पश्चिम बंगाल में वार्डों की संख्या बढ़ाने पर मंत्री अग्निमित्रा पॉल का बड़ा बयान, बोलीं- जलभराव सबसे बड़ी समस्या

पश्चिम बंगाल में वार्डों की संख्या बढ़ाने पर मंत्री अग्निमित्रा पॉल का बड़ा बयान, बोलीं- जलभराव सबसे बड़ी समस्या

कोलकाता, 12 अगस्त 2026। पश्चिम बंगाल में डिलिमिटेशन बिल और नगर निकायों के वार्डों की संख्या बढ़ाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कोलकाता और हावड़ा नगर निगमों में वार्डों की संख्या बढ़ाने का जिक्र करते हुए पिछली सरकारों पर नागरिक सुविधाओं की अनदेखी का आरोप लगाया।

अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हावड़ा नगर निगम में वार्डों की संख्या 140 से बढ़ाकर 209 और कोलकाता नगर निगम में 50 से बढ़ाकर 68 करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, वार्डों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य शहरी प्रशासन और नागरिक सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित करना है।

पिछली सरकारों पर लगाए गंभीर आरोप

मंत्री ने आरोप लगाया कि कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन आम जनता को अभी तक जरूरी नागरिक सुविधाएं ठीक से नहीं मिल सकीं। उन्होंने कहा कि सरकार को सत्ता में आए करीब ढाई से तीन महीने ही हुए हैं, लेकिन शहरों में वर्षों से चली आ रही समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं।

उन्होंने खास तौर पर जलभराव, पानी की आपूर्ति, खराब सड़कें, नालियों की सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याओं का जिक्र किया।

भारी बारिश के बाद जलभराव का मुद्दा

अग्निमित्रा पॉल ने हाल ही में हुई भारी बारिश का उदाहरण देते हुए कहा कि बारिश के दो दिन बाद भी कई इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति बनी रही। उन्होंने कहा कि जलभराव को शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक माना जाना चाहिए और इसके स्थायी समाधान की जरूरत है।

उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन समस्याओं का समाधान पहले ही किया जाना चाहिए था। उनके मुताबिक, शहर में बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और नियमित नालों की सफाई नहीं होने के कारण बारिश के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

पानी, सड़क और स्ट्रीट लाइट की समस्याओं का जिक्र

मंत्री ने कहा कि कई इलाकों में उचित जल आपूर्ति अभी भी एक समस्या बनी हुई है। इसके अलावा सड़क निर्माण और रखरखाव पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि कई जगहों पर सड़कें पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हुई हैं और नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से बारिश के दौरान पानी जमा हो जाता है। उन्होंने सड़कों के किनारे पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं होने की समस्या भी उठाई।

वार्ड बढ़ने से क्या बदलेगा?

नगर निगमों में वार्डों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य प्रशासनिक क्षेत्रों का पुनर्गठन और आबादी के हिसाब से स्थानीय प्रतिनिधित्व को व्यवस्थित करना बताया जा रहा है। हालांकि, वार्डों की संख्या बढ़ने के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नगर निकायों में पानी, सड़क, ड्रेनेज, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जाएं।

अग्निमित्रा पॉल के बयान से साफ है कि सरकार शहरी निकायों की समस्याओं को राजनीतिक मुद्दे के तौर पर भी उठा रही है। खासकर बारिश के बाद होने वाला जलभराव कोलकाता और आसपास के शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है।

जलभराव को लेकर बढ़ी चिंता

कोलकाता जैसे बड़े महानगर में भारी बारिश के दौरान जलभराव से यातायात, बाजार, आवागमन और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। कई इलाकों में पानी जमा होने से लोगों को घरों और दुकानों से निकलने में परेशानी होती है।

ऐसे में मंत्री द्वारा जलभराव को सबसे बड़ी समस्या बताए जाने के बाद ड्रेनेज सिस्टम और नगर निकायों की कार्यप्रणाली पर चर्चा फिर तेज हो गई है।

मंत्री के बयान की मुख्य बातें
हावड़ा नगर निगम में वार्ड 140 से बढ़ाकर 209 करने की बात कही गई।
कोलकाता नगर निगम में वार्ड 50 से बढ़ाकर 68 करने का जिक्र।
अग्निमित्रा पॉल ने पिछली सरकारों पर नागरिक सुविधाओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
भारी बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव का मुद्दा उठाया।
पानी की पर्याप्त सप्लाई नहीं होने का दावा।
सड़कों के विकास और रखरखाव को लेकर सवाल उठाए।
नालियों की सफाई और स्ट्रीट लाइट की कमी का भी जिक्र किया।
मंत्री ने जलभराव को सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बताया।
नगर निकायों में बेहतर प्रशासन और नागरिक सुविधाओं की जरूरत पर जोर दिया।