UGC-NET विवाद में AI के इस्तेमाल पर सवाल, विशेषज्ञों का दावा- पेपर तैयार करने में हुआ गलत इस्तेमाल; NTA ने किया इनकार

UGC-NET विवाद में AI के इस्तेमाल पर सवाल, विशेषज्ञों का दावा- पेपर तैयार करने में हुआ गलत इस्तेमाल; NTA ने किया इनकार

तीन विषयों की परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बाद उठे सवाल, NTA ने कहा- प्रश्नपत्र तैयार करने में जनरेटिव AI का इस्तेमाल नहीं हुआ

UGC-NET परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रश्नपत्र तैयार करने और अनुवाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों और NTA से जुड़े कुछ पूर्व अधिकारियों ने दावा किया है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने में AI का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया। उनके मुताबिक, पर्याप्त मानवीय और विषय विशेषज्ञों की जांच नहीं होने के कारण प्रश्नपत्रों में कई गंभीर गलतियां सामने आईं। हालांकि, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि विवादित प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए जनरेटिव AI का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र की परीक्षा दोबारा होगी
विवाद के बीच NTA ने UGC-NET के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षाएं दोबारा कराने का फैसला किया है। इन परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्रों में गलतियों, पुराने सवालों की पुनरावृत्ति और अनुवाद संबंधी खामियों की शिकायत की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की ऐसी परीक्षा में प्रश्न तैयार करने से लेकर अंतिम रूप देने तक पर्याप्त विशेषज्ञ निगरानी बेहद जरूरी है।

समाजशास्त्र के पेपर में नाम और शब्दों की गलतियां
समाजशास्त्र के प्रश्नपत्र को लेकर अभ्यर्थियों ने कई तरह की गड़बड़ियों की शिकायत की। रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध विद्वानों के नामों की स्पेलिंग तक गलत थी। जॉर्ज रिट्जर का नाम गलत तरीके से लिखा गया, वहीं टैल्कॉट पार्सन्स और जीएस घुर्ये जैसे विद्वानों के नामों में भी त्रुटियां सामने आईं। इसके अलावा कई शब्दों का अनुवाद अस्पष्ट और असहज होने की शिकायत की गई। कुछ अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रश्न निर्धारित सिलेबस से मेल नहीं खाते थे।

अंग्रेजी के पेपर में पुराने सवाल दोहराने का आरोप
अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र को लेकर भी अभ्यर्थियों ने गंभीर सवाल उठाए। रिपोर्ट के अनुसार, उम्मीदवारों ने दावा किया कि 150 में से करीब 67 प्रश्न पहले आयोजित UGC-NET परीक्षा में पूछे जा चुके थे। कुछ अभ्यर्थियों का आरोप था कि कई सवालों के विकल्पों का क्रम भी पहले जैसा ही रखा गया। कॉमर्स के अभ्यर्थियों ने भी टैक्सेशन, ब्रेक-ईवन एनालिसिस, कैपिटल स्ट्रक्चर और सर्विसेज मार्केटिंग से जुड़े कुछ सवालों के दोहराए जाने की शिकायत की।

NTA ने कहा- प्रश्नपत्र तैयार करने में AI का इस्तेमाल नहीं
NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने जनरेटिव AI के जरिए विवादित प्रश्नपत्र तैयार किए जाने के दावे से इनकार किया है। उनका कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसकी मानवीय समीक्षा की गई थी। हालांकि, जब प्रश्नपत्रों में इतनी गलतियां कैसे रह गईं, इस सवाल पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। दूसरी ओर, विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि यदि प्रश्नपत्र कई विषय विशेषज्ञों के पैनल ने तैयार किए थे, तो पुराने सवालों की इतनी अधिक पुनरावृत्ति और बुनियादी गलतियां कैसे रह गईं।

परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक और मानवीय जांच को लेकर बहस
इस पूरे विवाद ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में AI और ऑटोमेशन के इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक का इस्तेमाल अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन प्रश्नपत्र तैयार करने, अनुवाद करने और अंतिम रूप देने के दौरान योग्य विषय विशेषज्ञों की पर्याप्त जांच जरूरी है। UGC-NET परीक्षा देशभर के विश्वविद्यालयों में शिक्षण और शोध से जुड़ी पात्रता तय करती है, इसलिए प्रश्नपत्रों की विश्वसनीयता और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।