इंदौर में दूध खरीदी रेट 65 रुपए करने की मांग, किसानों का मोर्चा; 1 सितंबर से नई दर पर फैसला

इंदौर में दूध खरीदी रेट 65 रुपए करने की मांग, किसानों का मोर्चा; 1 सितंबर से नई दर पर फैसला

इंदौर। जिले में दूध की नई खरीदी दर तय होने से पहले दूध उत्पादक किसानों ने 65 रुपए प्रति लीटर खरीदी मूल्य की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। किसान शोषण विरोधी मंच के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान मंगलवार को कलेक्टर और संभागायुक्त कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना है कि पशुपालन और दूध उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें उसके अनुपात में दूध का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।

किसानों की यह मांग ऐसे समय उठी है, जब 1 सितंबर 2026 से इंदौर जिले में दूध की नई खरीदी दर तय की जानी है। अब सभी की नजर आने वाली बैठक और उसमें तय होने वाले नए खरीद मूल्य पर है।

पशु, चारा और दवाइयों का खर्च बढ़ने का दावा

दूध उत्पादक किसानों का कहना है कि पिछले कुछ समय में पशुपालन से जुड़ी लगभग हर लागत बढ़ी है। पशुओं की कीमत महंगी होने के साथ खली-भूसा, हरा चारा, पशु आहार, दवाइयां और मजदूरी पर भी पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि दूध उत्पादन केवल पशु पालने तक सीमित नहीं है। पशुओं की देखभाल, उनके लिए चारा-पानी, इलाज और मजदूरी सहित कई खर्च लगातार जुड़े रहते हैं। ऐसे में मौजूदा खरीद मूल्य में किसानों के लिए पर्याप्त आमदनी निकालना मुश्किल हो रहा है।

झालरिया में बैठक के बाद लिया गया फैसला

किसानों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचने से पहले इंदौर बाईपास स्थित झालरिया में बैठक की। इसमें दिलीप सिंह पवार, महेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में दूध उत्पादक किसान शामिल हुए।

बैठक में किसानों ने दूध उत्पादन की वास्तविक लागत और उनकी मेहनत को ध्यान में रखते हुए नई खरीदी दर तय करने की मांग उठाई। इसके बाद किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए ज्ञापन सौंपा।

गांव में 45 से 55 रुपए, शहर में 65 से 70 रुपए का दावा

किसानों ने दूध की खरीद और बिक्री के बीच कीमतों के अंतर का मुद्दा भी उठाया है। उनका दावा है कि गांवों में किसानों से दूध करीब 45 से 55 रुपए प्रति लीटर तक की दर पर खरीदा जा रहा है, जबकि शहर में यही दूध उपभोक्ताओं को करीब 65 से 70 रुपए प्रति लीटर में मिल रहा है।

किसानों का कहना है कि उत्पादन करने वाले किसान को मिलने वाली कीमत और उपभोक्ता द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत के बीच अंतर को देखते हुए किसानों के हिस्से में उचित मूल्य आना चाहिए।

हालांकि, दूध का खरीद मूल्य दूध की गुणवत्ता और फैट के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए किसानों द्वारा बताए गए भाव को सभी प्रकार के दूध के लिए एक समान दर नहीं माना जा सकता।

व्यापारियों का अलग तर्क, फैट के आधार पर भुगतान

दूध व्यापारियों की ओर से बताया गया है कि किसानों को दूध की गुणवत्ता और फैट के आधार पर भुगतान किया जाता है। व्यापारियों के मुताबिक करीब 9.50 रुपए प्रति फैट की दर से भुगतान किया जा रहा है। आने वाले दिनों में किसानों और दूध कारोबारियों के बीच बैठक प्रस्तावित है, जिसमें नई खरीदी दर को लेकर चर्चा होगी।

यानी 1 सितंबर से लागू होने वाली नई दर केवल किसानों की मांग पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि दूध की गुणवत्ता, बाजार की स्थिति, उत्पादन लागत और व्यापारियों की लागत जैसे पहलुओं पर भी चर्चा हो सकती है।

इंदौर में पहले भी बढ़ चुके हैं दूध के दाम

इंदौर में इस साल दूध की कीमतों में पहले भी बढ़ोतरी हो चुकी है। अप्रैल 2026 में खुले दूध का भाव 60 रुपए से बढ़ाकर 63 रुपए प्रति लीटर किया गया था। दुकानों और डेयरियों पर दूध की कीमत 65 रुपए प्रति लीटर तक बताई गई थी। उस समय दूध कारोबारियों ने गर्मी में हरे चारे की कमी और पशु आहार की बढ़ती कीमतों को दाम बढ़ने की वजह बताया था।

इस पृष्ठभूमि में अब किसानों की ओर से दूध की खरीद कीमत 65 रुपए प्रति लीटर करने की मांग सामने आई है। अगर खरीद मूल्य में बड़ी बढ़ोतरी होती है तो आगे चलकर इसका असर उपभोक्ता कीमतों पर भी पड़ सकता है, हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नई खरीदी दर क्या तय होती है और बाजार में उसका कितना असर पड़ता है।

सहकारी दुग्ध संघ में भी दूध की गुणवत्ता के आधार पर भुगतान

इंदौर सहकारी दुग्ध संघ से जुड़ी व्यवस्था में भी दूध की गुणवत्ता के आधार पर भुगतान किया जाता है। मध्य प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ की उपलब्ध दर जानकारी में इंदौर के लिए दूध की दर फैट और एसएनएफ/टीएस के आधार पर अलग-अलग दर्ज है। इससे साफ है कि दूध का भुगतान केवल एक समान प्रति लीटर दर से तय नहीं होता, बल्कि दूध की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

वहीं जून 2026 में इंदौर सहकारी दुग्ध संघ ने दूध संग्रहण और गुणवत्ता जांच को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए मोबाइल मिल्क टेस्टिंग ऐप लागू करने की जानकारी दी थी। इसके जरिए दूध की गुणवत्ता की जानकारी किसानों तक पहुंचाने और भुगतान प्रक्रिया को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

अभी क्या हुआ और आगे क्या होगा?

फिलहाल किसानों ने 65 रुपए प्रति लीटर की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप दिया है। अब 1 सितंबर से लागू होने वाली नई दूध खरीदी दर को लेकर किसानों और दूध कारोबारियों के बीच होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण होगी।

अगर किसानों की मांग के अनुरूप खरीदी दर बढ़ती है, तो इससे दूध उत्पादकों को राहत मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर, खरीद कीमत में बढ़ोतरी का असर दूध की सप्लाई चेन और आगे चलकर उपभोक्ता कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, अभी 65 रुपए प्रति लीटर की दर तय नहीं हुई है और इसे किसानों की मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

इस पूरे मामले में अगला बड़ा अपडेट नई खरीदी दर तय होने के बाद सामने आएगा। तब यह स्पष्ट होगा कि किसानों की 65 रुपए प्रति लीटर की मांग पर सहमति बनती है या बाजार और लागत के आधार पर कोई दूसरी दर निर्धारित की जाती है।