9 साल बाद MP के कॉलेजों में चुनावी हलचल, ABVP-NSUI को JAYS देगा सीधी टक्कर

9 साल बाद MP के कॉलेजों में चुनावी हलचल, ABVP-NSUI को JAYS देगा सीधी टक्कर

2017 के बाद पहली बार चुनाव की आहट, JAYS ने प्रदेशभर में उम्मीदवार उतारने की तैयारी की


मध्यप्रदेश के कॉलेजों में करीब नौ साल बाद एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव की हलचल तेज होती नजर आ रही है। अगर चुनाव सितंबर में होते हैं, तो इस बार छात्र राजनीति का मुकाबला पहले से ज्यादा दिलचस्प रहने वाला है। ABVP और NSUI के बीच होने वाले पारंपरिक मुकाबले में अब जय आदिवासी युवा शक्ति यानी JAYS भी मैदान में उतरने जा रहा है। संगठन ने प्रदेशभर के कॉलेजों में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। खास फोकस आदिवासी बहुल क्षेत्रों और उन कॉलेजों पर रहेगा, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी विद्यार्थी पढ़ते हैं।

JAYS की एंट्री से बदलेगा छात्र राजनीति का चुनावी समीकरण

JAYS के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दे ने इंदौर में आदिवासी दिवस के कार्यक्रम के दौरान छात्रसंघ चुनाव लड़ने का ऐलान किया। घोषणा के बाद संगठन ने कॉलेजों में अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। JAYS की योजना अलग-अलग कॉलेजों में विद्यार्थियों के बीच पहुंच बनाने और स्थानीय स्तर पर छात्र नेताओं को तैयार करने की है। उम्मीदवारों के चयन में आदिवासी युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। संगठन का मानना है कि कॉलेजों से जुड़े स्थानीय मुद्दों को उठाकर वह विद्यार्थियों के बीच मजबूत आधार तैयार कर सकता है।

मालवा-निमाड़ के कॉलेजों से शुरू होगी JAYS की चुनावी तैयारी

JAYS का शुरुआती फोकस मालवा और निमाड़ क्षेत्र के कॉलेजों पर रहने वाला है। इन इलाकों में आदिवासी विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है और संगठन पहले से ही आदिवासी युवाओं के बीच सक्रिय रहा है। ऐसे में JAYS इन्हीं क्षेत्रों को अपनी छात्र राजनीति की पहली बड़ी जमीन बनाने की कोशिश करेगा। संगठन के पदाधिकारी कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों से बातचीत करेंगे, उनकी समस्याओं की जानकारी जुटाएंगे और संभावित उम्मीदवारों की पहचान करेंगे। इसके बाद अभियान को प्रदेश के अन्य कॉलेजों तक विस्तार देने की योजना है।

छात्रवृत्ति, रोजगार और बैकलॉग भर्ती को बनाएगा बड़ा चुनावी मुद्दा

छात्रसंघ चुनाव में JAYS की रणनीति केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं रहने वाली है। संगठन छात्रों से सीधे जुड़े मुद्दों को चुनावी अभियान का हिस्सा बनाने की तैयारी में है। छात्रवृत्ति में आने वाली परेशानियां, रोजगार के अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याएं, बैकलॉग पदों पर भर्ती और कॉलेजों की स्थानीय समस्याएं प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकती हैं। JAYS पहले भी बैकलॉग भर्ती और पटवारी परीक्षा जैसे मामलों को लेकर आवाज उठा चुका है। अब इन्हीं मुद्दों को कॉलेज परिसरों में छात्रों के बीच ले जाने की तैयारी है।

ABVP-NSUI के मुकाबले में तीसरा संगठन, आदिवासी बहुल कॉलेजों पर नजर

मध्यप्रदेश की छात्र राजनीति में लंबे समय से ABVP और NSUI दो प्रमुख छात्र संगठनों के रूप में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में JAYS की चुनावी एंट्री कई कॉलेजों में मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है। खासतौर पर आदिवासी बहुल इलाकों के कॉलेजों में इसका असर देखने को मिल सकता है। JAYS की कोशिश ऐसे विद्यार्थियों को अपने साथ जोड़ने की होगी, जो आदिवासी समाज से आते हैं और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज चाहते हैं। इससे कुछ कॉलेजों में पुराने चुनावी समीकरण भी बदल सकते हैं।

2017 के बाद पहली बार चुनाव की तैयारी, सितंबर में हो सकते हैं छात्रसंघ चुनाव

मध्यप्रदेश में आखिरी बार छात्रसंघ चुनाव 2017 में हुए थे। इसके बाद करीब नौ वर्षों से कॉलेजों में सीधे छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए। अब सरकार की ओर से सितंबर में चुनाव कराने की तैयारी की बात सामने आई है। हालांकि चुनाव की तारीख को लेकर अभी अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। तारीख तय होने के बाद कॉलेज परिसरों में छात्र संगठनों की गतिविधियां तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। इसी के साथ संभावित उम्मीदवारों और छात्र संगठनों के बीच संपर्क अभियान भी तेज होगा।

2013 में बना था JAYS, अब छात्र राजनीति में पहली बड़ी चुनावी परीक्षा

जय आदिवासी युवा शक्ति यानी JAYS की स्थापना वर्ष 2013 में हुई थी। संगठन मुख्य रूप से आदिवासी समाज और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहा है। छात्र राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए करीब दो साल पहले संगठन ने छात्र इकाई की शुरुआत की थी। अब छात्रसंघ चुनाव की संभावित वापसी JAYS के लिए अपनी छात्र इकाई की ताकत दिखाने का बड़ा मौका होगी। अगर संगठन आदिवासी बहुल कॉलेजों में मजबूत प्रदर्शन करता है, तो आने वाले समय में मध्यप्रदेश की छात्र राजनीति में उसकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।