शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 1,100 अंक उछला

 शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 1,100 अंक उछला

 भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 15 अक्टूबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 1,100 अंक उछलकर 73,850 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 300 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,900 के पार कारोबार करने लगा। आईटी और FMCG कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला। हालांकि, सरकारी बैंकों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।

बाजार में तेजी की प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को माना जा रहा है। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत के आयात बिल पर दबाव कम होने और महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे निवेशकों की धारणा को सहारा मिला और बाजार में खरीदारी बढ़ी।

 सेंसेक्स के 30 में से 26 शेयरों में तेजी

गुरुवार के कारोबार में सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से 26 में तेजी दर्ज की गई। इससे बाजार में व्यापक खरीदारी का संकेत मिला। आईटी और FMCG सेक्टर के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी दिखाई दी, जबकि सरकारी बैंकिंग शेयरों में दबाव बना रहा।

निफ्टी में भी करीब 1.40% की तेजी दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांकों में बढ़त से बाजार में सकारात्मक माहौल बना, हालांकि अलग-अलग सेक्टरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा।

कच्चा तेल सस्ता होने से बाजार को मिला सहारा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम कारक रही। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, WTI क्रूड करीब 1.05% गिरकर 94 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड करीब 1.63% गिरकर 104 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें घटने से देश के आयात बिल में राहत मिल सकती है। इसके अलावा, कंपनियों की उत्पादन और परिवहन लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना रहती है।

हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करता है कि कीमतें कितने समय तक कम रहती हैं और इसका लाभ घरेलू अर्थव्यवस्था तक किस हद तक पहुंचता है।

एशियाई बाजारों में भारी गिरावट

भारतीय बाजार में तेजी के बीच एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 7.79% गिरकर 5,527 पर आ गया। जापान का निक्केई 4.81% टूटकर 64,489 पर और हांगकांग का हैंगसेंग 1.21% गिरकर 24,009 पर कारोबार करता दिखा।

एशियाई बाजारों में इस गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार में खरीदारी देखने को मिली। इससे अलग-अलग बाजारों में निवेशकों की धारणा और सेक्टरों के प्रदर्शन में अंतर नजर आया।

 अमेरिकी बाजार में भी रही गिरावट

14 अक्टूबर के कारोबार में अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए थे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, डाउ जोन्स 49 अंक यानी 0.09% गिरकर 51,621 पर रहा। नैस्डैक में 512 अंकों यानी 1.88% की गिरावट दर्ज की गई और यह 26,693 पर बंद हुआ। वहीं, S&P 500 करीब 1.11% गिरकर 7,719 पर आ गया।

अमेरिकी और एशियाई बाजारों में कमजोरी के बीच भारतीय बाजार में तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींचा। हालांकि, वैश्विक बाजारों का रुख आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर सकता है।

 विदेशी निवेशकों ने सात दिनों में बेचे ₹8,440 करोड़ के शेयर

शेयर बाजार में तेजी के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII/FPI) की बिकवाली जारी रहने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने पिछले सात दिनों में भारतीय बाजार से 8,440 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की।

पिछले 30 दिनों के आंकड़ों में विदेशी निवेशकों की शुद्ध बिकवाली 86,263 करोड़ रुपये रही। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बीते सात दिनों में 12,898 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। पिछले 30 दिनों में घरेलू संस्थागत निवेशकों की शुद्ध खरीदारी 96,867 करोड़ रुपये रही।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है, जबकि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाला एक अहम कारक बनी हुई है।

एक दिन पहले बाजार में रही थी गिरावट

15 अक्टूबर की तेजी से एक दिन पहले यानी 14 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में गुरुवार की बढ़त ने बाजार में उतार-चढ़ाव को फिर चर्चा में ला दिया है।

फिलहाल निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी हुई है। बाजार में तेजी के बावजूद अलग-अलग शेयरों और सेक्टरों में जोखिम बना रहता है। इसलिए निवेश से जुड़े फैसले लेते समय केवल एक दिन की तेजी को आधार बनाना उचित नहीं है।