इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 7-8 बाघों की मौजूदगी की संभावना, बनेगा टाइगर मूवमेंट सेल

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 7-8 बाघों की मौजूदगी की संभावना, बनेगा टाइगर मूवमेंट सेल

बस्तर संभाग के तीन जिलों में एक साल से दर्ज हो रही बाघों की गतिविधियां, निगरानी बढ़ाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने पर जोर

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पिछले करीब एक साल से अलग-अलग इलाकों में बाघों की मौजूदगी दर्ज की जा रही है। दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव जिलों में बाघों की गतिविधियां सामने आने के बीच वन विभाग ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व में करीब 7 से 8 बाघ होने की संभावना जताई है। हालांकि इन जिलों में नजर आ रहे बाघ एक ही हैं या अलग-अलग, इसको लेकर विभाग अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है।

बाघों की गतिविधियों पर अब रखी जाएगी विशेष नजर

वन विभाग ने बाघों की आवाजाही और गतिविधियों पर वैज्ञानिक तरीके से निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए संबंधित वनमंडलों में टाइगर मूवमेंट सेल स्थापित किए जाएंगे। इन सेल के जरिए बाघों की मौजूदगी से जुड़े आंकड़े जुटाने, उनकी गतिविधियों को समझने और संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने की व्यवस्था की जाएगी।

DFO की निगरानी में काम करेगा सेल

विभागीय व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक संबंधित वनमंडल में टाइगर मूवमेंट सेल वनमंडलाधिकारी यानी DFO की प्रत्यक्ष निगरानी में काम करेगा। अधिकारियों को बाघों की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

SDO को बनाया जाएगा नोडल अधिकारी

टाइगर मूवमेंट सेल के संचालन के लिए संबंधित उप वनमंडलाधिकारी को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके साथ ही वन परिक्षेत्र अधिकारियों और बीट अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट रूप से तय की जाएंगी। किसी विशेष स्थिति में वन्यप्राणी वृत्त कार्यालय के साथ समन्वय कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने पर फोकस

बाघों की मौजूदगी वाले इलाकों में वन विभाग की प्राथमिकता निगरानी के साथ-साथ मानव और वन्यजीव के बीच संभावित संघर्ष को रोकना है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बाघ की गतिविधि की सूचना मिलने पर स्थानीय स्तर पर तेजी से प्रतिक्रिया दी जाए और जरूरत के अनुसार सुरक्षा संबंधी कदम उठाए जाएं।

बाघ की लोकेशन सार्वजनिक नहीं होगी

वन विभाग ने बाघों की सटीक लोकेशन सार्वजनिक नहीं करने का निर्णय लिया है। विभाग का कहना है कि यदि बाघ की लोकेशन सार्वजनिक होती है तो मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो सकती है। इससे वन्यजीव के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए बाघों की गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को नियंत्रित तरीके से साझा किया जाएगा।

वैज्ञानिक डेटा से स्पष्ट होगी बाघों की संख्या

दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव में सामने आ रही गतिविधियों के आधार पर बाघों की संख्या को लेकर अभी संभावना जताई जा रही है। अलग-अलग स्थानों पर दिखने वाले बाघ एक ही हैं या अलग-अलग, इसकी पुष्टि निगरानी और वैज्ञानिक डेटा के आधार पर ही हो सकेगी। टाइगर मूवमेंट सेल बनने के बाद इस दिशा में व्यवस्थित जानकारी जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

जानकारी:
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 7-8 बाघ होने की संभावना जताई गई है।
दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव में पिछले करीब एक साल से बाघों की गतिविधियां दर्ज हो रही हैं।
बाघ एक ही हैं या अलग-अलग, इसकी अभी पुख्ता पुष्टि नहीं हुई है।
संबंधित वनमंडलों में टाइगर मूवमेंट सेल बनाए जाएंगे।
सेल DFO की प्रत्यक्ष निगरानी में काम करेगा।
SDO को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा।
वन परिक्षेत्र और बीट अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।
बाघों की सटीक लोकेशन सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई पर जोर रहेगा।