कल पाकिस्तान को मिला जवाब, आज चीन की बारी? सर्जियो गोर लद्दाख पहुंचे, दलाई लामा से मुलाकात पर टिकी नजरें
कश्मीर के बाद अमेरिकी राजदूत का लद्दाख दौरा रणनीतिक रूप से अहम, गलवान के बाद पहली बार किसी अमेरिकी राजदूत की लद्दाख यात्रा; चीन की सीमा के करीब अमेरिकी मौजूदगी पर बढ़ी निगाहें
भारत में अमेरिका के राजदूत और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों के विशेष दूत सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरा इस समय कूटनीतिक और रणनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। बुधवार को श्रीनगर पहुंचने के बाद गोर ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की। अब गुरुवार को वह लद्दाख पहुंचे हैं। उनकी यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत के चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ सीमा एवं सुरक्षा संबंधी मुद्दे लगातार रणनीतिक महत्व रखते हैं।
गोर की लद्दाख यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद किसी अमेरिकी राजदूत का लद्दाख दौरा पहली बार बताया जा रहा है। हालांकि, इस यात्रा को सीधे तौर पर चीन के खिलाफ अमेरिकी कदम कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन विशेषज्ञ इसे भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और सीमा सुरक्षा को लेकर अमेरिकी रुचि के संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
पहले श्रीनगर में दिया बड़ा बयान, पाकिस्तान ने जताई नाराजगी
सर्जियो गोर के लद्दाख दौरे से एक दिन पहले श्रीनगर में उनका बयान भी सुर्खियों में रहा। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद अमेरिकी राजदूत ने जम्मू-कश्मीर को भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बेहतर होने का उल्लेख करते हुए अमेरिका की यात्रा सलाह में बदलाव पर विचार करने की बात कही।
गोर के इस बयान पर पाकिस्तान ने कड़ी आपत्ति जताई। रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान ने इस बयान के विरोध में इस्लामाबाद में अमेरिकी राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान की आपत्ति के बाद गोर का अगले ही दिन लद्दाख पहुंचना इस पूरे दौरे को और अधिक चर्चा में ले आया है।
अब लद्दाख पर नजर, चीन के लिए क्यों अहम है दौरा?
लद्दाख भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह इलाका चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के नजदीक स्थित है और यहां वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC से जुड़े सुरक्षा मुद्दे लंबे समय से भारत-चीन संबंधों का अहम हिस्सा रहे हैं।
2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा। ऐसे माहौल में किसी अमेरिकी राजदूत का लद्दाख दौरा सामान्य राजनयिक यात्रा से कहीं ज्यादा ध्यान आकर्षित कर रहा है।
अमेरिका पहले भी भारत-चीन सीमा पर यथास्थिति बदलने की कोशिशों का विरोध करता रहा है। इसलिए गोर की लद्दाख यात्रा को भारत की सीमा सुरक्षा परिस्थितियों को करीब से समझने और भारत के साथ रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।
दलाई लामा से मुलाकात भी बेहद महत्वपूर्ण
सर्जियो गोर के लद्दाख दौरे का एक और महत्वपूर्ण पहलू तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा से प्रस्तावित मुलाकात है। रिपोर्ट के अनुसार गोर लेह के शेवतसेल टीचिंग ग्राउंड में दलाई लामा से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात का विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है और इसे निजी बैठक के तौर पर देखा जा रहा है।
दलाई लामा को लेकर चीन की स्थिति बेहद संवेदनशील रही है। बीजिंग दलाई लामा को राजनीतिक व्यक्ति के रूप में देखता है और विदेशी सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ उनकी आधिकारिक मुलाकातों का विरोध करता रहा है। ऐसे में अमेरिकी राजदूत और दलाई लामा की लद्दाख में मुलाकात स्वाभाविक रूप से चीन की नजरों में भी महत्वपूर्ण होगी।
गलवान के बाद पहली अमेरिकी राजदूत यात्रा
गलवान घाटी में जून 2020 में हुए संघर्ष के बाद भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव कई महीनों तक बना रहा। सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ी और दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य एवं कूटनीतिक बातचीत हुई।
ऐसे में गोर की लद्दाख यात्रा को 2020 के बाद बदले क्षेत्रीय रणनीतिक माहौल के संदर्भ में देखा जा रहा है। भारत-अमेरिका संबंधों में रक्षा और सुरक्षा सहयोग लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। गोर का सीमावर्ती क्षेत्र का दौरा इस साझेदारी के रणनीतिक आयाम को सामने लाता है।
अमेरिका के लिए लद्दाख क्यों महत्वपूर्ण?
लद्दाख केवल पर्यटन के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। यहां भारत की चीन के साथ LAC और पाकिस्तान से जुड़े रणनीतिक क्षेत्र मौजूद हैं।
लद्दाख की भौगोलिक स्थिति इसे भारत की सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे में किसी बड़े देश के राजदूत का यहां दौरा स्थानीय परिस्थितियों, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों की किसी यात्रा को लेकर यह दावा करना कि इससे चीन के खिलाफ कोई तत्काल नीति या सैन्य कदम तय हो गया है, उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में भी इसे सीधे चीन विरोधी कदम के रूप में देखने से सावधानी बरतने की बात कही गई है।
उमर अब्दुल्ला और मनोज सिन्हा से भी मुलाकात
लद्दाख जाने से पहले सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की। यह दौरा छह साल से अधिक समय बाद किसी मौजूदा अमेरिकी राजदूत की जम्मू-कश्मीर यात्रा के रूप में भी महत्वपूर्ण है।
इस दौरान क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति, पर्यटन और अमेरिका की यात्रा सलाह जैसे मुद्दे चर्चा में रहे। गोर ने संकेत दिया कि क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में सुधार को देखते हुए अमेरिकी यात्रा सलाह की समीक्षा की जा सकती है।
पाकिस्तान के बाद चीन पर निगाहें
सर्जियो गोर के दौरे का क्रम भी चर्चा में है। पहले उन्होंने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया और वहां जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इस बयान के बाद पाकिस्तान ने विरोध दर्ज कराया। अब उनके लद्दाख दौरे और दलाई लामा से मुलाकात को चीन के संदर्भ में देखा जा रहा है।
इसी वजह से यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका भारत के दोनों संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों को लेकर अपनी रणनीतिक सक्रियता बढ़ा रहा है। हालांकि, फिलहाल इतना कहना ज्यादा उचित होगा कि गोर का दौरा भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ती अमेरिकी दिलचस्पी का संकेत है, न कि किसी नए सैन्य गठजोड़ या चीन विरोधी कार्रवाई की घोषणा।
ट्रंप प्रशासन में गोर की भूमिका भी खास
सर्जियो गोर सिर्फ भारत में अमेरिकी राजदूत ही नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के विशेष दूत की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। ऐसे में भारत, पाकिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनकी भूमिका सामान्य राजदूत से व्यापक है।
उनकी मौजूदा यात्रा इसी व्यापक भूमिका के तहत भी देखी जा रही है। जम्मू-कश्मीर के बाद लद्दाख का दौरा भारत के उन क्षेत्रों पर अमेरिकी कूटनीतिक ध्यान को दिखाता है, जहां चीन और पाकिस्तान से जुड़े रणनीतिक समीकरण मौजूद हैं।
चीन की प्रतिक्रिया पर भी रहेगी नजर
गोर की दलाई लामा से मुलाकात और लद्दाख यात्रा के बाद चीन की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी। चीन लंबे समय से दलाई लामा को लेकर विदेशी सरकारों के संपर्क का विरोध करता रहा है। इसलिए यदि अमेरिकी राजदूत की दलाई लामा से मुलाकात होती है, तो बीजिंग इसे संवेदनशील मुद्दे के रूप में देख सकता है।
फिलहाल गोर की लद्दाख यात्रा का सबसे बड़ा संदेश यही माना जा रहा है कि अमेरिका भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों और क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों को करीब से समझने में रुचि दिखा रहा है। हालांकि इसके वास्तविक कूटनीतिक असर का आकलन आने वाले दिनों में ही हो सकेगा।
नोट: इस खबर में रणनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव से जुड़े कुछ निष्कर्ष उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर विश्लेषणात्मक हैं। इन्हें किसी आधिकारिक अमेरिकी घोषणा या चीन के खिलाफ घोषित नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए
news desk MPcg