भोपाल में रहवासी इलाकों की कमर्शियल एक्टिविटी के खिलाफ फिर सड़क पर उतरेंगे लोग, गुलमोहर से निकलेगी टॉर्च रैली

भोपाल में रहवासी इलाकों की कमर्शियल एक्टिविटी के खिलाफ फिर सड़क पर उतरेंगे लोग, गुलमोहर से निकलेगी टॉर्च रैली

भोपाल। राजधानी भोपाल में आवासीय इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। रहवासी इलाकों में दुकानों, ऑफिस और अन्य कमर्शियल गतिविधियों के विरोध में शनिवार को लोग सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के बैनर तले शाम को गुलमोहर स्थित सेवाएं मार्केट से टॉर्च लाइट रैली निकाली जाएगी।

रैली में अरेरा कॉलोनी, बावड़ियाकलां और आसपास के कई इलाकों के रहवासी शामिल होने की बात कही गई है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में नियमों के विपरीत चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के कारण स्थानीय रहवासियों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नोटिस के बाद भी कारोबार जारी रहने का आरोप

रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम ने आवासीय इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माणों को लेकर बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए थे। कई प्रतिष्ठानों को बंद भी कराया गया, लेकिन इसके बावजूद कुछ जगहों पर गतिविधियां दोबारा शुरू होने की शिकायत सामने आ रही है।

रहवासियों का कहना है कि जिन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई के बाद बंद होने की सूचना लगाई गई थी, उन्हीं स्थानों पर अब ‘TO-LET’ के बोर्ड दिखाई दे रहे हैं। उनका आरोप है कि इन बोर्ड के जरिए नए किराएदार तलाशे जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें आशंका है कि पुराने कारोबार के बंद होने के बाद उसी जगह पर नए नाम से फिर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो सकती हैं।

‘सिर्फ नोटिस नहीं, जमीन पर कार्रवाई हो’

आंदोलनकारियों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जिन स्थानों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया है, वहां प्रशासन और नगर निगम को नियमों के अनुसार सीलिंग, हटाने और जरूरत पड़ने पर ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई करनी चाहिए।

रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम ने बड़ी संख्या में अवैध निर्माणों की पहचान करने और कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन कई मामलों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। उनका कहना है कि जब तक चिन्हित प्रतिष्ठानों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का सिलसिला जारी रह सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी हवाला

रहवासी संगठन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी हवाला दे रहे हैं। अरेरा कॉलोनी निवासी और याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी के मुताबिक, 1 अगस्त को कई व्यावसायिक संस्थानों ने नगर निगम के निर्देश का हवाला देते हुए अपने प्रतिष्ठानों पर कारोबार बंद करने की सूचना लगाई थी।

लेकिन अब उन्हीं जगहों पर ‘TO-LET’ के बोर्ड लगाए जाने को लेकर रहवासी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी स्थान पर व्यावसायिक गतिविधि नियमों के विपरीत थी, तो सिर्फ प्रतिष्ठान बंद कराने या नोटिस देने से मामला खत्म नहीं होना चाहिए। उस स्थान के व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए भी प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

पार्किंग और ट्रैफिक को लेकर भी नाराजगी

रहवासियों का कहना है कि आवासीय इलाकों में बड़े स्तर पर कमर्शियल गतिविधियां चलने से आसपास के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। दुकानों और कार्यालयों में आने वाले ग्राहकों और कर्मचारियों के कारण पार्किंग की समस्या, ट्रैफिक दबाव और शोर बढ़ने की शिकायत की जा रही है।

इसके अलावा कई इलाकों में सड़क किनारे वाहन खड़े होने, आने-जाने में परेशानी और स्थानीय सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की बात भी रहवासी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र को आवासीय उपयोग के लिए विकसित किया गया है, वहां बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां होने से क्षेत्र की मूल व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

गुलमोहर से निकलेगी टॉर्च लाइट रैली

शनिवार शाम को गुलमोहर स्थित सेवाएं मार्केट से टॉर्च लाइट रैली निकाली जाएगी। इसमें अरेरा कॉलोनी, बावड़ियाकलां और आसपास के क्षेत्रों के रहवासी शामिल होंगे।

रैली के दौरान आंदोलनकारी आवासीय भूखंडों पर चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाएंगे और नगर निगम से चिन्हित मामलों में प्रभावी कार्रवाई की मांग करेंगे।

आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या कारोबारी का विरोध करना नहीं, बल्कि आवासीय क्षेत्रों में नियमों के मुताबिक मूल व्यवस्था बहाल कराना है। वे चाहते हैं कि जिन स्थानों पर व्यावसायिक गतिविधियां नियमों के विपरीत पाई गई हैं, वहां कार्रवाई स्पष्ट और स्थायी हो।

रहवासियों की प्रमुख मांगें

रहवासी संगठनों की मांग है कि—

आवासीय क्षेत्रों में अवैध कमर्शियल गतिविधियों पर रोक लगे।
चिन्हित अवैध निर्माणों पर सिर्फ नोटिस नहीं, बल्कि अंतिम कार्रवाई हो।
नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों को सील किया जाए।
बंद किए गए प्रतिष्ठानों में नए नाम से कारोबार शुरू होने की संभावना पर निगरानी रखी जाए।
आवासीय क्षेत्रों में पार्किंग और ट्रैफिक की समस्या को नियंत्रित किया जाए।
नगर निगम की कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक की जाए।

फिलहाल टॉर्च लाइट रैली के जरिए रहवासी अपनी मांग प्रशासन और नगर निगम तक पहुंचाने की तैयारी में हैं। अब देखना होगा कि इस विरोध प्रदर्शन के बाद नगर निगम और प्रशासन की ओर से आवासीय इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।