भोपाल में लगातार बारिश से मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ा, अस्पतालों की OPD में बढ़ी मरीजों की भीड़

भोपाल में लगातार बारिश से मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ा, अस्पतालों की OPD में बढ़ी मरीजों की भीड़

खांसी-जुकाम, बुखार और फ्लू के लक्षण वाले मरीज बढ़े; अगस्त में स्वाइन फ्लू के 6 मामले, त्वचा संक्रमण में भी 20% तक इजाफा

भोपाल। राजधानी भोपाल में अगस्त के दौरान लगातार बारिश और कई इलाकों में जलभराव के चलते मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। जेपी अस्पताल, हमीदिया अस्पताल और एम्स भोपाल की मेडिसिन ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पतालों में खांसी, जुकाम, बुखार और फ्लू जैसे लक्षणों के साथ मरीज पहुंच रहे हैं। कुछ मरीजों में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण भी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। संभावित संक्रमण को देखते हुए हमीदिया अस्पताल में वायरस की जांच के लिए किट मंगाई गई है, जबकि एम्स भोपाल में जांच किट पहले से उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर भी ऐसे मरीजों की निगरानी की जा रही है, जिनमें लगातार बुखार, सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं।

स्वाइन फ्लू के 6 मामले, सभी मरीज हुए रिकवर
जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार भोपाल में अगस्त महीने में स्वाइन फ्लू के 6 मामले सामने आए हैं। ये मामले निजी अस्पतालों में दर्ज किए गए थे। विभाग के मुताबिक सभी मरीज इलाज के बाद रिकवर कर चुके हैं। हालांकि बारिश के मौसम में संक्रमण की संभावना को देखते हुए लक्षणों वाले मरीजों की निगरानी जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
हमीदिया अस्पताल के वरिष्ठ श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत श्रीवास्तव के अनुसार, वर्तमान में स्वाइन फ्लू का प्रमुख स्ट्रेन इन्फ्लुएंजा A(H1N1) है। मानसून के दौरान देश के कुछ हिस्सों में इसके संक्रमण में बढ़ोतरी देखी जा रही है और भोपाल में भी इसके मामले सामने आए हैं। इसके अलावा मौसमी फ्लू के दूसरे स्ट्रेन, जैसे H3N2, का संक्रमण भी सामान्य रूप से बना हुआ है। ओपीडी में फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टरों के मुताबिक इस बार कुछ मरीजों में अलग तरह के लक्षण भी देखने को मिल रहे हैं। कई मरीज बुखार उतरने के बाद भी ठंड लगने और लंबे समय तक बॉडी पेन की शिकायत कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तीन से पांच दिन में आराम नहीं मिलता है तो मरीज को अस्पताल में जांच और चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

बारिश में पेट से जुड़ी बीमारियों का भी खतरा
लगातार बारिश के दौरान पानी के दूषित होने की वजह से पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक इस मौसम में डायरिया, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए व ई जैसे संक्रमण लोगों को परेशान कर सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार बारिश के मौसम में बुखार होने पर उसे केवल सामान्य वायरल मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर यदि बुखार लगातार बना रहे या दूसरे लक्षण भी दिखाई दें तो मरीज को लक्षणों के आधार पर जांच करानी चाहिए, ताकि बीमारी की सही पहचान समय पर हो सके और उपचार शुरू किया जा सके।

डेंगू पर भी स्वास्थ्य विभाग की नजर
डेंगू के मामले पिछले वर्षों की तुलना में कम बताए जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग आने वाले महीनों को लेकर सतर्क है। जिला मलेरिया विभाग के अनुसार इस साल अब तक 63 डेंगू के मामले दर्ज किए गए हैं। अगस्त में अब तक करीब 6 से 7 मामले सामने आए हैं। आने वाले समय में डेंगू और चिकनगुनिया का खतरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। दवा का छिड़काव किया जा रहा है और उन इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां पिछले वर्षों में डेंगू के अधिक मामले सामने आए थे। स्वास्थ्य विभाग का फोकस मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के साथ-साथ संभावित मरीजों की पहचान और निगरानी पर भी है। बारिश के बाद जमा पानी में मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए ऐसे स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

त्वचा संक्रमण के मरीज भी बढ़े
बारिश और वातावरण में बढ़ी नमी का असर त्वचा संबंधी बीमारियों पर भी दिखाई दे रहा है। राजधानी में त्वचा संक्रमण के मरीजों की संख्या में करीब 20 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एम्स और हमीदिया अस्पताल की स्किन ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है। हमीदिया अस्पताल में सोमवार और मंगलवार को त्वचा संक्रमण से जुड़े मरीजों की संख्या करीब डेढ़ सौ तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। त्वचा रोग विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से त्वचा पर वायरस, बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनप सकते हैं। बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़े पहने रहने से शरीर की त्वचा पर नमी बनी रहती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार त्वचा संक्रमण शुरुआत में शरीर के छोटे हिस्से पर दिखाई दे सकता है, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह दूसरे हिस्सों में भी फैल सकता है। ऐसे में बारिश के दौरान साफ-सफाई और त्वचा को सूखा रखना जरूरी माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी
लगातार बारिश के बीच राजधानी में वायरल, फ्लू, पेट और त्वचा से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ने के कारण अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ गई है। स्वाइन फ्लू के मामलों को देखते हुए संदिग्ध मरीजों की जांच की व्यवस्था की जा रही है। वहीं डेंगू और चिकनगुनिया की आशंका को देखते हुए मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के लिए अभियान जारी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार बुखार, ठंड लगना, शरीर में दर्द, सांस से जुड़ी परेशानी या अन्य लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर मरीजों को चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। बारिश के मौसम में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और उपचार पर जोर दिया जा रहा है।