MP में स्वाइन फ्लू की दस्तक: इंदौर में एक मौत, भोपाल में 6 मरीज मिले; रोज 6 हजार लोग वायरल लक्षणों के साथ पहुंच रहे अस्पताल

MP में स्वाइन फ्लू की दस्तक: इंदौर में एक मौत, भोपाल में 6 मरीज मिले; रोज 6 हजार लोग वायरल लक्षणों के साथ पहुंच रहे अस्पताल

भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम बदलने के साथ वायरल और श्वसन संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इंदौर में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण से एक महिला की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि राजधानी भोपाल में भी छह मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही अस्पतालों की ओपीडी में गले में खराश, खांसी, बुखार और सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है।

भोपाल के जेपी अस्पताल, हमीदिया अस्पताल और एम्स की ओपीडी में रोजाना करीब 10 हजार मरीज पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें लगभग 60 प्रतिशत यानी करीब छह हजार मरीजों में वायरल या रेस्पिरेटरी संक्रमण जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। लगातार बढ़ती मरीजों की संख्या ने अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ा दिया है।

इंदौर में स्वाइन फ्लू से महिला की मौत

इंदौर में स्वाइन फ्लू से एक महिला की मौत का मामला सामने आया है। उज्जैन निवासी 60 वर्षीय महिला का करीब 16 दिनों तक इलाज चला। उपचार के दौरान उसकी हालत बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई।

महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन के स्तर पर स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। खासकर बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी जा रही है।

भोपाल में 6 मरीजों में H1N1 की पुष्टि

राजधानी भोपाल में अब तक छह मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, शहर में फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है।

जेपी, हमीदिया और एम्स की ओपीडी में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की है, जिन्हें गले में खराश, खांसी, बुखार, नाक बहना और शरीर में थकान जैसी शिकायतें हैं।

डॉक्टरों के अनुसार मौसम में बदलाव के दौरान वायरल और रेस्पिरेटरी संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। ऐसे में हर बुखार या खांसी को स्वाइन फ्लू मानने की जरूरत नहीं है, लेकिन लगातार बने रहने वाले या गंभीर लक्षणों में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

रोज 10 हजार मरीजों की ओपीडी

भोपाल के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक जेपी अस्पताल, हमीदिया और एम्स की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 10 हजार मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें करीब 60 प्रतिशत मरीजों में वायरल-रेस्पिरेटरी संक्रमण के लक्षण बताए जा रहे हैं।

यानी करीब छह हजार मरीज रोजाना गले में खराश, खांसी, बुखार, नाक बहने और थकान जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे अस्पतालों की ओपीडी पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।

H1N1 जांच में भी परेशानी

स्वाइन फ्लू की जांच को लेकर भी अस्पतालों में समस्या सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार गांधी मेडिकल कॉलेज में एच1एन1 जांच किट उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है। वहीं एम्स में भी फिलहाल एच1एन1 की जांच नहीं हो पाने की जानकारी सामने आई है।

ऐसे में गंभीर लक्षण वाले मरीजों की जांच के लिए निजी लैब पर निर्भरता बढ़ सकती है। कोविड की नियमित जांच पहले की तरह नहीं होने के कारण डॉक्टर जरूरत के मुताबिक गंभीर मरीजों का वायरल पैनल टेस्ट कराने की सलाह दे रहे हैं।

देश के दूसरे राज्यों में भी बढ़ रहे फ्लू के मामले

फ्लू और वायरल संक्रमण का असर सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में वर्ष 2026 में अब तक स्वाइन फ्लू के 1,344 मामले सामने आने की जानकारी दी गई है। वहीं बेंगलुरु में फ्लू जैसे लक्षणों के कारण 500 छात्रों और 21 कर्मचारियों के बीमार होने की बात सामने आई है।

दिल्ली, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बढ़ते मामलों के बीच मध्य प्रदेश में भी स्वास्थ्य विभाग की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है। फिलहाल प्रदेश में किसी औपचारिक अलर्ट की जानकारी नहीं है।

स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए क्या करें?

स्वाइन फ्लू और अन्य वायरल संक्रमण से बचने के लिए सावधानी बरतना सबसे जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के मुताबिक मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा हाथों को नियमित रूप से साबुन या सैनिटाइजर से साफ करना चाहिए।

अगर किसी व्यक्ति को खांसी, बुखार या सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण हैं तो उसे दूसरों से उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए। खांसते और छींकते समय मुंह और नाक को ढकना भी जरूरी है।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

सामान्य वायरल संक्रमण और गंभीर श्वसन संक्रमण के लक्षणों में अंतर करना जरूरी है। लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या ऑक्सीजन स्तर में गिरावट जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो मरीज को तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

फिलहाल मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जरूरी है। भोपाल में छह पुष्ट मामलों और इंदौर में एक मौत के बाद अस्पतालों में जांच और उपचार की व्यवस्था को सुचारु रखना भी बड़ी चुनौती है। वहीं आम लोगों को घबराने के बजाय सावधानी बरतने और लक्षण होने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है।

नोट: ऊपर दिए गए आंकड़े उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर हैं। स्वाइन फ्लू की स्थिति तेजी से बदल सकती है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग की ताजा जानकारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।