Indore News: कैदियों के खानपान और स्वास्थ्य का रखा जाता है खास ख्याल

इंदौर के सांवेर रोड पर 217 करोड़ की लागत से नई सेंट्रल जेल का निर्माण चल रहा है, जिसमें 4,000 कैदियों की क्षमता और 60 बिस्तरों वाला अस्पताल होगा। 130 साल पुराने जेल कानूनों में संशोधन के लिए नया जेल अधिनियम तैयार किया जा रहा है, जो जेल को 'सुधारात्मक गृह' के रूप में परिभाषित करेगा। नई जेल में थर्ड जेंडर के लिए अलग बैरक और आधुनिक सुविधाएं होंगी।

Indore News: कैदियों के खानपान और स्वास्थ्य का रखा जाता है खास ख्याल

इंदौर, मध्यप्रदेश (06/05/2025): सांवेर रोड स्थित नई सेंट्रल जेल का निर्माण बीते कई वर्षों से अधूरा पड़ा था, जिसे पूरा करने के लिए शासन ने 217 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की। लोक निर्माण विभाग ने टेंडर जारी कर इस परियोजना का कार्य बीसीसी रियल इन्फ्रा कंपनी को सौंपा। इसके तहत अब दूसरे चरण का निर्माण कार्य चल रहा है। इस नई जेल में 4,000 से अधिक कैदियों के लिए व्यवस्था होगी और यहां 60 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक अस्पताल भी बनेगा, जिसमें कैदियों को आपातकालीन एवं आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

130 साल पुराने कानूनों में बदलाव की तैयारी, नया जेल अधिनियम रास्ते में

130 साल पुराने अंग्रेजों के बनाए जेल कानूनों में अब संशोधन की तैयारी की जा रही है। मोहन सरकार इस दिशा में कदम बढ़ा रही है और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक नया जेल अधिनियम तैयार किया जा रहा है। यह अधिनियम कैबिनेट की मंजूरी के बाद नोटिफाई किया जाएगा। हालांकि पूर्व में जारी नोटिफिकेशन पर अमल नहीं हो पाया है। इंदौर की वर्तमान सेंट्रल जेल शहर के मध्य और घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है, जिससे इसकी शिफ्टिंग की योजना बनी और सांवेर रोड पर 50 एकड़ में नई जेल का निर्माण प्रारंभ हुआ।

नई जेल में थर्ड जेंडर बैरक, सुधारात्मक गृह की अवधारणा

पहले हाउसिंग बोर्ड को यह परियोजना सौंपी गई थी, लेकिन बाद में यह निजी कंपनी को दे दी गई। विवादों के बाद अब शेष कार्य लोक निर्माण विभाग से करवाया जा रहा है। हाल ही में 168 करोड़ रुपए का टेंडर शेष निर्माण कार्यों के लिए पास हुआ। दूसरे चरण के अंतर्गत प्रशासनिक ब्लॉक, क्वार्टर और अन्य बैरकों का निर्माण हो रहा है। 4,000 से अधिक कैदियों की क्षमता वाली इस जेल में थर्ड जेंडर के लिए भी अलग बैरक बनाई जा रही है। नया जेल अधिनियम, जो 1 जनवरी से लागू होना था, अब सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार संशोधित हो रहा है। इसी के अंतर्गत जेल विभाग का नाम ‘बंदी गृह एवं सुधारात्मक विभाग’ और जेल को 'सुधारात्मक गृह' के रूप में जाना जाएगा।