इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले बढ़ी हलचल, मैदान से लेकर शुल्क और सुरक्षा शर्तों तक विवाद
19 सितंबर को रीजनल पार्क के सामने होगा कार्यक्रम; नेहरू स्टेडियम में अनुमति नहीं मिलने के बाद बदला स्थान, IDA ने मांगे अतिरिक्त 4.03 लाख रुपए, पुलिस ने सुरक्षा को लेकर रखीं 31 शर्तें
इंदौर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले आयोजन स्थल, शुल्क और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई स्तर पर घटनाक्रम सामने आए हैं। कार्यक्रम पहले 12 सितंबर को नेहरू स्टेडियम में प्रस्तावित था, लेकिन वहां अनुमति नहीं मिलने के बाद इसकी तारीख 19 सितंबर की गई और आयोजन के लिए रीजनल पार्क के सामने इंदौर विकास प्राधिकरण यानी IDA के मैदान को चुना गया। IDA ने करीब 12 हजार वर्गमीटर जमीन अस्थायी उपयोग के लिए उपलब्ध कराई। इसके बाद निर्धारित अवधि से पहले मैदान के एक हिस्से का इस्तेमाल शुरू होने के आधार पर कांग्रेस से करीब 4.03 लाख रुपए अतिरिक्त भुगतान करने को कहा गया। दूसरी ओर, कार्यक्रम की अनुमति के साथ इंदौर पुलिस ने आयोजकों के सामने 31 सुरक्षा शर्तें रखी हैं।
नेहरू स्टेडियम से रीजनल पार्क तक बदला कार्यक्रम का स्थान
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का इंदौर संस्करण पहले 12 सितंबर को नेहरू स्टेडियम में प्रस्तावित था। बाद में कार्यक्रम की तारीख बदलकर 19 सितंबर की गई। आयोजन के लिए कांग्रेस ने रीजनल पार्क के सामने स्थित IDA के मैदान का विकल्प चुना। IDA ने कार्यक्रम के लिए करीब 12 हजार वर्गमीटर जमीन अस्थायी लीज पर देने की मंजूरी दी। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस ने मैदान के उपयोग के लिए 10,08,175 रुपए जमा किए थे।
इसके बाद कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हुईं। कांग्रेस की ओर से मैदान पर डोम, पंडाल और अन्य व्यवस्थाएं तैयार की गईं। इसी दौरान IDA की ओर से अतिरिक्त भुगतान का मामला सामने आया। इससे आयोजन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई।
पहले जमा किए 10.08 लाख, फिर मांगे गए 4.03 लाख रुपए अतिरिक्त
IDA की ओर से कांग्रेस को भेजे गए पत्र के मुताबिक करीब 12 हजार वर्गमीटर जमीन 17 से 19 सितंबर तक के अस्थायी उपयोग के लिए आवंटित की गई थी। निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि आवंटित क्षेत्र के करीब 4,800 वर्गमीटर हिस्से का इस्तेमाल 14 सितंबर से ही शुरू कर दिया गया था।
इसके बाद IDA ने निर्धारित अवधि से पहले जमीन के उपयोग के आधार पर कांग्रेस से ₹4,03,270 अतिरिक्त जमा कराने को कहा। यह रकम पहले जमा किए गए करीब 10.08 लाख रुपए के अतिरिक्त थी। कांग्रेस की ओर से इस अतिरिक्त भुगतान पर आपत्ति जताए जाने की बात सामने आई, हालांकि कार्यक्रम की तैयारियां जारी रहीं।
इस मामले में कांग्रेस नेताओं ने अतिरिक्त शुल्क की मांग पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासनिक पक्ष से इसे जमीन के निर्धारित अवधि से पहले उपयोग से जुड़ा शुल्क बताया गया है। इसलिए शुल्क को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग व्याख्या सामने आई है।
पुलिस ने कार्यक्रम की अनुमति के साथ रखीं 31 सुरक्षा शर्तें
कार्यक्रम से ठीक पहले इंदौर पुलिस ने कांग्रेस को अनुमति के साथ 31 सुरक्षा शर्तों की सूची दी। इन शर्तों में भीड़ नियंत्रण, प्रवेश और निकास व्यवस्था, तलाशी, CCTV, पार्किंग, चिकित्सा सुविधा, आपातकालीन निकासी और मंच की सुरक्षा जैसे प्रावधान शामिल हैं। आयोजकों को कार्यक्रम में आने वाले लोगों की संख्या और उनके आवागमन से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने आयोजकों से यह जानकारी भी मांगी है कि अलग-अलग जिलों या कॉलेजों से कितने लोग कार्यक्रम में पहुंचेंगे, कितने लोग निजी वाहनों, बस या ट्रेन से आएंगे और वाहनों से जुड़ी जानकारी क्या होगी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत स्वयंसेवकों और आयोजन स्थल की निगरानी से जुड़े इंतजाम भी शामिल हैं।
राजीव गांधी हत्याकांड की सुरक्षा चूक का भी दिया गया हवाला
पुलिस की ओर से दी गई सुरक्षा शर्तों में 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले की सुरक्षा संबंधी चूकों का हवाला भी दिया गया है। उस घटना की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति जेएस वर्मा आयोग की रिपोर्ट का संदर्भ देते हुए आयोजकों की जिम्मेदारियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर जोर दिया गया है।
पुलिस का कहना है कि सुरक्षा शर्तें कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की संभावित मौजूदगी और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तय की गई हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने इतनी बड़ी संख्या में शर्तें लगाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस बोली- सभी सुरक्षा शर्तों का करेंगे पालन
कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि वह पुलिस की ओर से निर्धारित सुरक्षा नियमों और शर्तों का पालन करेगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पार्टी ने अलग-अलग स्तर पर तैयारियां की हैं।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार छात्रों से संवाद के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में संपर्क अभियान चलाया गया है। बारकोड के जरिए पंजीयन की व्यवस्था भी की गई है। पार्टी ने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के शामिल होने का दावा किया है। हालांकि, पंजीयन और वास्तविक उपस्थिति अलग-अलग आंकड़े हो सकते हैं।
शिक्षा, परीक्षा, पेपर लीक और रोजगार होंगे प्रमुख मुद्दे
‘छात्रों की गूंज’ अभियान का मुख्य फोकस छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर रखा गया है। कांग्रेस के अनुसार कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक, भर्ती परीक्षाएं, रोजगार और शिक्षित बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
पार्टी का कहना है कि एकेडमिक कैलेंडर समय पर लागू होना चाहिए, परीक्षाएं निर्धारित समय पर होनी चाहिए और युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होने चाहिए। मध्य प्रदेश में व्यापमं, MPPSC और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े छात्रों के मुद्दों को भी कार्यक्रम में उठाए जाने की बात कही गई है।
राहुल गांधी इससे पहले भी इस अभियान के तहत छात्रों से संवाद कर चुके हैं। इंदौर इस अभियान का पांचवां शहर बताया जा रहा है। इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
कमलेश्वर पटेल ने लगाए कार्यक्रम रोकने की कोशिश के आरोप
कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने आयोजन से जुड़े घटनाक्रम को लेकर राज्य सरकार और भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम की घोषणा के बाद से ही अलग-अलग स्तर पर अड़चनें सामने आ रही हैं और विपक्ष की आवाज को रोकने की कोशिश की जा रही है।
पटेल ने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पानी जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सरकार से युवाओं और छात्रों से जुड़े सवालों पर ध्यान देने की मांग की। उनके ये बयान कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं; सरकार या भाजपा की ओर से इन आरोपों को लेकर अलग प्रतिक्रिया सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
भाजपा के कार्यक्रम को लेकर भी पटेल ने लगाए आरोप
कमलेश्वर पटेल ने इंदौर में हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के कार्यक्रम को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम सरकारी आयोजन जैसा था और इसमें सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने बड़ी संख्या में बसों के जरिए लोगों को कार्यक्रम में लाने का भी आरोप लगाया।
ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन्हें आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
250 नेताओं के लिए अलग व्यवस्था, देशभर से प्रतिनिधियों के पहुंचने की तैयारी
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए आयोजन स्थल पर छात्रों के अलावा कांग्रेस नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बैठने की भी अलग व्यवस्था की जा रही है। कांग्रेस के मुताबिक करीब 250 नेताओं के लिए अलग स्थान रखा गया है।
कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विभिन्न राज्यों से जुड़े पार्टी पदाधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक और वरिष्ठ नेता भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। आयोजन स्थल पर छात्रों के क्षेत्र और नेताओं के क्षेत्र को अलग रखने की व्यवस्था की जा रही है।
छात्रों की गूंज का इंदौर संस्करण क्यों चर्चा में है?
इंदौर में होने वाला यह कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है, जब राज्य में शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती और रोजगार को लेकर राजनीतिक दल लगातार बयान दे रहे हैं। कांग्रेस इसे छात्रों से सीधे संवाद का कार्यक्रम बता रही है, जबकि भाजपा और कांग्रेस के बीच कार्यक्रम से पहले ही राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो चुकी है।
कार्यक्रम से पहले आयोजन स्थल बदलने, अतिरिक्त शुल्क और सुरक्षा शर्तों से जुड़े घटनाक्रमों ने इसकी तैयारियों को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से सुरक्षा संबंधी शर्तों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था और कार्यक्रम में आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है।
अब 19 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम में कितने छात्र पहुंचते हैं और शिक्षा, परीक्षा, भर्ती तथा रोजगार से जुड़े किन मुद्दों पर राहुल गांधी छात्रों के साथ संवाद करते हैं, इस पर नजर रहेगी।
news desk MPcg