भिंड में पिकअप-डंपर की जोरदार भिड़ंत, 8 मजदूरों की मौत; 20 से ज्यादा घायल
भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में मंगलवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। भिंड-ग्वालियर नेशनल हाईवे-719 पर छीमका गांव के पास मजदूरों से भरी पिकअप और सामने से आ रहे डंपर की जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे में आठ मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 25 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में घायलों की संख्या 25 से 32 तक बताई गई है, इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़ा पुलिस और प्रशासन की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा।
हादसे का शिकार हुए मजदूर मध्य प्रदेश के ग्वालियर क्षेत्र में धान की रोपाई का काम पूरा करने के बाद उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी लौट रहे थे। रात के समय पिकअप में सवार होकर घर जा रहे मजदूरों की गाड़ी छीमका गांव के पास अचानक हादसे का शिकार हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि पिकअप का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें बैठे मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए।
रात करीब एक बजे मची चीख-पुकार
जानकारी के मुताबिक हादसा सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे हुआ। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिकअप की रफ्तार काफी अधिक थी। इसी दौरान हाईवे पर कुछ गायें सड़क पर बैठी दिखाई दीं। अचानक मवेशियों के सामने आने पर चालक ने उन्हें बचाने के लिए वाहन को मोड़ने की कोशिश की।
इसी दौरान सामने से आ रहे डंपर से पिकअप की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पिकअप में फंसे मजदूर मदद के लिए चीखने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और घायलों को वाहन से बाहर निकालने में मदद की। प्रारंभिक जानकारी में मवेशियों को बचाने के प्रयास को हादसे की प्रमुख वजह बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस दुर्घटना के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
गोहद अस्पताल में मची अफरा-तफरी
हादसे की सूचना मिलते ही गोहद चौराहा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस और स्थानीय लोगों ने राहत एवं बचाव अभियान चलाया। घायलों को तत्काल गोहद अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद ग्वालियर के अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।
पुलिस के अनुसार हादसे में आठ लोगों की मौत हुई है। मृतकों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए हैं। घायलों और मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी है। पुलिस संबंधित परिवारों से संपर्क करने का प्रयास कर रही है।
धान की रोपाई के लिए ग्वालियर आए थे मजदूर
बताया जा रहा है कि हादसे में शामिल मजदूर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी क्षेत्र के रहने वाले थे। धान की रोपाई के सीजन में वे काम की तलाश में ग्वालियर क्षेत्र आए थे। कई दिनों तक खेतों में काम करने के बाद अब काम पूरा होने पर वे वापस अपने घर लौट रहे थे।
ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में धान की रोपाई के दौरान बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे जिलों और राज्यों से काम के लिए पहुंचते हैं। सीजन खत्म होने के बाद मजदूर अक्सर एक साथ वाहनों से अपने गांवों की ओर लौटते हैं। ऐसे में लंबी दूरी की यात्रा, रात का समय और वाहन में अधिक संख्या में यात्रियों का होना सड़क सुरक्षा के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।
इस हादसे ने एक बार फिर प्रवासी और मौसमी मजदूरों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे के बाद हाईवे पर कुछ देर प्रभावित रहा यातायात
दुर्घटना के बाद पिकअप और डंपर सड़क पर क्षतिग्रस्त हालत में पड़े रहे। इससे हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने दोनों वाहनों को सड़क से हटवाकर यातायात व्यवस्था सामान्य कराई।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दुर्घटना के समय पिकअप की वास्तविक गति कितनी थी, वाहन में कितने लोग सवार थे और सड़क पर मवेशियों के अचानक आने के अलावा हादसे की कोई दूसरी वजह भी थी या नहीं।
NH-719 पर पहले भी हो चुके हैं कई बड़े हादसे
भिंड-ग्वालियर-इटावा को जोड़ने वाला NH-719 लंबे समय से सड़क सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में रहा है। भिंड जिले में इस मार्ग पर लगातार हादसे होते रहे हैं। जनवरी 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक भिंड जिले के करीब 80 किलोमीटर हिस्से में 2017 से अब तक 4,000 से ज्यादा दुर्घटनाएं दर्ज होने और 1,403 लोगों की मौत का दावा किया गया था। इस मार्ग पर रोजाना करीब 20 हजार वाहनों के दबाव की भी जानकारी दी गई थी।
इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच इस मार्ग को लेकर लगातार नाराजगी रही है। संकरी टू-लेन सड़क, भारी वाहनों की आवाजाही, सड़क किनारे मवेशियों की मौजूदगी और कई स्थानों पर यातायात सुरक्षा से जुड़ी कमियां दुर्घटना के जोखिम को बढ़ाती हैं।
फोरलेन की मांग को लेकर आंदोलन भी हो चुके हैं
NH-719 को फोरलेन करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। संत समाज, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कई बार सड़क चौड़ीकरण की मांग को लेकर आंदोलन किए हैं। मार्च 2026 में बरेठा टोल प्लाजा पर ‘रोड नहीं तो टोल नहीं’ अभियान के तहत प्रदर्शन भी किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने हाईवे को संकरा बताते हुए लगातार हो रहे हादसों पर चिंता जताई थी।
इससे पहले भी सड़क के चौड़ीकरण को लेकर केंद्र स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ने की जानकारी सामने आती रही है। लोकसभा में मार्च 2025 के एक जवाब के मुताबिक ग्वालियर-भिंड-एमपी/यूपी बॉर्डर सेक्शन को 4/6 लेन में विकसित करने के लिए डीपीआर तैयार करने का काम कराया जा रहा था।
वहीं जून 2026 में आई रिपोर्ट के मुताबिक ग्वालियर-भिंड-इटावा NH-719 के करीब 117 किलोमीटर हिस्से को फोरलेन करने के लिए टेंडर जारी होने और परियोजना को गति मिलने की जानकारी सामने आई थी।
मवेशियों की वजह से हादसों का खतरा
भिंड के इस हादसे में सड़क पर मौजूद गायों को बचाने की कोशिश सामने आई है। हाईवे पर खुले में घूमते या सड़क पर बैठे मवेशी रात के समय वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। खासकर तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक मवेशी आ जाएं तो चालक के पास वाहन को नियंत्रित करने के लिए बेहद कम समय रहता है।
ऐसी स्थिति में वाहन को अचानक मोड़ने से सामने से आ रहे वाहन से टक्कर, वाहन पलटने या सड़क से उतरने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हाईवे पर मवेशियों की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम, पर्याप्त संकेतक और रात के समय निगरानी को भी सड़क सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जाता है।
एक साथ आठ मौतों से परिवारों में मातम
धान की रोपाई का काम पूरा करने के बाद मजदूर अपने घर लौट रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही किलोमीटर का सफर उनके लिए इतना भयावह साबित होगा। हादसे में आठ मजदूरों की मौत के बाद उनके परिवारों में मातम पसरा है। घायल मजदूरों के परिजन भी अस्पताल पहुंचकर अपने लोगों की स्थिति जानने में जुटे हैं।
पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और हादसे की जांच जारी है। मृतकों की पूरी पहचान और घायलों की स्थिति की जानकारी प्रशासन की ओर से अपडेट किए जाने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
हादसे ने फिर उठाया हाईवे की सुरक्षा का सवाल
भिंड का यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल भी सामने लाता है। सड़क की चौड़ाई, भारी वाहनों का दबाव, तेज रफ्तार, रात में दृश्यता, मवेशियों की आवाजाही और सुरक्षित यातायात व्यवस्था जैसे मुद्दों पर लंबे समय से चर्चा होती रही है।
अब इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों की नजर एक बार फिर NH-719 के चौड़ीकरण और सुरक्षा व्यवस्था पर है। यदि सड़क को निर्धारित मानकों के अनुसार विकसित करने के साथ स्पीड कंट्रोल, डिवाइडर, पर्याप्त साइन बोर्ड, मवेशी नियंत्रण और प्रभावी ट्रैफिक मॉनिटरिंग की व्यवस्था होती है, तो भविष्य में ऐसे हादसों का जोखिम कम किया जा सकता है।
नोट: हादसे में मृतकों की संख्या आठ है, जबकि घायलों की संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। इसलिए अंतिम संख्या प्रशासन/पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के अनुसार अपडेट की जाएगी।
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