भोपाल में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 231वीं पुण्यस्मृति, CM मोहन यादव ने किया नमन; सुशासन और लोककल्याण के योगदान को किया याद
भोपाल, मध्य प्रदेश: लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 231वीं पुण्यस्मृति के अवसर पर गुरुवार को भोपाल के रवींद्र भवन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में शामिल हुए और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। अहिल्याबाई होलकर का निधन 13 अगस्त 1795 को हुआ था, इसलिए हर वर्ष 13 अगस्त को उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया जाता है।
CM मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन और उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होलकर का जीवन सुशासन, न्याय, जनकल्याण और महिला नेतृत्व का प्रेरणादायी उदाहरण है।
अहिल्याबाई ने 18वीं शताब्दी में मालवा क्षेत्र का शासन संभाला और अपनी प्रशासनिक क्षमता के कारण अलग पहचान बनाई। उनका शासन वर्ष 1767 से 1795 तक रहा और उन्होंने महेश्वर को अपने शासन का प्रमुख केंद्र बनाया।
18वीं शताब्दी में महिला नेतृत्व की मिसाल
अहिल्याबाई होलकर का जीवन उस दौर में महिला नेतृत्व की असाधारण मिसाल माना जाता है। पति खंडेराव होलकर और बाद में ससुर मल्हारराव होलकर के निधन के बाद उन्होंने राज्य की जिम्मेदारी संभाली।
उनके शासन में न्याय व्यवस्था, प्रशासन, व्यापार, कृषि और जनकल्याण से जुड़े कार्यों पर जोर दिया गया। यही वजह है कि इतिहास में उन्हें एक न्यायप्रिय और लोककल्याणकारी शासक के रूप में याद किया जाता है।
देशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का निर्माण
अहिल्याबाई होलकर का योगदान केवल मालवा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में मंदिरों, घाटों, कुओं और धर्मशालाओं के निर्माण तथा कई धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार में योगदान दिया।
उनके प्रमुख कार्यों में काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ के पुराने मंदिर और महेश्वर के कई मंदिरों से जुड़े निर्माण एवं संरक्षण कार्यों का उल्लेख मिलता है। हरिद्वार और रामेश्वरम जैसे धार्मिक क्षेत्रों में भी उनके संरक्षण कार्यों को याद किया जाता है।
महेश्वर को बनाया प्रमुख केंद्र
अहिल्याबाई होलकर ने महेश्वर को अपने शासन का प्रमुख केंद्र बनाया। उनके शासनकाल में महेश्वर प्रशासन के साथ-साथ संस्कृति और व्यापार का भी महत्वपूर्ण केंद्र बना।
महेश्वरी साड़ी और हथकरघा परंपरा को बढ़ावा देने में भी उनके संरक्षण की भूमिका का उल्लेख किया जाता है। उनके शासन की पहचान जनकल्याण और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने से भी जुड़ी रही है।
महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा
अहिल्याबाई होलकर को आज महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व की प्रेरणादायी प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। मध्य प्रदेश सरकार ने भी उनके जीवन और कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया है।
2025 में उनकी 300वीं जयंती के अवसर पर मध्य प्रदेश समेत देशभर में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। मध्य प्रदेश में इन आयोजनों को महिला नेतृत्व और सुशासन के संदेश से भी जोड़ा गया था।
सुशासन के मॉडल के रूप में याद की जाती हैं अहिल्याबाई
अहिल्याबाई होलकर की सबसे बड़ी पहचान उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण से जुड़ी है। उनके शासन को न्याय, जनकल्याण और प्रभावी प्रशासन के लिए याद किया जाता है।
उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास के साथ-साथ आम जनता के लिए बुनियादी सुविधाओं को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया। यही कारण है कि उनकी विरासत आज भी मध्य प्रदेश के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
मध्य प्रदेश में लगातार हो रहे हैं स्मृति कार्यक्रम
मध्य प्रदेश सरकार पिछले कुछ समय से अहिल्याबाई होलकर की विरासत को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित करती रही है। 2025 में उनकी 300वीं जयंती के अवसर पर राज्य में ‘जन कल्याणी पर्व’ समेत कई कार्यक्रम हुए थे। भोपाल में महिला बाइक रैली और अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए गए थे, जिनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए थे।
सरकार की ओर से अहिल्याबाई होलकर के प्रशासन, न्याय व्यवस्था, जनकल्याण और महिला नेतृत्व से जुड़े पहलुओं को युवाओं तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया है।
आज भी देशभर में याद की जाती हैं
अहिल्याबाई होलकर का निधन 13 अगस्त 1795 को हुआ था। करीब 231 साल बाद भी देश के अलग-अलग हिस्सों में उनके नाम से जुड़े मंदिर, घाट और अन्य निर्माण उनके योगदान की याद दिलाते हैं।
उनकी विरासत सिर्फ ऐतिहासिक स्मृति तक सीमित नहीं है। सुशासन, महिला नेतृत्व, सामाजिक कल्याण और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में उनके कार्यों को आज भी उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया जाता है।
बड़ी बात
भोपाल के रवींद्र भवन में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 231वीं पुण्यस्मृति पर कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने लोकमाता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सुशासन, न्यायप्रिय प्रशासन, जनकल्याण और महिला नेतृत्व की विरासत को याद किया। अहिल्याबाई होलकर ने 1767 से 1795 तक मालवा क्षेत्र का शासन संभाला और महेश्वर को अपने प्रशासन का प्रमुख केंद्र बनाया। देश के कई प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के निर्माण तथा जीर्णोद्धार में उनके योगदान के कारण उन्हें आज भी पूरे देश में सम्मान के साथ याद किया जाता है।
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