भारत के 90% हिस्से में बादल गायब, कमजोर पड़ रहा मानसून; बिहार में बाढ़ का कहर, महाराष्ट्र के अंबोली में भारी बारिश
उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बादलों की गतिविधि घटी, बिहार के 13 जिलों में 27 लाख लोग प्रभावित; अंबोली में बारिश ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड
मौसम के बदलते मिजाज ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग की सैटेलाइट तस्वीरों में भारत के बड़े हिस्से में बादलों की गतिविधि कम दिखाई दे रही है। खासतौर पर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के इलाकों में आसमान अपेक्षाकृत साफ नजर आ रहा है। इसे मानसूनी गतिविधियों के कमजोर पड़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि IMD की ओर से अभी देश से मानसून की आधिकारिक वापसी की घोषणा नहीं की गई है। मानसून की वापसी के लिए केवल बादलों की कमी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि लगातार बारिश में कमी, हवा के पैटर्न में बदलाव और निचले वायुमंडल में नमी घटने जैसे कई मानकों की पुष्टि जरूरी होती है। दूसरी तरफ बिहार में मानसून का असर बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा है। गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती समेत कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से राज्य के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। बड़ी संख्या में गांव और आबादी प्रभावित हुई है और प्रशासन की ओर से राहत-बचाव अभियान चलाया जा रहा है। वहीं महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले का अंबोली इलाका भी भारी बारिश के लिए चर्चा में है। पश्चिमी घाट में स्थित अंबोली में मानसून के दौरान बेहद ज्यादा बारिश होती है और यहां कई बार देश के सबसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में शामिल होने वाले आंकड़े सामने आते हैं। हालांकि अंबोली में अगस्त तक 250 इंच और सितंबर तक 400 इंच बारिश होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। ऐसे में मौसम विभाग के प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर ही इन रिकॉर्ड्स को अंतिम रूप से प्रकाशित करना सही रहेगा। कुल मिलाकर एक तरफ उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बारिश और बादलों की गतिविधियां कमजोर पड़ती दिख रही हैं, जबकि बिहार और पश्चिमी घाट के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ की चुनौती बनी हुई है। इससे साफ है कि मानसून की विदाई से पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज काफी असमान बना हुआ है।
बिहार में बाढ़ से 13 जिले प्रभावित, 27 लाख से ज्यादा लोग संकट में
बिहार में गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती समेत कई नदियों के जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। 7 सितंबर तक 13 जिलों में करीब 27.01 लाख लोग प्रभावित होने की जानकारी सामने आई थी। वहीं 8 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में बाढ़ से कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है। हालांकि गंगा का जलस्तर कुछ इलाकों में घटने लगा है, लेकिन कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और राहत-बचाव अभियान जारी है।
अंबोली की बारिश को लेकर आंकड़ों की दोबारा पुष्टि जरूरी
महाराष्ट्र के अंबोली में भारी बारिश जरूर दर्ज होती है, लेकिन 250 इंच और सितंबर तक 400 इंच बारिश वाले आंकड़े की फिलहाल उपलब्ध IMD आधिकारिक स्रोत से स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिल पाई है। इसलिए इस आंकड़े को पक्के तथ्य के तौर पर प्रकाशित करना उचित नहीं होगा। IMD के ताजा बुलेटिन और स्थानीय वर्षा रिकॉर्ड के आधार पर अंबोली में भारी बारिश की स्थिति की पुष्टि करके ही सटीक आंकड़ा देना बेहतर रहेगा।
मानसून की वापसी पर अभी नजर
IMD के आधिकारिक मानकों के मुताबिक मानसून की वापसी सिर्फ सैटेलाइट तस्वीरों में बादल कम होने से घोषित नहीं होती। लगातार शुष्क मौसम, नमी में कमी और वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव जैसे कई संकेतों को एक साथ देखा जाता है। इसलिए फिलहाल इसे मानसून की गतिविधियों में बदलाव का संकेत माना जा सकता है, लेकिन देश से मानसून की आधिकारिक वापसी कहना जल्दबाजी होगी।
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