ग्वालियर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में सुविधाओं की हालत खराब, फीस के बाद भी लिफ्ट बंद और गिर रही फॉल्स सीलिंग

ग्वालियर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में सुविधाओं की हालत खराब, फीस के बाद भी लिफ्ट बंद और गिर रही फॉल्स सीलिंग

इलाज के लिए शुल्क देने के बावजूद मरीज परेशान; CM हेल्पलाइन तक पहुंची शिकायत, एक हजार करोड़ के विस्तार प्रस्ताव के बीच मौजूदा व्यवस्थाओं पर सवाल

ग्वालियर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज के लिए अलग-अलग शुल्क लेने के बावजूद मरीजों और उनके स्वजनों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। अस्पताल में कहीं लिफ्ट बंद होने की शिकायत है तो कहीं फॉल्स सीलिंग गिरने की स्थिति सामने आ रही है। व्यवस्थाओं को लेकर मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतें अब सीएम हेल्पलाइन तक पहुंच चुकी हैं।

मरीजों और उनके स्वजनों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के लिए निर्धारित शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अस्पताल की मूलभूत सुविधाओं का लाभ सुचारु रूप से नहीं मिल पा रहा है। खासकर गंभीर मरीजों और बुजुर्गों के लिए लिफ्ट बंद होना बड़ी परेशानी बन सकता है।

OPD से लेकर जांच तक अलग-अलग शुल्क

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीजों से विभिन्न सेवाओं के लिए शुल्क लिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सामान्य OPD के लिए 25 रुपए, प्राइवेट OPD के लिए 500 रुपए और भर्ती के लिए 200 रुपए शुल्क निर्धारित है।

इसके अलावा एक्स-रे के लिए 100 रुपए, अल्ट्रासाउंड के लिए 200 रुपए, कलर डॉप्लर के लिए 600 रुपए और ECG के लिए 100 रुपए लिए जा रहे हैं।

मरीजों का कहना है कि जब अस्पताल में अलग-अलग सेवाओं के लिए शुल्क लिया जा रहा है, तो उसके साथ बुनियादी सुविधाओं का व्यवस्थित रहना भी जरूरी है।

लिफ्ट बंद होने से मरीजों को परेशानी

अस्पताल में लिफ्ट की सुविधा मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती है। लिफ्ट बंद होने की स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों को सीढ़ियों या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ सकता है।

गंभीर स्थिति वाले मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में भी अतिरिक्त परेशानी हो सकती है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन से लिफ्ट को जल्द दुरुस्त कराने की मांग उठ रही है।

फॉल्स सीलिंग को लेकर भी चिंता

अस्पताल में फॉल्स सीलिंग के गिरने की समस्या को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर छत या फॉल्स सीलिंग का कोई हिस्सा गिरना मरीजों, उनके परिजनों और स्टाफ के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

मरीजों के स्वजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन को ऐसी समस्याओं की नियमित जांच कराकर समय रहते मरम्मत करानी चाहिए, ताकि किसी बड़े हादसे की स्थिति न बने।

CM हेल्पलाइन तक पहुंची शिकायत

अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर मरीजों और उनके स्वजनों की शिकायतें सीएम हेल्पलाइन तक पहुंच चुकी हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि समस्याओं की जानकारी संबंधित स्तर तक पहुंचने के बावजूद उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिला है।

इस वजह से अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों के स्वजन चाहते हैं कि शिकायतों पर सिर्फ कार्रवाई का आश्वासन देने के बजाय जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को सुधारा जाए।

एक हजार करोड़ के प्रस्ताव के बीच मौजूदा सुविधाओं पर सवाल

गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) प्रबंधन की ओर से अस्पताल और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए करीब एक हजार करोड़ रुपए के प्रस्ताव की बात सामने आ रही है।

एक तरफ अस्पताल के विस्तार और नई सुविधाओं की योजनाएं बनाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर मौजूदा अस्पताल में लिफ्ट और फॉल्स सीलिंग जैसी बुनियादी समस्याएं बनी हुई हैं। यही वजह है कि मरीजों के स्वजन सवाल उठा रहे हैं कि नई परियोजनाओं पर बड़े खर्च की योजना बनाने से पहले वर्तमान सुविधाओं को ठीक करना जरूरी है।

‘नई सुविधाओं से पहले मौजूदा व्यवस्था ठीक हो’

मरीज के स्वजन रामकेश सिंह का कहना है कि अस्पताल में नई सुविधाएं विकसित करना अच्छी बात है, लेकिन पहले मौजूदा व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाना चाहिए।

उनका कहना है कि मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं और उन्हें इलाज के साथ सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण मिलना चाहिए। लिफ्ट और फॉल्स सीलिंग जैसी समस्याओं को लंबे समय तक लंबित रखना मरीजों की परेशानी बढ़ाता है।

प्रबंधन के सामने दोहरी चुनौती

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मौजूदा सुविधाओं को बेहतर बनाना और भविष्य के विस्तार की योजनाओं को आगे बढ़ाना, दोनों ही अस्पताल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, मरीजों के लिए तत्काल जरूरत बुनियादी सुविधाओं की बहाली है।

अब देखना होगा कि जीआरएमसी प्रबंधन सीएम हेल्पलाइन में पहुंची शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है और बंद लिफ्ट तथा फॉल्स सीलिंग जैसी समस्याओं को कितनी जल्दी दूर किया जाता है।

फिलहाल, अस्पताल में इलाज के लिए शुल्क देने वाले मरीजों और उनके स्वजनों की मांग है कि बड़ी परियोजनाओं और विस्तार योजनाओं के साथ-साथ मौजूदा व्यवस्थाओं की नियमित देखरेख पर भी प्राथमिकता से ध्यान दिया जाए।