हैं, क्योंकि मंडी जिला इनकी जन्मभूमि और कुल्लू जिला इनकी कर्मभूमि है। साथ ही इनकी जगत प्रकाश नड्डा और जयराम ठाकुर के साथ भी काफी नजदीकियां हैं। आपदा के समय में भी इन्होंने लोगों की काफी ज्यादा मदद की। भाजपा नेता अजय राणा लंबे समय से टिकट के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं। इस बार भी अजय राणा फिर से रेस में हैं। पूर्व में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ चुके आश्रय शर्मा भी भाजपा के टिकट के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं। आश्रय शर्मा नड्डा और जयराम ठाकुर से मिलकर अपनी बात रख चुके हैं।इसके साथ ही पूर्व सांसद महेश्वर सिंह भी टिकट की आस में हैं। लेकिन उनकी उम्र को देखते हुए ही पार्टी कोई निर्णय कर सकती है।

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Fri, 09 Feb 2024 21:48:34 +0530 Newsdesk
Mandi Lok Sabha Seat: 150 लोकसभा सीटों पर भाजपा जल्द उतारेगी उम्मीदवार, कंगना को भी मिल सकता है टिकट https://citytoday.co.in/BJP-will-soon-field-candidates-on-150-Lok-Sabha-seats,-Kangana-may-also-get-ticket https://citytoday.co.in/BJP-will-soon-field-candidates-on-150-Lok-Sabha-seats,-Kangana-may-also-get-ticket नई दिल्ली।Mandi Lok Sabha Seat: आने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा हर एक सीट पर मंथन कर रही है। हारी हुई सीटों को झटकने की रणनीति पर काम चल रहा है। अबकी बार 400 पार का नारा साकार करने के लिए भाजपा उन सीटों पर ज्यादा ध्यान दे रही है जिस पर चुनौतियां ज्यादा है। ऐसी ही करीब 150 सीटें हैं। जिनके लिए बहुत जल्द भाजपा अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर सकती है। फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। लेकिन भाजपा उन्हें शायद ही हिमाचल से चुनाव लड़वाए। इसके अलावा पूर्व मंत्री गोबिंद सिंह ठाकुर और भाजपा के प्रदेश महामंत्री बिहारी लाल शर्मा का नाम भी चर्चा में चल रहा है। इसके अलावा तलबगारों की बात की जाए तो उनकी भी एक लंबी सूची है।



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Fri, 09 Feb 2024 21:42:49 +0530 Newsdesk
Bharat Jodo Nyay Yatra: 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' पहुंची बिहार, राज्य में करीब दो साल बाद आएंगे राहुल गांधी https://citytoday.co.in/Bharat-Jodo-Nyay-Yatra-reaches-Bihar,-Rahul-Gandhi-will-come-to-the-state-after-almost-two-years https://citytoday.co.in/Bharat-Jodo-Nyay-Yatra-reaches-Bihar,-Rahul-Gandhi-will-come-to-the-state-after-almost-two-years Bharat Jodo Nyay Yatra: कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' के तहत सोमवार को बिहार के सीमांचल किशनगंज जिले में पहुंचेंगे। जो मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। यह यात्रा इस समय बिहार में आई है, जब कांग्रेस के पूर्व सहयोगी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दिन फिर से बीजेपी के साथ गठबंधन में वापस जाने का ऐलान किया है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद गांधी की पहली बिहार यात्रा है। यहां राहुल गांधी किशनगंज में सार्वजनिक सभा संबोधित करेंगे। फिर पूर्णिया में बड़ी रैली होगी, और एक दिन बाद कटिहार में भी रैली होगी। कांग्रेस के प्रदेश इकाई के अध्यक्ष ने बताया कि गांधी अररिया जिले के रास्ते पश्चिम बंगाल को जाएंगे। और फिर बिहार लौटेंगे। इस यात्रा में कांग्रेस के गठबंधन साथियों राजद के लालू प्रसाद और कम्युनिस्ट पार्टी के भट्टाचार्य भी शामिल होंगे। कांग्रेस नेता प्रेम चंद्र मिश्रा ने बताया कि जद-यू अध्यक्ष नीतीश कुमार भी पूर्णिया में आयोजित रैली के दौरान राहुल गांधी के साथ मंच साझा करेंगे। लेकिन न्याय यात्रा के बिहार में प्रवेश करने से एक दिन पहले ही नीतीश कुमार महागठबंधन और इंडिया से नाता तोड़ राजग में चले गए। 

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Mon, 29 Jan 2024 18:49:08 +0530 Newsdesk
Jagadish Shettar Joined BJP: 6 महीने के भीतर ही कांग्रेस का दामन छोड़ कर जगदीश शेट्टार ने की घर वापसी https://citytoday.co.in/agadish-Shettar-returned-home-after-leaving-Congress-within-6-months https://citytoday.co.in/agadish-Shettar-returned-home-after-leaving-Congress-within-6-months Jagadish Shettar Joined BJP:  भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव की तैयारियों में अलग-अलग राज्यों से अच्छे संदेश आ रहे हैं। कर्नाटक में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार ने भाजपा में वापसी की है। शेट्टार को लिंगायत समुदाय का बड़ा नेता माना जाता है। जगदीश शेट्टार ने गुरुवार को भाजपा कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ले ली है। उन्हें भाजपा प्रमुख बीवाई विजयेंद्र और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सदस्यता दिलाई। शेट्टार ने बीते साल अप्रैल में भाजपा से इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि उन्हें विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला था।भाजपा की तरफ से टिकट नहीं मिलने के बाद, शेट्टार और लक्ष्मण सवादी ने पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद उन पर येदियुरप्पा ने हमला किया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी ने उन्हें हर संभव मौके दिए थे, लेकिन उन्होंने इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस में शामिल होने के लिए तैयार हैं। यह उनकी विचारधारा के खिलाफ है और वह इसके लिए माफी मांगते हैं।

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Thu, 25 Jan 2024 20:04:47 +0530 Newsdesk
Tejashwi Yadav : राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद तेजस्वी यादव बोले& राम नहीं चुनाव आ रहे हैं https://citytoday.co.in/After-the-consecration-of-Ram-temple,-Tejashwi-Yadav-said---Elections-are-coming,-not-Ram. https://citytoday.co.in/After-the-consecration-of-Ram-temple,-Tejashwi-Yadav-said---Elections-are-coming,-not-Ram. Tejashwi Yadav: अयोध्या के राम मंदिर में रामलला का भव्य आयोजन हो गया है। जिसे बीजेपी ने धूमधाम से मनाया। इस मौके पर दिवाली के त्योहार के बहाने से विपक्ष ने इसे बीजेपी का चुनावी हथकंडा बताने का आरोप लगाया है। रामलला की प्रतिष्ठा को लेकर एक सियासी उग्रवाद छिड़ा हुआ है।

इस आयोजन के दौरान आरजेडी विधायक और बिहार सरकार के मंत्री तेजप्रताप यादव ने एक विवादात्मक बयान जारी किया है। उनकी एक्स पोस्ट में उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा है कि राम नहीं आ रहे, चुनाव आ रहे हैं। इससे साफ है, कि यह विवाद सियासी रंग में बढ़ चुका है और दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। तेजप्रताप यादव ने उदाहरणदाता के रूप में कहा, "राम नहीं आ रहे हैं! चुनाव आ रहे हैं! श्रीराम तो पहले से ही हमारे मन, हृदय और कण-कण में विराजमान हैं। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री राम विष्णु जी के अवतार हैं, और भगवान विष्णु के अन्तिम अवतार "कल्कि अवतार" को कलियुग का अंत होने के बाद धर्म की पुनर्स्थापना के लिए आना बाकी है। इस प्रकार सीता रामचंद्र की जय है।

तेजप्रताप यादव ने इस पोस्ट में भगवान विष्णु के कल्कि अवतार की चर्चा भी की है और अपनी पोस्ट को 'सियावर रामचंद्र की जय' के साथ समाप्त किया है। पिछले दिनों उन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन भी एक पोस्ट में राम के अनुयायियों से साझा किया था कि राम सभी के मन में है,और उन्होंने कहा कि सबसे पहले अपने अंदर के रावण को बाहर निकालें। उन्होंने समाज में समाजवाद, महिला सुरक्षा और गरीबी की समस्याओं के खिलाफ उठने की आवश्यकता है।राम को लाना है तो अपने बुरे विचारों को बाहर निकालिए और देश को प्रेम सद्भाव और खुशहाली के रास्ते पर लेके चलिए।

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Tue, 23 Jan 2024 19:28:11 +0530 Newsdesk
Bharat Jodo Nyay Yatra : राहुल गांधी मणिपुर से शुरू करेंगे अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ https://citytoday.co.in/240 https://citytoday.co.in/240 Bharat Jodo Nyay Yatra: कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत जोड़ों यात्रा के बाद अब अपनी दूसरी यात्रा "भारत जोड़ो न्याय यात्रा" के लिए पूरी तैयारी में हैं। राहुल गांधी की इस यात्रा की शुरुआत 14 जनवरी से होगी। अब यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ों न्याय यात्रा कहां से शुरू होगी। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने इसकी जानकारी साझा की है, जिससे सभी में स्पष्टता हुई है।

Bharat Jodo Nyay Yatra: कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा है कि, "14 जनवरी से राहुल गांधी मणिपुर से भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू करेंगे। इस यात्रा से सभी को प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा घबराई हुई है कि अगर विपक्ष के लोग एकजुटता से चुनाव लड़ेंगे तो चुनौती खड़ी होगी। और मुझे विश्वास है कि INDIA गठबंधन अच्छा प्रदर्शन करेगा। वहीं लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे के सवाल पर सचिन पायलट ने कहा है कि, सीटों का बंटवारा जल्दी ही होगा। 

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Tue, 09 Jan 2024 22:42:10 +0530 Newsdesk
Mallikarjun Kharge on Maldives Dispute: खड़गे ने पीएम मोदी पर साधा निशाना कहा& विदेश नीति पर अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं https://citytoday.co.in/238 https://citytoday.co.in/238 Mallikarjun Kharge on Maldives Dispute:राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी पर निशाना साधते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने मालदीव विवाद पर टिप्पणी करते हुए राज्यसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश नीति के मामलों में अपनी इच्छानुसार काम कर रहे हैं। कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान, उन्होंने मालदीव में चल रहे विवाद पर पूछे जाने पर यह दिखाया कि उन्हें अपने राजनीतिक दृष्टिकोण से मुद्दा समझने में कठिनाई हो रही है।

Mallikarjun Kharge on Maldives Dispute: खड़गे ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यक्तिगत रूप से सभी मामलों में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमें अपने पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षित और स्थिर संबंध बनाए रखने की आवश्यकता है।"उन्होंने कहा, "हालांकि, जीवन में आने वाली चुनौतियों और कठिनाईयों के बावजूद, हमें हमेशा संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए। संघर्ष को समझने का यही एक तरीका है कि हम अपनी इच्छा से सही कदम उठाएं, जैसा कि दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश की स्थापना की थी।"

उन्होंने बताया, "पीएम मोदी विदेश नीति को अपनी दृष्टि से संचालित कर रहे हैं और इसमें वे अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं।" खड़गे ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी किसी को भी गले मिला लेते हैं और अपनी मर्जी से लोगों को पटकनी भी देते हैं।"हालांकि, हम अपने चारों ओर के लोगों को नहीं बदल सकते हैं। हमें एक साथ रहना होगा और प्रगति करना होगा। लेकिन जब कोई हम पर हमला करता है, तो हमें उसका सामना करने और उसके खिलाफ खड़ा होने के लिए तैयार रहना चाहिए।"

इसके साथ ही, भारतीय राष्ट्रीय जनतांत्रिक समावेशी गठबंधन (इंडिया) ने समृद्धि की दिशा में साथ में कदम बढ़ाने का निर्णय लिया है। खड़गे ने बताया कि बुधवार को नई दिल्ली में कई बैठकें आयोजित की गई हैं और सभी संसदीय क्षेत्रों में पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है।

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Tue, 09 Jan 2024 22:12:03 +0530 Newsdesk
JDU Meeting : जेडीयू की बैठक में ललन सिंह ने अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा, नीतीश कुमार बन सकते है नए अध्यक्ष https://citytoday.co.in/168 https://citytoday.co.in/168 नई दिल्‍ली। JDU Meeting: जनता दल यूनाइटेड (JDU) अध्‍यक्ष पद से ललन सिंह ने इस्‍तीफा दे दिया है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) अध्‍यक्ष पद से ललन सिंह ने इस्‍तीफा दे दिया है। पार्टी ने ललन सिंह के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। सूत्रों के अनुसार, जेडीयू के अध्यक्ष ललन सिंह ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी प्रमुख के पद के लिए नीतीश कुमार के नाम का प्रस्ताव रखा। जेडीयू में सांगठनिक परिवर्तन को लेकर काफी समय से चर्चाएं चल रही थीं। हालांकि, बैठक से पहले ललन सिंह ने अपने इस्तीफे की खबरों को अफवाह माना था। लेकिन इस्तीफे के बाद अब इस पद के लिए नीतीश कुमार का नाम लिया गया है। परिणामस्वरूप, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी के नए अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल सकते है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ललन सिंह आज राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में एक साथ शामिल होने के लिए पहुंचे थे। नीतीश कुमार पार्टी कार्यालय पहुंचते ही कार्यकर्ताओं ने उनके लिए जिंदाबाद के नारे लगाए। बैठक के दौरान, ललन सिंह ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव में अपनी सक्रियता को देखते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है, और वह नीतीश कुमार का नाम अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। नीतीश कुमार के नाम पर तुरंत सहमति हो गई है।

पिछले कुछ दिनों से मीडिया में एक वर्ग में यह अफवाहें फैल रही थीं। कि ललन सिंह को सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से कथित निकटता के कारण अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है। मीडिया में यह भी दावा किया जा रहा था। कि पिछले साल अगस्त में भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद नीतीश कुमार फिर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर मोड़ सकते हैं।

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Fri, 29 Dec 2023 18:00:30 +0530 Newsdesk
Shashi Tharoor Challenge to PM Modi: शशि थरूर का आखिरी चुनाव, कहा& अगर पीएम मोदी भी मेरे खिलाफ चुनाव लड़ें तो भी मैं जीतूंगा https://citytoday.co.in/142 https://citytoday.co.in/142 Shashi Tharoor Challenge to PM Modi:कांग्रेस नेता शशि थरूर ने मंगलवार को घोषणा की कि वह 2024 में तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से चौथी बार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जो उनके लिए आखिरी चुनाव हो सकता है। थरूर ने एक टीवी चैनल के साथ की गई बातचीत में यह बयान दिया और कहा, "मैं यहां से दोबारा चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी करेगी और अगर मुझसे कहा गया तो मैं लड़ूंगा।" उन्होंने यह भी जताया कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके खिलाफ चुनाव लड़ते हैं, तो भी में जीतूंगा। थरूर ने कहा, "मैं अपने रिकॉर्ड के आधार पर चुनाव लड़ रहा हूं, और अगर लोग ऐसा सोचते हैं, तो उन्हें मुझे बदलने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह इस पर आधारित नहीं होगा, कि मैं किसके साथ लड़ रहा हूं।"

जब मैंने पहली बार चुनाव लड़ा, तो मेरी इच्छा विदेश मंत्री बनने की थी, जो नहीं हुई, अब यह लोगों को तय करना है।" जब उनसे पूछा गया कि क्या वह केरल विधानसभा के लिए चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं, तो उन्होंने कहा, "फिलहाल मेरा ध्यान लोकसभा चुनावों पर है और उस समय की परिस्थितियों के आधार पर, इस पर विचार करूंगा।"

संयुक्त राष्ट्र में पूर्व अवर महासचिव, थरूर ने भारत वापस आने के बाद तत्कालीन कांग्रेस के शीर्ष अधिकारियों से मिलने के बाद 2009 के लोकसभा चुनावों में तिरुवनंतपुरम से पार्टी का टिकट हासिल किया।

उन्होंने एक हैट्रिक पूरी की है, जब 2014 में उनकी पत्नी सुनंदा पुस्कर की असामयिक मृत्यु के बाद वह तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सीट के लिए चुनाव लड़े और जीत हासिल की। उन्होंने लोकसभा सदस्य के रूप में तीन बार चुनाव जीते हैं, जो सीधे तौर पर उनकी कठिनाईयों और परिस्थितियों को दिखाते हैं। उनकी दो बार की जीत के बाद, उन्होंने 2019 में भी चुनाव जीता, जिसमें उन्होंने 99,989 वोटों के अंतर से विजय प्राप्त की। इससे पहले, 2014 में उनकी जीत का अंतर 15,470 वोट था और 2009 में उनके पहले चुनाव में यह अंतर 99,998 वोट था। थरूर की कार्यशैली ने उन्हें एक अलग रूप से पहचान दिलाई है, और उन्होंने कांग्रेस के विरोधियों के साथ मिलकर नहीं जाएं हैं, इसका संकेत दिया है।

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Tue, 26 Dec 2023 19:11:28 +0530 Newsdesk
PM Modi : संजय राउत को बड़ी राहत, राजद्रोह का आरोप हटाया गया https://citytoday.co.in/91 https://citytoday.co.in/91 PM Modi: महाराष्ट्र पुलिस ने शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र "सामना" के कार्यकारी संपादक संजय राउत के खिलाफ लगाए गए राजद्रोह के आरोप को हटा दिया है। इसके पीछे बीजेपी की शिकायत पर आधारित था, जिसमें राउत को "सामना" के कॉलम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी करने का आरोप था। पुलिस ने कहा कि कानूनी सलाह और राय लेने के बाद आरोप हटाया गया है और मामले की जांच जारी है।

एक अधिकारी ने मंगलवार को यह बताया कि महाराष्ट्र पुलिस ने "सामना" के कार्यकारी संपादक संजय राउत के खिलाफ राजद्रोह के आरोप को हटा दिया है। संजय राउत शिवसेना (यूबीटी) के नेता हैं और "सामना" के कार्यकारी संपादक भी हैं। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने कानूनी राय लेने और परामर्श करने के बाद राउत के खिलाफ लगाए गए राजद्रोह के आरोप को हटा दिया गया है। पुलिस अधिकारी ने कहा, ह्यह्यमामले में कानूनी राय लेने के बाद, पुलिस ने मामले से राजद्रोह का आरोप हटाने का फैसला किया। यवतमाल जिले की पुलिस ने 11 दिसंबर को शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य को 'सामना' में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर मामला दर्ज किया था। यहां राउत के खिलाफ धारा 124 (ए) (राजद्रोह), 153 (ए) (धर्म, नस्ल, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने), धारा 505 (2) (वर्गों के बीच शत्रुता, घृणा या दुर्भावना पैदा करने या बढ़ावा देने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया गया था। 

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Wed, 20 Dec 2023 20:19:33 +0530 Newsdesk
India Alliance Meeting: इंडिया' गठबंधन की आज चौथी बैठक, लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों पर हो सकती है चर्चा  https://citytoday.co.in/76 https://citytoday.co.in/76 दिल्ली India Alliance Meeting:19 दिसंबर यानि की आज मंगलवार को होने वाली इस अहम बैठक में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने आने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए सीट के बंटवारे, रणनीति तय करने, और साझा जनसभाओं की योजना बनाने पर चर्चा होगी। कांग्रेस के हाल के चुनावों में हार के बाद, इस बैठक को और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजस्थान, छत्तीसगढ़, और मध्य प्रदेश में हार के कारण भी यह बैठक अहम मानी जा रही है। यह बैठक दोपहर 3 बजे दिल्ली के अशोका होटल में होगी।

इस बैठक से पहले, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को घोषणा की कि 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस' के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का चयन 2024 के बाद किया जाएगा।"

"सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में सकारात्मक एजेंडा बनाने, सीटों का बंटवारा करने, नई रणनीतियों की तैयारी करने, और साझा जनसभाओं की योजना बनाने के लिए मुख्य रूप से चर्चा की जा सकती है। 

"ममता बनर्जी ने कहा, 'देर आए दुरुस्त आए.' यह पूछे जाने पर कि क्या ‘इंडिया' गठबंधन सीट-बंटवारे जैसे मुद्दों पर कदम उठाने में देर कर रहा है। इस सवाल पर ममता बनर्जी ने कहा, 'देर आए दुरुस्त आए.' टीएमसी प्रमुख ने कहा कि वह देश भर में गठबंधन सहयोगियों के लिए प्रचार करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ भी बैठक की और देश की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की है।

वहीं बिहार के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि पहले गठबंधन की जो समितियां बनाई गई थीं, वो पर्दे के पीछे काम कर रही थीं और चुनाव की तैयारी की जा रही थी. तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्षी समूह में हर कोई अपनी भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय दल बहुत मजबूत हैं।

राजद नेता ने कहा, 'जहां भी क्षेत्रीय पार्टियां हैं, वहां भाजपा कहीं नजर नहीं आती. ज्यादातर क्षेत्रीय पार्टियां ‘इंडिया' गठबंधन के साथ हैं। 

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Tue, 19 Dec 2023 19:10:09 +0530 Newsdesk
Donate For Desh Campaign: लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने शुरू किया 'डोनेट फॉर देश' अभियान https://citytoday.co.in/68 https://citytoday.co.in/68 Donate For Desh Campaign:18 दिसंबर को, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले 'डोनेट फॉर देश' (donateinc.in) क्राउडफंडिंग अभियान की शुरुआत की। खरगे ने आम लोगों को योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया।

 और कांग्रेस पार्टी के लिए एक लाख 38 हजार रुपये का दान भी किया। 'डोनेट फॉर देश' पहले से ही लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन चुका है। नेटिजेंस ने दावा किया है, कि कांग्रेस पार्टी की आईटी सेल ने सबसे सस्ता टॉप-लेवल डोमेन (TLD) डोनेट nic.in का चयन किया है। कुछ लोगों ने यह भी कहा है कि सबसे पुरानी पार्टी ने कथित तौर पर donatefordesh.com और donatefordesh.org डोमेन नाम खो दिए हैं, क्योंकि उन्हें महत्वपूर्ण डोमेन बुक करने में विफलता का सामना करना पड़ा है। एक यूजर ने ट्वीट किया है कि donatefordesh.com ऑपइंडिया सपोर्ट पर रीडायरेक्ट करता है, जबकि donatefordesh.org बीजेपी डोनेशन पेज पर रीडायरेक्ट करता है। 

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Mon, 18 Dec 2023 20:22:56 +0530 Newsdesk
Security lapse In Lok Sabha:सुरक्षा चूक के मामले में उच्च&स्तरीय जांच शुरू , सरकार ने कहा राजनीति नहीं करनी चाहिए https://citytoday.co.in/43 https://citytoday.co.in/43 Security lapse In Lok Sabha : सरकार ने बताया कि लोकसभा में हुई सुरक्षा चूक की घटना के मामले में एक उच्च-स्तरीय जांच की शुरुआत की गई है और विपक्ष को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। सदन में हुई कार्यवाही के बाद, विपक्षी सदस्यों ने सुरक्षा की चूक से संबंधित नारेबाजी शुरू की। संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सभी दलों के सदन के नेताओं की बैठक में सुझाव सुने गए और उनमें से कुछ को लागू किया गया है। उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों पर सदस्यों से राजनीति नहीं करने का आग्रह किया।

उन्होंने बताया कि घटना के तत्काल बाद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के नेताओं को मिलकर संसद की सुरक्षा को सुधारने के लिए बैठक बुलाई। जोशी ने बताया कि कुछ सांसदों के सुझावों को पहले से ही लागू किया गया है, और आज अध्यक्ष ने खुद भी इसे मजबूत करने के लिए और कदम उठाने की संकेत दी हैं। मंत्री ने जताया कि इस राष्ट्रीय मुद्दे को किसी सदस्य द्वारा राजनीतिक बनाए रखना उचित नहीं है।

1974 से 1999 तक संसद में सुरक्षा चूक की कुछ घटनाओं का विवरण देते हुए जोशी ने उभरा दिया कि पहले भी दीर्घकालिक घटनाओं में तत्कालीन अध्यक्षों के निर्देशों के अनुसार त्वरित कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, "मैं इन घटनाओं की कल की घटना से तुलना नहीं कर रहा हूं। फिर भी हमें अपने अतीत से सीखना चाहिए, ताकि भविष्य उज्ज्वल हो।" जोशी ने उज्ज्वल भविष्य के लिए ऐसे मामलों में इतिहास से सीख निकालने की महत्वपूर्णता पर जोर दिया।

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Thu, 14 Dec 2023 20:40:21 +0530 Newsdesk