स्कूल जाने के लिए उफनती नदी पार करने को मजबूर बच्चे, पौड़ी में एक साल से नहीं बना पुल
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड। उत्तराखंड के चौबट्टाखाल क्षेत्र के गवाणी गांव से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां स्कूली बच्चों को पढ़ाई के लिए रोजाना उफनती मछलाड़ नदी पार करनी पड़ रही है। दावा है कि अगस्त 2024 में बारिश और नदी के तेज बहाव के कारण गांव का पुल बह गया था, लेकिन करीब एक साल बीतने के बाद भी अब तक इस पुल का पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है।
पुल नहीं होने के कारण गांव के बच्चों और स्थानीय लोगों की मुश्किलें बारिश के मौसम में और बढ़ गई हैं। नदी में पानी का बहाव तेज होने पर बच्चों को जोखिम उठाकर दूसरी तरफ जाना पड़ता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
अगस्त 2024 में बह गया था पुल
स्थानीय स्तर पर सामने आए दावे के मुताबिक, अगस्त 2024 में मछलाड़ नदी में आए तेज बहाव के कारण पुल बह गया था। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही यहां नया पुल बनाया जाएगा, लेकिन लंबे समय बाद भी स्थायी समाधान नहीं होने की बात कही जा रही है।
पुल के अभाव में गांव का संपर्क प्रभावित हुआ है। खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए यह समस्या गंभीर बनी हुई है।
जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं बच्चे
बारिश के दौरान पहाड़ी नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में बच्चों का नदी पार करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए वैकल्पिक सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
नदी का बहाव कम होने पर भी पत्थरों और पानी के कारण फिसलने का खतरा रहता है। वहीं तेज बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सरकार से अस्थायी व्यवस्था की मांग
इस मामले को लेकर सरकार और प्रशासन से तत्काल ट्रॉली या अस्थायी पुल की व्यवस्था करने की मांग की गई है, ताकि बच्चों और ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए जोखिम न उठाना पड़े।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक स्थायी पुल का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक प्रशासन को अस्थायी व्यवस्था करनी चाहिए। खासकर स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की जा रही है।
स्थायी पुल के निर्माण की मांग
गांव के लोगों की मांग है कि केवल कागजों पर विकास के दावे करने के बजाय जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए। अगस्त 2024 में पुल बहने के बाद से समस्या बनी हुई है, इसलिए स्थायी पुल का निर्माण जल्द शुरू करने की मांग उठ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल बनने से न सिर्फ बच्चों को स्कूल जाने में सुविधा होगी, बल्कि गांव के लोगों को भी रोजमर्रा के आवागमन में राहत मिलेगी।
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानसून के दौरान नदियों और गदेरों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है। ऐसे में बिना पुल के नदी पार करना दुर्घटना का कारण बन सकता है।
गवाणी गांव के बच्चों का मामला इसी वजह से गंभीर माना जा रहा है। स्कूल जाने के लिए बच्चों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन:
मछलाड़ नदी पर तुरंत अस्थायी पुल या ट्रॉली लगाए।
स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करे।
अगस्त 2024 में बह चुके पुल का स्थायी पुनर्निर्माण जल्द शुरू करे।
बारिश के दौरान नदी के जलस्तर और सुरक्षा की निगरानी बढ़ाए।
जब तक पुल नहीं बनता, बच्चों को सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराया जाए।
यह मामला उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल सामने लाता है। सड़क और पुल जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों और खासकर स्कूली बच्चों को हर दिन जोखिम उठाना पड़ रहा है।
news desk MPcg