ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत, ED केस की सुनवाई 18 अगस्त तक टली

ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत, ED केस की सुनवाई 18 अगस्त तक टली

Supreme Court of India ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई फिलहाल टाल दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

क्या है पूरा मामला

यह मामला राजनीतिक रणनीतिकार कंपनी Indian Political Action Committee (I-PAC) और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित दफ्तरों में हुई ED की छापेमारी से जुड़ा है।

ED का आरोप है कि इस साल जनवरी में कथित कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान जब एजेंसी I-PAC के दफ्तर और प्रतीक जैन के ठिकानों पर तलाशी अभियान चला रही थी, तब ममता बनर्जी और कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने वहां पहुंचकर जांच में दखल दिया। एजेंसी का दावा है कि तलाशी के दौरान अधिकारियों को रोका गया और दबाव बनाने की कोशिश की गई।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ

सुनवाई के दौरान जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त तय कर दी।

इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी वर्चुअल माध्यम से पेश हुए। सुनवाई के दौरान अदालत में हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत भी हुई, जब जस्टिस मिश्रा ने पूछा, “मिस्टर कल्याण बनर्जी कहां हैं?” इस पर उन्होंने बताया कि वह वर्चुअली उपस्थित हैं।

ममता बनर्जी ने क्या कहा

अपने जवाबी हलफनामे में ममता बनर्जी ने ED के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वह केवल पार्टी से जुड़े संवेदनशील राजनीतिक और रणनीतिक डेटा को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से परिसर में गई थीं।

उन्होंने दावा किया कि तलाशी के दौरान 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़ी गोपनीय जानकारी देखी जा रही थी, जिसे सुरक्षित रखना जरूरी था।

पहले क्या टिप्पणी कर चुका है सुप्रीम कोर्ट

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा चल रही जांच में कथित हस्तक्षेप लोकतंत्र और व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है मामला

यह मामला केवल ED की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें केंद्र और राज्य की संस्थाओं के बीच टकराव, राजनीतिक हस्तक्षेप और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता जैसे बड़े मुद्दे भी जुड़े हुए हैं।
अब सबकी नजर 18 अगस्त की अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील और राजनीतिक रूप से चर्चित मामले में आगे की दिशा तय करेगा