कानपुर: जूता-चप्पल फैक्ट्री में आग, एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत
कानपुर के चमनगंज में जूता-चप्पल फैक्ट्री में भीषण आग लगने से एक ही परिवार के पांच लोगों की जिंदा जलने से मौत। आग शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई, इमारत में अग्नि सुरक्षा उपायों का अभाव और अवैध कारखाना मुख्य कारण।
कानपुर, 5 मई 2025: उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के चमनगंज क्षेत्र में रविवार रात एक भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। गांधी नगर के प्रेमनगर में स्थित एक पांच मंजिला इमारत में अवैध रूप से चल रही जूता-चप्पल फैक्ट्री में लगी आग के कारण एक ही परिवार के पांच लोगों की जिंदा जलने से मौत हो गई। मृतकों में माता-पिता और उनकी तीन नाबालिग बेटियां शामिल हैं। इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर मुद्दा उठाया है।
जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 9:30 बजे चमनगंज थाना क्षेत्र के तहत गांधी नगर में मोहम्मद कासिफ की स्वामित्व वाली पांच मंजिला इमारत की पहली मंजिल पर शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। इस इमारत की निचली दो मंजिलों पर जूता-चप्पल बनाने का कारखाना चल रहा था, जबकि ऊपरी मंजिलें आवासीय उपयोग में थीं। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी इमारत धुएं और लपटों से घिर गई। पड़ोसियों ने आग की लपटें और धुआं देखकर तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी।
आग की चपेट में आने से चौथी मंजिल पर रहने वाला एक परिवार बुरी तरह फंस गया। मृतकों की पहचान मोहम्मद दानिश (45), उनकी पत्नी नाजनीन सबा (42), और उनकी तीन बेटियों सारा (15), सिमरा (12), और इनाया (7) के रूप में हुई है। दमकल कर्मियों को चौथी मंजिल तक पहुंचने में घंटों लग गए, क्योंकि इमारत में न तो अग्नि सुरक्षा के इंतजाम थे और न ही आपातकालीन निकास।
दमकल और बचाव कार्य
हादसे की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की दर्जनों गाड़ियां और स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने सीढ़ियों और हथौड़ों का उपयोग कर इमारत में प्रवेश किया, लेकिन संकरी गलियों और भारी धुएं ने बचाव कार्य को और जटिल बना दिया। अधिकारियों के अनुसार, आग की तीव्रता को बढ़ाने में कुछ घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के फटने ने भी भूमिका निभाई।
कानपुर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (ADCP) राजेश श्रीवास्तव ने बताया, "पांच लोगों को इमारत से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि उनकी जान नहीं बच सकी।" मुख्य अग्निशमन अधिकारी दीपक शर्मा ने कहा, "आग को नियंत्रित करने में कई घंटे लगे। इमारत में अग्नि सुरक्षा उपकरणों का अभाव और अवैध कारखाने की मौजूदगी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।"
news desk MPcg