यूपी के 50 हजार से ज्यादा बुनकरों को बड़ी राहत, 5 साल में बनेंगे 150 आधुनिक हैंडलूम क्लस्टर; योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला

यूपी के 50 हजार से ज्यादा बुनकरों को बड़ी राहत, 5 साल में बनेंगे 150 आधुनिक हैंडलूम क्लस्टर; योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के हथकरघा उद्योग से जुड़े हजारों कारीगरों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार ने राज्य में हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक बनाने और बुनकरों की आमदनी बढ़ाने के लिए अगले पांच वर्षों में 150 आधुनिक हैंडलूम क्लस्टर विकसित करने की योजना को मंजूरी दी है। सरकार का दावा है कि इस पहल से प्रदेश के 50 हजार से अधिक बुनकरों को सीधे फायदा मिल सकता है।

मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में हथकरघा क्लस्टर विकास योजना के तहत 2.5 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही सरकार ने पारंपरिक बुनकरों को आधुनिक तकनीक, बेहतर उत्पादन व्यवस्था और बाजार से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

150 क्लस्टर में एक जगह मिलेंगी कई सुविधाएं

मुख्यमंत्री हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना के तहत प्रस्तावित क्लस्टरों में बुनकरों को उत्पादन से लेकर बाजार तक की सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। क्लस्टर आधारित व्यवस्था का उद्देश्य छोटे-छोटे बुनकरों और कारीगरों को एक साझा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है, ताकि वे बेहतर तकनीक और संसाधनों का इस्तेमाल कर सकें।

ऐसे क्लस्टरों में आधुनिक मशीनरी, डिजाइन और तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, कच्चे माल की उपलब्धता तथा उत्पादों की बिक्री और मार्केटिंग से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ावा देने की योजना है। इससे बुनकरों को अकेले कारोबार करने के बजाय सामूहिक रूप से उत्पादन और विपणन करने का अवसर मिल सकता है।

बुनकरों की आय बढ़ाने पर फोकस

उत्तर प्रदेश लंबे समय से हथकरघा और हस्तशिल्प के लिए देश के प्रमुख राज्यों में रहा है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में परिवार पारंपरिक बुनाई और वस्त्र निर्माण से जुड़े हैं। हालांकि आधुनिक मशीनों से तैयार होने वाले कपड़ों से प्रतिस्पर्धा, कच्चे माल की लागत, बाजार तक सीमित पहुंच और तकनीकी बदलाव जैसी चुनौतियां बुनकरों के सामने रही हैं।

सरकार की नई पहल में इन्हीं चुनौतियों को कम करने की कोशिश की जा रही है। आधुनिक क्लस्टरों के जरिए बुनकरों को बेहतर उत्पादन तकनीक और बाजार की मांग के अनुरूप डिजाइन विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे उनके उत्पादों को स्थानीय बाजार के साथ-साथ बड़े बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

हरदोई में 1000 एकड़ का पीएम मित्र वस्त्र पार्क

हथकरघा क्षेत्र के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में टेक्सटाइल सेक्टर को बड़े स्तर पर विकसित करने की तैयारी भी चल रही है। हरदोई में करीब 1,000 एकड़ क्षेत्र में पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क विकसित करने की योजना है।

इस तरह के बड़े टेक्सटाइल पार्क में कपड़ा उत्पादन की पूरी वैल्यू चेन को एक स्थान पर विकसित करने का प्रयास किया जाता है। इससे कपड़ा उद्योग से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना रहती है।

हथकरघा क्लस्टरों और बड़े टेक्सटाइल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ बढ़ावा मिलने से उत्तर प्रदेश के पारंपरिक बुनकरों और आधुनिक वस्त्र उद्योग के बीच बेहतर कनेक्शन तैयार किया जा सकता है।

युवाओं और महिलाओं के लिए भी खुल सकते हैं अवसर

हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक बनाने का असर केवल मौजूदा बुनकरों तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। क्लस्टरों में उत्पादन, डिजाइनिंग, पैकेजिंग, क्वालिटी कंट्रोल, मार्केटिंग और बिक्री जैसे काम बढ़ने पर स्थानीय युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

वहीं, हथकरघा से जुड़े कई पारंपरिक कामों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रशिक्षण और आधुनिक बाजार से जुड़ाव बढ़ने पर महिला कारीगरों को भी अपनी आय बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं।

पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने की कोशिश

सरकार की योजना का एक अहम पहलू पारंपरिक बुनाई को आधुनिक बाजार की जरूरतों से जोड़ना भी है। आज ग्राहक केवल पारंपरिक डिजाइन ही नहीं, बल्कि आधुनिक पैटर्न, बेहतर फिनिशिंग और आकर्षक पैकेजिंग वाले उत्पाद भी पसंद करते हैं।

ऐसे में डिजाइन डेवलपमेंट, नई तकनीक और मार्केटिंग की जानकारी बुनकरों को उनके उत्पादों की बेहतर कीमत दिलाने में मदद कर सकती है। ऑनलाइन बिक्री और ई-कॉमर्स के बढ़ते बाजार का इस्तेमाल भी स्थानीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

50 हजार से ज्यादा बुनकरों को सीधा फायदा

सरकार द्वारा तैयार किए गए खाके के मुताबिक अगले पांच वर्षों में 150 हैंडलूम क्लस्टर विकसित किए जाने हैं। इस पूरी पहल से 50 हजार से अधिक बुनकरों के लाभान्वित होने की उम्मीद जताई गई है।

सरकार का फोकस केवल बुनकरों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उनकी उत्पादकता, आय और बाजार में प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ाने पर है। यदि क्लस्टर योजना प्रभावी तरीके से जमीन पर लागू होती है तो छोटे बुनकरों को कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद की बिक्री तक कई स्तरों पर मदद मिल सकती है।

यूपी के हथकरघा सेक्टर को मिल सकता है नया बाजार

उत्तर प्रदेश के हथकरघा उत्पादों की पहचान देश के अलग-अलग हिस्सों में है। वाराणसी की बनारसी साड़ी, आजमगढ़ की बुनाई और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक वस्त्र कलाएं राज्य की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का हिस्सा हैं।

नई क्लस्टर व्यवस्था इन पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक डिजाइन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, 150 आधुनिक हैंडलूम क्लस्टर बनाने की योजना उत्तर प्रदेश के पारंपरिक बुनकर समुदाय के लिए बड़ा बदलाव ला सकती है। सरकार की कोशिश है कि आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था के जरिए हथकरघा उद्योग को मजबूत किया जाए, बुनकरों की आय बढ़े और आने वाली पीढ़ी भी इस पारंपरिक व्यवसाय से जुड़ी रहे।