दिल्ली के जसोला में पतंग के पीछे दौड़ते हुए खुले नाले में गिरा 15 साल का मिथुन, 3 दिन बाद मिला शव; JE निलंबित
नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जसोला गांव में 22 अगस्त को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला 15 वर्षीय मिथुन कुमार पतंग पकड़ने के दौरान खुले और गहरे नाले में गिर गया। तेज बहाव के कारण वह बह गया और कई घंटों तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। तीन दिनों तक चले बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मंगलवार दोपहर उसका शव नाले से करीब 500 मीटर दूर बरामद किया गया। इस हादसे के बाद खुले नाले को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है।
22 अगस्त की सुबह हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक हादसा शनिवार, 22 अगस्त 2026 को सुबह करीब 11 बजे जसोला गांव में हुआ। मिथुन स्कूल जाने की तैयारी कर रहा था और कथित तौर पर पतंग पकड़ने या उतारने के दौरान खुले नाले के पास पहुंचा। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ा और वह खुले नाले में जा गिरा।
एक अन्य बच्चे ने घटना देखी और परिवार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद परिजनों ने पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। दिल्ली फायर सर्विस को करीब 11:54 बजे घटना की सूचना मिली, जिसके बाद दो फायर टेंडर मौके पर भेजे गए और तलाश शुरू की गई।
नाला खुला था, तेज बहाव ने बढ़ाई मुश्किल
मिथुन जिस नाले में गिरा, वह खुला था और उसमें पानी का बहाव तेज बताया गया। लगातार पानी बहने और आसपास जमा कचरे व घनी वनस्पति के कारण बचाव दल को तलाशी में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
घटना के बाद दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF, Boat Club और अन्य संबंधित एजेंसियों ने नाले और उससे जुड़े हिस्सों में तलाश शुरू की। टीमों ने रविवार और सोमवार को भी कई घंटे अभियान चलाया, लेकिन मिथुन का पता नहीं चल सका।
बेटे की तलाश में नाले में उतर गए पिता
बेटे के लापता होने के बाद पिता अवधेश कुमार का धैर्य जवाब दे गया। जब कई घंटों की तलाश के बाद भी मिथुन का पता नहीं चला तो वह खुद नाले में उतरकर बेटे को खोजने लगे।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में अवधेश हाथ में डंडा लेकर गंदे और बहते पानी के बीच बेटे को तलाशते दिखाई दिए। परिवार का कहना था कि उन्हें डर था कि कहीं समय निकल न जाए।
परिवार और स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर नाराजगी भी जताई। उनका आरोप था कि शुरुआत में तलाशी पर्याप्त प्रभावी तरीके से नहीं की गई और नाले में जमा कचरे के कारण भी बचाव कार्य प्रभावित हुआ।
परिवार ने सड़क पर प्रदर्शन भी किया
मिथुन के नहीं मिलने के बाद परिवार और स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। रविवार को लोगों ने सड़क पर विरोध जताते हुए प्रशासन से रेस्क्यू ऑपरेशन तेज करने की मांग की। स्थानीय लोगों का कहना था कि खुले नाले के कारण पहले भी खतरा बना हुआ था।
रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नाले का तेज बहाव, बारिश के कारण बढ़ा पानी और जगह-जगह जमा कचरा था। इसी वजह से नाले के अंदर और आगे के हिस्सों में तलाशी अभियान चलाना मुश्किल हो रहा था।
तीसरे दिन कचरा हटाया गया, तब मिला शव
लगभग 72 घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद मंगलवार, 25 अगस्त को मिथुन का शव बरामद हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, नाले से करीब 500 मीटर आगे, जहां नाला आगरा नहर की ओर जाता है, वहां कचरे और मलबे के बीच शव फंसा मिला।
NDRF की टीम ने मंगलवार दोपहर करीब 1:15 से 2 बजे के बीच शव बरामद किया। नाले के आसपास जमा प्लास्टिक की बोतलें, निर्माण सामग्री, कपड़े, टायर और अन्य कचरे को हटाने के बाद तलाशी को आगे बढ़ाया गया था। शव को पोस्टमार्टम के लिए AIIMS भेजा गया। परिवार के अनुसार, अंतिम संस्कार उत्तर प्रदेश के बदायूं में किया जाएगा।
मिथुन का परिवार बदायूं का रहने वाला
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मिथुन का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं का रहने वाला है और काम की तलाश में दिल्ली आया था। परिवार जसोला में किराए के मकान में रह रहा था। मिथुन चार भाई-बहनों में सबसे छोटा था और सरकारी स्कूल में कक्षा 8 में पढ़ता था।
हादसे के बाद MCD के जूनियर इंजीनियर पर कार्रवाई
घटना के बाद नगर निगम की जिम्मेदारी और खुले नाले की स्थिति को लेकर सवाल उठे। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने सोमवार को संबंधित जूनियर इंजीनियर को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई हादसे के दो दिन बाद की गई, जब रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद मिथुन का पता नहीं चल पाया था।
प्रशासन की ओर से मामले की जांच भी शुरू की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि खुले नाले की सुरक्षा को लेकर क्या व्यवस्था थी और हादसे की स्थिति में संबंधित विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की गई।
अभी क्या हुआ?
25 अगस्त की दोपहर मिथुन का शव बरामद होने के बाद करीब तीन दिन से चल रहा सर्च ऑपरेशन समाप्त हो गया। शव पोस्टमार्टम के लिए AIIMS भेजा गया है। वहीं MCD के संबंधित जूनियर इंजीनियर को निलंबित किया जा चुका है और खुले नाले की स्थिति तथा जिम्मेदारी को लेकर जांच जारी है।
इस हादसे ने दिल्ली में खुले नालों की सुरक्षा और बारिश के दौरान इनके आसपास सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर ऐसे स्थानों पर जहां नाले खुले हों और पानी का बहाव तेज हो, वहां बैरिकेडिंग, ढक्कन और चेतावनी संकेत नहीं होने से हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
news desk MPcg