25.79 करोड़ की संदीपनि स्कूल बिल्डिंग डेढ़ साल में बदहाल, नल गायब और शौचालयों में गंदगी

25.79 करोड़ की संदीपनि स्कूल बिल्डिंग डेढ़ साल में बदहाल, नल गायब और शौचालयों में गंदगी

25.79 करोड़ की संदीपनि स्कूल बिल्डिंग डेढ़ साल में बदहाल, नल गायब और शौचालयों में गंदगी

नर्मदापुरम के सिवनी मालवा में सीएम राइज स्कूल की इमारत की हालत पर सवाल, टूटे बेसिन-झूले और छत पर उगे पौधे; जिला शिक्षा अधिकारी ने जारी किया नोटिस

मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों को बेहतर सुविधाएं देने और उन्हें निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित करने के उद्देश्य से संदीपनि सीएम राइज स्कूलों की शुरुआत की गई है। इन स्कूलों में आधुनिक भवन, बेहतर शौचालय, पेयजल और विद्यार्थियों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा में करीब 25.79 करोड़ रुपए की लागत से बनी संदीपनि स्कूल की बिल्डिंग की हालत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण के करीब डेढ़ साल के भीतर ही परिसर में कई जगह अव्यवस्था सामने आने की जानकारी है। स्कूल में नल गायब होने, शौचालयों में गंदगी, टूटे बेसिन और झूलों के साथ छत पर पौधे उगने जैसी समस्याएं बताई गई हैं। मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने नोटिस जारी किया है।

25.79 करोड़ रुपए की लागत से बनी बिल्डिंग पर सवाल

सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के साथ विद्यार्थियों को बेहतर भौतिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संदीपनि सीएम राइज स्कूल भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। नर्मदापुरम जिले में भी ऐसे स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जिले में सात संदीपनि स्कूलों में सिवनी मालवा का भवन सबसे पहले तैयार किया गया था। इस भवन पर करीब 25.79 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

इतनी बड़ी लागत से बने भवन से उम्मीद की जाती है कि विद्यार्थियों को साफ-सुथरा और सुरक्षित वातावरण मिलेगा। लेकिन डेढ़ साल के भीतर ही भवन और परिसर की सुविधाओं की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आने से रखरखाव और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, भवन की प्रत्येक कमी कब से मौजूद है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पेयजल और हाथ धोने के लिए लगे नल गायब

स्कूल परिसर में पेयजल और हाथ धोने के लिए लगाए गए महंगे ब्रांडेड जैगुआर कंपनी के नल गायब होने की जानकारी सामने आई है। स्कूल में विद्यार्थियों की स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिहाज से पानी की सुविधा बेहद जरूरी है। ऐसे में नलों का गायब होना केवल सामान की कमी का मामला नहीं, बल्कि बच्चों की दैनिक जरूरतों से भी जुड़ा हुआ है।

इस मामले में यह पता लगाना जरूरी होगा कि नल कब और किन परिस्थितियों में गायब हुए। साथ ही, स्कूल परिसर में लगाए गए उपकरणों की नियमित जांच और उनकी सुरक्षा की व्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा। उपलब्ध जानकारी में नल गायब होने के पीछे किसी व्यक्ति की भूमिका या घटना की तारीख का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

शौचालयों में गंदगी, टूटे बेसिन से विद्यार्थियों को परेशानी

स्कूल के शौचालयों में गंदगी और बेसिन टूटे होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। स्कूल में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रोजाना पढ़ने आते हैं, इसलिए साफ शौचालय और हाथ धोने की पर्याप्त सुविधा जरूरी है। इन सुविधाओं की खराब स्थिति से बच्चों को परेशानी हो सकती है और स्वच्छता बनाए रखना भी मुश्किल हो सकता है।

सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए भवनों में साफ-सफाई और मरम्मत की नियमित व्यवस्था महत्वपूर्ण है। शौचालयों की सफाई, टूटे बेसिनों की मरम्मत और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना स्कूल प्रबंधन की प्राथमिकताओं में होना चाहिए।

टूटे झूले और छत पर उगे पौधों ने बढ़ाई चिंता

स्कूल परिसर में झूले टूटे होने की जानकारी भी सामने आई है। विद्यार्थियों के लिए बनाए गए खेल और मनोरंजन के साधनों का सुरक्षित स्थिति में होना जरूरी है, ताकि उनका इस्तेमाल करते समय किसी तरह की दुर्घटना का खतरा न रहे। टूटे झूलों को समय पर दुरुस्त करना या असुरक्षित होने पर उनका उपयोग रोकना आवश्यक है।

इसके अलावा, भवन की छत पर पौधे उगने की बात भी बताई गई है। छत पर पौधों का उगना जल निकासी और नियमित रखरखाव की जांच की जरूरत की ओर संकेत कर सकता है। यदि छत पर पानी जमा होता है या दरारों में वनस्पति उगती है, तो समय रहते निरीक्षण और मरम्मत जरूरी हो सकती है। हालांकि, भवन को इससे कितना नुकसान हुआ है, इसकी पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही की जा सकती है।

जिला शिक्षा अधिकारी ने जारी किया नोटिस

स्कूल भवन की हालत को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने नोटिस जारी किया है। नोटिस के जरिए संबंधित पक्ष से स्थिति को लेकर जवाब मांगे जाने की जानकारी है। अब मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि सामने आई कमियों के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

मामले की जांच में स्कूल प्रबंधन की भूमिका, भवन के रखरखाव की व्यवस्था और सुविधाओं की नियमित निगरानी जैसे पहलुओं को देखना महत्वपूर्ण होगा। यदि उपकरण गायब हुए हैं या सुविधाएं क्षतिग्रस्त हैं, तो उनके कारणों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई और मरम्मत की जरूरत होगी।

सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और रखरखाव पर सवाल

संदीपनि सीएम राइज स्कूलों का उद्देश्य सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में करोड़ों रुपए की लागत से बने भवन में साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय और खेल सुविधाओं की स्थिति महत्वपूर्ण हो जाती है। भवन निर्माण के साथ-साथ उसकी नियमित देखरेख और समय पर मरम्मत भी जरूरी है।

सिवनी मालवा के संदीपनि स्कूल से जुड़ा मामला इस बात पर ध्यान दिलाता है कि सरकारी भवनों की गुणवत्ता और रखरखाव की निगरानी लगातार होनी चाहिए। फिलहाल, नोटिस के बाद संबंधित पक्ष का जवाब और प्रशासन की आगे की कार्रवाई सामने आने पर ही स्पष्ट होगा कि कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।