घर खरीदने का तरीका बदला, अब सिर्फ EMI और ब्याज नहीं देख रहे खरीदार; स्कूल-ऑफिस की दूरी से लेकर ट्रैफिक तक हो रहा हिसाब

घर खरीदने का तरीका बदला, अब सिर्फ EMI और ब्याज नहीं देख रहे खरीदार; स्कूल-ऑफिस की दूरी से लेकर ट्रैफिक तक हो रहा हिसाब

घर खरीदना लंबे समय से भारतीय परिवारों के लिए सबसे बड़े वित्तीय फैसलों में से एक रहा है। पहले प्रॉपर्टी खरीदते समय बजट, डाउन पेमेंट, होम लोन की ब्याज दर और EMI को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता था। लेकिन अब खासकर युवा होमबायर्स के लिए ‘अफोर्डेबिलिटी’ का मतलब बदल रहा है। खरीदार यह देखने लगे हैं कि घर खरीदने के बाद वहां रोजमर्रा की जिंदगी कितनी सुविधाजनक और आरामदायक रहेगी।

अब केवल यह सवाल नहीं रह गया है कि कितने रुपये का घर खरीदा जा सकता है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि घर से ऑफिस पहुंचने में कितना समय लगेगा, बच्चों के स्कूल की दूरी कितनी है और बाजार, अस्पताल व सार्वजनिक परिवहन कितनी आसानी से उपलब्ध हैं।

घर की कीमत के साथ इलाके की भी जांच

कई खरीदार प्रॉपर्टी फाइनल करने से पहले इलाके का अलग-अलग समय पर जायजा ले रहे हैं। सुबह ऑफिस जाने के समय और शाम को पीक आवर में ट्रैफिक की स्थिति कैसी रहती है, घर से मुख्य सड़क तक पहुंचने में कितना समय लगता है और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा कितनी बेहतर है—इन बातों को भी निर्णय का हिस्सा बनाया जा रहा है।

यानी एक ऐसा घर जिसकी कीमत थोड़ी कम है, लेकिन वहां से रोज ऑफिस पहुंचने में डेढ़-दो घंटे लगते हैं, जरूरी नहीं कि वह खरीदार के लिए वास्तव में सस्ता साबित हो। दूसरी ओर, बेहतर कनेक्टिविटी वाले इलाके में महंगा घर लंबे समय में समय और यात्रा खर्च बचा सकता है।

स्कूल और अस्पताल भी बने अहम फैक्टर

परिवारों के लिए घर के आसपास अच्छे स्कूल और अस्पताल की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। खासकर बच्चों वाले परिवार प्रॉपर्टी खरीदने से पहले यह देख रहे हैं कि स्कूल कितनी दूरी पर है और रोज बच्चों को लाने-ले जाने में कितना समय लगेगा।

इसी तरह अस्पताल, मेडिकल स्टोर, किराना बाजार, शॉपिंग सेंटर और दूसरी रोजमर्रा की जरूरतों की सुविधाएं घर के आसपास होना भी खरीदारों की प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है।

ड्रेनेज और पानी जैसी सुविधाओं पर भी नजर

प्रॉपर्टी की खूबसूरत लोकेशन या बड़ा घर ही अब पर्याप्त नहीं माना जा रहा। पानी की उपलब्धता, बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति और इलाके की ड्रेनेज व्यवस्था भी खरीदारों के लिए अहम हो गई है।

मानसून के दौरान किसी इलाके में बार-बार पानी भरता है या सड़कें खराब रहती हैं, तो इससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के साथ भविष्य में प्रॉपर्टी की मांग और कीमत पर भी असर पड़ सकता है।

ग्रीन एरिया और ऊर्जा बचत भी महत्वपूर्ण

बढ़ते शहरीकरण के बीच खरीदार अब आसपास हरियाली, पार्क और खुले स्थानों को भी महत्व दे रहे हैं। इसके साथ ही घर की ऊर्जा खपत, प्राकृतिक रोशनी और हवा जैसी चीजों पर भी ध्यान बढ़ा है।

ऐसे घर और इलाके जहां बेहतर पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, जल निकासी, पानी की सुविधा और हरियाली मौजूद हो, वे भविष्य में रहने के लिहाज से ज्यादा आकर्षक साबित हो सकते हैं।

तेजी से बढ़ते शहरों में बढ़ी जरूरत

भारत के तेजी से विस्तार करते शहरों और महानगरों में लोगों की यात्रा का समय लगातार महत्वपूर्ण हो रहा है। शहर के एक हिस्से में सस्ता घर खरीदना और रोज लंबी दूरी तय करना कई परिवारों के लिए व्यावहारिक विकल्प नहीं रह गया है।

यही वजह है कि होमबायर्स अब ‘घर की कीमत + होम लोन की EMI’ के साथ ‘रोजमर्रा की जिंदगी की लागत’ को भी जोड़कर फैसला लेने लगे हैं। इसमें आने-जाने का खर्च, समय, बच्चों की यात्रा, आसपास की सुविधाएं और भविष्य में इलाके के विकास की संभावनाएं शामिल हैं।

प्रॉपर्टी खरीदने से पहले किन बातों की जांच करें?

घर खरीदने से पहले खरीदारों के लिए केवल प्रॉपर्टी की कीमत और लोन की ब्याज दर देखना पर्याप्त नहीं है। इलाके की कनेक्टिविटी, ट्रैफिक, स्कूल, अस्पताल, बाजार, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पानी, ड्रेनेज, हरियाली और भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की भी जानकारी लेना जरूरी है।

इस बदलाव से साफ है कि आज के खरीदार के लिए ‘अच्छा घर’ सिर्फ चार दीवारों और कीमत का नाम नहीं है। ऐसी प्रॉपर्टी ज्यादा आकर्षक हो सकती है, जहां घर के साथ सुविधाजनक लोकेशन और बेहतर जीवनशैली भी मिल सके।