कॉकरोच जनता पार्टी: 2 करोड़ फॉलोअर्स के साथ अचानक बनी चर्चा का केंद्र, फाउंडर के माता-पिता चिंतित

कॉकरोच जनता पार्टी: 2 करोड़ फॉलोअर्स के साथ अचानक बनी चर्चा का केंद्र, फाउंडर के माता-पिता चिंतित

नई दिल्ली में इन दिनों एक अनोखी डिजिटल पहल कॉकरोच जनता पार्टी तेजी से चर्चा में है। इस ऑनलाइन ग्रुप ने सोशल मीडिया पर सिर्फ कुछ ही दिनों में करीब 2 करोड़ फॉलोअर्स जुटाकर सभी राजनीतिक दलों को भी पीछे छोड़ दिया है।

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के फाउंडर अभिजीत दीपके हैं, जो फिलहाल अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं। उनके माता-पिता ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस अचानक मिली लोकप्रियता से वे बेहद परेशान हैं और उन्हें डर है कि उनका बेटा किसी कानूनी या राजनीतिक मुश्किल में न फंस जाए।

माता-पिता की चिंता बढ़ी

अभिजीत के पिता भगवान दीपके और मां अनीता दीपके महाराष्ट्र के संभाजीनगर में रहते हैं। उन्होंने कहा कि अभिजीत हमेशा से राजनीति में जाने के इच्छुक नहीं थे, और अचानक बढ़ती लोकप्रियता ने परिवार की नींद उड़ा दी है। परिवार का कहना है कि सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ते फॉलोअर्स और चर्चा के चलते उन्हें डर है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो जाए।

कैसे शुरू हुआ यह डिजिटल मूवमेंट

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट से हुई, जो बहुत तेजी से वायरल हो गई। इसके बाद कुछ ही दिनों में यह एक डिजिटल मूवमेंट के रूप में बदल गया। इस प्लेटफॉर्म ने खुद को एक व्यंग्यात्मक और सोशल मीडिया आधारित राजनीतिक प्रयोग बताया है, जिसका उद्देश्य युवाओं की ऑनलाइन भागीदारी को दर्शाना है।

सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ी लोकप्रियता

कई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस डिजिटल ग्रुप के फॉलोअर्स कुछ ही समय में करोड़ों तक पहुंच गए। इससे यह देश की सबसे तेजी से बढ़ने वाली ऑनलाइन पॉलिटिकल कम्युनिटी में शामिल हो गया है।

विवाद और चर्चा दोनों तेज

इस पहल को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे डिजिटल क्रिएटिविटी और व्यंग्य मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे गंभीर राजनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं वहीं फाउंडर अभिजीत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कथित हैकिंग और अकाउंट ब्लॉकिंग जैसी समस्याओं का भी दावा किया है, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।

युवाओं के बीच तेजी से बढ़ता ट्रेंड

इस डिजिटल मूवमेंट ने खासकर युवाओं के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की है। सोशल मीडिया ट्रेंड्स, मीम्स और ऑनलाइन कैंपेन के जरिए यह तेजी से फैलता जा रहा है।

हालांकि, इसके बढ़ते प्रभाव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस भी शुरू हो गई है कि क्या यह केवल एक डिजिटल ट्रेंड है या आने वाले समय में इसका कोई बड़ा प्रभाव भी देखने को मिल सकता है।