भोपाल: मोहन सरकार फिर लेगी 5 हजार करोड़ का कर्ज, मध्य प्रदेश पर 4.21 लाख करोड़ का कर्ज, ब्याज में 29 हजार करोड़ का भुगतान

मध्य प्रदेश की मोहन सरकार 5 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज ले रही है, जिससे राज्य पर कुल कर्ज 4.21 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। इस वित्तीय वर्ष में ब्याज के रूप में 29 हजार करोड़ रुपये चुकाए जाएंगे। विपक्ष ने कर्ज नीति पर सवाल उठाते हुए इसे आर्थिक कुप्रबंधन करार दिया है।

भोपाल: मोहन सरकार फिर लेगी 5 हजार करोड़ का कर्ज, मध्य प्रदेश पर 4.21 लाख करोड़ का कर्ज, ब्याज में 29 हजार करोड़ का भुगतान

भोपाल: मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से 5 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। इस कर्ज के साथ राज्य पर कुल कर्ज का बोझ 4.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। इस वित्तीय वर्ष में सरकार पहले ही 47 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है, और अब यह नया कर्ज इस आंकड़े को और बढ़ाएगा। सरकार को इस कर्ज के ब्याज के रूप में 29 हजार करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा, जिससे प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

कर्ज लेने की प्रक्रिया और उद्देश्य

जानकारी के अनुसार, यह कर्ज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के माध्यम से दो किश्तों में लिया जाएगा, प्रत्येक 2500 करोड़ रुपये की। पहली किश्त 14 साल और दूसरी 20 साल की अवधि के लिए होगी। सरकार का दावा है कि यह कर्ज विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे के सुधार, और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देने के लिए लिया जा रहा है। विशेष रूप से, लाड़ली बहना योजना जैसी योजनाओं पर भारी खर्च के कारण सरकार को अतिरिक्त धन की जरूरत पड़ रही है, जिसके लिए कर्ज एकमात्र रास्ता बन गया है।

कर्ज का बढ़ता बोझ

31 मार्च 2024 तक मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज 3.75 लाख करोड़ रुपये था। चालू वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा लिए गए 47 हजार करोड़ रुपये के कर्ज को जोड़कर यह आंकड़ा अब 4.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे प्रदेश का प्रत्येक नागरिक औसतन 50 हजार रुपये से अधिक का कर्जदार हो गया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की कर्ज नीति पर तीखा हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, "सरकार कर्ज लेकर विकास का दावा कर रही है, लेकिन यह सिर्फ कर्ज का विकास है। ब्याज के रूप में भारी राशि चुकाने के कारण प्रदेश की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो रही है।"

ब्याज का भारी बोझ

कर्ज के साथ-साथ ब्याज का भुगतान भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में सरकार को कर्ज के ब्याज के रूप में 29 हजार करोड़ रुपये चुकाने होंगे। यह राशि प्रदेश के बजट का एक बड़ा हिस्सा है, जो अन्य विकास कार्यों पर खर्च हो सकता था। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अपनी आय के स्रोत बढ़ाने और फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने की जरूरत है, ताकि कर्ज के इस दलदल से निकला जा सके।