उज्जैन समेत 7 जिलों के किसानों से करोड़ों की ठगी का आरोपी 7 साल बाद गिरफ्तार, पत्नी भी पकड़ी गई; निवेश के नाम पर लिया था पैसा
उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन समेत कई जिलों में किसानों को कृषि उत्पादों पर आकर्षक लाभ और कमाई का लालच देकर करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी करने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) को बड़ी सफलता मिली है। सात साल से फरार चल रहे आरोपी प्रेमनारायण दांगी और उसकी पत्नी अंकिता दांगी को उदयपुर से गिरफ्तार किया गया है। दोनों को उज्जैन लाकर मंगलवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
यह मामला वर्ष 2019 में सामने आया था। आरोप है कि एक कंपनी के जरिए किसानों को खाद, बीज और कृषि दवाइयों पर आकर्षक लाभ देने का भरोसा दिलाकर उनसे बड़ी रकम जमा कराई गई। बाद में जब किसानों को उनका पैसा और promised लाभ नहीं मिला तो मामला आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ तक पहुंचा।
मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी के जरिए बनाया था नेटवर्क
EOW के मुताबिक, वर्ष 2019 में ग्रीन लीफ फर्टिलाइजर प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी का संचालन उदयपुर से किया जा रहा था। कंपनी के संचालन से प्रेमनारायण दांगी, उसकी पत्नी अंकिता, ओमप्रकाश सोनी और सुधीर मिश्रा के जुड़े होने की बात जांच में सामने आई थी।
आरोप है कि कंपनी ने किसानों को अपनी योजनाओं में पैसा लगाने के लिए आकर्षित किया। किसानों को बताया गया कि खाद, बीज और कृषि दवाइयों के कारोबार से उन्हें अच्छा लाभ मिलेगा। कृषि क्षेत्र से जुड़े होने के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने कंपनी की योजनाओं पर भरोसा किया।
इसके बाद अलग-अलग किसानों से रकम जमा कराई गई।
उज्जैन सहित इन जिलों के किसान हुए प्रभावित
जांच में सामने आया है कि कंपनी का नेटवर्क केवल उज्जैन तक सीमित नहीं था। आरोपितों ने मंदसौर, नीमच, शाजापुर, रतलाम, आगर और देवास समेत कई जिलों के किसानों को योजनाओं से जोड़कर उनसे रकम जमा कराई।
इस मामले में किसानों को कृषि सामग्री और निवेश पर आकर्षक रिटर्न का लालच दिया गया था। शिकायतें सामने आने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने मामले की जांच शुरू की।
एक शिकायत में 2.39 करोड़ रुपये जमा कराने का आरोप
EOW के अनुसार शिकायतकर्ता महेश पटेल से ही करीब 2.39 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे। जांच आगे बढ़ने पर एजेंसी को ऐसे कई अन्य किसानों और निवेशकों की जानकारी मिली, जिन्होंने कंपनी की योजनाओं में पैसा लगाया था।
मामले में कथित धोखाधड़ी की रकम करोड़ों रुपये में बताई गई है। हालांकि पूरे मामले में वास्तविक प्रभावित लोगों और कुल राशि का अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
सात साल तक पुलिस से बचते रहे आरोपी
मामला दर्ज होने के बाद से प्रेमनारायण दांगी और उसकी पत्नी अंकिता लंबे समय से फरार चल रहे थे। दोनों लगातार पुलिस की गिरफ्त से बाहर थे। EOW की टीम आरोपितों की तलाश में जुटी हुई थी।
जांच के दौरान एजेंसी को जानकारी मिली कि दोनों उदयपुर में छिपकर रह रहे हैं। इसके बाद EOW ने वहां दबिश दी और दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम दोनों आरोपितों को उदयपुर से उज्जैन लेकर आई।
मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया
गिरफ्तारी के बाद दोनों को मंगलवार को न्यायालय के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों को जेल भेज दिया।
अब जांच एजेंसी कथित धोखाधड़ी में उनकी भूमिका, कंपनी के संचालन, किसानों से जमा कराई गई रकम और पैसों के इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेगी।
EOW यह भी पता लगाने में जुटी है कि कंपनी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या थी और किसानों से जमा की गई रकम कहां-कहां इस्तेमाल की गई।
किसानों को कैसे फंसाया गया?
जांच के अनुसार आरोपितों ने किसानों को सीधे तौर पर कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं का भरोसा दिलाया। किसानों को बताया गया कि कंपनी के जरिए खाद, बीज और कृषि दवाइयों में निवेश करने से उन्हें अच्छा आर्थिक लाभ मिलेगा।
ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के बीच कंपनी का नेटवर्क तैयार किया गया। आकर्षक योजनाओं और लाभ की उम्मीद में लोगों ने बड़ी रकम जमा कर दी।
आरोप है कि बाद में जब निवेशकों को अपेक्षित भुगतान नहीं मिला तो उन्होंने शिकायतें करना शुरू किया।
अब आगे क्या होगा?
दोनों आरोपितों के जेल जाने के बाद EOW की जांच आगे जारी रहेगी। एजेंसी कंपनी के दस्तावेज, बैंक खातों, लेनदेन और किसानों से जमा कराई गई रकम से जुड़े रिकॉर्ड खंगालेगी।
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कुल कितने किसानों से पैसा लिया गया, कितनी रकम जमा हुई और इस रकम को कहां ट्रांसफर किया गया। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
अभी क्या अपडेट है?
26 अगस्त 2026 के ताजा अपडेट के मुताबिक प्रेमनारायण दांगी और उसकी पत्नी अंकिता को उदयपुर से गिरफ्तार कर उज्जैन लाया जा चुका है। दोनों को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। दोनों पर वर्ष 2019 में ग्रीन लीफ फर्टिलाइजर प्राइवेट लिमिटेड के जरिए किसानों को आकर्षक लाभ का झांसा देकर करोड़ों रुपये जमा कराने का आरोप है।
फिलहाल EOW इस पूरे नेटवर्क और कथित आर्थिक धोखाधड़ी की रकम का पता लगाने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में कुल कितने किसान प्रभावित हुए और कितनी रकम की धोखाधड़ी हुई।
नोट: आरोपों की पुष्टि अदालत में होने वाली सुनवाई और जांच के अंतिम निष्कर्ष के आधार पर होगी। फिलहाल दोनों आरोपी मामले में आरोपी हैं।
news desk MPcg