श्रमिकों को ई-स्कूटी खरीदने ₹40 हजार तक की मदद, 49 तरह के निर्माण श्रमिकों को मिलेगा लाभ
बढ़ई, वेल्डर, प्लम्बर और राजमिस्त्री समेत निर्माण श्रमिकों के लिए योजना
मध्य प्रदेश में निर्माण श्रमिकों के लिए सरकार ने ई-स्कूटर खरीदने पर आर्थिक सहायता देने की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत बढ़ई, वेल्डर, प्लम्बर, राजमिस्त्री समेत 49 प्रकार के निर्माण कार्यों से जुड़े पंजीकृत श्रमिकों को इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी। श्रम विभाग के अंतर्गत आने वाले भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित ‘भवन एवं अन्य सन्निर्माण ई-स्कूटर हेतु अनुदान योजना, 2024’ के तहत पात्र श्रमिकों को ई-स्कूटर की खरीद पर अनुदान दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य श्रमिकों को अपने काम के लिए आने-जाने में सुविधा देना और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
ई-स्कूटर की कीमत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹40 हजार की सहायता
योजना के तहत पात्र निर्माण श्रमिक को ई-स्कूटर की कुल कीमत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 40 हजार रुपए तक का अनुदान दिया जाएगा। इसमें जो राशि कम होगी, वही श्रमिक को सहायता के रूप में मिलेगी। उदाहरण के तौर पर यदि ई-स्कूटर की कीमत 70 हजार रुपए है तो उसकी कीमत का 50 प्रतिशत यानी 35 हजार रुपए अनुदान के रूप में मिल सकता है। वहीं यदि स्कूटर की कीमत 1 लाख रुपए है तो 50 प्रतिशत राशि 50 हजार रुपए होगी, लेकिन योजना के तहत अधिकतम 40 हजार रुपए ही दिए जाएंगे। स्वीकृत अनुदान की राशि सीधे पात्र श्रमिक के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।
इस साल 1 हजार श्रमिकों को मिलेगा योजना का लाभ
योजना के तहत सरकार ने इस साल 1 हजार निर्माण श्रमिकों को ई-स्कूटर खरीदने के लिए अनुदान देने का कोटा तय किया है। लाभार्थियों का चयन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। यानी जो पात्र श्रमिक पहले आवेदन करेंगे और जिनके आवेदन निर्धारित नियमों के अनुसार स्वीकृत होंगे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर योजना का लाभ दिया जाएगा। 1 हजार आवेदन स्वीकृत होने के बाद उस वर्ष के लिए निर्धारित लाभार्थियों की संख्या पूरी मानी जाएगी। इसलिए पात्र श्रमिकों के लिए समय पर आवेदन करना महत्वपूर्ण होगा।
दिव्यांग श्रमिकों के लिए 60 सीटें आरक्षित
सरकार ने योजना में दिव्यांग निर्माण श्रमिकों के लिए भी विशेष प्रावधान किया है। निर्धारित 1 हजार लाभार्थियों के कोटे में से 60 सीटें दिव्यांग श्रमिकों के लिए आरक्षित रखी गई हैं। इससे निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले दिव्यांग श्रमिकों को भी इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। योजना का लाभ उन्हीं श्रमिकों को मिलेगा जो निर्धारित पात्रता और पंजीयन संबंधी शर्तों को पूरा करते हैं।
मध्य प्रदेश में 17 लाख निर्माण श्रमिक पंजीकृत
मध्य प्रदेश में भवन एवं अन्य निर्माण कार्यों से जुड़े करीब 17 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं। इनमें अलग-अलग तरह के निर्माण कार्य करने वाले श्रमिक शामिल हैं। ई-स्कूटर अनुदान योजना के जरिए सरकार इन पंजीकृत श्रमिकों को निजी आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने में आर्थिक मदद उपलब्ध करा रही है। इलेक्ट्रिक स्कूटर मिलने से श्रमिकों को काम के स्थान तक पहुंचने में सुविधा होने के साथ ही पेट्रोल-डीजल पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है।
अनुदान से खरीदा ई-स्कूटर 3 साल तक नहीं बेच सकेंगे
योजना का लाभ लेने वाले श्रमिकों के लिए वाहन को लेकर भी एक महत्वपूर्ण नियम निर्धारित किया गया है। अनुदान की राशि से खरीदे गए ई-स्कूटर को लाभार्थी तीन साल तक किसी दूसरे व्यक्ति को बेच नहीं सकेगा। यानी योजना के तहत वाहन खरीदने के बाद निर्धारित तीन साल की अवधि तक उसे अपने पास रखना होगा। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की ओर से दी गई आर्थिक सहायता का इस्तेमाल वास्तव में श्रमिक के व्यक्तिगत आवागमन के लिए ही हो।
पहले आओ-पहले पाओ के कारण आवेदन में देरी न करें
इस योजना में हर साल लाभार्थियों की संख्या 1 हजार तक सीमित है और चयन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर किया जाना है। ऐसे में पात्र निर्माण श्रमिकों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद समय पर आवेदन करना जरूरी होगा। निर्धारित कोटा पूरा होने के बाद उसी वर्ष नए आवेदकों को योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। योजना के नियमों के अनुसार पात्रता पूरी करने वाले श्रमिकों को ही अनुदान की राशि प्रदान की जाएगी।
news desk MPcg