भारत से रिश्ते सुधारना चाहता बांग्लादेश, PM तारिक रहमान ने मांगा ‘अनुकूल माहौल’: शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर भी दबाव; दिल्ली ने कहा- कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच जारी

भारत से रिश्ते सुधारना चाहता बांग्लादेश, PM तारिक रहमान ने मांगा ‘अनुकूल माहौल’: शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर भी दबाव; दिल्ली ने कहा- कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच जारी

नई सरकार के रुख में बदलाव के संकेत, ढाका ने रिश्ते सुधारने के साथ हसीना प्रत्यर्पण का मुद्दा भी उठाया

 भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले दो वर्षों से चले आ रहे तनाव के बीच प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने नई दिल्ली के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर खुलकर बात की है। सोमवार, 10 अगस्त को भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात के दौरान रहमान ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर जोर दिया। इसी बैठक में बांग्लादेश ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह भी किया।

यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब ढाका और नई दिल्ली के रिश्ते एक साथ दो अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ तारिक रहमान सरकार भारत के साथ संबंधों को स्थिर और बेहतर करने की इच्छा जाहिर कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शेख हसीना की भारत में मौजूदगी और उनके खिलाफ बांग्लादेश में चल रही कानूनी कार्रवाई दोनों देशों के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दों में बनी हुई है।

रहमान ने कहा- रिश्ते आगे बढ़ाने के लिए माहौल जरूरी

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, तारिक रहमान ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए “अनुकूल माहौल” तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हसीना सरकार के अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में लगातार तनाव बना हुआ है।

Reuters के अनुसार, रहमान सरकार पिछले करीब छह महीने से भारत के साथ रिश्तों को स्थिर करने की कोशिश कर रही है। सोमवार की बैठक में पहली बार रहमान की ओर से सार्वजनिक रूप से ऐसे माहौल पर जोर दिया गया, जिसे दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सीमा प्रबंधन, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव कम होना आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

हसीना के प्रत्यर्पण पर भी ढाका का जोर

रिश्ते सुधारने की बात के साथ ही बांग्लादेश ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी उठाया। बांग्लादेश की ओर से भारत से कहा गया कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।

शेख हसीना अगस्त 2024 में अपनी सरकार के पतन के बाद भारत आ गई थीं और तब से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई है और नवंबर 2025 में उन्हें एक मामले में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई थी। हसीना इस फैसले को स्वीकार नहीं करती हैं।

भारत के लिए यह मामला बेहद संवेदनशील है, क्योंकि एक ओर ढाका लगातार प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नई दिल्ली को अपने कानूनी और न्यायिक ढांचे के तहत इस अनुरोध पर फैसला करना है।

भारत का रुख- प्रत्यर्पण अनुरोध की समीक्षा जारी

शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत ने फिलहाल कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया है। भारतीय पक्ष का कहना है कि बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अनुरोध की समीक्षा कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं के अनुसार की जा रही है।

इसका मतलब यह है कि तारिक रहमान सरकार की ओर से प्रत्यर्पण पर दबाव बनाए जाने के बावजूद इस मामले में भारत की तरफ से तत्काल प्रत्यर्पण का कोई संकेत नहीं दिया गया है।

यही वजह है कि हसीना का मामला दोनों देशों के बीच संबंधों में सबसे बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक पेच बना हुआ है। रहमान सरकार संबंधों को आगे बढ़ाना चाहती है, लेकिन साथ ही वह अपने घरेलू राजनीतिक एजेंडे के तहत हसीना की वापसी और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को भी महत्वपूर्ण मानती है।

हसीना के सार्वजनिक संबोधन से फिर बढ़ा तनाव

भारत-बांग्लादेश संबंधों में यह नया घटनाक्रम शेख हसीना के हालिया सार्वजनिक संबोधन के कुछ दिन बाद सामने आया है। अगस्त की शुरुआत में हसीना ने भारत से एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अपनी बात रखी थी। यह 2024 में सत्ता से हटने और भारत आने के बाद उनका पहला प्रमुख सार्वजनिक मीडिया संवाद था।

हसीना ने अपने संबोधन में दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई थी। Reuters के अनुसार, उन्होंने कहा था कि वह अपने देश लौटने और अदालत का सामना करने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई।

ढाका ने भारत पर जताई थी नाराजगी

हसीना के भारत से सार्वजनिक रूप से संबोधित करने के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के प्रति कड़ा रुख अपनाया था। ढाका ने इस कार्यक्रम को अनुमति दिए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि इससे दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है।

बांग्लादेश ने इससे पहले अपने मीडिया संस्थानों को भी हसीना के प्रस्तावित संबोधन को प्रसारित या प्रकाशित नहीं करने की चेतावनी दी थी। ढाका ने इसके लिए अपने इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल के दिसंबर 2024 के आदेश का हवाला दिया था, जिसमें हसीना के बयानों और भाषणों के प्रसारण पर रोक से संबंधित निर्देश बताए गए थे।

भारत ने साफ किया- निजी कार्यक्रम में सरकार की कोई भूमिका नहीं

हसीना के कार्यक्रम को लेकर भारत ने बांग्लादेश के आरोपों को अलग तरीके से देखा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था का कार्यक्रम था और भारत सरकार की उसमें कोई भूमिका नहीं थी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि सरकार की इसमें कोई भागीदारी नहीं थी और कार्यक्रम में व्यक्त किए जाने वाले विचारों का भी सरकार समर्थन नहीं करती।

इस स्पष्टीकरण का मकसद यह स्पष्ट करना था कि हसीना को भारत में सार्वजनिक मंच उपलब्ध कराए जाने को भारत सरकार की आधिकारिक राजनीतिक गतिविधि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अब त्रिवेदी-रहमान मुलाकात क्यों अहम?

भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी और प्रधानमंत्री तारिक रहमान की मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दोनों पक्षों के बीच उच्च स्तर पर संवाद बनाए रखने का संकेत देती है।

मुलाकात के बाद भारतीय हाई कमिश्नर ने भारत की ओर से बांग्लादेश के साथ सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्योन्मुखी तरीके से काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इससे संकेत मिलता है कि हसीना के मुद्दे पर मतभेदों के बावजूद भारत और बांग्लादेश संवाद का रास्ता बंद नहीं करना चाहते। दोनों देशों के लिए यह जरूरी भी है क्योंकि सीमा से लेकर व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तक कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर लगातार बातचीत की आवश्यकता रहती है।

रिश्ते सुधारने की राह में सबसे बड़ी चुनौती हसीना का मुद्दा

भारत-बांग्लादेश संबंधों को सामान्य करने की कोशिशों में सबसे बड़ा सवाल फिलहाल शेख हसीना ही हैं। ढाका चाहता है कि भारत उन्हें वापस करे, जबकि नई दिल्ली प्रत्यर्पण अनुरोध की कानूनी समीक्षा कर रहा है।

दूसरी तरफ हसीना का भारत से सार्वजनिक बयान देना भी ढाका के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार हसीना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाना चाहती है, जबकि हसीना अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती रही हैं।

इसलिए आने वाले समय में भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों की दिशा इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि दोनों सरकारें हसीना के प्रत्यर्पण, राजनीतिक गतिविधियों और द्विपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों को किस तरह संभालती हैं।

क्या भारत-बांग्लादेश रिश्तों में वाकई नरमी आ रही है?

तारिक रहमान का सोमवार का बयान निश्चित तौर पर संबंधों में संवाद और सुधार की इच्छा का संकेत देता है, लेकिन इसे अभी पूर्ण कूटनीतिक बदलाव कहना जल्दबाजी होगी। एक ही बैठक में भारत के साथ संबंध सुधारने की बात और हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोनों सामने आना बताता है कि ढाका अपने राष्ट्रीय और राजनीतिक हितों के साथ नई दिल्ली के साथ व्यावहारिक संबंध भी बनाए रखना चाहता है।

भारत की ओर से भी सकारात्मक और भविष्योन्मुखी सहयोग की बात कही गई है। हालांकि, हसीना के प्रत्यर्पण पर अंतिम फैसला और दोनों देशों के बीच अन्य लंबित मुद्दों पर प्रगति ही यह तय करेगी कि यह शुरुआती नरमी लंबे समय के कूटनीतिक सुधार में बदलती है या नहीं।