“मैं सुपरह्यूमन नहीं हूं, 24 घंटे काम नहीं कर सकता…” वाराणसी के सिपाही ने WhatsApp ग्रुप में भेजा इस्तीफा, विभाग में मचा हड़कंप
रामनगर थाने में तैनात आरक्षी देवगन चौहान ने काम के बढ़ते दबाव और लगातार ड्यूटी से परेशान होकर वरिष्ठ अधिकारियों वाले ग्रुप में भेजा इस्तीफा; अधिकारियों की काउंसलिंग के बाद वापस लिया फैसला
डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पुलिस विभाग से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है। रामनगर थाने में तैनात एक सिपाही ने काम के दबाव और लगातार ड्यूटी से परेशान होकर अपना इस्तीफा सीधे पुलिस अधिकारियों के आधिकारिक WhatsApp ग्रुप में भेज दिया। इस्तीफे में सिपाही ने लिखा कि वह कोई सुपरह्यूमन नहीं है और 24 घंटे सातों दिन काम करने में सक्षम नहीं है।
सिपाही का इस्तीफा जैसे ही अधिकारियों वाले ग्रुप में पहुंचा, पुलिस महकमे में हलचल मच गई। मामला सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल सिपाही से संपर्क किया और उसकी स्थिति समझने की कोशिश की। अधिकारियों की समझाइश और काउंसलिंग के बाद सिपाही ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया।
ट्रॉमा सेंटर में लगातार ड्यूटी से बढ़ा काम का दबाव
रामनगर थाने में तैनात आरक्षी देवगन चौहान पिछले कुछ समय से लगातार ड्यूटी के दबाव में थे। बताया गया कि उनकी ड्यूटी ट्रॉमा सेंटर में इलाज करा रहे एक मरीज के साथ लगाई जा रही थी।
लगातार एक ही तरह की ड्यूटी और पर्याप्त आराम नहीं मिल पाने से वह परेशान हो गए थे। काम के बढ़ते दबाव के बीच उनका धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने नौकरी से स्वेच्छा से अलग होने का फैसला कर लिया।
वरिष्ठ अधिकारियों के ग्रुप में ही डाल दिया इस्तीफा
आमतौर पर पुलिस विभाग में किसी कर्मचारी की ओर से नौकरी छोड़ने से जुड़ी प्रक्रिया निर्धारित माध्यम से होती है। लेकिन देवगन चौहान ने अपना इस्तीफा सीधे उस WhatsApp ग्रुप में भेज दिया, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी जुड़े हुए थे।
इस्तीफा सामने आते ही अधिकारियों का ध्यान इस मामले की ओर गया। संदेश में सिपाही ने अपनी परेशानी जाहिर करते हुए साफ शब्दों में कहा कि उसके अंदर 24 घंटे लगातार काम करने की क्षमता नहीं है।
उसकी इस टिप्पणी को काम के दबाव को लेकर उसकी नाराजगी और मानसिक थकान से जोड़कर देखा जा रहा है।
ड्यूटी बांटने में पक्षपात का भी लगाया आरोप
सिपाही ने अपने इस्तीफे में केवल काम के दबाव की बात नहीं कही, बल्कि ड्यूटी बांटे जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उसने आरोप लगाया कि ड्यूटी के वितरण में पक्षपात किया जा रहा है।
लगातार ड्यूटी और आराम की कमी के बीच ड्यूटी व्यवस्था को लेकर असंतोष बढ़ने के बाद उसने यह कदम उठाया। हालांकि, ड्यूटी वितरण में लगाए गए आरोपों की विभागीय स्तर पर क्या स्थिति है, यह अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
“मैं 24x7 काम नहीं कर सकता…”
सिपाही के इस्तीफे में लिखी बात सबसे ज्यादा चर्चा में है। उसने खुद को सुपरह्यूमन नहीं बताते हुए कहा कि वह लगातार 24 घंटे और सातों दिन काम नहीं कर सकता।
इस टिप्पणी के जरिए उसने पुलिसकर्मियों पर पड़ने वाले लगातार काम के दबाव की ओर इशारा किया। उसका कहना था कि लगातार ड्यूटी करने से वह परेशान हो चुका था और इसी वजह से उसने इस्तीफा देने का फैसला लिया।
अधिकारियों ने की काउंसलिंग, फिर वापस लिया इस्तीफा
इस्तीफा वायरल होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। अधिकारियों ने सिपाही से बातचीत की और उसकी परेशानी को समझने की कोशिश की।
काउंसलिंग और समझाइश के बाद देवगन चौहान ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया। इस तरह फिलहाल नौकरी छोड़ने का फैसला टल गया है और वह विभाग में अपनी सेवा जारी रखेंगे।
पुलिस विभाग में काम के दबाव को लेकर फिर चर्चा
इस घटना ने एक बार फिर पुलिसकर्मियों की लगातार ड्यूटी और काम के दबाव को लेकर चर्चा छेड़ दी है। पुलिस विभाग में कानून-व्यवस्था से लेकर वीआईपी ड्यूटी, अस्पतालों में सुरक्षा और अन्य जिम्मेदारियों के कारण कर्मचारियों पर अलग-अलग तरह के काम का दबाव रहता है।
ऐसे में ड्यूटी के दौरान पर्याप्त आराम और काम का संतुलित बंटवारा कितना जरूरी है, यह मामला उसी ओर ध्यान खींचता है। हालांकि, इस विशेष मामले में ड्यूटी व्यवस्था और सिपाही की शिकायतों पर विभागीय स्तर पर क्या निर्णय लिया जाएगा, इसकी जानकारी सामने आना बाकी है।
इस्तीफे के बाद अब विभाग की नजर आगे की व्यवस्था पर
सिपाही ने भले ही अपना इस्तीफा वापस ले लिया हो, लेकिन WhatsApp ग्रुप में भेजे गए उसके संदेश ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और ड्यूटी व्यवस्था से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है।
अब देखना होगा कि ट्रॉमा सेंटर की ड्यूटी और ड्यूटी वितरण को लेकर सिपाही की शिकायतों पर अधिकारी क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल अधिकारियों की समझाइश के बाद मामला शांत हो गया है।
news desk MPcg