दिल्ली में ड्रग्स सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई, UAE से प्रत्यर्पित आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया NCB की हिरासत में
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ भारतीय एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। ड्रग्स किंगपिन बताए जा रहे वीरेंद्र सिंह बसोया को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत लाए जाने के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने हिरासत में लिया है। उसके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया गया था, जिसके आधार पर जून 2026 में UAE में उसकी गिरफ्तारी हुई थी।
भारतीय एजेंसियों और UAE अधिकारियों के बीच लगातार समन्वय के बाद बसोया की भारत वापसी सुनिश्चित की गई। उसकी गिरफ्तारी और भारत लाया जाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ चल रही जांच में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
इंटरपोल रेड नोटिस के बाद UAE में पकड़ा गया
जांच एजेंसियों के मुताबिक, वीरेंद्र सिंह बसोया लंबे समय से भारतीय एजेंसियों की जांच के दायरे में था। उसके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तलाश तेज की गई थी।
जून 2026 में UAE में उसकी गिरफ्तारी हुई। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने UAE के संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क और समन्वय बनाए रखा, जिसके जरिए उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
NCB की हिरासत में पहुंचा आरोपी
भारत लौटने के बाद बसोया को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की हिरासत में लिया गया है। अब एजेंसी उससे ड्रग्स की तस्करी, कथित नेटवर्क और विदेशों से जुड़े कनेक्शन को लेकर पूछताछ कर सकती है।
जांच एजेंसियों की कोशिश यह पता लगाने की होगी कि ड्रग्स की सप्लाई कहां से होती थी, भारत में इसकी डिलीवरी किन लोगों के जरिए की जाती थी और इस नेटवर्क में देश-विदेश के कौन-कौन से लोग शामिल हैं।
करोड़ों रुपये की ड्रग्स बरामदगी से जुड़ा नेटवर्क
बसोया का नाम दिल्ली में सामने आए बड़े ड्रग्स मामलों से भी जोड़ा गया है। 2025 की रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने एक बड़े मामले में करीब ₹13,000 करोड़ की ड्रग्स बरामदगी की जांच की थी और जांचकर्ताओं ने इस मामले में वीरेंद्र सिंह बसोया का नाम अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जोड़ा था।
इसी मामले में उसके बेटे ऋषभ बसोया के खिलाफ भी इंटरपोल रेड नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई थी। जांच एजेंसियों का आरोप था कि यह नेटवर्क बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की सप्लाई से जुड़ा हुआ था।
विदेशों से नेटवर्क चलाने का आरोप
जांच एजेंसियों को शक है कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के सदस्य अलग-अलग देशों में रहकर तस्करी के नेटवर्क को संचालित करते रहे हैं। ऐसे मामलों में भारत से बाहर बैठे आरोपियों को पकड़ना एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होती है।
इसी वजह से इंटरपोल रेड नोटिस और दूसरे देशों की सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बसोया को UAE से भारत लाने की कार्रवाई भी इसी अंतरराष्ट्रीय सहयोग का हिस्सा है।
अब आगे क्या करेगी NCB?
भारत पहुंचने के बाद NCB की जांच का फोकस कथित ड्रग नेटवर्क की पूरी कड़ी को सामने लाने पर रहेगा। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर सकती है कि ड्रग्स की खरीद, अंतरराष्ट्रीय आवाजाही, भारत में सप्लाई और पैसों के लेनदेन को कौन-कौन लोग संभालते थे।
इसके अलावा विदेशों में मौजूद संभावित सहयोगियों और नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
पहले भी सामने आया था बसोया का नाम
रिपोर्टों के अनुसार, वीरेंद्र सिंह बसोया का नाम इससे पहले भी बड़े नारकोटिक्स मामलों में सामने आ चुका है। 2025 में पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा उसके खिलाफ एक अन्य कथित ₹5,000 करोड़ के ड्रग्स मामले में गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई थी।
हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होता है।
अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क पर शिकंजा कसने की कोशिश
वीरेंद्र सिंह बसोया को UAE से भारत लाया जाना भारतीय एजेंसियों के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के मामलों में आरोपी अक्सर देश से बाहर चले जाते हैं। ऐसे मामलों में इंटरपोल, विदेशी पुलिस और संबंधित सरकारों के बीच सहयोग जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होता है।
अब NCB की हिरासत में पूछताछ के दौरान कथित ड्रग सिंडिकेट से जुड़े कई अहम राज सामने आने की उम्मीद है। एजेंसी की जांच यह स्पष्ट करने की कोशिश करेगी कि इस नेटवर्क का संचालन कैसे होता था, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और भारत में ड्रग्स की सप्लाई का पूरा सिस्टम किस तरह काम करता था।
नोट: वीरेंद्र सिंह बसोया के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच एजेंसियों के दावों पर आधारित हैं; मामले में दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
news desk MPcg