Sehore: जलसंकट ने बढ़ाई मुश्किलें, हैंडपंप सूखे, ग्रामीण परेशान
सीहोर जिले में भीषण गर्मी के साथ जलसंकट गहराया, 900 हैंडपंप सूखे, ग्रामीण परेशान। पीएचई ने 899 हैंडपंपों की मरम्मत, 29 में मोटर पंप और 10 नल-जल योजनाएं चालू कीं। लोग पानी के लिए भटक रहे, विभाग ने शिकायत केंद्र बनाकर तत्काल कार्रवाई शुरू की।
सीहोर: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में भीषण गर्मी के साथ-साथ जलसंकट ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पानी की किल्लत इस कदर बढ़ गई है कि हैंडपंप और ट्यूबवेल तक जवाब दे रहे हैं। पानी की तलाश में लोग दिन-रात भटक रहे हैं, लेकिन राहत मिलने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
हैंडपंप बने शोपीस, जलस्तर तेजी से गिरा
पिछले एक महीने में जिले में करीब 900 हैंडपंपों ने काम करना बंद कर दिया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के अनुसार, जलस्तर के तेजी से नीचे जाने के कारण इन हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता खत्म हो गई है। विभाग ने इस दौरान 899 हैंडपंपों में सुधार कार्य किया, जिसमें पाइप बढ़ाने और मरम्मत जैसे कदम शामिल हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में आष्टा (225 हैंडपंप), बुधनी (195), सीहोर (175), भैरूंदा (155) और इछावर (149) शामिल हैं।
29 हैंडपंपों में लगाए गए मोटर पंप
जलस्तर के अत्यधिक नीचे चले जाने से 29 हैंडपंप पूरी तरह बंद हो गए थे। इनमें पानी की आपूर्ति शुरू करने के लिए सिंगल-फेस मोटर पंप लगाए गए हैं। सीहोर में 13, आष्टा में 7, इछावर में 6 और बुधनी में 3 मोटर पंप स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, 25 नए हैंडपंप भी स्थापित किए गए हैं, जिनमें सीहोर में 20, आष्टा में 4 और इछावर में 1 शामिल हैं।
नल-जल योजनाएं भी बंद, विभाग के सामने चुनौती
जलसंकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले की 10 नल-जल योजनाएं जल स्रोतों की कमी के कारण बंद हो चुकी थीं। पीएचई ने इनमें से सीहोर के 8 गांवों (हैदरगंज, सिकन्दरगंज, सतोरनिया, तोरनिया, कसारखेडी, सरखेडा, छापरी दोराहा, झागरिया), इछावर के 1 गांव (मोहनपुर नोआबाद) और आष्टा के 1 गांव (अरनियाराम) में नलकूप खनन कर योजनाओं को फिर से चालू किया है।
लोगों की गुहार, शिकायत केंद्र स्थापित
जलसंकट से परेशान लोग रोजाना कलेक्ट्रेट और पीएचई कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पीएचई ने जिला और विकासखंड स्तर पर शिकायत केंद्र बनाए हैं। विभाग के कार्यपालन यंत्री प्रदीप सक्सेना ने बताया कि जल प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई की जा रही है और पेयजल व्यवस्था को सुचारू करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का हाल बेहाल
जिले के कई गांवों में लोग सुबह से रात तक पानी के इंतजाम में जुटे हैं। हैंडपंपों के सूखने और जलस्तर के नीचे जाने से पानी की एक-एक बूंद के लिए ग्रामी tribunnews.com की रिपोर्ट के अनुसार, कई गांवों में लोग दूर-दूर तक पानी की तलाश में भटक रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
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