इंदौर में जलसंकट की आशंका, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज; 40 लाख आबादी को रोज 800 MLD पानी की जरूरत

इंदौर में जलसंकट की आशंका, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज; 40 लाख आबादी को रोज 800 MLD पानी की जरूरत

इंदौर में जलसंकट की आशंका, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज; 40 लाख आबादी को रोज 800 MLD पानी की जरूरत

कमजोर मानसून से तालाबों में कम हुआ जलभराव, विजयवर्गीय और सिलावट ने अधिकारियों के साथ की बैठक; नर्मदा पाइपलाइन फूटने से सड़क पर बहा हजारों लीटर पानी

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में कम बारिश के कारण जलसंकट की आशंका बढ़ गई है। सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश वाले शहर में इस बार लगभग 23 इंच वर्षा दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में आने वाली गर्मियों में पेयजल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। स्थिति को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपए के पैकेज की मांग की है। वहीं, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर जलसंकट से निपटने के उपायों पर चर्चा की।

40 लाख की आबादी, रोज 800 MLD पानी की जरूरत

इंदौर की आबादी करीब 40 लाख बताई जा रही है। शहर में घरेलू जरूरतों के लिए प्रतिदिन लगभग 620 MLD यानी मिलियन लीटर पानी की आवश्यकता होती है। औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य उपयोगों को जोड़ने पर पानी की कुल मांग 750 से 800 MLD तक पहुंच जाती है। इतनी बड़ी आबादी की जरूरत पूरी करने के लिए नियमित जलापूर्ति और उपलब्ध जलस्रोतों का बेहतर प्रबंधन जरूरी है। कम बारिश के कारण जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा नहीं होने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

महापौर ने मुख्यमंत्री से मांगा 50 करोड़ का पैकेज

जलसंकट की आशंका को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपए का पैकेज देने की मांग की है। इसका उद्देश्य शहर में पानी की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना है। जलसंकट के समाधान पर चर्चा के लिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और तुलसी सिलावट ने नगर निगम तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में पानी की मांग, आपूर्ति व्यवस्था और संभावित संकट से निपटने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।

डीमार्ट के पास फूटी नर्मदा पाइपलाइन, सड़क पर बहा पानी

इसी बीच गुरुवार सुबह बंगाली चौराहे से बायपास के बीच डीमार्ट के पास नर्मदा जलापूर्ति की पाइपलाइन फूट गई। पाइपलाइन से तेज दबाव के साथ पानी निकलने लगा और करीब 40 फीट ऊंचा फव्वारा दिखाई दिया। सड़क पर पानी भरने के कारण यातायात प्रभावित हुआ और अंडरपास को भी बंद करना पड़ा। एक ओर शहर में पानी बचाने और जल प्रबंधन को लेकर चिंता जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर पाइपलाइन लीकेज जैसी घटनाओं से पानी की बर्बादी का मुद्दा भी सामने आया है।

नर्मदा से रोज मिलता है करीब 440 MLD पानी

इंदौर की बड़ी आबादी पेयजल के लिए नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नर्मदा परियोजना से शहर को प्रतिदिन करीब 440 MLD पानी मिलता है। हालांकि, लीकेज और अन्य कारणों से लगभग 22 प्रतिशत तक पानी बर्बाद होने का अनुमान है। सप्लाई नेटवर्क में होने वाले नुकसान को कम करना जल प्रबंधन की बड़ी चुनौती है। पाइपलाइनों की नियमित जांच और समय पर मरम्मत से पानी की बर्बादी रोकने में मदद मिल सकती है।

भूजल दोहन 90 प्रतिशत तक पहुंचने की चिंता

शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल हैं, जबकि नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल और हाइड्रेंट बताए गए हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखे जाने का उल्लेख है। उपलब्ध आंकड़ों में भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत बताया गया है। भूजल पर बढ़ती निर्भरता और लगातार दोहन के कारण भविष्य में पानी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण जैसे उपायों पर ध्यान देना जरूरी होगा।

पिछली गर्मियों में 700 टैंकरों से पहुंचाया गया था पानी

पिछली गर्मियों में बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर जलसंकट का सामना करना पड़ा था। हालात संभालने के लिए करीब 700 टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाना पड़ा। टैंकरों पर निर्भरता बढ़ने से प्रशासनिक व्यवस्था और आम लोगों दोनों पर दबाव पड़ता है। इस बार कम बारिश, तालाबों में कम जलभराव और पाइपलाइन लीकेज जैसी चुनौतियां सामने हैं। ऐसे में समय रहते जल प्रबंधन की योजना तैयार करना अहम माना जा रहा है।

शहर के 27 तालाबों पर भी टिकी निगाहें

इंदौर में कुल 27 तालाब हैं, जिनमें से सात की निगरानी नगर निगम करता है। इन तालाबों की कुल क्षमता करीब 2,880 करोड़ लीटर बताई गई है, जबकि उपलब्ध पानी का एक अन्य आकलन करीब 2,260 करोड़ लीटर है। कम बारिश के कारण इस बार तालाबों में अपेक्षित जलभराव नहीं होने की बात सामने आई है। जलाशयों में पानी की वास्तविक उपलब्धता और आने वाले महीनों में मांग के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।

कई वार्डों में ओवरहेड टंकियों की कमी

शहर के कुछ वार्डों में ओवरहेड टंकियां नहीं हैं। ऐसे क्षेत्रों में दूसरे वार्डों की टंकियों के माध्यम से पानी पहुंचाया जाता है। इससे जलापूर्ति के समय और मात्रा पर दबाव बढ़ सकता है। खबर के मुताबिक, पिछले साल मालवा मिल स्थित हाइड्रेंट को भी पहली बार बंद करना पड़ा था। ऐसे में वैकल्पिक जलस्रोतों, भंडारण क्षमता और वितरण नेटवर्क को मजबूत करना भी जरूरी है।

बोरवेल के पानी की गुणवत्ता भी चिंता का विषय

जल उपलब्धता के साथ पानी की गुणवत्ता भी अहम मुद्दा है। वर्ष 2019 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इंदौर में 70 स्थानों पर बोरवेल के पानी के नमूनों की जांच की गई थी। इनमें से 69 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। यह आंकड़ा उस समय लिए गए नमूनों से संबंधित है। वर्तमान स्थिति जानने के लिए नए परीक्षण जरूरी होंगे। जलसंकट के दौरान भूजल का इस्तेमाल बढ़ने पर उसकी गुणवत्ता की नियमित जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

पानी बचाने के लिए लोगों से अपील

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शहरवासियों से पानी बचाने की अपील की है। उन्होंने परिवार के साथ बैठकर पानी बचाने का चार्ट बनाने, पानी की टंकी में ओवरफ्लो रोकने के लिए अलार्म लगाने और RO से निकलने वाले वेस्ट पानी का पोछा लगाने जैसे कामों में उपयोग करने की सलाह दी। जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। पानी की बर्बादी रोकने, लीकेज की सूचना देने और उपलब्ध जलस्रोतों का जिम्मेदारी से उपयोग करने से दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।