सागर में ऑनलाइन सट्टे के करोड़ों के खेल का पर्दाफाश, 2 मास्टरमाइंड गिरफ्तार; 2.69 करोड़ कैश और 30 लाख का सोना बरामद
30 से ज्यादा फर्जी फर्म और म्यूल बैंक खातों से होता था लेनदेन, एक फोन कॉल ने खोल दिया गिरोह का राज; 2019 से चला रहे थे सट्टे का नेटवर्क
सागर। मध्य प्रदेश में ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए होने वाले करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन के एक बड़े नेटवर्क का सागर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने सागर से भोपाल तक फैले अंतरराज्यीय गिरोह के दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 2.69 करोड़ रुपये नकद, करीब 30 लाख रुपये का सोना, नोट गिनने की मशीन और फर्जी फर्मों व बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
पुलिस की शुरुआती जांच में 30 से ज्यादा फर्जी फर्मों और बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों का पता चला है। इन खातों के जरिए ऑनलाइन सट्टे से आने वाली रकम को अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर किया जाता था। पुलिस के वित्तीय विश्लेषण में अब तक 5.50 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेनदेन सामने आने की बात कही गई है।
2 मास्टरमाइंड भोपाल से गिरफ्तार
सागर पुलिस के मुताबिक मामले में मुख्य आरोपी अमित विश्वकर्मा और ऋषभ पटेल को भोपाल क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। दोनों पर ऑनलाइन सट्टे के नेटवर्क को संचालित करने और फर्जी फर्मों व बैंक खातों के जरिए रकम का लेनदेन कराने का आरोप है।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को आठ दिन की रिमांड पर लिया है। पूछताछ के दौरान नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के लेनदेन के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
मामले में धर्मेंद्र नाहर, सोनू दांगी, विपिन गिरी और स्वर्णेंद्र पांडे समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। वहीं सरमन उर्फ शुभम रैकवार और ऋषि केशव सिंह की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
30 से ज्यादा फर्जी फर्मों का खुलासा
जांच में पुलिस को अब तक 30 से अधिक फर्जी फर्मों के बारे में जानकारी मिली है। इनमें ग्लैमर इंटरप्राइजेस, भूपेंद्र इंटरप्राइजेस और अन्य फर्मों के नाम शामिल बताए गए हैं।
इन फर्मों के नाम पर अलग-अलग निजी बैंकों में करंट अकाउंट खोले गए थे। पुलिस को शक है कि इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टे से आने वाली रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।
प्रारंभिक वित्तीय जांच में इन खातों के माध्यम से 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। पुलिस अब बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल लेनदेन की जांच कर नेटवर्क के पूरे दायरे का पता लगाने में जुटी है।
बेरोजगार युवाओं को कमीशन का लालच देकर बनाते थे मोहरा
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बेरोजगार और जरूरतमंद युवाओं को कमीशन देने का लालच देते थे। इसके बाद उनके दस्तावेज लेकर उनके नाम से बैंक खाते और फर्म तैयार कराई जाती थीं।
इन खातों में ऑनलाइन सट्टे से जुड़ी रकम का लेनदेन किया जाता था। खाता धारकों को इसके बदले कमीशन दिया जाता था, जबकि असली नेटवर्क संचालित करने वाले लोग पर्दे के पीछे रहते थे।
ऐसे खातों को साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इनका इस्तेमाल संदिग्ध रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने और वास्तविक संचालकों तक पहुंच को छिपाने के लिए किया जाता है।
एक फोन कॉल ने पकड़वा दिया पूरा नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक आरोपी बेहद सावधानी से मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते थे। जिस नंबर को वह अपने पास रखते थे, उससे सामान्य तौर पर किसी से बातचीत नहीं करते थे। बातचीत के लिए दूसरे नंबर से वाट्सऐप कॉल का इस्तेमाल किया जाता था।
आरोपी की सभी सिम भी फर्जी दस्तावेजों और गलत पते पर बताई जा रही थीं। ऐसे में पुलिस के लिए उसकी लोकेशन तक पहुंचना मुश्किल था।
लेकिन जांच के दौरान आरोपी ने एक बार गलती से अपने मुख्य मोबाइल नंबर से कॉल कर दिया। यही एक कॉल पुलिस के लिए बड़ा सुराग बन गई। एएसपी नरेंद्र सोलंकी की टीम ने नंबर को ट्रैक कर उसकी लोकेशन का पता लगाया और भोपाल पुलिस को जानकारी दी।
इसके बाद संयुक्त कार्रवाई में आरोपियों को सीहोर के पास से गिरफ्तार किया गया।
किराए के मकान से मिला करोड़ों का कैश
पुलिस जब आरोपियों के ठिकाने तक पहुंची तो वहां से बड़ी मात्रा में नकदी और सोना बरामद हुआ। जिस मकान से रकम मिली, वह भी आरोपियों का अपना नहीं बल्कि किराए का ठिकाना बताया गया है।
तलाशी के दौरान पुलिस को 2 करोड़ 69 लाख रुपये नकद, करीब 30 लाख रुपये का सोना, नोट गिनने की मशीन और फर्जी कंपनियों व बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज मिले।
इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रकम कहां से आई और इसे आगे कहां भेजा जाना था।
2019 से चला रहे थे ऑनलाइन सट्टे का कारोबार
पूछताछ में मुख्य आरोपी ऋषभ पटेल ने कथित तौर पर बताया कि उसने 2019 से ऑनलाइन बेटिंग का कारोबार शुरू किया था। उसका लक्ष्य बड़ा मैच फिक्सर और बुकी बनना था।
पुलिस के अनुसार आरोपी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों के माध्यम से सट्टा संचालित करते थे। ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए टेलीग्राम चैनलों का भी इस्तेमाल किया जाता था। इसके जरिए ग्राहकों की चेन तैयार की गई और सट्टेबाजी का नेटवर्क आगे बढ़ाया गया।
सागर से भोपाल तक चलता था पार्सल का नेटवर्क
गिरोह के काम करने का तरीका भी बेहद अलग बताया जा रहा है। मास्टरमाइंड आरोपी हर जगह खुद जाकर काम नहीं करते थे। सागर में म्यूल बैंक खाते खुलवाने के बाद बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और अन्य जानकारी चार्टर्ड बस के जरिए भोपाल भेजी जाती थी।
पुलिस के मुताबिक सागर से धर्मेंद्र नाहर दस्तावेज और बैंकिंग जानकारी बस के जरिए भोपाल भेजता था, जहां ऋषभ पटेल और विपिन गिरी उन्हें रिसीव करते थे।
इस तरह बिना बार-बार मुलाकात किए ही गिरोह के सदस्य बैंक खातों और फर्जी फर्मों का नेटवर्क चला रहे थे।
देश छोड़कर भागने की भी थी आशंका
जांच के शुरुआती दौर में पुलिस को यह जानकारी भी मिली थी कि गिरोह से जुड़े कुछ आरोपी देश छोड़कर श्रीलंका या म्यांमार भाग सकते हैं। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी।
हालांकि मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब पुलिस उनसे पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और सट्टे की रकम किन-किन राज्यों और खातों तक पहुंचाई जाती थी।
पुलिस खंगाल रही डिजिटल और बैंकिंग कड़ियां
इस पूरे मामले में अब पुलिस की जांच केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। फर्जी फर्मों के दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी, मोबाइल नंबर, डिजिटल चैट और संदिग्ध लेनदेन की जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध ट्रांजेक्शन के पीछे कितने लोग शामिल थे और इस नेटवर्क का संचालन किन अन्य शहरों से किया जा रहा था।
फिलहाल दो मुख्य आरोपियों की रिमांड के दौरान पुलिस को नेटवर्क से जुड़े कई और अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
news desk MPcg