भिंड में दर्दनाक सड़क हादसा: मजदूरों से भरी पिकअप और डंपर की टक्कर, 8 की मौत, 32 घायल

भिंड में दर्दनाक सड़क हादसा: मजदूरों से भरी पिकअप और डंपर की टक्कर, 8 की मौत, 32 घायल

मवेशियों को बचाने के दौरान अनियंत्रित हुई पिकअप, NH-719 पर हुआ भीषण हादसा; घायल मजदूरों को अस्पताल पहुंचाया गया

भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में 18 अगस्त की देर रात एक भीषण सड़क हादसे में 8 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 32 लोग घायल हुए। हादसा भिंड-ग्वालियर नेशनल हाईवे-719 पर छीमका गांव के पास करीब रात 1 बजे हुआ। मजदूरों से भरी पिकअप की सामने से आ रहे डंपर से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि पिकअप बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और कई मजदूर वाहन के अंदर फंस गए।

जानकारी के मुताबिक, पिकअप में सवार मजदूर ग्वालियर इलाके में धान की रोपाई का काम पूरा करने के बाद अपने घर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी लौट रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि हाईवे पर बैठे मवेशियों को बचाने की कोशिश में पिकअप चालक का वाहन पर नियंत्रण बिगड़ गया। इसके बाद पिकअप गलत दिशा में चली गई और सामने से आ रहे डंपर से आमने-सामने टकरा गई।

हादसे में पांच मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से वाहन में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला गया। घायलों को इलाज के लिए गोहद अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर घायलों को ग्वालियर रेफर किया गया।

सड़क सुरक्षा और मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस हादसे ने हाईवे पर मवेशियों की मौजूदगी, रात के समय यातायात सुरक्षा और प्रवासी मजदूरों के सुरक्षित परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हादसे के बाद राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई। मजदूरों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने वाले वाहनों की क्षमता, सुरक्षा मानकों और रात में लंबी दूरी की यात्रा के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

हादसे में घायल हुए मजदूरों का इलाज जारी रहा, जबकि मृतकों के शवों को उनके गृह जिले भेजने की प्रक्रिया की गई। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की गई।

यह हादसा एक बार फिर बताता है कि हाईवे पर मवेशियों की समस्या और मजदूरों के सुरक्षित आवागमन जैसे मुद्दों को नजरअंदाज करना कितना भारी पड़ सकता है।