इंदौर में दूषित पानी का कहर: 18 मौतें, 3200 बीमार, लापरवाही उजागर

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इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों की संख्या 3200 के पार पहुंच गई है। सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हैं। इस भयावह त्रासदी के पीछे नगर निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाह कार्यशैली सामने आई है। जर्जर जल सप्लाई लाइन बदलने का प्रस्ताव एमआईसी में पास होने के बावजूद फाइलों की लेटलतीफी ने हालात बिगाड़ दिए।

बुधवार देर रात इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन सिंह ने दोनों के साथ करीब डेढ़ घंटे तक बैठक की। दूषित पानी से हुई मौतों, प्रशासनिक तालमेल की कमी और हालात न संभाल पाने पर कड़ी फटकार भी लगाई गई।

जानकारी के मुताबिक, 25 नवंबर 2022 को एमआईसी में भागीरथपुरा में नई नर्मदा पाइप लाइन बिछाने का प्रस्ताव पास हुआ, लेकिन महापौर ने इस पर 67 दिन बाद हस्ताक्षर किए। टेंडर और वर्क ऑर्डर में भी भारी देरी हुई, जिससे 10 माह में पूरा होने वाला काम 35 माह में भी पूरा नहीं हो सका।

बैठक में संघ ने भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया। प्राथमिकता भागीरथपुरा के हालात सुधारने, मरीजों के इलाज और इंदौर की छवि बचाने पर रखी गई है।