दिल्ली PG हादसे में 22 घंटे से रेस्क्यू जारी, 6 मौतें; मालिक के खिलाफ लुकआउट नोटिस

दिल्ली PG हादसे में 22 घंटे से रेस्क्यू जारी, 6 मौतें; मालिक के खिलाफ लुकआउट नोटिस

बेसमेंट में तोड़फोड़ के दौरान बिगड़ा इमारत का संतुलन, 5 मंजिला बिल्डिंग भरभराकर गिरी; मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर हुए दर्दनाक इमारत हादसे के बाद करीब 22 घंटे से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे एक 5 मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में पुलिस, दमकल तथा राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए। मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया।

हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत, 12 लोगों को सुरक्षित निकाला
हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि रेस्क्यू टीम ने 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। बचाए गए लोगों में 5 की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर घायलों को तत्काल इलाज के लिए AIIMS में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। हादसे के बाद प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालना है। आशंका है कि मलबे के बड़े हिस्से के नीचे अभी भी कुछ लोग दबे हो सकते हैं।

रेस्क्यू डॉग और कैमरों की मदद से मलबे में तलाश
रेस्क्यू टीम बेहद सावधानी के साथ मलबा हटाने का काम कर रही है। भारी मलबे के बीच किसी व्यक्ति के दबे होने की संभावना को देखते हुए रेस्क्यू डॉग की मदद ली जा रही है। इसके अलावा विशेष कैमरों और अन्य उपकरणों के जरिए मलबे के अंदर की स्थिति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। टीम का फोकस इस बात पर है कि मलबा हटाते समय किसी संभावित जीवित व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे। बचाव अभियान लगातार जारी है और मौके पर मौजूद टीमें हर संभावित जगह की जांच कर रही हैं।

बेसमेंट में चल रही थी तोड़फोड़, इसी दौरान ढह गई बिल्डिंग
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हादसे से पहले इमारत के बेसमेंट में तोड़फोड़ का काम चल रहा था। बताया जा रहा है कि इसी दौरान बिल्डिंग का संतुलन बिगड़ा और देखते ही देखते पूरी 5 मंजिला इमारत ढह गई। इमारत करीब 40 साल पुरानी बताई जा रही है। हादसे के बाद निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े काम की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस और प्रशासन यह पता लगाने में जुटे हैं कि बेसमेंट में किस तरह का काम किया जा रहा था और क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था।

MCD रिकॉर्ड में खतरनाक घोषित नहीं थी इमारत
हादसे को लेकर एक अहम जानकारी यह भी सामने आई है कि दिल्ली नगर निगम यानी MCD के रिकॉर्ड में इस इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया गया था। ऐसे में अब जांच एजेंसियां यह भी पता कर रही हैं कि करीब 40 साल पुरानी इस इमारत की संरचनात्मक स्थिति कैसी थी और क्या बेसमेंट में किए जा रहे बदलाव के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी। हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

मालिक हरिराम बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी
हादसे के बाद पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम बंसल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। लुकआउट नोटिस एक तरह का अलर्ट होता है, जिसके जरिए जांच एजेंसी संबंधित व्यक्ति के विदेश जाने की कोशिश करने पर एयरपोर्ट या सीमा पर उसे रोकने के लिए इमिग्रेशन अधिकारियों को निर्देश देती है। पुलिस अब मालिक की भूमिका समेत इमारत से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच कर रही है।

हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने की तैयारी
इस घटना ने पुरानी इमारतों की सुरक्षा और बेसमेंट में होने वाले निर्माण या तोड़फोड़ के काम को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन हादसे के कारणों की जांच कर रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इमारत गिरने से पहले वहां किस तरह का काम चल रहा था। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मलबा पूरी तरह हटने और जांच आगे बढ़ने के बाद हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।