उज्जैन में आएगा 6,200 करोड़ का सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट, 55 एकड़ जमीन पर बनेगी हाईटेक यूनिट; हजारों रोजगार के अवसर

उज्जैन में आएगा 6,200 करोड़ का सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट, 55 एकड़ जमीन पर बनेगी हाईटेक यूनिट; हजारों रोजगार के अवसर

उज्जैन। मध्यप्रदेश अब देश के तेजी से बढ़ते सेमीकंडक्टर और हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है। उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी में पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज की सेमीकंडक्टर इकाई स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। कंपनी की ओर से करीब 6,200 करोड़ रुपए के निवेश की योजना है और परियोजना के लिए लगभग 55 एकड़ जमीन की मांग की गई है।

एमपीआईडीसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजेश राठौर के मुताबिक, जमीन आवंटन की प्रक्रिया चल रही है और कंपनी के अधिकारी प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण भी कर चुके हैं। जमीन और अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद परियोजना के भूमि पूजन की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। ताजा जानकारी के मुताबिक परियोजना अभी भूमि आवंटन और प्रशासनिक औपचारिकताओं के चरण में है, यानी निर्माण कार्य शुरू होने की स्थिति अभी नहीं आई है।

6,200 करोड़ रुपए का बड़ा निवेश

पारस डिफेंस की सहायक कंपनी पारस सेमीकंडक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड मध्यप्रदेश में करीब 6,200 करोड़ रुपए के निवेश से अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर परियोजना स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। जुलाई 2026 में कंपनी और मध्यप्रदेश सरकार के बीच इस परियोजना को लेकर MoU भी हुआ था।

इस परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और कंपनी के बीच समझौता किया गया था। सरकार की ओर से निवेशकों को परियोजना के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।

कंपनी की परियोजना को मध्यप्रदेश की सेमीकंडक्टर नीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर से जुड़े निवेश को बढ़ावा देना है।

55 एकड़ जमीन पर विकसित होगी परियोजना

परियोजना के लिए अब उज्जैन की DMIC विक्रम उद्योगपुरी में जमीन को लेकर प्रक्रिया चल रही है। शुरुआती जानकारी में करीब 50 एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई गई थी, जबकि ताजा प्रक्रिया में कंपनी की ओर से लगभग 55 एकड़ जमीन की मांग सामने आई है।

एमपीआईडीसी की टीम ने कंपनी को विक्रम उद्योगपुरी के फेज-2 क्षेत्र में जमीन दिखाई है। कंपनी के अधिकारियों ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण भी किया है और साइट को परियोजना के लिए उपयुक्त माना है।

जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना के अगले चरण में निर्माण और अन्य तकनीकी काम शुरू होने की संभावना है।

सिर्फ 'चिप बनाने' की यूनिट नहीं, क्या होगा यहां?

इस परियोजना को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि इसे सीधे पारंपरिक सेमीकंडक्टर फैब यानी सिलिकॉन वेफर बनाने वाली फैक्ट्री कहना सही नहीं होगा।

पारस सेमीकंडक्टर्स जिस सुविधा की योजना बना रही है, वह OSAT—Outsourced Semiconductor Assembly and Test सुविधा है। इसमें तैयार सेमीकंडक्टर वेफर से चिप्स की असेंबली, पैकेजिंग, टेस्टिंग और विश्वसनीयता जांच जैसे काम किए जाते हैं।

कंपनी की योजना अत्याधुनिक पैकेजिंग तकनीकों पर काम करने की है। इनमें 2.5D/3D एडवांस्ड पैकेजिंग, 3D हेटेरोजीनियस इंटीग्रेशन, हाइब्रिड बॉन्डिंग, चिपलेट इंटीग्रेशन, वेफर बंपिंग, फ्लिप-चिप असेंबली और टेस्टिंग जैसी तकनीकें शामिल हैं।

यानी उज्जैन की प्रस्तावित यूनिट भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में चिप की पैकेजिंग और टेस्टिंग से जुड़े महत्वपूर्ण चरण में काम कर सकती है।

कितने लोगों को मिलेगा रोजगार?

परियोजना से रोजगार को लेकर अलग-अलग स्तर पर आंकड़े सामने आए हैं। ताजा उज्जैन परियोजना संबंधी जानकारी में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 7 हजार लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान बताया गया है।

वहीं जुलाई में परियोजना के MoU के समय कंपनी की ओर से करीब 2,500 प्रत्यक्ष रोजगार की बात कही गई थी। इसलिए रोजगार के आंकड़े को खबर में अलग-अलग श्रेणियों के साथ समझना जरूरी है—प्रत्यक्ष रोजगार और परियोजना से बनने वाले कुल प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार एक समान संख्या नहीं हैं।

परियोजना शुरू होने के बाद सिर्फ मुख्य यूनिट में ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स, तकनीकी सेवाओं, सप्लाई चेन, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट और अन्य सहायक गतिविधियों में भी रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

उज्जैन के लिए क्यों बड़ी खबर है?

सेमीकंडक्टर आज लगभग हर आधुनिक तकनीक का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मोबाइल फोन, कार, कंप्यूटर, संचार उपकरण, रक्षा प्रणालियां, औद्योगिक मशीनरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े सिस्टम में चिप्स का इस्तेमाल होता है।

ऐसे में उज्जैन में एडवांस्ड सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और टेस्टिंग सुविधा स्थापित होने से शहर की औद्योगिक पहचान केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगी। इससे हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े नए निवेशकों के लिए भी उज्जैन और आसपास का क्षेत्र आकर्षक बन सकता है।

अगर परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती है तो इसके आसपास सप्लायर, लॉजिस्टिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, पैकेजिंग, टेस्टिंग और तकनीकी सेवाओं से जुड़े छोटे-बड़े उद्योग विकसित होने की संभावना है।

मध्यप्रदेश की सेमीकंडक्टर नीति का असर

इस परियोजना के पीछे मध्यप्रदेश की नई सेमीकंडक्टर नीति को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकार हाईटेक उद्योगों को आकर्षित करने के लिए निवेशकों को जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य जरूरी सुविधाओं के साथ नीतिगत सहयोग देने की दिशा में काम कर रही है।

जुलाई में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई बैठक में कंपनी ने राज्य में 6,200 करोड़ रुपए की परियोजना की जानकारी दी थी। उस समय सरकार की ओर से निवेशकों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया गया था।

पारस डिफेंस का सेमीकंडक्टर सेक्टर में विस्तार

पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज मुख्य रूप से रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी है। कंपनी ऑप्टिक्स और ऑप्ट्रॉनिक्स, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, एंटी-ड्रोन सिस्टम, RF एवं माइक्रोवेव सिस्टम, स्पेस टेक्नोलॉजी और हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में काम करती है।

अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रवेश कंपनी के कारोबार के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रस्तावित OSAT सुविधा के जरिए कंपनी भारत में बढ़ते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का हिस्सा बनना चाहती है।

अभी क्या अपडेट है?

अभी परियोजना जमीन आवंटन की प्रक्रिया में है। कंपनी के अधिकारियों ने उज्जैन में प्रस्तावित जमीन का निरीक्षण कर लिया है। एमपीआईडीसी और कंपनी के बीच जमीन से जुड़ी औपचारिकताएं आगे बढ़ रही हैं।

जमीन और अन्य जरूरी अनुमतियां पूरी होने के बाद भूमि पूजन और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल उत्पादन शुरू होने की कोई अंतिम तारीख घोषित नहीं हुई है।

इसलिए फिलहाल यह कहना सही होगा कि उज्जैन में 6,200 करोड़ रुपए के निवेश से सेमीकंडक्टर OSAT परियोजना प्रस्तावित है और इसे जमीन मिलने के बाद आगे बढ़ाया जाएगा।

क्या उज्जैन बनेगा सेमीकंडक्टर हब?

एक बड़ी OSAT सुविधा आने से उज्जैन को सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में जगह मिल सकती है। हालांकि इसे तुरंत देश का पूर्ण सेमीकंडक्टर निर्माण केंद्र कहना जल्दबाजी होगी। परियोजना के साथ-साथ अन्य कंपनियों का निवेश, सप्लाई चेन, कुशल तकनीकी मानव संसाधन और सहायक उद्योग विकसित होना भी जरूरी होगा।

फिलहाल 6,200 करोड़ रुपए का प्रस्तावित निवेश, विक्रम उद्योगपुरी में जमीन की प्रक्रिया और हाईटेक OSAT सुविधा की योजना उज्जैन के औद्योगिक विकास के लिए बड़ा कदम है। आने वाले समय में जमीन आवंटन और निर्माण शुरू होने के बाद इस परियोजना की अगली तस्वीर और स्पष्ट होगी।