भिवापुर में निकली पारंपरिक मारबत शोभायात्रा, ‘इडा-पीडा रोगराई घेऊन जागे’ के नारों से गूंजा शहर

भिवापुर में निकली पारंपरिक मारबत शोभायात्रा, ‘इडा-पीडा रोगराई घेऊन जागे’ के नारों से गूंजा शहर

सामाजिक संगठन ने पोला पर्व पर निकाला मारबत जुलूस, राजनीति से भ्रष्टाचार तक कई ज्वलंत मुद्दों पर लोगों का ध्यान खींचा
पोला पर्व पर जुटे सैकड़ों युवा

भिवापुर में पोला पर्व के अवसर पर सामाजिक संगठन की ओर से पारंपरिक मारबत जुलूस निकाला गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में युवक और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। जुलूस के दौरान ‘इडा-पीडा रोगराई घेऊन जागे मारबत’ के नारे लगाए गए, जिससे पूरा शहर गूंज उठा। पारंपरिक आयोजन को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों की झलक

मारबत जुलूस के दौरान तैयार किए गए बडग्यों के जरिए राजनीति, सामाजिक मुद्दों, भ्रष्टाचार और अन्य ज्वलंत विषयों को सामने रखा गया। आयोजकों ने पारंपरिक उत्सव के माध्यम से इन मुद्दों की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। जुलूस में शामिल झांकियों और प्रतीकों को देखने के लिए रास्तेभर लोगों की भीड़ नजर आई।

पुराने मंदिर से शुरू हुआ जुलूस

मारबत जुलूस की शुरुआत जुनी गुजरी स्थित विठ्ठल-रुक्माई मंदिर से हुई। यहां से जुलूस आगे बढ़ते हुए कलार वली चौक, टी हाउस चौक, रामधन चौक और बस स्थानक परिसर से होकर गुजरा। निर्धारित मार्ग से होते हुए मारबत जुलूस नक्षी रोड स्थित खुले मैदान तक पहुंचा।

खुले मैदान में किया गया मारबत का दहन

जुलूस के अंतिम पड़ाव पर नक्षी रोड स्थित खुले मैदान में मारबत का दहन किया गया। पारंपरिक मान्यता और आयोजन की परंपरा के अनुसार इस दौरान लोगों ने बुराइयों और सामाजिक समस्याओं से मुक्ति की कामना की। दहन कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

सुरक्षा के लिए पुलिस का कड़ा बंदोबस्त

मारबत जुलूस में उमड़ी भीड़ को देखते हुए भिवापुर पुलिस विभाग की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। जुलूस के पूरे मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा, ताकि यातायात व्यवस्था बनाए रखने के साथ किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस ने निगरानी रखी।

परंपरा के साथ सामाजिक संदेश भी

भिवापुर का यह मारबत उत्सव केवल धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जुलूस में समकालीन सामाजिक मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने आयोजन को खास बना दिया। पारंपरिक नारों, जुलूस और सामाजिक संदेशों के साथ इस आयोजन ने क्षेत्र में लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

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