संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी, महिला आरक्षण पर नजर
केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस सत्र में लोकसभा की सीटें बढ़ाने, परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को संसद के दोनों सदनों में जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इस बार विधेयकों को पारित कराने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक शामिल बताए जा रहे हैं। विशेष सत्र की तारीख को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
लोकसभा और राज्यसभा में कितने वोटों की जरूरत?
विधेयकों को पारित कराने में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त संख्या में सांसदों का समर्थन हासिल करना है। खबर में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, लोकसभा में एनडीए के 318 सांसद हैं, जबकि दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोटों की जरूरत बताई गई है। इस हिसाब से सरकार को अतिरिक्त सांसदों का समर्थन हासिल करना होगा।
राज्यसभा में एनडीए के 153 सांसद बताए गए हैं। वहां विधेयक पारित कराने के लिए 162 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी। यानी उच्च सदन में भी सरकार को अतिरिक्त नौ सांसदों का समर्थन जुटाना पड़ेगा।
हालांकि, वास्तविक बहुमत की गणना सदन में कुल सदस्य संख्या, मतदान के समय उपस्थित सदस्यों और लागू संवैधानिक नियमों के आधार पर की जानी चाहिए।
DMK समेत छोटे दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार विधेयकों पर समर्थन हासिल करने के लिए डीएमके और कुछ छोटे राजनीतिक दलों के संपर्क में है। सरकार की कोशिश है कि संसद में संख्या बल मजबूत किया जाए, ताकि महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को पारित कराने का रास्ता साफ हो सके।
विपक्षी दलों के रुख और संभावित राजनीतिक समीकरणों पर भी सबकी नजर रहेगी। इन विधेयकों को लेकर अलग-अलग दलों की सहमति अहम होगी, क्योंकि संविधान संशोधन के लिए सामान्य विधेयक की तुलना में अधिक समर्थन की आवश्यकता होती है।
अप्रैल में भी पेश किए गए थे विधेयक
खबर के अनुसार, सरकार ने इससे पहले 15 से 17 अप्रैल 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाया था। उस दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर मतदान हुआ, लेकिन जरूरी दो-तिहाई समर्थन नहीं मिल सका।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मतदान में 528 सांसदों ने हिस्सा लिया था। इनमें 298 वोट पक्ष में और 230 विपक्ष में पड़े। इस आंकड़े के आधार पर विधेयक पारित नहीं हो पाया था। अब सरकार दोबारा समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
लोकसभा की सीटें बढ़ाने और परिसीमन का क्या मतलब है?
लोकसभा की सीटें बढ़ाने का मतलब संसद के निचले सदन में सांसदों की कुल संख्या में वृद्धि करना है। वहीं, परिसीमन वह प्रक्रिया है, जिसके तहत जनसंख्या और निर्धारित संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं और प्रतिनिधित्व तय किया जाता है।
इन बदलावों का सीधा असर लोकसभा के चुनावी नक्शे और राज्यों के प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है। इसलिए परिसीमन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाना महत्वपूर्ण होगा।
महिला आरक्षण का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाना है। इसे लागू करने की प्रक्रिया परिसीमन और संबंधित संवैधानिक प्रावधानों से जुड़ी है। ऐसे में प्रस्तावित विधेयकों पर होने वाली चर्चा राजनीतिक और संवैधानिक, दोनों लिहाज से अहम मानी जा रही है।
मानसून सत्र के बाद विशेष सत्र की संभावना
रिपोर्ट के मुताबिक, संसद के मानसून सत्र की अंतिम बैठक 13 अगस्त 2026 को हुई थी। इसके बाद सत्रावसान की औपचारिक घोषणा नहीं किए जाने की बात कही गई है। इसी वजह से संसद के विशेष सत्र को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।
फिलहाल सरकार की ओर से विशेष सत्र की तारीख और विधेयकों को पेश करने की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। यदि सत्र बुलाया जाता है, तो महिला आरक्षण, लोकसभा की सीटों में संभावित वृद्धि और परिसीमन जैसे मुद्दे संसद की कार्यवाही के केंद्र में रह सकते हैं।
news desk MPcg