पहलगाम हमले का एक महीना: घाटी में अब भी तनाव, हालात नाजुक
पहलगाम हमले के बाद ठीक एक महीना पूरा होने के मौके पर जम्मू और कश्मीर में हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. हमले के बाद के घटनाक्रम ने भारत-पाकिस्तान संबंधों पर भी गहरी छाप छोड़ी है.इस एक महीने में जम्मू-कश्मीर और वहां के लोगों की जिंदगी ही बदल गई है.
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले को आज एक महीना पूरा हो गया है, लेकिन घाटी में हालात अब भी नाजुक बने हुए हैं। बैसरन घाटी में चार आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला कर 26 लोगों की जान ले ली थी, जिसमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था, लेकिन एक महीने बाद भी हमलावरों का कोई सुराग नहीं मिला है, जिससे स्थानीय लोगों और प्रशासन में बेचैनी बढ़ गई है।
हमले के बाद सेना, एनआईए, और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बैसरन घाटी के 54 रास्तों पर तलाशी अभियान तेज कर दिया है। खराब मौसम और घने जंगलों ने सर्च ऑपरेशन में बाधा डाली, लेकिन सुरक्षा बलों ने हार नहीं मानी। सूत्रों के मुताबिक, हमलावरों को स्थानीय समर्थन मिलने की आशंका है, जिसके चलते 15 संदिग्धों की पहचान की गई है, जिनके मोबाइल हमले के समय सक्रिय थे।
हमले के बाद पहलगाम में सन्नाटा पसरा है। पर्यटक शहर छोड़कर चले गए, जिससे पर्यटन पर निर्भर स्थानीय अर्थव्यवस्था ठप हो गई है। कश्मीरियों में डर और अनिश्चितता का माहौल है। वहीँ आपको बता दे की हमले में मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा देने की मांग उठी, जिसे पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। विपक्षी नेता राहुल गांधी ने हमले में मारे गए नेवी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के परिवार से मुलाकात की और पीड़ितों को न्याय की मांग की। वहीं, ऋषिकेश एम्स के एक डॉक्टर के खिलाफ हमले के बाद मिठाई बांटने और आपत्तिजनक पोस्ट करने पर मुकदमा दर्ज किया गया।
हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह खालिद कसूरी ने वीडियो जारी कर हमले से इनकार किया, लेकिन खुफिया एजेंसियां उसे पकड़ने के लिए सक्रिय हैं। सुरक्षा बलों ने 20 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है, और सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखने का वादा किया है।
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