31 साल की नौकरी, वेतन 80 लाख; संपत्ति 2.53 करोड़ की निकली: इंदौर निगम के ARO पर लोकायुक्त का छापा, पत्नी के नाम 2 बिल्डिंग

31 साल की नौकरी, वेतन 80 लाख; संपत्ति 2.53 करोड़ की निकली: इंदौर निगम के ARO पर लोकायुक्त का छापा, पत्नी के नाम 2 बिल्डिंग

जितेंद्र कुमार पांडे के ठिकानों पर दस्तावेज खंगाले, आय से अधिक संपत्ति के आरोप में जांच; संपत्तियों और बैंक खातों की भी पड़ताल

इंदौर नगर निगम में सहायक राजस्व अधिकारी के पद पर पदस्थ जितेंद्र कुमार पांडे के खिलाफ लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की है। लोकायुक्त की टीम ने उनके ठिकानों पर छापामार कार्रवाई करते हुए संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की है। शुरुआती पड़ताल में करीब 2.53 करोड़ रुपए की संपत्ति सामने आने की जानकारी है।
जांच के दौरान अधिकारी की करीब 31 साल की सेवा अवधि और इस दौरान प्राप्त वेतन को भी आधार बनाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, 31 साल की नौकरी में उन्हें करीब 80 लाख रुपए वेतन मिला। इसके मुकाबले सामने आई संपत्ति का मूल्य काफी अधिक है। इसी अंतर को लेकर लोकायुक्त की टीम आय और संपत्ति के स्रोतों का मिलान कर रही है।

पत्नी के नाम मिलीं दो बिल्डिंग
लोकायुक्त की जांच में अधिकारी की पत्नी के नाम दर्ज दो बिल्डिंग की जानकारी भी सामने आई है। टीम इन संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसके साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इन संपत्तियों को कब खरीदा या बनवाया गया और इनके लिए रकम कहां से आई।
जांच टीम अधिकारी और उनके परिवार के नाम दर्ज दूसरी चल-अचल संपत्तियों की जानकारी भी जुटा रही है। जमीन, मकान, बैंक खाते और अन्य निवेश से संबंधित रिकॉर्ड को जांच के दायरे में लिया गया है।

80 लाख वेतन के मुकाबले 2.53 करोड़ की संपत्ति
लोकायुक्त की कार्रवाई में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, अधिकारी को 31 साल की नौकरी के दौरान करीब 80 लाख रुपए वेतन मिला। वहीं जांच में करीब 2.53 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता चला है। इसी आधार पर लोकायुक्त यह पता लगाने में जुटी है कि संपत्ति अर्जित करने के लिए किन-किन स्रोतों से रकम प्राप्त हुई।
हालांकि, किसी संपत्ति को आय से अधिक मानने से पहले उसके सभी वैध स्रोतों, पारिवारिक आय, कर्ज, निवेश और अन्य वित्तीय साधनों की जांच की जाती है। इसलिए अंतिम स्थिति विस्तृत जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही सामने आएगी।

बैंक खातों और प्रॉपर्टी रिकॉर्ड की जांच
लोकायुक्त की टीम संपत्तियों के अलावा बैंक खातों और दूसरे वित्तीय लेन-देन की जानकारी भी खंगाल रही है। अधिकारियों के मुताबिक, दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि अलग-अलग संपत्तियों में कितना निवेश किया गया और रकम का स्रोत क्या था।
जांच के दौरान संपत्तियों के दस्तावेजों में दर्ज कीमत और उनकी वास्तविक कीमत से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा सकती है। इसके अलावा अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम मौजूद अन्य संपत्तियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। छापे में मिले दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर अधिकारी की ज्ञात आय और संपत्ति का विस्तृत मिलान किया जाएगा।
फिलहाल लोकायुक्त टीम इस बात की जांच कर रही है कि सामने आई 2.53 करोड़ रुपए की संपत्ति में कितनी संपत्ति वैध आय से अर्जित हुई और क्या कोई हिस्सा आय से अधिक संपत्ति के दायरे में आता है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।